भारत में महंगाई नियंत्रण पर बड़ा फैसला: 2031 तक 4% टारगेट बरकरार, RBI की नई गाइडलाइंस समझें

भारत सरकार ने महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए एक अहम फैसला लेते हुए रिटेल इंफ्लेशन टारगेट (4% ±2%) को मार्च 2031 तक जारी रखने का निर्देश दिया है। यह फैसला Reserve Bank of India (RBI) के लिए नीति निरंतरता का संकेत देता है और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

फरवरी 2026 में देश की महंगाई दर 3.21% दर्ज की गई, जो इस लक्ष्य के भीतर है। यह दिखाता है कि मौजूदा ढांचा कीमतों को नियंत्रित रखने और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने में प्रभावी रहा है।

 

क्या है 4% महंगाई टारगेट और क्यों है जरूरी?

भारत में Flexible Inflation Targeting (FIT) फ्रेमवर्क के तहत महंगाई को एक तय लक्ष्य के आसपास बनाए रखने की कोशिश की जाती है।

वर्तमान टारगेट:

  • लक्ष्य (Target): 4%
  • ऊपरी सीमा: 6%
  • निचली सीमा: 2%

इसका उद्देश्य है कि महंगाई न तो बहुत ज्यादा बढ़े और न ही बहुत कम हो। इससे मौद्रिक नीति को स्पष्ट दिशा मिलती है और बिजनेस व आम लोगों को भविष्य की योजना बनाने में मदद मिलती है।

यह फ्रेमवर्क पहली बार 2016 में लागू किया गया था, जिसने भारत की आर्थिक नीति में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया।

 

RBI और MPC की भूमिका क्या है?

महंगाई को नियंत्रित रखने की जिम्मेदारी Monetary Policy Committee (MPC) की होती है, जिसमें 6 सदस्य होते हैं और इसकी अध्यक्षता RBI गवर्नर करते हैं।

MPC के मुख्य टूल:

  • रेपो रेट (Repo Rate)
  • ब्याज दरों में बदलाव

कैसे काम करता है:

  • महंगाई बढ़ने पर ब्याज दरें बढ़ाई जाती हैं (Demand कम करने के लिए)
  • महंगाई कम होने पर दरें घटाई जाती हैं (Growth बढ़ाने के लिए)

पिछले दशक में लगभग 75% समय महंगाई तय सीमा के भीतर रही है, जो इस सिस्टम की सफलता को दर्शाता है।

 

भारत में हाल की महंगाई स्थिति

भारत में महंगाई को Consumer Price Index (CPI) के आधार पर मापा जाता है।

हाल के आंकड़े:

  • जनवरी 2026: 2.74%
  • फरवरी 2026: 3.21%

नई बेस ईयर (2024) के साथ CPI की गणना अपडेट की गई है, जिससे उपभोक्ता खर्च के पैटर्न को बेहतर तरीके से दर्शाया जा सके।

ध्यान देने वाली बात:

  • खाद्य वस्तुओं का CPI में बड़ा हिस्सा होता है
  • इसलिए मौसम और वैश्विक कीमतों का महंगाई पर सीधा असर पड़ता है

 

2031 तक वही टारगेट क्यों रखा गया?

सरकार द्वारा 4% टारगेट को बनाए रखने का फैसला नीति स्थिरता और भरोसे को दर्शाता है।

हालांकि, अगस्त 2025 में RBI ने एक चर्चा पत्र जारी कर कुछ बदलावों पर सुझाव मांगे थे, जैसे:

  • क्या Core Inflation को प्राथमिकता दी जाए
  • क्या 4% लक्ष्य सही है
  • क्या टॉलरेंस बैंड बदला जाए
  • क्या फिक्स्ड टारगेट की जगह रेंज होनी चाहिए

सभी सुझावों की समीक्षा के बाद सरकार ने मौजूदा ढांचे को जारी रखने का फैसला किया।

 

क्या है Flexible Inflation Targeting (FIT)?

Flexible Inflation Targeting एक ऐसी मौद्रिक नीति है जिसमें:

  • महंगाई को तय लक्ष्य के आसपास रखा जाता है
  • लेकिन आर्थिक विकास के लिए कुछ लचीलापन भी दिया जाता है

मुख्य विशेषताएं:

  • 2016 में लागू
  • Price Stability और Economic Growth पर फोकस
  • 3 तिमाही तक सीमा से बाहर रहने पर RBI जवाबदेह
  • फैसले MPC द्वारा लिए जाते हैं

यह प्रणाली भारत को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाती है।

 

Exam Point (महत्वपूर्ण प्रश्न)

प्रश्न: भारत में पॉलिसी इंटरेस्ट रेट कौन तय करता है?

A. Finance Commission
B. NITI Aayog
C. Monetary Policy Committee
D. SEBI

सही उत्तर: C. Monetary Policy Committee

वंदे भारत ट्रेन में खराब खाने पर बवाल, IRCTC पर लगा जुर्माना

हाल ही में, भारतीय रेलवे ने पटना-टाटानगर वंदे भारत एक्सप्रेस में खाने की गुणवत्ता को लेकर मिली शिकायत के बाद IRCTC पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया है। इस घटना की रिपोर्ट 15 मार्च को मिली थी, जिसके बाद यह कड़ी कार्रवाई की गई है। इसके अलावा, यह कार्रवाई न केवल कैटरिंग एजेंसी के खिलाफ है, बल्कि सर्विस प्रोवाइडर के खिलाफ भी है। यह कदम यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने और रेलवे सेवाओं में जवाबदेही लागू करने पर ज़ोर देता है।

 

पटना-टाटानगर ट्रेन मामले में क्या हुआ?

