राशिद खान ने रचा इतिहास, टी20 क्रिकेट में ऐसा करने वाले बने पहले गेंदबाज

राशिद खान (Rashid Khan) ने T20 क्रिकेट में एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है जो आज तक दुनिया का कोई भी गेंदबाज नहीं कर पाया। दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए टी20 वर्ल्ड कप 2026 (T20 World Cup 2026) के ग्रुप मैच में उन्होंने यह रिकॉर्ड बनाया। UAE के खिलाफ खेलते हुए राशिद खान T20 फॉर्मेट में 700 विकेट लेने वाले दुनिया के पहले गेंदबाज बन गए हैं। उनकी इस उपलब्धि ने क्रिकेट जगत में सबको हैरान कर दिया है क्योंकि उनसे पहले किसी भी गेंदबाज ने इस फॉर्मेट में 700 विकेट का आंकड़ा नहीं छुआ था। राशिद ने अपनी फिरकी के दम पर दुनिया भर के बल्लेबाजों को परेशानी में डाला है और अब वे इस फॉर्मेट के सबसे सफल गेंदबाज हैं।

राशिद ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि यूएई के बल्लेबाज़ मोहम्मद अरफान को आउट करके हासिल की। इससे पहले फरवरी 2025 में उन्होंने Dwayne Bravo (631 विकेट) का रिकॉर्ड तोड़कर टी20 प्रारूप के सबसे सफल विकेट-टेकर का दर्जा हासिल किया था। अब 700 विकेट के आंकड़े के साथ राशिद खान ने टी20 क्रिकेट में एक नया वैश्विक मानक स्थापित कर दिया है। राशिद खान टी20 क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं। इसी के साथ अब वो इस फॉर्मेट में सबसे पहले 700 विकेट हासिल करने वाले गेंदबाज भी बन गए हैं। दुनियाभर में टी20 क्रिकेट खेलते हुए उन्होंने ये मुकाम हासिल किया है।

राशिद खान – 700 टी20 विकेट: एक ऐतिहासिक उपलब्धि

राशिद खान का 700 टी20 विकेट का मील का पत्थर उन्हें विश्व क्रिकेट में शीर्ष स्थान पर अकेले खड़ा करता है।

  • टी20 इतिहास में 700 विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज़
  • 518 मैचों में यह उपलब्धि हासिल
  • Dwayne Bravo के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा
  • फरवरी 2025 में टी20 के सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ बने
  • 432 अलग-अलग बल्लेबाज़ों को आउट किया (टी20 इतिहास में सर्वाधिक)

यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और फ्रेंचाइज़ लीगों में उनकी लंबे समय तक बनी रही बादशाहत को दर्शाती है। सबसे छोटे प्रारूप में अब तक कोई अन्य गेंदबाज़ इस आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया है।

अंतरराष्ट्रीय और T20I रिकॉर्ड

राशिद खान के 700 टी20 विकेट में मजबूत अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन भी शामिल है:

  • 191 T20I विकेट – टी20 अंतरराष्ट्रीय इतिहास में सर्वाधिक
  • कुल 432 में से 130 शिकार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में
  • 200 T20I विकेट के आंकड़े के करीब
  • T20I में 11 बार चार विकेट (रिकॉर्ड)
  • टी20 में कुल 22 चार-विकेट हॉल (अब तक सबसे ज्यादा)

ये आंकड़े दर्शाते हैं कि उनकी सफलता केवल लीग क्रिकेट तक सीमित नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी उनका दबदबा कायम है।

हैट्रिक, कप्तानी और अनोखे गेंदबाज़ी रिकॉर्ड

राशिद खान के 700 विकेटों में कई दुर्लभ उपलब्धियाँ शामिल हैं:

  • 4 टी20 हैट्रिक (CPL, BBL, IPL और T20I) – रिकॉर्ड
  • कप्तान के रूप में 145 विकेट (टी20 में दूसरे सर्वाधिक)
  • 379 विकेट बोल्ड या LBW (कुल करियर का 54%)
  • 225 बोल्ड – टी20 इतिहास में सबसे अधिक
  • 154 LBW – सर्वाधिक

स्टंप्स पर लगातार आक्रमण करने की उनकी क्षमता इस उपलब्धि को और खास बनाती है। आधे से अधिक विकेट बोल्ड या LBW होना उनकी शुद्ध गेंदबाज़ी कौशल का प्रमाण है।

विभिन्न देशों और लीगों में दबदबा

राशिद खान के 700 टी20 विकेट कई देशों और लीगों में फैले हुए हैं:

  • भारत में 181 विकेट
  • यूएई में 131 विकेट
  • ऑस्ट्रेलिया में 102 विकेट
  • एशिया में कुल 406 विकेट (रिकॉर्ड)
  • 442 फ्रेंचाइज़ विकेट (कुल मिलाकर तीसरे सर्वाधिक)

उन्होंने चार टीमों के लिए 50 से अधिक विकेट लिए हैं:

  • 195 – अफगानिस्तान
  • 98 – एडिलेड स्ट्राइकर्स
  • 93 – सनराइजर्स हैदराबाद
  • 65 – गुजरात टाइटंस

यह उपलब्धि दर्शाती है कि राशिद खान हर परिस्थिति और पिच पर खुद को ढालने में सक्षम हैं। उनके 700 टी20 विकेट आधुनिक क्रिकेट में निरंतरता, कौशल और वैश्विक प्रभुत्व का प्रतीक हैं।

टी20 में माइलस्टोन तक पहुंचने वाले पहले गेंदबाज

टी20 क्रिकेट में प्रमुख विकेट माइलस्टोन (मैचों के आधार पर)

माइलस्टोन (विकेट) गेंदबाज़ लिए गए मैच
50 विकेट नयन दोषी 29
100 विकेट डर्क नैनेस 70
200 विकेट डर्क नैनेस 166
250 विकेट लसिथ मलिंगा 187
300 विकेट ड्वेन ब्रावो 292
400 विकेट ड्वेन ब्रावो 365
500 विकेट ड्वेन ब्रावो 459
600 विकेट ड्वेन ब्रावो 545
700 विकेट राशिद खान 518

14 मिलियन डाउनलोड, 1 मिलियन मोबाइल अपडेट: आधार ऐप की ज़बरदस्त ग्रोथ स्टोरी

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने बताया है कि नए आधार ऐप को लोगों द्वारा तेज़ी से अपनाया जा रहा है और अब तक लगभग 1.4 करोड़ डाउनलोड हो चुके हैं। 28 जनवरी 2026 को राष्ट्र को समर्पित किया गया यह ऐप प्रतिदिन औसतन 1 लाख डाउनलोड दर्ज कर रहा है। एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, 10 लाख से अधिक निवासियों ने आधार ऐप के माध्यम से अपने मोबाइल नंबर अपडेट किए हैं, जो इसकी बढ़ती दैनिक उपयोगिता को दर्शाता है। यह बढ़ती स्वीकृति सुरक्षित, डिजिटल और गोपनीयता-प्रथम आधार सेवाओं के प्रति जनता के बढ़ते विश्वास को प्रतिबिंबित करती है।

