IFFI 2026: Goa में होने वाले 57वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में आशुतोष गोवारिकर होंगे फेस्टिवल डायरेक्टर

भारतीय सिनेमा और इंटरनेशनल फिल्म इंडस्ट्री के लिए बड़ी खबर सामने आई है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने मशहूर फिल्म निर्देशक Ashutosh Gowariker को 57वें International Film Festival of India (IFFI 2026) का Festival Director नियुक्त किया है। यह प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सव नवंबर 2026 में गोवा में आयोजित किया जाएगा, जिसका इंतजार दुनियाभर के फिल्ममेकर्स और सिनेमा प्रेमी बेसब्री से करते हैं।

Ashutosh Gowariker अपने शानदार निर्देशन और बेहतरीन कहानी कहने की शैली के लिए जाने जाते हैं। उनकी नियुक्ति से उम्मीद की जा रही है कि IFFI 2026 में एक नई रचनात्मकता और वैश्विक स्तर की गुणवत्ता देखने को मिलेगी।

Gowariker का IFFI से पुराना जुड़ाव भी रहा है—उन्होंने 1984 में इसमें भाग लिया था और 2024 में इंटरनेशनल सिनेमा के Jury President भी रह चुके हैं, जो उनके अनुभव और विश्वसनीयता को और मजबूत बनाता है।

IFFI 2026 के बारें में

International Film Festival of India एशिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सवों में से एक है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1952 में हुई थी। यह महोत्सव भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, National Film Development Corporation और Entertainment Society of Goa के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया जाता है। समय के साथ IFFI ने एक वैश्विक मंच के रूप में पहचान बनाई है, जहां दुनियाभर के फिल्ममेकर्स, कलाकार और सिनेमा प्रेमी एक साथ आते हैं।

IFFI 2026 में क्या-क्या होगा?

IFFI 2026 के इस संस्करण में दर्शकों को इंटरनेशनल फिल्म प्रतियोगिता, मास्टरक्लास, पैनल डिस्कशन और दिग्गज फिल्मकारों को श्रद्धांजलि जैसे कई खास आकर्षण देखने को मिलेंगे। हर साल की तरह इस बार भी Goa अपनी खूबसूरत लोकेशन और सांस्कृतिक माहौल के साथ इस आयोजन को और भी खास बनाएगा, जिससे यह फेस्टिवल न सिर्फ सिनेमा का जश्न होगा, बल्कि एक वैश्विक सांस्कृतिक अनुभव भी बनेगा।

भारतीय वैज्ञानिक परवीन शेख को मिला 2026 Whitley Award, रचा इतिहास

भारत के लिए गर्व की बात है कि भारतीय वैज्ञानिक परवीन शेख को 2026 का प्रतिष्ठित Whitley Award प्रदान किया गया है। यह सम्मान उन्हें endangered पक्षी Indian Skimmer के संरक्षण में उनके अद्भुत योगदान के लिए दिया गया है।

यह अवॉर्ड Whitley Fund for Nature द्वारा दिया जाता है और इस बार समारोह Royal Geographical Society में आयोजित हुआ, जहां Princess Anne ने उन्हें सम्मानित किया।

यह उपलब्धि न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे विश्व में grassroots conservation (जमीनी स्तर पर संरक्षण) के महत्व को उजागर करती है।

क्यों चर्चा में है ये खबर?

  1. भारत की महिला वैज्ञानिक को Global Award
  2. एक endangered species को बचाने का real impact
  3. grassroots model की international recognition
  4. प्रयागराज जैसे हाई-रिस्क क्षेत्र में विस्तार

Indian Skimmer: एक दुर्लभ और संकटग्रस्त नदी पक्षी

Indian Skimmer एक बेहद अनोखा और संकटग्रस्त पक्षी है, जिसकी पहचान इसकी चमकीली नारंगी चोंच और पानी की सतह पर स्किमिंग करते हुए मछली पकड़ने की खास तकनीक से होती है।

खास बातें:

  • भारत में इस पक्षी की 90% से अधिक वैश्विक आबादी पाई जाती है
  • कुल संख्या लगभग 3,000 के आसपास
  • ये रेतीले टापुओं (sandbars) और नदी के बीच बने द्वीपों पर घोंसले बनाते हैं
  • नदी के बहाव और पर्यावरणीय बदलाव के प्रति बेहद संवेदनशील

दुर्भाग्यवश, habitat loss और प्रदूषण के कारण यह पक्षी दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों से लगभग गायब हो चुका है।

कम्युनिटी मॉडल: ‘हमारे पक्षी’ बचाने की अनोखी पहल

परवीन शेख की सफलता के पीछे उनका community-led conservation model सबसे बड़ी ताकत है, जिसे “Guardian Model” कहा जाता है।

इस मॉडल की खासियत:

  • स्थानीय ग्रामीणों को Nest Guardian के रूप में प्रशिक्षित किया गया
  • घोंसलों की वैज्ञानिक मॉनिटरिंग
  • शिकारी और मानवीय हस्तक्षेप से सुरक्षा
  • स्थानीय लोगों में ownership की भावना—अब वे इन्हें “हमारे पक्षी” कहते हैं