यह मामला ट्रेन नंबर 21896 में सामने आया, जहाँ एक यात्री ने ट्रेन में परोसे जाने वाले खाने की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई थी।

जाँच के बाद अधिकारियों को सेवा मानकों में खामियाँ मिलीं।

इसके परिणामस्वरूप, इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया गया।

इसके अलावा, इस मामले के लिए ज़िम्मेदार निजी सेवा प्रदाता पर और भी कड़ा जुर्माना लगाया गया ₹50 लाख—और उसका अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया।

 

ट्रेनों में खाने की गुणवत्ता इतना अहम मुद्दा क्यों है?

भारतीय रेलवे हर साल लगभग 58 करोड़ भोजन परोसता है, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े कैटरिंग नेटवर्कों में से एक बनाता है।

सेवा में ज़रा सी भी चूक हर दिन हज़ारों यात्रियों को प्रभावित कर सकती है।

हालाँकि शिकायतों की दर बहुत कम है—लगभग 0.0008%—फिर भी हर मामले को गंभीरता से लिया जाता है, क्योंकि इसका सीधा असर जनता के भरोसे और स्वास्थ्य मानकों पर पड़ता है।

खाने की गुणवत्ता सीधे तौर पर इन चीज़ों से जुड़ी है:

  • यात्रियों का स्वास्थ्य और स्वच्छता
  • सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर जनता का भरोसा
  • यात्रा का समग्र अनुभव

सरकार का रुख: लापरवाही के प्रति ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ (बिल्कुल भी बर्दाश्त न करना)

रेल मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि यात्रियों की सुरक्षा और सेवा की गुणवत्ता उनके लिए सर्वोच्च प्राथमिकताएँ हैं।

पिछले तीन वर्षों में, कैटरिंग और सेवाओं से जुड़ी कई शिकायतों के परिणामस्वरूप कुल ₹2.6 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है।

इस वर्ष

2025 में, पैंट्री स्टाफ़ द्वारा मारपीट की तीन घटनाएँ रिपोर्ट की गईं, जिसके बाद रेलवे अधिकारियों और पुलिस ने सख़्त कानूनी कार्रवाई की।

 

रेलवे सुधार 2026: ‘रिफ़ॉर्म एक्सप्रेस’ क्या है?

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2026 के लिए ‘रिफ़ॉर्म एक्सप्रेस’ पहल के तहत कई सुधारों की घोषणा की है।

अब तक नौ सुधारों को मंज़ूरी मिल चुकी है, और ये सुधार ऑपरेशनल दक्षता और यात्रियों की सुविधा, दोनों पर केंद्रित हैं।

इन सुधारों में शामिल हैं:

  • माल ढुलाई में सुधार
  • बुनियादी ढांचे के निर्माण में बढ़ोतरी
  • यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के उपाय
  • नमक की ढुलाई जैसे लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों पर विशेष ध्यान

भारत हर साल लगभग 35 मिलियन टन नमक का उत्पादन करता है, लेकिन इसमें से केवल 9.2 मिलियन टन नमक ही रेलगाड़ी से ढोया जाता है; ऐसा लगता है कि यह क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षित रहा है।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट 2026: किसे मिल रही अनुमति और क्यों घटा जहाज़ों का आवागमन?

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक समुद्री व्यापार पर गंभीर असर पड़ा है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट देखी गई है। 1 मार्च से शुरू हुए तनाव के बाद शिप ट्रैफिक लगभग 95% तक घट गया, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि, भारत, चीन और थाईलैंड जैसे कुछ देशों को सीमित रूप से सुरक्षित मार्ग मिल पाया है।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य का वैश्विक महत्व

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ता है और दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है।

इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा सीधे तौर पर तेल की कीमतों, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार को प्रभावित करती है। मौजूदा संकट ने यह भी दिखाया है कि भू-राजनीतिक तनाव के समय वैश्विक सप्लाई चेन कितनी कमजोर हो सकती है।

क्यों कुछ देशों को ही मिल रही है अनुमति?

  • इस संकट के दौरान ईरान ने चयनात्मक (Selective) नीति अपनाई है। ईरान केवल उन देशों के जहाजों को अनुमति दे रहा है जिन्हें वह “गैर-शत्रुतापूर्ण” मानता है।
  • हालांकि “गैर-शत्रुतापूर्ण” की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है, जिससे वैश्विक शिपिंग कंपनियों में अनिश्चितता बनी हुई है।
  • भारत, चीन, पाकिस्तान और थाईलैंड जैसे देशों को कूटनीतिक संतुलन और तटस्थ रुख के कारण मार्ग मिल पाया है।

देशवार स्थिति: कौन गुजर पा रहा है?