आधार ऐप: अगली पीढ़ी का डिजिटल पहचान उपकरण

आधार ऐप एक नेक्स्ट-जेनरेशन मोबाइल एप्लीकेशन है जो Android और iOS प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इसे आधार नंबर होल्डर्स (ANH) को अपनी डिजिटल पहचान रखने और शेयर करने का एक सुरक्षित और आसान तरीका देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • उपस्थिति प्रमाण के लिए फेस वेरिफिकेशन
  • एक-क्लिक बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक
  • ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री देखने की सुविधा
  • आसान साझा करने के लिए QR-आधारित कॉन्टैक्ट कार्ड
  • ई-आधार डाउनलोड

आधार ऐप डेटा न्यूनतमकरण (Data Minimization), सहमति नियंत्रण (Consent Control) और चयनात्मक साझा (Selective Sharing) को बढ़ावा देता है, जिससे गोपनीयता-प्रथम पहचान प्रबंधन सुनिश्चित होता है।

10 लाख मोबाइल अपडेट और बढ़ती उपयोगिता

आधार ऐप के माध्यम से अब तक:

  • 10 लाख मोबाइल नंबर अपडेट
  • 3.57 लाख बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक लेनदेन
  • लगभग 8 लाख ई-आधार डाउनलोड

अब निवासी सीधे ऐप के जरिए अपना पंजीकृत मोबाइल नंबर अपडेट कर सकते हैं, जिससे भौतिक आधार केंद्रों पर निर्भरता कम हुई है। भविष्य के संस्करणों में और भी अपडेट सेवाएँ जोड़ी जाएंगी।

आधार ऐप के वास्तविक उपयोग

आधार ऐप कई व्यावहारिक उपयोगों को समर्थन देता है, जिससे डिजिटल सत्यापन आसान और तेज़ बनता है:

  • OVSE QR स्कैनिंग के माध्यम से होटल चेक-इन
  • आयु सत्यापन (Age Gating)
  • अस्पताल में आगंतुक प्रवेश
  • कार्यक्रमों में प्रवेश सत्यापन
  • गिग वर्कर्स और सेवा साझेदारों का सत्यापन

UIDAI ऑफलाइन सत्यापन पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार कर रहा है, ताकि अधिक संस्थाएँ आधार ऐप की सुविधाओं का उपयोग कर सकें और सेवा वितरण को सहज बना सकें।

“वन फैमिली – वन ऐप” अवधारणा

आधार ऐप की एक अनूठी विशेषता यह है कि एक ही डिवाइस पर अधिकतम पाँच आधार प्रोफाइल प्रबंधित किए जा सकते हैं। इससे परिवार के सदस्य एक ही मोबाइल ऐप के माध्यम से सामूहिक रूप से आधार सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं। यह सुविधा विशेष रूप से बुजुर्गों और बच्चों के लिए लाभकारी है, क्योंकि यह डिजिटल पहचान प्रबंधन को केंद्रीकृत और सरल बनाती है।

भारत की डिजिटल अवसंरचना को सशक्त बनाना

आधार ऐप की तेज़ी से बढ़ती लोकप्रियता UIDAI की तकनीक-आधारित सुशासन (Technology-driven Governance) के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। नियमित अपडेट, उन्नत सुरक्षा परतें और सरल उपयोगकर्ता इंटरफेस इसकी व्यापक स्वीकृति के प्रमुख कारण हैं। सुरक्षित डिजिटल पहचान सत्यापन को बढ़ावा देकर यह ऐप भारत की डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करता है और व्यापक डिजिटल इंडिया दृष्टि का समर्थन करता है।

पृष्ठभूमि: आधार और डिजिटल पहचान

आधार भारत की विशिष्ट डिजिटल पहचान प्रणाली है, जो एक अरब से अधिक निवासियों को कवर करती है। UIDAI द्वारा प्रबंधित यह प्रणाली कल्याणकारी योजनाओं, बैंकिंग, दूरसंचार और अन्य डिजिटल सेवाओं के लिए एक बुनियादी पहचान के रूप में कार्य करती है। समय के साथ आधार में बायोमेट्रिक लॉकिंग और OTP-आधारित प्रमाणीकरण जैसी उन्नत सुरक्षा सुविधाएँ जोड़ी गई हैं।

आधार ऐप का लॉन्च मोबाइल-प्रथम (Mobile-first) और गोपनीयता-केंद्रित पहचान प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत की डिजिटल गवर्नेंस और समावेशी पहुंच की नीति के अनुरूप है।

राजनाथ सिंह ने बीईएल में मिसाइल इंटीग्रेशन फैसिलिटी और एआई पुश का उद्घाटन किया

भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को 16 फरवरी 2026 को बड़ा बढ़ावा मिला, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बेंगलुरु में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) की नई मिसाइल इंटीग्रेशन फैसिलिटी का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने आकाश तीसरी और चौथी रेजिमेंट के कॉम्बैट सिस्टम्स को हरी झंडी दिखाई तथा माउंटेन फायर कंट्रोल रडार का अनावरण किया। साथ ही उन्होंने पुणे में BEL के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उत्कृष्टता केंद्र का दूरस्थ उद्घाटन किया और कंपनी की AI नीति भी औपचारिक रूप से लॉन्च की।

मिसाइल इंटीग्रेशन फैसिलिटी और आकाश रेजिमेंट

नई मिसाइल इंटीग्रेशन सुविधा स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सुविधा मिसाइल प्रणालियों के तेज और प्रभावी एकीकरण में सहायता करेगी। रक्षा मंत्री ने आकाश की तीसरी और चौथी रेजिमेंट के कॉम्बैट सिस्टम्स को रवाना किया। Akash missile system एक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है, जो हवाई खतरों को रोकने के लिए डिजाइन की गई है। नई रेजिमेंटों के शामिल होने से भारत की वायु रक्षा प्रणाली और अधिक सशक्त तथा त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनेगी। इस अवसर पर माउंटेन फायर कंट्रोल रडार का भी अनावरण किया गया।

एआई पहल: उत्कृष्टता केंद्र और BEL की AI नीति

कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत प्रौद्योगिकियों पर विशेष जोर दिया गया। पुणे में AI उत्कृष्टता केंद्र का दूरस्थ उद्घाटन किया गया तथा BEL की AI नीति पेश की गई। AI का उपयोग खतरे की पूर्वानुमान प्रणाली, प्रारंभिक चेतावनी तंत्र, रीयल-टाइम निर्णय लेने और स्वायत्त रक्षा प्रणालियों में किया जाएगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि AI और क्वांटम कंप्यूटिंग आधुनिक युद्ध की प्रकृति को बदल रहे हैं और ये पहलें युद्धक्षेत्र में परिचालन क्षमता तथा आत्मविश्वास को बढ़ाएंगी।

स्वदेशी रक्षा तकनीक और अनुसंधान प्रगति

दौरे के दौरान रक्षा मंत्री को कई उन्नत स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं और अनुसंधान कार्यक्रमों की जानकारी दी गई, जिनमें क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (QRSAM), लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट Mk-II (LCA Mk-II), एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA), प्रोजेक्ट कुशा (MR SAM/LR SAM), काउंटर-ड्रोन सिस्टम और नौसैनिक वेपन कंट्रोल सिस्टम शामिल हैं। उन्होंने नेटवर्क-केंद्रित अभियानों और रीयल-टाइम डेटा शेयरिंग को मजबूत करने में BEL की भूमिका की सराहना की। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्वदेशी वायु रक्षा और एंटी-ड्रोन प्रणालियों का सफल उपयोग भी किया गया था।

