World Mosquito Day 2025: जानें डेंगू और मलेरिया से बचाव की जरूरी सावधानियां

विश्व मच्छर दिवस प्रतिवर्ष 20 अगस्त को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मच्छरों से फैलने वाले रोगों के प्रति जागरूकता फैलाना तथा उनसे बचाव एवं नियंत्रण के उपायों को प्रोत्साहित करना है। यह दिन मच्छरों से होने वाली बीमारियों, जैसे मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और जीका वायरस, के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है।

World Mosquito Day की थीम

वर्ल्ड मच्छर दिवस 2025 की थीम है “अधिक समतापूर्ण विश्व के लिए मलेरिया के खिलाफ लड़ाई को तेज करना” (Accelerating the Fight Against Malaria for a More Equitable World)। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल करोड़ों लोग इन बीमारियों से प्रभावित होते हैं, इसलिए बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

  • 20 अगस्त, 1897 को प्रसिद्ध ब्रिटिश चिकित्सक एवं वैज्ञानिक सर रोनाल्ड रॉस ने यह सिद्ध किया कि मादा एनोफिलीज़ मच्छर ही मलेरिया का वाहक है।
  • इस खोज ने चिकित्सा विज्ञान की दिशा ही बदल दी और मलेरिया नियंत्रण की नींव रखी।
  • इस महत्वपूर्ण योगदान के लिए रोनाल्ड रॉस को वर्ष 1902 में नोबेल पुरस्कार (चिकित्सा/शारीरिकी) से सम्मानित किया गया।
  • उनकी इस ऐतिहासिक खोज की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 20 अगस्त को विश्व मच्छर दिवस मनाया जाता है।

उद्देश्य

  • मच्छरजनित रोगों के बारे में जनसाधारण को जागरूक करना।
  • रोग-नियंत्रण हेतु वैज्ञानिक अनुसंधान एवं चिकित्सा प्रयासों को प्रोत्साहन देना।
  • मच्छरों की रोकथाम एवं उन्मूलन संबंधी उपायों को लोकप्रिय बनाना।
  • वैश्विक स्तर पर मलेरिया उन्मूलन की दिशा में सहयोग सुनिश्चित करना।

भारत और मच्छरजनित रोग नियंत्रण

  • भारत लंबे समय से मलेरिया, डेंगू, फाइलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से प्रभावित रहा है।
  • इसके नियंत्रण हेतु भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NVBDCP) संचालित है।
  • भारत सरकार ने राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन रूपरेखा 2016-2030 के अंतर्गत 2030 तक मलेरिया-मुक्त राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखा है।

रोकथाम एवं नियंत्रण के उपाय

  • घर एवं आसपास पानी एकत्रित न होने देना।
  • मच्छरदानी, रिपेलेंट व जालीदार खिड़कियों का उपयोग।
  • जल-स्रोतों (कूलर, टंकी, गमले) की नियमित सफाई एवं जल-परिवर्तन।
  • सामुदायिक स्तर पर स्वच्छता अभियान तथा कीटनाशी छिड़काव।
  • जन-जागरूकता और स्वास्थ्य शिक्षा। 

डेंगू और मलेरिया से बचाव के आसान घरेलू नुस्खे

  • नीम का तेल और कपूर – नीम के तेल को पानी में मिलाकर कमरे में छिड़काव करने से मच्छर भागते हैं। कपूर जलाकर कमरे में रखने से भी मच्छर नहीं आते।
  • तुलसी का पौधा – घर में तुलसी लगाने से मच्छरों की संख्या कम होती है, क्योंकि इसकी खुशबू मच्छरों को पसंद नहीं आती।
  • लहसुन और पुदीना – लहसुन की गंध और पुदीने का तेल दोनों ही मच्छरों को दूर रखने में असरदार हैं।
  • सरसों और नारियल तेल – इन तेलों को मिलाकर शरीर पर लगाने से मच्छर काटने से बचते हैं।
  • नींबू और लौंग – नींबू के टुकड़ों में लौंग लगाकर कमरे में रखने से मच्छर पास नहीं आते।

मच्छरों से होने वाली बीमारियां

WHO की रिपोर्ट के मुताबिक, वेक्टर बोर्न डिजीज को मच्छरजनित रोग कहा जाता है। इसका मतलब है मच्छरों से होने वाले बुखार। ये एक संक्रामक रोग होता है जो हर साल दुनियाभर में 7,00,000 से ज़्यादा मौतों का कारण बनता है। इनमें सबसे ज्यादा तेजी से फैलने वाला बुखार मलेरिया है। मलेरिया से प्रतिवर्ष 608,000 से अधिक मौतें होती हैं, जिनमें भी 5 साल से कम आयु के बच्चे शामिल होते हैं। वहीं, डेंगू भी 132 देशों में लोगों को प्रभावित करने वाला बुखार है। डेंगू से हर साल लगभग 40,000 मौतें होती हैं। इसके अलावा, चिकनगुनिया, जीका फीवर, पीला बुखार, वेस्ट नाइल फीवर, जापानी एन्सेफलाइटिस और ओरोपोचे बुखार भी मच्छरों से होने वाले रोग हैं।

