India Census 2027: आरजीआई ने टोल-फ्री हेल्पलाइन 1855 शुरू की

सरकार ने भारत में होने वाली जनगणना 2027 को लेकर एक बहुत बड़ा और अहम कदम उठाया है। लोगों की सुविधा और उनकी परेशानियों को दूर करने के लिए भारत के रजिस्ट्रार जनरल (आरजीआई) ने एक नई सेवा शुरू की है। अब जनगणना से जुड़े किसी भी सवाल का जवाब पाना बहुत आसान हो गया है। सरकार ने इसके लिए एक खास राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1855 जारी कर दिया है। बता दें, इसके साथ ही, आज के डिजिटल समय को देखते हुए एक व्हाट्सएप चैटबॉट भी लॉन्च किया गया है ताकि लोग आसानी से अपने मोबाइल पर जानकारी हासिल कर सकें।

इस नई सुविधा का मकसद

इस नई सुविधा का सीधा उद्देश्य जनगणना के पहले चरण को आसान बनाना है। नई दिल्ली से मिली जानकारी के मुताबिक, यह नया हेल्पलाइन नंबर 1855 मुख्य रूप से ‘आवास सूचीकरण और आवास गणना’ (एचएलओ) से जुड़े सवालों का तुरंत समाधान करेगा। जनगणना आयुक्त ने जनता की सुविधा का पूरा ध्यान रखते हुए व्हाट्सएप चैटबॉट की शुरुआत की है, जिससे लोग मैसेज भेजकर तुरंत सही और सटीक जानकारी पा सकते हैं। यह पूरी प्रक्रिया आम जनता एवं गणना करने वाले कर्मचारियों, दोनों के लिए बहुत मददगार साबित होगी।

नई हेल्पलाइन बहुभाषी होगी

रजिस्ट्रार जनरल ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एक संदेश भेजकर इस नई सुविधा की पूरी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि यह नई हेल्पलाइन बहुभाषी होगी, यानी इसमें कई भाषाओं में बात करने की सुविधा दी गई है। इससे आम जनता, गणना करने वाले कर्मचारियों और पर्यवेक्षकों को उनकी अपनी भाषा में सवालों के जवाब और जरूरत की सहायता मिल सकेगी। इस टोल-फ्री नंबर को सभी लैंडलाइन और मोबाइल नेटवर्क से जोड़ दिया गया है ताकि किसी भी नंबर से कॉल करने पर कोई परेशानी न हो।

सवाल का सटीक और पक्का समाधान

सरकार ने आम लोगों की परेशानी को दूर करने हेतु बहुत ही पक्की व्यवस्था की है। अगर किसी व्यक्ति के पास जनगणना को लेकर कोई बहुत ही खास या अलग तरह का सवाल है, तो उसकी कॉल को सीधे संबंधित राज्य के जनगणना निदेशालय से जोड़ दिया जाएगा। इससे लोगों को इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा और उन्हें सीधे सही अधिकारी से उनके सवाल का सटीक और पक्का समाधान मिल जाएगा।

आजादी के बाद की आठवीं जनगणना

भारत में चल रही यह 2027 की जनगणना, आजादी के बाद की आठवीं जनगणना है। यह इतिहास में पहली बार है जब जनगणना की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल की जा रही है। इसमें नागरिकों को पहली बार यह छूट दी गई है कि वे एक खास पोर्टल पर जाकर खुद ही 33 तय सवालों के जवाब दे सकते हैं।

2021 की जनगणना को टाल दिया गया था

कोरोना महामारी की वजह से 2021 की जनगणना को टाल दिया गया था। अब यह काम दो चरणों में हो रहा है। पहला चरण (मकान-सूचीकरण और आवास जनगणना) अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण (जनसंख्या गणना) फरवरी 2027 में पूरा होगा।

 

क्या ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का उपयोग होगा, जानें सबकुछ

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान (Iran) के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की बात को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि ‘वह ईरान के खिलाफ युद्ध में परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करेंगे।’ वाइट हाउस में पत्रकारों ने जब ट्रंप से पूछा कि क्या वह ऐसे हथियार का इस्तेमाल करेंगे तो उन्होंने कहा “मैं परमाणु हथियार का इस्तेमाल क्यों करूंगा? हमने इसके बिना ही पूरी तरह से पारंपरिक तरीके से उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि नहीं, मैं इसका इस्तेमाल नहीं करूगा। किसी को भी परमाणु हथियार का इस्तेमाल करने की इजाजत कभी नहीं दी जानी चाहिए।

