संघर्ष की एक सदी: CPI के वरिष्ठ नेता आर. नल्लाकन्नु का 101 वर्ष की आयु में निधन

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के वरिष्ठ नेता आर. नल्लाकन्नु का 25 फरवरी 2026 को चेन्नई में 101 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे आयु संबंधी बीमारियों के कारण 1 फरवरी से राजीव गांधी सरकारी जनरल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थे। उनके निधन के साथ ही तमिलनाडु ने अपने अंतिम शतायु और प्रभावशाली कम्युनिस्ट नेताओं में से एक को खो दिया। लगभग आठ दशकों तक नल्लाकन्नु ईमानदारी, त्याग और शोषितों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के प्रतीक बने रहे।

आर. नल्लाकन्नु – संघर्ष को समर्पित एक जीवन

आर. नल्लाकन्नु, जिन्हें स्नेहपूर्वक कॉमरेड आरएनके कहा जाता था, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के वरिष्ठ और सम्मानित नेता थे। उनका जन्म 26 दिसंबर 1925 को तमिलनाडु के तूतीकोरिन (Thoothukudi) जिले के श्रीवैगुंडम के निकट पेरुम्पथु गाँव में हुआ था। बचपन से ही उन्होंने गरीबी और शोषण को करीब से देखा। मार्क्सवादी विचारधारा से प्रभावित होकर वे 1946 में, जब भारत अभी ब्रिटिश शासन के अधीन था, CPI में शामिल हुए। उनके लिए राजनीति कभी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का साधन नहीं रही, बल्कि शोषित और वंचित वर्गों को संगठित करने का आजीवन मिशन थी।

गिरफ्तारी, जेल और नेल्लै साजिश मामला

उनकी सक्रियता के कारण उन्हें सत्ता के विरोध का सामना करना पड़ा। 1948 में नेल्लै साजिश मामले में उन्हें गिरफ्तार कर सात वर्ष की सजा हुई। जेल के दौरान उन्होंने अमानवीय यातनाएँ झेलीं। एक घटना में एक पुलिसकर्मी ने उनकी मूंछ सिगरेट से जला दी, जिसके बाद उन्होंने जीवनभर मूंछ नहीं रखी। कठिनाइयों के बावजूद उनका संकल्प और मजबूत हुआ, और जेल का समय उनके राजनीतिक जीवन का निर्णायक अध्याय बन गया।

किसानों और पर्यावरण के प्रबल समर्थक

आर. नल्लाकन्नु का जीवन जमीनी आंदोलनों से गहराई से जुड़ा रहा। उनके प्रमुख संघर्ष क्षेत्रों में शामिल थे:

  • किसानों के अधिकार और कृषि सुधार
  • कृषि मजदूरों का कल्याण
  • तमिलनाडु में अवैध रेत खनन का विरोध
  • पर्यावरण संरक्षण, विशेषकर कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना पर चिंताएँ

लगभग 25 वर्षों तक उन्होंने किसान संगठनों का नेतृत्व किया और तमिलनाडु भर में मजबूत जनाधार तैयार किया। वृद्धावस्था तक वे सक्रिय रहे।

CPI और तमिलनाडु की राजनीति में नेतृत्व

उन्होंने 13 वर्षों तक CPI के राज्य सचिव के रूप में कार्य किया और पार्टी को तमिलनाडु की राजनीति में मजबूत आधार प्रदान किया। उनके नेतृत्व में:

  • मजदूरों और किसानों के बीच CPI का प्रभाव बढ़ा
  • प्रगतिशील राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन मजबूत हुए
  • सामाजिक न्याय और श्रमिक अधिकार प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बने

2023 में CPM के वरिष्ठ नेता एन. शंकरैया के निधन के बाद, नल्लाकन्नु राज्य के अंतिम शतायु कम्युनिस्ट नेता थे।

व्यक्तिगत ईमानदारी और सादगी

आर. नल्लाकन्नु की सबसे बड़ी पहचान उनकी निष्कलंक ईमानदारी थी।

  • 80वें जन्मदिन पर पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा भेंट की गई कार और ₹1 करोड़ की राशि उन्होंने लौटा दी।
  • 2022 में ‘थगैसाल तमिझर’ पुरस्कार के तहत मिले ₹15 लाख उन्होंने मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर दिए और अपनी ओर से ₹5,000 अतिरिक्त जोड़े।

सार्वजनिक जीवन में दशकों बिताने के बावजूद उन्होंने सादा जीवन जिया और सभी राजनीतिक दलों के बीच सम्मान प्राप्त किया।

पुरस्कार और सम्मान

उनके योगदान को व्यापक रूप से मान्यता मिली। उन्हें प्राप्त प्रमुख सम्मान:

  • अंबेडकर पुरस्कार (2008)
  • ‘थगैसाल तमिझर’ पुरस्कार (2023)

ये सम्मान सामाजिक न्याय, कृषि सुधार और प्रगतिशील राजनीति के प्रति उनके आजीवन समर्पण का प्रतीक थे।

भारत और स्वीडन ने SITAC रूपरेखा के तहत एआई साझेदारी को और मजबूत किया

भारत और स्वीडन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इंडियाएआई मिशन और व्यापार स्वीडन ने भारत एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन 2026 (India AI Impact Summit 2026) के दौरान एक आशय-पत्र (Statement of Intent – SoI) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य एआई क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देना तथा दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को सशक्त बनाना है।

स्टेटमेंट ऑफ इंटेंट (SoI) क्या है?