रूस 2036 तक शुक्र ग्रह के लिए वेनेरा-डी मिशन प्रक्षेपित करेगा

रूस ने आधिकारिक तौर पर यह घोषणा की है कि वह 2034 से 2036 के बीच वेनेरा-डी मिशन के माध्यम से शुक्र ग्रह (Venus) की खोज में वापसी करेगा। इस बहुप्रतीक्षित मिशन में एक लैंडर, ऑर्बिटल यान और गुब्बारा जांच यान (Balloon Probe) शामिल होंगे। यह रूस की दशकों बाद अंतरग्रहीय अन्वेषण (Interplanetary Exploration) में वापसी होगी और सोवियत काल के ऐतिहासिक वेनेरा कार्यक्रम को पुनर्जीवित करेगी।

यह पहल रूस के नए राष्ट्रीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का हिस्सा है। स्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट (IKI) के ओलेग कोराबलेव के अनुसार, जनवरी 2026 से इस मिशन की प्रारंभिक डिज़ाइन पर काम शुरू होगा।

वेनेरा-डी मिशन क्या है?

वेनेरा-डी में “डी” का अर्थ है “डोल्गोज़िवुशाया” (लॉन्ग-लिव्ड / दीर्घजीवी)। इसका उद्देश्य शुक्र ग्रह के वातावरण, सतह और जलवायु तंत्र पर गहन वैज्ञानिक डेटा एकत्र करना है। यह सोवियत युग के वेनेरा और वेगा कार्यक्रमों के बाद रूस का सबसे बड़ा शुक्र अन्वेषण प्रयास होगा।

मिशन के घटक

  • लैंडर: सतह की संरचना, तापमान, दाब (Pressure) और संभव हो तो मिट्टी का विश्लेषण करेगा।

  • ऑर्बिटल यान: उच्च-रिज़ॉल्यूशन चित्र, वातावरण संबंधी अध्ययन और अन्य यंत्रों से डेटा एकत्र करेगा।

  • गुब्बारा जांच यान: शुक्र ग्रह के ऊपरी वातावरण में तैरता रहेगा और तापमान, हवाओं तथा रासायनिक संरचना को लंबे समय तक मापेगा।

समयरेखा और विकास

  • प्रारंभिक डिज़ाइन चरण: जनवरी 2026 से, अवधि 2 वर्ष

  • सहयोग: लावोच्किन एसोसिएशन (रूसी एयरोस्पेस कंपनी)

  • प्रक्षेपण खिड़की: 2034 से 2036 के बीच

  • लॉन्च वाहन: रूसी रॉकेट से प्रक्षेपण

शुक्र ग्रह की कठोर परिस्थितियों को देखते हुए यह डिज़ाइन और योजना चरण अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

वैज्ञानिक लक्ष्य

  • वातावरण की गति (Atmospheric Dynamics) और बादलों की रसायन प्रक्रिया को समझना

  • ज्वालामुखीय गतिविधि (Volcanism) के वर्तमान या पूर्व संकेतों की जांच

  • जलवायु विकास का अध्ययन और पृथ्वी से तुलना

  • संभावित प्राचीन जीवन के संकेत या निवास योग्य परिस्थितियों का पता लगाना

वैश्विक परिप्रेक्ष्य

हाल के वर्षों में शुक्र ग्रह के प्रति रुचि बढ़ी है, खासकर फॉस्फीन गैस (संभावित जैव-चिह्न) की खोज संबंधी बहस के बाद।

  • NASA: VERITAS और DAVINCI+ मिशन

  • ESA (यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी): EnVision मिशन (2030 के शुरुआती दशक में)

  • रूस: वेनेरा-डी (2034–36)

इस तरह वेनेरा-डी विश्व स्तर पर शुक्र अन्वेषण की नई दौड़ में रूस की वापसी को दर्शाता है।

जुलाई में भारत की बेरोजगारी दर घटकर 5.2% हुई

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अनुसार, भारत की बेरोज़गारी दर जुलाई 2025 में घटकर 5.2% पर आ गई। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के ताज़ा आँकड़े बताते हैं कि ग्रामीण भारत रोजगार वृद्धि का मुख्य चालक रहा, जहाँ कृषि सबसे बड़ा नियोक्ता बनी हुई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में सेवाक्षेत्र (Services Sector) रोजगार में अग्रणी रहा।

यह नतीजे नीति-निर्माताओं के लिए सकारात्मक संकेत हैं, जो अब ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समावेशी रोजगार सृजन पर ज़ोर दे रहे हैं।

प्रमुख श्रम बल संकेतक

PLFS की त्रैमासिक बुलेटिन (अप्रैल–जून 2025) और मासिक बुलेटिन (जुलाई 2025) में भारत के रोजगार परिदृश्य की विस्तृत तस्वीर सामने आई।

