PM मोदी और मैक्रों ने H125 हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन का किया शुभारंभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति एमुएल मैक्रों ने रिमोटली एच-125 हेलिकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन का उद्घाटन किया। ये दोनों नेता मुंबई में थे और असेंबली लाइन कर्नाटक के वेमगल में शुरू हुई है। ये यूरोप की बड़ी कंपनी एयरबस और भारत की टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) का जॉइंट वेंचर है। यहां H-125 हेलीकॉप्टर बनाए जाएंगे। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय मीटिंग के बाद जॉइंट स्टेटमेंट दिया। पीएम मोदी ने भारत-फ्रांस के संबंध को बहुत स्पेशल बताया। उन्होंने कहा कि फ्रांस भारत के सबसे पुराने स्ट्रैटजिक पार्टनर में से एक है और हमने मिलकर इस पार्टनरशिप को अभूतपूर्व गहराई और ऊर्जा दी है।

H125 हेलीकॉप्टर भारत: पहली निजी हेलीकॉप्टर विनिर्माण सुविधा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति एमुएल मैक्रों ने H125 हेलीकॉप्टर निर्माण सुविधा का वर्चुअल शुभारंभ किया। कर्नाटक के वेमगल औद्योगिक क्षेत्र में स्थित यह संयंत्र भारत की पहली निजी क्षेत्र की हेलीकॉप्टर निर्माण इकाई है। यहां प्रारंभिक चरण में प्रति वर्ष 10 H125 हेलीकॉप्टरों का निर्माण किया जाएगा और अगले 20 वर्षों में अनुमानित 500 हेलीकॉप्टरों की मांग को ध्यान में रखते हुए उत्पादन क्षमता बढ़ाई जाएगी। पहला “मेड इन इंडिया” H125 हेलीकॉप्टर 2027 की शुरुआत तक उड़ान भरने की उम्मीद है, जो आत्मनिर्भर भारत एयरोस्पेस मिशन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

H125 हेलीकॉप्टर भारत: विशेषताएं और उपयोग

  • H125 हेलीकॉप्टर भारत परियोजना एक वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त सिंगल-इंजन हेलीकॉप्टर के निर्माण पर केंद्रित है।
  • Airbus H125 अपने “हॉट एंड हाई” प्रदर्शन के लिए प्रसिद्ध है और माउंट एवरेस्ट पर लैंडिंग का रिकॉर्ड रखता है।
  • इस हेलीकॉप्टर का उपयोग नागरिक मिशनों, पर्यटन, आपातकालीन सेवाओं और आपदा प्रबंधन में किया जाएगा। साथ ही, इसी संयंत्र में इसके सैन्य संस्करण H125M के उत्पादन की भी योजना है, जिससे भारतीय सशस्त्र बलों को समर्थन मिलेगा।
  • यह पहल भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी को और मजबूत करती है तथा भारत की स्वदेशी एयरोस्पेस विनिर्माण क्षमता का विस्तार करती है।

C295 विमान भारत: रक्षा विनिर्माण में एक और मील का पत्थर

H125 हेलीकॉप्टर सुविधा के साथ-साथ भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी के तहत फिक्स्ड-विंग विमान निर्माण भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। पहला “मेड इन इंडिया” Airbus C295 सैन्य परिवहन विमान सितंबर 2026 तक वडोदरा से रोलआउट होने की उम्मीद है। भारतीय वायु सेना द्वारा ऑर्डर किए गए 56 C295 विमानों में से 16 स्पेन से प्राप्त हो चुके हैं, जबकि शेष 40 भारत में निर्मित किए जा रहे हैं। लगभग 70% पुर्जे देश में ही तैयार किए जा रहे हैं और 37 भारतीय आपूर्तिकर्ता इस परियोजना से जुड़े हैं। यह आत्मनिर्भर भारत एयरोस्पेस के तहत मजबूत प्रगति को दर्शाता है।

भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी और आत्मनिर्भर भारत

गुजरात में C295 विमान निर्माण और कर्नाटक में H125 हेलीकॉप्टर निर्माण का दोहरा मॉडल आत्मनिर्भर भारत पहल का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जा रहा है।

इस सहयोग से:

  • 10,000 से अधिक रोजगार सृजित होंगे
  • उच्च-प्रौद्योगिकी एयरोस्पेस इकोसिस्टम विकसित होगा
  • घरेलू पुर्जा निर्माण को बढ़ावा मिलेगा
  • भारत की रक्षा निर्यात क्षमता मजबूत होगी

भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी अब खरीदार-विक्रेता संबंध से आगे बढ़कर सह-उत्पादन और विनिर्माण साझेदारी में बदल रही है, जिससे रणनीतिक स्वायत्तता और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

भारत-फ्रांस विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी

  • भारत और फ्रांस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को “स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” तक उन्नत किया है, जो विभिन्न क्षेत्रों में गहरे सहयोग को दर्शाता है।
  • रक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्वास्थ्य, कौशल विकास और महत्वपूर्ण खनिजों सहित 21 प्रमुख परिणामों की घोषणा की गई।
  • नेताओं ने वैश्विक अनिश्चितता के दौर में इस साझेदारी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
  • दीर्घकालिक स्थिरता, सुरक्षा सहयोग, आर्थिक विकास और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को प्राथमिकता दी गई। फ्रांस ने भारत को अपने सबसे विश्वसनीय रणनीतिक साझेदारों में से एक बताया।

कर्नाटक में H125 हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन

कर्नाटक के वेमगल में Airbus H125 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन का शुभारंभ इस यात्रा का मुख्य आकर्षण रहा। यह Airbus और Tata Group का संयुक्त उपक्रम है।

  • पहला “मेड इन इंडिया” H125 2027 की शुरुआत तक अपेक्षित
  • नागरिक और सार्वजनिक उपयोग के लिए डिज़ाइन
  • माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम
  • दक्षिण एशिया और वैश्विक बाजारों में निर्यात की संभावना

यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत के तहत भारत के एयरोस्पेस विनिर्माण आधार को मजबूत करती है।

