NHAI राष्ट्रीय राजमार्गों पर बनाएगा मधुमक्खी गलियारे, जानें वजह

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने 17 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे “बी कॉरिडोर” (BeeCorridors) नामक एक अनोखी और पर्यावरण-अनुकूल पहल की घोषणा की है। इस योजना के तहत राजमार्गों के आसपास परागण-अनुकूल (पॉलिनेटर-फ्रेंडली) गलियारों का विकास किया जाएगा, जिनमें फूलदार पेड़-पौधे लगाए जाएंगे ताकि मधुमक्खियों और अन्य परागणकर्ताओं के संरक्षण को बढ़ावा मिल सके। इसका उद्देश्य मधुमक्खियों पर बढ़ते पारिस्थितिक दबाव को कम करना और जैव विविधता को मजबूत करना है। वर्ष 2026–27 में लगभग 40 लाख पेड़ लगाए जाने का लक्ष्य है, जिनमें से करीब 60% पौधारोपण बी कॉरिडोर पहल के तहत होगा। यह कदम सतत और हरित राजमार्ग विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

NHAI बी कॉरिडोर पहल: सतत राष्ट्रीय राजमार्ग विकास की दिशा में बड़ा कदम

एनएचएआई की बी कॉरिडोर पहल राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे सजावटी पौधारोपण से हटकर पारिस्थितिक पौधारोपण की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव दर्शाती है। अब सजावटी पौधों की जगह ऐसे पेड़-पौधे लगाए जाएंगे जो पराग और मधुरस (नेक्टर) से भरपूर हों और मधुमक्खियों सहित अन्य परागणकर्ताओं को समर्थन दें। यह पहल पूरे वर्ष मधुमक्खियों को भोजन की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। बी कॉरिडोर के माध्यम से जैव विविधता में सुधार होगा और दीर्घकालिक पारिस्थितिक संतुलन को बढ़ावा मिलेगा।

परागण संरक्षण क्यों महत्वपूर्ण है?

मधुमक्खियाँ और अन्य परागणकर्ता कृषि और बागवानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन बढ़ते पारिस्थितिक दबाव के कारण उनकी संख्या प्रभावित हो रही है। एनएचएआई की यह पहल मधुमक्खी-अनुकूल हरित पट्टियाँ विकसित कर पारिस्थितिक संतुलन बहाल करने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने का प्रयास करती है। स्वस्थ परागणकर्ता आबादी फसल उत्पादन और जैव विविधता दोनों को मजबूत बनाती है। इस प्रकार राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे पौधारोपण क्षेत्र केवल हरियाली नहीं बल्कि पारिस्थितिक समर्थन तंत्र बनेंगे।

बी कॉरिडोर कैसे विकसित किए जाएंगे?

इस योजना के तहत पेड़, झाड़ियाँ, जड़ी-बूटियाँ और घास का मिश्रण लगाया जाएगा। नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और सिरिस जैसी देशी प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी। विभिन्न मौसमों में अलग-अलग समय पर फूल खिलने की व्यवस्था की जाएगी ताकि पूरे वर्ष मधुरस उपलब्ध रहे। मधुमक्खियों की औसत उड़ान दूरी को ध्यान में रखते हुए 500 मीटर से 1 किलोमीटर के अंतराल पर फूलदार पेड़ों के समूह लगाए जाएंगे। यह व्यवस्थित दृष्टिकोण सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है।

वर्ष 2026–27 के लिए पौधारोपण लक्ष्य

एनएचएआई वर्ष 2026–27 में लगभग 40 लाख पेड़ लगाने की योजना बना रहा है, जिनमें से लगभग 60% बी कॉरिडोर पहल के तहत होंगे। देशभर के फील्ड कार्यालय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के आधार पर उपयुक्त राजमार्ग खंड और खाली भूमि का चयन करेंगे। इस अवधि में कम से कम तीन परागण कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। यह बड़े पैमाने का मधुमक्खी-अनुकूल पौधारोपण अभियान राष्ट्रीय स्तर पर परागण संरक्षण को मजबूती देगा।

परागणकर्ता और पारिस्थितिक अवसंरचना

परागणकर्ता, विशेषकर मधुमक्खियाँ, वैश्विक खाद्य उत्पादन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा सुनिश्चित करती हैं। अक्सर अवसंरचना विकास में जैव विविधता की अनदेखी हो जाती है, लेकिन पारिस्थितिक अवसंरचना विकास और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ती है। बी कॉरिडोर जैसी पहल परिवहन विकास को पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ संतुलित करती है। देशी और मधुरस-समृद्ध प्रजातियों के रोपण से भारत परागण सेवाओं, कृषि उत्पादन और जलवायु सहनशीलता में सुधार कर सकता है। ऐसा सतत राष्ट्रीय राजमार्ग मॉडल अन्य देशों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

T20 वर्ल्ड कप 2026 में सबसे ज़्यादा विकेट: सबसे ज़्यादा विकेट लेने वालों की पूरी लिस्ट

