तमिलनाडु ने भारत की पहली डीपटेक स्टार्टअप पॉलिसी लॉन्च की

भारत के नवाचार पारितंत्र को बड़ी मजबूती देते हुए तमिलनाडु ने देश की पहली समर्पित डीपटेक स्टार्टअप नीति का अनावरण किया है, जिससे विज्ञान-आधारित उद्यमिता के लिए एक राष्ट्रीय मानक स्थापित हुआ है। तमिलनाडु डीपटेक स्टार्टअप नीति 2025–26 का उद्देश्य अत्याधुनिक अनुसंधान को व्यावसायिक और स्केलेबल समाधानों में परिवर्तित करना है, ताकि राज्य को फ्रंटियर और डीप साइंस तकनीकों का प्रमुख केंद्र बनाया जा सके।

नीति की दृष्टि और वित्तीय प्रतिबद्धता

यह नीति प्रयोगशालाओं से वैश्विक बाजारों तक नवाचार को पहुंचाने की स्पष्ट रणनीति प्रस्तुत करती है। इसके अंतर्गत ₹100 करोड़ की राशि से 100 डीपटेक स्टार्टअप्स को सहायता दी जाएगी। नीति का फोकस दीर्घ-कालिक, विज्ञान-आधारित नवाचारों पर है तथा इसमें फंडिंग, इन्फ्रास्ट्रक्चर, मेंटरशिप और उद्योग साझेदारी का संरचित समर्थन शामिल है।

प्राथमिक क्षेत्र (Priority Sectors)

नीति के तहत उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), एडवांस्ड कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर्स, बायोटेक्नोलॉजी, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा शामिल हैं। इन क्षेत्रों के माध्यम से राज्य उच्च-मूल्य बौद्धिक संपदा और वैश्विक प्रतिस्पर्धी उद्यम विकसित करना चाहता है।

उमेजिन टेक्नोलॉजी कॉन्फ्रेंस में लॉन्च

इस नीति का औपचारिक शुभारंभ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने चेन्नई में आयोजित उमेजिन टेक्नोलॉजी कॉन्फ्रेंस (Umagine) के चौथे संस्करण में किया। उमेजिन एक रणनीतिक मंच है, जो वैश्विक टेक कंपनियों, स्टार्टअप्स, निवेशकों, नीति निर्माताओं और शैक्षणिक संस्थानों को एक साथ लाता है।

प्रमुख निवेश और समझौते (MoUs)

सम्मेलन के दौरान कई बड़े निवेश समझौतों की घोषणा हुई:

  • Better Compute Works: AI डेटा सेंटर की स्थापना, निवेश ₹5,000 करोड़, 1,450 रोजगार
  • Eros GenAI: AI R&D सेंटर का विस्तार, निवेश ₹3,600 करोड़, 1,000 रोजगार
  • Phantom Digital Effects: चेन्नई में VFX संचालन विस्तार, निवेश ₹100 करोड़, 1,000 रोजगार

ये घोषणाएँ तमिलनाडु की बढ़ती तकनीकी क्षमता को दर्शाती हैं।

स्टार्टअप आउटरीच और वैश्विक अवसर

आईटी मंत्री पलानीवेल थियागा राजन ने बताया कि सरकार ने Umagine DX पहल के तहत 23 जिलों के 60 शैक्षणिक संस्थानों में कार्यशालाएँ और तकनीकी व्याख्यान आयोजित किए। StartupTN के माध्यम से 40 स्टार्टअप्स को उमेजिन में नवाचार प्रदर्शित करने और दुबई, सिंगापुर व शारजाह में वैश्विक निवेशकों के समक्ष पिच करने का अवसर दिया गया।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

तमिलनाडु डीपटेक स्टार्टअप नीति शुरू करने वाला पहला भारतीय राज्य

  • ₹100 करोड़ से 100 डीपटेक स्टार्टअप्स को समर्थन
  • Umagine तमिलनाडु का प्रमुख टेक्नोलॉजी सम्मेलन
  • डीपटेक = विज्ञान-आधारित नवाचार, जिनका विकास चक्र लंबा होता है
  • फोकस क्षेत्र: AI, सेमीकंडक्टर्स, बायोटेक, अंतरिक्ष और स्वच्छ ऊर्जा

पूर्व केंद्रीय मंत्री कबींद्र पुरकायस्थ का 94 साल की उम्र में निधन

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कबींद्र पुरकायस्थ का 07 जनवरी 2026 को उम्र संबंधी दिक्कतों के चलते 94 साल की उम्र में निधन हो गया।सिलचर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि पुरकायस्थ को कुछ दिन पहले उम्र संबंधी बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां वो वेंटिलेटर पर थे। उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं। उनकी पत्नी का पहले ही निधन हो गया था। उनके बेटे कनाद पुरकायस्थ असम से राज्यसभा सांसद हैं।

पहली सरकार में संचार राज्य मंत्री

कबींद्र पुरकायस्थ 1998-99 के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी की पहली सरकार में संचार राज्य मंत्री थे। वह पहली बार 1991 में सिलचर सीट से लोकसभा के लिए चुने गए थे। वह 1998 और 2009 में फिर से सांसद बने। 1931 में सिलहट के कमारखाल में जन्मे पुरकायस्थ असम की बराक घाटी में बीजेपी के एक कद्दावर नेता थे।

