भारत और न्यूजीलैंड 27 अप्रैल को यहां मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर करेंगे। इस समझौते का मकसद घरेलू निर्यातकों के सामान के लिए इस देश के बाजार में टैरिफ मुक्त पहुंच उपलब्ध कराना है। इस समझौते से अगले 15 सालों में 20 अरब डालर का निवेश आने की संभावना जताई गई है। यह समझौता बाज़ार तक पहुँच को बेहतर बनाने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी केंद्रित होगा, और इसके साथ ही यह भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
भारत-न्यूजीलैंड FTA में क्या शामिल है
FTA समझौते के तहत, भारत को न्यूजीलैंड में अपने 100% निर्यात पर ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी। इससे कपड़ा, दवा और इंजीनियरिंग सामान जैसे विभिन्न क्षेत्रों को फायदा होगा। इसके बदले में, भारत न्यूजीलैंड के लगभग 95% निर्यात पर टैरिफ (शुल्क) कम करेगा या पूरी तरह खत्म कर देगा; इसमें ऊन, कोयला, लकड़ी, वाइन और एवोकैडो व ब्लूबेरी जैसे फल शामिल हैं।
हालाँकि, भारत ने अपने घरेलू किसानों और उद्योगों की सुरक्षा के लिए डेयरी उत्पाद, खाद्य तेल और कुछ विशिष्ट कृषि उत्पादों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को सावधानीपूर्वक इस दायरे से बाहर रखा है।
व्यापार और निवेश को बढ़ावा
इस FTA से उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार पाँच सालों के अंदर दोगुना होकर $5 बिलियन तक पहुँच जाएगा। इससे व्यवसायों और निवेशकों के लिए नए अवसर भी खुलेंगे, और व्यापार ज़्यादा आसान और कम खर्चीला हो जाएगा। इस समझौते से दोनों देशों के बीच सप्लाई चेन, निर्यात और आर्थिक सहयोग भी बढ़ने की संभावना है।
भारतीय पेशेवरों के लिए अवसर
इस समझौते की मुख्य बात सेवा क्षेत्र से जुड़ी है, जिसके तहत न्यूज़ीलैंड भारतीय पेशेवरों को अस्थायी कार्य वीज़ा प्रदान करेगा।
हर साल लगभग 5,000 कुशल श्रमिकों को न्यूज़ीलैंड में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी, और वे वहाँ तीन साल तक रह सकेंगे। इससे रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे और उन्हें वैश्विक स्तर पर काम करने का अनुभव मिलेगा।
इस समझौते का रणनीतिक महत्व
यह FTA वैश्विक व्यापार साझेदारियों के विस्तार की दिशा में भारत के प्रयासों को भी दर्शाता है, और इससे सीमित बाजारों पर निर्भरता कम होगी।
यह हिंद-प्रशांत आर्थिक क्षेत्र में भारत की स्थिति को भी सुदृढ़ करता है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक विकास और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।


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