दक्षिण अफ्रीका से कैपुचिन बंदरों का बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान में आयात

बेंगलुरु के पास स्थित बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान (Bannerghatta Biological Park) ने संरक्षण-उन्मुख चिड़ियाघर प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दक्षिण अफ्रीका से आठ ब्लैक-कैप्ड कैपुचिन बंदरों का आयात किया है। यह आयात एक औपचारिक पशु विनिमय कार्यक्रम के तहत किया गया, जो वैज्ञानिक वन्यजीव प्रबंधन, आनुवंशिक विविधता बनाए रखने और वैश्विक संरक्षण मानकों के पालन पर भारत के बढ़ते जोर को दर्शाता है।

आयातित प्रजाति के बारे में

आयात किए गए जानवर ब्लैक-कैप्ड कैपुचिन बंदर हैं, जिनका वैज्ञानिक नाम Sapajus apella है। ये प्राइमेट्स मूल रूप से दक्षिण अमेरिका के निवासी हैं और अपनी उच्च बुद्धिमत्ता, सामाजिक व्यवहार तथा अनुकूलन क्षमता के लिए जाने जाते हैं। कैपुचिन बंदरों का अध्ययन अक्सर उनकी समस्या-समाधान क्षमता और औजारों के उपयोग के लिए किया जाता है। इस तरह की प्रजातियों की स्वस्थ बंदी आबादी बनाए रखने के लिए आनुवंशिक विविधता और समृद्ध आवास आवश्यक होते हैं, जिसके लिए नियंत्रित अंतरराष्ट्रीय विनिमय कार्यक्रम महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं।

आयात का विवरण

कुल आठ कैपुचिन बंदर—चार नर और चार मादा—दक्षिण अफ्रीका से आयात किए गए। ये जानवर केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, बेंगलुरु पर पहुंचे और वहां से सीधे बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान के भीतर निर्धारित क्वारंटीन सुविधा में ले जाए गए। निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार, क्वारंटीन अवधि के दौरान इन बंदरों का अनिवार्य स्वास्थ्य परीक्षण और निगरानी की जाएगी। पशु-चिकित्सकीय स्वीकृति मिलने के बाद ही इन्हें चिड़ियाघर के बाड़ों में स्थानांतरित किया जाएगा।

नियामक और कानूनी अनुपालन

यह आयात भारत में वन्यजीवों की आवाजाही से संबंधित वैधानिक और नियामक ढांचे के सख्त अनुपालन के साथ किया गया। इसके लिए कई प्राधिकरणों से पूर्व अनुमोदन प्राप्त किए गए। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA), नई दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय पशु स्थानांतरण की अनिवार्य अनुमति ली गई। इसके अलावा, राज्य के मुख्य वन्यजीव संरक्षक, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), पशुपालन एवं डेयरी विभाग तथा वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी प्राप्त किए गए।

पृष्ठभूमि

आधुनिक चिड़ियाघर अब केवल पशुओं के प्रदर्शन तक सीमित नहीं हैं। वे एक्स-सीटू संरक्षण, बंदी प्रजनन, शिक्षा और अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समय के साथ बंदी आबादी में सीमित आनुवंशिक विविधता के कारण इनब्रीडिंग और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए दुनिया भर के चिड़ियाघर पशु विनिमय कार्यक्रमों में भाग लेते हैं, जिससे नई आनुवंशिक रेखाओं को शामिल किया जा सके।

मुख्य बिंदु 

  • बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान ने दक्षिण अफ्रीका से आठ कैपुचिन बंदरों का आयात किया।
  • आयातित प्रजाति: ब्लैक-कैप्ड कैपुचिन (Sapajus apella)।
  • यह आयात पशु विनिमय कार्यक्रम के तहत किया गया।
  • अंतरराष्ट्रीय पशु स्थानांतरण के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की अनुमति अनिवार्य है।
  • भारत में आयात से पहले पशु क्वारंटीन सेवाओं की स्वीकृति आवश्यक होती है।

ओडिशा बनेगा एआई हब, 19-20 दिसंबर को क्षेत्रीय एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस

ओडिशा सरकार 19–20 दिसंबर को रीजनल AI इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस की मेजबानी करेगी। यह आयोजन शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग के क्षेत्र में ओडिशा को एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम है। 17 दिसंबर को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी विभाग द्वारा आयोजित कर्टन-रेज़र कार्यक्रम में राज्य की AI विज़न, नीति रोडमैप और वास्तविक उपयोग वाले AI अनुप्रयोगों की बढ़ती श्रृंखला को रेखांकित किया गया।

ओडिशा की AI विज़न और नीति दिशा

  • इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री मुकेश महालिंग ने कहा कि ओडिशा तकनीक-आधारित विकास के लिए भविष्य-तैयार दृष्टिकोण अपना रहा है।
  • ओडिशा AI नीति 2025, साथ ही फिनटेक, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी सहायक नीतियाँ, जिम्मेदार और निवेशक-अनुकूल AI अपनाने का वातावरण बना रही हैं।
  • राज्य का लक्ष्य मजबूत शासन, उन्नत डिजिटल क्षमताओं और दीर्घकालिक नीति स्थिरता के साथ सम्पूर्ण AI नवाचार इकोसिस्टम विकसित करना है।

