NeGD ने IIT Delhi में सरकारी अधिकारियों के लिए शासन में AI प्रशिक्षण का शुभारंभ किया

भारत में डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (NeGD) ने गवर्नेंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर 2-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। आईआईटी दिल्ली के प्रबंधन अध्ययन विभाग (डीएमएस) में आयोजित इस पहल का उद्देश्य केंद्रीय और राज्य विभागों के सरकारी अधिकारियों को आवश्यक एआई ज्ञान और शासन, सार्वजनिक सेवा वितरण और नीति कार्यान्वयन में इसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों से लैस करना है।

समाचार में क्यों?

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (NeGD) ने “शासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI in Governance)” पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। यह प्रशिक्षण 26 जून 2025 को IIT दिल्ली के प्रबंधन अध्ययन विभाग (DMS) में प्रारंभ हुआ और इसका उद्देश्य केंद्र व राज्य सरकारों के अधिकारियों को AI की व्यावहारिक समझ और गवर्नेंस में इसके अनुप्रयोग के लिए प्रशिक्षित करना है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम की मुख्य बातें

  • अवधि: 2 दिन (26–27 जून 2025)

  • स्थान: प्रबंधन अध्ययन विभाग, IIT दिल्ली

  • प्रतिभागी: 59 सरकारी अधिकारी (केंद्र व राज्य मंत्रालयों/विभागों से)

  • आयोजक: राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (NeGD), MeitY

  • शैक्षणिक भागीदार: IIT दिल्ली

उद्देश्य

  • सरकारी सेवाओं में उत्तरदायी और नैतिक AI को अपनाने की क्षमता निर्माण।

  • अधिकारियों को AI नीतियों, कानूनी व नैतिक मुद्दों, डिजिटल परिवर्तन की समझ देना।

  • बेहतर निर्णय-निर्माण, सेवा वितरण और नागरिक सहभागिता हेतु AI का प्रयोग सिखाना।

प्रशिक्षण की विशेषताएँ

  • विशेषज्ञों द्वारा इंटरैक्टिव सत्र

  • वास्तविक सरकारी परिदृश्य में AI उपयोग को समझाने हेतु समूह अभ्यास

  • प्रशासन में सफल AI परियोजनाओं पर अध्ययन

पृष्ठभूमि और महत्त्व

  • यह कार्यक्रम डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के ‘कैपेसिटी बिल्डिंग योजना चरण-III (CB Phase III)’ के अंतर्गत आयोजित किया गया है।

  • इसका उद्देश्य सरकारी अधिकारियों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना और उन्हें AI-सक्षम गवर्नेंस सुधारों का नेतृत्व करने के लिए तैयार करना है।

रणनीतिक महत्त्व

  • भारतीय नौकरशाही को तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करता है।

  • नीतिगत समझ और व्यावहारिक AI कार्यान्वयन के बीच की दूरी को कम करता है।

  • डिजिटल-प्रथम (Digital First) गवर्नेंस के राष्ट्रीय लक्ष्यों को साकार करने में सहायक है।

प्रोजेक्ट एलिफेंट: जनगणना का पहला चरण पूरा हुआ

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में देहरादून में अपनी 21वीं संचालन समिति की बैठक के दौरान प्रोजेक्ट एलीफेंट की व्यापक समीक्षा की। समीक्षा में पूर्वोत्तर राज्यों में समन्वित हाथी जनसंख्या आकलन के चरण-1 के पूरा होने, हाथी-ट्रेन टकराव के लिए उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने के लिए 3,400 किलोमीटर से अधिक रेलवे लाइनों का सर्वेक्षण और प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम में सुस्त भालू और घड़ियाल को शामिल करने सहित महत्वपूर्ण विकास का खुलासा किया गया। ये प्रयास भारत भर में बेहतर वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष के शमन की दिशा में एक व्यापक प्रयास का संकेत देते हैं।

समाचार में क्यों?

पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में परियोजना हाथी (Project Elephant) की 21वीं संचालन समिति बैठक देहरादून में आयोजित हुई। बैठक में पूर्वोत्तर भारत में हाथियों की जनसंख्या आकलन (Phase-I) के पूर्ण होने, रेलवे लाइनों के सर्वेक्षण, और स्लॉथ बीयर (भालू) व घड़ियाल को प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम (Species Recovery Programme) में शामिल किए जाने जैसे कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

परियोजना हाथी की समीक्षा

  • अध्यक्षता: केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव

  • स्थान: देहरादून

  • उद्देश्य: हाथियों के संरक्षण हेतु चल रही केंद्रीय प्रायोजित योजना की प्रगति की समीक्षा

हाथी जनसंख्या आकलन 

  • पूर्वोत्तर भारत में जनसंख्या आकलन का पहला चरण (Phase-I) पूर्ण

  • 16,500 से अधिक मल नमूने (dung samples) एकत्र किए गए – डीएनए आधारित गणना के लिए

  • 2017 की अंतिम जनगणना: भारत में कुल 29,964 हाथी

  • 2022–23 की रिपोर्ट (जारी नहीं हुई): 20% गिरावट का संकेत

हाथी-रेल दुर्घटना न्यूनीकरण 

  • 3,452.4 किमी रेल मार्ग की पहचान संवेदनशील क्षेत्र के रूप में

  • 77 उच्च जोखिम क्षेत्र चिन्हित – हाथियों की रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए

  • 2019–2024 के बीच 73 हाथी रेल दुर्घटनाओं में मारे गए

पालित हाथियों की आनुवंशिक प्रोफाइलिंग 

  • 1,911 डीएनए प्रोफाइल तैयार किए गए – 22 राज्यों से

  • उद्देश्य: दीर्घकालिक निगरानी और संरक्षण रणनीति को मजबूत करना

मानव-हाथी संघर्ष न्यूनीकरण 

  • दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के लिए क्षेत्रीय कार्य योजना पर चर्चा

  • भारतीय रेलवे, NHAI, ऊर्जा मंत्रालय और खनन विभागों के साथ समन्वय पर ज़ोर

प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम 

  • भालू (Sloth Bear) और घड़ियाल (Gharial) को कार्यक्रम में शामिल किया गया

  • उद्देश्य: घटती जनसंख्या और संकटग्रस्त आवासों का संरक्षण

सोनोवाल ने समुद्री वित्तपोषण को बढ़ावा देने के लिए सागरमाला वित्त निगम का उद्घाटन किया

भारत के समुद्री क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने समुद्री विकास के लिए समर्पित देश की पहली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) – सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (SMFCL) का उद्घाटन किया। यह लॉन्च इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण वित्तीय अंतराल को पाटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और भारत के समुद्री अमृत काल विजन 2047 के साथ संरेखित है, जिसका लक्ष्य भारत को वैश्विक समुद्री महाशक्ति में बदलना है।

समाचार में क्यों?

केन्द्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भारत का पहला समुद्री क्षेत्र पर केंद्रित गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC)सागरमाला फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SMFCL) — का उद्घाटन किया। यह पहल “मैरिटाइम अमृत काल विज़न 2047” और “विकसित भारत” की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक समुद्री शक्ति बनाना है।

सागरमाला फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SMFCL): मुख्य विशेषताएँ

  • भारत की पहली और विशेष NBFC जो समुद्री क्षेत्र के लिए वित्तीय सेवाएँ प्रदान करेगी।

  • बंदरगाहों, समुद्री MSMEs, स्टार्टअप्स और संस्थाओं को वित्त पोषण उपलब्ध कराएगी।

  • समुद्री अवसंरचना (infrastructure) में पूंजी की कमी को पूरा करने में मदद करेगी।

  • भारत को वैश्विक समुद्री हब बनाने की राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा।

SAGAR SETU प्लेटफ़ॉर्म का शुभारंभ

  • डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म जो बंदरगाह संचालन में प्रचालन कुशलता (operational efficiency) बढ़ाएगा।

  • व्यापार करने में सरलता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देगा।

मानकीकृत दरमान (SoR)

  • सभी प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरणों में एक समान शुल्क ढाँचा

  • पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और न्यायसंगत मूल्य निर्धारण को बढ़ावा देगा।

“गेटवे टू ग्रीन” रिपोर्ट

  • भारतीय बंदरगाहों में ग्रीन हाइड्रोजन को अपनाने की योजना और रोडमैप पेश किया गया।

  • भारत को ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाने के लक्ष्य में सहायक।

CDAC के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) – डिजिटल परिवर्तन की दिशा में

  • इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत CDAC के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर।

  • समुद्री क्षेत्र में डिजिटल नवाचार और परिवर्तन के लिए डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना होगी।

निष्कर्ष

सागरमाला फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SMFCL) और उससे जुड़ी डिजिटल व हरित पहलें भारत को समुद्री विकास, नवाचार और सतत ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने की दिशा में निर्णायक कदम हैं। यह भारत के समुद्री अमृत काल विज़न 2047 को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा।

केरल साहित्य अकादमी ने 2024 के साहित्य पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की

केरल साहित्य अकादमी, राज्य की प्रमुख साहित्यिक संस्था, ने 2024 के अपने साहित्यिक पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा की है, जो मलयालम साहित्य में उभरती प्रतिभाओं और अनुभवी लेखकों दोनों को सम्मानित करते हैं। ये पुरस्कार उपन्यास और कविता से लेकर नाटक, जीवनी और अनुवाद तक की विधाओं में उत्कृष्टता का सम्मान करते हैं, जो केरल में साहित्यिक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए अकादमी की प्रतिबद्धता को मजबूत करते हैं।

चर्चा में क्यों?

2024 केरल साहित्य अकादमी पुरस्कारों की आधिकारिक घोषणा 26 जून, 2025 को त्रिशूर में की गई, जिसमें मलयालम साहित्य के विभिन्न योगदानों को मान्यता दी गई। इन पुरस्कारों का सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक है और इन्हें मलयालम लेखकों के लिए सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक माना जाता है।

प्रमुख साहित्यिक पुरस्कार:

  • सर्वश्रेष्ठ उपन्यास:
    जी. आर. इंदुगोपन“आणो”

  • कविता:
    अनिता थंपी“मुरिंगा वाझा करिवेप्पु”

  • लघु कहानी:
    वी. शिनिलाल“गारीसप्पा अरुवि अथवा ओरु जलयात्रा”

  • निबंध (सिबी कुमार स्मृति पुरस्कार):
    एम. स्वराज“पूक्कलुडे पुस्तकम्”

फेलोशिप एवं आजीवन योगदान सम्मान:

  • अकादमी फेलोशिप:
    के. वी. रामकृष्णन

  • आजीवन साहित्यिक योगदान सम्मान:
    एळच्चेरी रामचंद्रन

अतिरिक्त छह लेखक जिन्हें आजीवन योगदान पुरस्कार मिला:

  1. पी. के. एन. पणिक्कर

  2. पय्यनूर कुन्हिरामन

  3. एम. एम. नारायणन

  4. टी. के. गंगाधरन

  5. के. ई. एन.

  6. मल्लिका यूनुस

अन्य श्रेणियों में विजेता लेखक और कृतियाँ:

  • नाटक:
    सशीधरन नाडुविल

  • साहित्य समालोचना:
    जी. दिलीप

  • वैज्ञानिक साहित्य:
    दीपक वी.

  • जीवनी / आत्मकथा:
    डॉ. के. राजशेखरन नायर

  • यात्रा-वृत्तांत:
    के. आर. अजयन्

  • अनुवाद:
    चिंथु प्रकाश

  • बाल साहित्य:
    ई. एन. शीजा

  • हास्य लेखन:
    निरंजन

पुरस्कार विवरण:

  • नियमित श्रेणियों के पुरस्कार:
    ₹25,000 की नकद राशि, शील्ड (plaque), और प्रमाणपत्र

  • फेलोशिप और प्रमुख आजीवन योगदान पुरस्कार:
    ₹50,000 नकद, दो तोला स्वर्ण पदक, शॉल, प्रशस्ति पत्र और शील्ड

  • अन्य आजीवन योगदान पुरस्कार:
    ₹30,000 नकद, शील्ड, शॉल और प्रमाणपत्र

विशेष सूचना:

इस वर्ष विलासिनी पुरस्कार (Vilasini Award) के लिए किसी भी लेखक का चयन नहीं किया गया।

पैन कार्ड 2.0: आसान भाषा में जानिए इससे जुड़ी सभी ज़रूरी बातें

पैन कार्ड क्या है?

