IDFC FIRST बैंक ने ‘जीरो-फॉरेक्स डायमंड रिजर्व क्रेडिट कार्ड’ लॉन्च किया

IDFC FIRST Bank ने जनवरी 2026 में अपना प्रीमियम क्रेडिट कार्ड — ‘ज़ीरो-फॉरेक्स डायमंड रिज़र्व क्रेडिट कार्ड’ लॉन्च करने की घोषणा की। यह कार्ड विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और प्रीमियम लाइफ़स्टाइल खर्च करने वाले ग्राहकों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें विदेशी मुद्रा (Forex) पर कोई मार्कअप शुल्क नहीं लिया जाता, साथ ही यात्रा, बीमा और रिवॉर्ड से जुड़े कई आकर्षक लाभ मिलते हैं।

यह लॉन्च प्रीमियम क्रेडिट कार्ड सेगमेंट में बैंक की मौजूदगी को और मजबूत करता है तथा वैश्विक स्तर पर खर्च करने वाले ग्राहकों की ज़रूरतों को पूरा करता है।

परीक्षा-उन्मुख त्वरित तथ्य (Prelims Ready)

  • क्या: ज़ीरो-फॉरेक्स डायमंड रिज़र्व क्रेडिट कार्ड का लॉन्च
  • लॉन्च किया: IDFC FIRST Bank
  • लॉन्च तिथि: जनवरी 2026
  • मुख्य विशेषता: शून्य विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) मार्कअप
  • लक्षित ग्राहक: अंतरराष्ट्रीय यात्री और प्रीमियम लाइफ़स्टाइल उपयोगकर्ता
  • वार्षिक शुल्क: ₹3,000 + GST
  • शुल्क माफी: दूसरे वर्ष से ₹6 लाख वार्षिक खर्च पर

ज़ीरो-फॉरेक्स डायमंड रिज़र्व क्रेडिट कार्ड क्या है?

यह एक प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय उपयोग वाला क्रेडिट कार्ड है, जो विदेश में खर्च करने पर कोई फॉरेक्स मार्कअप शुल्क नहीं लेता। सामान्यतः अन्य कार्डों पर 2%–3.5% तक फॉरेक्स शुल्क लगता है।

यह कार्ड खास तौर पर उपयोगी है:

  • विदेशी यात्रा के दौरान
  • अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन ख़रीदारी में
  • विदेशों में एटीएम से नकद निकासी के लिए

आवेदन और वेलकम बेनिफिट्स

  • आवेदन प्रक्रिया: पूरी तरह डिजिटल (वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से)
  • वेलकम ऑफर:
  1. कार्ड सक्रिय होने के 30 दिनों के भीतर ₹5,000 खर्च करने पर ₹500 का गिफ्ट वाउचर

यह प्रक्रिया IDFC FIRST Bank की डिजिटल-फर्स्ट बैंकिंग रणनीति के अनुरूप है।

यात्रा और बीमा लाभ

एयरपोर्ट और लाउंज एक्सेस

  • ₹20,000 के मासिक खर्च पर घरेलू व अंतरराष्ट्रीय लाउंज एक्सेस
  • वार्षिक अंतरराष्ट्रीय खर्च USD 1,000 पर एयरपोर्ट मीट-एंड-ग्रीट सेवा

व्यापक यात्रा बीमा

  • यात्रा रद्द होने पर कवर: ₹25,000
  • खोए हुए सामान और उड़ान में देरी का कवर: शामिल
  • हवाई दुर्घटना बीमा: ₹1 करोड़
  • व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा: ₹10 लाख
  • ये लाभ इस कार्ड को फ्रीक्वेंट फ्लायर्स के लिए बेहद आकर्षक बनाते हैं।

शुल्क, ब्याज और अन्य चार्ज

  • जॉइनिंग व वार्षिक शुल्क: ₹3,000 + GST
  • शुल्क माफी: ₹6 लाख या उससे अधिक वार्षिक खर्च पर
  • ब्याज दर: डायनामिक, 8.5% प्रति वर्ष से शुरू

ग्लोबल एटीएम निकासी:

  1. देय तिथि तक 0% ब्याज
  2. ₹199 प्रति लेन-देन शुल्क
  • फ्यूल सरचार्ज वेवर: चयनित पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध

रिवॉर्ड पॉइंट्स संरचना

  • होटल खर्च: ₹150 पर 60 रिवॉर्ड पॉइंट्स तक
  • फ्लाइट बुकिंग: ₹150 पर 40 रिवॉर्ड पॉइंट्स
  • अन्य खर्च: ₹150 पर 10 रिवॉर्ड पॉइंट्स

रिवॉर्ड पॉइंट्स का मूल्य

  • 1 रिवॉर्ड पॉइंट = ₹0.25
  • लाइफटाइम वैधता
  • कोई अर्निंग कैप नहीं
  • ऑनलाइन रिडेम्पशन सुविधा

