बजट 2026: क्या हुआ सस्ता और क्या महंगा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को केंद्रीय बजट 2026-27 पेश कर दिया है। यह नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का 15वां बजट है। साथ ही, यह राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के 2024 में लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के बाद दूसरा पूर्ण बजट है। सीतारमण लगातार नौवीं बार संसद में बजट पेश करने वाली देश की पहली महिला वित्त मंत्री बन गई हैं। वित्त मंत्री सीतारमण ने पेश किए बजट में ‘बायोफार्मा शक्ति’ स्कीम का ऐलान किया है। इसके अंतर्गत केंद्र सरकार की ओर से अगले पांच वर्षों के लिए 10,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। आइए जानते हैं इस बजट में आम आदमी के लिए कहां राहत भरी खबर आई है और कहां उसे झटका लगा है।

दवाएं होंगी सस्ती

देश के आम बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने आम लोगों के लिए बड़ी राहत दी है। बजट में ऐलान किया गया है कि, डायबिटीज और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां सस्ती होंगी। इससे लाखों मरीजों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होने की उम्मीद है।

स्मार्टफोन और टैबलेट सस्ते

मेक-इन-इंडिया अभियान को मजबूती देते हुए भारत में निर्मित स्मार्टफोन और टैबलेट के दामों में कमी आने की संभावना है। सरकार के इस कदम से न केवल घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी किफायती दरों पर इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे।

खेल इक्विपमेंट पर सरकार का खास फोकस

वित्त मंत्री ने कहा कि बजट 2026–27 में खेल इक्विपमेंट को अधिक किफायती बनाने का प्रस्ताव किया गया है, जिससे युवाओं और खिलाड़ियों को सीधा लाभ मिलेगा। सरकार का फोकस है कि इस बजट के बाद बाजार में खेल कूद के सामान और किफायती दामों में मिले। यानी इस बजट के बाद खेल-कूद के सामान सस्ते होंगे।

सस्ती हुई चीज़ें

  • लेदर से बने प्रोडक्ट सस्ते होंगे।
  • मोबाइल फोन और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की बैटरी सस्ती होंगी।
  • माइक्रोवेव ओवन सस्ता होगा।
  • कैंसर की 17 दवाएं सस्ती होंगी।
  • सोलर पैनल के दाम घटेंगे।
  • अल्कोहलिक लिकर स्क्रैप और कुछ मिनरल्स: टैक्स कलेक्टेड ऑन सोर्स (TCS) को 5 प्रतिशत से घटाकर 2% कर दी गई है।

महंगी हुई चीज़ें

  • इनकम टैक्स में गलत जानकारी देना: टैक्स की रकम के 100% के बराबर पेनल्टी
  • चल संपत्ति का खुलासा न करना: अब इस पर पेनल्टी लगेगी
  • स्टॉक ऑप्शन और फ्यूचर्स ट्रेडिंग: सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स 0.02% से बढ़ाकर 0.05% किया गया
  • इसके अलावा जिन सेक्टर्स में कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी की गई है, यानी जो चीजें महंगी होने वाली हैं. उनमें सबसे ऊपर शराब, स्क्रैप और खनिज शामिल हैं।

 

 

Budget 2026 Highlights: बजट की 10 बड़ी घोषणाएं, जानें यहाँ

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 01 फरवरी 2026 को आज बजट 2026 पेश किया है। लगातार 9वीं बार आम बजट पेश करने वाली वे भारत की पहली महिला वित्त मंत्री हैं। शिक्षा क्षेत्र सरकार से नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) के लक्ष्यों के अनुसार GDP का 6% खर्च बढ़ाने का आग्रह कर रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विकसित भारत के मुख्य चालक के रूप में सेवाओं के क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर देते हुए कहा, ‘मैं एक हाई-पावर्ड ‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज’ स्टैंडिंग कमेटी बनाने का प्रस्ताव देती हूं, जो ऐसे उपायों की सिफारिश करेगी जो विकसित भारत के मुख्य ड्राइवर के तौर पर सर्विस सेक्टर पर फोकस करें। इससे हम सर्विस सेक्टर में ग्लोबल लीडर बनेंगे, और 2047 तक हमारी ग्लोबल हिस्सेदारी 10 फीसदी होगी।

बजट की 10 बड़ी घोषणाएं: विस्तार से

  1. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2026 पेश करते हुए कई बड़ी घोषणाएं की हैं। इन्हीं धोषणाओं में से एक है हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का निर्माण। वित्त मंत्री ने देश भर में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाए जाने की घोषणा की है। ये सात कॉरिडोर मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-चेन्नई, हैदराबाद-बेंगलुरु, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी, वाराणसी-सिलीगुड़ी हैं। इन शहरों के बीच हाई-स्पीड ट्रेनें दौड़ेंगी। इन ट्रेनों के चलने से यात्रियों को काफी सहूलियतें मिलेंगी।
  2. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में सेमीकंडक्टर पर विशेष ध्यान दिया है। वित्त मंत्री ने कहा कि सेमी कंडक्टर के लिए 40 हजार करोड़ रुपये देने की घोषणा की। वित्त मंत्री ने कहा कि वित्त मंत्री ने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन पर अपना फोकस बढ़ाएगा। इसके तहत घरेलू कैपिटल-गुड्स क्षमताएं बनाने और एक इंडिपेंडेंट सप्लाई चेन बनाने पर जोर रहेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि इसके लिए ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल जैसे खनिज-समृद्ध राज्य दुर्लभ पृथ्वी संसाधनों तक पहुंच हासिल करने में महत्वपूर्ण होंगे।
  3. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि हम 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों, यानी टियर 2 और टियर 3 शहरों में इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास जारी रखेंगे। वित्त वर्ष 2026-27 में मैं सार्वजनिक पूंजीगत खर्च (पब्लिक कैपेक्स) को 12.2 लाख करोड़ रुपये बढ़ाने का प्रस्ताव रखती हूं।
  4. वित्त मंत्री निर्मला सीतरमण ने दिव्यांगजन कौशल योजना का ऐलान किया, जिसका मकसद प्रत्येक दिव्यांग समूह को उद्योग अनुकूल और विशिष्ट प्रशिक्षण के माध्यम से सम्मान से जीवन जीने के अवसरों को सुनिश्चित करना है। साथ ही, दिव्यांग सहारा योजना की घोषणा भी हुई। इसका उद्देश्य आर्टिफिशियल लिम्ब्स मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एल्मिको) को सहायक उपकरणों के उत्पादन को बढ़ाने, अनुसंधान एवं विकास में निवेश और एआई से एकीकरण के लिए मदद करना है।
  5. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि मैं तीन नए AIIMS संस्थान स्थापित करने, आयुष फार्मेसियों और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को उन्नत बनाने और अधिक कुशल व्यक्ति उपलब्ध कराने और जामनगर स्थित डब्ल्यूएचओ (WHO) वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र को अपग्रेड करने का प्रस्ताव करती हूं।
  6. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में बढ़ावा देने के लिए मैं देश में 5 क्षेत्रीय हब स्थापित करने हेतु राज्यों को सहायता देने की एक योजना का प्रस्ताव करती हूं। साथ ही, 50 प्रतिशत जिला अस्पतालों में इमरजेंसी और ट्रामा सेंटर की स्थापना करेंगे। इसके अलावा, 5 पूर्वादय राज्यों में 5 पर्यटन स्थल का निर्माण करेंगे। मंदिरों और मठों का संरक्षण करेंगे।
  7. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि मैं एक उच्च-शक्ति प्राप्त ‘शिक्षा से रोजगार और उद्यम’ स्थायी समिति गठित करने का प्रस्ताव करती हूं, जो ‘विकसित भारत’ के मुख्य चालक के रूप में सेवा क्षेत्र पर केंद्रित उपायों की सिफारिश करेगी। यह हमें सेवाओं के मामले में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाएगा, जिसका लक्ष्य 2047 तक वैश्विक हिस्सेदारी को 10% तक पहुंचाना है।
  8. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तिगत निवासियों (PROI) को पोर्टफोलियो निवेश योजना (PIS) के माध्यम से सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों के इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करने की अनुमति दी जाएगी। साथ ही, PROI के लिए निवेश की सीमा को 5% से बढ़ाकर 10% करने का प्रस्ताव है।
  9. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि मैं ‘चैलेंज मोड’ में मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव करती हूं। साथ ही, मैं खादी और हथकरघा को मजबूत करने के लिए ‘महात्मा गांधी ग्राम स्वराज’ पहल शुरू करने का भी प्रस्ताव रखती हूं।
  10. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि खेलकूद के सामान सस्ते होंगे। गांवों के लिए बड़ी स्कीम का ऐलान किया। महात्मा गांधी स्वरोजगार का ऐलान, SME के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का ऐलान। इससे खिलाड़ियों को मदद मिलेगी। बच्चों का खेलकूद की तरफ रुझान बढ़ेगा।