स्टेटमेंट ऑफ इंटेंट (Statement of Intent – SoI) एक औपचारिक रूपरेखा (Framework) है, जो दो देशों के बीच सहयोग को संरचित और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए तैयार की जाती है।

इस समझौते के तहत सहयोग के प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं:

  • एआई समाधान (AI Solutions) का विकास
  • एआई तकनीकों का विभिन्न क्षेत्रों में अनुप्रयोग
  • उद्योगों में एआई का व्यापक कार्यान्वयन (Deployment)
  • वास्तविक औद्योगिक और सामाजिक परिणामों पर विशेष ध्यान

यह समझौता दर्शाता है कि दोनों देश नवाचार, आर्थिक विकास और सतत विकास के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करना चाहते हैं, साथ ही एआई से जुड़े संभावित जोखिमों को जिम्मेदारीपूर्वक संबोधित करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।

SITAC कार्यक्रम का शुभारंभ

इस समझौते की एक प्रमुख उपलब्धि स्वीडन–भारत टेक्नोलॉजी एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉरिडोर (SITAC) की शुरुआत है। यह पहल इंडियाएआई मिशन और व्यापार स्वीडन के सहयोग से शुरू की गई है।

SITAC एक प्रमुख (Flagship) मंच के रूप में कार्य करेगा, जो निम्नलिखित के बीच संरचित सहयोग को बढ़ावा देगा:

  • सरकारी एजेंसियाँ
  • उद्योग हितधारक
  • स्टार्टअप्स
  • शैक्षणिक एवं शोध संस्थान

इस पहल का उद्देश्य दोनों देशों के एआई इकोसिस्टम को जोड़ना तथा व्यापार और नवाचार के नए अवसरों का सृजन करना है।

SITAC के अंतर्गत प्रमुख पहलें

SITAC ढांचे के तहत निम्नलिखित गतिविधियाँ संचालित की जाएंगी:

  • सम्मेलन, सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन
  • भारतीय और स्वीडिश एआई इकोसिस्टम के बीच आदान-प्रदान कार्यक्रम
  • नवाचार केंद्रों और उत्कृष्टता केंद्रों (Centres of Excellence) का भ्रमण
  • कंपनियों, निवेशकों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद
  • संयुक्त नवाचार मंचों और निवेश गलियारों की पहचान
  • प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में एआई के व्यापक उपयोग को बढ़ावा

आधिकारिक वक्तव्य

कविता भाटिया, सीओओ, इंडियाएआई मिशन ने कहा कि भारत और स्वीडन एक मूल्य-आधारित और विश्वसनीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भविष्य के सह-निर्माता (Co-architects) हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश जिम्मेदार और भरोसेमंद एआई विकास के लिए साझा दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

वहीं, सोफिया होगमैन, स्वीडन की ट्रेड एंड इन्वेस्ट कमिश्नर टू इंडिया ने कहा कि यह आशय-पत्र (SoI) साझा रणनीतिक दृष्टि को ठोस और व्यावहारिक परिणामों में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है।

यह साझेदारी क्यों महत्वपूर्ण है?

यह सहयोग निम्नलिखित उद्देश्यों के अनुरूप है:

  • IndiaAI Mission का उद्देश्य कम्प्यूटिंग संसाधनों (Compute), डेटा और प्रतिभा (Talent) तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करके एक सशक्त राष्ट्रीय एआई इकोसिस्टम का निर्माण करना है, जिससे देश में नवाचार और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके।
  • वहीं स्वीडन औद्योगिक नवाचार, उन्नत अनुसंधान और जिम्मेदार एआई कार्यान्वयन (Responsible AI Implementation) में अपनी मजबूत विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है।

यह साझेदारी उद्यमों, स्टार्टअप्स और शोध संस्थानों को व्यापक, समावेशी और स्केलेबल एआई समाधान विकसित करने में सहायता प्रदान करेगी, जिससे आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति और सतत विकास को गति मिलेगी।

ऐतिहासिक सम्मान: मोदी इज़राइल और फ़िलिस्तीन दोनों द्वारा सम्मानित होने वाले पहले नेता बने

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल और फलस्तीन दोनों से सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करने वाले विश्व के चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं। इजरायली संसद (केसेट) में अपने ऐतिहासिक संबोधन के बाद उन्हें ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित किया गया। यह केसेट का सर्वोच्च सम्मान है और पीएम मोदी इस पदक को प्राप्त करने वाले पहले नेता बने हैं।

केसेट स्पीकर अमीर ओहाना ने यह मेडल पीएम मोदी को प्रदान किया, जो उनके व्यक्तिगत नेतृत्व के माध्यम से भारत-इजरायल रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने और ऊंचाइयों पर ले जाने में दिए गए असाधारण योगदान की मान्यता है। यह मेडल विशेष रूप से भारत और इजराइल के बीच गहरी दोस्ती और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को समर्पित है। पीएम मोदी ने इस सम्मान को स्वीकार करते हुए इसे दोनों देशों की स्थायी मित्रता का प्रतीक बताया और विनम्रता से ग्रहण किया।

स्पीकर ऑफ द केसेट मेडल – इज़राइल का सर्वोच्च संसदीय सम्मान

इजरायली संसद (केसेट) में 25 फरवरी 2026 को अपने ऐतिहासिक संबोधन के बाद उन्हें ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान इज़राइली संसद का सर्वोच्च संसदीय अलंकरण है। यह पदक केसेट के स्पीकर अमीर ओहाना द्वारा प्रदान किया गया, जिससे प्रधानमंत्री मोदी इस सम्मान को प्राप्त करने वाले पहले वैश्विक नेता बन गए।

यह पुरस्कार भारत–इज़राइल के रणनीतिक संबंधों को सुदृढ़ करने में उनके “असाधारण योगदान” के लिए दिया गया, जिसमें रक्षा, नवाचार, प्रौद्योगिकी और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग शामिल है। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत–इज़राइल संबंधों को “अद्भुत मित्रता” बताते हुए दोनों देशों के बीच मजबूत व्यक्तिगत और द्विपक्षीय संबंधों की सराहना की।

ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन – 2018 का सम्मान

वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘फिलिस्तीन राज्य का ग्रैंड कॉलर’ से सम्मानित किया गया, जो विदेशी नेताओं को दिया जाने वाला फिलिस्तीन का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह पुरस्कार फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास द्वारा भारत के फिलिस्तीनी आकांक्षाओं के समर्थन और द्विपक्षीय सहयोग के सम्मान में प्रदान किया गया। यह सम्मान विश्व के कई प्रमुख नेताओं को भी दिया जा चुका है, जिससे प्रधानमंत्री मोदी एक विशिष्ट कूटनीतिक श्रेणी में शामिल हुए।

केसेट को संबोधन – आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख

यरूशलम में Knesset को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दोहराया। अपने संबोधन में उन्होंने 26/11 मुंबई हमलों को याद किया और 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ समन्वित वैश्विक कार्रवाई का आह्वान करते हुए कहा कि “कहीं भी आतंक, हर जगह शांति के लिए खतरा है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवाद से निपटने के लिए बिना किसी दोहरे मापदंड के निरंतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।

गाजा शांति पहल और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति समर्थन

प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा समर्थित गाजा शांति पहल के प्रति भी समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने संवाद और कूटनीति के प्रति प्रतिबद्धता, स्थायी और न्यायपूर्ण शांति के समर्थन तथा क्षेत्रीय स्थिरता की भारत की निरंतर नीति पर जोर दिया। उनके वक्तव्य ने पश्चिम एशिया में भारत के संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाया—जहाँ एक ओर इज़राइल के साथ मजबूत संबंध बनाए रखे गए हैं, वहीं दूसरी ओर फिलिस्तीनी राष्ट्र की आकांक्षाओं और शांति प्रयासों का समर्थन भी जारी है।

भारत की पश्चिम एशिया कूटनीति के लिए रणनीतिक महत्व

इज़राइल और फिलिस्तीन दोनों से सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करना एक दुर्लभ कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। इससे भारत-इज़राइल रणनीतिक साझेदारी को मजबूती मिली है, फिलिस्तीन के साथ सद्भाव कायम रहा है, भारत की वैश्विक कूटनीतिक प्रतिष्ठा बढ़ी है और स्वतंत्र विदेश नीति को बल मिला है। वर्ष 2026 की इज़राइल यात्रा प्रधानमंत्री मोदी की नौ वर्षों में दूसरी यात्रा है, जिसने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा किया है।

PM Modi को मिला इजरायली संसद का ‘सर्वोच्च सम्मान’, बने मेडल पाने वाले पहले वैश्विक नेता

भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 25 फरवरी 2026 को यरुशलम में इज़राइल की सर्वोच्च संसदीय सम्मान “स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल” से सम्मानित किया गया। वे इस प्रतिष्ठित सम्मान को प्राप्त करने वाले पहले वैश्विक नेता बन गए हैं। यह पुरस्कार भारत–इज़राइल के बीच सामरिक संबंधों को गहरा करने, व्यापारिक सहयोग को बढ़ावा देने तथा नवाचार, रक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी का विस्तार करने में उनके व्यक्तिगत नेतृत्व और योगदान के लिए प्रदान किया गया।

इज़राइल में प्रधानमंत्री मोदी को “स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल” से सम्मान

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इज़राइल की संसद नेसेट को संबोधित करने के बाद “स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान नेसेट के स्पीकर अमीर ओहाना द्वारा प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री मोदी इस प्रतिष्ठित सम्मान को प्राप्त करने वाले पहले वैश्विक नेता बने हैं।

मुख्य बिंदु:

  • यह मेडल प्राप्त करने वाले पहले विश्व नेता
  • भारत–इज़राइल सामरिक संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए सम्मानित
  • व्यक्तिगत कूटनीतिक नेतृत्व की मान्यता
  • इज़राइल का सर्वोच्च संसदीय सम्मान

भारत–इज़राइल सामरिक साझेदारी को नई मजबूती

नेसेट में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और इज़राइल का नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (Innovation Ecosystem) गहरी साझेदारी का स्वाभाविक आधार है।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र:

  • रक्षा और सुरक्षा सहयोग
  • कृषि प्रौद्योगिकी एवं जल प्रबंधन
  • साइबर सुरक्षा और नवाचार
  • व्यापार और निवेश

यह सम्मान द्विपक्षीय संबंधों को सामरिक स्तर तक ले जाने में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका को मान्यता देता है।

मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर प्रगति

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत–इज़राइल मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हो रही प्रगति का भी उल्लेख किया।

महत्वपूर्ण विकास:

  • FTA वार्ता का पहला दौर शुरू
  • वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार विस्तार पर जोर
  • अप्रयुक्त व्यापार संभावनाओं को खोलने की दिशा में प्रयास
  • उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, किंतु अभी भी दोनों देशों के बीच अवसरों की पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हुआ है।

“स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल” का महत्व

यह मेडल इज़राइल का सर्वोच्च संसदीय सम्मान है, जो असाधारण योगदान और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रदान किया जाता है।

  • भारत के लिए यह सम्मान:
  • कूटनीतिक प्रतिष्ठा को बढ़ाता है
  • पश्चिम एशिया में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करता है
  • सामरिक सहयोग को मजबूती देता है
  • आर्थिक एवं प्रौद्योगिकी सहयोग को प्रोत्साहित करता है

यह पुरस्कार प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।

भारत–इज़राइल संबंध : एक अवलोकन

भारत और इज़राइल ने वर्ष 1992 में पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। तब से रक्षा, कृषि, जल संरक्षण, साइबर सुरक्षा और व्यापार सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंध तेजी से विस्तारित हुए हैं। इज़राइल भारत के प्रमुख रक्षा आपूर्तिकर्ताओं में से एक है, जबकि व्यापार अब उच्च-प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारियों तक विस्तृत हो चुका है। नियमित उच्चस्तरीय यात्राओं और रणनीतिक संवादों ने दोनों देशों के बीच राजनीतिक विश्वास और आर्थिक सहयोग को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है।

