भारत रत्न नानाजी देशमुख को उनकी 15वीं पुण्य तिथि पर याद किया गया

मध्य प्रदेश के चित्रकूट में भारत रत्न नानाजी देशमुख की 15वीं पुण्यतिथि पर उन्हें भव्य श्रद्धांजलि दी गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस स्मरण समारोह को संबोधित करते हुए नानाजी के ग्रामीण विकास, सामाजिक सुधार और राजनीतिक नेतृत्व में अतुलनीय योगदान को रेखांकित किया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण किया गया और भगवान राम के जीवन पर आधारित प्रस्तुति “राम दर्शन” का आयोजन भी हुआ।

नानाजी देशमुख का जीवन और विरासत

महाराष्ट्र में जन्मे नानाजी देशमुख ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा को समर्पित किया। वे बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े थे और बाद में भारतीय जनसंघ के महासचिव के रूप में कार्य किया। भारतीय राजनीति और ग्रामीण विकास में उनके योगदान को व्यापक रूप से सराहा गया।

केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने नानाजी को ऐसे व्यक्ति के रूप में वर्णित किया, जिनका प्रभाव पीढ़ियों तक बना रहेगा। उन्होंने कहा कि नानाजी की लोकप्रियता राजनीतिक मतभेदों से परे थी, और वे “अंत्योदय” (समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान) के सिद्धांत पर कार्य करते रहे, जिसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने प्रचारित किया था।

ग्रामीण विकास में नानाजी देशमुख का योगदान

नानाजी की सबसे बड़ी विरासत उनके ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में निहित है। उनका मानना था कि सच्ची प्रगति तभी संभव है जब गांव आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनें। इस विचार को साकार करने के लिए उन्होंने कई विकास मॉडल स्थापित किए, विशेष रूप से चित्रकूट में, जहां उन्होंने “एकात्म मानववाद” (Integral Humanism) के सिद्धांतों को लागू किया।

उनके प्रमुख योगदानों में शामिल हैं:

  • दीनदयाल रिसर्च इंस्टीट्यूट (DRI) की स्थापना, जो ग्रामीण विकास को समर्पित है।
  • किसानों और कारीगरों को सशक्त बनाने के लिए सतत कृषि पद्धतियों को लागू करना।
  • गांवों में शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देना।
  • ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना।

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार नानाजी की विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए विभिन्न ग्रामीण कल्याण योजनाओं को लागू कर रही है। पिछले एक दशक में सरकार ने 60 करोड़ गरीबों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए आवास, शौचालय, पीने का पानी, रसोई गैस, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की हैं।

राजनीति और सामाजिक सुधार में नानाजी देशमुख की भूमिका

नानाजी देशमुख राजनीति में सक्रिय रहते हुए भी अपनी नैतिकता के लिए प्रसिद्ध थे। वे भारतीय जनसंघ की स्थापना में प्रमुख भूमिका निभाने के साथ-साथ 1975-77 के आपातकाल का विरोध करने के लिए जनता पार्टी के गठन में भी योगदान दिया।

विशेष रूप से, उन्होंने 60 वर्ष की आयु में राजनीति से संन्यास लेकर समाज सेवा को अपना पूर्णकालिक मिशन बना लिया। उनका यह निर्णय उनकी निस्वार्थता और समाज सेवा के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सम्मान और पहचान

पद्म विभूषण से सम्मानित।
2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित।

अमित शाह ने कहा कि नानाजी का कार्य उनके द्वारा प्राप्त सम्मान से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

शिक्षा और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद में नानाजी देशमुख का प्रभाव

नानाजी भारतीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने गोरखपुर में पहले सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की, जो आज पूरे देश में हजारों विद्यालयों के रूप में विस्तारित हो चुका है।

उनका जीवन RSS के आदर्शों, बाल गंगाधर तिलक के राष्ट्रवाद और महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज (गांवों की आत्मनिर्भरता) के सिद्धांतों से प्रेरित था।

चित्रकूट: आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व

चित्रकूट में नानाजी को श्रद्धांजलि देने का निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि यह स्थान आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत पूजनीय है। यह वह पवित्र भूमि है जहां भगवान श्रीराम ने अपने वनवास का एक महत्वपूर्ण भाग बिताया था।

अमित शाह ने कहा कि चित्रकूट भारतीय विरासत का प्रतीक है और त्याग व सेवा का केंद्र बना रहेगा।

विश्व एनजीओ दिवस 2025: इतिहास, थीम और महत्व

विश्व एनजीओ दिवस हर साल 27 फरवरी को मनाया जाता है ताकि गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों के समाधान में योगदान को सम्मानित और सराहा जा सके। यह दिन मानवीय सहायता, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, मानवाधिकार और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में एनजीओ की भूमिका को उजागर करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। विश्व एनजीओ दिवस 2025 की थीम “स्थायी भविष्य के लिए जमीनी आंदोलनों को सशक्त बनाना” है, जो स्थानीय संगठनों की स्थायी विकास में भूमिका को रेखांकित करती है। इस दिन की स्थापना 2010 में हुई थी और पहली बार 2014 में इसे मनाया गया था। यह दिन वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त कर चुका है, जहां सरकारें, व्यवसाय और समुदाय एनजीओ के प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए सहयोग करते हैं।

