चुनाव आयोग ने मतदाताओं की सुविधा हेतु मतदान केंद्रों पर मोबाइल डिपॉज़िट सुविधा शुरू की

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदान प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और मतदाताओं के अनुभव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण सुधारों की घोषणा की है: मोबाइल जमा सुविधा और चुनावी प्रचार मानदंडों का युक्तिकरण। इन सुधारों का उद्देश्य मतदान केंद्रों पर गोपनीयता बनाए रखना और मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग व चुनावी गतिविधियों की भीड़ को नियंत्रित करना है।

क्यों चर्चा में है?

23 मई 2025 को भारत निर्वाचन आयोग ने दो नई मतदान-दिवस सुधारों की घोषणा की:

  1. मतदान केंद्रों के बाहर मोबाइल जमा सुविधा की व्यवस्था

  2. प्रचार मानदंडों का पुनर्गठन, जो जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और चुनाव संचालन नियम, 1961 के अनुसार है।

मोबाइल जमा सुविधा

  • मोबाइल फोन मतदान केंद्र के अंदर ले जाना प्रतिबंधित रहेगा।

  • मतदाता अपने मोबाइल फोन को प्रवेश द्वार के पास बने साधारण बॉक्स या जूट बैग में जमा करेंगे।

  • फोन स्विच ऑफ स्थिति में रहना अनिवार्य है और केवल मतदान के बाद वापस लिया जा सकता है

  • स्थानीय परिस्थितियों में आवश्यकता अनुसार रिटर्निंग ऑफिसर विशेष छूट प्रदान कर सकते हैं।

  • यह कदम चुनाव संचालन नियम 49M के अनुरूप है, जो मतदाता की गोपनीयता सुनिश्चित करता है।

प्रचार मानदंडों का युक्तिकरण

  • मतदान केंद्र से 100 मीटर की दूरी के भीतर कोई चुनाव प्रचार नहीं किया जा सकेगा।

  • अनौपचारिक पहचान पर्ची वितरित करने वाले बूथ भी 100 मीटर से बाहर लगाए जाने होंगे।

  • यह सुधार मतदान के दिन तटस्थता, निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया गया है।

सुधारों के उद्देश्य

  • मतदाता सुविधा को बढ़ाना, विशेषकर:

    • वरिष्ठ नागरिक

    • महिला मतदाता

    • दिव्यांग (PwD) मतदाता

  • मतदान की गोपनीयता सुनिश्चित करना और डिजिटल व्यवधानों को रोकना।

  • अनधिकृत प्रचार गतिविधियों को रोकना

  • मतदान केंद्रों पर प्रबंधन को सुव्यवस्थित बनाना।

महत्त्व

  • मतदान के दौरान मोबाइल के बढ़ते उपयोग और उससे होने वाले व्यवधानों से निपटने में सहायक।

  • मतदान स्थल पर अधिक अनुशासित और सुरक्षित वातावरण बनाना।

  • मतदान प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखते हुए मतदाताओं की सहायता प्रणाली को आधुनिक बनाना

श्रेणी विवरण 
क्यों चर्चा में? मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की सुविधा हेतु मोबाइल जमा सुविधा लागू – भारत निर्वाचन आयोग की पहल
घोषणा किसने की? भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India)
मुख्य सुधार मोबाइल जमा सुविधा; प्रचार मानदंडों का युक्तिकरण
कानूनी आधार जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951; चुनाव संचालन नियम, 1961
उद्देश्य मतदाता सुविधा बढ़ाना, गोपनीयता सुनिश्चित करना, व्यवधानों को कम करना
मोबाइल उपयोग नीति मतदान केंद्र के अंदर मोबाइल की अनुमति नहीं; बाहर स्विच-ऑफ स्थिति में जमा करना अनिवार्य
प्रचार मानदंड मतदान केंद्र से 100 मीटर के भीतर प्रचार वर्जित; अनौपचारिक पहचान पर्ची वाले बूथ 100 मीटर के बाहर ही

मत्स्य पालन क्षेत्र में परिवर्तन: 2025 सम्मेलन में प्रौद्योगिकी और नीति केन्द्रीय भूमिका में

भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र में क्रांति लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए, मत्स्य पालन विभाग (जो कि मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय – MoFAH&D के अंतर्गत आता है) ने 23 मई 2025 को नई दिल्ली में “मत्स्य सचिव सम्मेलन 2025” एवं “जलकृषि में प्रौद्योगिकी और नवाचार के उपयोग पर राष्ट्रीय कार्यशाला” का आयोजन किया।

इस सम्मेलन का उद्देश्य प्रमुख योजनाओं जैसे:

  • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY),

  • मत्स्य पालन एवं जलकृषि अवसंरचना विकास निधि (FIDF) और

  • प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY)

की प्रगति की समीक्षा करना था। साथ ही, ड्रोन तकनीक और उपग्रह आधारित निगरानी जैसी आधुनिक तकनीकों को मत्स्य क्षेत्र की मूल्य शृंखला में एकीकृत करने पर जोर दिया गया।

यह पहल मत्स्य क्षेत्र को स्मार्ट, टिकाऊ और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

क्यों चर्चा में है?

