UNFCCC को भारत ने दिए नए जलवायु लक्ष्य, 2031–2035 की रणनीति तय

भारत ने 2031-2035 के लिए अपने अपडेटेड लक्ष्य जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) को सौंप दिए हैं। यह नई योजना उत्सर्जन कम करने, स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार करने और वनावरण बढ़ाने पर केंद्रित है। ये लक्ष्य मार्च 2026 में कैबिनेट की मंज़ूरी के बाद घोषित किए गए थे, और ये लक्ष्य जलवायु परिवर्तन से निपटने में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाएंगे। इन लक्ष्यों का उद्देश्य उत्सर्जन को काफ़ी हद तक कम करना और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है। भारत ने पर्यावरण के क्षेत्र में काफ़ी प्रगति की है, और वह 2070 के ‘नेट ज़ीरो’ लक्ष्य के और करीब पहुँचने का प्रयास करेगा।

भारत का नया NDC (2031-2035) क्या है?

भारत का अपडेटेड NDC विकास की ज़रूरतों को संतुलित करते हुए जलवायु संबंधी महत्वाकांक्षाओं के उच्च स्तर को दर्शाता है। ये लक्ष्य जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पेरिस समझौते के तहत की गई वैश्विक प्रतिबद्धताओं का हिस्सा हैं।

नए लक्ष्य तीन मुख्य स्तंभों पर केंद्रित हैं:

  • उत्सर्जन में कमी,
  • स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण,
  • कार्बन पृथक्करण।

मुख्य लक्ष्य घोषित

  • GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 47% की कमी
  • 60% स्थापित बिजली क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों से
  • जंगलों और वृक्ष आवरण के माध्यम से 3.5-4 अरब टन कार्बन सिंक

शुरुआती उपलब्धियों से लेकर ऊँची महत्वाकांक्षाओं तक

भारत ने अपने जलवायु संबंधी वादों को लगातार तय समय से पहले ही पूरा किया है।

2015 के मूल NDC लक्ष्यों में 2030 तक उत्सर्जन की तीव्रता को 33-35% तक कम करना और 40% गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करना शामिल था।

खास बात यह है कि भारत ने ये उपलब्धियाँ हासिल कर ली हैं:

  • 36% उत्सर्जन तीव्रता में कमी (2020 तक)
  • 52.57% गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता (फरवरी 2026)

इस मज़बूत प्रदर्शन ने भारत को 2035 के लिए अपनी महत्वाकांक्षा के मानदंडों को और ऊँचा उठाने और वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका निभाने में सक्षम बनाया है।

स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा और हरित विकास रणनीति

भारत ने अपने नवीकरणीय ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकी के स्रोतों के विस्तार पर विशेष ज़ोर दिया है।

इसके साथ ही, प्रमुख पहलों का उद्देश्य जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम करना और सतत विकास को बढ़ावा देना है।

इस बदलाव को समर्थन देने वाली प्रमुख सरकारी योजनाओं में ये शामिल हैं:

  • ग्रीन हाइड्रोजन मिशन
  • PM सूर्य घर: मुफ़्त बिजली योजना
  • उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ
  • कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के लिए PM-KUSUM योजना

भारत इन जैसी पहलों के लिए विभिन्न देशों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है और सहयोग कर रहा है:

  • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA)
  • आपदा-रोधी बुनियादी ढाँचे के लिए गठबंधन (CDRI)

ये प्रयास भारत को वैश्विक जलवायु कार्रवाई में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करते हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) क्या हैं?

राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) वे जलवायु कार्य योजनाएँ हैं, जिन्हें UNFCCC के पेरिस समझौते के तहत अलग-अलग देशों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।

इसकी मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

  • हर देश को अपने लक्ष्य खुद तय करने होते हैं।
  • हर 5 साल में NDC को अपडेट करना होता है।
  • उत्सर्जन में कमी और अनुकूलन पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

यह CBDR-RC (साझी लेकिन अलग-अलग ज़िम्मेदारियाँ) के सिद्धांत द्वारा निर्देशित होता है।

खेल क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने हेतु भारत सरकार का बड़ा फैसला: 3 साल तक IP फीस माफ

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने खेल नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की घोषणा की है, जिसके तहत खेल से संबंधित बौद्धिक संपदा (IP) पंजीकरणों पर 3 साल की फीस माफ़ी दी जाएगी। यह घोषणा नई दिल्ली में ‘विश्व बौद्धिक संपदा दिवस’ समारोह के दौरान की गई थी, और इसने खेल क्षेत्र में नवाचार, विनिर्माण और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर भारत के बढ़ते फोकस को उजागर किया।

बौद्धिक संपदा पर 3 साल की IP शुल्क माफ़ी

सबसे महत्वपूर्ण घोषणा सभी खेल-संबंधी श्रेणियों में तीन वर्षों के लिए IP पंजीकरण शुल्क की पूरी माफ़ी थी, जिसमें शामिल हैं:

  • ट्रेडमार्क
  • कॉपीराइट
  • पेटेंट
  • डिज़ाइन
  • भौगोलिक संकेतक (GI)
  • पारंपरिक ज्ञान

इस कदम का उद्देश्य स्टार्टअप्स, एथलीट्स, छात्रों और इनोवेटर्स को बिना किसी आर्थिक बाधा का सामना किए, अपने विचारों का कानूनी मालिकाना हक हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

सरकार रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सहायता भी देगी, जिससे पहली बार आवेदन करने वालों के लिए यह प्रक्रिया और भी सुगम हो जाएगी।

यह पहल ‘इनोवेट, पेटेंट, प्रोड्यूस, प्रॉस्पर’ (Innovate, Patent, Produce, Prosper) जैसे व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप भी है, जिसका मुख्य ज़ोर विचारों को आर्थिक संपत्तियों में बदलने पर है।

कश्मीर विलो बैट: वैश्विक मंच पर भारत की कारीगरी

इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण GI-टैग वाले कश्मीर विलो क्रिकेट बैट पर दिया गया ज़ोर था, जो भारत की पारंपरिक कारीगरी और बौद्धिक संपदा की ताकत का प्रतीक है।

मंत्री ने यह भी बताया कि यह भारत में GI मान्यता प्राप्त कुछ चुनिंदा खेल उत्पादों में से एक है, और यह स्थानीय कौशल, विरासत तथा आर्थिक संभावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है।

इसके अलावा, इसकी वैश्विक पहुँच और ब्रांडिंग का विस्तार करने की भी आवश्यकता है। इस तरह के उत्पादों को बढ़ावा देने से निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है, रोज़गार के अवसर पैदा हो सकते हैं, और वैश्विक खेल सामान बाज़ार में भारत की उपस्थिति मज़बूत हो सकती है।

भारत को उत्पादन का एक बड़ा केंद्र बनाना

सरकार जम्मू-कश्मीर और मेरठ (उत्तर प्रदेश) जैसे क्षेत्रों में खेल-कूद के सामान बनाने वाले क्लस्टर्स (समूहों) को विकसित करने की भी योजना बना रही है।

इन क्लस्टर्स का उद्देश्य खेल-कूद के सामानों का घरेलू उत्पादन बढ़ाना और साथ ही स्थानीय सप्लाई चेन को मज़बूत करना है।

इसके अलावा, ये क्लस्टर रोज़गार के अवसर पैदा करेंगे और आयात पर निर्भरता को कम करेंगे। साथ ही, बैट, बॉल, हॉकी के उपकरण, जिम के औज़ार और ट्रेनिंग गियर जैसे उत्पादों के स्वदेशी निर्माण में भी तेज़ी आएगी।

स्मार्ट वियरेबल्स हैकाथॉन का शुभारंभ

मंत्री ने ‘विकसित भारत डिजिटल मैट्रिक्स 2026 हैकाथॉन’ का भी शुभारंभ किया, जिसका आयोजन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के साथ मिलकर किया जाएगा।

यह छह महीने की पहल इन बातों पर केंद्रित है:

  • स्मार्ट वियरेबल टेक्नोलॉजी का विकास करना।
  • यह फिटनेस, स्वास्थ्य और परफॉर्मेंस की ट्रैकिंग को बेहतर बनाएगी।
  • साथ ही, डिज़ाइन और टेक्नोलॉजी में इनोवेशन को बढ़ावा देगी।

अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस 2026: गति, अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक एकता का उत्सव

अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस हर साल 29 अप्रैल को विशव स्तर पर मनाया जाता है। यह दिन नृत्य को अभिव्यक्ति, संस्कृति और संचार के एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में रेखांकित करता है। इसे ‘विश्व नृत्य दिवस’ के नाम से भी जाना जाता है, और यह अवसर सभी आयु वर्ग के लोगों को गति और लय के माध्यम से आपस में जुड़ने के लिए प्रेरित करता है। यह दिन हर साल जीन-जॉर्जेस नोवरे की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है, और यह हमें याद दिलाता है कि नृत्य भाषा और सीमाओं से परे है। साथ ही, यह आज की तेज़ी से बदलती दुनिया में रचनात्मकता, एकता और भावनात्मक कल्याण को भी बढ़ावा देता है।

अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस 2026

अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस हर साल 29 अप्रैल को दुनिया भर में मनाया जाता है, और यह कलाकारों, छात्रों और समुदायों को नृत्य की सुंदरता का जश्न मनाने के लिए एक साथ लाता है। इसका आयोजन इंटरनेशनल थिएटर इंस्टीट्यूट द्वारा UNESCO के सहयोग से किया जाता है, जो इसे विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त एक सांस्कृतिक कार्यक्रम बनाता है। इस दिन को ‘विश्व नृत्य दिवस’ के नाम से भी जाना जाता है, और इसका मुख्य उद्देश्य नृत्य के बारे में जागरूकता फैलाना है—कि यह मानवीय अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक विरासत का एक अनिवार्य हिस्सा है।

अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस क्या है?

अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस एक वैश्विक पहल है, जो नृत्य को केवल एक प्रदर्शन कला से कहीं अधिक के रूप में बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। यह नृत्य को आत्म-अभिव्यक्ति, शिक्षा और सांस्कृतिक पहचान के माध्यम के रूप में भी उजागर करता है। यह उत्सव शुरुआती लोगों से लेकर पेशेवरों तक—सभी को नृत्य में शामिल होने और रोज़मर्रा के जीवन में इसके महत्व को समझने के लिए प्रोत्साहित करता है। इसका उद्देश्य नृत्य को अधिक सुलभ बनाना और दुनिया भर की शिक्षा प्रणालियों में इसे मान्यता दिलाना भी है।

अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस क्यों मनाया जाता है?

इस दिन को मनाने का उद्देश्य केवल मनोरंजन तक ही सीमित नहीं है। यह इस बात की याद दिलाता है कि नृत्य किस प्रकार विभिन्न संस्कृतियों और पृष्ठभूमियों के लोगों को आपस में जोड़ता है। इसे नृत्य में वैश्विक भागीदारी को बढ़ावा देने, युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और नृत्य शिक्षा के महत्व को उजागर करने के लिए मनाया जाता है। यह दिन कलात्मक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी समर्थन करता है, और नृत्य को संचार तथा एकता का एक माध्यम बनाता है। नृत्य मूल रूप से एक ऐसी सार्वभौमिक भाषा बन जाता है, जो बिना शब्दों के संवाद करती है और लोगों को आपस में जोड़ती है।

विश्व नृत्य दिवस का महत्व

नृत्य का व्यक्तिगत और सामाजिक, दोनों ही संदर्भों में गहरा महत्व है। यह केवल एक कला रूप ही नहीं है, बल्कि यह भावनाओं, परंपराओं और पहचान का प्रतिबिंब भी है। इसके अलावा, नृत्य करने से शारीरिक फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, साथ ही आत्मविश्वास और रचनात्मकता भी बढ़ती है।

यह लोगों को उन भावनाओं को व्यक्त करने का अवसर देता है, जिन्हें अक्सर शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता। व्यापक स्तर पर, नृत्य सांस्कृतिक विविधता और वैश्विक सद्भाव को बढ़ावा देता है, और इस प्रकार यह एक विविध दुनिया में एकता का एक शक्तिशाली माध्यम बन जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस का इतिहास

अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस की स्थापना वर्ष 1982 में अंतर्राष्ट्रीय थिएटर संस्थान द्वारा की गई थी। इस तारीख को जीन-जॉर्जेस नोवरे की जयंती के सम्मान में चुना गया था; इन्होंने बैले नृत्य में क्रांति ला दी थी और इन्हें आधुनिक नृत्य थिएटर का जनक माना जाता है।

इस पहल से पहले, नृत्य को अक्सर वह पहचान और संस्थागत सहयोग नहीं मिल पाता था, जिसका वह हकदार था। इस दिवस की शुरुआत से नृत्य को मुख्यधारा की शिक्षा में शामिल करने में मदद मिलेगी, और साथ ही नर्तकों तथा उनकी कला को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी।

विश्व नृत्य दिवस कैसे मनाया जाता है

अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस दुनिया भर में विविध और जीवंत तरीकों से मनाया जाता है। विभिन्न नृत्य शैलियों और परंपराओं को प्रदर्शित करने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रस्तुतियों और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है। स्कूलों और कॉलेजों में छात्र प्रतियोगिताओं, सामूहिक प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। इसके अलावा, जागरूकता फैलाने और भागीदारी को प्रोत्साहित करने में कार्यशालाएँ और ऑनलाइन अभियान भी अहम भूमिका निभाते हैं। ये उत्सव न केवल लोगों का मनोरंजन करते हैं, बल्कि उन्हें नृत्य के महत्व और विविधता के बारे में शिक्षित भी करते हैं।

RBI ने शहरी सहकारी बैंकों के लिए ‘मिशन सक्षम’ की शुरुआत की

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शहरी सहकारी बैंक (यूसीबी) क्षेत्र के क्षमता निर्माण के लिए 28 अप्रैल 2026 को ‘मिशन सक्षम’ की शुरुआत की। आरबीआई ने एक बयान में कहा कि यूसीबी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए पहले से ही विभिन्न नियामकीय एवं पर्यवेक्षी कदम उठाए जा रहे हैं और यह मिशन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

‘मिशन सक्षम’ के तहत यूसीबी से जुड़े विभिन्न वर्गों के लिए बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों से करीब 1.40 लाख प्रतिभागियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। लाभान्वित होने वालों में यूसीबी के निदेशक मंडल के सदस्य, वरिष्ठ प्रबंधन, जोखिम, अनुपालन और ऑडिट प्रमुख, आईटी और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारी शामिल होंगे।

