दिग्गज फिल्म अभिनेता धर्मेन्द्र का निधन?, सच्चाई या अफवाह, 12वीं पास कर मुंबई पहुंचे थे धर्मेन्द्र

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेन्द्र, जिन्होंने 1960 के दशक में अपने करियर की शुरुआत की थी और शोले, फूल और पत्थर तथा चुपके-चुपके जैसी फिल्मों से दर्शकों का दिल जीता, लगभग छह दशकों से हिंदी सिनेमा के महत्वपूर्ण चेहरों में शामिल हैं। दिसंबर में वे 90 वर्ष के होने जा रहे हैं। फिलहाल, अभिनेता को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। उनकी बेटी ईशा देओल ने पुष्टि की है कि धर्मेन्द्र की हालत में सुधार हो रहा है।

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धर्मेंद्र का करियर

धर्मेन्द्र ने 1960 में फिल्मफेयर पत्रिका द्वारा आयोजित एक प्रतिभा प्रतियोगिता जीती, जिसके बाद उन्हें हिंदी फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे में काम करने का मौका मिला, यही उनकी फिल्मी पारी की शुरुआत थी। साल 1954 में धर्मेन्द्र ने प्रकाश कौर से विवाह किया। बाद में, 1980 के दशक की शुरुआत में उन्होंने अभिनेत्री हेमा मालिनी से शादी की, हालांकि उन्होंने अपनी पहली पत्नी को तलाक नहीं दिया। धर्मेन्द्र को भारतीय सिनेमा के इतिहास के सबसे सफल और लोकप्रिय अभिनेताओं में गिना जाता है। पांच से अधिक दशकों तक फैले अपने करियर में उन्होंने न केवल एक्शन फिल्मों से बल्कि रोमांटिक और कॉमेडी भूमिकाओं से भी दर्शकों का दिल जीता। अपने शानदार व्यक्तित्व और दमदार अंदाज के कारण वे लंबे समय तक बॉलीवुड के “ही-मैन” के रूप में मशहूर रहे।

प्रारंभिक जीवन और करियर की शुरुआत

  • पूरा नाम: धर्मेन्द्र केवल कृष्ण देओल

  • जन्मस्थान: लुधियाना, पंजाब

  • पहली फिल्म: दिल भी तेरा हम भी तेरे (1960)
    धीरे-धीरे अपनी सशक्त अदाकारी और आकर्षक व्यक्तित्व के बल पर धर्मेन्द्र ने बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई और शीघ्र ही एक सुपरस्टार के रूप में उभरे।

प्रसिद्ध फ़िल्में और करियर की ऊँचाइयाँ

“ही-मैन” की उपाधि उन्हें उन दमदार भूमिकाओं के लिए मिली, जिनमें वे साहस, शक्ति और नायकत्व का प्रतीक बने।

कुछ प्रमुख फ़िल्में:

  • फूल और पत्थर (1966) – पहली बड़ी हिट फ़िल्म

  • मेरा गाँव मेरा देश (1971) – अभिनय की परिपक्वता का उदाहरण

  • यादों की बारात (1973) – संगीत और भावनाओं का बेहतरीन संगम

  • बेताब (1983) – उनके पुत्र सनी देओल की पहली फ़िल्म

  • घायल (1990) – एक्शन और संवेदना का संगम

  • शोले (1975), चुपके चुपके (1975) – उनके सर्वाधिक यादगार अभिनय में से एक

व्यक्तिगत जीवन

धर्मेन्द्र ने वर्ष 1954 में प्रकाश कौर से विवाह किया। बाद में उन्होंने अभिनेत्री हेमा मालिनी से विवाह किया, जो बॉलीवुड की सबसे चर्चित जोड़ियों में से एक रही।

संतानें:

  • सनी देओल, बॉबी देओल (प्रकाश कौर से)

  • ईशा देओल, अहाना देओल (हेमा मालिनी से)

  • अजीता और विजेता (प्रकाश कौर से)

उनके पुत्र सनी और बॉबी देओल हिंदी सिनेमा के प्रमुख अभिनेता हैं, वहीं ईशा और अहाना ने भी फिल्म और प्रोडक्शन क्षेत्र में कार्य किया है।

सम्मान और उपलब्धियाँ

  • पद्म भूषण (2012): भारत सरकार द्वारा कला क्षेत्र में योगदान हेतु प्रदान किया गया।

  • फिल्मफेयर पुरस्कार: सर्वश्रेष्ठ अभिनेता श्रेणी में कई बार नामांकन और पुरस्कार।
    धर्मेन्द्र को न केवल उनकी फिल्मों के लिए बल्कि भारतीय फिल्म उद्योग को आकार देने में उनके योगदान के लिए भी याद किया जाएगा।

परीक्षा हेतु प्रमुख तथ्य

तथ्य विवरण
पूरा नाम धर्मेन्द्र देओल
जन्म तिथि 8 दिसंबर 1935
अभी का आयु 89 वर्ष
प्रमुख फ़िल्में शोले, फूल और पत्थर, चुपके चुपके
उपनाम बॉलीवुड का “ही-मैन”
कुल फ़िल्में 300 से अधिक
सम्मान पद्म भूषण (2012), फिल्मफेयर पुरस्कार

बांग्लादेश संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन में शामिल होने वाला पहला दक्षिण एशियाई देश बना

बांग्लादेश ने 2025 में आधिकारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र जल अभिसमय (UN Water Convention) को स्वीकार कर लिया है, जिससे वह ऐसा करने वाला पहला दक्षिण एशियाई देश बन गया है। यह निर्णय क्षेत्रीय सीमापार जल प्रबंधन (Transboundary Water Governance) के दृष्टिकोण में एक बड़ा परिवर्तन दर्शाता है और विशेष रूप से भारत के साथ मौजूदा द्विपक्षीय जल-साझाकरण समझौतों को प्रभावित कर सकता है। जैसे-जैसे वैश्विक जल संकट गहराता जा रहा है, बांग्लादेश का यह कदम अपने हितों को एक बहुपक्षीय कानूनी ढांचे के माध्यम से सुरक्षित करने की रणनीतिक दिशा को दर्शाता है।

यूएन वाटर कन्वेंशन क्या है?