  • भारत: कई भारतीय टैंकर सफलतापूर्वक पार हुए, जिससे ऊर्जा आपूर्ति बनी हुई है।
  • चीन: मजबूत आर्थिक संबंधों के कारण पारगमन संभव हुआ, रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रांजिट शुल्क भी दिया गया।
  • थाईलैंड: कूटनीतिक प्रयासों के बाद एक टैंकर को अनुमति मिली।
  • पाकिस्तान: मिश्रित स्थिति—एक जहाज को अनुमति, जबकि दूसरे को नियमों के उल्लंघन के कारण रोका गया।
  • तुर्की और जापान: अभी भी अनुमति के लिए प्रयास जारी हैं।

वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर प्रभाव

  • कम जहाजों के गुजरने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। इससे ईंधन की कीमतों में वृद्धि और महंगाई का खतरा बढ़ गया है।
  • शिपिंग कंपनियों के लिए जोखिम बढ़ गया है, जिससे बीमा प्रीमियम और परिवहन लागत भी काफी बढ़ गई है।
  • भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति आर्थिक चुनौती बन सकती है।

क्यों कहा जाता है ‘चोकपॉइंट’?

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को “ग्लोबल एनर्जी चोकपॉइंट” कहा जाता है क्योंकि:

  • इसकी चौड़ाई सबसे संकरे स्थान पर केवल 33 किमी है
  • विश्व के तेल और LNG का बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है

यह ईरान, इराक और सऊदी अरब जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के बीच स्थित है

राम नवमी 2026: तिथि, अनुष्ठान और इस पर्व का महत्व

राम नवमी 2026 का पर्व 26 मार्च (गुरुवार) को पूरे भारत में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। यह पवित्र हिंदू त्योहार भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं। यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आता है, इसलिए इसे राम जन्मोत्सव भी कहा जाता है। इस दिन भक्त पूजा-पाठ, रामायण का पाठ और मंदिर दर्शन करते हैं।

राम नवमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार राम नवमी की तिथि दो दिनों में पड़ सकती है, लेकिन मध्याह्न मुहूर्त के आधार पर सही दिन तय किया जाता है।

मुख्य समय:

  • नवमी तिथि प्रारंभ: 26 मार्च 2026 – 11:48 AM
  • नवमी तिथि समाप्त: 27 मार्च 2026 – 10:06 AM
  • मध्याह्न मुहूर्त: 11:13 AM से 01:41 PM
  • भगवान राम जन्म समय: 12:27 PM

इस प्रकार राम नवमी 26 मार्च 2026 को ही मनाई जाएगी।

राम नवमी का ऐतिहासिक व पौराणिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार राजा दशरथ ने संतान प्राप्ति के लिए महर्षि वशिष्ठ के मार्गदर्शन में पुत्रकामेष्टि यज्ञ किया। इसके बाद प्रसाद रूप में प्राप्त खीर के सेवन से उनकी रानियों ने चार पुत्रों—राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न—को जन्म दिया।

चैत्र शुक्ल नवमी को भगवान राम का जन्म हुआ, जिससे इस पर्व की शुरुआत हुई और तब से हर वर्ष इसे श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

हिंदू धर्म में राम नवमी का महत्व

राम नवमी का धार्मिक महत्व बहुत बड़ा है। यह भगवान राम के आदर्श जीवन और उनके द्वारा स्थापित धर्म, सत्य, साहस और आदर्श नेतृत्व का प्रतीक है।

भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, जिसका अर्थ है आदर्श मानव। उनके जीवन की कथा रामायण में वर्णित है, जो कर्तव्य, भक्ति और नैतिकता का संदेश देती है।

यह पर्व अच्छाई की बुराई पर विजय का भी प्रतीक है, क्योंकि भगवान राम ने बाद में रावण का वध कर धर्म की स्थापना की।

भारत में राम नवमी कैसे मनाई जाती है

राम नवमी पूरे देश में बड़े उत्साह से मनाई जाती है, विशेष रूप से अयोध्या में, जिसे भगवान राम की जन्मभूमि माना जाता है।

इस दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान कर पूजा करते हैं, कई लोग सरयू नदी में पवित्र स्नान भी करते हैं। मंदिरों और घरों को फूलों, दीपों और रोशनी से सजाया जाता है, जिससे भक्तिमय वातावरण बनता है।

लोकसभा ने ट्रांसजेंडर संशोधन विधेयक 2026 पारित किया: इसका क्या अर्थ है?

लोकसभा ने 24 मार्च, 2026 को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया। इस विधेयक में स्व-अनुभूत लिंग पहचान और यौन अभिविन्यास को छोड़कर ‘ट्रांसजेंडर’ की परिभाषा को पुनर्परिभाषित किया गया है, जिससे भारत में अधिकारों, मान्यता और समावेशिता को लेकर बहस छिड़ गई है।

लोकसभा ने 24 मार्च, 2026 को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक 2026 पारित कर दिया। यह विधेयक ‘ट्रांसजेंडर’ शब्द की परिभाषा को पुनर्परिभाषित करता है और इसके दायरे से यौन अभिविन्यास और स्वयं द्वारा बोधित लिंग पहचान को बाहर रखता है। सरकार ने इसे कार्यान्वयन में स्पष्टता लाने के उद्देश्य से पेश किया था, और इस संशोधन ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस छेड़ दी है। साथ ही, इससे पहचान के अधिकारों, कानूनी मान्यता और व्यक्तियों की समावेशिता को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं।

संशोधन विधेयक में क्या प्रस्ताव है?