राष्ट्रीय AI रोडमैप का हिस्सा

  • यह सम्मेलन इंडिया AI इम्पैक्ट समिट (फरवरी 2026) की तैयारी के व्यापक रोडमैप का हिस्सा है।
  • देश के आठ राज्यों—मध्य प्रदेश, केरल, गुजरात, राजस्थान, मेघालय, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा—में रीजनल AI इम्पैक्ट समिट्स आयोजित किए जाएंगे।
  • मंत्री ने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा को देश का एक प्रमुख AI हब बनाने की परिकल्पना की है।

सम्मेलन की थीम

  • रीजनल AI इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस का मार्गदर्शक सिद्धांत “तीन पी – प्लैनेट, पीपल और प्रोग्रेस” है।
  • इसका फोकस स्थिरता, समावेशी विकास और शासन में क्षेत्र-विशेष AI अनुप्रयोगों पर रहेगा।

मुख्य बिंदु

  • ओडिशा 19–20 दिसंबर को रीजनल AI इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस की मेजबानी करेगा।
  • आयोजन इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 से जुड़ा हुआ है।
  • मुख्य थीम: प्लैनेट, पीपल, प्रोग्रेस।
  • स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा प्रबंधन और सामाजिक क्षेत्रों में AI के उपयोग की योजना।
  • ओडिया भाषा को AI के माध्यम से बढ़ावा देने हेतु भाषा धाम की शुरुआत।

शाश्वत शर्मा बने Airtel इंडिया के MD और CEO

टेलीकॉम क्षेत्र की प्रमुख कंपनी भारती एयरटेल ने शीर्ष प्रबंधन स्तर पर एक अहम नेतृत्व परिवर्तन की घोषणा की है। कंपनी के बोर्ड ने 18 दिसंबर 2025 को मंज़ूरी देते हुए शाश्वत शर्मा को 1 जनवरी 2026 से एयरटेल इंडिया का प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने का निर्णय लिया है। यह कदम एयरटेल की उत्तराधिकार योजना और वरिष्ठ प्रबंधन के रणनीतिक पुनर्गठन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शश्वत शर्मा की नियुक्ति

वर्तमान में CEO-डिज़ाइनेट के रूप में कार्यरत शश्वत शर्मा 1 जनवरी 2026 से पाँच वर्षों के कार्यकाल के लिए MD एवं CEO का पद संभालेंगे। उन्हें कंपनी का की मैनेजेरियल पर्सन (KMP) भी नामित किया जाएगा। उनकी नियुक्ति एयरटेल की नेतृत्व निरंतरता और आंतरिक प्रतिभा विकास पर केंद्रित रणनीति को दर्शाती है। MD एवं CEO के रूप में वे भारत में एयरटेल के संचालन, रणनीतिक क्रियान्वयन और परिचालन प्रदर्शन की ज़िम्मेदारी संभालेंगे।

गोपाल विट्टल की भूमिका में बदलाव

नेतृत्व परिवर्तन के तहत वर्तमान वाइस चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर गोपाल विट्टल अब एक्ज़ीक्यूटिव वाइस चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे। वे जनवरी 2026 से अगले पाँच वर्षों तक (शेयरधारकों की मंज़ूरी के अधीन) पूर्णकालिक निदेशक के रूप में बने रहेंगे। इससे वे दीर्घकालिक रणनीति, कॉरपोरेट गवर्नेंस और नेतृत्व निगरानी पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।

वित्तीय नेतृत्व में बदलाव

बोर्ड ने वित्तीय नेतृत्व में भी अहम बदलावों को मंज़ूरी दी है। वर्तमान मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) सोमन रे को ग्रुप चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर नियुक्त किया गया है, जिससे समूह स्तर पर वित्तीय निगरानी मज़बूत होगी। वहीं, अखिल गर्ग को एयरटेल इंडिया का नया CFO नियुक्त किया गया है।

मुख्य बिंदु 

  • शाश्वत शर्मा 1 जनवरी 2026 से एयरटेल इंडिया के MD एवं CEO नियुक्त
  • नियुक्ति पाँच वर्ष के कार्यकाल के लिए
  • गोपाल विट्टल बनेंगे एक्ज़ीक्यूटिव वाइस चेयरमैन
  • सोमन रे बने ग्रुप CFO
  • अखिल गर्ग बने एयरटेल इंडिया के CFO

ब्राज़ील ने ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत को सौंप दी

ब्राज़ील ने दिसंबर 2025 में औपचारिक रूप से BRICS की अध्यक्षता भारत को सौंपी, जिससे 2026 में BRICS का नेतृत्व भारत संभालेगा। यह हस्तांतरण 12 दिसंबर 2025 को चौथी BRICS शेरपा बैठक के समापन सत्र के दौरान किया गया।

