नवजात शिशुओं के लिए पहली बार Malaria की खास दवा को मिली मंजूरी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बच्चों में मलेरिया के मामले और इससे मौत के जोखिमों को कम करने हेतु एक अहम कदम की घोषणा की है। 24 अप्रैल 2026 को मलेरिया की पहली ऐसी दवा को मंजूरी दी गई है, जिसे खास तौर पर शिशुओं के लिए बनाया गया है। अब तक, शिशुओं का इलाज उन दवाओं से किया जाता था जो वयस्कों के लिए उपलब्ध थीं। इससे नवजात शिशुओं में डोज की गलती होने और इसके कारण जोखिम बढ़ने का खतरा बना रहता था।

लाखों लोगों की मौत का कारण

हर साल मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियां लाखों लोगों की मौत का कारण बनती हैं। बरसात का मौसम आते ही मच्छरों का प्रजनन एवं मच्छर काटने से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। साल 2024 में, दुनिया भर के 80 देशों में मलेरिया के लगभग 282 मिलियन (28.2 करोड़) मामले सामने आए और 6.10 लाख लोगों की मौत हो गई। साल 2023 की तुलना में मामलों में लगभग 9 मिलियन की बढ़ोतरी हुई थी। अफ्रीकी क्षेत्र पर इसका सबसे ज्यादा बोझ देखा जाता रहा है जहां मौतों में 5 साल से कम उम्र के बच्चों का आंकड़ा 75% तक होता है।

छोटे बच्चों के लिए पहली दवा

मलेरिया फीवर के बारे में लोगों को जागरूक करने और इसके खिलाफ वैश्विक प्रयासों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर साल 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है।

प्री-क्वालिफिकेशन मंजूरी

आर्टेमेथर और ल्यूमेफैंट्रिन नामक दो दवाओं का ये नया कॉम्बिनेशन मलेरिया की पहली ऐसी दवा है जो 5 किलोग्राम से कम वजन वाले शिशुओं के लिए सुरक्षित है।

नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों के में मलेरिया के इलाज की इस दवा को प्री-क्वालिफिकेशन मंजूरी मिली है। प्री-क्वालिफिकेशन का मतलब है कि यह दवा गुणवत्ता, सुरक्षा और असर के अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करती है।

शिशुओं में मौत का खतरा कम करने में मददगार

गौरतलब है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चे इस बीमारी की चपेट में सबसे ज्यादा आते हैं। मच्छरों से फैलने वाली इस बीमारी से होने वाली कुल मौतों में से लगभग 70% मौतें इसी आयु वर्ग में होती हैं। विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई है कि ये दवा शिशुओं में मौत का खतरा कम करने में मददगार साबित हो सकती है।

 

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का बड़ा ऐलान, मैं राजनीति छोड़ दूंगा; जानें वजह

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि वे साल 2027 में अपना दूसरा कार्यकाल पूरा करने के बाद राजनीति से संन्यास ले लेंगे। साइप्रस की अपनी यात्रा के दौरान मैक्रों ने यह साफ कर दिया कि पद छोड़ने के बाद उनका सार्वजनिक जीवन में बने रहने का कोई इरादा नहीं है। यह उन पहले की अटकलों से एक बड़ा बदलाव है, जिनमें यह माना जा रहा था कि वे भविष्य में राजनीति में लौट सकते हैं। उनके इस बयान के बाद, फ्रांस उनकी राष्ट्रपति-अवधि के बाद के एक नए राजनीतिक दौर के लिए खुद को तैयार कर रहा है।

मौजूदा कार्यकाल 2027 में खत्म 

2017 में, मैक्रों 39 साल की उम्र में फ्रांस के सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति बने थे। 2022 में चुनाव के बाद उन्हें इस पद के लिए फिर से चुना गया। उनका मौजूदा कार्यकाल 2027 में खत्म हो रहा है, और फ्रांसीसी संविधान के अनुसार, कोई भी नेता लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति नहीं चुना जा सकता है।

उनके राष्ट्रपति-काल के दौरान प्रमुख सुधार और चुनौतियाँ

  • उनके राष्ट्रपति-काल की पहचान प्रमुख सुधारों और राजनीतिक चुनौतियों से रही है। सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में से एक सेवानिवृत्ति की आयु से संबंधित था।
  • उनके राष्ट्रपति-काल में एक बड़ा सुधार यह हुआ कि उन्होंने रिटायरमेंट की उम्र 62 से बढ़ाकर 64 कर दी।
  • उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जैसे कि इन सुधारों के खिलाफ जनता का ज़ोरदार विरोध। इसके अलावा, 2024 में संसद में बहुमत खो देना और अचानक हुए चुनावों के बाद पैदा हुई राजनीतिक अस्थिरता।
  • इन चुनौतियों ने उनके दूसरे कार्यकाल के दौरान शासन-प्रशासन को और भी अधिक जटिल बना दिया है।