विकसित भारत और आत्मनिर्भरता पर जोर

रक्षा मंत्री ने कहा कि वैश्विक प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा में भारत को आगे रहना होगा। उन्होंने BEL, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने, तेज प्रोटोटाइप विकास और बहु-विषयक नवाचार पर बल दिया। उन्होंने आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ा और कहा कि स्वदेशी प्रणालियों से मिली विजय राष्ट्रीय आत्मविश्वास को बढ़ाती है तथा विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाती है।

BEL और आकाश प्रणाली के बारे में

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) रक्षा मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है, जो रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, संचार प्रणाली और मिसाइल तकनीक विकसित करता है। आकाश मिसाइल प्रणाली एक स्वदेशी मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जो कई हवाई लक्ष्यों को एक साथ निशाना बनाने में सक्षम है। यह भारत की वायु रक्षा संरचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता को समर्थन प्रदान करती है।

HAMMER क्या है? वह सटीक हथियार जिसे भारत फ्रांस के साथ मिलकर बनाएगा

भारत और फ्रांस के बीच हैमर मिसाइल का निर्माण भारत में करने के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। हैमर मिसाइल को भारत में संयुक्त रूप से बनाने के लिए दोनों देशों में यह समझौता एआई इम्पैक्ट समिट के लिए भारत आ रहे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के तीन दिवसीय के आधिकारिक यात्रा पर होने की संभावना है। भारत, फ्रांस से 114 अतिरिक्त राफेल खरीदने की भी डील कर रहा है, इस पर वजह से हैमर मिसाइल को भारत में ही बनाने की अहमियत बढ़ गई है। इसके लिए भारत इलेक्ट्रोनिक्स ने फ्रांस की सफ्रान (Safran) के साथ एक साझा कंपनी बनाई है।

हैमर मिसाइल क्या है ?

हैमर मिसाइल का इस्तेमाल राफेल फाइटर जेट में किया जा रहा है। अंग्रेजी में हैमर (HAMMER) का अर्थ है-हाइली ऐजल मॉड्यूलर म्यूनिशन एक्सटेंडेड रेंज या अत्यधिक फुर्तिला मॉड्यूलर युद्ध-सामग्री विस्तारित रेंज। अभी तक यह फ्रांस से आयात किया जा रहा है, लेकिन नए समझौते के साकार होने के बाद यह भारत में ही बनने लगेगी। भारत में बनने से भारतीय वायु सेना को इसकी तेजी से डिलिवरी मिल सकती है और यह मेक इन इंडिया अभियान के लिए भी उपयुक्त है।

हैमर मिसाइल की रेंज क्या है

हैमर मिसाइल की हमले की रेंज मोटे तौर पर 60 से 70 किलो मीटर है। इसे पहाड़ी क्षेत्रों में दुश्मन के ठिकानों को बर्बाद करने के लिए बहुत ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है। दुश्मन के बहुत ही मजबूत सुरक्षा वाले बंकरों के लिए तो यह काल का काम करती है। 2007 में पहली बार पेरिस एयर शो में इसे सार्वजनिक किया गया, तब इसका नाम AASM था। लेकिन, 2011 में इसे हैमर नाम दिया गया। यह मध्यम रेंज की हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है।

राफेल में कितनी हैमर मिसाइल

हैमर मिसाइल हर मौसम में दिन या रात कभी भी दागी जा सकती है। एक राफेल फाइटर जेट में 250 किलो के 6 हैमर मिसाइल लोड की जा सकती हैं, जो 6 अलग-अलग टारगेट को एक ही समय पर निशाना दाग सकती हैं।

अचूक मानी जाती है हैमर मिसाइल

हैमर मिसाइल मारो और भूल जाओ वाली सोच पर काम करती है। मतलब, एक बार टारगेट लॉक होने और मिसाइल लॉन्च हो जाने के बाद इसे आगे गाइड करने की जरूत नहीं। 124 से 1,000 किलो की यह मिसाइल स्थिर और चलते हुए दोनों तरहों के टारगेट को निशाना बना सकती है और इसमें जो एडवांस नैविगेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हुआ है, इसकी वजह से इसके चूकने की आशंका लगभग खत्म हो जाती है।

 

नॉर्वे के जोहान्स क्लाबो ने शानदार रिले गोल्ड जीतकर अपना 9वाँ ओलंपिक पदक हासिल किया

Johannes Høsflot Klæbo ने 15 फरवरी 2026 को Milano Cortina 2026 Winter Olympics में पुरुषों की 4×7.5 किमी रिले स्पर्धा में नॉर्वे को स्वर्ण पदक दिलाते हुए अपना रिकॉर्ड नौवाँ शीतकालीन ओलंपिक पदक जीता। 29 वर्षीय नॉर्वेजियन स्टार इस जीत के साथ शीतकालीन ओलंपिक इतिहास के सबसे सफल (सबसे अधिक पदक जीतने वाले) खिलाड़ी बन गए। इटली के टेसरो में आयोजित रोमांचक मुकाबले में नॉर्वे ने फ्रांस और इटली को पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। क्लेबो ने इस ऐतिहासिक जीत को ओलंपिक रिकॉर्ड तोड़ने और अपनी टीम के साथ जश्न मनाने का “परफेक्ट तरीका” बताया।

Johannes Høsflot Klæbo का 9वाँ शीतकालीन ओलंपिक पदक

Milano Cortina 2026 Winter Olympics में जोहान्स क्लेबो ने अपना नौवाँ शीतकालीन ओलंपिक पदक जीतकर इतिहास रच दिया। यह उपलब्धि तब मिली जब नॉर्वे ने पुरुषों की 4×7.5 किमी रिले स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। इस जीत के साथ क्लेबो ने सभी पुराने रिकॉर्ड पीछे छोड़ते हुए शीतकालीन ओलंपिक इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ी का दर्जा हासिल किया। मिलानो-कोर्तिना 2026 में ही वे अब तक चार स्वर्ण पदक जीत चुके हैं, जो क्रॉस-कंट्री स्कीइंग में उनकी अद्भुत निरंतरता को दर्शाता है। उनका नौवाँ पदक केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि वैश्विक खेल मंच पर नॉर्वे के लिए गर्व का क्षण भी है।

पुरुषों की 4×7.5 किमी रिले में नॉर्वे का स्वर्ण: पूरी रेस का विवरण

  • नॉर्वे की टीम—जोहान्स क्लेबो, एमिल इवर्सेन, मार्टिन लोवस्ट्रोएम नयेनगेट और एइनार हेडेगार्ट—ने शानदार सामूहिक प्रदर्शन करते हुए 1 घंटा 4 मिनट 24.5 सेकंड में रेस पूरी की। नॉर्वे ने रजत पदक विजेता फ्रांस को 22.2 सेकंड से पीछे छोड़ा, जबकि इटली 47.9 सेकंड पीछे रहकर कांस्य पदक पर रहा।
  • यह स्वर्ण इसलिए भी खास था क्योंकि पिछले बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक में नॉर्वे को इसी स्पर्धा में रजत पदक से संतोष करना पड़ा था। क्लेबो ने कहा कि रिले जीतना नॉर्वेजियन स्कीयरों के लिए लगभग “जिम्मेदारी” जैसा है, जो देश की मजबूत क्रॉस-कंट्री परंपरा को दर्शाता है।

बीजिंग रजत के बाद क्लेबो की दमदार वापसी

  • क्लेबो ने मिलानो-कोर्तिना 2026 की इस रिले जीत को भावनात्मक और अविस्मरणीय बताया। बीजिंग में रजत पदक के बाद टीम निराश थी, लेकिन इस बार उन्होंने शानदार वापसी करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया।
  • उनका नौवाँ शीतकालीन ओलंपिक पदक दृढ़ संकल्प और लचीलापन (resilience) का प्रतीक है। क्लेबो ने कहा कि टीम के साथ मिलकर ओलंपिक रिकॉर्ड तोड़ना इस क्षण को और भी विशेष बना देता है। यह जीत शीतकालीन ओलंपिक खेलों में क्रॉस-कंट्री स्कीइंग पर नॉर्वे के वर्चस्व को और मजबूत करती है।

क्या 9 पदकों के बाद भी रुकेंगे नहीं क्लेबो?

