फीफा ने 2026 विश्व कप के विशेष सत्र के लिए शुभंकर की घोषणा की

फीफा ने आधिकारिक रूप से विश्व कप 2026 के मैस्कॉट्स का अनावरण किया। यह आयोजन 25 सितम्बर 2025 को किया गया। तीनों मैस्कॉट्स अपने-अपने सह-मेज़बान देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं और विश्व कप की एकता, आनंद और वैश्विक उत्सव की भावना को दर्शाते हैं।

क्लच द बाल्ड ईगल – अमेरिका

  • प्रतीक: साहस, जिज्ञासा और समावेशिता।

  • मैदान पर भूमिका: मिडफील्डर, जो टीम को जोड़कर रखता है और रणनीतिक कौशल दर्शाता है।

  • संदेश: अमेरिका की विविध सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और समरसता।

मेपल द मूस – कनाडा

  • प्रतीक: प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता।

  • मैदान पर भूमिका: गोलकीपर, जो संरक्षक और शक्ति का प्रतीक है।

  • संदेश: कनाडा की स्वागतपूर्ण भावना और दृढ़ता।

ज़ायू द जैगुआर – मेक्सिको

  • प्रतीक: दक्षिण मेक्सिको के जंगल, प्राचीन विरासत और रंगीन परंपराएँ।

  • मैदान पर भूमिका: स्ट्राइकर, जो रचनात्मक और फुर्तीला है।

  • संदेश: फुटबॉल में जुनून और लय।

खास बातें

  • पहली बार पुरुषों के वरिष्ठ फीफा विश्व कप में एक से अधिक मैस्कॉट्स पेश किए गए।

  • यह निर्णय बहुराष्ट्रीय मेज़बानी प्रारूप और टूर्नामेंट के विस्तार (32 से 48 टीमों) के अनुरूप है।

  • फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने कहा – “ये मैस्कॉट्स आनंद, ऊर्जा और एकजुटता की भावना से भरपूर हैं, बिल्कुल विश्व कप की तरह।”

फीफा विश्व कप 2026 – मुख्य जानकारी

बिंदु विवरण
उद्घाटन मैच 11 जून 2026 – एस्तादियो अज़्टेका, मैक्सिको सिटी
फाइनल मैच 19 जुलाई 2026 – मेटलाइफ स्टेडियम, न्यू जर्सी (न्यूयॉर्क सिटी के पास)
टीमें 48 (पहले 32)
कुल मैच 104
नई विशेषता फाइनल के दौरान पहला हाफटाइम शो

27 साल का हुआ Google, एक यादगार डूडल के साथ नवाचार की विरासत का जश्न

गूगल ने 27 सितंबर 2025 को अपने 27वें जन्मदिन पर एक खास डूडल जारी किया, जो उपयोगकर्ताओं को उसकी शुरुआती यात्रा की याद दिलाता है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोध प्रोजेक्ट के रूप में 1998 में शुरू हुआ यह सफ़र आज इसे दुनिया की सबसे प्रभावशाली तकनीकी कंपनियों में से एक बना चुका है। इस अवसर पर जारी डूडल में गूगल का पहला लोगो दिखाया गया है, जो बीते तीन दशकों से उपयोगकर्ताओं के विश्वास और समर्थन के प्रति आभार का प्रतीक है।

गूगल 27 सितंबर को क्यों मनाता है जन्मदिन?

  • आधिकारिक स्थापना (Incorporation): 4 सितंबर 1998

  • जन्मदिन का उत्सव: 27 सितंबर

हालाँकि कंपनी की स्थापना 4 सितंबर को हुई थी, लेकिन गूगल अब 27 सितंबर को ही अपना प्रतीकात्मक जन्मदिन मानता है। इसका कारण है शुरुआती डूडल परंपरा, जो इसी दिन से शुरू हुई थी और धीरे-धीरे हर साल का नियमित उत्सव बन गई।

एक गैराज से लेकर वैश्विक ताक़त तक

गूगल का मिशन शुरू से ही था – “दुनिया की जानकारी को व्यवस्थित करना और उसे सार्वभौमिक रूप से सुलभ व उपयोगी बनाना।”

मुख्य मील के पत्थर:

  • संस्थापक: लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन

  • शुरुआत: मेनलो पार्क, कैलिफ़ोर्निया के एक गैराज से

  • पैरेंट कंपनी: अब Alphabet Inc. का हिस्सा

मुख्य कारोबार:

  • सर्च इंजन – विश्व का सबसे लोकप्रिय प्लेटफ़ॉर्म

  • YouTube – सबसे बड़ा वीडियो-शेयरिंग मंच

  • एंड्रॉयड OS – वैश्विक स्मार्टफ़ोन बाज़ार में प्रभुत्व

  • क्लाउड व विज्ञापन – राजस्व और नवाचार के मुख्य स्तंभ

  • AI व क्वांटम कंप्यूटिंग – सुंदर पिचाई के नेतृत्व में अग्रणी योगदान

गूगल डूडल्स का विकास

  • पहला डूडल (1998): बर्निंग मैन फेस्टिवल के लिए स्टिक फिगर लोगो

  • आज: वैज्ञानिकों, कलाकारों, ऐतिहासिक घटनाओं और त्योहारों को समर्पित

  • उद्देश्य: शिक्षित करना, मनोरंजन करना और उपयोगकर्ताओं को वैश्विक संस्कृति से जोड़ना

इस साल का 27वाँ जन्मदिन डूडल एक भावनात्मक झलक है—गूगल के पहले लोगो के ज़रिए उसके विकास और उपयोगकर्ताओं के प्रति आभार को दर्शाता है।

गूगल का भविष्य

सुंदर पिचाई के नेतृत्व में गूगल इन क्षेत्रों में अग्रसर है:

  • क्वांटम कंप्यूटिंग – अगली पीढ़ी की कंप्यूटिंग क्षमता

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) – गूगल बार्ड और जेमिनी जैसे टूल्स

  • क्लाउड व ई-कॉमर्स सेवाएँ – वैश्विक व्यापार समाधान में परिवर्तन

गूगल का मूल उद्देश्य अब भी वही है – जानकारी के माध्यम से लोगों को सशक्त बनाना

भारत सरकार ने बीएसआई का नेतृत्व करने के लिए पहले मशरूम वैज्ञानिक को नियुक्त किया

भारत के वैज्ञानिक समुदाय के लिए 25 सितम्बर 2025 का दिन ऐतिहासिक रहा, जब डॉ. कनद दास ने बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (BSI) के 13वें निदेशक के रूप में पदभार संभाला। वे इस प्रतिष्ठित संस्था के पहले माइकोलॉजिस्ट (कवक विशेषज्ञ) बने हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अधीन कार्यरत BSI की स्थापना 1890 में हुई थी और इसका कार्य भारत की वनस्पति विविधता का दस्तावेज़ीकरण एवं संरक्षण करना है। डॉ. दास की नियुक्ति कवकीय विविधता (फंगल बायोडायवर्सिटी) की अहमियत को नई पहचान देती है।

डॉ. कनद दास कौन हैं?

भारत के अग्रणी कवक वर्गीकरण विशेषज्ञ (Fungal Taxonomist)

  • 165 से अधिक नई जंगली मशरूम प्रजातियाँ और 2 नए वंश (Genera) खोजे।

  • 170 शोध-पत्र प्रकाशित (Fungal Diversity, Mycosphere, Nature Scientific Reports, IMA Fungus जैसी जर्नल्स में)।

  • 8 पुस्तकें जंगली मशरूम पर लिखीं।

  • 25+ वर्ष का अनुभव वनस्पति विज्ञान में।

  • नेतृत्वकारी भूमिकाएँ – आचार्य जगदीश चंद्र बोस भारतीय वानस्पतिक उद्यान एवं सेंट्रल नेशनल हर्बेरियम।

  • करियर की शुरुआत – BSI देहरादून केंद्र में शोध छात्र के रूप में।

उनकी यात्रा संस्थान से प्रारंभ होकर उसी के शीर्ष तक पहुँचना, समर्पण और दीर्घ अनुभव का प्रतीक है।

बीएसआई के लिए दृष्टिकोण (Vision)