परिणाम चौंकाने वाले:

  1. Nest survival rate 14% से बढ़कर 27% हुआ
  2. पक्षियों की संख्या 400 (2017) से बढ़कर लगभग 1,000 तक पहुंची

यह मॉडल साबित करता है कि जब समुदाय जुड़ता है, तो संरक्षण में चमत्कार संभव है।

पायलट फेज के बाद SEBI ने लॉन्च किया PaRRVA सिस्टम

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने ‘पास्ट रिस्क एंड रिटर्न वेरिफिकेशन एजेंसी’ (PaRRVA) को चालू कर दिया है। दिसंबर 2025 में शुरू किए गए सफल पायलट चरण के बाद, यह प्रणाली 4 मई 2026 से पूरी तरह से काम करने लगेगी। PaRRVA को वित्तीय सेवा प्रदाताओं के सत्यापित प्रदर्शन डेटा उपलब्ध कराने के लिए डिज़ाइन किया गया है, और यह निवेशकों को सोच-समझकर निर्णय लेने में मदद करेगा, साथ ही विश्वास और जवाबदेही को भी बढ़ाएगा।

PaRRVA क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

PaRRVA एक नियामक तंत्र है जिसे SEBI द्वारा वित्तीय संस्थाओं द्वारा किए गए पिछले प्रदर्शन के दावों को सत्यापित और मानकीकृत करने के लिए शुरू किया गया है।

मुख्य उद्देश्य

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निवेशक कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सटीक, पारदर्शी और विश्वसनीय डेटा प्राप्त करें।

यह क्यों ज़रूरी है

  • इससे गुमराह करने वाले परफॉर्मेंस के दावे कम होंगे।
  • इससे फाइनेंशियल सर्विस प्रोवाइडर्स का भरोसा भी बढ़ेगा।
  • इससे सोच-समझकर किए गए इन्वेस्टमेंट फैसलों को बढ़ावा मिलेगा।
  • साथ ही, इन्वेस्टर प्रोटेक्शन सिस्टम भी मज़बूत होगा।

शामिल प्रमुख संस्थाएँ

SEBI ने PaRRVA के कामकाज को लागू करने और उसका प्रबंधन करने के लिए कुछ खास संस्थाओं को नियुक्त किया है।

CARE Ratings Limited को PaRRVA एजेंसी के तौर पर मान्यता दी गई है।

इसके अलावा, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (NSE) PaRRVA डेटा सेंटर (PDC) के रूप में कार्य करेगा।

ये संस्थाएँ कामकाज के सुचारू संचालन, डेटा के सत्यापन और प्रदर्शन रिकॉर्ड की सुरक्षित हैंडलिंग को सुनिश्चित करेंगी।

PaRRVA कैसे काम करता है

PaRRVA विनियमित संस्थाओं को अपना प्रदर्शन डेटा जमा करने की अनुमति देगा, जिसे बाद में सत्यापित और प्रमाणित किया जाएगा।

PaRRVA का उपयोग कौन कर सकता है?

  • निवेश सलाहकार
  • अनुसंधान विश्लेषक
  • एल्गोरिद्मिक ट्रेडिंग सेवा प्रदाता

मुख्य विशेषताएं

  • पिछले जोखिम और रिटर्न डेटा का सत्यापन
  • प्रदर्शन रिपोर्टिंग का मानकीकरण
  • और निवेशकों के लिए प्रमाणित डेटा तक पहुंच

निवेशकों और बाज़ार की पारदर्शिता पर प्रभाव

PaRRVA की शुरुआत से निवेशकों के विश्वास में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।

निवेशकों के लिए लाभ

  • इससे सत्यापित प्रदर्शन रिकॉर्ड तक पहुँच मिलेगी।
  • साथ ही, सेवा प्रदाताओं के बीच बेहतर तुलना करना संभव होगा।
  • इससे धोखाधड़ी या गुमराह करने वाले दावों का जोखिम भी कम होगा।

वित्तीय संस्थाओं के लिए लाभ

  • इसमें सत्यापित ट्रैक रिकॉर्ड प्रदर्शित करने की क्षमता है।
  • विज्ञापनों में PaRRVA-प्रमाणित डेटा का उपयोग।
  • और इससे विश्वसनीयता तथा बाज़ार में प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

कैबिनेट का अहम निर्णय: महाराष्ट्र में AI नीति 2026 लागू

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र राज्य कैबिनेट ने महत्वाकांक्षी ‘महाराष्ट्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नीति 2026’ को मंज़ूरी दे दी है। इस नीति का उद्देश्य ₹10,000 करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित करना और 2031 तक लगभग 1.5 लाख रोज़गार के अवसर पैदा करना है। इस नीति के माध्यम से, राज्य को भारत के एक अग्रणी AI हब (केंद्र) के रूप में स्थापित किया जाएगा। नवाचार, बुनियादी ढांचे और समावेशी विकास पर विशेष ज़ोर देते हुए, इस नीति का दृष्टिकोण भारत के उस व्यापक प्रयास के अनुरूप है, जिसके तहत भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता बनने की दिशा में अग्रसर है।