सामग्री क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध

रिजर्व बैंक ने कहा कि संभव होने पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सामग्री क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित हो सके। इस मिशन का खाका यूसीबी के शीर्ष निकाय और राष्ट्रीय/राज्य सहकारी महासंघों के साथ परामर्श कर तैयार किया गया है।

अनुपालन संस्कृति में सुधार

केंद्रीय बैंक ने कहा कि इस पहल से शहरी सहकारी बैंकों में प्रबंधन एवं संचालन क्षमता मजबूत होगी, अनुपालन संस्कृति में सुधार आएगा और संस्थागत मजबूती बढ़ेगी। यह मिशन यूबीसी के अम्ब्रेला संगठन और राष्ट्रीय और स्टेट को-ऑपरेटिव फेडरेशन के साथ सलाह करेक डिजाइन किया गया है। मिशन सक्षम का उद्देश्य खुद को मजबूत करने वाला इकोसिस्टम बनाना है, जो यूसीबी क्षेत्र की सिस्टमिक स्टेबिलिटी और वृद्धि और विकास में अहम योगदान देगा।

भरत कपूर कौन थे? जानिए उनकी शिक्षा, करियर और भारतीय सिनेमा में योगदान

भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता भरत कपूर का 27 अप्रैल 2026 को उम्र से जुड़ी दिक्कतों के कारण निधन हो गया। वे 80 साल के थे। वे बीते तीन दिनों से बीमार थे और अस्पताल में भर्ती थे। भरत कपूर के करीबी दोस्त और अभिनेता अवतार गिल ने इस खबर की पुष्टि की है। भरत कपूर ने फिल्मों से लेकर छोटे पर्दे तक अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया। मगर, उनके अभिनय सफर की शुरुआत रंगमंच से हुई थी।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

भरत कपूर का जन्म 15 अक्टूबर, 1945 को भारत में हुआ था। कम उम्र से ही उन्होंने अभिनय और प्रदर्शन में गहरी रुचि दिखाई थी। हालाँकि उनकी औपचारिक शिक्षा के बारे में विस्तृत जानकारी सीमित है, लेकिन सिनेमा के प्रति उनके जुनून ने उन्हें अभिनय को एक पूर्णकालिक करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उनके शुरुआती वर्ष समर्पण और कड़ी मेहनत से संवारे गए, जिसने उन्हें भारतीय फिल्म उद्योग में एक मजबूत नींव स्थापित करने में मदद की।

फ़िल्मी करियर और शोहरत की राह

कपूर ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1972 में फ़िल्म ‘जंगल में मंगल’ से की थी। इन वर्षों के दौरान, उन्होंने 150 से अधिक फ़िल्मों में काम किया और कई तरह की भूमिकाएँ निभाईं। उन्हें विशेष रूप से पुलिस अफ़सरों, वकीलों और नकारात्मक किरदारों को बड़ी गहराई से निभाने के लिए जाना जाता था। उनकी कुछ सबसे यादगार फ़िल्मों में ‘नूरी’, ‘लव स्टोरी’, ‘आख़िरी रास्ता’, ‘खुदा गवाह’, ‘साजन चले ससुराल’ और ‘मीनाक्षी: ए टेल ऑफ़ थ्री सिटीज़’ शामिल हैं; इन फ़िल्मों ने उनकी बहुमुखी प्रतिभा को बखूबी दर्शाया है।

टेलीविज़न करियर और लोकप्रिय शो

अभिनय के मामले में भरत कपूर का छोटे पर्दे पर भी खूब दबदबा रहा। उन्हें कैंपस, परंपरा, राहत, सांस, अमानत, भाग्यविधाता, तारा, चुनौती और चंद्रकांता जैसे टीवी शो में देखा गया। भरत कपूर ने करीब चार दशक तक इंडस्ट्री में काम किया। अभिनय के दम पर छोटी भूमिकाओं से भी बड़ा एक्टर कैसे बना जा सकता है, यह भरत कपूर से सीखा जा सकता है। टेलीविज़न पर निभाई गई उनकी भूमिकाओं ने उन्हें पूरे देश के दर्शकों से जुड़ने में मदद की, खासकर भारतीय टेलीविज़न के ‘सुनहरे दौर’ के दौरान। उनके अभिनय को उसकी यथार्थवादिता और भावनात्मक गहराई के लिए सराहा गया।

निर्देशक के रूप में योगदान

अभिनय के अलावा, भरत कपूर ने फ़िल्म-निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रखा। उन्होंने ‘रईसज़ादा’ (1990) और ‘बरसात की रात’ (1998) जैसी फ़िल्मों का निर्देशन भी किया है। एक निर्देशक के तौर पर उनके काम में कहानी कहने की कला और सिनेमा की उनकी गहरी समझ साफ़ झलकती है। इस बात ने उनके करियर को एक नया आयाम दिया है, और कैमरे के आगे और पीछे—दोनों ही जगहों पर उनकी प्रतिभा को साबित किया है।

