भारतीय डाक ने डिजिटल इंडिया को सशक्त बनाने हेतु IT 2.0 उन्नत डाक प्रौद्योगिकी का अनावरण किया

भारत डाक (India Post) ने आधिकारिक रूप से आईटी 2.0 – उन्नत डाक प्रौद्योगिकी (APT) को पूरे देश में लागू कर दिया है। यह कदम इसके डिजिटल परिवर्तन (Digital Transformation) की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। डिजिटल इंडिया पहल के अंतर्गत विकसित यह प्रणाली डाक क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकों को लाती है, जिससे कार्यप्रणाली सुगम होगी और नागरिकों को बेहतर अनुभव मिलेगा।

आईटी 2.0 – उन्नत डाक प्रौद्योगिकी क्या है?

प्रमुख नवाचार और विशेषताएँ

  • एकीकृत डिजिटल इंटरफ़ेस (Unified Digital Interface): सभी डाक सेवाओं और लेन-देन के लिए एक ही डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म।

  • क्यूआर-कोड आधारित भुगतान: QR स्कैनिंग के माध्यम से तुरंत और सुरक्षित कैशलेस भुगतान।

  • ओटीपी आधारित डिलीवरी सत्यापन: संवेदनशील वस्तुओं की डिलीवरी पर प्राप्तकर्ता की पहचान वन-टाइम पासवर्ड से सुनिश्चित।

  • डिजीपिन (DIGIPIN): 10 अंकों का अल्फ़ान्यूमेरिक डिजिटल पोस्टल पहचान संख्या, जिससे डिलीवरी की सटीकता और ट्रेसबिलिटी बेहतर होगी।

तकनीक और अवसंरचना

  • भारतीय विशेषज्ञता से निर्मित: इसे सेंटर फ़ॉर एक्सीलेंस इन पोस्टल टेक्नोलॉजी (CEPT) ने पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित किया है, जो आत्मनिर्भर भारत की भावना को दर्शाता है।

  • क्लाउड और कनेक्टिविटी: यह प्लेटफ़ॉर्म सरकार की उन्नत क्लाउड प्रणाली मेघराज 2.0 (MeghRaj 2.0) पर आधारित है।

  • BSNL नेटवर्क से समर्थन: शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मज़बूत और सतत कनेक्टिविटी सुनिश्चित।

नीतिगत दृष्टि और क्रियान्वयन

  • सरकार की रणनीतिक पहल: इस परियोजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया के नेतृत्व में हुई।

  • डिजिटल इंडिया मील का पत्थर: यह कदम पारंपरिक डाक सेवाओं को स्मार्ट, तेज़ और कुशल बनाएगा तथा भारत डाक को एक डिजिटल लॉजिस्टिक्स और संचार अवसंरचना में बदल देगा।

नागरिकों और सेवाओं के लिए लाभ

  • सटीकता में सुधार: नया DIGIPIN सिस्टम दूरदराज़ और ग्रामीण क्षेत्रों में पते की व्याख्या में होने वाली त्रुटियों को समाप्त करेगा।

  • सुरक्षा और गति: ओटीपी सत्यापन के ज़रिए पासपोर्ट, कानूनी दस्तावेज़ और आधार अपडेट जैसी संवेदनशील सेवाओं की सुरक्षित डिलीवरी।

  • कैशलेस लेन-देन: क्यूआर कोड भुगतान से ग्रामीण डाकघरों में भी डिजिटल लेन-देन संभव, जिससे वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा।

भारत ने ‘अग्नि-5’ बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया

भारत ने 20 अगस्त 2025 को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से अग्नि-5 इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) का सफल प्रक्षेपण किया। यह परीक्षण स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड के तहत किया गया, जिसमें सभी परिचालन और तकनीकी मानकों को परखा गया। इस सफलता ने भारत की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता (Strategic Deterrence Capability) को और मज़बूती प्रदान की।

भारत का यह सबसे लंबे दूरी का मिसाइल है, जिसे भारत का ब्रह्मास्त्र कहा जाता है। MIRV तकनीक वाली अग्नि 5 मिसाइल एक साथ कई सौ किलोमीटर में फैले तीन ठिकानों पर हमला कर सकता है, और उसे पलक झपकते ही तबाह कर सकता है। यह मिसाइल 29.401 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने में सक्षम है।

अग्नि-5 क्या है?