एलेना रिबाकिना कौन हैं, जो ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 महिला सिंगल्स चैंपियन हैं?

एलेना रिबाकिना ने मेलबर्न में खेले गए ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 के महिला एकल फाइनल में विश्व नंबर-1 आर्यना सबालेंका को रोमांचक मुकाबले में हराकर खिताब अपने नाम किया। रॉड लेवर एरिना में खेला गया यह फाइनल तीन सेट तक चला और दर्शकों को आख़िरी पल तक रोमांचित बनाए रखा। हालाँकि सबालेंका विश्व की नंबर-1 खिलाड़ी के रूप में फाइनल में उतरी थीं, लेकिन रिबाकिना ने बेहतरीन दृढ़ता, कौशल और मानसिक मजबूती का प्रदर्शन करते हुए मुकाबले पर नियंत्रण बनाए रखा और ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 का महिला एकल खिताब जीतकर यादगार जीत दर्ज की।

मैच का संक्षिप्त विवरण और स्कोरलाइन

एलेना रिबाकिना ने तीन सेटों के रोमांचक मुकाबले में आर्यना सबालेंका को 6-4, 4-6, 6-4 से हराया। रिबाकिना ने पहले सेट में शानदार शुरुआत करते हुए सबालेंका की सर्विस जल्दी ब्रेक की और सेट अपने नाम किया। दूसरे सेट में सबालेंका ने जोरदार वापसी करते हुए मुकाबले पर दबदबा बनाया और स्कोर बराबर कर दिया। निर्णायक तीसरे सेट में सबालेंका ने शुरुआती बढ़त हासिल की, लेकिन रिबाकिना ने दो बार उनकी सर्विस तोड़ते हुए मैच का रुख पलट दिया और खिताब जीत लिया।

फाइनल के अहम मोड़

मुकाबले का सबसे निर्णायक क्षण तीसरे सेट में तब आया जब रिबाकिना 0-3 से पीछे चल रही थीं। भारी दबाव के बावजूद उन्होंने धैर्य और एकाग्रता बनाए रखी। लगातार दो गेम में सबालेंका की सर्विस ब्रेक कर उन्होंने मैच की लय पूरी तरह बदल दी। मजबूत सर्विस, दमदार ग्राउंडस्ट्रोक्स और कम अनफोर्स्ड एरर्स के दम पर रिबाकिना ने अंतिम चरण में बढ़त बनाई। यह वापसी उनके मानसिक दृढ़ता और दबाव में शानदार प्रदर्शन की क्षमता को दर्शाती है।

रिबाकिना की जीत का महत्व

यह जीत एलेना रिबाकिना के करियर का पहला ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब और विंबलडन 2022 के बाद दूसरा ग्रैंड स्लैम खिताब है। वहीं, आर्यना सबालेंका के लिए यह लगातार दूसरी बार ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल में हार रही। रिबाकिना की इस जीत ने महिला टेनिस की शीर्ष खिलाड़ियों में उनकी स्थिति को और मजबूत किया और शीर्ष स्तर पर उनकी निरंतरता को साबित किया। यह फाइनल हाल के वर्षों के सबसे रोमांचक महिला एकल मुकाबलों में से एक के रूप में याद किया जाएगा।

क्या सच में एक स्पेनिश वैज्ञानिक ने पैंक्रियाटिक कैंसर का इलाज ढूंढ लिया है?

एक शोध दल ने बताया है कि उन्होंने प्रयोगशाला में चूहों में अग्नाशय कैंसर (Pancreatic Cancer) के सबसे आक्रामक रूप को पूरी तरह समाप्त कर दिया, और उपचार के बाद ट्यूमर की दोबारा वापसी नहीं हुई। यह अध्ययन वरिष्ठ कैंसर वैज्ञानिक मारियानो बार्बासिड के नेतृत्व में किया गया है और इसे दशकों में अग्नाशय कैंसर अनुसंधान की सबसे आशाजनक प्रगति माना जा रहा है। हालांकि, वैज्ञानिक इसे लेकर उत्साहित जरूर हैं, लेकिन इसे तुरंत “इलाज” कहना जल्दबाज़ी मानते हैं। स्पेन की एक शोध टीम ने रिपोर्ट किया है कि तीन दवाओं के संयुक्त उपचार (ट्रिपल-ड्रग थेरेपी) ने चूहों में अग्नाशय कैंसर के ट्यूमर को पूरी तरह खत्म कर दिया, जिससे इस जानलेवा बीमारी के खिलाफ नई उम्मीद जगी है।

अग्नाशय कैंसर इतना घातक क्यों है?

  • अग्नाशय कैंसर, विशेषकर पैंक्रियाटिक डक्टल एडेनोकार्सिनोमा, दुनिया के सबसे घातक कैंसरों में से एक है।
  • यह आमतौर पर बहुत देर से पता चलता है और पारंपरिक उपचारों के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी होता है।
  • इसका एक बड़ा कारण इसका घना ट्यूमर माइक्रोएनवायरनमेंट है, जो दवाओं को ट्यूमर तक पहुँचने से रोकता है।
  • इसके अलावा, अग्नाशय कैंसर की कोशिकाएँ बेहद अनुकूलनशील होती हैं और एकल-दवा उपचार को जल्दी निष्क्रिय कर देती हैं।
  • इसी कारण इसकी जीवित रहने की दर (Survival Rate) अन्य अधिकांश कैंसरों की तुलना में बहुत कम है।

ट्रिपल-ड्रग थेरेपी क्या है?

