जनवरी में GST कलेक्शन ₹1.93 लाख करोड़ के पार क्यों पहुंचा?

भारत की कर संग्रहण स्थिति 2026 की शुरुआत में मजबूत बनी हुई है। जनवरी 2026 में सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह ₹1.93 लाख करोड़ से अधिक रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.2% की वृद्धि दर्शाता है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से आयात से संबंधित कर राजस्व में इज़ाफ़े के कारण हुई, जबकि पिछले वर्ष कई वस्तुओं पर GST दरें घटाई गई थीं। शुद्ध GST राजस्व में भी संतोषजनक वृद्धि दर्ज की गई। ताज़ा आंकड़े यह संकेत देते हैं कि अर्थव्यवस्था में गतिविधियाँ लचीली बनी हुई हैं और विभिन्न क्षेत्रों में उपभोग का स्तर स्थिर है।

जनवरी GST संग्रह प्रदर्शन

भारत में जनवरी 2026 में सकल GST संग्रह ₹1.93 लाख करोड़ से अधिक रहा, जो वर्ष-दर-वर्ष 6.2% की वृद्धि को दर्शाता है। रिफंड समायोजन के बाद शुद्ध GST राजस्व ₹1.71 लाख करोड़ दर्ज किया गया, जिसमें 7.6% की बढ़ोतरी हुई। यह वृद्धि बेहतर कर अनुपालन और निरंतर आर्थिक गतिविधियों का संकेत देती है। हालिया GST दर युक्तिकरण के बावजूद संग्रह मजबूत बना हुआ है, जो घरेलू व्यापार और आयात दोनों में बेहतर रिपोर्टिंग प्रणाली और विस्तृत कर आधार को दर्शाता है।

घरेलू बनाम आयात राजस्व रुझान

जनवरी में घरेलू लेन-देन से GST राजस्व 4.8% बढ़कर ₹1.41 लाख करोड़ हो गया। इसके विपरीत, आयात से संबंधित GST राजस्व में 10.1% की तेज वृद्धि दर्ज की गई और यह ₹52,253 करोड़ तक पहुंच गया। आयात से बढ़ा संग्रह कुल GST आंकड़ों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह रुझान मजबूत आयात मांग और सीमा शुल्क से जुड़े GST प्रवर्तन में सुधार को दर्शाता है, जबकि घरेलू उपभोग में मध्यम लेकिन स्थिर वृद्धि बनी हुई है।

रिफंड और शुद्ध GST वृद्धि

जनवरी 2026 के दौरान कुल GST रिफंड 3.1% घटकर ₹22,665 करोड़ रह गया, जिससे शुद्ध राजस्व आंकड़ों में सुधार हुआ। कम रिफंड और अधिक सकल संग्रह के संयुक्त प्रभाव से शुद्ध GST में 7.6% की वृद्धि दर्ज की गई। नियंत्रित रिफंड प्रवाह इनपुट टैक्स क्रेडिट के बेहतर मिलान और कर अनुपालन में सुधार का संकेत देता है। शुद्ध GST आंकड़ों पर विशेष नजर रखी जाती है, क्योंकि यही सरकार के पास वास्तविक रूप से उपलब्ध राजस्व को दर्शाते हैं।

GST दर कटौती और सेस बदलाव का प्रभाव

22 सितंबर 2025 से लगभग 375 वस्तुओं पर GST दरों में कटौती की गई, जिससे कई उत्पाद सस्ते हुए। इसके साथ ही, अब क्षतिपूर्ति उपकर (Compensation Cess) केवल तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों पर ही लगाया जा रहा है, जबकि पहले यह लक्ज़री और ‘सिन गुड्स’ पर भी लागू था। परिणामस्वरूप, जनवरी में सेस संग्रह घटकर ₹5,768 करोड़ रह गया, जो एक वर्ष पहले ₹13,009 करोड़ था। इन नीतिगत बदलावों से राजस्व वृद्धि की गति कुछ हद तक धीमी हुई है, लेकिन उपभोक्ताओं की वहन क्षमता में बढ़ोतरी हुई है।

जानें कौन हैं एयर मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया, जिन्होंने संभाली ईस्टर्न एयर कमांड की कमान

एयर मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया ( Air Marshal Inderpal Singh Walia ) को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। उन्होंने भारतीय वायु सेना (IAF) ईस्टर्न एयर कमांड के नए एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पदभार संभाला है। दरअसल, एयर मार्शल सूरत सिंह 31 जनवरी को रिटायर हो गए हैं, उन्होंने 39 साल लंबी सेवा पूरी की है, उनकी जगह एयर मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब पूर्वी वायु कमान भारत की पूर्वी वायु सीमा की सुरक्षा और संवेदनशील सीमाओं पर परिचालन तत्परता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वायु मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया कौन हैं?

वायु मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया भारतीय वायु सेना के एक अनुभवी फाइटर पायलट और कमांडर हैं। वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र हैं और 11 जून 1988 को आईएएफ के फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त किया। 35 से अधिक वर्षों के अपने करियर में उन्होंने शांत, प्रभावशाली संचालन नेतृत्व और तीक्ष्ण रणनीतिक क्षमता के लिए प्रतिष्ठा बनाई है। लड़ाकू उड्डयन और हवाई संचालन की उनकी गहरी समझ उन्हें भारतीय वायु सेना के सबसे महत्वपूर्ण ऑपरेशनल कमांड्स में से एक का नेतृत्व करने के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाती है।

उड़ान अनुभव और विमान विशेषज्ञता

वायु मार्शल वालिया कई अग्रणी लड़ाकू विमानों पर प्रशिक्षित हैं, जिनमें MiG-21, MiG-23, MiG-27, Jaguar और Su-30 MKI शामिल हैं। उन्होंने 3,200 घंटे से अधिक दुर्घटना-मुक्त उड़ान का अनुभव प्राप्त किया है, जो उनके असाधारण पेशेवर कौशल और दक्षता को दर्शाता है। एक फाइटर स्ट्राइक लीडर और इंस्ट्रूमेंट रेटिंग इंस्ट्रक्टर एवं एग्जामिनर (IRIE) के रूप में, उन्होंने पायलट प्रशिक्षण और लड़ाकू तत्परता में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनका उड़ान अनुभव पारंपरिक प्लेटफॉर्म्स और आधुनिक मल्टीरोल फाइटर्स का संयोजन है, जो उन्हें संतुलित परिचालन दृष्टिकोण प्रदान करता है।

प्रमुख कमांड और स्टाफ पदस्थापन

अपने उत्कृष्ट करियर के दौरान, वायु मार्शल वालिया ने कई महत्वपूर्ण कमांड और स्टाफ पदों पर कार्य किया है। उन्होंने MiG-27 स्क्वाड्रन का नेतृत्व किया, प्रतिष्ठित टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (TACDE) का संचालन किया, और एक अग्रिम वायु बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग के रूप में सेवा दी। इसके अलावा वे एयर हेडक्वार्टर में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (ट्रेनिंग) और HQ वेस्टर्न एयर कमांड में एयर डिफेंस कमांडर के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान नियुक्ति से पहले वे HQ ईस्टर्न एयर कमांड में सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर के पद पर थे।

पुरस्कार और सम्मान

उल्लेखनीय सेवा के लिए, वायु मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया को वायु सेना पदक (VM) 2008 और अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) 2018 से सम्मानित किया गया। ये सम्मान उनके पेशेवर कौशल, नेतृत्व क्षमता और भारतीय वायु सेना में संचालनात्मक दक्षता और प्रशिक्षण में उनके महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाते हैं।

16वें वित्त आयोग ने 41% हिस्सेदारी का बंटवारा क्यों बनाए रखा?