मिसाइल की रूपरेखा

  • प्रकार (Type): इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM)

  • रेंज (Range): 5,000 किमी से अधिक – एशिया के अधिकांश हिस्सों और यूरोप के कुछ भाग तक मारक क्षमता

  • पेलोड (Payload): पारंपरिक (Conventional) और परमाणु (Nuclear) दोनों प्रकार के वारहेड ले जाने में सक्षम

  • चरण (Stages): तीन-चरणीय, ठोस ईंधन (Solid Fuel) आधारित

  • लॉन्च प्लेटफ़ॉर्म: कैनिस्टराइज्ड – सड़कों पर चलने वाले मोबाइल प्लेटफ़ॉर्म से त्वरित प्रक्षेपण संभव

अग्नि-5 भारत की अग्नि श्रृंखला की सबसे उन्नत मिसाइल है। यह भारत की “नो फर्स्ट यूज़” (NFU) नीति के तहत परमाणु प्रतिरोधक रणनीति की रीढ़ (Backbone) मानी जाती है।

2025 परीक्षण का विवरण

  • तारीख: 20 अगस्त 2025

  • स्थान: इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR), चांदीपुर, ओडिशा

  • पर्यवेक्षण एजेंसी: स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड

  • उद्देश्य: परिचालन तत्परता और तकनीकी संरचनाओं का सत्यापन

परिणाम

  • परीक्षण पूरी तरह सफल रहा।

  • मिसाइल की सटीकता, विश्वसनीयता और प्रदर्शन की पुष्टि हुई।

  • यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोध (Credible Minimum Deterrence) बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है, खासकर तेजी से बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल में।

विश्व उद्यमी दिवस 2025: नवाचार, साहस और आर्थिक प्रभाव का जश्न

हर साल 21 अगस्त को दुनिया भर में विश्व उद्यमी दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2025 में यह दिवस गुरुवार को पड़ रहा है। यह दिन उन लोगों को सम्मानित करने का अवसर है जो विचारों को हकीकत में बदलते हैं, शून्य से व्यवसाय खड़े करते हैं और नवाचार तथा रोजगार दोनों को गति देते हैं। यह दिवस न केवल उद्यमियों की उपलब्धियों को मान्यता देता है बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था में उनके योगदान की गहरी समझ को भी प्रोत्साहित करता है।

विश्व उद्यमी दिवस क्या है?

विश्व उद्यमी दिवस एक अंतरराष्ट्रीय दिवस है जो नए व्यवसाय की नींव रखने वाले दूरदर्शी उद्यमियों को समर्पित है।

  • उद्यमी तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक प्रगति के केंद्र में होते हैं।

  • चाहे छोटे व्यवसायी हों या टेक्नोलॉजी स्टार्टअप के संस्थापक, यह दिवस उनकी सहनशीलता, रचनात्मकता और नेतृत्व को रेखांकित करता है।

  • इसका उद्देश्य उद्यमिता शिक्षा को बढ़ावा देना और नई पीढ़ी को नवाचार के माध्यम से वास्तविक समस्याओं के समाधान की ओर प्रेरित करना है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

उद्यमी केवल कंपनियाँ शुरू नहीं करते, बल्कि—

  • रोजगार सृजन करते हैं

  • GDP वृद्धि में योगदान देते हैं

  • सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए नवाचार लाते हैं

  • प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करते हैं जिससे गुणवत्ता में सुधार और प्रगति तेज़ होती है

आज की बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में उद्यमिता आर्थिक लचीलापन और सामाजिक प्रगति की आधारशिला है।

प्रमुख योगदान

  • विविध क्षेत्रों में रोजगार का सृजन

  • तकनीकी, सेवा और सतत विकास में नवाचार

  • स्थानीय और वैश्विक अर्थव्यवस्था को गति देना

  • प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा, जिससे गुणवत्ता और प्रगति को प्रोत्साहन

इतिहास और वैश्विक पहुँच

  • विश्व उद्यमी दिवस की उत्पत्ति का सटीक दस्तावेज़ीकरण उपलब्ध नहीं है।

  • 21वीं सदी में इसकी प्रासंगिकता तेज़ी से बढ़ी है।

  • आज इसे 170 से अधिक देशों में मान्यता प्राप्त है।

  • सरकारें, शैक्षणिक संस्थान और व्यवसायिक समुदाय इसे मिलकर मनाते हैं।

  • आयोजन में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, स्टार्टअप शोकेस और प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल होते हैं।

इसे कैसे मनाएँ या शामिल हों?