इस संशोधन में नए कानून के तहत ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा को और अधिक स्पष्ट रूप से परिभाषित करने का प्रावधान है। इसमें यह भी स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अलग-अलग यौन रुझान या स्वयं द्वारा मानी गई लैंगिक पहचान वाले व्यक्ति इस परिभाषा के अंतर्गत नहीं आएंगे।

इसके बजाय, विधेयक उन समूहों पर ध्यान केंद्रित करता है जिन्हें पारंपरिक रूप से और सामाजिक रूप से मान्यता प्राप्त है, जैसे कि हिजरा, किन्नर, अरावानी, जोगता और अंतरलिंगी भिन्नता वाले व्यक्ति।

सरकार का तर्क है कि यह स्पष्टता आवश्यक है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभ और सुरक्षा लक्षित समूह तक पहुंचें।

नई परिभाषा और प्रमुख प्रावधान

इसमें एक संशोधित परिभाषा भी पेश की गई है जो आत्म-पहचान के बजाय जैविक और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान पर आधारित है।

इसमें शामिल है,

अंतरलिंगी स्थितियों या जन्मजात विकृतियों वाले व्यक्ति

वे व्यक्ति जो पारंपरिक ट्रांसजेंडर समुदायों से संबंधित हैं

किसी नामित चिकित्सा प्राधिकरण के माध्यम से मान्यता

एक नए प्रावधान के तहत ‘प्राधिकरण’ को एक मेडिकल बोर्ड के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसका नेतृत्व वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी करते हैं और जो आवश्यकता पड़ने पर ट्रांसजेंडर पहचान को सत्यापित और प्रमाणित कर सकता है।

कड़ी सजाएं लागू की गईं

प्रमुख परिवर्तनों में से एक ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ अपराधों के लिए श्रेणीबद्ध दंडों की शुरुआत है।

अधिकतम सजा को 2 साल (2019 के अधिनियम में) से बढ़ाकर 14 साल की कैद कर दिया गया है, जो कमजोर वर्गों के खिलाफ अपराधों की गंभीरता को दर्शाता है।

इस कदम के माध्यम से इसका उद्देश्य हिंसा और भेदभाव के खिलाफ कानूनी सुरक्षा और निवारण को मजबूत करना है।

सरकार का औचित्य

सरकार की ओर से सामाजिक न्याय मंत्री वीरेंद्र कुमार उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य उन लोगों की रक्षा करना है जो जैविक कारणों से अत्यधिक सामाजिक भेदभाव का सामना करते हैं।

सरकार के अनुसार, पूर्ववर्ती कानून लाभार्थियों की पहचान करने में कठिनाइयाँ पैदा करता था और इससे कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावशीलता कम हो सकती थी।

इस संशोधन का उद्देश्य लक्षित सुरक्षा सुनिश्चित करना और कार्यान्वयन में स्पष्टता लाना भी है।

विरोध और आलोचना

इस विधेयक को विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है। आलोचकों का तर्क है कि यह स्व-पहचान के अधिकार का उल्लंघन करता है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने NALSA फैसले (2014) के तहत मान्यता दी है।

विपक्षी सदस्यों ने इस बात पर भी जोर दिया कि यह विधेयक ट्रांसजेंडर समुदाय से पर्याप्त परामर्श किए बिना पेश किया गया था।

कानूनी संदर्भ: एनएएलएसए का निर्णय 2014

ऐतिहासिक फैसले NALSA बनाम भारत संघ (2014) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने लैंगिक पहचान को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी। इसके साथ ही, यह व्यक्तियों को अपने लिंग की स्व-पहचान करने की अनुमति देता है।

वर्तमान संशोधन स्व-पहचान की तुलना में जैविक और चिकित्सा प्रमाणीकरण पर जोर देकर इस सिद्धांत का खंडन करता प्रतीत होता है।

आधारित प्रश्न

प्रश्न: ट्रांसजेंडर व्यक्ति संशोधन विधेयक 2026 निम्नलिखित में से किसे अपनी परिभाषा से बाहर रखता है?

ए. अंतर्लिंगी व्यक्ति
बी. हिजड़ा
सी. स्व-अनुभूत लिंग पहचान
डी. जन्मजात भिन्नताएं

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना में बदलाव: उच्च छात्रवृत्ति, अधिक नौकरियां और नए तकनीकी क्षेत्र शामिल किए गए

सरकार ने प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना में बदलाव करते हुए छात्रवृत्ति राशि बढ़ाई है, पात्रता नियमों में ढील दी है और सेमीकंडक्टर जैसे नए क्षेत्रों को शामिल किया है। प्रमुख बदलावों, लाभों और परीक्षा संबंधी बिंदुओं के बारे में जानें।

सरकार ने प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना में बदलाव करते हुए कंपनियों और उम्मीदवारों दोनों के लिए नियमों को आसान बनाया है। मार्च 2026 में घोषित इस अद्यतन योजना में अब सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा और वैश्विक क्षमता केंद्र जैसे नए जमाने के क्षेत्र भी शामिल होंगे। इसके साथ ही, छात्रवृत्ति में वृद्धि की गई है और पात्रता मानदंडों को भी सरल बनाया गया है। इस कदम का उद्देश्य कम भागीदारी और उच्च ड्रॉप-आउट दर जैसी पिछली चुनौतियों का समाधान करना और योजना को अधिक समावेशी बनाना है।

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना 2026 में प्रमुख परिवर्तन

पुनर्गठित योजना में भागीदारी और परिणामों को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार पेश किए गए। प्रमुख बाधाओं में से एक कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) की अनिवार्यता को हटाना है।