राजनीतिक यात्रा

प्रारंभिक जीवन एवं आरएसएस से जुड़ाव:

कबींद्र पुरकायस्थ 1951 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े। राजनीति में आने से पहले वे शिक्षक के रूप में कार्यरत रहे। बाद में उन्होंने उत्तर-पूर्व भारत में आरएसएस के प्रचारक (पूर्णकालिक कार्यकर्ता) के रूप में सेवाएँ दीं। उन्हें एक प्रखर बौद्धिक व्यक्तित्व, अनुशासित संगठनकर्ता और अनेक कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शक के रूप में जाना जाता था।

संसदीय करियर:

वे सिलचर लोकसभा क्षेत्र से तीन बार सांसद निर्वाचित हुए—1991, 1998 और 2009 में। दशकों तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने स्थानीय मुद्दों को प्रभावी ढंग से संसद में उठाया और सिलचर की जनता से गहरा जुड़ाव बनाए रखा।

केंद्रीय मंत्री के रूप में भूमिका:

1998–1999 के दौरान, प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में उन्होंने संचार मंत्रालय में राज्य मंत्री (MoS) के रूप में कार्य किया। इस अवधि में उन्होंने संचार अवसंरचना के विकास और विस्तार से जुड़े कार्यों में योगदान दिया।

मुख्य योगदान

राजनीतिक विरासत:

कबींद्र पुरकायस्थ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। उन्होंने असम और समूचे उत्तर-पूर्व भारत में भाजपा के संगठनात्मक आधार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पार्टी के भीतर उन्हें एक बौद्धिक मार्गदर्शक और वैचारिक स्तंभ के रूप में सम्मान प्राप्त था। क्षेत्र में भाजपा की रणनीति, विस्तार और जनाधार निर्माण में उनके विचारों और प्रयासों का गहरा प्रभाव रहा।

सामाजिक कार्य:

राजनीति के साथ-साथ वे सामाजिक सरोकारों के प्रति भी गहराई से प्रतिबद्ध रहे। उन्होंने शरणार्थियों के पुनर्वास कार्यक्रमों में सक्रिय योगदान दिया और क्षेत्रीय विकास से जुड़ी विभिन्न पहलों पर कार्य किया। सामुदायिक कल्याण को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने समाज में सामाजिक एवं राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए।

 

 

प्रवासी भारतीय दिवस (पीबीडी) 2026: तिथि, इतिहास, महत्व और मुख्य तथ्य

प्रवासी भारतीय दिवस (Pravasi Bharatiya Divas – PBD), जिसे अनिवासी भारतीय (NRI) दिवस भी कहा जाता है, प्रत्येक वर्ष 9 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के भारत के विकास में दिए गए अमूल्य योगदान को पहचानना और सम्मानित करना है। इसका गहरा ऐतिहासिक महत्व भी है, क्योंकि 9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे, जिसने आगे चलकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा और नेतृत्व प्रदान किया।

प्रवासी भारतीय दिवस 2026 : तिथि एवं स्वरूप

  • तिथि: 9 जनवरी 2026
  • स्वरूप: गैर-सम्मेलन वर्ष (Non-Convention Year)
  • आयोजन: भारत सहित विश्वभर में भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों द्वारा

वर्ष 2015 से प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन द्विवार्षिक (हर दो वर्ष में) आयोजित किए जाते हैं। चूँकि 2026 गैर-सम्मेलन वर्ष है, इसलिए बड़े केंद्रीय आयोजन (प्लेनरी सत्र, पुरस्कार समारोह आदि) नहीं होंगे। हालाँकि, क्षेत्रीय कार्यक्रम, वेबिनार, सांस्कृतिक आयोजन और युवा-केंद्रित संवाद भारतीय मिशनों द्वारा आयोजित किए जाने की संभावना है।

प्रवासी भारतीय दिवस का इतिहास

  • शुरुआत: 2003, भारत सरकार द्वारा
  • उद्देश्य: भारत और लगभग 3.5 करोड़ प्रवासी भारतीयों (NRI एवं PIO) के बीच संबंध मजबूत करना

मुख्य पड़ाव:

  • 2003–2013: हर वर्ष सम्मेलन (नई दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद आदि)
  • 2015 से: द्विवार्षिक आयोजन
  • 17वाँ संस्करण (2023): इंदौर, मध्य प्रदेश
  • 18वाँ संस्करण (2025): भुवनेश्वर, ओडिशा
  • 19वाँ संस्करण: अपेक्षित वर्ष 2027

प्रवासी भारतीय दिवस 2025 : प्रमुख झलकियाँ

  • आयोजन: 8–10 जनवरी 2025, भुवनेश्वर
  • थीम: “विकसित भारत में प्रवासी भारतीयों का योगदान”
  • 50 से अधिक देशों के प्रवासी प्रतिनिधियों की भागीदारी
  • उद्घाटन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
  • मुख्य अतिथि: त्रिनिदाद और टोबैगो के राष्ट्रपति (वर्चुअल माध्यम से)