इस अभिसमय का पूरा नाम है — “Convention on the Protection and Use of Transboundary Watercourses and International Lakes”, जो साझा जल निकायों के सतत और न्यायसंगत उपयोग को सुनिश्चित करने वाला एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता है।

  • स्वीकृत (Adopted): 1992, हेलसिंकी में

  • प्रवर्तन (Came into force): 1996 (संयुक्त राष्ट्र यूरोपीय आर्थिक आयोग – UNECE के तहत)

  • वैश्विक पहुंच (Global reach): 2016 से सभी यूएन सदस्य देशों के लिए खुला

यह अभिसमय साझा नदियों, झीलों और जलभृतों (Aquifers) के प्रबंधन में सहयोग, समानता और विवाद-निवारण के लिए एक ठोस कानूनी ढांचा प्रदान करता है।

अभिसमय की प्रमुख विशेषताएँ

बांग्लादेश का इस संधि में शामिल होना इसकी इन विशिष्टताओं से प्रेरित है:

  • सहकारी शासन (Cooperative Governance): साझा जल स्रोतों के प्रबंधन हेतु औपचारिक समझौतों और संयुक्त संस्थानों की अनिवार्यता।

  • समान उपयोग का सिद्धांत (Equitable Utilization): साझा जल संसाधनों का न्यायसंगत उपयोग सुनिश्चित करना और किसी अन्य देश को गंभीर क्षति से बचाना।

  • विवाद निवारण प्रणाली (Conflict Prevention): शांतिपूर्ण विवाद समाधान के लिए संस्थागत ढांचा।

  • एसडीजी संरेखण (SDG Alignment): यह एसडीजी 6.5 (एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन) को आगे बढ़ाता है और भोजन सुरक्षा (SDG 2), जलवायु कार्रवाई (SDG 13) तथा शांतिपूर्ण संस्थान (SDG 16) जैसे लक्ष्यों को भी समर्थन देता है।

  • वैश्विक भागीदारी (Global Inclusion): हाल के वर्षों में चाड, घाना, इराक, नाइजीरिया, गाम्बिया, नामीबिया और पनामा जैसे देशों ने भी इसे अपनाया है।

बांग्लादेश की रणनीतिक प्रेरणा

बांग्लादेश भारत के साथ 54 नदियाँ साझा करता है, जिनमें तीस्ता और गंगा जैसी प्रमुख नदियाँ शामिल हैं। ये नदियाँ देश की कृषि, पेयजल और पारिस्थितिक संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
तीस्ता जल समझौते में लंबे समय से हो रही देरी और ऊपरी धारा से बढ़ते जल उपयोग ने बांग्लादेश की चिंता बढ़ाई है।

इस अभिसमय से जुड़कर बांग्लादेश को—

  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने जल-संबंधी मुद्दे उठाने का वैधानिक मंच,

  • वैश्विक जल शासन सहायता तंत्र तक पहुंच,

  • और अन्य सदस्य देशों के साथ राजनयिक गठबंधन बनाने का अवसर मिला है।

भारत और क्षेत्रीय जल कूटनीति पर प्रभाव

भारत ने अब तक यूएन वाटर कन्वेंशन को स्वीकार नहीं किया है।
वह जल विवादों को सुलझाने के लिए द्विपक्षीय संधियों पर भरोसा करता है, जैसे कि —

  • इंडस वाटर्स ट्रीटी (1960) — पाकिस्तान के साथ

  • गंगा जल साझा संधि (1996) — बांग्लादेश के साथ

भारत का मत है कि सीमापार जल मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाने से राजनयिक लचीलापन (Diplomatic Flexibility) कम हो सकता है, इसलिए वह बेसिन स्तर या द्विपक्षीय वार्ता को प्राथमिकता देता है।

प्रमुख वैश्विक सूचकांक 2025 में भारत की रैंकिंग

किसी देश की विकास और प्रगति का स्तर अक्सर उन वैश्विक सूचकांकों और रिपोर्टों में दिखाई देता है, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय संगठनों द्वारा प्रकाशित किया जाता है। ये रैंकिंग शासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और सामाजिक समानता जैसे क्षेत्रों में देशों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने में मदद करती हैं।

भारत, जो दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, लगातार उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। फिर भी, विभिन्न वैश्विक सूचकांकों में उसकी स्थिति यह दर्शाती है कि जहाँ एक ओर कई क्षेत्रों में भारत ने मज़बूती दिखाई है, वहीं कुछ क्षेत्रों में अब भी सुधार की आवश्यकता बनी हुई है। आइए, 2025 के नवीनतम वैश्विक सूचकांकों और रिपोर्टों में भारत की स्थिति पर एक नज़र डालते हैं।