  • क्लेबो का सफर यहीं थमने वाला नहीं लगता। वे आगामी पुरुष टीम स्प्रिंट और 50 किमी क्लासिक रेस में भी प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। यदि वे इन स्पर्धाओं में भी स्वर्ण जीतते हैं, तो उनका ओलंपिक रिकॉर्ड और मजबूत हो सकता है।
  • क्लेबो ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनके पास सर्वोच्च स्तर पर फिर से प्रतिस्पर्धा करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा बची है। रिले स्वर्ण ने उनका आत्मविश्वास और बढ़ा दिया है। अब खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों की नजर इस पर टिकी है कि क्या जोहान्स क्लेबो अपने शीतकालीन ओलंपिक पदकों की संख्या को और आगे बढ़ा पाएंगे।

कैबिनेट ने 50% मार्केट फाइनेंस मैंडेट के साथ मेगा अर्बन चैलेंज फंड को मंजूरी दी

शहरी अवसंरचना को नई गति देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹1 लाख करोड़ के अर्बन चैलेंज फंड (UCF) को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य भारत के शहरी विकास मॉडल को पारंपरिक अनुदान-आधारित (Grant-based) व्यवस्था से हटाकर बाज़ार-संबद्ध और सुधार-प्रेरित विकास की ओर ले जाना है। अनिवार्य निजी भागीदारी और प्रतिस्पर्धी परियोजना चयन की व्यवस्था के माध्यम से यह फंड अगले पांच वर्षों में लगभग ₹4 लाख करोड़ के निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य रखता है। यह पहल भारतीय शहरों को आर्थिक विकास के सशक्त केंद्रों में परिवर्तित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

अर्बन चैलेंज फंड (Urban Challenge Fund) क्या है?

अर्बन चैलेंज फंड (UCF) एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसके तहत ₹1 लाख करोड़ की केंद्रीय सहायता (Central Assistance – CA) प्रदान की जाएगी। इस योजना में केंद्र सरकार परियोजना लागत का 25% वहन करेगी, जबकि कम से कम 50% धनराशि बाजार स्रोतों — जैसे म्युनिसिपल बॉन्ड, बैंक ऋण और पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) — से जुटाना अनिवार्य होगा।

यह फंड वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक संचालित होगा, जिसे आवश्यकता पड़ने पर 2033-34 तक बढ़ाया जा सकता है। यह पहल पारंपरिक अनुदान-आधारित मॉडल से हटकर परिणाम-आधारित (Outcome-based) वित्तपोषण, सुशासन सुधार और निजी निवेश को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जिससे भारत की शहरी नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव आएगा।

अर्बन चैलेंज फंड की प्रमुख वित्तीय संरचना

इस योजना के तहत —

  • 25% केंद्रीय सहायता
  • न्यूनतम 50% बाजार वित्तपोषण अनिवार्य
  • शेष राशि राज्य सरकारों, शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) या अन्य स्रोतों से

इस वित्तीय ढांचे के माध्यम से अगले पांच वर्षों में शहरी क्षेत्र में लगभग ₹4 लाख करोड़ के कुल निवेश को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अतिरिक्त, 4,223 शहरों — विशेषकर टियर-II और टियर-III शहरों — की ऋण क्षमता (Creditworthiness) बढ़ाने के लिए ₹5,000 करोड़ का एक विशेष कोष भी स्वीकृत किया गया है। इसका उद्देश्य शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को बैंक योग्य (Bankable) परिसंपत्ति वर्ग के रूप में स्थापित करना है, जिससे वे बाजार से आसानी से संसाधन जुटा सकें।

छोटे शहरों के लिए क्रेडिट गारंटी

छोटे और पहली बार ऋण लेने वाले शहरों को समर्थन देने के लिए मंत्रिमंडल ने ₹5,000 करोड़ की क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी योजना को मंजूरी दी है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • पहले ऋण पर अधिकतम ₹7 करोड़ या 70% तक केंद्रीय गारंटी (जो भी कम हो)
  • दूसरे ऋण पर ₹7 करोड़ या 50% तक गारंटी
  • छोटे शहरों में ₹20–28 करोड़ तक की परियोजनाओं को समर्थन
  • पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी राज्यों और 1 लाख से कम आबादी वाले शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को विशेष लाभ
  • यह व्यवस्था छोटे शहरों की वित्तीय विश्वसनीयता बढ़ाकर उन्हें बाजार से संसाधन जुटाने में सक्षम बनाएगी।

चैलेंज-आधारित परियोजना चयन

Urban Challenge Fund के अंतर्गत परियोजनाओं का चयन प्रतिस्पर्धी “चैलेंज मोड” के माध्यम से किया जाएगा।

चयन मानदंड:

  • परिवर्तनकारी आर्थिक प्रभाव
  • सतत विकास (Sustainability) पर जोर
  • सुधार-उन्मुख दृष्टिकोण
  • स्पष्ट KPI (Key Performance Indicators)
  • तृतीय-पक्ष सत्यापन

फंड जारी करना सुधारों के क्रियान्वयन और तय माइलस्टोन की प्राप्ति से जुड़ा होगा। निगरानी पूरी तरह डिजिटल होगी और यह आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के एकल पोर्टल के माध्यम से संचालित की जाएगी।

UCF के अंतर्गत परियोजना क्षेत्र 

1. विकास केंद्र के रूप में शहर (Cities as Growth Hubs)

शहर क्षेत्रों का विकास, ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट, ग्रीनफील्ड परियोजनाएँ, आर्थिक कॉरिडोर और गतिशीलता अवसंरचना का विस्तार।

2. शहरों का रचनात्मक पुनर्विकास

विरासत क्षेत्रों, केंद्रीय व्यावसायिक जिलों (CBD), ब्राउनफील्ड पुनर्विकास, जलवायु सहनशीलता और भीड़-भाड़ कम करने की रणनीतियाँ, विशेषकर पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में।

3. जल एवं स्वच्छता

जलापूर्ति, सीवरेज, स्टॉर्म वाटर सिस्टम, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और विरासत कचरा निस्तारण का उन्नयन, स्वच्छता लक्ष्यों के अनुरूप।

अर्बन चैलेंज फंड का दायरा

यह फंड कवर करेगा —

  • 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर
  • सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियाँ
  • 1 लाख से अधिक आबादी वाले औद्योगिक शहर
  • छोटे ULBs (क्रेडिट गारंटी समर्थन के माध्यम से)

सिद्धांततः, सभी शहर इस ढांचे के अंतर्गत पात्र माने जाएंगे।

सुधार-आधारित वित्तपोषण मॉडल

वित्तपोषण निम्न सुधारों से जुड़ा होगा —

  • सुशासन और डिजिटल प्रणाली सुधार
  • वित्तीय सुधार और क्रेडिट क्षमता
  • परिचालन दक्षता
  • शहरी नियोजन और ट्रांजिट-ओरिएंटेड विकास
  • परियोजना-विशिष्ट KPI

यह मॉडल जवाबदेही, दक्षता और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करता है।

अर्बन चैलेंज फंड क्यों महत्वपूर्ण है?

