सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी दिवस 2025: 18 जून

गैस्ट्रोनॉमी, जिसे अक्सर भोजन की कला कहा जाता है, केवल खाना पकाने तक सीमित नहीं है। यह किसी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक पाक विरासत को दर्शाता है। चाहे वह बैंकॉक की सड़क पर मिलने वाला स्ट्रीट फूड हो या मोरक्को का कोई पारंपरिक स्टू — गैस्ट्रोनॉमी एक स्थान और उसके लोगों की कहानी कहती है।

सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी: भोजन के माध्यम से बदलाव का रास्ता

जब स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) के साथ जोड़ा जाता है, तो गैस्ट्रोनॉमी एक शक्तिशाली परिवर्तनकारी साधन बन जाती है।
सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी का अर्थ है — ऐसा भोजन और पाक अभ्यास जो पर्यावरण के अनुकूल, सामाजिक रूप से उत्तरदायी और आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो।

इसमें ध्यान दिया जाता है:

  • सामग्री (ingredients) कहाँ से आती हैं

  • वे कैसे उगाई जाती हैं

  • कैसे परिवहन किया जाता है

  • और अंततः, कैसे खपत की जाती हैं — इस सबके दौरान प्रकृति और सार्वजनिक स्वास्थ्य को न्यूनतम नुकसान हो।

संक्षेप में: सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी का मतलब है स्थानीय, मौसमी, संसाधन-कुशल और संस्कृति-सम्मानजनक भोजन विकल्प अपनाना।

संयुक्त राष्ट्र और सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी को बढ़ावा

  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 18 जून को “सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी दिवस” के रूप में घोषित किया, जिसे A/RES/71/246 प्रस्ताव के तहत 21 दिसंबर 2016 को अपनाया गया था।
  • इस दिन को मनाने का उद्देश्य है — भोजन और पाक परंपराओं की भूमिका को स्थायी विकास के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में पहचानना।

सहयोगी संगठन:

  • UNESCO (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन)

  • FAO (खाद्य और कृषि संगठन)

ये संस्थाएं सदस्य देशों, अंतर्राष्ट्रीय निकायों और सिविल सोसायटी के साथ मिलकर सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी को बढ़ावा देती हैं।

यूनेस्को द्वारा सतत पाककला को बढ़ावा देने के प्रयास

  • UNESCO ने 2004 में “UNESCO Creative Cities Network (UCCN)” की स्थापना की, जिसमें गैस्ट्रोनॉमी सहित 7 रचनात्मक क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जाता है।
  • 2025 तक, 56 शहरों को Creative Cities of Gastronomy के रूप में मान्यता दी गई है, जो स्थानीय खाद्य विरासत और सस्टेनेबिलिटी को प्रोत्साहित करते हैं।

अन्य पहलें:

  • कोयले की जगह स्वच्छ ऊर्जा (जैसे गैस या बिजली) का उपयोग करने वाले रेस्तरां को बढ़ावा

  • टीवी कार्यक्रमों, फूड शोज़ और सांस्कृतिक प्रदर्शनियों के माध्यम से जन जागरूकता

  • स्थानीय किसानों और खाद्य उद्योगों को पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और आधुनिक टिकाऊ पद्धतियों को अपनाने में सहायता

FAO और हरित आहार 

FAO पौधों पर आधारित, स्थानीय सामग्री वाले और कम पर्यावरणीय प्रभाव वाले “हरित संस्कृति आहार” की वकालत करता है।

प्रमुख प्रयास:

  • “Fish on our mind, fish on your plate” और “Celebrating nutrition” जैसे कुकबुक प्रकाशित करना

  • Lebanon में फ्रीकह और अफ्रीका में दालों जैसे पारंपरिक खाद्य तत्वों को उजागर करना

  • ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाना

  • खाद्य विरासत को समझने के लिए सांस्कृतिक शिक्षा को बढ़ावा (जैसे – चाय या वसाबी की खेती की परंपरा)

आज सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी क्यों जरूरी है?