पैन (PAN) यानी स्थायी खाता संख्या, भारत सरकार के आयकर विभाग द्वारा जारी की जाती है। यह एक 10 अंकों की अल्फ़ान्यूमेरिक संख्या होती है जो आपकी वित्तीय गतिविधियों जैसे कि टैक्स भुगतान, बैंक खाता खोलना, आदि को ट्रैक करने के लिए इस्तेमाल होती है। यह एक पहचान पत्र (Identity Proof) के रूप में भी मान्य है।

पैन कार्ड 2.0 क्या है?

पैन कार्ड 2.0 मौजूदा पैन कार्ड का नया और उन्नत संस्करण है। इसका उद्देश्य इसे और अधिक डिजिटल, सुरक्षित और यूज़र-फ्रेंडली बनाना है। इसके ज़रिए सेवाएं तेज़ और सुरक्षित होंगी, और सारी प्रक्रिया तकनीक के माध्यम से ऑनलाइन की जा सकेगी।

पैन कार्ड 2.0 में क्या नया है?

  • बेहतर QR कोड: जिससे तुरंत जांचा जा सकेगा कि पैन असली है या नकली।

  • पैन डेटा वॉल्ट: आपकी पैन जानकारी को सुरक्षित और निजी रखने के लिए।

  • ऑनलाइन वेरिफिकेशन: बैंक और सरकारी विभाग पैन की जांच तुरंत ऑनलाइन कर सकेंगे।

  • एकीकृत पोर्टल: पैन से जुड़ा सारा काम एक ही पोर्टल से किया जा सकेगा।

  • पेपरलेस प्रक्रिया: कोई प्रिंट या पोस्ट की ज़रूरत नहीं — सब कुछ डिजिटल।

  • तेज़ सेवा: पैन कार्ड पहले से ज्यादा तेज़ी से जारी होगा।

  • विशेष हेल्पडेस्क: सवालों और समस्याओं के लिए कॉल सेंटर और सहायता टीम।

क्या पैन 2.0 लेना ज़रूरी है?

नहीं, यह अनिवार्य नहीं है। अगर आपके पास पहले से पैन कार्ड है, तो वह पूरी तरह वैध है और चलता रहेगा।
लेकिन अगर आप नया पैन बनवा रहे हैं या पैन में कोई अपडेट कर रहे हैं, तो आप मुफ्त में पैन कार्ड 2.0 पा सकते हैं।

पैन कार्ड 2.0 के लिए ज़रूरी दस्तावेज़:

  1. पहचान प्रमाण (PoI):

    • आधार कार्ड

    • पासपोर्ट

    • ड्राइविंग लाइसेंस

    • वोटर आईडी

  2. पता प्रमाण (PoA):

    • बैंक स्टेटमेंट (पिछले 3 महीने)

    • किराए का समझौता

    • बिजली/पानी/गैस का बिल (पिछले 3 महीने)

    • आधार कार्ड (यदि वर्तमान पता है)

  3. जन्मतिथि प्रमाण (DoB):

    • जन्म प्रमाण पत्र

    • स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र

    • पासपोर्ट

ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

स्टेप 1:
NSDL की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ

स्टेप 2:
अपना पैन नंबर, जन्मतिथि और आधार नंबर दर्ज करें

स्टेप 3:
अपनी जानकारी जांचें और सहमति बॉक्स पर टिक करें

स्टेप 4:
OTP (वन टाइम पासवर्ड) के लिए मोबाइल या ईमेल चुनें, और OTP दर्ज करें

स्टेप 5:
शर्तें स्वीकार करें और भुगतान विकल्प चुनें

अगर आपने 30 दिनों के अंदर पैन के लिए आवेदन किया है तो यह मुफ़्त है (3 बार तक)।
30 दिन के बाद ₹8.26 (GST सहित) का छोटा शुल्क लगता है।

पैन कार्ड 2.0 के फायदे:

  • सब कुछ ऑनलाइन और पेपरलेस

  • पैन कार्ड जल्दी और तेज़ी से जारी

  • बेहतर सुरक्षा, फर्जीवाड़े से बचाव

  • मुफ्त अपग्रेड (कुछ मामलों में)

  • समर्पित सहायता सेवा

तेलंगाना का लोक महोत्सव बोनालु भक्ति और उत्सव के साथ शुरू हुआ

हैदराबाद के गोलकोंडा किले में जीवंत और ऐतिहासिक बोनालू उत्सव की शानदार शुरुआत हुई, जो तेलंगाना की लोक परंपराओं से ओतप्रोत एक महीने तक चलने वाले उत्सव की शुरुआत थी। श्री जगदम्बा महाकाली मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी, जहाँ पहले बोनम सहित अनुष्ठान और प्रसाद पारंपरिक उत्साह के साथ किए गए। चमकीले परिधानों में सजी महिलाएँ, पोथाराजस द्वारा लयबद्ध नृत्य और अग्नि प्रदर्शन ने इस वार्षिक उत्सव की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भव्यता को उजागर किया।

समाचार में क्यों?

