Pariksha Pe Charcha 2026: परीक्षा पे चर्चा 2026 के लिए 80 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वार्षिक संवाद कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ (PPC) के 9वें संस्करण को लेकर देश भर के छात्रों, टीचर्स और पेरेंट्स में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। ‘परीक्षा को उत्सव बनाएं, तनाव को कहें अलविदा’ के मंत्र के साथ शुरू हुए इस कार्यक्रम के लिए अब तक 80 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं, जो एक नया कीर्तिमान स्थापित करने की तरफ इशारा करता है।

फॉर्म भरने की लास्ट डेट

जानकारी के लिए बता दें कि PPC 2026 Registration के लिए अंतिम तिथि 11 जनवरी 2026 निर्धारित है। ऐसे में जो भी छात्र पीएम मोदी से मिलकर बातचीत करना चाहते हैं और प्रधानमंत्री आवास में समय व्यतीत करना चाहते हैं वे जल्द से जल्द ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर लें। स्टूडेंट्स के साथ ही पीपीसी 2026 के लिए टीचर्स और पेरेंट्स में आवेदन कर सकते हैं।

रजिस्ट्रेशन करने की स्टेप्स

  • परीक्षा पे चर्चा 2026 रजिस्ट्रेशन करने के लिए सर्वप्रथम आधिकारिक वेबसाइट innovateindia1.mygov.in पर जाना होगा।
  • वेबसाइट के होम पेज पर Participate Now पर क्लिक करना होगा।
  • अब आपकी अपनी कैटेगरी के अनुसार- Student (Self Participation), Student (Participation through Teacher login), Teacher, Parent का चुनाव कर उसके नीचे क्लिक टू पार्टिसिपेट पर क्लिक करें।
  • अपना पूरा नाम, मोबाइल नंबर/ ईमेल आईडी दर्ज करके पंजीकरण करें।
  • इसके बाद अन्य डिटेल भरकर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूर्ण कर लें।

परीक्षा पे चर्चा 2026 पंजीकरण फॉर्म लिंक

परीक्षा पे चर्चा के लिए रजिस्ट्रेशन फ्री

परीक्षा पे चर्चा के लिए रजिस्ट्रेशन फ्री में किया जा सकता है, इसके लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जा रहा है। आवेदन के लिए मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी की आवश्यकता पड़ेगी। इसके अलावा जिनके पास डिजिलॉकर की आईडी है वे इसके माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर सकते हैं।

व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए भारत-ओमान CEPA पर हस्ताक्षर

भारत और ओमान ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर कर खाड़ी क्षेत्र में भारत की आर्थिक सहभागिता को नई ऊँचाई दी है। यह समझौता प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और सुल्तान हैथम बिन तारिक की उपस्थिति में संपन्न हुआ, जो इसके रणनीतिक और राजनीतिक महत्व को दर्शाता है।

संक्षिप्त परिचय 

  • समझौते पर भारत की ओर से वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और ओमान की ओर से एच.ई. क़ैस बिन मोहम्मद अल यूसुफ ने हस्ताक्षर किए।
  • 2006 में अमेरिका के साथ FTA के बाद यह ओमान का पहला द्विपक्षीय व्यापार समझौता है।
  • पिछले छह महीनों में भारत का दूसरा FTA (यूके के बाद)।
  • भारत–ओमान द्विपक्षीय व्यापार 10 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है, जिसमें आगे बढ़ने की व्यापक संभावनाएँ हैं।

भारत–ओमान CEPA की प्रमुख विशेषताएँ

1. भारतीय वस्तुओं के लिए अभूतपूर्व बाज़ार पहुँच

  • ओमान की 98.08% टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क
  • भारत के 99.38% निर्यात मूल्य को कवर
  • 97.96% टैरिफ लाइनों पर तत्काल शुल्क समाप्ति

लाभान्वित क्षेत्र:

वस्त्र, चमड़ा, जूते, रत्न–आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, प्लास्टिक, फर्नीचर, कृषि उत्पाद, फार्मा व मेडिकल डिवाइसेज़, ऑटोमोबाइल।

इससे रोज़गार सृजन, MSME, कारीगरों और महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा।

2. भारत की टैरिफ प्रतिबद्धताएँ

  • 77.79% टैरिफ लाइनों पर उदारीकरण
  • ओमान से आयात के 94.81% मूल्य को कवर
  • संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा: बहिष्करण सूची और टैरिफ रेट कोटा (TRQ)

बहिष्कृत क्षेत्र:

डेयरी, चाय, कॉफी, रबर, तंबाकू; सोना–चाँदी बुलियन/आभूषण; जूते, खेल सामान; धातु स्क्रैप।

3. सेवाओं में ऐतिहासिक प्रतिबद्धताएँ (ओमान की पहली)

127 उप-क्षेत्रों में व्यापक सेवाएँ शामिल, जैसे—

  • आईटी/कंप्यूटर सेवाएँ, व्यवसायिक व पेशेवर सेवाएँ, ऑडियो–विज़ुअल, R&D, शिक्षा और स्वास्थ्य।
  • भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए बड़े अवसर, जहाँ वर्तमान में भारत का हिस्सा केवल 5.31% है।

4. भारतीय पेशेवरों के लिए बेहतर आवाजाही (Mode 4)

  • Intra-Corporate Transferees का कोटा 20% से बढ़ाकर 50%
  • Contractual Service Suppliers की अवधि 90 दिन से बढ़ाकर 2 वर्ष (आगे बढ़ाने का विकल्प)
  • लेखांकन, कराधान, वास्तुकला, चिकित्सा व संबद्ध क्षेत्रों में उदार प्रवेश।