COVID-19 के बाद की दुनिया में, जहां हम तीनहरी पारिस्थितिकीय संकट (जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता का नुकसान और प्रदूषण) का सामना कर रहे हैं, ऐसे समय में सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी अत्यधिक प्रासंगिक हो गई है।

इसके लाभ:

  • जलवायु परिवर्तन में कमी — स्थानीय और मौसमी खाद्य सामग्री के उपयोग से

  • जैव विविधता का संरक्षण — देसी फसलों और पशुओं को महत्व देकर

  • खाद्य सुरक्षा में वृद्धि — स्थानीय खाद्य प्रणालियों को मज़बूत बनाकर

  • सांस्कृतिक विरासत की रक्षा — पारंपरिक व्यंजनों को जीवित रखकर

निष्कर्ष:

सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी केवल भोजन नहीं है, यह प्रकृति, संस्कृति और समुदाय की जिम्मेदारी से जुड़ा एक आंदोलन है। यह हमें बेहतर भोजन चुनने, बेहतर सोचने और एक स्थायी भविष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है।

बिहार ने भारत की पहली मोबाइल-आधारित ई-वोटिंग प्रणाली की शुरुआत की

बिहार राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने मोबाइल आधारित ई-वोटिंग प्रणाली की शुरुआत की है, जिससे बिहार ऐसा करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। यह नई प्रणाली 28 जून को होने वाले नगर निकाय चुनावों में लागू की जाएगी, जिसकी पुष्टि राज्य निर्वाचन आयुक्त दीपक प्रसाद ने की है।

क्या है ई-वोटिंग?

ई-वोटिंग का मतलब है मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए दूरस्थ मतदान करना। इस प्रणाली में मतदाता एंड्रॉइड मोबाइल ऐप का उपयोग करके बिना मतदान केंद्र गए ही अपना वोट डाल सकते हैं।

बिहार में ई-वोटिंग दो मोबाइल ऐप्स के माध्यम से संचालित होगी:

  1. “e-Voting SECBHR” – इसे सी-डैक (Centre for Development of Advanced Computing) ने विकसित किया है।

  2. बिहार राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा विकसित एक अन्य ऐप।

समावेशी मतदान: जिन्हें वोट देने में कठिनाई होती थी, अब उनका भी अधिकार सुरक्षित

राज्य निर्वाचन आयुक्त के अनुसार, इस प्रणाली का उद्देश्य उन मतदाताओं को सक्षम बनाना है जो पारंपरिक मतदान में शामिल नहीं हो पाते:

  • प्रवासी श्रमिक

  • दिव्यांग मतदाता

  • गर्भवती महिलाएं

  • वरिष्ठ नागरिक

  • गंभीर रूप से बीमार लोग

अब उन्हें मतदान केंद्र पर उपस्थित होना अनिवार्य नहीं है, जिससे मतदान प्रतिशत बढ़ने और लोकतंत्र को और समावेशी और सुलभ बनाने की उम्मीद है।

डिजिटल सुरक्षा और पारदर्शिता

बिहार की ई-वोटिंग प्रणाली में अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है:

  • ब्लॉकचेन तकनीक – डेटा का सुरक्षित और पारदर्शी प्रबंधन

  • लाइवनेस डिटेक्शन – यह सुनिश्चित करता है कि मतदाता खुद उपस्थित है

  • चेहरे की पहचान (Face Match) और लाइव फेस स्कैन

  • पूर्व-रिकॉर्डेड डेटा से चेहरा मिलान

  • ऑडिट ट्रेल, ठीक वैसे ही जैसे EVM में VVPAT के माध्यम से वोट सत्यापन होता है

ये सभी सुविधाएं मिलकर यह सुनिश्चित करती हैं कि हर वोट प्रामाणिक, सत्यापित और सुरक्षित रूप से दर्ज हो।

अन्य राज्यों के लिए आदर्श मॉडल

बिहार पहले भी डिजिटल चुनावी नवाचार में अग्रणी रहा है:

  • FRS (फेस रिकग्निशन सिस्टम) – मतदाता की पहचान

  • OCR (ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन) – मतगणना और परिणाम

  • डिजिटल लॉक – ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा

इन तकनीकों के माध्यम से बिहार ने चुनावी पारदर्शिता और दक्षता में मिसाल कायम की है।

वैश्विक मानकों की ओर कदम

मोबाइल आधारित ई-वोटिंग को अपनाकर बिहार अब उन देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जैसे:

  • एस्टोनिया – यूरोप का एकमात्र देश जहां राष्ट्रव्यापी ई-वोटिंग सफलतापूर्वक लागू है।

बिहार की यह पहल भारत के डिजिटल लोकतंत्र को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Maruti Suzuki ने खुदरा कार वित्तपोषण को बढ़ावा देने के लिए इक्विटास बैंक के साथ साझेदारी की

मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड (MSIL) — भारत की अग्रणी कार निर्माता कंपनी — ने इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक (ESFB) के साथ एक रणनीतिक वाहन वित्तपोषण साझेदारी की है। इस साझेदारी का उद्देश्य नए वाहनों, पुराने वाहनों और व्यावसायिक वाहनों के लिए बेहतर खुदरा वित्तीय समाधान उपलब्ध कराना है। यह समझौता ग्राहकों को सुलभ, किफायती और अनुकूलित ऋण सुविधाएँ प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

समाचार में क्यों?

