केंद्रीय कैबिनेट ने ₹10,000 करोड़ के स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 (FoF 2.0) को ₹10,000 करोड़ के कोष (Corpus) के साथ मंजूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य भारत के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के लिए वेंचर कैपिटल को प्रोत्साहित करना है, विशेषकर डीप टेक, नवाचारी विनिर्माण (Innovative Manufacturing) और प्रारंभिक-विकास (Early-Growth) क्षेत्रों में। यह कदम भारत के घरेलू निवेश परिदृश्य को मजबूत करने तथा नवाचार-आधारित आर्थिक विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 क्या है?

स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 (FoF 2.0) एक सरकार समर्थित पहल है, जिसका उद्देश्य वैकल्पिक निवेश कोष (Alternative Investment Funds – AIFs) के माध्यम से स्टार्टअप्स तक दीर्घकालिक पूंजी पहुँचाना है।

इस मॉडल में सरकार सीधे स्टार्टअप्स को धन उपलब्ध नहीं कराती, बल्कि AIFs में निवेश करती है। ये AIFs आगे चलकर संभावनाशील स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं। इस व्यवस्था से—

  • वेंचर कैपिटल की उपलब्धता बढ़ती है
  • निजी निवेश को आकर्षित (Crowd-in) करने में मदद मिलती है
  • घरेलू वेंचर कैपिटल फंड्स मजबूत होते हैं
  • उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में वित्तीय अंतर (Funding Gap) कम होता है

यह योजना भारत की स्टार्टअप विकास यात्रा के अगले चरण की महत्वपूर्ण शुरुआत मानी जा रही है।

पृष्ठभूमि: फंड ऑफ फंड्स 1.0 की सफलता

नई योजना फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स (FFS 1.0) की सफलता पर आधारित है, जिसे वर्ष 2016 में शुरू किया गया था।

FFS 1.0 की प्रमुख उपलब्धियाँ:

  • ₹10,000 करोड़ का कोष (Corpus) पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध (Fully Committed) किया गया।
  • 145 वैकल्पिक निवेश कोष (Alternative Investment Funds – AIFs) के माध्यम से निवेश किया गया।
  • 1,370 से अधिक स्टार्टअप्स में ₹25,500 करोड़ से अधिक का निवेश प्रवाहित हुआ।
  • AI, रोबोटिक्स, क्लीन टेक, फिनटेक, बायोटेक, स्पेस टेक और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों को समर्थन मिला।

FFS 1.0 ने पहली बार उद्यम शुरू करने वाले संस्थापकों (First-time Founders) को प्रोत्साहन देने और भारत के वेंचर कैपिटल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

स्टार्टअप इंडिया FoF 2.0 के प्रमुख फोकस क्षेत्र

नई योजना अधिक लक्षित (Targeted) और विभाजित (Segmented) फंडिंग दृष्टिकोण पर आधारित है।

1. डीप टेक और नवाचारी विनिर्माण

यह योजना उन उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों को प्राथमिकता देती है, जिन्हें दीर्घकालिक और धैर्यपूर्ण पूंजी (Patient Capital) की आवश्यकता होती है, जैसे—

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
  • रोबोटिक्स
  • सेमीकंडक्टर डिज़ाइन
  • स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy)
  • उन्नत विनिर्माण (Advanced Manufacturing)

ये क्षेत्र भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

2. प्रारंभिक-विकास (Early-Growth) चरण के स्टार्टअप्स

FoF 2.0 प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप्स को पूंजीगत सहायता (Funding Cushion) प्रदान करेगा, ताकि धन की कमी के कारण उनकी विफलता की संभावना कम हो। प्रारंभिक फंडिंग गैप अक्सर नवाचार को सीमित कर देता है, और यह योजना उसी चुनौती को दूर करने का प्रयास करती है।

3. मेट्रो शहरों से परे राष्ट्रीय विस्तार

यह योजना वेंचर कैपिटल को टियर-2 और टियर-3 शहरों तक पहुँचाने को प्रोत्साहित करती है, जिससे नवाचार केवल बेंगलुरु या मुंबई जैसे प्रमुख केंद्रों तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे देश में फैल सके।

4. उच्च-जोखिम पूंजी अंतर की पूर्ति

आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता से जुड़े प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को केंद्रित पूंजी आवंटन प्रदान किया जाएगा। इससे उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों में मौजूद वित्तीय अंतर (High-Risk Capital Gaps) को कम करने में सहायता मिलेगी।

भारत के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र की वृद्धि

वर्ष 2016 में स्टार्टअप इंडिया पहल शुरू होने के बाद से भारत का स्टार्टअप परिदृश्य उल्लेखनीय रूप से विस्तारित हुआ है।

  • 2016 में 500 से भी कम स्टार्टअप्स थे।
  • आज 2 लाख से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त (DPIIT-recognised) स्टार्टअप्स हैं।
  • वर्ष 2025 में अब तक का सबसे अधिक वार्षिक स्टार्टअप पंजीकरण दर्ज किया गया।

इस तीव्र वृद्धि ने भारत को विश्व के अग्रणी स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्रों में शामिल कर दिया है।

विकसित भारत @ 2047 के साथ सामंजस्य

₹10,000 करोड़ का स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 भारत के दीर्घकालिक विज़न विकसित भारत @ 2047 के अनुरूप है। नवाचार-आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देकर यह योजना—

  • विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने
  • उच्च-गुणवत्ता वाले रोजगार सृजित करने
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने
  • आर्थिक लचीलापन (Economic Resilience) विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