5. भारतीय कंपनियों के लिए 100% FDI

  • प्रमुख सेवा क्षेत्रों में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति
  • भारतीय कंपनियों को ओमान में व्यावसायिक उपस्थिति विस्तार का अवसर।

6. ऐतिहासिक प्रावधान

  • पारंपरिक चिकित्सा (AYUSH) पर पहली बार सभी मोड्स में प्रतिबद्धता
  • मेडिकल वैल्यू ट्रैवल को बढ़ावा
  • फार्मा अनुमोदनों का त्वरित मार्ग: USFDA, EMA, UKMHRA मान्यताओं की पहचान

GMP निरीक्षण स्वीकृति

हलाल प्रमाणन और NPOP (ऑर्गेनिक) के लिए पारस्परिक मान्यता

गैर-टैरिफ बाधाओं के समाधान के प्रावधान।

रणनीतिक महत्व

  • खाड़ी क्षेत्र में भारत की आर्थिक उपस्थिति मज़बूत
  • गैर-प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के साथ उच्च-गुणवत्ता FTA रणनीति को बल
  • निर्यात, रोज़गार और आपूर्ति-श्रृंखला लचीलापन बढ़ेगा
  • ओमान को मध्य-पूर्व व अफ्रीका तक भारत की पहुँच का रणनीतिक हब
  • घरेलू संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के साथ समावेशी विकास।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 18 दिसंबर 2025 को भारत–ओमान CEPA पर हस्ताक्षर।
  • ओमान की 98.08% टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क, भारत के 99.38% निर्यात को कवर।
  • श्रम-प्रधान क्षेत्रों, MSME और महिला उद्यमों को बड़ा लाभ।
  • सेवाओं में 127 उप-क्षेत्रों में महत्वाकांक्षी प्रतिबद्धताएँ।
  • भारतीय पेशेवरों के लिए Mode 4 में बेहतर गतिशीलता।
  • ओमान में भारतीय कंपनियों के लिए 100% FDI की अनुमति।

PM मोदी को ऑर्डर ऑफ ओमान सम्मान मिला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ओमान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ ओमान’ से नवाजा गया है। इसके साथ ही उन्हें अब तक 29 देशों के सर्वोच्च विदेशी नागरिक सम्मान मिल चुके हैं। यह सम्मान न केवल प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत कूटनीति को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत और प्रभाव का भी संकेत देता है।

ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक ने प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान प्रदान किया। यह सम्मान उन्हें ओमान की दो दिवसीय राजकीय यात्रा के दौरान दिया गया। यह यात्रा उनके तीन देशों के दौरे का अंतिम चरण थी। ऑर्डर ऑफ ओमान ओमान का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1970 में सुल्तान कबूस बिन सईद ने की थी।

ऑर्डर ऑफ़ ओमान के बारे में

ऑर्डर ऑफ़ ओमान ओमान सल्तनत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह सम्मान पहले विश्व के प्रतिष्ठित नेताओं को प्रदान किया जा चुका है, जिनमें नेल्सन मंडेला, महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय, महारानी मैक्सिमा, जापान के सम्राट अकिहितो और जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला शामिल हैं। इस विशिष्ट सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शामिल होना भारत–ओमान द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती, परिपक्वता और गहराई को रेखांकित करता है।

भारत और ओमान के बीच मजबूत संबंध

यह सम्मान भारत और ओमान के बीच मजबूत और पुराने रिश्तों को सम्मान देने के लिए दिया जाता है। यह दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध, जनसंपर्क और वैश्विक शांति में योगदान के लिए दिया जाता है। इस अवसर को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि भारत और ओमान के कूटनीतिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे हो चुके हैं।

प्रधानमंत्री को अब तक 29 देशों के सर्वोच्च नागरिक सम्मान

ऑर्डर ऑफ ओमान के साथ प्रधानमंत्री मोदी को अब तक 29 देशों के सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल चुके हैं। इनमें ब्राजील, फ्रांस, रूस, अमेरिका, श्रीलंका, भूटान, मिस्र, कुवैत, यूएई, सऊदी अरब और फलस्तीन जैसे देशों के बड़े सम्मान शामिल हैं। यह उपलब्धि किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री के लिए दुर्लभ मानी जाती है। प्रधानमंत्री मोदी को मिले ये सम्मान भारत की मजबूत विदेश नीति और बढ़ती वैश्विक भूमिका को दिखाते हैं। ओमान का यह सम्मान बताता है कि भारत अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भरोसेमंद और प्रभावशाली देश के रूप में स्थापित हो चुका है।

मुख्य बिंदु 

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ओमान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ़ ओमान प्रदान किया गया।

  • यह प्रधानमंत्री मोदी का 29वाँ सर्वोच्च विदेशी राजकीय सम्मान है।

  • इससे पहले यह सम्मान नेल्सन मंडेला और महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय जैसी विश्व की प्रतिष्ठित हस्तियों को दिया जा चुका है।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने तीन देशों की यात्रा के तहत ओमान का दौरा किया।

  • इस दौरान भारत–ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) पर हस्ताक्षर किए गए।

  • इस यात्रा से रणनीतिक, आर्थिक और जन-जन के बीच संपर्क (people-to-people ties) और अधिक सशक्त हुए।