पहले केवल सीएसआर दायित्वों वाली कंपनियां ही भाग ले सकती थीं। अब सीएसआर प्रतिबद्धताओं के बिना कंपनियां भी शामिल हो सकती हैं और इससे भाग लेने वाले संगठनों की संख्या में काफी वृद्धि होगी।

एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव सेमीकंडक्टर और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों को शामिल करना है। इन क्षेत्रों की भागीदारी भविष्य के लिए तैयार उद्योगों पर सरकार के फोकस को दर्शाती है।

उम्मीदवारों के लिए पात्रता मानदंड में ढील दी गई है।

योजना को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने के लिए प्राधिकरण ने पात्रता मानदंडों में ढील दी है। अब स्नातकोत्तर डिग्री और एमबीए धारक भी पात्र हैं, जो पहले संभव नहीं था।

आयु संबंधी मानदंडों में भी संशोधन किया गया है।

  • न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई है।
  • अधिकतम आयु सीमा 24 से बढ़ाकर 25 वर्ष कर दी गई है।

इस बदलाव से नवस्नातकों और युवा पेशेवरों सहित युवा व्यक्तियों के व्यापक समूह को इस योजना से लाभ उठाने का अवसर मिलेगा।

छात्रवृत्ति में वृद्धि से भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।

प्रारंभिक चरणों में मुख्य चिंता सीमित वित्तीय प्रोत्साहनों के कारण कम भागीदारी थी। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने मासिक वजीफे की सीमा ₹5,000 से बढ़ाकर ₹9,000 कर दी है।

इस वृद्धि से यह उम्मीद की जाती है कि,

  • अधिक से अधिक उम्मीदवारों को आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित करें
  • स्कूल छोड़ने वालों की दर कम करें
  • विभिन्न पृष्ठभूमियों के छात्रों के लिए इंटर्नशिप को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाएं।

सहभागी कंपनियों और क्षेत्रों का विस्तार

इस योजना में कंपनियों की भागीदारी में भी लगातार वृद्धि देखी गई। पहले चरण (अक्टूबर 2024) में 280 कंपनियों से बढ़कर यह संख्या 549 हो गई है और इसने 500 के प्रारंभिक लक्ष्य को भी पार कर लिया है।

इस योजना में भाग लेने वाली प्रमुख कंपनियां निम्नलिखित हैं:

  • रिलायंस इंडस्ट्रीज
  • टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस)
  • एचडीएफसी बैंक
  • मारुति सुजुकी
  • लार्सन और टुब्रो
  • महिंद्रा एंड महिंद्रा

सीएसआर प्रतिबंधों को हटाने और नए क्षेत्रों को भी इसमें भाग लेने की अनुमति देने से लाभार्थियों के लिए अवसरों का विस्तार होगा।

तीसरे चरण के लक्ष्य और अवसर

इस योजना का तीसरा चरण वर्तमान में चल रहा है और इसने 1 लाख (100,000) इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

अब तक इस योजना के तहत,

  • 15,500 से अधिक इंटर्नशिप के प्रस्ताव दिए जा चुके हैं।
  • अवसर 19 क्षेत्रों में फैले हुए हैं।
  • इसमें 32 राज्य और क्षेत्र शामिल हैं।

आधारित प्रश्न

प्रश्न: पीएम इंटर्नशिप योजना 2026 के तहत संशोधित मासिक वजीफा कितना है?

ए. ₹5,000
बी. ₹7,000
सी. ₹9,000
डी. ₹10,000

S&P ने FY27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ बढ़ाकर 7.1% की: जानें कारण और जोखिम

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने उपभोग, निवेश और निर्यात के आधार पर भारत के वित्त वर्ष 2027 के जीडीपी पूर्वानुमान को बढ़ाकर 7.1% कर दिया है, साथ ही मध्य पूर्व में तनाव, तेल की कीमतों और मुद्रास्फीति के दबाव से उत्पन्न जोखिमों के बारे में चेतावनी भी दी है।

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने 25 मार्च, 2026 को वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान अपडेट करते हुए इसे बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। यह वृद्धि मजबूत निजी उपभोग, बेहतर निवेश और स्थिर निर्यात प्रदर्शन के बाद हुई है। हालांकि, वैश्विक एजेंसी ने चेतावनी दी है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से मध्य पूर्व में, जोखिम पैदा कर सकते हैं।

भारत के लिए एसएंडपी का नवीनतम जीडीपी पूर्वानुमान

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स द्वारा जारी नवीनतम एशिया-प्रशांत आर्थिक दृष्टिकोण भारत की विकास गाथा का संतुलित परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करता है।

प्रमुख विकास अनुमान

  • वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी वृद्धि: संशोधित होकर 7.6% हो गई है।
  • वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी वृद्धि दर: अनुमानित 7.1%

वैश्विक स्तर पर विकास दर में मामूली गिरावट की उम्मीद है, लेकिन यह मजबूत बनी रहेगी।

विकास के मुख्य कारक

  • मजबूत निजी उपभोग जो मांग को समर्थन दे रहा है
  • निजी निवेश में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है
  • निर्यात में स्थिर प्रदर्शन, विशेष रूप से सेवाओं के क्षेत्र में।

भारत की आर्थिक वृद्धि के पीछे क्या कारण हैं?