इस प्रकार, यह कार्ड यात्रा-केंद्रित और लाइफ़स्टाइल खर्च—दोनों के लिए उपयुक्त है।

GI काउंसिल ने हेल्थ इंश्योरेंस इकोसिस्टम के लिए एस प्रकाश को CEO नियुक्त किया

भारत के स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र में बेहतर समन्वय और अधिक संरचित कार्यप्रणाली की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। नॉन-लाइफ बीमा कंपनियों की शीर्ष औद्योगिक संस्था द्वारा एक महत्वपूर्ण नेतृत्व नियुक्ति की गई है। यह कदम ऐसे समय में आया है, जब दावा निपटान विवाद, अस्पताल बिलिंग प्रथाएँ और धोखाधड़ी प्रबंधन जैसे मुद्दों पर सभी हितधारकों के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता महसूस की जा रही है। यह नई भूमिका स्वास्थ्य बीमा पारिस्थितिकी तंत्र में दक्षता और भरोसा बढ़ाने में सहायक मानी जा रही है।

क्यों खबर में है?

जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (General Insurance Council) ने एस. प्रकाश को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), हेल्थ इंश्योरेंस इकोसिस्टम एंड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 7 जनवरी 2026 से प्रभावी होगी।

जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के बारे में

  • जनरल इंश्योरेंस काउंसिल भारत में नॉन-लाइफ (सामान्य) बीमा कंपनियों की शीर्ष औद्योगिक संस्था है।
  • यह बीमा कंपनियों, नियामकों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर
  • क्षेत्र के संतुलित और व्यवस्थित विकास को बढ़ावा देती है,
  • विभिन्न चुनौतियों का समाधान करती है,
  • तथा मोटर, स्वास्थ्य, फसल और सामान्य बीमा जैसे क्षेत्रों में नीतिगत पहलों का समर्थन करती है।

नए CEO की भूमिका और जिम्मेदारियाँ

  • अपने नए दायित्व में एस. प्रकाश बीमा कंपनियों, अस्पतालों, नियामकों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर क्षेत्र-व्यापी पहलों को आगे बढ़ाएंगे।
  • उनका मुख्य फोकस स्वास्थ्य बीमा वैल्यू चेन—जिसमें पॉलिसीधारक, सेवा प्रदाता और भुगतानकर्ता शामिल हैं—में पारदर्शिता, दक्षता और भरोसे को मजबूत करने पर होगा।

प्रमुख फोकस क्षेत्र

  • उपचार प्रोटोकॉल और केयर पाथवे का मानकीकरण, जिससे विवादों और लागत में असमानता को कम किया जा सके।
  • धोखाधड़ी, अपव्यय और दुरुपयोग (Fraud, Waste & Abuse) से निपटने के लिए मजबूत ढांचे विकसित करना।
  • शिकायत निवारण के लिए साझा और सुचारु तंत्र को सक्षम बनाना।
  • बीमाकर्ताओं और अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना।

नियुक्ति का महत्व

  • स्वास्थ्य बीमा इकोसिस्टम के लिए एक समर्पित CEO पद का सृजन इस बात का संकेत है कि उद्योग सहयोगात्मक शासन (Collaborative Governance) की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
  • यह कदम स्वास्थ्य बीमा को अधिक पॉलिसीधारक-केंद्रित बनाने, बीमा कंपनियों और अस्पतालों के बीच टकराव को कम करने, तथा पूरे सिस्टम में विश्वास बढ़ाने के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है।

केंद्र ने अगले तीन सालों के लिए ₹17 लाख करोड़ की PPP प्रोजेक्ट पाइपलाइन का अनावरण किया

भारत में अवसंरचना विकास को गति देने और निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए भारत सरकार ने बजट की एक महत्वपूर्ण घोषणा को अमल में लाया है। पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत परियोजनाओं की एक संरचित, बहु-वर्षीय पाइपलाइन तैयार की गई है, जिससे योजना की स्पष्टता बढ़ेगी, क्रियान्वयन तेज़ होगा और मध्यम अवधि में भारत के अवसंरचना निर्माण को मजबूती मिलेगी।

क्यों खबरों में है?

  • आर्थिक कार्य विभाग (Department of Economic Affairs) ने केंद्रीय बजट 2025–26 की घोषणा के अनुरूप तीन वर्षीय PPP परियोजना पाइपलाइन तैयार की है।
  • इस पाइपलाइन में कुल 852 परियोजनाएँ शामिल हैं, जिनकी संयुक्त लागत ₹17 लाख करोड़ से अधिक है। ये परियोजनाएँ केंद्र सरकार के मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैली हुई हैं।

तीन वर्षीय PPP परियोजना पाइपलाइन क्या है?

