जेपी मॉर्गन भारत में एशिया का सबसे बड़ा GCC स्थापित करेगा

भारत उच्च-मूल्य वाली व्यावसायिक गतिविधियों के लिए वैश्विक कंपनियों की पसंदीदा मंज़िल बना हुआ है। इसी कड़ी में भारत के वैश्विक सेवा पारिस्थितिकी तंत्र को एक बड़ा प्रोत्साहन देते हुए, अमेरिकी बैंकिंग दिग्गज जेपी मॉर्गन ने मुंबई में एशिया का सबसे बड़ा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) स्थापित करने की योजना की घोषणा की है। यह कदम वैश्विक वित्त और प्रौद्योगिकी मानचित्र पर भारत की स्थिति को और सुदृढ़ करता है।

पृष्ठभूमि

जेपी मॉर्गन ने पिछले कुछ वर्षों में भारत में अपनी उपस्थिति लगातार बढ़ाई है। केवल पिछले दो वर्षों में ही बैंक ने लगभग 10 लाख वर्ग फुट कार्यालय स्थान लिया है। कुशल मानव संसाधन, लागत-लाभ, और मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम के कारण भारत वैश्विक बैंकों के लिए एक पसंदीदा केंद्र बन गया है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

यह विकास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह—

  • भारत में एशिया का सबसे बड़ा जीसीसी स्थापित करेगा
  • बड़े पैमाने पर उच्च-कौशल रोजगार सृजित करेगा
  • वैश्विक बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में भारत की भूमिका को मजबूत करेगा
  • अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित करेगा

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) क्या है?

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी की ऑफशोर इकाई होती है, जो निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्य संभालती है—

  • सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवाएँ
  • वित्तीय संचालन और अनुपालन
  • डेटा एनालिटिक्स और जोखिम प्रबंधन
  • अनुसंधान, नवाचार और सपोर्ट सेवाएँ

भारत दुनिया में सबसे अधिक जीसीसी की मेज़बानी करता है, जिससे वह ज्ञान-आधारित सेवाओं का वैश्विक केंद्र बन चुका है।

एक नज़र में प्रमुख बिंदु

  • कंपनी: जेपी मॉर्गन
  • स्थान: पवई, मुंबई
  • क्षेत्रफल: 20 लाख वर्ग फुट
  • कर्मचारी क्षमता: लगभग 30,000
  • पूरा होने का लक्ष्य: 2029

मुख्य निष्कर्ष

  • जेपी मॉर्गन मुंबई में एशिया का सबसे बड़ा जीसीसी स्थापित करेगा
  • यह कदम वित्त और प्रौद्योगिकी सेवाओं में भारत की मजबूती को दर्शाता है
  • परियोजना से बड़े पैमाने पर कुशल रोजगार सृजित होंगे
  • भारत लगातार वैश्विक जीसीसी हब के रूप में उभर रहा है

PM मोदी को इथियोपिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 16 दिसंबर 2025 को इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली ने अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘द ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया’ से सम्मानित किया। यह पुरस्कार अदीस अबाबा में अंतरराष्ट्रीय सम्मलन केंद्र में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रधानमंत्री मोदी को प्रदान किया गया। यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी को प्रदान किया गया 28वां शीर्ष विदेशी राजकीय पुरस्कार है, जो वैश्विक मंच पर भारत के नेतृत्व और उसकी सक्रिय अंतरराष्ट्रीय सहभागिता की निरंतर मान्यता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री मोदी इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाले पहले वैश्विक नेता हैं। मोदी ने इस सम्मान के लिए प्रधानमंत्री अबी और इथियोपिया के लोगों के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने प्रधानमंत्री अबी के नेतृत्व और राष्ट्रीय एकता, स्थिरता, और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए उनके प्रयासों की सराहना की।

पुरस्कार के बारे में

द ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह सम्मान इथियोपिया के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को सुदृढ़ करने और वैश्विक मंच पर उसकी स्थिति को मजबूत करने में असाधारण योगदान के लिए प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार औपचारिक रूप से इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉ. अबीय अहमद अली द्वारा प्रदान किया गया, जिन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री मोदी की मेज़बानी की और सम्मान समारोह का नेतृत्व किया।

प्रधानमंत्री मोदी के विचार

इस सम्मान को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इसे केवल अपने लिए नहीं, बल्कि सभी भारतीयों के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन असंख्य भारतीयों का है, जिनके विश्वास, योगदान और प्रयासों ने भारत–इथियोपिया संबंधों को आकार दिया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध सभ्यताओं में से एक द्वारा सम्मानित किया जाना विशेष महत्व रखता है और इस पुरस्कार को 140 करोड़ भारतीयों को समर्पित किया।

ऐतिहासिक उपलब्धि और 28वां वैश्विक सम्मान

इस सम्मान के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने दो महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं। वे इथियोपिया का सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करने वाले पहले वैश्विक नेता बने और यह पुरस्कार उनका 28वां अंतरराष्ट्रीय राजकीय सम्मान भी है, जो उन्हें विश्व स्तर पर सर्वाधिक सम्मानित भारतीय नेताओं में शामिल करता है। राजनीतिक विश्लेषकों और भाजपा ने इसे भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और प्रधानमंत्री मोदी के स्थिर एवं सम्मानित नेतृत्व का प्रमाण बताया।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध

प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया कि भारत और इथियोपिया के बीच हजारों वर्षों पुराने संपर्क और आदान–प्रदान रहे हैं, जिनकी जड़ें शिक्षा, संस्कृति और जन-जन के संबंधों में हैं। उन्होंने विशेष रूप से भारतीय शिक्षकों और शिक्षाविदों की भूमिका की सराहना की, जिन्होंने दशकों से इथियोपिया की शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आज भी कई भारतीय शिक्षक और प्रोफेसर इथियोपिया के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सद्भाव और विश्वास मजबूत हुआ है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • प्रधानमंत्री मोदी को इथियोपिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान – द ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया प्रदान किया गया।
  • वे यह सम्मान पाने वाले पहले वैश्विक राष्ट्राध्यक्ष/सरकार प्रमुख बने।
  • यह प्रधानमंत्री मोदी का 28वां शीर्ष विदेशी राजकीय सम्मान है।
  • सम्मान इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉ. अबीय अहमद अली द्वारा प्रदान किया गया।
  • भारत–इथियोपिया संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया।
  • अफ्रीकी संघ (African Union) का मुख्यालय इथियोपिया में स्थित है।

जानें क्या है ‘VB-G RAM G’ योजना? यह मनरेगा से कैसे अलग

मोदी सरकार ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार सुनिश्चित कराने वाली मनरेगा योजना की जगह नया बिल ले आई है। केंद्र सरकार मनरेगा (MGNREGA) को खत्म कर नया ग्रामीण रोजगार कानून लाने जा रही है। इसका नाम है, ‘विकसित भारत-रोजगार गारंटी व आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी- जी राम जी। (Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin): VB – G RAM G), इसका मुख्य उद्देश्य 2047 का राष्ट्रीय विजन तैयार करना है।

यह योजना मनरेगा से कैसे अलग होगी?

यह योजना एक तरह से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट (MGNREGA) का ही अपग्रेडेड वर्जन है। इस ग्रामीण योजना के तहत ग्रामीण परिवार को 100 के बजाय 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी। यह योजना किसानों और मजदूरों दोनों के लिए काफी फायदेमंद साबित होने जा रही है। नए बिल में मनरेगा के उलट हर हफ्ते पेमेंट किया जा सकता है। मनरेगा में 15 दिन में मजदूरी का भुगतान होता था। मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर या काम पूरा होने के अधिकतम 15 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। नए एक्ट में ग्राम पंचायत योजनाओं को जरूरी किया गया है, जिसे खुद पंचायत ही तैयार करेगी। इसके अलावा इन्हें पीएम गति शक्ति जैसे सिस्टम से जोड़ा जाएगा।

‘जी राम जी’ का फुल फॉर्म क्या है

‘जी राम जी’(G RAM G) का पूरा नाम ‘विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ है। यह एक नई सरकारी योजना है, जिसे मनरेगा की जगह लाने की तैयारी है। इस योजना को ‘ VB-G RAM G ’ योजना भी कहा जाता है।

किसानों को डबल फायदा

विकसित भारत-रोजगार गारंटी व आजीविका मिशन (ग्रामीण) से किसानों को डबल फायदा होने वाला है। एक तो उन्हें खेतों के लिए मजदूर आसानी से मिल सकेंगे। दूसरे खेतों के लिए बेहतर ढांचा तैयार हो सकेगा। इस योजना के अंतर्गत बुआई और कटाई के मौसम में 60 दिन का विशेष समय रखा गया है। इस दौरान मनरेगा के तहत काम बंद कर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य बुआई और कटाई के समय मजदूरों की कमी नहीं होने देना है। इस दौरान काम रोकने का फायदा यह होगा कि फर्जी तरीके से मजदूरी को नहीं बढ़ाया जा सकेगा। किसान को सिंचाई परियोजनाओं का भी लाभ सीधे तौर पर मिलेगा।

ग्रामीण मजदूरों को भी फायदा

मनरेगा की तुलना में इस योजना से ग्रामीण मजदूरों को भी फायदा मिलने वाला है। इसके तहत 100 के बजाय 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं से यह सुनिश्चित होगा कि मजदूरों को बेहतर रोजगार विकल्प उपलब्ध हो सकेंगे।

Oscar 2026: भारत की ‘होमबाउंड’ बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म के लिए शॉर्टलिस्ट

भारतीय सिनेमा ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, क्योंकि नीरज घायवान की फिल्म ‘होमबाउंड’ को 98वें अकादमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर 2026) में सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। यह फिल्म अब मतदान के अगले चरण में पहुँच गई है और दुनिया भर के 86 देशों व क्षेत्रों से भेजी गई प्रविष्टियों में से चुनी गई अंतिम 15 शॉर्टलिस्टेड फिल्मों में शामिल हो गई है।

उपलब्धि क्या है?