मुख्य बिंदु

1. इतिहास और पृष्ठभूमि

  • आधिकारिक रूप से 2010 में मान्यता प्राप्त, पहली बार 2014 में मनाया गया।
  • इस अवधारणा को लातविया के सामाजिक उद्यमी मार्किस लियर्स स्कैडमैनिस ने प्रस्तावित किया।
  • संयुक्त राष्ट्र (UN), यूरोपीय संघ और अन्य वैश्विक संगठनों से अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त।

2. विश्व एनजीओ दिवस 2025 की थीम

  • “स्थायी भविष्य के लिए जमीनी आंदोलनों को सशक्त बनाना”
  • स्थानीय एनजीओ की स्थिरता को बढ़ावा देने में भूमिका को उजागर करता है।
  • संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप।

3. विश्व एनजीओ दिवस का महत्व

  • सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय विकास में एनजीओ के योगदान को पहचानता है।
  • वित्तीय सीमाओं, नीति प्रतिबंधों और संचालन संबंधी चुनौतियों पर जागरूकता बढ़ाता है।
  • गैर-लाभकारी संगठनों का समर्थन करने के लिए स्वयंसेवा, दान और नीति सुधारों को बढ़ावा देता है।
  • एनजीओ, सरकार, व्यवसायों और स्थानीय समुदायों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करता है।

4. विश्व एनजीओ दिवस से जुड़े मुख्य तथ्य

  • उद्देश्य: वैश्विक स्तर पर एनजीओ के प्रभाव को पहचानना।
  • स्थापना: मार्किस स्कैडमैनिस द्वारा प्रस्तावित।
  • पहली बार आयोजन: 27 फरवरी 2014।
  • वार्षिक थीम: संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप।
  • वैश्विक मान्यता: अंतरराष्ट्रीय संगठनों, सरकारों और नागरिक समाज समूहों द्वारा समर्थित।

5. विश्व एनजीओ दिवस के उत्सव के तरीके

  • जागरूकता पोस्टर डिजाइन करें: एनजीओ पहलों को बढ़ावा देने वाले पोस्टर बनाएं।
  • चैरिटी अभियान आयोजित करें: आवश्यक वस्तुओं या धनराशि के लिए दान अभियान शुरू करें।
  • नीति सुधारों का समर्थन करें: गैर-लाभकारी संगठनों के लिए अनुकूल कानूनों की वकालत करें।
  • स्वयंसेवा करें: किसी एनजीओ में अपना समय दें और समाज सेवा में योगदान करें।
  • सोशल मीडिया अभियान चलाएं: सफलता की कहानियां साझा करें और जागरूकता बढ़ाएं।
  • फंडरेज़र आयोजित करें: एनजीओ परियोजनाओं के लिए क्राउडफंडिंग पहल शुरू करें।
  • शिक्षा को बढ़ावा दें: वंचित बच्चों को मुफ्त शिक्षा या मेंटरशिप प्रदान करें।
  • वेबिनार में शामिल हों: गैर-लाभकारी प्रबंधन और सामाजिक प्रभाव के बारे में जानें।

विश्व एनजीओ दिवस न केवल एनजीओ के योगदान को मान्यता देने का अवसर है, बल्कि यह समाज के हर व्यक्ति को इन संगठनों के प्रयासों को समर्थन देने और बदलाव लाने के लिए प्रेरित करता है।

सारांश/स्थिर जानकारी विवरण
क्यों चर्चा में? विश्व एनजीओ दिवस, तिथि, थीम, महत्व, उद्धरण
मनोयन तिथि 27 फरवरी 2025
2025 की थीम स्थायी भविष्य के लिए जमीनी आंदोलनों को सशक्त बनाना”
संस्थापक मार्किस लियर्स स्कैडमैनिस (लातविया)
पहली बार आयोजन 27 फरवरी 2014
उद्देश्य वैश्विक विकास में एनजीओ के योगदान को पहचानना और सम्मानित करना
मुख्य कार्यक्षेत्र मानवीय सहायता, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, मानवाधिकार, पर्यावरण
एनजीओ की चुनौतियाँ वित्तीय सीमाएँ, नीति प्रतिबंध, संचालन कठिनाइयाँ
कैसे मनाया जाता है? जागरूकता अभियान, चैरिटी ड्राइव, स्वयंसेवा, सोशल मीडिया पहल
वैश्विक मान्यता संयुक्त राष्ट्र (UN), यूरोपीय संघ (EU) और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा समर्थित

तुहिन कांता पांडे SEBI के नए अध्यक्ष नियुक्त

भारत के वित्त सचिव तुहिन कांता पांडे को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) का 11वां अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल तीन वर्षों के लिए होगा। वह माधबी पुरी बुच का स्थान लेंगे, जो सेबी की पहली महिला अध्यक्ष थीं और 28 फरवरी 2025 को उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। उनकी नियुक्ति को 27 फरवरी 2025 को कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) द्वारा मंजूरी दी गई।