  • स्पेन के स्पैनिश नेशनल कैंसर रिसर्च सेंटर (CNIO) में विकसित यह नई थेरेपी किसी एक लक्ष्य पर निर्भर नहीं करती।
  • इसके बजाय, इसमें तीन दवाओं का एक साथ उपयोग किया गया है, जो कैंसर कोशिकाओं के भीतर मौजूद कई जीवन-रक्षक (survival) मार्गों को एक साथ अवरुद्ध करती हैं।
  • यह बहुआयामी रणनीति कैंसर कोशिकाओं को खुद को “रीवायर” करने से रोकती है, जो अक्सर उपचार विफल होने का कारण बनता है।
  • शोधकर्ताओं के अनुसार, एक साथ कई मार्ग बंद कर देने से कैंसर के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचता।

प्रयोगशाला परीक्षणों में क्या सामने आया?

  • नियंत्रित प्रयोगशाला अध्ययनों में, उन्नत अग्नाशय कैंसर से ग्रस्त चूहों को इस ट्रिपल-ड्रग संयोजन से उपचारित किया गया।
  • परिणाम बेहद चौंकाने वाले थे। ट्यूमर पूरी तरह समाप्त हो गए, और लंबे समय तक निगरानी में कोई पुनरावृत्ति (relapse) नहीं देखी गई।
  • इतना ही नहीं, चूहों में न्यूनतम दुष्प्रभाव देखे गए, जो कैंसर उपचार में एक बड़ी चुनौती मानी जाती है।
  • स्वतंत्र विशेषज्ञों का कहना है कि अग्नाशय कैंसर के मॉडलों में इस तरह की स्थायी और बिना पुनरावृत्ति वाली प्रतिक्रिया अत्यंत दुर्लभ है।

यह खोज वैज्ञानिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है?

  • यह अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Proceedings of the National Academy of Sciences (PNAS) में प्रकाशित हुआ है, जो कठोर सहकर्मी समीक्षा के बाद ही शोध प्रकाशित करती है।
  • समीक्षकों ने उपचार के लंबे समय तक टिकाऊ प्रभाव और कम विषाक्तता दोनों को असाधारण बताया।
  • यही कारण है कि यह शोध पहले के कई प्रयोगात्मक उपचारों से अलग और अधिक प्रभावशाली माना जा रहा है।
  • वैज्ञानिकों के लिए यह संकेत है कि कैंसर के कई मार्गों को एक साथ निशाना बनाना शायद अग्नाशय कैंसर की जिद्दी प्रतिरोधक क्षमता को तोड़ने की कुंजी हो सकता है।

मारियानो बार्बासिड कौन हैं?

  • मारियानो बार्बासिड यूरोप के सबसे प्रतिष्ठित कैंसर वैज्ञानिकों में से एक हैं।
  • 1980 के दशक की शुरुआत में उन्होंने पहले मानव ऑन्कोजीन की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसने कैंसर जीवविज्ञान को पूरी तरह बदल दिया।
  • दशकों से उनका शोध KRAS-ड्रिवन ट्यूमर पर केंद्रित रहा है, जो लगभग 90 प्रतिशत अग्नाशय कैंसर मामलों के लिए जिम्मेदार होते हैं।
  • उनका लंबे समय से यह तर्क रहा है कि अग्नाशय कैंसर को एक ही दवा से नहीं हराया जा सकता।
  • इसी पृष्ठभूमि के कारण इस नए अध्ययन को अतिरिक्त वैज्ञानिक विश्वसनीयता मिलती है।

फंडिंग, विश्वसनीयता और वैज्ञानिक सावधानियाँ

  • इस शोध को Fundación CRIS Contra el Cáncer का समर्थन प्राप्त था, जो उच्च-जोखिम लेकिन उच्च-प्रभाव वाले कैंसर अनुसंधान के लिए जानी जाती है।
  • CNIO के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अध्ययन ने सभी स्थापित प्रयोगात्मक प्रोटोकॉल का पालन किया और स्वतंत्र सहकर्मी समीक्षा से गुज़रा।
  • सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों के बीच उन्होंने यह भी कहा कि न तो शोध में कोई जल्दबाज़ी की गई और न ही वैज्ञानिक सुरक्षा मानकों से समझौता हुआ।
  • इससे अध्ययन की विश्वसनीयता और गंभीरता और मजबूत होती है।

2026 में छठा नेशनल क्रॉप न्यूट्रिशन समिट कहाँ आयोजित होगा?

भारत का कृषि क्षेत्र एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहाँ अब केवल पारंपरिक उर्वरक ही नहीं, बल्कि मृदा स्वास्थ्य, सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients) और सतत कृषि इनपुट भी उतने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं। इसी पृष्ठभूमि में फरवरी 2026 की शुरुआत में मुंबई एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर के आयोजन की मेज़बानी करेगा। नेशनल क्रॉप न्यूट्रिशन समिट का उद्देश्य नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और शोधकर्ताओं को एक साझा मंच पर लाना है। इसका मुख्य फोकस यह है कि भारत बढ़ती फसल पोषण आवश्यकताओं को कैसे पूरा करे और साथ ही स्वयं को वैश्विक एग्री-इनपुट विनिर्माण केंद्र के रूप में कैसे स्थापित करे।

नेशनल क्रॉप न्यूट्रिशन समिट के बारे में

  • यह दो दिवसीय शिखर सम्मेलन इंडियन माइक्रो-फर्टिलाइजर्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IMMA) द्वारा आयोजित किया जाएगा।
  • आयोजन स्थल होगा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) परिसर, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स, मुंबई।
  • यह इस सम्मेलन का छठा संस्करण है और इसकी थीम है – “Converge, Collaborate & Co-create” (एकजुट हों, सहयोग करें और सह-निर्माण करें)।
  • सम्मेलन में नीति, विज्ञान, उद्योग और नवाचार के संगम पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जो भारतीय कृषि की बदलती जरूरतों को दर्शाता है।

सम्मेलन के प्रमुख फोकस क्षेत्र

  • सम्मेलन में सूक्ष्म पोषक तत्वों, विशेष उर्वरकों (Specialty Fertilizers) और जैविक इनपुट्स पर चर्चा होगी, जिनकी मांग मृदा पोषक तत्वों की कमी और बदलती कृषि पद्धतियों के कारण तेजी से बढ़ रही है।
  • विचार-विमर्श के विषयों में प्रिसिजन न्यूट्रिशन, सतत इनपुट उपयोग, नियामक सुधार और घरेलू विनिर्माण के विस्तार के अवसर शामिल होंगे।
  • भारत को वैश्विक एग्री-इनपुट निर्यात में प्रतिस्पर्धी बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा, साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसानों की उत्पादकता और मृदा स्वास्थ्य से कोई समझौता न हो।

उद्घाटन और सरकारी भागीदारी

  • सम्मेलन का उद्घाटन जयकुमार जितेंद्रसिंह रावल, विपणन एवं प्रोटोकॉल मंत्री, महाराष्ट्र सरकार द्वारा किया जाएगा।
  • विशिष्ट अतिथि के रूप में पी. के. सिंह, भारत सरकार के कृषि आयुक्त, सरकार की एग्री-इनपुट सुधारों से जुड़ी दृष्टि प्रस्तुत करेंगे।
  • उनका संबोधन विशेष उर्वरकों, जैविक इनपुट्स, ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस और एग्री-इनपुट्स के निर्यात में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित होगा।

फसल पोषण का महत्व क्यों बढ़ रहा है?