  • यह पाइपलाइन अगले तीन वर्षों में शुरू की जाने वाली पहचानी गई और प्रस्तावित PPP परियोजनाओं की एक अग्रिम सूची है।
  • इससे निवेशकों, डेवलपर्स, बैंकों और ठेकेदारों को समय से पहले जानकारी मिलती है, जिससे परियोजना तैयारी, वित्तपोषण और जोखिम मूल्यांकन बेहतर ढंग से किया जा सके।
  • इस पहल का संचालन वित्त मंत्रालय के अंतर्गत किया गया है, ताकि बेहतर समन्वय और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके।

परियोजनाओं का दायरा और पैमाना

  • यह पाइपलाइन केंद्रीय अवसंरचना मंत्रालयों के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी शामिल करती है, जो समग्र सरकारी दृष्टिकोण को दर्शाती है।
  • परियोजनाएँ परिवहन (सड़क, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे), ऊर्जा, शहरी अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, जल और सामाजिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में प्रस्तावित हैं।
  • 852 परियोजनाओं और ₹17 लाख करोड़ से अधिक मूल्य के साथ, यह अब तक घोषित सबसे बड़ी मध्यम अवधि PPP रूपरेखाओं में से एक है।

PPP आधारित अवसंरचना का महत्व

  • PPP मॉडल के तहत निजी पूंजी, तकनीक और दक्षता का उपयोग होता है, जबकि जोखिमों का उचित बँटवारा सरकार और निजी क्षेत्र के बीच किया जाता है।
  • सरकार के लिए यह वित्तीय दबाव कम करता है और परियोजनाओं की डिलीवरी तेज़ करता है, वहीं निवेशकों के लिए यह स्थिर और दीर्घकालिक अवसर प्रदान करता है।
  • एक स्पष्ट और विश्वसनीय पाइपलाइन PPP में भागीदारी की सबसे बड़ी बाधा—अनिश्चितता—को कम करती है।

अपेक्षित लाभ

  • स्पष्ट परियोजना पाइपलाइन जारी कर सरकार का उद्देश्य परियोजना जोखिम कम करना, बैंक योग्यताएँ सुधारना और घरेलू व विदेशी निवेश को आकर्षित करना है।
  • बेहतर योजना और क्रमबद्ध क्रियान्वयन से देरी घटेगी, लागत कम होगी और परिणाम बेहतर होंगे, जिससे आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और प्रतिस्पर्धात्मकता को बल मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने भूटान के टॉप कोर्ट से किया एमओयू

भारत और भूटान के बीच न्यायिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भूटान के साथ युवा विधि पेशेवरों (लॉ क्लर्क्स) के आदान-प्रदान के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस घोषणा की जानकारी भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने दी और भूटान से आए दो लॉ क्लर्क्स का सर्वोच्च न्यायालय में स्वागत किया।

क्यों खबर में है?

भारत और भूटान के बीच एक MoU पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसके तहत भूटान के लॉ क्लर्क्स भारत के सर्वोच्च न्यायालय में कार्य करेंगे। इस पहल का उद्देश्य न्यायिक आदान-प्रदान, प्रशिक्षण और दीर्घकालिक संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देना है।

MoU के बारे में

इस समझौते की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं—

  • भूटान के दो लॉ क्लर्क भारत के सर्वोच्च न्यायालय में कार्य करेंगे।
  • उनका कार्यकाल तीन माह का होगा।
  • उन्हें भारतीय लॉ क्लर्क्स के समान मानदेय दिया जाएगा।
  • यात्रा व्यय भारत का सर्वोच्च न्यायालय वहन करेगा।

समझौते की पृष्ठभूमि

यह पहल दोनों देशों के बीच विकसित हो रहे न्यायिक सहयोग को दर्शाती है—

  • अक्टूबर 2025 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने भूटान का दौरा किया था।
  • इस दौरान भारत और भूटान ने न्यायिक संबंधों को गहरा करने पर सहमति जताई।
  • सहयोग के क्षेत्रों में तकनीकी एकीकरण और क्षमता निर्माण शामिल हैं।

पहल का महत्व

यह MoU दोनों देशों के लिए कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है—

  • भारत और भूटान के बीच न्यायिक कूटनीति को मजबूती मिलती है।
  • भूटानी न्यायपालिका को भारत की विधिक प्रणाली को समझने और अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
  • यह पहल भारत की ‘पड़ोसी पहले’ (Neighbourhood First) नीति के तहत क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देती है।

रमेश कुमार जुनेजा ने काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन का पदभार संभाला

भारत के चमड़ा निर्यात क्षेत्र को वैश्विक व्यापार के एक अहम दौर में नया नेतृत्व मिला है। रमेश कुमार जुनेजा ने काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स (CLE) के चेयरमैन के रूप में पदभार संभाला है। उनका व्यापक उद्योग अनुभव और लंबे समय से संस्थागत जुड़ाव, अंतरराष्ट्रीय चमड़ा बाजारों में भारत की स्थिति को और मजबूत करने में सहायक माना जा रहा है।

क्यों खबरों में है?

