विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की अध्यक्ष एनालेना बेरबॉक से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि बैठक में यूएन80,सतत विकास लक्ष्य, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा हुई। साथ ही आज के समय के अनुसार वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर दिया गया, खासकर वैश्विक दक्षिण के हितों को ध्यान में रखते हुए।
घटना का असर पूरी दुनिया पर
हैदराबाद हाउस में हुई इस मुलाकात में बेयरबॉक ने भारत सरकार के आमंत्रण और मेहमाननवाजी के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया में बढ़ते तनाव, विभाजन और संयुक्त राष्ट्र के मूल सिद्धांतों पर दबाव जैसी चुनौतियां सामने हैं। जलवायु परिवर्तन, कोविड जैसी महामारी और युद्धों के आर्थिक असर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी हिस्से की घटना का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।
भारत दुनिया का बड़ा लोकतंत्र
बेरबॉक ने कहा कि उनके कार्यकाल की प्राथमिकता संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा करना है। उन्होंने बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के देशों के गठबंधन की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का बड़ा लोकतंत्र है और ऐसे समय में वैश्विक सहयोग में उसकी अहम भूमिका है।
संयुक्त राष्ट्र का समर्थन
यूएनजीए प्रमुख ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र का चार्टर हमारा साझा जीवन बीमा है। इस 80वें सत्र में सत्र में महासभा के अध्यक्ष के रूप में मेरी प्राथमिकता संयुक्त चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन की रक्षा करना है। इसको लेकर मैंने बहुपक्षीय और संयुक्त राष्ट्र का समर्थन करने के लिए एक अंतर-क्षेत्रीय गठबंधन बनाने का भी आह्वान किया है। संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्य के रूप में भारत ने 80 वर्षों के इतिहास में अहम भूमिका निभाई है।
तीन लाख से अधिक सैनिक
बेरबॉक ने कहा कि 1948 से भारत ने शांति सुरक्षा के क्षेत्र में 53 से अधिक अभियानों में तीन लाख से अधिक सैनिक भेजे हैं। वैश्विक शांति की सेवा में 184 से अधिक भारतीय शांति सैनिकों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के समर्थन के रूप में भारत दक्षिण-दक्षिण सहयोग में अग्रणी भूमिका निभाता है।


Symbiosis University ने एशिय...
MobiKwik को RBI से NBFC की ...
नीति आयोग की DPI@204...