केंद्र और राज्यों के बीच धन के बंटवारे ने एक नए चरण में प्रवेश कर लिया है। 16वें वित्त आयोग ने, जिनकी सिफारिशें 2026–27 से 2030–31 तक लागू होंगी, विभाज्य कर पूल में राज्यों की हिस्सेदारी को 41% पर बरकरार रखा है, लेकिन इस हिस्से के वितरण के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। जीडीपी योगदान को एक नए मानदंड के रूप में शामिल करने और राजस्व घाटा अनुदानों को समाप्त करने के माध्यम से आयोग ने दक्षता, आर्थिक वृद्धि और राजकोषीय अनुशासन की दिशा में स्पष्ट संकेत दिया है। इसी कारण यह विषय प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है।

41% कर हस्तांतरण बरकरार: इसका क्या अर्थ है

18 राज्यों द्वारा अपनी हिस्सेदारी 50% तक बढ़ाने की मांग के बावजूद, आयोग ने कर हस्तांतरण दर को 41% पर ही बनाए रखा। आयोग का तर्क है कि राज्य पहले ही कुल गैर-ऋण सार्वजनिक राजस्व का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा प्राप्त कर रहे हैं, और यदि उनकी हिस्सेदारी और बढ़ाई जाती है तो इससे केंद्र सरकार की राष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने की क्षमता सीमित हो जाएगी। यह निर्णय 15वें वित्त आयोग की निरंतरता को दर्शाता है, साथ ही यह संकेत भी देता है कि अब राजकोषीय संघवाद का फोकस केवल अधिक धन हस्तांतरण पर नहीं, बल्कि व्यय की गुणवत्ता और प्रभावशीलता पर होगा।

जीडीपी योगदान को शामिल किया गया

एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में, क्षैतिज कर वितरण सूत्र में राज्य के जीडीपी योगदान को एक नए मानदंड के रूप में शामिल किया गया है, जिसे 10% भार दिया गया है। यह मानदंड उन राज्यों को मान्यता देता है जो राष्ट्रीय आर्थिक वृद्धि में अधिक योगदान करते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह एक दिशात्मक परिवर्तन है, कोई अत्यधिक या अचानक बदलाव नहीं, जिसका उद्देश्य दक्षता और समानता के बीच संतुलन बनाना है।

क्षैतिज कर वितरण सूत्र में बदलाव

जीडीपी योगदान के अलावा, आयोग ने कई समायोजन किए हैं। इसमें कर प्रयास (Tax Effort) के लिए 2.5% भार को हटा दिया गया, जनसंख्या भार को 2.5 प्रतिशत अंक बढ़ाया गया, और क्षेत्रफल, जनसांख्यिकीय प्रदर्शन तथा प्रति व्यक्ति GSDP दूरी के भार को घटाया गया। परिणामस्वरूप, औद्योगिक और तेजी से बढ़ते राज्यों जैसे कर्नाटक, केरल, गुजरात और महाराष्ट्र को अधिक हिस्सेदारी मिली, जबकि अधिक जनसंख्या वाले और गरीब राज्य जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार को सापेक्ष रूप से कम हिस्सेदारी मिली। इस पुनर्वितरण के राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव महत्वपूर्ण हैं।

राजस्व घाटा अनुदान नहीं

आयोग ने पहली बार राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grants, RDGs) को शून्य करने की सिफारिश की। आयोग का तर्क है कि RDGs राजकोषीय सुधार के प्रोत्साहन को कमजोर करते हैं और निर्भरता को बढ़ावा देते हैं। आयोग ने कहा कि राज्यों के पास राजस्व बढ़ाने और व्यय को संतुलित करने के पर्याप्त अवसर हैं। यह पूर्व के वित्त आयोगों से एक महत्वपूर्ण अलगाव है और राज्यों में आत्मनिर्भरता और वित्तीय जिम्मेदारी की दिशा में एक मजबूत कदम को दर्शाता है।

स्थानीय निकाय और आपदा प्रबंधन फंडिंग

RDGs को काटने के बावजूद, आयोग ने अगले पांच वर्षों में ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के लिए ₹7.91 लाख करोड़ आबंटित किए हैं, जिसमें ग्रामीण-शहरी विभाजन 60:40 है, और विशेष रूप से जल, स्वच्छता और शहरी अवसंरचना पर ध्यान दिया गया है। इसके अलावा, राज्य आपदा प्रतिक्रिया एवं निवारण फंडों के लिए ₹2.04 लाख करोड़ और राष्ट्रीय आपदा फंड के लिए ₹79,000 करोड़ की सिफारिश की गई है, जिसमें नवीनीकृत आपदा जोखिम सूचकांक का उपयोग किया गया है। यह दर्शाता है कि आयोग सामान्य वित्तीय सहायता के बजाय कार्यात्मक और उद्देश्य-संबंधित अनुदानों को प्राथमिकता देता है।

16.5% हिस्सेदारी के साथ कौन-सा राज्य बना भारत का नवीकरणीय ऊर्जा पावरहाउस?

भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा में गुजरात ने बड़ी बढ़त हासिल की है। 31 दिसंबर 2025 तक गुजरात देश की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में 16.5% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन गया। मजबूत नीतियां, विशाल सोलर पार्क और रूफटॉप सोलर के तेज़ी से अपनाए जाने ने गुजरात को नए रिकॉर्ड बनाने में मदद की है। यह उपलब्धि भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को समर्थन देती है और नेट-ज़ीरो उत्सर्जन की दिशा में देश की राह को मजबूत करती है। गुजरात की प्रगति यह दिखाती है कि किस तरह राज्य स्तर की पहलें भारत के हरित परिवर्तन को आगे बढ़ा सकती हैं।

गुजरात की नवीकरणीय ऊर्जा में अग्रणी भूमिका

गुजरात भारत में कुल स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में 42.583 गीगावाट के साथ पहले स्थान पर है, जिससे वह स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में राष्ट्रीय अग्रणी बन गया है। देश की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में राज्य की 16.50% हिस्सेदारी उसके मजबूत नीतिगत समर्थन और तैयार अवसंरचना को दर्शाती है। गुजरात पवन ऊर्जा क्षमता में पहले और सौर ऊर्जा प्रतिष्ठानों में दूसरे स्थान पर है। यह नेतृत्व भारत की दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा दृष्टि के अनुरूप है और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाते हुए क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करता है।

सौर ऊर्जा: गुजरात की वृद्धि की रीढ़

दिसंबर 2025 तक 25,529.40 मेगावाट स्थापित सौर क्षमता के साथ गुजरात एक प्रमुख सौर ऊर्जा हब के रूप में उभरा है। इसमें ग्राउंड-माउंटेड सोलर परियोजनाएं, रूफटॉप सोलर, हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स और पीएम-कुसुम जैसी ऑफ-ग्रिड प्रणालियां शामिल हैं। चारणका, राधनेशडा और धोलेरा जैसे बड़े सोलर पार्कों ने बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन को बढ़ावा दिया है। कच्छ में प्रस्तावित 37.35 गीगावाट क्षमता वाला खावड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क, जिसमें से 11.33 गीगावाट पहले ही चालू हो चुका है, दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क बन चुका है।

पवन ऊर्जा और हाइब्रिड परियोजनाएं

भारत की पहली विंड पावर नीति लागू करने के साथ ही गुजरात ने पवन ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई है। दिसंबर 2025 तक राज्य में 14,820.94 मेगावाट की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता है, जिसमें कच्छ जिला सबसे बड़ा योगदानकर्ता है। इसके अलावा जामनगर, देवभूमि द्वारका, अमरेली और राजकोट जैसे जिले भी पवन ऊर्जा उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गुजरात ने आधुनिक ट्रांसमिशन (एवैकुएशन) अवसंरचना और सरकार द्वारा आवंटित भूमि के समर्थन से 2,398.77 मेगावाट की पवन-सौर हाइब्रिड परियोजनाएं भी सफलतापूर्वक शुरू की हैं।