प्रवासी भारतीय दिवस का महत्व

1. आर्थिक योगदान

प्रवासी भारतीयों से भारत को प्रतिवर्ष 100 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का रेमिटेंस

निवेश, स्टार्टअप, उद्यमिता और तकनीकी हस्तांतरण को बढ़ावा

2. सांस्कृतिक एवं सामाजिक भूमिका

भारतीय संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों का वैश्विक प्रसार

मातृभूमि से भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव मजबूत

3. नीति एवं शासन मंच

OCI कार्ड, मतदान अधिकार, संपत्ति कानून, कौशल गतिशीलता जैसे मुद्दों पर चर्चा

प्रवासी भारतीयों और नीति निर्माताओं के बीच संवाद का मंच

4. वैश्विक सॉफ्ट पावर

मेज़बान देशों में भारत के हितों की वकालत

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि और प्रभाव को मजबूती

विशेष पहल: प्रवासी भारतीय एक्सप्रेस

प्रवासी भारतीय दिवस से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल है प्रवासी भारतीय एक्सप्रेस—

  • IRCTC द्वारा संचालित लग्ज़री पर्यटक ट्रेन
  • प्रवासी तीर्थ दर्शन योजना (विदेश मंत्रालय) के तहत
  • 16–17 दिनों की भारत यात्रा
  • प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण
  • चयनित PIOs को अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ने का अवसर

आधार सेवाओं की जानकारी देने के लिए शुभंकर ‘उदय’ लॉन्च, जानें सबकुछ

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने सार्वजनिक संचार को अधिक सरल, मानवीय और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आधार मैस्कॉट ‘उदय (Udai)’ का शुभारंभ किया है। यह मैस्कॉट नागरिकों के लिए एक कम्युनिकेशन साथी (resident-facing companion) के रूप में कार्य करेगा, जिसका उद्देश्य आधार से जुड़ी जानकारी और सेवाओं को आसान, मित्रवत और समझने योग्य बनाना है।

‘उदय’ का उद्देश्य

उदय को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि वह तकनीक और आम नागरिकों के बीच की दूरी को कम करे। यह मैस्कॉट आधार से संबंधित विभिन्न सेवाओं को सरल भाषा और आकर्षक तरीके से समझाने में मदद करेगा, जैसे—

  • आधार अपडेट और सुधार
  • प्रमाणीकरण व सत्यापन प्रक्रियाएँ
  • ऑफलाइन आधार सत्यापन
  • आधार जानकारी का चयनात्मक साझा करना
  • आधार का सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग
  • आधार से जुड़ी नई तकनीकों को अपनाना

इस मैस्कॉट-आधारित दृष्टिकोण से UIDAI का लक्ष्य विशेष रूप से पहली बार उपयोग करने वाले नागरिकों, वरिष्ठ नागरिकों और दूरदराज़ क्षेत्रों के लोगों तक प्रभावी संचार सुनिश्चित करना है।

MyGov प्लेटफॉर्म पर राष्ट्रीय प्रतियोगिता

उदय के डिज़ाइन और नामकरण के लिए UIDAI ने MyGov प्लेटफॉर्म पर राष्ट्रीय स्तर की खुली प्रतियोगिताएँ आयोजित कीं। इस पहल को देशभर से शानदार प्रतिक्रिया मिली—

  • कुल प्रविष्टियाँ: 875
  • प्रतिभागी: छात्र, पेशेवर, डिज़ाइनर और रचनात्मक प्रतिभाएँ
  • चयन प्रक्रिया: पारदर्शी, बहु-स्तरीय मूल्यांकन

अंततः चयनित मैस्कॉट सार्वजनिक रचनात्मकता और संस्थागत परिष्कार का उत्कृष्ट मिश्रण है।

प्रतियोगिता के विजेता

मैस्कॉट डिज़ाइन प्रतियोगिता

  • प्रथम पुरस्कार: अरुण गोकुल (त्रिशूर, केरल)
  • द्वितीय पुरस्कार: इदरीस दावाईवाला (पुणे, महाराष्ट्र)
  • तृतीय पुरस्कार: कृष्णा शर्मा (गाजीपुर, उत्तर प्रदेश)

मैस्कॉट नामकरण प्रतियोगिता

  • प्रथम पुरस्कार: रिया जैन (भोपाल, मध्य प्रदेश)
  • द्वितीय पुरस्कार: इदरीस दावाईवाला (पुणे, महाराष्ट्र)
  • तृतीय पुरस्कार: महाराज सरन चेल्लापिल्ला (हैदराबाद, तेलंगाना)

मैस्कॉट का नाम ‘उदय’ रखा गया, जो विकास, प्रगति और सशक्तिकरण का प्रतीक है—ये मूल्य आधार की भावना से जुड़े हैं।