सेबी प्रमुख के रूप में बड़ी चुनौतियाँ

पांडे ऐसे समय में सेबी की कमान संभाल रहे हैं जब भारतीय शेयर बाजार भारी बिकवाली के दबाव में है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा भारी पूंजी निकासी (₹1.13 लाख करोड़, 2025 में अब तक) ने बाजार को नीचे धकेल दिया है। उनकी गहरी आर्थिक और वित्तीय विशेषज्ञता से बाजार में स्थिरता लाने की उम्मीद की जा रही है।

तुहिन कांता पांडे: एक अनुभवी प्रशासक

शैक्षणिक पृष्ठभूमि

  • पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से अर्थशास्त्र में परास्नातक
  • यूके से एमबीए, जिससे उन्हें वित्तीय प्रबंधन और आर्थिक नीतियों की गहरी समझ मिली।

प्रशासनिक करियर

  • 1987 बैच के ओडिशा कैडर के IAS अधिकारी
  • केंद्र और राज्य सरकार में वित्तीय नीति और सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन से जुड़े अहम पदों पर कार्य किया।

महत्वपूर्ण पद

  • जिला कलेक्टर, संबलपुर
  • वाणिज्य मंत्रालय में उप सचिव
  • योजना आयोग में संयुक्त सचिव
  • नागर विमानन मंत्रालय के सचिव (2021)
  • सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) के प्रमुख
  • निवेश और सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के प्रमुख

वित्त सचिव के रूप में योगदान

  • वित्तीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रित करने के लिए आर्थिक नीतियों की रणनीति तैयार की।
  • एयर इंडिया के ऐतिहासिक विनिवेश (Disinvestment) और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के सार्वजनिक निर्गम (IPO) का सफल संचालन किया।
  • वित्तीय स्थिरता बढ़ाने और निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने के लिए सुधार लागू किए।

सेबी प्रमुख के रूप में जिम्मेदारियाँ और प्राथमिकताएँ

बाज़ार सुधार और स्थिरता

  • भारतीय पूंजी बाजार में नियमों की पारदर्शिता और सख्त अनुपालन सुनिश्चित करना।
  • निवेशकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना और धोखाधड़ी पर कड़ी निगरानी रखना।
  • शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय संस्थानों का सख्त नियमन।

आर्थिक नीतियाँ और सुधार

  • कॉरपोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) को मजबूत करने के लिए नए दिशानिर्देश लाना।
  • IPO प्रक्रिया और विनिवेश (Disinvestment) को अधिक पारदर्शी बनाना।
  • डिजिटलीकरण और AI-आधारित अनुपालन प्रणाली को बढ़ावा देना।
  • विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए बाजार नियमन को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना।

आगामी चुनौतियाँ और संभावित नीतियाँ

  • FPI के भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर निकासी को संतुलित करने के लिए रणनीति बनाना।
  • घरेलू और विदेशी निवेशकों का विश्वास बहाल करने के लिए नीतिगत सुधार लाना।
  • पूंजी बाजार को मजबूत करने के लिए नए वित्तीय उत्पाद और डिजिटल अवसंरचना विकसित करना।

तुहिन कांता पांडे के नेतृत्व में सेबी की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी, क्योंकि भारतीय शेयर बाजार को अस्थिरता से उबारकर नए सिरे से निवेशकों का विश्वास बहाल करना उनकी सबसे बड़ी चुनौती होगी।

श्रेणी विवरण
क्यों चर्चा में? तुहिन कांता पांडे को तीन साल के कार्यकाल के लिए सेबी का 11वां अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वह माधबी पुरी बुच का स्थान लेंगे।
नियुक्ति की तिथि 27 फरवरी 2025 (कैबिनेट की नियुक्ति समिति द्वारा पुष्टि)
कार्यकाल प्रारंभ तिथि 1 मार्च 2025 (माधबी पुरी बुच के कार्यकाल की समाप्ति के बाद)
पिछला पद वित्त सचिव, भारत सरकार
मुख्य जिम्मेदारियाँ पूंजी बाजार का विनियमन, निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, कॉरपोरेट गवर्नेंस को मजबूत बनाना, स्टॉक एक्सचेंज और म्यूचुअल फंड की निगरानी, नीति सुधारों को लागू करना।
आगामी चुनौतियाँ 2025 में ₹1.13 लाख करोड़ की विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) निकासी के कारण मंदी वाले बाजार को संभालना, नियामक ढांचे को मजबूत करना, और निवेशकों का विश्वास बढ़ाना।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से अर्थशास्त्र में एमए; यूके से एमबीए।
करियर की प्रमुख उपलब्धियाँ संबलपुर के जिला कलेक्टर, वाणिज्य मंत्रालय में उप सचिव, योजना आयोग में संयुक्त सचिव, DIPAM के प्रमुख के रूप में कार्य किया; एयर इंडिया के विनिवेश और LIC सूचीबद्धता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नीतिगत दृष्टिकोण कॉरपोरेट गवर्नेंस सुधार, डिजिटल अनुपालन तंत्र, IPO प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए सुधार।
सेबी पर प्रभाव पांडे के नेतृत्व में वित्तीय बाजारों में स्थिरता आने, कड़े नियम लागू होने और निवेशक हितैषी नीतियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