परमाणु बम बनाने की अनुमति नहीं

राष्ट्रपति ने एक बार फिर दोहराया कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु बम बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने तकनीकी शब्दों के बजाय सरल भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अमेरिका ईरान से ‘न्यूक्लियर डस्ट’ (संवर्धित यूरेनियम) को बाहर निकालने के लिए किसी भी हद तक जाएगा। ट्रंप का मानना है कि परमाणु हथियारों से लैस ईरान पूरी दुनिया के लिए खतरा है।

अनिश्चितकालीन युद्धविराम की घोषणा

युद्ध की स्थिति के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने इस हफ्ते की शुरुआत में ईरान के साथ अनिश्चितकालीन युद्धविराम की घोषणा की थी। यह फैसला दो हफ्ते के पिछले युद्धविराम के खत्म होने से ठीक एक दिन पहले लिया गया। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कार्रवाई जल्दी इसलिए रोक दी क्योंकि दूसरी तरफ से शांति की अपील की गई थी, लेकिन अमेरिका ने 100 प्रतिशत प्रभावी ‘नाकाबंदी’ कर रखी है जिससे उनका सारा व्यापार ठप हो गया है।

अमेरिका की अर्थव्यवस्था मजबूत

ट्रंप ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका की अर्थव्यवस्था मजबूत है और तेल का पर्याप्त भंडार है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकने के प्रयासों के तहत, कई जहाज अब होर्मुज जलडमरूमध्य के बजाय अमेरिका की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था अविश्वसनीय है… मैंने जेडी, मार्को, हॉवर्ड और स्कॉट को फोन किया और उनसे कहा कि मुझे यह बताते हुए दुख हो रहा है, लेकिन हमें थोड़ा सा रास्ता बदलना होगा। हमें ईरान जाकर यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके पास परमाणु हथियार न हों।

ईरानी टैंकर जब्त

अमेरिकी सेना के अनुसार, उसने हिंद महासागर में तेल तस्करी से जुड़ा एक और ईरानी टैंकर जब्त किया है, जिससे तनाव और बढ़ गया है। इससे पहले, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन मालवाहक जहाजों पर हमला किया था। अमेरिका और ईरान के बीच यह तनाव इस अहम समुद्री मार्ग से तेल व्यापार को लगभग पूरी तरह से रोक चुका है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ रहा है।

सैटेलाइट अध्ययन में मुंबई और सिकंदराबाद के लैंडफिल वैश्विक मीथेन उत्सर्जन के टॉप-25 में शामिल

हाल ही में सैटेलाइट पर आधारित एक वैश्विक अध्ययन से पता चला है कि सिकंदराबाद और मुंबई में मौजूद लैंडफिल साइटें, वर्ष 2025 में दुनिया की शीर्ष 25 मीथेन उत्सर्जित करने वाली कचरा साइटों में शामिल हैं। इन निष्कर्षों ने भारत की कचरा प्रबंधन प्रणालियों से जुड़ी बढ़ती पर्यावरणीय चिंताओं और जलवायु परिवर्तन में उनके योगदान को उजागर किया है। यह विश्लेषण मीथेन के हजारों ‘प्लूम’ (बादलों) के प्रेक्षणों पर आधारित है, और यह लक्षित जलवायु कार्रवाई करने तथा लैंडफिल प्रबंधन में सुधार लाने की तत्काल आवश्यकता पर भी ज़ोर देता है।

अध्ययन में क्या पाया गया: मुख्य बातें

इस अध्ययन ने दुनिया भर के 707 कचरा स्थलों से निकलने वाले 2,994 मीथेन के गुबारों का विश्लेषण किया है और प्रदूषण के प्रमुख हॉटस्पॉट की पहचान की है।

  • दुनिया भर में सबसे ज़्यादा उत्सर्जन करने वाली शीर्ष 25 जगहों में भारत की 2 लैंडफिल साइटें शामिल हैं।
  • इसके अलावा, चिली और ब्राज़ील जैसे देशों में भी लैंडफिल साइटों की संख्या सबसे ज़्यादा थी (प्रत्येक में 3)।
  • रैंकिंग में भारत सऊदी अरब और तुर्की के साथ खड़ा है।

यह शोध ‘कार्बन मैपर’ (Carbon Mapper) से प्राप्त सैटेलाइट डेटा का उपयोग करके किया गया था, और इसका विश्लेषण लॉस एंजिल्स स्थित कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय द्वारा अपने ‘स्टॉप मीथेन प्रोजेक्ट’ (Stop Methane Project) के माध्यम से किया गया।

लैंडफिल से मीथेन उत्सर्जन खतरनाक क्यों है?