महाराष्ट्र AI नीति 2026

हाल ही में मंज़ूर की गई AI नीति का मकसद महाराष्ट्र को राष्ट्रीय और वैश्विक AI इनोवेशन केंद्र में बदलना है। इसका मुख्य ज़ोर एक मज़बूत इकोसिस्टम बनाने पर होगा, जिसमें ये चीज़ें शामिल होंगी:

  • बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर
  • कुशल वर्कफ़ोर्स
  • स्टार्टअप इकोसिस्टम
  • ज़िम्मेदार AI गवर्नेंस

राज्य का लक्ष्य ‘इंडिया AI मिशन’ के लिए एक रोल मॉडल के तौर पर काम करना भी है।

₹10,000 करोड़ का निवेश और रोज़गार सृजन का लक्ष्य

इस नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसकी आर्थिक महत्वाकांक्षा है।

  • इसके तहत ₹10,000 करोड़ से अधिक के निवेश का लक्ष्य रखा गया है।
  • इससे वर्ष 2031 तक 1.5 लाख रोज़गार के अवसर सृजित होंगे।
  • साथ ही, यह भी स्वीकार किया गया है कि AI के कारण लगभग 70% नौकरियों का स्वरूप बदल सकता है।

यह उद्योगों और रोज़गार के स्वरूप को नया आकार देने में AI के बढ़ते महत्व को भी रेखांकित करता है।

राज्य में AI इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा

इस नीति में इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े विकास का भी प्रस्ताव है, जिसमें ये शामिल हैं:

  • 5 AI इनोवेशन शहरों की स्थापना।
  • साथ ही, 2,000 GPUs के साथ एक कॉमन कंप्यूटिंग बैकबोन का निर्माण।
  • इसके अलावा, सरकारी विभागों के लिए “Compute-as-a-Service” की शुरुआत।

इससे हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग तक किफायती पहुँच सुनिश्चित होगी, जो AI के विकास के लिए बहुत ज़रूरी है।

कौशल विकास और मानव संसाधन विकास पर विशेष ज़ोर

  • AI के दौर के लिए राज्य के कार्यबल को तैयार करने के उद्देश्य से, महाराष्ट्र 2 लाख युवाओं और पेशेवरों को प्रशिक्षित करने की योजना बना रहा है।
  • इसके साथ ही, यह ‘महाराष्ट्र सेंटर फॉर एडवांस्ड AI ट्रेनिंग’ (MCAT) की स्थापना भी करेगा और उद्योग-अकादमिक साझेदारी को बढ़ावा देगा।
  • इस पहल का उद्देश्य कौशल की कमी को दूर करना और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल का निर्माण करना भी है।

स्टार्टअप्स, MSMEs और इनोवेशन को बढ़ावा

यह पॉलिसी AI इनोवेशन को सपोर्ट करने के लिए मज़बूत इंसेंटिव भी पेश करती है।

  • कुल ₹500 करोड़ का AI स्टार्टअप वेंचर फंड (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) दिया जाएगा।
  • साथ ही, 5,000 MSMEs द्वारा AI अपनाने के लिए 20% की सब्सिडी भी दी जाएगी।
  • पॉलिसी सपोर्ट के लिए 12 AI इनक्यूबेटर्स स्थापित किए जाएंगे।
  • इसके तहत स्टार्टअप्स को ₹1 करोड़ तक और महिलाओं के नेतृत्व वाले वेंचर्स को ₹1.25 करोड़ तक का ग्रांट भी दिया जाएगा।

इसके अलावा, ‘Maha AI Tools Hub’ AI को अपनाने और उसके विकास के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराएगा।

निवेश आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन

AI के क्षेत्र में निवेश के लिए राज्य को एक आकर्षक गंतव्य बनाने हेतु, राज्य सरकार निम्नलिखित कदम उठाएगी:

  • 20% तक की पूंजीगत सब्सिडी प्रदान करेगी।
  • स्टाम्प शुल्क में छूट या 100% की पूर्ण माफी देगी।
  • इसके साथ ही, बिजली दरों में सब्सिडी (10 वर्षों तक ₹2 प्रति यूनिट) भी प्रदान करेगी।
  • पेटेंट, प्रमाणन और वैश्विक प्रदर्शनियों पर होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति (reimbursement) करेगी।

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: हर आरोपी को त्वरित सुनवाई का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने 29 अप्रैल 2026 को एक केस की सुनवाई के दौरान मौलिक अधिकारों का हवाला देते हुए आरोपी को बेल दिया। कोर्ट ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि, किसी आरोपी के जल्द सुनवाई के अधिकार को, उस पर लगे आरोपों की गंभीरता के कारण छीना नहीं जा सकता है। सुनवाई में अगर देरी होता है तो वह जमानत का हकदार होगा, यह उसके मौलिक अधिकारों का हिस्सा है।

किस बेंच ने सुनवाई फैसला

बता दें, जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने सुनवाई के दौरान हैरानी जताई। दरअसल, उत्तर प्रदेश (UP) में हत्या के एक मामले में एक विचाराधीन कैदी पिछले नौ सालों से जेल में बंद है। कोर्ट ने इस बात की जानकारी होते ही उसे पहली ही सुनवाई में जमानत दे दी और राज्य सरकार की राय भी नहीं मांगी, जो कि किसी मामले का फैसला करने का सामान्य तरीका नहीं है।