सिनेमा में विरासत और योगदान

भारतीय सिनेमा में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे अपनी सशक्त सहायक भूमिकाओं और अपने द्वारा निभाए गए हर किरदार में यथार्थता लाने के लिए जाने जाते थे। फिल्मों और टेलीविजन, दोनों ही क्षेत्रों में उनके काम ने कई उभरते हुए कलाकारों को प्रेरित किया। उनके निधन के बाद भी, उनका अभिनय दर्शकों का मनोरंजन करता रहेगा और हिंदी सिनेमा के समृद्ध इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा।

भरत कपूर की शादी

भरत कपूर की शादी लोपा कपूर से हुई। इनके तीन बच्चे हैं। इनके बेटे राहुल कपूर निर्देशक हैं। बेटी का नाम कविता अरोड़ा है, जिनकी शादी अजय अरोड़ा से हुई है। भरत कपूर का एक बेटा सागर कपूर है।

 

Symbiosis University ने एशिया की पहली UNESCO चेयर शुरू की

सिम्बायोसिस स्किल्स एंड प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी ने ‘जेंडर इन्क्लूजन और स्किल डेवलपमेंट’ पर एशिया की पहली UNESCO चेयर शुरू की है। इस पहल का मकसद AI, रोबोटिक्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे तेज़ी से बढ़ते सेक्टर्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाकर उन्हें सशक्त बनाना है। यह ऐतिहासिक कदम भारत को स्किल डेवलपमेंट और भविष्य की नौकरियों में, खासकर महिलाओं के लिए, जेंडर गैप को पाटने के वैश्विक प्रयासों में सबसे आगे ला खड़ा करेगा।

एशिया की पहली UNESCO चेयर ‘जेंडर इंक्लूजन’ पर लॉन्च 

इस पहल का उद्घाटन कौशल मंत्रालय के श्री जयंत चौधरी ने एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान किया, जिसका विषय था ‘Women Leading the Future of Work’ (महिलाएं काम के भविष्य का नेतृत्व कर रही हैं)।

इस लॉन्च की मुख्य बातें:

  • यह एशिया में अपनी तरह की पहली UNESCO चेयर है।
  • यह उभरते उद्योगों में जेंडर इंक्लूजन (लैंगिक समावेश) पर केंद्रित होगी।
  • इसमें UNESCO के साथ भी सहयोग शामिल है।

इस कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ. स्वाति मजूमदार कर रही हैं, जो SSPU की प्रो-चांसलर थीं।

भविष्य के कौशलों और उभरती तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करना

इस चेयर का उद्देश्य महिलाओं को अगली पीढ़ी के उद्योगों के लिए तैयार करना भी है, जहाँ पारंपरिक रूप से उनकी भागीदारी कम रही है।

इसके अंतर्गत लक्षित प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
  • रोबोटिक्स और ऑटोमेशन
  • सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी
  • रक्षा टेक्नोलॉजी
  • उन्नत विनिर्माण

इन क्षेत्रों को अब ‘सनराइज़ सेक्टर’ (तेज़ी से उभरते क्षेत्र) माना जाता है, जिनमें विकास की उच्च क्षमता और रोज़गार के भरपूर अवसर मौजूद हैं।

प्रशिक्षण और रोज़गार में सफलता पर अब तक का प्रभाव

इस पहल ने अब तक काफ़ी मज़बूत नतीजे दिखाए हैं।

  • कुल मिलाकर 10,000 से ज़्यादा वंचित लड़कियों को प्रशिक्षित किया गया है।
  • साथ ही, उन्हें अत्याधुनिक तकनीकों से भी परिचित कराया गया है।
  • और कई उम्मीदवारों को अच्छी-खासी सैलरी वाली नौकरियाँ मिली हैं।

यह भारत में कौशल-आधारित शिक्षा मॉडलों की बढ़ती सफलता को दर्शाता है।

वैश्विक सहयोग और उद्योग की भागीदारी

इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में निम्नलिखित संस्थाओं की भागीदारी देखने को मिली:

  • अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन
  • UNESCO-UNEVOC
  • अग्रणी कंपनियाँ जैसे:
  • लार्सन एंड टुब्रो
  • IBM
  • Capgemini
  • Barclays

यह भागीदारी उद्योग और शिक्षा जगत के बीच मज़बूत सहयोग को रेखांकित करती है, जो वास्तविक दुनिया के कौशल विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

नई पहलें, मेंटरशिप और अनुसंधान

इस कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी को मज़बूत करने के लिए नए कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं।

शुरू की गई प्रमुख पहलें

  • STEM क्षेत्र में लड़कियों के लिए ‘कुशल साथी’ मेंटरशिप कार्यक्रम।
  • साथ ही, लिंग और कार्य पर आधारित एक अनुसंधान संकलन का विमोचन।

इन पहलों का उद्देश्य दीर्घकालिक मार्गदर्शन, सहयोग और करियर के रास्ते तैयार करना है।

UNESCO Chair क्या है?