फ्रांस में प्रेसिडेंट के टर्म के नियम

  • फ्रांस में प्रेसिडेंट को पांच साल के टर्म के लिए चुना जाता है।
  • साथ ही, प्रेसिडेंट को ज़्यादा से ज़्यादा दो लगातार टर्म तक ही रहने की इजाज़त है।
  • ऑफिस छोड़ने के बाद कोई भी प्रेसिडेंट सक्सेसफुली वापस नहीं आया है।
  • ये नियम समय-समय पर लीडरशिप में बदलाव पक्का करते हैं।

आंध्र प्रदेश ने ₹13,000 करोड़ का विशाल मशरूम मिशन शुरू किया

आंध्र प्रदेश राज्य सरकार ने लगभग ₹13,000 करोड़ के निवेश के साथ पहले ‘मशरूम मिशन’ की घोषणा की है। इस घोषणा का नेतृत्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने किया, और इस पहल का उद्देश्य राज्य को भारत का सबसे बड़ा मशरूम उत्पादक बनाना है। छोटे किसानों, स्वयं सहायता समूहों और निर्यात के अवसरों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए, इस मिशन से पूरे राज्य में रोज़गार के अवसर पैदा होने और एक नई कृषि-आधारित मूल्य श्रृंखला (value chain) के निर्माण की उम्मीद है।

आंध्र प्रदेश मशरूम मिशन

यह प्रस्तावित मिशन एक बड़े पैमाने की कृषि पहल है, जिसे मशरूम उत्पादन और ग्रामीण आय में उल्लेखनीय वृद्धि करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • कुल ₹13,000 करोड़ का निवेश।
  • इसका लक्ष्य प्रति वर्ष 67,500 टन मशरूम का उत्पादन करना भी है।
  • इसका उद्देश्य बिहार को पीछे छोड़ना भी है, जो वर्तमान में लगभग 45,000 टन उत्पादन के साथ शीर्ष स्थान पर है।
  • इस पहल के तहत, पूरे राज्य में कुल 1.62 लाख मशरूम इकाइयां स्थापित की जाएंगी।

यह पहल आंध्र प्रदेश को भारत में मशरूम की खेती के क्षेत्र में भविष्य के अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करती है।

छोटे किसानों और ग्रामीण रोज़गार पर ज़ोर

इस मिशन की मुख्य विशेषता यह है कि इसका ज़ोर छोटे और मध्यम स्तर की उत्पादन इकाइयों पर है, और इसे ग्रामीण परिवारों तक पहुँचाना है।

हर इकाई:

  • लगभग 5,000 वर्ग फ़ीट का इलाका घेरेगी।
  • स्वरोज़गार के अवसरों को बढ़ावा देगी।
  • और साथ ही, लगातार आमदनी पैदा करने में भी मदद करेगी।

सरकार की यह भी योजना है कि वह स्वयं-सहायता समूहों (SHGs) को इसमें शामिल करे, और खास तौर पर ग्रामीण महिलाओं और छोटे उद्यमियों की भागीदारी को बढ़ावा दे।

सब्सिडी सहायता और सरकारी फंडिंग

इस प्रोजेक्ट को आर्थिक रूप से सफल बनाने के लिए, सरकार मज़बूत सब्सिडी सहायता दे रही है।

  • कुल सब्सिडी: ₹5,184 करोड़
  • यह प्रोजेक्ट की कुल लागत का लगभग 40% हिस्सा कवर करेगी।
  • और इसकी फंडिंग केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर करेंगी।

यह आर्थिक मदद किसानों पर पड़ने वाले बोझ को कम करेगी और इसके ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल को बढ़ावा देगी।

प्रचारित किए जाने वाले मशरूम के प्रकार

यह मिशन उन किस्मों पर ध्यान केंद्रित करेगा जो व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य और जलवायु के अनुकूल हैं।

मुख्य किस्मों में शामिल हैं:

  • मिल्की मशरूम – जो गर्मी-रोधी है और भारतीय जलवायु के लिए उपयुक्त है।
  • पैडी स्ट्रॉ मशरूम – यह तेजी से बढ़ने वाला और लाभदायक मशरूम है।
  • बटन मशरूम – जिसकी घरेलू और निर्यात बाजारों में भारी मांग है।

यह विविधीकरण बेहतर अनुकूलन क्षमता और बाजार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करेगा।

निर्यात और कृषि मूल्य श्रृंखला को बढ़ावा

‘मशरूम मिशन’ का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि एक मज़बूत कृषि-व्यवसाय इकोसिस्टम का निर्माण करना भी है।