  • भारत के निम्न पादप समूहों और कवकों की व्यापक चेकलिस्ट तैयार करना।

  • राष्ट्रीय हर्बेरियम डेटाबेस का डिजिटलीकरण, ताकि शोधकर्ताओं और आम जनता दोनों के लिए सुलभ हो।

  • वनस्पति सर्वेक्षण कार्यों में समावेशिता और वैज्ञानिक विस्तार को बढ़ावा देना।

बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (BSI) – तथ्य

  • स्थापना: 1890

  • मुख्यालय: कोलकाता

  • मंत्रालय: MoEFCC

  • संरचना: 11 क्षेत्रीय केंद्र, 4 सहायक इकाइयाँ

  • मिशन: भारत की पुष्पीय संपदा का अन्वेषण, दस्तावेज़ीकरण और संरक्षण

प्रमुख स्थिर तथ्य (Static)

बिंदु विवरण
नए निदेशक डॉ. कनद दास
विशेषज्ञता माइकोलॉजी (कवक वर्गीकरण)
प्रमुख उपलब्धि 165 नई मशरूम प्रजातियाँ, 2 नए वंश
BSI स्थापना 1890
मुख्यालय कोलकाता
दृष्टि निम्न पादप समूहों की चेकलिस्ट व हर्बेरियम का डिजिटलीकरण

मोदी ने राजस्थान में ₹1.22 लाख करोड़ के विकास अभियान की शुरुआत की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितम्बर 2025 को बांसवाड़ा (राजस्थान) से नवरात्रि के अवसर पर राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा विकास पैकेज शुरू किया। नवरात्रि के दौरान बांसवाड़ा से की गई इस घोषणा में स्वच्छ ऊर्जा, आदिवासी उत्थान, कनेक्टिविटी और कल्याणकारी योजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसका उद्देश्य दक्षिण राजस्थान और उसके आसपास के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को बदलना है।

कुल राशि: ₹1.22 लाख करोड़
यह पैकेज स्वच्छ ऊर्जा, आदिवासी सशक्तिकरण, संपर्कता और कल्याण योजनाओं पर केंद्रित है।

शक्ति भूमि से ऊर्जा क्रांति

भारत के ऊर्जा क्षेत्र को नई उड़ान

  • माही बांसवाड़ा परमाणु ऊर्जा परियोजना – ₹42,000 करोड़

    • 4 स्वदेशी 700 मेगावॉट रिएक्टर (Fleet Mode में)

  • सौर ऊर्जा परियोजनाएँ – जैसलमेर, जालोर, सीकर, फालोदी में उद्घाटन; बीकानेर और आंध्रप्रदेश में शिलान्यास।

  • ट्रांसमिशन अवसंरचना – ₹13,180 करोड़

    • नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों को देशभर के उपभोक्ता केन्द्रों से जोड़ने के लिए।

भारत अब ऊर्जा घाटे से स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है और राजस्थान इसमें प्रमुख भूमिका निभा रहा है।

किसानों और गाँवों को सौर योजना से शक्ति

  • पीएम सूर्या घर मुफ्त बिजली योजना – घरों के लिए मुफ्त रूफटॉप सौर पैनल।

  • पीएम-कुसुम योजना (घटक C) – ₹16,050 करोड़

    • 3,517 मेगावॉट कृषि फीडरों का सौरकरण।

सिंचाई की लागत घटेगी, डीज़ल निर्भरता कम होगी, ग्रामीण ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

हर घर और खेत तक पानी

  • ₹20,830 करोड़ – बाँध निर्माण और पुनर्जीवन (इसरदा, मोर सागर), नहर और पंप हाउस, लिफ्ट एवं फीडर कैनाल।

  • ₹5,880 करोड़ – बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, अजमेर जिलों में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति (अमृत 2.0 के तहत)।

सड़क, रेल और क्षेत्रीय संपर्कता

  • ₹2,630 करोड़ – फ्लाईओवर, हाईवे और पुल।

  • 3 नई ट्रेनें शुरू

    • इनमें 2 वंदे भारत एक्सप्रेस सेवाएँ भी शामिल।
      ग्रामीण इलाकों को शहरी केन्द्रों से जोड़ने पर जोर।

रोजगार, युवा और कल्याण

  • 15,000 से अधिक नियुक्ति पत्र सरकारी नौकरियों (शिक्षक, अभियंता आदि) में।

  • आदिवासी और वंचित वर्ग के लिए विशेष योजनाएँ:

    • पीएम जनमन योजना

    • एकलव्य आवासीय विद्यालय और वन धन योजना

    • वनाधिकारों की मान्यता और लघु वनोपज पर एमएसपी विस्तार।

संक्षिप्त तथ्य (Static)

बिंदु विवरण
कुल पैकेज ₹1.22 लाख करोड़
घोषणा तिथि 25 सितम्बर 2025
स्थान बांसवाड़ा, राजस्थान
ऊर्जा परियोजनाएँ ₹90,000 करोड़ (परमाणु + सौर + ट्रांसमिशन)
जल परियोजनाएँ ₹20,830 करोड़ (बाँध, नहर) + ₹5,880 करोड़ (पेयजल)
सड़क-रेल ₹2,630 करोड़ + 3 नई ट्रेनें (2 वंदे भारत)
रोजगार 15,000 नियुक्ति पत्र
आदिवासी/कल्याण योजनाएँ पीएम जनमन, एकलव्य विद्यालय, वन धन, एमएसपी विस्तार

मोदी ने 75 लाख महिलाओं के लिए ₹7,500 करोड़ की रोजगार योजना शुरू की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 सितम्बर 2025 को बिहार की महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की शुरुआत की। इस अवसर पर 75 लाख महिलाओं को प्रत्येक को ₹10,000 की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से दी गई। कुल ₹7,500 करोड़ की राशि का वितरण किया गया, जिससे यह देश की सबसे बड़ी महिला-केंद्रित DBT योजनाओं में से एक बन गई।

योजना का उद्देश्य

  • महिलाओं को स्वरोजगार और आजीविका सृजन के लिए प्रोत्साहित करना।

  • ग्रामीण और शहरी महिलाओं को वित्तीय आत्मनिर्भरता की ओर ले जाना।

  • केंद्र सरकार के “3 करोड़ लक्षपति दीदी” अभियान को मजबूत करना।

योजना की मुख्य विशेषताएँ

  • प्रारंभिक सहायता: प्रति परिवार एक महिला को ₹10,000 की राशि।

  • अतिरिक्त सहायता: व्यवसाय की सफलता के आधार पर अधिकतम ₹2 लाख तक।

  • प्रमुख क्षेत्र: किराना दुकान, दर्जीगिरी, पशुपालन, हस्तशिल्प आदि।

  • प्रशिक्षण व्यवस्था: बिहार की 11 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह (SHGs) के माध्यम से।

  • बाज़ार सुविधा: ग्रामीण हाट-बाज़ार के विस्तार से बिक्री सहयोग।

  • वित्तीय सहयोग: जीविका निधि क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी से माइक्रोफाइनेंस और बिजनेस प्रशिक्षण।

“75 लाख बहनों को ₹10,000 — एक नई शुरुआत”

  • DBT को संभव बनाने में जन धन योजना, आधार और मोबाइल लिंकिंग की बड़ी भूमिका।

  • 30 करोड़ से अधिक महिलाओं के पास बैंक खाते, जिससे पारदर्शी और रीयल-टाइम ट्रांसफर संभव हुआ।

  • योजना को नवरात्रि पर “भाइयों की बहनों को भेंट” की सांस्कृतिक और व्यक्तिगत प्रतीकात्मकता से जोड़ा गया।

लक्षपति दीदी अभियान से जुड़ाव

  • राष्ट्रीय लक्ष्य: 3 करोड़ महिलाएँ आत्मनिर्भर बनें, जिनकी वार्षिक आय ₹1 लाख से अधिक हो।

  • अब तक उपलब्धि: 2 करोड़ से अधिक महिलाएँ लाभान्वित।

  • बिहार की भूमिका: देश में सर्वाधिक लक्षपति दीदी तैयार करने वाला राज्य।

  • पूरक योजनाएँ: मुद्रा योजना, ड्रोन दीदी, बीमा सखी, बैंक दीदी आदि।

स्थिर तथ्य (Static)