मारुति सुज़ुकी और इक्विटास बैंक के बीच यह MoU (सहमति ज्ञापन) हाल ही में हस्ताक्षरित किया गया है ताकि भारत भर में, विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में कंपनी के वित्तपोषण नेटवर्क को मजबूत किया जा सके। यह साझेदारी ऐसे समय में हुई है जब वाहन बिक्री को बढ़ावा देने के लिए आसान फाइनेंसिंग की बड़ी भूमिका है।

साझेदार संगठन

  • MSIL (मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड) – भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी

  • ESFB (इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक) – भारत के प्रमुख स्मॉल फाइनेंस बैंकों में से एक

MoU पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी

  • मारुति सुज़ुकी की ओर से:

    • पार्थो बनर्जी (सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर – मार्केटिंग एवं सेल्स)

    • विशाल शर्मा (उपाध्यक्ष – मारुति सुज़ुकी फाइनेंस)

  • इक्विटास बैंक की ओर से:

    • जगदीश जे. (हेड – रिटेल एसेट्स)

  • घोषणा की तिथि: जून 2025

  • स्थान: नई दिल्ली

उद्देश्य एवं सेवाएं

साझेदारी का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित है:

  • नई कारों के लिए आसान और किफायती ऋण

  • पुरानी (सेकंड हैंड) कारों के लिए वित्तीय सुविधा

  • व्यावसायिक वाहनों के लिए ऋण विकल्प

अतिरिक्त लाभ:

  • प्रतिस्पर्धी ब्याज दरें

  • तेज़ ऋण वितरण प्रक्रिया

  • ग्राहक-हितैषी ऋण शर्तें

  • अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना

महत्त्व

यह साझेदारी न केवल मारुति सुज़ुकी की ग्राहक पहुँच को बढ़ाएगी बल्कि वित्तीय सशक्तिकरण और वाहन स्वामित्व को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाएगी, विशेषकर उन ग्राहकों के लिए जिनके पास पारंपरिक बैंकिंग विकल्प सीमित हैं।

‘साइबर सुरक्षा’ अभ्यास शुरू

डिफेन्स साइबर एजेंसी (Defence Cyber Agency) ने 16 जून 2025 को ‘Cyber Suraksha’ नामक एक बहु-चरणीय साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण अभ्यास की शुरुआत की। यह 12 दिवसीय कार्यक्रम (16 जून से 27 जून 2025 तक) रक्षा और सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े 100 से अधिक प्रतिभागियों को वास्तविक साइबर खतरों का अनुकरण कर साइबर सुरक्षा, लचीलापन (resilience) और रणनीतिक निर्णय क्षमता का प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।

समाचार में क्यों?

यह अभ्यास इसके पैमाने, नेतृत्व की भागीदारी, और यथार्थवादी साइबर सिमुलेशन के कारण चर्चा में है। यह रक्षा क्षेत्र में भारत की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Cyber Suraksha: उद्देश्य और विशेषताएँ

  • आयोजक: डिफेन्स साइबर एजेंसी, इंटीग्रेटेड डिफेन्स स्टाफ मुख्यालय, रक्षा मंत्रालय

  • अवधि: 16 जून से 27 जून 2025 (12 दिन)

  • प्रतिभागी: राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र की विभिन्न एजेंसियों से 100+ अधिकारी

प्रमुख उद्देश्य

  • वास्तविक साइबर हमलों की नकल कर प्रशिक्षण देना

  • रक्षा क्षेत्र में साइबर-सुरक्षा की संस्कृति को बढ़ावा देना

  • तकनीकी विशेषज्ञों और नेतृत्व (CISOs) को साइबर हमलों की स्थिति में प्रतिक्रिया देना सिखाना