मुख्य अवसर

  • खाड़ी देशों में बढ़ती मांग।
  • प्रसंस्करण और आपूर्ति श्रृंखलाओं का विस्तार।
  • एक नई कृषि मूल्य श्रृंखला का निर्माण।

इस पहल का लक्ष्य एक नया निर्यात-उन्मुख क्षेत्र बनाकर, भारत की ‘मिलेट क्रांति’ (मोटे अनाज की क्रांति) की सफलता को दोहराना है।

केन्‍या के Sebastian Sawe ने 2 घंटे के अंदर पूरी की मैरानथन, बनाया वर्ल्‍ड रिकॉर्ड

केन्‍या के सेबास्टियन सावे (Sebastian Sawe) ने लंदन मैराथन में इतिहास रच दिया। सावे दुनिया के पहले धावक बने, जिन्‍होंने आधिकारिक रेस परिस्थितियों में दो घंटे की बाधा को तोड़ दिया। उन्‍होंने 1:59:30 के समय में मैराथन की दौड़ पूरी करते हुए विश्व रिकॉर्ड बनाया।

सावे से पहले केन्‍या के केल्विन किपटुम के नाम यह रिकॉर्ड दर्ज था, जिन्‍होंने 2023 में शिकागो में 2:30:35 के समय में मैराथन पूरी की थी। सावे कानूनन दो घंटे के अंदर मैराथन की दौड़ पूरी करने वाले पहले धावक बने। उन्‍होंने साल 2019 में इलियुड किपचोगे के प्रदर्शनी मार्क 1:59:41 को पीछे छोड़ा।

कौन हैं सेबैस्टियन सावे

केन्या के 30 साल के सेबैस्टियन सावे ने लंदन मैराथन को पूरा करने में 1:59:30 (1 घंटा, 59 मिनट, 30 सेकंड) का समय निकाला और केन्या के ही केल्विन किप्टम के पिछले वर्ल्ड रिकॉर्ड को 65 सेकंड से पीछे छोड़ दिया। केन्या के लॉन्ग डिस्टेंस रनर सावे ने इससे पहले 2023 वर्ल्ड रोड रनिंग चैंपियनशिप्स और 2023 वर्ल्ड क्रॉस कन्ट्री चैंपियनशिप्स में गोल्ड के अलावा 2025 बर्लिन मैराथन और 2025 और 2026 के लंदन मैराथन में गोल्ड मेडल अपने नाम किए हैं।

सावे केन्या के रिफ़्ट वैली वाले ग्रामीण इलाके से आते हैं जहां से ज़्यादातर बड़े रनर्स निकलते हैं। वो शुरुआत में 10,000 मीटर और हाफ़ मैराथन में माहिर माने जाते थे। सावे एक गरीब परिवार से उभरे एथलीट बताये जाते हैं। दूसरे रनर्स की तरह उनके लिए भी दौड़ना ग़रीबी से निकलने का रास्ता रहा है। वो केन्या के हाई अल्टीट्यूड सेंटर कपटागाट या इटेन में ट्रेनिंग करते हैं। वो मशहूर कोच पैट्रिक सैंग की अगुआई में ट्रेनिंग करते हैं जो मशहूर रनर Eliud Kichoge के भी कोच रहे हैं।

सावे ने असंभव को कैसे संभव कर दिखाया

सावे का प्रदर्शन सिर्फ़ रफ़्तार के बारे में नहीं था, बल्कि यह रणनीति और सहनशक्ति के बारे में भी था। उनकी दौड़ में गति और तेज़ी का एक बेहतरीन मेल भी देखने को मिला।

दौड़ का विश्लेषण

  • उन्होंने 60:29 के समय में आधी दूरी तय कर ली थी।
  • इसके अलावा, 30 से 35 किलोमीटर के बीच की दूरी उन्होंने 13:54 में पूरी की।
  • 35 से 40 किलोमीटर के बीच वे और भी तेज़ रहे, और यह दूरी 13:42 में तय की।

दौड़ के आखिरी पड़ाव में, जहाँ दूसरे एथलीटों की रफ़्तार धीमी पड़ गई थी, वहीं सावे ने अपनी गति बढ़ा दी और अपनी असाधारण सहनशक्ति का लोहा मनवाया।

ISSF Junior World Cup 2026: अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर भारतीय निशानेबाज़

भारतीय निशानेबाजों ने काहिरा में आयोजित आईएसएसएफ जूनियर विश्व कप 2026 में 16 पदक जीतकर शीर्ष स्थान हासिल किया। इन पदकों में पांच स्वर्ण, छह रजत और पांच कांस्य पदक शामिल हैं। भारतीय दल ने पाँच स्वर्ण, छह रजत और पाँच कांस्य पदक हासिल किए हैं, और वैश्विक मंच पर शूटिंग खेलों में देश की बढ़ती ताकत को रेखांकित किया है।