यह सम्मेलन प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), मत्स्य पालन एवं जलकृषि आधारभूत संरचना विकास निधि (FIDF) और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) जैसी प्रमुख योजनाओं की समीक्षा के लिए आयोजित हुआ।
प्रमुख फोकस बिंदु:

  • कठिन क्षेत्रों में ड्रोन से मछली परिवहन।

  • PM-MKSSY के तहत जलकृषि बीमा

  • राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल मंच (NFDP) के ज़रिए डिजिटल पंजीकरण को बढ़ावा।

  • उपग्रह प्रौद्योगिकी से मछुआरों की सुरक्षा और संसाधनों का मानचित्रण।

अध्यक्षता और सहभागिता

  • सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ. अभिलक्ष लिखी, सचिव (मत्स्य), MoFAH&D ने की।

  • प्रतिभागी संस्थाएं: राज्य मत्स्य सचिव, RBI, NABARD, ONDC, ICAR, SFAC, NCDC

प्रमुख तकनीकी नवाचार

  • 70 किलो पेलोड ड्रोन का विकास – दुर्गम इलाकों में जीवित मछली पहुंचाने के लिए।

  • उपग्रह तकनीक – संसाधन मानचित्रण, मछुआरों की सुरक्षा, बायोमेट्रिक ID के लिए।

  • ReALCraft प्रणाली – नावों की निगरानी के लिए प्रोत्साहन।

अवसंरचना और स्थिरता 

  • स्मार्ट, एकीकृत मत्स्य बंदरगाहों के विकास की अपील।

  • FAO की Blue Port पहल के साथ तालमेल।

  • हरी और नीली स्थिरता (Green & Blue Sustainability) के सिद्धांतों पर बल।

समीक्षित योजनाएं

  1. PMMSY: मछली उत्पादन और आधारभूत संरचना बढ़ाना।

  2. FIDF: पंजीकरण और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता।

  3. PM-MKSSY: जलकृषि हेतु बीमा योजना।

PM-MKSSY के तहत जलकृषि बीमा

  • बेसिक बीमा: प्राकृतिक आपदाओं को कवर करता है।

  • समग्र बीमा: रोगों को भी कवर करता है।

  • प्रीमियम कैप: ₹1 लाख प्रति किसान (प्रति 1800 घन मीटर इकाई)।

  • SC/ST/महिलाओं को 10% अतिरिक्त प्रोत्साहन

  • डिजिटल पंजीकरण को NFDP के माध्यम से बढ़ावा।

चुनौतियां और रिक्तियाँ

  • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत ऋण तक पहुंच – जमानत संबंधी अड़चनें

  • बाद-की-फसल (post-harvest) अवसंरचना को मजबूत करने की आवश्यकता।

  • भौतिक और डिजिटल बाजारों से जोड़ने की जरूरत

अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र

  • शोभा मत्स्य पालन

  • सीवीड (समुद्री शैवाल) खेती

  • कृत्रिम रीफ (Artificial Reefs) का विकास।

  • अमृत सरोवरों का उपयोग अंतर्देशीय जलकृषि (Inland Aquaculture) में।

  • क्षमता निर्माण, विस्तार सेवाएं, और FFPO (मछुआरा उत्पादक संगठन) को समर्थन।

श्रेणी विवरण 
क्यों चर्चा में? मत्स्य क्षेत्र में तकनीक और नीतिगत सुधारों को लेकर 2025 सम्मेलन में केंद्रित चर्चा।
घटना मत्स्य सचिव सम्मेलन 2025 और राष्ट्रीय कार्यशाला
मुख्य आयोजक मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय (MoFAH&D)
समीक्षित प्रमुख योजनाएं प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), पीएम मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY), मत्स्य अवसंरचना विकास निधि (FIDF)
प्रमुख तकनीकी नवाचार ड्रोन तकनीक, उपग्रह तकनीक, ReALCraft निगरानी प्रणाली
बीमा योजना PM-MKSSY – सामान्य और समग्र बीमा कवरेज (Basic & Comprehensive Coverage)
चर्चित प्रमुख मुद्दे ऋण तक पहुंच, डिजिटल पंजीकरण, बाद-की-फसल अवसंरचना, सततता (Sustainability)
डिजिटल प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल मंच (NFDP)

पीएम मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की 10वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मई 2025 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में नीति आयोग की 10वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इसका उद्देश्य विकसित भारत@2047 (Viksit Bharat@2047) के रोडमैप पर चर्चा करना था।

क्यों चर्चा में है?

इस वर्ष की गवर्निंग काउंसिल बैठक का फोकस है:
“विकसित राज्य से विकसित भारत” (Viksit Rajya for Viksit Bharat)
इसका उद्देश्य राज्यों की भागीदारी को बढ़ाकर राष्ट्रीय विकास को गति देना है। बैठक में विकेन्द्रीकृत, समावेशी और टिकाऊ विकास पर जोर दिया गया।

पृष्ठभूमि

  • नीति आयोग (NITI Aayog) की स्थापना 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग के स्थान पर की गई थी।

  • इसका सर्वोच्च निकाय गवर्निंग काउंसिल है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं।

  • इसमें राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, और नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं।

बैठक का उद्देश्य

  • “टीम इंडिया” दृष्टिकोण को मजबूत करना ताकि भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बन सके।

  • राज्यों को सशक्त बनाना ताकि वे अपने स्थानीय संसाधनों और प्राथमिकताओं के आधार पर विजन डॉक्युमेंट तैयार कर सकें।

मुख्य लक्ष्य

  1. राज्यों को विकास के प्रेरक बनाना

    • प्रत्येक राज्य को दीर्घकालिक, समावेशी विकास योजना बनाने हेतु प्रोत्साहित करना।

  2. डाटा-आधारित शासन

    • राज्यों में मॉनिटरिंग व इवैल्यूएशन (M&E) यूनिट्स और ICT ढांचा विकसित करना।

  3. रोजगार व कौशल विकास

    • उद्यमिता, स्किलिंग और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना, ताकि जनसंख्या लाभांश का उपयोग हो सके।

  4. हरित विकास (Green Growth)