रूफटॉप सोलर और कृषि को समर्थन

गुजरात ने 11 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन का आंकड़ा पार कर लिया है, जिससे 6,412.80 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है और राज्य रूफटॉप सोलर के क्षेत्र में राष्ट्रीय अग्रणी बन गया है। वर्ष 2016 से गुजरात ने आवासीय रूफटॉप सोलर को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया है, जिसके परिणामस्वरूप भारत की कुल रूफटॉप सोलर क्षमता में राज्य की 25% से अधिक हिस्सेदारी है। कृषि क्षेत्र में पीएम-कुसुम योजना के तहत 12,700 ऑफ-ग्रिड सोलर वॉटर पंप लगाए गए हैं, जिससे किसानों की बिजली लागत कम हुई है और सिंचाई को अधिक टिकाऊ बनाया गया है।

नीतिगत ढांचा और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस

गुजरात की नवीकरणीय ऊर्जा में सफलता का आधार मजबूत नीतियां हैं—विंड पावर नीति 1993 से लेकर गुजरात एकीकृत नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2025 तक। ये नीतियां क्षमता सीमाओं को हटाती हैं, ग्रिड कनेक्टिविटी को सरल बनाती हैं और हाइब्रिड प्रणालियों व बैटरी स्टोरेज को प्रोत्साहित करती हैं। अक्षय ऊर्जा सेतु जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म तेज़ मंज़ूरी और पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं। साथ ही, राज्य की नीतियां निजी निवेश, नवाचार, नवीकरणीय विनिर्माण और हरित रोजगार सृजन को भी बढ़ावा देती हैं।

विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026: प्रकृति के जीवनदायी पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण का संकल्प

World Wetlands Day 2026: विश्व आर्द्रभूमि दिवस या विश्व वेटलैंड्स डे (World Wetlands Day) पूरे दुनिया में 02 फरवरी को मनाया जाता है। इस बार के विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 की थीम ‘आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव’ है। इस वर्ष की वैश्विक थीम इस बात को रेखांकित करती है कि पारंपरिक और आदिवासी ज्ञान ने सदियों से आर्द्रभूमियों की रक्षा कैसे की है। आधुनिक विकास और जलवायु दबाव के कारण जहां आर्द्रभूमियां तेज़ी से समाप्त हो रही हैं, वहीं स्थानीय समुदाय आज भी पारंपरिक तरीकों से उनका सतत प्रबंधन कर रहे हैं। वर्ष 2026 का यह आयोजन नीति-निर्माताओं को याद दिलाता है कि विज्ञान और परंपरा का समन्वय ही आर्द्रभूमियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है, जो जैव विविधता, जल सुरक्षा और दुनिया भर में लाखों लोगों की आजीविका के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

विश्व आर्द्रभूमि दिवस क्या है?

विश्व आर्द्रभूमि दिवस हर वर्ष 2 फरवरी को मनाया जाता है, जो 1971 में ईरान के रामसर शहर में रामसर कन्वेंशन पर हस्ताक्षर की स्मृति में आयोजित होता है। इस दिन का उद्देश्य झीलों, दलदलों, मैंग्रोव, बाढ़ मैदानों और लैगून जैसी आर्द्रभूमियों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। ये पारिस्थितिक तंत्र स्वच्छ जल उपलब्ध कराते हैं, बाढ़ के प्रभाव को कम करते हैं, कार्बन का भंडारण करते हैं और समृद्ध जैव विविधता को सहारा देते हैं। अपनी अत्यधिक उपयोगिता के बावजूद, विकास योजनाओं में आर्द्रभूमियों को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। विश्व आर्द्रभूमि दिवस यह याद दिलाता है कि आर्द्रभूमियों का संरक्षण सीधे तौर पर मानव अस्तित्व और सतत विकास से जुड़ा हुआ है।

विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 की थीम का विवरण

विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 की थीम ‘आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव’ है। पीढ़ियों से मछुआरा समुदाय, पशुपालक समूह और वनवासी आर्द्रभूमियों का प्रबंधन सतत दोहन, मौसमी उपयोग और सांस्कृतिक नियमों के माध्यम से करते आए हैं। इन परंपरागत तरीकों ने बिना आधुनिक तकनीक के भी पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखा। यह थीम इस बात को मान्यता देती है कि पारंपरिक ज्ञान पुराना नहीं, बल्कि आज के जलवायु संकट के दौर में अत्यंत प्रासंगिक है। साथ ही, यह सांस्कृतिक विरासत के सम्मान को बढ़ावा देते हुए संरक्षण को केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि लोगों-केंद्रित दृष्टिकोण के रूप में प्रस्तुत करती है।

रामसर कन्वेंशन और सामुदायिक सहभागिता

रामसर कन्वेंशन आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके समझदारीपूर्ण उपयोग (Wise Use) को समर्पित एक वैश्विक संधि है। 170 से अधिक अनुबंधित देशों की भागीदारी के साथ यह कन्वेंशन आर्द्रभूमियों की रक्षा को प्रोत्साहित करता है, साथ ही सतत आजीविका के अवसरों को भी बनाए रखने पर ज़ोर देता है। इसका एक प्रमुख सिद्धांत “वाइज यूज़” है, जो पारंपरिक और स्थानीय प्रथाओं से गहराई से मेल खाता है। वर्ष 2025 तक दुनिया भर में 2,500 से अधिक रामसर स्थल हैं, जो 250 मिलियन हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैले हुए हैं। हाल के वर्षों में यह कन्वेंशन सामुदायिक भागीदारी पर विशेष बल देता है, यह मानते हुए कि संरक्षण के प्रयास तब सबसे अधिक सफल होते हैं जब स्थानीय लोग केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार होते हैं।

भारत में आर्द्रभूमियां और सांस्कृतिक जुड़ाव

भारत में 98 रामसर स्थल हैं, जो दक्षिण एशिया में सबसे अधिक हैं और लगभग 13.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हुए हैं। भारत की आर्द्रभूमियां संस्कृति, धर्म और आजीविका से गहराई से जुड़ी हुई हैं। चिलिका झील पारंपरिक मछुआरा समुदायों का सहारा है, जबकि सुंदरबन आर्द्रभूमि में शहद संग्रह और मत्स्य पालन के माध्यम से लोगों की आजीविका चलती है। नाव उत्सवों से लेकर पवित्र झीलों तक, भारत की आर्द्रभूमियां जीवंत सांस्कृतिक परिदृश्य के रूप में मौजूद हैं। यही कारण है कि विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 की थीम के संदर्भ में भारत की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन जाती है।

भारत में आर्द्रभूमियों की श्रेणियां

भारत की आर्द्रभूमियों को व्यापक रूप से आठ श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। इनमें हिमालयी झीलें, गंगा के बाढ़ मैदानों के दलदल, दक्कन पठार के जलाशय, तटीय लैगून, मैंग्रोव, लवणीय आर्द्रभूमियां, उत्तर-पूर्वी दलदली क्षेत्र और द्वीपीय पारिस्थितिक तंत्र शामिल हैं। प्रत्येक श्रेणी स्थानीय जलवायु, भू-आकृति और जल उपलब्धता के अनुरूप विकसित हुई पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों से जुड़ी है। शुष्क क्षेत्रों में पारंपरिक जल-संचयन प्रणालियां और बाढ़ मैदानों में मौसमी मत्स्य-निषेध जैसी प्रथाएं इस बात का उदाहरण हैं कि किस तरह समुदायों ने अपनी आवश्यकताओं को पूरा करते हुए आर्द्रभूमियों के स्वास्थ्य की रक्षा की है।

आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017

आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 भारत में आर्द्रभूमियों की सुरक्षा के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करते हैं। इन नियमों के तहत राज्यों को आर्द्रभूमियों की पहचान करने, प्रदूषणकारी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने और उनके लिए प्रबंधन योजनाएं तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। महत्वपूर्ण रूप से, ये नियम सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित करते हैं, जो विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 की थीम के अनुरूप है। हालांकि, कमजोर प्रवर्तन और विकास से जुड़े प्रतिस्पर्धी हितों के कारण इनके क्रियान्वयन में अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं। औपचारिक शासन प्रक्रियाओं में पारंपरिक ज्ञान के एकीकरण से अनुपालन और संरक्षण के परिणामों में सुधार किया जा सकता है।