आदेश पर आपत्ति जताई

बेंच ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश पर भी आपत्ति जताई, जिसमें आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। हाई कोर्ट (HC) ने जमानत न देने के आधार के तौर पर सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असली मतलब समझने में नाकाम रहा और इस पर निराशा जताई।

कोर्ट के फैसले का असली उद्देश्य

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आगे कहा कि ऐसा लगता है कि हाई कोर्ट इस कोर्ट के फैसले का असली उद्देश्य और आधार समझने में नाकाम रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट को बस इस बात पर गौर करना चाहिए था कि, याचिकाकर्ता पिछले नौ सालों से एक विचाराधीन कैदी के तौर पर जेल में बंद है। संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मिले जल्द सुनवाई के अधिकार को ध्यान में रखते हुए, याचिकाकर्ता की जमानत याचिका पर विचार करने के लिए हाई कोर्ट को और क्या चाहिए था?

 

 

अब नहीं खोएंगे PF के पैसे, EPFO का नया प्लेटफॉर्म करेगा मदद

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ‘E-PRAAPTI’ नाम से एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च करने जा रहा है। मनसुख मंडाविया ने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि इस पहल का मकसद यूज़र्स को यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के बिना भी, निष्क्रिय या बिना दावे वाले प्रॉविडेंट फंड खातों को ट्रैक करने और उन्हें फिर से चालू करने में मदद करना है। यह कदम डिजिटल शासन, पारदर्शिता और यूज़र्स के सशक्तिकरण की दिशा में सरकार के प्रयासों को दर्शाता है।

E-PRAAPTI पोर्टल क्या है?

E-PRAAPTI का पूरा नाम ‘EPF Aadhaar-Based Access Portal to Tracking the Inoperative Accounts’ है। यह एक नया डिजिटल सिस्टम है, जिसे लोगों को उनके पुराने या निष्क्रिय प्रोविडेंट फंड खातों को मैनेज करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

यह प्लेटफ़ॉर्म आधार-आधारित प्रमाणीकरण का उपयोग करेगा और उपयोगकर्ताओं को अपने नियोक्ताओं पर निर्भर हुए बिना, स्वतंत्र रूप से अपने खातों तक पहुँचने की सुविधा देगा।

यह विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए फायदेमंद होगा जिन्होंने कई बार अपनी नौकरियाँ बदली हैं या जो अपने EPF विवरणों का ट्रैक खो चुके हैं।

शुरुआत में, यह पोर्टल ‘सदस्य ID-आधारित प्रणाली’ का उपयोग करके कार्य करेगा और उपयोगकर्ताओं को अपने खाते का विवरण आसानी से प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा।

नए EPFO ​​प्लेटफ़ॉर्म की मुख्य विशेषताएं

  • E-PRAAPTI पोर्टल ने कई ऐसे उपयोगकर्ता-अनुकूल फ़ीचर्स पेश किए हैं, जिनका उद्देश्य पहुँच और कार्यकुशलता में सुधार करना है।
  • इसके अलावा, उपयोगकर्ता आधार का उपयोग करके सुरक्षित रूप से लॉग इन कर सकते हैं, जिससे त्वरित और विश्वसनीय पहचान सत्यापन सुनिश्चित होता है।
  • यह प्लेटफ़ॉर्म लोगों को इनएक्टिव या अनक्लेम्ड EPF अकाउंट और उन अकाउंट को भी ट्रेस करने और रीएक्टिवेट करने की सुविधा देगा जो UAN से लिंक नहीं हैं।
  • साथ ही, सब्सक्राइबर अपने अकाउंट को खुद मैनेज कर सकते हैं, और ज़्यादातर मामलों में एम्प्लॉयर के दखल की ज़रूरत खत्म हो जाएगी।
  • बाद के फेज़ में यह सिस्टम उन यूज़र्स को सपोर्ट करेगा जिन्हें अपनी मेंबर ID याद नहीं है और इसे और भी ज़्यादा इनक्लूसिव बना देगा।

EPFO में डिजिटल बदलाव को बढ़ावा

E-PRAAPTI की शुरुआत, EPFO ​​की अपनी सेवाओं को आधुनिक बनाने और कागज़ी काम को कम करने की बड़ी कोशिश का एक हिस्सा है।

संगठन ने इस दिशा में पहले ही काफी प्रगति कर ली है, जिसके तहत:

  • वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 83.1 मिलियन दावों का निपटारा किया गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 60.1 मिलियन दावों से ज़्यादा है।
  • इसके अलावा, अब ज़्यादातर दावों की प्रोसेसिंग डिजिटल तरीके से की जाती है।
  • चेक अपलोड करने की ज़रूरत खत्म करने जैसी प्रक्रियाओं को आसान बनाया गया है।
  • साथ ही, बैंक खातों को लिंक करने और उनका सत्यापन करने की प्रक्रिया भी तेज़ हो गई है।

इन बदलावों से यह सिस्टम ज़्यादा कुशल और उपयोगकर्ता के लिए ज़्यादा सुविधाजनक बन गया है।