मुख्य घटक

साइबर अटैक सिमुलेशन

  • गमिफाइड (gamified), तेज गति वाले साइबर खतरों के सिमुलेशन

  • व्यावहारिक कौशल बढ़ाने के लिए चुनौतीपूर्ण परिदृश्य

CISOs कॉन्क्लेव

  • मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (Chief Information Security Officers) का नेतृत्व सम्मेलन

  • साइबर विशेषज्ञों के व्याख्यान, और

  • टेबल-टॉप अभ्यास, जिसमें साइबर संकट के दौरान निर्णय लेने की रणनीति का अभ्यास कराया जाएगा

प्रशिक्षण की चरणबद्ध योजना

  • संरचित शिक्षण मॉड्यूल

  • वास्तविक समय की चुनौतियाँ

  • मूल्यांकन सत्र

  • दबाव में निर्णय लेने का प्रशिक्षण

रणनीतिक महत्त्व

  • जैसे-जैसे साइबर खतरों की जटिलता बढ़ रही है, यह अभ्यास सुनिश्चित करता है कि भारत की सशस्त्र सेनाएँ तकनीकी रूप से तैयार और सामरिक रूप से प्रशिक्षित रहें।

  • यह अभ्यास भारत की साइबर सुरक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है।

भविष्य की योजना

  • रक्षा मंत्रालय ने संकेत दिया है कि इस तरह के साइबर प्रशिक्षण अभ्यास नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे ताकि हर स्तर पर साइबर तत्परता (cyber readiness) सुनिश्चित की जा सके। Cyber Suraksha अभ्यास भारत की डिजिटल रक्षा क्षमताओं को मज़बूती प्रदान करने की दिशा में एक रणनीतिक और समयोचित प्रयास है।

अंकिता रैना ने गुइमारेस आईटीएफ में एलिस रोबे के साथ 32वां युगल खिताब जीता

भारत की टेनिस स्टार अंकिता रैना ने फ्रांस की एलिस रॉब के साथ मिलकर गुइमारेस, पुर्तगाल में आयोजित $40,000 आईटीएफ महिला टेनिस टूर्नामेंट का डबल्स खिताब 15 जून 2025 को जीत लिया। चौथी वरीय इस जोड़ी ने तीसरी वरीय जापानी जोड़ी हिरोमी अबे और कनाको मोरिसाकी को रोमांचक मुकाबले में 1-6, 6-4, [10-8] से हराकर शानदार वापसी की।

समाचार में क्यों?

यह जीत अंकिता रैना की 2025 सीज़न की तीसरी डबल्स खिताबी जीत और उनके करियर की कुल 32वीं डबल्स ट्रॉफी है। 32 वर्ष की उम्र में भी उनकी लगातार प्रदर्शन करने की क्षमता और ITF सर्किट पर दबदबा इस जीत से फिर साबित हुआ। एलिस रॉब के साथ यह भारत-फ्रांस की सफल साझेदारी का भी उदाहरण है।

मुख्य मुकाबला विवरण

  • टूर्नामेंट: $40,000 ITF महिला टेनिस, गुइमारेस, पुर्तगाल

  • फाइनल परिणाम:

    • अंकिता रैना (भारत) / एलिस रॉब (फ्रांस) ने

    • हिरोमी अबे / कनाको मोरिसाकी (जापान) को हराया

    • स्कोर: 1-6, 6-4, [10-8]

खिलाड़ियों की प्रोफ़ाइल और उपलब्धियां

अंकिता रैना (भारत)

  • आयु: 32 वर्ष

  • कैरियर डबल्स खिताब: 32

  • सिंगल्स खिताब: 11

  • 2025 में खिताब: 3 डबल्स खिताब

  • भारत की शीर्ष महिला खिलाड़ियों में शामिल

एलिस रॉब (फ्रांस)

  • आयु: 25 वर्ष

  • कैरियर डबल्स खिताब: 8

  • ITF सर्किट की उभरती खिलाड़ी

जीत का महत्व

  • अंकिता की स्थायित्वपूर्ण और लम्बे समय तक प्रदर्शन की क्षमता को रेखांकित करता है।

  • रैंकिंग प्वाइंट्स और आत्मविश्वास को बढ़ावा मिलेगा, खासकर आगामी WTA आयोजनों से पहले।

  • अंतरराष्ट्रीय महिला डबल्स में भारत की मौजूदगी को मजबूत करता है

  • इस जीत से यह भी सिद्ध होता है कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ प्रतिस्पर्धात्मक टीम निर्माण में अहम भूमिका निभाती हैं।