BRICS क्या है

BRICS उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। इसका उद्देश्य ग्लोबल साउथ देशों के बीच विकास, व्यापार, वित्त और वैश्विक शासन सुधार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है।
BRICS की अध्यक्षता हर वर्ष घूर्णन (रोटेशन) के आधार पर बदलती है।

अध्यक्षता हस्तांतरण समारोह

  • ब्राज़ील के शेरपा राजदूत मॉरिसियो लिरियो ने भारत के शेरपा राजदूत सुधाकर दलैला को प्रतीकात्मक BRICS गदा (Gavel) सौंपी।
  • यह हस्तांतरण चौथी शेरपा बैठक के अंत में हुआ।
  • गदा BRICS की आधिकारिक नेतृत्व जिम्मेदारी के हस्तांतरण का प्रतीक है।
  • हालांकि समारोह दिसंबर के मध्य में हुआ, औपचारिक रूप से ब्राज़ील 31 दिसंबर 2025 तक अध्यक्ष रहेगा।

ब्राज़ील की BRICS अध्यक्षता: प्रमुख प्राथमिकताएँ

ब्राज़ील ने अपनी अध्यक्षता के दौरान छह मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया—

  • वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग
  • जलवायु परिवर्तन
  • व्यापार, निवेश और वित्त
  • शांति एवं सुरक्षा के लिए बहुपक्षीय ढांचा
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का शासन
  • BRICS का संस्थागत विकास

इसके साथ ही, ब्राज़ील ने समावेशी वैश्विक शासन और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार पर चर्चाओं को आगे बढ़ाया।

भारत के नेतृत्व में प्रमुख उद्देश्य (2026)

  • जलवायु आपदा जोखिम न्यूनीकरण प्रणालियों को मजबूत करना
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता का न्यायसंगत और जिम्मेदार उपयोग बढ़ावा देना
  • वैज्ञानिक अनुसंधान और ज्ञान साझा करना
  • वैश्विक शासन संस्थानों में सुधार, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद
  • सर्वसम्मति-निर्माण और समावेशी विकास पर विशेष जोर

अमेज़न गदा (Amazon Gavel): प्रतीकात्मक महत्व

  • यह गदा अमेज़न वर्षावन से प्राप्त पुन: प्रयुक्त लकड़ी से बनाई गई है।
  • इटाउबा (Itaúba) और पाउ रैन्हा (Pau Rainha) जैसे स्थानीय वृक्षों की छोड़ी गई लकड़ी का उपयोग किया गया।
  • इसे अमेज़ोनास के नोवो एइराओ समुदाय ने एक स्थिरता परियोजना के तहत हस्तनिर्मित किया।

गदा का प्रतीकात्मक अर्थ—

  • ब्राज़ील की स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता
  • जलवायु सहयोग की निरंतरता
  • BRICS देशों के बीच गहन सहयोग

मुख्य बिंदु

  • ब्राज़ील ने दिसंबर 2025 में BRICS अध्यक्षता भारत को सौंपी
  • भारत 2026 में BRICS का नेतृत्व करेगा
  • प्रमुख स्तंभ: लचीलापन, नवाचार, सहयोग, स्थिरता
  • ग्लोबल साउथ और वैश्विक शासन सुधार पर फोकस
  • अमेज़न गदा स्थिरता की प्रतिबद्धता को दर्शाती है

लोकसभा से पास हुआ ‘जी राम जी’ बिल

लोकसभा ने 18 दिसंबर 2025 को विरोध, हंगामे और मात्र आठ घंटे की बहस के बीच विकसित भारत गारंटी रोज़गार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM-G) विधेयक, 2025 पारित किया। इस विधेयक का उद्देश्य ग्रामीण रोज़गार और आजीविका योजनाओं में सुधार करना है और यह प्रभावी रूप से मनरेगा (MGNREGA) के प्रावधानों का स्थान लेता है।

पृष्ठभूमि: मनरेगा (MGNREGA) क्या है

मनरेगा एक अधिकार-आधारित ग्रामीण रोज़गार कार्यक्रम है, जो ग्रामीण परिवारों को प्रति वर्ष कम-से-कम 100 दिन का मज़दूरी रोज़गार सुनिश्चित करता है।

मनरेगा की प्रमुख विशेषताएँ:

  • मांग-आधारित रोज़गार सृजन
  • पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से विकेंद्रीकृत योजना
  • टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण (सड़कें, जल संरक्षण आदि)
  • पारदर्शिता, सामाजिक अंकेक्षण तथा महिलाओं और वंचित वर्गों की भागीदारी पर ज़ोर

नया विधेयक क्यों लाया गया

सरकार का तर्क है कि मनरेगा ने ग्रामीण संकट कम करने में मदद की, लेकिन अब इसमें पुनर्संरचना की आवश्यकता है ताकि—

  • दीर्घकालिक ग्रामीण उत्पादकता को समर्थन मिले
  • रोज़गार को अवसंरचना निर्माण से जोड़ा जाए
  • पारदर्शिता के लिए प्रौद्योगिकी का समावेश हो
  • विकसित भारत @2047 के विकास लक्ष्यों के अनुरूप हो