बिंदु विवरण
योजना का नाम मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना (बिहार)
शुभारंभ तिथि 26 सितम्बर 2025
प्रारंभिक लाभ प्रत्येक महिला को ₹10,000
कुल लाभार्थी 75 लाख महिलाएँ
कुल वितरित राशि ₹7,500 करोड़
भविष्य की संभावना प्रति महिला अधिकतम ₹2 लाख तक सहायता
जुड़ी हुई योजनाएँ जीविका निधि, लक्षपति दीदी, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत

पत्रकार अम्शी प्रसन्नकुमार ने कृषि मीडिया पुरस्कार 2025 जीता

मैसूर के वरिष्ठ पत्रकार अम्शी प्रसन्नकुमार को होम्बले संहिता हरिनिकुमार एलुमनी कृषि मीडिया अवॉर्ड – 2025 के लिए चुना गया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें कृषि पत्रकारिता में उनके असाधारण योगदान के लिए प्रदान किया जा रहा है, खासकर किसानों को प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से जागरूक करने के कार्य हेतु। यह पुरस्कार कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय (यूएएस), बेंगलुरु के एलुमनी एसोसिएशन द्वारा स्थापित किया गया है और उन्हें यह सम्मान 11 अक्टूबर 2025 को वेटरिनरी कॉलेज कैंपस, हेब्बाल, बेंगलुरु में प्रदान किया जाएगा।

कर्नाटक पत्रकारिता की सशक्त आवाज़

अम्शी प्रसन्नकुमार ने पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबा और सम्मानजनक करियर बनाया है।

  • पूर्व अध्यक्ष, मैसूर जिला पत्रकार संघ

  • सदस्य, कर्नाटक मीडिया अकादमी

उन्होंने अपने लेखन और रिपोर्टिंग के माध्यम से ग्रामीण मुद्दों, कृषि पद्धतियों और किसान कल्याण पर लगातार प्रकाश डाला है। उनकी पत्रकारिता ने न केवल किसानों को सूचित किया है बल्कि उन्हें नीतियों, नवाचारों और सर्वोत्तम प्रथाओं से जोड़कर सशक्त भी किया है।

कृषि मीडिया अवॉर्ड के बारे में

होम्बले संहिता हरिनिकुमार एलुमनी कृषि मीडिया अवॉर्ड प्रतिवर्ष उन पत्रकारों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने कृषि पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान दिया हो। इसका उद्देश्य है—

  • कृषि और ग्रामीण विकास क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण पत्रकारिता को प्रोत्साहन देना।

  • किसान-केंद्रित ज्ञान के प्रचार में मीडिया की भूमिका को रेखांकित करना।

  • युवा पत्रकारों को कृषि विषयों पर कार्य करने के लिए प्रेरित करना।

यह पुरस्कार इस बात का प्रतीक है कि भारत में खेती-किसानी और स्थिरता से जुड़े विमर्श को आकार देने में मीडिया की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।

मुख्य तथ्य (Key Static)

  • पुरस्कार: कृषि मीडिया अवॉर्ड 2025

  • विजेता: अम्शी प्रसन्नकुमार, मैसूर

  • प्रस्तुतकर्ता: एलुमनी एसोसिएशन, यूएएस बेंगलुरु

  • तारीख: 11 अक्टूबर 2025

तुर्की–अमेरिका परमाणु समझौता : वैश्विक ऊर्जा शक्ति संतुलन में नया बदलाव

एक बड़ी भू-राजनीतिक और ऊर्जा संबंधी सफलता के रूप में, तुर्की और अमेरिका ने 25 सितंबर, 2025 को राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन की व्हाइट हाउस की हाई-प्रोफाइल यात्रा के दौरान एक रणनीतिक असैन्य परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता द्विपक्षीय संबंधों को, विशेष रूप से परमाणु ऊर्जा के उच्च-तकनीकी क्षेत्र में, गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसके ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और क्षेत्रीय प्रभाव पर व्यापक प्रभाव पड़ेंगे।

वैश्विक प्रभाव वाली परमाणु साझेदारी

  • मुख्य बिंदु:

    • बड़े पैमाने पर परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का विकास

    • स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) की तैनाती

  • रणनीतिक महत्व:

    • रूस के साथ चल रही परमाणु परियोजनाओं का संतुलन

    • चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के साथ जारी वार्ताओं में शक्ति संतुलन

