इंडियन बैंक और पीएनबी ने बचत खातों में न्यूनतम बैलेंस न रखने पर लगने वाला जुर्माना हटाया

इंडियन बैंक और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने बचत खातों में न्यूनतम बैलेंस न रखने पर लगने वाले जुर्माने को समाप्त कर दिया है। यह बदलाव जुलाई 2025 से प्रभावी हुआ है, जिसमें इंडियन बैंक ने 7 जुलाई से और पीएनबी ने 1 जुलाई से यह नियम लागू किया है। इस कदम का उद्देश्य बैंकिंग को देशभर के लोगों, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और कम आय वर्ग के लिए अधिक सरल और सुलभ बनाना है।

खाताधारकों के लिए बड़ी राहत

7 जुलाई 2025 से इंडियन बैंक बचत खातों में न्यूनतम बैलेंस न रखने पर कोई जुर्माना नहीं वसूलेगा। इसी तरह, पीएनबी ने 1 जुलाई से ऐसे सभी शुल्क समाप्त कर दिए हैं। यह कदम छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों, छोटे दुकानदारों और ग्रामीण परिवारों सहित कई तरह के ग्राहकों को लाभ पहुंचाएगा।

बैंकों का मानना है कि इन शुल्कों को हटाने से अधिक लोग बैंक खाते खोलने और उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित होंगे। यह वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने की एक बड़ी पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना है।

उधारकर्ताओं के लिए सस्ती ब्याज दरें

न्यूनतम बैलेंस जुर्माना हटाने के साथ ही इंडियन बैंक ने अपने कर्ज पर ब्याज दरों में भी मामूली कटौती की है। 3 जुलाई 2025 से बैंक ने एक साल की एमसीएलआर (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट) को 5 बेसिस प्वाइंट घटाकर 9% कर दिया है। इसका लाभ नए ऋण लेने वाले ग्राहकों को मिलेगा, जिससे उन्हें ब्याज में थोड़ी बचत हो सकेगी।

कमजोर वर्गों को सहारा

पीएनबी ने कहा है कि न्यूनतम बैलेंस शुल्क हटाने से महिलाओं, किसानों और निम्न आय वर्ग के लोगों को विशेष राहत मिलेगी। इन वर्गों के लिए न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है, और अब यह राहत उनके आर्थिक बोझ को कम करेगी।

पीएनबी के एमडी और सीईओ अशोक चंद्रा ने कहा,“हम मानते हैं कि इन शुल्कों को हटाने से ग्राहकों पर वित्तीय दबाव घटेगा और वे औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में अधिक भागीदारी करेंगे।”

यह पहल समावेशी बैंकिंग को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है, जिसका स्वागत देशभर में लाखों ग्राहक करेंगे।

विश्व जूनोसिस दिवस 2025: इतिहास, थीम और महत्व

दुनियाभर में हर साल 6 जुलाई को ‘विश्व जूनोसेस डे’ मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों के प्रति जागरुकता पैदा करना है। इन बीमारियों को जूनोटिक रोग कहा जाता है। इसमें रेबीज, टीबी, स्वाइन फ्लू, और डेंगू जैसे रोग शामिल हैं। विश्व जूनोसिस दिवस हमें यह समझने में मदद करता है कि मानव और पशु स्वास्थ्य आपस में जुड़े हैं, और इन रोगों से बचाव के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

जूनोटिक रोग क्या हैं?

जूनोटिक रोग (Zoonotic Diseases) वे बीमारियाँ होती हैं जो जानवरों से मनुष्यों में फैलती हैं। इनके कारण बैक्टीरिया, वायरस, फंगी या परजीवी हो सकते हैं।
प्रमुख उदाहरण:

  • रेबीज़

  • कोविड-19

  • एवियन फ्लू (बर्ड फ्लू)

  • इबोला

  • सालमोनेला संक्रमण

संक्रमण के तरीके:

  • जानवरों को छूने से

  • संक्रमित कीड़ों के काटने से

  • असुरक्षित या अधपका मांस/दूध खाने से

WHO के अनुसार, 75% से अधिक नई मानव बीमारियाँ जानवरों से आती हैं।

शब्दों की समझ:

  • “Zoonosis” = रोग का नाम (जैसे रेबीज़)