UNESCO Chair एक ऐसा कार्यक्रम है जिसे UNESCO द्वारा इन उद्देश्यों के लिए स्थापित किया गया है:

  • अनुसंधान और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
  • यह अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को भी प्रोत्साहित करेगा।
  • यह शिक्षा, स्थिरता और समानता जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान करेगा।

MobiKwik को RBI से NBFC की मंज़ूरी मिली, डिजिटल लेंडिंग के क्षेत्र में उतरने को तैयार

फिनटेक कंपनी One MobiKwik Systems को भारतीय रिज़र्व बैंक से नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) लाइसेंस के लिए मंज़ूरी मिल गई है। इस मंज़ूरी के साथ ही कंपनी के इतिहास में एक और अहम पड़ाव जुड़ गया है। इस मंज़ूरी से कंपनी को रेगुलेटेड लेंडिंग के क्षेत्र में विस्तार करने का मौका मिलेगा और वह अपनी एक अलग फाइनेंशियल सर्विसेज़ विंग शुरू कर सकेगी।

MobiKwik का NBFC लाइसेंस RBI ने मंज़ूर किया

MobiKwik ने घोषणा की है कि NBFC लाइसेंस के लिए उसके आवेदन को भारतीय रिज़र्व बैंक ने मंज़ूर कर लिया है।

इस मंज़ूरी से कंपनी को औपचारिक रूप से विनियमित ऋण क्षेत्र में प्रवेश करने में मदद मिलेगी।

इस लाइसेंस के साथ,

  • मोबिक्विक सीधे लोन दे सकता है।
  • यह अपने क्रेडिट प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को भी बढ़ा रहा है।
  • यह रेगुलेटेड फाइनेंशियल फ्रेमवर्क के तहत भी काम करता है।

खबर है कि यह मंज़ूरी चार महीने के अंदर मिल जाएगी और यह कंपनी पर रेगुलेटरी के भरोसे को दिखाता है।

MobiKwik Financial Services (MFSPL) की शुरुआत

मंज़ूरी मिलने के बाद, MobiKwik अपनी नई लेंडिंग डिवीज़न शुरू करेगा।

MobiKwik फाइनेंशियल सर्विसेज़ प्राइवेट लिमिटेड (MFSPL)

यह कंपनी की पूरी तरह से अपनी सहायक कंपनी है।

यह नई इकाई खास क्रेडिट प्रोडक्ट्स डिज़ाइन करने पर ध्यान देगी, साथ ही यह ग्राहकों और व्यापारियों, दोनों को सेवाएँ देगी और अपनी डिजिटल लेंडिंग क्षमताओं का विस्तार करेगी।

यह कदम पेमेंट्स से हटकर पूरी तरह से वित्तीय सेवाएँ देने की दिशा में एक रणनीतिक बदलाव का संकेत है।

कंपनी के नेतृत्व ने क्या कहा

उपासना टाकू के अनुसार, यह मंज़ूरी कंपनी के विकास में एक अहम पड़ाव है।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि:

  • यह मंज़ूरी MobiKwik की विश्वसनीयता को मज़बूत करेगी।
  • इससे एक बड़े पैमाने पर काम करने वाले फ़ाइनेंशियल प्लेटफ़ॉर्म में बदलने में मदद मिलेगी।
  • इससे विकास और नए प्रयोगों के लिए नए रास्ते खुलेंगे।

मंज़ूरी मिलने में लगी कम समय-सीमा रेगुलेटर के भरोसे को भी दिखाती है।

मज़बूत कस्टमर बेस और टेक्नोलॉजी का फ़ायदा

MobiKwik के पास पहले से ही एक बड़ा डिजिटल इकोसिस्टम है, जो उसके लेंडिंग बिज़नेस के विस्तार में मददगार साबित होगा।

इसकी मुख्य ताकतों में शामिल हैं:

  • 18.6 करोड़ से ज़्यादा यूज़र्स
  • बेहतरीन टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर
  • मज़बूत रिस्क अंडरराइटिंग सिस्टम

NBFC क्या है?

NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी) एक वित्तीय संस्था है, जिसे RBI द्वारा रेगुलेट किया जाता है।

  • यह लोन और क्रेडिट सुविधाएँ प्रदान कर सकती है।
  • यह बैंकों जैसी ही सेवाएँ भी देती है।
  • यह बिना पूरे बैंकिंग लाइसेंस के काम करती है।

NBFCs, क्रेडिट की पहुँच बढ़ाने में—विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहाँ सेवाएँ कम उपलब्ध हैं—एक अहम भूमिका निभाती हैं।

जानें कौन हैं एनालेना बेरबॉक, दिल्ली दौरे पर पहुंचीं UNGA अध्यक्ष

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की अध्यक्ष एनालेना बेरबॉक से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि बैठक में यूएन80,सतत विकास लक्ष्य, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा हुई। साथ ही आज के समय के अनुसार वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर दिया गया, खासकर वैश्विक दक्षिण के हितों को ध्यान में रखते हुए।