T20 वर्ल्ड कप 2026 में रोमांचक क्रिकेट एक्शन देखने को मिल रहा है, जिसमें टॉप बॉलर सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले बॉलर के टाइटल के लिए मुकाबला कर रहे हैं। भारत और श्रीलंका मिलकर इस टूर्नामेंट का 10वां एडिशन खेल रहे हैं, जो अलग-अलग जगहों पर खेला जा रहा है, जिसमें स्पिन-फ्रेंडली पिचें और हाई-स्कोरिंग ग्राउंड हैं।

जब टीमें सेमी-फ़ाइनल स्पॉट के लिए लड़ रही हैं, तो बॉलर मैच के नतीजों को बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। तेज़ पेसर से लेकर चालाक ऑल-राउंडर तक, कई खिलाड़ियों ने पहले ही बड़ा असर डाला है।

शैडली वैन शल्कविक विकेट चार्ट में सबसे आगे

USA के शैडली वैन शल्कविक अभी T20 वर्ल्ड कप 2026 में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ हैं। उन्होंने सिर्फ़ चार मैचों में 13 विकेट लिए हैं, जिससे वे अब तक टूर्नामेंट के सबसे अच्छे गेंदबाज़ बन गए हैं। उनकी लगातार लाइन, डिसिप्लिन्ड लेंथ और ज़रूरी मौकों पर विकेट लेने की काबिलियत ने USA को बड़े मैचों में मुकाबले में बने रहने में मदद की है।

अब तक के बेस्ट बॉलिंग फिगर

वेस्टइंडीज के ऑलराउंडर रोमारियो शेफर्ड के नाम अब तक टूर्नामेंट में बेस्ट बॉलिंग फिगर हैं। उन्होंने स्कॉटलैंड के खिलाफ 5/20 का शानदार स्पेल किया, जो अब तक के कॉम्पिटिशन के बेस्ट परफॉर्मेंस में से एक है।

T20 वर्ल्ड कप 2026 में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी

सबसे ज़्यादा विकेट लेने वालों की अपडेटेड लिस्ट यहाँ दी गई है:

रैंक खिलाड़ी देश विकेट मैच
1 शैडली वैन शाल्कविक संयुक्त राज्य अमेरिका 13 4
2 माइकल लीस्क स्कॉटलैंड 9 4
3 लुंगी एनगिडी दक्षिण अफ्रीका 8 3
4 अज़मतुल्लाह उमरज़ई अफ़ग़ानिस्तान 8 3
5 ब्लेसिंग मुज़ारबानी ज़िम्बाब्वे 7 2

गेंदबाजों का बड़ा असर

  • माइकल लीस्क ने चार मैचों में 9 विकेट लेकर सबको प्रभावित किया है।
  • साउथ अफ्रीका के पेस लीडर लुंगी एनगिडी ने सिर्फ़ तीन मैचों में 8 विकेट लिए हैं।
  • अफ़गानिस्तान के ऑलराउंडर अज़मतुल्लाह उमरज़ई बल्ले और गेंद दोनों से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
  • ज़िम्बाब्वे के लंबे तेज़ गेंदबाज़ ब्लेसिंग मुज़रबानी ने सिर्फ़ दो मैचों में 7 विकेट लिए हैं, और उनका स्ट्राइक रेट बहुत अच्छा है।

मुश्किल हालात बॉलर्स की परीक्षा लेते हैं

भारत और श्रीलंका के अलग-अलग शहरों में मैच खेले जा रहे हैं, इसलिए बॉलर्स को इन चीज़ों के साथ जल्दी से एडजस्ट करना होगा:

  • टर्निंग पिचें
  • नमी वाला मौसम
  • छोटी बाउंड्री
  • ज़्यादा स्कोर वाली सतहें

इन चुनौतियों के साथ तालमेल बिठाना टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले बॉलर के तौर पर खत्म करने के लिए ज़रूरी है।

मैक्रों की भारत यात्रा 2026: भारत-फ्रांस के बीच महत्वपूर्ण खनिज सहयोग समझौता

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान भारत और फ्रांस ने 18 फरवरी 2026 को महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) पर सहयोग के लिए संयुक्त आशय घोषणा (Joint Declaration of Intent) पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की खोज, उत्खनन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इसका उद्देश्य हरित और डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत एवं लचीली आपूर्ति शृंखलाएं तैयार करना है। मुंबई में हुई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के बाद इस घोषणा को भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी में एक नए मील के पत्थर के रूप में देखा जा रहा है।

क्या हुआ हस्ताक्षर?

