राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर में भरकर रचा इतिहास

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जैसलमेर एयर फोर्स स्टेशन पर स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर ‘HAL Prachand’ में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया। वह ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर में को-पायलट के रूप में उड़ान भरने वाली देश की पहली राष्ट्रपति बन गईं। यह क्षण भारत की रक्षा क्षमता और स्वदेशी सैन्य तकनीक के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह विशेष उड़ान भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े युद्धाभ्यास ‘Vayu Shakti 2026’ से पहले आयोजित की गई। राष्ट्रपति ने लगभग 25 मिनट की इस विशेष सॉर्टी के दौरान सीमा क्षेत्र और Pokhran Field Firing Range का हवाई सर्वेक्षण किया।

जैसलमेर में क्या हुआ?

  • भारतीय वायुसेना द्वारा विस्तृत ब्रीफिंग के बाद सॉर्टी शुरू हुई।
  • प्रस्थान से पहले राष्ट्रपति ने कॉकपिट से हाथ हिलाकर भारत की वायु शक्ति पर विश्वास व्यक्त किया।
  • उड़ान के दौरान उन्होंने LCH ‘प्रचंड’ को “आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक” बताया।
  • उन्होंने सीमा पर तैनात सैनिकों को शुभकामनाएँ दीं और उनकी समर्पित सेवा को सलाम किया।

LCH ‘प्रचंड’: भारत का पहला स्वदेशी अटैक हेलीकॉप्टर

LCH ‘प्रचंड’ भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया लड़ाकू हेलीकॉप्टर है, जिसे Hindustan Aeronautics Limited (HAL) ने तैयार किया है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • उन्नत एवियोनिक्स और स्टील्थ क्षमता
  • रात्रि हमला (Night Attack) क्षमता
  • एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें
  • 20 मिमी टरेट गन और रॉकेट सिस्टम
  • उच्च ऊँचाई वाले क्षेत्रों में संचालन की क्षमता

इसकी तैनाती से भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

रक्षा प्लेटफॉर्म्स के साथ राष्ट्रपति की सक्रियता

  • LCH ‘प्रचंड’ की इस उड़ान के साथ राष्ट्रपति मुर्मू ने रक्षा क्षेत्र में एक और उपलब्धि जोड़ी।
  • अप्रैल 2023 में उन्होंने तेजपुर एयर फोर्स स्टेशन से Sukhoi Su-30MKI में उड़ान भरी थी।
  • अक्टूबर 2025 में अंबाला एयर फोर्स स्टेशन से Dassault Rafale में सॉर्टी की थी।

अब LCH ‘प्रचंड’ में उड़ान भरकर वह भारतीय वायुसेना के दो अलग-अलग लड़ाकू विमानों और एक अटैक हेलीकॉप्टर में सॉर्टी करने वाली पहली भारतीय राष्ट्रपति बन गई हैं।

‘वायु शक्ति’ 2026 और रणनीतिक महत्व

हेलीकॉप्टर ने पोखरण फायरिंग रेंज के ऊपर उड़ान भरी, जहाँ भारतीय वायुसेना का युद्धाभ्यास ‘वायु शक्ति’ आयोजित होना था। राष्ट्रपति दिन–संध्या–रात्रि युद्ध प्रदर्शन की साक्षी बनने वाली हैं।

पाकिस्तान सीमा के निकट उड़ान भरना भारत की परिचालन तैयारी और तकनीकी आत्मविश्वास का प्रतीक है। यह स्वदेशी रक्षा निर्माण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और आत्मनिर्भरता के संदेश को भी मजबूत करता है।

LCH ‘प्रचंड’ का विकास

  • लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर परियोजना को अत्यधिक ऊँचाई और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में संचालन की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया था। इसे अक्टूबर 2022 में जोधपुर में औपचारिक रूप से भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया।
  • यह हेलीकॉप्टर भारतीय वायुसेना और भारतीय थलसेना दोनों के लिए उपयुक्त है तथा सीमावर्ती और उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनाती के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।
  • LCH ‘प्रचंड’ भारत की बढ़ती एयरोस्पेस निर्माण क्षमता और स्वदेशी रक्षा उत्पादन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।

भारत-इज़राइल रणनीतिक साझेदारी 2026: यूपीआई लॉन्च और मुक्त व्यापार समझौते की नई शुरुआत

भारत और इज़राइल के बीच द्विपक्षीय संबंध फरवरी 2026 में एक ऐतिहासिक मुकाम पर पहुँचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच उच्च-स्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने अपने संबंधों को औपचारिक रूप से “विशेष रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक उन्नत कर दिया।

यह उन्नयन फिनटेक, रक्षा और हरित ऊर्जा सहित 16 महत्वपूर्ण समझौतों द्वारा समर्थित है, जिससे भारत इज़राइल का प्रमुख डिजिटल अवसंरचना साझेदार बनकर उभरा है।

यूपीआई एकीकरण: एनपीसीआई इंटरनेशनल और MASAV समझौता

डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में सबसे बड़ा कदम इज़राइल में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की शुरुआत है।

  • एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) ने इज़राइल की केंद्रीय भुगतान संस्था MASAV के साथ अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर किए।
  • इससे भारतीय पर्यटक और पेशेवर इज़राइल में सीधे UPI के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे।
  • साथ ही, कम लागत वाले सीमापार प्रेषण (remittance) कॉरिडोर की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
  • इज़राइल अब सिंगापुर, यूएई, फ्रांस और श्रीलंका जैसे देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को अपनाया है।

3.62 अरब डॉलर का व्यापार समझौता (FTA)

  • आर्थिक सहयोग को औपचारिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।
  • एफटीए वार्ता का पहला व्यापक दौर 26 फरवरी 2026 को संपन्न हुआ।
  • वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 3.62 अरब डॉलर रहा।
  • एक महत्वपूर्ण श्रम गतिशीलता समझौते के तहत अगले पाँच वर्षों में 50,000 अतिरिक्त भारतीय श्रमिकों को इज़राइल में कार्य करने की अनुमति दी जाएगी, जिससे उसके विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।

फिनटेक से आगे: एआई, परमाणु और अंतरिक्ष सहयोग

  • यह साझेदारी अब उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों तक विस्तारित हो चुकी है, जो आने वाले दशक की दिशा तय करेंगे।
  • क्वांटम कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर संयुक्त घोषणाएँ।
  • असैन्य परमाणु ऊर्जा और समुद्री विरासत संरक्षण में सहयोग का नया ढांचा।
  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरियों के लिए आवश्यक खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित करने हेतु रणनीतिक साझेदारी।

यह विशेष रणनीतिक साझेदारी न केवल दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी संबंधों को गहरा करेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर डिजिटल सहयोग और नवाचार के नए मानक भी स्थापित करेगी।

Sikkim रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने चुंगथांग-लाचेन एक्सिस और ताराम चू ब्रिज का उद्घाटन किया

रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने 26 फरवरी, 2026 को उत्तरी सिक्किम में ठीक किए गए चुंगथांग-लाचेन एक्सिस और 400 ft बेली सस्पेंशन ताराम चू ब्रिज का उद्घाटन किया। ये महत्वपूर्ण अवसंरचनात्मक परियोजनाएँ सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा कई प्राकृतिक आपदाओं के बाद पुनर्निर्मित की गईं।

यह पुनर्स्थापना 2025 के विनाशकारी बादल फटने की घटनाओं, 2024 के चक्रवात रेमाल और 2023 की ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के बाद क्षेत्र में संपर्क व्यवस्था को बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

चुंगथांग–लाचेन अक्ष पुनर्स्थापना: मुख्य बिंदु

  • 28 किमी लंबा चुंगथांग–लाचेन मार्ग पूरी तरह बहाल किया गया।
  • मई–जून 2025 के बादल फटने, जून 2024 के चक्रवात रेमाल और अक्टूबर 2023 की GLOF से मार्ग को भारी क्षति हुई थी।
  • प्रोजेक्ट स्वास्तिक के तहत 96 भूस्खलनों को साफ किया गया।
  • अस्थिर पहाड़ी हिस्सों के पुनर्निर्माण हेतु 8 किमी नई कटिंग (formation cutting) की गई।
  • धंसने और संवेदनशील क्षेत्रों से बचने के लिए वैकल्पिक मार्ग (डाइवर्जन) बनाए गए।

इस मार्ग के पुनः खुलने से स्थानीय निवासियों, पर्यटकों और सुरक्षा बलों की आवाजाही सुगम होगी। साथ ही यह सीमावर्ती अवसंरचना को मजबूत कर उत्तर सिक्किम की आर्थिक गतिविधियों को गति देगा।

ताराम चू पुल की प्रमुख विशेषताएँ

  • 400 फीट लंबा बेली सस्पेंशन पुल
  • बाढ़ और भूस्खलन से क्षतिग्रस्त पुराने ढांचे का स्थान लिया
  • दुर्गम क्षेत्र में त्वरित निर्माण हेतु डिजाइन
  • उत्तर सिक्किम में हर मौसम में संपर्क सुनिश्चित

बेली पुल एक पोर्टेबल, पूर्व-निर्मित ट्रस पुल होता है, जिसका उपयोग भारतीय सेना और BRO पहाड़ी एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापक रूप से करते हैं। नया ताराम चू पुल लाचेन और आसपास के रणनीतिक क्षेत्रों तक निर्बाध पहुंच बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

प्रोजेक्ट स्वास्तिक के तहत BRO का व्यापक पुनर्वास कार्य

चुंगथांग–लाचेन अक्ष और ताराम चू पुल का पुनर्निर्माण BRO के प्रोजेक्ट स्वास्तिक के अंतर्गत बड़े पैमाने पर आपदा-पश्चात पुनर्वास प्रयासों का हिस्सा है।

  • प्रभावित मार्गों पर 96 भूस्खलन हटाए गए
  • चार प्रमुख पुलों का निर्माण
  • दो अन्य पुलों की मरम्मत
  • अक्टूबर 2025 में 7.5 किमी लंबा नागा टूंग खंड पुनः खोला गया

ये प्रयास हिमालयी दुर्गम परिस्थितियों में BRO की इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाते हैं।

‘आत्मनिर्भर सिक्किम’ और रणनीतिक महत्व

उद्घाटन के दौरान रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि ये परियोजनाएँ सिक्किम के मुख्यमंत्री की ‘आत्मनिर्भर सिक्किम – विकसित भारत विजन’ के अनुरूप हैं।