त्रैमासिक रुझान (अप्रैल–जून 2025)

  • श्रम बल भागीदारी दर (LFPR)

    • कुल: 55%

    • ग्रामीण: 57.1%

    • शहरी: 50.6%

  • कार्यकर्ता जनसंख्या अनुपात (WPR)

    • कुल: 52%

    • ग्रामीण: 54.4%

    • शहरी: 47.1%

  • बेरोज़गारी दर (UR)

    • कुल: 5.4%

    • ग्रामीण: 4.8%

    • शहरी: 6.8%

मासिक रुझान (जुलाई 2025)

  • LFPR: 54.9% (जून के 54.2% से थोड़ा सुधार)

  • बेरोज़गारी दर: 5.2% (जून के 5.6% से कम)

रोजगार संरचना – ग्रामीण बनाम शहरी

ग्रामीण क्षेत्र

  • स्वरोज़गार का दबदबा: पुरुषों में 55.3% और महिलाओं में 71.6% स्वरोज़गार में।

  • कृषि: अब भी सबसे बड़ा नियोक्ता, जो ग्रामीण निर्भरता को दर्शाता है।

शहरी क्षेत्र

  • नियमित वेतनभोगी/तनख्वाहदार नौकरियों का वर्चस्व: पुरुषों में 47.5% और महिलाओं में 55.1% इस श्रेणी में।

  • सेवाक्षेत्र अग्रणी: वित्त, आईटी, व्यापार और आतिथ्य (Hospitality) सबसे प्रमुख।

रोजगार में लैंगिक असमानताएँ

सर्वेक्षण ने रोजगार भागीदारी में लगातार लैंगिक अंतर को रेखांकित किया –

  • महिला WPR: 31.6%

  • पुरुष WPR: 73.1%

यह अंतर संरचनात्मक चुनौतियों को दर्शाता है, जैसे – औपचारिक नौकरियों तक सीमित पहुँच, सांस्कृतिक बाधाएँ और महिलाओं के लिए असमान अवसर।

नया PLFS पद्धति (2025 से लागू)

  • प्रारंभ: जनवरी 2025

  • विशेषता: मासिक, त्रैमासिक और वार्षिक स्तर पर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के आँकड़े।

  • सर्वेक्षण कवरेज (अप्रैल–जून 2025): 1.34 लाख से अधिक परिवार और 5.7 लाख व्यक्ति।

  • उद्देश्य: उच्च-आवृत्ति श्रम आँकड़े प्रदान करना ताकि वास्तविक समय में रोजगार बदलावों को ट्रैक किया जा सके और लक्षित हस्तक्षेपों के ज़रिये रोजगार सृजन की नीति बनाई जा सके।

नीतिगत महत्व और प्रभाव

  • ग्रामीण लचीलापन: रोजगार वृद्धि कृषि व स्वरोज़गार की महत्ता को दर्शाती है।

  • शहरी सेवाक्षेत्र पर निर्भरता: वैश्विक बाजार उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशीलता को उजागर करती है।

  • लैंगिक समावेशन: महिलाओं की कम भागीदारी को बढ़ाने के लिए विशेष नीतियों की आवश्यकता।

  • डेटा-आधारित प्रशासन: मासिक और त्रैमासिक आँकड़े श्रम बाज़ार में बदलावों पर त्वरित नीति-निर्माण को संभव बनाएँगे।

विश्व मानवतावादी दिवस 2025: इतिहास और महत्व

हर साल 19 अगस्त को विश्व मानवतावादी दिवस मनाया जाता है ताकि दुनिया भर के मानवतावादी कार्यकर्ताओं के साहस, त्याग और अथक प्रयासों को सम्मान दिया जा सके। 2025 की थीम“वैश्विक एकजुटता को सशक्त बनाना और स्थानीय समुदायों को सशक्त करना” — करुणा की सामूहिक शक्ति और मानवीय प्रयासों में स्थानीय समुदायों की भूमिका पर विशेष प्रकाश डालती है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि संघर्षों से लेकर जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक संकटों के समय में एकता और सहानुभूति ही हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं।

विश्व मानवतावादी दिवस क्या है?

विश्व मानवतावादी दिवस की शुरुआत 2003 में बगदाद स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पर हुए बम विस्फोट की स्मृति में हुई थी, जिसमें 22 सहायता कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी। तब से यह दिवस सहायता कार्यकर्ताओं और प्रभावित समुदायों की सुरक्षा, गरिमा और कल्याण के लिए वैश्विक मंच बन चुका है।

विश्व मानवतावादी दिवस 2025 के मुख्य तथ्य

  • तारीख: हर साल 19 अगस्त को मनाया जाता है।

  • थीम 2025: “वैश्विक एकजुटता को सशक्त बनाना और स्थानीय समुदायों को सशक्त करना”

  • इस वर्ष का विषय इस बात पर जोर देता है कि मानवीय प्रयासों में स्थानीय समुदायों को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं बल्कि सक्रिय भागीदार के रूप में शामिल किया जाए।

विश्व मानवतावादी दिवस क्यों महत्वपूर्ण है?