फिल्म ‘होमबाउंड’ को अकादमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज़ (AMPAS) द्वारा अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी में आधिकारिक रूप से शॉर्टलिस्ट किया गया है। शॉर्टलिस्ट होने का अर्थ है कि यह फिल्म अब अंतिम नामांकन चरण के लिए पात्र हो गई है, जहाँ अकादमी के विभिन्न विभागों के सदस्य 15 चयनित फिल्मों को देखने के बाद मतदान करेंगे। अंततः इनमें से केवल 5 फिल्मों को ही ऑस्कर के अंतिम नामांकन में जगह मिलेगी।

फिल्म ‘होमबाउंड’ के बारे में

नीरज घायवान द्वारा निर्देशित ‘होमबाउंड’ में ईशान खट्टर और विशाल जेठवा मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि जान्हवी कपूर एक महत्वपूर्ण सहायक भूमिका निभा रही हैं। यह फिल्म दो बचपन के दोस्तों—शोएब और चंदन—की कहानी है, जिनका पुलिस बल में शामिल होने का साझा सपना सामाजिक दबाव, कर्तव्य और दोस्ती के बीच उनके जीवन की दिशा तय करता है। यह कथा युवा भारत के अनुभवों को केंद्र में रखते हुए आकांक्षा, जिम्मेदारी और भावनात्मक दृढ़ता जैसे विषयों को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती है।

पृष्ठभूमि और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

फिल्म ‘होमबाउंड’ को पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त सराहना मिल चुकी है। इसका प्रीमियर कान्स फिल्म फेस्टिवल 2025 के प्रतिष्ठित ‘अन सर्टेन रिगार्द (Un Certain Regard)’ सेक्शन में हुआ, जिसे विश्व सिनेमा के सबसे सम्मानित मंचों में गिना जाता है। इसके बाद फिल्म को टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) में भी प्रदर्शित किया गया, जहाँ इसे इंटरनेशनल ऑडियंस चॉइस अवॉर्ड में सेकंड रनर-अप का सम्मान मिला।

इन प्रमुख अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में मिली सफलता ने ‘होमबाउंड’ के लिए वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान और सकारात्मक माहौल तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।

निर्माण और रचनात्मक टीम

फिल्म ‘होमबाउंड’ का निर्माण धर्मा प्रोडक्शंस द्वारा किया गया है। इसके निर्माता करण जौहर, अदार पूनावाला और अपूर्व मेहता हैं। फिल्म की सह-निर्माता मारीके डी’सूज़ा और मेलिटा टोसकान डू प्लांटियर हैं। विशेष रूप से, विश्व-प्रसिद्ध फिल्मकार मार्टिन स्कॉर्सेसी और प्रविण खैरनार को फिल्म के एक्ज़ीक्यूटिव प्रोड्यूसर के रूप में श्रेय दिया गया है, जिससे फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक विश्वसनीयता व प्रतिष्ठा प्राप्त हुई है।

ऑस्कर का इंटरनेशनल फीचर फिल्म वर्ग

इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी उन फीचर फिल्मों को मान्यता देती है, जिनका निर्माण संयुक्त राज्य अमेरिका के बाहर हुआ हो और जिनमें संवाद मुख्य रूप से अंग्रेज़ी के अलावा किसी अन्य भाषा में हों। इस श्रेणी में प्रत्येक देश केवल एक आधिकारिक प्रविष्टि भेज सकता है, जिससे चयन प्रक्रिया अत्यंत प्रतिस्पर्धी हो जाती है।

अंतिम 15 फिल्मों की शॉर्टलिस्ट में जगह बनाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • फिल्म: होमबाउंड
  • निर्देशक: नीरज घायवान
  • श्रेणी: बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म
  • कार्यक्रम: 98वां अकादमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर 2026)
  • शॉर्टलिस्ट: 15 फिल्में
  • मुख्य कलाकार: ईशान खट्टर, विशाल जेठवा

IPL 2026 Auction: 25 करोड़ 20 लाख में बिकने के बावजूद कैमरन ग्रीन को 18 करोड़ ही क्यों मिलेंगे?

आईपीएल मिनी-नीलामी में उस समय इतिहास रच गया जब ऑस्ट्रेलिया के ऑलराउंडर कैमरन ग्रीन पर कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने ₹25.20 करोड़ की रिकॉर्ड बोली लगाई। यह आईपीएल नीलामी में किसी विदेशी खिलाड़ी के लिए अब तक की सबसे ऊँची बोली है। हालांकि, सुर्खियाँ बटोरने वाली इस राशि के बावजूद कैमरन ग्रीन को वास्तव में ₹18 करोड़ ही मिलेंगे। यह विरोधाभास भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा लागू किए गए एक नए नियम के कारण है, जिसका उद्देश्य विदेशी खिलाड़ियों की कमाई को नियंत्रित करना और फ्रेंचाइज़ियों के बीच वित्तीय संतुलन बनाए रखना है।

कैमरन ग्रीन और आईपीएल नीलामी में बोली की जंग

कैमरन ग्रीन नीलामी सूची में सबसे बड़ा नाम बनकर उतरे, हालांकि चोट के कारण वह मेगा ऑक्शन में हिस्सा नहीं ले पाए थे। ₹2 करोड़ के बेस प्राइस के साथ उनसे मजबूत प्रतिस्पर्धा की उम्मीद थी—और वैसा ही हुआ। बोली की शुरुआत सीमित पर्स होने के बावजूद मुंबई इंडियंस ने की, जिसके बाद राजस्थान रॉयल्स और फिर कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) इस रेस में शामिल हो गए। जैसे ही मुंबई बाहर हुई और राजस्थान अपनी वित्तीय सीमा तक पहुँच गया, मुकाबला KKR और चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के बीच और तेज हो गया—ये दोनों ही फ्रेंचाइज़ियाँ उस समय सबसे बड़े शेष पर्स वाली थीं। रणनीतिक ज़रूरतों से प्रेरित होकर—KKR आंद्रे रसेल के आईपीएल से संन्यास के बाद एक रिप्लेसमेंट ऑलराउंडर की तलाश में था, जबकि CSK को पावर-हिटिंग ऑलराउंड फिनिशर चाहिए था—बोली में जबरदस्त उछाल आया और अंततः यह ₹25 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई।