H125 हेलीकॉप्टर परियोजना का महत्व

यह परियोजना केवल एक विनिर्माण इकाई नहीं है, बल्कि:

  • स्वदेशी एरोनॉटिकल क्षमताओं को बढ़ावा देती है
  • एयरोस्पेस क्षेत्र में कुशल रोजगार सृजित करती है
  • भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग को मजबूत करती है
  • वैश्विक हेलीकॉप्टर निर्यात में भारत की भूमिका का विस्तार करती है
  • आपातकालीन चिकित्सा, कानून प्रवर्तन और यात्री सेवाओं को समर्थन देती है

H125 हेलीकॉप्टर भारत को उच्च-ऊंचाई विमानन तकनीक में एक महत्वपूर्ण वैश्विक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा।

रक्षा और एयरोस्पेस सहयोग का विस्तार

भारत-फ्रांस रक्षा संबंध पहले से ही राफेल लड़ाकू विमानों और पनडुब्बी सहयोग को शामिल करते हैं। अब यह सहयोग आगे बढ़कर संयुक्त हेलीकॉप्टर निर्माण, अनुसंधान एवं विकास, उन्नत सामग्री, मिसाइल प्रणालियों और एयरोस्पेस तकनीक तक विस्तारित हो रहा है।

एरोनॉटिक्स में कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र और एआई व डिजिटल साइंस के लिए इंडो-फ्रेंच केंद्रों की भी घोषणा की गई है। भारत-फ्रांस विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी रणनीतिक और औद्योगिक रक्षा सहयोग को नई मजबूती प्रदान करती है।

इंडियन ओवरसीज बैंक ने ऑनलाइन डेथ क्लेम सेटलमेंट पोर्टल लॉन्च किया

इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) ने ग्राहकों के परिवारों और कानूनी उत्तराधिकारियों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से ऑनलाइन डेथ क्लेम सेटलमेंट पोर्टल लॉन्च किया है। यह पहल बैंक की डिजिटल परिवर्तन (Digital Transformation) की दिशा में प्रतिबद्धता को दर्शाती है, साथ ही संवेदनशील परिस्थितियों में मानवीय दृष्टिकोण बनाए रखने पर भी जोर देती है।

ऑनलाइन डेथ क्लेम सेटलमेंट पोर्टल क्या है?

यह नया पोर्टल एक सुरक्षित, एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से दावेदार (Claimants) पूरी मृत्यु दावा निपटान प्रक्रिया ऑनलाइन शुरू और पूर्ण कर सकते हैं।

प्रमुख विशेषताएं:

  • दावेदार की जानकारी का ऑनलाइन सबमिशन
  • दिवंगत ग्राहक के खाते की जानकारी दर्ज करना
  • आवश्यक दस्तावेजों की सीधी अपलोड सुविधा
  • क्लेम की स्थिति की रियल-टाइम ट्रैकिंग
  • सुरक्षित और पारदर्शी प्रोसेसिंग सिस्टम

अब परिवारों को बार-बार बैंक शाखा के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। पूरी प्रक्रिया घर बैठे पूरी की जा सकती है।

₹15 लाख तक के दावों के लिए सरल प्रक्रिया

शोकग्रस्त परिवारों की परेशानी कम करने के लिए IOB ने ₹15 लाख तक के दावों हेतु एक सरलीकृत प्रक्रिया शुरू की है।

प्रमुख लाभ:

  • किसी तीसरे पक्ष की जमानत (Surety) की आवश्यकता नहीं
  • दस्तावेजों की कम औपचारिकता
  • तेज स्वीकृति प्रक्रिया
  • 15 दिनों की सख्त समय-सीमा

बैंक ने आश्वासन दिया है कि सभी पात्र दावों का निपटान 15 दिनों के भीतर किया जाएगा, जिससे विश्वास और जवाबदेही बढ़ेगी।

रियल-टाइम पारदर्शिता और ट्रैकिंग

इस पोर्टल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी रियल-टाइम ट्रैकिंग प्रणाली है।

दावेदार:

  • आवेदन की हर चरण की स्थिति देख सकते हैं
  • डिजिटल अपडेट प्राप्त कर सकते हैं
  • बार-बार फॉलो-अप या अनिश्चितता से बच सकते हैं

यह प्रणाली पारदर्शिता बढ़ाती है और ग्राहकों का भरोसा मजबूत करती है।

नई कॉर्पोरेट वेबसाइट का शुभारंभ

क्लेम पोर्टल के साथ ही IOB ने अपनी नई कॉर्पोरेट वेबसाइट भी लॉन्च की है, जो एंटरप्राइज-ग्रेड Liferay Digital Experience Platform (DXP) पर आधारित है।

नई वेबसाइट की विशेषताएं:

  • आधुनिक और सहज डिजाइन
  • व्यक्तिगत (Personalized) यूजर इंटरफेस
  • आसान और सुगम नेविगेशन
  • बेहतर डिजिटल पहुंच (Accessibility)

यह उन्नत तकनीक और ग्राहक-अनुकूल सेवाओं का संयोजन दर्शाता है कि बैंक डिजिटल युग में भी “मानवीय स्पर्श” बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस पहल का महत्व

यह कदम IOB की व्यापक डिजिटल परिवर्तन यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

क्यों महत्वपूर्ण है?