RBI ने NBFC, सूक्ष्म वित्त कर्ज के लिए बैंक वित्त पर जोखिम भारांश कम किया

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंक ऋण वृद्धि में मंदी को देखते हुए गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को दिए जाने वाले बैंक ऋणों पर जोखिम भार (Risk Weights) बढ़ाने के 2023 के अपने निर्णय को वापस लेने का फैसला किया है। यह बदलाव 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी होगा, जिससे बैंकों के लिए पूंजी मुक्त होगी, NBFCs को ऋण प्रवाह में सुधार मिलेगा और सूक्ष्म ऋणों (Microloans) पर जोखिम भार को लेकर स्पष्टता आएगी।

मुख्य बिंदु

NBFC ऋणों पर जोखिम भार

  • RBI ने नवंबर 2023 में बैंक ऋणों पर 25 प्रतिशत अंक का जोखिम भार बढ़ाया था, जिसे अब वापस ले लिया गया है।
  • अब जोखिम भार NBFC की बाहरी क्रेडिट रेटिंग के अनुसार तय होगा।
  • इस फैसले से बैंक की पूंजी मुक्त होगी और NBFCs को ऋण प्रवाह में सुधार मिलेगा।

नवंबर 2023 के फैसले का प्रभाव

  • जोखिम भार बढ़ने के कारण NBFCs को दिए गए बैंक ऋणों की वृद्धि दर दिसंबर 2023 में 15% थी, जो दिसंबर 2024 में घटकर 6.7% रह गई।
  • कुल बैंक ऋण वृद्धि भी 20% से घटकर 11.2% हो गई।
  • NBFCs को पूंजी बाजार (Capital Markets) और बाहरी वाणिज्यिक उधारी (External Commercial Borrowings – ECBs) जैसी वैकल्पिक वित्तीय स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ा, जो डॉलर हेजिंग लागत बढ़ने के कारण महंगे हो गए।

सूक्ष्म ऋणों के लिए संशोधित जोखिम भार

  • RBI ने स्पष्ट किया है कि बैंकों द्वारा दिए गए सूक्ष्म ऋणों (Microloans) पर अलग-अलग जोखिम भार होंगे:
    • 75% जोखिम भार: नियामकीय खुदरा (Regulatory Retail) या व्यावसायिक ऋणों (Business Loans) पर।
    • 100% जोखिम भार: उपभोक्ता ऋण (Consumer Credit), यानी केवल व्यक्तिगत उपभोग के लिए लिए गए ऋणों पर।
  • पहले दोनों श्रेणियों पर 125% का जोखिम भार था, जिससे बैंकों में भ्रम की स्थिति बनी हुई थी।

RBI के निर्णय का संभावित प्रभाव

  • बैंकों के लिए: जोखिम भार कम होने से बैंकों को कम पूंजी अलग रखनी होगी, जिससे उनकी ऋण देने की क्षमता बढ़ेगी।
  • NBFCs के लिए: बैंकों से ऋण लेना आसान होगा, जिससे महंगे वित्तीय स्रोतों पर निर्भरता कम होगी।
  • लघु वित्त बैंक और माइक्रोफाइनेंस ऋणदाताओं के लिए: संशोधित जोखिम भार से स्पष्टता मिलेगी और ऋण जोखिम का न्यायसंगत आकलन संभव होगा।

चेन्नई एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री ने ‘उड़ान यात्री कैफे’ का उद्घाटन किया

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री राम मोहन नायडू ने चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर UDAN यात्री कैफे का उद्घाटन किया, जो इस पहल के तहत दूसरा कैफे है। यह कदम यात्रियों की सुविधा बढ़ाने और हवाई यात्रा को अधिक सुलभ, किफायती और सहज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे पहले, पहला UDAN यात्री कैफे 19 दिसंबर 2024 को कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उसके 100वें वर्षगांठ के उपलक्ष्य में शुरू किया गया था।

कोलकाता के UDAN यात्री कैफे की सफलता

कोलकाता हवाई अड्डे पर शुरू किए गए UDAN यात्री कैफे को यात्रियों से अत्यधिक सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। लोगों ने इसके भोजन की गुणवत्ता, स्वाद और किफायती दरों की सराहना की है। इस पहल की सफलता के बाद यात्रियों ने अन्य हवाई अड्डों पर भी ऐसी सुविधाएं शुरू करने की मांग की, जिसके परिणामस्वरूप नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इसे चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक विस्तारित किया।

चेन्नई हवाई अड्डा: एक प्रमुख विमानन केंद्र

चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भारत के सबसे पुराने और पांचवें सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक है, जो हर साल 2.2 करोड़ से अधिक यात्रियों को सेवा प्रदान करता है। इसे दक्षिण भारत का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है और यह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए महत्वपूर्ण केंद्र है। चेन्नई हवाई अड्डे पर UDAN यात्री कैफे का उद्देश्य यात्रियों को उच्च गुणवत्ता वाला भोजन किफायती दरों पर प्रदान करना है, जो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के हवाई यात्रा को अधिक समावेशी बनाने के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

बुनियादी ढांचे के विकास और विस्तार की योजनाएँ

UDAN यात्री कैफे के उद्घाटन के साथ ही, श्री राम मोहन नायडू ने चेन्नई हवाई अड्डे के उन्नयन के लिए कई प्रमुख परियोजनाओं की भी घोषणा की:

  • टर्मिनल 2 का विस्तार:
    • 86,135 वर्ग मीटर में फैला विस्तार कार्य प्रगति पर है, जिससे अंतरराष्ट्रीय परिचालन को बढ़ावा मिलेगा।
  • टर्मिनल 1 और 4 का नवीनीकरण:
    • यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए ₹75 करोड़ से अधिक की लागत से इन टर्मिनलों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
  • यातायात प्रबंधन प्रणाली:
    • ₹19 करोड़ की लागत से एक नई यातायात प्रबंधन प्रणाली लागू की जा रही है, जिससे हवाई अड्डे के आसपास भीड़भाड़ कम होगी और यातायात प्रवाह सुगम होगा।

यात्रियों की सुविधा और हरित ऊर्जा पहल

चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा यात्रियों के लिए अधिकतम सुविधा सुनिश्चित करने के लिए कई सेवाएँ प्रदान कर रहा है:

  • बेहतर यात्री सेवाएँ:
    • वरिष्ठ नागरिकों और गर्भवती महिलाओं के लिए निःशुल्क बग्गी सेवा।
    • बच्चों के लिए देखभाल कक्ष, चिकित्सा सुविधाएँ और आधुनिक लाउंज।
  • हरित ऊर्जा प्रतिबद्धता:
    • हवाई अड्डा पूरी तरह से हरित ऊर्जा पर संचालित होता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया जा रहा है।
    • 1.5 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया है।

UDAN यात्री कैफे और UDAN योजना का महत्व

UDAN यात्री कैफे सरकार की UDAN (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य हवाई यात्रा को अधिक किफायती और सुलभ बनाना है। यह योजना क्षेत्रीय हवाई संपर्क बढ़ाने और हवाई अड्डों के बुनियादी ढांचे में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। चेन्नई में इस कैफे की शुरुआत इस पहल के विस्तार की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

समारोह में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

इस उद्घाटन समारोह में कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया, जिनमें शामिल हैं:

  • डॉ. टी. आर. बी. राजा, तमिलनाडु के उद्योग मंत्री।
  • नागरिक उड्डयन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी।
  • भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) और चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रतिनिधि।

SIDBI ने MSME वित्तपोषण को मजबूत करने हेतु TCL के साथ MoU पर हस्ताक्षर किए

भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) ने माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) के लिए वित्तीय अवसरों को बढ़ाने के उद्देश्य से टाटा कैपिटल लिमिटेड (TCL) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता MSME विकास को समर्थन देने के लिए वित्तीय साधनों जैसे मशीनरी/उपकरण वित्तपोषण, कार्यशील पूंजी ऋण और संपत्ति के विरुद्ध ऋण प्रदान करने पर केंद्रित है। इस साझेदारी के तहत सह-वित्तपोषण, जोखिम साझाकरण और संयुक्त वित्तीय मॉडल की संभावनाओं को भी खोजा जाएगा, जिससे MSME को बेहतर ऋण सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

प्रमुख बिंदु:

समझौते का उद्देश्य: SIDBI और टाटा कैपिटल लिमिटेड (TCL) के माध्यम से MSME के लिए वित्तीय अवसरों को मजबूत करना।

वित्त पोषण के क्षेत्र:

  • मशीनरी/उपकरण वित्तपोषण
  • कार्यशील पूंजी ऋण (CC/OD/व्यवसाय ऋण)
  • संपत्ति के विरुद्ध ऋण
    जोखिम साझाकरण और सह-वित्तपोषण: MoU जोखिम साझाकरण तंत्र, संयुक्त वित्तपोषण और सह-वित्तपोषण मॉडल को अपनाने की संभावनाओं की तलाश करेगा, जिससे MSME को आसान ऋण उपलब्ध कराया जा सके।

हस्ताक्षर समारोह

हस्ताक्षरकर्ता:

  • विवेक कुमार मल्होत्रा, मुख्य महाप्रबंधक, SIDBI
  • विवेक चोपड़ा, मुख्य परिचालन अधिकारी, खुदरा वित्त, TCL
  • वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

SIDBI की MSME विकास में भूमिका

  • अप्रत्यक्ष ऋण: साझेदार संस्थानों के माध्यम से MSME वित्तपोषण का विस्तार।
  • प्रत्यक्ष ऋण: MSME क्षेत्र में मौजूदा ऋण अंतर को कम करना।
  • फंड ऑफ फंड्स: स्टार्टअप्स का समर्थन कर उद्यमिता को बढ़ावा देना।
  • संवर्धन और विकास: MSME के लिए सहायता और क्रेडिट-प्लस पहल।
  • सुविधादाता: सरकारी MSME योजनाओं के लिए एक प्रमुख एजेंसी के रूप में कार्य करना।

यह समझौता MSME क्षेत्र को वित्तीय सहायता प्रदान करने और उनकी वृद्धि में सहायक सिद्ध होगा।