  • भारत का फसल पोषण बाज़ार तेज़ी से बदल रहा है। पारंपरिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से कई क्षेत्रों में मृदा क्षरण और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी देखने को मिली है।
  • इसके परिणामस्वरूप किसान अब माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, बायो-फर्टिलाइज़र और पुनर्योजी (Regenerative) इनपुट्स को तेजी से अपना रहे हैं।
  • ये इनपुट न केवल पैदावार बढ़ाते हैं, बल्कि दीर्घकालिक मृदा स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाते हैं। यह सम्मेलन नीति और उद्योग के प्रयासों को इन्हीं बदलती ज़मीनी वास्तविकताओं के अनुरूप जोड़ने का प्रयास करेगा।

मुख्यमंत्री ग्रामोत्थान योजना गुजरात के गांवों को कैसे बदलेगी?

गुजरात ने ग्रामीण शासन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मुख्यमंत्री ग्रामोत्थान योजना की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य राज्य भर में ग्रामीण बुनियादी ढांचे का कायाकल्प करना है। इस योजना के तहत 2,666 नए पंचायत कार्यालयों की आधारशिला रखी गई। इसका लक्ष्य सरकारी सेवाओं को सीधे गांवों तक पहुंचाना और गांवों को अधिक आत्मनिर्भर बनाकर शहरों पर बढ़ते दबाव को कम करना है।

मुख्यमंत्री ग्रामोत्थान योजना क्या है?

  • मुख्यमंत्री ग्रामोत्थान योजना गुजरात सरकार की एक प्रमुख ग्रामीण विकास पहल है।
  • इस योजना का उद्देश्य गांवों को उनकी ग्रामीण पहचान बनाए रखते हुए शहरों जैसी सुविधाएं प्रदान करना है।
  • ग्राम पंचायतों को मजबूत बनाकर सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आवश्यक सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हों।
  • यह कार्यक्रम ग्राम संस्थाओं को शासन और विकास के केंद्र के रूप में स्थापित करता है, ताकि ग्रामीणों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए शहरों की ओर न जाना पड़े।

पंचायत कार्यालय: शासन अब गांव के द्वार पर

  • एमजीवाई के पहले चरण में 2,666 ग्राम पंचायत कार्यालय-सह-तलाटी आवास बनाए जाएंगे, जिन पर लगभग ₹663 करोड़ की लागत आएगी।
  • इन आधुनिक भवनों से सरकारी योजनाओं, प्रमाणपत्रों और रिकॉर्ड तक ग्रामीणों की पहुंच आसान होगी।
  • पहले चरण में 114 तालुका मुख्यालयों के अंतर्गत आने वाले गांव शामिल हैं, और भविष्य में 10,000 से अधिक आबादी वाली सभी पंचायतों तक योजना का विस्तार किया जाएगा।
  • इससे जमीनी स्तर पर लोकतंत्र और प्रशासनिक दक्षता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

गांवों में शहरी सुविधाएं: प्रमुख फोकस क्षेत्र

  • इस योजना के तहत गांवों में वे सुविधाएं विकसित की जाएंगी जो आमतौर पर शहरों में उपलब्ध होती हैं।
  • इनमें बेहतर सड़क संपर्क, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता व्यवस्था, सोलर स्ट्रीट लाइट, ई-ग्राम केंद्र और सामुदायिक भवन शामिल हैं।
  • बुनियादी ढांचे के इस उन्नयन से ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
  • सरकार का लक्ष्य है कि गांव अधिक रहने योग्य, आर्थिक रूप से सक्रिय और सामाजिक रूप से सशक्त बनें, जिससे शहरों की ओर पलायन कम हो और शहरी भीड़ घटे।

ग्रामीण-शहरी असंतुलन को कम करने की पहल

  • मुख्यमंत्री के अनुसार, बढ़ते शहरीकरण के दबाव को संतुलित करने के लिए विशेष योजना की आवश्यकता है।
  • मुख्यमंत्री ग्रामोत्थान योजना इसी उद्देश्य से संतुलित और समावेशी विकास को बढ़ावा देती है।
  • यह योजना “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है।
  • गांवों को सशक्त बनाकर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को विकास केंद्रों के रूप में विकसित करना चाहती है।

गांधीवादी विचार और ग्राम स्वराज

  • इस योजना की शुरुआत शहीद दिवस के अवसर पर की गई, जो महात्मा गांधी की 1948 में हुई शहादत की स्मृति में मनाया जाता है।
  • मुख्यमंत्री ने गांधीजी के ‘ग्राम स्वराज’ के विचार को याद किया, जिसमें आत्मनिर्भर और सशक्त गांवों पर जोर दिया गया है।
  • ग्रामोत्थान योजना इसी दर्शन को आगे बढ़ाती है, जहां गांवों को आश्रित इकाइयों के बजाय विकास के इंजन के रूप में देखा जाता है।

ISRO ने गगनयान मिशन लॉन्च के लिए क्या टाइमलाइन कन्फर्म की है?

भारत का बहुप्रतीक्षित मानव अंतरिक्ष उड़ान सपना अब अपने सबसे निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। सुरक्षा और विश्वसनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) गगनयान मिशन की तैयारियों को तेज़ कर रहा है। भारतीय अंतरिक्ष यात्री 2027 में अंतरिक्ष यात्रा पर जाएंगे, उससे पहले कई मानवरहित (Uncrewed) परीक्षण मिशन किए जाएंगे। ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन के अनुसार, गगनयान का पहला मानवरहित मिशन G1 मार्च 2026 में प्रस्तावित है।

गगनयान मिशन क्या है?

  • गगनयान भारत का प्रमुख मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसका नेतृत्व ISRO कर रहा है।
  • इसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों, जिन्हें गगनयात्री कहा जाता है, को निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में भेजना और सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना है।
  • इस मिशन की सफलता के साथ भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद स्वतंत्र रूप से मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता हासिल करने वाला चौथा देश बनेगा।

मानव उड़ान से पहले मानवरहित मिशन

  • अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले ISRO ने तीन मानवरहित मिशनों की योजना बनाई है, ताकि मिशन की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
  • इनमें पहला मिशन G1 है, जो लगभग 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है।
  • अब तक 8,000 से अधिक ग्राउंड और संरचनात्मक परीक्षण किए जा चुके हैं।
  • इनमें संरचनात्मक मजबूती, एवियोनिक्स, प्रोपल्शन और मिशन सॉफ्टवेयर की जाँच शामिल है।
  • इन मिशनों का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर प्रणाली सुरक्षा के पैमाने पर “100 में से 100” अंक प्राप्त करे।

व्योममित्रा और प्रमुख प्रणालियों का परीक्षण

  • G1 मिशन (मार्च 2026) में ISRO का ह्यूमनॉइड रोबोट व्योममित्रा भेजा जाएगा।
  • व्योममित्रा जीवन-समर्थन प्रणालियों, क्रू मॉड्यूल के अंदर के वातावरण, पुनःप्रवेश (री-एंट्री) व्यवहार और रिकवरी प्रक्रियाओं की जाँच में मदद करेगा।
  • ये परीक्षण मानव उपस्थिति का अनुकरण करेंगे और यह आकलन करेंगे कि लॉन्च, कक्षा और वापसी के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा।

अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान

  • ISRO ने स्पष्ट किया है कि अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा गगनयान कार्यक्रम की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
  • चुने गए चार गगनयात्री — शुभांशु शुक्ला, प्रशांत बालकृष्णन नायर, अजीत कृष्णन और अंगद प्रताप — कठोर प्रशिक्षण से गुजर रहे हैं।
  • इसके साथ ही रॉकेट, क्रू मॉड्यूल और आपातकालीन एस्केप प्रणालियों पर समानांतर परीक्षण जारी हैं।
  • ग्राउंड परीक्षणों के बाद पर्यावरणीय सत्यापन और सॉफ्टवेयर सिमुलेशन किए जाएंगे।

प्रक्षेपण यान और मिशन प्रोफ़ाइल

  • अंतरिक्ष यात्रियों को मानव-रेटेड LVM3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा।
  • यह रॉकेट क्रू मॉड्यूल को लगभग 400 किमी ऊँची निम्न पृथ्वी कक्षा में स्थापित करने में सक्षम है।
  • प्रस्तावित मानव मिशन की अवधि लगभग तीन दिन होगी।
  • इसके बाद क्रू मॉड्यूल पृथ्वी के वायुमंडल में पुनःप्रवेश करेगा और पैराशूट व रिकवरी प्रणालियों की मदद से भारतीय समुद्री क्षेत्र में सुरक्षित लैंडिंग करेगा।

लद्दाख का आसमान खून जैसा लाल क्यों हो गया? क्या यह कोई खूबसूरत नज़ारा था या धरती के लिए अंतरिक्ष से कोई चेतावनी?

जनवरी 2026 के मध्य में लद्दाख के हानले क्षेत्र के ऊपर रात का आसमान अचानक चौंकाने वाला दृश्य बन गया। आमतौर पर गहरे काले और तारों से भरे आकाश के बजाय, इस बार आसमान रक्त-लाल चमक से भर गया। तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुईं और कई लोगों ने इसे “भारत में नॉर्दर्न लाइट्स” कहना शुरू कर दिया। लेकिन वैज्ञानिकों ने जल्द ही स्पष्ट किया कि यह केवल एक सुंदर प्राकृतिक दृश्य नहीं था, बल्कि 2003 के बाद आए सबसे शक्तिशाली सौर तूफानों में से एक का प्रत्यक्ष प्रभाव था। इस घटना ने उपग्रह सुरक्षा, बिजली ग्रिड और अंतरिक्ष मौसम से जुड़ी तैयारियों को लेकर गंभीर चिंताएँ भी पैदा कीं।

लद्दाख के ऊपर वास्तव में क्या हुआ?

  • यह असामान्य लाल आभा लद्दाख के हानले क्षेत्र में देखी गई, जो अपने अंधेरे आसमान और खगोलीय वेधशालाओं के लिए प्रसिद्ध है। सामान्य तारों भरे अंधेरे की जगह, पूरा आकाश गहरे लाल रंग में डूबा नजर आया।
  • यह घटना तब हुई जब सूर्य से निकले आवेशित कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराए।
  • उच्च ऊँचाई (300 किमी से अधिक) पर इन कणों ने ऑक्सीजन परमाणुओं को उत्तेजित किया, जिससे लाल रंग की रोशनी उत्पन्न हुई।
  • भारत जैसे निम्न अक्षांश वाले क्षेत्रों में इस प्रकार की लाल ऑरोरा अत्यंत दुर्लभ होती है, जिससे यह घटना दृश्यात्मक रूप से आकर्षक होने के साथ-साथ वैज्ञानिक रूप से भी चिंताजनक बन गई।

लाल आकाश के पीछे का सौर विस्फोट

  • इस घटना का असली कारण लाखों किलोमीटर दूर सूर्य पर घटित हुआ।
  • 18 जनवरी 2026 को सूर्य से एक शक्तिशाली X-क्लास सौर ज्वाला (Solar Flare) निकली, जो सौर विस्फोटों की सबसे तीव्र श्रेणी मानी जाती है।
  • इसके बाद एक विशाल कोरोनल मास इजेक्शन (CME) हुआ—अत्यधिक गर्म प्लाज़्मा और चुंबकीय क्षेत्रों का बादल।
  • लगभग 1,700 किमी प्रति सेकंड की रफ्तार से यात्रा करते हुए यह CME मात्र 25 घंटे में पृथ्वी तक पहुँच गया और असाधारण शक्ति के साथ पृथ्वी के चुंबकीय कवच से टकराया।

ऑरोरा हरा नहीं, लाल क्यों दिखाई दिया?

  • ध्रुवीय क्षेत्रों में ऑरोरा सामान्यतः हरे रंग का होता है, क्योंकि वहाँ कम ऊँचाई पर ऑक्सीजन के साथ टकराव होता है।
  • लेकिन भारत सामान्य ऑरोरा क्षेत्रों से काफी दक्षिण में स्थित है।
  • लद्दाख में जो दृश्य देखा गया, वह ऑरोरा परदे का ऊपरी किनारा था, जो ऊँचाई पर ऑक्सीजन उत्तेजना के कारण लाल चमक उत्पन्न करता है।
  • यही कारण है कि यह घटना भारत के लिए दुर्लभ थी और यह इस बात का स्पष्ट संकेत थी कि सौर तूफान अत्यंत शक्तिशाली था।
  • वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे सूर्य अपने सोलर मैक्सिमम (11 वर्षीय सौर चक्र का सबसे सक्रिय चरण) की ओर बढ़ रहा है, ऐसी घटनाएँ भविष्य में और अधिक देखने को मिल सकती हैं।

आदित्य-एल1 की भूमिका: भारत का अंतरिक्ष मौसम प्रहरी

  • भारत के पहले सौर मिशन आदित्य-एल1 ने इस सौर तूफान की निगरानी में अहम भूमिका निभाई।
  • यह यान पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी दूर L1 लैग्रांज बिंदु पर स्थित है, जहाँ से यह आने वाली सौर गतिविधियों की पूर्व चेतावनी देता है।
  • आदित्य-एल1 से प्राप्त आँकड़ों ने दिखाया कि इस तूफान के दौरान पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र कितनी गंभीर रूप से संकुचित हो गया था।
  • ऐसी 24 से 48 घंटे पहले मिलने वाली चेतावनी उपग्रह संचालकों को सिस्टम को सेफ मोड में डालने और बिजली ग्रिड प्रबंधकों को लोड समायोजित करने का अवसर देती है, जिससे बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।

ऑरोरा (उत्तरी और दक्षिणी रोशनी) – समझाया गया

शीर्षक मुख्य बिंदु
ऑरोरा क्या हैं? पृथ्वी के आकाश में दिखाई देने वाले प्राकृतिक प्रकाश प्रदर्शन
मुख्यतः ध्रुवों के पास उच्च अक्षांशीय क्षेत्रों में देखे जाते हैं
परदे, चाप, किरणें, सर्पिल या झिलमिलाती रोशनी के रूप में दिखाई देते हैं
सूर्य से आए आवेशित कणों और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र व वायुमंडल की परस्पर क्रिया से उत्पन्न
अन्य नाम ऑरोरा बोरेलिस – उत्तरी प्रकाश
ऑरोरा ऑस्ट्रेलिस – दक्षिणी प्रकाश
घटनास्थल (क्षेत्र) मुख्यतः आर्कटिक वृत्त और अंटार्कटिक वृत्त के आसपास
निम्न अक्षांशों (जैसे भारत) में बहुत कम दिखाई देते हैं
ऑरोरा बोरेलिस (Northern Lights) उत्तरी गोलार्ध में घटित
नॉर्वे, स्वीडन, फ़िनलैंड, आइसलैंड, कनाडा और अलास्का में सामान्यतः देखे जाते हैं
उत्तर दिशा में पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से सौर कणों की क्रिया के कारण
ऑरोरा ऑस्ट्रेलिस (Southern Lights) दक्षिणी गोलार्ध में घटित
अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और दक्षिणी दक्षिण अमेरिका में दिखाई देते हैं
भौतिक प्रक्रिया वही है, केवल दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में
ऑरोरा का स्रोत सूर्य से उत्पत्ति
सूर्य लगातार आवेशित कणों की धारा उत्सर्जित करता है जिसे सौर पवन (Solar Wind) कहते हैं
इसमें इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन शामिल होते हैं

SAIL को तीसरी बार फिर से ‘ग्रेट प्लेस टू वर्क’ के तौर पर सर्टिफाइड क्यों किया जा रहा है?