    • तुर्की को विविधीकृत परमाणु ऊर्जा खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना

  • अन्य ऊर्जा कदम:

    • राष्ट्रपति एर्दोआन की अमेरिका यात्रा के दौरान BOTAS ने 75.8 अरब घन मीटर एलएनजी आयात अनुबंध (Mercuria–स्विट्ज़रलैंड, Woodside Energy–ऑस्ट्रेलिया) पर हस्ताक्षर किए।

तुर्की की परमाणु महत्वाकांक्षा

अक्कूयू : पहला कदम

  • निर्माणकर्ता: रूस की Rosatom

  • लागत: 20 अरब डॉलर

  • रिएक्टर: 4 वीवीईआर (VVER) इकाइयाँ

  • कुल क्षमता: 4,800 मेगावॉट

  • पहली इकाई चालू होने की समय-सीमा: 2026

आगामी परियोजनाएँ

  • सिनोप (काला सागर तट)

  • थ्रेस क्षेत्र (उत्तर-पश्चिम)

  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए खुले, जिसमें नया अमेरिका–तुर्की समझौता मजबूत दावेदार है।

SMRs (भविष्य की दिशा)

  • औद्योगिक क्षेत्रों के पास तैनाती

  • नवीकरणीय ऊर्जा के साथ एकीकरण

  • पारंपरिक संयंत्रों की तुलना में तेज़ निर्माण

  • तुर्की को क्षेत्रीय SMR हब बनाने की क्षमता

स्थिर तथ्य (Static)

बिंदु विवरण
हस्ताक्षर तिथि 25 सितंबर 2025
हस्ताक्षरकर्ता बायराक्तर (तुर्की) एवं रुबियो (अमेरिका)
केंद्रबिंदु नागरिक परमाणु सहयोग — बड़े संयंत्र व SMRs
अन्य सक्रिय परियोजना अक्कूयू (रूस, 4,800 मेगावॉट)
अन्य ऊर्जा कदम 75.8 अरब घन मीटर एलएनजी आयात अनुबंध (Mercuria, Woodside Energy)
रणनीतिक उद्देश्य ऊर्जा विविधीकरण, गैस आयात में कमी, ग्रिड आधुनिकीकरण

दुबई के सड़क और परिवहन प्राधिकरण ने दुबई स्वायत्त क्षेत्र के शुरूआत की घोषणा की

दुबई के सड़क और परिवहन प्राधिकरण ने दुबई स्वायत्त क्षेत्र के शुरूआत की घोषणा की है। यह चालक रहित वाहनों और समुद्री परिवहन के लिए 15 किलोमीटर का समर्पित गलियारा है। इसके 2026 में चालू होने की संभावना है। इस क्षेत्र में अल जद्दाफ मेट्रो स्टेशन, दुबई क्रीक हार्बर और दुबई फेस्टिवल सिटी शामिल हैं। प्राधिकरण की सार्वजनिक परिवहन एजेंसी के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी अहमद बहरोज़यान ने कहा कि इस व्‍यवस्‍था में टैक्सियों से लेकर सड़क की सफाई करने वालों तक, सब कुछ स्वचालित रूप से संचालित होता है। यह परियोजना दुबई की उस महत्वाकांक्षा के अनुरूप है, जिसके तहत वह 2030 तक अपनी 25% दैनिक यात्राओं को स्वचालित (autonomous) बनाना चाहता है। यह ज़ोन 2026 की शुरुआत में चालू होगा और इसमें अल जद्दाफ मेट्रो स्टेशन, दुबई क्रीक हार्बर और दुबई फेस्टिवल सिटी जैसे प्रमुख हब शामिल होंगे।

पूर्णतः एकीकृत ऑटोनॉमस नेटवर्क

  • ड्राइवरलेस मेट्रो

  • रोबोटैक्सी और रोबोबस

  • ऑटोनॉमस शटल व लॉजिस्टिक वाहन

  • डिलीवरी रोबोट और रोड-क्लीनिंग बॉट्स

  • सेल्फ-ड्राइविंग मरीन अब्रास (वाटर टैक्सी)