    • नवीकरणीय ऊर्जा और सर्कुलर इकोनॉमी में संभावनाएं तलाशना।

  5. शहरी-ग्रामीण एमएसएमई (MSME) विकास

    • अनौपचारिक क्षेत्र और ग्रामीण गैर-कृषि रोजगार को समर्थन देना।

  6. टियर-2 और टियर-3 शहरों को बढ़ावा

    • मेट्रो शहरों के अलावा निर्माण व सेवा क्षेत्रों का विस्तार करना।

चर्चित विषय (4वीं मुख्य सचिवों की राष्ट्रीय बैठक से प्रेरित 6 प्रमुख थीम्स)

  1. टियर 2 और 3 शहरों में निर्माण क्षेत्र (Manufacturing) का इकोसिस्टम

  2. टियर 2 और 3 शहरों में सेवाक्षेत्र (Services Sector) का इकोसिस्टम

  3. ग्रामीण गैर-कृषि एमएसएमई और अनौपचारिक क्षेत्र में रोजगार।

  4. शहरी एमएसएमई और रोजगार सृजन

  5. नवीकरणीय ऊर्जा में संभावनाएं।

  6. सर्कुलर इकोनॉमी और सतत विकास पद्धतियाँ

महत्त्व

  • यह बैठक सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को मजबूत करती है।

  • केंद्र और राज्यों के बीच साझेदारी को और मजबूती मिलती है।

  • नीचे से ऊपर की योजना (Bottom-up Planning) को बढ़ावा देती है, जिससे स्थानीय स्तर की नीतियाँ अधिक प्रासंगिक बनती हैं।

केंद्र ने शैक्षणिक संस्थानों को तंबाकू मुक्त बनाने हेतु राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया

शिक्षा मंत्रालय ने शैक्षणिक संस्थानों को तम्बाकू और पदार्थ मुक्त क्षेत्र बनाने के उद्देश्य से एक राष्ट्रव्यापी प्रवर्तन अभियान शुरू किया है। यह कदम देश के युवाओं को तम्बाकू, शराब और नशीली दवाओं के दुरुपयोग के हानिकारक प्रभावों से बचाने के प्रयासों के हिस्से के रूप में उठाया गया है, जिसमें शैक्षिक और कानून प्रवर्तन अधिकारियों दोनों से सक्रिय भागीदारी की उम्मीद है।

क्यों चर्चा में है?

  • स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे शिक्षण संस्थानों के आसपास तंबाकू-निषेध दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू करें।
  • यह निर्देश 15 मई 2025 को हुई नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 8वीं बैठक के बाद जारी किया गया।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

  • भारत की एक बड़ी जनसंख्या 29 वर्ष से कम आयु की है।

  • ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे (GYTS-2), 2019 के अनुसार,
    13–15 वर्ष के 8.5% छात्र तंबाकू का सेवन करते हैं।
    हर दिन 5,500 बच्चे तंबाकू सेवन शुरू करते हैं।

  • तंबाकू का सेवन अक्सर अन्य खतरनाक नशों की ओर ले जाता है।

ToFEI पहल के तहत प्रमुख दिशा-निर्देश

तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान (ToFEI) दिशानिर्देशों में निम्नलिखित नौ आवश्यक गतिविधियाँ शामिल हैं,

  1. संस्थान के भीतर और बाहर ‘तंबाकू-मुक्त क्षेत्र’ के बोर्ड लगाना।

  2. परिसर में तंबाकू सेवन के कोई चिन्ह न हों।

  3. तंबाकू के दुष्प्रभावों संबंधी पोस्टर/सामग्री प्रदर्शित करना।

  4. हर 6 महीने में तंबाकू-नियंत्रण गतिविधियां आयोजित करना।

  5. स्कूलों में Tobacco Monitors की नियुक्ति।

  6. स्कूल के आचरण नियम में तंबाकू-मुक्त नीति को शामिल करना।

  7. स्कूल के चारों ओर 100 गज में पीली रेखा खींचना।

  8. 100 गज की सीमा में तंबाकू विक्रेताओं की अनुमति नहीं

  9. स्कूल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के बीच सहयोग सुनिश्चित करना।

तत्काल कार्रवाई के बिंदु

  • संस्थानों के चारों ओर पीली रेखा चिह्नित करना।

  • 100 गज के भीतर तंबाकू की बिक्री बंद कराना।
    इसके लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मदद आवश्यक होगी।

मासिक प्रवर्तन अभियान

अवधि: 31 मई (विश्व तंबाकू निषेध दिवस) से 26 जून (ड्रग्स विरोध दिवस) तक।

  • COTPA, 2003 की धारा 6(b) को लागू किया जाएगा:

    • शिक्षण संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू की बिक्री पर रोक।

    • नाबालिगों को/द्वारा तंबाकू की बिक्री पर प्रतिबंध।

सामुदायिक सहभागिता और भागीदारी

  • स्कूल प्रबंधन समितियां (SMCs), माता-पिता और शिक्षक सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

  • SOPs (मानक संचालन प्रक्रियाएं) बनाई जाएंगी ताकि लोग बिना भय के उल्लंघनों की रिपोर्ट कर सकें।

  • ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस जागरूकता क्विज–2025’ MyGov पर (22 मई से 21 जुलाई तक) आयोजित की जा रही है।

FSSAI ने अवैध रूप से फल पकाने की प्रथाओं पर कार्रवाई शुरू की

खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक सक्रिय कदम उठाते हुए, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कैल्शियम कार्बाइड जैसे प्रतिबंधित पकाने वाले एजेंटों के उपयोग के खिलाफ निगरानी और प्रवर्तन को तेज करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश, जिसका मुख्य उद्देश्य फल बाजारों और भंडारण सुविधाओं में असुरक्षित प्रथाओं पर अंकुश लगाना है, सार्वजनिक स्वास्थ्य पर रासायनिक रूप से पके आमों के हानिकारक प्रभावों पर बढ़ती चिंताओं के मद्देनजर आया है।

क्यों चर्चा में है?