भारत की महत्वपूर्ण वैश्विक सूचकांकों में स्थिति 2025

सूचकांक का नाम प्रकाशित करने वाला संगठन भारत की रैंक (2025) प्रमुख बिंदु / मानदंड
जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक 2025 जर्मनवॉच, न्यू क्लाइमेट इंस्टीट्यूट, क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क 10वां ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा उपयोग और जलवायु नीति पर प्रदर्शन का आकलन करता है।
क्यूएस वर्ल्ड फ्यूचर स्किल्स इंडेक्स 2025 क्वाक्वारेली साइमंड्स (QS) 25वां भविष्य के कार्य कौशल, शैक्षणिक तैयारी और आर्थिक रूपांतरण का मूल्यांकन करता है।
हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2025 इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी 85वां भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए वीज़ा-मुक्त गंतव्यों की संख्या पर आधारित।
ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2025 ग्लोबल फायरपावर 4था 145 देशों की पारंपरिक सैन्य शक्ति का आकलन करता है।
ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2024 इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस 14वां 163 देशों में आतंकवाद के प्रभाव को मापता है।
ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2024 विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) 39वां / 133 अर्थव्यवस्थाएँ नवाचार-आधारित विकास का मूल्यांकन करता है।
ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2024 कंसर्न वर्ल्डवाइड एवं वेल्ट हंगर हिल्फे 105वां / 127 कुपोषण, बाल दुबलापन, ठिगनापन और मृत्यु दर के आधार पर भूख को मापता है।
वर्ल्ड कॉम्पिटिटिवनेस इंडेक्स 2024 अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधन विकास संस्थान (IMD) 39वां दीर्घकालिक मूल्य सृजन और प्रतिस्पर्धात्मकता का मूल्यांकन करता है।
ग्लोबल पीस इंडेक्स 2024 इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस 116वां / 163 संघर्ष, सुरक्षा और सैन्यीकरण के आधार पर शांति स्तर का मूल्यांकन करता है।
वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2024 रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स 162वां प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा का मूल्यांकन करता है।
वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2024 आईक्यूएयर 3रा (सबसे प्रदूषित देश) दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बनी रही।
इंटरनेशनल इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी इंडेक्स 2024 यू.एस. चैंबर ऑफ कॉमर्स 42वां / 55 अर्थव्यवस्थाएँ बौद्धिक संपदा की सुरक्षा और प्रवर्तन का मूल्यांकन करता है।
ग्लोबल सॉफ्ट पावर इंडेक्स 2024 ब्रांड फाइनेंस 29वां राष्ट्रीय प्रभाव और प्रतिष्ठा की वैश्विक धारणा को मापता है।
मानव विकास सूचकांक 2023–24 संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) 134वां / 193 देश जीवन प्रत्याशा, शिक्षा और प्रति व्यक्ति आय के आधार पर मूल्यांकन।
लैंगिक असमानता सूचकांक 2022 संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) 108वां / 193 देश स्वास्थ्य, सशक्तिकरण और श्रम भागीदारी में लैंगिक असमानता को मापता है।
वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2024 संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क 126वां नागरिकों की खुशी और सामाजिक कल्याण की धारणा पर आधारित।
भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक 2023 ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल 93वां / 180 देश सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार की धारणा के आधार पर रैंकिंग।
विधि का शासन सूचकांक 2024 वर्ल्ड जस्टिस प्रोजेक्ट 79वां न्याय, शासन और जवाबदेही का मूल्यांकन करता है।
ग्लोबल लाइवेबिलिटी इंडेक्स 2024 इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट नई दिल्ली व मुंबई: 141वां 173 शहरों में जीवन की गुणवत्ता और मानक का आकलन।
बहुआयामी गरीबी सूचकांक 2024 UNDP एवं ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल भारत में 23.4 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी में हैं।
ऊर्जा संक्रमण सूचकांक 2024 विश्व आर्थिक मंच 63वां / 120 देश ऊर्जा प्रदर्शन और संक्रमण तत्परता की तुलना करता है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक 2024 अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) भारत की GDP वृद्धि दर 2024 और 2025 में 6.5% अनुमानित।
वैश्विक प्रेषण प्रवाह रिपोर्ट 2024 विश्व बैंक भारत को 129 अरब अमेरिकी डॉलर की प्राप्ति — विश्व में सर्वाधिक।
SIPRI रिपोर्ट स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट 2019–23 के दौरान भारत विश्व का सबसे बड़ा हथियार आयातक बना रहा।
लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स 2023 विश्व बैंक 38वां व्यापार लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता को मापता है।

विश्लेषण एवं अंतर्दृष्टि 

भारत के प्रदर्शन का विश्लेषण दर्शाता है कि—

  • श्रेष्ठ प्रदर्शन वाले क्षेत्र: भारत ने सैन्य शक्ति, नवाचार, प्रवासी प्रेषण (Remittances) और जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट स्थान हासिल किया है।

  • सुधार की आवश्यकता वाले क्षेत्र: प्रेस की स्वतंत्रता, भूख नियंत्रण, भ्रष्टाचार पर अंकुश और लैंगिक समानता जैसे क्षेत्रों में अभी काफी सुधार की आवश्यकता है।

  • जलवायु प्रगति: जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक में शीर्ष 10 में स्थान प्राप्त करना भारत की नवीकरणीय ऊर्जा और उत्सर्जन नीतियों में निरंतर सुधार को दर्शाता है।

  • सामाजिक असमानता का संकेत: मानव विकास और खुशी सूचकांक में निम्न रैंक भारत में आय एवं सामाजिक असमानता की स्थायी चुनौतियों को उजागर करती है।

असम में बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक पारित

असम सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए “असम बहुविवाह निषेध विधेयक, 2025” (Assam Prohibition of Polygamy Bill 2025) को मंज़ूरी दी है। इस विधेयक का उद्देश्य बहुविवाह (Polygamy) यानी एक व्यक्ति द्वारा पहली शादी रहते हुए दूसरी शादी करने की प्रथा को प्रतिबंधित करना है। इसे दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। यह कदम राज्य में विवाह संबंधी कानूनों में कानूनी एकरूपता लाने और महिलाओं के अधिकारों को सशक्त करने की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है।