भारत-फ्रांस महत्वपूर्ण खनिज सहयोग एक संयुक्त आशय घोषणा के माध्यम से औपचारिक रूप से स्थापित हुआ। यह समझौता दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और अन्य आवश्यक खनिजों की विविध और टिकाऊ आपूर्ति शृंखला सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। ये खनिज स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। भारत के राजदूत संजीव कुमार सिंगला ने संयुक्त उन्नत प्रौद्योगिकी विकास समूह के गठन की जानकारी भी दी। यह समझौता उभरती प्रौद्योगिकियों और औद्योगिक लचीलापन के क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक सहयोग को दर्शाता है।

हरित और डिजिटल अर्थव्यवस्था में महत्व

महत्वपूर्ण खनिज नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, बैटरी भंडारण, डिजिटल अवसंरचना और रक्षा विनिर्माण के लिए आधारभूत भूमिका निभाते हैं। दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का उपयोग पवन टर्बाइन, इलेक्ट्रिक वाहन, सौर पैनल और उच्च तकनीकी इलेक्ट्रॉनिक्स में होता है। खोज, उत्खनन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण में साझेदारी के माध्यम से दोनों देश सीमित वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना चाहते हैं। यह पहल दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करेगी और वैश्विक स्थिरता लक्ष्यों के तहत जलवायु प्रतिबद्धताओं को समर्थन देगी।

सीएनआरएस साझेदारी और उन्नत प्रौद्योगिकी सहयोग

इस सहयोग के तहत भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और फ्रांस के CNRS (नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च) के बीच एक आशय पत्र पर भी सहमति बनी। इसके तहत उन्नत सामग्रियों (Advanced Materials) पर एक केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है, जिससे शोध सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। सीएनआरएस विश्व की प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाओं में से एक है। साथ ही, दोनों देशों ने संयुक्त उन्नत प्रौद्योगिकी विकास समूह गठित करने का निर्णय लिया, जिससे नवाचार, औद्योगिक अनुसंधान और उभरती तकनीकों में सहयोग और गहरा होगा।

व्यापक रणनीतिक वार्ता: इंडो-पैसिफिक, यूक्रेन और गाज़ा

रणनीतिक वार्ताएं केवल महत्वपूर्ण खनिजों तक सीमित नहीं रहीं। दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन संघर्ष पर चिंता व्यक्त की और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का समर्थन किया। गाज़ा शांति योजना के कार्यान्वयन और दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन को भी दोहराया गया।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों ने स्वतंत्र, मुक्त और नियम-आधारित व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना के लिए गठबंधन (CDRI) जैसे मंचों के माध्यम से सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी। यह व्यापक संवाद भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को बहुआयामी और भविष्य उन्मुख बनाता है।

टाइप II नॉन-डिपॉजिट NBFC क्या है? एयरटेल मनी की नई भूमिका को समझा गया

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एयरटेल मनी को पंजीकरण प्रमाणपत्र (Certificate of Registration – CoR) प्रदान किया है। इस स्वीकृति के साथ भारती एयरटेल की सहायक कंपनी अब टाइप-II, गैर-जमा स्वीकार करने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) के रूप में कार्य कर सकेगी। यह अनुमति एयरटेल मनी के लिए विनियमित वित्तीय सेवाओं के व्यापक क्षेत्र में औपचारिक प्रवेश का संकेत है। साथ ही, भारती एयरटेल ने आरबीआई द्वारा अनिवार्य अस्वीकरण जारी करते हुए स्पष्ट किया कि नियामक संस्था कंपनी की वित्तीय सुदृढ़ता या देनदारियों की गारंटी नहीं देती।

एयरटेल मनी को आरबीआई से टाइप-II एनबीएफसी की मंजूरी

  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एयरटेल मनी (Airtel Money) को एनबीएफसी (Non-Banking Financial Company) के रूप में पंजीकरण प्रदान किया है।
  • इसे टाइप-II गैर-जमा स्वीकार करने वाली एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • यह अनुमति एनबीएफसी ढांचे के तहत दी गई है, जिससे एयरटेल मनी अब आरबीआई के नियमों के अनुसार अपने वित्तीय उत्पादों और सेवाओं का कानूनी रूप से विस्तार कर सकेगी।

टाइप-II गैर-जमा एनबीएफसी को समझें

टाइप-II (Non-Deposit Accepting) एनबीएफसी—

  • आम जनता से जमा (डिपॉजिट) स्वीकार नहीं कर सकती।
  • ऋण देने और अन्य वित्तीय गतिविधियों में संलग्न हो सकती है।
  • आरबीआई की निगरानी और अनुपालन मानकों के तहत कार्य करती है।

इस प्रकार की एनबीएफसी का मुख्य ध्यान जमा स्वीकार करने के बजाय ऋण, भुगतान सेवाओं और अन्य वित्तीय समाधानों पर केंद्रित रहता है।

आरबीआई का अनिवार्य अस्वीकरण – महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण

आरबीआई के निर्देशानुसार Bharti Airtel ने स्पष्ट किया कि—

  • आरबीआई कंपनी की वित्तीय सुदृढ़ता की कोई गारंटी नहीं देता।
  • आरबीआई कंपनी के बयानों या विचारों का सत्यापन नहीं करता।
  • आरबीआई किसी भी देनदारी या पुनर्भुगतान के लिए जिम्मेदार नहीं है।
  • यह एनबीएफसी पंजीकरण के साथ लागू होने वाला एक मानक नियामकीय अस्वीकरण है।