  • मानवतावादी कार्यकर्ताओं का सम्मान
    उन लोगों का जश्न मनाना जो आपदा और संघर्ष क्षेत्रों में अपनी जान जोखिम में डालकर मदद पहुँचाते हैं।

  • वैश्विक एकजुटता को बढ़ावा
    यह दिखाता है कि मानवीय चुनौतियों का समाधान एकता और सहयोग से संभव है।

  • वैश्विक संकटों पर जागरूकता
    युद्ध, जलवायु आपदाओं और विस्थापन जैसी समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करता है।

  • कार्रवाई के लिए प्रेरणा
    लोगों को दान, स्वयंसेवा या जनजागरूकता अभियानों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करता है।

विश्वभर में कैसे मनाया जाता है?

  • संयुक्त राष्ट्र एवं एनजीओ पहलें: वैश्विक अभियान, कहानियों पर आधारित कार्यक्रम, और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि।

  • समुदाय स्तर पर आयोजन: शैक्षिक व्याख्यान, स्कूल प्रोजेक्ट, फंडरेज़र और स्वयंसेवी कार्यक्रम।

  • डिजिटल अभियान: सोशल मीडिया पर वास्तविक मानवीय कहानियाँ साझा की जाती हैं।

  • व्यक्तिगत योगदान: लोग दान, जागरूकता फैलाने या स्थानीय स्तर पर मदद करके योगदान देते हैं।

जानें क्या है AI टूल ‘सभासार’, जो ग्राम पंचायतों के काम को बना देगा आसान?

भारत सरकार ने ग्राम सभाओं की कार्यप्रणाली को सशक्त और आधुनिक बनाने के लिए एआई-आधारित टूल ‘सभासार’ की शुरुआत की है। इसे पहले त्रिपुरा में लागू किया गया है और धीरे-धीरे पूरे देश में विस्तार किया जाएगा। इसका उद्देश्य है—ग्राम स्तरीय शासन को डिजिटल, मानकीकृत और लोकतांत्रिक बनाना।

क्या है ‘सभासार’?

‘सभासार’ एक एआई-सक्षम डॉक्यूमेंटेशन टूल है, जो ग्राम सभा बैठकों की वीडियो और ऑडियो कार्यवाही को संरचित Minutes of Meeting (MoM) में बदलता है।

मुख्य विशेषताएँ

  • एआई जनरेटेड मिनट्स: बैठक के वीडियो/ऑडियो को स्वतः संक्षिप्त कार्यवृत्त में परिवर्तित करता है।

  • भाषा समर्थन: भाषिणी प्लेटफ़ॉर्म पर आधारित—हिंदी, बंगाली, तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती और अंग्रेज़ी सहित सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं में उपलब्ध।

  • एकरूपता: पूरे भारत में समान प्रकार का दस्तावेजीकरण सुनिश्चित करता है।

  • सुलभता: e-GramSwaraj लॉगिन से अधिकारी सीधे अपलोड कर सकते हैं।

  • पारदर्शिता: ग्रामवासी तुरंत संक्षेपित कार्यवृत्त देख सकेंगे, जिससे जवाबदेही बढ़ेगी।

ग्राम सभा का डिजिटल इकोसिस्टम

‘सभासार’ अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर कार्य करता है:

  1. पंचायत निर्णय (NIRNAY) पोर्टल

    • ग्राम सभा की बैठकों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग।

    • बैठक का शेड्यूल, सार्वजनिक सूचना और एजेंडा पूर्व-प्रसारित।

    • FY 2024–25 में 10,000+ बैठकें इस प्लेटफ़ॉर्म पर आयोजित।

  2. ई-ग्रामस्वराज पोर्टल

    • पंचायत स्तर की योजनाएँ, बजट और खातों की निगरानी।

    • ‘सभासार’ से जुड़ा हुआ, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित।

  3. भाषिणी प्लेटफ़ॉर्म

    • एआई आधारित भाषा अनुवाद पहल।

    • डिजिटल और भाषाई खाई को पाटता है।

    • ‘सभासार’ का भाषा-आधारित आधार।

भारतीय राजनीति में ग्राम सभा का महत्व

  • संवैधानिक आधार: 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1993।

  • अनिवार्य बैठकें: वर्ष में कम से कम 4 (26 जनवरी, 1 मई, 15 अगस्त, 2 अक्टूबर)।

  • संरचना: ग्राम के सभी पंजीकृत मतदाता।

ग्राम सभा के कार्य

  • विकास योजनाओं की स्वीकृति।

  • कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी।

  • पंचायत की जवाबदेही सुनिश्चित करना।

आँकड़े (2025)

  • 2,55,397 ग्राम पंचायतें

  • 6,742 मध्यवर्ती पंचायतें

  • 665 जिला पंचायतें

  • 16,189 पारंपरिक स्थानीय निकाय
    ये सभी प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से ग्राम सभा से जुड़े हुए हैं।