  • भावनात्मक समय में प्रक्रियात्मक बोझ कम करता है
  • डिजिटल पहुंच के माध्यम से वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देता है
  • दक्षता और जवाबदेही में सुधार करता है
  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में ग्राहकों का विश्वास मजबूत करता है

यह पहल तकनीक और संवेदनशीलता के संतुलन का उदाहरण है, जिससे डिजिटल बैंकिंग अधिक सुलभ, पारदर्शी और सहानुभूतिपूर्ण बनती है।

स्मृति मंधाना ने BBC इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ द ईयर का खिताब जीता

भारत की स्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना को वर्ष 2025 की बीबीसी इंडियन स्पो‌र्ट्स वुमेन ऑफ द ईयर चुना गया। मंधाना ने भारत की 2025 महिला विश्व कप में ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाई थी। यह पुरस्कार 16 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया गया। कार्यक्रम में शतरंज की भारतीय स्टार दिव्या देशमुख को सिर्फ 20 साल की उम्र में ऐतिहासिक फिडे महिला विश्व कप जीतने के लिए इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द ईयर का पुरस्कार दिया गया।

स्मृति मंधाना का ऐतिहासिक 2025 सत्र

  • 29 वर्ष की स्मृति मंधाना ने 2025 महिला विश्व कप में भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई। यह भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास का एक ऐतिहासिक क्षण था।
  • ऑस्ट्रेलिया दौरे पर मौजूद मंधाना ने वीडियो संदेश के माध्यम से आभार व्यक्त करते हुए 2025 को “महिला क्रिकेट के लिए विशेष वर्ष” बताया।

उनकी प्रमुख उपलब्धियां:

  • महिला वनडे क्रिकेट में दूसरा सर्वाधिक शतक
  • वर्तमान महिला क्रिकेटरों में तीसरा सर्वाधिक रन
  • 50 गेंदों में सबसे तेज़ 50 ओवर अंतरराष्ट्रीय शतक (पुरुष या महिला), जिससे उन्होंने Virat Kohli का रिकॉर्ड तोड़ा

महाराष्ट्र के सांगली से ताल्लुक रखने वाली मंधाना ने अपने पिता और भाई के मार्गदर्शन में क्रिकेट की शुरुआत की, जो स्वयं जिला स्तर के खिलाड़ी रहे हैं।

दिव्या देशमुख को ‘इमर्जिंग प्लेयर’ सम्मान

  • युवा शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख ने FIDE महिला विश्व कप में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ‘इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द ईयर’ का पुरस्कार जीता।
  • उनकी यह उपलब्धि हाल के वर्षों में भारतीय महिला शतरंज की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक मानी जा रही है। यह पुरस्कार दर्शाता है कि भारत वैश्विक शतरंज में, विशेषकर युवा प्रतिभाओं के बीच, अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
  • दिव्या की सफलता इस बात का प्रतीक है कि क्रिकेट से आगे बढ़कर भारतीय महिलाएं विभिन्न खेलों में विश्व स्तर पर पहचान बना रही हैं।

अन्य प्रमुख पुरस्कार विजेता

पैरा-स्पोर्ट्सवुमन ऑफ द ईयर

Preethi Pal – 2024 पेरिस पैरालंपिक में दो कांस्य पदक (एथलेटिक्स)।

लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड

Anjali Bhagwat – ओलंपिक फाइनल में पहुंचने वाली भारत की पहली महिला निशानेबाज़।

बीबीसी स्टार परफॉर्मर्स ऑफ द ईयर

  • भारतीय महिला क्रिकेट टीम – विश्व कप विजेता
  • भारतीय महिला ब्लाइंड क्रिकेट टीम – विश्व कप जीत
  • भारतीय महिला कबड्डी टीम – विश्व कप चैंपियन
  • एकता भ्यान, दीप्ति जीवनजी, प्रीति पाल – पैरा एथलेटिक्स उपलब्धियां

बीबीसी चेंजमेकर्स ऑफ द ईयर

  • भारतीय महिला आइस हॉकी टीम
  • राजबीर कौर
  • सविता पुनिया
  • पानी देवी

विजेताओं का चयन लिएंडर पेस, दीपा मलिक और अंजू बॉबी जॉर्ज सहित प्रतिष्ठित जूरी द्वारा किया गया।

यह पुरस्कार क्यों महत्वपूर्ण है?

BBC Indian Sportswoman of the Year भारत में महिला खिलाड़ियों के लिए सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक बन चुका है। यह केवल प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि प्रेरणा और प्रभाव को भी मान्यता देता है।

स्मृति मंधाना की जीत दर्शाती है:

  • भारतीय महिला क्रिकेट की वैश्विक पहचान में वृद्धि
  • महिला खेलों में बढ़ता निवेश और दृश्यता
  • युवा लड़कियों के लिए मजबूत प्रेरणादायक रोल मॉडल

क्रिकेट, शतरंज, पैरा एथलेटिक्स और कबड्डी तक – भारतीय महिला खिलाड़ी उत्कृष्टता की नई परिभाषा गढ़ रही हैं।

PM Modi ने नई दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन किया। उन्होंने इस एक्सपो को विचारों, नवाचार और संकल्प का शक्तिशाली संगम बताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम भारत की असाधारण एआई प्रतिभा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य को वैश्विक हित में आकार देने की उसकी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की एआई यात्रा देश में परिवर्तनकारी समाधान प्रदान करेगी और साथ ही वैश्विक तकनीकी प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026: नवाचार का संगम

इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 नीति-निर्माताओं, स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और वैश्विक प्रौद्योगिकी नेताओं को एक मंच पर लाता है।

एक्सपो की मुख्य विशेषताएँ:

  • विभिन्न क्षेत्रों में एआई आधारित नवाचारों का प्रदर्शन
  • उद्योग जगत के नेताओं और स्टार्टअप्स की भागीदारी
  • सुशासन और सार्वजनिक सेवाओं में एआई के उपयोग का प्रदर्शन
  • समावेशी और जिम्मेदार एआई विकास पर विशेष ध्यान

यह एक्सपो कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल नवाचार में भारत की बढ़ती वैश्विक नेतृत्व भूमिका को सुदृढ़ करता है।

जिम्मेदार और समावेशी एआई के लिए भारत की दृष्टि

प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि सरकार एआई का उपयोग जिम्मेदारी, समावेशन और व्यापक स्तर पर करने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत की एआई रूपरेखा निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित है:

  • नैतिक एआई विकास
  • डेटा संरक्षण और गोपनीयता
  • जनकल्याण के लिए बड़े पैमाने पर एआई समाधान
  • डिजिटल तकनीकों तक समावेशी पहुंच