गामिनी ने कुनो में तीन शावकों को जन्म दिया, भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 38 हुई

दक्षिण अफ्रीका से लाई गई चीता गामिनी ने कुनो राष्ट्रीय उद्यान में तीन शावकों को जन्म दिया है, जिससे भारत में कुल चीतों की संख्या बढ़कर 38 हो गई है। सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि भारत में जन्मे जीवित चीता शावकों की संख्या अब 27 हो गई है। इस नवीनतम जन्म के साथ भारतीय धरती पर चीते के नौवें सफल कुनबे (लिटर) का रिकॉर्ड दर्ज हुआ है।

गामिनी का दूसरा कुनबा

मंत्री ने बताया कि गामिनी दूसरी बार माँ बनी है। यह जन्म उस समय हुआ है जब दक्षिण अफ्रीका से चीतों को भारत लाए जाने के तीन वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सफल जन्म प्रोजेक्ट चीता को और मजबूती देता है तथा भारत के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का प्रतीक है।

ऐतिहासिक वन्यजीव स्थानांतरण

प्रोजेक्ट चीता को बड़े मांसाहारी जीव का विश्व का पहला अंतर-महाद्वीपीय स्थानांतरण (Inter-continental Translocation) माना जाता है। वर्ष 2022–23 के दौरान नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से कुल 20 चीतों को भारत लाया गया। Narendra Modi ने 17 सितंबर 2022 को कुनो नेशनल पार्क में पहले आठ चीतों को स्वयं छोड़ा था। इस परियोजना का उद्देश्य भारत में चीता आबादी को पुनर्स्थापित करना है, जिसे वर्ष 1952 में देश में विलुप्त घोषित कर दिया गया था।

संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि

नवीनतम जन्म भारत में एक स्थायी और आत्मनिर्भर चीता आबादी स्थापित करने के प्रयासों में निरंतर प्रगति को दर्शाता है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए लगातार सफल प्रजनन अत्यंत आवश्यक है, जिससे भारतीय आवासों में चीतों की स्थिर और सुरक्षित आबादी विकसित हो सके।

MCQs: प्रोजेक्ट चीता और कुनो नेशनल पार्क

Q1. हाल ही में कुनो नेशनल पार्क में किस चीते ने तीन बच्चों को जन्म दिया?
(a) साशा
(b) आशा
(c) गामिनी
(d) सियाया
(e) निरवा

जवाब: (c)
Sol: गामिनी, एक साउथ अफ़्रीकी चीता, ने तीन बच्चों को जन्म दिया।

Q2. तीन बच्चों के जन्म के साथ, भारत में चीतों की कुल आबादी पहुँच गई है:
(a) 32
(b) 34
(c) 36
(d) 38
(e) 40

जवाब: (d)
Sol: चीतों की कुल आबादी बढ़कर 38 हो गई है।

Q3. अब भारत में जन्मे कितने चीते के बच्चे बचे हैं? (a) 24
(b) 25
(c) 26
(d) 27
(e) 28

Ans: (d)
Sol: भारत में जन्मे जीवित शावकों की संख्या 27 तक पहुँच गई है।

Q4. प्रोजेक्ट चीता में किन देशों से चीते लाए गए?

(a) केन्या और तंजानिया
(b) नामीबिया और साउथ अफ्रीका
(c) बोत्सवाना और ज़िम्बाब्वे
(d) इथियोपिया और सूडान
(e) ब्राज़ील और अर्जेंटीना

Ans: (b)
Sol: नामीबिया और साउथ अफ्रीका से 20 चीते लाए गए।

Q5. भारत में पहले आठ चीते कब छोड़े गए:
(a) 15 अगस्त 2022
(b) 2 अक्टूबर 2022
(c) 17 सितंबर 2022
(d) 26 जनवरी 2023
(e) 5 जून 2022

उत्तर: (c)
उत्तर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले आठ चीतों को 17 सितंबर 2022 को छोड़ा।

केंद्रीय कैबिनेट ने केरल का नाम बदलकर “केरलम” करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने “केरल” राज्य का नाम बदलकर “केरलम” करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय केरल विधान सभा द्वारा 24 जून 2024 को पारित उस प्रस्ताव के बाद लिया गया, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत राज्य के नाम में आधिकारिक परिवर्तन के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया गया था। इस स्वीकृति के साथ राज्य के नाम को उसकी मूल भाषाई और सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप “केरलम” करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत प्रक्रिया

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 3 संसद को किसी राज्य के नाम, क्षेत्रफल या सीमाओं में परिवर्तन करने का अधिकार देता है। संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार, राष्ट्रपति “केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026” को राज्य विधानमंडल की राय प्राप्त करने हेतु Kerala Legislative Assembly को संदर्भित करेंगे। राज्य विधानसभा की राय प्राप्त होने के बाद केंद्र सरकार आगे की कार्रवाई करेगी। राष्ट्रपति की अनुशंसा के बिना यह विधेयक संसद में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। साथ ही, संविधान की प्रथम अनुसूची में संशोधन भी आवश्यक होगा, जहाँ राज्य का नाम वर्तमान में “Kerala” अंकित है।

मांग की पृष्ठभूमि

केरल विधान सभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर कहा था कि राज्य का नाम मलयालम भाषा में “केरलम” है। प्रस्ताव में उल्लेख किया गया कि 1 नवंबर 1956 को राज्यों का भाषाई आधार पर पुनर्गठन हुआ था और इसी दिन “केरल पिरवी दिवस” भी मनाया जाता है। विधानसभा ने केंद्र से राज्य की ऐतिहासिक और भाषाई पहचान के अनुरूप नाम संशोधित करने का आग्रह किया था।