हेमंत बर्मन ने पुरुषों की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन स्पर्धा में रजत पदक जीता, जबकि कजाकिस्तान के ओलेग नोस्कोव ने जूनियर विश्व रिकॉर्ड बनाकर स्वर्ण पदक जीता। उज्बेकिस्तान के निकिता सोकोलोव ने कांस्य पदक हासिल किया। मिश्रित ट्रैप टीम स्पर्धा में, जुहैर खान और अद्या कात्याल ने कांस्य पदक जीता। हंगरी ने जूनियर विश्व रिकॉर्ड स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता।

हेमंत बर्मन ने रजत पदक जीतकर कमाल किया

शानदार प्रदर्शन करने वालों में से एक हेमंत बर्मन रहे, जिन्होंने 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन्स इवेंट में रजत पदक अपने नाम किया। 18 वर्षीय खिलाड़ी ने फ़ाइनल में 351.7 अंक बनाए और असाधारण संयम तथा कौशल का प्रदर्शन किया।

बर्मन 578-24x के स्कोर के साथ सातवें स्थान पर रहते हुए फ़ाइनल के लिए क्वालिफ़ाई किया था, लेकिन जब सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी, तब उन्होंने अपने प्रदर्शन को और बेहतर किया।

इस इवेंट में गोल्ड मेडल ओलेग नोस्कोव ने जीता, जिन्होंने 355.6 के स्कोर के साथ एक नया जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया, जबकि निकिता सोलोकोव ने ब्रॉन्ज़ मेडल हासिल किया।

इसके अलावा, वेदांत वाघमारे और रोहित कन्यान जैसे अन्य भारतीय प्रतिभागी भी फ़ाइनल में पहुँचे, लेकिन वे क्रमशः छठे और सातवें स्थान पर रहे।

ट्रैप मिक्स्ड टीम इवेंट में भारत को कांस्य पदक

भारत ने ट्रैप मिक्स्ड टीम इवेंट में एक और पदक अपने नाम कर लिया है, जहाँ ज़ुहैर खान और आद्या कात्याल की जोड़ी ने कांस्य पदक जीता।

यह जोड़ी शुरुआत में रजत पदक की दौड़ में मज़बूती से बनी हुई थी, लेकिन फ़ाइनल सीरीज़ में उन्हें कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा, जिसके चलते वे 19 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर खिसक गए।

महिलाओं के इवेंट्स में मिले-जुले नतीजे

50m राइफल प्रोन महिला इवेंट में, तेजल नथावत, युगेश्वरी बैस, अनुष्का ठाकुर और ख्वाहिश शर्मा सहित भारतीय निशानेबाज़ पोडियम पर जगह बनाने में कामयाब नहीं हो पाईं।

यह एक झटका था, लेकिन भारतीय दल का कुल मिलाकर प्रदर्शन शानदार रहा है, जिसमें कई कैटेगरी में लगातार मेडल जीतने के प्रयास किए गए हैं।

ISSF जूनियर विश्व चैंपियनशिप

अब सबका ध्यान आने वाली ISSF जूनियर विश्व चैंपियनशिप पर होगा, जो जून महीने में जर्मनी के सुहल में होने वाली है।

यह इवेंट भारतीय निशानेबाजों के लिए अपनी मौजूदा फॉर्म को और बेहतर बनाने और भविष्य के सीनियर-लेवल अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों—जिनमें ओलंपिक भी शामिल हैं—की तैयारी करने के लिए एक अहम मंच साबित होगा।

स्काईरूट एयरोस्पेस का ‘विक्रम-1’ भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के नए युग का संकेत

भारत ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया, जब Skyroot Aerospace के ‘विक्रम-1’ (जो देश का पहला निजी तौर पर बनाया गया ऑर्बिटल रॉकेट है) को हैदराबाद स्थित कैंपस से श्रीहरिकोटा के लिए रवाना किया गया। यह घटना एक नए युग का संकेत है, जिसमें निजी कंपनियाँ भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही हैं। इसका उद्देश्य दुनिया के तेज़ी से बढ़ते बाज़ार में किफायती और ‘ऑन-डिमांड’ सैटेलाइट लॉन्च सेवाएँ उपलब्ध कराना भी है।

विक्रम-1 श्रीहरिकोटा से लॉन्च के करीब पहुँचा

इस रॉकेट को तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद में स्काईरूट के Max-Q कैंपस से औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इसका पेलोड फेयरिंग – जो एक ज़रूरी ढाँचा है और उड़ान के दौरान सैटेलाइट्स की सुरक्षा करेगा – अब सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पहुँचा दिया गया है, जो भारत का मुख्य स्पेसपोर्ट है।