यह एक्सपो दर्शाता है कि भारत एआई को केवल तकनीकी प्रतिस्पर्धा का साधन नहीं, बल्कि मानव प्रगति के उपकरण के रूप में देखता है।

वैश्विक हित के लिए एआई: भारत की बढ़ती भूमिका

  • भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता में प्रगति केवल घरेलू परिवर्तन तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में विकसित एआई समाधान वैश्विक विकास में भी योगदान देंगे।
  • यह दृष्टिकोण भारत की व्यापक डिजिटल इंडिया पहल के अनुरूप है, जहाँ तकनीक का उपयोग सुशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और वित्तीय समावेशन को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है।
  • इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 की मेजबानी करके भारत ने स्वयं को वैश्विक तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र में एक जिम्मेदार एआई नवप्रवर्तक के रूप में स्थापित किया है।

भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) वह तकनीक है जिसमें मशीनें सीखने, तर्क करने और निर्णय लेने जैसे कार्य करती हैं, जो सामान्यतः मानव बुद्धि से जुड़े होते हैं।
  • भारत ने सरकारी पहलों, स्टार्टअप्स के विकास और शोध संस्थानों के माध्यम से एआई पारिस्थितिकी तंत्र का तेजी से विस्तार किया है। डिजिटल इंडिया और राष्ट्रीय एआई रणनीतियों के अंतर्गत एआई को शासन, स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा में एकीकृत किया जा रहा है।
  • साथ ही, भारत सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करने के लिए नैतिक एआई ढांचे पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। मजबूत आईटी कार्यबल और नवाचार-आधारित नीतियों के कारण भारत तेजी से एक वैश्विक एआई केंद्र के रूप में उभर रहा है।

विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना के लिए मिलन गांव खुला, मिलन 2026 अभ्यास शुरू

भारतीय नौसेना ने 15 फरवरी 2026 को विशाखापत्तनम स्थित पूर्वी नौसेना कमान में मिलन विलेज का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के सबसे बड़े बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों में से एक एक्सरसाइज मिलन 2026 की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है। समारोह की अध्यक्षता वाइस एडमिरल संजय भल्ला ने की, जिन्होंने 70 से अधिक देशों की भागीदारी वाली नौसेनाओं के लिए मिलन विलेज का औपचारिक उद्घाटन किया। यह आयोजन भारत की बढ़ती समुद्री कूटनीति और वैश्विक पहुंच को दर्शाता है।

मिलन विलेज क्या है और इसका महत्व

मिलन विलेज एक विशेष रूप से तैयार किया गया अनुभव क्षेत्र है, जिसका उद्देश्य नौसैनिक प्रतिनिधियों के बीच मित्रता, सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। यह एक सामाजिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में कार्य करता है, जहाँ पेशेवर संवाद के साथ-साथ आपसी संबंध भी मजबूत होते हैं।

मुख्य विशेषताएँ:

  • 70 से अधिक देशों की भागीदारी
  • सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और लोक नृत्य
  • हस्तशिल्प और हथकरघा स्टॉल
  • नौसैनिक स्मृति-चिह्न प्रदर्शनी
  • भारतीय क्षेत्रीय व्यंजन
  • मिलन 2026 का विषय है – “मित्रता, सहयोग और सहभागिता”।

एक्सरसाइज मिलन 2026: एक महत्वपूर्ण समुद्री संगम

एक्सरसाइज मिलन 2026 का आयोजन 15 से 25 फरवरी 2026 तक विशाखापत्तनम में किया जाएगा। यह एक ऐतिहासिक समुद्री संगम का हिस्सा है, जिसमें शामिल हैं:

  • अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू 2026 (IFR 2026)
  • इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम (IONS) प्रमुखों का सम्मेलन

अभ्यास दो चरणों में आयोजित होगा:

  • हार्बर चरण
  • समुद्री चरण

मुख्य गतिविधियाँ:

  • पनडुब्बी रोधी युद्धाभ्यास
  • वायु रक्षा अभ्यास
  • खोज एवं बचाव अभियान
  • सहकारी समुद्री सुरक्षा अभियान

इन गतिविधियों का उद्देश्य विभिन्न नौसेनाओं के बीच समन्वय (इंटरऑपरेबिलिटी) और सामूहिक प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना है।

भारत की ‘महासागर’ दृष्टि को सुदृढ़ करना

मिलन 2026, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महासागर (MAHASAGAR) दृष्टि – Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions – का व्यावहारिक रूप है।

यह अभ्यास भारत की भूमिका को मजबूत करता है:

  • एक विश्वसनीय सुरक्षा साझेदार के रूप में
  • वैश्विक समुद्री क्षेत्र में जिम्मेदार भागीदार के रूप में
  • मुक्त, खुला, समावेशी और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था के समर्थक के रूप में

दुनिया भर की नौसेनाओं की मेजबानी करके भारत समुद्री क्षेत्र जागरूकता और सहकारी सुरक्षा ढांचे को सुदृढ़ करता है।

मिलन विलेज के माध्यम से सांस्कृतिक कूटनीति

मिलन विलेज भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करता है। प्रतिनिधियों को अनुभव होगा:

  • लाइव गायन प्रस्तुतियाँ
  • पारंपरिक लोक नृत्य
  • भारतीय हस्तशिल्प प्रदर्शन
  • विविध क्षेत्रीय व्यंजन

यह सांस्कृतिक जुड़ाव पेशेवर नौसैनिक अभ्यासों को पूरक बनाता है और सहभागी देशों के बीच दीर्घकालिक संबंध स्थापित करता है।

एक्सरसाइज मिलन का विकास

एक्सरसाइज मिलन की शुरुआत 1995 में भारतीय नौसेना द्वारा द्विवार्षिक अभ्यास के रूप में की गई थी। प्रारंभ में यह कुछ क्षेत्रीय देशों तक सीमित था, लेकिन समय के साथ यह एक प्रमुख बहुपक्षीय समुद्री आयोजन बन गया।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती समुद्री भागीदारी के साथ मिलन का दायरा और जटिलता दोनों बढ़े हैं। 2026 का संस्करण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अपने व्यापक पैमाने और IFR 2026 तथा IONS सम्मेलन के साथ समन्वय के कारण ऐतिहासिक माना जा रहा है।

जेपी नड्डा इंडिया एआई समिट में ‘साही’ और ‘बोध’ पहल का शुभारंभ करेंगे

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई समिट में दो प्रमुख राष्ट्रीय पहलों – साही (SAHI) और बोध (BODH) – का शुभारंभ करेंगे। इन पहलों का उद्देश्य भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को मजबूत और सुरक्षित तरीके से अपनाना है। यह पहल भारत की डिजिटल स्वास्थ्य दृष्टि के अनुरूप एक सुरक्षित, नैतिक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हेल्थ एआई पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

साही (SAHI) क्या है?