सारांश/स्थिर विवरण विवरण
समाचार में क्यों? SIDBI ने टाटा कैपिटल लिमिटेड (TCL) के साथ MSME वित्तपोषण को मजबूत करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए
समझौता ज्ञापन किनके बीच हुआ? SIDBI और टाटा कैपिटल लिमिटेड (TCL)
उद्देश्य MSME वित्तपोषण के अवसरों को मजबूत करना
प्रमुख वित्तपोषण क्षेत्र मशीनरी/उपकरण वित्तपोषण, कार्यशील पूंजी ऋण, संपत्ति के विरुद्ध ऋण
जोखिम प्रबंधन रणनीतियाँ जोखिम साझाकरण, सह-वित्तपोषण, संयुक्त वित्तपोषण
MSME वृद्धि में SIDBI की भूमिका अप्रत्यक्ष एवं प्रत्यक्ष ऋण, स्टार्टअप वित्तपोषण, संवर्धन और विकास, सरकारी योजनाओं का सुविधादाता
समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले प्रतिनिधि विवेक कुमार मल्होत्रा (SIDBI) और विवेक चोपड़ा (TCL)
अपेक्षित प्रभाव MSME के लिए बेहतर ऋण पहुंच और वित्तीय सहायता

एन चंद्रशेखरन को रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन का अध्यक्ष नियुक्त किया गया

टाटा संस के अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन को रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन (RTEF) का प्रमुख नियुक्त किया गया है। यह फाउंडेशन, जिसे दिवंगत रतन टाटा ने सेक्शन 8 संस्था के रूप में स्थापित किया था, समाज सेवा और तकनीकी अनुसंधान के माध्यम से भारतीय समाज के विकास में योगदान देने पर केंद्रित है। उनकी नियुक्ति मेहली मिस्त्री, शिरीन और दीना जेजीभॉय तथा दारियस खंबाटा द्वारा की गई, जो रतन टाटा की वसीयत के कार्यकारी हैं। चंद्रशेखरन के नेतृत्व में फाउंडेशन की कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित किया जाएगा, जिससे इसकी स्वतंत्र पहचान और प्रभावी संचालन सुनिश्चित हो सके।

एन चंद्रशेखरन की RTEF में नियुक्ति के प्रमुख बिंदु

रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन (RTEF) के बारे में

  • रतन टाटा द्वारा स्थापित एक सेक्शन 8 संस्था, जिसका उद्देश्य समाज सेवा और तकनीकी अनुसंधान को बढ़ावा देना है।
  • भारत में नवीन पहल के माध्यम से सकारात्मक प्रभाव डालने की प्रतिबद्धता।
  • टाटा ट्रस्ट्स से स्वतंत्र पहचान बनाए रखता है।

एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति

  • रतन टाटा की वसीयत के कार्यकारियों द्वारा नियुक्ति की गई।
  • बाहरी कानूनी राय लेने के बाद यह निर्णय लिया गया।
  • कोई कानूनी अड़चन नहीं, क्योंकि फाउंडेशन टाटा ट्रस्ट्स से अलग रूप से संचालित होता है।
  • रतन टाटा ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में व्यक्तिगत रूप से चंद्रशेखरन को चुना था।

प्रबंधन एवं नेतृत्व संरचना

  • बर्जिस तारापोरवाला और आर.आर. शास्त्री को होल्डिंग ट्रस्टी नियुक्त किया गया।
  • जमशेद पॉंचा को फाउंडेशन का सीईओ बनाया गया।
  • एन चंद्रशेखरन, फाउंडेशन की प्रबंधन संरचना और संचालन टीम को औपचारिक रूप देंगे।

फाउंडेशन की दृष्टि और उद्देश्य

  • समाज सेवा और टेक्नोलॉजी अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध।
  • नवीन और प्रभावशाली पहलों के माध्यम से भारतीय समाज को सशक्त बनाना।
  • रतन टाटा की परोपकारी और तकनीकी नवाचारों की विरासत को आगे बढ़ाना।
मुख्य पहलू विवरण
क्यों चर्चा में? एन चंद्रशेखरन रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन (RTEF) के अध्यक्ष नियुक्त
फाउंडेशन का नाम रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन (RTEF)
प्रकार सेक्शन 8 कंपनी
स्थापक दिवंगत रतन टाटा
अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन
होल्डिंग ट्रस्टी बर्जिस तारापोरवाला और आर.आर. शास्त्री
सीईओ जमशेद पॉंचा
उद्देश्य समाज सेवा, टेक्नोलॉजी अनुसंधान और विकास
प्रबंधन टाटा ट्रस्ट्स से स्वतंत्र रूप से संचालित
नियुक्ति का आधार रतन टाटा की वसीयत के कार्यकारियों द्वारा निर्णय
मुख्य दृष्टि प्रभावशाली पहलों के माध्यम से भारतीय समाज को सशक्त बनाना

धीमी बिक्री के बावजूद वित्त वर्ष 24 में कॉर्पोरेट मुनाफे में 15.3% की बढ़ोतरी: RBI

भारतीय कॉरपोरेट मुनाफे में FY24 के दौरान 15.3% की मजबूत वृद्धि देखी गई, जबकि बिक्री वृद्धि मध्यम रही और केवल 5.5% रही। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रिपोर्ट के अनुसार, लागत-कटौती उपायों ने कंपनियों को आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद अपनी लाभप्रदता बनाए रखने में मदद की। जहां सेवा क्षेत्र ने मजबूती दिखाई, वहीं विनिर्माण क्षेत्र धीमी वृद्धि से जूझता रहा।

सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों का प्रदर्शन कैसा रहा?