पुनर्स्थापित अवसंरचना से—

  • स्थानीय समुदायों की पहुंच बेहतर होगी
  • उत्तर सिक्किम में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा
  • सीमा के निकट रक्षा लॉजिस्टिक्स मजबूत होंगे
  • व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलेगा

उत्तर सिक्किम की भौगोलिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निकटता के कारण यहाँ अवसंरचना विकास अत्यंत रणनीतिक महत्व रखता है।

सीमा सड़क संगठन (BRO) के बारे में

  • सीमा सड़क संगठन की स्थापना 1960 में भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क विकसित और बनाए रखने के लिए की गई थी। यह रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  • BRO हिमालय, रेगिस्तान और पूर्वोत्तर के दुर्गम इलाकों में परियोजनाएँ निष्पादित करता है। प्रोजेक्ट स्वास्तिक सिक्किम और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में अवसंरचना विकास के लिए जिम्मेदार है।
  • सीमावर्ती क्षेत्रों में त्वरित आपदा पुनर्स्थापना और रणनीतिक सड़क निर्माण के लिए यह संगठन विशेष रूप से जाना जाता है।

अंतरराष्ट्रीय ध्रुवीय भालू दिवस 2026

अंतरराष्ट्रीय ध्रुवीय भालू दिवस हर वर्ष 27 फरवरी को मनाया जाता है। यह दिवस जलवायु परिवर्तन और आर्कटिक समुद्री बर्फ के तेजी से पिघलने के कारण ध्रुवीय भालुओं पर पड़ रहे प्रभाव के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है। यह आयोजन पोलर बियर इंटरनेशनल (पीबीआई) द्वारा किया जाता है, जो आर्कटिक क्षेत्र और ध्रुवीय भालुओं के संरक्षण के लिए कार्यरत एक प्रमुख वैश्विक संस्था है।

यह तिथि विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी समय ध्रुवीय भालू की माएँ अपने नवजात शावकों के साथ बर्फीले मांद (स्नो डेन) में रहती हैं। यह उनके जीवन का सबसे संवेदनशील और कमजोर चरण होता है।

अंतरराष्ट्रीय ध्रुवीय भालू दिवस का उद्देश्य

इस दिवस के मुख्य उद्देश्य हैं—

  • ग्लोबल वार्मिंग और उसके प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाना
  • आर्कटिक क्षेत्र में घटती समुद्री बर्फ के दुष्प्रभावों को उजागर करना
  • मांद काल (Denning Period) के दौरान माँ और शावकों की सुरक्षा पर जोर देना
  • वैज्ञानिक शोध और संरक्षण प्रयासों की जानकारी साझा करना

यह दिवस क्यों महत्वपूर्ण है?

ध्रुवीय भालू, जिनका वैज्ञानिक नाम उर्सस मैरिटिमस है, शिकार के लिए समुद्री बर्फ पर निर्भर रहते हैं। उनका मुख्य भोजन सील मछलियाँ हैं, जिन्हें पकड़ने के लिए उन्हें स्थिर बर्फ की आवश्यकता होती है।

लेकिन बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण—

  • आर्कटिक समुद्री बर्फ में तेजी से कमी आ रही है
  • प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं
  • शिकार क्षेत्र सीमित हो रहे हैं
  • शावकों के जीवित रहने की दर घट रही है

इसलिए यह दिवस आर्कटिक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए त्वरित जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

मांद काल के दौरान माँ और शावकों की सुरक्षा

अंतरराष्ट्रीय ध्रुवीय भालू दिवस विशेष रूप से मांद काल पर प्रकाश डालता है, जब गर्भवती मादाएँ बर्फीली मांद में शावकों को जन्म देती हैं।

मांद काल क्यों महत्वपूर्ण है?

  • शावक जन्म के समय अंधे होते हैं।
  • उनका वजन लगभग आधा किलोग्राम (करीब एक पाउंड) होता है।
  • अत्यधिक ठंड से बचाने के लिए उनके पास केवल पतली फर की परत होती है।
  • परिवार वसंत ऋतु तक मांद में ही रहता है।
  • औसतन केवल लगभग आधे शावक ही वयस्क अवस्था तक पहुँच पाते हैं।

जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों से मांद स्थलों पर होने वाली हलचल माँ और शावकों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

इस दिवस को कैसे मनाया जाता है?

जागरूकता और शिक्षा

  • कई चिड़ियाघर और वन्यजीव पार्क विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
  • प्रदर्शनी, इंटरैक्टिव सत्र और ऑनलाइन अभियान के माध्यम से लोगों को शिक्षित किया जाता है।
  • यह दिवस जलवायु नीतियों और आर्कटिक संरक्षण संबंधी चर्चाओं को भी प्रभावित करता है।

जलवायु कार्रवाई पहल

  • कुछ संस्थान इस दिन कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए विशेष कदम उठाते हैं।
  • विश्वविद्यालय और संगठन अपनी ऊर्जा खपत कम करके पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं।
  • 27 फरवरी के आसपास ध्रुवीय भालुओं से संबंधित ऑनलाइन खोज और जागरूकता में वृद्धि देखी जाती है।

संरक्षण में अग्रणी भूमिका

पोलर बियर इंटरनेशनल (पीबीआई) ध्रुवीय भालुओं के मांद व्यवहार और आर्कटिक पारिस्थितिकी पर शोध करता रहा है।

उनके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं—

  • मांद स्थलों की निगरानी
  • मातृ व्यवहार का अध्ययन
  • आर्कटिक नीतियों को समर्थन
  • पारिस्थितिकी-आधारित जलवायु समाधान को बढ़ावा

यह शोध संरक्षण नीतियों को मजबूत करने में सहायक है।

आप कैसे भाग ले सकते हैं?