नया BCCI नियम: क्यों कैमरन ग्रीन को पूरे ₹25.2 करोड़ नहीं मिलेंगे

कैमरन ग्रीन को पूरे ₹25.2 करोड़ नहीं मिलने का कारण BCCI द्वारा मिनी-ऑक्शन के लिए हाल ही में लागू किया गया एक नया नियम है, जो विदेशी खिलाड़ियों की सैलरी को नियंत्रित करता है। इस नियम के अनुसार, किसी भी विदेशी खिलाड़ी को मिनी-ऑक्शन से मिलने वाली अधिकतम राशि निम्न में से जो कम हो, उसी तक सीमित रहेगी—

  • सबसे ऊँची रिटेंशन राशि, या
  • सबसे हालिया मेगा ऑक्शन की सबसे ऊँची बोली

वर्तमान चक्र में, भले ही ऋषभ पंत ₹27 करोड़ में खरीदे गए हों, लेकिन सबसे ऊँची रिटेंशन राशि ₹18 करोड़ है। इसी वजह से मिनी-ऑक्शन में चुने गए किसी भी विदेशी खिलाड़ी के लिए ₹18 करोड़ ही प्रभावी वेतन सीमा बन जाती है। इस नए प्रावधान का उद्देश्य फ्रेंचाइज़ियों के बीच वित्तीय संतुलन बनाए रखना और मिनी-ऑक्शन में असंतुलित बोली को नियंत्रित करना है।

अतिरिक्त राशि कहाँ जाती है?

यदि किसी विदेशी खिलाड़ी की ऑक्शन बोली ₹18 करोड़ की निर्धारित सीमा से अधिक होती है, तो अतिरिक्त राशि न तो खिलाड़ी को मिलती है और न ही फ्रेंचाइज़ी के पास रहती है। यह राशि सीधे BCCI के पास जमा हो जाती है। कैमरन ग्रीन के मामले में—

  • कुल बोली राशि: ₹25.2 करोड़
  • अनुमत वेतन (सीमा): ₹18 करोड़
  • अतिरिक्त राशि: ₹7.2 करोड़ → BCCI को भुगतान

यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि फ्रेंचाइज़ियाँ खुलकर प्रतिस्पर्धी बोली लगा सकें, लेकिन विदेशी खिलाड़ियों की कमाई निर्धारित वेतन सीमा से अधिक न हो।

BCCI ने यह नियम क्यों लागू किया?

BCCI ने यह नियम इसलिए लागू किया क्योंकि हाल के मिनी-ऑक्शनों में यह देखा गया कि कुछ विदेशी खिलाड़ी असमान रूप से बहुत ऊँची बोलियाँ हासिल कर रहे थे, जो कई बार शीर्ष भारतीय खिलाड़ियों को मिलने वाली रिटेंशन राशि से भी अधिक होती थीं। इस नियम के पीछे मुख्य उद्देश्य हैं—

  • भारतीय और विदेशी खिलाड़ियों के बीच संतुलन बनाए रखना
  • मिनी-ऑक्शन से टीम संतुलन बिगड़ने से रोकना
  • फ्रेंचाइज़ियों की वित्तीय स्थिरता को लंबे समय तक सुरक्षित रखना
  • रिटेंशन प्रणाली को प्रभावी और प्रासंगिक बनाए रखना

विदेशी खिलाड़ियों के वेतन को रिटेंशन सीमा से जोड़कर, BCCI ने टीम निर्माण में भारतीय कोर खिलाड़ियों की प्राथमिकता को और मज़बूत किया है।

फ्रेंचाइज़ियों और खिलाड़ियों पर प्रभाव

KKR जैसी फ्रेंचाइज़ियों के लिए इसका मतलब यह है कि वे बड़े विदेशी सितारों को टीम में शामिल तो कर सकती हैं, लेकिन स्क्वाड के भीतर लंबे समय की वेतन असमानता की चिंता नहीं रहेगी। वहीं खिलाड़ियों, खासकर विदेशी स्टार खिलाड़ियों के लिए, यह संकेत है कि रिकॉर्ड बोली हमेशा रिकॉर्ड भुगतान में नहीं बदलेगी। समग्र रूप से देखें तो यह नियम IPL इकोसिस्टम में वित्तीय अनुशासन लाता है, साथ ही ऑक्शन की रोमांचक और प्रतिस्पर्धी प्रकृति को भी बनाए रखता है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • IPL मिनी-ऑक्शन में कैमरन ग्रीन ₹25.2 करोड़ में बिके, जो किसी विदेशी खिलाड़ी के लिए अब तक की सबसे बड़ी बोली है।
  • नए BCCI नियम के कारण कैमरन ग्रीन को केवल ₹18 करोड़ ही मिलेंगे।
  • यह वेतन सीमा सबसे अधिक रिटेंशन राशि, जो वर्तमान में ₹18 करोड़ है, पर आधारित है।
  • विदेशी खिलाड़ियों के लिए यदि बोली राशि तय सीमा से अधिक होती है, तो अतिरिक्त रकम BCCI को जाती है।
  • यह नियम मिनी-ऑक्शन में विदेशी खिलाड़ियों की अत्यधिक कमाई पर रोक लगाने के उद्देश्य से लागू किया गया है।

 

ICC Men’s Player of Month: साइमन हार्मर नवंबर के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने

दक्षिण अफ्रीका के ऑफ़ स्पिनर साइमन हार्मर को नवंबर 2025 के लिए ICC मेन्स प्लेयर ऑफ़ द मंथ चुना गया है। यह सम्मान उन्हें भारत के खिलाफ ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) में शानदार प्रदर्शन के बाद दिया गया। गेंदबाज़ी में उनकी प्रभुत्वकारी भूमिका ने दक्षिण अफ्रीका को भारत में ऐतिहासिक 2-0 टेस्ट सीरीज जीत दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई, जो कि 2000 के बाद पहली बार भारतीय मिट्टी पर उनकी इस तरह की श्रृंखला जीत थी।

ICC मंथ के खिलाड़ी: चयन और प्रतियोगिता

साइमन हार्मर ने यह पुरस्कार जीतने से पहले मजबूत प्रतिस्पर्धा को मात दी, जिसमें बांग्लादेश के ताइजुल इस्लाम और पाकिस्तान के मोहम्मद नवाज़ शामिल थे। यह हार्मर का पहला ICC मेन्स प्लेयर ऑफ़ द मंथ पुरस्कार है, जिसे ICC वेबसाइट पर पंजीकृत वैश्विक प्रशंसकों और पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों व मीडिया पेशेवरों की विशेषज्ञ पैनल द्वारा संयुक्त मतदान प्रक्रिया के माध्यम से चुना गया।

भारत में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत

हार्मर का पुरस्कार विजेता प्रदर्शन दक्षिण अफ्रीका और भारत के बीच हुई दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला के दौरान आया, जो कोलकाता और गुवाहाटी में आयोजित हुई।
प्रोटियास ने 2–0 की क्लीन स्वीप हासिल की, यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी जिसने भारत की घरेलू ताकत को चुनौती दी और दक्षिण अफ्रीका की भारत में 25 वर्षों में पहली टेस्ट सीरीज जीत सुनिश्चित की। हार्मर को प्लेयर ऑफ़ द सीरीज भी नामित किया गया, जो उनके इस ऐतिहासिक जीत में केंद्रीय योगदान को रेखांकित करता है।

सीरीज के आँकड़े और रिकॉर्ड

साइमन हार्मर ने दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला में 17 विकेट लिए, जिसमें उनका औसत 8.94 और इकॉनमी रेट 5.66 रहा। यह आंकड़े भारतीय परिस्थितियों में अत्यंत प्रभावशाली माने जाते हैं, जहाँ आमतौर पर स्पिन गेंदबाज़ी का लाभ होता है लेकिन घरेलू टीमों का दबदबा रहता है।

उनके प्रदर्शन ने न केवल श्रृंखला में क्लीन स्वीप सुनिश्चित किया, बल्कि ICC वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप 2025–27 की रैंकिंग में दक्षिण अफ्रीका को दूसरे स्थान पर पहुंचाकर WTC फाइनल की दौड़ में उनकी स्थिति मजबूत की।

मुख्य बिंदु

  • साइमन हार्मर (दक्षिण अफ्रीका) को ICC मेन्स प्लेयर ऑफ़ द मंथ, नवम्बर 2025 का पुरस्कार मिला।
  • उन्होंने बांग्लादेश के ताइजुल इस्लाम और पाकिस्तान के मोहम्मद नवाज़ को मात दी।
  • भारत के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला में 17 विकेट लिए।
  • दक्षिण अफ्रीका को भारत में 2000 के बाद पहली बार ऐतिहासिक 2–0 टेस्ट सीरीज जीत दिलाई।
  • उन्हें प्लेयर ऑफ़ द सीरीज भी नामित किया गया।

भारत और ब्राजील ने स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के रखरखाव पर त्रिपक्षीय MoU पर हस्ताक्षर किए

भारत और ब्राज़ील ने स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों के रखरखाव से संबंधित एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर अपने समुद्री और रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह समझौता दोनों देशों को प्रमुख समुद्री राष्ट्रों तथा ग्लोबल साउथ की अग्रणी आवाज़ों के रूप में उभरती साझेदारी को रेखांकित करता है। यह MoU 9 से 12 दिसंबर 2025 के दौरान नौसेना प्रमुख (CNS) एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी की आधिकारिक ब्राज़ील यात्रा के समय संपन्न हुआ।

MoU के बारे में

यह त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) भारतीय नौसेना, ब्राज़ीलियाई नौसेना और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) के बीच हस्ताक्षरित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों नौसेनाओं द्वारा संचालित स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों सहित अन्य नौसैनिक प्लेटफॉर्म्स के रखरखाव से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। यह समझौता जीवन-चक्र समर्थन (Life-Cycle Support) को बेहतर बनाने, तकनीकी विशेषज्ञता साझा करने तथा पनडुब्बी रखरखाव और संचालन क्षमता (Sustainment) में सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए किया गया है।

स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों की पृष्ठभूमि

स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियाँ उन्नत डीज़ल-इलेक्ट्रिक अटैक पनडुब्बियाँ हैं, जिन्हें सतह-विरोधी (Anti-Surface Warfare), पनडुब्बी-विरोधी (Anti-Submarine Warfare), खुफिया संग्रह और निगरानी अभियानों के लिए डिज़ाइन किया गया है। भारत इन पनडुब्बियों का संचालन परियोजना–75 (Project-75) के तहत करता है, जिनका निर्माण प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा देश में ही किया गया है। वहीं ब्राज़ील भी अपने नौसैनिक आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों का संचालन करता है, जिससे रखरखाव और लॉजिस्टिक्स में सहयोग दोनों देशों के लिए परस्पर लाभकारी बनता है।