  • “Zoonotic” = उस प्रकार की बीमारी का वर्णन (जैसे जूनोटिक वायरस)

इतिहास और उद्देश्य

6 जुलाई 1885 को महान वैज्ञानिक लुई पाश्चर (Louis Pasteur) ने पहली बार इंसान को रेबीज़ का सफल टीका दिया था। विश्व जूनोसिस दिवस उसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में हर साल मनाया जाता है।

उद्देश्य:

  • जूनोटिक रोगों के प्रति लोगों को जागरूक करना

  • मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझाना

  • One Health दृष्टिकोण को बढ़ावा देना

यह दिवस WHO, FAO, OIE और अन्य वैश्विक संस्थाओं द्वारा समर्थित होता है।

भारत में उठाए गए कदम

भारत सरकार द्वारा जूनोटिक रोगों से निपटने के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं:

  1. राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP)

    • ब्रूसेलोसिस और खुरपका-मुंहपका रोग रोकने के लिए

  2. मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयाँ (MVUs)

    • ग्रामीण इलाकों में समय पर पशु उपचार और रोगों की पहचान

  3. राष्ट्रीय वन हेल्थ कार्यक्रम (National One Health Programme)

    • इंसान और पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच समन्वय

  4. पशु जन्म नियंत्रण नियम 2023 (Animal Birth Control Rules)

    • आवारा जानवरों की नसबंदी और टीकाकरण (विशेषकर रेबीज़)

  5. टीकाकरण अभियान

    • पालतू और पालतू जानवरों के लिए नियमित टीकाकरण को बढ़ावा देना

आज की दुनिया में इसका महत्व

COVID-19 जैसी महामारियों के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण आपस में गहराई से जुड़े हैं।
विश्व जूनोसिस दिवस:

  • जन जागरूकता बढ़ाता है

  • स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए प्रेरित करता है

  • OpenWHO जैसे प्लेटफॉर्म पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देता है

One Health दृष्टिकोण को आज वैश्विक स्वास्थ्य रणनीति के रूप में अपनाया जा रहा है, ताकि भविष्य में जूनोटिक रोगों को रोका जा सके।

पुरी बनेगा ओडिशा का छठा नगर निगम

ओडिशा के प्रसिद्ध तीर्थ और पर्यटन नगर पुरी को अब नगर निगम (Municipal Corporation) का दर्जा दिया जाएगा। यह घोषणा मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 5 जुलाई 2025 को बहुदा यात्रा से पहले की। इस फैसले का उद्देश्य उस शहर की आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाना है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं।

पुरी बना ओडिशा का छठा नगर निगम

पुरी अब भुवनेश्वर, कटक, संबलपुर, बेरहामपुर और राउरकेला के बाद ओडिशा का छठा नगर निगम बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगम का दर्जा मिलने से पुरी में सड़कें, सफाई, जल आपूर्ति, जल निकासी और अन्य नगर सेवाओं में सुधार होगा। इसके अंतर्गत पुरी शहर के आसपास के 7–8 ग्राम पंचायतों को भी शामिल किया जाएगा, जो पुरी सदर और ब्रह्मगिरी ब्लॉकों में आते हैं।

उन्नयन का कारण

मुख्यमंत्री माझी ने बताया कि पुरी की बढ़ती जनसंख्या और साल भर आने वाले भक्तों व पर्यटकों की संख्या को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। वर्तमान नगरपालिका इतने बड़े स्तर की ज़रूरतों को पूरा नहीं कर पा रही है, खासकर रथ यात्रा और बहुदा यात्रा जैसे भव्य आयोजनों के दौरान, जब लाखों लोग इकट्ठा होते हैं। नगर निगम बनने की प्रक्रिया 6 जुलाई 2025 से शुरू की जाएगी।

पुरी के लिए नई परियोजनाएं

नगर निगम की घोषणा के साथ मुख्यमंत्री ने श्री जगन्नाथ संग्रहालय, पुस्तकालय और शोध केंद्र की भी योजना का ऐलान किया।

  • संग्रहालय में भगवान जगन्नाथ से जुड़ी इतिहास, परंपराएं और संस्कृति को कला और मूर्तियों के माध्यम से दर्शाया जाएगा।