इसके साथ ही, उड़ान से पहले की ज़रूरी जाँच पूरी हो गई है। इस बीच, रॉकेट के प्रोपल्शन चरण पहले से ही लॉन्च स्थल पर मौजूद हैं, जिससे अंतिम एकीकरण और लॉन्च की तैयारियों का रास्ता साफ़ हो गया है।

भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक गेम-चेंजर

विक्रम-1 के लॉन्च से Skyroot Aerospace के पहली ऐसी निजी भारतीय कंपनी बनने की उम्मीद है, जो ऑर्बिटल लॉन्च का प्रयास करेगी।

यह भारत के पारंपरिक रूप से सरकार के नेतृत्व वाले अंतरिक्ष मिशनों से एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जिन पर अब तक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का ही वर्चस्व रहा है।

यह मिशन IN-SPACe के अधिकार के तहत संचालित किया जा रहा है, जो ISRO की तकनीकी देखरेख में निजी क्षेत्र की भागीदारी को विनियमित करता है।

यह सहयोग अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में भारत के विकसित होते सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल को प्रदर्शित करता है।

विक्रम-1 को क्या खास बनाता है?

विक्रम-1 को एक मल्टी-स्टेज ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल के तौर पर डिज़ाइन किया गया है, जिसे छोटे सैटेलाइट के बढ़ते बाज़ार के लिए खास तौर पर तैयार किया गया है।

इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • इसमें लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) तक 350 kg तक का पेलोड ले जाने की क्षमता है।
  • इसे हल्केपन और बेहतर कार्यक्षमता के लिए पूरी तरह से कार्बन-कम्पोजिट संरचनाओं का उपयोग करके बनाया गया है।
  • यह 3D-प्रिंटेड इंजनों और हाई-थ्रस्ट सॉलिड फ्यूल बूस्टर्स से संचालित होता है।
  • और इसे मांग के अनुसार तथा किफायती सैटेलाइट लॉन्च के लिए भी डिज़ाइन किया गया है।

इसकी संरचना सात-मंजिला इमारत जितनी ऊँची है, और विक्रम-1 उस अत्याधुनिक नवाचार का प्रतिनिधित्व करता है जिसे पूरी तरह से भारत के निजी क्षेत्र के भीतर विकसित किया गया है।

एयरोस्पेस विकास के लिए तेलंगाना का विज़न

फ्लैग-ऑफ कार्यक्रम के दौरान, माननीय मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना की उस महत्वाकांक्षा पर ज़ोर दिया, जिसके तहत वह एक वैश्विक एयरोस्पेस हब बनना चाहता है।

राज्य सरकार इन बातों पर ध्यान केंद्रित कर रही है:

  • एयरोस्पेस तकनीकों में कौशल विकास।
  • साथ ही, वैश्विक विश्वविद्यालयों और उद्योग जगत के अग्रणी लोगों के साथ साझेदारी।
  • और एक मज़बूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण।

सन फार्मा का बड़ा विदेशी अधिग्रहण प्रयास: 11.75 अरब डॉलर में ऑर्गेनॉन को खरीदने की तैयारी

सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज़ ने अमेरिका स्थित Organon & Co. को $11.75 बिलियन में, पूरी तरह से नकद सौदे के ज़रिए खरीदने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना का खुलासा किया है। यह अधिग्रहण किसी भी भारतीय कंपनी द्वारा किए गए सबसे बड़े विदेशी अधिग्रहणों में से एक होगा। इसके साथ ही, यह वैश्विक दवा उद्योग में भारत की मौजूदगी को और मज़बूत करेगा।

भारत की सबसे बड़ी फार्मा डील: मुख्य बातें

नए समझौते के तहत, सन फार्मा, Organon के सभी बकाया शेयर $14 प्रति शेयर की दर से खरीदेगी।

इस डील को दोनों कंपनियों के बोर्ड से मंज़ूरी मिल गई है, और उम्मीद है कि रेगुलेटरी और शेयरधारकों की मंज़ूरी मिलने के बाद, यह डील 2027 की शुरुआत तक पूरी हो जाएगी।

इस घोषणा के चलते बाज़ार में ज़ोरदार प्रतिक्रिया देखने को मिली है, और सन फार्मा के शेयरों में 7% से ज़्यादा की तेज़ी आई है।

वैश्विक बाज़ारों में रणनीतिक विस्तार

Organon & Co. के अधिग्रहण से Sun Pharma की वैश्विक उपस्थिति में काफ़ी विस्तार हुआ है।

Organon के पास ये हैं:

  • यूरोपीय संघ और उभरते बाज़ारों में कुल 6 विनिर्माण इकाइयाँ।
  • साथ ही, 70 से ज़्यादा उत्पादों का पोर्टफ़ोलियो।
  • 140 से ज़्यादा देशों में इनकी उपस्थिति।