रमेश कुमार जुनेजा ने काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स (CLE) के चेयरमैन का कार्यभार संभाला। उन्होंने यह जिम्मेदारी चेन्नई में आयोजित CLE की समिति प्रशासन की 184वीं बैठक के दौरान ग्रहण की।

काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स (CLE) के बारे में

  • काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रायोजित एक निर्यात संवर्धन परिषद है।
  • CLE भारतीय चमड़ा, फुटवियर और चमड़ा उत्पादों के वैश्विक बाजारों में प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह नीति समर्थन, व्यापार सुविधा और बाजार विकास के माध्यम से निर्यातकों की मदद करती है।

रमेश कुमार जुनेजा का पेशेवर सफर

  • रमेश कुमार जुनेजा का चमड़ा उद्योग से जुड़ाव चार दशकों से अधिक का है।
  • वे JC ग्रुप के संस्थापक हैं और 1980 के दशक में अंतरराष्ट्रीय रिटेलर्स के साथ सीधे सहयोग करने वाले शुरुआती उद्योग नेताओं में शामिल रहे।
  • उन्होंने फिनिश्ड लेदर के नामित टैनर बनने का मॉडल अपनाया, जिससे भारतीय चमड़े को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में पहचान और विश्वसनीयता मिली।

CLE के साथ लंबा जुड़ाव

  • जुनेजा पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से CLE से जुड़े हुए हैं।
  • वे 2014 से ईस्टर्न रीजन के रीजनल चेयरमैन रहे हैं और अप्रैल 2024 में CLE के वाइस चेयरमैन बने।
  • यह लंबा संस्थागत अनुभव चेयरमैन के रूप में उन्हें निरंतरता और सूझबूझ भरा नेतृत्व देने में मदद करेगा।

महत्व

  • चमड़ा उद्योग भारत में रोजगार सृजन का एक बड़ा स्रोत और निर्यात आय का अहम योगदानकर्ता है।
  • CLE का नेतृत्व स्थिरता मानकों, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और बाजार विविधीकरण जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
  • रमेश कुमार जुनेजा के नेतृत्व में परिषद से मूल्य संवर्धन, नवाचार और भारत के निर्यात दायरे के विस्तार पर विशेष ध्यान देने की उम्मीद है।

RBI ने बैंकों के डिविडेंड पेआउट पर 75% की लिमिट लगाने का प्रस्ताव दिया

भारत के बैंकिंग नियामक ने बैंकों की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक अहम सुधार का प्रस्ताव रखा है। जब बैंकों की लाभप्रदता मजबूत हो रही है और परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार आया है, तब नियामक का ध्यान अब संतुलित पूंजी प्रबंधन पर केंद्रित है। यह प्रस्ताव शेयरधारकों को रिटर्न देने और भविष्य के जोखिमों से निपटने के लिए पर्याप्त आय बनाए रखने—दोनों के बीच संतुलन साधने का प्रयास करता है।

क्यों खबरों में है?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंकों के डिविडेंड भुगतान को उनके कर पश्चात लाभ (PAT) के 75% तक सीमित करने का प्रस्ताव रखा है।
यह प्रस्ताव बैंकों की पूंजी स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से जारी ड्राफ्ट दिशानिर्देशों का हिस्सा है।

RBI के प्रस्ताव में क्या कहा गया है?

  • प्रस्तावित नियमों के तहत बैंक अपने वार्षिक लाभ का 75% से अधिक लाभांश वितरित नहीं कर सकेंगे।
  • यह प्रावधान अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों पर लागू होगा।
  • उद्देश्य यह है कि मुनाफे का एक हिस्सा भविष्य की वृद्धि और जोखिम प्रबंधन के लिए बैंक के पास बना रहे।
  • RBI ने दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देने से पहले हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए हैं।

लाभांश पर सीमा लगाने का कारण

  • भारतीय बैंक फिलहाल मजबूत मुनाफा और घटते एनपीए देख रहे हैं।
  • लेकिन अत्यधिक लाभांश वितरण से बैंकों के पूंजी बफर कमजोर हो सकते हैं।

भुगतान पर सीमा लगाकर RBI यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बैंक आर्थिक झटकों, क्रेडिट चक्रों और वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताओं का सामना करने के लिए पर्याप्त पूंजी बनाए रखें।