  1. कार्यक्रमों और कार्यशालाओं में भाग लें – उद्यमिता विकास और फंडिंग पर चर्चाएँ, पैनल डिस्कशन।

  2. स्थानीय और छोटे व्यवसायों का समर्थन करें – स्थानीय उद्यमियों से खरीदारी करके समुदाय को मज़बूत बनाएं।

  3. सफलता की कहानियाँ साझा करें – ब्लॉग, पॉडकास्ट या सोशल मीडिया पर प्रेरणादायक कहानियाँ फैलाएँ।

  4. उद्यमिता शिक्षा को बढ़ावा दें – स्कूल-कॉलेजों में बिज़नेस प्लान प्रतियोगिताएँ, गेस्ट लेक्चर और इंटरएक्टिव सेशन।

  5. सोशल मीडिया पर जुड़ें – #WorldEntrepreneursDay, #WED2025, #CelebrateEntrepreneurs, #InnovationLeaders जैसे हैशटैग का उपयोग करें।

प्रेरणादायक विषय और रुझान

हर साल इस दिवस पर चर्चाएँ इन मुद्दों पर केंद्रित रहती हैं:

  • सतत व्यवसाय (Sustainability)

  • महिला और अल्पसंख्यक उद्यमिता

  • तकनीकी नवाचार और डिजिटल परिवर्तन

  • सामाजिक उद्यमिता और इम्पैक्ट इन्वेस्टिंग

ये विषय दर्शाते हैं कि उद्यमिता केवल लाभ कमाने का साधन नहीं बल्कि सकारात्मक बदलाव की शक्ति भी है।

कोर सेक्टर की ग्रोथ जुलाई में घटकर 2% रही

भारत के आठ प्रमुख उद्योगों (कोर इंडस्ट्रीज़) ने जुलाई 2025 में वर्ष-दर-वर्ष (YoY) आधार पर 2% की वृद्धि दर्ज की है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा आँकड़ों के अनुसार यह मामूली बढ़त मिश्रित प्रदर्शन को दर्शाती है—जहाँ इस्पात, सीमेंट, उर्वरक और बिजली क्षेत्र में मज़बूत विस्तार हुआ, वहीं कोयला उत्पादन में भारी गिरावट और पेट्रोलियम उत्पादों में कमी ने असर डाला।

कोर सेक्टर को समझना

आठ प्रमुख उद्योग कौन-कौन से हैं?

भारत के औद्योगिक स्वास्थ्य का मुख्य पैमाना माने जाने वाले कोर सेक्टर में ये आठ उद्योग शामिल हैं:

  1. कोयला (Coal)

  2. कच्चा तेल (Crude Oil)

  3. प्राकृतिक गैस (Natural Gas)

  4. पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद (Petroleum Refinery Products)

  5. उर्वरक (Fertilisers)

  6. इस्पात (Steel)

  7. सीमेंट (Cement)

  8. बिजली (Electricity)

इनका संयुक्त भार 40.27% है सूचकांक औद्योगिक उत्पादन (IIP) में।

जुलाई 2025 का प्रदर्शन

सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर

  • इस्पात (Steel): 12.8% की तेज़ वृद्धि—सबसे ऊँचा प्रदर्शन, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की मांग से मज़बूत सहारा।

  • सीमेंट (Cement): 11.7% की बढ़त—निर्माण और रियल एस्टेट गतिविधियों के साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च से बढ़ावा।

  • उर्वरक (Fertilisers): 2% की वृद्धि—अनुकूल मानसून के बाद खरीफ बुवाई सीजन से सहारा।

  • बिजली (Electricity): 0.5% की मामूली बढ़त—उत्पादन स्थिर, लेकिन मौसम संबंधी कारणों से कुछ बाधा।

जिन सेक्टरों में गिरावट आई

  • कोयला (Coal): 12.3% की भारी गिरावट—भारी मानसून बारिश से खनन कार्य बाधित।

  • कच्चा तेल (Crude Oil): 1.3% की गिरावट—घरेलू उत्पादन में लंबे समय से ठहराव जारी।

  • प्राकृतिक गैस (Natural Gas): 3.2% की कमी—अपस्ट्रीम गतिविधि में कमी का असर।

  • पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद (Petroleum Refinery Products): 1% की गिरावट—डाउनस्ट्रीम गतिविधि धीमी।

संचयी प्रदर्शन (अप्रैल–जुलाई 2025-26)

  • कुल वृद्धि: 1.6% (पिछले साल की तुलना में)।

  • मज़बूत क्षेत्र:

    • सीमेंट: 8.9% की बढ़त

    • इस्पात: 8.5% की बढ़त

सरकारी पूंजीगत व्यय और पीएम गति शक्ति योजना के तहत तेज़ी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार ने इन क्षेत्रों को मज़बूती प्रदान की।

