एनसीएस पोर्टल के माध्यम से नौकरियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार और Zepto ने साझेदारी की

मज़दूरी एवं रोज़गार मंत्रालय ने युवाओं के लिए अधिक रोजगार अवसर और रोज़गार योग्यता (Employability) बढ़ाने की दिशा में Zepto (प्रमुख क्विक-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया की उपस्थिति में सितंबर 2025 में हुआ। इस पहल के तहत सरकार के राष्ट्रीय करियर सेवा (NCS) पोर्टल का उपयोग किया जाएगा, जो नौकरी खोजने वालों को सत्यापित नियोक्ताओं से जोड़ने के लिए बनाया गया एक डिजिटल मंच है।

राष्ट्रीय करियर सेवा (NCS) पोर्टल

  • शुरुआत: 20 जुलाई 2015

  • मंत्रालय: मज़दूरी एवं रोज़गार मंत्रालय

  • वेबसाइट: www.ncs.gov.in

  • उद्देश्य: रोजगार मिलान, करियर मार्गदर्शन, व्यावसायिक प्रशिक्षण, जॉब फेयर और शिकायत निवारण

  • पंजीकृत नियोक्ता: 52 लाख से अधिक

  • शुरुआत से अब तक रिक्तियां: लगभग 7.5 करोड़

साझेदारी की मुख्य विशेषताएँ

1. रोजगार सृजन

  • Zepto इस MoU के तहत 10,000 शहरी रोजगार अवसर उपलब्ध कराएगा।

  • इससे विशेष लाभ होगा:

    • युवाओं को

    • महिलाओं को

    • प्रथम बार नौकरी करने वालों को

  • यह पहल गिग और प्लेटफ़ॉर्म अर्थव्यवस्था में स्थिर एवं संरचित रोजगार अवसर बनाएगी।

2. रोजगार योग्यता में वृद्धि

  • केवल नौकरी उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि युवाओं की क्षमता बढ़ाने पर भी ज़ोर।

  • प्रमुख कदम:

    • गिग वर्करों का औपचारिकरण

    • e-Shram पोर्टल से एकीकरण

    • सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुँच

    • कौशल विकास एवं प्रशिक्षण अवसर

3. सामाजिक सुरक्षा एवं संरक्षण

  • यह सहयोग असंगठित एवं औपचारिक रोज़गार के बीच की खाई को पाटेगा।

  • गिग वर्करों एवं प्लेटफ़ॉर्म कर्मचारियों को जोड़ा जाएगा:

    • ई-श्रम पंजीकरण (असंगठित मज़दूरों का राष्ट्रीय डाटाबेस)

    • सरकार समर्थित बीमा, स्वास्थ्य देखभाल और वित्तीय समावेशन योजनाओं से

प्रमुख तथ्य (Static Facts)

  • समझौता: सितंबर 2025

  • संस्थान: मज़दूरी एवं रोज़गार मंत्रालय और Zepto

  • रोज़गार अवसर: 10,000

  • लाभार्थी: युवा, महिलाएँ, प्रथम बार नौकरी करने वाले

  • पोर्टल: राष्ट्रीय करियर सेवा (NCS)

  • NCS शुरुआत: 20 जुलाई 2015

  • ई-श्रम एकीकरण: सक्षम किया गया

कैबिनेट ने डीएसआईआर/सीएसआईआर “क्षमता निर्माण एवं मानव संसाधन विकास” योजना को हरी झंडी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विज्ञान एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) की महत्वाकांक्षी योजना “क्षमता निर्माण एवं मानव संसाधन विकास (CBHRD)” को मंजूरी दी है। इस योजना का कुल व्यय ₹2,277.397 करोड़ होगा और इसे 15वें वित्त आयोग अवधि (2021–22 से 2025–26) के दौरान वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा लागू किया जाएगा।

योजना के बारे में

  • लक्ष्य: युवा वैज्ञानिकों को सशक्त बनाना, STEMM (Science, Technology, Engineering, Medical, Mathematical) विषयों में उत्कृष्टता बढ़ाना, तथा विश्वस्तरीय R&D कार्यबल तैयार करना।

  • क्षेत्र: राष्ट्रीय प्रयोगशालाएँ, राष्ट्रीय महत्त्व के संस्थान, उत्कृष्टता संस्थान, विश्वविद्यालय और शोध संस्थान।

  • सहयोग: अकादमिक-औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा देना और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में योगदान देना।