मंत्रालयीय समीक्षा और स्वीकृति

इस प्रस्ताव की समीक्षा गृह मंत्रालय द्वारा की गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की स्वीकृति के बाद इसे विधि एवं न्याय मंत्रालय के अंतर्गत विधिक कार्य विभाग और विधायी विभाग को भेजा गया। दोनों विभागों की सहमति के पश्चात प्रस्ताव को मंत्रिमंडल के समक्ष रखा गया, जहाँ इसे मंजूरी प्रदान की गई।

निर्णय का महत्व

यदि संसद इस विधेयक को पारित कर देती है, तो राज्य का आधिकारिक नाम “केरल” से बदलकर “केरलम” हो जाएगा और सभी संवैधानिक अभिलेखों में यही नाम दर्ज होगा। यह कदम राज्य की भाषाई पहचान और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के साथ-साथ उसके मूल मलयालम उच्चारण के अनुरूप आधिकारिक नाम सुनिश्चित करेगा।

MCQs: नाम बदलना – केरल से केरलम

Q1. यूनियन कैबिनेट ने केरल का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है:
(a) केरल
(b) केरलम
(c) मलयालम प्रदेश
(d) मालाबार
(e) त्रावणकोर

जवाब: (b)
जवाब: प्रस्तावित नया नाम “केरलम” है।

Q2. किसी राज्य का नाम बदलने की शक्ति भारत के संविधान के किस आर्टिकल के तहत दी गई है?
(a) आर्टिकल 1
(b) आर्टिकल 2
(c) आर्टिकल 3
(d) आर्टिकल 4
(e) आर्टिकल 5

जवाब: (c)
जवाब: आर्टिकल 3 संसद को किसी भी राज्य का नाम बदलने का अधिकार देता है।

Q3. संसद में बिल पेश करने से पहले, इसे अपने विचार बताने के लिए किस बॉडी को भेजा जाना चाहिए? (a) सुप्रीम कोर्ट
(b) इलेक्शन कमीशन
(c) संबंधित राज्य विधानसभा
(d) नीति आयोग
(e) फाइनेंस कमीशन

जवाब: (c)
जवाब: प्रेसिडेंट को बिल संबंधित राज्य विधानसभा को भेजना होगा।

Q4. केरल विधानसभा ने नाम बदलने का प्रस्ताव कब पास किया:
(a) 15 अगस्त 2023
(b) 1 नवंबर 2023
(c) 24 जून 2024
(d) 26 जनवरी 2024
(e) 2 अक्टूबर 2024

जवाब: (c)
जवाब: प्रस्ताव 24.06.2024 को पास हुआ था।

Q5. संशोधन के लिए संविधान के किस शेड्यूल में बदलाव की ज़रूरत होगी? (a) दूसरी अनुसूची
(b) तीसरी अनुसूची
(c) चौथी अनुसूची
(d) पाँचवीं अनुसूची
(e) पहली अनुसूची

उत्तर: (e)
उत्तर: राज्यों का नाम संविधान की पहली अनुसूची में दिया गया है।

भारत अपना पहला व्यापक कार्बन ट्रेडिंग कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी में

भारत अपने पहले व्यापक कार्बन ट्रेडिंग कार्यक्रम को शुरू करने के अंतिम चरण में है, जिसका उद्देश्य औद्योगिक उत्सर्जन को विनियमित और रिपोर्ट करना है। यह योजना देश की जलवायु कार्यनीति (Climate Action Framework) में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। Bureau of Energy Efficiency (BEE) के अधिकारियों के अनुसार, यह कार्यक्रम अप्रैल 2025 से मार्च 2026 की अवधि को कवर करेगा। पारदर्शिता और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सत्यापनकर्ताओं (Verifiers) के साक्षात्कार वर्तमान में जारी हैं।

कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) क्या है?

कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) भारत का पहला अनुपालन-आधारित (Compliance-Based) कार्बन बाजार है। इस व्यवस्था के तहत उद्योगों को उत्सर्जन लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे। जो इकाइयाँ निर्धारित सीमा से कम उत्सर्जन करेंगी, वे कार्बन क्रेडिट अर्जित कर सकेंगी, जबकि सीमा से अधिक उत्सर्जन करने वाली इकाइयों को क्रेडिट खरीदने होंगे या दंड का सामना करना पड़ेगा। BEE ने अक्टूबर 2025 और जनवरी 2026 में जारी अधिसूचनाओं के माध्यम से सात क्षेत्रों की लगभग 490 औद्योगिक इकाइयों को उत्सर्जन लक्ष्य आवंटित कर दिए हैं।

इस्पात और उर्वरक क्षेत्र अभी शामिल नहीं

हालाँकि इस योजना का लक्ष्य अंततः लगभग 800 इकाइयों को शामिल करना है, जो भारत के अधिकांश औद्योगिक उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन पहले चरण में इस्पात और उर्वरक क्षेत्र को शामिल नहीं किया गया है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इस्पात और उर्वरक क्षेत्र यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के अंतर्गत आते हैं, जो जनवरी से लागू हुआ है और उच्च उत्सर्जन वाले उत्पादों के निर्यात पर कार्बन कर लगाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के चरणों में इन क्षेत्रों को शामिल करना अंतरराष्ट्रीय व्यापार दबावों और जलवायु प्रतिबद्धताओं को संतुलित करने के लिए आवश्यक होगा।

देरी नहीं, योजना तय समय पर

BEE के निदेशक सौरभ दीदी ने स्पष्ट किया है कि योजना में कोई देरी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि 490 इकाइयों के लिए उत्सर्जन लक्ष्य पहले ही अधिसूचित किए जा चुके हैं और कार्यान्वयन निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ रहा है। यह कार्बन बाजार उद्योगों को उत्सर्जन की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से करने और स्वच्छ उत्पादन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