घटना का असर पूरी दुनिया पर

हैदराबाद हाउस में हुई इस मुलाकात में बेयरबॉक ने भारत सरकार के आमंत्रण और मेहमाननवाजी के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया में बढ़ते तनाव, विभाजन और संयुक्त राष्ट्र के मूल सिद्धांतों पर दबाव जैसी चुनौतियां सामने हैं। जलवायु परिवर्तन, कोविड जैसी महामारी और युद्धों के आर्थिक असर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी हिस्से की घटना का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।

भारत दुनिया का बड़ा लोकतंत्र

बेरबॉक ने कहा कि उनके कार्यकाल की प्राथमिकता संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा करना है। उन्होंने बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के देशों के गठबंधन की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का बड़ा लोकतंत्र है और ऐसे समय में वैश्विक सहयोग में उसकी अहम भूमिका है।

संयुक्त राष्ट्र का समर्थन

यूएनजीए प्रमुख ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र का चार्टर हमारा साझा जीवन बीमा है। इस 80वें सत्र में सत्र में महासभा के अध्यक्ष के रूप में मेरी प्राथमिकता संयुक्त चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन की रक्षा करना है। इसको लेकर मैंने बहुपक्षीय और संयुक्त राष्ट्र का समर्थन करने के लिए एक अंतर-क्षेत्रीय गठबंधन बनाने का भी आह्वान किया है। संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्य के रूप में भारत ने 80 वर्षों के इतिहास में अहम भूमिका निभाई है।

तीन लाख से अधिक सैनिक

बेरबॉक ने कहा कि 1948 से भारत ने शांति सुरक्षा के क्षेत्र में 53 से अधिक अभियानों में तीन लाख से अधिक सैनिक भेजे हैं। वैश्विक शांति की सेवा में 184 से अधिक भारतीय शांति सैनिकों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के समर्थन के रूप में भारत दक्षिण-दक्षिण सहयोग में अग्रणी भूमिका निभाता है।

नीति आयोग की DPI@2047 पहल लॉन्च: 30 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य

भारत ने एक बड़े आर्थिक बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है, क्योंकि NITI Aayog ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के लिए एक नई दो-चरणों वाली रणनीति पेश की है। DPI का यह नया चरण 2047 तक देश को $30 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखता है। इस रोडमैप का शीर्षक ‘DPI@2047: The Roadmap to Prosperity’ है, जो यह बताता है कि कैसे डिजिटल सिस्टम अलग-अलग क्षेत्रों में समावेशी विकास, इनोवेशन और उत्पादकता को बढ़ावा देंगे। इस विज़न का लक्ष्य प्रति व्यक्ति आय को $18,000 तक पहुँचाना भी है, जो बड़े पैमाने पर आर्थिक सशक्तिकरण का संकेत देता है।

DPI 2.0 और DPI 3.0: दो चरणों की व्याख्या

DPI 2.0 (2025–2035): सक्षम नागरिकों का निर्माण

DPI 2.0 का पहला चरण डिजिटल सशक्तिकरण की नींव को मज़बूत करने पर केंद्रित है। इसका लक्ष्य कुशल और सक्षम नागरिकों का एक व्यापक आधार तैयार करना है, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।

यह चरण विभिन्न डिजिटल उपकरणों तक पहुँच का विस्तार भी करेगा, सेवा वितरण में सुधार लाएगा, और यह भी सुनिश्चित करेगा कि अधिक-से-अधिक लोग—विशेष रूप से निम्न और मध्यम-आय वर्ग के लोग—आर्थिक अवसरों से लाभान्वित हो सकें।

PI 3.0 (2035–2047): नवाचार और समृद्धि को बढ़ावा

DPI 3.0 के दूसरे चरण का उद्देश्य ज़मीनी स्तर पर नवाचार और उच्च-मूल्य वाली आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देकर दीर्घकालिक समृद्धि के द्वार खोलना है।

यह एक ऐसी व्यवस्था की परिकल्पना करता है, जिसमें स्थानीय व्यवसाय और समुदाय वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में सक्रिय रूप से योगदान देंगे।

यह चरण नवाचार-आधारित विकास पर केंद्रित होगा, और यह क्रमिक प्रगति से आगे बढ़कर उत्पादकता-संचालित विकास की ओर अग्रसर होगा।

आधार से UPI तक: DPI 1.0 की नींव

भारत की डिजिटल यात्रा DPI 1.0 के साथ शुरू हुई, जिसने बदलाव की बुनियाद रखी। साथ ही, आधार और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) जैसे कई प्लेटफॉर्म्स ने डिजिटल पहचान और पेमेंट्स के क्षेत्र में पहले ही क्रांति ला दी है।

इन प्रणालियों ने निम्नलिखित को संभव बनाया है:

  • 1.3 अरब से अधिक लोगों के लिए डिजिटल पहचान।
  • साथ ही, निर्बाध और तत्काल वित्तीय लेन-देन।
  • और पूरे देश में वित्तीय समावेशन का विस्तार।