UPSC दृष्टिकोण से प्रासंगिकता

  • 73वाँ संशोधन (Panchayati Raj)

  • ई-गवर्नेंस पहलें

  • लोकतंत्र का गहनकरण और citizen participation

  • प्रशासन में प्रौद्योगिकी का उपयोग

कार्लोस अल्काराज ने जीता अपना पहला सिनसिनाटी ओपन का खिताब

स्पेनिश टेनिस स्टार कार्लोस अल्काराज़ ने अपना पहला सिनसिनाटी ओपन खिताब जीता, जब उनके प्रतिद्वंद्वी जैनिक सिनर को फाइनल में केवल 23 मिनट में ही रिटायर होना पड़ा। इस जीत से अल्काराज़ को 2025 का छठा खिताब, उनके करियर की 22वीं टूर-स्तरीय ट्रॉफी और आठवां एटीपी मास्टर्स 1000 का ताज मिला – जो नोवाक जोकोविच के अलावा सक्रिय खिलाड़ियों में सबसे अधिक है।

फाइनल का घटनाक्रम

  • मैच की शुरुआत में ही अल्काराज़ 5-0 से आगे थे।

  • तेज़ गर्मी और अस्वस्थता के कारण सिनर मेडिकल टाइमआउट के बाद भी नहीं खेल पाए और मैच छोड़ दिया।

  • सिनर का बयान: “कल से ही तबियत ठीक नहीं थी… कोशिश की पर और नहीं खेल सका।”

  • अल्काराज़ की प्रतिक्रिया: “मैं इस तरह जीतना नहीं चाहता, आप सच्चे चैंपियन हैं और मज़बूती से लौटेंगे।”

प्रतिद्वंद्विता और रिकॉर्ड

  • हेड-टू-हेड: अल्काराज़ 9–5 से आगे।

  • 2025 में दोनों की लगातार चौथी फाइनल भिड़ंत (रोम, रोलां गैरो, विंबलडन, सिनसिनाटी)।

  • सिनर की 26 मैचों की हार्ड-कोर्ट जीत श्रृंखला टूटी।

  • अल्काराज़ ने इस साल अब तक 3 मास्टर्स 1000 खिताब (मोंटे-कार्लो, रोम, सिनसिनाटी) जीते।

एटीपी रैंकिंग पर असर

  • अल्काराज़ अब Year-End No. 1 की दौड़ में बढ़त पर।

  • PIF ATP Live Race to Turin में सिनर से 1,890 अंक आगे

  • यूएस ओपन 2025 में वर्ल्ड नंबर 1 रैंकिंग दांव पर होगी।

ऐतिहासिक उपलब्धियां

सिर्फ 22 साल की उम्र में अल्काराज़ ने:

  • 22 करियर खिताब जीते।

  • 8 ATP Masters 1000 ट्रॉफी हासिल की।

  • 2025 में टूर-लीडिंग 54 जीत दर्ज कीं।

  • सक्रिय खिलाड़ियों में सिर्फ जोकोविच (40) उनसे आगे।

आगे की राह

  • अल्काराज़ यूएस ओपन में जोरदार फॉर्म के साथ उतरेंगे, लक्ष्य: Year-End No. 1 दोबारा पाना।

  • वहीं, सिनर की फिटनेस पर सवाल, उनका यूएस ओपन खिताब बचाव और मिक्स्ड डबल्स में खेलना अनिश्चित है।

इगा श्वियातेक ने जीता सिनसिनाटी ओपन, यूएस ओपन से पहले दिया कड़ा संदेश

गर्मियों की एक तपती शाम को मेसन, ओहायो में, इगा श्वियातेक ने टेनिस जगत को याद दिलाया कि वह अब भी दौरे की सबसे प्रबल प्रतिस्पर्धियों में से एक हैं। पोलैंड की स्टार ने जैस्मिन पाओलिनी को 7-5, 6-4 से हराकर 2025 सिनसिनाटी ओपन खिताब जीता। यह उनका एक साल से अधिक समय बाद पहला हार्ड-कोर्ट खिताब है। इस जीत से न केवल उनका करियर 24वें खिताब तक पहुंचा, बल्कि यह उनके प्रतिद्वंद्वियों को भी एक मजबूत संदेश देता है—वह यूएस ओपन के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

फाइनल: पाओलिनी के खिलाफ कड़ा मुकाबला

श्वियातेक की जीत आसान नहीं थी। पाओलिनी, जो अपने जुझारू स्वभाव और हिम्मत के लिए जानी जाती हैं, ने दोनों सेटों में उन्हें कड़ी टक्कर दी:

  • पहला सेट: पाओलिनी ने 3-0 की बढ़त बना ली, लेकिन श्वियातेक ने लगातार पांच गेम जीतकर वापसी की। पाओलिनी ने 5-5 की बराबरी कर ली, मगर श्वियातेक ने अपनी मजबूत डिफेंस और सर्विस के दम पर सेट 7-5 से जीता।