यह पहल भारत को एक वैश्विक नवाचार केंद्र (Global Innovation Hub) के रूप में स्थापित करने की महत्वाकांक्षा को और सशक्त बनाती है।

असम को मिला कुमार भास्कर वर्मा सेतु, पूर्वोत्तर की पहली इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम में कई महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जिनमें गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी पर निर्मित कुमार भास्कर वर्मा सेतु तथा डिब्रूगढ़ जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग पर पूर्वोत्तर क्षेत्र की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) शामिल है। ये परियोजनाएँ ₹5,450 करोड़ से अधिक के व्यापक विकास अभियान का हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र में कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करना, रणनीतिक तैयारियों को मजबूत करना, शहरी गतिशीलता में सुधार करना और क्षेत्रीय विकास को गति देना है।

कुमार भास्कर वर्मा सेतु: गुवाहाटी की कनेक्टिविटी में बदलाव

कुमार भास्कर वर्मा सेतु 2.86 किलोमीटर लंबा, छह-लेन वाला एक्स्ट्राडोज्ड प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (PSC) पुल है, जिसका निर्माण लगभग ₹3,030 करोड़ की लागत से किया गया है। यह पुल गुवाहाटी को उत्तर गुवाहाटी से जोड़ता है और पूर्वोत्तर भारत का पहला एक्स्ट्राडोज्ड पुल है।

इसके शुरू होने से शहर के दोनों हिस्सों के बीच यात्रा समय घटकर मात्र सात मिनट रह जाएगा। यह पुल प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर सहित कई महत्वपूर्ण स्थलों तक बेहतर संपर्क सुनिश्चित करता है।

इस पुल में उन्नत इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग किया गया है, जैसे—

  • फ्रिक्शन पेंडुलम बेयरिंग के साथ बेस आइसोलेशन तकनीक
  • अधिक टिकाऊपन के लिए उच्च-प्रदर्शन स्टे केबल्स

साथ ही, ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम (BHMS) के माध्यम से पुल की संरचना की वास्तविक समय (Real-time) निगरानी संभव है, जिससे इसकी सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित होती है।

पूर्वोत्तर का पहला हाईवे इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF)

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिब्रूगढ़ जिले के मोरान बाईपास पर पूर्वोत्तर क्षेत्र की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) का उद्घाटन किया।
  • भारतीय वायु सेना के समन्वय से विकसित यह ELF एक द्वि-उपयोग (Dual-use) अवसंरचना है, जो आपात स्थितियों में सैन्य और नागरिक दोनों प्रकार के विमानों के संचालन में सहायक होगी।
  • उद्घाटन के तुरंत बाद भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों— Sukhoi Su-30MKI और Dassault Rafale —ने इस राष्ट्रीय राजमार्ग खंड पर सफल टेक-ऑफ और लैंडिंग का प्रदर्शन किया। इस ऐतिहासिक क्षण को लगभग एक लाख दर्शकों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा।

रणनीतिक और आपदा-तैयार अवसंरचना

4.2 किलोमीटर लंबा यह प्रबलित कंक्रीट (Reinforced Concrete) राजमार्ग खंड इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि आवश्यकता पड़ने पर यह एक आपातकालीन रनवे के रूप में कार्य कर सके। यह निम्न क्षमता वाले विमानों को संभाल सकता है—

  • अधिकतम 40 टन वजन तक के लड़ाकू विमान
  • अधिकतम 74 टन टेक-ऑफ वजन वाले परिवहन विमान

विमानों की आवाजाही सुगम बनाने के लिए इस सुविधा में बीच में कोई सेंट्रल डिवाइडर नहीं रखा गया है। संचालन की पूर्ण तैयारी सुनिश्चित करने हेतु फेंसिंग की गई है तथा सड़क किनारे की अस्थायी संरचनाओं को हटाया गया है।

असम के ऊपरी क्षेत्र (Upper Assam) में, भारत-चीन सीमा के निकट स्थित यह ELF भारत की सैन्य तैयारी को मजबूत करता है। यदि डिब्रूगढ़ हवाई अड्डा या चाबुआ वायुसेना स्टेशन उपलब्ध न हो, तो यह एक वैकल्पिक लैंडिंग विकल्प प्रदान करता है।

हाईवे लैंडिंग फैसिलिटी क्यों महत्वपूर्ण हैं

  • राजमार्ग आधारित आपातकालीन लैंडिंग पट्टियाँ लचीलापन और रणनीतिक बढ़त प्रदान करती हैं।
  • स्थायी एयरबेस के विपरीत, ये आपात स्थितियों में अतिरिक्त विकल्प (Redundancy) और संचालन में आश्चर्य तत्व (Operational Surprise) उपलब्ध कराती हैं।
  • पूर्वोत्तर जैसे क्षेत्र, जो प्राकृतिक आपदाओं और रणनीतिक संवेदनशीलताओं के प्रति संवेदनशील है, वहाँ ऐसी सुविधाएँ त्वरित तैनाती क्षमता और आपदा प्रतिक्रिया दक्षता को बढ़ाती हैं।
  • इस प्रकार, यह ELF राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय सहायता उद्देश्यों की भी पूर्ति करता है।

 