गोवा मुक्ति दिवस 2025: इतिहास, महत्व और समारोह

गोवा मुक्ति दिवस 2025 पूरे गोवा राज्य में 19 दिसंबर को गर्व और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया जाता है। यह दिन 1961 में गोवा को 450 से अधिक वर्षों के पुर्तगाली औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराए जाने की ऐतिहासिक घटना की स्मृति में मनाया जाता है। यह भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता, स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और गोवा के लोगों के आत्म-शासन के लंबे संघर्ष को सम्मान देता है। यद्यपि भारत 1947 में स्वतंत्र हुआ था, लेकिन गोवा को स्वतंत्रता बाद में मिली, जिससे यह दिन भारत के स्वतंत्रता पश्चात इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय बनता है।

गोवा पर औपनिवेशिक शासन

गोवा भारत के दक्षिण-पश्चिमी तट पर स्थित है और 1510 से पुर्तगाल के नियंत्रण में था। 15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के बाद भी गोवा, दमन और दीव पुर्तगाली क्षेत्रों के रूप में बने रहे। भारत ने प्रारंभ में गोवा के एकीकरण के लिए शांतिपूर्ण और कूटनीतिक प्रयास किए, लेकिन पुर्तगाल ने गोवा को उपनिवेश नहीं बल्कि अपना “ओवरसीज़ प्रांत” बताकर बातचीत से इनकार कर दिया। स्थिति इसलिए भी जटिल थी क्योंकि पुर्तगाल नाटो का सदस्य था और भारत पश्चिमी सैन्य गठबंधन के साथ टकराव से बचना चाहता था।

गोवा का स्वतंत्रता संग्राम

गोवा का स्वतंत्रता आंदोलन 18 जून 1946 को तब तेज़ हुआ, जब डॉ. राम मनोहर लोहिया और डॉ. जूलियाओ मेनेज़ेस ने पुर्तगालियों द्वारा लगाए गए सार्वजनिक सभाओं के प्रतिबंध को चुनौती दी। यद्यपि प्रारंभिक सविनय अवज्ञा आंदोलनों को दबा दिया गया, लेकिन इससे गोवा में व्यापक जन-प्रतिरोध की भावना जागृत हुई। समय के साथ विरोध प्रदर्शन, भूमिगत आंदोलन और राजनीतिक सक्रियता बढ़ती गई। दमन के बावजूद मुक्ति की माँग मजबूत बनी रही, जिससे गोवा का संघर्ष भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण, लेकिन अपेक्षाकृत कम चर्चित हिस्सा रहा।

ऑपरेशन विजय और गोवा की मुक्ति

निर्णायक मोड़ दिसंबर 1961 में आया, जब पुर्तगाली बलों ने भारतीय मछुआरों पर गोलीबारी की और भारतीय ग्रामीणों को बंधक बनाने का प्रयास किया। इसके बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने रक्षा मंत्री वी. के. कृष्ण मेनन की सलाह पर सैन्य कार्रवाई को स्वीकृति दी। 18 दिसंबर 1961 को ‘ऑपरेशन विजय’ शुरू किया गया, जिसमें लगभग 30,000 भारतीय सैनिकों के साथ थलसेना, नौसेना और वायुसेना ने संयुक्त रूप से भाग लिया। यह अभियान 48 घंटे से भी कम समय में पूरा हुआ और 19 दिसंबर 1961 को गोवा आधिकारिक रूप से मुक्त हो गया, जिससे 451 वर्षों का पुर्तगाली शासन समाप्त हुआ।

मुक्ति के बाद

मुक्ति के बाद गोवा को दमन और दीव के साथ एक केंद्र शासित प्रदेश के रूप में प्रशासित किया गया। मेजर जनरल कुन्हिरामन पलट कांडेत को पहला उपराज्यपाल नियुक्त किया गया, जिन्हें प्रशासनिक संक्रमण की ज़िम्मेदारी सौंपी गई। 30 मई 1987 को गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला और वह भारत का 25वाँ राज्य बना, जबकि दमन और दीव केंद्र शासित प्रदेश बने रहे। इससे गोवा का भारतीय संघ में पूर्ण संवैधानिक एकीकरण हुआ।

गोवा मुक्ति दिवस का महत्व

गोवा मुक्ति दिवस का राष्ट्रीय महत्व अत्यधिक है। यह भारत में यूरोपीय औपनिवेशिक शासन के अंतिम अंत का प्रतीक है और भारत की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के प्रति दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। यह दिवस सैनिकों और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को भी सम्मान देता है। ऑपरेशन विजय के दौरान 22 भारतीय सैनिकों और लगभग 30 पुर्तगाली सैनिकों ने अपने प्राण गंवाए, जिनका बलिदान भारत की एकता और स्वतंत्रता के लिए स्मरणीय है।

गोवा मुक्ति दिवस का आयोजन

यह दिवस पूरे गोवा में उत्साह के साथ मनाया जाता है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और नागरिकों को शुभकामनाएँ देते हैं। मशाल जुलूस, स्मृति सभाएँ और देशभक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। साथ ही गोवा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, संगीत और परंपराओं को प्रदर्शित करने वाले सांस्कृतिक आयोजन भी होते हैं, जो गोवावासियों में गर्व और पहचान की भावना को सुदृढ़ करते हैं।

मुख्य बिंदु:

  • गोवा मुक्ति दिवस प्रतिवर्ष 19 दिसंबर को मनाया जाता है।
  • 1961 में ऑपरेशन विजय के माध्यम से गोवा को पुर्तगाली शासन से मुक्त कराया गया।
  • गोवा पर पुर्तगाली शासन 450 से अधिक वर्षों तक रहा।
  • ऑपरेशन विजय 48 घंटे से भी कम समय में संपन्न हुआ।
  • इस अभियान में 22 भारतीय सैनिक शहीद हुए।
  • गोवा 1961 में केंद्र शासित प्रदेश और 1987 में पूर्ण राज्य बना।