दावों का तेज़ी से निपटारा और ऑटोमेशन

EPFO सेवाओं में एक अहम सुधार, दावों की ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग में बढ़ोतरी है।

  • वित्त वर्ष 2025–26 में, कुल 55.1 मिलियन एडवांस दावों को प्रोसेस किया गया।
  • साथ ही, इनमें से 71.11% दावों का निपटारा तीन दिनों के भीतर कर दिया गया।
  • कुल मिलाकर, 98.70% दावों को महज़ 20 दिनों के भीतर सुलझा लिया गया।

आपदा पीड़ितों को राहत: RBI ने लागू किए नए लोन पुनर्गठन नियम

भारतीय रिज़र्व बैंक ने आपदा-प्रभावित क्षेत्रों के लिए लोन रीस्ट्रक्चरिंग के लिए संशोधित दिशानिर्देश पेश किए हैं, जिससे बैंकों और NBFCs को ज़्यादा लचीलापन मिलेगा। यह नया नियम 1 जुलाई, 2026 से लागू होगा। इस नए फ्रेमवर्क के तहत, लोन देने वाली संस्थाएँ (lenders) उधार लेने वालों के अनुरोध का इंतज़ार किए बिना ही सक्रिय रूप से लोन रीस्ट्रक्चर कर सकेंगी; साथ ही, इसमें 5% प्रोविज़निंग की अनिवार्यता भी रखी गई है। इस कदम का उद्देश्य प्रभावित उधारकर्ताओं को तेज़ी से वित्तीय राहत पहुँचाना है, और साथ ही बैंकिंग प्रणाली में वित्तीय स्थिरता बनाए रखना भी है।

RBI का अहम सुधार

नए नियमों में अहम बदलाव यह है कि अब लोन देने वाली संस्थाएँ (Lenders) उन इलाकों में, जो प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हैं, अपनी मर्ज़ी से लोन रीस्ट्रक्चरिंग की प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं।

इससे ये बातें सुनिश्चित होती हैं:

  • प्रभावित उधार लेने वालों को तुरंत आर्थिक राहत।
  • साथ ही, मदद पाने में होने वाली देरी में कमी।
  • और संकट के समय में बेहतर और तेज़ प्रतिक्रिया।

हालाँकि, उधार लेने वालों के पास अभी भी नियंत्रण रहेगा; उन्हें आपदा की घोषणा की तारीख से 135 दिनों की ‘ऑप्ट-आउट’ (प्रक्रिया से बाहर निकलने की) विंडो मिलेगी।

1 जुलाई, 2026 से क्या बदलाव होंगे?

  • ये बदले हुए नियम आगे से लागू होंगे, इसका मतलब है कि,
  • नए रीस्ट्रक्चरिंग केस अपडेटेड नियमों को फॉलो करेंगे।
  • साथ ही, मौजूदा रीस्ट्रक्चर्ड लोन पुराने नियमों के तहत जारी रहेंगे, जब तक कि उन्हें फिर से बदला न जाए।
  • यह फ्रेमवर्क प्रिंसिपल पर आधारित है और लेंडर्स को स्थिति के आधार पर सॉल्यूशन डिजाइन करने की फ्लेक्सिबिलिटी देता है।

5% प्रोविज़निंग नियम: राहत और जोखिम के बीच संतुलन

  • इस पॉलिसी की एक मुख्य विशेषता 5% की अनिवार्य प्रोविज़निंग है, जिसके तहत बैंकों और NBFCs को बकाया लोन की वैल्यू का 5% हिस्सा अलग रखना ज़रूरी होता है।
  • इसके अलावा, यह मौजूदा विवेकपूर्ण प्रावधानों के अतिरिक्त है।
  • RBI ने इसे घटाकर 2% करने के अनुरोधों को भी खारिज कर दिया है और कहा है कि यह अनिश्चित रिकवरी स्थितियों के लिए जोखिम कवरेज सुनिश्चित करेगा।
  • यह ऐसे लोन्स को उच्च-जोखिम वाले पुनर्गठित एसेट्स के रूप में मानने से भी बचाता है।

पात्रता मानदंड: केवल ‘मानक’ खाते ही मान्य हैं

  • RBI ने पात्रता की कड़ी शर्तों को भी बरकरार रखा है।
  • केवल मानक खाते ही पात्र हैं।
  • आपदा के समय, ऋण 30 दिनों से अधिक समय से बकाया नहीं होने चाहिए।

इसके अलावा, पात्रता की अवधि को बढ़ाकर 89 दिनों तक करने के अनुरोधों को भी अस्वीकार कर दिया गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह राहत केवल वास्तविक रूप से आपदा-प्रभावित उधारकर्ताओं तक ही पहुँचे।

लागू करने के लिए सख्त समय-सीमाएँ

  • समय पर सहायता सुनिश्चित करने के लिए RBI ने स्पष्ट समय-सीमाएँ तय की हैं।
  • संकल्प प्रक्रिया आपदा की घोषणा के 45 दिनों के भीतर शुरू हो जानी चाहिए।
  • और इसे लागू करने का काम 90 दिनों के भीतर पूरा हो जाना चाहिए।
  • इससे देरी से बचा जा सकेगा और प्रभावित क्षेत्रों की त्वरित वित्तीय रिकवरी सुनिश्चित होगी।