सेवा तीर्थ से PM मोदी ने दुर्घटना पीड़ितों के लिए ‘पीएम राहत योजना’ की घोषणा की

केंद्र सरकार ने 14 फरवरी 2026 को पीएम राहत योजना शुरू करने की घोषणा की। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटना पीड़ितों को आपातकालीन चिकित्सा उपलब्ध कराना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 14 फरवरी को ‘सेवा तीर्थ’ स्थानांतरित होने के तुरंत बाद पीएम राहत (PM RAHAT – Road Accident Victim Hospitalization and Assured Treatment) योजना को मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी सड़क दुर्घटना पीड़ित को धन की कमी के कारण जीवनरक्षक उपचार से वंचित न होना पड़े। पीएम राहत योजना के अंतर्गत पात्र पीड़ितों को दुर्घटना की तिथि से 7 दिनों तक प्रति व्यक्ति अधिकतम ₹1.5 लाख तक का कैशलेस उपचार प्रदान किया जाएगा। यह पहल भारत की आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम मानी जा रही है।

भारत के लिए पीएम राहत क्यों महत्वपूर्ण है

भारत में हर वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु होती है। अध्ययनों के अनुसार, लगभग 50% दुर्घटना मृत्यु को रोका जा सकता है यदि पीड़ितों को गोल्डन ऑवर (Golden Hour) — यानी दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा — के भीतर समय पर उपचार मिल जाए। इस दौरान शीघ्र चिकित्सा सहायता मिलने से जीवित रहने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

पीएम राहत (PM RAHAT – Road Accident Victim Hospitalization and Assured Treatment) योजना शुरू करके सरकार का उद्देश्य है—

  • तुरंत अस्पताल में भर्ती सुनिश्चित करना
  • अस्पतालों के लिए वित्तीय निश्चितता प्रदान करना
  • संगठित आपातकालीन समन्वय प्रणाली विकसित करना
  • कमजोर और वंचित नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करना
  • यह निर्णय सेवा, करुणा और जवाबदेही पर आधारित सुशासन मॉडल को दर्शाता है।

पीएम राहत योजना की प्रमुख विशेषताएँ

पीएम राहत योजना दुर्घटना पीड़ितों को संरचित और तकनीक-आधारित सहायता प्रदान करती है।

मुख्य बिंदु:

  • प्रति पीड़ित ₹1.5 लाख तक का कैशलेस उपचार
  • दुर्घटना की तिथि से 7 दिनों तक कवरेज
  • स्थिरीकरण (Stabilization) उपचार की सुविधा:
  • गैर-गंभीर मामलों में अधिकतम 24 घंटे तक
  • जीवन-घातक मामलों में अधिकतम 48 घंटे तक
  • डिजिटल प्रणाली के माध्यम से पुलिस सत्यापन
  • किसी भी श्रेणी की सड़क पर लागू

यह सुनिश्चित करता है कि आर्थिक बाधाओं के बिना आपातकालीन उपचार तुरंत शुरू हो सके।

ERSS 112 और डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण

पीएम राहत (PM RAHAT) योजना को Emergency Response Support System (ERSS 112) हेल्पलाइन से एकीकृत किया गया है। इसके माध्यम से दुर्घटना पीड़ित, ‘राह-वीर’ (Good Samaritans) या आसपास मौजूद लोग 112 डायल करके एम्बुलेंस सहायता तथा निकटतम नामित अस्पताल की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, यह योजना निम्न डिजिटल प्रणालियों से भी जुड़ी है—

  • सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का eDAR प्लेटफॉर्म (Electronic Detailed Accident Report)
  • National Health Authority का TMS 2.0 सिस्टम
  • यह एकीकरण दुर्घटना की रिपोर्टिंग से लेकर अस्पताल में भर्ती, पुलिस सत्यापन, उपचार और भुगतान निपटान तक एक सुचारु एवं निर्बाध डिजिटल प्रक्रिया सुनिश्चित करता है।

वित्तपोषण और प्रतिपूर्ति तंत्र

  • पीएम राहत के तहत प्रतिपूर्ति मोटर वाहन दुर्घटना निधि (Motor Vehicle Accident Fund – MVAF) के माध्यम से की जाएगी।
  • यदि दोषी वाहन बीमित है, तो भुगतान सामान्य बीमा कंपनियों द्वारा किया जाएगा।
  • यदि वाहन बीमित नहीं है या मामला ‘हिट एंड रन’ का है, तो भुगतान भारत सरकार के बजट आवंटन से किया जाएगा।
  • राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा स्वीकृत दावों का निपटान 10 दिनों के भीतर किया जाएगा, जिससे अस्पतालों को वित्तीय निश्चितता प्राप्त होगी।
  • यह संरचना अस्पतालों को बिना किसी बाधा के निरंतर आपातकालीन उपचार प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

शिकायत निवारण और जवाबदेही

पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए शिकायतों का निपटान जिला सड़क सुरक्षा समिति द्वारा नामित शिकायत निवारण अधिकारी करेंगे।

यह समिति जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट/उपायुक्त की अध्यक्षता में कार्य करती है।

पुलिस सत्यापन की समय-सीमा निर्धारित की गई है—

  • गैर-जीवन-घातक मामलों में 24 घंटे
  • जीवन-घातक मामलों में 48 घंटे

यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि आपातकालीन उपचार में देरी किए बिना जवाबदेही कायम रहे।

भारत पहली बार ग्लोबल साउथ AI इम्पैक्ट समिट 2026 की मेज़बानी करेगा

AI इम्पैक्ट समिट 2026 आज 16 फरवरी, 2026 को भारत मंडपम में ऑफिशियली शुरू होने वाला है। यह भारत और ग्लोबल साउथ के लिए एक ऐतिहासिक पल है। यह पांच दिन का समिट ग्लोबल साउथ में होस्ट किया गया पहला ग्लोबल AI समिट है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस गवर्नेंस और कोऑपरेशन के भविष्य को आकार देने के लिए दुनिया के लीडर्स, पॉलिसीमेकर्स, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन्स को एक साथ ला रहा है।