मीथेन सबसे शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसों में से एक है, जो ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ा रही है।

  • यह 20 वर्षों की अवधि में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में लगभग 86 गुना अधिक हानिकारक है।
  • यह वायुमंडल में लगभग 12 वर्षों तक बनी रहती है, लेकिन इसका अल्पकालिक प्रभाव अधिक तीव्र होता है, जो इसे और भी अधिक खतरनाक बनाता है।
  • इसके अलावा, औद्योगिक क्रांति के बाद से वैश्विक तापमान में हुई वृद्धि के लिए लगभग 30% तक मीथेन ही जिम्मेदार है।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के अनुसार, आज मीथेन की सांद्रता औद्योगिक काल से पहले के स्तरों की तुलना में 2.5 गुना अधिक है।

लैंडफिल में मीथेन तब बनती है, जब भोजन, कागज़ और बगीचे के कचरे जैसे जैविक पदार्थ बिना ऑक्सीजन के सड़ते हैं; यदि इन लैंडफिल का सही प्रबंधन न किया जाए, तो ये मीथेन उत्सर्जन के प्रमुख स्रोत बन जाते हैं।

उत्सर्जन का पैमाना: समस्या कितनी गंभीर है?

अध्ययन में पाया गया है कि सबसे बड़े लैंडफिल साइट्स से हर घंटे 3.6 से 7.5 टन मीथेन गैस निकलती है, जो कि एक चिंताजनक आंकड़ा है।

इसकी गंभीरता को समझने के लिए:

  • हर घंटे 5 टन गैस का उत्सर्जन 10 लाख SUVs से होने वाले प्रदूषण के बराबर है।
  • इसकी तुलना 500 MW के कोयला-आधारित पावर प्लांट से होने वाले उत्सर्जन से भी की जा सकती है।

इससे पहले, गाज़ीपुर लैंडफिल को भी ‘मीथेन सुपर-एमिटर’ के रूप में पहचाना गया था, क्योंकि 2022 में एक ही घटना के दौरान यहाँ से 400 टन प्रति घंटे से अधिक मीथेन का उत्सर्जन हुआ था।

इन लैंडफिल साइट्स से किसका संबंध है?

रिपोर्ट ने पहचानी गई भारतीय साइट्स को उन संभावित ज़िम्मेदार ऑपरेटर्स से जोड़ा है, जो हैं रामकी एनविरो इंजीनियर्स (सिकंदराबाद क्षेत्र) और एंटनी वेस्ट हैंडलिंग सेल लिमिटेड (मुंबई)।

ये संबंध सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटा पर आधारित हैं, और इन पर आधिकारिक जवाबों का अभी भी इंतज़ार है।

वैज्ञानिकों ने मीथेन हॉटस्पॉट की पहचान कैसे की?

शोधकर्ताओं ने मीथेन के गुबारों को रियल-टाइम में ट्रैक करने के लिए उन्नत सैटेलाइट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है।

इस प्रक्रिया में सैटेलाइट के ज़रिए उत्सर्जन के गुबारों की मैपिंग करना शामिल है। साथ ही, इन जगहों का मिलान ज्ञात लैंडफिल साइटों से किया गया और सरकारी व सार्वजनिक रिकॉर्ड के ज़रिए ऑपरेटरों की पहचान करने की कोशिश की गई।

इस तरीके से प्रदूषण के स्रोतों का बेहद सटीक पता लगाना संभव हो पाया है, जिससे जवाबदेही और भी ज़्यादा पारदर्शी हो गई है।

डाबर ने हरजीत एस. भल्ला को भारत के कारोबार का CEO नियुक्त किया

डाबर ने हरजीत एस. भल्ला को अपने भारत के कारोबार का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल 23 अप्रैल, 2026 से प्रभावी हो गया है। यह घोषणा एक रेगुलेटरी फाइलिंग के ज़रिए की गई, जो घरेलू परिचालन के लिए कंपनी के नेतृत्व को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम को दर्शाती है। वह सीधे मोहित मल्होत्रा ​​को रिपोर्ट करेंगे, जो कंपनी के पूर्णकालिक निदेशक और वैश्विक CEO के तौर पर कार्यरत हैं।