बोनालू महोत्सव 2025 की शुरुआत 26 जून को हैदराबाद स्थित गोलकोंडा किले के श्री जगदम्बा महाकाली मंदिर में पारंपरिक उत्साह और धार्मिक श्रद्धा के साथ हुई। इस अवसर पर हजारों भक्तों ने भाग लिया। राज्य सरकार द्वारा ₹20 करोड़ की अनुदान राशि और प्रमुख नेताओं की उपस्थिति ने इस उत्सव के महत्व को और बढ़ा दिया।

बोनालू त्योहार के बारे में:

  • उत्पत्ति: यह एक पारंपरिक हिंदू त्योहार है जो मुख्य रूप से तेलंगाना, विशेष रूप से हैदराबाद और सिकंदराबाद में मनाया जाता है।

  • उद्देश्य: श्रद्धालु माँ महाकाली को ‘बोनम’ (चावल, गुड़, दही और नीम पत्तों का मिश्रण) अर्पित करते हैं, जिससे वह बीमारियों और आपदाओं से रक्षा करें।

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: यह त्योहार 19वीं सदी में फैली महामारी के दौरान मां काली से मिले संरक्षण के प्रति आभार प्रकट करने के लिए आरंभ हुआ था।

2025 बोनालू उत्सव की प्रमुख झलकियाँ:

  • प्रारंभ स्थल: श्री जगदम्बा महाकाली मंदिर, गोलकोंडा किला

  • मुख्य अर्पण: पहला बोनम भव्य शोभायात्रा के साथ लंगरहौज़ क्रॉसरोड से लाया गया

  • विशेष प्रस्तुतियाँ: अग्नि-प्रदर्शन कलाकारों और पारंपरिक पोथराजू नृत्य ने धार्मिक रंग में सांस्कृतिक जीवंतता जोड़ी

  • महिलाओं की भागीदारी: पारंपरिक वेशभूषा में हजारों महिलाओं ने पूजा और अर्पण में हिस्सा लिया

सरकार की भागीदारी:

  • पट्टू वस्त्र (रेशमी पोशाक) अर्पण: राज्य की ओर से मंत्री कोंडा सुरेखा ने देवी को पट्टू वस्त्र अर्पित किए

  • मंदिर अनुदान: हैदराबाद स्थित 2,783 महाकाली मंदिरों को ₹20 करोड़ की अनुदान राशि प्रदान की गई

प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति:

  • विधानसभा अध्यक्ष गड्डम प्रसाद कुमार

  • परिवहन मंत्री पोनम प्रभाकर

  • हैदराबाद महापौर गडवाल विजयलक्ष्मी

  • सांसद ईटला राजेंद्र

  • विधान परिषद सदस्य के. कविता और विजयशांति

आगामी बोनालू उत्सव चरण:

  • सिकंदराबाद बोनालू: 13–14 जुलाई, उज्जैनी महाकाली मंदिर

  • लाल दरवाजा व पुराना शहर बोनालू: 20–21 जुलाई

  • सुरक्षा प्रबंध: शहर प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा और यातायात नियंत्रण व्यवस्था की गई है

निष्कर्ष:

बोनालू महोत्सव न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह तेलंगाना की सांस्कृतिक पहचान और लोक परंपरा का प्रतीक भी है। गोलकोंडा से प्रारंभ होकर यह उत्सव राज्य भर में भक्ति, नृत्य और उत्साह के साथ मनाया जाएगा, जो देवी महाकाली के प्रति आस्था और आभार का भव्य प्रदर्शन है।

गुजरात ने 2029 WPFG की मेजबानी का अधिकार हासिल किया

भारत ने आधिकारिक तौर पर 2029 विश्व पुलिस और अग्निशमन खेलों (WPFG) की मेजबानी के लिए बोली जीत ली है, यह आयोजन गुजरात के अहमदाबाद, गांधीनगर और एकता नगर में आयोजित किया जाएगा। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा पुष्टि की गई यह घोषणा भारत के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक खेल जीत का प्रतीक है और एक अंतरराष्ट्रीय खेल स्थल के रूप में गुजरात की बढ़ती प्रमुखता को रेखांकित करती है।

समाचार में क्यों?