आधिकारिक लॉन्च और प्रमुख वक्तव्य

उदय का अनावरण UIDAI के अध्यक्ष नीलकंठ मिश्रा ने तिरुवनंतपुरम में आयोजित एक कार्यक्रम में किया। उन्होंने प्रतियोगिता विजेताओं को सम्मानित भी किया। मिश्रा ने कहा कि उदय का शुभारंभ एक अरब से अधिक नागरिकों के लिए आधार संचार को सरल और अधिक समावेशी बनाने की दिशा में अहम कदम है।

UIDAI के CEO भुवनेश कुमार ने नागरिक भागीदारी को विश्वास और स्वीकार्यता का आधार बताया। विवेक सी. वर्मा के अनुसार, उदय एक साथी और कथावाचक के रूप में नागरिकों को आधार जानकारी से सहजता से जोड़ने में मदद करेगा।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्व

यह पहल निम्नलिखित विषयों के अंतर्गत महत्वपूर्ण है—

  • डिजिटल गवर्नेंस
  • नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक सेवाएँ
  • ई-गवर्नेंस पहल
  • UIDAI और आधार सुधार

भारतीय धावक जिन्‍सन जॉनसन ने की संन्यास की घोषणा

जिन्सन जॉनसन, भारत के प्रसिद्ध मध्य-दूरी धावक, ने प्रतिस्पर्धी एथलेटिक्स से संन्यास की घोषणा की है। 34 वर्षीय केरल के इस एथलीट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया और अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के माध्यम से कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कर राष्ट्रीय पहचान बनाई। उनका संन्यास राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में एक दशक से अधिक समय तक चले उनके गौरवशाली एथलेटिक करियर का समापन है।

यह संन्यास क्यों महत्वपूर्ण है?

जिन्सन जॉनसन का संन्यास भारतीय मध्य-दूरी दौड़ में एक युग के अंत का प्रतीक है। उनकी उपलब्धियों ने वैश्विक मंच पर भारत की एथलेटिक पहचान को सशक्त किया:

  • एशियन गेम्स चैंपियन – प्रतिष्ठित महाद्वीपीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक विजेता
  • राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक – दो दूरी वर्गों में राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर – कॉमनवेल्थ गेम्स स्तर की प्रतियोगिताओं में भागीदारी
  • युवा प्रेरणा – उभरते भारतीय धावकों के लिए आदर्श
  • दीर्घकालिक उत्कृष्टता – 15+ वर्षों तक प्रतिस्पर्धी एथलेटिक्स में निरंतर श्रेष्ठ प्रदर्शन

करियर की प्रमुख उपलब्धियाँ और सफलताएँ

स्वर्णिम क्षण: 2018 एशियन गेम्स (जकार्ता)

जिन्सन जॉनसन का करियर का सबसे यादगार और गौरवपूर्ण पल 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में आया, जहाँ उन्होंने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया:

  • 1500 मीटर स्वर्ण पदक – 3:44.72 सेकंड (उस समय एशियन गेम्स रिकॉर्ड)
  • 800 मीटर रजत पदक – एक ही एशियन गेम्स में दो पदक जीतने का दुर्लभ कारनामा
  • अंतरराष्ट्रीय पहचान – एशिया के शीर्ष मिडिल-डिस्टेंस धावकों में स्थान बनाया
  • राष्ट्रीय गौरव – महाद्वीपीय स्तर के सबसे बड़े मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व किया

राष्ट्रीय रिकॉर्ड: महान बाधाओं को तोड़ना

800 मीटर राष्ट्रीय रिकॉर्ड (2018):

उपलब्धि विवरण
टूटा हुआ रिकॉर्ड श्रीराम सिंह का 42 वर्ष पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड
नया समय 1:45.65 सेकंड
स्थान गुवाहाटी राष्ट्रीय अंतर-राज्यीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप
महत्व 42 वर्षों से चला आ रहा ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ने वाले पहले भारतीय धावक बने

1500 मीटर राष्ट्रीय रिकॉर्ड (2018–2019): जिन्सन जॉनसन

जिन्सन जॉनसन ने 1500 मीटर दौड़ में भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल कीं और लगातार दो बार राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा।

पहला राष्ट्रीय रिकॉर्ड (2018)

कॉमनवेल्थ गेम्स, गोल्ड कोस्ट में जिन्सन जॉनसन ने 3:37.86 सेकंड का समय लेकर बहादुर प्रसाद का 23 वर्ष पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा। इस रेस में उन्होंने फाइनल में 5वाँ स्थान प्राप्त किया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए एक उल्लेखनीय प्रदर्शन था।

दूसरा राष्ट्रीय रिकॉर्ड (2019)

2019 में बर्लिन मीट के दौरान जिन्सन जॉनसन ने अपने ही रिकॉर्ड को और बेहतर करते हुए 3:35.24 सेकंड का समय निकाला। यह समय किसी भी भारतीय धावक द्वारा 1500 मीटर में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा और इससे उनकी निरंतर प्रगति तथा विश्वस्तरीय क्षमता स्पष्ट हुई।

