UK के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मिलकर एक नई अंतर्राष्ट्रीय पहल शुरू की है, जिसका मकसद होर्मुज़ जलडमरूमध्य को सुरक्षित करना है। यह दुनिया के सबसे अहम शिपिंग मार्गों में से एक है। इस वर्चुअल बैठक में भारत समेत करीब 40 देशों ने हिस्सा लिया। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब मध्य-पूर्व में शांति की स्थिति अस्थिर बनी हुई है। चूंकि दुनिया भर की ऊर्जा आपूर्ति काफी हद तक इसी मार्ग पर निर्भर करती है, इसलिए इस पहल का उद्देश्य सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना और वाणिज्यिक शिपिंग की रक्षा करना है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के लिए वैश्विक प्रयास
इस पहल को औपचारिक रूप से ‘होर्मुज़ जलडमरूमध्य समुद्री नौवहन स्वतंत्रता पहल’ कहा जाता है, और इसे समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
इस पहल का नेतृत्व कीर स्टारमर और इमैनुएल मैक्रॉन ने किया, और उनके प्रयासों का मुख्य ज़ोर इन बातों पर है:
- नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना
- वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा करना
- और वाणिज्यिक शिपिंग कार्यों को समर्थन देना
इस बैठक में लगभग 40 देशों ने हिस्सा लिया, और भारत के विदेश मंत्रालय ने बैठक में अपनी भागीदारी की पुष्टि की है। इसके अलावा, संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस बैठक में भाग नहीं लिया।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है।
- यह फ़ारस की खाड़ी को दुनिया के वैश्विक बाज़ारों से जोड़ता है।
- इसके अलावा, दुनिया के तेल और गैस की खेप का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुज़रता है।
- इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट से वैश्विक ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और व्यापार में अस्थिरता पैदा हो सकती है।
नाकाबंदी और युद्ध: संकट की वजह क्या है?
यह संकट तब और बढ़ गया, जब 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और इज़राइल द्वारा शुरू की गई सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने नाकाबंदी लगा दी।
मुख्य घटनाक्रमों में शामिल हैं:
- ईरान ने जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) से होने वाली जहाज़ों की आवाजाही पर रोक लगा दी है।
- अमेरिका ने भी ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकाबंदी लगा दी है।
- इसके अलावा, सैकड़ों जहाज़ फँस गए और 20,000 से ज़्यादा नाविक भी वहीं फँसकर रह गए।
वैश्विक आर्थिक प्रभाव
- यूरोपीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि होर्मुज़ संकट के दुनिया भर में गंभीर आर्थिक परिणाम हो सकते हैं।
- इस व्यवधान के कारण ईंधन और तेल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों के चलते खाद्य पदार्थों की कमी का जोखिम बढ़ गया है।
- इसके अलावा, जेट ईंधन की कमी के कारण कई उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं, और वैश्विक मुद्रास्फीति पर भी दबाव बढ़ गया है।


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