  • साही (SAHI) का पूरा नाम है – भारत के लिए हेल्थकेयर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की स्ट्रेटेजी।
  • यह स्वास्थ्य क्षेत्र में जिम्मेदार एआई अपनाने के लिए एक राष्ट्रीय मार्गदर्शक ढांचा है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • एआई शासन (गवर्नेंस) और डेटा प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करता है।
  • नैतिक और प्रमाण-आधारित एआई उपयोग सुनिश्चित करता है।
  • राज्यों और स्वास्थ्य संस्थानों को सुरक्षित कार्यान्वयन में सहायता करता है।
  • निगरानी, सत्यापन और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य पर जोर देता है।

साही का उद्देश्य भारत की स्वास्थ्य प्रणाली में एआई को सुरक्षित, समावेशी और पारदर्शी बनाना है, साथ ही रोगियों के अधिकारों और डेटा सुरक्षा की रक्षा करना है।

बोध (BODH) क्या है?

बोध (BODH) का पूरा नाम है – Benchmarking Open Data Platform for Health AI।
यह स्वास्थ्य एआई मॉडलों के मूल्यांकन के लिए एक गोपनीयता-सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सहयोग से विकसित।
  • वास्तविक स्वास्थ्य डेटा के आधार पर एआई मॉडलों का परीक्षण करता है।
  • मूल डेटा साझा नहीं करता, जिससे गोपनीयता सुरक्षित रहती है।
  • आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत एक डिजिटल सार्वजनिक संपत्ति के रूप में कार्य करता है।
  • हेल्थ एआई प्रणालियों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करता है।

बोध यह सुनिश्चित करता है कि एआई उपकरणों को लागू करने से पहले उनका कठोर परीक्षण किया जाए, जिससे प्रणाली में भरोसा बढ़े।

साही और बोध भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?

  • सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हुए नवाचार को बढ़ावा देते हैं।
  • मजबूत नियामक और नैतिक एआई ढांचा तैयार करते हैं।
  • एआई आधारित चिकित्सा उपकरणों पर जनता का विश्वास बढ़ाते हैं।
  • भारत को डिजिटल स्वास्थ्य क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाते हैं।
  • गोपनीयता से समझौता किए बिना स्वास्थ्य सेवाओं में एआई का समावेश सुनिश्चित करते हैं।
  • ये दोनों पहलें मिलकर नवाचार और जिम्मेदारी के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करती हैं।

भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई की भूमिका

  • विश्व स्तर पर स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई का उपयोग रोग निदान, बीमारी की भविष्यवाणी, मेडिकल इमेजिंग और व्यक्तिगत उपचार में किया जा रहा है।
  • भारत में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत एक एकीकृत स्वास्थ्य डेटा तंत्र विकसित किया जा रहा है। हेल्थ एआई ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ा सकता है, निदान संबंधी त्रुटियों को कम कर सकता है और अस्पताल प्रबंधन को बेहतर बना सकता है।
  • हालांकि, इसके लिए नैतिक शासन, मानकीकृत सत्यापन और डेटा सुरक्षा अत्यंत आवश्यक हैं। साही और बोध इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक संरचित और पारदर्शी ढांचा प्रदान करते हैं।

देश का चीनी निर्यात विपणन वर्ष 2025-26 में फरवरी तक 2.01 लाख टन

वर्तमान 2025-26 विपणन वर्ष (अक्टूबर–सितंबर) में भारत का चीनी निर्यात फरवरी तक 2.01 लाख टन को पार कर गया है। यह जानकारी अखिल भारतीय चीनी व्यापार संघ (AISTA) ने दी है। संयुक्त अरब अमीरात को सबसे अधिक 47,006 टन चीनी निर्यात की गई। इसके बाद अफगानिस्तान को 46,163 टन, जिबूती को 30,147 टन और भूटान को 20,017 टन चीनी निर्यात हुई। केंद्र सरकार ने चालू वर्ष में कुल 20 लाख टन चीनी निर्यात को मंजूरी दी है, जिसमें हाल ही में अतिरिक्त 5 लाख टन की अनुमति भी शामिल है। साथ ही, चीनी उत्पादन में 13 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है, जिससे भारत की निर्यात संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।

भारत का चीनी निर्यात 2.01 लाख टन पार – AISTA के आंकड़े

AISTA के अनुसार, 2025-26 विपणन वर्ष (अक्टूबर 2025 – सितंबर 2026) में फरवरी तक कुल 2,01,547 टन चीनी का निर्यात किया गया।

मुख्य बिंदु:

  • कुल निर्यात (फरवरी तक): 2,01,547 टन
  • सफेद चीनी: 1,63,000 टन
  • रिफाइंड चीनी: 37,638 टन
  • निर्यात सरकारी कोटा प्रणाली के तहत

भारत में चीनी निर्यात कोटा प्रणाली के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है, जिसमें चीनी मिलों को आनुपातिक आधार पर कोटा आवंटित किया जाता है। इससे घरेलू आपूर्ति संतुलित रहती है और वैश्विक व्यापार में भागीदारी भी सुनिश्चित होती है।

भारत के चीनी निर्यात में UAE शीर्ष पर

इस विपणन वर्ष में संयुक्त अरब अमीरात भारत का सबसे बड़ा आयातक बना है।

प्रमुख निर्यात गंतव्य:

  • संयुक्त अरब अमीरात – 47,006 टन
  • अफगानिस्तान – 46,163 टन
  • जिबूती – 30,147 टन
  • भूटान – 20,017 टन

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि पश्चिम एशिया और पड़ोसी देशों में भारतीय चीनी की मजबूत मांग बनी हुई है। इससे विदेशी मुद्रा आय में वृद्धि होती है और वैश्विक चीनी बाजार में भारत की स्थिति मजबूत होती है।

सरकार ने 20 लाख टन निर्यात को दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने 2025-26 विपणन वर्ष के लिए कुल 20 लाख टन चीनी निर्यात को मंजूरी दी है।

मंजूरी का विवरण:

  • प्रारंभिक कोटा: 15 लाख टन
  • अतिरिक्त अनुमति: 5 लाख टन
  • अतिरिक्त कोटा मिलों के बीच अदला-बदली योग्य नहीं
  • निर्यात आवंटन प्रोराटा आधार पर

AISTA के अध्यक्ष प्रफुल विथलानी के अनुसार, यह दो-स्तरीय कोटा प्रणाली प्रीमियम ट्रेडिंग को कम करेगी और वास्तविक निर्यातक मिलों को अतिरिक्त शुल्क दिए बिना लाभ पहुंचाएगी।

2026 में चीनी उत्पादन 13% बढ़ने का अनुमान

2025-26 विपणन वर्ष में एथेनॉल उत्पादन हेतु डायवर्जन को छोड़कर चीनी उत्पादन 13 प्रतिशत बढ़कर 29.6 मिलियन टन होने का अनुमान है।

उत्पादन वृद्धि के लाभ:

  • निर्यात क्षमता में सुधार
  • घरेलू आपूर्ति स्थिर
  • मिलों को बेहतर मूल्य प्राप्ति
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती

उत्पादन में वृद्धि से भारत की निर्यात रणनीति को समर्थन मिलेगा, साथ ही घरेलू उपभोग की आवश्यकताओं का संतुलन भी बना रहेगा।

AISTA के बारे में

अखिल भारतीय चीनी व्यापार संघ (AISTA) की स्थापना 17 जनवरी 2016 को भारत के बिखरे हुए चीनी उद्योग को एकजुट करने के उद्देश्य से की गई थी। यह संगठन व्यापारियों, मिल मालिकों, रिफाइनरों, थोक उपभोक्ताओं, सेवा प्रदाताओं, किसानों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को एक साझा मंच प्रदान करता है। यह भारत की चीनी अर्थव्यवस्था की सामूहिक आवाज़ के रूप में कार्य करता है।

भारत का चीनी उद्योग और निर्यात नीति

भारत विश्व के सबसे बड़े चीनी उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है। चीनी निर्यात को घरेलू आपूर्ति और मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए नियंत्रित किया जाता है। चीनी का विपणन वर्ष अक्टूबर से सितंबर तक चलता है। हाल के वर्षों में एथेनॉल मिश्रण नीति ने उत्पादन पैटर्न को प्रभावित किया है।

सरकार निर्यात कोटा के माध्यम से किसानों के हित, मिलों की तरलता और वैश्विक मांग के बीच संतुलन बनाए रखती है। बढ़ता उत्पादन और नियंत्रित निर्यात नीति घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता बनाए रखने में सहायक है।

जनवरी 2026 में सोने-चांदी के आयात बढ़ने से भारत का व्यापार घाटा बढ़कर $34.68 बिलियन

जनवरी 2026 में भारत का व्यापार घाटा तेज़ी से बढ़ गया, क्योंकि आयात में साल-दर-साल 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, माल निर्यात (मर्चेंडाइज़ एक्सपोर्ट) में मामूली 0.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 36.56 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात बढ़कर 71.24 अरब डॉलर तक पहुंच गया। परिणामस्वरूप, व्यापार घाटा बढ़कर 34.68 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष जनवरी में 23.43 अरब डॉलर था। आयात में इस तेज़ वृद्धि का मुख्य कारण वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोने और चांदी का अधिक आयात रहा।

जनवरी 2026 का व्यापार घाटा: आंकड़े क्या बताते हैं?

जनवरी 2026 के व्यापार आंकड़े निर्यात और आयात के बीच बढ़ते अंतर को दर्शाते हैं।

  • व्यापार घाटा बढ़कर 34.68 अरब डॉलर
  • जनवरी 2025 में 23.43 अरब डॉलर था
  • दिसंबर 2025 के 25 अरब डॉलर से भी अधिक
  • आयात का मूल्य निर्यात के लगभग दोगुना

व्यापार घाटा बढ़ने का अर्थ है कि देश आयात पर जितनी विदेशी मुद्रा खर्च कर रहा है, उससे कम निर्यात से कमा पा रहा है। इससे मुद्रा स्थिरता और चालू खाते के संतुलन पर प्रभाव पड़ सकता है।

आयात में 19% वृद्धि: सोना और चांदी प्रमुख कारण

आयात में 19 प्रतिशत की वृद्धि मुख्य रूप से कीमती धातुओं के कारण हुई।

  • कुल आयात: 71.24 अरब डॉलर
  • सोना और चांदी के आयात में तेज़ वृद्धि
  • त्योहारी और निवेश मांग में बढ़ोतरी
  • वैश्विक कीमतों के रुझानों का प्रभाव

जब सोने जैसे गैर-आवश्यक आयात तेजी से बढ़ते हैं, तो व्यापार घाटा भी बढ़ता है। सोने का आयात सीधे तौर पर चालू खाते के घाटे और विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह को प्रभावित करता है।

निर्यात वृद्धि कमजोर

जहाँ आयात में तेज़ उछाल देखा गया, वहीं निर्यात वृद्धि सीमित रही।

  • मर्चेंडाइज़ निर्यात में केवल 0.6% वृद्धि
  • कुल निर्यात 36.56 अरब डॉलर
  • वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता से मांग प्रभावित
  • प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में धीमी रिकवरी