समुद्री साझेदारी मजबूत: भारत और श्रीलंका ने किया DIVEX 2026 अभ्यास

भारत और श्रीलंका ने 21 से 28 अप्रैल तक कोलंबो में द्विपक्षीय डाइविंग अभ्यास ‘IN–SLN DIVEX 2026’ का चौथा संस्करण सफलतापूर्वक आयोजित किया। इस अभ्यास में भारतीय नौसेना ने हिस्सा लिया, जिसमें विशेष पोत INS ‘निरीक्षक’ और श्रीलंकाई नौसेना के गोताखोर शामिल थे। यह पहल हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के प्रति बढ़ते सहयोग, बेहतर तालमेल और साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

IN-SLN DIVEX 2026 की मुख्य बातें

इस अभ्यास का मुख्य ज़ोर पानी के अंदर होने वाले आधुनिक ऑपरेशन्स पर था, जो दोनों नौसेनाओं की तकनीकी क्षमताओं और आपसी तालमेल को दिखाता है।

इसका सबसे अहम पहलू 55 मीटर से ज़्यादा की गहराई में गोताखोरी के ऑपरेशन्स को सफलतापूर्वक अंजाम देना था, जिसने दोनों नौसेनाओं के उच्च स्तर के कौशल और तैयारी को साबित किया।

गोताखोरों ने ‘मिक्स्ड गैस डाइविंग’ का अभ्यास भी किया, जो पानी के अंदर होने वाले जटिल मिशनों के लिए बेहद ज़रूरी है।

इस अभ्यास में SS Worcester और SS Perseus जैसे ऐतिहासिक विश्व युद्ध-कालीन जहाज़ों के मलबे के पास भी ऑपरेशन्स किए गए, जिससे इन अभ्यासों को तकनीकी और ऐतिहासिक, दोनों ही नज़रिए से और भी ज़्यादा अहमियत मिली।

समुद्री सुरक्षा और इंटरऑपरेबिलिटी को मज़बूत करना

IN-SLN DIVEX को इस देश की नौसेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी (आपसी तालमेल) को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, और यह उन्हें संयुक्त मिशनों के दौरान बिना किसी रुकावट के काम करने में सक्षम बनाता है।

इसके अलावा, यह हिंद महासागर क्षेत्र में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो एक प्रमुख वैश्विक व्यापार मार्ग और रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र है।

यह अभ्यास संयुक्त परिचालन तत्परता, आपातकालीन स्थितियों में समन्वय और समुद्री क्षेत्र की जागरूकता के क्षेत्रों को मज़बूत करेगा।

इस तरह का सहयोग प्राकृतिक आपदाओं, समुद्री दुर्घटनाओं और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर तैयारी सुनिश्चित करेगा।

डिफेंस डिप्लोमेसी और लीडरशिप एंगेजमेंट

इस एक्सरसाइज ने दोनों देशों के बीच मजबूत डिफेंस संबंधों को भी हाईलाइट किया है।

रियर एडमिरल एसजे कुमारा ने INS निरीक्षक का दौरा किया और श्रीलंकाई डाइवर्स को ट्रेनिंग देने में भारत के योगदान की तारीफ की।

एक्सपर्टीज़ का एक्सचेंज मिलिट्री डिप्लोमेसी के लेवल पर भरोसे को दिखाता है।

सैन्य अभ्यासों से परे: विश्वास और सौहार्द का निर्माण

यह अभ्यास केवल ऑपरेशनल गतिविधियों तक ही सीमित नहीं था। दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी संबंधों को मज़बूत करने के लिए कई पहलें भी आयोजित की गईं।

इसके अलावा, संयुक्त गतिविधियों में गैल फेस पर समुद्र तट की सफाई का अभियान, मैत्रीपूर्ण खेल आयोजन और योग सत्र भी शामिल थे।

इन गतिविधियों ने आपसी सम्मान को बढ़ावा दिया है और सांस्कृतिक संबंधों को भी मज़बूत किया है, जो दीर्घकालिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण हैं।

मानवीय सहायता और क्षेत्रीय पहुँच

भारत ने ‘आरोग्य मैत्री’ पहल के तहत ‘BHISM क्यूब्स’ सौंपकर मानवीय सहायता भी प्रदान की है।

ये पोर्टेबल मेडिकल यूनिट्स आपदा प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य सेवा सहायता को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

यह कदम एक ज़िम्मेदार क्षेत्रीय भागीदार के रूप में भारत की भूमिका को उजागर करता है, जो न केवल सुरक्षा में, बल्कि मानवीय प्रयासों में भी योगदान दे रहा है।

 

पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0 रिपोर्ट जारी, 3635 पंचायतें अग्रणी बनीं