VB-G RAM-G विधेयक के उद्देश्य

  • ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के अवसरों का विस्तार
  • अल्पकालिक राहत से हटकर दीर्घकालिक आजीविका परिसंपत्तियों पर फोकस
  • प्रौद्योगिकी के माध्यम से बेहतर शासन
  • ग्रामीण कार्यों का राष्ट्रीय अवसंरचना योजना से एकीकरण
  • वंचित समूहों का बेहतर लक्षित कवरेज

विधेयक में प्रस्तावित प्रमुख बदलाव

1. रोज़गार गारंटी में वृद्धि

  • गारंटीकृत कार्यदिवस 100 से बढ़ाकर 125 दिन प्रति परिवार
  • रोज़गार अधिकार में 25% वृद्धि

2. कृषि अवकाश (Agricultural Pause)

  • बुवाई और कटाई के चरम मौसम में 60 दिनों का अवकाश
  • राज्यों को स्थानीय फसल चक्र के अनुसार अवकाश अधिसूचित करने का अधिकार
  • उद्देश्य: कृषि के लिए श्रम उपलब्धता सुनिश्चित करना

3. नई लागत-साझेदारी व्यवस्था

योजना को केंद्र प्रायोजित योजना (CSS) बनाया गया

वित्तपोषण पैटर्न:

  • 90:10 – पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्य/केंद्रशासित प्रदेश
  • 60:40 – अन्य राज्य
  • 100% केंद्र – बिना विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेश

4. मानक (कैप्ड) बजट आवंटन

  • मांग-आधारित बजट की जगह राज्यवार सीमित आवंटन
  • आवंटन से अधिक खर्च का भार राज्यों पर
  • खुली-अंत (ओपन-एंडेड) फंडिंग से स्पष्ट बदलाव

5. प्रौद्योगिकी-आधारित शासन

  • विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक का निर्माण
  • पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान से एकीकरण

प्रमुख विशेषताएँ:

  • बायोमेट्रिक उपस्थिति
  • AI आधारित धोखाधड़ी पहचान
  • कार्यों की GPS ट्रैकिंग
  • साप्ताहिक सार्वजनिक डेटा प्रकटीकरण

उठाई गई प्रमुख चिंताएँ

  • राज्यों पर वित्तीय बोझ: 60:40 मॉडल से गरीब राज्यों पर दबाव
  • अधिकार बनाम बजट कैप: सीमित आवंटन से अधिकार-आधारित प्रकृति कमजोर

डिजिटल पहुँच की समस्या:

  • कमजोर कनेक्टिविटी
  • उपकरण विफलता
  • फिंगरप्रिंट मिसमैच से बहिष्करण का जोखिम
  • कृषि अवकाश का जोखिम: भूमिहीन मज़दूरों की आय प्रभावित हो सकती है
  • कार्यान्वयन चुनौतियाँ: ऐतिहासिक रूप से औसत रोज़गार 45–55 दिन ही रहा है

विधेयक के सकारात्मक पहलू

  • टिकाऊ और जलवायु-सहिष्णु परिसंपत्तियों पर ज़ोर
  • राष्ट्रीय अवसंरचना योजना से बेहतर एकीकरण
  • बाज़ार, गोदाम जैसी आजीविका परिसंपत्तियों का संवर्धन
  • साप्ताहिक वेतन भुगतान
  • उल्लंघन पर ₹10,000 तक दंड
  • एकल महिलाएँ, वृद्ध, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों पर विशेष फोकस

मुख्य बिंदु 

  • VB-G RAM-G विधेयक लोकसभा में पारित
  • मनरेगा का स्थान VB-G RAM-G लेगा
  • रोज़गार गारंटी 125 दिन
  • कृषि अवकाश और बजट कैप की व्यवस्था
  • प्रौद्योगिकी-आधारित शासन पर मजबूत ज़ोर
  • दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों और तात्कालिक ग्रामीण आजीविका के बीच संतुलन

Pariksha Pe Charcha 2026: परीक्षा पे चर्चा 2026 के लिए 80 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वार्षिक संवाद कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ (PPC) के 9वें संस्करण को लेकर देश भर के छात्रों, टीचर्स और पेरेंट्स में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। ‘परीक्षा को उत्सव बनाएं, तनाव को कहें अलविदा’ के मंत्र के साथ शुरू हुए इस कार्यक्रम के लिए अब तक 80 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं, जो एक नया कीर्तिमान स्थापित करने की तरफ इशारा करता है।

फॉर्म भरने की लास्ट डेट

जानकारी के लिए बता दें कि PPC 2026 Registration के लिए अंतिम तिथि 11 जनवरी 2026 निर्धारित है। ऐसे में जो भी छात्र पीएम मोदी से मिलकर बातचीत करना चाहते हैं और प्रधानमंत्री आवास में समय व्यतीत करना चाहते हैं वे जल्द से जल्द ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर लें। स्टूडेंट्स के साथ ही पीपीसी 2026 के लिए टीचर्स और पेरेंट्स में आवेदन कर सकते हैं।

