वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में भारत ने एक रणनीतिक कदम उठाया है। सरकार ने गुजरात के धोलेरा में टाटा सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) को मंज़ूरी दे दी है। इस पहल को ₹91,000 करोड़ के भारी-भरकम निवेश का समर्थन प्राप्त होगा, और इस परियोजना के माध्यम से देश की पहली चिप फैब्रिकेशन यूनिट स्थापित की जाएगी। उम्मीद है कि यह पहल घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देगी, आयात पर निर्भरता कम करेगी और हज़ारों रोज़गार के अवसर पैदा करेगी।
टाटा सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट के लिए SEZ मंज़ूरी
सरकार ने धोलेरा में टाटा सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड के लिए स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) को आधिकारिक तौर पर नोटिफ़ाई कर दिया है।
- इसे बोर्ड ऑफ़ अप्रूवल ने मंज़ूरी दी है, जो SEZ मामलों के लिए सबसे बड़ी अथॉरिटी है।
- इसकी अध्यक्षता कॉमर्स सेक्रेटरी करेंगे।
- और इसे कॉमर्स डिपार्टमेंट ने 9 अप्रैल, 2026 को नोटिफ़ाई किया था।
यह SEZ इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर, सॉफ़्टवेयर और IT/ITeS सेवाओं पर फ़ोकस करेगा, जिससे यह एक पूरी तरह से टेक्नोलॉजी हब बन जाएगा।
सेमीकंडक्टर हब के लिए भारी निवेश
इस प्रोजेक्ट में ₹91,000 करोड़ का निवेश भी शामिल है, जिससे यह भारत की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर पहलों में से एक बन गया है।
मुख्य बातें ये हैं:
- भारत की पहली चिप फैब्रिकेशन यूनिट की स्थापना करना
- साथ ही सेमीकंडक्टर के घरेलू उत्पादन को मज़बूत बनाना
- वैश्विक चिप आयात पर निर्भरता को कम करना
धोलेरा: उभरता हुआ सेमीकंडक्टर हब
यह SEZ गुजरात के धोलेरा में 66.16 हेक्टेयर ज़मीन पर विकसित किया जाएगा।
- धोलेरा को चुनने की वजह यह है कि यह ‘धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन’ (SIR) का हिस्सा है।
- इसे एक ‘स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी’ के तौर पर प्लान किया गया था।
- साथ ही, इसे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और अहमदाबाद, वडोदरा, गांधीनगर और सूरत जैसे शहरों से बेहतर कनेक्टिविटी से भी लैस किया गया था।
धोलेरा, भारत में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक अहम डेस्टिनेशन के तौर पर तेज़ी से उभर रहा है।
विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZs) क्या हैं?
विशेष आर्थिक क्षेत्र देश के भीतर ऐसे खास इलाके होते हैं, जहाँ व्यापार और वाणिज्य से जुड़े कानून देश के बाकी हिस्सों से अलग होते हैं।
ये क्षेत्र निम्नलिखित सुविधाएँ प्रदान करते हैं:
- व्यवसायों के लिए कर में छूट और शुल्क-मुक्त आयात की सुविधा।
- साथ ही, विनियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाता है।
- और बेहतर बुनियादी ढाँचा तथा लॉजिस्टिक्स सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
इसका मुख्य उद्देश्य एक ऐसा व्यवसाय-अनुकूल वातावरण तैयार करना है, जो उद्योगों को अपने परिचालन स्थापित करने और निर्यात का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित करे।
भारत में SEZ का विकास
भारत में SEZ की यात्रा आज़ादी के कुछ ही समय बाद शुरू हो गई थी।
- 1965: एशिया का पहला एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग ज़ोन (EPZ) गुजरात राज्य के कांडला में स्थापित किया गया।
- 2000: निर्यात और विकास को बढ़ावा देने के लिए SEZ नीति पेश की गई।
- 2005: संसद द्वारा SEZ अधिनियम भी पारित किया गया।
- 2006: विकास की गति तेज़ करने के लिए SEZ अधिनियम और नियम लागू किए गए।
31 मार्च, 2024 तक भारत में 280 से ज़्यादा चालू SEZ हैं, जो अर्थव्यवस्था में उनके महत्व को दर्शाते हैं।
भारत में अन्य सेमीकंडक्टर SEZ प्रोजेक्ट्स
टाटा के सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट के अलावा, कई अन्य SEZ को भी मंज़ूरी दी गई है।
- CG सेमी – ₹2,150 करोड़
- कायन्स सेमीकॉन – ₹681 करोड़
- माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी भारत – ₹13,000 करोड़
- हुबली टिकाऊ सामान क्लस्टर – ₹100 करोड़
यह पूरे भारत में सेमीकंडक्टर निवेश के बढ़ते इकोसिस्टम को दर्शाता है।


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