बैंकों और शेयरधारकों पर प्रभाव

  • बैंकों के लिए: यह कदम पूंजी संरक्षण और बैलेंस शीट की मजबूती को प्रोत्साहित करेगा, खासकर तब जब ऋण वृद्धि तेज़ बनी हुई है।
  • शेयरधारकों के लिए: भले ही तात्कालिक लाभांश आय कुछ कम हो, लेकिन बेहतर पूंजी पर्याप्तता से दीर्घकालिक स्थिरता और प्रणालीगत जोखिम में कमी आएगी।
  • यह प्रस्ताव वैश्विक बैंकिंग नियामकीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है।

बैंकिंग में लाभांश नियमन

  • बैंकिंग क्षेत्र में लाभांश पर कड़ा नियमन होता है क्योंकि बैंक जनता की जमा राशि और प्रणालीगत जोखिम से जुड़े होते हैं।
  • नियामक अक्सर लाभांश पर सीमा लगाते हैं ताकि बैंक अल्पकालिक रिटर्न के बजाय वित्तीय मजबूती को प्राथमिकता दें।
  • भारत में RBI लाभांश पात्रता को पूंजी पर्याप्तता, परिसंपत्ति गुणवत्ता और लाभप्रदता जैसे मानकों से जोड़ता है।

वित्तीय स्थिरता के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?

  • मजबूत पूंजी बफर बैंकों को मंदी के दौर में भी ऋण देने में सक्षम बनाते हैं।
  • लाभांश पर सीमा लगाकर RBI सावधानीपूर्ण बैंकिंग नियमन को मजबूत करता है, जिससे मुनाफा अत्यधिक वितरण के बजाय पूरे वित्तीय तंत्र की मजबूती में उपयोग हो सके।

कर्नाटक में सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री बने सिद्धारमैया

कर्नाटक की राजनीति में एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हुआ है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया राज्य के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री बन गए हैं। राजनीतिक अस्थिरता, गठबंधन सरकारों और अल्पकालिक कार्यकालों के लिए जाने जाने वाले कर्नाटक में यह उपलब्धि अत्यंत दुर्लभ मानी जा रही है। उनका राजनीतिक सफर सामाजिक न्याय, जमीनी जुड़ाव और राजनीतिक दृढ़ता का प्रतीक है।

खबरों में क्यों?

  • जनवरी 2026 में सिद्धारमैया ने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री देवराज उर्स के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की।
  • उन्होंने अपने विभिन्न कार्यकालों को मिलाकर लगभग 7 वर्ष 8 माह मुख्यमंत्री पद पर पूरे किए।

एक पुराने राजनीतिक रिकॉर्ड का अंत

  • देवराज उर्स ने कर्नाटक में 7 वर्षों से थोड़ा अधिक समय तक शासन किया था।
  • सिद्धारमैया ने इस रिकॉर्ड को पार कर राज्य के राजनीतिक इतिहास में नया अध्याय जोड़ा।
  • गठबंधन राजनीति, दलबदल और अस्थिर सरकारों वाले राज्य में उनका लंबा कार्यकाल लगातार जनसमर्थन और राजनीतिक कुशलता को दर्शाता है।

प्रारंभिक जीवन और राजनीति में प्रवेश

  • सिद्धारमैया का जन्म मैसूरु जिले के टी. नरसीपुरा के पास सिद्धारमनाहुंडी गांव में एक किसान परिवार में हुआ।
  • वे पेशे से वकील रहे और कुछ समय तक विद्यावर्धक लॉ कॉलेज में कानून भी पढ़ाया।
  • 1983 में उन्होंने चामुंडेश्वरी सीट से एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर राजनीति में चौंकाने वाली एंट्री की।

कांग्रेस से पहले की राजनीतिक यात्रा

  • कई अन्य नेताओं के विपरीत, सिद्धारमैया की शुरुआती राजनीतिक नींव कांग्रेस के बाहर पड़ी थी।
  • वे जनता पार्टी और बाद में जनता दल में आगे बढ़े और मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े के कार्यकाल में पशुपालन, रेशम उद्योग (सेरीकल्चर) और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण मंत्री पदों पर रहे।
  • उनके राजनीतिक जीवन में एक निर्णायक मोड़ 2006 में आया, जब उन्होंने जनता दल (सेक्युलर) से अलग होकर बाद में कांग्रेस पार्टी का दामन थामा।

AHINDA और सामाजिक न्याय की राजनीति

  • कांग्रेस में आने के बाद सिद्धारमैया ने AHINDA मॉडल को राजनीतिक आधार बनाया।
  • AHINDA = अल्पसंख्यक (Minorities), पिछड़ा वर्ग (Backward Classes) और दलित (Dalits)
  • वे कुरुबा समुदाय से आने वाले कर्नाटक के पहले मुख्यमंत्री हैं, जो राज्य का तीसरा सबसे बड़ा सामाजिक समूह है।
  • यह सामाजिक गठजोड़ उनकी चुनावी सफलता और शासन दर्शन का केंद्र रहा है।