  • दूसरा सेट: श्वियातेक ने अच्छी शुरुआत की, लेकिन पाओलिनी ने दो बार उनकी सर्विस तोड़ी। हर बार श्वियातेक ने धैर्य और सटीकता से वापसी की और अंततः एक ऐस (Ace) के साथ चैंपियनशिप प्वॉइंट पर मैच समाप्त किया।

श्वियातेक की प्रतिक्रिया—रैकेट जमीन पर पटकना, अपने सिर की ओर इशारा करना और खुशी से उछलना—दर्शाती है कि यह जीत उनके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी।

जीत का महत्व

यह सिनसिनाटी खिताब श्वियातेक के करियर और WTA टूर दोनों के लिए कई मायनों में अहम है:

  • 2024 इंडियन वेल्स के बाद पहला हार्ड-कोर्ट खिताब – यह साबित करता है कि उन्होंने क्ले और ग्रास से परे भी अपना फॉर्म वापस पा लिया है।

  • 24वां करियर खिताब और 11वां WTA 1000 – उन्हें अपनी पीढ़ी की सबसे सफल खिलाड़ियों में और मजबूत बनाता है।

  • यूएस ओपन 2025 के लिए रफ्तार – साल के आखिरी ग्रैंड स्लैम से पहले दो खिताब तीन टूर्नामेंटों में।

  • दूसरे स्थान पर वापसी – अब वह वर्ल्ड नंबर 1 की पोजिशन वापस पाने के बेहद करीब हैं।

2025 में श्वियातेक की वापसी

पिछले साल उन्होंने अपना टॉप रैंकिंग खो दिया था और फ्रेंच ओपन 2024 से लेकर विंबलडन 2025 तक एक खिताबी सूखा झेला। कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या उनका दबदबा खत्म हो रहा है।

लेकिन उनका जवाब दमदार रहा है:

  • विंबलडन 2025 चैंपियन (उनका पहला ग्रास-कोर्ट ग्रैंड स्लैम)

  • सिनसिनाटी 2025 चैंपियन (हार्ड-कोर्ट)

  • पिछले 20 मैचों में 18 जीत

  • चार टूर्नामेंटों में तीन फाइनल

उनकी यह वापसी उनके खेल में बदलाव दर्शाती है—ज्यादा धैर्य, विविधता और रणनीतिक लचीलापन—जो उन्हें न्यूयॉर्क में फेवरिट के रूप में स्थापित करता है।

पाओलिनी की चुनौती

हालांकि हार के बावजूद, जैस्मिन पाओलिनी ने दौरे पर एक दमदार चुनौतीकर्ता के रूप में अपनी छवि मजबूत की है। उन्होंने कई बार श्वियातेक की लय तोड़ी और उनकी कमियों को उजागर किया, जिन्हें यूएस ओपन में अन्य खिलाड़ी भुना सकते हैं। फिर भी, श्वियातेक की लगातार स्थिरता और मानसिक मजबूती आखिरकार भारी पड़ी।

असम राइफल्स और आईआईटी मणिपुर ने ड्रोन प्रशिक्षण के लिए किया समझौता

भारत की रक्षा क्षमताओं के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए असम राइफल्स ने इंफाल के मण्ट्रिपुखरी स्थित भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) मणिपुर के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह सहयोग सुरक्षा, निगरानी और लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए ड्रोन तकनीक को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है, जो रक्षा और अकादमिक संस्थानों के बीच साझेदारी में एक मील का पत्थर साबित होगा।

समझौते का विवरण

यह समझौता मेजर जनरल रवरोप सिंह, आईजी असम राइफल्स (दक्षिण) और IIIT मणिपुर के निदेशक की उपस्थिति में औपचारिक रूप से संपन्न हुआ। दोनों पक्षों ने अकादमिक विशेषज्ञता और रक्षा आवश्यकताओं को जोड़कर अत्याधुनिक तकनीकी समाधान विकसित करने के महत्व पर बल दिया।

MoU के प्रमुख उद्देश्य

  • निगरानी और टोही (Reconnaissance) के लिए उन्नत ड्रोन सिस्टम विकसित करना।

  • असम राइफल्स के जवानों को ड्रोन उड़ान संचालन और रखरखाव का प्रशिक्षण देना।

  • DGCA-प्रमाणित ड्रोन प्रशिक्षण की क्षमता का निर्माण करना।

  • कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में लॉजिस्टिक सपोर्ट को ड्रोन के माध्यम से मजबूत करना।

ड्रोन प्रशिक्षण पहल

इस सहयोग के तहत एडवांस्ड ड्रोन ट्रेनिंग और रिफ्रेशर कोर्स शुरू किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल है:

  • ड्रोन उड़ान संचालन – व्यावहारिक पायलटिंग और नेविगेशन कौशल।

  • तकनीकी रखरखाव – ड्रोन प्रणालियों की मरम्मत और देखभाल।

  • प्रमाणीकरण – DGCA मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण, ताकि राष्ट्रीय विमानन नियमों का पालन हो सके।