दुबई ने व्यवसाय लाइसेंसिंग को सरल बनाने के लिए शुरू किया ‘वन फ़्रीज़ोन पासपोर्ट’

दुबई ने अपने वैश्विक व्यवसाय केंद्र की स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए “वन फ़्रीज़ोन पासपोर्ट” की शुरुआत की है। यह एकीकृत लाइसेंसिंग प्रणाली कंपनियों को एक ही लाइसेंस के तहत अमीरात के सभी फ़्रीज़ोन में काम करने की अनुमति देती है। दुबई फ़्रीज़ोन काउंसिल द्वारा लॉन्च किया गया यह सुधार लागत को कम करने, नौकरशाही को घटाने और व्यापार विस्तार को तेज़ करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

सभी फ़्रीज़ोन में एकीकृत व्यवसाय मॉडल

पहले कंपनियों को हर फ़्रीज़ोन में काम करने के लिए अलग-अलग लाइसेंस लेना पड़ता था। अब “वन फ़्रीज़ोन पासपोर्ट” इस आवश्यकता को समाप्त कर देता है, जिससे व्यवसायों को दोबारा पंजीकरण या डुप्लीकेट अनुपालन जांच से नहीं गुजरना होगा।

मुख्य विशेषताएँ

  • एक ही लाइसेंस, दुबई के सभी फ़्रीज़ोन में मान्य।

  • नए और मौजूदा दोनों प्रकार की कंपनियों पर तुरंत लागू।

  • नियामकीय अनुपालन और संचालन में आसानी।

  • कर छूट, 100% विदेशी स्वामित्व और अन्य फ़्रीज़ोन लाभों तक पहुँच।

दुबई की डी33 आर्थिक एजेंडा से जुड़ाव

यह कदम दुबई के आर्थिक एजेंडा डी33 को सीधा समर्थन देता है, जिसका लक्ष्य 2033 तक दुबई के GDP को दोगुना करना और उसे विश्व की शीर्ष तीन आर्थिक नगरियों में शामिल करना है।

दुबई फ़्रीज़ोन काउंसिल के अध्यक्ष शेख़ अहमद बिन सईद अल मक़तूम के अनुसार, यह पहल निवेशकों और उद्यमियों के लिए “गेम-चेंजर” है, जो प्रतिस्पर्धी और व्यवसाय-हितैषी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के प्रति दुबई की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

व्यवसायों के लिए रणनीतिक लाभ

  1. लागत और समय की बचत

    • कई लाइसेंस आवेदनों और डुप्लीकेट कागज़ी कार्य की ज़रूरत खत्म।

    • अनुपालन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुगमता।

  2. तेज़ बाज़ार में प्रवेश

    • स्टार्टअप और बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ तुरंत विभिन्न फ़्रीज़ोन में विस्तार कर सकेंगी।

  3. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में वृद्धि

    • अंतरराष्ट्रीय व्यवसायों के लिए बाधाएँ कम होने से दीर्घकालिक निवेश आकर्षित होंगे।

  4. अंतर-क्षेत्रीय सहयोग

    • यह प्लेटफ़ॉर्म लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देगा।

बैंकों ने ‘स्टैंड-अप इंडिया’ योजना के तहत 2.75 लाख लाभार्थियों को ₹62,791 करोड़ की स्वीकृति दी

अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और महिलाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए अप्रैल 2016 में शुरू की गई स्टैंड-अप इंडिया योजना ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा संसद में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, अगस्त 2025 तक, बैंकों ने 2,75,291 लाभार्थियों को ₹62,791 करोड़ के ऋण स्वीकृत किए हैं।

स्टैंड-अप इंडिया योजना के बारे में
5 अप्रैल 2016 को शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और महिलाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देना है। इसके तहत हरे-भरे (ग्रीनफील्ड) उद्यम स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।

मुख्य विशेषताएँ

  • पात्रता: प्रत्येक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक शाखा में कम से कम एक SC/ST और एक महिला उद्यमी।

  • ऋण राशि: ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक।

  • क्षेत्र: व्यापार, निर्माण, सेवा और कृषि से संबद्ध गतिविधियाँ।

अब तक की उपलब्धियाँ

  • ऋण स्वीकृत: ₹62,791 करोड़।

  • कुल लाभार्थी: 2,75,291 खाते (SC/ST एवं महिला उद्यमी)।

  • प्रभाव: अर्द्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रथम-पीढ़ी उद्यमियों को औपचारिक ऋण उपलब्ध हुआ, जिससे व्यवसाय और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिला।