रूमेटॉइड आर्थराइटिस जागरूकता दिवस 2026: गठिया के प्रति समझ और जागरूकता का संकल्प

रूमेटॉइड आर्थराइटिस को अक्सर केवल जोड़ों के दर्द के रूप में समझ लिया जाता है, जबकि वास्तव में यह एक दीर्घकालिक ऑटोइम्यून बीमारी है, जो पूरे शरीर को प्रभावित कर सकती है और जीवन की गुणवत्ता पर गहरा असर डालती है। हर वर्ष 2 फरवरी को विश्व स्तर पर मनाया जाने वाला रूमेटॉइड आर्थराइटिस जागरूकता दिवस 2026 इस बात पर ज़ोर देता है कि समय पर पहचान, उचित इलाज और भावनात्मक सहयोग इस आजीवन बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए बेहद ज़रूरी हैं। दुनिया भर में लाखों लोग इससे प्रभावित हैं, और यह दिवस हमें याद दिलाता है कि जागरूकता कोई विकल्प नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य परिणामों, गरिमा और आशा के लिए एक अनिवार्यता है।

रूमेटॉइड आर्थराइटिस जागरूकता दिवस 2026 की तिथि

रूमेटॉइड आर्थराइटिस जागरूकता दिवस हर वर्ष 2 फरवरी को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह सोमवार, 2 फरवरी को पड़ेगा, जब वैश्विक स्वास्थ्य संगठन, रोगी समूह और चिकित्सा समुदाय ऑटोइम्यून बीमारियों के प्रति जागरूकता फैलाने के साझा प्रयास में एकजुट होंगे। यह वार्षिक आयोजन इस बात की याद दिलाता है कि समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप बीमारी की दिशा को काफी हद तक बदल सकता है और दीर्घकालिक स्वास्थ्य परिणामों में उल्लेखनीय सुधार ला सकता है।

रूमेटॉइड आर्थराइटिस क्या है?

रूमेटॉइड आर्थराइटिस (RA) एक दीर्घकालिक ऑटोइम्यून रोग है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से स्वस्थ जोड़ों के ऊतकों पर हमला करने लगती है। इसके परिणामस्वरूप दर्द, सूजन, जकड़न और सूजन होती है, जो आमतौर पर शरीर के दोनों ओर के जोड़ों को समान रूप से प्रभावित करती है। समय के साथ यह रोग कार्टिलेज और हड्डियों को नुकसान पहुंचा सकता है और हृदय, फेफड़े, आंखों तथा रक्त वाहिकाओं जैसे अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। इसी कारण रूमेटॉइड आर्थराइटिस को केवल जोड़ों की नहीं, बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करने वाली प्रणालीगत बीमारी माना जाता है।

दिवस का इतिहास और उद्देश्य

रूमेटॉइड आर्थराइटिस जागरूकता दिवस की स्थापना RA से जूझ रहे लोगों की अदृश्य चुनौतियों पर ध्यान आकर्षित करने के लिए की गई थी। वर्षों में इसे स्वास्थ्य संगठनों और एडवोकेसी समूहों द्वारा अनुसंधान, रोगी शिक्षा, समय पर स्क्रीनिंग और सहानुभूति को बढ़ावा देने के लिए उपयोग किया गया है। इस आयोजन ने ऑटोइम्यून रोग प्रबंधन में उपेक्षा और गलतफहमी से पहचान, समर्थन और वैज्ञानिक प्रगति की दिशा में दृष्टिकोण बदलने में मदद की है।

देखने योग्य संकेत और लक्षण

रूमेटॉइड आर्थराइटिस के प्रारंभिक लक्षण अक्सर हल्के लेकिन धीरे-धीरे बढ़ने वाले होते हैं। आम संकेतों में शामिल हैं: लगातार जोड़ों में दर्द और सूजन, सुबह की जकड़न जो एक घंटे से अधिक रहती है, थकान, कमजोरी, और कभी-कभी हल्का बुखार। रोग के उन्नत चरण में जोड़ों में विकृति और गतिशीलता में कमी हो सकती है। इन लक्षणों को जल्दी पहचानना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि समय पर उपचार अप्रतिवर्तनीय जोड़ क्षति और विकलांगता को रोक सकता है।

कारण और जोखिम कारक

रूमेटॉइड आर्थराइटिस के सटीक कारण अभी भी ज्ञात नहीं हैं, लेकिन इसके विकास से जुड़े कई जोखिम कारक पहचाने गए हैं। इनमें शामिल हैं: आनुवंशिक प्रवृत्ति, हॉर्मोनल कारक (RA महिलाओं में अधिक सामान्य है), धूम्रपान, पर्यावरणीय उत्तेजक, मोटापा, और कुछ विशेष संक्रमण। इन कारकों के प्रति जागरूकता होने से व्यक्ति रोकथाम के कदम उठा सकते हैं और बिना देरी के चिकित्सीय सलाह ले सकते हैं।

केंद्रीय बजट 2026-27 की मुख्य बातें

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026–27 पेश किया। कर्तव्य भवन में तैयार किया गया यह पहला बजट तीन मूल सिद्धांतों से प्रेरित है, जिनका उद्देश्य भारत की आर्थिक वृद्धि को गति देना, नागरिकों को सशक्त बनाना और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।

बजट अनुमान (एक नज़र में) 

  • गैर-ऋण प्राप्तियां: ₹36.5 लाख करोड़
  • कुल व्यय: ₹53.5 लाख करोड़
  • केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियां: ₹28.7 लाख करोड़
  • सकल बाजार उधारी: ₹17.2 लाख करोड़
  • राजकोषीय घाटा: जीडीपी का 4.3% (बजट अनुमान 2026–27)
  • ऋण-से-जीडीपी अनुपात: जीडीपी का 55.6%
  • सार्वजनिक पूंजीगत व्यय: ₹12.2 लाख करोड़

तीन कर्तव्य: विकास की आधारशिला

यह बजट भारत के विकास को दिशा देने वाले तीन प्रमुख सिद्धांतों (कर्तव्यों) पर आधारित है:

  • पहला कर्तव्य: उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर तथा वैश्विक परिस्थितियों के प्रति लचीलापन विकसित कर आर्थिक विकास को तेज़ और सतत बनाना।
  • दूसरा कर्तव्य: लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उन्हें भारत की समृद्धि का सशक्त भागीदार बनने की क्षमता प्रदान करना।
  • तीसरा कर्तव्य: “सबका साथ, सबका विकास” के अनुरूप यह सुनिश्चित करना कि हर परिवार, समुदाय, क्षेत्र और क्षेत्रक (सेक्टर) को संसाधनों और अवसरों तक समान एवं न्यायसंगत पहुंच मिले।

पहला कर्तव्य: आर्थिक विकास को तेज़ करना

1. रणनीतिक क्षेत्रों में विनिर्माण का विस्तार

बायोफार्मा शक्ति (Biopharma SHAKTI) पहल

  • भारत को वैश्विक बायोफार्मा विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए 5 वर्षों में ₹10,000 करोड़ का परिव्यय
  • तीन नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NIPER) की स्थापना

सात मौजूदा NIPER का उन्नयन

  • 1,000 से अधिक मान्यता प्राप्त क्लीनिकल ट्रायल साइट्स का नेटवर्क तैयार किया जाएगा
  • इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
  • उपकरण, सामग्री उत्पादन और पूर्ण-स्टैक भारतीय बौद्धिक संपदा (IP) के डिज़ाइन पर फोकस
  • कुशल कार्यबल के विकास के लिए उद्योग-नेतृत्व वाले अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र