इसकी उद्घाटन सत्र में लगभग 80 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें असम राइफल्स के जवान और IIIT के संकाय सदस्य शामिल थे। यह क्षमता निर्माण और तकनीकी नवाचार के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

रक्षा में ड्रोन का सामरिक महत्व

आधुनिक युद्ध और सुरक्षा अभियानों में ड्रोन फ़ोर्स मल्टीप्लायर बन चुके हैं। इनके उपयोग में शामिल हैं:

  • निगरानी – सीमा क्षेत्रों, उग्रवाद-प्रभावित इलाकों और उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों की मॉनिटरिंग।

  • टोही (Reconnaissance) – वास्तविक समय में खुफिया जानकारी जुटाना।

  • लॉजिस्टिक सपोर्ट – पूर्वोत्तर के दुर्गम इलाकों में सामग्री पहुँचाना।

  • आपदा प्रबंधन – बाढ़, भूस्खलन या भूकंप जैसी आपदाओं के दौरान राहत कार्यों में सहायता।

ट्विटर के पूर्व सीईओ पराग अग्रवाल ने लॉन्च किया नया स्टार्ट अप ‘पैरेलल वेब सिस्टम’

साल 2022 में Twitter को खरीदने के बाद एलन मस्क ने पराग अग्रवाल को सीईओ के पद से हटा दिया था और उन्हें कंपनी से जाना पड़ा था। पराग अग्रवाल, जो कभी ट्विटर के शीर्ष पद पर काम कर चुके हैं, हाल ही में पैरेलल वेब सिस्टम्स नामक एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप लॉन्च किया है। जो एआई एजेंट्स को इंसानों की तरफ से काम पूरा करने में मदद करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य मशीनों को सीधे वेब से जानकारी एकत्रित करने, वैरिफाई करने और व्यवस्थित करने की अनुमति देना है। पराग अग्रवाल ने एलन मस्क द्वारा एक्स (पूर्व में ट्विटर) से अचानक बर्खास्त किए जाने के 3 साल से भी कम समय के बाद वापसी की है।

पैरेलल क्या है? एआई-प्रेरित वेब की नई दृष्टि

पराग अग्रवाल जो स्टार्टअप लेकर आ रहे हैं उसका नाम ‘Parallel Web Systems’ है। यह कंपनी ऐसे टूल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाती है जिससे AI एजेंट्स इंटरनेट पर रियल-टाइम में जानकारी ला सकें, उसे परख सकें और व्यवस्थित कर सकें। इस स्टार्टअप का मिशन विशेष रूप से एआई के लिए वेब इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है, जिससे मशीनें न केवल वेब को ब्राउज़ कर सकें, बल्कि जानकारी को इंसानों से कहीं अधिक कुशलता से ग्रहण, संसाधित और उस पर कार्रवाई भी कर सकें।

अग्रवाल का कहना है कि भविष्य में एआई एजेंट्स—स्वायत्त प्रोग्राम जो कार्य कर सकते हैं—वेब के प्राथमिक उपयोगकर्ता बन जाएंगे। वे बड़े पैमाने पर अनुसंधान, विश्लेषण और स्वचालन करेंगे, जो इंसानों की क्षमताओं से कहीं अधिक होगा।

प्रमुख तकनीकें और उत्पाद

पैरेलल की पेशकश का केंद्र इसके डीप रिसर्च API और लो-लेवल सर्च टूल्स हैं, जिन्हें विशेष रूप से एआई-नेटिव वेब इंटरैक्शन के लिए तैयार किया गया है। इन टूल्स की मदद से डेवलपर्स ऐसे सिस्टम बना सकते हैं जहाँ,

  • एआई एजेंट्स इंसानी घंटों का शोध मिनटों में पूरा कर सकें

  • वेब क्रॉलिंग, इंडेक्सिंग से लेकर सर्च रैंकिंग तक हर स्तर पर कस्टम इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध हो

  • वित्त, स्वास्थ्य, बीमा और बिक्री जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग हो

उदाहरण:

  • एआई सेल्स एजेंट्स संभावित ग्राहकों पर शोध करते हैं

  • कोडिंग एजेंट्स डाक्यूमेंटेशन से जानकारी निकालते और उसका सार बनाते हैं

  • वित्तीय टूल्स निवेश अवसरों के लिए SEC फाइलिंग का विश्लेषण करते हैं

  • बीमा प्रणाली वास्तविक समय वेब सत्यापन से क्लेम ऑटोमेट करती है

बेंचमार्क तोड़ने वाला प्रदर्शन

पैरेलल के एआई टूल्स केवल तेज ही नहीं हैं—वे बेहद सटीक भी हैं और GPT-5 जैसे प्रमुख मॉडलों को भी पीछे छोड़ रहे हैं।

  • BrowseComp बेंचमार्क (मल्टी-हॉप वेब नेविगेशन और तर्क):