भारतीय खाद्य संरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 21 मई 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे कैल्शियम कार्बाइड जैसे प्रतिबंधित पकाने वाले रसायनों के उपयोग के खिलाफ निगरानी और प्रवर्तन को तेज़ करें। यह निर्देश मुख्यतः फलों की मंडियों और भंडारण स्थलों में अस्वास्थ्यकर तरीके से आम जैसे फलों को पकाने की प्रथा पर रोक लगाने के लिए दिया गया है।

निर्देश का उद्देश्य:

  • केवल प्राकृतिक रूप से पके हुए फलों की बिक्री सुनिश्चित करना।

  • उपभोक्ताओं को विषैले और कैंसरकारी रसायनों से बचाना।

  • राज्यों और क्षेत्रीय स्तर पर कड़ी निगरानी और प्रवर्तन को बढ़ावा देना।

कैल्शियम कार्बाइड: मुख्य चिंता

  • आमतौर पर आम जैसे फलों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए इस्तेमाल होता है।

  • इसमें अक्सर आर्सेनिक और फॉस्फोरस के अंश होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होते हैं।

  • इससे मुख में छाले, तंत्रिका संबंधी समस्याएं, और कैंसर होने की संभावना बढ़ सकती है।

FSSAI के प्रमुख निर्देश:

  • मंडियों, फल बाजारों और कोल्ड स्टोरेज में निरीक्षण को तेज़ करें।

  • किसानों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता अभियान चलाएं।

  • इथिलीन गैस जैसे सुरक्षित विकल्पों को प्रोत्साहित करें (नियंत्रित परिस्थितियों में)।

  • खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत नियम उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें।

पृष्ठभूमि:

  • आमतौर पर गर्मियों के मौसम में आमों की कृत्रिम पकाई एक दोहराया जाने वाला मुद्दा रहा है।

  • FSSAI ने इससे पहले भी कई परामर्श और चेतावनियाँ जारी की हैं, लेकिन राज्यों में प्रवर्तन असमान रहा है।

महत्त्व:

  • खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम।

  • प्राकृतिक और जैविक खाद्य व्यवहार को बढ़ावा देता है।

  • उपभोक्ताओं के बीच खाद्य गुणवत्ता में विश्वास को मजबूत करता है।

मॉर्गन स्टेनली ने वित्त वर्ष 26 और वित्त वर्ष 27 के लिए भारत के विकास का अनुमान बढ़ाया

मॉर्गन स्टेनली, एक प्रमुख वैश्विक वित्तीय सेवा फर्म, ने मजबूत घरेलू मांग परिदृश्य और सुधरते व्यापक आर्थिक स्थिरता का हवाला देते हुए भारत के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर के पूर्वानुमान को वित्त वर्ष 26 के लिए 6.2% और वित्त वर्ष 27 के लिए 6.5% तक मामूली रूप से उन्नत किया है। वृद्धि दर में यह वृद्धि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के आंतरिक विकास इंजनों में विश्वास को दर्शाती है।

क्यों चर्चा में है?

मॉर्गन स्टैनली ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान FY26 के लिए 6.2% और FY27 के लिए 6.5% कर दिया है। यह अनुमान 21 मई 2025 को जारी उसकी नवीनतम आर्थिक रिपोर्ट में दिया गया है। यह संशोधन भारत की आंतरिक विकास संभावनाओं और मजबूत आर्थिक स्थिरता में बढ़ते वैश्विक निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है।

मुख्य बिंदु:

वित्तीय वर्ष पहले का अनुमान संशोधित अनुमान
FY26 6.1% 6.2%
FY27 6.3% 6.5%

संशोधन के प्रमुख कारण:

  • अमेरिका-चीन व्यापार तनाव में कमी और बाहरी मांग में सुधार

  • घरेलू मांग बनी मुख्य प्रेरक शक्ति

    • शहरी खपत में सुधार

    • ग्रामीण मांग बनी मजबूत

  • नीतिगत समर्थन जारी

    • विशेषकर पूंजीगत व्यय केंद्रित राजकोषीय नीति के माध्यम से

  • मुद्रास्फीति स्थिर होने से RBI द्वारा मौद्रिक नीति में ढील की संभावना

विस्तृत कारण:

1. खपत में सुधार

  • अब अधिक व्यापक और संतुलित हो रही है

  • शहरी क्षेत्रों में खपत तेजी से बढ़ रही है

  • ग्रामीण मांग लगातार बनी हुई है

2. निवेश परिदृश्य

  • सरकारी और घरेलू पूंजीगत व्यय आगे बढ़ रहे हैं

  • निजी कॉरपोरेट निवेश में धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद

3. नीतिगत परिप्रेक्ष्य

  • RBI द्वारा दरों में कटौती की संभावना

  • राजकोषीय घाटा घटाने के साथ-साथ पूंजीगत व्यय पर जोर

  • समग्र मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता “संतोषजनक स्थिति” में बनी हुई है

पृष्ठभूमि:

  • मॉर्गन स्टैनली एक प्रमुख वैश्विक वित्तीय सेवा संस्था है, जिसे आर्थिक पूर्वानुमान में विश्वसनीय माना जाता है