TCS ने वित्तीय परिचालन को सुचारू बनाने के लिए CEB के साथ हाथ मिलाया

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) ने काउंसिल ऑफ यूरोप डेवलपमेंट बैंक (CEB), जो पेरिस में स्थित है, के साथ साझेदारी की है ताकि बैंक के जटिल वित्तीय लेनदेन को अधिक कुशल और पारदर्शी बनाया जा सके। इस सहयोग के तहत, TCS अपनी AI-संचालित समाधान प्रणाली ‘TCS BaNCS™ for Reconciliations’ को लागू करेगा, जो CEB की मिलान प्रक्रिया (reconciliation processes) को स्वचालित और आधुनिक बनाने में मदद करेगा।

समाचार में क्यों?

TCS और CEB के बीच यह साझेदारी कई कारणों से महत्वपूर्ण है:

  • यह वैश्विक वित्तीय क्षेत्र में भारत की आईटी नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है।

  • यह AI और ऑटोमेशन को एक प्रमुख यूरोपीय विकास बैंक के मुख्य बैंकिंग कार्यों में शामिल करती है।

  • यह CEB के उस मिशन के अनुरूप है जो पूरे यूरोप में सामाजिक विकास परियोजनाओं का समर्थन करने के लिए संचालन क्षमता को बेहतर बनाना चाहता है।

साझेदारी के बारे में

  • साझेदार संस्थाएं: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (भारत) और काउंसिल ऑफ यूरोप डेवलपमेंट बैंक (CEB, पेरिस)

  • उद्देश्य: बैंक की वित्तीय मिलान (reconciliation) प्रणाली को आधुनिकीकरण और स्वचालित करना।

मुख्य विशेषताएं और लाभ

पूर्ण जीवनचक्र में स्वचालन

  • ट्रांज़ैक्शन मिलान (Transaction Matching)

  • अपवादों को संभालना (Exception Handling)

  • जांच प्रक्रिया (Investigation)

  • रिपोर्टिंग (Reporting)

एकीकरण 

  • CEB के कोर बैंकिंग सिस्टम्स के साथ सहज एकीकरण

  • तेज और सटीक दैनिक मिलान को सक्षम बनाता है

तकनीकी बढ़त 

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और ऑटोमेशन का उपयोग

  • रीयल-टाइम विजिबिलिटी और कम टर्नअराउंड टाइम

प्रमुख लाभ

  • कम मैनुअल प्रयास

  • अधिक पारदर्शिता

  • संचालन पर बेहतर नियंत्रण

  • समय पर डेटा के आधार पर बेहतर निर्णय लेना

काउंसिल ऑफ यूरोप डेवलपमेंट बैंक (CEB) के बारे में

  • मुख्यालय: पेरिस, फ्रांस

  • स्थापना: 1956

  • सदस्य देश: 43 यूरोपीय देश

  • मुख्य उद्देश्य: सामाजिक समावेशन और विकास को बढ़ावा देना, विशेषकर शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और आवास जैसे क्षेत्रों में।

UPI की गति में वृद्धि: अब 10 सेकंड में होगा लेनदेन

भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लेनदेन अब और अधिक तेज़ हो जाएंगे, क्योंकि 16 जून 2025 से नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने निर्देश दिया है कि सभी भुगतान संबंधित प्रक्रियाएं 10–15 सेकंड के भीतर पूरी होनी चाहिए। यह कदम डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित, तेज़ और अधिक भरोसेमंद बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है, विशेषकर जब देश में UPI लेनदेन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं।

समाचार में क्यों?

NPCI ने हाल ही में सभी UPI भागीदारों को एक सर्कुलर जारी किया है जिसमें नई तकनीकी मानकों को लागू करने का निर्देश दिया गया है। यह बदलाव मई 2025 में हुए 1,868 करोड़ से अधिक UPI लेनदेन (₹25.14 लाख करोड़ मूल्य) के बाद किया गया है, जिससे प्रणाली पर भारी दबाव पड़ा।

मुख्य विशेषताएं

तेज़ लेनदेन प्रक्रिया

  • अब मनी ट्रांसफर, स्टेटस चेक और रिवर्सल 10–15 सेकंड के भीतर पूरे होने चाहिए (पहले 30 सेकंड लगते थे)।