हालांकि मासिक वृद्धि कमजोर रही, वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, वस्तु और सेवा निर्यात समग्र रूप से सकारात्मक बने हुए हैं। चालू वित्त वर्ष में कुल निर्यात 860 अरब डॉलर के करीब पहुँचने की उम्मीद है।

संचयी निर्यात मजबूत

हालांकि जनवरी 2026 में व्यापार घाटा बढ़ा, लेकिन संचयी (क्यूम्युलेटिव) निर्यात में मजबूती बनी हुई है।

  • अप्रैल से जनवरी तक निर्यात में 6.15% वृद्धि
  • कुल संचयी निर्यात 720.76 अरब डॉलर
  • वस्तु और सेवा दोनों निर्यात का योगदान
  • सेवा निर्यात कुल व्यापार संतुलन को सहारा दे रहे हैं

यह दर्शाता है कि एक महीने के दबाव के बावजूद, व्यापक रुझान अभी भी स्थिर और सकारात्मक बने हुए हैं।

जनवरी 2026 में बेरोजगारी दर मामूली बढ़कर पांच प्रतिशत पर: सर्वेक्षण

भारत की बेरोज़गारी दर जनवरी 2026 में बढ़कर 5 प्रतिशत हो गई, जो पिछले तीन महीनों का उच्चतम स्तर है। यह जानकारी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी नवीनतम आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) में दी गई है। इस वृद्धि का मुख्य कारण ग्रामीण श्रम बाज़ारों में मौसमी कमजोरी और फसल कटाई के बाद आने वाली मंदी को माना जा रहा है। हालांकि बेरोज़गारी दर में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन श्रम बल भागीदारी दर में भी कमी देखी गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि इस अवधि में कम लोग सक्रिय रूप से रोजगार की तलाश कर रहे थे। यह आंकड़े करंट वीकली स्टेटस (CWS) पद्धति के आधार पर तैयार किए गए हैं।

जनवरी 2026 में शहरी बेरोज़गारी 7% – NSO के आंकड़े

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के अनुसार:

  • शहरी बेरोज़गारी दर: 7% (दिसंबर में 6.7% से बढ़कर)
  • ग्रामीण बेरोज़गारी दर: 4.2% (तीन महीनों का उच्चतम स्तर)
  • कुल बेरोज़गारी दर: 5%

शहरी बेरोज़गारी में वृद्धि शहरों के रोजगार बाज़ार में हल्के दबाव का संकेत देती है, जबकि ग्रामीण बेरोज़गारी में बढ़ोतरी कृषि फसल कटाई के बाद होने वाले मौसमी बदलावों को दर्शाती है।

भारत की बेरोज़गारी दर क्यों बढ़ी?

जनवरी में बेरोज़गारी दर बढ़ने के प्रमुख कारण हैं:

  • फसल कटाई के बाद मंदी: कटाई के बाद कृषि गतिविधियों में कमी
  • मौसमी ग्रामीण कारण: अस्थायी कृषि नौकरियों में कमी
  • श्रम बल भागीदारी में नरमी: कुछ लोगों का अस्थायी रूप से नौकरी की तलाश छोड़ना

ग्रामीण रोजगार आमतौर पर फसल चक्र पर निर्भर करता है। कृषि के व्यस्त मौसम के बाद श्रम की मांग घट जाती है, जिससे अल्पकालिक रूप से बेरोज़गारी दर बढ़ सकती है।

करंट वीकली स्टेटस (CWS) को समझना

बेरोज़गारी दर का आकलन करंट वीकली स्टेटस (CWS) पद्धति के तहत किया जाता है।

CWS के अनुसार:

  • यदि किसी व्यक्ति ने पिछले सात दिनों में कम से कम एक घंटा काम किया है, तो उसे रोज़गार प्राप्त (Employed) माना जाता है।
  • यदि उसने एक भी घंटा काम नहीं किया, लेकिन वह काम करने के लिए उपलब्ध था या काम की तलाश कर रहा था, तो उसे बेरोज़गार (Unemployed) माना जाता है।

यह पद्धति अल्पकालिक रोजगार में होने वाले उतार-चढ़ाव को दर्शाती है और मासिक श्रम बाज़ार रुझानों को समझने में सहायक है।

5% बेरोज़गारी का अर्थ क्या है?

5% की बेरोज़गारी दर वैश्विक मानकों की तुलना में अभी भी मध्यम स्तर पर है, लेकिन इसमें हुई वृद्धि सावधानी का संकेत देती है।

मुख्य प्रभाव:

  • ग्रामीण क्षेत्रों में अल्पकालिक रोजगार में कमी
  • शहरी रोजगार बाज़ार में हल्की नरमी
  • रोजगार सृजन उपायों को जारी रखने की आवश्यकता

हालांकि, मौसमी रुझान अक्सर आने वाले महीनों में बदल जाते हैं, जब कृषि और निर्माण गतिविधियाँ फिर से तेज़ हो जाती हैं।

PLFS और श्रम बाज़ार निगरानी

  • आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) वर्ष 2017 में शुरू किया गया था और इसने पहले की पंचवर्षीय सर्वेक्षण प्रणाली का स्थान लिया।
  • यह सर्वेक्षण भारत में रोजगार और बेरोज़गारी से संबंधित नियमित आंकड़े प्रदान करता है।
  • शहरी आंकड़े मासिक रूप से जारी किए जाते हैं।
  • ग्रामीण और शहरी संयुक्त आंकड़े तिमाही आधार पर जारी होते हैं।
  • करंट वीकली स्टेटस पद्धति नीति निर्माताओं को श्रम बाज़ार की अल्पकालिक स्थिति का आकलन करने और लक्षित नीतियाँ बनाने में मदद करती है।

 

 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिल्ली में ओल चिकी के 100 साल पूरे होने के जश्न को हरी झंडी दिखाई