अन्य विनिर्माण पहलें

  • इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का परिव्यय बढ़ाकर ₹40,000 करोड़
  • ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में समर्पित रेयर अर्थ कॉरिडोर
  • चुनौती मार्ग के माध्यम से तीन समर्पित केमिकल पार्क
  • सटीक विनिर्माण के लिए CPSEs द्वारा दो स्थानों पर हाई-टेक टूल रूम
  • निर्माण और अवसंरचना उपकरणों के संवर्धन हेतु विशेष योजना
  • 5 वर्षों में ₹10,000 करोड़ से अधिक के आवंटन के साथ कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग स्कीम

एकीकृत वस्त्र क्षेत्र कार्यक्रम

  • प्राकृतिक और मानव-निर्मित रेशों में आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना
  • पारंपरिक क्लस्टरों के आधुनिकीकरण हेतु वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना
  • मूल्य संवर्धन बढ़ाने के लिए मेगा टेक्सटाइल पार्क
  • खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल

2. विरासत औद्योगिक क्षेत्रों का पुनरुद्धार

  • लागत प्रतिस्पर्धात्मकता और दक्षता बढ़ाने के लिए अवसंरचना और प्रौद्योगिकी उन्नयन के माध्यम से 200 विरासत औद्योगिक क्लस्टरों को पुनर्जीवित करने की योजना

3. “चैंपियन एसएमई” का निर्माण और सूक्ष्म उद्यमों को समर्थन

  • भविष्य के चैंपियन तैयार करने के लिए ₹10,000 करोड़ का एसएमई ग्रोथ फंड
  • आत्मनिर्भर भारत फंड में अतिरिक्त ₹2,000 करोड़ की पूंजी
  • टियर-II और टियर-III शहरों में ‘कॉरपोरेट मित्र’ तैयार करने हेतु पेशेवर संस्थान (ICAI, ICSI, ICMAI) द्वारा अल्पकालिक पाठ्यक्रमों की रूपरेखा

4. सशक्त अवसंरचना को बढ़ावा

पूंजीगत व्यय

  • वित्त वर्ष 2026–27 में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़
  • निजी डेवलपर्स का भरोसा मजबूत करने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड
  • CPSEs की महत्वपूर्ण रियल एस्टेट परिसंपत्तियों के पुनर्चक्रण हेतु REITs

परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स

  • डानकुनी (पूर्व) से सूरत (पश्चिम) को जोड़ने वाले नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर
  • 5 वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग परिचालित
  • मानव संसाधन विकास के लिए प्रशिक्षण संस्थानों को क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करना
  • अंतर्देशीय जलमार्गों के लिए वाराणसी और पटना में शिप रिपेयर इकोसिस्टम
  • अंतर्देशीय जलमार्ग और तटीय शिपिंग की हिस्सेदारी 6% से बढ़ाकर 2047 तक 12% करने हेतु कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम
  • सीप्लेन निर्माण और संचालन को प्रोत्साहन देने के लिए सीप्लेन VGF स्कीम

5. दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना

  • कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज (CCUS) तकनीकों के लिए 5 वर्षों में ₹20,000 करोड़ का परिव्यय

6. सिटी इकोनॉमिक रीजन का विकास

  • चैलेंज मोड के माध्यम से प्रत्येक सिटी इकोनॉमिक रीजन के लिए 5 वर्षों में ₹5,000 करोड़ का आवंटन

विकास को जोड़ने वाले सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर:

  • मुंबई–पुणे
  • पुणे–हैदराबाद
  • हैदराबाद–बेंगलुरु
  • हैदराबाद–चेन्नई
  • चेन्नई–बेंगलुरु
  • दिल्ली–वाराणसी
  • वाराणसी–सिलीगुड़ी

वित्तीय क्षेत्र सुधार

  • विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप बैंकिंग क्षेत्र की समीक्षा और संरेखण हेतु बैंकिंग पर उच्च-स्तरीय समिति
  • पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन का पुनर्गठन
  • विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण साधन) नियमों की व्यापक समीक्षा
  • ₹1,000 करोड़ से अधिक के एकल निर्गम पर नगरपालिका बॉन्ड के लिए ₹100 करोड़ का प्रोत्साहन

दूसरा कर्तव्य: आकांक्षाओं की पूर्ति और क्षमता निर्माण

विकसित भारत के लिए पेशेवरों का निर्माण

एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स

  • मौजूदा एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल (AHP) संस्थानों का उन्नयन
  • निजी और सरकारी क्षेत्रों में नए AHP संस्थानों की स्थापना
  • लक्ष्य: 5 वर्षों में 1,00,000 से अधिक अतिरिक्त एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स तैयार करना

मेडिकल हब्स और आयुष (AYUSH)

  • भारत को मेडिकल टूरिज़्म का केंद्र बनाने के लिए पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब्स
  • तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान

पशुपालन

  • 20,000 से अधिक पशु चिकित्सक पेशेवरों की संख्या में वृद्धि
  • वेटरनरी कॉलेजों, अस्पतालों, डायग्नोस्टिक लैब्स और ब्रीडिंग सुविधाओं के लिए ऋण-आधारित पूंजी सब्सिडी योजना

ऑरेंज इकोनॉमी (क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज)

  • इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज, मुंबई द्वारा 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों में
  • विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) के कंटेंट क्रिएटर लैब्स की स्थापना

शिक्षा

  • प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर में चैलेंज रूट के माध्यम से पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप
  • हर ज़िले में एक बालिका छात्रावास (VGF/पूंजीगत सहायता के माध्यम से)
  • ‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज़’ पर उच्च-स्तरीय स्थायी समिति का गठन

पर्यटन और विरासत

  • नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट को उन्नत कर नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी बनाया जाएगा
  • 20 पर्यटन स्थलों पर 10,000 गाइड्स के कौशल उन्नयन के लिए पायलट योजना
  • सांस्कृतिक और विरासत स्थलों के दस्तावेज़ीकरण हेतु नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड
  • लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, आदिचनल्लूर, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस सहित
  • 15 पुरातात्विक स्थलों को सांस्कृतिक गंतव्यों के रूप में विकसित किया जाएगा

खेल

  • अगले एक दशक में खेल क्षेत्र को रूपांतरित करने के लिए खेलो इंडिया मिशन

तीसरा कर्तव्य: समावेशी विकास (सबका साथ, सबका विकास)

1. किसानों की आय में वृद्धि

  • 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास
  • तटीय क्षेत्रों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी उच्च मूल्य कृषि को समर्थन
  • उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए नारियल संवर्धन योजना
  • भारत-VISTAAR: AgriStack पोर्टलों को ICAR की कृषि पद्धतियों से जोड़ने वाला बहुभाषी एआई टूल

2. दिव्यांगजनों का सशक्तिकरण

  • आईटी, AVGC, हॉस्पिटैलिटी और फूड एंड बेवरेज क्षेत्रों में कार्य-उन्मुख भूमिकाएं प्रदान करने वाली दिव्यांगजन कौशल योजना

3. मानसिक स्वास्थ्य एवं ट्रॉमा केयर के प्रति प्रतिबद्धता

  • उत्तर भारत में NIMHANS-2 की स्थापना
  • रांची और तेज़पुर स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को क्षेत्रीय शीर्ष (एपेक्स) संस्थानों के रूप में उन्नयन

4. पूर्वोदय राज्यों और उत्तर-पूर्व क्षेत्र पर विशेष फोकस

  • दुर्गापुर में नोड के साथ एकीकृत ईस्ट कोस्ट औद्योगिक कॉरिडोर
  • पूर्वोदय राज्यों में पांच पर्यटन गंतव्यों का विकास
  • 4,000 ई-बसों की तैनाती
  • अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिज़ोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट का विकास

5. वित्त आयोग अनुदान

  • 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार वित्त वर्ष 2026–27 के लिए राज्यों को ₹1.4 लाख करोड़ का प्रावधान

प्रत्यक्ष कर सुधार (Direct Tax Reforms)