अंतरराष्ट्रीय ध्रुवीय भालू दिवस पर आप सरल लेकिन प्रभावी कदम उठा सकते हैं—

  • संरक्षण प्रयासों के लिए दान करें
  • ऑनलाइन शैक्षिक कार्यक्रमों में भाग लें
  • जागरूकता अभियान चलाएँ
  • सोशल मीडिया पर तथ्य साझा करें
  • संरक्षण उत्पाद खरीदकर शोध का समर्थन करें

जब जागरूकता को कार्रवाई में बदला जाता है, तभी यह दिवस वास्तव में ध्रुवीय भालुओं और उनके शावकों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में सार्थक कदम बनता है।

सवाल
Q. पोलर बेयर शिकार के लिए मुख्य रूप से किस हैबिटैट पर निर्भर रहते हैं?

A) फॉरेस्ट टुंड्रा
B) कोस्टल घास के मैदान
C) आर्कटिक समुद्री बर्फ़
D) पहाड़ी ढलान

ऑपरेशन ग़ज़ब लिल-हक़: पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच ‘खुली जंग’ का ऐलान

पाकिस्तान ने “ऑपरेशन ग़ज़ब लिल-हक़” नाम से एक बड़ा सीमापार सैन्य अभियान शुरू किया है, जिससे अफगानिस्तान के साथ तनाव में तीव्र वृद्धि हुई है। यह अभियान 26 फरवरी 2026 की तड़के उस समय शुरू हुआ, जब इस्लामाबाद ने अफगान तालिबान पर सीमा के कई संवेदनशील क्षेत्रों में “बिना उकसावे की गोलीबारी” शुरू करने का आरोप लगाया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे पिछले कई महीनों से बढ़ रही शत्रुता और सीमापार उग्रवादी गतिविधियों के खिलाफ एक निर्णायक जवाब बताया। रिपोर्टों के अनुसार काबुल सहित अफगानिस्तान के कई शहरों में हवाई हमले किए गए, जबकि दोनों देशों ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए। यह घटनाक्रम हाल के वर्षों में दोनों पड़ोसी देशों के बीच सबसे गंभीर टकरावों में से एक माना जा रहा है।

ऑपरेशन “ग़ज़ब लिल-हक़” क्या है?

पाकिस्तान द्वारा शुरू किया गया ऑपरेशन “ग़ज़ब लिल-हक़” (अर्थ: “न्याय के लिए क्रोध”) एक व्यापक सैन्य अभियान है, जिसे कथित अफ़गान तालिबान ठिकानों के विरुद्ध चलाया जा रहा है। पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय के अनुसार, यह अभियान तब शुरू किया गया जब खैबर पख्तूनख्वा के चितरल, खैबर, मोहम्मद, कुर्रम और बाजौर सेक्टरों में सीमापार गोलीबारी की घटनाएँ सामने आईं।

पाकिस्तान के सरकारी प्रसारक ने दावा किया कि सशस्त्र बलों ने काबुल, कंधार और पक्तिया में तालिबान के प्रमुख सैन्य ठिकानों पर समन्वित हवाई हमले किए। नंगरहार प्रांत में एक गोला-बारूद डिपो को भी नष्ट किए जाने की बात कही गई। पाकिस्तान ने बताया कि झड़पों में उसके दो सुरक्षाकर्मी मारे गए, जबकि 133 तालिबान लड़ाकों को मार गिराने का दावा किया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है।

ताजा पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव की वजह

यह नया टकराव हाल के दिनों में बढ़ती सीमापार झड़पों के बाद सामने आया।

  • पाकिस्तान ने पहले भी अफगानिस्तान के अंदर हवाई हमले किए थे।
  • इस्लामाबाद का दावा है कि ये हमले पाकिस्तान में हुए आत्मघाती हमलों से जुड़े उग्रवादी शिविरों को निशाना बनाकर किए गए।
  • अफगान अधिकारियों ने आरोप लगाया कि नागरिक घरों और एक धार्मिक स्कूल को निशाना बनाया गया, जिसमें महिलाओं और बच्चों की मौत हुई।
  • तालिबान ने 26 फरवरी 2026 की रात “बड़े पैमाने पर” जवाबी कार्रवाई की घोषणा की।
  • काबुल में जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं, जबकि पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी सीमावर्ती इलाकों में भारी गोलीबारी की खबरें आईं।

हताहत और परस्पर विरोधी दावे

पाकिस्तान ने पुष्टि की कि खैबर पख्तूनख्वा में सीमा झड़पों के दौरान उसके दो सैनिक मारे गए और तीन घायल हुए।

तालिबान प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने दावा किया कि कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और कुछ को बंदी बना लिया गया, साथ ही कुछ सैन्य चौकियों पर कब्ज़ा कर लिया गया।