समझौते के प्रमुख उद्देश्य

भारतीय नौसेना के अनुसार, यह समझौता (MoU) कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करेगा। इनमें लॉजिस्टिक्स सहायता, कार्मिकों का प्रशिक्षण, अनुभवों का आदान-प्रदान, तथा रक्षा अनुसंधान एवं विकास (R&D) में सहयोग शामिल है। यह समझौता नौसेना-से-नौसेना और उद्योग-से-उद्योग सहयोग दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जो स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने और दीर्घकालिक परिचालन तत्परता को बढ़ाने में सहायक होगा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • भारत और ब्राज़ील ने स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों के रखरखाव पर एक त्रिपक्षीय समझौता (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
  • इस MoU में भारतीय नौसेना, ब्राज़ीलियाई नौसेना और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) शामिल हैं।
  • यह समझौता चीफ ऑफ नेवल स्टाफ (CNS) एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी की ब्राज़ील यात्रा (9–12 दिसंबर 2025) के दौरान हस्ताक्षरित हुआ।
  • समझौते का फोकस लाइफ-साइकिल सपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, प्रशिक्षण और अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर है।
  • भारत और ब्राज़ील दोनों स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों का संचालन करते हैं।

IPL History: जानें कौन हैं प्रशांत वीर, जो बने IPL इतिहास के सबसे महंगे अनकैप्ड खिलाड़ी?

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में एक नया रिकॉर्ड बना, जब चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने प्रशांत वीर को 14.20 करोड़ रुपये में खरीदा, जिससे वह IPL इतिहास के सबसे महंगे अनकैप्ड खिलाड़ी बन गए। इस युवा ऑलराउंडर की इस बड़ी डील ने IPL 2025 की नीलामी के दौरान देश भर का ध्यान खींचा और घरेलू T20 खिलाड़ियों की बढ़ती अहमियत को दिखाया। प्रशांत वीर जो एक बाएं हाथ के स्पिनर और ऑलराउंडर हैं, को सीएसके ने रविंद्र जडेजा के संभावित विकल्प के तौर पर देखा है। कई टीमों ने इस युवा खिलाड़ी में दिलचस्पी दिखाई, लेकिन अंत में सीएसके और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच कड़ी बोली लगी जिसमें सीएसके विजयी रहा।

रिकॉर्ड किस बारे में है?

  • प्रशांत वीर ने आईपीएल 2022 मेगा नीलामी में ₹10 करोड़ में बिके आवेश खान का पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया।
  • प्रशांत वीर नीलामी में ₹30 लाख के बेस प्राइस के साथ उतरे थे, लेकिन जबरदस्त बोली के चलते उनकी कीमत ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गई।
  • चेन्नई सुपर किंग्स (CSK), सनराइजर्स हैदराबाद, राजस्थान रॉयल्स, मुंबई इंडियंस और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा हुई, अंततः CSK ने उन्हें ₹14.20 करोड़ में खरीद लिया।

प्रशांत वीर कौन हैं?

  • प्रशांत वीर उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले 20 वर्षीय बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाजी करने वाले ऑलराउंडर हैं।
  • वह भारतीय घरेलू क्रिकेट में, विशेषकर टी20 प्रारूप में, उभरते हुए सबसे रोमांचक युवा खिलाड़ियों में से एक माने जाते हैं।
  • वह विकेट लेने वाली स्पिन गेंदबाजी के साथ-साथ निचले क्रम में आक्रामक बल्लेबाजी करने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं, जिससे वह दोनों विभागों में योगदान देते हैं।

घरेलू क्रिकेट पृष्ठभूमि

  • प्रशांत वीर ने भारत की प्रमुख घरेलू टी20 प्रतियोगिता स्यद मुश्ताक अली ट्रॉफी के मौजूदा सत्र में शानदार प्रदर्शन कर अपनी पहचान बनाई।
  • उनके निरंतर और प्रभावशाली प्रदर्शन ने नीलामी में उनकी कीमत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
  • टूर्नामेंट में उन्होंने 7 पारियों में 9 विकेट लिए, जिसमें गेंद के साथ नियंत्रण और विविधता साफ दिखी।
  • बल्लेबाजी में भी उन्होंने उपयोगी योगदान दिया, जिसमें बिहार के खिलाफ 26 गेंदों पर नाबाद 40 रन और जम्मू-कश्मीर के खिलाफ मात्र 10 गेंदों पर नाबाद 37 रन की तेज पारियां शामिल हैं।

CSK ने उन पर निवेश क्यों किया?

  • चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) युवा और दीर्घकालिक क्षमता वाले खिलाड़ियों पर भरोसा जताने के लिए जानी जाती है।
  • रविंद्र जडेजा और सैम करन को संजू सैमसन के बदले ट्रेड करने के बाद, प्रशांत वीर को CSK एक भविष्य के ऑलराउंड एसेट के रूप में देख रही है।
  • उनकी बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी और ऑलराउंड क्षमताएं भारतीय परिस्थितियों में उन्हें बेहद उपयोगी बनाती हैं, और CSK उन्हें अपनी कोर टीम में दीर्घकालिक विकल्प/उत्तराधिकारी के रूप में तैयार करती नजर आ रही है।

मुख्य बातें

  • खिलाड़ी: प्रशांत वीर
  • टीम: चेन्नई सुपर किंग्स (CSK)
  • कीमत: ₹14.20 करोड़
  • रिकॉर्ड: IPL इतिहास में सबसे महंगा अनकैप्ड खिलाड़ी
  • पिछला रिकॉर्ड धारक: आवेश खान (₹10 करोड़, IPL 2022)
  • भूमिका: बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर
  • राज्य टीम: उत्तर प्रदेश

Vijay Diwas 2025 : जानें 16 दिसंबर को क्यों मनाया जाता है विजय दिवस

विजय दिवस, जिसे विक्ट्री डे या बिजॉय डिबोस भी कहा जाता है, भारत और बांग्लादेश में हर वर्ष 16 दिसंबर को मनाया जाता है। वर्ष 2025 में यह दिन 1971 के भारत–पाक युद्ध में भारत की ऐतिहासिक विजय की 54वीं वर्षगांठ को चिह्नित करता है। यह युद्ध दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को नया आकार देने वाला सिद्ध हुआ और इसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का निर्माण हुआ। यह दिवस निर्णायक सैन्य विजय के साथ-साथ दोनों देशों के उन शहीदों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करता है जिन्होंने युद्ध में अपने प्राण न्योछावर किए।

16 दिसंबर को विजय दिवस क्यों मनाया जाता है

  • 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सशस्त्र बलों ने ढाका (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) में भारतीय सशस्त्र बलों और मुक्ति वाहिनी (बांग्लादेश की मुक्ति सेना) के समक्ष औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण किया।
  • इस आत्मसमर्पण के साथ बांग्लादेश मुक्ति संग्राम और 1971 का भारत–पाक युद्ध समाप्त हुआ—यह भारत के सैन्य इतिहास की सबसे निर्णायक जीतों में से एक है।
  • लगभग 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने हथियार डाले, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य आत्मसमर्पण माना जाता है।

पृष्ठभूमि: 1971 का भारत–पाक युद्ध

  • यह युद्ध 13 दिनों (3 से 16 दिसंबर 1971) तक चला—अल्पकालिक लेकिन अत्यंत तीव्र।
  • पूर्वी पाकिस्तान में बंगाली आबादी के विरुद्ध राजनीतिक दमन और हिंसा से मानवीय संकट उत्पन्न हुआ, जिसके कारण बड़ी संख्या में शरणार्थी भारत आए।
  • भारत ने बंगाली राष्ट्रवादी आंदोलन का समर्थन किया, जो पाकिस्तान से स्वतंत्रता की मांग कर रहा था।
  • संकट बढ़ने पर भारत और पाकिस्तान के बीच पूर्वी व पश्चिमी मोर्चों पर पूर्ण युद्ध छिड़ गया।

परिणाम और ऐतिहासिक महत्व

  • युद्ध का अंत भारत की निर्णायक जीत के साथ हुआ, जिससे पूर्वी पाकिस्तान मुक्त हुआ और बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र बना।
  • आत्मसमर्पण पत्र पर 16 दिसंबर 1971 को ढाका में पाकिस्तानी सेना की पूर्वी कमान द्वारा हस्ताक्षर किए गए।
  • इस विजय ने भारत की सैन्य क्षमता, मानवीय दृष्टिकोण और क्षेत्रीय नेतृत्व को सुदृढ़ किया, साथ ही मानवीय संकटों के समाधान और लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के समर्थन का संदेश दिया।

1971 की विजय के पीछे नेतृत्व

  • राजनीतिक स्तर पर युद्ध का नेतृत्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया, जिनकी कूटनीतिक और रणनीतिक निर्णय निर्णायक रहे।
  • सैन्य मोर्चे पर फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ (तत्कालीन थलसेना प्रमुख) के दूरदर्शी नेतृत्व में अभियान संचालित हुआ।
  • लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा ने पूर्वी मोर्चे का नेतृत्व किया और ढाका में पाकिस्तानी आत्मसमर्पण स्वीकार किया।
  • ये नेता भारत की महानतम सैन्य उपलब्धियों के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं।

विजय दिवस 2025: राष्ट्रीय एवं सैन्य आयोजन

  • 2025 में विजय दिवस की 54वीं वर्षगांठ के अवसर पर देशभर में सैन्य, सांस्कृतिक और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
  • प्रमुख आकर्षण के रूप में 16 दिसंबर 2025 को हेडक्वार्टर ईस्टर्न कमांड द्वारा कोलकाता (पश्चिम बंगाल) के मंगल पांडे प्रशिक्षण क्षेत्र, विजय दुर्ग में भव्य मिलिट्री टैटू का आयोजन किया गया।

भारत–बांग्लादेश की साझा स्मृति

  • विजय दिवस भारत और बांग्लादेश—दोनों के लिए साझा स्मरण दिवस है।
  • भारत में इसे विजय दिवस और बांग्लादेश में बिजॉय डिबोस के रूप में मनाया जाता है।
  • यह दिवस 1971 की घटनाओं पर आधारित साझा इतिहास, आपसी सम्मान और स्थायी मित्रता का प्रतीक है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • विजय दिवस/बिजॉय डिबोस: हर वर्ष 16 दिसंबर
  • 2025: विजय दिवस की 54वीं वर्षगांठ
  • 1971 के भारत–पाक युद्ध में भारत की विजय की स्मृति
  • 16 दिसंबर 1971 को ढाका में पाकिस्तानी सेना का आत्मसमर्पण
  • युद्ध अवधि: 3–16 दिसंबर 1971 (13 दिन)
  • परिणाम: बांग्लादेश का निर्माण और लगभग 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों का आत्मसमर्पण

भारत में बना पहला स्वदेशी 1.0 GHz माइक्रोप्रोसेसर, जानें इससे कैसे होगा फायदा?