डाबर में नेतृत्व में अहम बदलाव

हरजीत एस. भल्ला की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब भारत में FMCG सेक्टर में तेज़ी से बदलाव आ रहे हैं—जिनकी मुख्य वजह उपभोक्ताओं की बदलती पसंद, डिजिटल विस्तार और ग्रामीण बाज़ार का विकास है।

इंडिया बिज़नेस के CEO के तौर पर, वे डाबर की घरेलू विकास रणनीति का नेतृत्व करेंगे। वे बाज़ार में कंपनी की स्थिति और ब्रांड के विस्तार को मज़बूत करेंगे, साथ ही बिक्री, मार्केटिंग और परिचालन प्रदर्शन की भी देखरेख करेंगे।

उनके व्यापक वैश्विक अनुभव से नई रणनीतिक अंतर्दृष्टि मिलने और भारतीय बाज़ार में डाबर की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने की उम्मीद है।

हरजीत एस. भल्ला का पेशेवर सफ़र

उनके पास दुनिया भर के कई स्थानों पर काम करने और दुनिया की शीर्ष कंपनियों में नेतृत्व की भूमिकाएँ निभाने का 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है।

उनके शुरुआती करियर की शुरुआत वर्ष 2000 में यूनिलीवर से हुई, जहाँ उन्होंने 16 वर्षों तक काम किया।

इस दौरान उन्होंने बिक्री और मार्केटिंग से जुड़ी कई भूमिकाएँ निभाईं, जिनमें मॉस्को (2009-2012) में मार्केटिंग डायरेक्टर के रूप में कार्य करना भी शामिल है।

साल 2016–17 में, उन्होंने Metro Cash & Carry में Chief Operating Officer (COO) के तौर पर काम शुरू किया; वे Executive Board का भी हिस्सा थे और उन्होंने रिटेल सेक्टर में काफी कीमती अनुभव हासिल किया।

Dabur में शामिल होने से पहले, Bhalla The Hershey Company से जुड़े हुए थे, जहाँ उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया:

  • प्रबंध निदेशक – भारत
  • उपाध्यक्ष – भारत और AEMEA
  • उपाध्यक्ष – कनाडा और AMEA
  • उपाध्यक्ष – कनाडा और वैश्विक ग्राहक

भारत, Canada और उभरते बाजारों जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने के उनके वैश्विक अनुभव से उनकी प्रोफ़ाइल में एक मज़बूत नेतृत्व क्षमता जुड़ जाती है।

डाबर के बारे में: एक प्रतिष्ठित FMCG ब्रांड

इसकी स्थापना वर्ष 1884 में हुई थी और यह भारत की अग्रणी FMCG कंपनियों में से एक है, जो स्वास्थ्य सेवा, पर्सनल केयर और खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में अपनी मज़बूत मौजूदगी के लिए जानी जाती है।

कंपनी ने इन क्षेत्रों में अपनी एक खास पहचान बनाई है:

  • आयुर्वेदिक और प्राकृतिक उत्पाद
  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मज़बूत वितरण नेटवर्क
  • घरों-घरों में भरोसेमंद ब्रांड

RBI का बड़ा फैसला, पेटीएम पेमेंट्स बैंक का लाइसेंस किया रद्द

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (Paytm Payments Bank Limited) का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है, और इसके साथ ही बैंक के तौर पर काम करने की उसकी क्षमता भी प्रभावी रूप से समाप्त हो गई है। यह फ़ैसला कई सालों से चली आ रही रेगुलेटरी चिंताओं और बार-बार नियमों का पालन न करने के बाद लिया गया है। केंद्रीय बैंक ने यह भी घोषणा की है कि वह बैंक को बंद करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए हाई कोर्ट का रुख करेगा। यह घटनाक्रम देश के फिनटेक इकोसिस्टम के लिए एक अहम मोड़ है, और साथ ही यह रेगुलेटरी अनुशासन को लेकर भी कई अहम सवाल खड़े करता है।

आरबीआई ने अपने आदेश में कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग रेगुलेशन एक्‍ट, 1949 (BR Act) के सेक्‍शन 22(4) के तहत पेटीएम पेमेंट्स बैंक को जारी किया गया बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह 24 अप्रैल, 2026 को कारोबार बंद होने के समय से प्रभावी होगा।

RBI के कदम का मतलब क्‍या है?