वर्तमान में भारत की आर्थिक शक्ति कई आंतरिक कारकों से प्रेरित है।

1. मजबूत घरेलू खपत

  • बढ़ती आय और शहरी मांग
  • सरकारी कल्याणकारी योजनाएं जो खर्च को बढ़ावा दे रही हैं
  • स्थिर मुद्रास्फीति (वर्तमान में मध्यम स्तर पर)

2. निवेश की वसूली

  • सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में वृद्धि की गई।
  • निजी क्षेत्र के निवेश में धीरे-धीरे वृद्धि हो रही है
  • दीर्घकालिक विकास के लिए अवसंरचना को बढ़ावा देना

3. निर्यात क्षमता

  • सेवाओं के निर्यात में वृद्धि (आईटी, डिजिटल सेवाएं)
  • व्यापार बाजारों का विविधीकरण

एसएंडपी द्वारा उजागर किए गए प्रमुख जोखिम

हालांकि दृष्टिकोण अभी भी सकारात्मक है, एसएंडपी ने कई वैश्विक और घरेलू जोखिमों के बारे में चेतावनी दी है।

बढ़ते भूराजनीतिक तनाव

  • मध्य पूर्व में जारी संघर्ष से तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे वैश्विक व्यापार मार्गों पर प्रभाव

तेल की ऊंची कीमतों से आयात बिल बढ़ सकता है, व्यापार घाटा भी बढ़ सकता है और मुद्रास्फीति का स्तर भी बढ़ सकता है।

मुद्रास्फीति और राजकोषीय स्वास्थ्य पर प्रभाव

एसएंडपी ने आने वाले वर्षों में मुद्रास्फीति में धीरे-धीरे वृद्धि का अनुमान लगाया है।

मुद्रास्फीति का दृष्टिकोण

  • वित्त वर्ष 2027 में अनुमानित मुद्रास्फीति: 4.3%
  • ऊर्जा की कीमतों और मांग में सुधार के कारण

राजकोषीय दबाव

तेल की बढ़ती कीमतें सरकार को मजबूर कर सकती हैं,

  • ईंधन सब्सिडी बढ़ाएँ
  • राजकोषीय घाटे का सावधानीपूर्वक प्रबंधन करें।

आधारित प्रश्न

प्रश्न: एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का पूर्वानुमान क्या है?

ए. 6.5%
बी. 7.1%
सी. 7.6%
डी. 8.0%

अकाशा300 3डी प्रिंटर की व्याख्या: यह आईएसआरओ के अंतरिक्ष अभियानों को कैसे बदल देगा

भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए, केरल स्थित स्टार्टअप स्पेसटाइम 4डी द्वारा विकसित अकाशा300 3डी प्रिंटर को आईएसआरओ के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (एलपीएससी) को सौंप दिया गया है। औद्योगिक स्तर का और उच्च तापमान पर काम करने वाला यह 3डी प्रिंटर आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए, केरल स्थित स्टार्टअप स्पेसटाइम 4डी द्वारा विकसित अकाशा300 3डी प्रिंटर को आईएसआरओ के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (एलपीएससी) को सौंप दिया गया है। औद्योगिक स्तर का और उच्च तापमान पर काम करने वाला यह 3डी प्रिंटर अंतरिक्ष विनिर्माण में आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रिंटर को अंतरिक्ष मिशनों के लिए जटिल पुर्जे बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

Akasha300 3D प्रिंटर क्या है?

यह उच्च तापमान वाला, बहु-सामग्री एक्सट्रूज़न 3डी प्रिंटर है और इसे विशेष रूप से उन्नत एयरोस्पेस अनुप्रयोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है।

सामान्य 3डी प्रिंटरों की तुलना में, यह इंजीनियरिंग-ग्रेड थर्मोप्लास्टिक्स और कंपोजिट सामग्रियों को संभालने में सक्षम है, जो अंतरिक्ष में चरम स्थितियों के लिए आवश्यक हैं।

इसे निम्नलिखित के सहयोग से विकसित किया गया है:

  • आईआईएसटी में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी नवाचार और इनक्यूबेशन केंद्र (एसटीआईआईसी)
  • केरल स्टार्टअप मिशन (केएसयूएम)

यह सिर्फ एक विनिर्माण उपकरण ही नहीं बल्कि एक अनुसंधान मंच भी है। यह मंच वैज्ञानिकों को अगली पीढ़ी की सामग्रियों और डिजाइनों के साथ प्रयोग करने में सक्षम बनाता है।

मुख्य विशेषताएं और तकनीकी क्षमताएं

Akasha300 अपनी उन्नत विशिष्टताओं के कारण अलग पहचान रखता है, जो इसे उच्च स्तरीय औद्योगिक और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त बनाता है।

इसकी कुछ प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं:

उच्च तापमान प्रिंटिंग: नोजल का तापमान 350°C तक जा सकता है (जिसे 550°C तक बढ़ाया जा सकता है)

डुअल एक्सट्रूज़न सिस्टम: यह एक साथ दो सामग्रियों से प्रिंटिंग करने में सक्षम बनाता है।

हीटेड बेड: 110°C तक (150°C तक अपग्रेड किया जा सकता है)

नियंत्रित कक्ष: तापमान को 80°C तक बनाए रखता है

बहु-सामग्री क्षमता: उन्नत पॉलिमर और कंपोजिट का समर्थन करता है

सुरक्षा प्रणालियाँ : इसमें वायु शोधन और मजबूत गति नियंत्रण शामिल हैं।

इन विशेषताओं के कारण यह प्रिंटर जटिल, हल्के और उच्च शक्ति वाले एयरोस्पेस घटकों का निर्माण कर सकता है।