हालांकि, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif के कार्यालय ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी आक्रामक कार्रवाई का “तत्काल और प्रभावी जवाब” दिया जाएगा।

नाजुक युद्धविराम पर संकट

अक्टूबर में हुए एक नाजुक युद्धविराम समझौते के बावजूद यह तनाव बढ़ा है। पाकिस्तान–अफगानिस्तान सीमा, जिसे आमतौर पर डूरंड रेखा कहा जाता है, लगभग 2,574 किमी लंबी और पहाड़ी व दुर्गम क्षेत्र से गुजरती है।

हालिया झड़पों के कारण—

  • तोरखम सीमा पार के पास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा।
  • अफगान नागरिकों की निर्वासन प्रक्रिया अस्थायी रूप से रोकी गई।
  • शरणार्थियों और व्यापारियों के लिए सीमा पार मार्ग बंद कर दिए गए।

रणनीतिक और सुरक्षा प्रभाव

यह नया संघर्ष क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान स्थित उग्रवादी समूह सीमापार हमले कर रहे हैं, जबकि काबुल बार-बार अपनी संप्रभुता के उल्लंघन का आरोप लगाता रहा है।

मुख्य प्रभाव:

  • सीमावर्ती क्षेत्रों में अस्थिरता में वृद्धि
  • व्यापार और शरणार्थी आवाजाही में बाधा
  • व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का खतरा
  • कूटनीतिक संबंधों में तनाव

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद ऐतिहासिक रूप से जटिल रहा है। डूरंड रेखा को लेकर लंबे समय से मतभेद रहे हैं, और तालिबान सरकार इसे औपचारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में मान्यता नहीं देती।
  • 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से सीमाई झड़पों में वृद्धि देखी गई है। पाकिस्तान लगातार अफगान क्षेत्र से संचालित कथित उग्रवादी समूहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करता रहा है।
  • यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच अविश्वास को और गहरा कर रहा है तथा दक्षिण एशिया में स्थिरता के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर रहा है।

 

विश्व NGO दिवस 2026: 27 फरवरी का महत्व आपकी सोच से कहीं अधिक क्यों है

विश्व एनजीओ दिवस 2026 शुक्रवार, 27 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा। यह वैश्विक दिवस गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की उस महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देता है, जो वे समाज को बदलने और लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में निभाते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और मानवाधिकार से लेकर आपदा राहत तक—एनजीओ जमीनी स्तर पर कार्य करते हुए सामाजिक बदलाव को गति देते हैं। यह दिवस केवल सराहना का नहीं, बल्कि जागरूकता, वकालत (एडवोकेसी) और ठोस कार्रवाई का भी प्रतीक है।

विश्व एनजीओ दिवस 2026: तिथि और वैश्विक महत्व

विश्व एनजीओ दिवस हर वर्ष 27 फरवरी को विश्वभर में मनाया जाता है। यह दिन विभिन्न क्षेत्रों और महाद्वीपों में कार्यरत संगठनों के योगदान को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करता है।

हर साल यह दिवस सामाजिक असमानता, गरीबी उन्मूलन, आपदा राहत और सतत विकास जैसे मुद्दों पर काम कर रहे संगठनों के सामूहिक प्रयासों को उजागर करता है। वर्ष 2026 में विशेष रूप से जागरूकता और वकालत पर जोर दिया जा रहा है, ताकि लोग समझ सकें कि एनजीओ दीर्घकालिक वैश्विक प्रगति में किस प्रकार योगदान देते हैं।

विश्व एनजीओ दिवस का इतिहास

इस दिवस की शुरुआत का उद्देश्य एनजीओ के सामुदायिक कार्यों को पहचान और सम्मान देना था। समय के साथ यह एक वैश्विक अभियान में बदल गया, जो सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रभाव को रेखांकित करता है।

एनजीओ सरकारों से स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं, लेकिन अक्सर सार्वजनिक संस्थानों के साथ सहयोग भी करते हैं। वे मानवीय सहायता, सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विश्व एनजीओ दिवस 2026 का महत्व

एनजीओ अक्सर पर्दे के पीछे काम करते हैं। उनके प्रयासों को हमेशा व्यापक पहचान नहीं मिलती, फिर भी उनका प्रभाव अत्यंत गहरा होता है।

यह दिवस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह—

  • समाज में एनजीओ की भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाता है
  • स्वयंसेवा और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करता है
  • फंडरेज़िंग और जनजागरूकता अभियानों को समर्थन देता है
  • जलवायु परिवर्तन और असमानता जैसे वैश्विक मुद्दों को उजागर करता है
  • नागरिकों, सरकारों और संस्थाओं के बीच साझेदारी को मजबूत करता है

सामाजिक परिवर्तन और विकास में एनजीओ की भूमिका

एनजीओ अनेक क्षेत्रों में सक्रिय हैं, जिनका सीधा प्रभाव आम जीवन पर पड़ता है।

उनके प्रमुख योगदानों में शामिल हैं—

  • वंचित समुदायों में शिक्षा उपलब्ध कराना
  • ग्रामीण और संघर्ष क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना
  • पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देना
  • मानवाधिकार और लैंगिक समानता की वकालत करना
  • आपदा राहत और पुनर्वास में सहायता देना

जमीनी स्तर पर जुड़ाव और नीति-आधारित हस्तक्षेप के माध्यम से एनजीओ समुदायों और प्रशासन के बीच की दूरी को कम करते हैं।

विश्व एनजीओ दिवस 2026 में कैसे भाग लें?