एयर इंडिया ने ट्रैवल + लेज़र अवॉर्ड्स 2025 में बेस्ट डोमेस्टिक एयरलाइन का खिताब जीता

भारत की राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयर इंडिया ने एक बार फिर ट्रैवल + लीजर इंडिया एंड साउथ एशिया बेस्ट अवॉर्ड्स 2025 में ‘सर्वश्रेष्ठ घरेलू एयरलाइन’ का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया है। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब एयर इंडिया को यह सम्मान मिला है। यह उपलब्धि ऐसे समय पर आई है जब एयर इंडिया वैश्विक विमानन क्षेत्र के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी परिवर्तन कार्यक्रम से गुजर रही है, जिसमें फ्लीट नवीनीकरण, सेवा गुणवत्ता और ग्राहक अनुभव पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

ट्रैवल + लीजर इंडिया एंड साउथ एशिया अवॉर्ड्स के बारे में

इन अवॉर्ड्स का आयोजन Travel + Leisure India and South Asia द्वारा किया जाता है।

ये पूरी तरह पाठक/यात्री आधारित (reader-voted) पुरस्कार हैं, न कि जूरी द्वारा तय किए गए।

यात्री अपने वास्तविक यात्रा अनुभव के आधार पर वोट करते हैं।

मूल्यांकन के प्रमुख मानदंडों में शामिल हैं:

  • सेवा गुणवत्ता
  • आराम और सुविधा
  • परिचालन विश्वसनीयता
  • समग्र यात्रा अनुभव

इसलिए यह पुरस्कार सीधे तौर पर यात्रियों के भरोसे और पसंद को दर्शाता है।

इस सम्मान का महत्व

यह भारतीय यात्रियों की बढ़ती अपेक्षाओं को दर्शाता है।

एयर इंडिया के प्रयासों की पुष्टि करता है, जैसे—

  • बेहतर ऑनबोर्ड आराम
  • निरंतर और बेहतर सेवा
  • अधिक परिचालन विश्वसनीयता

घरेलू विमानन बाजार में एयर इंडिया की विश्वसनीयता और साख को और मजबूत करता है।

ग्राहक विश्वास की भूमिका

  • एयर इंडिया के अनुसार, यह पुरस्कार घरेलू मार्गों पर यात्रियों द्वारा दिखाए गए विश्वास और भरोसे का प्रमाण है।
  • एयरलाइन ने अपने फ्रंटलाइन स्टाफ, केबिन क्रू और ग्राउंड ऑपरेशंस टीम की भूमिका को भी रेखांकित किया, जो यात्रियों को एकसमान और बेहतर अनुभव देने में अहम भूमिका निभाते हैं।
  • एयर इंडिया के मुख्य ग्राहक अनुभव अधिकारी राजेश डोगरा ने कहा कि लगातार दूसरे वर्ष यह पुरस्कार जीतना एयरलाइन की विश्वस्तरीय यात्रा अनुभव देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

एयर इंडिया की परिवर्तन यात्रा

  • यह सम्मान टाटा समूह में वापसी के बाद एयर इंडिया के व्यापक परिवर्तन चरण के साथ मेल खाता है।
  • एयर इंडिया स्वयं को एक वैश्विक विमानन ब्रांड के रूप में पुनर्स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है।
  • इस परिवर्तन का एक प्रमुख स्तंभ है फ्लीट आधुनिकीकरण।
  • एयर इंडिया ने 570 नए विमानों का ऑर्डर दिया है, जो विमानन इतिहास के सबसे बड़े ऑर्डर्स में से एक है।
  • इसके अलावा, USD 400 मिलियन का रेट्रोफिट कार्यक्रम मौजूदा विमानों को अपग्रेड करने के लिए चल रहा है।
  • 2026 के अंत तक, एयर इंडिया का अधिकांश बेड़ा नया या पूरी तरह अपग्रेडेड होगा।

मुख्य बिंदु 

  • एयर इंडिया को ट्रैवल + लीजर अवॉर्ड्स 2025 में सर्वश्रेष्ठ घरेलू एयरलाइन चुना गया।
  • यह लगातार दूसरी बार मिला सम्मान है।
  • पुरस्कार पूरी तरह यात्रियों के वोट पर आधारित है।
  • एयर इंडिया 570 नए विमानों के ऑर्डर के साथ बड़े परिवर्तन से गुजर रही है।
  • USD 400 मिलियन के रेट्रोफिट कार्यक्रम के तहत मौजूदा बेड़े को उन्नत किया जा रहा है।
  • 2026 तक अधिकांश बेड़ा नया या अपग्रेडेड होगा।

भारत AI मॉडल्स के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार

बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज़ (BofA) की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एप्लिकेशनों के सक्रिय उपयोगकर्ताओं का दुनिया का सबसे बड़ा वैश्विक केंद्र बनकर उभरा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ओपनएआई के चैटजीपीटी, गूगल के जेमिनी और पर्प्लेक्सिटी जैसे प्रमुख AI प्लेटफॉर्म्स के लिए दैनिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं (DAUs) और मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं (MAUs) — दोनों के मामले में भारत विश्व में शीर्ष स्थान पर है।