  • सेवा क्षेत्र:
    • बिक्री में 6.8% की वृद्धि हुई।
    • परिचालन मुनाफे में 15.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो FY23 के 16.8% लाभ वृद्धि के अनुरूप है।
    • कर के बाद लाभ (PAT) में 38.1% की वृद्धि हुई, जो परिचालन दक्षता का संकेत है।
  • विनिर्माण क्षेत्र:
    • बिक्री वृद्धि घटकर 4.1% रह गई।
    • धातु, रसायन, दवा और परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों के कमजोर प्रदर्शन के कारण गिरावट आई।
    • परिचालन मुनाफे में 13.2% और PAT में 7.6% की वृद्धि हुई, जो FY23 की 3.9% की गिरावट के बाद सुधार को दर्शाता है।

लाभ वृद्धि में लागत प्रबंधन की क्या भूमिका रही?

  • रिपोर्ट बताती है कि लागत-कटौती रणनीतियाँ मुनाफा बढ़ाने में केंद्रीय भूमिका निभा रही हैं।
  • परिचालन लागत में केवल 3.4% की वृद्धि हुई, जो मुख्य रूप से नियंत्रित विनिर्माण लागत के कारण संभव हुआ।
  • कर्मचारी वेतन वृद्धि भी धीमी रही, जिससे कंपनियों ने वित्तीय स्थिरता बनाए रखी।
  • इन उपायों के कारण परिचालन और शुद्ध लाभ मार्जिन में सुधार हुआ, भले ही बिक्री में मंदी रही।

भारतीय कंपनियों की वित्तीय स्थिति कितनी मजबूत है?

  • RBI ने 6,955 गैर-वित्तीय सार्वजनिक कंपनियों के डेटा का विश्लेषण किया, जिससे वित्तीय स्थिरता में सुधार देखा गया।
  • ऋण-से-इक्विटी अनुपात (Debt-to-Equity Ratio) में गिरावट आई, जिससे उधारी पर निर्भरता घटी।
  • ब्याज कवरेज अनुपात (ICR) FY24 में बढ़कर 4.1 हो गया, जो दर्शाता है कि कंपनियाँ अपने ऋण दायित्वों को पूरा करने की बेहतर स्थिति में हैं।
मुख्य पहलू विवरण
क्यों चर्चा में? FY24 में कॉरपोरेट मुनाफे में 15.3% की वृद्धि हुई, जबकि बिक्री वृद्धि केवल 5.5% रही, जो लागत-कटौती रणनीतियों से संभव हुआ।
सेवा क्षेत्र बिक्री में 6.8% की वृद्धि, परिचालन मुनाफे में 15.5% की बढ़ोतरी, और PAT में 38.1% की वृद्धि, जिससे मजबूत प्रदर्शन दिखा।
विनिर्माण क्षेत्र बिक्री वृद्धि घटकर 4.1% रह गई, लेकिन परिचालन मुनाफा 13.2% और PAT 7.6% बढ़ा, जिससे FY23 की 3.9% की गिरावट पलटी।
लागत प्रबंधन परिचालन खर्च केवल 3.4% बढ़ा, कर्मचारी वेतन वृद्धि धीमी रही, जिससे लाभ मार्जिन में सुधार हुआ।
वित्तीय स्थिति ऋण-से-इक्विटी अनुपात घटा, ब्याज कवरेज अनुपात (ICR) 4.1 तक बढ़ा, जिससे कर्ज प्रबंधन बेहतर हुआ।

Punjab के सभी स्कूलों में पंजाबी पढ़ना हुआ अनिवार्य

पंजाब सरकार ने राज्य के सभी स्कूलों में, चाहे वे किसी भी शिक्षा बोर्ड से संबद्ध हों, पंजाबी को मुख्य और अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाना अनिवार्य कर दिया है। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस फैसले की घोषणा एक नई अधिसूचना के माध्यम से की, जो तत्काल प्रभाव से लागू होगी। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि पंजाबी पीएसईबी, सीबीएसई और सीआईएससीई जैसे विभिन्न बोर्डों के स्कूल पाठ्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनी रहे। यह निर्णय सीबीएसई की कक्षा 10 की क्षेत्रीय भाषा सूची से पंजाबी को कथित रूप से हटाने की चिंताओं के बीच लिया गया है।

मुख्य बिंदु

  • पंजाब सरकार ने कक्षा 10 के लिए पंजाबी को मुख्य विषय के रूप में अनिवार्य किया।
  • पीएसईबी, सीबीएसई और सीआईएससीई सहित सभी स्कूलों पर यह नियम लागू।
  • अगर किसी छात्र के प्रमाणपत्र में पंजाबी मुख्य विषय के रूप में शामिल नहीं होगी, तो वह अमान्य माना जाएगा।
  • पंजाब लर्निंग ऑफ पंजाबी एंड अदर लैंग्वेजेज एक्ट, 2008 को सख्ती से लागू किया जाएगा।
  • नियम का उल्लंघन करने वाले निजी स्कूलों पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया गया।