RTA के पब्लिक ट्रांसपोर्ट एजेंसी के सीईओ अहमद बहरोज़यान ने कहा कि यह “भविष्य की वह तस्वीर है, जहाँ टैक्सी से लेकर सड़क साफ़ करने वाली मशीन तक—सब कुछ स्वचालित होगा और अधिकतम दक्षता से जुड़ा रहेगा।”

रोबोटैक्सी और साझेदारी

  • Uber और WeRide के साथ साझेदारी

  • 2025 के अंत तक रोबोटैक्सी का पायलट ट्रायल

  • 2028 तक 1,000 ऑटोनॉमस टैक्सियों का लक्ष्य

  • 2026 की शुरुआत में ऐप आधारित सेवा शुरू होगी

  • यात्रियों को कम लागत, तेज़ सेवा और पर्यावरण अनुकूल ई-फ्लीट का लाभ मिलेगा

सुरक्षा और परीक्षण

  • जुमेराह क्षेत्र में 50 से अधिक ऑटोनॉमस वाहनों का परीक्षण जारी

  • ट्रैफिक रिस्पॉन्स, पैदल यात्री सुरक्षा और सेंसर की विश्वसनीयता का आकलन

  • अबू धाबी के TXAI प्रोग्राम की सफलता से प्रेरणा, जिसने बिना किसी बड़े हादसे के 4.3 लाख किमी पूरे किए

त्वरित तथ्य (Static)

  • परियोजना: दुबई ऑटोनॉमस ज़ोन (DAZ)

  • लंबाई: 15 किमी (अल जद्दाफ से फेस्टिवल सिटी)

  • लॉन्च वर्ष: 2026

  • लक्ष्य: 2030 तक 25% दैनिक यात्राएँ ऑटोनॉमस

  • परिवहन साधन: रोबोटैक्सी, रोबोबस, मरीन अब्रास, डिलीवरी बॉट्स

  • साझेदार: Uber, WeRide

रविचंद्रन अश्विन बीबीएल में शामिल होने वाले पहले भारतीय बने

भारत के अनुभवी ऑफ़-स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने इतिहास रच दिया है। वे बिग बैश लीग (BBL) से अनुबंध करने वाले पहले टेस्ट-खेल चुके भारतीय पुरुष क्रिकेटर बन गए हैं। अश्विन आगामी बीबीएल 2025–26 सीज़न में सिडनी थंडर की ओर से खेलेंगे। यह भारतीय क्रिकेट में लंबे समय से चला आ रहा एक बड़ा अवरोध तोड़ने जैसा है। अब तक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) सक्रिय भारतीय पुरुष खिलाड़ियों को विदेशी टी20 लीग में भाग लेने से रोकता रहा है। हालांकि भारतीय महिला खिलाड़ी नियमित रूप से विमेंस बिग बैश लीग (WBBL) में खेलती रही हैं, लेकिन पुरुष खिलाड़ियों की भागीदारी केवल घरेलू क्रिकेट और आईपीएल तक सीमित थी। अश्विन का यह कदम उनके इस साल आईपीएल से संन्यास लेने के बाद संभव हो पाया, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय टी20 फ्रेंचाइज़ी अनुबंधों के पात्र हो गए।

यह कदम क्यों अहम है?

प्रतिबंधात्मक दौर का अंत

  • दशकों तक BCCI के नियमों ने भारतीय खिलाड़ियों को विदेशी लीग से दूर रखा, ताकि आईपीएल की विशिष्टता बनी रहे।

  • मौजूदा खिलाड़ियों के लिए यह पाबंदी जारी रहेगी, लेकिन अश्विन जैसे संन्यास ले चुके खिलाड़ी अब स्वतंत्र हैं।

  • यह कदम भविष्य में अन्य वरिष्ठ भारतीय खिलाड़ियों के लिए भी रास्ता खोल सकता है, जो संन्यास के बाद विदेशी लीगों में करियर बढ़ाना चाहेंगे।

रणनीतिक समय और दोहरी लीग भागीदारी

  • अश्विन ने इंटरनेशनल लीग टी20 (ILT20), यूएई से भी अनुबंध किया है (2 दिसंबर से 4 जनवरी तक)।

  • बीबीएल का सीज़न 14 दिसंबर से शुरू होगा, ऐसे में अश्विन का बीबीएल डेब्यू जनवरी की शुरुआत में, यानी टूर्नामेंट के मध्य में होने की संभावना है।