विधेयक के मुख्य प्रावधान

  • यदि किसी व्यक्ति की पहली शादी अभी भी वैध है, तो वह दूसरी शादी नहीं कर सकेगा।

  • इस कानून का उल्लंघन करने वाले को 7 वर्ष तक की सज़ा हो सकती है।

  • विधेयक में प्रभावित महिलाओं के लिए एक विशेष मुआवज़ा कोष (Compensation Fund) बनाने का भी प्रावधान है।

  • यह विधेयक 25 नवंबर 2025 को असम विधानसभा में पेश किया जाएगा।

छूट और विशेष प्रावधान

  • यह कानून अनुसूचित जनजातियों (STs) या संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों पर लागू नहीं होगा।

  • 2005 से पहले हुई अनुसूचित क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय के अंतर्गत वैध शादियाँ भी इस कानून के दायरे से बाहर रहेंगी।

इस विधेयक का महत्व

  • लैंगिक न्याय (Gender Justice): बहुविवाह पर रोक लगाकर महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक असुरक्षा से बचाने का प्रयास।

  • कानूनी एकरूपता (Legal Uniformity): असम सरकार विवाह कानूनों को सभी समुदायों के लिए समान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

  • संवैधानिक अधिकारिता (Legislative Competence): विशेषज्ञ समिति ने निष्कर्ष निकाला था कि चूंकि विवाह और तलाक “संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List)” में आते हैं, इसलिए असम को ऐसा कानून बनाने का अधिकार है।

  • दृष्टांत (Precedent): यह कानून अन्य राज्यों के लिए भी व्यक्तिगत कानून सुधार (Personal Law Reform) की दिशा में एक मिसाल बन सकता है।

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की Biography: उनके जीवन, करियर, उपलब्धियों और विरासत के बारे में जानें

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक, महान विद्वान, और स्वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री थे। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता में गहरा विश्वास रखा और महात्मा गांधी के अहिंसात्मक आंदोलनों का पूरा समर्थन किया। भारत में शिक्षा को सुधारने के उनके प्रयासों के सम्मान में 11 नवम्बर को हर वर्ष राष्ट्रीय शिक्षा दिवस (National Education Day) के रूप में मनाया जाता है।

प्रारंभिक जीवन

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का जन्म 11 नवम्बर 1888 को मक्का (सऊदी अरब) में मुहियुद्दीन अहमद के रूप में हुआ था। जब वे दो वर्ष के थे, उनका परिवार भारत के कलकत्ता (अब कोलकाता) आ गया। उनके पिता एक प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान थे, जबकि उनकी माता मदीना के प्रतिष्ठित विद्वानों के परिवार से थीं।

शिक्षा और प्रारंभिक रुचियाँ

  • आज़ाद की शिक्षा घर पर ही हुई। उन्होंने छोटी उम्र में ही फ़ारसी, उर्दू, अरबी जैसी कई भाषाएँ सीख लीं। उन्हें इतिहास, दर्शनशास्त्र और गणित जैसे विषयों में गहरी रुचि थी।
  • बारह वर्ष की आयु तक उन्होंने एक पुस्तकालय, वाचनालय और वाद-विवाद संस्था स्थापित कर ली थी। वे इस्लामी धर्मशास्त्र, विज्ञान और दर्शन के गहरे ज्ञाता बन चुके थे।

पत्रकार के रूप में मौलाना आज़ाद

  • मौलाना आज़ाद ने 11 वर्ष की आयु में ही ‘आज़ाद’ उपनाम से कविताएँ और लेख लिखना शुरू कर दिया था।
  • 1912 में उन्होंने “अल-हिलाल (Al-Hilal)” नामक साप्ताहिक पत्रिका निकाली, जिसमें उन्होंने ब्रिटिश शासन की कड़ी आलोचना की। यह पत्रिका इतनी लोकप्रिय हुई कि 1914 में ब्रिटिश सरकार ने इसे प्रतिबंधित कर दिया।
  • इसके बाद उन्होंने “अल-बलाघ (Al-Balagh)” नामक एक और प्रकाशन शुरू किया, जिसे 1916 में फिर से प्रतिबंधित कर दिया गया। उनके क्रांतिकारी विचारों के कारण उन्हें कई प्रदेशों में प्रवेश से रोका गया और 1920 तक बिहार में नजरबंद रखा गया।

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका

  • 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में मौलाना आज़ाद ने क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया और अरविंदो घोष जैसे नेताओं के साथ कार्य किया।
  • 1908 में वे मिस्र, सीरिया, तुर्की और फ्रांस गए, जहाँ से उनके राष्ट्रवादी विचारों को नई दिशा मिली।
  • उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का नेतृत्व किया और महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन (1920–22) का समर्थन किया।
  • 1923 में, मात्र 35 वर्ष की आयु में, वे कांग्रेस के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष बने।
  • 1930 के नमक सत्याग्रह के दौरान उन्हें जेल भेजा गया।
  • 1940 से 1946 तक वे कांग्रेस अध्यक्ष रहे और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने पर फिर गिरफ्तार किए गए।

हिंदू-मुस्लिम एकता के समर्थक

मौलाना आज़ाद जीवन भर हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रबल समर्थक रहे। उन्होंने अपने लेखों और भाषणों में एकता और धर्मनिरपेक्ष भारत की वकालत की।
वे देश के विभाजन के विरोधी थे और विभाजन के बाद हुए दंगों से अत्यंत दुखी हुए। उन्होंने शरणार्थी शिविरों की स्थापना में मदद की और हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों का संचालन किया।