टेलीकॉम और फिनटेक का संगम

  • Airtel Money टेलीकॉम और वित्तीय सेवाओं के बीच एक सेतु का कार्य करता है।
  • यह भारत में डिजिटल भुगतान और फिनटेक क्षेत्र की वृद्धि को समर्थन देता है।
  • यह तकनीक-आधारित एनबीएफसी मॉडलों की बढ़ती प्रवृत्ति को मजबूत करता है।
  • साथ ही, यह मोबाइल प्लेटफॉर्म और वित्तीय समाधानों के गहरे एकीकरण को दर्शाता है।

मशहूर एक्ट्रेस प्रवीणा देशपांडे का निधन

अभिनेत्री प्रवीणा देशपांडे का 17 फरवरी 2026 को मुंबई में 60 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह मल्टीपल मायलोमा नामक श्वेत रक्त कोशिकाओं के कैंसर से पीड़ित थीं। उनके परिवार ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इस दुखद समाचार की पुष्टि की। वह वर्ष 2019 से उपचार करा रही थीं, लेकिन उन्होंने अपनी बीमारी को निजी रखा। फिल्म Ready की अभिनेत्री का अंतिम संस्कार उसी दिन अंधेरी, मुंबई में किया गया। उनके परिवार में उनके पति और दो बच्चे हैं।

मृत्यु का कारण: मल्टीपल मायलोमा

प्रवीणा देशपांडे ने मल्टीपल मायलोमा जैसी गंभीर रक्त कैंसर बीमारी से लंबी लड़ाई लड़ी। यह बीमारी प्लाज़्मा कोशिकाओं को प्रभावित करती है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। 2019 से उपचार के बावजूद उन्होंने अपनी स्वास्थ्य स्थिति को सार्वजनिक नहीं किया। बीमारी के दौरान भी उन्होंने चुनिंदा रूप से मनोरंजन जगत में काम जारी रखा। उनके निधन की खबर से प्रशंसकों और सहकर्मियों में शोक की लहर दौड़ गई।

अंतिम ऑन-स्क्रीन उपस्थिति

निधन से पहले प्रवीणा देशपांडे ने नेटफ्लिक्स सीरीज़ Taskaree में कैमियो भूमिका निभाई थी, जिसमें उन्होंने अभिनेता इमरान हाशमी के साथ स्क्रीन साझा की। सीरीज़ की रिलीज़ के बाद उन्होंने निर्देशक नीरज पांडे की सराहना की थी और भविष्य में उनके साथ फिर काम करने की इच्छा जताई थी, जो अब अधूरी रह गई।

करियर यात्रा: टीवी और फिल्में

प्रवीणा देशपांडे ने अपने करियर की शुरुआत रंगमंच से की, जिसके बाद उन्होंने टेलीविजन और फिल्मों में कदम रखा। उन्हें लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों जैसे घर एक मंदिर, करम अपना अपना और कुल्फी कुमार बाजेवाला से पहचान मिली।

फिल्मों में उन्होंने मराठी और हिंदी सिनेमा में काम किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में शामिल हैं—

  • मुंबई मेरी जान
  • डी-डे
  • एक विलेन
  • गब्बर इज बैक
  • परमाणु: द स्टोरी ऑफ पोखरण

उनके अभिनय की गहराई और संवेदनशीलता के लिए सराहना की जाती थी।

मल्टीपल मायलोमा: एक संक्षिप्त जानकारी

मल्टीपल मायलोमा प्लाज़्मा कोशिकाओं में बनने वाला कैंसर है, जो अस्थि मज्जा (बोन मैरो) को प्रभावित करता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकता है। इसके सामान्य लक्षणों में हड्डियों में दर्द, थकान, बार-बार संक्रमण और एनीमिया शामिल हैं। उपचार में कीमोथेरेपी, लक्षित थेरेपी और स्टेम सेल प्रत्यारोपण शामिल हो सकते हैं, जो बीमारी की अवस्था पर निर्भर करता है। प्रवीणा देशपांडे लगभग सात वर्षों तक इस बीमारी से जूझती रहीं।

देवेंद्र फडणवीस ने पहले मुंबई क्लाइमेट वीक का भव्य शुभारंभ किया

मुंबई ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बांद्रा स्थित जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में पहले मुंबई क्लाइमेट वीक का उद्घाटन किया। यह तीन दिवसीय वैश्विक सम्मेलन जलवायु चर्चा को व्यावहारिक और क्रियान्वित किए जा सकने वाले समाधानों की दिशा में ले जाने का उद्देश्य रखता है।

इस कार्यक्रम का आयोजन प्रोजेक्ट मुंबई ने महाराष्ट्र सरकार के साथ साझेदारी में और बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के समर्थन से किया है। सम्मेलन में वैश्विक, राष्ट्रीय और स्थानीय विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। फोकस विशेष रूप से ग्लोबल साउथ की चुनौतियों, शहरी लचीलापन, नवीकरणीय ऊर्जा और समावेशी जलवायु परिवर्तन रणनीतियों पर है।