इस दिवस में भागीदारी कई सरल लेकिन सार्थक तरीकों से की जा सकती है—

  • किसी स्थानीय या ऑनलाइन एनजीओ के साथ स्वयंसेवा करना
  • अपनी पसंद के सामाजिक उद्देश्य के लिए दान देना
  • सोशल मीडिया पर जागरूकता संदेश साझा करना
  • कार्यशालाओं, सेमिनार या जागरूकता अभियानों में भाग लेना
  • स्थानीय विकास परियोजनाओं में सहयोग करना
  • एनजीओ कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों को सम्मानित करना

छोटे-छोटे प्रयास भी एनजीओ पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने में योगदान देते हैं।

वास्तविक बदलाव के लिए प्रेरक विचार

विश्व एनजीओ दिवस 2026 केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदारी का अवसर है।

आप अपने पेशेवर कौशल—जैसे वित्त, संचार या कानूनी सलाह—से योगदान दे सकते हैं। छात्र परिसर में जागरूकता अभियान चला सकते हैं। समुदाय दान अभियान या पर्यावरण स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं।

जब सराहना को कार्रवाई में बदला जाता है, तब विश्व एनजीओ दिवस 2026 सतत सामाजिक प्रभाव का प्रेरक बन जाता है।

प्रश्न

Q. वर्ल्ड NGO डे हर साल मनाया जाता है,

A) 20 फरवरी
B) 27 फरवरी
C) 1 मार्च
D) 15 जनवरी

भारत-इज़राइल में अब ‘स्पेशल स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’

भारत और इज़राइल ने 25–26 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इज़राइल यात्रा के दौरान अपने द्विपक्षीय संबंधों को “शांति, नवाचार और समृद्धि के लिए विशेष रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक उन्नत किया। यह यात्रा इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मेजबानी में हुई और 2017 में मोदी की इज़राइल यात्रा तथा 2018 में नेतन्याहू की भारत यात्रा से स्थापित मजबूत आधार को आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पड़ाव साबित हुई।

संयुक्त वक्तव्य में रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा, व्यापार, कृषि, कनेक्टिविटी और जन-से-जन संबंधों सहित कई क्षेत्रों में गहन सहयोग की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।

भारत-इज़राइल विशेष रणनीतिक साझेदारी 2026: नए युग की शुरुआत

भारत और इज़राइल के नेताओं ने 2017 और 2018 की ऐतिहासिक यात्राओं को याद करते हुए कहा कि उन्हीं दौरों ने आधुनिक भारत-इज़राइल संबंधों की मजबूत नींव रखी थी। वर्ष 2026 में दोनों देशों ने औपचारिक रूप से अपने संबंधों को “विशेष रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक उन्नत कर दिया है। यह साझेदारी शांति, सुरक्षा और तकनीकी नवाचार पर केंद्रित है।

इज़राइल की अत्याधुनिक नवाचार क्षमता और स्टार्टअप शक्ति को भारत के विशाल बाजार, प्रतिभा और विनिर्माण क्षमता के साथ जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं— एआई, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव-प्रौद्योगिकी, रक्षा प्लेटफॉर्म और अंतरिक्ष तकनीक। यह साझेदारी भारत के दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण और इज़राइल की नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती है।

रक्षा और सुरक्षा सहयोग

4 नवंबर 2025 को हुए रक्षा सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन (MoU) का स्वागत करते हुए दोनों देशों ने भविष्य की रणनीतिक रूपरेखा तय की।

मुख्य फोकस क्षेत्र:

  • उन्नत रक्षा प्लेटफॉर्म
  • संयुक्त अनुसंधान एवं उत्पादन
  • साइबर सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग
  • रणनीतिक संवाद तंत्र

दोनों पक्षों ने 7 अक्टूबर 2023 को इज़राइल पर हुए हमले और 2025 में भारत में हुई आतंकी घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति दोहराई।

एआई, साइबर सुरक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियाँ

तकनीकी सहयोग इस विशेष रणनीतिक साझेदारी का केंद्रीय स्तंभ है।

प्रमुख पहलें:

  • एआई सहयोग पर समझौता
  • भारत-इज़राइल साइबर उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना
  • क्रिटिकल एवं उभरती प्रौद्योगिकी (CET) पहल
  • I4F (इंडस्ट्रियल R&D एवं इनोवेशन फंड) का विस्तार
  • संयुक्त शोध वित्त पोषण को 1 मिलियन डॉलर से बढ़ाकर 1.5 मिलियन डॉलर (प्रत्येक देश द्वारा)

साथ ही Indian Space Research Organisation (ISRO) और Israel Space Agency (ISA) के बीच अंतरिक्ष सहयोग को भी सुदृढ़ किया गया।

व्यापार, एफटीए वार्ता और यूपीआई लिंक

दोनों नेताओं ने व्यापारिक क्षमता को पूर्ण रूप से उपयोग में लाने पर जोर दिया।

मुख्य आर्थिक प्रगति:

  • मुक्त व्यापार समझौते (FTA) वार्ता हेतु शर्तों पर हस्ताक्षर
  • सितंबर 2025 का भारत-इज़राइल द्विपक्षीय निवेश समझौता
  • भारत-इज़राइल वित्तीय संवाद की शुरुआत
  • NPCI इंटरनेशनल और MASAV के बीच UPI को इज़राइल की त्वरित भुगतान प्रणाली से जोड़ने का समझौता

साथ ही भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) के माध्यम से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।

कृषि, जल और सतत विकास

कृषि और जल सहयोग दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण आधार है।

मुख्य बिंदु:

  • 35 उत्कृष्टता केंद्र संचालित; 8 और जोड़े जा रहे
  • 10 लाख से अधिक भारतीय किसानों को प्रशिक्षण
  • भारत-इज़राइल कृषि नवाचार केंद्र (IINCA) पर समझौता
  • मत्स्य और जलीय कृषि में सहयोग
  • विलवणीकरण, अपशिष्ट जल पुन: उपयोग और नदी सफाई पर ध्यान

पर्यावरणीय सहयोग में जलवायु कार्रवाई, सर्कुलर अर्थव्यवस्था और जैव विविधता संरक्षण भी शामिल है।

जन-से-जन संपर्क, शिक्षा और श्रमिक गतिशीलता

दोनों देशों ने इज़राइल में भारतीय श्रमिकों की सुरक्षित आवाजाही बढ़ाने पर सहमति जताई।

मुख्य बिंदु:

  • अगले पाँच वर्षों में 50,000 अतिरिक्त भारतीय श्रमिक
  • विनिर्माण, सेवा और रेस्तरां क्षेत्रों में विस्तार
  • संयुक्त समन्वय समिति को सुदृढ़ करना

शिक्षा क्षेत्र में नालंदा विश्वविद्यालय और यरूशलेम का हिब्रू विश्वविद्यालय के बीच समझौता, भारत-इज़राइल अकादमिक सहयोग मंच (I2I Forum) तथा एआई आधारित शिक्षा सहयोग शामिल हैं।

16 नए समझौते

इस यात्रा के दौरान कुल 16 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें एआई सहयोग, साइबर उत्कृष्टता केंद्र, शिक्षा एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान (2026–2029), कृषि और मत्स्य नवाचार, भू-भौतिकीय अन्वेषण, समुद्री विरासत (लोथल परियोजना), वित्तीय एवं मध्यस्थता सहयोग, यूपीआई भुगतान लिंक और श्रमिक गतिशीलता प्रोटोकॉल शामिल हैं।

ये समझौते महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को संस्थागत रूप देते हैं और भारत-इज़राइल संबंधों को एक नए रणनीतिक स्तर पर स्थापित करते हैं।

सवाल

Q. 2026 के दौरे के दौरान, भारत और इज़राइल ने अपने रिश्ते को अपग्रेड किया,

A. कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप
B. स्ट्रेटेजिक अलायंस
C. स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप
D. डिफेंस पैक्ट

 

चंद्रशेखर आज़ाद की 95वीं पुण्यतिथि: वह क्रांतिकारी जिसने आत्मसमर्पण से बेहतर शहादत को चुना

भारत ने 27 फरवरी 2025 को चंद्रशेखर आज़ाद का 95वां शहीदी दिवस मनाया, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे निडर क्रांतिकारियों में से एक थे। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे निर्भीक सेनानियों में गिने जाने वाले आज़ाद को देशभर में श्रद्धांजलि अर्पित की गई और विभिन्न दलों के राजनीतिक नेताओं ने उनके साहस और बलिदान को नमन किया। आज़ाद ने प्रण लिया था कि वे कभी भी अंग्रेजों के हाथ जीवित नहीं पकड़े जाएंगे, और उन्होंने 1931 में अपने अंतिम क्षण तक इस वचन को निभाया। उनका जीवन अडिग देशभक्ति, त्याग और क्रांतिकारी जज़्बे का प्रतीक है, जो आज भी भारत के स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणादायी विरासत के रूप में स्मरण किया जाता है।

चंद्रशेखर आज़ाद कौन थे?

  • चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को भाबरा (वर्तमान मध्य प्रदेश) में चंद्रशेखर तिवारी के रूप में हुआ था। वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रमुख और निर्भीक क्रांतिकारी नेताओं में से एक बने।
  • सिर्फ 15 वर्ष की आयु में असहयोग आंदोलन के दौरान गिरफ्तारी के समय उन्होंने अपना नाम “आज़ाद”, पिता का नाम “स्वतंत्र” और पता “जेल” बताया। इसी साहसिक घोषणा ने उन्हें जीवनभर के लिए “आज़ाद” बना दिया।

प्रारंभिक प्रेरणा: जलियांवाला बाग से असहयोग आंदोलन तक

  • जलियाँवाला बाग हत्याकांड ने युवा आज़ाद को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने महात्मा गांधीi के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन (1920–22) में भाग लिया।
  • लेकिन 1922 में चौरी-चौरा घटना के बाद आंदोलन स्थगित होने से वे निराश हुए और अहिंसात्मक मार्ग के बजाय क्रांतिकारी रास्ता अपनाया। इसके बाद वे हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) से जुड़े, जिसका उद्देश्य सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकना था।