    • पैरेलल: 58% सटीकता

    • GPT-5: 41%

    • मानव (2 घंटे की सीमा): 25%

  • DeepResearch बेंच (गहन और गुणवत्तापूर्ण लंबे शोध):

    • पैरेलल जीत दर: 82%

    • GPT-5 जीत दर: 66%

ये आँकड़े इस बात को रेखांकित करते हैं कि पैरेलल इंसानों की तरह वेब ब्राउज़िंग पर नहीं, बल्कि मशीनों की तरह वेब उपभोग, सत्यापन और बड़े पैमाने पर जानकारी उत्पादन पर केंद्रित है।

टीम और भविष्य की दृष्टि

आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी धारक पराग अग्रवाल, ट्विटर में लगभग एक दशक का अनुभव लेकर अपने पहले बड़े स्टार्टअप में उतरे हैं। खोसला वेंचर्स, इंडेक्स वेंचर्स और फर्स्ट राउंड कैपिटल जैसे शीर्ष सिलिकॉन वैली निवेशकों से 30 मिलियन डॉलर की फंडिंग के साथ, पैरेलल में ट्विटर, गूगल, स्ट्राइप, वेमो और एयरबीएनबी के पूर्व इंजीनियर भी शामिल हैं।

आगे की योजनाएँ:

  • ऐसे एआई एजेंट्स विकसित करना जो कई दिनों का शोध कुछ घंटों में कर सकें

  • इवेंट-ड्रिवेन सिस्टम बनाना जो वेब पर लगातार नज़र रखें

  • SQL जैसे क्वेरी टूल्स लाना, जिससे ऑनलाइन डेटा के साथ वास्तविक समय में बातचीत की जा सके

इन टूल्स की मदद से संगठन पूर्णतः स्वायत्त एआई वर्कफ़्लोज़ तैयार कर पाएँगे, जहाँ एजेंट्स न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ कार्य कर सकें, विश्लेषण करें और विभिन्न क्षेत्रों में दोहरावपूर्ण प्रक्रियाओं को अंजाम दें।

भारत का लक्ष्य 2035 तक स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन और 2040 तक मानवयुक्त चंद्र मिशन स्थापित करना: डॉ. जितेंद्र सिंह

भारत वैश्विक अंतरिक्ष दौड़ में नए और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय कर रहा है। लोकसभा में बोलते हुए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार की उस दृष्टि को दोहराया जिसके अंतर्गत वर्ष 2035 तक एक पूर्ण रूप से परिचालित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने और वर्ष 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजने की योजना है। इन अभियानों को “विकसित भारत 2047” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धियों के रूप में देखा जा रहा है।

भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाएँ: आईएसएस से चंद्रमा तक

डॉ. सिंह की घोषणा उस विशेष संसदीय सत्र के दौरान हुई, जो भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन सुभांशु शुक्ला के ऐतिहासिक मिशन के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। शुक्ला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पहुँचने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने। इस उपलब्धि को राष्ट्रीय गौरव का क्षण और देश की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं का प्रतीक बताया गया।

मंत्री ने अगले बड़े लक्ष्य स्पष्ट किए:

  • भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (2035 तक): एक स्थायी, स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन जो भारत को दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष उड़ानों की श्रेणी में ले जाएगा।

  • मानवयुक्त चंद्र मिशन (2040 तक): एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह पर कदम रखेगा, जो भारत की अंतरिक्ष खोज यात्रा में ऐतिहासिक मील का पत्थर होगा।

दृष्टि की नींव: 11 वर्षों की अंतरिक्ष सुधार यात्रा

डॉ. सिंह ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत की अंतरिक्ष यात्रा में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं, विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में। उन्होंने कई नीतिगत सुधारों को इस महत्वाकांक्षी दिशा की आधारशिला बताया।

मुख्य विकास:

  • अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी: इससे नवाचार का एक नया इकोसिस्टम तैयार हुआ है और अनेक स्पेस-टेक स्टार्टअप सामने आए हैं।

  • अनुसंधान एवं विकास में वृद्धि: अत्याधुनिक शोध ने इसरो की क्षमताओं को और मजबूत किया और स्वदेशी तकनीकी उपलब्धियों को बढ़ावा दिया।

  • ऑपरेशन सिंदूर: इस ऑपरेशन में उपयोग की गई तकनीकें मोदी सरकार के कार्यकाल में विकसित की गईं, जिससे अंतरिक्ष तकनीक की वास्तविक जीवन उपयोगिता सिद्ध हुई।

सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान केवल रॉकेट और उपग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और जनकल्याण से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

प्रमुख लाभ:

  • कृषि, आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन में उपग्रह डेटा का उपयोग

  • परिवहन और लॉजिस्टिक्स में नेविगेशन और संचार प्रणाली की भूमिका

  • आधारभूत ढाँचे के विकास और पर्यावरण निगरानी में रिमोट सेंसिंग की सहायता

इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि अंतरिक्ष तकनीक जीवन की गुणवत्ता सुधारने और आर्थिक विकास को गति देने में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रही है।

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