प्रशासनिक उपलब्धियाँ और नेतृत्व भूमिकाएँ

  • सिद्धारमैया ने अब तक कुल 16 राज्य बजट प्रस्तुत किए हैं, जो कर्नाटक के किसी भी मुख्यमंत्री द्वारा पेश किए गए बजटों में सबसे अधिक हैं। इस मामले में उन्होंने रामकृष्ण हेगड़े को भी पीछे छोड़ दिया है।
  • वे 2009 से 2013 और फिर 2019 से 2023 तक दो बार विपक्ष के नेता भी रहे, और सत्ता से बाहर रहते हुए भी राज्य की राजनीति में एक प्रभावशाली तथा केंद्रीय भूमिका निभाते रहे।
  • अपने लंबे राजनीतिक करियर में वे मंत्री, उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे प्रमुख पदों पर कार्य कर चुके हैं।

विरासत और शासन पर विचार

  • इस उपलब्धि पर सिद्धारमैया ने कहा कि वे इसे रिकॉर्ड नहीं, बल्कि जनता की सेवा का सौभाग्य मानते हैं।
  • उन्होंने देवराज उर्स जैसे नेताओं के प्रभाव को स्वीकार किया।
  • साथ ही बसवन्ना से लेकर नलवाड़ी कृष्णराज वोडेयार तक की सामाजिक न्याय परंपरा का उल्लेख किया।
  • उन्होंने गरीबों, दलितों और पिछड़े वर्गों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई।

परीक्षा उपयोगी तथ्य (Prelims & Mains)

  • सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री (कर्नाटक): सिद्धारमैया
  • रिकॉर्ड तोड़ा: देवराज उर्स
  • मील का पत्थर: जनवरी 2026
  • सामाजिक मॉडल: AHINDA
  • प्रस्तुत बजट: 16 (रिकॉर्ड)
  • पहले मुख्यमंत्री (कुरुबा समुदाय से): सिद्धारमैया

हरियाणा में देश की पहली हाईड्रोजन ट्रेन दौड़ने को तैयार, जानें सबकुछ

भारत हरित परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। हरियाणा में भारत की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन का संचालन जल्द शुरू होने वाला है। यह पायलट परियोजना भारतीय रेलवे के नेतृत्व में चल रही है और जिंद–सोनीपत रेल मार्ग पर संचालित की जाएगी। यह परियोजना अब कमीशनिंग के अंतिम चरण में है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा और सतत परिवहन के प्रति भारत की बढ़ती प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।

खबरों में क्यों?

हरियाणा में भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ की तैयारी पूरी हो चुकी है। जिंद में स्थापित हाइड्रोजन संयंत्र तैयार है और परियोजना अंतिम कमीशनिंग चरण में पहुँच गई है।

हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना के बारे में

  • यह उत्तरी रेलवे (Northern Railway) की एक पायलट परियोजना है।
  • ट्रेन हरियाणा के जिंद–सोनीपत मार्ग पर चलेगी।
  • हाइड्रोजन ट्रेन-सेट का निर्माण पूरा हो चुका है।
  • इस परियोजना का उद्देश्य भारत में रेल परिवहन के लिए हाइड्रोजन को स्वच्छ ईंधन के रूप में व्यवहार्य सिद्ध करना है।

हाइड्रोजन संयंत्र और ऊर्जा व्यवस्था

  • जिंद में हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया गया है, जिसकी भंडारण क्षमता 3,000 किलोग्राम है।
  • संयंत्र को स्थिर 11 केवी विद्युत आपूर्ति प्रदान की जा रही है, ताकि कमीशनिंग और नियमित संचालन के दौरान निर्बाध हाइड्रोजन उत्पादन सुनिश्चित हो सके।
  • हाइड्रोजन का उत्पादन इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के माध्यम से किया जा रहा है, जो हरित हाइड्रोजन उत्पादन की एक प्रमुख विधि है।

राज्य और रेलवे अधिकारियों की भूमिका

  • हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के अधिकारियों के साथ परियोजना की समीक्षा की।
  • उन्होंने विद्युत आपूर्ति प्रणाली की नियमित निगरानी पर जोर दिया।
  • राष्ट्रीय स्तर पर यह परियोजना अनुसंधान, डिजाइन एवं मानक संगठन (RDSO) द्वारा निर्धारित सुरक्षा और प्रदर्शन मानकों के अनुरूप विकसित की जा रही है।