AI इम्पैक्ट समिट 2026: ग्लोबल साउथ के लिए ऐतिहासिक अवसर

  • AI इम्पैक्ट समिट 2026 इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ग्लोबल साउथ में आयोजित पहला वैश्विक AI सम्मेलन है।
  • भारत स्वयं को विकसित और विकासशील देशों के बीच जिम्मेदार AI नीतियों के निर्माण में एक सेतु (Bridge) के रूप में स्थापित कर रहा है।
  • यह आयोजन नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में हो रहा है। 100 से अधिक देशों को आमंत्रित किया गया है और 45 से अधिक देशों के मंत्रीस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इसमें भाग ले रहे हैं।
  • United Nations के महासचिव तथा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति इस सम्मेलन के वैश्विक महत्व को दर्शाती है।
  • यह सम्मेलन वैश्विक डिजिटल शासन (Digital Governance) में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को मजबूत करता है।

दुनिया भर के लीडर्स भारत में इकट्ठा हुए

AI इम्पैक्ट समिट 2026 में 20 से ज़्यादा देशों के लीडर्स हिस्सा ले रहे हैं।

इसमें शामिल होने वाले खास लोगों में शामिल हैं,

  • इमैनुएल मैक्रों (फ्रांस-राष्ट्रपति)
  • लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा (ब्राज़ील-राष्ट्रपति)
  • पेड्रो सांचेज़ पेरेज़-कास्टेजोन (स्पेन-राष्ट्रपति)
  • गाय पारमेलिन (राष्ट्रपति-स्विट्ज़रलैंड)
  • डिक शूफ़ (PM-नीदरलैंड)
  • शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान (क्राउन प्रिंस UAE)
  • नवीनचंद्र रामगुलाम (PM-मॉरिशस)
  • अनुरा कुमारा दिसानायके (राष्ट्रपति-श्रीलंका)
  • सेबेस्टियन पिल्ले (VP-सेशेल्स)
  • शेरिंग तोबगे (भूटान-PM)

बोलीविया, क्रोएशिया, एस्टोनिया, फिनलैंड, ग्रीस, गुयाना, कजाकिस्तान, लिकटेंस्टीन, सर्बिया और स्लोवाकिया के नेता भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं। 45 से ज़्यादा देशों के मिनिस्टीरियल डेलीगेशन और UN सेक्रेटरी-जनरल भी इसमें शामिल हो रहे हैं।

मुख्य विषय: वैश्विक AI सहयोग का मार्गदर्शन करने वाले तीन सूत्र

AI Impact Summit 2026 तीन मूलभूत स्तंभों (जिन्हें “सूत्र” कहा गया है) पर आधारित है।

1. People (लोग)

मानव-केंद्रित AI विकास पर जोर, जिसमें समावेशन, सुरक्षा और नैतिक मानकों को सुनिश्चित किया जाता है।

2. Planet (पृथ्वी)

जलवायु और पर्यावरणीय लक्ष्यों के अनुरूप टिकाऊ (Sustainable) AI प्रणालियों को बढ़ावा देना।

3. Progress (प्रगति)

AI के माध्यम से नवाचार-आधारित विकास और समान (Equitable) आर्थिक उन्नति को प्रोत्साहित करना।

ये तीनों स्तंभ नवाचार और जिम्मेदारी के बीच संतुलन स्थापित करने का लक्ष्य रखते हैं।

सात चक्र: विषयगत कार्य समूह

AI Impact Summit 2026 की चर्चाएँ सात “चक्रों” अथवा कार्य समूहों में संगठित की गई हैं।

  1. मानव पूंजी (Human Capital)
  2. सामाजिक सशक्तिकरण हेतु समावेशन (Inclusion for Social Empowerment)
  3. सुरक्षित और विश्वसनीय AI (Safe and Trusted AI)
  4. विज्ञान (Science)
  5. लचीलापन (Resilience)
  6. नवाचार और दक्षता (Innovation and Efficiency)
  7. AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण एवं आर्थिक विकास के लिए AI (Democratizing AI Resources & AI for Economic Development)

ये सातों चक्र AI शासन (AI Governance) के प्रति भारत के संरचित, संतुलित और समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।

भारत के लिए AI Impact Summit 2026 का महत्व

  • AI Impact Summit 2026 भारत की वैश्विक प्रौद्योगिकी नेता के रूप में भूमिका को मजबूत करता है।
  • ग्लोबल साउथ में इस प्रकार के पहले सम्मेलन की मेजबानी करना डिजिटल कूटनीति में भारत के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
  • यह सम्मेलन आर्थिक विकास और सामाजिक समावेशन के साथ जिम्मेदार AI विकास के भारत के दृष्टिकोण को समर्थन देता है।
  • यह भारत को एक ऐसे मंच के रूप में स्थापित करता है, जहाँ विकसित और विकासशील देश समान रूप से AI शासन पर चर्चा कर सकते हैं।
  • व्यापक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और मजबूत विषयगत फोकस के कारण यह सम्मेलन बहुपक्षीय मंचों पर भविष्य के AI सहयोग ढाँचों को आकार देने की क्षमता रखता है।

AI Impact Summit 2026 से जुड़े स्थिर तथ्य

  • आयोजन स्थल: Bharat Mandapam, नई दिल्ली
  • ग्लोबल साउथ में आयोजित पहला वैश्विक AI सम्मेलन
  • 20 से अधिक देशों के नेता उपस्थित
  • 45 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडल भाग ले रहे हैं
  • सम्मेलन तीन सूत्रों—People, Planet, Progress—द्वारा निर्देशित है
  • चर्चाएँ सात चक्रों (Seven Chakras) में संरचित हैं
  • दो लाख से अधिक प्रतिभागियों ने ऑनलाइन पंजीकरण किया
  • उद्देश्य: वैश्विक AI शासन और सहयोग को सुदृढ़ करना