वैश्विक स्तर पर कड़े होते जलवायु नियमों के बीच भारत का यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक घरेलू कार्बन बाजार ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देगा, हरित प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा, भारतीय निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करेगा और भारत को वैश्विक जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप आगे बढ़ने में मदद करेगा। सफल क्रियान्वयन की स्थिति में यह योजना भारत की निम्न-कार्बन विकास रणनीति का एक प्रमुख स्तंभ बन सकती है।

MCQs: भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS)

Q1. भारत का पहला बड़ा कार्बन-ट्रेडिंग प्रोग्राम कौन सी संस्था लागू कर रही है?
(a) SEBI
(b) NITI आयोग
(c) ब्यूरो ऑफ़ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE)
(d) पर्यावरण मंत्रालय
(e) NABARD

जवाब: (c)
जवाब: ब्यूरो ऑफ़ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम लागू कर रहा है।

Q2. भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम के पहले फेज़ में लगभग कितनी इंडस्ट्रियल यूनिट्स शामिल हैं?
(a) 300
(b) 400
(c) 490
(d) 650
(e) 800

जवाब: (c)
जवाब: सात सेक्टर्स में लगभग 490 यूनिट्स को एमिशन टारगेट जारी किए गए हैं।

Q3. भारत के कार्बन ट्रेडिंग प्रोग्राम के पहले फेज़ के लिए कम्प्लायंस पीरियड है:
(a) अप्रैल 2024 – मार्च 2025
(b) जनवरी 2025 – दिसंबर 2025
(c) अप्रैल 2025 – मार्च 2026
(d) जनवरी 2026 – दिसंबर 2026
(e) अप्रैल 2026 – मार्च 2027

जवाब: (c)
Sol: यह प्रोग्राम अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक कवर करता है।

Q4. कार्बन मार्केट के पहले फेज़ में कौन से दो बड़े सेक्टर शामिल नहीं हैं?

(a) पावर और सीमेंट
(b) स्टील और फर्टिलाइज़र
(c) टेक्सटाइल और केमिकल्स
(d) ऑयल और गैस
(e) ऑटोमोबाइल और एविएशन

जवाब: (b)
Sol: स्टील और फर्टिलाइज़र सेक्टर को अभी पहले फेज़ में शामिल किया जाना बाकी है।

Q5. यूरोपियन यूनियन के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) का मुख्य मकसद है:
(a) डिजिटल ट्रेड को बढ़ावा देना
(b) एक्सपोर्ट सब्सिडी देना
(c) ज़्यादा एमिशन वाले इंपोर्ट पर कार्बन टैक्स लगाना
(d) विदेशी इन्वेस्टमेंट बढ़ाना
(e) खेती के एक्सपोर्ट को रेगुलेट करना

जवाब: (c)
जवाब: CBAM, EU में ज़्यादा एमिशन वाले सामान के इंपोर्ट पर कार्बन टैक्स लगाता है।

Q6. कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम के तहत, जो इंडस्ट्री अपनी तय लिमिट से कम एमिशन करती हैं, वे:
(a) एक्स्ट्रा टैक्स दे सकती हैं
(b) ऑपरेशन बंद कर सकती हैं
(c) कार्बन क्रेडिट कमा सकती हैं और बेच सकती हैं
(d) कोयले को बिना किसी रोक-टोक के इंपोर्ट कर सकती हैं
(e) एमिशन की रिपोर्टिंग से बच सकती हैं

जवाब: (c)
जवाब: लिमिट से कम एमिशन करने वाली यूनिट कार्बन क्रेडिट कमा सकती हैं और उनका ट्रेड कर सकती हैं।

Q7. बाद के फेज़ में लगभग 800 यूनिट को शामिल करने से भारत के इंडस्ट्रियल एमिशन का लगभग कितना हिस्सा कवर होगा? (a) थोड़ा हिस्सा
(b) आधा
(c) लगभग सभी
(d) एक-चौथाई
(e) एक-तिहाई

जवाब: (c)
जवाब: 800 यूनिट तक बढ़ाने का मकसद लगभग सभी इंडस्ट्रियल एमिशन को कवर करना है।

भारतीय सेना ने स्ट्रेला-10 मिसाइल का सफल परीक्षण किया

भारतीय सेना की कोणार्क कोर के अंतर्गत आने वाली “ब्लेज़िंग स्काईज़ ब्रिगेड” के एयर डिफेंस वॉरियर्स ने स्ट्रेला-10 (VSHORADS) का पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में उच्च-तीव्रता परीक्षण सफलतापूर्वक किया। राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में आयोजित इस लाइव अभ्यास ने कम ऊँचाई पर आने वाले हवाई खतरों से निपटने में सेना की मजबूत युद्धक तत्परता और परिचालन सटीकता का प्रदर्शन किया। यह अभ्यास वायु रक्षा क्षमताओं को और सुदृढ़ करने तथा वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सिमुलेटेड लक्ष्यों पर सटीक प्रहार

BMP आधारित मोबाइल प्लेटफॉर्म से दागी गई स्ट्रेला-10 मिसाइल ने सिमुलेटेड दुश्मन हवाई लक्ष्यों पर सीधे और सटीक प्रहार किए। लगभग 6 से 10 किलोमीटर की प्रभावी मारक क्षमता वाला यह सिस्टम कम ऊँचाई पर उड़ने वाले विमानों, हेलीकॉप्टरों और आधुनिक हवाई खतरों जैसे ड्रोन को निष्क्रिय करने में सक्षम है। अधिकारियों के अनुसार, इस अभ्यास ने फायरिंग मानकों की पुष्टि की, क्रू के बीच समन्वय को मजबूत किया तथा वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में लक्ष्य भेदन प्रक्रियाओं का परीक्षण किया।