शिक्षा के क्षेत्र में योगदान

मौलाना’ उपाधि उन्हें उनके गहन ज्ञान के कारण मिली। उन्होंने स्वतंत्र भारत की शिक्षा नीति के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने 1920 में अलीगढ़ में जामिया मिलिया इस्लामिया (Jamia Millia Islamia) की स्थापना में सहयोग दिया।

वे 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा के प्रबल पक्षधर थे और उन्होंने पूर्वी और पश्चिमी शिक्षा प्रणाली के संतुलन का समर्थन किया।

उनके नेतृत्व में कई प्रमुख संस्थाएँ बनीं —

  • विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC)

  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IITs)

  • भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc)

स्वतंत्रता के बाद का जीवन

  • स्वतंत्र भारत में वे पहले शिक्षा मंत्री (1947–1958) बने। उन्होंने विद्यालयों, कॉलेजों और उच्च शिक्षा संस्थानों के विकास पर विशेष जोर दिया।
  • उन्होंने साहित्य अकादमी, संगीत नाटक अकादमी और ललित कला अकादमी जैसी सांस्कृतिक संस्थाओं की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • उन्होंने 1950 में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की स्थापना की, ताकि अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके।

साहित्यिक योगदान

मौलाना आज़ाद एक उत्कृष्ट लेखक भी थे। उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं —

  • India Wins Freedom

  • ग़ुबार-ए-ख़ातिर (Ghubar-e-Khatir)

  • तज़किरा (Tazkirah)

  • तरजुमान-उल-क़ुरआन (Tarjumanul Quran)

निधन और विरासत

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का निधन 22 फरवरी 1958 को हुआ। 1992 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उनकी जयंती 11 नवम्बर को भारत में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाई जाती है। मौलाना आज़ाद एजुकेशन फ़ाउंडेशन (1989) गरीब और वंचित वर्गों की शिक्षा को बढ़ावा देती है, जबकि मौलाना अबुल कलाम आज़ाद नेशनल फ़ेलोशिप अल्पसंख्यक छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए सहायता प्रदान करती है।

Booker Prize 2025: हंगरी-ब्रिटिश लेखक डेविड स्जेले ने उपन्यास ‘फ्लेश’ हेतु 2025 का बुकर पुरस्कार जीता

लंदन में 10 नवंबर 2025 को रात आयोजित समारोह में हंगरी-ब्रिटिश लेखक डेविड स्जेले को उनके उपन्यास ‘फ्लेश’ के लिए बुकर प्राइज 2025 से सम्मानित किया गया। इस अवॉर्ड के तहत उन्हें 50,000 पाउंड की राशि और ट्रॉफी दी गई। पुरस्कार उन्हें पिछले साल की विजेता सामंथा हार्वी ने प्रदान किया। 51 वर्षीय स्जेले के उपन्यास ‘फ्लेश’ में एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो भावनात्मक रूप से टूट चुका है और जिंदगी की कुछ अप्रत्याशित घटनाएं उसकी दुनिया बदल देती हैं। कहानी को समझने के बाद फैसला सुनाने वालों ने इस किताब को ‘सरल लेकिन गहराई से भरी, तनावपूर्ण और भावनात्मक रूप से झकझोर देने वाली कहानी’ बताया।

किरण देसाई: एक करीबी दावेदार

बता दें कि भारतीय मूल की लेखिका किरण देसाई अपनी किताब सोनिया और सनी का अकेलापन’ के लिए इस बार दूसरे स्थान पर रहीं। अगर वे जीततीं, तो वे बुकर प्राइज के 56 वर्षों के इतिहास में दो बार यह पुरस्कार जीतने वाली पांचवीं लेखिका बन जातीं। इससे पहले उन्होंने 2006 में ‘नुकसान की विरासत’ के लिए यह पुरस्कार जीता था।

667 पन्नों की एक लंबी कहानी

किरण देसाई की नई किताब 667 पन्नों की एक लंबी कहानी है, जिसमें भारत और अमेरिका की पृष्ठभूमि पर दो भारतीय युवाओं सोनिया और सनी, के जीवन और प्रेम को दिखाया गया है। निर्णायकों ने इसे ‘प्रेम, परिवार, परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम’ बताया। बुकर प्राइज के निर्णायक मंडल के अध्यक्ष आयरिश लेखक रॉडी डॉयल ने कहा कि ‘फ्लेश’ एक बिल्कुल अलग तरह की किताब है। यह थोड़ी अंधेरी कहानी है, लेकिन इसे पढ़ना आनंददायक है।

ये किताबें भी थे सूची में सामिल

गौरतलब है कि इस साल बुकर प्राइज की सूची में अन्य नामों में सुसान चोई (‘फ्लैशलाइट’), केटी कितामुरा (‘ऑडिशन’), बेन मार्कोविट्स (‘द रेस्ट ऑफ अवर लाइव्स’) और एंड्रयू मिलर (‘द लैंड इन विंटर’) शामिल थे। सभी फाइनलिस्ट लेखकों को 2,500 पाउंड और उनकी किताब का विशेष संस्करण दिया जाएगा। निर्णायकों ने कहा कि इस साल की सभी छह किताबें ‘मानव भावनाओं, रिश्तों और समाज की जटिलताओं’ को अनोखे ढंग से पेश करती हैं। साथ ही हर लेखक ने अपनी कहानी को पूरी मौलिकता और खूबसूरती के साथ लिखा है।