करियर टाइमलाइन: जिन्सन जॉनसन

वर्ष आयोजन उपलब्धि
2018 जकार्ता एशियाई खेल 1500 मीटर स्वर्ण (3:44.72 सेकंड), 800 मीटर रजत
2018 गुवाहाटी (राष्ट्रीय प्रतियोगिता) 800 मीटर में 42 वर्ष पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा (1:45.65 सेकंड)
2018 गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स 1500 मीटर में 23 वर्ष पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा (3:37.86 सेकंड)
2019 बर्लिन मीट 1500 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड और बेहतर किया (3:35.24 सेकंड)
2026 सेवानिवृत्ति पेशेवर एथलेटिक्स करियर का समापन

विरासत और प्रभाव

स्थापित रिकॉर्ड्स

जिन्सन जॉनसन ने भारतीय एथलेटिक्स पर अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने भविष्य की पीढ़ियों के लिए राष्ट्रीय मानक स्थापित किए और यह साबित किया कि भारतीय धावक मध्य-दूरी स्पर्धाओं में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं। उनके रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन ने देशभर के युवा धावकों को प्रेरित किया और केरल को राष्ट्रीय एथलेटिक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाई।

अंतरराष्ट्रीय पहचान

जिन्सन जॉनसन ने विश्व-स्तरीय मध्य-दूरी धावकों के साथ प्रतिस्पर्धा की और कई सत्रों तक लगातार उच्च प्रदर्शन बनाए रखा। उन्होंने विभिन्न महाद्वीपीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया और वैश्विक मंच पर भारतीय एथलेटिक्स को गौरवान्वित किया।

उस्मान ख्वाजा ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की

ऑस्ट्रेलिया के बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया है। सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर होने वाला एशेज सीरीज का आखिरी मुकाबला उनके करियर का आखिरी टेस्ट भी होगा। इसी मैदान पर पाकिस्तान के इस्लामाबाद में जन्म ख्वाजा ने अपना टेस्ट डेब्यू भी किया था। 4 जनवरी से ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच सीरीज का आखिरी मुकाबला शुरू होगा।

उस्मान ख्वाजा का इंटरनेशनल करियर

उस्मान ख्वाजा 4 साल की उम्र में अपने परिवार के साथ न्यू साउथ वेल्स आ गए थे। 2010-11 एशेज सीरीज में रिकी पोंटिंग की चोट की वजह से ख्वाजा को टेस्ट डेब्यू का मौका मिला था। वह ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलने वाले पाकिस्तान में जन्मे पहले खिलाड़ी भी हैं। सिडनी टेस्ट उनके करियर का 88वां मुकाबला होगा। अभी तक 87 टेस्ट में उन्होंने 43.39 की औसत से 6206 रन बनाए हैं। इसमें 16 शतक और 28 फिफ्टी शामिल हैं। ख्वाजा की सबसे बड़ी पारी 232 रनों की रही। इसके अलावा 40 वनडे मैचों में उन्होंने 1554 और 9 टी20 इंटरनेशनल मैच में 241 रन बनाए।

परीक्षा के महत्वपूर्ण बिंदु

  • ऑस्ट्रेलिया के पहले मुस्लिम टेस्ट क्रिकेटर
  • 87 मैचों में 6,206 टेस्ट रन, 43.39 औसत
  • 16 शतक, 28 अर्धशतक
  • 40 मैचों में 1,554 वनडे रन
  • टेस्ट डेब्यू: 2010-11 बनाम इंग्लैंड
  • करियर का निर्णायक पल: 2018 SCG में एशेज शतक (171 रन)
  • रिटायरमेंट: जनवरी 2026 SCG में

वैज्ञानिकों ने बिना किसी रुकावट के ठंडे एटम को मापने के लिए एक नई तकनीक विकसित की

बेंगलुरु स्थित रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI) के वैज्ञानिकों ने ठंडे परमाणुओं (कोल्ड एटम्स) को बिना बाधित किए मापने की एक क्रांतिकारी तकनीक विकसित की है। रमन ड्रिवन स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी (RDSNS) नामक यह नई विधि वैज्ञानिकों को परमाणु प्रणालियों के घनत्व की वास्तविक समय में निगरानी करने में सक्षम बनाती है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम सेंसिंग और उच्च-परिशुद्धता मापन तकनीकों के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास की गति तेज होने की उम्मीद है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

ठंडे परमाणुओं (कोल्ड एटम्स) को मापने की वर्तमान तकनीकें अक्सर परमाणु प्रणाली को नष्ट कर देती हैं या उसकी क्वांटम अवस्था बदल देती हैं। RDSNS इस बड़ी समस्या का समाधान प्रस्तुत करती है, क्योंकि यह मापन को बिना हस्तक्षेप संभव बनाती है।

मुख्य लाभ:

  • नॉन-इनवेसिव (बिना बाधा): परमाणुओं की क्वांटम अवस्था प्रभावित नहीं होती
  • रीयल-टाइम निगरानी: घनत्व का तुरंत मापन
  • उच्च परिशुद्धता: अत्यंत छोटे आयतन (0.01 घन मिलीमीटर) की जांच
  • सिग्नल प्रवर्धन: लगभग 10 लाख गुना तक सिग्नल बढ़ोतरी
  • बेहतर सटीकता: पारंपरिक तरीकों से अधिक विश्वसनीय

RDSNS (Raman Driven Spin Noise Spectroscopy) क्या है?