प्रमुख उप-योजनाएँ

  1. डॉक्टोरल और पोस्ट-डॉक्टोरल फैलोशिप – युवा शोधकर्ताओं को उच्च अध्ययन हेतु सहायता।

  2. बाह्य अनुसंधान, एमेरिटस वैज्ञानिक एवं भटनागर फैलोशिप योजना – वरिष्ठ वैज्ञानिकों और सहयोगी परियोजनाओं को प्रोत्साहन।

  3. पुरस्कारों के माध्यम से उत्कृष्टता की मान्यता और प्रोत्साहन – उत्कृष्ट वैज्ञानिक योगदान का सम्मान।

  4. यात्रा एवं संगोष्ठी अनुदान – सम्मेलन, कार्यशाला और शैक्षणिक आदान-प्रदान में भागीदारी हेतु सहयोग।

यह ढाँचा शोध करियर के हर स्तर पर वैज्ञानिक प्रतिभा को प्रोत्साहन देता है।

योजना का महत्त्व

  • भारत का स्थान वैश्विक नवाचार सूचकांक 2024 में 39वाँ।

  • भारत वैज्ञानिक प्रकाशनों में शीर्ष 3 देशों में शामिल।

  • CBHRD से होगा:

    • राष्ट्रीय शोध प्रतिभा पूल का विस्तार

    • नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा

    • विज्ञान-प्रौद्योगिकी में वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता में वृद्धि

    • अकादमिक अनुसंधान और उद्योग अनुप्रयोगों के बीच सेतु निर्माण

बजट एवं क्रियान्वयन

  • कुल बजट: ₹2,277.397 करोड़ (2021–26)

  • नोडल संस्था: CSIR (DSIR के अंतर्गत)

  • कवरेज: सभी प्रमुख अकादमिक एवं शोध संस्थान

  • विशेष प्रावधान:

    • भटनागर फैलोशिप – ₹40 लाख प्रतिवर्ष तक का आर्थिक सहयोग + ₹25 लाख वार्षिक अनुसंधान अनुदान।

मुख्य तथ्य (Static Facts)

  • योजना का नाम: क्षमता निर्माण एवं मानव संसाधन विकास (CBHRD)

  • कुल व्यय: ₹2,277.397 करोड़

  • अवधि: 2021–22 से 2025–26

  • क्रियान्वयन: CSIR, DSIR के अंतर्गत

  • मुख्य तत्व: फैलोशिप, अनुसंधान अनुदान, पुरस्कार, यात्रा अनुदान

  • लक्ष्य: STEMM कार्यबल को सशक्त बनाना एवं भारत की नवाचार क्षमता बढ़ाना

वित्त मंत्री द्वारा जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (जीएसटीएटी) का शुभारंभ

केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने 24 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय अधिकरण (GSTAT) का औपचारिक शुभारंभ किया। यह कदम भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में संरचनात्मक सुधार का प्रतीक है और करदाताओं को एक समान, पारदर्शी एवं प्रभावी अपीलीय तंत्र उपलब्ध कराता है।

उद्देश्य और दृष्टि

  • समयबद्ध एवं न्यायसंगत विवाद निपटारा

  • कर कानूनों की समान व्याख्या सुनिश्चित करना

  • करदाताओं के विश्वास और व्यावसायिक माहौल को मज़बूत करना

  • मुकदमेबाजी में कमी और Ease of Doing Business को बढ़ावा देना

  • नागरिक देवो भवः” की भावना के अनुरूप, सरलता, डिजिटलीकरण और नागरिक-प्रथम सेवा पर बल

GSTAT की संरचना

  • प्रधान पीठ (Principal Bench): नई दिल्ली

  • राज्य पीठें (State Benches): 31 पीठें, 45 स्थानों पर

  • प्रत्येक पीठ की संरचना:

    • 2 न्यायिक सदस्य (Judicial Members)

    • 1 तकनीकी सदस्य (केंद्र)

    • 1 तकनीकी सदस्य (राज्य)

यह ढाँचा सहकारी संघवाद की भावना को दर्शाता है और कानूनी एवं तकनीकी विशेषज्ञता के संतुलन से निर्णय प्रक्रिया को सुदृढ़ करता है।

तकनीकी नवाचार – GSTAT e-Courts Portal

  • विकसित: GSTN और NIC द्वारा

  • मुख्य विशेषताएँ:

    • अपीलों का e-Filing

    • डिजिटल सुनवाई (Digital Hearings)

    • ऑनलाइन केस ट्रैकिंग

    • केस प्रबंधन उपकरण (Case Management Tools)

    • उपयोगकर्ता सहायता: FAQs, गाइड और वीडियो

करदाता 30 जून 2026 तक अपील दाख़िल कर सकेंगे, जिससे MSMEs और व्यक्तिगत करदाताओं को पर्याप्त तैयारी समय मिलेगा।

GSTAT के लाभ

  • राज्यों में कर निर्णयों की समानता

  • अपीलों का त्वरित निपटारा

  • व्यवसायों के लिए कानूनी अनिश्चितता में कमी

  • MSMEs, निर्यातकों और स्टार्टअप्स के लिए सहूलियत

  • मेक इन इंडिया और Ease of Doing Business को मज़बूती

इससे भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली अधिक न्यायपूर्ण, सुलभ और तकनीकी रूप से उन्नत बनेगी।

स्थिर तथ्य (Static Facts)

  • नाम: वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय अधिकरण (GSTAT)

  • शुभारंभ तिथि: 24 सितंबर 2025

  • शुभारंभकर्ता: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

  • संरचना: 1 प्रधान पीठ (दिल्ली), 31 राज्य पीठें

  • प्रमुख सुविधा: GSTAT e-Courts Portal (efiling.gstat.gov.in)

  • उद्देश्य: GST विवादों के लिए एक समान और स्वतंत्र अपीलीय मंच

कैबिनेट ने बिहार में 3,822 करोड़ रुपये की एनएच-139डब्ल्यू राजमार्ग परियोजना को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट समिति ने साहेबगंज–अरेराज–बेतिया (NH-139W) खंड पर 4-लेन ग्रीनफ़ील्ड हाईवे निर्माण को मंज़ूरी दी है। यह परियोजना हाइब्रिड एन्‍युइटी मोड (HAM) पर लागू होगी और इसकी कुल लंबाई 78.942 किमी तथा अनुमानित लागत ₹3,822.31 करोड़ होगी। यह कदम पीएम गति शक्ति मास्टर प्लान के अधीन क्षेत्रीय संपर्क, व्यापार, पर्यटन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।

परियोजना का अवलोकन

  • प्रकार: ग्रीनफ़ील्ड कॉरिडोर (नई संरेखण पर निर्माण)

  • कनेक्टिविटी:

    • पटना (राजधानी) से बेतिया तक तेज़ यात्रा

    • वैशाली, सारण, सिवान, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण जिलों को जोड़ना

    • भारत-नेपाल सीमा से संपर्क बढ़ाना और सीमा पार व्यापार सुगम करना

रणनीतिक महत्व

1. कनेक्टिविटी सुधार

  • पटना–बेतिया यात्रा समय 2.5 घंटे से घटकर 1 घंटा

  • औसत गति: 80 किमी/घं. (डिज़ाइन गति 100 किमी/घं.)

2. व्यापार और उद्योग

  • कृषि क्षेत्र, औद्योगिक क्लस्टर और नेपाल सीमा व्यापार को बढ़ावा

  • लॉजिस्टिक्स और फ्रेट मूवमेंट सुगम

3. गति शक्ति मास्टर प्लान समर्थन

  • 7 आर्थिक नोड, 6 सामाजिक अवसंरचना नोड और 8 लॉजिस्टिक नोड को जोड़ेगा

4. पर्यटन संवर्धन

  • प्रमुख धार्मिक व पर्यटन स्थलों तक बेहतर पहुँच:

    • केसरीया बुद्ध स्तूप (साहेबगंज)

    • सोमेश्वरनाथ मंदिर (अरेराज)

    • जैन मंदिर एवं विश्व शांति स्तूप (वैशाली)

    • महावीर मंदिर (पटना)

  • बौद्ध सर्किट और अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा

आर्थिक व रोज़गार प्रभाव

  • प्रत्यक्ष रोज़गार: 14.22 लाख मानव-दिवस

  • अप्रत्यक्ष रोज़गार: 17.69 लाख मानव-दिवस

  • निर्माण, आतिथ्य, लॉजिस्टिक्स और परिवहन सेवाओं से अतिरिक्त रोज़गार

हाइब्रिड एन्‍युइटी मोड (HAM) क्यों?