ब्रिटानिया के एमडी और सीईओ वरुण बेरी ने दिया इस्तीफा, रक्षित हरगवे संभालेंगे पद

ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज के प्रबंधक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी वरुण बेरी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस बीच, हाल ही में नियुक्त किए गए रक्षित हरगवे ने एमडी व सीईओ का पद संभालेंगे।कंपनी ने रक्षित हरगवे (Rakshit Hargave) को अपना नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल पांच वर्षों का होगा, जो 15 दिसंबर 2025 से प्रभावी होगा। यह नियुक्ति कंपनी सदस्यों की स्वीकृति के बाद लागू होगी। हरगावे की यह नियुक्ति ब्रिटानिया के लिए एक महत्वपूर्ण नेतृत्व बदलाव मानी जा रही है, क्योंकि वे वैश्विक उपभोक्ता ब्रांडों और व्यावसायिक परिवर्तन के क्षेत्र में लंबा अनुभव लेकर आ रहे हैं।

करियर पृष्ठभूमि और उपलब्धियाँ

ब्रिटानिया से जुड़ने से पहले, रक्षित हरगवे आदित्य बिड़ला समूह की पेंट्स डिवीजन बिड़ला ओपस (Birla Opus) के सीईओ थे। उन्होंने नवंबर 2021 में इस पद को संभाला था और देशभर में छह एकीकृत विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित करने के साथ-साथ वितरण और आपूर्ति श्रृंखला नेटवर्क का विस्तार किया।

हरगवे ने इससे पहले कई प्रतिष्ठित वैश्विक और भारतीय उपभोक्ता वस्तु कंपनियों में नेतृत्व भूमिकाएँ निभाईं, जिनमें शामिल हैं —

  • बीयर्सडॉर्फ (निविया) – एशिया-प्रशांत क्षेत्र के संचालन का नेतृत्व किया और निविया इंडिया के प्रबंध निदेशक रहे।

  • हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) – सेल्स और मार्केटिंग डायरेक्टर तथा लक्मे लीवर के सीओओ के रूप में कार्य किया।

  • जुबिलेंट फूडवर्क्स – भारत में डोमिनोज़ पिज़्ज़ा की 30-मिनट डिलीवरी मॉडल की शुरुआत में प्रमुख भूमिका निभाई।

  • नेस्ले इंडिया – अपने करियर के शुरुआती चरण में यहाँ से शुरुआत की। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टाटा मोटर्स से की थी, जहाँ उन्होंने इंजीनियरिंग और प्रबंधन दोनों क्षेत्रों में मज़बूत नींव रखी।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि

रक्षित हरगवे ने आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक और एफएमएस (Faculty of Management Studies), दिल्ली विश्वविद्यालय से एमबीए किया है। आईआईटी वाराणसी ने उन्हें उनकी असाधारण पेशेवर उपलब्धियों के लिए “डिस्टिंग्विश्ड यंग एलुमनाई अवॉर्ड” से सम्मानित किया था।

ब्रिटानिया का रणनीतिक कदम

कंपनी के निदेशक मंडल ने कहा कि हरगवे की नियुक्ति ब्रिटानिया के दीर्घकालिक रणनीतिक लक्ष्यों के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य नेतृत्व को सुदृढ़ करना और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में विकास को गति देना है।
इस बीच, हिमांशु कपानिया, जो वर्तमान में प्रबंध निदेशक हैं, रक्षित हरगवे के पदभार ग्रहण करने तक संचालन की देखरेख करेंगे। बोर्ड ने पूर्व सीईओ के योगदान की सराहना करते हुए हरगावे के नेतृत्व पर पूर्ण विश्वास व्यक्त किया है।

ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज़ के बारे में

1892 में स्थापित, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड भारत के सबसे विश्वसनीय खाद्य ब्रांडों में से एक है। कंपनी के प्रसिद्ध उत्पादों में गुड डे, मेरी गोल्ड, बोरबोन, न्यूट्रिचॉइस और ट्रीट शामिल हैं। ब्रिटानिया ग्रामीण और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में अपने विस्तार को लगातार आगे बढ़ा रही है, जिसका उद्देश्य है — पौष्टिक और किफायती खाद्य पदार्थ हर व्यक्ति तक पहुँचाना।

भारत-अंगोला ने व्यापार और समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

एक ऐतिहासिक राजनयिक उपलब्धि के तहत भारत और अंगोला ने मत्स्य पालन, एक्वाकल्चर (मछली पालन), समुद्री संसाधन और दूतावास सहयोग के क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। ये समझौते राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की अंगोला की पहली राजकीय यात्रा के दौरान संपन्न हुए — जो किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की इस देश की पहली यात्रा थी। यह दौरा भारत और अंगोला के बीच एक व्यापक और रणनीतिक साझेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

समझौतों के मुख्य क्षेत्र

इन समझौता ज्ञापनों का उद्देश्य निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है —

  • मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर: सतत समुद्री संसाधन प्रबंधन, प्रौद्योगिकी विनिमय और क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित करना।

  • दूतावास सहयोग: वीज़ा सेवाओं, दूतावास सहायता और नागरिक सेवाओं में सुधार के माध्यम से द्विपक्षीय आवागमन और व्यापार को सुगम बनाना।

ये समझौते पारंपरिक रूप से ऊर्जा-केंद्रित भारत–अंगोला संबंधों को सतत विकास और आर्थिक विविधता की दिशा में विस्तृत करने की कोशिश को दर्शाते हैं।