Akasha300 किस प्रकार ISRO की सहायता करता है

आईएसआरओ के एलपीएससी में अकाशा300 की तैनाती से अनुसंधान, प्रोटोटाइपिंग और विनिर्माण क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

इसकी सबसे बड़ी खूबी रैपिड प्रोटोटाइपिंग है। इंजीनियर अब महीनों के बजाय कुछ ही दिनों में कंपोनेंट डिजाइन और टेस्ट कर सकते हैं, जिससे रॉकेट इंजन और सैटेलाइट सिस्टम के विकास में तेजी आएगी।

एक अन्य महत्वपूर्ण लाभ उन्नत सामग्रियों का उपयोग करने की क्षमता है, जैसे कि…

  • पीईके (पॉलीथर ईथर कीटोन)
  • PEKK (पॉलीथर कीटोन कीटोन)
  • कार्बन-फाइबर-प्रबलित कंपोजिट

ये सामग्रियां अपने उच्च शक्ति-से-भार अनुपात और ताप प्रतिरोध के लिए जानी जाती हैं और अंतरिक्ष अभियानों के लिए आवश्यक हैं।

लागत दक्षता और स्वदेशी नवाचार

Akasha300 का एक मुख्य लाभ इसकी लागत-प्रभावशीलता है। मिलिंग और टर्निंग जैसी पारंपरिक निर्माण विधियों के परिणामस्वरूप अक्सर सामग्री की बर्बादी और उच्च लागत होती है।

इसके विपरीत, 3डी प्रिंटिंग जो सुविधाएँ प्रदान करती है,

  • सामग्री की बर्बादी कम हुई
  • उत्पादन लागत कम करें
  • तेज़ प्रतिक्रिया समय

आधारित प्रश्न

प्रश्न: अकाशा300 3डी प्रिंटर किस संगठन द्वारा विकसित किया गया है?

ए. इसरो
बी. डीआरडीओ
सी. स्पेसटाइम 4डी
डी. एचएएल

भारत की स्पोर्ट्स इकॉनमी 2025 में ₹18,864 करोड़ पार: क्रिकेट का दबदबा, डिजिटल का उछाल

मीडिया अधिकारों, प्रायोजनों और क्रिकेट के प्रभुत्व के बल पर भारत की खेल अर्थव्यवस्था 2025 तक 2 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर जाएगी। विकास के कारकों, रुझानों और भविष्य की संभावनाओं का अन्वेषण करें।

भारत की खेल अर्थव्यवस्था ने 2025 में 2 अरब डॉलर का आंकड़ा पार करते हुए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है और इसका मूल्य 18,864 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। डब्ल्यूपीपी मीडिया की रिपोर्ट ‘स्पोर्टिंग नेशन: बिल्डिंग अ लेगेसी’ के अनुसार, यह उपलब्धि भारत में कई खेलों के तीव्र व्यवसायीकरण और विस्तार को दर्शाती है। इस वृद्धि का कारण बढ़ते निवेश, मीडिया अधिकारों की बढ़ती मांग और प्रशंसकों की बढ़ती भागीदारी है।

आज भारत की खेल अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी है?

भारतीय खेल बाजार ने पिछले कुछ वर्षों में लगातार और प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की है। 2025 में इसका कुल मूल्य ₹18,864 करोड़ (2.13 अरब डॉलर) तक पहुंच गया है। यह 2024 के ₹16,633 करोड़ से 13.4% की वार्षिक वृद्धि दर्शाता है।

पिछले कुछ वर्षों के रुझानों में ऊपर की ओर रुझान स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

  • 2023: ₹15,766 करोड़
  • 2024: ₹16,633 करोड़
  • 2025: ₹18,864 करोड़

यह निरंतर वृद्धि इस बात को उजागर करती है कि भारत में खेल अब केवल मनोरंजन नहीं बल्कि एक गंभीर व्यावसायिक पारिस्थितिकी तंत्र बन गए हैं।

मीडिया पर खर्च: विकास का सबसे बड़ा चालक

इस वृद्धि का मुख्य कारण मीडिया पर किया गया खर्च है, जिसका खेल अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान है। 2025 में मीडिया निवेश कुल बाजार का लगभग 51% था और यह ₹9,571 करोड़ तक पहुंच जाएगा।

एक आंकड़े से पता चलता है कि,

  • टेलीविजन विज्ञापन: ₹5,117 करोड़ (16-17% की वृद्धि)
  • डिजिटल विज्ञापन: ₹4,449 करोड़ (लगभग 24% की वृद्धि)

यह रुझान भारतीय दर्शकों द्वारा खेल देखने के तरीके में आए बड़े बदलाव को दर्शाता है। हालांकि टेलीविजन अभी भी प्रमुख माध्यम बना हुआ है, लेकिन मोबाइल के बढ़ते विस्तार के साथ डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म भी तेजी से लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं।

प्रायोजन: विकास का एक मजबूत स्तंभ

खेलों में उछाल का एक अन्य प्रमुख कारण प्रायोजन कारक है। 2025 में प्रायोजन निवेश ₹7,943 करोड़ तक पहुंच गया, जो कुल बाजार का लगभग 42% है।