  • भले ही शुरुआत देर से हो, लेकिन उनसे उम्मीद है कि वे सिडनी थंडर के लिए निर्णायक चरण में अहम भूमिका निभाएँगे।

सांस्कृतिक और टीम पर असर

  • अश्विन की मौजूदगी टीम को क्रिकेटिंग अनुभव के साथ-साथ बड़ा मार्केटिंग आकर्षण भी देगी।

  • सिडनी की बड़ी भारतीय प्रवासी आबादी के बीच उनका जुड़ाव फैन एंगेजमेंट को और बढ़ाएगा।

  • साथ ही, फ्रेंचाइज़ी को विश्वास है कि उनका अनुभव स्थानीय प्रतिभाओं को विकसित करने और टीम को प्लेऑफ़ की दौड़ में मज़बूत बनाने में मदद करेगा।

सुधांशु वत्स एएससीआई के अध्यक्ष, सुब्रमण्येश्वर उपाध्यक्ष नियुक्त

भारत की प्रमुख विज्ञापन नियामक संस्था एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) में महत्वपूर्ण नेतृत्व बदलाव हुआ है। सुधांशु वत्स, प्रबंध निदेशक (MD) पिडिलाइट इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड को ASCI का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह घोषणा संस्था की 39वीं वार्षिक आम बैठक में की गई, ठीक उस समय जब ASCI अक्टूबर 2025 में अपनी 40वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है। यह नियुक्ति ऐसे दौर में हुई है जब विज्ञापन जगत तेजी से बदल रहा है और स्वनियमन (self-regulation) तथा नैतिक विज्ञापन प्रथाओं की अहमियत और बढ़ गई है।

नया नेतृत्व

  • सुधांशु वत्स – अध्यक्ष (President)

  • एस. सुब्रमण्येश्वर, मुलनलो ग्लोबल – उपाध्यक्ष (Vice Chairman)

  • परीतोष जोशी, प्रिंसिपल, प्रोवोकेट्योर एडवाइजरी – मानद कोषाध्यक्ष (Honorary Treasurer)

इन नियुक्तियों का उद्देश्य है कि विज्ञापन, कॉरपोरेट और परामर्श क्षेत्रों से विविध दृष्टिकोण लेकर ASCI को नई चुनौतियों के लिए तैयार किया जाए — जैसे इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और एआई-जनित कंटेंट

एएससीआई की नई पहलें

  1. AdWise कार्यक्रम (छात्रों के लिए मीडिया साक्षरता)

    • 10 लाख से अधिक स्कूली छात्रों को शिक्षित करना

    • भ्रामक/हानिकारक विज्ञापनों की पहचान करना सिखाना

    • विज्ञापन संदेशों का समालोचनात्मक मूल्यांकन

    • ब्रांड प्रभाव और उपभोक्ता अधिकारों पर जागरूकता

  2. जेन अल्फा (Gen Alpha) पर एथ्नोग्राफिक रिसर्च

    • डिजिटल युग में पैदा हुई नई पीढ़ी के विज्ञापन उपभोग का अध्ययन

    • बच्चों के लिए जिम्मेदार विज्ञापन ढाँचा तैयार करना

    • लक्षित संदेशों से होने वाले मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक जोखिमों की रोकथाम

  3. भौगोलिक विस्तार (Geographical Expansion)

    • नई उपस्थिति और निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए बेंगलुरु और नई दिल्ली में विस्तार

    • स्थानीय विज्ञापनदाताओं, एजेंसियों और शैक्षणिक संस्थानों से नेटवर्क मजबूत करना

याद रखने योग्य मुख्य तथ्य

  • सुधांशु वत्स बने ASCI के नए अध्यक्ष (2025)

  • एस. सुब्रमण्येश्वर उपाध्यक्ष, परीतोष जोशी कोषाध्यक्ष

  • AdWise कार्यक्रम के ज़रिए 10 लाख छात्रों को विज्ञापन साक्षरता

  • Gen Alpha पर विशेष शोध, बच्चों के लिए जिम्मेदार विज्ञापन

  • दिल्ली और बेंगलुरु में ASCI का विस्तार

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