  • UPI एड्रेस वैलिडेशन अब केवल 10 सेकंड में पूरा होगा (पहले 15 सेकंड लगते थे)।

उपभोक्ता विश्वास में सुधार

  • UPI ऐप्स पर अब केवल अंतिम लाभार्थी (beneficiary) का नाम दिखेगा, किसी मध्यवर्ती संस्थान का नहीं।

  • उपयोगकर्ता लाभार्थी का नाम अब एडिट नहीं कर सकेंगे, जिससे धोखाधड़ी को रोका जा सके।

खाता शेष जांच की सीमा

  • अब उपयोगकर्ता प्रति दिन अधिकतम 50 बार अपने खाते का बैलेंस UPI ऐप पर चेक कर सकेंगे।

  • पहले इस पर कोई सीमा नहीं थी — यह सीमा सिस्टम पर लोड को कम करने के लिए लगाई गई है।

अनुपालन की समयसीमा

  • सभी UPI संबंधित संस्थाओं को 30 जून 2025 तक इन मानकों को पूरी तरह लागू करना अनिवार्य है।

पृष्ठभूमि और महत्व

UPI क्या है?

UPI एक रियल-टाइम इंटरबैंक पेमेंट सिस्टम है जिसे NPCI द्वारा विकसित किया गया है। यह मोबाइल के माध्यम से तत्काल बैंक-से-बैंक धन हस्तांतरण की सुविधा देता है।

यह अपडेट क्यों आवश्यक था?

  • बढ़ते डिजिटल लेनदेन के कारण सिस्टम पर भार बढ़ गया था।

  • लेनदेन प्रतिक्रिया समय (response time) कम होने से समय समाप्त (timeout) समस्याएं घटेंगी, और उपयोगकर्ता का अनुभव बेहतर होगा।

इस बदलाव का महत्व

  • ग्राहक संतुष्टि में वृद्धि।

  • विफल लेनदेन के तेज़ समाधान की सुविधा।

  • डिजिटल इंडिया मिशन के तहत डिजिटल भुगतान को बढ़ावा।

आर्मंड डुप्लांटिस ने 12वीं बार पोल वॉल्ट का विश्व रिकॉर्ड तोड़ा

स्वीडन के पोल वॉल्ट स्टार आर्मंड डुप्लांटिस ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है, जब उन्होंने 15 जून 2025 को स्टॉकहोम में आयोजित डायमंड लीग मीट के दौरान 6.28 मीटर की जबरदस्त छलांग लगाकर अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया। यह कारनामा उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में कर दिखाया, और यह 12वीं बार है जब डुप्लांटिस ने पोल वॉल्ट में नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है।

समाचार में क्यों?

डायमंड लीग का स्टॉकहोम चरण ऐतिहासिक बन गया, जब आर्मंड डुप्लांटिस ने घरेलू मैदान पर पहली बार विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह रिकॉर्ड 1912 के ओलंपिक स्टेडियम में बना — एक ऐसी जगह जो खेलों के इतिहास में विशेष महत्व रखती है।

मुख्य विशेषताएं

नया रिकॉर्ड

  • 6.28 मीटर, पिछला रिकॉर्ड 6.27 मीटर (फरवरी 2025) था।

  • स्टॉकहोम ओलंपियास्टेडियन में पहले ही प्रयास में हासिल किया।

ऐतिहासिक महत्व

  • पहली बार डुप्लांटिस ने स्वीडन में विश्व रिकॉर्ड तोड़ा।

  • यह उनके लिए एक व्यक्तिगत सपना था जिसे उन्होंने साकार किया।

वातावरण और उत्सव

  • दर्शकों का उत्साह देखते ही बनता था — घरेलू समर्थन ने बड़ी भूमिका निभाई।

  • छलांग के बाद डुप्लांटिस ने अपने परिवार के साथ भावुक होकर जश्न मनाया।

व्यक्तिगत टिप्पणी

  • अनुभव को “जादुई” बताया और ओलंपिक जैसे क्षण की तरह महसूस किया।

  • शुरुआत में शारीरिक असहजता के बावजूद आत्मविश्वास और अनुभव पर भरोसा जताया।

अन्य प्रमुख प्रदर्शन – स्टॉकहोम डायमंड लीग 2025

  • हंटर बेल (ब्रिटेन) – महिला 800 मीटर में 1:57.66 के साथ विजेता।

  • डिना ऐशर-स्मिथ – महिला 100 मीटर में 10.93 सेकंड के साथ दूसरे स्थान पर;
    जूलियन अल्फ्रेड ने 10.75 सेकंड में पहला स्थान हासिल किया।