रजिस्ट्रेशन करने की स्टेप्स

  • परीक्षा पे चर्चा 2026 रजिस्ट्रेशन करने के लिए सर्वप्रथम आधिकारिक वेबसाइट innovateindia1.mygov.in पर जाना होगा।
  • वेबसाइट के होम पेज पर Participate Now पर क्लिक करना होगा।
  • अब आपकी अपनी कैटेगरी के अनुसार- Student (Self Participation), Student (Participation through Teacher login), Teacher, Parent का चुनाव कर उसके नीचे क्लिक टू पार्टिसिपेट पर क्लिक करें।
  • अपना पूरा नाम, मोबाइल नंबर/ ईमेल आईडी दर्ज करके पंजीकरण करें।
  • इसके बाद अन्य डिटेल भरकर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूर्ण कर लें।

परीक्षा पे चर्चा 2026 पंजीकरण फॉर्म लिंक

परीक्षा पे चर्चा के लिए रजिस्ट्रेशन फ्री

परीक्षा पे चर्चा के लिए रजिस्ट्रेशन फ्री में किया जा सकता है, इसके लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जा रहा है। आवेदन के लिए मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी की आवश्यकता पड़ेगी। इसके अलावा जिनके पास डिजिलॉकर की आईडी है वे इसके माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर सकते हैं।

व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए भारत-ओमान CEPA पर हस्ताक्षर

भारत और ओमान ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर कर खाड़ी क्षेत्र में भारत की आर्थिक सहभागिता को नई ऊँचाई दी है। यह समझौता प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और सुल्तान हैथम बिन तारिक की उपस्थिति में संपन्न हुआ, जो इसके रणनीतिक और राजनीतिक महत्व को दर्शाता है।

संक्षिप्त परिचय 

  • समझौते पर भारत की ओर से वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और ओमान की ओर से एच.ई. क़ैस बिन मोहम्मद अल यूसुफ ने हस्ताक्षर किए।
  • 2006 में अमेरिका के साथ FTA के बाद यह ओमान का पहला द्विपक्षीय व्यापार समझौता है।
  • पिछले छह महीनों में भारत का दूसरा FTA (यूके के बाद)।
  • भारत–ओमान द्विपक्षीय व्यापार 10 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है, जिसमें आगे बढ़ने की व्यापक संभावनाएँ हैं।

भारत–ओमान CEPA की प्रमुख विशेषताएँ

1. भारतीय वस्तुओं के लिए अभूतपूर्व बाज़ार पहुँच

  • ओमान की 98.08% टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क
  • भारत के 99.38% निर्यात मूल्य को कवर
  • 97.96% टैरिफ लाइनों पर तत्काल शुल्क समाप्ति

लाभान्वित क्षेत्र:

वस्त्र, चमड़ा, जूते, रत्न–आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, प्लास्टिक, फर्नीचर, कृषि उत्पाद, फार्मा व मेडिकल डिवाइसेज़, ऑटोमोबाइल।

इससे रोज़गार सृजन, MSME, कारीगरों और महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा।

2. भारत की टैरिफ प्रतिबद्धताएँ

  • 77.79% टैरिफ लाइनों पर उदारीकरण
  • ओमान से आयात के 94.81% मूल्य को कवर
  • संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा: बहिष्करण सूची और टैरिफ रेट कोटा (TRQ)

बहिष्कृत क्षेत्र:

डेयरी, चाय, कॉफी, रबर, तंबाकू; सोना–चाँदी बुलियन/आभूषण; जूते, खेल सामान; धातु स्क्रैप।

3. सेवाओं में ऐतिहासिक प्रतिबद्धताएँ (ओमान की पहली)

127 उप-क्षेत्रों में व्यापक सेवाएँ शामिल, जैसे—

  • आईटी/कंप्यूटर सेवाएँ, व्यवसायिक व पेशेवर सेवाएँ, ऑडियो–विज़ुअल, R&D, शिक्षा और स्वास्थ्य।
  • भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए बड़े अवसर, जहाँ वर्तमान में भारत का हिस्सा केवल 5.31% है।

4. भारतीय पेशेवरों के लिए बेहतर आवाजाही (Mode 4)

  • Intra-Corporate Transferees का कोटा 20% से बढ़ाकर 50%
  • Contractual Service Suppliers की अवधि 90 दिन से बढ़ाकर 2 वर्ष (आगे बढ़ाने का विकल्प)
  • लेखांकन, कराधान, वास्तुकला, चिकित्सा व संबद्ध क्षेत्रों में उदार प्रवेश।

5. भारतीय कंपनियों के लिए 100% FDI

  • प्रमुख सेवा क्षेत्रों में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति
  • भारतीय कंपनियों को ओमान में व्यावसायिक उपस्थिति विस्तार का अवसर।

6. ऐतिहासिक प्रावधान

  • पारंपरिक चिकित्सा (AYUSH) पर पहली बार सभी मोड्स में प्रतिबद्धता
  • मेडिकल वैल्यू ट्रैवल को बढ़ावा
  • फार्मा अनुमोदनों का त्वरित मार्ग: USFDA, EMA, UKMHRA मान्यताओं की पहचान