  • पुस्तकालय में भगवान जगन्नाथ और ओड़िया संस्कृति से जुड़ी पुस्तकों का संग्रह होगा।

  • शोध केंद्र में इन्हीं विषयों पर अनुसंधान को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

  • इसके अलावा, 300 सीटों वाला ऑडिटोरियम भी बनेगा, जहां भगवान जगन्नाथ की कथाओं पर आधारित लाइट एंड साउंड शो दिखाया जाएगा।

सरकार की 2036 तक की दृष्टि

ओडिशा सरकार का लक्ष्य 2036 तक पुरी को एक प्रमुख आध्यात्मिक और पर्यटन शहर के रूप में विकसित करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक स्वच्छ, हरित और आधुनिक पुरी का निर्माण, एक बेहतर ओडिशा की दिशा में बड़ा कदम होगा। यह घोषणा रथ यात्रा के दौरान की गई और यह सरकार की व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसका मकसद पुरी को स्थानीय निवासियों और आगंतुकों दोनों के लिए बेहतर बनाना है।

बैंक धोखाधड़ी जोखिम प्रणाली लागू करें: RBI

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 30 जून 2025 को सभी बैंकों को एक नया सिस्टम अपनाने का निर्देश दिया, जिसका नाम है फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FRI)। यह उपकरण दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा विकसित किया गया है और इसका उद्देश्य ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी को रोकना है। यह टूल संदिग्ध मोबाइल नंबरों की रीयल-टाइम पहचान में मदद करता है, जिससे बैंकों को अपने ग्राहकों की सुरक्षा करने में आसानी होती है।

क्या है फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FRI)?

FRI एक डिजिटल उपकरण है जो यह जांचता है कि कोई मोबाइल नंबर धोखाधड़ी में लिप्त है या नहीं। यह नंबरों को मध्यम, उच्च या बहुत उच्च जोखिम की श्रेणियों में वर्गीकृत करता है। इसकी जानकारी कई स्रोतों से आती है जैसे:

  • साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल

  • चक्षु प्लेटफॉर्म

  • बैंकों और एजेंसियों से प्राप्त शिकायतें

बैंक FRI का कैसे इस्तेमाल करेंगे?

RBI ने सभी प्रकार के बैंकों—शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक, और को-ऑपरेटिव बैंक—को अपने सिस्टम को FRI से जोड़ने का निर्देश दिया है। यदि कोई मोबाइल नंबर जोखिम भरा पाया जाता है, तो बैंक:

  • लेनदेन रोक सकते हैं

  • ग्राहक को चेतावनी भेज सकते हैं

  • अन्य सुरक्षा उपाय लागू कर सकते हैं

कुछ बैंक जैसे HDFC बैंक, ICICI बैंक, और डिजिटल ऐप जैसे PhonePe और Paytm पहले से ही इस सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं और उन्हें अच्छे परिणाम मिल रहे हैं।

API के जरिए रीयल-टाइम सुरक्षा

DoT की डिजिटल इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) धोखाधड़ी के लिए डिस्कनेक्ट किए गए मोबाइल नंबरों की सूची (Mobile Number Revocation List – MNRL) तैयार करती है। बैंक API (Application Programming Interface) के माध्यम से इस सिस्टम से जुड़ सकते हैं, जिससे उन्हें रीयल-टाइम में डेटा मिलता है और वे तेजी से निर्णय ले सकते हैं।

डिजिटल बैंकिंग को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम

संचार मंत्रालय ने इसे देशव्यापी सामूहिक प्रयास बताया है जो ऑनलाइन धोखाधड़ी से निपटने के लिए शुरू किया गया है। जैसे-जैसे और बैंक FRI को अपनाएंगे, यह भारत की बैंकिंग प्रणाली में एक मानक सुरक्षा उपकरण बन जाएगा। इससे ग्राहकों की धनराशि सुरक्षित रहेगी और डिजिटल बैंकिंग में भरोसा बढ़ेगा।

SBI ने विश्व अर्थव्यवस्था में 44 बिलियन डॉलर जोड़ने में मदद की

एसबीआई रिसर्च की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2024–25 (FY25) में वैश्विक अर्थव्यवस्था में 297 अरब डॉलर का योगदान दिया, जो कि वैश्विक GDP वृद्धि का 6.7% है। इसमें से अकेले भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने 44 अरब डॉलर यानी 1.1% वैश्विक वृद्धि में हिस्सेदारी निभाई। यह रिपोर्ट न केवल भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत को दर्शाती है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि एसबीआई जैसी संस्थाएं भारत और वैश्विक दोनों स्तरों पर आर्थिक विकास को गति देने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका

FY25 में दुनिया की कुल अर्थव्यवस्था में $4,118 अरब की वृद्धि हुई, जिसमें भारत की हिस्सेदारी $297 अरब रही। यह दर्शाता है कि भारत अब वैश्विक आर्थिक विकास में एक प्रमुख भागीदार बन चुका है, और कुल वैश्विक वृद्धि का लगभग 7% हिस्सा भारत ने जोड़ा है।

एसबीआई का बड़ा योगदान

एसबीआई ने अपने विशाल एसेट बेस के जरिए FY25 में 44 अरब डॉलर का योगदान दिया, जो वैश्विक GDP वृद्धि का 1.1% है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की GDP वृद्धि में अकेले एसबीआई का योगदान 16% रहा, जो इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक स्तंभ सिद्ध करता है।

वित्तीय सेवा क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि

एसबीआई ने भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र के सकल मूल्य वर्धन (GVA) में भी 8.7% का योगदान दिया। FY25 में एसबीआई का GVA ₹1,38,533 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹1,32,157 करोड़ से बढ़कर आया — यानी सिर्फ एक साल में 5% वृद्धि

भारत की आर्थिक ताकत का उभार

यह रिपोर्ट भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था की ओर संकेत करती है। भारत अब केवल विकासशील राष्ट्र नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन बन रहा है। एसबीआई की यह उपलब्धि भारतीय संस्थानों की क्षमता और योगदान को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने में मदद करती है।

मशरिक बना GIFT सिटी में प्रवेश करने वाला पहला यूएई बैंक

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रमुख बैंक मशरिक (Mashreq) को गुजरात स्थित गिफ्ट सिटी (GIFT City) में शाखा खोलने के लिए इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिल गया है। यह भारत के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) में प्रवेश करने वाला पहला यूएई-आधारित बैंक बन गया है। यह कदम भारत-UAE के बीच वित्तीय सहयोग को मज़बूत करने और अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

गिफ्ट सिटी में अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग यूनिट

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए) ने मशरेक बैंक को गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) में अपना परिचालन शुरू करने के लिए प्रारंभिक मंजूरी दे दी है। बैंक के अनुसार, वह 2025 के अंत तक पूरी तरह से संचालन शुरू कर देगा। UAE के सेंट्रल बैंक और भारत की संबंधित संस्थाओं से भी सभी आवश्यक अनुमतियाँ मिल चुकी हैं।

बैंक की सेवाएँ और उद्देश्य

गिफ्ट सिटी शाखा का उद्देश्य वैश्विक और सीमा-पार व्यापार से जुड़े ग्राहकों की सेवा करना है। यह शाखा विदेशी मुद्रा में ऋण, व्यापार वित्त, जोखिम प्रबंधन उपकरण जैसी सेवाएं प्रदान करेगी। गिफ्ट सिटी की भौगोलिक स्थिति और समय क्षेत्र का लाभ उठाकर बैंक भारत और खाड़ी देशों के ग्राहकों को तेज़ और सुविधाजनक सेवाएं दे सकेगा। साथ ही, टैक्स में कुछ छूट भी मिलने की उम्मीद है जिससे सेवाएं सस्ती हो सकेंगी।

भारत-UAE वित्तीय संबंध होंगे और मजबूत

मशरिक की मौजूदगी से भारत और यूएई के बीच आर्थिक सहयोग और अधिक गहरा होगा। यह बैंक भारतीय कंपनियों को वैश्विक साझेदारों तक पहुँचने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दोनों देशों के बीच निवेश, व्यापार और पूंजी प्रवाह बढ़ेगा।

गिफ्ट सिटी क्यों बन रही है वैश्विक आकर्षण

गिफ्ट सिटी अपनी आधुनिक सुविधाओं, प्रतिस्पर्धी कर नीति, और अनुकूल नियामक ढांचे के कारण वैश्विक बैंकों के लिए एक आकर्षक हब बनती जा रही है। मशरिक बैंक की एंट्री इस विश्वास को और बढ़ावा देती है कि भारत का वित्तीय ढांचा वैश्विक मानकों पर खरा उतरता है और आने वाले समय में और विदेशी बैंक यहां निवेश कर सकते हैं।