AI ऐप उपयोग में भारत की वैश्विक बढ़त

BofA रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख AI और लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) ऐप्स के वैश्विक उपयोगकर्ताओं का एक बड़ा हिस्सा भारत से आता है। लाखों भारतीय उपयोगकर्ता रोज़ाना चैटबॉट्स, AI असिस्टेंट्स और जनरेटिव टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे भारत सक्रिय उपयोगकर्ता आधार के लिहाज़ से दुनिया का सबसे बड़ा बाज़ार बन गया है।

इस तेज़ वृद्धि के पीछे कई प्रमुख कारण हैं—

  • स्मार्टफोन की व्यापक उपलब्धता
  • किफायती मोबाइल डेटा दरें
  • युवा और तकनीक-प्रेमी आबादी
  • शिक्षा, उत्पादकता, कोडिंग और कंटेंट निर्माण में AI का बढ़ता उपयोग

टेलीकॉम सेक्टर पर प्रभाव

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की टेलीकॉम कंपनियाँ AI उपयोग में इस उछाल से लाभ उठाने की मजबूत स्थिति में हैं। रिलायंस जियो और भारती एयरटेल से उम्मीद है कि वे AI-आधारित सेवाओं के समर्थन और एकीकरण को बढ़ाएँगी, जिससे नए राजस्व अवसर पैदा होंगे।

BofA ने टेलीकॉम कंपनियों के लिए आय के प्रमुख स्रोत बताए हैं—

  • डेटा खपत में वृद्धि
  • प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (ARPU) में सुधार
  • वैल्यू-ऐडेड और AI-आधारित सेवाओं की अपसेलिंग

डेटा उपयोग और ARPU में बढ़ोतरी

जनरेटिव AI ऐप्स डेटा-गहन होते हैं, जिनमें क्लाउड इंटरेक्शन, रियल-टाइम रिस्पॉन्स और मल्टीमीडिया प्रोसेसिंग शामिल होती है। इनके बढ़ते उपयोग से प्रति उपयोगकर्ता मोबाइल डेटा खपत स्वाभाविक रूप से बढ़ती है।

BofA के अनुसार, इससे टेलीकॉम कंपनियाँ—

  • प्रति उपयोगकर्ता डेटा उपयोग बढ़ा सकेंगी
  • प्रीमियम या AI-केंद्रित डेटा प्लान पेश कर सकेंगी
  • ARPU में वृद्धि कर सकेंगी, जो टेलीकॉम मुनाफ़े का एक अहम संकेतक है

मुख्य बिंदु:

  • भारत AI ऐप्स के दैनिक और मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं में विश्व में पहले स्थान पर है।
  • यह निष्कर्ष बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज़ (BofA) की रिपोर्ट में सामने आया है।
  • प्रमुख AI ऐप्स में ChatGPT, Google Gemini और Perplexity शामिल हैं।
  • रिलायंस जियो और भारती एयरटेल AI उपयोग से कमाई बढ़ा सकती हैं।
  • AI के ज़रिये डेटा खपत, ARPU और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

कश्मीर घाटी में मिलिट्री स्पेशल ट्रेन से पहुंचे टैंक और आर्टिलरी गन

भारत की रक्षा लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशनल तैयारियों को एक महत्वपूर्ण बढ़ावा देते हुए भारतीय सेना ने विशेष सैन्य ट्रेन के माध्यम से कश्मीर घाटी में टैंक और आर्टिलरी गन सफलतापूर्वक शामिल (इंडक्ट) की हैं। यह उपलब्धि एक बड़ी लॉजिस्टिक मील का पत्थर मानी जा रही है, जो रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में भारी सैन्य साजो-सामान को तेज़ी से पहुँचाने की सेना की क्षमता को दर्शाती है।

लॉजिस्टिक ऑपरेशन का विवरण:

यह तैनाती एक वैधता (वैलिडेशन) अभ्यास का हिस्सा थी, जिसके तहत भारतीय सेना ने जम्मू क्षेत्र से कश्मीर घाटी के अनंतनाग तक टैंकों, आर्टिलरी गनों और डोज़रों का सफलतापूर्वक परिवहन किया। यह मूवमेंट विशेष रूप से समन्वित सैन्य ट्रेन के माध्यम से किया गया, जो भारतीय सेना और उत्तरी रेलवे के बीच निर्बाध तालमेल को दर्शाता है। यह ऑपरेशन घाटी के भीतर गहराई तक भारी बख़्तरबंद हथियारों को समयबद्ध और प्रभावी ढंग से तैनात करने की सेना की क्षमता को प्रमाणित करता है, जिससे उसकी परिचालन लचीलापन (ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी) में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

तैनाती का रणनीतिक महत्व:

कश्मीर घाटी में टैंकों और आर्टिलरी की तैनाती रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, प्रतिकूल जलवायु और संवेदनशील सुरक्षा वातावरण के लिए जाना जाता है। भारी सैन्य उपकरणों की त्वरित तैनाती से भारतीय सेना की उभरती सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने की क्षमता मजबूत होती है। इसके साथ ही, यह सफल परिवहन भारत द्वारा रेल-आधारित सैन्य लॉजिस्टिक्स में किए गए निवेश की उपयोगिता को भी प्रमाणित करता है, जो अग्रिम क्षेत्रों में दीर्घकालिक सैन्य तैनाती और संचालन को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

बढ़ी हुई गतिशीलता और तैयारी:

सेना के अनुसार, यह अभ्यास भारत के उत्तरी क्षेत्रों में उसकी बढ़ी हुई गतिशीलता और सुदृढ़ लॉजिस्टिक क्षमताओं को प्रदर्शित करता है। भारी सैन्य साजो-सामान का कुशल रेल परिवहन सड़क काफिलों पर निर्भरता को कम करता है, जो अक्सर मौसम की बाधाओं और कठिन भू-भाग के कारण प्रभावित होते हैं। ऐसी क्षमताएँ त्वरित बल-संगठन, निरंतर सैन्य अभियानों और संवेदनशील सीमाओं पर प्रभावी प्रतिरोध सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

मुख्य बिंदु:

  • भारतीय सेना ने कश्मीर घाटी में टैंक और आर्टिलरी तैनात की।
  • यह तैनाती एक विशेष सैन्य ट्रेन के माध्यम से की गई।
  • सैन्य उपकरण जम्मू क्षेत्र से अनंतनाग तक पहुँचाए गए।
  • इससे बढ़ी हुई गतिशीलता और लॉजिस्टिक क्षमता का प्रदर्शन हुआ।
  • इस अभियान में उत्तरी रेलवे का सहयोग रहा।

भारत टैक्सी जनवरी 2026 में लॉन्च होगी, जानें सबकुछ

भारत का राइड-हेलिंग बाजार जनवरी 2026 से एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ने वाला है, जब भारत टैक्सी (Bharat Taxi) का पूर्ण रूप से संचालन शुरू होगा। यह एक स्वदेशी, ड्राइवर-स्वामित्व वाला मोबिलिटी प्लेटफॉर्म है, जिसे ओला, उबर और रैपिडो जैसे स्थापित ऐप्स को चुनौती देने के उद्देश्य से लॉन्च किया जा रहा है। भारत टैक्सी का संचालन सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है और इसे ऐसे वैकल्पिक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसमें ड्राइवरों के कल्याण और निष्पक्ष आय को प्राथमिकता दी गई है।

भारत टैक्सी क्या है

  • भारत टैक्सी एक ऐप-आधारित राइड-हेलिंग सेवा है।
  • दिसंबर 2025 में नई दिल्ली और गुजरात के कुछ हिस्सों में इसका पायलट संचालन शुरू हुआ।
  • रिपोर्ट्स के अनुसार, जनवरी 2026 में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पूर्ण लॉन्च की तैयारी है।
  • यह खुद को दुनिया का सबसे बड़ा ड्राइवर-स्वामित्व वाला मोबिलिटी नेटवर्क बताता है।

प्लेटफॉर्म से 1 लाख से अधिक ड्राइवर जुड़े हैं, जिनमें:

  • कार ड्राइवर
  • ऑटो-रिक्शा चालक
  • बाइक टैक्सी ऑपरेटर शामिल हैं।
  • अधिकांश ड्राइवर दिल्ली और गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र से हैं।

ज़ीरो-कमीशन मॉडल: सबसे बड़ी खासियत

  • भारत टैक्सी की सबसे बड़ी पहचान इसका शून्य कमीशन मॉडल है।
  • शुरुआती चरण में ड्राइवरों को किराये का 100% हिस्सा मिलेगा।
  • इसके विपरीत, ओला और उबर जैसे प्लेटफॉर्म आमतौर पर 20–30% कमीशन लेते हैं।

भविष्य में सहकारी संस्था लगभग 20% शुल्क रख सकती है, लेकिन इसे:

मुनाफे के रूप में नहीं

बल्कि ड्राइवरों को प्रोत्साहन (इंसेंटिव) के तौर पर वापस वितरित किया जाएगा।

इस मॉडल का उद्देश्य ड्राइवरों की आय स्थिरता बढ़ाना और मौजूदा प्लेटफॉर्म्स पर व्याप्त असंतोष को कम करना है।

भारत टैक्सी ऐप की विशेषताएं

  • भारत टैक्सी ऐप Android और iOS दोनों पर उपलब्ध है।
  • अब तक इसके 75,000 से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं।
  • ऐप में ओला और उबर जैसे परिचित फीचर्स दिए गए हैं, जिससे यात्रियों को इस्तेमाल में आसानी हो।

मुख्य फीचर्स:

  • पारदर्शी किराया गणना
  • बहुभाषी समर्थन
  • रियल-टाइम वाहन ट्रैकिंग
  • 24×7 कस्टमर सपोर्ट
  • सुरक्षा पर विशेष जोर, ड्राइवर सत्यापन और दिल्ली पुलिस सहित एजेंसियों से एकीकरण

राइड विकल्प:

  • एसी
  • प्रीमियम
  • नॉन-एसी
  • एक्सएल कैब

इसके अलावा, ऐप को मेट्रो जैसी सार्वजनिक परिवहन सेवाओं से जोड़ा गया है, जिससे एक ही ऐप के माध्यम से मल्टी-मॉडल यात्रा की योजना बनाई जा सके।

किराया संरचना

भारत टैक्सी ने प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी किराया घोषित किया है:

  • न्यूनतम किराया: ₹30 (4 किमी तक)
  • 4 से 12 किमी: ₹23 प्रति किमी
  • 12 किमी से अधिक: ₹18 प्रति किमी

प्लेटफॉर्म का दावा है कि पिकअप समय अक्सर 2 मिनट के भीतर होगा और किराए में बार-बार बदलाव (फ्रीक्वेंट फ्लक्चुएशन) नहीं किए जाएंगे।