यात्रा का रणनीतिक महत्व

द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करना

राष्ट्रपति मुर्मु को अंगोला में पूर्ण राजकीय सम्मान, जिसमें 21 तोपों की सलामी भी शामिल थी, प्रदान किया गया। उन्होंने अंगोला के राष्ट्रपति जाओ लौरेंको (João Lourenço) के साथ व्यापक वार्ता की। दोनों नेताओं ने आपसी विश्वास, सम्मान और साझा विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई तथा जन-से-जन संबंधों और बहुपक्षीय सहयोग के महत्व पर बल दिया।

आर्थिक सहयोग का विविधीकरण

जहाँ ऊर्जा भारत–अंगोला साझेदारी का प्रमुख स्तंभ बनी हुई है, वहीं समुद्री और मत्स्य क्षेत्रों में सहयोग से कृषि, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, रक्षा और अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार का मार्ग खुला है। यह विविधीकरण दीर्घकालिक और लचीली आर्थिक साझेदारी के निर्माण की दिशा में एक अहम कदम है।

वैश्विक सततता सहयोग को प्रोत्साहन

अंगोला का भारत-नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय अभियानों — जैसे इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) और ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस (GBA) — में शामिल होना दोनों देशों की वैश्विक पर्यावरणीय लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह भारत की हरित कूटनीति (Green Diplomacy) और अफ्रीका में बढ़ते प्रभाव का भी प्रतीक है।

समझौतों के लाभ

अंगोला के लिए:

  • मत्स्य और एक्वाकल्चर क्षेत्र में भारतीय विशेषज्ञता तक पहुँच।

  • स्थानीय रोजगार सृजन और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा।

  • विदेशी निवेश और आर्थिक विविधीकरण में वृद्धि।

भारत के लिए:

  • अफ्रीकी बाज़ार में व्यापारिक उपस्थिति को मज़बूती।

  • समुद्री प्रौद्योगिकी और विशेषज्ञता के निर्यात के अवसर।

  • क्षेत्र में रणनीतिक और राजनयिक प्रभाव में वृद्धि।

दोनों देशों के लिए:

  • बेहतर दूतावास सेवाएँ और नागरिक सहायता।

  • पेशेवरों और पर्यटकों के आवागमन में सुगमता।

  • पर्यावरणीय और आर्थिक मंचों पर घनिष्ठ सहयोग।

प्रमुख स्थिर तथ्य

  • संबंधित देश: भारत और अंगोला

  • अवसर: किसी भारतीय राष्ट्रपति की अंगोला को पहली राजकीय यात्रा

  • समझौता हस्ताक्षर तिथि: 10 नवंबर 2025

  • मुख्य समझौते:

    • मत्स्य पालन एवं एक्वाकल्चर सहयोग

    • दूतावास (Consular) सहयोग

शेखा नासिर अल नौवैस संयुक्त राष्ट्र पर्यटन का नेतृत्व करने वाली पहली महिला बनीं

लैंगिक समानता और वैश्विक पर्यटन क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए शेखा नासिर अल नौवैस (Shaikha Nasser Al Nowais) को यूएन टूरिज़्म (UN Tourism) की पहली महिला प्रमुख नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति की पुष्टि स्पेन के सेगोविया शहर में आयोजित 123वें यूएन टूरिज़्म कार्यकारी परिषद सत्र के दौरान की गई, और इसे जल्द ही संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) द्वारा औपचारिक रूप से अनुमोदित किया जाएगा। वे जनवरी 2026 में चार वर्ष के कार्यकाल के लिए पदभार ग्रहण करेंगी, जिससे संगठन की स्थापना (1975) के बाद 50 वर्षों की परंपरा टूटेगी।

50 साल की बाधा को तोड़ने वाली नियुक्ति

शेखा नासिर अल नौवैस की नियुक्ति अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। वे संयुक्त राष्ट्र की उस विशेषीकृत एजेंसी का नेतृत्व करेंगी जो जिम्मेदार, सतत और सार्वभौमिक रूप से सुलभ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कार्य करती है।

  • यूएई की प्रतिक्रिया: संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान ने इस नियुक्ति को महिला सशक्तिकरण और वैश्विक सहयोग के प्रति यूएई की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।

  • समर्पण: अल नौवैस ने अपनी उपलब्धि को हिज हाईनेस शैखा फातिमा बिंत मुबारक को समर्पित किया, जिन्हें उन्होंने एमिराती महिलाओं की प्रेरणा और समर्थन का स्तंभ बताया।

एक अग्रणी एमिराती नेता

16 वर्षों से अधिक के पेशेवर अनुभव के साथ, शेखा नासिर अल नौवैस ने व्यवसाय और पर्यटन दोनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है —

  • कॉरपोरेट वाइस प्रेसिडेंट, रोटाना होटल्स

  • अध्यक्ष, अबू धाबी चैंबर की टूरिज़्म वर्किंग ग्रुप

  • सदस्य, अबू धाबी बिजनेसवुमन काउंसिल

उनकी विशेषज्ञता कॉरपोरेट गवर्नेंस, रणनीतिक विकास और पर्यटन प्रबंधन में है, जिससे वे यूएन टूरिज़्म को वैश्विक चुनौतियों के बीच नवाचार, समावेशन और सतत विकास की दिशा में आगे ले जाने के लिए सक्षम हैं।

वैश्विक पर्यटन के लिए दृष्टि 

यूएन टूरिज़्म की महासचिव (Secretary-General) के रूप में, शैखा अल नवाइस ने “पांच स्तंभों वाली दृष्टि” (Five-Pillar Vision) प्रस्तुत की है —

  1. जिम्मेदार पर्यटन (Responsible Tourism): पर्यावरण-सचेत और टिकाऊ यात्रा प्रथाओं को बढ़ावा देना।