संशोधित ब्याज अनुदान योजना (MISS) – फसल ऋण हेतु

  • FY 2024–25 में कुल ₹17,811.72 करोड़ का वितरण।

  • इसमें ब्याज अनुदान और शीघ्र पुनर्भुगतान प्रोत्साहन (PRI) शामिल।

  • किसानों पर ब्याज का बोझ कम हुआ और सस्ती दर पर ऋण उपलब्ध हुआ।

महत्व

  • समावेशी उद्यमिता: महिलाओं और SC/ST समुदायों को पूंजी तक पहुंच।

  • कृषि ऋण समर्थन: किसानों की वित्तीय चुनौतियों में कमी।

  • डिजिटल ऋण नियमन: सुरक्षित और नवोन्मेषी फिनटेक वातावरण।

ये पहलें समावेशी विकास, ग्रामीण प्रगति और वित्तीय स्थिरता की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

भारत की GDP ग्रोथ वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में 6.7% रहने की उम्मीद

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (Q1) में भारत की अर्थव्यवस्था 6.7% की दर से बढ़ेगी, जो भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 6.5% के अनुमान से अधिक है। हालांकि यह वृद्धि FY2025 की चौथी तिमाही (Q4) में दर्ज 7.4% की तुलना में कुछ कम है, लेकिन सेवाक्षेत्र की मज़बूती और सरकारी पूंजीगत व्यय में तेज़ी के चलते यह दर काफ़ी ठोस मानी जा रही है।

क्षेत्रवार प्रदर्शन: सेवाक्षेत्र आगे, उद्योग में मंदी

सकल मूल्य संवर्धन (GVA)

  • Q1 FY2026 में 6.4% वृद्धि का अनुमान (Q4 FY2025 के 6.8% से कम)।

  • उद्योग: वृद्धि घटकर 4.0% रह सकती है (पिछली तिमाही में 6.5%)।

  • कृषि, वानिकी एवं मत्स्य पालन: 5.4% से घटकर 4.5% पर आने की संभावना, हालाँकि 2024–25 के अच्छे फसल उत्पादन का लाभ रहेगा।

  • सेवाक्षेत्र: आठ तिमाहियों में सबसे ऊँची वृद्धि 8.3%, (Q4 FY2025 में 7.3%), मुख्यतः सरकारी खर्च से प्रेरित।

परोक्ष कर एवं सब्सिडी प्रवृत्तियाँ

  • परोक्ष कर राजस्व में 11.3% वृद्धि, जबकि पिछली तिमाही (Q4) में 3.1% की गिरावट थी।

  • सब्सिडी व्यय में 7.3% संकुचन, जो Q4 FY2025 के 40.7% से कहीं धीमा रहा।

  • इसके चलते GDP और GVA में 30 आधार अंकों का सकारात्मक अंतर रहा (Q4 में 62 अंक)।

सरकारी व्यय: वृद्धि का प्रमुख कारक

केंद्र सरकार का खर्च

  • Q1 FY2026 में पूंजीगत व्यय 52% वार्षिक वृद्धि के साथ ₹2.8 ट्रिलियन पर पहुँचा।

  • यह Q4 FY2025 की 33.4% वृद्धि और Q1 FY2025 की 35% गिरावट की तुलना में काफ़ी बेहतर है।

राज्य सरकारों का खर्च (24 राज्यों के आँकड़े)

  • पूंजीगत व्यय एवं शुद्ध ऋण वितरण 23% वृद्धि के साथ ₹1.1 ट्रिलियन।

  • Q4 FY2025 की 27% वृद्धि से थोड़ा कम, पर Q1 FY2025 की 19.6% गिरावट से बेहतर।

राजस्व व्यय

  • राज्यों का गैर-ब्याज राजस्व व्यय 10.7% वृद्धि पर।

  • केंद्र का गैर-ब्याज राजस्व व्यय 6.9% बढ़ा, जबकि Q4 FY2025 में इसमें 6.1% की गिरावट हुई थी।

निजी क्षेत्र की गतिविधि: परियोजनाओं में उछाल

  • नई परियोजनाओं की घोषणाएँ लगभग दोगुनी होकर ₹5.8 ट्रिलियन (Q1 FY2025 में ₹3.0 ट्रिलियन)।

  • परियोजना पूर्णता ₹2.3 ट्रिलियन, जो पिछले साल (₹0.7 ट्रिलियन) से कहीं अधिक है, हालाँकि Q4 FY2025 (₹2.5 ट्रिलियन) से थोड़ा कम।

आगे की संभावनाएँ

ICRA का मानना है कि आर्थिक गति स्थिर रह सकती है, जिसे सहारा मिलेगा:

  • सरकारी व्यय और अधोसंरचना निवेश से।

  • संभावित मौद्रिक नरमी और बेहतर ऋण प्रवाह से।

  • आगामी GST संरचना सुधार, जो त्योहारों से पहले शहरी खपत को प्रोत्साहित करेगा।

कृषि और उद्योग में कुछ सुस्ती के बावजूद, सेवाक्षेत्र की मजबूती और नीति-आधारित खर्च भारत की विकास दर को मज़बूत बनाए रखेगा।

आदि कर्मयोगी अभियान: उत्तरदायी शासन के लिए दुनिया का सबसे बड़ा जनजातीय नेतृत्व कार्यक्रम शुरू

आदि कर्मयोगी अभियान (Adi Karmayogi Abhiyan), जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा 19 अगस्त 2025 को शुरू किया गया, भारत की जनजातीय समुदायों को सशक्त बनाने की एक ऐतिहासिक पहल है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा जनजातीय नेतृत्व कार्यक्रम कहा जा रहा है, जिसका लक्ष्य 1 लाख जनजाति-प्रधान गाँवों में 20 लाख परिवर्तनकारी नेतृत्वकर्ताओं (Change Leaders) को संगठित करना है। यह अभियान विकसित भारत 2047 की दृष्टि के अनुरूप, जनकेंद्रित और समावेशी विकास मॉडल की नींव रखता है।

मूल दृष्टि और दर्शन

आदि कर्मयोगी अभियान की प्रेरणा तीन आदर्शों से ली गई है:

  • सेवा

  • संकल्प

  • समर्पण

ये सिद्धांत शासन की उस समावेशी भावना को प्रतिबिंबित करते हैं, जिसे “सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास, सबका विश्वास” कहा गया है। यह पहल जनजातीय गौरव वर्ष का केंद्रीय हिस्सा है, जो भारत की जनजातीय विरासत और भविष्य का उत्सव मनाता है।

अभियान के प्रमुख उद्देश्य

  • उत्तरदायी और जन-चालित शासन को सभी स्तरों पर बढ़ावा देना।

  • गवर्नेंस लैब कार्यशालाएँ (Governance Lab Workshops) आयोजित कर राज्य से लेकर गाँव स्तर तक अधिकारियों की क्षमता बढ़ाना।

  • जनजातीय समुदायों के साथ मिलकर “1 लाख जनजातीय गाँव – विज़न 2030” तैयार करना, जिसमें लक्ष्य, निवेश और स्थानीय रणनीतियाँ निर्धारित हों।

  • 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और 550 ज़िलों में 20 लाख जनजातीय नेतृत्वकर्ताओं का नेटवर्क बनाना।

प्रमुख घटक और परिणाम

1. आदि सेवा केंद्र (Adi Sewa Kendra)

  • जनजातीय क्षेत्रों में स्थापित सेवा केंद्र

  • अधिकारी और समुदाय सदस्य “आदि सेवा समय” देंगे (प्रत्येक पखवाड़े 1–2 घंटे)

  • स्थानीय समस्याओं का समाधान, युवाओं का मार्गदर्शन और गाँव के विकास कार्यों पर ध्यान

2. गवर्नेंस लैब कार्यशालाएँ (Governance Lab Workshops)

  • प्रशासनिक स्तरों पर समस्याओं के समाधान हेतु प्रक्रिया प्रयोगशालाएँ

  • 10 जुलाई 2025 से सक्रिय

  • राज्य, ज़िला और ब्लॉक मास्टर ट्रेनरों की क्षमता-वृद्धि केंद्र

3. जनजातीय गाँव कार्ययोजना (Tribal Village Action Plans)

  • प्रत्येक जनजातीय गाँव द्वारा विज़न 2030 रोडमैप तैयार

  • सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप

  • सभी सरकारी योजनाओं और सेवाओं की संतृप्ति (Saturation) सुनिश्चित

4. सामुदायिक नेतृत्व और स्वयंसेवी नेटवर्क

  • आदि सहयोगी (Adi Sahyogi): शिक्षक, डॉक्टर, मेंटर जैसे पेशेवर मार्गदर्शन देंगे।

  • आदि साथी (Adi Saathi): स्थानीय हितधारक—स्वयं सहायता समूह (SHGs), एनआरएलएम सदस्य, जनजातीय बुज़ुर्ग और युवा नेता—क्रियान्वयन व जागरूकता में भाग लेंगे।

  • प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं, महिलाओं और स्थानीय नेताओं को शासन, समस्या समाधान और सामाजिक गतिशीलता में प्रशिक्षित किया जाएगा।