  • 40% लागत – सरकार द्वारा निर्माण अवधि में वहन

  • 60% लागत – निजी डेवलपर को एन्‍युइटी भुगतान से समय के साथ

  • जोखिम साझा, समय पर कार्यान्वयन और न्यूनतम प्रारंभिक निजी पूंजी निवेश

कनेक्टिविटी लाभ

परियोजना पूरी होने पर यह हाईवे कई राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ेगा:
NH-31, NH-722, NH-727, NH-27, NH-227A
→ भीड़भाड़ वाले शहरों से डिटूर घटेंगे, सड़क सुरक्षा और यात्रा समय में सुधार होगा।

मुख्य बिंदु

  • परियोजना: 4-लेन साहेबगंज–अरेराज–बेतिया (NH-139W)

  • लंबाई: 78.942 किमी

  • लागत: ₹3,822.31 करोड़

  • मॉडल: हाइब्रिड एन्‍युइटी मोड (HAM)

  • समय लाभ: 2.5 घंटे → 1 घंटा

  • पर्यटन केंद्र: केसरीया स्तूप, वैशाली, महावीर मंदिर

दुबई में 7वां फ्यूचर फूड फोरम 2025 शुरू हुआ

7वाँ फ़्यूचर फ़ूड फ़ोरम 2025 दुबई में आधिकारिक रूप से प्रारंभ हुआ, जहाँ सरकारों, व्यवसायों और शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुख हितधारकों ने वैश्विक खाद्य प्रणाली से जुड़ी चुनौतियों और अवसरों पर विचार-विमर्श किया। खाद्य सुरक्षा, स्थिरता और व्यापार पर केंद्रित यह आयोजन विशेषकर ग्लोबल साउथ देशों के बीच साझेदारी मज़बूत करने का प्रयास है ताकि नवाचार और नीतिगत सुधारों के ज़रिए खाद्य प्रणाली को मज़बूत बनाया जा सके।

फ़ोरम के उद्देश्य और मुख्य क्षेत्र

इस वर्ष का विषय “लचीले खाद्य तंत्र का निर्माण” है, जिसके तहत चर्चा निम्न मुद्दों पर हुई –

  • कृषि और खाद्य प्रसंस्करण में तकनीकी एकीकरण

  • आपूर्ति श्रृंखला में सतत (Sustainable) प्रथाएँ

  • सीईपीए (CEPA) समझौतों के माध्यम से सीमा-पार व्यापार सहयोग

  • लघु एवं मध्यम उद्यमों (SMEs) को वैश्विक खाद्य निर्यात में शामिल करना

  • वैश्विक एग्रो-टेक (Agri-tech) और उपभोक्ता स्वास्थ्य से जुड़े श्रेष्ठ अभ्यास

यूएई की भूमिका और दृष्टि

  • यूएई ने खाद्य क्षेत्र का योगदान 8.1 अरब डॉलर से 10.9 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।

  • फ़ोरम का जोर सिर्फ यूएई तक सीमित नहीं रहा बल्कि अफ़्रीका, दक्षिण एशिया और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों पर भी रहा, जहाँ खाद्य प्रणाली जलवायु परिवर्तन और व्यापार व्यवधानों से अधिक प्रभावित होती है।

चर्चा किए गए प्रमुख विषय

1. सीईपीए (CEPA) का प्रभाव

  • नए बाज़ारों तक पहुँच

  • शुल्क और नियामकीय बाधाओं में कमी

  • SMEs की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी

  • क्षेत्रीय फूड कॉरिडोर का विकास

2. सतत प्रोटीन और उपभोक्ता प्रवृत्तियाँ

  • पौध-आधारित, कीट-आधारित और प्रयोगशाला में विकसित प्रोटीन का बढ़ता उपयोग

  • उपभोक्ताओं की मांग –

    • पोषक और कम-कार्बन खाद्य

    • फार्म-टू-फोर्क ट्रैसेबिलिटी

    • नैतिक स्त्रोत और पशु कल्याण

3. एग्री-टेक और खाद्य नवाचार

  • प्रिसीजन फार्मिंग टूल्स

  • एआई-आधारित फसल पूर्वानुमान

  • स्मार्ट सिंचाई प्रणाली

  • वर्टिकल और शहरी खेती मॉडल
    → इन तकनीकों से अपव्यय में कमी, उत्पादन में वृद्धि और जलवायु चुनौतियों से निपटने में मदद मिल रही है।