मुंबई क्लाइमेट वीक – कार्यक्रम का अवलोकन एवं उद्देश्य

  • अवधि: तीन दिवसीय सम्मेलन (समापन 19 फरवरी 2026)
  • आयोजक: प्रोजेक्ट मुंबई
  • साझेदार: महाराष्ट्र सरकार, बीएमसी
  • मुख्य विषय: क्रियान्वित किए जा सकने वाले जलवायु समाधान
  • विशेष फोकस: ग्लोबल साउथ की चुनौतियाँ

यह कार्यक्रम नीति संवाद के साथ-साथ मुंबई भर में सामुदायिक और कैंपस आधारित गतिविधियों को भी शामिल करता है।

पीएम कुसुम के तहत सौर ऊर्जा को बढ़ावा

केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि:

  • महाराष्ट्र के लिए 1 लाख अतिरिक्त सोलर पंप दिए जाएंगे
  • यह योजना PM Kusum Scheme के तहत लागू होगी
  • इससे कृषि क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी

उन्होंने कहा कि भारत ने आर्थिक विकास को उत्सर्जन से अलग करने में प्रगति की है और पिछले दशक में उत्सर्जन तीव्रता में कमी आई है।

महाराष्ट्र की जलवायु रणनीति पर फडणवीस

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बढ़ती हीटवेव, असमय वर्षा और जलवायु संबंधी चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने शासन-आधारित जलवायु प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर जोर दिया और आर्थिक विकास के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी के संतुलन की प्रतिबद्धता दोहराई।

गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति और शहरव्यापी भागीदारी

उद्घाटन समारोह में कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं, जिनमें शामिल हैं:

  • प्रह्लाद जोशी
  • पंकजा मुंडे
  • मुंबई की मेयर रितु तावड़े
  • एमएमआरडीए आयुक्त संजय मुखर्जी

कार्यक्रम केवल कन्वेंशन सेंटर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामुदायिक और सांस्कृतिक स्थलों तक भी विस्तारित किया गया है, जिससे पूरे शहर में जलवायु जागरूकता को बढ़ावा मिल रहा है।

भारत के तेजस्विन शंकर ने पुरुषों की हेप्टाथलॉन में स्वर्ण पदक जीता

भारत के स्टार एथलीट तेजस्विन शंकर ने चीन के Tianjin में आयोजित एशियन इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। उन्होंने पुरुषों की हेप्टाथलॉन स्पर्धा में 5,993 अंकों के रिकॉर्ड प्रदर्शन के साथ पहला स्थान हासिल किया। यह इस चैम्पियनशिप में भारत का एकमात्र स्वर्ण पदक रहा। इस उपलब्धि के साथ तेजस्विन शंकर ने अपना ही पिछला सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पीछे छोड़ते हुए नया राष्ट्रीय इंडोर रिकॉर्ड भी बनाया। भारत ने कुल पाँच पदकों के साथ प्रतियोगिता में छठा स्थान प्राप्त किया।

एशियन इंडोर एथलेटिक्स चैम्पियनशिप 2026 में तेजस्विन शंकर का स्वर्ण

भारत के प्रतिभाशाली एथलीट तेजस्विन शंकर ने एशियन इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की हेप्टाथलॉन स्पर्धा में 5,993 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीता। यह स्कोर एक नया राष्ट्रीय इंडोर रिकॉर्ड है। उन्होंने अपना ही 2021 में अमेरिका में बनाया गया 5,650 अंकों का पिछला सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड तोड़ दिया। यह प्रतियोगिता में भारत का एकमात्र स्वर्ण पदक था, जिसने भारतीय एथलेटिक्स के लिए इसे विशेष उपलब्धि बना दिया।

तेजस्विन शंकर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड क्यों खास है?

हेप्टाथलॉन सात ट्रैक एवं फील्ड स्पर्धाओं का दो दिनों में आयोजित होने वाला कठिन बहु-इवेंट मुकाबला है। इसमें उच्च स्तर की सहनशक्ति, तकनीक और निरंतर प्रदर्शन की आवश्यकता होती है। 5,993 अंकों का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड यह दर्शाता है कि तेजस्विन शंकर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निरंतर सुधार और स्थिरता दिखाई है। यह स्वर्ण पदक भारत की बहु-इवेंट एथलेटिक्स में बढ़ती उपस्थिति को भी मजबूत करता है।

भारत का कुल पदक प्रदर्शन

भारत ने इस चैम्पियनशिप में कुल पाँच पदक जीतकर समग्र तालिका में छठा स्थान हासिल किया। अन्य पदक विजेताओं में—

  • पूजा – हाई जंप में रजत पदक
  • तजिंदरपाल सिंह तूर – शॉट पुट में रजत पदक
  • एंसी सोजन – लंबी कूद में कांस्य पदक

अंतिम दिन जीते गए अतिरिक्त पदकों ने भारत की कुल पदक संख्या को मजबूत किया और समग्र रैंकिंग बेहतर बनाई।

तियानजिन चैम्पियनशिप में चीन शीर्ष पर

मेज़बान देश चीन ने प्रतियोगिता में दबदबा बनाया और कुल 34 पदकों (10 स्वर्ण, 11 रजत और 13 कांस्य) के साथ पदक तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। भारत पाँच पदकों (एक स्वर्ण सहित) के साथ छठे स्थान पर रहा।