इसका मतलब है कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक अब कानून के तहत परिभाषित कोई भी ‘बैंकिंग’ गतिविधि या उससे जुड़ा कोई अन्य कारोबार तत्काल प्रभाव से नहीं कर सकता है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि नतीजतन, पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड को बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के सेक्‍शन 5(b) में परिभाषित ‘बैंकिंग’ का कारोबार करने या सेक्‍शन 6 के अंतर्गत बताए गए कोई भी अतिरिक्त कारोबार करने से तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाता है।

RBI: लाइसेंस रद्द करने की वजह 

  • बैंक जिस तरह से काम कर रहा था, उससे वहां पैसा जमा करने वाले लोगों का पैसा सुरक्षित नहीं था।
  • बैंक चलाने वाले अधिकारियों का रवैया और फैसले आम जनता और खाताधारकों के फायदे में नहीं थे।
  • RBI को लगा कि इस बैंक को और ज्यादा चलाने से जनता को कोई लाभ नहीं होगा, बल्कि जोखिम ही बढ़ेगा।
  • बैंक ने लाइसेंस लेते समय जो वादे और नियम (जैसे KYC और फंड्स का सही इस्तेमाल) माने थे, उनका लगातार उल्लंघन किया गया।

विकास की कहानी और संचालन का पैमाना

  • इसकी स्थापना विजय शेखर शर्मा ने की थी। Paytm Payments Bank की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई और इसने बहुत तेज़ी से पूरे भारत में अपनी पहुँच का विस्तार किया।
  • यह डिजिटल बैंकिंग और पेमेंट्स के क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बन गया।
  • अपने चरम पर, इस बैंक के पास लगभग 30 मिलियन बैंक खाते और 100 मिलियन से अधिक KYC-अनुपालन वाले उपयोगकर्ता थे।
  • इसके लगभग 300 मिलियन वॉलेट ग्राहक और 8 मिलियन से अधिक FASTag उपयोगकर्ता भी हैं।
  • पैमाने के लिहाज़ से इतनी ज़बरदस्त सफलता के बावजूद, अनुपालन और शासन से जुड़े मुद्दों ने इसकी सफलता को प्रभावित किया है।

उपेंद्र द्विवेदी US आर्मी वॉर कॉलेज के इंटरनेशनल हॉल ऑफ फ़ेम में शामिल

भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी को अमेरिका के आर्मी वॉर कॉलेज (AWC) कार्लाइल बैरक्स के अंतरराष्ट्रीय हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया है। भारतीय सेना ने इसे उनकी सैन्य सेवा और नेतृत्व का महत्वपूर्ण सम्मान बताया। जनरल द्विवेदी इस सम्मान को पाने वाले तीसरे भारतीय सेना प्रमुख बन गए हैं। इससे पहले जनरल वी.के. सिंह और जनरल बिक्रम सिंह को यह गौरव मिल चुका है। इस उपलब्धि ने भारत की बढ़ती वैश्विक सैन्य प्रतिष्ठा को उजागर किया है, और साथ ही भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच, विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए, गहरे होते रक्षा संबंधों को भी दर्शाया है।

US आर्मी वॉर कॉलेज में ऐतिहासिक सम्मान

प्रेरण समारोह कार्लिस्ले बैरक्स में आयोजित किया गया, जो US आर्मी वॉर कॉलेज (US Army War College) का मुख्यालय है। जनरल द्विवेदी इस संस्थान के पूर्व छात्र हैं, और उन्हें उनकी विशिष्ट सेवा तथा सैन्य नेतृत्व में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अब वे भारतीय सेना के दो पूर्व प्रमुखों के साथ इस सूची में शामिल हो गए हैं:

  • वी.के. सिंह
  • बिक्रम सिंह

यह सम्मान उन्हें उन चुनिंदा वैश्विक सैन्य नेताओं के समूह में शामिल करता है, जिन्हें उनकी उत्कृष्टता और रणनीतिक प्रभाव के लिए पहचाना जाता है।

भारत के लिए यह सम्मान क्यों मायने रखता है?