भारत ने 2029 वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स (WPFG) की मेज़बानी के लिए आधिकारिक रूप से बोली जीत ली है। यह आयोजन गुजरात के तीन शहरों—अहमदाबाद, गांधीनगर और एकता नगर—में आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक घोषणा की पुष्टि गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने की, और इसे भारत की खेल कूटनीति और वैश्विक आयोजन क्षमता की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स (WPFG) के बारे में:

  • स्थापना: 1985

  • पहली बार आयोजित: सैन जोस, कैलिफ़ोर्निया, अमेरिका

  • आयोजन की प्रकृति: द्विवार्षिक (हर दो वर्ष में एक बार)

  • प्रतिभागी: पुलिस, अग्निशमनकर्मी, सीमा शुल्क एवं सुधार सेवाओं से जुड़े अधिकारी

  • भाग लेने वाले देश: 70+

  • कुल खिलाड़ी: 10,000 से अधिक

  • खेलों की संख्या: 60+ (एथलेटिक्स, तैराकी, मार्शल आर्ट्स, साइक्लिंग, सामरिक चुनौतियाँ आदि)

भारत की बोली और आयोजन योजना:

  • मेज़बान राज्य: गुजरात

  • आयोजन स्थल: अहमदाबाद, गांधीनगर, एकता नगर

  • आयोजक: गुजरात सरकार, भारत सरकार के गृह मंत्रालय के सहयोग से

  • बोली प्रस्तुति का स्थान: बर्मिंघम, अमेरिका

भारत की बोली की विशेषताएं:

  • आधुनिक खेल अवसंरचना

  • उन्नत कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स

  • वैश्विक स्तर के आयोजनों का सफल अनुभव

  • सुरक्षा और आतिथ्य को प्राथमिकता

WPFG 2029 की मेज़बानी का महत्व:

  • अंतरराष्ट्रीय पहचान: भारत की वैश्विक खेल आयोजक के रूप में साख में वृद्धि

  • राज्य विकास: गुजरात को खेल पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम

  • आर्थिक लाभ: अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का आगमन, पर्यटन राजस्व, और वैश्विक निवेश

  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान: वैश्विक सुरक्षा सेवाओं के बीच सद्भाव और सहयोग को बढ़ावा

वक्तव्य और प्रतिक्रियाएं:

  • मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इसे “गुजरात के लिए गर्व का क्षण” बताया।

  • उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दूरदर्शी नेतृत्व को दिया।

  • साथ ही कहा कि यह कदम अहमदाबाद को भारत की खेल राजधानी बनाने की दिशा में एक मजबूत प्रयास है।

एमपी में शिक्षकों की ऑनलाइन अटेंडेंस 1 जुलाई से होगा अनिवार्य

स्कूल प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक बड़े कदम के तहत मध्य प्रदेश सरकार ने 1 जुलाई 2025 से सरकारी स्कूलों के सभी शिक्षकों के लिए डिजिटल रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया है। यह ‘हमारे शिक्षक’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाएगा, जो राज्य के शिक्षा 3.0 पोर्टल के साथ एकीकृत एक ई-गवर्नेंस टूल है।

समाचार में क्यों?

मध्य प्रदेश सरकार ने स्कूल प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से 1 जुलाई 2025 से सभी सरकारी स्कूल शिक्षकों के लिए डिजिटल उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। यह प्रक्रिया ‘हमारे शिक्षक’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जाएगी, जिसे राज्य के Education 3.0 पोर्टल से जोड़ा गया है।

प्रमुख बिंदु:

  • प्लेटफॉर्म का नाम: हमारे शिक्षक
  • लॉन्च तिथि: 23 जून 2025
  • अनिवार्यता की शुरुआत: 1 जुलाई 2025 से
  • लाभार्थी: मध्य प्रदेश के सभी सरकारी स्कूल शिक्षक व शिक्षा विभाग के कर्मचारी
  • सिस्टम लिंक: Education 3.0 पोर्टल से एकीकृत ई-गवर्नेंस टूल