अधिग्रहण के बाद, यह संयुक्त इकाई 150 देशों में काम करेगी, जिससे Sun Pharma सचमुच एक वैश्विक फ़ार्मास्यूटिकल दिग्गज बन जाएगी।

महिलाओं के स्वास्थ्य और बायोसिमिलर्स को बढ़ावा

इस सौदे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू, तेज़ी से बढ़ रहे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना है।

महिलाओं के स्वास्थ्य के क्षेत्र में, सन फार्मा दुनिया की शीर्ष तीन कंपनियों में से एक बनने की राह पर है।

इसके अलावा, बायोसिमिलर्स के क्षेत्र में भी यह कंपनी दुनिया भर में 7वीं सबसे बड़ी कंपनी के तौर पर अपनी जगह बनाएगी।

यह विविधीकरण पारंपरिक जेनेरिक्स पर निर्भरता को कम करेगा और कंपनी को भविष्य-उन्मुख फार्मास्युटिकल क्षेत्रों में स्थापित करेगा।

वित्तीय मज़बूती और तालमेल

Organon ने रिपोर्ट किया कि:

  • वर्ष 2025 में उसका राजस्व लगभग $6.2 बिलियन रहा।
  • साथ ही, उसका समायोजित EBITDA $1.9 बिलियन रहा।
  • और उस पर लगभग $8.6 बिलियन का कर्ज़ भी था।

विलय के बाद बनने वाली संयुक्त कंपनी का अनुमानित राजस्व $12.4 बिलियन होगा, जिससे वह दुनिया की शीर्ष 25 फार्मा कंपनियों में शामिल हो जाएगी।

बायोसिमिलर क्या हैं?

बायोसिमिलर ऐसी दवाएँ हैं जो पहले से मंज़ूर हो चुकी बायोलॉजिकल दवाओं से बहुत मिलती-जुलती होती हैं, लेकिन आमतौर पर ये ज़्यादा किफ़ायती होती हैं।

ये इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये:

  • बेहतर इलाज तक पहुँच बढ़ाती हैं।
  • स्वास्थ्य देखभाल की लागत को भी कम करती हैं।
  • और दवा बाज़ार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती हैं।

जस्टिस लीसा गिल बनीं आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस

न्यायमूर्ति लीसा गिल ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली है। शपथ ग्रहण समारोह आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में आयोजित किया गया था। राज्यपाल एस अब्दुल नजीर ने 25 अप्रैल को यहां लोक भवन में हुए एक समारोह में जस्टिस गिल को शपथ दिलाई। जस्टिस गिल ने जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर की जगह ली है, जो 24 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो गए। यह शीर्ष न्यायिक पदों पर महिलाओं के अधिक प्रतिनिधित्व की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उनकी नियुक्ति को एक प्रगतिशील कदम के रूप में देखा जा सकता है, जो भारत की कानूनी प्रणाली के भीतर महिलाओं की समावेशिता और विविधता को सुदृढ़ करेगा।

लीसा गिल ने AP हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली

न्यायमूर्ति लीसा गिल ने शपथ लेने के बाद आधिकारिक तौर पर अपना पदभार ग्रहण किया। उन्हें आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नज़ीर ने शपथ दिलाई।

यह समारोह विजयवाड़ा के लोक भवन में कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और न्यायपालिका के सदस्यों की उपस्थिति में आयोजित किया गया।

इस प्रोसेस में शामिल था,

  • भारत के राष्ट्रपति द्वारा जारी किया गया अपॉइंटमेंट का वारंट पढ़ना।
  • साथ ही, औपचारिक शपथ ग्रहण समारोह भी हुआ।
  • यह शपथ समारोह जजों, ब्यूरोक्रेट्स और गणमान्य लोगों की मौजूदगी में होता है।

पहली महिला मुख्य न्यायाधीश

  • न्यायमूर्ति गिल की नियुक्ति ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनी हैं।
  • यह उपलब्धि भारत की न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को उजागर करती है।
  • उनकी नियुक्ति न्यायपालिका में लैंगिक समानता की दिशा में हुई प्रगति को दर्शाती है, और साथ ही योग्यता एवं अनुभव को मिली मान्यता का भी प्रतीक है।
  • साथ ही, कानूनी पेशे में महिलाओं को प्रोत्साहन देना।
  • इस तरह के घटनाक्रम न्यायिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और समावेशिता को सुदृढ़ करेंगे।

CM चंद्रबाबू नायडू ने दी बधाई

  • मुख्य न्यायाधीश के शपथ ग्रहण समारोह से पहले, आंध्र प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने विजयवाड़ा में न्यायमूर्ति लिसा गिल से मुलाकात की और उन्हें अपनी शुभकामनाएं दीं।
  • बैठक में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच समन्वय के महत्व पर भी ज़ोर दिया गया।
  • साथ ही, उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए उन्हें सम्मानित किया गया और राज्य नेतृत्व की ओर से उन्हें समर्थन भी मिला।

शपथ ग्रहण समारोह में कौन-कौन शामिल हुए?