  • ‘इंटरनेशनल हॉल ऑफ़ फ़ेम’ उन वरिष्ठ सैन्य नेताओं को दिया जाता है, जिन्होंने असाधारण नेतृत्व का प्रदर्शन किया हो और साथ ही वैश्विक सैन्य सहयोग को मज़बूत बनाया हो।
  • जनरल द्विवेदी का इसमें शामिल होना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वैश्विक मंच पर भारत की सैन्य दक्षता की पहचान है। साथ ही, यह अंतरराष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा ढांचों में भारत के बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाता है।
  • इससे भारतीय और अमेरिकी सशस्त्र बलों के बीच संस्थागत संबंध भी मज़बूत होंगे।
  • इस तरह के सम्मान वैश्विक सुरक्षा में एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार के रूप में भारत की छवि को भी बेहतर बनाते हैं।

भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग को मिला बढ़ावा

संयुक्त राज्य अमेरिका की अपनी यात्रा के दौरान, जनरल द्विवेदी ने इन महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की:

  • भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग।
  • साथ ही, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग।
  • और संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण तथा इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाना।

 

 

जापान ने रक्षा निर्यात नियमों में संशोधन किया: भारत ने इसे रणनीतिक साझेदारी के लिए एक बढ़ावा बताया

भारत ने जापान द्वारा रक्षा निर्यात ढांचे में संशोधन करने के हालिया कदम का स्वागत किया है और इसे द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि यह निर्णय भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और गहरा करेगा, विशेष रूप से रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्रों में। उम्मीद है कि यह संशोधित नीति उन्नत प्रौद्योगिकी और रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर खोलेगी।

जापान ने अपनी रक्षा नीति में क्या बदलाव किया है?

जापान ने अपने लंबे समय से चले आ रहे ‘रक्षा उपकरणों और प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण संबंधी तीन सिद्धांतों’ में संशोधन किया है, जिन्होंने पहले रक्षा निर्यात पर कड़ी सीमाएँ लगा रखी थीं।

खास बदलाव हैं

  • डिफेंस एक्सपोर्ट को लिमिटेड कैटेगरी से आगे बढ़ाना।
  • डिफेंस इक्विपमेंट और टेक्नोलॉजी के बड़े ट्रांसफर की इजाज़त।
  • साथ ही, सख्त एक्सपोर्ट कंट्रोल और मॉनिटरिंग सिस्टम का लगातार पालन करना।
  • और एक्सपोर्ट अप्रूवल का केस-बाई-केस मूल्यांकन।

यह महत्वपूर्ण बदलाव, तेज़ी से बदलते भू-राजनीतिक परिवेश में वैश्विक सुरक्षा के प्रति जापान के विकसित होते दृष्टिकोण को दर्शाता है।

भारत का दृष्टिकोण: मज़बूत होती रणनीतिक साझेदारी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस कदम को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक सकारात्मक घटनाक्रम बताया है।

भारत के लिए यह क्यों मायने रखता है

  • इससे रक्षा और सुरक्षा सहयोग बढ़ेगा।
  • साथ ही, यह टेक्नोलॉजी शेयरिंग और इनोवेशन को भी बढ़ावा देगा।
  • यह संयुक्त रणनीतिक क्षमताओं को मज़बूत करेगा।
  • और सरकार तथा निजी क्षेत्रों के बीच सहयोग को समर्थन देगा।

भारत और जापान पहले ही अपने संयुक्त सुरक्षा समझौतों के तहत गहरे सहयोग के लिए प्रतिबद्ध हैं; इस नीतिगत बदलाव से इस प्रक्रिया में तेज़ी आने की उम्मीद है।

नीतिगत बदलावों के पीछे जापान का रणनीतिक दृष्टिकोण

जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि आज की दुनिया में कोई भी देश अकेले अपनी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता।

नीति के मुख्य उद्देश्य

  • जापान के साझेदार देशों की रक्षा क्षमताओं को मज़बूत करना।
  • यह वैश्विक शांति और संघर्ष की रोकथाम को बढ़ावा देगा।
  • साथ ही, रणनीतिक साझेदारियों और सहयोग को भी प्रोत्साहित करेगा।

भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी के बारे में

भारत और जापान के बीच एक विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी है, जिसमें इन क्षेत्रों में सहयोग शामिल है:

  • रक्षा और सुरक्षा
  • व्यापार और आर्थिक विकास
  • बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी
  • हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता

दोनों देश एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सिंधु जल को लेकर पाकिस्तान की गुहार: यूएनएससी से भारत के साथ संधि बहाल करने की मांग

सिंधु जल संधि (IWT) पर भारत के कड़ी रुख से घबराया पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय मंचों की शरण में पहुंच गया है। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और संयुक्त राष्ट्र महासभा के समक्ष भारत के फैसले का मुद्दा उठाते हुए संधि को ‘पूरी तरह लागू’ कराने की मांग की है।

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी दी कि उन्होंने पाकिस्तान के उप‑प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री की तरफ से लिखा गया पत्र यूएन जनरल असेंबली के अध्यक्ष को सौंपा है। इस पत्र में भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने को ‘क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा’ बताया गया है।

पत्र में क्या कहा गया है?

पत्र में कहा गया है कि भारत का फैसला पाकिस्तान में मानवीय संकट पैदा कर सकता है। साथ ही, भारत पर ‘प्रचार अभियान’ चलाने का आरोप लगाते हुए कश्मीर मुद्दे को भी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया गया है।

65 साल में पहली बार

रिपोर्ट के अनुसार, 1960 की सिंधु जल संधि तीन युद्धों, कारगिल संघर्ष, संसद हमला, 26/11, उरी और पुलवामा जैसे बड़े आतंकी हमलों के बावजूद बनी रही, लेकिन पिछले 65 साल में पहली बार भारत ने इसे अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है। इससे पाकिस्तान पर यह स्पष्ट संदेश गया है कि सीमा‑पार आतंकवाद की कीमत अब उसकी राष्ट्रीय जल जीवनरेखा से जुड़ सकती है।

सिंधु जल संधि: अस्थायी रूप से सस्पेंड

भारत ने 23 अप्रैल 2025 को सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के क्रियान्वयन को अस्थायी रूप से सस्पेंड करने का फैसला किया था। यह कदम पहलगाम आतंकी हमले के ठीक बाद उठाया गया, जिसमें 26 सामान्य नागरिकों की जान गई थी। यह आतंकी हमला पाकिस्तान से आए आतंकियों ने किया था।

भारत ने क्या कहा?

भारत ने कहा कि खून और पानी एक साथ नहीं बर सकते। सरकार का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को विश्वसनीय एवं स्थायी रूप से समाप्त नहीं करता, तब तक 1960 की संधि को उसी पुराने ढर्रे पर चलाना भारत के राष्ट्रीय हित और नागरिकों की सुरक्षा के खिलाफ है।

सिंधु जल संधि पाकिस्तान के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

  • सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है।
  • इसके तहत भारत से जाने वाली पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी मुख्य रूप से पाकिस्तान को आवंटित किया गया है।
  • बता दें, पाकिस्तान अपनी ज्यादातर खेती के लिए इन्हीं नदियों पर निर्भर है।
  • इस संधि पर 1960 में दोनों देशों के बीच हस्ताक्षर हुए थे, जो युद्धों और दशकों की दुश्मनी के बावजूद कायम रही है।

NASSCOM को मिला नया चेयरमैन: AI विशेषज्ञ श्रीकांत वेलामाकन्नी ने संभाला पदभार

श्रीकांत वेलामाकन्नी को NASSCOM का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है। वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एनालिटिक्स के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाने जाते हैं। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था तेज़ी से विस्तार कर रही है। उम्मीद है कि उनका नेतृत्व IT उद्योग को उभरती हुई तकनीकों, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और नवाचार-आधारित विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने में मार्गदर्शन प्रदान करेगा।

श्रीकांत वेलामाकन्नी कौन हैं?

श्रीकांत वेलामाकन्नी एक जाने-माने उद्यमी और टेक्नोलॉजी लीडर हैं।

  • वे Fractal Analytics के सह-संस्थापक हैं।
  • उन्हें डेटा साइंस, AI और बिज़नेस स्ट्रेटेजी के क्षेत्र में दो दशकों से भी ज़्यादा का अनुभव है।
  • एनालिटिक्स-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनके योगदान के लिए उन्हें विश्व स्तर पर भी पहचान मिली है।

AI के क्षेत्र में उनकी मज़बूत पृष्ठभूमि उन्हें भारत के IT इकोसिस्टम में इनोवेशन को बढ़ावा देने वाली एक प्रमुख हस्ती के रूप में स्थापित करती है।