एशियन इंडोर एथलेटिक्स चैम्पियनशिप के बारे में

एशियन इंडोर एथलेटिक्स चैम्पियनशिप एशियन एथलेटिक्स द्वारा आयोजित एक महाद्वीपीय प्रतियोगिता है। इसमें इंडोर ट्रैक एवं फील्ड स्पर्धाएँ शामिल होती हैं, जैसे स्प्रिंट, कूद, थ्रो और हेप्टाथलॉन जैसी बहु-इवेंट प्रतियोगिताएँ। इंडोर प्रतियोगिताएँ नियंत्रित स्टेडियम वातावरण में आयोजित होती हैं, जो आउटडोर प्रतियोगिताओं से ट्रैक आकार और परिस्थितियों में भिन्न होती हैं। यह टूर्नामेंट खिलाड़ियों को विश्व इंडोर चैम्पियनशिप और ओलंपिक जैसे वैश्विक आयोजनों की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय अनुभव प्रदान करता है।

अडानी-मार्सिले समझौता ग्लोबल शिपिंग के लिए गेम-चेंजर क्यों हो सकता है

अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (APSEZ) ने फ्रांस के सबसे बड़े बंदरगाह मार्सिले पोर्ट के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य इंडिया–मिडिल ईस्ट–यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) के माध्यम से भारत–यूरोपीय संघ व्यापार को मजबूत करना है। साझेदारी के तहत व्यापार सुगमता, बंदरगाह नवाचार और ऊर्जा संक्रमण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही IMEC कॉरिडोर से जुड़े प्रमुख बंदरगाहों के समन्वय के लिए “IMEC पोर्ट्स क्लब” स्थापित करने का भी प्रस्ताव है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

अडानी पोर्ट्स–मार्सेई फोस समझौते की प्रमुख बातें

अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड और मार्सिले पोर्ट के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) में व्यापार और लॉजिस्टिक्स सहयोग को मजबूत करने के लिए कई रणनीतिक उद्देश्यों को शामिल किया गया है—

  • व्यापार सुगमता: कार्गो आवागमन और कस्टम प्रक्रियाओं को सरल बनाना।
  • बंदरगाह नवाचार: डिजिटलीकरण और स्वचालन में सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान।
  • ऊर्जा संक्रमण: हरित ईंधन और टिकाऊ बंदरगाह समाधान को बढ़ावा देना।
  • IMEC पोर्ट्स क्लब: IMEC कॉरिडोर से जुड़े बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे और संचालन का समन्वय।
  • कनेक्टिविटी में वृद्धि: भारत–यूरोप लॉजिस्टिक्स गलियारों को मजबूत करना।

यह समझौता दक्षता, स्थिरता और बहु-मोडल लॉजिस्टिक्स एकीकरण पर केंद्रित गहरे सहयोग का संकेत देता है।

IMEC कॉरिडोर के लिए मार्सेई फोस का महत्व

मार्सेई फोस यूरोप के भूमध्यसागरीय प्रवेश द्वार के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है—

  • यूरोप के सबसे बड़े एकीकृत मल्टीमोडल बंदरगाहों में से एक।
  • समुद्र, रेल, नदी और सड़क परिवहन नेटवर्क से जुड़ा हुआ।
  • लगभग 70 मिलियन टन अतिरिक्त कार्गो क्षमता जोड़ता है।
  • IMEC कॉरिडोर के पश्चिमी हिस्से को मजबूत करता है।

अडानी पोर्ट्स के साथ साझेदारी कर मार्सेई फोस भारत–मध्य पूर्व–यूरोप व्यापार प्रवाह को एक संरचित मार्ग प्रदान करता है, जिससे लॉजिस्टिक्स अधिक पूर्वानुमेय और प्रतिस्पर्धी बनता है।

अडानी पोर्ट्स की रणनीतिक भूमिका – मुंद्रा और हजीरा का महत्व

IMEC कॉरिडोर के पूर्वी हिस्से में अडानी पोर्ट्स की परिसंपत्तियाँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं—

  • Mundra Port: भारत का सबसे बड़ा वाणिज्यिक बंदरगाह।
  • Hazira Port: कंटेनर और थोक कार्गो का प्रमुख केंद्र।
  • मिलकर एक मजबूत मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम बनाते हैं।
  • दक्षिण एशिया को पश्चिम एशिया से जोड़ते हैं।

अब मार्सेई फोस के जुड़ने से अडानी पोर्ट्स को यूरोप में अंतिम कड़ी मिलती है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता और मजबूती बढ़ती है।

भारत–यूरोप व्यापार और लॉजिस्टिक्स पर प्रभाव

यह साझेदारी भारत–यूरोप व्यापार संबंधों को नया आकार दे सकती है—

  • बंदरगाह दक्षता में सुधार और पारगमन समय में कमी।
  • आपूर्ति श्रृंखला की अधिक मजबूती।
  • भारत–यूरोप कनेक्टिविटी में वृद्धि।
  • हरित लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा संक्रमण पर विशेष ध्यान।