यह सम्मेलन वैश्विक स्तर पर AI नीति-निर्माण और सहयोग की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है।

WHO ने वैश्विक पोलियो उन्मूलन को मजबूत करने हेतु नए nOPV2 टीके को दी प्रीक्वालिफिकेशन मंजूरी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक अतिरिक्त नवीन ओरल पोलियो वैक्सीन टाइप-2 (nOPV2) को प्रीक्वालिफिकेशन प्रदान किया है। यह कदम सर्कुलेटिंग वैक्सीन-डेराइव्ड पोलियोवायरस टाइप-2 (cVDPV2) से होने वाले प्रकोपों के प्रति वैश्विक प्रतिक्रिया क्षमता को और मजबूत करेगा।

WHO की प्रीक्वालिफिकेशन प्रक्रिया यह प्रमाणित करती है कि संबंधित वैक्सीन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रभावशीलता के मानकों को पूरा करती है। इसके बाद UNICEF जैसी संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां इस टीके की वैश्विक स्तर पर खरीद और वितरण कर सकती हैं, जिससे पोलियो उन्मूलन प्रयासों को गति मिलेगी।

nOPV2 क्या है?

नवीन ओरल पोलियो वैक्सीन टाइप-2 (nOPV2) एक उन्नत टीका है, जिसे वैक्सीन-जनित पोलियोवायरस टाइप-2 (cVDPV2) से होने वाले प्रकोपों को रोकने के लिए विकसित किया गया है। यह विशेष रूप से उन क्षेत्रों में प्रभावी है जहाँ टीकाकरण कवरेज कम होने के कारण वायरस फैलने का खतरा अधिक रहता है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • पुराने OPV टीकों की तुलना में जीन संबंधी रूप से अधिक स्थिर
  • घातक (विरुलेंट) रूप में परिवर्तित होने का कम जोखिम
  • वायरस के प्रसार को तेजी से रोकने की क्षमता बरकरार
  • लगभग 24 महीनों तक शेल्फ लाइफ
  • सामान्य वैक्सीन तापमान पर सुरक्षित भंडारण संभव

हाल ही में प्रीक्वालिफाइड किया गया यह टीका हैदराबाद स्थित Biological E Limited द्वारा निर्मित है। इससे पहले इसका उत्पादन इंडोनेशिया की एक कंपनी द्वारा किया जा रहा था। अब भारत में उत्पादन शुरू होने से वैश्विक आपूर्ति प्रणाली अधिक मजबूत और लचीली बनेगी।

वैश्विक महत्व

1980 के दशक से अब तक टीकाकरण अभियानों के कारण दुनिया भर में पोलियो मामलों में 99% से अधिक की कमी आई है। फिर भी, कम टीकाकरण वाले क्षेत्रों में cVDPV2 के प्रकोप सामने आते रहते हैं।

इस नई प्रीक्वालिफिकेशन से:

  • प्रकोप से निपटने की क्षमता मजबूत होगी
  • वैक्सीन आपूर्ति में विविधता आएगी
  • वैश्विक स्तर पर त्वरित वितरण संभव होगा
  • पोलियो उन्मूलन के अंतिम चरण को गति मिलेगी

World Health Organization के महानिदेशक Tedros Adhanom Ghebreyesus ने दोहराया है कि पोलियो उन्मूलन में टीकों की भूमिका केंद्रीय और निर्णायक है।

भारत के लिए महत्व

भारत को 2014 में पोलियो-मुक्त घोषित किया गया था। फिर भी, उच्च टीकाकरण कवरेज बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है ताकि बीमारी दोबारा न उभरे।

यह विकास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:

  • बेहतर और स्थिर वैक्सीन आपूर्ति सुनिश्चित होती है
  • भारत की प्रकोप-तैयारी क्षमता मजबूत होती है
  • भारत की वैश्विक वैक्सीन निर्माण में भूमिका सशक्त होती है
  • नियमित टीकाकरण एवं विशेष अभियानों को समर्थन मिलता है

भारत दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रमों में से एक संचालित करता है। nOPV2 की विविध आपूर्ति उपलब्ध होने से देश की पोलियो-मुक्त स्थिति बनाए रखने में अतिरिक्त विश्वास मिलता है।

परीक्षा हेतु मुख्य बिंदु

  • WHO द्वारा अतिरिक्त nOPV2 वैक्सीन को प्रीक्वालिफिकेशन
  • लक्षित वायरस: cVDPV2
  • निर्माण: Biological E Limited (भारत)
  • भारत 2014 में पोलियो-मुक्त घोषित
  • वैश्विक प्रकोप प्रतिक्रिया एवं वैक्सीन आपूर्ति सुदृढ़

यह प्रीक्वालिफिकेशन पोलियो उन्मूलन की वैश्विक यात्रा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा वैक्सीन उत्पादन में भारत की अग्रणी भूमिका को मजबूत करता है।

एशियन राइफल/पिस्टल चैंपियनशिप 2026: भारत 94 मेडल के साथ मेडल टैली में टॉप पर

भारत ने डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में हुई एशियन राइफल/पिस्टल चैंपियनशिप 2026 में शानदार प्रदर्शन किया और 94 मेडल जीतकर मेडल टेबल में टॉप पर रहा।