भारत के IT क्षेत्र में Nasscom की भूमिका

NASSCOM (नेशनल एसोसिएशन ऑफ़ सॉफ़्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज़) एक शीर्ष संस्था है, जो भारत के IT और बिज़नेस प्रोसेस मैनेजमेंट उद्योग का प्रतिनिधित्व करती है।

नैसकॉम के मुख्य काम

  • यह IT और डिजिटल सर्विस सेक्टर की ग्रोथ को बढ़ावा देता है।
  • पॉलिसी एडवोकेसी और इंडस्ट्री कोलैबोरेशन को भी सपोर्ट करता है।
  • AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल टेक्नोलॉजी में इनोवेशन को बढ़ावा देना।
  • यह दुनिया भर में भारत की IT इंडस्ट्री को भी रिप्रेजेंट करता है।

नेतृत्व में इस बदलाव का क्या अर्थ है?

वेलामकान्नी की नियुक्ति से कई प्रमुख क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

चूँकि वे AI पृष्ठभूमि से आते हैं, इसलिए AI को अपनाने और उसमें नवाचार पर संभवतः अधिक ज़ोर दिया जाएगा।

चूँकि भारत का IT क्षेत्र वैश्विक स्तर पर कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है, ऐसे में नेतृत्व में बदलाव वैश्विक विस्तार और साझेदारियों के लिए रणनीतियों को संरेखित करने में सहायक हो सकता है।

उनकी दूरदृष्टि डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल परिवर्तन और उभरती हुई तकनीकों जैसे क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देगी।

 

राजेश कुमार अग्रवाल ने पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन में निदेशक का कार्यभार संभाला

राजेश कुमार अग्रवाल ने पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) में निदेशक का पदभार ग्रहण कर लिया है। उन्हें बिजली और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव है। अपने करियर के एक महत्वपूर्ण हिस्से के दौरान वे पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन से जुड़े रहे हैं, जहाँ उन्होंने प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग, क्रेडिट मूल्यांकन और ऋण पोर्टफोलियो प्रबंधन जैसे विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया है।

ऊर्जा और वित्तीय क्षेत्रों में व्यापक अनुभव

राजेश कुमार अग्रवाल के पास 30 वर्षों से अधिक का पेशेवर अनुभव है, जिसका अधिकांश समय उन्होंने PFC में बिताया है।

उनकी विशेषज्ञता के मुख्य क्षेत्रों में शामिल हैं:

  • बड़े पैमाने की बिजली परियोजनाओं के लिए प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग।
  • साथ ही, क्रेडिट मूल्यांकन और जोखिम आकलन।
  • लोन पोर्टफोलियो प्रबंधन का हिस्सा होना।
  • उत्पादन, पारेषण और वितरण से जुड़ी परियोजनाओं का मूल्यांकन।

उनकी नई भूमिका में मुख्य ज़िम्मेदारियाँ

PFC में डायरेक्टर के तौर पर, अग्रवाल संगठन की वित्तीय और परिचालन रणनीतियों को आकार देने में अहम भूमिका निभाएँगे।

मुख्य ज़िम्मेदारियाँ

  • वित्तपोषण से जुड़े फ़ैसलों और उधार देने की रणनीति की देखरेख करना।
  • जोखिम का आकलन और परियोजनाओं का मूल्यांकन करना।
  • साथ ही, वित्तपोषित परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर नज़र रखना।
  • PFC के निवेश पोर्टफ़ोलियो के दीर्घकालिक विकास में सहयोग देना।

पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन के बारे में

पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन भारत की एक अग्रणी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) है, जो बिजली क्षेत्र पर केंद्रित है।

PFC के मुख्य कार्य

  • यह बिजली उत्पादन परियोजनाओं के वित्तपोषण में सहायता करता है।
  • यह पारेषण और वितरण बुनियादी ढांचे को भी सहयोग प्रदान करता है।
  • यह तापीय और नवीकरणीय ऊर्जा, दोनों प्रकार की परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण करता है।

अवलोकन

  • PFC भारत सरकार का एक सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम (NBFC) है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1986 में विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत की गई थी।
  • यह भारतीय विद्युत क्षेत्र को बुनियादी ढाँचे के वित्तपोषण की सुविधा प्रदान करता है।
  • इसे 12 अक्टूबर 2021 को ‘महारत्न’ का दर्जा प्रदान किया गया।
  • PFC BSE और NSE पर भी सूचीबद्ध है।

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