GMP निरीक्षण स्वीकृति

हलाल प्रमाणन और NPOP (ऑर्गेनिक) के लिए पारस्परिक मान्यता

गैर-टैरिफ बाधाओं के समाधान के प्रावधान।

रणनीतिक महत्व

  • खाड़ी क्षेत्र में भारत की आर्थिक उपस्थिति मज़बूत
  • गैर-प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के साथ उच्च-गुणवत्ता FTA रणनीति को बल
  • निर्यात, रोज़गार और आपूर्ति-श्रृंखला लचीलापन बढ़ेगा
  • ओमान को मध्य-पूर्व व अफ्रीका तक भारत की पहुँच का रणनीतिक हब
  • घरेलू संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के साथ समावेशी विकास।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 18 दिसंबर 2025 को भारत–ओमान CEPA पर हस्ताक्षर।
  • ओमान की 98.08% टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क, भारत के 99.38% निर्यात को कवर।
  • श्रम-प्रधान क्षेत्रों, MSME और महिला उद्यमों को बड़ा लाभ।
  • सेवाओं में 127 उप-क्षेत्रों में महत्वाकांक्षी प्रतिबद्धताएँ।
  • भारतीय पेशेवरों के लिए Mode 4 में बेहतर गतिशीलता।
  • ओमान में भारतीय कंपनियों के लिए 100% FDI की अनुमति।

PM मोदी को ऑर्डर ऑफ ओमान सम्मान मिला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ओमान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ ओमान’ से नवाजा गया है। इसके साथ ही उन्हें अब तक 29 देशों के सर्वोच्च विदेशी नागरिक सम्मान मिल चुके हैं। यह सम्मान न केवल प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत कूटनीति को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत और प्रभाव का भी संकेत देता है।

ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक ने प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान प्रदान किया। यह सम्मान उन्हें ओमान की दो दिवसीय राजकीय यात्रा के दौरान दिया गया। यह यात्रा उनके तीन देशों के दौरे का अंतिम चरण थी। ऑर्डर ऑफ ओमान ओमान का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1970 में सुल्तान कबूस बिन सईद ने की थी।

ऑर्डर ऑफ़ ओमान के बारे में

ऑर्डर ऑफ़ ओमान ओमान सल्तनत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह सम्मान पहले विश्व के प्रतिष्ठित नेताओं को प्रदान किया जा चुका है, जिनमें नेल्सन मंडेला, महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय, महारानी मैक्सिमा, जापान के सम्राट अकिहितो और जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला शामिल हैं। इस विशिष्ट सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शामिल होना भारत–ओमान द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती, परिपक्वता और गहराई को रेखांकित करता है।

भारत और ओमान के बीच मजबूत संबंध

यह सम्मान भारत और ओमान के बीच मजबूत और पुराने रिश्तों को सम्मान देने के लिए दिया जाता है। यह दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध, जनसंपर्क और वैश्विक शांति में योगदान के लिए दिया जाता है। इस अवसर को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि भारत और ओमान के कूटनीतिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे हो चुके हैं।

प्रधानमंत्री को अब तक 29 देशों के सर्वोच्च नागरिक सम्मान

ऑर्डर ऑफ ओमान के साथ प्रधानमंत्री मोदी को अब तक 29 देशों के सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल चुके हैं। इनमें ब्राजील, फ्रांस, रूस, अमेरिका, श्रीलंका, भूटान, मिस्र, कुवैत, यूएई, सऊदी अरब और फलस्तीन जैसे देशों के बड़े सम्मान शामिल हैं। यह उपलब्धि किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री के लिए दुर्लभ मानी जाती है। प्रधानमंत्री मोदी को मिले ये सम्मान भारत की मजबूत विदेश नीति और बढ़ती वैश्विक भूमिका को दिखाते हैं। ओमान का यह सम्मान बताता है कि भारत अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भरोसेमंद और प्रभावशाली देश के रूप में स्थापित हो चुका है।

मुख्य बिंदु 

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ओमान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ़ ओमान प्रदान किया गया।

  • यह प्रधानमंत्री मोदी का 29वाँ सर्वोच्च विदेशी राजकीय सम्मान है।

  • इससे पहले यह सम्मान नेल्सन मंडेला और महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय जैसी विश्व की प्रतिष्ठित हस्तियों को दिया जा चुका है।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने तीन देशों की यात्रा के तहत ओमान का दौरा किया।

  • इस दौरान भारत–ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) पर हस्ताक्षर किए गए।

  • इस यात्रा से रणनीतिक, आर्थिक और जन-जन के बीच संपर्क (people-to-people ties) और अधिक सशक्त हुए।

गोवा मुक्ति दिवस 2025: इतिहास, महत्व और समारोह

गोवा मुक्ति दिवस 2025 पूरे गोवा राज्य में 19 दिसंबर को गर्व और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया जाता है। यह दिन 1961 में गोवा को 450 से अधिक वर्षों के पुर्तगाली औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराए जाने की ऐतिहासिक घटना की स्मृति में मनाया जाता है। यह भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता, स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और गोवा के लोगों के आत्म-शासन के लंबे संघर्ष को सम्मान देता है। यद्यपि भारत 1947 में स्वतंत्र हुआ था, लेकिन गोवा को स्वतंत्रता बाद में मिली, जिससे यह दिन भारत के स्वतंत्रता पश्चात इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय बनता है।