भारत की मेडल टैली

  • 51 गोल्ड
  • 23 सिल्वर
  • 20 ब्रॉन्ज़
  • कुल: 94 मेडल

सिर्फ आखिरी दिन, भारतीय शूटर्स ने 6 गोल्ड, 3 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज़ मेडल जीते, जिससे कॉन्टिनेंटल शूटिंग में उनका दबदबा और पक्का हो गया।

फाइनल दिवस की मुख्य झलकियाँ

25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल (सीनियर)

अमनप्रीत सिंह ने 589-24x के स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता। ओलंपियन गुरप्रीत सिंह ने 584-20x के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि अंकुर गोयल ने 570-11x के स्कोर के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। इस तिकड़ी ने टीम स्पर्धा में भी भारत को स्वर्ण पदक दिलाया।

25 मीटर पिस्टल (जूनियर)

सूरज शर्मा ने 585-25x के शानदार प्रदर्शन के साथ स्वर्ण पदक जीता। मुकेश नेलावल्ली ने 582-21x के साथ रजत पदक प्राप्त किया, जबकि डेफलंपिक्स पदक विजेता अभिनव देशवाल ने 573-17x के साथ कांस्य पदक हासिल किया। भारत ने इस स्पर्धा में पोडियम स्वीप करते हुए टीम स्वर्ण पदक भी जीता।

50 मीटर राइफल प्रोन (महिला – सीनियर)

सिफ्ट कौर समरा ने 623.2 के स्कोर के साथ रजत पदक जीता। वर्ष 2010 की विश्व चैंपियन तेजस्विनी सावंत ने कांस्य पदक हासिल किया, जबकि स्वर्ण पदक कजाखस्तान की खिलाड़ी ने जीता। समरा, सावंत और मनीनी कौशिक की तिकड़ी ने टीम स्वर्ण पदक भी अपने नाम किया।

50 मीटर राइफल प्रोन (महिला – जूनियर)

धवलिका देवी न्यामुरुस ने 614.1 के स्कोर के साथ कांस्य पदक जीता। कजाखस्तान की तोमिरिस अमानोवा और दर्या पोनोमारेंको ने क्रमशः स्वर्ण और रजत पदक हासिल किए। भारतीय टीम की प्राची गायकवाड़, अनुष्का ठाकुर और देवी ने मिलकर टीम स्वर्ण पदक जीता।

महत्व

भारत ने कई स्पर्धाओं में पोडियम स्वीप करते हुए शानदार प्रदर्शन किया। सीनियर और जूनियर दोनों वर्गों में मजबूत प्रदर्शन ने एशिया में भारत की एक अग्रणी निशानेबाजी राष्ट्र के रूप में स्थिति को और सुदृढ़ किया। पिस्टल और राइफल दोनों स्पर्धाओं में प्रतिभा की गहराई स्पष्ट रूप से देखने को मिली। यह चैंपियनशिप भारतीय निशानेबाजों के लिए व्यक्तिगत और टीम दोनों स्तरों पर अत्यंत सफल रही।

भारतीय सेना पहले इंटरनेशनल मिलिट्री एडवेंचर चैलेंज कप (IMACC) 2026 की मेज़बानी करेगी

भारतीय सेना 18 से 23 फरवरी 2026 तक पूर्वी हिमालय की तराई में पहली बार अंतरराष्ट्रीय सैन्य एडवेंचर चैलेंज कप (IMACC) 2026 की मेजबानी करेगा। इस आयोजन का उद्देश्य सैन्य सहयोग को सुदृढ़ करना तथा कठिन और चुनौतीपूर्ण भू-भाग में सैनिकों की सहनशक्ति और परिचालन क्षमताओं की परीक्षा लेना है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, IMACC 2026 में भारत और मित्र देशों की सैन्य टीमें भाग लेंगी। एक सप्ताह तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में साहसिक गतिविधियों और सहनशक्ति आधारित चुनौतियों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी, जिससे सैनिकों के कौशल, टीमवर्क और रणनीतिक क्षमता का व्यापक परीक्षण किया जाएगा।

भाग लेने वाले देश और बल

IMACC 2026 में सात मित्र देशों की टीमें भाग लेंगी—
भूटान, ब्राज़ील, कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, नेपाल, श्रीलंका और सऊदी अरब।

भारत की ओर से भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना, भारतीय तटरक्षक बल तथा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की टीमें भाग लेंगी।

IMACC 2026 के उद्देश्य

यह प्रतियोगिता सैनिकों की शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता, टीमवर्क, नेतृत्व कौशल और दबाव में निर्णय लेने की क्षमता की परीक्षा लेने के लिए डिज़ाइन की गई है। सभी प्रतियोगिताएँ दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में आयोजित की जाएँगी, जो सशस्त्र बलों द्वारा वास्तविक परिचालन परिस्थितियों का अनुकरण करेंगी।

वैश्विक सैन्य खेल सहयोग

अंतरराष्ट्रीय सैन्य खेल आयोजन सशस्त्र बलों के बीच विश्वास, सहयोग और सौहार्द को बढ़ावा देते हैं। ये आयोजन अंतर्राष्ट्रीय सैन्य खेल परिषद (CISM) के बैनर तले आयोजित किए जाते हैं, जिसका आदर्श वाक्य है— “Friendship through Sport।”

भारत CISM की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेता रहा है और वर्ष 2007 में 4वें CISM मिलिट्री वर्ल्ड गेम्स की मेजबानी भी कर चुका है।

महत्व

IMACC 2026 रक्षा कूटनीति को सुदृढ़ करेगा, मित्र देशों के बीच पारस्परिक सहयोग (Interoperability) को बढ़ावा देगा, वैश्विक सैन्य सहयोग में भारत की भूमिका को मजबूत करेगा तथा सैनिकों में शारीरिक और मानसिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करेगा। यह आयोजन सैन्य तत्परता और अंतरराष्ट्रीय खेल सहयोग के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