भारत की सबसे बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात कंपनी ने उत्पादन और मुनाफे से आगे बढ़कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 29 जनवरी 2026 को स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) को एक बार फिर “ग्रेट प्लेस टू वर्क” के रूप में मान्यता मिली। यह लगातार तीसरा वर्ष है जब SAIL को यह प्रतिष्ठित प्रमाणन प्राप्त हुआ है। यह मान्यता फरवरी 2026 से फरवरी 2027 तक मान्य रहेगी और यह कर्मचारियों के विश्वास, पारदर्शिता तथा पेशेवर विकास पर SAIL के निरंतर फोकस को दर्शाती है। एक महारत्न पीएसयू के लिए यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि कार्यस्थल संस्कृति अब संस्थागत उत्कृष्टता का एक महत्वपूर्ण मानदंड बन चुकी है।

ग्रेट प्लेस टू वर्क प्रमाणन क्या है

  • यह प्रमाणन ग्रेट प्लेस टू वर्क इंस्टीट्यूट द्वारा प्रदान किया जाता है, जो कार्यस्थल संस्कृति के आकलन के लिए विश्व-स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्था है।
  • यह एक कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया पर आधारित होता है, जिसमें कर्मचारी सर्वेक्षण और संगठनात्मक कार्य-प्रणालियों का विश्लेषण शामिल है।
  • इसमें ट्रस्ट इंडेक्स स्कोर एक प्रमुख मानक है, जो नेतृत्व की विश्वसनीयता, सम्मान, निष्पक्षता, गर्व और सहयोग जैसे पहलुओं पर कर्मचारियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया को मापता है।
  • SAIL के इस स्कोर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो नेतृत्व और संगठनात्मक प्रणालियों पर कर्मचारियों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।

SAIL के लिए यह मान्यता क्यों महत्वपूर्ण है

  • SAIL एक महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है और भारत के इस्पात क्षेत्र में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
  • लगातार तीन वर्षों तक यह प्रमाणन प्राप्त करना दर्शाता है कि संगठन केवल औद्योगिक उत्पादन पर ही नहीं, बल्कि मानव संसाधन में निवेश पर भी समान रूप से ध्यान दे रहा है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के संदर्भ में यह मान्यता आधुनिक, चुस्त और कर्मचारी-केंद्रित प्रशासन की ओर बदलाव का संकेत देती है।
  • इसके साथ ही यह SAIL की एम्प्लॉयर ब्रांडिंग को मजबूत करती है, जिससे प्रतिस्पर्धी औद्योगिक वातावरण में कुशल पेशेवरों को आकर्षित और बनाए रखना आसान होता है।

सीखने और डोमेन मोबिलिटी पर फोकस

  • SAIL ने क्षमता निर्माण और कौशल विविधीकरण में भी बड़े निवेश किए हैं।
  • कार्यकारी अधिकारियों को संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से डोमेन परिवर्तन के अवसर दिए जा रहे हैं।
  • इन पहलों के लिए SAIL ने IIM कोझिकोड, IIM बैंगलोर, IIM जम्मू, IIM रायपुर, IIM रांची, साथ ही XLRI और ASCI जैसे प्रमुख प्रबंधन संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किए हैं।
  • इन कार्यक्रमों का फोकस विशेष रूप से मार्केटिंग और मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों पर है, ताकि अधिकारी बदलती व्यावसायिक और संगठनात्मक आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को ढाल सकें।

महारत्न पीएसयू के रूप में SAIL

  • SAIL भारत की सबसे बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात उत्पादक कंपनी है और इसे महारत्न का दर्जा प्राप्त है, जो इसे अधिक वित्तीय और परिचालन स्वायत्तता प्रदान करता है।
  • पारंपरिक रूप से औद्योगिक भूमिका के लिए जानी जाने वाली SAIL ने हाल के वर्षों में संगठनात्मक परिवर्तन, डिजिटलाइजेशन और कार्यबल आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया है।
  • “ग्रेट प्लेस टू वर्क” के रूप में मिली यह मान्यता, पीएसयू सुधारों के व्यापक उद्देश्य—दक्षता, जवाबदेही और कर्मचारी संतुष्टि—के अनुरूप है।

तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार 2016-2022 के विजेता कौन हैं?

कई वर्षों के इंतज़ार के बाद, तमिलनाडु सरकार ने अंततः 2016 से 2022 तक के राज्य फिल्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। ये पुरस्कार तमिल सिनेमा के उस दौर को सम्मानित करते हैं जो सामाजिक चेतना, यथार्थवाद और कलात्मक समृद्धि के लिए जाना जाता है। न्यायालयीन ड्रामा से लेकर हाशिए पर पड़े वर्गों की सशक्त कहानियों तक, इन पुरस्कारों ने उन फिल्मों और कलाकारों को मान्यता दी है जिन्होंने मुख्यधारा की कहानी कहने की शैली को नई दिशा दी।

बड़े विजेता और प्रमुख फिल्में

  • कई फिल्मों ने अपनी सिनेमाई उत्कृष्टता और सामाजिक प्रभाव के कारण विशेष पहचान बनाई।
  • साई पल्लवी अभिनीत गर्गी (2022) को सर्वश्रेष्ठ फिल्म (प्रथम पुरस्कार) मिला, वहीं साई पल्लवी को उनकी संयमित और प्रभावशाली अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला।
  • इसी तरह, सूर्या अभिनीत जय भीम (2021) को भी सर्वश्रेष्ठ फिल्म (प्रथम पुरस्कार) से सम्मानित किया गया, जिसने न्याय, जातिगत वास्तविकताओं और संवैधानिक मूल्यों पर तमिल सिनेमा की मजबूत पकड़ को दोहराया।

प्रमुख अभिनेताओं के सराहनीय अभिनय

  • इन पुरस्कारों में उन अभिनय प्रस्तुतियों को भी मान्यता दी गई जिन्होंने सांस्कृतिक स्तर पर गहरी छाप छोड़ी।
  • धनुष को वड़ा चेन्नई (2018) में शहरी अपराध और सत्ता संरचनाओं के सशक्त चित्रण के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया।
  • विक्रम प्रभु को तानाक्करण (2022) में हिरासत हिंसा और प्रणालीगत उत्पीड़न को उजागर करने वाली भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला।
  • अन्य उल्लेखनीय विजेताओं में विजय सेतुपति, आर्या, नयनतारा, ज्योतिका, कीर्ति सुरेश और मंजू वारियर शामिल रहे, जो भूमिकाओं और विषयों की विविधता को दर्शाता है।