  • इससे पहले भारत के लिए FY26 और FY27 में क्रमशः 6.1% और 6.3% का अनुमान था

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने FY26 के लिए पहले ही 6.5% का अनुमान जताया है

टाइप 055 डिस्ट्रॉयर बनाम अर्ले बर्क-क्लास: नौसेना युद्ध का भविष्य

गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक पोतों (Destroyers) का विकास समुद्री शक्ति निर्धारण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वर्तमान में इस विकास की अग्रिम पंक्ति में जो दो युद्धपोत हैं, वे हैं:

  • चीन का टाइप 055 विध्वंसक

  • संयुक्त राज्य अमेरिका का अर्ले बर्क-श्रेणी विध्वंसक

हालाँकि दोनों पोत अपने-अपने नौसेनाओं की रीढ़ माने जाते हैं, लेकिन वे डिज़ाइन, तकनीक और रणनीतिक उद्देश्य के मामले में अलग-अलग दर्शन का प्रतिनिधित्व करते हैं।

यह लेख टाइप 055 बनाम अर्ले बर्क-क्लास विध्वंसकों की तुलना करता है, जिसमें उनके आग्नेय शक्ति, सेंसर क्षमताओं, युद्ध भूमिका और भविष्य के नौसैनिक संघर्षों में उनके महत्व पर प्रकाश डाला गया है।

1. टाइप 055 विध्वंसक – परिचय

परिचय:
टाइप 055 विध्वंसक, जिसे आधिकारिक रूप से 10,000 टन श्रेणी का गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक कहा जाता है, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) द्वारा निर्मित अब तक के सबसे उन्नत और शक्तिशाली सतह युद्धपोतों में से एक है।

  • इसे पहली बार 2017 में लॉन्च किया गया था और

  • 2020 से यह पूरी तरह से परिचालन में आ चुका है।

इसके आकार और मारक क्षमता को देखते हुए इसे अक्सर एक क्रूज़र श्रेणी के पोत के रूप में छिपे रूप में देखा जाता है।

मुख्य विशिष्टताएँ – टाइप 055 विध्वंसक

पैरामीटर विवरण
विस्थापन क्षमता लगभग 13,000 टन (पूर्ण भार पर)
लंबाई लगभग 180 मीटर
गति अनुमानित 30 नॉट्स
क्रू लगभग 300 कर्मी
हथियार प्रणाली 112 वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) सेल्स
प्रमुख पोत नानचांग, ल्हासा, डालियान (और अन्य)

विशेषता:
टाइप 055 को ब्लू-वॉटर ऑपरेशंस के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें वायु रक्षा, पनडुब्बी रोधी, सतह रोधी और भूमि-पर-हमला मिशन शामिल हैं।

2. अर्ले बर्क-क्लास विध्वंसक – परिचय

परिचय:
अर्ले बर्क-क्लास विध्वंसक अमेरिकी नौसेना की रीढ़ है और 1990 के दशक की शुरुआत से सेवा में है।
70 से अधिक पोत सक्रिय सेवा में हैं, और Flight III अपग्रेड्स के तहत नए पोतों का निर्माण जारी है।
यह सबसे सफल और दीर्घकालिक विध्वंसक वर्गों में से एक है, और लगातार नई तकनीक व बहु-भूमिका क्षमता के साथ विकसित हो रहा है।

मुख्य विशिष्टताएँ – अर्ले बर्क-क्लास विध्वंसक

पैरामीटर विवरण
विस्थापन क्षमता 9,000 से 10,000 टन (फ्लाइट संस्करण पर निर्भर)
लंबाई लगभग 155 मीटर
गति 30+ नॉट्स
क्रू लगभग 300 कर्मी
हथियार प्रणाली 90–96 वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) सेल्स (फ्लाइट के अनुसार)
प्रमुख पोत यूएसएस अर्ले बर्क, यूएसएस जॉन फिन, यूएसएस जैक एच. लुकास (Flight III)

विशेषता:
यह वर्ग वायु रोधी, सतह रोधी, पनडुब्बी रोधी युद्ध में सक्षम है और इसके साथ ही बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा क्षमता भी रखता है।

3. हथियार और युद्ध प्रणालियाँ

टाइप 055 – हथियार प्रणाली

हथियार विवरण
VLS सेल्स 112 यूनिवर्सल वर्टिकल लॉन्च सिस्टम सेल्स
मिसाइलें HHQ-9B (सतह-से-वायु), YJ-18 (एंटी-शिप), CJ-10 (क्रूज़), Yu-8 (पनडुब्बी रोधी रॉकेट्स)
मुख्य तोप 130 मिमी नौसैनिक तोप
निकट रक्षा प्रणाली HQ-10 शॉर्ट-रेंज मिसाइलें और टाइप 1130 CIWS
टॉरपीडो और इलेक्ट्रॉनिक बचाव मानक पनडुब्बी रोधी टॉरपीडो ट्यूब और इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेज़र्स

विशेषता:
टाइप 055 की VLS प्रणाली मॉड्यूलर है, जिससे इसे मिशन की आवश्यकताओं के अनुसार लोड किया जा सकता है।

अर्ले बर्क-क्लास – हथियार प्रणाली

हालाँकि इसकी क्षमता टाइप 055 से थोड़ी कम है, लेकिन अर्ले बर्क-क्लास पोतों को प्रमाणित युद्ध प्रणालियों से लैस किया गया है और यह मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ गहन समन्वय में कार्य करने में सक्षम है।