नेशनल स्टैटिस्टिकल सिस्टम्स ट्रेनिंग एकेडमी ने 18वां स्थापना दिवस मनाया

राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणाली प्रशिक्षण अकादमी (NSSTA), जो सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अंतर्गत कार्यरत है, ने उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित महालनोबिस ऑडिटोरियम, नॉलेज पार्क-II में अपना 18वां स्थापना दिवस मनाया। इस वर्ष की थीम थी — “विकसित भारत@2047 के विज़न को प्राप्त करने के लिए आधिकारिक सांख्यिकी में क्षमता निर्माण की पुनर्कल्पना”। इस अवसर पर NSSTA की उस यात्रा को रेखांकित किया गया, जिसके तहत यह भारत की आधिकारिक सांख्यिकीय प्रणाली को कौशल विकास, नैतिक मानकों और तकनीकी उन्नति के माध्यम से सशक्त बनाने वाली एक प्रमुख केंद्रीय प्रशिक्षण संस्था के रूप में स्थापित हुई है।

कार्यक्रम की मुख्य झलकियाँ

क्षमता निर्माण पर विशेष जोर

P. R. Meshram, महानिदेशक (डेटा गवर्नेंस) ने कहा कि आधुनिक क्षमता निर्माण पारंपरिक प्रशिक्षण से आगे बढ़कर लोगों (People), प्रक्रियाओं (Processes) और प्लेटफॉर्म (Platforms) में निवेश पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सांख्यिकी को आम जनता के लिए सरल और समझने योग्य बनाने में प्रभावी संचार कौशल की महत्वपूर्ण भूमिका है।

केंद्रीय मंत्री का संबोधन

केंद्रीय मंत्री Rao Inderjit Singh ने कहा कि सांख्यिकी साक्ष्य-आधारित शासन की आधारशिला है। उन्होंने क्षमता निर्माण में बिग डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मजबूत संस्थानों के निर्माण में सक्षम व्यक्तियों की भूमिका को रेखांकित करते हुए इस पहल को “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” की भावना से जोड़ा।

डेटा: उत्पादन का पाँचवाँ कारक

Saurabh Garg, सचिव, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने डेटा को भूमि, श्रम, पूंजी और प्रौद्योगिकी के साथ “उत्पादन का पाँचवाँ कारक” बताया। उन्होंने भारतीय सांख्यिकी सेवा (ISS) के पुनर्गठन, 60 मंत्रालयों में ISS अधिकारियों की तैनाती तथा जिला स्तर पर सूक्ष्म (ग्रैन्युलर) डेटा प्रसार पर विशेष ध्यान देने की बात कही।

डिजिटल डेटा लैब का उद्घाटन

केंद्रीय मंत्री ने डिजिटल डेटा लैब का उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य—

  • डिजिटल कौशल को बढ़ावा देना
  • उभरती तकनीकों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना
  • AI-सक्षम सांख्यिकीय प्रणालियों को समर्थन देना
  • मिशन कर्मयोगी को सशक्त बनाना

अंतरराष्ट्रीय मान्यता

स्टीफन प्रीसनर, संयुक्त राष्ट्र रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर ने सांख्यिकी को “विकास का व्याकरण” बताते हुए कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) 2030 और भारत के विजन 2047 को प्राप्त करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

अन्य प्रमुख बिंदु

  • ISS प्रशिक्षुओं द्वारा “AAROHAN” और “PRATIBIMB” पत्रिकाओं का विमोचन।
  • “नीतिनिर्माताओं और जनता तक सांख्यिकी का संप्रेषण” विषय पर पैनल चर्चा।
  • iGOT कर्मयोगी पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

महत्व

18वें स्थापना दिवस समारोह ने National Statistical Systems Training Academy (NSSTA) की प्रतिबद्धता को दोहराया, जिसमें आधिकारिक सांख्यिकी को मजबूत करना, डेटा-आधारित नीति निर्माण के माध्यम से सुशासन को बढ़ावा देना, AI और उन्नत विश्लेषण को अपनाना तथा भविष्य के लिए तैयार सांख्यिकीय कार्यबल का निर्माण शामिल है।

यह आयोजन विकसित भारत@2047 की दीर्घकालिक विकास दृष्टि के अनुरूप है और इस बात पर बल देता है कि सुदृढ़ डेटा प्रणाली प्रभावी शासन और समावेशी विकास की केंद्रीय आधारशिला है।

नीति आयोग ने “ट्रेड वॉच क्वार्टरली” का छठा संस्करण जारी किया

NITI Aayog ने वित्त वर्ष 2025–26 की दूसरी तिमाही (जुलाई–सितंबर 2025) के लिए अपनी प्रमुख प्रकाशन “Trade Watch Quarterly” का छठा संस्करण जारी किया। यह रिपोर्ट नई दिल्ली में उपाध्यक्ष Suman Bery द्वारा सदस्य Arvind Virmani की उपस्थिति में जारी की गई। इस प्रकाशन में वैश्विक और घरेलू व्यापार रुझानों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है, साथ ही भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार पर विशेष फोकस किया गया है।