  • फेमके बोल (नीदरलैंड) – महिला 400 मीटर हर्डल्स में 52.11 सेकंड का शानदार समय।

कई खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ (PB) और मौसमी सर्वश्रेष्ठ (SB) प्रदर्शन किए।

आर्मंड डुप्लांटिस: पृष्ठभूमि

  • अमेरिका में जन्मे, लेकिन स्वीडन का प्रतिनिधित्व करते हैं।

  • दो बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता और बार-बार विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले धावक।

  • अब तक 12 बार विश्व रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं — जो एथलेटिक्स में बेहद दुर्लभ है।

इस रिकॉर्ड का महत्व

  • पोल वॉल्ट स्पर्धा में डुप्लांटिस की पूर्ण प्रभुत्व को फिर से स्थापित करता है।

  • फील्ड इवेंट्स की लोकप्रियता को बढ़ावा देता है।

  • युवा एथलीटों को लगातार उत्कृष्टता और दीर्घकालिक सफलता के लिए प्रेरित करता है।

SIPRI Report: भारत के पास परमाणु हथियारों का जखीरा

भारत ने 2024 में अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार किया है और वह नए परमाणु प्रक्षेपण प्रणालियों का विकास भी कर रहा है, यह जानकारी स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताज़ा रिपोर्ट SIPRI Yearbook 2025 में दी गई है। यह रिपोर्ट शस्त्रीकरण, निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर विश्वसनीय स्रोत मानी जाती है।

समाचार में क्यों?

SIPRI Yearbook 2025 के अनुसार, भारत उन देशों में शामिल है जो अपने परमाणु क्षमताओं का विस्तार कर रहे हैं। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है और विश्व एक बहुध्रुवीय परमाणु व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट परमाणु आधुनिकीकरण और निरस्त्रीकरण वार्ता की कमी को लेकर वैश्विक जोखिमों को रेखांकित करती है।

भारत की परमाणु विस्तार की मुख्य बातें

  • भारत ने 2024 में अपने परमाणु शस्त्रागार में थोड़ा विस्तार किया।

  • नई परमाणु प्रक्षेपण प्रणालियों (delivery systems) का विकास जारी है।

  • कनस्तरीकृत (canisterised) मिसाइलों का विकास कर रहा है जो मेटेड वॉरहेड्स ले जा सकती हैं।

  • भविष्य में ये मिसाइलें MIRVs (Multiple Independently Targetable Reentry Vehicles) को समर्थन दे सकती हैं।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य

  • सभी 9 परमाणु संपन्न राष्ट्र (अमेरिका, रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, यूके, फ्रांस, इज़रायल, उत्तर कोरिया) अपने शस्त्रागार का आधुनिकीकरण कर रहे हैं।

  • SIPRI ने चेताया है कि “नए और खतरनाक परमाणु हथियारों की दौड़” शुरू हो चुकी है।

चीन की तेज़ी से हो रही वृद्धि

  • चीन का परमाणु भंडार बढ़कर 600 वॉरहेड्स तक पहुंच गया, हर साल लगभग 100 वॉरहेड्स की वृद्धि।

  • देशभर में लगभग 350 नए ICBM साइलो बनाए गए।

  • 2030 तक चीन की ICBM संख्या अमेरिका या रूस के बराबर हो सकती है।

वैश्विक परमाणु भंडार (जनवरी 2025 तक अनुमानित)

  • कुल परमाणु वॉरहेड्स: 12,241

  • सैन्य भंडार में: 9,614

  • तैनात (deployed) वॉरहेड्स: 3,912 (मिसाइलों या विमानों पर)

  • हाई ऑपरेशनल अलर्ट पर: 2,100 वॉरहेड्स (मुख्यतः अमेरिका और रूस के पास)

  • चीन अब संभवतः शांतिकाल में भी मिसाइलों पर वॉरहेड्स रखता है।

स्थायी तथ्य और पृष्ठभूमि

  • SIPRI: स्टॉकहोम स्थित संस्थान, जो शस्त्र नियंत्रण, संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर कार्य करता है।

  • भारत की परमाणु नीति: “विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध” और नो फर्स्ट यूज़ (NFU) सिद्धांत पर आधारित।