नया आयकर अधिनियम

  • नया आयकर अधिनियम, 2025 अप्रैल 2026 से लागू होगा
  • आम नागरिकों के लिए आसान अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु सरलीकृत और पुनः डिज़ाइन किए गए फॉर्म

ईज़ ऑफ लिविंग से जुड़े उपाय

  • मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) द्वारा दिया गया ब्याज आयकर से मुक्त
  • विदेश यात्रा पैकेज पर TCS दर घटाकर 2% (पहले 2–20%)
  • शिक्षा और चिकित्सा हेतु LRS के अंतर्गत रेमिटेंस पर TCS दर 2% (पहले 5%)
  • मैनपावर सप्लाई के लिए सरलीकृत TDS प्रावधान
  • फॉर्म 15G/15H के लिए डिपॉजिटरी के साथ सिंगल विंडो फाइलिंग
  • आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च, नाममात्र शुल्क के साथ
  • क्रमिक (स्टैगरड) रिटर्न फाइलिंग टाइमलाइन
  • छोटे करदाताओं के लिए 6 माह की विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण योजना

दंड एवं अभियोजन का युक्तिकरण

  • आयकर मूल्यांकन और दंड कार्यवाही का एकीकरण
  • पुनर्मूल्यांकन के बाद भी रिटर्न अपडेट करने की अनुमति (10% अतिरिक्त कर के साथ)
  • अतिरिक्त कर भुगतान पर आय की गलत रिपोर्टिंग से प्रतिरक्षा
  • खातों की प्रस्तुति न करने और वस्तु रूप में TDS न देने का अपराधीकरण समाप्त
  • ₹20 लाख से कम की विदेशी संपत्ति के गैर-प्रकटीकरण पर अभियोजन से प्रतिरक्षा (1 अक्टूबर 2024 से पूर्व प्रभावी)

आईटी क्षेत्र के लिए समर्थन

  • सॉफ्टवेयर विकास, आईटी-सक्षम सेवाएं और अनुबंध R&D सेवाएं एकीकृत कर
    “सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं” श्रेणी में शामिल; 15.5% सेफ हार्बर मार्जिन
  • सेफ हार्बर सीमा ₹300 करोड़ से बढ़ाकर ₹2,000 करोड़
  • स्वचालित प्रक्रिया के माध्यम से 5 वर्षों तक सेफ हार्बर की निरंतरता
  • एकतरफा एडवांस्ड प्राइसिंग एग्रीमेंट (APA) प्रक्रिया को 2 वर्षों में त्वरित रूप से पूरा करना

वैश्विक व्यवसाय और निवेश को आकर्षित करना

  • भारतीय डेटा सेंटर का उपयोग करने वाली विदेशी क्लाउड सेवा कंपनियों को 2047 तक कर अवकाश
  • संबंधित इकाई डेटा सेंटर सेवाओं के लिए 15% सेफ हार्बर
  • बॉन्डेड वेयरहाउस में अनिवासी घटक वेयरहाउसिंग पर 2% सेफ हार्बर
  • टोल मैन्युफैक्चरर्स को पूंजीगत वस्तुएं प्रदान करने वाले अनिवासियों को 5 वर्ष की कर छूट
  • अनिवासी विशेषज्ञों की वैश्विक आय पर 5 वर्ष की कर छूट
  • अनुमानित कर का भुगतान करने वाले अनिवासियों के लिए MAT से छूट

सहकारी संस्थाएं

  • पशु आहार और कपास बीज की आपूर्ति करने वाली सहकारी समितियों के लिए कटौती की अवधि बढ़ाई गई
  • नए कर व्यवस्था में अंतर-सहकारी लाभांश आय पर कटौती
  • अधिसूचित राष्ट्रीय सहकारी संघों के लिए 3 वर्ष की लाभांश कर छूट

अन्य प्रत्यक्ष कर प्रस्ताव

  • शेयर बायबैक पर कराधान सभी शेयरधारकों के लिए पूंजीगत लाभ के रूप में; प्रवर्तकों के लिए अतिरिक्त कर (कॉरपोरेट 22%, गैर-कॉरपोरेट 30%)
  • शराब, स्क्रैप, खनिज (2%) और तेंदू पत्ता (2%) पर TCS का युक्तिकरण
  • फ्यूचर्स पर STT बढ़ाकर 0.05% (पहले 0.02%)
  • ऑप्शंस पर STT बढ़ाकर 0.15% (पहले 0.1–0.125%)
  • MAT को 14% (पहले 15%) पर अंतिम कर बनाया गया; 1 अप्रैल 2026 से आगे अतिरिक्त क्रेडिट संचय नहीं होगा

अप्रत्यक्ष कर सुधार (Indirect Tax Reforms)

शुल्क सरलीकरण (टैरिफ सिंप्लीफिकेशन)

समुद्री, चमड़ा और वस्त्र उत्पाद

  • सी-फूड प्रोसेसिंग इनपुट्स के लिए शुल्क-मुक्त आयात सीमा FOB मूल्य के 1% से बढ़ाकर 3%
  • चमड़ा/सिंथेटिक फुटवियर के निर्यात हेतु शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति

ऊर्जा संक्रमण और सुरक्षा

  • लिथियम-आयन सेल निर्माण के लिए मूल सीमा शुल्क (BCD) में छूट की अवधि बढ़ाई गई
  • सोलर ग्लास निर्माण हेतु सोडियम एंटीमॉनेट पर शुल्क छूट

परमाणु ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज

  • परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के आयात पर मौजूदा छूट 2035 तक बढ़ाई गई
  • महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण के लिए पूंजीगत वस्तुओं पर शुल्क छूट

बायोगैस और विमानन

  • बायोगैस-मिश्रित CNG में बायोगैस के मूल्य को केंद्रीय उत्पाद शुल्क से बाहर किया गया
  • नागरिक, प्रशिक्षण विमान और रक्षा क्षेत्र के विमान पुर्ज़ों पर मूल सीमा शुल्क से छूट

इलेक्ट्रॉनिक्स

  • माइक्रोवेव ओवन के कुछ घटकों पर शुल्क छूट

विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ)

  • पात्र विनिर्माण इकाइयों द्वारा DTA बिक्री पर एकमुश्त रियायती शुल्क दरें

ईज़ ऑफ लिविंग (कस्टम्स)

  • व्यक्तिगत उपयोग के लिए शुल्कयोग्य वस्तुओं पर टैरिफ दर 20% से घटाकर 10%
  • 17 दवाओं/औषधियों को मूल सीमा शुल्क से छूट
  • 7 दुर्लभ बीमारियों के लिए दवाओं/खाद्य पदार्थों का व्यक्तिगत शुल्क-मुक्त आयात
  • अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान संशोधित बैगेज क्लीयरेंस प्रावधान

कस्टम्स प्रक्रिया का सरलीकरण

विश्वास-आधारित प्रणालियां

  • AEO टियर-2 और टियर-3 के लिए ड्यूटी डिफरल अवधि 15 से बढ़ाकर 30 दिन
  • एडवांस रूलिंग की वैधता 3 से बढ़ाकर 5 वर्ष
  • क्लीयरेंस पूर्ण करने हेतु माल आगमन की स्वतः सूचना
  • वेयरहाउस ढांचे को ऑपरेटर-केंद्रित प्रणाली में परिवर्तित, स्व-घोषणाओं के साथ

ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस

  • वित्त वर्ष के अंत तक कार्गो क्लीयरेंस के लिए सिंगल डिजिटल विंडो
  • अप्रैल 2026 तक खाद्य, दवा और वन्यजीव उत्पादों की क्लीयरेंस प्रक्रिया चालू
  • अनुपालन-मुक्त वस्तुओं के लिए तत्काल कस्टम्स क्लीयरेंस
  • कस्टम्स इंटीग्रेटेड सिस्टम (CIS) का 2 वर्षों में कार्यान्वयन
  • कंटेनर निरीक्षण हेतु AI-आधारित नॉन-इंट्रूसिव स्कैनिंग का विस्तार