भारत ने DHRUV64 के प्रक्षेपण के साथ तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यह देश का पहला पूर्णतः स्वदेशी 1.0 गीगाहर्ट्ज़, 64-बिट डुअल-कोर माइक्रोप्रोसेसर है। इसे माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट प्रोग्राम (MDP) के तहत सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) द्वारा विकसित किया गया है। यह प्रोसेसर भारत के घरेलू सेमीकंडक्टर डिज़ाइन पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत तैयार किया गया है। यह चिप भारत को विदेशी चिप्स पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी।

DHRUV64 माइक्रोप्रोसेसर क्या है?

DHRUV64 एक स्वदेशी, उच्च-प्रदर्शन माइक्रोप्रोसेसर है, जिसे पूरी तरह भारत में डिज़ाइन और विकसित किया गया है। यह 1.0 गीगाहर्ट्ज़ की क्लॉक स्पीड पर कार्य करता है और इसमें 64-बिट डुअल-कोर आर्किटेक्चर है, जो कुशल प्रोसेसिंग, बेहतर मल्टीटास्किंग और पूर्ववर्ती स्वदेशी प्रोसेसर प्रयासों की तुलना में अधिक विश्वसनीयता प्रदान करता है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अनुसार, यह प्रोसेसर भारत की स्वदेशी प्रोसेसर पाइपलाइन को सशक्त बनाता है और रणनीतिक तथा वाणिज्यिक—दोनों प्रकार के अनुप्रयोगों को समर्थन देने में सक्षम है।

DHRUV64 की प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ

DHRUV64 माइक्रोप्रोसेसर में आधुनिक और स्केलेबल डिज़ाइन शामिल है, जिसे विविध वास्तविक-दुनिया के अनुप्रयोगों के लिए विकसित किया गया है। इसकी 64-बिट आर्किटेक्चर बड़े डेटा सेट और अधिक जटिल कंप्यूटिंग कार्यों को संभालने में सक्षम बनाती है, जिससे यह नेक्स्ट-जेनरेशन डिजिटल सिस्टम्स के लिए उपयुक्त है। प्रोसेसर का डिज़ाइन विभिन्न बाहरी हार्डवेयर प्रणालियों के साथ सहज एकीकरण को संभव बनाता है, जिससे विभिन्न उद्योगों में इसकी उपयोगिता और लचीलापन बढ़ता है। MeitY के अनुसार, इसके निर्माण में हाई-परफॉर्मेंस चिप्स में प्रचलित तकनीकों का उपयोग किया गया है, जिससे यह वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रतिस्पर्धी बना रहता है।

रणनीतिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में अनुप्रयोग

DHRUV64 को एक बहुउपयोगी माइक्रोप्रोसेसर के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जिसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता है। इनमें 5G अवसंरचना शामिल है, जहाँ विश्वसनीय और सुरक्षित प्रोसेसिंग अत्यंत आवश्यक होती है; ऑटोमोबाइल प्रणालियाँ, जो तेजी से एम्बेडेड कंप्यूटिंग पर निर्भर होती जा रही हैं; तथा औद्योगिक स्वचालन, जो आधुनिक विनिर्माण का एक प्रमुख स्तंभ है। यह प्रोसेसर उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और तेजी से विस्तार कर रहे इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) इकोसिस्टम के लिए भी उपयुक्त है। उच्च दक्षता और विश्वसनीयता प्रदान करने की इसकी क्षमता इसे उन अनुप्रयोगों के लिए विशेष रूप से मूल्यवान बनाती है, जहाँ दीर्घकालिक स्थिरता और सुरक्षित संचालन की आवश्यकता होती है।

भारत के सेमीकंडक्टर और डिजिटल विज़न के साथ तालमेल

DHRUV64 का शुभारंभ सरकार की व्यापक पहलों—जैसे इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन—के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य देश में चिप फैब्रिकेशन और उन्नत पैकेजिंग सुविधाएँ स्थापित करना है। स्वदेशी प्रोसेसर डिज़ाइन इस दृष्टि का एक आधारभूत स्तंभ है, जो यह सुनिश्चित करता है कि भारत केवल असेंबली हब न बने, बल्कि प्रौद्योगिकी का सृजनकर्ता भी बने।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • DHRUV64 भारत का पहला पूर्णतः स्वदेशी 1.0 गीगाहर्ट्ज़, 64-बिट ड्यूल-कोर माइक्रोप्रोसेसर है।
  • इसे सी-डैक (C-DAC) द्वारा माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट प्रोग्राम (MDP) के अंतर्गत विकसित किया गया है।
  • इसकी घोषणा 15 दिसंबर 2025 को की गई।
  • यह उच्च दक्षता और विश्वसनीयता के साथ रणनीतिक एवं वाणिज्यिक अनुप्रयोगों को समर्थन देता है।
  • 5G, ऑटोमोबाइल प्रणालियों, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक स्वचालन और IoT के लिए उपयुक्त है।

Recent Posts

about | - Part 80_12.1
QR Code
Scan Me