यह तकनीक स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी पर आधारित है और तीन चरणों में कार्य करती है:

  • परमाणुओं के स्पिन में होने वाले प्राकृतिक उतार-चढ़ाव का पता लगाती है
  • दो रमन लेज़र बीम की मदद से सिग्नल को प्रवर्धित करती है
  • परमाणुओं को नुकसान पहुँचाए बिना अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर घनत्व मापती है
  • इससे लगभग 38 माइक्रोमीटर के क्षेत्र में मौजूद करीब 10,000 परमाणुओं का अध्ययन संभव होता है।

कैसे किया गया परीक्षण?

शोधकर्ताओं ने RDSNS का परीक्षण पोटैशियम परमाणुओं पर किया, जिन्हें एक विशेष मैग्नेटो-ऑप्टिकल ट्रैप में बंद किया गया था।

मुख्य निष्कर्ष:

  • परमाणु बादल का केंद्रीय घनत्व 1 सेकंड में स्थिर
  • पुराने तरीकों में 2 सेकंड लगते थे
  • परिणाम फ्लोरेसेंस इमेजिंग से मेल खाते पाए गए
  • किसी सममिति (symmetry) मान्यता की आवश्यकता नहीं
  • स्थानीय घनत्व का अत्यंत सटीक मापन संभव

क्वांटम तकनीक में अनुप्रयोग

यह उपलब्धि निम्न क्षेत्रों में क्रांतिकारी प्रभाव डालेगी:

  • क्वांटम कंप्यूटर: परमाणु प्रणालियों पर बेहतर नियंत्रण
  • क्वांटम सेंसर: अधिक संवेदनशील ग्रैविमीटर और मैग्नेटोमीटर
  • प्रिसिजन मापन: उच्च-सटीक परमाणु डायग्नॉस्टिक्स
  • क्वांटम ट्रांसपोर्ट अध्ययन: क्वांटम व्यवहार की बेहतर समझ
  • नॉन-इक्विलिब्रियम डायनेमिक्स: नए शोध अवसर

संस्थागत संदर्भ

  • संस्थान: रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI), बेंगलुरु
  • स्थिति: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत स्वायत्त संस्थान
  • प्रयोगशाला प्रमुख: प्रो. सप्तऋषि चौधुरी (QuMIX लैब)
  • समर्थन: भारत का राष्ट्रीय क्वांटम मिशन

भारतीय रेलवे ने 100 पुरस्कार विजेताओं को 70वां अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार प्रदान किया

भारतीय रेल 70वें अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार–2025 के अंतर्गत 100 अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी असाधारण सेवा और उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित करेगी। यह भव्य पुरस्कार समारोह 9 जनवरी 2026 को यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पुरस्कार प्रदान करेंगे, जिनका उद्देश्य उन व्यक्तियों को सम्मानित करना है जिनके कार्यों ने देशभर में रेलवे संचालन, सुरक्षा और सार्वजनिक सेवा वितरण को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ये पुरस्कार क्यों महत्वपूर्ण हैं?

अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार भारतीय रेल के सर्वोच्च सेवा सम्मानों में से एक है। इन पुरस्कारों के माध्यम से निम्नलिखित क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता दी जाती है—

  • नवाचार (Innovation): प्रक्रियाओं में सुधार और उत्पादकता बढ़ाने वाली पहल
  • साहस और निस्वार्थ सेवा: यात्रियों तथा रेलवे संपत्ति की सुरक्षा के लिए असाधारण साहस
  • संचालन उत्कृष्टता: सुरक्षा, रखरखाव और अवसंरचना संरक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन
  • संस्थागत उत्कृष्टता: सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले रेलवे ज़ोन
  • उदाहरणीय सेवा: विभिन्न क्षेत्रों में किए गए उल्लेखनीय और प्रभावशाली योगदान

ये पुरस्कार भारतीय रेल के मानव संसाधन की प्रतिबद्धता, क्षमता और सेवा भावना को सम्मानित करते हैं तथा कार्यकुशलता और उत्कृष्टता की संस्कृति को प्रोत्साहित करते हैं।

पुरस्कार श्रेणियाँ एवं मान्यता

कुल 100 पुरस्कारार्थियों का चयन किया गया है, जिनमें विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हैं—

  • 17 अधिकारी: नवाचार तथा प्रक्रियागत सुधारों के लिए
  • 22 कार्मिक: असाधारण साहस और निस्वार्थ सेवा के लिए
  • 14 अधिकारी: राजस्व वृद्धि एवं सतर्कता (विजिलेंस) प्रयासों के लिए
  • 19 कर्मचारी: संचालन उत्कृष्टता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए
  • 16 पुरस्कारार्थी: रिकॉर्ड समय में प्रमुख परियोजनाओं के सफल पूर्ण होने के लिए
  • 10 कार्मिक: विभिन्न कार्यक्षेत्रों में उत्कृष्ट एवं बहुआयामी प्रदर्शन के लिए
  • 2 खिलाड़ी: राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल उपलब्धियों के लिए