राष्ट्रीय कार्यक्रमों के साथ एकीकरण

यह अभियान कई प्रमुख योजनाओं से जुड़ा हुआ है:

  • धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान

  • प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (PM JANMAN)

  • राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन

इनसे मिलकर यह जनजातीय क्षेत्रों के लिए एक समग्र और मिशन मोड विकास रणनीति प्रदान करता है।

सामरिक महत्व

आदि कर्मयोगी अभियान केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि यह एक प्रणालीगत बदलाव है जो शासन के केंद्र में जनजातीय नागरिकों को स्थापित करता है।

  • यह समुदायों को योजना और समस्या-समाधान की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाता है।

  • जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक ढाँचा मज़बूत करता है।

  • जनजातीय जनसंख्या को अपने विकास यात्रा का निर्माता बनने का अवसर देता है।

  • इससे विश्वास, जवाबदेही और सतत प्रगति को बढ़ावा मिलेगा।

संसद ने महत्वपूर्ण खनिज उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु ऐतिहासिक खनिज एवं खनिज (संशोधन) विधेयक, 2025 को मंज़ूरी दी

संसद ने 19 अगस्त 2025 को खनिज एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2025 पारित किया, जो एमएमडीआर अधिनियम, 1957 में एक महत्वपूर्ण सुधार है। यह विधेयक भारत के खनिज क्षेत्र को रूपांतरित करेगा—विशेषकर महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच बढ़ाने, खोज की आधुनिक पद्धतियों को अपनाने और संसाधन प्रबंधन की दक्षता सुधारने में।

प्रमुख संशोधन और प्रावधान

1. ट्रस्ट का विस्तार
राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (National Mineral Exploration Trust) का नाम बदलकर राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण एवं विकास ट्रस्ट कर दिया गया है। अब यह ट्रस्ट भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशी परियोजनाओं को भी समर्थन देगा। ट्रस्ट की निधि क्षमता को और मज़बूत करने के लिए रॉयल्टी योगदान 2% से बढ़ाकर 3% कर दिया गया है।

2. गहन-स्थित खनिजों हेतु पट्टे में लचीलापन
खनन पट्टा धारक अब अपने क्षेत्र को 10% (साधारण पट्टों के लिए) और 30% (समग्र लाइसेंस के लिए) तक बढ़ा सकेंगे। यह सुविधा विशेष रूप से गहन-स्थित और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और रेयर अर्थ के लिए दी गई है। अब पट्टा धारक बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के अपने मौजूदा पट्टे में इन खनिजों को जोड़ सकेंगे।

3. कैप्टिव खनन का उदारीकरण
पहले कैप्टिव खनन (Captive Mining) में 50% तक की बिक्री की सीमा थी। अब इसे हटा दिया गया है। पट्टा धारक अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद शेष खनिज खुले बाज़ार में स्वतंत्र रूप से बेच सकते हैं, जिसके लिए केवल नाममात्र का अतिरिक्त भुगतान सरकार को करना होगा।

4. खनिज विनिमय (Mineral Exchanges) की स्थापना
खनिजों के पारदर्शी और कुशल व्यापार के लिए औपचारिक खनिज विनिमय मंचों को अधिकृत किया गया है। ये प्लेटफ़ॉर्म बेहतर मूल्य निर्धारण तंत्र को बढ़ावा देंगे और निवेशकों का विश्वास मज़बूत करेंगे।

5. सतत खनन और सामरिक संसाधन सुरक्षा
शून्य-अपशिष्ट खनन (Zero-Waste Mining) और ज़िम्मेदार खनन को प्रोत्साहित किया गया है। यह संशोधन भारत के पर्यावरणीय लक्ष्यों और राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के अनुरूप है, जिससे विद्युत वाहन, रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सामरिक क्षेत्रों को लाभ होगा।

व्यापक उद्देश्य और प्रभाव

भारत वर्तमान में महत्वपूर्ण खनिजों के लिए आयात पर निर्भर है, जो हाई-टेक उद्योगों और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं। सीमित घरेलू भंडार और बढ़ती मांग को देखते हुए यह विधेयक—

  • आयात निर्भरता कम करेगा

  • स्थानीय उत्पादन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा

  • निजी निवेश व विदेशी सहयोग आकर्षित करेगा

  • भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में स्थिति को मज़बूत करेगा

आधुनिक नियमों, खोज क्षमता के विस्तार और उच्च-मूल्य खनिजों तक आसान पहुंच से यह संशोधन भारत को महत्वपूर्ण आर्थिक और सामरिक लाभ दिलाने में सहायक सिद्ध होगा।