ओला और उबर से कैसे अलग है भारत टैक्सी

  • सर्ज प्राइसिंग से परहेज़: आमतौर पर सर्ज प्राइसिंग नहीं होगी, केवल असाधारण परिस्थितियों में सीमित डायनेमिक प्राइसिंग संभव।
  • ड्राइवर-स्वामित्व: भारत टैक्सी ड्राइवरों के स्वामित्व वाली सहकारी संस्था है, जबकि ओला और उबर निजी कॉरपोरेट प्लेटफॉर्म हैं।
  • इससे ड्राइवरों को निर्णय-प्रक्रिया में अधिक भागीदारी मिलती है।
  • एयरपोर्ट और प्रमुख स्थानों पर समर्पित भारत टैक्सी स्टैंड स्थापित करने की योजना भी है।
  • हालांकि, यह भी संभव है कि कई ड्राइवर एक साथ भारत टैक्सी और ओला/उबर/रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करते रहें।

मुख्य बिंदु 

  • भारत टैक्सी एक ड्राइवर-स्वामित्व वाला सहकारी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है।
  • इसका संचालन सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड कर रही है।
  • शुरुआती चरण में शून्य कमीशन मॉडल लागू होगा।
  • दिसंबर 2025 में दिल्ली और गुजरात में पायलट संचालन शुरू हुआ।
  • जनवरी 2026 में दिल्ली में पूर्ण लॉन्च अपेक्षित है।

भारत और सऊदी के बीच मजूबत होगी रणनीतिक साझेदारी

भारत और सऊदी अरब ने अपने बढ़ते रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए द्विपक्षीय वीज़ा छूट समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आधिकारिक यात्राओं को सरल और सुगम बनाना तथा भारत–सऊदी अरब रणनीतिक साझेदारी परिषद (Strategic Partnership Council) के तहत सहयोग को और सशक्त करना है। यह पहल कूटनीति, व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में विस्तृत होते द्विपक्षीय संबंधों को दर्शाती है।

वीज़ा छूट समझौते पर हस्ताक्षर

  • यह समझौता रियाद (सऊदी अरब) में संपन्न हुआ।
  • भारत की ओर से समझौते पर सुहेल अज़ाज़ ख़ान, सऊदी अरब में भारत के राजदूत, ने हस्ताक्षर किए।
  • सऊदी अरब की ओर से अब्दुलमजीद बिन राशिद अलस्मारी, विदेश मंत्रालय के प्रोटोकॉल मामलों के उप मंत्री, ने हस्ताक्षर किए।

समझौते के प्रमुख प्रावधान

  • भारत और सऊदी अरब एक-दूसरे के अल्पकालिक वीज़ा (short-stay visa) की आवश्यकता से आपसी छूट प्रदान करेंगे।
  • यह छूट केवल राजनयिक (Diplomatic), विशेष (Special) और आधिकारिक (Official) पासपोर्ट धारकों पर लागू होगी।
  • यह समझौता केवल आधिकारिक यात्राओं तक सीमित है।
  • सामान्य पासपोर्ट धारकों या दीर्घकालिक प्रवास पर यह लागू नहीं होगा।
  • इसका मुख्य उद्देश्य प्रक्रियात्मक देरी को कम करना और द्विपक्षीय कार्यों से जुड़े अधिकारियों की आवाजाही को सुगम बनाना है।

उद्देश्य और रणनीतिक महत्व

भारतीय दूतावास के अनुसार, यह समझौता भारत–सऊदी अरब रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए किया गया है।

अधिकारियों के लिए यात्रा प्रक्रियाओं के सरलीकरण से:

  • बेहतर समन्वय
  • तेज़ निर्णय-प्रक्रिया
  • नियमित उच्च-स्तरीय संवाद को बढ़ावा मिलेगा।

यह समझौता भारत–सऊदी अरब रणनीतिक साझेदारी परिषद के प्रभावी संचालन में सहायक होगा, जो द्विपक्षीय सहयोग के लिए प्रमुख संस्थागत ढांचा है।

आसान आधिकारिक यात्रा से प्राथमिक क्षेत्रों में चर्चा और सहयोग को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

मुख्य बिंदु 

  • भारत और सऊदी अरब ने रियाद में द्विपक्षीय वीज़ा छूट समझौते पर हस्ताक्षर किए।
  • समझौता राजनयिक, विशेष और आधिकारिक पासपोर्ट धारकों पर लागू होगा।
  • अल्पकालिक वीज़ा आवश्यकता से आपसी छूट प्रदान की गई है।
  • यह समझौता भारत–सऊदी अरब रणनीतिक साझेदारी परिषद को समर्थन देता है।
  • इसका उद्देश्य आधिकारिक यात्राओं और द्विपक्षीय आदान-प्रदान को सुगम बनाना है।
  • यह पहल भारत–पश्चिम एशिया संबंधों के सुदृढ़ीकरण को दर्शाती है।

भारत में कॉफी बागान: वैश्विक रैंक, क्षेत्र, इतिहास, आवश्यकताएँ और महत्व

भारत में कॉफी बागान एक वैश्विक रूप से महत्वपूर्ण कृषि गतिविधि है, जो जैव-विविधता संरक्षण, जनजातीय आजीविका, निर्यात आय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से गहराई से जुड़ी हुई है। कच्चे तेल के बाद कॉफी दुनिया की दूसरी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली वस्तु है और प्रतिदिन विश्वभर में लगभग 2.25 अरब कप कॉफी का उपभोग होता है। भारत विश्व में कॉफी उत्पादन में 7वें स्थान पर है और अपनी उच्च गुणवत्ता, छाया में उगाई गई (shade-grown) तथा सतत (sustainable) कॉफी के लिए जाना जाता है।

कॉफी उत्पादन में भारत की वैश्विक स्थिति

भारत कॉफी उत्पादन और खेती के क्षेत्रफल के आधार पर विश्व में 7वें स्थान पर है। देश में लगभग 4.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कॉफी बागान फैले हुए हैं, जो—