  2. डिजिटल नवाचार (Digital Innovation): पर्यटन क्षेत्र में एआई और तकनीकी अपनाने को प्रोत्साहित करना।

  3. सतत वित्तपोषण (Sustainable Financing): पर्यटन ढाँचे और विकास में वैश्विक निवेश को सुदृढ़ करना।

  4. युवा और महिला सशक्तिकरण (Youth & Women Empowerment): उद्योग में कम प्रतिनिधित्व वाले वर्गों के लिए अवसर बढ़ाना।

  5. पारदर्शी शासन (Transparent Governance): जवाबदेही और वैश्विक पर्यटन प्रबंधन में सर्वोत्तम प्रथाओं को सुनिश्चित करना।

उनका नेतृत्व समावेशिता, नवाचार और स्थिरता के नए वैश्विक मानक स्थापित करने की उम्मीद जगाता है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय शासन में यूएई की नेतृत्व भूमिका और महिला भागीदारी को और मजबूत करेगा।

मुख्य तथ्य 

  • कार्यकाल की अवधि: 4 वर्ष (जनवरी 2026 से प्रारंभ)

  • पुष्टि: 123वां यूएन टूरिज़्म कार्यकारी परिषद सत्र, सेगोविया, स्पेन

  • पूर्व भूमिकाएँ: रोटाना होटल्स में कॉरपोरेट वाइस प्रेसिडेंट, अबू धाबी चैंबर की टूरिज़्म वर्किंग ग्रुप की अध्यक्ष, अबू धाबी बिजनेसवुमन काउंसिल की सदस्य

  • दृष्टि का केंद्रबिंदु: जिम्मेदार पर्यटन, डिजिटल नवाचार, सतत वित्तपोषण, युवा एवं महिला सशक्तिकरण, और पारदर्शी शासन

दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम को खेल नगरी के रूप में पुनर्विकसित किया जाएगा

भारत के खेल बुनियादी ढांचे को मज़बूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, नई दिल्ली के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम (JLN) को अब एक आधुनिक स्पोर्ट्स सिटी के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है। खेल मंत्रालय द्वारा घोषित इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत, मौजूदा स्टेडियम परिसर को एक अत्याधुनिक बहु-खेल केंद्र में बदलने का प्रस्ताव है, जिसमें एथलीटों के लिए आवासीय सुविधाएँ भी शामिल होंगी। यह पहल भारत की उस दीर्घकालिक दृष्टि को आगे बढ़ाती है, जिसके तहत विश्वस्तरीय प्रशिक्षण वातावरण तैयार कर खिलाड़ियों के समग्र विकास को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

पुनर्विकास में क्या शामिल है

यह प्रस्तावित परियोजना 102 एकड़ क्षेत्र में फैले मौजूदा स्टेडियम परिसर के पूर्ण पुनर्निर्माण को शामिल करती है। योजना की मुख्य विशेषताएँ हैं —

  • मौजूदा स्टेडियम संरचना को पूरी तरह तोड़कर आधुनिक रूप में पुनर्निर्माण।

  • कई खेल विधाओं के लिए सुविधाओं वाला एकीकृत खेल परिसर का निर्माण।

  • एथलीटों के लिए आवासीय सुविधाएँ, ताकि प्रशिक्षण, पुनर्प्राप्ति और निवास एक ही स्थान पर संभव हो सके।

  • इनडोर और आउटडोर एरेना, अभ्यास मैदान, उच्च प्रदर्शन केंद्र और दर्शक-अनुकूल स्थानों का विकास।

हालांकि यह परियोजना अभी प्रस्ताव चरण में है, लेकिन इसे कतर और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के सफल स्पोर्ट्स सिटी मॉडल्स के अनुरूप तैयार करने पर विचार किया जा रहा है।

वर्तमान स्थिति और चुनौतियाँ

  • फिलहाल परियोजना की योजना और मूल्यांकन का कार्य जारी है; समयसीमा और लागत का विस्तृत विवरण अभी तय नहीं हुआ है।

  • विकास कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा ताकि वर्तमान गतिविधियाँ बाधित न हों।

  • खेल महासंघों, शहरी नियोजन निकायों, एथलीटों और स्थानीय समुदायों के बीच सहयोग और समन्वय अत्यंत आवश्यक होगा।

  • परियोजना की सततता, पर्यावरणीय प्रभाव और विरासत संरक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा।

संभावित लाभ

खिलाड़ियों के लिए:

  • अत्याधुनिक और केंद्रीकृत प्रशिक्षण, विश्राम और प्रदर्शन सुधार सुविधाएँ।

  • चिकित्सा, पोषण और मनोवैज्ञानिक सहायता के साथ उच्च प्रदर्शन वातावरण।

जनता और शहर के लिए:

  • नागरिकों के लिए खेल और मनोरंजन सुविधाओं तक बेहतर पहुंच।

  • सामुदायिक आयोजन, विद्यालयी खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए अवसर।

प्रमुख स्थिर तथ्य

  • स्टेडियम: जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम (JLN), नई दिल्ली

  • परियोजना का प्रकार: बहु-खेल स्पोर्ट्स सिटी के रूप में संपूर्ण पुनर्विकास

  • क्षेत्रफल: 102 एकड़

  • मुख्य विशेषताएँ: मल्टी-स्पोर्ट एरेना, एथलीट आवास, प्रशिक्षण और पुनर्प्राप्ति क्षेत्र

  • स्थिति: प्रस्ताव चरण; समयसीमा और लागत तय नहीं

  • अंतरराष्ट्रीय मॉडल: कतर और ऑस्ट्रेलिया की स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाएँ

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