गोवा पर औपनिवेशिक शासन

गोवा भारत के दक्षिण-पश्चिमी तट पर स्थित है और 1510 से पुर्तगाल के नियंत्रण में था। 15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के बाद भी गोवा, दमन और दीव पुर्तगाली क्षेत्रों के रूप में बने रहे। भारत ने प्रारंभ में गोवा के एकीकरण के लिए शांतिपूर्ण और कूटनीतिक प्रयास किए, लेकिन पुर्तगाल ने गोवा को उपनिवेश नहीं बल्कि अपना “ओवरसीज़ प्रांत” बताकर बातचीत से इनकार कर दिया। स्थिति इसलिए भी जटिल थी क्योंकि पुर्तगाल नाटो का सदस्य था और भारत पश्चिमी सैन्य गठबंधन के साथ टकराव से बचना चाहता था।

गोवा का स्वतंत्रता संग्राम

गोवा का स्वतंत्रता आंदोलन 18 जून 1946 को तब तेज़ हुआ, जब डॉ. राम मनोहर लोहिया और डॉ. जूलियाओ मेनेज़ेस ने पुर्तगालियों द्वारा लगाए गए सार्वजनिक सभाओं के प्रतिबंध को चुनौती दी। यद्यपि प्रारंभिक सविनय अवज्ञा आंदोलनों को दबा दिया गया, लेकिन इससे गोवा में व्यापक जन-प्रतिरोध की भावना जागृत हुई। समय के साथ विरोध प्रदर्शन, भूमिगत आंदोलन और राजनीतिक सक्रियता बढ़ती गई। दमन के बावजूद मुक्ति की माँग मजबूत बनी रही, जिससे गोवा का संघर्ष भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण, लेकिन अपेक्षाकृत कम चर्चित हिस्सा रहा।

ऑपरेशन विजय और गोवा की मुक्ति

निर्णायक मोड़ दिसंबर 1961 में आया, जब पुर्तगाली बलों ने भारतीय मछुआरों पर गोलीबारी की और भारतीय ग्रामीणों को बंधक बनाने का प्रयास किया। इसके बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने रक्षा मंत्री वी. के. कृष्ण मेनन की सलाह पर सैन्य कार्रवाई को स्वीकृति दी। 18 दिसंबर 1961 को ‘ऑपरेशन विजय’ शुरू किया गया, जिसमें लगभग 30,000 भारतीय सैनिकों के साथ थलसेना, नौसेना और वायुसेना ने संयुक्त रूप से भाग लिया। यह अभियान 48 घंटे से भी कम समय में पूरा हुआ और 19 दिसंबर 1961 को गोवा आधिकारिक रूप से मुक्त हो गया, जिससे 451 वर्षों का पुर्तगाली शासन समाप्त हुआ।

मुक्ति के बाद

मुक्ति के बाद गोवा को दमन और दीव के साथ एक केंद्र शासित प्रदेश के रूप में प्रशासित किया गया। मेजर जनरल कुन्हिरामन पलट कांडेत को पहला उपराज्यपाल नियुक्त किया गया, जिन्हें प्रशासनिक संक्रमण की ज़िम्मेदारी सौंपी गई। 30 मई 1987 को गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला और वह भारत का 25वाँ राज्य बना, जबकि दमन और दीव केंद्र शासित प्रदेश बने रहे। इससे गोवा का भारतीय संघ में पूर्ण संवैधानिक एकीकरण हुआ।

गोवा मुक्ति दिवस का महत्व

गोवा मुक्ति दिवस का राष्ट्रीय महत्व अत्यधिक है। यह भारत में यूरोपीय औपनिवेशिक शासन के अंतिम अंत का प्रतीक है और भारत की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के प्रति दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। यह दिवस सैनिकों और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को भी सम्मान देता है। ऑपरेशन विजय के दौरान 22 भारतीय सैनिकों और लगभग 30 पुर्तगाली सैनिकों ने अपने प्राण गंवाए, जिनका बलिदान भारत की एकता और स्वतंत्रता के लिए स्मरणीय है।

गोवा मुक्ति दिवस का आयोजन

यह दिवस पूरे गोवा में उत्साह के साथ मनाया जाता है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और नागरिकों को शुभकामनाएँ देते हैं। मशाल जुलूस, स्मृति सभाएँ और देशभक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। साथ ही गोवा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, संगीत और परंपराओं को प्रदर्शित करने वाले सांस्कृतिक आयोजन भी होते हैं, जो गोवावासियों में गर्व और पहचान की भावना को सुदृढ़ करते हैं।

मुख्य बिंदु:

  • गोवा मुक्ति दिवस प्रतिवर्ष 19 दिसंबर को मनाया जाता है।
  • 1961 में ऑपरेशन विजय के माध्यम से गोवा को पुर्तगाली शासन से मुक्त कराया गया।
  • गोवा पर पुर्तगाली शासन 450 से अधिक वर्षों तक रहा।
  • ऑपरेशन विजय 48 घंटे से भी कम समय में संपन्न हुआ।
  • इस अभियान में 22 भारतीय सैनिक शहीद हुए।
  • गोवा 1961 में केंद्र शासित प्रदेश और 1987 में पूर्ण राज्य बना।

एयर इंडिया ने ट्रैवल + लेज़र अवॉर्ड्स 2025 में बेस्ट डोमेस्टिक एयरलाइन का खिताब जीता

भारत की राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयर इंडिया ने एक बार फिर ट्रैवल + लीजर इंडिया एंड साउथ एशिया बेस्ट अवॉर्ड्स 2025 में ‘सर्वश्रेष्ठ घरेलू एयरलाइन’ का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया है। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब एयर इंडिया को यह सम्मान मिला है। यह उपलब्धि ऐसे समय पर आई है जब एयर इंडिया वैश्विक विमानन क्षेत्र के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी परिवर्तन कार्यक्रम से गुजर रही है, जिसमें फ्लीट नवीनीकरण, सेवा गुणवत्ता और ग्राहक अनुभव पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

ट्रैवल + लीजर इंडिया एंड साउथ एशिया अवॉर्ड्स के बारे में

इन अवॉर्ड्स का आयोजन Travel + Leisure India and South Asia द्वारा किया जाता है।

ये पूरी तरह पाठक/यात्री आधारित (reader-voted) पुरस्कार हैं, न कि जूरी द्वारा तय किए गए।

यात्री अपने वास्तविक यात्रा अनुभव के आधार पर वोट करते हैं।

मूल्यांकन के प्रमुख मानदंडों में शामिल हैं:

  • सेवा गुणवत्ता
  • आराम और सुविधा
  • परिचालन विश्वसनीयता
  • समग्र यात्रा अनुभव

इसलिए यह पुरस्कार सीधे तौर पर यात्रियों के भरोसे और पसंद को दर्शाता है।

इस सम्मान का महत्व

यह भारतीय यात्रियों की बढ़ती अपेक्षाओं को दर्शाता है।

एयर इंडिया के प्रयासों की पुष्टि करता है, जैसे—

  • बेहतर ऑनबोर्ड आराम
  • निरंतर और बेहतर सेवा
  • अधिक परिचालन विश्वसनीयता

घरेलू विमानन बाजार में एयर इंडिया की विश्वसनीयता और साख को और मजबूत करता है।

ग्राहक विश्वास की भूमिका

  • एयर इंडिया के अनुसार, यह पुरस्कार घरेलू मार्गों पर यात्रियों द्वारा दिखाए गए विश्वास और भरोसे का प्रमाण है।
  • एयरलाइन ने अपने फ्रंटलाइन स्टाफ, केबिन क्रू और ग्राउंड ऑपरेशंस टीम की भूमिका को भी रेखांकित किया, जो यात्रियों को एकसमान और बेहतर अनुभव देने में अहम भूमिका निभाते हैं।
  • एयर इंडिया के मुख्य ग्राहक अनुभव अधिकारी राजेश डोगरा ने कहा कि लगातार दूसरे वर्ष यह पुरस्कार जीतना एयरलाइन की विश्वस्तरीय यात्रा अनुभव देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

एयर इंडिया की परिवर्तन यात्रा

  • यह सम्मान टाटा समूह में वापसी के बाद एयर इंडिया के व्यापक परिवर्तन चरण के साथ मेल खाता है।
  • एयर इंडिया स्वयं को एक वैश्विक विमानन ब्रांड के रूप में पुनर्स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है।
  • इस परिवर्तन का एक प्रमुख स्तंभ है फ्लीट आधुनिकीकरण।
  • एयर इंडिया ने 570 नए विमानों का ऑर्डर दिया है, जो विमानन इतिहास के सबसे बड़े ऑर्डर्स में से एक है।
  • इसके अलावा, USD 400 मिलियन का रेट्रोफिट कार्यक्रम मौजूदा विमानों को अपग्रेड करने के लिए चल रहा है।
  • 2026 के अंत तक, एयर इंडिया का अधिकांश बेड़ा नया या पूरी तरह अपग्रेडेड होगा।

मुख्य बिंदु 

  • एयर इंडिया को ट्रैवल + लीजर अवॉर्ड्स 2025 में सर्वश्रेष्ठ घरेलू एयरलाइन चुना गया।
  • यह लगातार दूसरी बार मिला सम्मान है।
  • पुरस्कार पूरी तरह यात्रियों के वोट पर आधारित है।
  • एयर इंडिया 570 नए विमानों के ऑर्डर के साथ बड़े परिवर्तन से गुजर रही है।
  • USD 400 मिलियन के रेट्रोफिट कार्यक्रम के तहत मौजूदा बेड़े को उन्नत किया जा रहा है।
  • 2026 तक अधिकांश बेड़ा नया या अपग्रेडेड होगा।

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