  • कृषि निर्यात
  • ग्रामीण रोजगार
  • विदेशी मुद्रा अर्जन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

भारत के कुल कॉफी उत्पादन का लगभग 70% निर्यात किया जाता है, जिससे यह एक प्रमुख निर्यातोन्मुख बागानी फसल बन जाती है।

भारत में कॉफी बागान की प्रमुख विशेषताएँ

भारतीय कॉफी को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में प्रीमियम पहचान मिलती है, क्योंकि यह—

  • पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में छाया में उगाई जाती है
  • मृदु अम्लता (mild acidity) और समृद्ध सुगंध वाली होती है
  • जनजातीय एवं लघु कृषकों द्वारा सतत खेती पद्धतियों से उत्पादित होती है
  • रसायनों का न्यूनतम उपयोग कर जैव-विविधता संरक्षण को बढ़ावा देती है

भारत में दो प्रमुख किस्में उगाई जाती हैं—

  • अरेबिका (Arabica): बेहतर गुणवत्ता और सुगंध के लिए प्रसिद्ध
  • रोबस्टा (Robusta): अधिक उपज और तीव्र स्वाद के लिए जानी जाती है

दोनों किस्में लगभग समान अनुपात में उत्पादित होती हैं।

भारत में कॉफी बागान का ऐतिहासिक विकास

उत्पत्ति और परिचय

  • कॉफी की उत्पत्ति इथियोपिया के काफ़ा प्रांत में मानी जाती है
  • अरबों ने यमन में इसका व्यवस्थित उत्पादन कर व्यापार मार्ग विकसित किए

बाबा बूदन का योगदान (लगभग 1600 ई.)

भारत में कॉफी की शुरुआत तब हुई जब सूफी संत बाबा बूदन यमन से सात कॉफी बीज लाकर कर्नाटक के बाबा बूदन गिरि में बोए।

औपनिवेशिक विस्तार

  • 18वीं शताब्दी में अंग्रेज़ों ने दक्षिण भारत में वाणिज्यिक कॉफी बागान विकसित किए
  • सड़कों, बंदरगाहों और निर्यात प्रणालियों का विकास हुआ
  • भारतीय कॉफी को छाया में उगाई गई उच्च गुणवत्ता वाली कॉफी के रूप में वैश्विक पहचान मिली

कॉफी बागान के लिए जलवायु और मृदा आवश्यकताएँ

  • मृदा (Soil)
  • गहरी, उपजाऊ, जैविक तत्वों से भरपूर और अच्छी जल-निकास वाली
  • हल्की अम्लीय मृदा सर्वाधिक उपयुक्त
  • जलवायु (Climate)
  • वर्षा: 1000–2500 मिमी

तापमान:

  • अरेबिका: 15–25°C
  • रोबस्टा: 20–30°C
  • आर्द्रता: 70–90%

ऊँचाई और छाया

  • अरेबिका: 1000–1500 मीटर
  • रोबस्टा: 500–1000 मीटर

प्राकृतिक छाया वृक्ष आवश्यक, जो पौधों की रक्षा और गुणवत्ता बढ़ाते हैं

भारत के प्रमुख कॉफी उत्पादक क्षेत्र

  • पारंपरिक क्षेत्र (पश्चिमी घाट) – कुल उत्पादन का लगभग 96%
  • कर्नाटक: 70% से अधिक उत्पादन (कोडागु/कूर्ग, चिक्कमगलूरु, हसन)
  • केरल: प्रमुख रोबस्टा उत्पादक (वायनाड, इडुक्की)
  • तमिलनाडु: उच्च गुणवत्ता अरेबिका (नीलगिरि, डिंडीगुल, थेनी)

गैर-पारंपरिक क्षेत्र (पूर्वी घाट)

आंध्र प्रदेश: अराकू घाटी

ओडिशा: कोरापुट, रायगढ़

(जनजातीय व जैविक खेती पर आधारित)

उत्तर-पूर्वी भारत

असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, त्रिपुरा

कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया की भूमिका

  • स्थापना: कॉफी अधिनियम, 1942
  • मंत्रालय: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय
  • मुख्यालय: बेंगलुरु

प्रमुख कार्य

एकीकृत कॉफी विकास परियोजना

गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में विस्तार

जनजातीय सशक्तिकरण

निर्यात संवर्धन और ब्रांडिंग

आर्थिक और पारिस्थितिक महत्व

वार्षिक उत्पादन: लगभग 3.6 लाख टन

निर्यात: 128 से अधिक देशों को

घरेलू खपत: 2012 (84,000 टन) → 2023 (91,000 टन)

छाया-आधारित एग्रो-फॉरेस्ट्री से जैव-विविधता संरक्षण

विशेष कॉफी किस्में

मॉनसूनड मालाबार

मैसूर नगेट्स एक्स्ट्रा बोल्ड

कापी रॉयल

हालिया विकास

5वां विश्व कॉफी सम्मेलन 2023 – बेंगलुरु

GI टैग: कूर्ग अरेबिका, वायनाड रोबस्टा, अराकू वैली अरेबिका आदि

निर्यात वृद्धि:

  • 2020–21: USD 719 मिलियन
  • 2023–24: USD 1.29 बिलियन
  • 2024–25: USD 1.8 बिलियन
  • GST में कमी (5%), और मुक्त व्यापार समझौतों से लाभ
  • जनजातीय मॉडल: कोरापुट कॉफी (TDCCOL)

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