चुनाव आयोग ने छह महीनों में चुनाव प्रणाली को मजबूत करने हेतु 28 सुधार पहलों का अनावरण किया

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने बीते छह महीनों में पारदर्शिता, दक्षता और समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए 28 महत्वपूर्ण पहलें लागू की हैं। ये सुधार तकनीकी एकीकरण, मतदाता सुविधा, सिस्टम शुद्धिकरण और क्षमता निर्माण तक फैले हुए हैं, जो एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी लोकतंत्र सुनिश्चित करने की आयोग की प्रतिबद्धता को मजबूत करते हैं।

सुधारों के छह स्तंभ

ये पहलें छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित हैं:

  1. हितधारक सहभागिता

  2. निर्वाचन प्रणाली शुद्धिकरण

  3. प्रौद्योगिकी एकीकरण

  4. मतदाता सूची शुद्धिकरण

  5. मतदान की सुविधा

  6. क्षमता निर्माण

हर स्तंभ का उद्देश्य मतदाता विश्वास, प्रशासनिक दक्षता और संस्थागत जवाबदेही को सुदृढ़ करना है।

28 सुधारों की मुख्य झलकियाँ

1. हितधारक सहभागिता

  • पूरे देश में 4,700 से अधिक सर्वदलीय बैठकें

  • 28,000+ पार्टी प्रतिनिधियों की भागीदारी।

  • राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय दलों के साथ 20 उच्च स्तरीय बैठकें, सुझाव और सर्वसम्मति निर्माण हेतु।

2. निर्वाचन प्रणाली शुद्धिकरण

  • निष्क्रिय राजनीतिक दलों को सूची से हटाना।

  • पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बीएलओ (Booth Level Officers) के लिए फोटो पहचान पत्र की शुरुआत।

  • ईवीएम सत्यापन प्रोटोकॉल को मज़बूत करना (माइक्रोकंट्रोलर सत्यापन, सुरक्षा प्रक्रिया)।

3. प्रौद्योगिकी एकीकरण

  • ECINET का शुभारंभ – 40+ चुनाव/मतदाता ऐप्स का एकीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म।

  • सभी मतदान केंद्रों से 100% वेबकास्टिंग, वास्तविक समय निगरानी हेतु।

  • रियल-टाइम वोटर टर्नआउट अपडेट, आम जनता और राजनीतिक दलों को उपलब्ध।

  • डेटा असंगति की स्थिति में VVPAT स्लिप की अनिवार्य गिनती, पारदर्शिता हेतु।

4. मतदाता सूची शुद्धिकरण

  • बिहार सहित पाँच राज्यों में विशेष संशोधन।

  • मृत्यु पंजीकरण डेटाबेस से रीयल-टाइम इंटीग्रेशन, मृत मतदाताओं का नाम हटाने हेतु।

  • डुप्लीकेट EPIC नंबरों का उन्मूलन।

  • SMS अलर्ट सेवा, जिससे नागरिकों को 15 दिन में मतदाता पहचान पत्र की जानकारी व डिलीवरी सुनिश्चित।

5. मतदान की सुविधा

  • मतदान केंद्रों के बाहर मोबाइल जमा काउंटर, सुरक्षा व सुविधा के लिए।

  • प्रत्येक मतदान केंद्र पर मतदाताओं की अधिकतम सीमा में कमी, भीड़ नियंत्रण हेतु।

  • अधिक स्पष्टता वाले मतदाता सूचना पर्चे

  • प्रत्याशियों को मतदान केंद्र से 100 मीटर दूर बूथ लगाने की अनुमति (ग़ैर-आधिकारिक पहचान पर्ची हेतु)।

6. क्षमता निर्माण

  • 7,000+ बीएलओ और पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण (IIIDEM में)।

  • फील्ड और मतदान कर्मियों के लिए मानदेय व अल्पाहार में वृद्धि।

  • क्षमता निर्माण का दायरा ब्ला (Booth Level Agents), मीडिया कर्मियों और पुलिस अधिकारियों तक बढ़ाया।

संस्थागत क्षमता को मज़बूत करना

चुनाव आयोग ने आंतरिक संचालन में भी सुधार किए हैं:

  • चुनावी स्टाफ के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली

  • ई-ऑफिस प्रणाली अपनाना, ताकि दस्तावेज़ीकरण और निर्णय तेज़ हो सके।

  • कई प्रशासनिक कार्यों को IIIDEM में स्थानांतरित करना, ताकि संचालन सुगम बने।

ये सभी कदम चुनाव आयोग की सुशासन और पारदर्शिता का आदर्श मॉडल प्रस्तुत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

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