पंचायती राज मंत्रालय ने राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (24 अप्रैल) के अवसर पर ‘पंचायत उन्नति सूचकांक’ (PAI) 2.0 रिपोर्ट जारी की थी। यह रिपोर्ट ग्रामीण विकास के क्षेत्र में हुई ज़बरदस्त प्रगति को दर्शाती है, जिसमें 3,635 ग्राम पंचायतें ‘अग्रणी’ (Front Runners) के रूप में उभरकर सामने आई हैं। पूरे देश से रिकॉर्ड 97.3% भागीदारी के साथ, ‘इंडिया PAI 2.0’ एक व्यापक ‘प्रदर्शन रिपोर्ट कार्ड’ के रूप में कार्य करता है; यह आजीविका, स्वास्थ्य, सुशासन और सामाजिक विकास जैसे कई प्रमुख क्षेत्रों में ज़मीनी स्तर पर हुई प्रगति को प्रदर्शित करता है।

PAI 2.0 रिपोर्ट: मुख्य बातें

पंचायत उन्नति सूचकांक 2.0 (PAI 2.0) पूरे भारत में ग्रामीण शासन के प्रदर्शन का विस्तृत मूल्यांकन प्रस्तुत करता है। इसमें भारत के 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 2.59 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है, जो इसे देश के सबसे बड़े डेटा-आधारित शासन अभ्यासों में से एक बनाता है।

कुल भाग लेने वाली पंचायतों में से,

  • कुल 3,635 ग्राम पंचायतों को ‘फ्रंट रनर्स’ (A ग्रेड) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • लगभग 1,18,824 पंचायतें (45.72%) ‘परफ़ॉर्मर’ श्रेणी (B ग्रेड) के अंतर्गत आती हैं।
  • शेष पंचायतों को ‘एस्पिरेंट’ और ‘बिगिनर’ श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।

यह वर्गीकरण, बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों और उन पंचायतों की पहचान करने में मदद करेगा जिन्हें विशेष सहायता की आवश्यकता है।

रिकॉर्ड भागीदारी और बेहतर ढांचा

PAI 2.0 ने 97.30% की प्रभावशाली भागीदारी दर हासिल की है, जो PAI 1.0 की 80.79% दर से एक बड़ा सुधार है। कुल 2,59,867 ग्राम पंचायतों ने सत्यापित डेटा जमा किया।

इस अपडेटेड वर्शन में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं:

  • एकल एकीकृत डेटा एंट्री सिस्टम।
  • पारदर्शिता के लिए ग्राम सभा द्वारा अनिवार्य सत्यापन।
  • बेहतर निगरानी के लिए रियल-टाइम डैशबोर्ड।
  • और राष्ट्रीय पोर्टलों से डेटा का एकीकरण।
  • साथ ही, स्थानीय भाषाओं के लिए भी सहायता उपलब्ध है।

इन बदलावों ने इस सिस्टम को और अधिक कुशल, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बना दिया है।

बेहतरीन प्रदर्शन वाले क्षेत्र: आजीविका और स्वास्थ्य

यह रिपोर्ट ‘सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण’ (LSDGs) के तहत प्रमुख विकास विषयों में हुए मज़बूत प्रदर्शन को उजागर करती है।

गरीबी-मुक्त और बेहतर आजीविका

इस विषय के अंतर्गत कुल 3,313 ग्राम पंचायतों ने ‘A+’ ग्रेड हासिल किया है, जो इन क्षेत्रों में हुई महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है:

  • गरीबी उन्मूलन
  • रोज़गार सृजन
  • ग्राम स्तर पर आर्थिक विकास

स्वस्थ पंचायतें

इस श्रेणी में कुल मिलाकर लगभग 1,015 पंचायतों ने ‘A+’ ग्रेड हासिल किया, जो इन क्षेत्रों में हुए सुधारों का संकेत है:

  • निवारक स्वास्थ्य सेवाएँ
  • पोषण जागरूकता
  • स्वच्छता और साफ़-सफ़ाई
  • सामुदायिक भागीदारी

पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) क्या है?

पंचायत उन्नति सूचकांक भारत का पहला राष्ट्रव्यापी, डेटा-आधारित ढांचा है, जिसका उद्देश्य देश की ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करना है।

यह पंचायतों का मूल्यांकन निम्नलिखित आधारों पर करता है:

  • 150 संकेतक
  • 230 डेटा बिंदु
  • 9 प्रमुख विषय, जिनमें गरीबी, स्वास्थ्य, जल, बुनियादी ढांचा, शासन और महिला सशक्तिकरण शामिल हैं।

PAI 1.0 की तुलना में—जिसमें 500 से अधिक संकेतक थे—PAI 2.0 को बेहतर उपयोगिता और अधिक सटीक फोकस के लिए सरल बनाया गया है।

प्रदर्शन श्रेणियों की व्याख्या

समग्र अंकों के आधार पर, इन पंचायतों को पाँच श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।

  • अचीवर (A+): 90 और उससे अधिक अंक
  • फ्रंट रनर (A): 75–90 अंक
  • परफ़ॉर्मर (B): 60–75 अंक
  • एस्पिरेंट (C): 40–60 अंक
  • बिगिनर (D): 40 से कम अंक

यह ग्रेडिंग प्रणाली स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती है और सरकारों को उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करती है जिनमें सुधार की आवश्यकता है।

राज्य-वार जानकारी और रुझान

यह रिपोर्ट उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में व्यापक भागीदारी को उजागर करती है, जिन्होंने बड़ी संख्या में पंचायतों का योगदान दिया है।