स्थिर तथ्य

  • फ़ोरम का नाम: फ़्यूचर फ़ूड फ़ोरम

  • 7वाँ संस्करण: दुबई, 2025

  • पहली बार आयोजित: 2019, यूएई

  • आयोजक: यूएई फ़ूड एंड बेवरेज बिज़नेस ग्रुप (F&B Group)

  • CEPA का पूरा नाम: Comprehensive Economic Partnership Agreement

  • यूएई का खाद्य क्षेत्र लक्ष्य: 8.1 अरब डॉलर → 10.9 अरब डॉलर

आईसीसी ने प्रशासन संबंधी मुद्दों पर यूएसए क्रिकेट की सदस्यता निलंबित की

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने 23 सितंबर 2025 को अमेरिका की क्रिकेट इकाई यूएसए क्रिकेट की सदस्यता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह निर्णय लंबे समय से चल रही प्रशासनिक और अनुपालन संबंधी विफलताओं के कारण लिया गया है। यह कदम ऐसे समय आया है जब क्रिकेट लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 (LA28) में अपनी वापसी की तैयारी कर रहा है।

निलंबन के प्रमुख कारण

  • बार-बार और लगातार आईसीसी संविधान का उल्लंघन

  • कार्यात्मक शासन संरचना लागू करने में विफलता

  • यूएसओपीसी (United States Olympic & Paralympic Committee) से राष्ट्रीय खेल निकाय का दर्जा प्राप्त करने में असफलता

  • अमेरिका और वैश्विक स्तर पर क्रिकेट की साख को नुकसान

खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं पर प्रभाव

  • निलंबन के बावजूद यूएसए की राष्ट्रीय टीमें आईसीसी टूर्नामेंटों में खेलती रहेंगी

  • खिलाड़ियों के हित सुरक्षित रखने के लिए आईसीसी अस्थायी रूप से:

    • हाई परफ़ॉर्मेंस कार्यक्रम

    • खिलाड़ी विकास योजनाएं

    • टीम लॉजिस्टिक्स और संचालन
      का प्रबंधन अपने हाथों में लेगी।

  • इससे खिलाड़ियों पर प्रशासनिक संकट का असर नहीं पड़ेगा।

आईसीसी सामान्यीकरण समिति (Normalisation Committee) की भूमिका

  • सुधार के लिए रोडमैप तैयार करेगी

  • शासन और संचालन की निगरानी करेगी

  • परामर्श और संरचनात्मक सहायता देगी

  • सदस्यता की बहाली केवल तभी होगी जब यूएसए क्रिकेट में स्पष्ट और प्रमाणित सुधार दिखाई देंगे।

प्रमुख तथ्य (Key Takeaways)

  • निलंबन प्राधिकरण: आईसीसी बोर्ड

  • तिथि: 23 सितंबर 2025

  • कारण: शासन संबंधी विफलताएं, यूएसओपीसी मान्यता का अभाव, साख को नुकसान

  • प्रभाव: यूएसए टीमें आईसीसी आयोजनों के लिए पात्र रहेंगी

  • प्रबंधन: आईसीसी और सामान्यीकरण समिति

कैबिनेट ने रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिन के बोनस को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 सितंबर 2025 को रेलवे के 10,91,146 गैर-राजपत्रित कर्मचारियों के लिए 78 दिनों के वेतन के बराबर उत्पादकता-लिंक्ड बोनस (PLB) की मंजूरी दी। इस निर्णय का कुल वित्तीय बोझ ₹1,865.68 करोड़ होगा। यह बोनस हर वर्ष की तरह दुर्गा पूजा और दशहरा से पहले दिया जाएगा।

PLB क्या है?

  • उत्पादकता-लिंक्ड बोनस (PLB) एक प्रदर्शन-आधारित वार्षिक बोनस है, जो रेलवे की परिचालन सफलता पर आधारित होता है।

  • यह एड-हॉक बोनस से अलग है क्योंकि यह सीधे मापे जाने योग्य उपलब्धियों (जैसे माल लदान, समयपालन, यात्री प्रबंधन) से जुड़ा होता है।

2025 PLB की मुख्य बातें

  • कुल कर्मचारी लाभान्वित: 10,91,146

  • कुल वित्तीय व्यय: ₹1,865.68 करोड़

  • प्रति कर्मचारी अधिकतम बोनस: ₹17,951

  • बोनस अवधि: 78 दिन का वेतन

  • लाभान्वित श्रेणियां:

    • लोको पायलट

    • ट्रेन मैनेजर (गार्ड)

    • स्टेशन मास्टर

    • ट्रैक मेंटेनर

    • तकनीशियन और हेल्पर

    • सुपरवाइज़र, प्वाइंट्समैन, मिनिस्टीरियल स्टाफ आदि

भारतीय रेलवे का प्रदर्शन (वित्त वर्ष 2024–25)

  • माल लदान: 1,614.90 मिलियन टन (अब तक का रिकॉर्ड)

  • यात्री संख्या: लगभग 7.3 अरब यात्री

  • संचालन दक्षता: समयपालन में सुधार और ट्रांज़िट देरी में कमी

  • राजस्व: माल और यात्री दोनों क्षेत्रों से आय में उल्लेखनीय वृद्धि

निर्णय का महत्व

  • कर्मचारियों के लिए:
    त्योहारों से पहले वित्तीय प्रोत्साहन, मनोबल और उपभोग क्षमता में वृद्धि।

  • भारतीय रेलवे के लिए:
    उत्पादकता से जुड़े बोनस से जवाबदेही की संस्कृति और सतत सुधार को बढ़ावा।

  • अर्थव्यवस्था के लिए:
    त्योहारों से पहले अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह, उपभोग में वृद्धि और सार्वजनिक क्षेत्र में प्रदर्शन-आधारित पुरस्कार प्रणाली का सशक्त संदेश।

स्थिर तथ्य (Static Facts)

  • परिचय वर्ष: 1979

  • लागू: गैर-राजपत्रित समूह ‘C’ एवं पात्र समूह ‘D’ स्टाफ

  • अपवाद: RPF/RPSF कार्मिक और राजपत्रित अधिकारी

  • अधिकतम बोनस सीमा: 78 दिन का वेतन

  • भुगतान आवृत्ति: वार्षिक, दुर्गा पूजा से पूर्व

  • आधार: औसत वेतन और कार्य किए गए दिनों की संख्या

केंद्र ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के रूप में जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल 2026 तक बढ़ाया

भारत की सैन्य नेतृत्व में निरंतरता और स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने जनरल अनिल चौहान के कार्यकाल को चीफ ऑफ डिफेन्स स्टाफ (CDS) के रूप में बढ़ा दिया है। 24 सितंबर 2025 को घोषित इस निर्णय के तहत जनरल चौहान अब 30 मई 2026 तक या अगले आदेश तक इस महत्वपूर्ण पद पर बने रहेंगे। यह विस्तार सरकार की तीनों सेनाओं में संयुक्तता, समन्वय और आधुनिकीकरण को सशक्त करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

जनरल अनिल चौहान का पृष्ठभूमि

  • भारत के दूसरे CDS (पहले CDS जनरल बिपिन रावत थे)

  • सितंबर 2022 में CDS नियुक्त हुए

  • CDS के रूप में रक्षा मंत्रालय के अधीन सैन्य मामलों के विभाग (DMA) के सचिव भी हैं

  • रणनीतिक योजना, ऑपरेशनल कमान और रक्षा आधुनिकीकरण में दशकों का अनुभव रखते हैं

कार्यकाल विस्तार का महत्व

1. नेतृत्व की निरंतरता सुनिश्चित करना

  • यह विस्तार रक्षा सुधारों को लागू करने के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक नेतृत्व सुनिश्चित करता है।

  • जनरल चौहान ने थिएटर कमांड्स प्रोजेक्ट और त्रि-सेवा एकीकरण को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

2. तीनों सेनाओं में संयुक्तता को मज़बूत करना

  • CDS के रूप में वे थलसेना, नौसेना और वायुसेना के एकीकृत संचालन की देखरेख करते हैं।

  • विस्तारित कार्यकाल से संयुक्त संचालन सिद्धांत को गति मिलेगी और भारत की सैन्य क्षमता में वृद्धि होगी।

3. रक्षा सुधार और आधुनिकीकरण को बढ़ावा

  • उनके नेतृत्व में DMA ने आत्मनिर्भर भारत और सैन्य खरीद सुधारों पर ज़ोर दिया है।

  • विस्तार से स्वदेशीकरण, अवसंरचना आधुनिकीकरण और रणनीतिक क्षमता विकास को और बल मिलेगा।