इसमे शामिल है,

  • टीम प्रायोजन
  • लीग साझेदारी
  • ऑन-ग्राउंड इवेंट ब्रांडिंग

खिलाड़ियों के एंडोर्समेंट भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। एंडोर्समेंट डील लगभग ₹1,350 करोड़ तक पहुंच गईं, जो 10% से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर्शाती हैं।

भारत की खेल अर्थव्यवस्था में क्रिकेट का वर्चस्व

अन्य खेलों के विकास के बावजूद, क्रिकेट भारतीय खेल जगत पर भारी अंतर से अपना दबदबा बनाए हुए है। 2025 में अकेले क्रिकेट ने लगभग ₹16,704 करोड़ का योगदान दिया और यह कुल खेल अर्थव्यवस्था का लगभग 89% है।

क्रिकेट सभी प्रमुख राजस्व स्रोतों में अग्रणी है।

  • प्रायोजन व्यय का 81%
  • एथलीटों के 87% समर्थन
  • मीडिया निवेश का 95%

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) और महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) जैसी लीगों ने इस प्रभुत्व में मूलभूत भूमिका निभाई है।

उभरते रुझान: डिजिटल, विविधता और विस्तार

क्रिकेट का दबदबा अभी भी कायम है, लेकिन फुटबॉल, कबड्डी और बैडमिंटन जैसे अन्य खेल धीरे-धीरे मुख्यधारा में आ रहे हैं। प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) और इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) जैसी लीगें विविधता लाने में योगदान दे रही हैं।

प्रमुख उभरते रुझानों में शामिल हैं:

  • डिजिटल दर्शकों की संख्या में तीव्र वृद्धि
  • महिला खेल लीगों का उदय
  • जमीनी स्तर के विकास कार्यक्रमों में वृद्धि
  • दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों में विस्तार

आधारित प्रश्न

प्रश्न: 2025 में भारत की खेल अर्थव्यवस्था का अनुमानित मूल्य कितना था?

ए. ₹15,766 करोड़
बी. ₹16,633 करोड़
सी. ₹18,864 करोड़
डी. ₹20,000 करोड़

एशिया में OpenAI का विस्तार: भारत में विकास को गति देने के लिए किरण मणि को APAC प्रमुख नियुक्त किया गया

ओपनएआई ने अपने एआई संचालन को विस्तार देने के लिए किरण मणि को एशिया-प्रशांत क्षेत्र का प्रमुख नियुक्त किया है। यह नियुक्ति भारत जैसे उच्च क्षमता वाले बाजारों पर ओपनएआई के बढ़ते फोकस को दर्शाती है, क्योंकि यह तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी परिदृश्य में वैश्विक एआई दिग्गजों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है।

ओपनएआई ने जियोस्टार के पूर्व सीईओ किरण मणि को एशिया-प्रशांत (एपीएसी) क्षेत्र का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति की घोषणा 25 मार्च, 2026 को की गई थी। वे सिंगापुर स्थित अपने कार्यालय से एशिया भर में ओपनएआई के विस्तार का नेतृत्व करेंगे और मुख्य रणनीति अधिकारी जेसन क्वोन को रिपोर्ट करेंगे। यह नियुक्ति भारत जैसे उच्च क्षमता वाले बाजारों पर कंपनी के बढ़ते फोकस को दर्शाती है।

किरण मणि कौन हैं?

किरण मणि एक अनुभवी प्रौद्योगिकी और व्यावसायिक नेता हैं, जिन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म और वैश्विक कंपनियों में व्यापक अनुभव है।

ओपनएआई में शामिल होने से पहले, उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज और वॉल्ट डिज्नी के संयुक्त उद्यम, जियोस्टार के सीईओ के रूप में कार्य किया।

उन्होंने गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और आईबीएम जैसी प्रमुख तकनीकी कंपनियों के साथ भी काम किया है और उन्होंने गूगल में एक दशक से अधिक समय बिताया है, जहां उन्होंने एशिया-प्रशांत और जापान में एंड्रॉइड और गूगल प्ले के संचालन का नेतृत्व किया।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में OpenAI का विस्तार क्यों हो रहा है?

एशिया-प्रशांत क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े और सबसे तेजी से बढ़ते डिजिटल बाजारों में से एक है।

भारत, इंडोनेशिया और जापान जैसे देशों में विशाल उपयोगकर्ता आधार मौजूद हैं और इसके साथ ही एआई-संचालित सेवाओं की मांग भी बढ़ेगी।

भारत की 1.4 अरब आबादी ओपनएआई के लिए एक प्रमुख फोकस क्षेत्र है। कंपनी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल सेवाओं जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपार संभावनाएं देखती है।

भारत और एशिया में OpenAI की रणनीति

यह कंपनी भारत में अपनी उपस्थिति को लगातार मजबूत कर रही है। 2024 में कंपनी ने भारत में अपना पहला कर्मचारी नियुक्त किया, जो सरकारी संबंधों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

फरवरी 2026 में, ओपनएआई ने भारत में एआई प्रौद्योगिकियों और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने के लिए टाटा समूह के साथ भी साझेदारी की।

इसके साथ ही, OpenAI का लक्ष्य ChatGPT और अन्य AI उपकरणों को अपनाने की प्रक्रिया को गति देना और साथ ही साझेदारी का निर्माण करना है।

आधारित प्रश्न

प्र. किरण मणि को एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए किस कंपनी का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है?

ए. गूगल
बी. माइक्रोसॉफ्ट
सी. ओपनएआई
डी. अमेज़न

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