अभ्यास की प्रमुख विशेषताएँ

अभ्यास के दौरान निगरानी और लक्ष्य अधिग्रहण प्रणालियों का निर्बाध एकीकरण प्रदर्शित किया गया। रेगिस्तानी परिस्थितियों में सटीक मिसाइल प्रक्षेपण, उच्च स्तर की फायर अनुशासन (Fire Discipline) और सामरिक दक्षता का प्रदर्शन किया गया। अत्यधिक तापमान और बदलती रेत जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में परीक्षण ने सैनिकों की परिचालन क्षमता को परखा। रडार-आधारित प्रणालियों के विपरीत, स्ट्रेला-10 मुख्य रूप से दृश्य लक्ष्य अधिग्रहण (Visual Target Acquisition) पर निर्भर करता है, जिससे प्रशिक्षण और युद्धक्षेत्र जागरूकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

सामरिक महत्व

पोखरण का रेगिस्तानी क्षेत्र चुनौतीपूर्ण वातावरण प्रदान करता है, जिससे वायु रक्षा इकाइयों की वास्तविक युद्ध स्थितियों के लिए तैयारी सुनिश्चित होती है। भारतीय सेना में स्ट्रेला-10 अभी भी सक्रिय सेवा में है, साथ ही भारत लगभग 6 किलोमीटर मारक क्षमता वाले स्वदेशी VSHORADS सिस्टम का भी विकास कर रहा है, जिससे घरेलू रक्षा क्षमताओं को और सुदृढ़ किया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि विशेष रूप से सामरिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में परिचालन तत्परता बनाए रखने के लिए ऐसे अभ्यास नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। यह सफल परीक्षण विकसित होते हवाई खतरों के विरुद्ध राष्ट्रीय वायुक्षेत्र की सुरक्षा के प्रति भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 महाराष्ट्र के शेगांव में आयोजित होगा

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा अखिल भारतीय आयुर्वेदिक कांग्रेस के सहयोग से चार दिवसीय “राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026” का आयोजन 25 से 28 फरवरी 2026 तक महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के शेगांव में किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्घाटन 25 फरवरी 2026 को द्रौपदी मुर्मू द्वारा संत गजानन महाराज संस्थान के विसावा मैदान में किया जाएगा। इस अवसर पर प्रतापराव जाधव सहित महाराष्ट्र के राज्यपाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन आयुष प्रणालियों के प्रचार-प्रसार और जनस्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

मेले का उद्देश्य

राष्ट्रीय आरोग्य मेला एक व्यापक जन-जागरूकता एवं जन-सेवा पहल है, जिसका उद्देश्य आयुष आधारित निवारक (Preventive) और प्रोत्साहक (Promotive) स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच का विस्तार करना है। मेले में आने वाले नागरिकों को निःशुल्क परामर्श, स्वास्थ्य जांच तथा मुफ्त दवाइयाँ प्रदान की जाएँगी। ये सेवाएँ आयुष की विभिन्न पद्धतियों— आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी— के अंतर्गत उपलब्ध होंगी। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में योग प्रदर्शन, विशेषज्ञ व्याख्यान, विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों की थेरेपी प्रदर्शनी तथा प्रतिष्ठित आयुष संस्थानों की प्रदर्शनियाँ भी आयोजित की जाएँगी।

किसानों और औषधीय कृषि पर विशेष फोकस

27 फरवरी 2026 को दोपहर 3:00 बजे “आयुर्वेदिक खेती: उत्पादन, मूल्य संवर्धन और विपणन” विषय पर एक विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में औषधीय पौधों की खेती, एग्रोफॉरेस्ट्री पद्धतियाँ, फसल कटाई के बाद प्रबंधन (Post-harvest Management) तथा बाजार से जुड़ाव (Market Linkages) पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य बुलढाणा और व्यापक विदर्भ क्षेत्र के किसानों को औषधीय फसलों की ओर प्रोत्साहित करना है, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो और आयुष आपूर्ति शृंखला को मजबूती मिले।

प्रतापराव जाधव ने किसानों, स्वयं सहायता समूहों और युवाओं से सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है, ताकि वे औषधीय पौधों पर आधारित कृषि में नए अवसरों का लाभ उठा सकें।

एक समेकित मंच

राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं, ज्ञान-साझाकरण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन के एक समेकित मंच के रूप में विकसित किया गया है। यह आयोजन आयुष प्रणालियों के महत्व को रेखांकित करता है, जो जनस्वास्थ्य सुधार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। महाराष्ट्र और पड़ोसी राज्यों के नागरिकों, किसानों, विद्यार्थियों और स्वास्थ्य पेशेवरों से बड़ी संख्या में भाग लेने का आग्रह किया गया है।

MCQs: नेशनल आरोग्य मेला 2026

Q1. नेशनल आरोग्य मेला 2026 किस शहर में होगा?

(a) नागपुर
(b) पुणे
(c) शेगांव
(d) नासिक
(e) औरंगाबाद

जवाब: (c)
जवाब: मेला महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के शेगांव में होगा।

Q2. नेशनल आरोग्य मेला 2026 किस मिनिस्ट्री द्वारा ऑर्गनाइज़ किया जा रहा है?