उद्योग विशेषज्ञ इसे एक सुरक्षित, प्रतिस्पर्धी और दीर्घकालिक यूरेशियाई व्यापार मार्ग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।

मोदी-मैक्रों ने टेक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत-फ्रांस इनोवेशन वर्ष की शुरुआत की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 17 से 19 फरवरी तक भारत की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान “भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026” का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रक्षा, डिजिटल प्रौद्योगिकी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करना है। यह यात्रा बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच दोनों देशों के मजबूत रणनीतिक समन्वय को दर्शाती है। दोनों नेताओं द्वारा भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करने और नवाचार तथा आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने की अपेक्षा है।

मोदी और मैक्रों द्वारा भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 का शुभारंभ

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने आधिकारिक रूप से भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 का शुभारंभ किया।
  • इस पहल का उद्देश्य स्टार्ट-अप्स, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी नेतृत्वकर्ताओं के बीच सहयोग को संस्थागत रूप देना है।
  • यह 1998 में स्थापित भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी की बढ़ती मजबूती को दर्शाता है, जो अब रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु कार्रवाई और इंडो-पैसिफिक सहयोग तक विस्तारित हो चुकी है।
  • नवाचार वर्ष उभरती प्रौद्योगिकियों, डिजिटल अवसंरचना और संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रमों पर केंद्रित रहेगा।

एआई इम्पैक्ट समिट और प्रौद्योगिकी साझेदारी

  • इस यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण एआई इम्पैक्ट समिट में दोनों नेताओं की संयुक्त भागीदारी है।
  • इससे पहले दोनों नेताओं ने फ्रांस में आयोजित एआई एक्शन समिट की सह-अध्यक्षता की थी, जिसमें नैतिक, सुरक्षित और मानव-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन को बढ़ावा दिया गया।
  • भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और विकासशील देशों के लिए तकनीकी क्षमता निर्माण को मजबूत करेगा।
  • दोनों पक्ष वैश्विक एआई विभाजन को कम करने और समावेशी डिजिटल विकास को समर्थन देने का लक्ष्य रखते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्विपक्षीय नवाचार प्रयासों का केंद्रीय तत्व बनी हुई है।

रक्षा संबंध: राफेल लड़ाकू विमान और रणनीतिक सहयोग

भारत-फ्रांस संबंधों में रक्षा सहयोग एक प्रमुख स्तंभ बना हुआ है। भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defense Acquisitions Council) ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

राफेल विमान का निर्माण डसॉल्ट एविएशन द्वारा किया जाता है। 114 विमानों में से—

  • 18 विमान सीधे उड़ान-योग्य (फ्लाईअवे) स्थिति में भारत आएंगे।
  • शेष विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा।

भारत पहले से ही वायुसेना में 36 राफेल विमानों का संचालन कर रहा है और 26 नौसैनिक संस्करणों का आदेश दे चुका है। विस्तारित बेड़ा भारत की वायु युद्ध क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से सुदृढ़ करेगा और रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देगा।

इंडो-पैसिफिक सहयोग और वैश्विक समन्वय

  • भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करता है।
  • फ्रांस अपने विदेशी क्षेत्रों, जैसे Réunion Island, के कारण एक निवासी इंडो-पैसिफिक शक्ति है।
  • दोनों देश बहुपक्षवाद, रणनीतिक स्वायत्तता और संयुक्त राष्ट्र सुधार का समर्थन करते हैं।
  • फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पुनर्गठित स्वरूप में भारत की स्थायी सदस्यता की आकांक्षा का लगातार समर्थन किया है।
  • नेता इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और समुद्री सहयोग की भी समीक्षा करेंगे।

‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ क्या है? भारत-फ्रांस के कदम की व्याख्या

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की 17–19 फरवरी 2026 की भारत यात्रा के दौरान भारत और फ्रांस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को “विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी” (Special Global Strategic Partnership) तक उन्नत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने उच्च स्तरीय वार्ता की तथा संयुक्त रूप से “इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026” का शुभारंभ किया। यह राष्ट्रपति मैक्रों की भारत की चौथी यात्रा है और इससे पहले 2025 में प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस का दौरा किया था। उन्नत साझेदारी का उद्देश्य Horizon 2047 रोडमैप के तहत रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), परमाणु ऊर्जा, जलवायु, इंडो-पैसिफिक और बहुपक्षीय सहयोग को गहरा करना है।

विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा

  • भारत-फ्रांस संयुक्त वक्तव्य 2026 में दोनों नेताओं ने संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी तक ले जाने पर सहमति जताई। यह निर्णय एक स्थिर और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के निर्माण की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 2023 में रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने पर अपनाए गए Horizon 2047 रोडमैप की प्रगति की समीक्षा भी की गई।
  • दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा, वैश्विक मुद्दों और जन-से-जन संपर्क की निगरानी के लिए वार्षिक विदेश मंत्रियों का व्यापक संवाद तंत्र स्थापित करने का निर्णय लिया। यह कदम भारत-फ्रांस संबंधों के दीर्घकालिक संस्थागत सुदृढ़ीकरण का संकेत है।