  • चीन की रणनीतिक दिशा: लॉन्च-ऑन-वार्निंग (सावधानी संकेत पर लॉन्च) नीति की ओर बढ़ रहा है।

  • रूस और अमेरिका: वैश्विक परमाणु वॉरहेड्स का 90% हिस्सा रखते हैं।

  • ICBM: इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल — लंबी दूरी तक परमाणु हमला करने में सक्षम।

भारत ने अब तक का सबसे बड़ा जनजातीय सशक्तिकरण अभियान शुरू किया

समावेशी शासन और अंतिम छोर तक सेवा पहुंचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, जनजातीय मामलों के मंत्रालय (MoTA) ने धरती आबा जनभागीदारी अभियान शुरू किया है, जो भारत में अब तक का सबसे बड़ा आदिवासी सशक्तिकरण अभियान है। इस पहल का उद्देश्य 549 आदिवासी जिलों, 2,900 से अधिक ब्लॉकों और 207 विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (PVTG) बहुल जिलों में सरकारी लाभों को पहुंचाना है, जिसमें लगभग 1 लाख गाँव और बस्तियाँ शामिल हैं। केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री श्री जुएल ओराम ने इसे अंत्योदय और विकसित भारत के सपने को साकार करने में एक प्रमुख मील का पत्थर बताया।

क्यों है यह समाचारों में?

15 जून 2025 को जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) द्वारा शुरू किया गया “धरतीआबा जनभागीदारी अभियान” भारत का अब तक का सबसे बड़ा जनजातीय सशक्तिकरण अभियान है।
इसका उद्देश्य है — 549 जनजातीय जिलों, 2,900+ ब्लॉकों, और 207 अति संवेदनशील जनजातीय समूह (PVTG) केंद्रित जिलों के लगभग 1 लाख गांवों और बस्तियों में सरकारी योजनाओं का पूर्ण लाभ पहुँचाना।

यह अभियान 30 जून 2025 तक चलेगा और प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाभियान (PM-JANMAN) तथा धरतीआबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA) के क्रियान्वयन को समर्थन देगा।

प्रमुख उद्देश्य

  • जनजातीय क्षेत्रों में योजनाओं की संतृप्ति (सभी लाभार्थियों तक लाभ पहुँचाना)

  • जनजातीय परिवारों को घर-घर जाकर सेवाएं प्रदान करना

  • शासन में जनभागीदारी (People’s Participation) को बढ़ावा देना

  • जनजातीय गौरव वर्ष के अंतर्गत आदिवासी विरासत को सम्मान देना

  • विकसित भारत और अंत्योदय के दृष्टिकोण को साकार करना

प्रभाव क्षेत्र और आकार

  • 549 जनजातीय जिले

  • 207 PVTG केंद्रित जिले

  • 2,900+ ब्लॉक

  • लगभग 1 लाख गांव/बस्तियाँ

  • जिला कलेक्टर, पंचायत प्रतिनिधि, सामुदायिक नेता और विभिन्न मंत्रालयों की भागीदारी

गांवों में शिविरों के माध्यम से प्रदान की जाने वाली प्रमुख सेवाएं

  • आधार कार्ड बनवाना और अपडेट कराना

  • आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कार्ड जारी करना

  • जन धन योजना के तहत बैंक खाता खोलना

  • पीएम-किसान योजना में पंजीकरण

  • वृद्धावस्था और विधवा पेंशन योजनाएं

  • जनजातीय छात्रों के लिए छात्रवृत्तियां

  • जीवन और दुर्घटना बीमा योजनाएं

  • कौशल प्रशिक्षण और आजीविका कार्यक्रम

क्रियान्वयन रणनीति

  • गांव स्तर पर कैंप आधारित मॉडल

  • जिला कलेक्टर/उपायुक्तों द्वारा पूर्व-अभियान तैयारी

  • पंचायती राज संस्थानों की भागीदारी से जागरूकता अभियान

  • स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय

संबद्ध प्रमुख कार्यक्रम

  1. प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाभियान (PM-JANMAN)

  2. धरतीआबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA)

अभियान का महत्व

  • यह अभियान भारत के जनजातीय समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें सशक्त बनाने की ऐतिहासिक पहल है।

  • यह आदिवासी संस्कृति का सम्मान करते हुए, नीति, सेवा और जन सहभागिता को एक मंच पर लाता है।

  • इसका उद्देश्य है कि कोई भी जनजातीय परिवार पीछे न छूटे।

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