हथियार विवरण
वर्टिकल लॉन्च सेल्स 90 से 96 Mk 41 VLS सेल्स
सपोर्टेड मिसाइलें SM-2, SM-6, ESSM (Evolved Sea Sparrow Missile), टोमहॉक क्रूज़ मिसाइलें, ASROC (पनडुब्बी रोधी रॉकेट)
मुख्य तोप 127 मिमी नौसैनिक तोप
निकट रक्षा प्रणाली फालान्क्स CIWS और SeaRAM (नवीनतम पोतों पर)
टॉरपीडो पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए ट्रिपल टॉरपीडो ट्यूब्स

विशेषता:
बर्क-क्लास पोतों की युद्ध प्रणालियाँ एजिस कॉम्बैट सिस्टम (Aegis Combat System) से जुड़ी होती हैं, जो उन्हें बेहतर स्थितिजन्य जागरूकता (situational awareness) और परतदार रक्षा क्षमता (layered defense) प्रदान करती हैं।

4. सेंसर और युद्ध प्रणालियाँ

टाइप 055 – सेंसर

टाइप 055 को डुअल-बैंड रडार सिस्टम से लैस किया गया है, जिसमें सभी दिशाओं में 360-डिग्री निगरानी के लिए सक्रिय फेज़्ड ऐरे रडार लगे हैं।

सेंसर सिस्टम विवरण
रडार बैंड X-बैंड और S-बैंड रडार – हवा और सतह दोनों का एक साथ ट्रैकिंग
फायर कंट्रोल सिस्टम उन्नत अग्नि-नियंत्रण प्रणाली
इंटीग्रेटेड मस्त डिज़ाइन स्टील्थ (गोपनीयता) और ऊँचाई से सेंसर कवरेज के लिए

ध्यान देने योग्य बात:
हालाँकि टाइप 055 के सेंसर उन्नत हैं, लेकिन चीन की रडार और सेंसर सॉफ़्टवेयर क्षमताओं से जुड़ी जानकारी आंशिक रूप से गोपनीय है, जिससे इसकी वास्तविक युद्ध प्रदर्शन क्षमता का आकलन करना कठिन हो जाता है।

अर्ले बर्क-क्लास – सेंसर प्रणाली

अर्ले बर्क-क्लास विध्वंसक अत्याधुनिक और युद्ध-सिद्ध Aegis Baseline 9 और Baseline 10 (Flight III) कॉम्बैट सिस्टम पर आधारित हैं:

सेंसर प्रणाली विवरण
AN/SPY-6 रडार (Flight III) बेहतर ट्रैकिंग और लक्ष्य पहचान क्षमता के साथ उन्नत रडार
सिग्नल प्रोसेसिंग बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा हेतु मल्टी-मिशन सिग्नल प्रोसेसिंग
कोऑपरेटिव एंगेजमेंट क्षमता अन्य अमेरिकी और मित्र नौसेना पोतों के साथ नेटवर्क आधारित कार्रवाई में सक्षम

विशेषता:
Aegis सिस्टम ने दशकों तक संचालन में अपनी प्रभावशीलता और युद्ध क्षमता सिद्ध की है, जिससे यह इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और नौसेना समन्वय में अमेरिका को बढ़त देता है।

5. उत्तरजीविता और स्टील्थ (गोपनीयता)

विध्वंसक स्टील्थ और सुरक्षा उपाय
Type 055 स्टील्थ आकृति, आंतरिक सेंसर, गर्मी-हस्ताक्षर कम करने वाली तकनीकें; अपने बड़े आकार के बावजूद कम रडार क्रॉस सेक्शन।
Arleigh Burke कोणीय सतहें और एग्जॉस्ट कूलिंग जैसे स्टील्थ उपाय शामिल; परन्तु डिज़ाइन पुराना होने के कारण Type 055 की तुलना में कम स्टील्थी।

दोनों में सामान्यत:

  • उन्नत डैमेज कंट्रोल सिस्टम

  • कंपार्टमेंटलाइज़ेशन

  • स्वचालित निगरानी प्रणाली

जो इन्हें युद्ध में उच्च उत्तरजीविता प्रदान करती हैं।

6. सामरिक भूमिका और तैनाती

Type 055 – PLAN में भूमिका (चीन की नौसेना)

  • एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के मुख्य एस्कॉर्ट के रूप में कार्य करता है

  • लंबी दूरी के सेंसर और मिसाइलों के साथ बेड़े की वायु रक्षा का नेतृत्व

  • स्वतंत्र शक्ति प्रदर्शन और ब्लू-वॉटर क्षेत्रों (विशेषकर दक्षिण चीन सागर और प्रशांत) में रणनीतिक चुनौती प्रदान करने की क्षमता

Arleigh Burke – अमेरिकी नौसेना में भूमिका

  • वैश्विक स्तर पर तैनात, अमेरिकी नौसेना की रीढ़

  • एयरक्राफ्ट कैरियर्स और अम्फीबियस ग्रुप्स के प्रमुख एस्कॉर्ट

  • यूरोप और एशिया में बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस

  • NATO और मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ पूर्ण समन्वय योग्य

इसकी लचीलापन इसे उच्च-तीव्रता युद्ध और शांति-कालीन निवारक अभियानों दोनों के लिए उपयुक्त बनाता है।

7. उत्पादन और लागत दक्षता

पैरामीटर Type 055 Arleigh Burke
अनुमानित लागत $1 से $1.5 बिलियन प्रति पोत $1.8 से $2 बिलियन प्रति पोत (फ्लाइट संस्करण पर निर्भर)
निर्मित पोत कम-से-कम 8 लॉन्च हो चुके; और अधिक निर्माणाधीन 75+ पोत सेवा में; नए Flight III संस्करण निर्माणाधीन
लागत लाभ सीमित संख्या, परंतु चीन तेजी से उत्पादन बढ़ा रहा है बड़ी संख्या में उत्पादन; economies of scale का लाभ

न्यायमूर्ति के. सोमशेखर मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त

भारत के राष्ट्रपति ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति केम्पैया सोमशेखर को मणिपुर उच्च न्यायालय के नए मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया है। यह नियुक्ति मुख्य न्यायाधीश डी. कृष्णकुमार के 21 मई 2025 को होने वाले सेवानिवृत्ति के मद्देनज़र की गई है। न्यायमूर्ति सोमशेखर के पास कर्नाटक में तीन दशकों से अधिक का न्यायिक अनुभव और विधिक सेवा का रिकॉर्ड है।

समाचारों में क्यों?