रक्षा सहयोग: राफेल-मरीन और स्कॉर्पीन

  • रक्षा सहयोग भारत-फ्रांस संयुक्त वक्तव्य 2026 का केंद्रीय स्तंभ बना हुआ है।
  • दोनों देशों ने उन्नत रक्षा प्लेटफॉर्म के सह-डिज़ाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन को तेज़ करने पर सहमति जताई है।
  • भारत ने हाल ही में 26 राफेल-मरीन लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • कलवरी-श्रेणी (स्कॉर्पीन) पनडुब्बी कार्यक्रम के तहत सहयोग जारी है, जिसमें छठी पनडुब्बी जनवरी 2025 में सौंप दी गई।
  • एक संयुक्त उन्नत प्रौद्योगिकी विकास समूह (Joint Advanced Technology Development Group) उभरती और महत्वपूर्ण तकनीकों की खोज करेगा।
  • डीआरडीओ (DRDO) और फ्रांस की डीजीए (DGA) के बीच सहयोग रक्षा अनुसंधान एवं विकास संबंधों को और मजबूत करेगा, जिससे रणनीतिक स्वायत्तता और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ेगी।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार

  • राष्ट्रपति मैक्रों भारत में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 में भाग लेंगे। दोनों नेताओं ने सुरक्षित, भरोसेमंद और सार्वजनिक हित में उपयोगी AI के विकास के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। इससे पहले हस्ताक्षरित भारत-फ्रांस कृत्रिम बुद्धिमत्ता घोषणा पर आगे बढ़ते हुए 2026 को “इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन” घोषित किया गया है।
  • AI, साइबर सुरक्षा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, स्टार्टअप और अनुसंधान के क्षेत्रों में संयुक्त पहलें शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान निकायों और उद्योगों को जोड़ेंगी।

परमाणु ऊर्जा और जलवायु सहयोग

  • भारत और फ्रांस ने असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग का विस्तार किया है, जिसमें बड़े रिएक्टरों तथा उभरती तकनीकों जैसे स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) को शामिल किया गया है।
  • जैतापुर परमाणु ऊर्जा परियोजना पर चर्चाओं में प्रगति हुई है।
  • फ्रांस ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता हासिल करने के भारत के लक्ष्य का समर्थन किया।
  • दोनों पक्षों ने पेरिस समझौते और जलवायु लक्ष्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिसमें वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित रखने का लक्ष्य शामिल है।
  • इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) और कोएलिशन फॉर डिज़ास्टर रेज़िलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) के माध्यम से सहयोग वैश्विक जलवायु कार्रवाई को मजबूत करता रहेगा।

इंडो-पैसिफिक और वैश्विक शासन

  • दोनों नेताओं ने स्वतंत्र और मुक्त इंडो-पैसिफिक के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
  • उन्होंने भारत-फ्रांस इंडो-पैसिफिक रोडमैप के तहत समन्वय तथा ऑस्ट्रेलिया और यूएई के साथ त्रिपक्षीय प्रारूपों पर जोर दिया।
  • फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पुनर्गठित स्वरूप में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपना मजबूत समर्थन दोहराया। राष्ट्रपति मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी को फ्रांस द्वारा आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन 2026 में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।
  • चर्चाओं में यूक्रेन, गाज़ा, ईरान और वैश्विक व्यापक आर्थिक स्थिरता जैसे मुद्दे शामिल रहे, जिनमें संवाद, कूटनीति और बहुपक्षीय सुधार पर बल दिया गया।

व्यापार और जन-से-जन संपर्क

  • भारत-फ्रांस संयुक्त वक्तव्य 2026 में व्यापार, निवेश और डिजिटल सहयोग में वृद्धि का उल्लेख किया गया। फ्रांस पहला यूरोपीय देश है जिसने भारत की UPI भुगतान प्रणाली को स्वीकार किया। दोनों नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता में प्रगति का स्वागत किया।
  • 2030 तक फ्रांस में भारतीय छात्रों की संख्या 30,000 तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। स्वास्थ्य, शिक्षा, नागरिक उड्डयन, रेलवे, स्टार्टअप और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में सहयोग द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगा।

पृष्ठभूमि

  • भारत और फ्रांस ने वर्ष 1998 में रणनीतिक साझेदारी स्थापित की थी। समय के साथ यह सहयोग रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, जलवायु कार्रवाई, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी क्षेत्रों तक विस्तारित हुआ है।
  • 2023 में 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर होराइजन 2047 रोडमैप को अपनाया गया, जिससे भविष्य का सहयोग भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी के लक्ष्य के अनुरूप तय किया गया।
  • फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का लगातार समर्थन किया है।
  • 2026 में संबंधों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक उन्नत किया जाना दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और दीर्घकालिक भू-राजनीतिक सामंजस्य को दर्शाता है।

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