निर्देशन और संगीत को सम्मान

  • निर्देशन श्रेणी में नई पीढ़ी के सशक्त फिल्मकारों को सम्मान मिला।
  • लोकेश कनगराज को मानगरम (2016) के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, जबकि गौतम रामचंद्रन को गर्गी (2022) के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • संगीत के क्षेत्र में ए. आर. रहमान (पोन्नियिन सेलवन: भाग-I) और संतोष नारायणन (वड़ा चेन्नई) जैसे दिग्गजों और समकालीन संगीतकारों को सम्मानित किया गया, जिससे कहानी को ऊँचाई देने में संगीत की भूमिका रेखांकित हुई।

पुरस्कार समारोह का विवरण

  • आधिकारिक पुरस्कार समारोह 13 फरवरी 2026 को कलैवनार अरंगम, चेन्नई में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री स्वयं विजेताओं को सम्मान प्रदान करेंगे।
  • तमिलनाडु सरकार द्वारा स्थापित राज्य फिल्म पुरस्कार, भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित राज्य स्तरीय फिल्म सम्मानों में से एक हैं, जो तमिल सिनेमा में कलात्मक गुणवत्ता, तकनीकी उत्कृष्टता और सामाजिक रूप से सार्थक कहानी कहने को सम्मानित करते हैं।

2016 के विजेता

  • सर्वश्रेष्ठ फिल्म: मानगरम
  • सर्वश्रेष्ठ फिल्म (विशेष पुरस्कार): मनुसंगड़ा
  • महिला सशक्तिकरण पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म (विशेष पुरस्कार): अरुवी
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता: विजय सेतुपति (पुरियाथा पुथिर)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री: कीर्ति सुरेश (पाम्बू सट्टै)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (विशेष पुरस्कार): एस. गुरु सोमसुंदरम (जोकर)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (विशेष पुरस्कार): अदिति बालन (अरुवी)
  • सर्वश्रेष्ठ खलनायक: रहमान (ओरु मुगथिरै)
  • सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता: रोबो शंकर (मरणोपरांत) (वेलैनु वंधुट्टा वेल्लैक्कारन)
  • सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेत्री: मधुमिता (काशमोरा)
  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता: आर. पार्थिबन (मावीरन किट्टू)
  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री: मनीषा यादव (ओरु कुप्पै कथै)
  • सर्वश्रेष्ठ निर्देशक: लोकेश कनगराज (मानगरम)
  • सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक: सैम सी.एस. (पुरियाथा पुथिर)
  • सर्वश्रेष्ठ गीतकार: मधन कार्की (गीत – ‘नान उन’, फिल्म 24)
  • सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक (पुरुष): वेलमुरुगन (ओरु कुप्पै कथै)
  • सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका (महिला): वैकोम विजयलक्ष्मी (वेलैनु वंधुट्टा वेल्लैक्कारन)
  • सर्वश्रेष्ठ छायाकार: बालसुब्रमणियम (कथाकली)
  • सर्वश्रेष्ठ संपादक: कासी विश्वनाथन (मावीरन किट्टू)
  • सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशक: जॉन ब्रिट्टो (इलामी)
  • सर्वश्रेष्ठ स्टंट कोरियोग्राफर: अंबरिव (काशमोरा / 24)

2017 के विजेता

  • सर्वश्रेष्ठ फिल्म (प्रथम पुरस्कार): अरम्म
  • सर्वश्रेष्ठ फिल्म (विशेष पुरस्कार): टू लेट
  • महिला सशक्तिकरण पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म (विशेष पुरस्कार): धर्मदुरई
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता: कार्थी (थीरन अधिकारम ओंद्रु)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री: नयनतारा (अरम्म)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (विशेष पुरस्कार): संतोष श्रीराम (टू लेट)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (विशेष पुरस्कार): एंड्रिया जेरमाया (तरमणि)
  • सर्वश्रेष्ठ खलनायक: प्रसन्ना (थिरुट्टु पायले 2)
  • सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता: बाला सरवनन (एन आलोडा सेरुप्पा कानोम)
  • सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेत्री: उर्वशी (मगलिर मट्टुम)
  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता: बोस वेंकट (कावन / थीरन अधिकारम ओंद्रु)
  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री: सुनु लक्ष्मी (अरम्म)
  • सर्वश्रेष्ठ निर्देशक: पुष्कर–गायत्री (विक्रम वेधा)
  • सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक: हिप हॉप तमिझा (कावन)
  • सर्वश्रेष्ठ गीतकार: विवेक (गीत – ‘थीरन दा’, फिल्म थीरन अधिकारम ओंद्रु)
  • सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक (पुरुष): सत्यप्रकाश (थिरुट्टु पायले 2)
  • सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका (महिला): शक्ति श्री गोपालन (विक्रम वेधा)
  • सर्वश्रेष्ठ छायाकार: पी. चेल्लादुरई (थिरुट्टु पायले 2)
  • सर्वश्रेष्ठ संपादक: ए. राजा मोहम्मद (थिरुट्टु पायले 2 / वीरैयन)
  • सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशक: ए. के. मुथु (अंडावा कानोम)
  • सर्वश्रेष्ठ स्टंट कोरियोग्राफर: धिलिप सुब्बारायन (विक्रम वेधा / थीरन अधिकारम ओंद्रु)

2018 विजेता

  • सर्वश्रेष्ठ फिल्म (प्रथम पुरस्कार): पेरीयेरुम पेरुमल
  • सर्वश्रेष्ठ फिल्म (विशेष पुरस्कार): सीताकाथी
  • महिला सशक्तिकरण के बारे में सर्वश्रेष्ठ फिल्म (विशेष पुरस्कार): काना
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता: धनुष (वाडा चेन्नई)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री: ज्योतिका (चेक्का चिवंता वानम)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (विशेष पुरस्कार): विष्णु विशाल (रतसासन)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (विशेष पुरस्कार): ऐश्वर्या राजेश (काना/वाडा चेन्नई)
  • सर्वश्रेष्ठ खलनायक: समुथिरकानी (वाडा चेन्नई)
  • सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता: योगी बाबू (मोहिनी)
  • सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेत्री: देवदर्शनी (96)
  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता: अमीर (वाडा चेन्नई)
  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री: विजी चन्द्रशेखर (कडाईकुट्टी सिंगम)
  • सर्वश्रेष्ठ निर्देशक: मारी सेल्वराज (पेरीयेरुम पेरुमल)
  • सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक: संतोष नारायणन (वाडा चेन्नई)
  • सर्वश्रेष्ठ गीतकार: त्यागराजन कुमारराजा (सीताकाथी)
  • सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक (पुरुष): सिड श्रीराम (एकाधिक फ़िल्में)
  • सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका (महिला): आराधना शिवकार्तिकेयन (काना)
  • सर्वश्रेष्ठ छायाकार: आर वेलराज (कडाईकुट्टी सिंगम/वाडा चेन्नई)
  • सर्वश्रेष्ठ संपादक: सैन लोकेश (रत्सासन)
  • सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशक: विनोथ राजकुमार (सीताकाथी)
  • सर्वश्रेष्ठ स्टंट समन्वयक: सुप्रीम सुंदर (गोली सोडा 2)