हाइड्रोजन ट्रेनों का महत्व

  • हाइड्रोजन ट्रेनें उपयोग के स्थान पर शून्य कार्बन उत्सर्जन करती हैं।
  • ये गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों पर डीज़ल ट्रेनों का एक प्रभावी विकल्प हैं।
  • यह परियोजना भारत के जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने, हरित हाइड्रोजन को बढ़ावा देने और दीर्घकालिक जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने के राष्ट्रीय उद्देश्यों के अनुरूप है।

परीक्षा उपयोगी बिंदु (प्रारंभिक व मुख्य)

  • देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: हरियाणा
  • पायलट परियोजना: भारतीय रेलवे (उत्तरी रेलवे)
  • रेल मार्ग: जिंद–सोनीपत
  • हाइड्रोजन प्लांट स्थान: जिंद
  • भंडारण क्षमता: 3,000 किलोग्राम
  • विद्युत आपूर्ति: 11 केवी
  • हाइड्रोजन उत्पादन विधि: इलेक्ट्रोलिसिस
  • संबंधित संस्था: RDSO (सुरक्षा व मानक)

Indian Army ने बनाई आधुनिक भैरव फोर्स, एक लाख ड्रोन ऑपरेटर शामिल

जनवरी 2026 में भारतीय सेना ने सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘भैरव’ नामक एक नए आधुनिक युद्ध बल के गठन की घोषणा की। यह विशिष्ट (एलीट) बल ड्रोन तकनीक को युद्ध अभियानों में एकीकृत करने के लिए बनाया गया है, जिससे तकनीक-आधारित आधुनिक युद्ध के युग में भारत की युद्धक्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इस नए बल में 1 लाख से अधिक प्रशिक्षित ड्रोन ऑपरेटर शामिल होंगे, जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी समर्पित ड्रोन युद्ध इकाइयों में से एक बनाता है।

‘भैरव’ बल क्या है?

भैरव बल नई पीढ़ी की एक युद्ध इकाई है, जिसे उच्च तीव्रता वाले आधुनिक युद्ध की चुनौतियों के अनुरूप तैयार किया गया है। इन बटालियनों का हर सैनिक उन्नत ड्रोन संचालन में प्रशिक्षित है, जिससे रियल-टाइम निगरानी, सटीक हमले और युद्धक्षेत्र से खुफिया जानकारी जुटाना संभव होता है।

मुख्य क्षमताएँ

  • दुश्मन ठिकानों पर आक्रामक ड्रोन हमले
  • वास्तविक समय में टोही और निगरानी
  • शत्रुतापूर्ण वातावरण में उच्च गति वाले अभियान
  • तकनीक-आधारित युद्धक्षेत्र प्रभुत्व

यह बदलाव हाल के वैश्विक संघर्षों से मिले सबक को दर्शाता है, जहाँ ड्रोन निर्णायक फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में उभरे हैं।

भैरव बटालियनों के बारे में

सारांश

भैरव बटालियनें अत्यधिक फुर्तीली और ड्रोन-केंद्रित युद्ध इकाइयों के रूप में संरचित हैं, जो स्पेशल फोर्सेज़ जैसे अभियानों को तेज़ी और सटीकता से अंजाम दे सकती हैं।

मुख्य कार्य

  • विभिन्न स्तरों पर स्पेशल फोर्सेज़ जैसे कार्य
  • गहराई तक सामरिक और परिचालन मिशन
  • अग्रिम मोर्चे की टुकड़ियों को ड्रोन-सक्षम फायरपावर से समर्थन

रणनीतिक उद्देश्य

इनका मुख्य उद्देश्य पैरा स्पेशल फोर्सेज़ (SF) और नियमित इन्फैंट्री बटालियनों के बीच की परिचालन खाई को पाटना है, ताकि सामरिक से लेकर परिचालन गहराई तक अभियानों का निर्बाध निष्पादन हो सके।

वर्तमान स्थिति और विस्तार योजना

  • अब तक 15 भैरव बटालियनें गठित की जा चुकी हैं
  • दोनों सीमाओं पर विभिन्न संरचनाओं में तैनात
  • निकट भविष्य में लगभग 25 बटालियनें गठित करने की योजना

यह विस्तार बहु-डोमेन युद्धक्षेत्रों में कार्य करने वाली भविष्य-तैयार सेनाओं पर भारतीय सेना के फोकस को दर्शाता है।

भारतीय सेना दिवस परेड 2026: पहला सार्वजनिक प्रदर्शन

भैरव बटालियनें 15 जनवरी 2026 को जयपुर, राजस्थान में आयोजित भारतीय सेना दिवस परेड में पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित होंगी। यह प्रस्तुति तकनीक-आधारित सैन्य शक्ति की ओर भारत के संक्रमण का प्रतीक है।

अन्य आधुनिक युद्ध पहल: रुद्र ब्रिगेड

भैरव के साथ-साथ भारतीय सेना ने ‘रुद्र ब्रिगेड’ भी गठित की हैं, जो सर्व-आयामी (ऑल-आर्म्स) एकीकृत संरचनाएँ हैं।