केरल और त्रिपुरा जैसे राज्यों ने उच्च श्रेणियों में मज़बूत प्रदर्शन दिखाया, जो प्रभावी स्थानीय शासन मॉडलों का संकेत है।

हालाँकि, कुछ क्षेत्रों में अभी भी ‘आकांक्षी’ (Aspirant) और ‘शुरुआती’ (Beginner) श्रेणियों में पंचायतों की संख्या अधिक है, और यह लक्षित हस्तक्षेपों की आवश्यकता को दर्शाता है।

भारत ने दिखाई सैन्य ताकत, एंटी-शिप मिसाइल NASM-SR का सफल परीक्षण

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय नौसेना ने सफलतापूर्वक अपनी पहली ‘साल्वो लॉन्च’ (salvo launch) की है, जो कि ‘नेवल एंटी-शिप मिसाइल-शॉर्ट रेंज’ (NASM-SR) है। यह परीक्षण ओडिशा राज्य में एक नौसैनिक हेलीकॉप्टर से किया गया था, और यह भारत की स्वदेशी मिसाइल क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण उन्नयन का भी प्रतीक है।

पहला साल्वो लॉन्च: भारत के लिए एक ऐतिहासिक कदम

NASM-SR परीक्षण भारत का पहला ऐसा परीक्षण है जिसमें हवा से लॉन्च की जाने वाली एंटी-शिप मिसाइल प्रणाली का ‘साल्वो लॉन्च’ (एक साथ कई मिसाइलों का प्रक्षेपण) किया गया।

इस परीक्षण के दौरान, एक ही हेलीकॉप्टर से बहुत कम समय के अंतराल पर कुल दो मिसाइलें दागी गईं, जिसने इस प्रणाली की तीव्र प्रहार क्षमता को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया।

मिशन के सभी उद्देश्य उन्नत ट्रैकिंग प्रणालियों—जैसे कि रडार, टेलीमेट्री और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल उपकरणों—की सहायता से सफलतापूर्वक हासिल किए गए; ये प्रणालियाँ चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज में इस परीक्षण की निगरानी कर रही हैं।

इसके अलावा, इस परीक्षण की मुख्य विशेषता मिसाइल की ‘वॉटरलाइन हिट’ करने की क्षमता और युद्ध की स्थितियों में दुश्मन के जहाजों को अधिकतम नुकसान पहुँचाना सुनिश्चित करना था।

NASM-SR के पीछे की उन्नत तकनीक

NASM-SR मिसाइल अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीकों से लैस है, जो इसे भारत के नौसैनिक शस्त्रागार में एक शक्तिशाली और महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती है।

यह सॉलिड प्रोपल्शन बूस्टर का उपयोग करता है, जिसे लंबे समय तक जलने वाले सस्टेनर के साथ जोड़ा गया है; यह कुशल उड़ान प्रदर्शन और इसकी विस्तारित एंगेजमेंट क्षमता को संभव बनाता है।

यह मिसाइल कई आधुनिक प्रणालियों से लैस है, जैसे:

  • फाइबर-ऑप्टिक जायरोस्कोप-आधारित नेविगेशन प्रणाली।
  • लक्ष्य का पता लगाने के लिए उच्च-सटीकता वाला सीकर।
  • साथ ही, उन्नत नियंत्रण और मार्गदर्शन एल्गोरिदम।
  • उच्च-बैंडविड्थ वाला दो-तरफ़ा डेटा लिंक।
  • सटीक लक्ष्य-भेदन के लिए रेडियो अल्टीमीटर।

ये प्रौद्योगिकियाँ जटिल समुद्री वातावरण में भी सटीकता, विश्वसनीयता और अनुकूलनशीलता सुनिश्चित करती हैं।

स्वदेशी विकास: एक सहयोगात्मक प्रयास

इस मिसाइल को ‘रिसर्च सेंटर इमारत’ ने DRDO की कई प्रयोगशालाओं के सहयोग से विकसित किया है, जिनमें शामिल हैं:

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला
  • उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला
  • टर्मिनल बैलिस्टिक्स अनुसंधान प्रयोगशाला
  • एकीकृत परीक्षण रेंज

इस मिसाइल का उत्पादन ‘विकास-सह-उत्पादन भागीदारों’ (DcPP) और कई भारतीय उद्योगों—जिनमें स्टार्ट-अप भी शामिल हैं—के सहयोग से किया जा रहा है; यह रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ पहल की सफलता को दर्शाता है।

एंटी-शिप मिसाइल क्या है?

एंटी-शिप मिसाइल को समुद्र में दुश्मन के जहाज़ों का पता लगाने, उन पर नज़र रखने और उन्हें नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

आधुनिक नौसैनिक युद्ध में ये मिसाइलें बहुत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये सेनाओं को लंबी दूरी से भी पूरी सटीकता के साथ लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम बनाती हैं।

इन्हें जहाज़ों, पनडुब्बियों, विमानों या हेलीकॉप्टरों से भी लॉन्च किया जा सकता है, जो इन्हें बहुमुखी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हथियार बनाते हैं।

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