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 16 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में ओल चिकी लिपि के शताब्दी समारोह का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें 1925 में संताली भाषा के लिए विकसित ओल चिकी लिपि के 100 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया गया। राष्ट्रपति ने संताली भाषा के संरक्षण और युवा पीढ़ी के बीच ओल चिकी लिपि के प्रसार के महत्व पर बल दिया। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने संताल समुदाय की सांस्कृतिक विरासत को सम्मानित करते हुए एक स्मारक सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया।

द्रौपदी मुर्मू द्वारा ओल चिकी लिपि शताब्दी समारोह का उद्घाटन

  • नई दिल्ली में ओल चिकी लिपि के शताब्दी समारोह का औपचारिक उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया। यह कार्यक्रम संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें वर्ष 1925 में विकसित ओल चिकी लिपि के 100 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया गया।
  • राष्ट्रपति ने संताल समुदाय की अपनी विशिष्ट भाषा, साहित्य और संस्कृति को संरक्षित रखने की सराहना की। उन्होंने कहा कि ओल चिकी लिपि केवल एक लेखन प्रणाली नहीं, बल्कि पहचान और एकता का सशक्त प्रतीक है।
  • ओल चिकी लिपि ने संताली भाषा की मौलिकता को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और भारत सहित विदेशों में बसे संताल समुदाय के बीच सांस्कृतिक गौरव को मजबूत किया है।

ओल चिकी लिपि का इतिहास और पंडित रघुनाथ मुर्मु का योगदान

  • ओल चिकी लिपि का आविष्कार वर्ष 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मू ने संताली भाषा को उसकी स्वयं की स्वतंत्र लिपि देने के उद्देश्य से किया था।
  • इससे पहले संताली भाषा को रोमन, देवनागरी, ओड़िया और बंगाली लिपियों में लिखा जाता था, लेकिन ये लिपियाँ संताली के शुद्ध उच्चारण और ध्वनियों को सही ढंग से अभिव्यक्त नहीं कर पाती थीं।
  • नेपाल, भूटान और मॉरीशस में रहने वाले संताल समुदाय के लोग स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग लिपियों का उपयोग करते थे। ओल चिकी लिपि के आविष्कार ने संताली भाषा को सही और मानकीकृत रूप में लिखने की व्यवस्था प्रदान की।
  • पिछले 100 वर्षों में ओल चिकी लिपि संताल समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और भाषा संरक्षण का केंद्रीय आधार बन गई है।

द्रौपदी मुर्मु का संताली भाषा के प्रसार का आह्वान

  • ओल चिकी लिपि के प्रचार-प्रसार पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में विशेष जोर दिया।
  • उन्होंने कहा कि बच्चे भले ही हिंदी, अंग्रेज़ी, ओड़िया, बंगाली या अन्य भाषाओं में पढ़ाई करें, लेकिन उन्हें अपनी मातृभाषा संताली को ओल चिकी लिपि में भी अवश्य सीखना चाहिए।
  • राष्ट्रपति ने यह भी रेखांकित किया कि भाषा और साहित्य समाज में एकता बनाए रखने वाले सूत्र की तरह कार्य करते हैं।
  • उन्होंने लेखकों से आग्रह किया कि वे संताली साहित्य को समृद्ध करें और अपने लेखन के माध्यम से सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा दें। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि संताली साहित्य का अन्य भाषाओं में अनुवाद किया जाए, ताकि इसकी पहुंच बढ़े और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहन मिले।

ओल चिकी के 100 वर्ष: स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी

  • ओल चिकी लिपि के शताब्दी समारोह के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एक स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी किया। ये प्रतीकात्मक पहल ओल चिकी लिपि के सांस्कृतिक महत्व और संताली भाषा में उसके योगदान को मान्यता देती हैं।
  • इस अवसर पर राष्ट्रपति ने संताल समुदाय के 10 विशिष्ट व्यक्तियों को भी सम्मानित किया, जिन्होंने ओल चिकी लिपि के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • यह सम्मान जनजातीय भाषाओं के संरक्षण और भारत की भाषाई विविधता को सशक्त बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

ओल चिकी लिपि और संताली भाषा

ओल चिकी लिपि

  • ओल चिकी लिपि का आविष्कार वर्ष 1925 में Pandit Raghunath Murmu द्वारा किया गया था। वे मयूरभंज राज्य (वर्तमान ओडिशा, भारत) के एक लेखक और शिक्षक थे।
  • ओल चिकी को ओल चेमेंत’, ओल सिकी, ओल या संताली वर्णमाला भी कहा जाता है।
  • इसका निर्माण संताली संस्कृति को बढ़ावा देने और भाषा के संरक्षण के उद्देश्य से किया गया।
  • संरचना: इसमें 30 अक्षर हैं और यह पूर्णतः ध्वन्यात्मक (Phonetic) लिपि है, अर्थात प्रत्येक अक्षर संताली भाषा की एक विशिष्ट ध्वनि को दर्शाता है।
  • इसे पहली बार 1939 में मयूरभंज राज्य प्रदर्शनी में सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया गया।
  • पंडित रघुनाथ मुर्मु ने ओल चिकी में संताली भाषा में 150 से अधिक कृतियाँ लिखीं, जिनमें उपन्यास, कविता, नाटक, व्याकरण और शब्दकोश शामिल हैं।

संताली भाषा

  • संताली भाषा ऑस्ट्रोएशियाटिक भाषा परिवार की मुंडा शाखा से संबंधित है, जो दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में फैला एक प्राचीन भाषा परिवार है।
  • यह मुख्य रूप से भारत के झारखंड और पश्चिम बंगाल में बोली जाती है, साथ ही उत्तर-पश्चिम बांग्लादेश, पूर्वी नेपाल और भूटान में भी इसके वक्ता हैं।
  • संवैधानिक मान्यता: वर्ष 2003 में संताली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया, जिसमें ओल चिकी को इसकी आधिकारिक लिपि के रूप में मान्यता दी गई।

महत्व

  • ओल चिकी लिपि संताली की ध्वन्यात्मक विशेषताओं के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है।
  • इसने संताली साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • यह संताली भाषी समुदाय को सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक मान्यता प्रदान करती है।

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