इसके अतिरिक्त, विभिन्न श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले रेलवे ज़ोनों को कुल 26 शील्ड प्रदान की जाएँगी।

विशेष उपलब्धियों की मान्यता

इन पुरस्कारों के माध्यम से उन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया गया है जिन्होंने—

  • महाकुंभ आयोजन के दौरान सुरक्षित और निर्बाध रेल संचालन सुनिश्चित किया
  • ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महत्वपूर्ण सेवाओं का सुचारु संचालन बनाए रखा
  • चुनौतीपूर्ण ट्रैक सेक्शनों पर बैलास्ट क्लीनिंग मशीनों की शुरुआत की
  • ट्रैक सुरक्षा और यात्रा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार किया
  • दीर्घकालिक रखरखाव दक्षता में योगदान दिया
  • बिना टिकट यात्रा और चोरी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया
  • रेल अवसंरचना और नेटवर्क क्षमता के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

ये सम्मान भारतीय रेल के समर्पित कर्मियों की प्रतिबद्धता, नवाचार और जनसेवा भावना को उजागर करते हैं।

कार्यक्रम विवरण

पुरस्कार समारोह:

  • तिथि: 9 जनवरी 2025
  • स्थान: यशोभूमि (भारत का सबसे बड़ा कन्वेंशन एवं एग्ज़ीबिशन सेंटर), नई दिल्ली
  • अध्यक्षता: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (रेलवे, सूचना एवं प्रसारण, तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी)

विशिष्ट अतिथि:

  • राज्य मंत्री: वी. सोमनन्ना एवं रवनीत सिंह
  • रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं सीईओ: सतीश कुमार
  • रेलवे बोर्ड के सदस्य
  • रेलवे ज़ोनों एवं उत्पादन इकाइयों के महाप्रबंधक

यह समारोह भारतीय रेल के उत्कृष्ट अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनके असाधारण योगदान के लिए सम्मानित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

2025-26 में भारत की GDP 7.4% बढ़ेगी: NSO Report

नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए भारत की GDP के पहले एडवांस अनुमान (FAE) जारी किए हैं। ये अनुमान भारत की आर्थिक परफॉर्मेंस दिखाते हैं और फाइनल आंकड़े जारी होने से पहले ग्रोथ के शुरुआती संकेत देते हैं।

यह क्यों मायने रखता है?

FAE इसलिए ज़रूरी है क्योंकि:

  • यह RBI की मॉनेटरी पॉलिसी (ब्याज दरों) को प्रभावित करता है
  • सरकारी खर्च के फैसलों को गाइड करता है
  • भारत में निवेशकों के भरोसे पर असर डालता है
  • सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर भारत की स्थिति को सही साबित करता है

जल्दी (जनवरी में) जारी होने से पॉलिसी में बदलाव के लिए 9 महीने मिलते हैं।

प्रमुख व्यक्ति (परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण)

विकास दरें:

सूचक FY26 FY25 परिवर्तन
वास्तविक जीडीपी 7.4% 6.5% ↑ 0.9%
नाममात्र जीडीपी 8% 10.4% ↓ 2.4%
रियल जीवीए 7.3%

एब्सोल्यूट वैल्यू (लाख करोड़ रुपये):

  • रियल GDP: 201.90 (बनाम FY25 में 187.97)
  • नॉमिनल GDP: 357.14 (बनाम FY25 में 330.68)

खर्च के घटक:

  • GFCF (निवेश): 7.8% सबसे ज़्यादा
  • PFCE (उपभोक्ता खर्च): 7.0%
  • GFCE (सरकारी खर्च): 5.2%

सेक्टर-वार विकास (FY26)

क्षेत्र विकास स्थिति
तृतीयक (सेवाएं) 9.1% सबसे तेज़
माध्यमिक (विनिर्माण) 6.6% उत्पादन +2.5%
प्राथमिक (कृषि) 2.7% धीमी

मुख्य बात: PLI स्कीम और बेहतर कैपेसिटी यूटिलाइज़ेशन की वजह से मैन्युफैक्चरिंग 4.5% से बढ़कर 7.0% हो गई।

महत्वपूर्ण विवरण (Important Details)

वास्तविक बनाम नाममात्र वृद्धि (Real vs Nominal):

  • वास्तविक GDP (7.4%): मुद्रास्फीति को घटाकर वास्तविक आर्थिक वृद्धि
  • नाममात्र GDP (8%): मुद्रास्फीति सहित (लगभग 0.6%)

मंत्री: राव इंदरजीत सिंह — सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन राज्य मंत्री (MoS), गुरुग्राम

संगठन: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) / सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI)

परीक्षा के लिए याद रखने योग्य बिंदु 

  • वास्तविक GDP वृद्धि (FY26): 7.4%
  • सबसे तेज़ बढ़ने वाला क्षेत्र: तृतीयक (सेवा) क्षेत्र — 9.1%
  • विनिर्माण (Manufacturing) वृद्धि: 7.0% (पहले 4.5% से बढ़कर)
  • सांख्यिकी मंत्री: राव इंदरजीत सिंह

संभावित प्रश्न (Likely Questions):