अर्बन चैलेंज फंड इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह —

  • निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देता है
  • म्युनिसिपल बॉन्ड बाजार को प्रोत्साहित करता है
  • शहरी स्थानीय निकायों की वित्तीय स्वायत्तता मजबूत करता है
  • जलवायु-सहनशील शहरों के विकास का समर्थन करता है
  • बजट 2025-26 की शहरी दृष्टि के अनुरूप है

इस पहल का उद्देश्य लचीले (Resilient), उत्पादक और समावेशी शहरों का निर्माण करना है, जो भारत की आर्थिक वृद्धि के प्रमुख इंजन बन सकें।

 

गेम-चेंजर प्रोजेक्ट: इस नदी के नीचे रोड-रेल टनल को मंज़ूरी मिली

एक ऐतिहासिक अवसंरचना निर्णय में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की बैठक में असम में 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना की प्रमुख विशेषता 15.79 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब टीबीएम (Tunnel Boring Machine) आधारित अंडरवॉटर रोड-कम-रेल सुरंग है, जो ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनाई जाएगी। कुल परियोजना लंबाई 33.7 किलोमीटर होगी और इसे ₹18,662 करोड़ की लागत से EPC (Engineering, Procurement and Construction) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। यह परियोजना पूर्वोत्तर क्षेत्र में कनेक्टिविटी और सामरिक अवसंरचना को नई मजबूती प्रदान करेगी।

परियोजना अवलोकन: ट्विन-ट्यूब टीबीएम अंडरवॉटर टनल

यह महत्वाकांक्षी परियोजना असम में Gohpur (NH-15) को Numaligarh (NH-715) से जोड़ेगी, जिससे यात्रा दूरी और समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।

प्रमुख विशेषताएँ

  • कुल लंबाई: 33.7 किलोमीटर
  • ब्रह्मपुत्र के नीचे सुरंग की लंबाई: 15.79 किलोमीटर
  • संरचना: 4-लेन (प्रत्येक ट्यूब में 2 लेन)
  • रेलवे अवसंरचना प्रावधान: एक ट्यूब में रेल लाइन की व्यवस्था
  • कार्यान्वयन मॉडल: इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एवं कंस्ट्रक्शन (EPC)
  • कुल लागत: ₹18,662 करोड़

यह परियोजना Brahmaputra नदी के नीचे निर्मित होने वाली भारत की पहली अंडरवॉटर रोड-कम-रेल सुरंग होगी और विश्व की दूसरी ऐसी परियोजना मानी जा रही है। यह पूर्वोत्तर भारत में रणनीतिक और आर्थिक कनेक्टिविटी को नई दिशा प्रदान करेगी।

ट्विन-ट्यूब टीबीएम अंडरवॉटर टनल परियोजना की आवश्यकता क्यों पड़ी?

अभी, नुमालीगढ़ और गोहपुर के बीच की दूरी लगभग 240 km है, और सफ़र में लगभग 6 घंटे लगते हैं। गाड़ियां यहां से गुज़रती हैं,

  • काजीरंगा नेशनल पार्क
  • सिलघाट इलाका (सिलघाट असम के नागांव जिले में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी किनारे पर बसा एक ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण, सुंदर बंदरगाह शहर है।)
  • बिश्वनाथ शहर

यह मार्ग पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, से होकर गुजरता है, जिससे वन्यजीव संरक्षण और यातायात प्रबंधन की चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं।

नई अंडरवॉटर सुरंग के निर्माण से यात्रा समय और दूरी में भारी कमी आएगी तथा निर्बाध और सुरक्षित कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी। साथ ही, यह परियोजना पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को बिना प्रभावित किए आधुनिक परिवहन सुविधा प्रदान करेगी।

स्ट्रेटेजिक और रीजनल महत्व

ब्रह्मपुत्र अंडरवाटर टनल प्रोजेक्ट से इन राज्यों को फायदा होगा,

  • असम
  • अरुणाचल प्रदेश
  • नागालैंड
  • दूसरे नॉर्थ-ईस्ट राज्य

इससे बॉर्डर इलाकों में स्ट्रेटेजिक कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे सिविलियन और डिफेंस लॉजिस्टिक्स दोनों के लिए मोबिलिटी बढ़ेगी। तेज़ माल ढुलाई से लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम होगी और नॉर्थ-ईस्ट में इकोनॉमिक ग्रोथ मज़बूत होगी।

राष्ट्रीय राजमार्ग एवं रेलवे के साथ एकीकरण

यह परियोजना निम्न प्रमुख अवसंरचनाओं के साथ एकीकृत होगी —

  • नेशनल हाईवे 15 (NH-15)
  • नेशनल हाईवे 715 (NH-715)
  • रांगिया–मुकोंगसेलेक रेलवे लाइन (NFR)
  • फुरकाटिंग–मारियानी लूप लाइन (NFR)

यह एकीकरण सड़क और रेल अवसंरचना को एक समेकित कॉरिडोर के अंतर्गत जोड़ते हुए मजबूत मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा।

मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा

यह परियोजना निम्नलिखित केंद्रों को आपस में जोड़ेगी —

  • 11 आर्थिक नोड (Economic Nodes)
  • 03 सामाजिक नोड (Social Nodes)
  • 02 पर्यटन नोड (Tourist Nodes)
  • 08 लॉजिस्टिक नोड (Logistic Nodes)
  • 04 प्रमुख रेलवे स्टेशन
  • 02 हवाई अड्डे
  • 02 अंतर्देशीय जलमार्ग

इस व्यापक एकीकरण से असम पूर्वोत्तर भारत में एक सशक्त लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक हब के रूप में उभरेगा, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास और संपर्कता को नई गति मिलेगी।

आर्थिक और रोजगार प्रभाव

यह महत्वाकांक्षी परियोजना लगभग 80 लाख मानव-दिवस (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष) रोजगार सृजित करने की क्षमता रखती है। इससे निम्न क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा —

  • औद्योगिक विकास
  • पर्यटन क्षेत्र की वृद्धि
  • क्षेत्रीय व्यापार का विस्तार
  • अवसंरचना-आधारित आर्थिक विकास

यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत में संपर्कता को सशक्त बनाने के भारत के व्यापक विज़न के अनुरूप है और असम को आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

ट्विन ट्यूब TBM टनल क्या है?