EU ने 2040 के लिए नया जलवायु लक्ष्य तय किया

यूरोपीय संघ (EU) ने 2 जुलाई 2025 को अपने लंबे समय से प्रतीक्षित जलवायु योजना की घोषणा की, जिसके तहत 2040 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 1990 के स्तर की तुलना में 90% तक घटाने का लक्ष्य रखा गया है। यह योजना 2050 तक कार्बन न्यूट्रल बनने की ईयू की व्यापक प्रतिबद्धता का हिस्सा है। हालांकि, सभी सदस्य देशों का समर्थन सुनिश्चित करने के लिए इस योजना में कुछ लचीलापन जोड़ा गया है, जिससे विभिन्न देशों में बहस छिड़ गई है।

नया जलवायु लक्ष्य और उसका उद्देश्य

यूरोपीय आयोग ने पुष्टि की है कि 2040 के लिए जलवायु लक्ष्य पहले की तरह ही रहेगा—उत्सर्जन में 90% की कटौती। यह लक्ष्य 2050 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन प्राप्त करने की ईयू की मुख्य योजना की दिशा में एक अहम कदम है, जिसका मतलब है कि यूरोप जितने ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करेगा, उतनी ही या उससे अधिक मात्रा में उन्हें वातावरण से हटाएगा। यह योजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस समय यूरोप जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव जैसी गंभीर स्थितियों का सामना कर रहा है, और वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं और भी अधिक सामान्य और खतरनाक होंगी।

योजना में लचीलापन बढ़ने से चिंताएँ

कुछ सदस्य देशों का समर्थन पाने के लिए, जो 90% उत्सर्जन कटौती लक्ष्य को लेकर आशंकित हैं, यूरोपीय संघ की इस योजना में 2036 से कार्बन क्रेडिट के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। इसके तहत देश अपनी कुल उत्सर्जन कटौती का 3% तक हिस्सा यूरोप के बाहर जलवायु-सहायक परियोजनाओं—जैसे वृक्षारोपण या नवीकरणीय ऊर्जा—को फंड करके पूरा कर सकते हैं।

हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर जलवायु कार्यकर्ता नाराज़ हैं। WWF यूरोप और विशेषज्ञ नील मकारॉफ जैसे आलोचकों का कहना है कि यह एक “छुपा हुआ रास्ता” (loophole) बनाता है और यूरोप के भीतर उत्सर्जन घटाने पर से ध्यान हटाता है। उनका मानना है कि इससे यूरोप में हरित निवेश में कमी आ सकती है।

चुनौतियाँ और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

चेक गणराज्य जैसे कुछ देश मानते हैं कि 90% उत्सर्जन कटौती का लक्ष्य बहुत कठिन है। वहीं, इटली और हंगरी जैसे देश भारी उद्योगों में प्रदूषण कम करने की लागत को लेकर चिंतित हैं—खासकर ऐसे समय में जब यूरोप को चीन और अमेरिका से आर्थिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

इसके बावजूद, ईयू के जलवायु प्रमुख वॉपके हूकस्त्रा ने कहा कि यह योजना “महत्वाकांक्षी” है लेकिन व्यावहारिकता और लचीलापन भी दिखाती है। यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लायन ने कहा कि यह कदम दिखाता है कि यूरोप जलवायु परिवर्तन से लड़ने को लेकर गंभीर है।

अब यह योजना जुलाई के मध्य में यूरोपीय पर्यावरण मंत्रियों द्वारा चर्चा के लिए रखी जाएगी, और 18 सितंबर को वोटिंग होगी। इसके लिए केंद्र-डाएं झुकाव वाले यूरोपीय पीपुल्स पार्टी (EPP) जैसे सांसदों का समर्थन आवश्यक होगा। ईयू उम्मीद कर रहा है कि यह योजना नवंबर में ब्राज़ील में होने वाले COP30 जलवायु सम्मेलन से पहले पारित हो जाएगी।

अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस 2025

दुनिया भर में शनिवार, 5 जुलाई 2025 को अंतर्राष्ट्रीय सहकारी दिवस (CoopsDay) मनाया जा रहा है। इस वर्ष का आयोजन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र के अंतर्राष्ट्रीय सहकारी वर्ष (IYC2025) के दौरान पड़ रहा है। यह दिन इस बात को रेखांकित करता है कि सहकारी संस्थाएं कैसे समावेशी, टिकाऊ और जन-केन्द्रित समुदायों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। CoopsDay का उद्देश्य सहकारिता के सिद्धांतों को बढ़ावा देना और दुनिया भर में उनके सामाजिक व आर्थिक योगदान को पहचान देना है।

वैश्विक उत्सव एक उद्देश्य के साथ

अंतर्राष्ट्रीय सहकारी दिवस हर वर्ष जुलाई के पहले शनिवार को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया भर में सहकारी संस्थाओं द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना है। वर्ष 2025 की थीम है — “सहकारिताएं: समावेशी और टिकाऊ समाधान द्वारा एक बेहतर विश्व की ओर”

यह आयोजन दो प्रमुख वैश्विक पहलों से जुड़ा हुआ है — संयुक्त राष्ट्र का उच्च स्तरीय राजनीतिक मंच (जो वैश्विक लक्ष्यों की प्रगति की समीक्षा करता है) और आगामी द्वितीय विश्व सामाजिक विकास शिखर सम्मेलन। ये कार्यक्रम दिखाते हैं कि सहकारी संस्थाएं केवल स्थानीय व्यवसाय नहीं, बल्कि एक वैश्विक आंदोलन का हिस्सा हैं जो सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में काम कर रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय सहकारी गठबंधन (ICA) के अनुसार, सहकारिताएं लोगों को सशक्त बनाती हैं, लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देती हैं, और स्वास्थ्य सेवा, आवास, कृषि, वित्त और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में वास्तविक समाधान प्रदान करती हैं।

सहकारी दिवस 2025 के उद्देश्य और प्रभाव

वर्ष 2025 में अंतर्राष्ट्रीय सहकारी दिवस के चार प्रमुख उद्देश्य निर्धारित किए गए हैं:

  1. सतत विकास में सहकारी संस्थाओं की भूमिका के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना।

  2. सहकारिता के विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देना।

  3. ऐसे कानूनी और नीतिगत वातावरण को समर्थन देना जो सहकारी संस्थाओं को फलने-फूलने में मदद करे।

  4. नेतृत्व और युवाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करना ताकि सहकारी मॉडल को नई ऊर्जा मिले।

सहकारिता के प्रभाव को दर्शाने वाले कुछ चौंकाने वाले तथ्य:

  • दुनिया की 12% से अधिक जनसंख्या किसी न किसी सहकारी संस्था से जुड़ी हुई है।

  • शीर्ष 300 सहकारी संस्थाओं का संयुक्त वार्षिक राजस्व 2.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है।

  • सहकारी संस्थाएं 28 करोड़ लोगों को रोजगार या आय प्रदान करती हैं, जो कि दुनिया की कुल कार्यबल का 10% हिस्सा है।

भारत की समृद्ध सहकारी विरासत

भारत में सहयोग की भावना सदियों पुरानी है, जो “वसुधैव कुटुम्बकम्” (सारा विश्व एक परिवार है) की सोच से प्रेरित रही है। आधुनिक कानूनों के अस्तित्व में आने से पहले ही भारतीय गांवों में जल, भूमि और वनों के प्रबंधन के लिए सामूहिक सहयोग की परंपरा प्रचलित थी।

आधुनिक सहकारी आंदोलन की शुरुआत 19वीं सदी के उत्तरार्ध में ग्रामीण क्षेत्रों में आने वाली कठिनाइयों के समाधान के रूप में हुई। उस समय खराब फसलें, ऊँचे ब्याज दरों पर ऋण और ज़मीन से जुड़े मुद्दों ने किसानों को संकट में डाल दिया था। ऐसे समय में सहकारी संस्थाएं एक जीवनरेखा बनकर सामने आईं — उन्होंने सस्ते ऋण, उचित मूल्य और सामुदायिक समर्थन प्रदान किया।

आज भारत में विभिन्न प्रकार की सहकारी संस्थाएं कार्यरत हैं, जैसे:

  • उपभोक्ता सहकारिताएं – जैसे केंद्रीय भंडार

  • उत्पादक सहकारिताएं – जैसे एपीपीसीओ (APPCO)

  • विपणन सहकारिताएं – जैसे अमूल (AMUL)

  • क्रेडिट सहकारिताएं – जैसे शहरी सहकारी बैंक

  • कृषि सहकारिताएं – जो साझा खेती और संसाधन उपयोग में मदद करती हैं

  • आवास सहकारिताएं – जो सस्ती और सामूहिक आवास उपलब्ध कराती हैं

भारत की कुछ प्रमुख सहकारी संस्थाएं, जिनका कारोबार सबसे अधिक है, इनमें शामिल हैं – इफको (IFFCO), अमूल (AMUL), कृभको (KRIBHCO) और सरस्वत बैंक। ये संस्थाएं न केवल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देती हैं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

भारतीय नौसेना में पहली महिला फाइटर पायलट बनीं सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया

सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया भारतीय नौसेना की पहली महिला बन गई हैं जिन्हें फाइटर पायलट प्रशिक्षण स्ट्रीम में शामिल किया गया है। यह ऐतिहासिक घोषणा 4 जुलाई 2025 को विशाखापत्तनम स्थित आईएनएस डेगा में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान की गई। यह भारतीय सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता (Gender Equality) की दिशा में एक बड़ा कदम है और महिलाओं के लिए रक्षा क्षेत्र में एक गौरवपूर्ण क्षण है।

भारतीय नौसेना ने इतिहास रच दिया है। सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया को आधिकारिक रूप से नौसेना के फाइटर स्ट्रीम में शामिल कर लिया गया है। वे इस स्ट्रीम में जगह पाने वाली पहली महिला अधिकारी बन गई हैं। इससे महिला अधिकारियों के लिए लड़ाकू भूमिकाओं के द्वार खुल गए हैं।

नौसेना विमानन में नया इतिहास

भारतीय नौसेना ने बताया कि सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया को फाइटर पायलट के रूप में प्रशिक्षण देने के लिए चुना गया है। वह एक वर्ष तक विशेष प्रशिक्षण लेंगी, जिसके बाद उन्हें MiG-29K या Rafale-M जैसे शक्तिशाली लड़ाकू विमानों को विमानवाहक पोतों (Aircraft Carriers) से उड़ाने का मौका मिल सकता है। यह घोषणा सेकंड बेसिक हॉक कन्वर्ज़न कोर्स के “विंगिंग सेरेमनी” के दौरान की गई, जिसमें पायलटों को Hawk Mk 132 विमान पर प्रशिक्षण दिया जाता है।

विंगिंग सेरेमनी और सम्मान

3 जुलाई 2025 को लेफ्टिनेंट अतुल कुमार ढुल और सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया को “विंग्स ऑफ गोल्ड” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान रियर एडमिरल जनक बेवली, सहायक नौसेना स्टाफ प्रमुख (विमानन) द्वारा प्रदान किया गया। नौसेना ने गर्व से साझा किया कि आस्था पूनिया लड़ाकू स्ट्रीम में शामिल होने वाली पहली महिला हैं—जो “नारी शक्ति” को आगे बढ़ाने का सशक्त प्रतीक है।

आस्था पूनिया की पृष्ठभूमि और नौसेना की दृष्टि

आस्था पूनिया उत्तर प्रदेश के मेरठ से हैं और उनका पारिवारिक संबंध सेना से नहीं है। उन्होंने बी.टेक की पढ़ाई पूरी की और बाद में नौसेना के एविएशन ब्रांच में शामिल हुईं। नौसेना पहले से ही महिलाओं को हेलिकॉप्टर पायलट और एयर ऑपरेशन्स ऑफिसर के रूप में शामिल कर चुकी है, लेकिन यह पहली बार है जब किसी महिला को फाइटर जेट ट्रेनिंग के लिए चुना गया है। यह कदम दिखाता है कि नौसेना महिलाओं को समान अवसर और सशक्तिकरण देने के लिए प्रतिबद्ध है।