  • FY26 में वास्तविक GDP वृद्धि कितनी है? → 7.4%
  • सबसे तेज़ वृद्धि किस क्षेत्र में हुई? → तृतीयक/सेवा क्षेत्र (9.1%)
  • विनिर्माण वृद्धि किससे बढ़कर 7.0% हुई? → 4.5% से
  • सांख्यिकी मंत्री कौन हैं? → राव इंदरजीत सिंह

केरल के वायनाड में पेपरलेस कोर्ट की शुरुआत, जानें सबकुछ

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने 06 जनवरी 2026 को केरल के वायनाड ज़िले के कल्पेट्टा में देश की पहली पूरी तरह पेपरलेस ज़िला अदालत का वर्चुअल उद्घाटन किया। यह ऐतिहासिक उपलब्धि ज़िला न्यायपालिका के पूर्ण डिजिटल परिवर्तन का प्रतीक है, जहाँ अब मामले की दाख़िलगी से लेकर अंतिम निर्णय तक सभी न्यायिक कार्यवाहियाँ पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से संचालित होंगी।

यह क्यों मायने रखता है?

यह डेवलपमेंट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:

  • न्यायिक आधुनिकीकरण: यह डिजिटल अदालतों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दिखाता है
  • दक्षता में बढ़ोतरी: देरी, कोर्ट के चक्कर और क्लर्कियल गलतियों को कम करता है
  • टेक्नोलॉजी का इंटीग्रेशन: जिला अदालत के कामकाज में AI का पहला इस्तेमाल
  • नागरिक-केंद्रित: डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए न्याय तक पहुंच में सुधार करता है
  • पर्यावरणीय प्रभाव: भारी मात्रा में कागज़ की खपत को खत्म करता है

प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ

तकनीक एवं विकास

  • डेवलपर: केरल उच्च न्यायालय (इन-हाउस विकसित प्रणाली)
  • एआई एकीकरण: कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित न्यायिक सहायता
  • डिजिटल हस्ताक्षर: आदेशों एवं निर्णयों का सुरक्षित प्रमाणीकरण
  • केंद्रीकृत प्रणाली: सभी न्यायिक कार्यवाहियों के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म

एआई-संचालित विशेषताएँ

  • मामलों का स्वचालित सारांश निर्माण (संरचित प्रारूप में)
  • केस विश्लेषण हेतु इंटरैक्टिव प्रश्न–उत्तर सहायता
  • डिजिटल एनोटेशन एवं दस्तावेज़ मार्कअप सुविधा
  • बयान और न्यायिक डिक्टेशन के लिए वॉइस-टू-टेक्स्ट
  • ट्रांसक्रिप्ट का स्वचालन

संचालनात्मक लाभ

पहलू प्रभाव
लिपिकीय देरी उल्लेखनीय रूप से कम
न्यायालय यात्राएँ डिजिटल पहुँच के माध्यम से न्यूनतम
लागत मुकदमेबाज़ी व्यय में कमी
भंडारण भौतिक फ़ाइल भंडारण की आवश्यकता नहीं
आदेश संप्रेषण त्वरित डिजिटल वितरण
मामले का निपटान तेज़ और अधिक कुशल समाधान

सिस्टम वर्कफ़्लो (System Workflow)

एंड-टू-एंड डिजिटल प्रक्रिया:

  1. केस फाइलिंग (ऑनलाइन सबमिशन)
  2. दस्तावेज़ अपलोड (डिजिटल फ़ॉर्मेट)
  3. एआई-सहायित केस विश्लेषण
  4. डिजिटल सुनवाई नोटिस
  5. इलेक्ट्रॉनिक कार्यवाही
  6. एआई-जनित केस सारांश
  7. डिजिटल निर्णय/आदेश की आपूर्ति
  8. सुरक्षित डिजिटल हस्ताक्षर

न्यायपालिका के लिए महत्व (Significance for Judiciary)

न्यायिक दक्षता:

  • मामलों का तेज़ निपटान
  • लंबित मामलों (बैकलॉग) में कमी
  • बेहतर केस प्रबंधन
  • न्याय तक बेहतर पहुँच

नागरिकों के लिए:

  • दूरस्थ रूप से केस ट्रैकिंग
  • बार-बार कोर्ट जाने की आवश्यकता नहीं
  • कानूनी लागत में कमी
  • त्वरित न्याय वितरण

न्यायाधीशों के लिए:

  • प्रभावी केस प्रबंधन टूल्स
  • एआई-सहायित कानूनी शोध
  • प्रशासनिक बोझ में कमी
  • निर्णय लेखन में बेहतर सहायता

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु (Exam Important Points)

याद रखें:

  • मुख्य न्यायाधीश (CJI): सूर्य कांत
  • स्थान: कालपेट्टा, वायनाड, केरल
  • तिथि: 6 जनवरी 2026
  • डेवलपर: केरल हाईकोर्ट (इन-हाउस)
  • मुख्य विशेषता: पूर्णतः पेपरलेस + एआई एकीकरण
  • पूर्ण नाम: भारत की पहली पूर्णतः पेपरलेस जिला अदालत

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