  • ट्विन ट्यूब टनल दो समानांतर सुरंगों से मिलकर बनती है, जिनका उपयोग सामान्यतः अलग-अलग यातायात प्रवाह (आवागमन की दिशा) के लिए किया जाता है।
  • TBM (Tunnel Boring Machine) एक अत्याधुनिक मशीन है, जिसका उपयोग भूमिगत या पानी के नीचे सुरंग बनाने के लिए अत्यधिक सटीकता और सुरक्षा के साथ किया जाता है।
  • TBM आधारित सुरंग निर्माण से पर्यावरणीय प्रभाव न्यूनतम रहता है और संरचनात्मक सुरक्षा अधिक सुनिश्चित होती है, जिससे दीर्घकालिक और सुरक्षित परिवहन अवसंरचना विकसित की जा सकती है।

भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में बड़ा सुधार, इतने देशों में बिना वीजा एंट्री

Henley & Partners द्वारा जारी हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2026 ने भारतीय यात्रियों के लिए एक चौंकाने वाला अपडेट प्रस्तुत किया है। भले ही भारत के पासपोर्ट की कुल वीज़ा-फ्री पहुंच में हल्की गिरावट दर्ज की गई हो, फिर भी वैश्विक रैंकिंग में यह 10 स्थान ऊपर पहुंच गया। यह बदलाव दर्शाता है कि पासपोर्ट की ताकत का आकलन पूर्ण (absolute) संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि अन्य देशों की तुलना में सापेक्ष (relative) स्थिति के आधार पर किया जाता है। दुनिया भर में वीज़ा नीतियों में छोटे-छोटे बदलाव भी रैंकिंग पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं, जिससे वैश्विक गतिशीलता और यात्रा स्वतंत्रता के संदर्भ में देशों की स्थिति बदल जाती है।

हेनली पासपोर्ट इंडेक्स क्या है?

Henley & Partners द्वारा प्रकाशित हेनली पासपोर्ट इंडेक्स दुनिया के 199 पासपोर्टों को 227 वैश्विक गंतव्यों तक उनकी पहुंच के आधार पर रैंक करता है। यह रैंकिंग अंतर्राष्ट्रीय वायु परिवहन संघ (IATA) के आधिकारिक डाटा पर आधारित होती है।

इस सूचकांक में निम्न प्रकार की यात्रा सुविधाओं को शामिल किया जाता है —

  • वीज़ा-फ्री (Visa-free) प्रवेश
  • आगमन पर वीज़ा (Visa on Arrival)
  • इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन (ETA)

यदि किसी देश की यात्रा के लिए प्रस्थान से पहले पूर्ण ई-वीज़ा आवेदन जैसी पूर्व स्वीकृति आवश्यक हो, तो उस गंतव्य के लिए शून्य अंक दिए जाते हैं।

भारत की 2026 पासपोर्ट रैंकिंग: विस्तृत विश्लेषण

हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में भारत के प्रदर्शन को इस प्रकार समझा जा सकता है —

  • 2025: रैंक 85 | 57 वीज़ा-फ्री गंतव्य
  • जनवरी 2026: रैंक 80 | 55 गंतव्य
  • फरवरी 2026: रैंक 75 | 56 गंतव्य

भारत को एक नया वीज़ा-फ्री गंतव्य The Gambia मिला, लेकिन दो देशों — Iran और Bolivia — की सुविधा समाप्त हो गई।

इस प्रकार, कुल गंतव्यों की संख्या में 2025 की तुलना में शुद्ध (नेट) कमी दर्ज हुई, फिर भी अन्य देशों की रैंकिंग में बदलाव के कारण भारत वैश्विक सूची में ऊपर चढ़ने में सफल रहा। यह दर्शाता है कि पासपोर्ट रैंकिंग सापेक्ष तुलना पर आधारित होती है, न कि केवल कुल गंतव्यों की संख्या पर।

भारत ने किन दो देशों की वीज़ा-फ्री सुविधा खोई?

ईरान

  • नवंबर 2025 में ईरान ने सामान्य भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए वीज़ा-फ्री प्रवेश निलंबित कर दिया।
  • यह निर्णय उन धोखाधड़ी और मानव तस्करी के मामलों के बाद लिया गया, जिनमें भारतीय नागरिकों को फर्जी नौकरी के प्रस्ताव देकर विदेश ले जाया गया और बाद में फिरौती के लिए अगवा किया गया।
  • अब अग्रिम वीज़ा स्वीकृति (Advance Visa Approval) अनिवार्य होने के कारण ईरान “वीज़ा-फ्री” श्रेणी में शामिल नहीं रहा।

बोलीविया

  • 2025 में बोलीविया भारतीय नागरिकों को आगमन पर वीज़ा (Visa on Arrival) प्रदान कर रहा था, जो हेनली इंडेक्स की स्कोरिंग प्रणाली में शामिल था।
  • लेकिन 2026 में बोलीविया ने ई-वीज़ा प्रणाली लागू कर दी, जिसमें यात्रा से पहले ऑनलाइन आवेदन और पूर्व स्वीकृति आवश्यक है। चूंकि अग्रिम आवेदन जरूरी हो गया, इसलिए बोलीविया अब “वीज़ा-फ्री” श्रेणी में नहीं गिना जाता।

गाम्बिया एडिशन – आंशिक रिकवरी

  • फरवरी 2026 में द गाम्बिया को फिर से भारत की सुलभ (Accessible) सूची में शामिल किया गया, जिससे कुल संख्या 55 से बढ़कर 56 हो गई।
  • हालांकि, यह संख्या अभी भी 2025 के कुल 57 गंतव्यों से कम है, इसलिए इसे आंशिक सुधार माना जा रहा है।

कम देशों के बावजूद भारत की रैंक कैसे सुधरी?

हेनली पासपोर्ट इंडेक्स एक सापेक्ष (Relative) रैंकिंग प्रणाली है, न कि पूर्ण (Absolute) प्रणाली।

इसे एक कक्षा के उदाहरण से समझा जा सकता है —

  • यदि आपके अंक थोड़े कम हो जाएं,
  • लेकिन बाकी विद्यार्थियों के अंक आपसे अधिक गिर जाएं,
  • तो आपकी रैंक बेहतर हो सकती है।

साल 2026 में कई देशों की वीज़ा नीतियों में बदलाव हुए। कुछ देशों ने भारत से अधिक वीज़ा-फ्री पहुंच खो दी। इसी कारण, भले ही भारत के वीज़ा-फ्री गंतव्यों की संख्या थोड़ी कम हुई, फिर भी भारत 75वें स्थान तक पहुंच गया।

भारत अपनी रैंक उन देशों के साथ साझा करता है जिनका वैश्विक गतिशीलता (Mobility) स्कोर समान है।

2026 में वर्तमान वीज़ा-फ्री पहुंच की स्थिति

भारतीय पासपोर्ट धारक वर्तमान में —

  • 56 गंतव्यों की यात्रा बिना पूर्व वीज़ा स्वीकृति के कर सकते हैं।
  • इसमें वीज़ा-ऑन-अराइवल और सीमित इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन (ETA) शामिल हैं।
  • पूर्ण पूर्व-स्वीकृत ई-वीज़ा (Full Pre-approved e-Visa) वाले देश इसमें शामिल नहीं हैं।
  • यही कुल गतिशीलता स्कोर भारत की वैश्विक पासपोर्ट रैंकिंग निर्धारित करता है।

रैंक के हिसाब से लिस्ट (वीज़ा-फ़्री स्कोर के हिसाब से)

  • सिंगापुर – 192
  • जापान, साउथ कोरिया – 187
  • स्वीडन, यूनाइटेड अरब अमीरात – 186
  • बेल्जियम, डेनमार्क, फ़िनलैंड, फ़्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, लक्ज़मबर्ग, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, स्पेन, स्विट्ज़रलैंड – 185
  • ऑस्ट्रिया, ग्रीस, माल्टा, पुर्तगाल – 184
  • हंगरी, मलेशिया, न्यूज़ीलैंड, पोलैंड, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया – 183
  • ऑस्ट्रेलिया, क्रोएशिया, चेकिया, एस्टोनिया, लातविया, यूनाइटेड किंगडम – 182
  • कनाडा, लिकटेंस्टीन, लिथुआनिया – 181
  • आइसलैंड – 180
  • यूनाइटेड स्टेट्स – 179