सरकार का आधिकारिक बयान

  • कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने 24 सितंबर 2025 को उनके कार्यकाल विस्तार को मंजूरी दी।

  • आदेश के अनुसार वे 30 मई 2026 तक या अगले आदेश तक CDS बने रहेंगे।

  • इस अवधि में वे सैन्य मामलों के विभाग (DMA) के सचिव के रूप में भी कार्य करते रहेंगे।

कैबिनेट ने बख्तियारपुर-तिलैया रेल लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दी

बिहार में रेलवे अवसंरचना को बड़ा प्रोत्साहन देते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने बख्तियारपुर–राजगीर–टिलैया रेलवे लाइन (104 किमी) के दोहरीकरण को मंजूरी दी है। लगभग ₹2,192 करोड़ की लागत से बनने वाला यह प्रोजेक्ट क्षेत्रीय संपर्क को बदल देगा, माल परिवहन को बढ़ावा देगा और पर्यटन को सशक्त बनाएगा।

यह महत्त्वपूर्ण अवसंरचना सुधार सरकार के मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स, जलवायु लक्ष्यों और समावेशी क्षेत्रीय विकास पर ध्यान को दर्शाता है तथा पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का हिस्सा है।

परियोजना का अवलोकन

  • रेलवे लाइन खंड: बख्तियारपुर – राजगीर – टिलैया

  • कुल दूरी: 104 किमी

  • लागत: ₹2,192 करोड़ (लगभग)

  • कवर ज़िले: बिहार के 4 ज़िले

  • लाभान्वित गाँव: लगभग 1,434 गाँव

  • लाभान्वित आबादी: लगभग 13.46 लाख लोग

  • आकांक्षी ज़िले शामिल: गया और नवादा

यह परियोजना मौजूदा सिंगल-ट्रैक लाइन के दोहरीकरण से क्षमता बढ़ाएगी और यात्री व मालगाड़ियों की गति व संचालन सुधार करेगी।

रणनीतिक महत्त्व

1. माल परिवहन व आर्थिक दक्षता

  • कोयला, सीमेंट, क्लिंकर, फ्लाई ऐश जैसे भारी माल की ढुलाई के लिए अहम मार्ग

  • पूर्ण होने पर 26 MTPA (मिलियन टन प्रति वर्ष) अतिरिक्त माल परिवहन की क्षमता

  • भीड़भाड़ वाले मार्गों का बोझ घटेगा और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी

2. पर्यावरणीय लाभ

  • तेल आयात में बचत: लगभग 5 करोड़ लीटर

  • CO₂ उत्सर्जन में कमी: 24 करोड़ किग्रा (लगभग 1 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर)

  • सड़क की जगह रेल से माल ढुलाई, जो अधिक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण-अनुकूल है

3. पर्यटन व तीर्थाटन को बढ़ावा

  • राजगीर (शांति स्तूप),

  • नालंदा (प्राचीन बौद्ध शिक्षा केंद्र),

  • पावापुरी (जैन तीर्थ स्थल)
    इन स्थलों से बेहतर संपर्क से देशभर से तीर्थयात्री व पर्यटक आकर्षित होंगे

4. सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

  • 13.46 लाख लोगों और 1,434 गाँवों के लिए बेहतर गतिशीलता

  • बाज़ार व सेवाओं तक आसान पहुँच

  • रोजगार व स्वरोजगार के अवसर

  • आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम के तहत तेज़ विकास

पीएम गति शक्ति योजना से जुड़ाव

यह परियोजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य है:

  • लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाना

  • अवसंरचना तालमेल से देरी कम करना

  • लोगों, सामान व सेवाओं की आवाजाही की लागत घटाना

स्थिर तथ्य

  • परियोजना: बख्तियारपुर–राजगीर–टिलैया लाइन का दोहरीकरण (104 किमी)

  • लागत: ₹2,192 करोड़

  • कवरेज: 4 ज़िले, 1,434 गाँव, 13.46 लाख लोग

  • लाभ: 26 MTPA माल परिवहन, पर्यटन, आकांक्षी ज़िले, गति शक्ति संरेखण

  • पीएम गति शक्ति योजना लॉन्च: 13 अक्टूबर 2021

  • भारतीय रेल नेटवर्क लंबाई: 68,000 किमी से अधिक (2023 तक)