नए निर्यात अवसर

  • विशेष आर्थिक क्षेत्र/उच्च समुद्र में मछली पकड़ना शुल्क-मुक्त; विदेशी बंदरगाह पर लैंडिंग को निर्यात माना जाएगा
  • कूरियर निर्यात पर ₹10 लाख मूल्य सीमा पूरी तरह समाप्त

विवाद निपटान

  • ईमानदार करदाता दंड के स्थान पर अतिरिक्त राशि का भुगतान कर विवाद निपटा सकेंगे

ग्रैमी अवार्ड्स 2026: विजेताओं की पूरी सूची

ग्रैमी अवॉर्ड्स 2026 ने एक बार फिर संगीत की उत्कृष्टता, रचनात्मकता और सांस्कृतिक प्रभाव को वैश्विक मंच पर उजागर किया। भारी उत्साह के बीच आयोजित इस साल के समारोह में चार्ट-टॉपिंग हिट्स, अलग-अलग शैलियों को परिभाषित करने वाले एल्बम और उभरते कलाकारों का जश्न मनाया गया। पॉप और रैप से लेकर कंट्री और लैटिन म्यूज़िक तक, विजेताओं की सूची में व्यावसायिक सफलता के साथ-साथ कलात्मक नवाचार की भी झलक देखने को मिली। बिली आयलिश, लेडी गागा और केंड्रिक लैमर जैसे बड़े नामों ने उभरते सितारों के साथ मंच साझा किया, जिससे ग्रैमी 2026 प्रभुत्व और खोज—दोनों का यादगार संगम बन गया।

इस साल के विनर्स की पूरी लिस्ट जानने से पहले इस साल के ग्रैमी अवॉर्ड्स के हॉट कंटेंस्टेंट्स के बारे में जान लीजिए जिन्होंने सबसे ज्यादा कैटेगरी में नॉमिनेशन हासिल किया है। 2026 के ग्रैमी में सबसे ज्यादा नॉमिनेशन हासिल कर केंड्रिक लैमर इस रेस में सबसे आगे नजर आ रहे हैं। उन्हें कुल 9 कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला है, जो उनके प्रभावशाली म्यूजिक और लगातार बदलते आर्टिस्टिक एक्सप्रेशन को दर्शाता है।

68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स की मुख्य झलकियां

2026 के ग्रैमी अवॉर्ड्स में विभिन्न शैलियों के दिग्गज और उभरते कलाकारों—दोनों का जश्न मनाया गया। लगभग सात दशकों से ये पुरस्कार संगीत की उत्कृष्टता को सम्मानित करते आ रहे हैं और इससे पहले बेयोंसे, एमिनेम और स्टीवी वंडर जैसे महान कलाकारों को पहचान दे चुके हैं। इस साल भी स्थापित सुपरस्टार्स के साथ-साथ नए और सीमाओं को तोड़ने वाले कलाकारों को खास मंच मिला। समारोह में संगीत शैलियों की विविधता, वैश्विक भागीदारी और श्रोताओं के बदलते स्वाद की झलक साफ दिखाई दी, जिसने ग्रैमी अवॉर्ड्स को अंतरराष्ट्रीय संगीत परिदृश्य का सशक्त प्रतिबिंब साबित किया।

विनर्स की पूरी लिस्ट-

  • बेस्ट पॉप वोकल एल्बम: लेडी गागा – मेहेम
  • बेस्ट ऑडियो बुक, नैरेशन और स्टोरीटेलिंग: दलाई लामा
  • बेस्ट पॉप सोलो परफॉर्मेंस: सबरीना कारपेंटर – मैनचाइल्ड
  • बेस्ट पॉप डुओ/ग्रुप परफॉर्मेंस: सिंथिया एरिवो और एरियाना ग्रांडे – डिफाइंग ग्रैविटी
  • बेस्ट डांस/इलेक्ट्रॉनिक एल्बम: एफकेए ट्विग्स – ईयूएसईएक्सयूए
  • बेस्ट डांस पॉप रिकॉर्डिंग: लेडी गागा – अब्राकाडाब्रा
  • एल्बम ऑफ द ईयर: बैड बनी – डेबी तिरार मास फोटोस
  • रिकॉर्ड ऑफ द ईयर: केंड्रिक लैमर और एसजेडए – लूथर
  • सॉन्ग ऑफ द ईयर: लेडी गागा – अब्राकाडाब्रा
  • बेस्ट न्यू आर्टिस्ट: ओलिविया डीन
  • बेस्ट मेलोडिक रैप परफॉर्मेंस: केंड्रिक लैमर और एसजेडए – लूथर
  • बेस्ट आरएंडबी परफॉर्मेंस: केहलानी – आफ्टर आवर्स
  • बेस्ट आरएंडबी एल्बम: लियोन थॉमस – मट
  • बेस्ट सॉन्ग रिटन फॉर विजुअल मीडिया: गोल्डन फ्रॉम केपॉप डेमन हंटर्स
  • बेस्ट म्यूजिक फिल्म: स्टीवन स्पीलबर्ग – म्यूजिक बाय जॉन विलियम्स
  • बेस्ट अल्टरनेटिव म्यूजिक एल्बम: टायलर, द क्रिएटर – डोंट टैप द ग्लास
  • बेस्ट रॉक एल्बम: लिंकिन पार्क – फ्रॉम जीरो
  • बेस्ट रॉक परफॉर्मेंस: यंगब्लड – चेंजेस (लाइव फ्रॉम विला पार्क)
  • बेस्ट रैप एल्बम: केंड्रिक लैमर – जीएनएक्स
  • बेस्ट रैप परफॉर्मेंस: डोइची – एंग्जायटी

रेलवे बजट 2026: भारतीय रेलवे को बदलने के लिए रिकॉर्ड ₹2.93 लाख करोड़ का निवेश

केंद्रीय बजट 2026-27 में भारतीय रेलवे को अब तक का सबसे अधिक वित्तीय समर्थन मिला है। बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रेल अवसंरचना के लिए रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय की घोषणा की, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि रेलवे भारत की विकास रणनीति का एक प्रमुख स्तंभ बना रहेगा। इस बजट में उच्च गति रेल कॉरिडोर, नेटवर्क विस्तार, क्षमता वृद्धि, सुरक्षा सुधार और आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य केवल तेज़ ट्रेनों तक सीमित नहीं है, बल्कि एक सुरक्षित, सक्षम और आधुनिक रेलवे प्रणाली विकसित करना है, जो देश की आर्थिक और सामाजिक जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर सके।

रिकॉर्ड आवंटन की व्याख्या: पूंजीगत व्यय बनाम कुल परिव्यय

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रेल मंत्रालय को ₹2,93,030 करोड़ का पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) आवंटित किया गया है। यह राशि नई रेल लाइनों के निर्माण, ट्रैक दोहरीकरण, रोलिंग स्टॉक और स्टेशन पुनर्विकास जैसी दीर्घकालिक परिसंपत्तियों के सृजन के लिए निर्धारित है। वहीं, पूंजीगत और राजस्व व्यय दोनों को मिलाकर कुल परिव्यय ₹2,78,030 करोड़ रखा गया है। इतना बड़ा आवंटन इस बात को रेखांकित करता है कि सरकार रेल-आधारित अवसंरचना विकास और लॉजिस्टिक्स दक्षता को लगातार सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा

रेलवे बजट 2026 की एक प्रमुख घोषणा देशभर में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की है। इन कॉरिडोरों का उद्देश्य प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय को काफी कम करना और क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देना है। प्रस्तावित मार्गों में मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–बेंगलुरु, हैदराबाद–चेन्नई, चेन्नई–बेंगलुरु, दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी शामिल हैं। ये कॉरिडोर मौजूदा रेल अवसंरचना को पूरक बनाएंगे और तेज़, स्वच्छ तथा टिकाऊ परिवहन के लिए भारत के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को मजबूती प्रदान करेंगे।