सबसे कम पासपोर्ट वीज़ा-फ़्री रैंक (91-101)

  • 101. अफ़गानिस्तान – 24
  • 100. सीरिया – 26
  • 99. इराक – 29
  • 98. यमन – 31
  • 97. पाकिस्तान – 32
  • 96. सोमालिया – 33
  • 95. नेपाल – 35
  • 94. नॉर्थ कोरिया – 36
  • 93. बांग्लादेश – 37
  • 92. इरिट्रिया – 38
  • 91. लीबिया, फ़िलिस्तीनी इलाका, श्रीलंका – 39

बैकग्राउंड: पासपोर्ट पावर कैसे कैलकुलेट किया जाता है

हर डेस्टिनेशन को 1 पॉइंट माना जाता है अगर,

  • वीज़ा की ज़रूरत नहीं है
  • वीज़ा ऑन अराइवल उपलब्ध है
  • बॉर्डर परमिट जारी किया गया है
  • बेसिक ETA (एम्बेसी अप्रूवल के बिना)
  • अगर डिपार्चर से पहले एम्बेसी अप्रूवल की ज़रूरत है तो 0 पॉइंट।

कुल पॉइंट्स मोबिलिटी स्कोर तय करते हैं, जो ग्लोबल रैंक तय करता है।

‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के तहत डिजिटल पीडीएस लॉन्च किया गया

केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गांधीनगर में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) आधारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की शुरुआत की, जो भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है। इस पहल के माध्यम से डिजिटल इंडिया अभियान को राशन वितरण प्रणाली से जोड़ा गया है, ताकि सस्ती दरों पर खाद्यान्न पारदर्शी और सुरक्षित डिजिटल ढांचे के जरिए गरीबों तक पहुंचे। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के सुशासन दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य तकनीक के माध्यम से दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।

CBDC आधारित PDS क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

  • CBDC आधारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) एक तकनीक-संचालित राशन वितरण व्यवस्था है, जिसमें सुरक्षित लेनदेन के लिए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) का उपयोग किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य पारंपरिक पीडीएस में होने वाली गड़बड़ियों, बिचौलियों की भूमिका और भ्रष्टाचार को समाप्त करना है।
  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, यह योजना पीएम नरेंद्र मोदी की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसमें राष्ट्र के संसाधनों पर पहला अधिकार गरीबों, दलितों, पिछड़े वर्गों और आदिवासी समुदायों का सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
  • खाद्यान्न वितरण प्रक्रिया के डिजिटलीकरण के माध्यम से सरकार खाद्य सुरक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने का प्रयास कर रही है, ताकि लाभ सीधे पात्र लाभार्थियों तक बिना किसी बाधा के पहुंच सके।

डिजिटल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की प्रमुख विशेषताएं

CBDC आधारित PDS कई नवाचारी विशेषताओं के साथ लागू किया गया है —

  • सुरक्षित लेनदेन के लिए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) का उपयोग
  • डिजिटल इंडिया अवसंरचना के साथ एकीकरण
  • प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम मुफ्त खाद्यान्न का प्रत्यक्ष वितरण
  • धोखाधड़ी और दोहराव (डुप्लीकेशन) की समाप्ति
  • अगले 3–4 वर्षों में देशव्यापी विस्तार की योजना

इस प्रणाली में ‘अन्नपूर्णा’ मशीन एक महत्वपूर्ण नवाचार है, जो मात्र 35 सेकंड में 25 किलोग्राम तक खाद्यान्न सटीकता के साथ वितरित कर सकती है। इससे मात्रा की शुद्धता और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित होता है।

DBT और डिजिटल इंडिया की भूमिका

  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि पहले लगभग 60 करोड़ लोगों के पास बैंक खाते नहीं थे। डिजिटल इंडिया पहल के तहत वित्तीय समावेशन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जिससे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगी।
  • आज भारत विश्व के कुल डिजिटल लेनदेन का लगभग आधा हिस्सा करता है। CBDC आधारित PDS इसी डिजिटल आधार को आगे बढ़ाते हुए खाद्यान्न वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। इस एकीकरण से लाभार्थियों को बिना किसी बिचौलिये के सीधे उनका हक प्राप्त होता है।

80 करोड़ नागरिकों के लिए खाद्य सुरक्षा सुदृढ़

  • सरकार वर्तमान में लगभग 80 करोड़ लोगों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध करा रही है। नई CBDC आधारित PDS प्रणाली इस विशाल कल्याणकारी योजना को अधिक प्रभावी और पारदर्शी ढंग से लागू करने में सहायक होगी।
  • अमित शाह के अनुसार, 1.07 लाख से अधिक गांवों तक कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है, जिससे दूरदराज क्षेत्रों में भी डिजिटल माध्यम से राशन वितरण संभव हो पाया है। यह सुधार बेहतर मात्रा नियंत्रण, गुणवत्ता मानकों और रीयल-टाइम ट्रैकिंग सुनिश्चित करता है, जिससे खाद्य सुरक्षा प्रणाली और अधिक मजबूत बनती है।

CBDC के बारे में

परिभाषा: CBDC (Central Bank Digital Currency) केंद्रीय बैंक द्वारा जारी की गई डिजिटल वैध मुद्रा है, जो उसके बैलेंस शीट पर देनदारी (Liability) के रूप में दर्ज होती है। भारत में इसे Reserve Bank of India (RBI) द्वारा जारी किया जाता है।

1. होलसेल CBDC (Wholesale CBDC): यह बैंकों और लाइसेंस प्राप्त वित्तीय संस्थानों के लिए होती है। इसका उपयोग इंटरबैंक भुगतान और प्रतिभूति (securities) लेनदेन में किया जाता है।

2. रिटेल CBDC (Retail CBDC): यह आम जनता के लिए उपलब्ध होती है, जिसे डिजिटल वॉलेट या स्मार्टफोन ऐप के माध्यम से उपयोग किया जा सकता है।

3. टोकन-आधारित रिटेल CBDC: इसमें निजी और सार्वजनिक कुंजी (Private-Public Key) प्रमाणीकरण के माध्यम से अपेक्षाकृत गुमनाम (anonymous) लेनदेन संभव होते हैं।

4. अकाउंट-आधारित रिटेल CBDC: इसमें उपयोग के लिए डिजिटल पहचान आवश्यक होती है। इसका उदाहरण पूर्वी कैरेबियन क्षेत्र की डिजिटल मुद्रा DCash है।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का विकास

  • भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की शुरुआत कमजोर और वंचित वर्गों को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी। समय के साथ डिजिटलीकरण, आधार लिंकिंग और DBT जैसी पहलों से इसकी कार्यक्षमता में सुधार हुआ।
  • हालांकि, कुछ क्षेत्रों में रिसाव (Leakages) और दोहराव (Duplication) की समस्याएं बनी रहीं। अब PDS में CBDC को शामिल करना कल्याणकारी योजनाओं की तकनीकी प्रगति का नया चरण माना जा रहा है।
  • डिजिटल मुद्रा और राशन वितरण को एक साथ जोड़कर सरकार देशभर में एक पारदर्शी, भ्रष्टाचार-मुक्त और विस्तार योग्य (Scalable) खाद्य सुरक्षा तंत्र स्थापित करना चाहती है।