(a) मिनिस्ट्री ऑफ़ हेल्थ
(b) मिनिस्ट्री ऑफ़ रूरल डेवलपमेंट
(c) मिनिस्ट्री ऑफ़ आयुष
(d) मिनिस्ट्री ऑफ़ एग्रीकल्चर
(e) मिनिस्ट्री ऑफ़ MSME

जवाब: (c)
जवाब: मिनिस्ट्री ऑफ़ आयुष इवेंट ऑर्गनाइज़ कर रहा है।

Q3. मेले का उद्घाटन करेंगे:
(a) प्रधानमंत्री
(b) भारत के राष्ट्रपति
(c) महाराष्ट्र के राज्यपाल
(d) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री
(e) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री

उत्तर: (b)
उत्तर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस इवेंट का उद्घाटन करेंगी।

Q4. “आयुर्वेदिक खेती” पर स्पेशल सेशन इस तारीख को होगा:
(a) 25 फरवरी 2026
(b) 26 फरवरी 2026
(c) 27 फरवरी 2026
(d) 28 फरवरी 2026
(e) 1 मार्च 2026

उत्तर: (c)
उत्तर: सेशन 27 फरवरी 2026 को दोपहर 3:00 बजे तय है।

Q5. इनमें से कौन सा सिस्टम आयुष सिस्टम का हिस्सा नहीं है? (a) आयुर्वेद
(b) यूनानी
(c) सिद्ध
(d) एलोपैथी
(e) होम्योपैथी

Ans: (d)
Sol: एलोपैथी, आयुष सिस्टम का हिस्सा नहीं है।

स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक ने राजन बजाज को MD और CEO नियुक्त किया

स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक ने अपने संस्थापक राजन बजाज को नया प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। इस नियुक्ति को बैंक के निदेशक मंडल, शेयरधारकों तथा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से स्वीकृति प्राप्त हुई है, जो उनके नेतृत्व और डिजिटल-प्रथम (Digital-First) दृष्टिकोण पर भरोसे को दर्शाता है।

फिनटेक स्टार्टअप से स्मॉल फाइनेंस बैंक तक

राजन बजाज, जो भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर के पूर्व छात्र हैं, ने वर्ष 2016 में बेंगलुरु स्थित फिनटेक स्टार्टअप “स्लाइस” की स्थापना की थी। शुरुआत में कंपनी ने युवाओं और कम बैंकिंग सुविधा प्राप्त ग्राहकों को नवीन क्रेडिट एवं भुगतान समाधान प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया। वर्ष 2024 में स्लाइस का विलय नॉर्थ ईस्ट स्मॉल फाइनेंस बैंक के साथ हुआ, जिससे यह एक पूर्णतः विनियमित स्मॉल फाइनेंस बैंक में परिवर्तित हो गया। विलय के बाद कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्य करने के पश्चात अब बाजाज ने सतीश कुमार कालरा का स्थान लिया है।

मजबूत निवेश समर्थन

स्लाइस एसएफबी ने टाइगर ग्लोबल, इनसाइट पार्टनर्स और एडवेंट इंटरनेशनल जैसे वैश्विक निवेशकों से 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की पूंजी जुटाई है। बैंक वर्तमान में दैनिक ब्याज क्रेडिट वाले बचत खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट, UPI सेवाएँ, ऋण समाधान तथा भारत की पहली UPI-आधारित बैंक शाखा सहित कई डिजिटल उत्पाद प्रदान कर रहा है।

एआई और वित्तीय समावेशन पर फोकस

बाजाज के नेतृत्व में बैंक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग कर बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत (Personalised) बैंकिंग सेवाएँ प्रदान करने की योजना बना रहा है। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि भारत में बैंकिंग क्षेत्र में अपार संभावनाएँ हैं और तकनीक के माध्यम से कम लागत पर अधिक लोगों तक अनुकूलित वित्तीय सेवाएँ पहुँचाई जा सकती हैं।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह नेतृत्व परिवर्तन Slice SFB को विनियामक अनुपालन और उन्नत फिनटेक नवाचार के संतुलन के साथ आगे बढ़ने में मदद करेगा, जिससे विशेष रूप से ग्रामीण और कम बैंकिंग सुविधा वाले क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को गति मिलेगी।

MCQs: स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक अपॉइंटमेंट

Q1. स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक के MD और CEO के तौर पर किसे अपॉइंट किया गया है?
(a) सतीश कुमार कालरा
(b) राजन बजाज
(c) यूजीन इमैनुएल कार्थक
(d) अरविंद कृष्णा
(e) उदय कोटक

Ans: (b)
Sol: स्लाइस के फाउंडर राजन बजाज को MD और CEO के तौर पर अपॉइंट किया गया है।

Q2. स्लाइस किस साल शुरू हुई थी?
(a) 2014
(b) 2015
(c) 2016
(d) 2017
(e) 2018

Ans: (c)
Sol: राजन बजाज ने 2016 में एक फिनटेक स्टार्टअप के तौर पर स्लाइस शुरू की थी।

Q3. स्लाइस 2024 में किस बैंक के साथ मर्ज होकर एक स्मॉल फाइनेंस बैंक बन गया? (a) जन स्मॉल फाइनेंस बैंक
(b) नॉर्थ ईस्ट स्मॉल फाइनेंस बैंक
(c) इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक
(d) उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक
(e) AU स्मॉल फाइनेंस बैंक

जवाब: (b)
जवाब: स्लाइस का 2024 में नॉर्थ ईस्ट स्मॉल फाइनेंस बैंक में मर्जर हो गया।

Q4. किस रेगुलेटरी बॉडी ने राजन बजाज के अपॉइंटमेंट को मंज़ूरी दी?

(a) SEBI
(b) IRDAI
(c) NABARD
(d) रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया
(e) मिनिस्ट्री ऑफ़ फाइनेंस

जवाब: (d)
जवाब: अपॉइंटमेंट को रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने मंज़ूरी दी थी।

Q5. स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स से कितनी फ़ंडिंग जुटाई है? (a) $100 मिलियन
(b) $150 मिलियन
(c) $200 मिलियन
(d) $250 मिलियन
(e) $300 मिलियन

उत्तर: (d)
उत्तर: बैंक ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स से $250 मिलियन से ज़्यादा जुटाए हैं।

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