इस सफलता को आधार बनाते हुए, नए रोडमैप का उद्देश्य डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार करके इसे अर्थव्यवस्था के और भी गहरे क्षेत्रों तक पहुँचाना है।

MSMEs, कृषि और रोज़गार सृजन पर ज़ोर

यह रिपोर्ट उन प्रमुख क्षेत्रीय बदलावों पर भी प्रकाश डालती है जो समावेशी विकास को बढ़ावा देंगे।

MSMEs के लिए, इस रणनीति का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से बाज़ार तक पहुँच का विस्तार करना है, और यह कम लागत वाली रोज़गार पूर्ति प्रणालियों का उपयोग करके व्यवसायों को स्थानीय प्रतिभा से जोड़ेगी।

कृषि क्षेत्र में, डिजिटल सलाहकार सेवाएँ, बेहतर बाज़ार संपर्क और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं तक पहुँच उपलब्ध कराकर किसानों की आय बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया जा रहा है।

इस दृष्टिकोण से गरीबी, बेरोज़गारी और खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों का समाधान होने की उम्मीद है।

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों को सुदृढ़ बनाना

यह रोडमैप मानव विकास पर भी विशेष ज़ोर देता है।

इसके अंतर्गत निम्नलिखित बातें शामिल हैं:

  • विभिन्न स्थानीय भाषाओं में शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षा।
  • डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म तक बेहतर पहुँच।
  • केंद्र सरकार की सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज का विस्तार।

बड़ा विज़न: विकसित भारत 2047

NITI Aayog का यह रोडमैप भारत के उस बड़े लक्ष्य के अनुरूप है, जिसके तहत 2047 तक भारत को ‘विकसित भारत’ (Developed India) बनाना है; यह वर्ष भारत की स्वतंत्रता के 100 साल पूरे होने का प्रतीक होगा।

यह सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और नागरिक समाज के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर ज़ोर देगा।

विश्वास, डेटा सुरक्षा, इंटरऑपरेबिलिटी और इनोवेशन भी इस विज़न को हासिल करने के लिए अहम स्तंभ होंगे।

PV Sindhu ने BWF की परिषद के सदस्य के रूप में काम शुरू किया

दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू (PV Sindhu) ने विश्व बैडमिंटन महासंघ (BWF) की परिषद के सदस्य के रूप में अपना कार्यकाल शुरू कर दिया है और उन्होंने दुनिया भर के खिलाड़ियों के मसलों को उठाने का वादा किया।

BWF परिषद में पूर्ण मतदान का अधिकार

बैडमिंटन की सबसे सफल खिलाड़ियों में से एक सिंधू ने दिसंबर में BWF खिलाड़ी आयोग की अध्यक्ष के रूप में चुने जाने के बाद BWF परिषद में पूर्ण मतदान का अधिकार हासिल कर लिया है। सिंधू आधिकारिक तौर पर 2025 के आखिर में परिषद में शामिल हुई थी। उन्होंने 25 अप्रैल को यहां वार्षिक आम बैठक में पहली बार हिस्सा लिया और इस तरह से उनके कार्यकाल की शुरुआत हुई।

BWF काउंसिल में सिंधु की क्या भूमिका होगी?

BWF काउंसिल एक शीर्ष शासी निकाय है, जो दुनिया भर में बैडमिंटन के लिए नीतियों और रणनीतियों को आकार देने के लिए ज़िम्मेदार है।

सिंधु की ज़िम्मेदारियों में शामिल हैं:

  • अहम फ़ैसले लेने की प्रक्रियाओं में हिस्सा लेना।
  • दुनिया भर में खिलाड़ियों के हितों का प्रतिनिधित्व करना।
  • और नीति तथा विकास रणनीतियों में योगदान देना।

उनकी मौजूदगी यह सुनिश्चित करेगी कि एथलीटों की आवाज़ सीधे तौर पर शासन-प्रशासन में शामिल हो।

यह नियुक्ति ऐतिहासिक क्यों है?

BWF काउंसिल में उनका शामिल होना इसलिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी सक्रिय खिलाड़ी का वोट देने वाले पद पर होना बहुत कम देखने को मिलता है। इससे खिलाड़ियों और प्रशासकों के बीच की दूरी भी कम होगी और वैश्विक खेल प्रशासन में खिलाड़ियों की भागीदारी मज़बूत होगी।

यह कदम फ़ैसले लेने वाली संस्थाओं में खिलाड़ियों को ज़्यादा शामिल करने के लिए एक मिसाल कायम करेगा।

BWF नेतृत्व का समर्थन

BWF की अध्यक्ष खुनयिंग पटामा लीस्वाड्ट्राकुल ने सिंधु की नियुक्ति का स्वागत किया है और एथलीटों के प्रतिनिधित्व के महत्व को रेखांकित किया है।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि:

  • एथलीट ही खेल का मूल हैं।
  • उनकी आवाज़ ही भविष्य के निर्णयों को दिशा देनी चाहिए।
  • सिंधु अपने अनुभव, नेतृत्व और विश्वसनीयता को साथ लाएंगी।

 

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