 

भारत चिकन नेक में अंडरग्राउंड रेलवे क्यों बना रहा है? बड़ा स्ट्रेटेजिक कदम समझाया गया

भारत ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे ‘चिकन नेक’ के नाम से भी जाना जाता है, में एक महत्वपूर्ण भूमिगत रेलवे परियोजना की घोषणा की है। 35.76 किलोमीटर लंबी यह नई अंडरग्राउंड रेलवे लाइन टिनमाइल हाट, रंगापानी और बागडोगरा को जोड़ेगी, जिससे पूर्वोत्तर राज्यों तक सुरक्षित और निर्बाध संपर्क सुनिश्चित किया जा सकेगा। यह रणनीतिक रेलवे परियोजना अत्यंत संवेदनशील सीमा क्षेत्र में रक्षा लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने, आपदा के समय लचीलापन बढ़ाने तथा आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इस परियोजना में सुरक्षित आवागमन के लिए उन्नत सुरंग तकनीक और आधुनिक रेलवे प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर भूमिगत रेलवे: यह परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है

  • सिलीगुड़ी कॉरिडोर में प्रस्तावित भूमिगत रेलवे परियोजना भारत के पूर्वोत्तर से जुड़ने वाले संकरे भू-मार्ग को सुरक्षित करने के उद्देश्य से विकसित की जा रही है।
  • सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे सामान्यतः ‘चिकन नेक’ कहा जाता है, मात्र लगभग 22 किलोमीटर चौड़ा है और यही मुख्य भूमि भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है।
  • नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के निकट स्थित होने के कारण यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है। यहाँ किसी भी प्रकार का व्यवधान परिवहन, रक्षा गतिविधियों और आर्थिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित कर सकता है।
  • प्रस्तावित भूमिगत रेलवे मार्ग एक सुरक्षित और बाहरी दृष्टि से अदृश्य (Non-visible) संरेखण प्रदान करेगा। इससे प्राकृतिक आपदाओं, यातायात भीड़ और सुरक्षा खतरों के प्रति संवेदनशीलता कम होगी तथा यात्रियों और रक्षा बलों के लिए निर्बाध रेल संपर्क सुनिश्चित किया जा सकेगा।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर भूमिगत रेलवे: मार्ग और लंबाई

  • सिलीगुड़ी कॉरिडोर की यह भूमिगत रेलवे परियोजना पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (Northeast Frontier Railway) के कटिहार मंडल के अंतर्गत आएगी।
  • इसका मार्ग टिनमाइल हाट से शुरू होकर रंगापानी की ओर बढ़ेगा और आगे बागडोगरा तक विस्तारित होगा। कुल भूमिगत संरेखण (Underground Alignment) 35.76 किलोमीटर लंबा होगा, जिसमें डुमडांगी–रंगापानी खंड लगभग 33.40 किलोमीटर को कवर करेगा।
  • यह रेललाइन पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग और उत्तर दिनाजपुर जिलों तथा बिहार के किशनगंज जिले से होकर गुजरेगी।
  • भूमिगत डिजाइन इस परियोजना को अधिक सुरक्षित और लचीला बनाता है। इसे मुख्य रूप से सुरंग-आधारित मार्ग के रूप में योजनाबद्ध किया गया है, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में भी सुरक्षित और निर्बाध रेल संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर भूमिगत रेलवे का रणनीतिक महत्व

  • सिलीगुड़ी कॉरिडोर में प्रस्तावित भूमिगत रेलवे राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • यह क्षेत्र बागडोगरा वायु सेना स्टेशन और बेंगदुबी सेना छावनी के निकट स्थित है। आपातकालीन परिस्थितियों में यह भूमिगत मार्ग रक्षा कर्मियों, सैन्य उपकरणों और राहत सामग्री की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करेगा।
  • भूमिगत संरेखण बाढ़, भूस्खलन या बाहरी खतरों से होने वाले व्यवधानों को कम करने में सहायक होगा। यह परियोजना क्षेत्र में रेल और वायु लॉजिस्टिक्स के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करती है।
  • साथ ही, पूर्वोत्तर क्षेत्र के दीर्घकालिक अवसंरचना सुरक्षा नियोजन को भी मजबूती प्रदान करती है, जो परिवहन और संपर्क के लिए सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर अत्यधिक निर्भर है।

आधुनिक तकनीक का उपयोग

  • इस भूमिगत रेलवे का निर्माण उन्नत इंजीनियरिंग तकनीकों से किया जाएगा। परियोजना में 2×25 kV AC विद्युतीकरण प्रणाली और स्टैंडर्ड-IV ऑटोमैटिक सिग्नलिंग शामिल होगी। संचार प्रणाली VOIP-आधारित ऑप्टिकल फाइबर केबल पर आधारित होगी।
  • पुलों का निर्माण RDSO के 25 टन एक्सल लोड मानकों के अनुसार किया जाएगा। ट्विन टनल (Twin Tunnels) का निर्माण टनल बोरिंग मशीन (TBM) पद्धति से होगा, जबकि क्रॉसओवर के लिए NATM तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
  • ये आधुनिक प्रणालियाँ उच्च सुरक्षा, अधिक भार क्षमता और सुचारु ट्रेन संचालन सुनिश्चित करेंगी। यह भूमिगत रेल लाइन रणनीतिक और वाणिज्यिक दोनों प्रकार के यातायात को कुशलतापूर्वक संभालने में सक्षम होगी।

बजट आवंटन और अवसंरचना विस्तार

  • यह परियोजना पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर क्षेत्र में व्यापक अवसंरचना विकास अभियान का हिस्सा है। इस वर्ष पश्चिम बंगाल के लिए रेलवे बजट आवंटन ₹14,205 करोड़ है। राज्य में लगभग ₹92,000 करोड़ मूल्य की रेलवे परियोजनाएँ वर्तमान में प्रगति पर हैं।
  • सिलीगुड़ी कॉरिडोर के माध्यम से यह भूमिगत रेलवे सरकार के रणनीतिक अवसंरचना विकास पर विशेष ध्यान को दर्शाती है। यह परियोजना सिलीगुड़ी से उच्च गति रेल संपर्क सुधारने की योजनाओं को भी पूरक करती है।
  • यह निवेश क्षेत्र में आर्थिक विकास, रक्षा तैयारियों और दीर्घकालिक संपर्क स्थिरता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर भूमिगत रेलवे – संक्षेप में

  • सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत का पूर्वोत्तर राज्यों से एकमात्र स्थलीय संपर्क है (लगभग 22 किमी चौड़ा)।
  • नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की निकटता के कारण यह अत्यंत रणनीतिक रूप से संवेदनशील है।
  • भूमिगत रेलवे लाइन की लंबाई 35.76 किमी होगी।
  • यह Northeast Frontier Railway के अंतर्गत आएगी।
  • उन्नत सुरंग और विद्युतीकरण तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
  • यह परियोजना रक्षा लॉजिस्टिक्स, आपदा प्रबंधन और रेल-वायु अवसंरचना एकीकरण को सुदृढ़ करती है।
  • यह एक प्रमुख रणनीतिक अवसंरचना विकास पहल है।

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