  • 20 मई 2025 को न्यायमूर्ति के. सोमशेखर की मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नति की औपचारिक घोषणा हुई।

  • इससे कुछ दिन पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनके नाम की सिफारिश की थी।

  • यह नियुक्ति मुख्य न्यायाधीश डी. कृष्णकुमार की सेवानिवृत्ति से उत्पन्न रिक्ति को भरती है।

मुख्य तथ्य:

तथ्य विवरण
नियुक्ति की तिथि 20 मई 2025
नियुक्त करने वाले भारत के राष्ट्रपति (भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद)
सिफारिश की गई द्वारा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई के नेतृत्व में)
किसका स्थान लेंगे न्यायमूर्ति डी. कृष्णकुमार (21 मई 2025 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं)
घोषणा की गई द्वारा केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा (X – पूर्व में ट्विटर पर)

न्यायमूर्ति के. सोमशेखर – प्रोफ़ाइल

  • 1990 में मैसूर और चामराजनगर में (दीवानी और फौजदारी मामलों में) वकालत की शुरुआत की।

  • 1998 में प्रत्यक्ष भर्ती के माध्यम से जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त हुए।

  • जुलाई 2016 में कर्नाटक उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नति हुई।

  • जुलाई 2018 में स्थायी न्यायाधीश बनाए गए।

नियुक्ति का महत्त्व

  • मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय की न्यायिक प्रशासन प्रणाली और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।

  • मणिपुर उच्च न्यायालय, जो भारत के नवीनतम उच्च न्यायालयों में से एक है (स्थापना: 2013), को इस नियुक्ति से अनुभवी न्यायिक नेतृत्व प्राप्त होगा।

  • यह नियुक्ति पूर्वोत्तर भारत में संवेदनशील समय के दौरान न्यायिक निरंतरता और निगरानी बनाए रखने में सहायक होगी।

सारांश/स्थिर जानकारी विवरण
समाचारों में क्यों? न्यायमूर्ति के. सोमशेखर मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त
नियुक्त व्यक्ति का नाम न्यायमूर्ति केम्पैया सोमशेखर
नियुक्ति पद मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
नियुक्त करने वाली प्राधिकरण भारत के राष्ट्रपति
सिफारिश की गई द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाला सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम
पूर्ववर्ती न्यायमूर्ति डी. कृष्णकुमार
सेवा पृष्ठभूमि जिला न्यायाधीश (1998), कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश

दूरसंचार विभाग ने साइबर अपराध से निपटने हेतु वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक लॉन्च किया

भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए एक सक्रिय कदम के रूप में, दूरसंचार विभाग (DoT) ने डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफ़ॉर्म (DIP) के तहत एक शक्तिशाली एनालिटिक्स टूल, वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक (FRI) पेश किया है। इस पहल का उद्देश्य संभावित वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मोबाइल नंबरों की पहचान करना और उन्हें ब्लॉक करना है, जिससे साइबर सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और बैंकों और UPI प्लेटफ़ॉर्म जैसी संस्थाओं को धोखाधड़ी वाले लेनदेन को रोकने में मदद मिलेगी।

समाचारों में क्यों?

दूरसंचार विभाग ने 21 मई 2025 को FRI टूल को औपचारिक रूप से वित्तीय संस्थाओं के लिए लॉन्च किया। यह कदम डिजिटल लेन-देन, खासकर UPI से जुड़े मोबाइल नंबरों के माध्यम से होने वाले साइबर अपराधों में वृद्धि के बाद उठाया गया है। इसका उद्देश्य वास्तविक समय (real-time) में फ्रॉड की पहचान और रोकथाम सुनिश्चित करना है।

FRI के प्रमुख उद्देश्य:

  • पूर्व-चिन्हित मोबाइल नंबरों के माध्यम से होने वाले वित्तीय धोखाधड़ी को रोकना।

  • संबंधित पक्षों के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को सक्षम करना।

  • डिजिटल लेन-देन में मजबूत सत्यापन प्रणाली के माध्यम से सुरक्षा सुनिश्चित करना।

FRI क्या है?

फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FRI) एक जोखिम-आधारित मीट्रिक है जो मोबाइल नंबरों को निम्न श्रेणियों में वर्गीकृत करता है:

  • मध्यम जोखिम (Medium Risk)

  • उच्च जोखिम (High Risk)

  • अत्यंत उच्च जोखिम (Very High Risk)

यह वर्गीकरण निम्न स्रोतों से मिले इनपुट पर आधारित है:

  • नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP)

  • DoT का चक्षु प्लेटफॉर्म

  • बैंक और वित्तीय संस्थान

इससे धोखाधड़ी वाली गतिविधियों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर रोका जा सकता है।

यह कैसे कार्य करता है:

  • डिजिटल इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) उन मोबाइल नंबरों को चिन्हित करती है जो धोखाधड़ी में शामिल हो सकते हैं।

  • ये नंबर साझा किए जाते हैं:

    • बैंकों

    • UPI सेवा प्रदाताओं

    • एनबीएफसी (NBFC) और अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ

  • ये नंबर मोबाइल नंबर रिवोकेशन लिस्ट (MNRL) में दर्ज किए जाते हैं।

  • UPI भुगतान से पहले वास्तविक समय में अलर्ट भेजे जाते हैं ताकि उनका सत्यापन हो सके।

उद्योग में अपनाने के उदाहरण:

फ़ोनपे:

  • FRI द्वारा उच्च जोखिम वाले नंबरों से लेन-देन को “PhonePe Protect” के माध्यम से अस्वीकार करता है।

  • मध्यम जोखिम के मामलों में उपयोगकर्ता को चेतावनी देता है।

Paytm और Google Pay:

  • चिन्हित नंबरों पर लेन-देन में देरी और चेतावनी प्रणाली लागू कर रहे हैं।

बैंक:

  • DIP अलर्ट का उपयोग करके संदेहास्पद लेन-देन को रोक रहे हैं।

इस पहल का महत्व:

  • UPI भारत का प्रमुख भुगतान माध्यम बन चुका है; यह टूल भारी वित्तीय नुकसान से बचा सकता है।

  • टेलीकॉम और वित्तीय क्षेत्र के बीच समन्वित और लक्षित प्रतिक्रिया को बढ़ावा देता है।

  • डिजिटल लेन-देन की सुरक्षा, विश्वसनीयता और लोगों के विश्वास को मजबूत करता है।

सारांश/स्थिर जानकारी विवरण
समाचारों में क्यों? साइबर अपराध से निपटने के लिए DoT ने फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FRI) लॉन्च किया
घोषणा की गई संस्था दूरसंचार विभाग (DoT)
विशेषता फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FRI) की शुरुआत
प्रयोग किया गया प्लेटफॉर्म डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP)
उद्देश्य मोबाइल नंबरों के जोखिम वर्गीकरण के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी को रोकना
जोखिम स्तर मध्यम, उच्च, अत्यंत उच्च
प्रारंभिक उपयोगकर्ता PhonePe (PhonePe Protect फ़ीचर के माध्यम से)
संबंधित पक्ष बैंक, एनबीएफसी, UPI प्रदाता, DoT, साइबरक्राइम पोर्टल (I4C)
महत्त्व साइबर फ्रॉड की रोकथाम, UPI प्रणाली की सुरक्षा, प्रारंभिक चेतावनी में सहायक

भारत ने 78वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में वैश्विक स्वास्थ्य प्रतिबद्धता की पुष्टि की

जिनेवा में 21 मई 2025 को आयोजित 78वीं विश्व स्वास्थ्य सभा (WHA) में भारत की भागीदारी ने वैश्विक स्वास्थ्य कूटनीति में एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। भारत ने न केवल अपनी घरेलू स्वास्थ्य उपलब्धियों को प्रस्तुत किया, बल्कि वैश्विक महामारी समझौते की आवश्यकता पर भी बल दिया, जो न्यायसंगत, बाध्यकारी और पारदर्शी हो।

प्रमुख बिंदु:

सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने भारत की प्रमुख स्वास्थ्य पहल आयुष्मान भारत, मातृ और शिशु स्वास्थ्य में सुधार, और संक्रामक रोगों की समाप्ति जैसे प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने सभी के लिए स्वास्थ्य सेवा (Universal Health Coverage) और स्वास्थ्य क्षेत्र में समानता (Health Equity) को भारत की प्राथमिकता बताया।

भारत ने तकनीकी साझेदारी, स्वास्थ्य संप्रभुता, और विकासशील देशों की क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि भारत वैश्विक स्वास्थ्य नीतियों को आकार देने में विकासशील राष्ट्रों की एक सशक्त आवाज बनकर उभरा है।

भारत की प्रमुख उपलब्धियाँ

प्रमुख पहल: आयुष्मान भारत

  • समग्र स्वास्थ्य देखभाल की सुविधा प्रदान की गई।

  • स्वास्थ्य अवसंरचना में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

  • महंगे उपचारों के लिए वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित की गई।

  • डिजिटल स्वास्थ्य को बढ़ावा मिला – जैसे कि आभा (ABHA) आईडी और टेलीमेडिसिन सेवाएं

वैश्विक मान्यता

भारत ने मातृ स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, और बाल मृत्यु दर में कमी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिसे निम्नलिखित संस्थाओं द्वारा सराहा गया:

  • संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA)

  • यूएन अंतर-एजेंसी समूह (UN Inter-Agency Group)

रोग उन्मूलन की दिशा में प्रतिबद्धता

  • भारत को ट्रेकोमा-मुक्त (Trachoma-Free) देश के रूप में WHO द्वारा प्रमाणित किया गया।

  • निम्नलिखित रोगों के उन्मूलन के लिए लगातार प्रयास जारी हैं:

    • क्षय रोग (टीबी)

    • कुष्ठ रोग 

    • लसीका फाइलेरिया 

    • खसरा और रूबेला 

    • काला-अजार 

न्यायसंगत महामारी समझौते की मांग

भारत ने एक वैधानिक रूप से बाध्यकारी वैश्विक महामारी समझौते के समर्थन में अपनी बात रखी, जिसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:

  • टीकों और दवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित हो।

  • डेटा और रोगजनकों (Pathogens) की पारदर्शी साझेदारी को प्रोत्साहन मिले।

  • तकनीकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण, विशेषकर वैश्विक दक्षिण (Global South) के लिए।

  • राष्ट्रीय संप्रभुता और स्थानीय स्वास्थ्य क्षमताओं का सम्मान हो।

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