इस समारोह में कई महत्वपूर्ण गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति देखी गई, जो इसके महत्व को दर्शाती है।

प्रमुख उपस्थित लोगों में शामिल थे:

  • प्रथम महिला समीरा नज़ीर
  • मंत्री और संसद सदस्य
  • वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी
  • न्यायाधीश और न्यायिक अधिकारी

भारत ने जैव विविधता परियोजना हेतु यूएनडीपी और ग्लोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी के साथ साझेदारी की

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने एक प्रमुख पाँच-वर्षीय जैव विविधता परियोजना शुरू की है। इस परियोजना का उद्देश्य तमिलनाडु और मेघालय में ज़मीनी स्तर के शासन को मज़बूत करना है। इस परियोजना को ग्लोबल एनवायरनमेंट फ़ैसिलिटी और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम का समर्थन प्राप्त है। साथ ही, इस पहल का मुख्य ज़ोर जैव विविधता को स्थानीय नियोजन प्रणालियों में एकीकृत करने के साथ-साथ समुदायों को सशक्त बनाने और सतत आजीविका को बढ़ावा देने पर है।

स्थानीय शासन पर आधारित एक ऐतिहासिक जैव विविधता पहल

“जैव विविधता संरक्षण की प्रतिबद्धताओं को सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ बनाना” नामक यह नव-लॉन्च की गई परियोजना, 4.88 मिलियन अमेरिकी डॉलर के वित्तीय सहयोग के साथ वर्ष 2025 से 2030 तक संचालित होगी।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण को सीधे तौर पर स्थानीय शासन के ढांचों में—और विशेष रूप से ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDPs) के माध्यम से—शामिल करना है।

यह इस बात को भी सुनिश्चित करता है कि संरक्षण अब विकास से अलग न रहे, बल्कि ग्रामीण नियोजन और निर्णय-निर्माण का एक केंद्रीय हिस्सा बन जाए।

पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) और जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) जैसी संस्थाओं को मज़बूत करके, यह परियोजना एक ऐसी व्यवस्था बनाती है जिसमें स्थानीय समुदाय जैव विविधता संसाधनों का सक्रिय रूप से प्रबंधन करते हैं और उनसे लाभ उठाते हैं।

फोकस लैंडस्केप: भारत के पारिस्थितिक हॉटस्पॉट

यह प्रोजेक्ट रणनीतिक रूप से दो पारिस्थितिक रूप से समृद्ध लैंडस्केप में स्थित है।

तमिलनाडु: वन्यजीव गलियारे और सामुदायिक ज्ञान

सत्यमंगलम क्षेत्र पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट के मिलन बिंदु पर स्थित है, जिसमें शामिल हैं:

  • मुदुमलाई टाइगर रिज़र्व
  • सत्यमंगलम टाइगर रिज़र्व

ये क्षेत्र वन्यजीव गलियारों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो विभिन्न प्रजातियों के आवागमन में सहायक होते हैं। इसके अतिरिक्त, यहाँ रहने वाले वन-सीमावर्ती समुदायों के पास गहन पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान मौजूद है, जिसे अब GPDPs के माध्यम से औपचारिक रूप से शासन व्यवस्था में एकीकृत किया जाएगा।

मेघालय: समुदाय-नेतृत्व वाली संरक्षण प्रणालियाँ

गारो हिल्स क्षेत्र में, यह परियोजना निम्नलिखित को शामिल करती है:

  • नोकरेक बायोस्फीयर रिज़र्व
  • बालपाक्रम राष्ट्रीय उद्यान
  • सिजू वन्यजीव अभयारण्य

मेघालय में ‘ग्राम रोज़गार परिषदों’ (VECs) का उपयोग किया जाता है, जो ग्राम पंचायतों की ही तरह कार्य करती हैं। ये संस्थाएँ संरक्षण प्रयासों का नेतृत्व करेंगी और सामुदायिक स्वामित्व सुनिश्चित करेंगी।

परियोजना के मुख्य उद्देश्य

यह परियोजना यह सुनिश्चित करती है कि जैव विविधता को स्थानीय विकास योजनाओं में शामिल किया जाए।

यह पर्यावरणीय लक्ष्यों को ग्रामीण विकास की प्राथमिकताओं के साथ जोड़कर शासन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाती है।

इसका मुख्य आकर्षण कुछ ऐसे टिकाऊ वित्तपोषण तंत्रों की शुरुआत है, जैसे:

  • पहुँच और लाभ साझाकरण (ABS)—जैव विविधता के संरक्षण के लिए समुदायों को पुरस्कृत करने हेतु।
  • साथ ही, निजी क्षेत्र की भागीदारी को आकर्षित करने के लिए CSR सह-वित्तपोषण।
  • हरित सूक्ष्म-उद्यम—पर्यावरण-अनुकूल आजीविका के अवसर पैदा करने हेतु।

ये दृष्टिकोण संरक्षण और सामुदायिक कल्याण के बीच एक सीधा आर्थिक जुड़ाव स्थापित करेंगे।

क्षमता निर्माण और ज्ञान साझाकरण

इस पहल का मुख्य उद्देश्य सफल मॉडलों का दस्तावेज़ीकरण करना और MoEFCC तथा NBA के मंचों के माध्यम से उनका राष्ट्रव्यापी विस्तार करना है।

विशेष ध्यान निम्नलिखित के सशक्तिकरण पर केंद्रित होगा:

  • महिलाएँ
  • अनुसूचित जातियाँ (SCs)
  • आदिवासी समुदाय

भारत के लिए यह परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत दुनिया के उन देशों में से एक है जहाँ जैव-विविधता (megadiverse) सबसे अधिक है, लेकिन इसके बावजूद इसे विकास और जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है। यह परियोजना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह स्थानीय शासन को वैश्विक पर्यावरणीय लक्ष्यों से जोड़ती है।

यह सीधे तौर पर निम्नलिखित का समर्थन करता है:

  • भारत की हाल ही में अपडेट की गई राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP 2024-2030)।
  • साथ ही, कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क के तहत 30×30 लक्ष्य।
  • और पेरिस समझौते के तहत भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs)।

IPL 2026: पंजाब किंग्स की शानदार जीत, 265 रन के विशाल लक्ष्य को किया पार

IPL 2026: पंजाब किंग्स ने दिल्ली कैपिटल्स को छह विकेट से हराकर आईपीएल इतिहास का सबसे बड़ा रन चेज किया है। दिल्ली ने केएल राहुल के नाबाद 152 रन की बदौलत 20 ओवर में दो विकेट पर 264 रन बनाए। जवाब में पंजाब के लिए प्रभसिमरन सिंह और कप्तान श्रेयस अय्यर ने अर्धशतक लगाए जिससे टीम ने 18.5 ओवर में चार विकेट पर 265 रन बनाकर मैच अपने नाम किया। आईपीएल का यह सबसे बड़ा रन चेज है। ये रिकॉर्ड पहले भी पंजाब के ही नाम था जिन्होंने साल 2024 में केकेआर के खिलाफ दो विकेट पर 262 रन बनाए थे। अब पंजाब ने अपने इस रिकॉर्ड में सुधार किया है।

पंजाब का आईपीएल 2026 (IPL 2026) में अजेय अभियान जारी है और वह अंक तालिका में शीर्ष पर बरकरार है। पंजाब के लिए प्रभसिमरन सिंह ने सबसे ज्यादा 26 गेंदों पर नौ चौकों और पांच छक्कों की मदद से 76 रन बनाए, जबकि श्रेयस 36 गेंदों पर तीन चौकों और सात छक्कों के सहारे 71 रन बनाकर नाबाद रहे। दिल्ली के लिए कुलदीप यादव ने दो विकेट झटके, जबकि अक्षर पटेल और विपराज निगम को एक-एक सफलता मिली।

प्रभसिमरन सिंह और प्रियांश आर्य का बड़ा योगदान

पंजाब की टीम को इतनी बड़ी जीत दर्ज करवाने में उसके दोनों ओपनर्स प्रभसिमरन सिंह और प्रियांश आर्य का बड़ा योगदान रहा। दोनों ने पहले विकेट के लिए मात्र 6.5 ओवरों में 126 रनों की साझेदारी की। प्रियांश आर्य ने 43 और प्रभसिमरन सिंह ने 26 गेंदों में 76 रनों की धुआंधार पारी खेली। पंजाब को अंत में जीत दिलाने में सबसे बड़ी भूमिका उसके कप्तान श्रेयस अय्यर ने निभाई। उन्होंने मात्र 36 गेंदों में 3 चौके और 7 छक्के लगाते हुए नाबाद 71 रनों की पारी खेली। निहाल वढेरा ने 15 गेंदों में 25 और शशांक सिंह ने 10 गेंदों में नाबाद 19 रनों की पारी खेली।

IPL में सबसे सफल चेज़

IPL के इतिहास में सबसे सफल चेज़ के मामले में पंजाब किंग्स अब टॉप दो स्थानों पर काबिज़ है।

  • 265/4 बनाम DC (2026)
  • 262/2 बनाम KKR (2024)
  • 247/2 SRH ने 2024 में SRH के खिलाफ जीत हासिल की
  • 230/4 RCB ने 2024 में GT के खिलाफ जीत हासिल की

 

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