पूंजीगत व्यय के प्रमुख फोकस क्षेत्र

बढ़े हुए बजटीय समर्थन को कई प्राथमिक क्षेत्रों में लगाया जाएगा। इनमें नई रेल लाइनों का निर्माण, मौजूदा मार्गों का दोहरीकरण और गेज परिवर्तन, यातायात सुविधाओं का विकास तथा आधुनिक रोलिंग स्टॉक की खरीद शामिल है। इसके अलावा सिग्नलिंग प्रणाली के उन्नयन, स्टेशन आधुनिकीकरण और उच्च-घनत्व मार्गों पर क्षमता वृद्धि पर भी निवेश किया जाएगा। इन सभी उपायों का उद्देश्य समयपालन, सुरक्षा और यात्रियों की सुविधा में सुधार करना है, साथ ही माल परिवहन को भी अधिक कुशल बनाना है।

 

Union Budget 2026: नया इनकम टैक्स कानून 1 अप्रैल 2026 से होगा लागू

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 01 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट 2026-27 पेश कर दिया है। वित्त मंत्री सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 में बताया कि जुलाई 2025 में अधिसूचित किया गया नया आयकर कानून 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। इस साल के बजट में व्यक्तिगत आयकर (पर्सनल इनकम टैक्स) को खास प्राथमिकता दी गई है। टैक्सपेयर्स की उम्मीदों को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं, जिनका उद्देश्य आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देना और करदाताओं को राहत प्रदान करना है।

इसके अतिरिक्त वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2027 के बजट में छोटे करदाताओं के लिए नियम-आधारित स्वचालित प्रक्रिया (ऑटोमेटेड सिस्टम) लागू करने का भी प्रस्ताव रखा। वित्त मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि पिछले साल के केंद्रीय बजट 2025-26 में सरकार ने व्यक्तिगत आयकर व्यवस्था में बड़े बदलाव किए थे। इसका मकसद वेतनभोगी वर्ग को राहत देना और लोगों की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ाकर खपत और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना था।

नया आयकर अधिनियम, 2025: अप्रैल 2026 से क्या बदलेगा

आयकर अधिनियम, 2025 को एक सरल और नागरिक-अनुकूल कानून के रूप में तैयार किया गया है। बजट के अनुसार, नए आयकर नियम और फॉर्म काफी पहले अधिसूचित कर दिए जाएंगे, ताकि करदाताओं को बदलावों के अनुसार खुद को ढालने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। कर रिटर्न के फॉर्म को स्पष्टता और सरलता के साथ नए सिरे से डिज़ाइन किया गया है, जिससे आम नागरिकों और छोटे करदाताओं के लिए अनुपालन आसान हो जाएगा। यह सुधार सरकार की पारदर्शिता, समझने में आसानी और लंबे समय से चली आ रही कर व्यवस्था की जटिलताओं को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम को दर्शाता है।

कर प्रशासन सुधार और लेखा प्रणाली में बदलाव

कर प्रशासन को अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए बजट में कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) की एक संयुक्त समिति गठित करने का प्रस्ताव किया गया है। यह समिति आय गणना एवं प्रकटीकरण मानकों (ICDS) को भारतीय लेखा मानकों (IndAS) में एकीकृत करेगी। इसके परिणामस्वरूप कर वर्ष 2027-28 से ICDS के अंतर्गत अलग से लेखा-पालन की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। यह कदम दोहराव को कम करेगा, अनुपालन लागत घटाएगा और कर व्यवस्था को कंपनियों द्वारा अपनाए जाने वाले लेखा मानकों के और अधिक अनुरूप बनाएगा।

शेयर बायबैक पर कर व्यवस्था: नियमों में बड़ा बदलाव

शेयर बायबैक के जरिए कर आर्बिट्राज के दुरुपयोग को रोकने के लिए बजट में एक महत्वपूर्ण सुधार प्रस्तावित किया गया है। इसके तहत अब सभी शेयरधारकों के लिए, उनकी श्रेणी की परवाह किए बिना, शेयर बायबैक से होने वाली आय पर पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) के रूप में कर लगाया जाएगा। प्रमोटरों द्वारा दुरुपयोग को हतोत्साहित करने के लिए अतिरिक्त बायबैक कर भी लागू किया जाएगा। इसके परिणामस्वरूप कॉर्पोरेट प्रमोटरों पर प्रभावी कर दर लगभग 22% और गैर-कॉर्पोरेट प्रमोटरों पर लगभग 30% होगी। इस बदलाव का उद्देश्य कर निष्पक्षता सुनिश्चित करना और बायबैक के माध्यम से लाभांश कर से बचने की प्रवृत्ति को रोकना है।

टीसीएस युक्तिकरण: प्रमुख लेन-देन को राहत

बजट में नकदी प्रवाह पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए स्रोत पर कर संग्रह (TCS) की दरों का युक्तिकरण किया गया है। इसके तहत स्क्रैप, खनिज और मादक शराब पर TCS की दर 2% निर्धारित की गई है, जबकि तेंदू पत्तों पर TCS को 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है। महत्वपूर्ण रूप से, उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS) के अंतर्गत ₹10 लाख से अधिक की विदेश प्रेषण राशि पर शिक्षा और चिकित्सा उपचार के लिए TCS को घटाकर 2% किया गया है, जबकि अन्य उद्देश्यों के लिए यह दर 20% बनी रहेगी। इससे विदेश में आवश्यक जरूरतों पर खर्च करने वाले परिवारों को सीधी राहत मिलेगी।

फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर एसटीटी में बढ़ोतरी

डेरिवेटिव्स बाजार में अत्यधिक सट्टेबाज़ी को नियंत्रित करने के लिए बजट में प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। इसके तहत फ्यूचर्स पर STT की दर 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दी गई है। वहीं, ऑप्शंस के मामले में प्रीमियम और एक्सरसाइज़ पर STT को पहले की दरों से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। इस कदम का उद्देश्य बाजार में स्थिरता बढ़ाना, अनावश्यक सट्टेबाज़ी को हतोत्साहित करना और निवेशकों का भरोसा बनाए रखना है।

एमएटी में सुधार: अप्रैल 2026 से अंतिम कर व्यवस्था

बजट में न्यूनतम वैकल्पिक कर (Minimum Alternate Tax – MAT) से जुड़ा एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। 1 अप्रैल 2026 से MAT को अंतिम कर बना दिया जाएगा, जिससे आगे MAT क्रेडिट का संचय बंद हो जाएगा। इसके साथ ही MAT की दर 15% से घटाकर 14% कर दी गई है।

31 मार्च 2026 तक जमा किया गया मौजूदा MAT क्रेडिट आगे भी समायोजन (सेट-ऑफ) के लिए उपलब्ध रहेगा, लेकिन केवल नई कर व्यवस्था के तहत और वह भी कर देयता के अधिकतम एक-चौथाई तक ही। इस प्रावधान का उद्देश्य कंपनियों को सरल और पारदर्शी नई कर व्यवस्था अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

मुख्य परिभाषाएँ

  • न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT): आयकर अधिनियम के तहत एक प्रावधान, जिसके अनुसार अधिक बुक प्रॉफिट कमाने वाली कंपनियों को न्यूनतम स्तर का कर भुगतान करना अनिवार्य होता है, भले ही वे विभिन्न छूटों के कारण सामान्य कर कम देती हों।
  • प्रतिभूति लेनदेन कर (Securities Transaction Tax – STT): भारत में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध प्रतिभूतियों (जैसे शेयर, फ्यूचर्स और ऑप्शंस) की खरीद-बिक्री पर लगाया जाने वाला प्रत्यक्ष कर।
  • स्रोत पर संकलित कर (Tax Collected at Source – TCS): निर्धारित वस्तुओं या लेनदेन की बिक्री के समय विक्रेता द्वारा खरीदार से वसूला जाने वाला कर, जिसे बाद में सरकार के खाते में जमा किया जाता है।

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