सीबीएसई के मसौदा नियमों पर विवाद

  • पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने सीबीएसई पर पंजाबी को अपनी कक्षा 10 की विषय सूची से हटाने का आरोप लगाया।
  • उन्होंने इसे पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत के खिलाफ “एक सोची-समझी साजिश” बताया।
  • सीबीएसई के मसौदे में संस्कृत, उर्दू, मराठी, गुजराती, तमिल जैसी भाषाएं शामिल थीं, लेकिन पंजाबी गायब थी।
  • इस मुद्दे पर बैंस ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर सफाई और कार्रवाई की मांग की।
  • शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने भी इस फैसले का विरोध किया और पंजाबी को तुरंत सूची में शामिल करने की मांग की।

सीबीएसई की सफाई

  • सीबीएसई ने स्पष्ट किया कि भाषा सूची में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
  • परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा कि मसौदा सूची केवल सांकेतिक थी, अंतिम नहीं।
  • सीबीएसई ने दोहराया कि पंजाबी अभी भी कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाओं में एक मान्य विषय है।

सरकारी कार्रवाई और भविष्य की योजनाएँ

  • पंजाब सरकार ने मोहाली के एमिटी इंटरनेशनल स्कूल पर 2008 के अधिनियम का पालन न करने पर जुर्माना लगाया।
  • जालंधर के दो स्कूलों पर भी पंजाबी पढ़ाने के नियमों का उल्लंघन करने पर दंड लगाया गया।
  • आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार जल्द ही अपनी शिक्षा नीति लाने की योजना बना रही है, जिसके लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी।
क्यों चर्चा में? पंजाब के स्कूलों में पंजाबी पढ़ाना अनिवार्य
फैसला कक्षा 10 के लिए पंजाबी को सभी स्कूलों में मुख्य विषय के रूप में अनिवार्य किया गया
लागू होने वाले स्कूल पीएसईबी, सीबीएसई और सीआईएससीई से संबद्ध सभी स्कूल
उल्लंघन पर दंड 2008 अधिनियम का उल्लंघन करने पर ₹50,000 का जुर्माना
विवाद सीबीएसई के मसौदा नीति में कथित रूप से पंजाबी को कक्षा 10 की विषय सूची से हटाया गया
सरकारी प्रतिक्रिया पंजाब के शिक्षा मंत्री ने सीबीएसई पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए स्पष्टीकरण मांगा
सीबीएसई की सफाई कहा कि मसौदा केवल सांकेतिक था, कोई भाषा हटाई नहीं गई
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ शिअद और अन्य नेताओं ने पंजाबी को तुरंत सीबीएसई की सूची में बहाल करने की मांग की
भविष्य की योजनाएँ विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के साथ पंजाब अपनी शिक्षा नीति पेश करेगा

सैन्य अभ्यास ‘जल-थल-रक्षा 2025’ बेट द्वारका में आयोजित किया गया

भारतीय सेना ने भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) और मरीन पुलिस के साथ मिलकर गुजरात के बेत द्वारका में बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास ‘जल-थल-रक्षा 2025’ का आयोजन किया। इस अभ्यास का उद्देश्य द्वीप सुरक्षा को मजबूत करना, अवैध अतिक्रमण रोकना और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना था। इस ड्रिल का निरीक्षण कई सरकारी एजेंसियों ने किया, जिससे संभावित सुरक्षा खतरों से निपटने की तैयारियों को परखा गया।

अभ्यास के प्रमुख बिंदु

स्थान और उद्देश्य

  • अभ्यास बेत द्वारका, गुजरात में आयोजित किया गया।
  • द्वीप सुरक्षा को सुदृढ़ करने और अवैध अतिक्रमण को रोकने पर केंद्रित।

प्रतिभागी

  • भारतीय सेना की 11 अहमदाबाद और 31 जामनगर इकाइयाँ।
  • भारतीय तटरक्षक बल (ICG) और मरीन पुलिस।
  • देवभूमि द्वारका जिला प्रशासन, वन विभाग, समुद्री बोर्ड, गुजरात ऊर्जा विभाग, और NSG।

प्रमुख गतिविधियाँ

  • हवरक्राफ्ट लैंडिंग और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा से जुड़े संयुक्त सुरक्षा अभ्यास।
  • भूमि आधारित खतरों और आतंकवादी हमलों के संभावित परिदृश्यों की प्रतिक्रिया का अभ्यास।
  • संकट के समय विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करना।

रणनीतिक महत्व

  • भारत की तटीय रक्षा क्षमताओं को मजबूत करता है।
  • आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए अंतर-सेवा समन्वय में सुधार करता है।
  • महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए तैयारियों को बढ़ाता है।
मुख्य पहलू विवरण
क्यों चर्चा में? बेत द्वारका में सैन्य अभ्यास जल-थल-रक्षा 2025′ आयोजित
अभ्यास का नाम जल-थल-रक्षा 2025
स्थान बेत द्वारका, गुजरात
उद्देश्य द्वीप सुरक्षा को मजबूत करना, अवैध अतिक्रमण रोकना
प्रमुख प्रतिभागी भारतीय सेना, तटरक्षक बल, मरीन पुलिस, सरकारी एजेंसियाँ
मुख्य गतिविधियाँ सुरक्षा अभ्यास, खतरे की प्रतिक्रिया सिमुलेशन, हवरक्राफ्ट की तैनाती
रणनीतिक प्रभाव रक्षा तैयारियों को मजबूत करना और एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना

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