पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए, भारत सरकार ने ‘RELIEF’ (Resilience & Logistics Intervention for Export Facilitation) योजना का विस्तार किया है। इस योजना का उद्देश्य उन निर्यातकों को सहायता प्रदान करना है, जिन्हें लॉजिस्टिक्स और बीमा की बढ़ती लागत का सामना करना पड़ रहा है। यह योजना ‘निर्यात संवर्धन मिशन’ के तहत शुरू की गई थी। अब इसकी पात्रता सूची में मिस्र और जॉर्डन को भी शामिल कर लिया गया है, और यह प्रभावित क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय निर्यातकों को व्यापक सहायता प्रदान करेगी।
RELIEF योजना क्या है?
- RELIEF योजना 19 मार्च, 2026 को शुरू की गई थी। यह एक समय-सीमा वाली पहल है, जिसका उद्देश्य निर्यातकों को खाड़ी और पश्चिम एशिया क्षेत्रों में संघर्ष और अस्थिरता के कारण उत्पन्न बाधाओं से निपटने में मदद करना है।
- यह निर्यात चक्र के दौरान वित्तीय और लॉजिस्टिकल सहायता भी प्रदान करता है, जिसमें पिछली खेपें और आगामी निर्यात—दोनों शामिल हैं।
- यह योजना एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (ECGC) के माध्यम से लागू की जाती है, जो नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
निर्यातकों के लिए मुख्य लाभ
यह योजना निर्यातकों को—और विशेष रूप से MSMEs को—इन तरीकों से लक्षित राहत प्रदान करती है:
- निर्यात शिपमेंट के लिए बीमा सहायता।
- नई निर्यात ऋण नीतियों को सुगम बनाना।
- माल ढुलाई और बीमा की उच्च लागत की प्रतिपूर्ति।
- साथ ही, पूरी हो चुकी और भविष्य की, दोनों तरह की शिपमेंट के लिए कवरेज।
ये उपाय उस वित्तीय दबाव को कम करने के लिए तैयार किए गए हैं, जो युद्ध से जुड़े जोखिमों और समुद्री परिवहन की बढ़ती लागतों के कारण उत्पन्न हुआ था।
मिस्र और जॉर्डन को क्यों शामिल किया गया?
- मिस्र और जॉर्डन जैसे देशों को शामिल करना इस बात का संकेत है कि खाड़ी क्षेत्र से बाहर भी भू-राजनीतिक उथल-पुथल का असर बढ़ रहा है।
- पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका के गलियारे में कई व्यापार मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिसके कारण देरी हो रही है, बीमा प्रीमियम बढ़ गया है और माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ गया है।
- इसके अलावा, इन देशों को शामिल करके सरकार का लक्ष्य उन निर्यातकों को सुरक्षा देना है जो इन विस्तारित व्यापार मार्गों से जुड़े हैं, और इससे निर्यात का काम भी ज़्यादा सुचारू रूप से चल पाएगा।
व्यापक भागीदारी के लिए नई नीति स्पष्टीकरण
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो निर्यातक 16 मार्च, 2026 के बाद नई ECGC होल टर्नओवर पॉलिसी लेंगे, वे इस योजना के तहत मिलने वाले लाभों के पात्र होंगे।
इस कदम से यह उम्मीद की जाती है कि:
- यह ज़्यादा से ज़्यादा निर्यातकों को इस योजना से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
- यह स्पष्टता और पहुँच में आसानी भी प्रदान करेगा।
- यह नए और छोटे निर्यातकों को सहायता देगा।


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