  • रेल मंत्रालय: भारत सरकार का रेल मंत्रालय

  • भारतीय रेल का माल परिवहन हिस्सा: कुल राष्ट्रीय माल परिवहन का लगभग 27%

  • आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम लॉन्च: जनवरी 2018, नीति आयोग द्वारा संचालित

अंत्योदय दिवस 2025: पंडित दीनदयाल उपाध्याय के दृष्टिकोण का सम्मान

अंत्योदय दिवस हर साल 25 सितंबर को मनाया जाता है, ताकि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 109वीं जयंती को सम्मानित किया जा सके। दीनदयाल उपाध्याय एक दूरदर्शी राजनीतिक चिंतक, दार्शनिक और समग्र मानववाद (Integral Humanism) के प्रवर्तक थे। “अंत्योदय” शब्द का अर्थ है “अंतिम व्यक्ति का उदय”, जो समाज के सबसे गरीब और वंचित वर्गों के उत्थान का प्रतीक है। 2014 में स्थापित, अंत्योदय दिवस यह याद दिलाता है कि विकास तभी सार्थक है जब यह समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक पहुंचे, और इसमें सहानुभूति, सामाजिक जिम्मेदारी और न्याय का संदेश निहित हो।

अंत्योदय दिवस का इतिहास

  • जन्म: 25 सितंबर 1916, नगला चंद्रभान, मथुरा, उत्तर प्रदेश

  • प्रारंभिक जीवन: छोटी उम्र में माता-पिता का निधन होने के बावजूद शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और बाद में राजनीतिक विज्ञान में अध्ययन किया।

  • राजनीतिक यात्रा: RSS के प्रचारक बने और भारतीय जनता पार्टी के पूर्ववर्ती संगठन भारतीय जनता संघ के सह-संस्थापक रहे।

  • दर्शन: समग्र मानववाद (Integral Humanism) का प्रचार किया, जिसमें शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आत्मिक विकास पर ध्यान दिया गया।

  • दृष्टि: सच्ची शासन प्रणाली गरीबों को प्राथमिकता दे, उनकी गरिमा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करे।

  • स्थापना: 2014 में भारत सरकार ने उनके सम्मान में 25 सितंबर को अंत्योदय दिवस घोषित किया।

अंत्योदय दिवस 2025 का महत्व

  • समाज को याद दिलाना कि विकास अधूरा है यदि कमजोर वर्ग का उत्थान नहीं हो।

  • सरकारी योजनाओं जैसे अंत्योदय अन्न योजना और दीनदयाल अंत्योदय योजना को बढ़ावा देना।

  • शासन में सहानुभूति, न्याय और समानता पर जोर देना।

  • विकास को लोगों-केंद्रित बनाना, केवल धन-केंद्रित नहीं।

  • युवाओं को सामाजिक न्याय और समानता के मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करना।

अंत्योदय से जुड़ी प्रमुख योजनाएं

  1. अंत्योदय अन्न योजना (AAY)

    • 2000 में शुरू की गई ताकि गरीबी रेखा (BPL) के परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो।

    • परिवारों को सस्ते अनाज (गेहूं और चावल) उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि कोई भूखा न सोए।

  2. दीनदयाल अंत्योदय योजना (DAY)

    • ग्रामीण और शहरी गरीबों पर केंद्रित, आजीविका और आत्मनिर्भरता पर जोर।

    • DAY-NRLM (National Rural Livelihoods Mission):

      • ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) में संगठित करना।

      • बचत, लघु व्यवसाय और वित्तीय स्वतंत्रता को बढ़ावा देना।

    • DAY-NULM (National Urban Livelihoods Mission):

      • शहरी गरीबों के लिए कौशल प्रशिक्षण, रोजगार सहायता और लघु ऋण।

      • सतत आजीविका और उद्यमिता को प्रोत्साहित करना।

ये कार्यक्रम दीनदयाल उपाध्याय के “अंत्योदय” दर्शन को दर्शाते हैं, जिसमें किसी भी नागरिक को पीछे नहीं छोड़ा जाता।

मुख्य तथ्य:

  • मनाया जाता है: 25 सितंबर 2025

  • स्मरण: पंडित दीनदयाल उपाध्याय (1916–1968)

  • परिचयित किया गया: 2014

  • मुख्य दर्शन: अंत्योदय – अंतिम व्यक्ति का उत्थान

  • संबंधित योजनाएं: अंत्योदय अन्न योजना (2000), दीनदयाल अंत्योदय योजना (NRLM और NULM)

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