2019 विजेता

  • सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म (प्रथम पुरस्कार): असुरन
  • सर्वश्रेष्ठ फिल्म (विशेष पुरस्कार): केडी अंगिरा करुप्पुदुरई
  • महिला सशक्तिकरण के बारे में सर्वश्रेष्ठ फिल्म (विशेष पुरस्कार): पोन मैगल वंधल
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता: आर पार्थिबन (ओथथा सेरुप्पु साइज 7)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री: मंजू वारियर (असुरन)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (विशेष पुरस्कार): कार्थी (कैथी)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (विशेष पुरस्कार): इंदुजा (मागामुनी)
  • सर्वश्रेष्ठ खलनायक: अर्जुन दास (कैथी)
  • सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता: करुणाकरण (मॉन्स्टर)
  • सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेत्री: कोवई सरला (कंचना-3)
  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता: प्रकाश राज (असुरन)
  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री: श्रीरंजनी (हाउस ओनर)
  • सर्वश्रेष्ठ निर्देशक: आर पार्थिबन (ओथ्था सेरुप्पु साइज़ 7)
  • सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक: थमन (मागामुनी)
  • सर्वश्रेष्ठ गीतकार: काबिलन (एनजीके)
  • सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक (पुरुष): हरिचरण (एकाधिक फ़िल्में)
  • सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका (महिला): सैंधवी (असुरन)
  • सर्वश्रेष्ठ छायाकार: थेनी ईश्वर (पेरानबू)
  • सर्वश्रेष्ठ संपादक: आर सुदर्शन (ओथ्था सेरुप्पु साइज़ 7)
  • सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशक: सीएस बालचंद्रन (धर्म प्रभु)
  • सर्वश्रेष्ठ स्टंट समन्वयक: अनबरीव (कैथी)

2020 के विजेता

  • सर्वश्रेष्ठ फिल्म (प्रथम पुरस्कार): कूझंगल
  • सर्वश्रेष्ठ फिल्म (विशेष पुरस्कार): थेन्
  • महिला सशक्तिकरण पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म (विशेष पुरस्कार): कमली फ्रॉम नदुक्कावेरी
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता: सूर्या (सूररै पोट्रु)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री: अपर्णा बालमुरली (सूररै पोट्रु)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (विशेष पुरस्कार): तरुण कुमार (थेन्)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (विशेष पुरस्कार): एबरनैथी (थेन्)
  • सर्वश्रेष्ठ खलनायक: नंदा (वानम कोट्टट्टुम)
  • सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता: रक्षण (कन्नुम कन्नुम कोल्लैयाडिथाल)
  • सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेत्री: —
  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता: करुणास (सूररै पोट्रु)
  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री: वडिवुक्करसाई (जननायगम विर्पनैक्कु अल्ला)
  • सर्वश्रेष्ठ निर्देशक: सुधा कोंगरा (सूररै पोट्रु)
  • सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक: जी. वी. प्रकाश कुमार (सूररै पोट्रु)
  • सर्वश्रेष्ठ गीतकार: थमरई (थायनिलम)
  • सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक (पुरुष): अमरिश (संदकारी)
  • सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका (महिला): वर्षा रंजीत (थायनिलम)
  • सर्वश्रेष्ठ छायाकार: एन. के. एकंबरम (का पे रणसिंघम)
  • सर्वश्रेष्ठ संपादक: लॉरेंस किशोर (थेन्)
  • सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशक: अय्यप्पन (संदकारी)
  • सर्वश्रेष्ठ स्टंट कोरियोग्राफर: सुपर सुब्बारायन (चेसिंग)

2021 विजेता

  • सर्वश्रेष्ठ फिल्म (प्रथम पुरस्कार): जय भीम
  • सर्वश्रेष्ठ फिल्म (विशेष पुरस्कार): 2000 रुपये
  • महिला सशक्तिकरण के बारे में सर्वश्रेष्ठ फिल्म (विशेष पुरस्कार): नेत्रिकन
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता: आर्य (सरपट्टा परंबराई)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री: लिजोमोल जोस (जय भीम)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (विशेष पुरस्कार): पसुपति (सरपट्टा परंबराई)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (विशेष पुरस्कार): अमृता श्रीनिवासन (इरुधि पक्कम)
  • सर्वश्रेष्ठ खलनायक: थमिज़ (जय भीम)
  • सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता: योगी बाबू (डॉक्टर)
  • सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेत्री: मधुमिता (वारिसी)
  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता: के मणिकंदन (जय भीम)
  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री: डॉ रायचल रेबेका (कदैसी विवासयी)
  • सर्वश्रेष्ठ निर्देशक: था से ज्ञानवेल (जय भीम)
  • सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक: शॉन रोल्डन (जय भीम)
  • सर्वश्रेष्ठ गीतकार: थमराई (मारा)
  • सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक (पुरुष): अरिवु (जय भीम)
  • सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका (महिला): भवतारिणी (मामनिथन)
  • सर्वश्रेष्ठ छायाकार: रिचर्ड एम नाथन (मानाडु)
  • सर्वश्रेष्ठ संपादक: प्रवीण (मानाडु)
  • सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशक: टी रामलिंगम (कर्णन)
  • सर्वश्रेष्ठ स्टंट समन्वयक: महेश मैथ्यू (कोडियिल ओरुवन)

2022 के विजेता

  • सर्वश्रेष्ठ फिल्म (प्रथम पुरस्कार): गार्गी
  • सर्वश्रेष्ठ फिल्म (विशेष पुरस्कार): इराविन निझल
  • महिला सशक्तिकरण पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म (विशेष पुरस्कार): अवल अप्पडिथान 2
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता: विक्रम प्रभु (तानाक्करन)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री: साई पल्लवी (गार्गी)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (विशेष पुरस्कार): अप्पुकुट्टी (वाज़्गा विवसायी)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (विशेष पुरस्कार): दुशारा विजयन (नक्षत्रम नगरगिरधु)
  • सर्वश्रेष्ठ खलनायक: प्रकाश राज (विरुमन)
  • सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता: रोबो शंकर (मरणोपरांत) (इराविन निझल)
  • सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेत्री: इंद्रजा शंकर (विरुमन)
  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता: बोस वेंकट (तानाक्करन)
  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री: वसुंधरा (वाज़्गा विवसायी)
  • सर्वश्रेष्ठ निर्देशक: गौतम रामचंद्रन (गार्गी)
  • सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक: ए. आर. रहमान (पोन्नियिन सेलवन: भाग-1)
  • सर्वश्रेष्ठ गीतकार: इलंगो कृष्णन (पोन्नियिन सेलवन: भाग-1)
  • सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक (पुरुष): हरिचरण (इराविन निझल)
  • सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका (महिला): खातिजा रहमान (इराविन निझल)
  • सर्वश्रेष्ठ छायाकार: आर. आर्थर विल्सन (इराविन निझल)
  • सर्वश्रेष्ठ संपादक: सुरेश उर्स (उलगम्मै)
  • सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशक: थोता थरानी (पोन्नियिन सेलवन: भाग-1)
  • सर्वश्रेष्ठ स्टंट कोरियोग्राफर: अनल अरासु (विरुमन)

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