रुद्र ब्रिगेड में शामिल घटक

  • इन्फैंट्री
  • मैकेनाइज़्ड यूनिट्स
  • टैंक
  • तोपखाना
  • स्पेशल फोर्सेज़
  • मानवरहित हवाई प्रणालियाँ (UAS)

ये ब्रिगेड संयुक्तता (जॉइंटनेस) और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को बढ़ाती हैं तथा ड्रोन-केंद्रित भैरव बटालियनों का पूरक हैं।

भारतीय सेना के बारे में

  • भूमिका: थल-आधारित शाखा और भारतीय सशस्त्र बलों का सबसे बड़ा घटक
  • थल सेनाध्यक्ष (COAS): उपेंद्र द्विवेदी
  • मुख्यालय: नई दिल्ली
  • स्थापना: 1895
  • आदर्श वाक्य: सेवा परमो धर्म

परीक्षा उपयोगी त्वरित तथ्य (प्रारंभिक व मुख्य)

  • क्या: उन्नत ड्रोन क्षमताओं वाला आधुनिक युद्ध बल
  • बल का नाम: भैरव
  • गठित करने वाला: भारतीय सेना
  • ड्रोन ऑपरेटर: 1 लाख से अधिक
  • गठित बटालियनें: 15 (बढ़ाकर 25 की जाएँगी)
  • परिचालन भूमिका: ड्रोन-आधारित दुश्मन ठिकानों और संरचनाओं को निशाना बनाना
  • पहला सार्वजनिक प्रदर्शन: भारतीय सेना दिवस परेड
  • तारीख: 15 जनवरी 2026
  • स्थान: जयपुर, राजस्थान

Axis Bank ने डिजिटल बैंकिंग सिक्योरिटी को बढ़ावा देने के लिए ‘सेफ्टी सेंटर’ लॉन्च किया

ऐक्सिस बैंक ने डिजिटल धोखाधड़ी से ग्राहकों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए अपने मोबाइल बैंकिंग ऐप पर ‘सेफ्टी सेंटर’ नामक एक नई सुविधा शुरू की है। इस फीचर के माध्यम से ग्राहक बिना बैंक शाखा जाए या कस्टमर केयर से संपर्क किए, अपने बैंकिंग खातों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण नियंत्रण स्वयं कर सकते हैं।

क्यों खबरों में है?

जनवरी 2026 में ऐक्सिस बैंक ने अपने मोबाइल ऐप पर सेफ्टी सेंटर लॉन्च किया। इसका उद्देश्य ग्राहकों को डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा और धोखाधड़ी से बचाव के लिए अधिक नियंत्रण प्रदान करना है।

सेफ्टी सेंटर के बारे में

सेफ्टी सेंटर ग्राहकों को अपनी जरूरत के अनुसार सुरक्षा सेटिंग्स कस्टमाइज़ करने की सुविधा देता है। इसके जरिए मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग की पहुंच पर रियल-टाइम नियंत्रण संभव है, जिससे किसी भी अनधिकृत या संदिग्ध लेनदेन को समय रहते रोका जा सकता है।

मुख्य सुरक्षा फीचर्स

इस सुविधा में एसएमएस शील्ड शामिल है, जिससे असली और फर्जी ऐक्सिस बैंक संदेशों की पहचान की जा सकती है। ग्राहक चाहें तो इंटरनेट बैंकिंग को पूरी तरह बंद कर सकते हैं, सभी प्लेटफॉर्म पर फंड ट्रांसफर को एक क्लिक में रोक सकते हैं, थर्ड-पार्टी ऐप्स के जरिए नेट बैंकिंग भुगतान ब्लॉक कर सकते हैं, तथा UPI उपयोग, नए पेयी जोड़ने और ट्रांसफर लिमिट पर भी नियंत्रण रख सकते हैं।

इस पहल का महत्व

यह कदम बढ़ते डिजिटल बैंकिंग धोखाधड़ी मामलों से निपटने में मदद करता है। सेफ्टी सेंटर ग्राहकों को स्वयं प्रबंधित सुरक्षा नियंत्रण प्रदान करता है, जिससे वे अधिक सशक्त महसूस करते हैं और बैंक शाखाओं या कस्टमर सपोर्ट पर निर्भरता कम होती है।

डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा

डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा में ट्रांजैक्शन लिमिट, प्रमाणीकरण जांच और एक्सेस कंट्रोल जैसे उपाय शामिल होते हैं। UPI और मोबाइल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के बीच, ऐसे फीचर्स ग्राहकों को फिशिंग, फर्जी SMS अलर्ट और अनधिकृत फंड ट्रांसफर से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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