नौसेना के भविष्य की तैयारी

फिलहाल भारतीय नौसेना के पास दो विमानवाहक पोत हैं—आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत, जिन पर वर्तमान में MiG-29K लड़ाकू विमान तैनात हैं। अप्रैल 2025 में भारत ने फ्रांस से 26 राफेल-एम लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए समझौता किया है। इसके अलावा, DRDO एक उन्नत फाइटर जेट—ट्विन इंजन डेक-बेस्ड फाइटर (TEDBF)—का भी विकास कर रहा है। भविष्य में आस्था पूनिया इन अत्याधुनिक विमानों को उड़ाने वाली भारत की पहली महिला बन सकती हैं।

यह उपलब्धि भारत की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और यह दर्शाती है कि अब महिलाएं भी सैन्य उड़ान के सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अपनी जगह बना रही हैं।

‘फैंटास्टिक फोर’ के स्टार जूलियन मैकमोहन का 56 साल की उम्र में निधन

ऑस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध अभिनेता जूलियन मैकमोहन का 56 वर्ष की आयु में कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद फ्लोरिडा में निधन हो गया। वह ‘फैंटास्टिक फोर’, ‘निप/टक’, ‘चार्म्ड’ और ‘एफबीआई: मोस्ट वांटेड’ जैसे लोकप्रिय टीवी शो और फिल्मों में अपनी भूमिकाओं के लिए जाने जाते थे। उनकी पत्नी केली मैकमोहन ने यह दुखद समाचार साझा करते हुए उन्हें एक प्यार और जीवन से भरपूर इंसान के रूप में याद किया। जूलियन की मौत से न केवल फिल्म जगत, बल्कि उनके प्रशंसकों के बीच भी गहरा शोक है।

उनका करियर और प्रसिद्धि

जूलियन मैकमोहन ने अपने करियर की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया में एक मॉडल के रूप में की थी और बाद में अभिनय की दुनिया में कदम रखा। उनका पहला अभिनय रोल 1989 की सोप ओपेरा ‘द पावर, द पैशन’ में था। इसके बाद उन्होंने कई अमेरिकी टीवी शोज़ और फिल्मों में काम किया। उन्हें सबसे ज्यादा पहचान टीवी शो ‘चार्म्ड’ में कोल टर्नर नामक एक राक्षस की भूमिका निभाने के लिए मिली, जो दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ।

बाद में, उन्होंने मार्वल की ‘फैंटास्टिक फोर’ फिल्मों (2005 और 2007) में प्रसिद्ध खलनायक डॉ. डूम की भूमिका निभाई। इस किरदार ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी ज्यादा लोकप्रिय बना दिया।

अन्य भूमिकाएँ और हालिया काम

जूलियन मैकमोहन ने ‘प्रोफाइलर’ और ‘एफबीआई: मोस्ट वांटेड’ जैसे हिट टीवी शोज़ में भी अभिनय किया। फिल्मों में उन्होंने ‘प्रीमोनिशन’, ‘रेड’ और ‘पैरानॉइया’ जैसी मशहूर फिल्मों में काम किया। उनकी अंतिम फिल्म ‘द सर्फर’ 2024 के कान्स फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित हुई थी। उनकी आखिरी टीवी भूमिका नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘द रेसिडेंस’ में थी, जिसमें उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री की भूमिका निभाई।

परिवार का बयान

उनकी पत्नी केली मैकमोहन ने एक भावुक बयान जारी करते हुए बताया कि जूलियन ने कैंसर से बहादुरी से लड़ते हुए शांति से अंतिम सांस ली। उन्होंने कहा कि जूलियन को जीवन, अपने परिवार, दोस्तों, प्रशंसकों और अपने काम से बेहद प्यार था। परिवार ने सभी से गोपनीयता बनाए रखने की अपील की और पुरानी स्मृतियों और शुभकामनाओं के लिए सभी का आभार जताया।

प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि

जूलियन का जन्म ऑस्ट्रेलिया में हुआ था। उनके पिता बिली मैकमोहन, 1971 से 1972 तक ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री रहे। जूलियन ने अपने अभिनय कौशल से न केवल ऑस्ट्रेलिया बल्कि हॉलीवुड में भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने हमेशा अपने काम के ज़रिए लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाने की कोशिश की और एक समर्पित कलाकार के रूप में याद किए जाएंगे।

Recent Posts

द हिंदू रिव्यू मार्च 2026
Most Important Questions and Answer PDF
QR Code
Scan Me