Q2 FY26 में व्यापार प्रदर्शन के प्रमुख निष्कर्ष

  • भारत के कुल निर्यात (सेवाएँ + वस्तुएँ) में लगभग 8.5% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • निर्यात वृद्धि आयात से अधिक रही, जिससे व्यापार विस्तार कायम रहा।
  • वैश्विक व्यापार वृद्धि की गति कुछ धीमी रही, लेकिन सकारात्मक बनी रही।
  • वैश्विक स्तर पर सेवाओं का प्रदर्शन वस्तुओं की तुलना में बेहतर रहा।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 2005 से विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार लगभग चार गुना बढ़ा है, जो वैश्विक दक्षिण के साथ भारत के बढ़ते एकीकरण को दर्शाता है।

थीमैटिक फोकस: इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार

इलेक्ट्रॉनिक्स भारत के निर्यात बास्केट में दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र बनकर उभरा है।

मुख्य बिंदु:

  • 2015–2024 के बीच वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मांग में भारत की हिस्सेदारी 17.2% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ी, जबकि वैश्विक वृद्धि दर 4.4% रही।
  • 2016 से 2024 के बीच इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगभग पाँच गुना बढ़कर 42.1 अरब डॉलर तक पहुँच गया।
  • वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार का आकार 4.6 ट्रिलियन डॉलर है।

प्रमुख निर्यात गंतव्य:

  • संयुक्त राज्य अमेरिका
  • यूनाइटेड किंगडम
  • संयुक्त अरब अमीरात

भारत ने निम्न क्षेत्रों में मजबूत स्थिति बनाई है—

  • मोबाइल फोन
  • उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स
  • संचार उपकरण

नीतिगत समर्थन

केंद्रीय बजट में इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना के तहत 40,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, ताकि घरेलू उत्पादन और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिल सके।

भविष्य के विकास क्षेत्र:

  • प्रिंटेड सर्किट बोर्ड डिजाइन
  • सेमीकंडक्टर असेंबली और परीक्षण
  • पावर इलेक्ट्रॉनिक्स
  • एम्बेडेड सिस्टम्स

ई-कॉमर्स की भूमिका

भारत विश्व के शीर्ष छह ई-कॉमर्स बाजारों में शामिल है, जहाँ ऑनलाइन खुदरा व्यापार में इलेक्ट्रॉनिक्स की हिस्सेदारी लगभग आधी है।

हालाँकि ई-कॉमर्स निर्यात वर्तमान में सीमित हैं, लेकिन 2030 तक इनके भारत के वस्तु निर्यात में 20–30% योगदान देने का अनुमान है। इसे समर्थन मिलेगा—

  • लॉजिस्टिक्स सुधारों से
  • नियामकीय सुविधा से
  • एमएसएमई की बढ़ती भागीदारी से

महत्व

रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता निम्न कारकों पर निर्भर करेगी—

  • वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में गहरा एकीकरण
  • टैरिफ तर्कसंगतीकरण
  • लॉजिस्टिक्स दक्षता
  • उद्योग-अनुकूल कौशल विकास

इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को भारत के विनिर्माण परिवर्तन, निर्यात वृद्धि और तकनीकी प्रगति के प्रमुख चालक के रूप में देखा जा रहा है।

उदय कोटक गिफ्ट सिटी के चेयरमैन नियुक्त

गुजरात सरकार ने कोटक महिंद्रा बैंक के फाउंडर उदय कोटक को गांधीनगर में मौजूद GIFT सिटी (गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस-टेक सिटी) का नया चेयरमैन अपॉइंट किया है। उन्होंने हसमुख अढिया की जगह ली है, जो पहले नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर काम कर रहे थे। अपॉइंटमेंट ऑर्डर गुजरात सरकार के अर्बन डेवलपमेंट और अर्बन हाउसिंग डिपार्टमेंट ने जारी किया है।

गिफ्ट सिटी के बारे में

GIFT City भारत का पहला परिचालन (operational) स्मार्ट सिटी और देश का पहला अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) है। यह एक प्रमुख वित्तीय हब है, जिसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री Narendra Modi ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए की थी।

मुख्य बिंदु:

  • बैंकिंग परिसंपत्तियाँ (सितंबर तक): 100.14 अरब डॉलर
  • संचयी बैंकिंग लेनदेन: 142.98 अरब डॉलर
  • 35 IFSC बैंकिंग इकाइयाँ कार्यरत, जिनमें कोटक महिंद्रा बैंक भी शामिल
  • हाल ही में दावोस में विश्व आर्थिक मंच में भागीदारी

नियुक्ति का महत्व

वित्तीय क्षेत्र से जुड़े अनुभवी नेता की नियुक्ति से GIFT City की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूती मिलने की संभावना है। उदय कोटक अपने साथ—

  • बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र का व्यापक अनुभव
  • मजबूत वैश्विक वित्तीय नेटवर्क
  • पूंजी बाजार और वित्तीय सेवाओं में विशेषज्ञता

लेकर आते हैं। हालांकि, सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह पद कार्यकारी होगा या गैर-कार्यकारी।

हालिया घटनाक्रम

पिछले वर्ष जुलाई में गुजरात कैडर के IAS अधिकारी संजय कौल को GIFT City का एमडी एवं सीईओ नियुक्त किया गया था। GIFT City लगातार एक प्रमुख वैश्विक वित्तीय सेवा केंद्र के रूप में विस्तार कर रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है?

यह नियुक्ति दर्शाती है—

  • भारत के IFSC इकोसिस्टम को मजबूत करने की रणनीतिक पहल
  • वैश्विक वित्तीय संस्थानों को आकर्षित करने के प्रयास
  • वित्तीय हब में उद्योग-नेतृत्व आधारित प्रशासन को बढ़ावा

उदय कोटक का नेतृत्व GIFT City को एक प्रमुख वैश्विक वित्तीय गंतव्य के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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