उपस्थिति नियम:

प्रवेश की समयसीमा:

  • स्कूल शुरू होने के 1 घंटे के भीतर उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य।

  • स्कूल समाप्त होने के 30 मिनट के अंदर भी उपस्थिति दर्ज की जा सकती है।

ग़ैरहाज़िरी/छुट्टी नीति:

  • यदि कोई शिक्षक समय पर उपस्थिति दर्ज नहीं करता, तो आधा दिन का आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) स्वचालित रूप से काटा जाएगा।

  • यह अवकाश वार्षिक या वैकल्पिक छुट्टियों से समायोजित होगा।

उद्देश्य और महत्व:

  • शिक्षकों की उपस्थिति का रीयल-टाइम निगरानी
  • शिक्षा स्टाफ की डिजिटल सेवा पुस्तिका बनाए रखना
  • स्थानांतरण, पदोन्नति और अवकाश जैसे प्रशासनिक निर्णयों को सुव्यवस्थित करना
  • पारदर्शिता बढ़ाना, मैनुअल त्रुटियों को घटाना और रिकॉर्ड को डिजिटाइज़ करना

पृष्ठभूमि:

  • यह पहल Education 3.0 के तहत स्कूल शिक्षा में डिजिटल सुधार का हिस्सा है।

  • मध्य प्रदेश उन राज्यों में शामिल है जो शिक्षा व्यवस्था में Ed-Tech आधारित निगरानी और पारदर्शिता लाने के लिए सक्रिय कदम उठा रहे हैं।

निष्कर्ष:
‘हमारे शिक्षक’ प्लेटफॉर्म के जरिए शिक्षकों की डिजिटल उपस्थिति प्रणाली को लागू करना मध्य प्रदेश सरकार की शिक्षा में तकनीकी नवाचार और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी, बल्कि प्रशासनिक सुधारों को भी गति मिलेगी।

UGRO Capital ने अनुज पांडे को सीईओ नियुक्त किया

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) यूजीआरओ कैपिटल ने अनुज पांडे को अपना नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया है। संस्थापक टीम के सदस्य और कंपनी के वर्तमान मुख्य जोखिम अधिकारी (सीआरओ), पांडे की पदोन्नति यूजीआरओ के मुख्य संचालन और क्रेडिट गवर्नेंस को मजबूत करने के उद्देश्य से एक रणनीतिक बदलाव को दर्शाती है।

समाचार में क्यों?

नॉन-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) UGRO कैपिटल ने 24 जून 2025 को अनुज पांडे को अपना नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया। अनुज पांडे वर्तमान में कंपनी के मुख्य जोखिम अधिकारी (CRO) हैं और संस्थापक टीम का हिस्सा रहे हैं। यह नियुक्ति UGRO की परिचालन दक्षता और जोखिम प्रबंधन को सुदृढ़ करने की रणनीति का हिस्सा है।

नियुक्ति से जुड़ी मुख्य बातें:

  • नया CEO: अनुज पांडे

  • वर्तमान पद: मुख्य जोखिम अधिकारी (CRO)

  • रिपोर्टिंग: शाचिंद्र नाथ (संस्थापक व प्रबंध निदेशक)

  • घोषणा की तारीख: 24 जून 2025

  • मुख्यालय: मुंबई

अनुज पांडे के बारे में:

  • संस्थापक सदस्य: UGRO कैपिटल की जोखिम नीति और क्रेडिट आर्किटेक्चर तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • अनुभव: वित्तीय और रणनीतिक भूमिकाओं में लगभग 25 वर्षों का अनुभव।

  • पूर्व नियोक्ता:

    • GSK कंज़्यूमर

    • ABN AMRO बैंक

    • बार्कलेज बैंक

    • रेलीगेयर

UGRO कैपिटल के बारे में:

  • प्रकार: गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC)

  • मुख्य फोकस:

    • MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) वित्तपोषण

    • डेटा-आधारित क्रेडिट निर्णय

    • डिजिटल लेंडिंग

  • संस्थापक और प्रबंध निदेशक: शाचिंद्र नाथ

रणनीतिक उद्देश्य:

  • MSME क्षेत्र में पहुंच का विस्तार

  • मज़बूत गवर्नेंस और जोखिम नियंत्रण बनाए रखना

  • निवेशकों के साथ संबंध गहराना

नियुक्ति का महत्व:

  • आंतरिक नेतृत्व उत्तराधिकार को मज़बूती प्रदान करता है।

  • जैसे-जैसे कंपनी विस्तार कर रही है, क्रेडिट गुणवत्ता और जोखिम न्यूनीकरण सुनिश्चित करना प्रमुख लक्ष्य है।

  • अनुज पांडे की नियुक्ति से परिचालन स्थायित्व को बढ़ावा मिलेगा, जबकि संस्थापक शाचिंद्र नाथ दीर्घकालिक रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

ईरान ने अमेरिकी-इजरायली हमलों के जवाब में IAEA के साथ सहयोग निलंबित करने का फैसला किया

इजरायल के साथ 12 दिनों तक चले संघर्ष के बाद ईरान की संसद (मजलिस) ने अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ सहयोग को निलंबित करने का प्रस्ताव पारित किया है। यह कदम अमेरिका द्वारा ईरान के तीन परमाणु स्थलों पर हवाई हमलों के बाद उठाया गया है – जबकि ईरान IAEA और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) दोनों का सदस्य है। इसके समानांतर, भारत में ईरान के दूतावास ने हाल की शत्रुता के दौरान भारत के लोगों की एकजुटता के लिए उनके प्रति गहरा आभार व्यक्त किया, जो कूटनीतिक आख्यानों और परमाणु निगरानी गतिशीलता में बदलाव को दर्शाता है।

समाचार में क्यों?

ईरान की संसद मजलिस ने 25 जून 2025 को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ सहयोग निलंबित करने का एक प्रस्ताव पारित किया। यह निर्णय अमेरिका द्वारा 22 जून को फोर्दो, इस्फ़हान और नतांज़ स्थित ईरानी परमाणु ठिकानों पर हवाई हमलों के बाद आया। इसके साथ ही भारत स्थित ईरानी दूतावास ने भारत के लोगों का समर्थन देने के लिए आभार व्यक्त किया।

निर्णय का विवरण:

  • ईरानी संसद ने IAEA के साथ सभी प्रकार के सहयोग को आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया।

  • यह प्रस्ताव सेपाह न्यूज़ (IRGC की आधिकारिक मीडिया शाखा) द्वारा भी पुष्टि किया गया।

  • ईरानी सांसदों ने IAEA पर जासूसी नेटवर्कों से प्रभावित होने का आरोप लगाया और उसकी निष्पक्षता पर प्रश्न उठाए।

ईरान की शिकायतें:

  • ईरान ने कहा कि वह गैर-परमाणु हथियार संपन्न देश है और IAEA तथा परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य होने के बावजूद उस पर हमला किया गया।

  • अमेरिका के हमलों को ईरान ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया।

  • भारत में ईरानी राजदूत इराज इलाही ने इन हमलों की निंदा करते हुए उन्हें “शांति प्रयासों पर आघात” कहा।

भारत से मिला समर्थन:

  • भारत स्थित ईरानी दूतावास ने भारतीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक नेताओं और राजनेताओं को धन्यवाद दिया।

  • भारत में हुई जनसभाएं, मीडिया वक्तव्य और शांति की अपीलों को ईरान ने नैतिक समर्थन का प्रतीक माना।

प्रभाव और महत्व:

  • यह निर्णय पश्चिमी-नेतृत्व वाले वैश्विक संस्थानों के प्रति ईरान के बढ़ते अविश्वास को दर्शाता है।

  • परमाणु अप्रसार प्रयासों और ईरान के परमाणु कार्यक्रम की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं।

  • 28 जून को मारे गए ईरानी जनरलों और परमाणु वैज्ञानिकों के लिए आयोजित राजकीय अंतिम संस्कार इस संघर्ष की गहराई को रेखांकित करता है।

निष्कर्ष:
ईरान का IAEA से सहयोग समाप्त करना न केवल पश्चिम के साथ उसके संबंधों में एक बड़े मोड़ को दर्शाता है, बल्कि यह वैश्विक परमाणु निगरानी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी प्रभाव डाल सकता है। भारत में ईरान को मिला नैतिक समर्थन इस घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

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