काकोरी कांड और क्रांतिकारी नेतृत्व

  • 1925 का काकोरी ट्रेन षड्यंत्र आज़ाद की प्रमुख क्रांतिकारी कार्रवाइयों में से एक था, जिसमें HRA के सदस्यों ने सरकारी खजाना ले जा रही ट्रेन को लूटा। अधिकांश क्रांतिकारी गिरफ्तार हो गए, लेकिन आज़ाद पुलिस से बच निकले।
  • वे वर्षों तक भूमिगत रहे और भेष बदलकर काम करते रहे, जिसके कारण उन्हें “क्विक सिल्वर” कहा जाता था। बाद में उन्होंने संगठन को पुनर्गठित कर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) बनाया।

सांडर्स की हत्या और अन्य क्रांतिकारी कदम

  • 1928 में लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने के लिए आज़ाद ने भगत सिंह और शिवराम राजगुरु के साथ मिलकर ब्रिटिश अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • यह कार्रवाई साइमन कमीशन के विरोध के दौरान हुए लाठीचार्ज में लाला लाजपत राय की मृत्यु के प्रतिशोध स्वरूप की गई थी।
  • आज़ाद ने 1929 में वायसराय लॉर्ड इरविन की ट्रेन पर बम हमले के प्रयास में भी भाग लिया। उनकी संगठन क्षमता और रणनीतिक कौशल ने ब्रिटिश दमन के बावजूद क्रांतिकारी गतिविधियों को जीवित रखा।

अल्फ्रेड पार्क में अंतिम संघर्ष

27 फरवरी 1931 को आज़ाद इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के अल्फ्रेड पार्क में एक साथी क्रांतिकारी से मिलने पहुंचे। किसी विश्वासघात के कारण वे ब्रिटिश पुलिस से घिर गए।

भीषण मुठभेड़ में उन्होंने दो अधिकारियों को घायल किया और अपने साथी को भागने का अवसर दिया। अंत में, अपने संकल्प के अनुसार कि वे जीवित पकड़े नहीं जाएंगे, उन्होंने अपनी अंतिम गोली स्वयं को मार ली। उस समय उनकी आयु मात्र 24 वर्ष थी। बाद में इस पार्क का नाम उनके सम्मान में आज़ाद पार्क रखा गया।

चंद्रशेखर आज़ाद की विरासत

चंद्रशेखर आज़ाद की विरासत आज भी प्रेरणा देती है।

उनके प्रमुख योगदान:

  • HSRA के तहत क्रांतिकारी आंदोलन का पुनर्गठन
  • काकोरी कांड में भागीदारी
  • लाला लाजपत राय की मृत्यु का प्रतिशोध
  • औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध निर्भीक प्रतिरोध का प्रतीक

उन्हें कई फिल्मों में भी दर्शाया गया है, जैसे शहीद, भगत सिंह की कहानी और रंग दे बसंती, जिन्होंने लोकप्रिय संस्कृति में उनकी स्मृति को जीवित रखा है।

प्रश्न

Q. चंद्रशेखर आज़ाद किस साल शहीद हुए थे?

A. 1928
B. 1929
C. 1930
D. 1931

जानें वृंदावन में फूलों की होली कब खेली जाएगी, कारण और महत्व

वृंदावन, नंदगांव और बरसाना की अनोखी होली देशभर में प्रसिद्ध है। देश-विदेश के लोग यहां लठमार, लड्डू मार और फूल वाली होली मनाने के लिए आते हैं। लड्डू मार होली के साथ ही मथुरा-वृंदावन में 9 दिनों तक चलने वाली होली की शुरुआत हो जाती है और यह रंगों वाली होली के अगले दिन तक चलती है। भगवान कृष्ण और राधा रानी के मंदिर में धूमधाम से भक्त होली का पर्व मनाते हैं। इस बार लड्डू मार होली 25 फरवरी, बुधवार के दिन मनाई गई। वहीं, 28 फरवरी, शनिवार को फूलों वाली होली मनाई जाएगी।

होली के दीवाने वृंदावन और बरसाना की होली का इंतज़ार पूरे साल करते हैं, और जब बात बांके बिहारी मंदिर में मनाई जाने वाली फूलों की होली की आती है, तो जो सुख और आनंद फूलों की होली खेलने में मिलता है।

वृंदावन में फूलों वाली होली कब खेली जाएगी?

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में इस साल फूलों की होली 28 फ़रवरी 2026, शनिवार के दिन खेली जाएगी। इस दिन मंदिर में फूलों की बारिश करके होली उत्सव मनाया जाएगा है, जिसकी छटा बेहद मनमोहक होगा। ब्रज में माना जाता है कि कृष्ण और राधा ने वृंदावन की कुंज-गलियों में प्रेमपूर्वक फूलों से होली खेली थी। फूलों की नरम पंखुड़ियों में प्रेम, कोमलता और सौहार्द का संदेश छिपा होता है। इसी प्रेममयी वातावरण को बनाए रखने के लिए आज भी बांके बिहारी मंदिर में भक्तों पर फूल बरसाए जाते हैं।

ब्रज की होली 2026

ब्रज क्षेत्र में होली का त्योहार पूरे 40 दिनों तक मनाया जाता है, बसंत पंचमी से ही होली पर्व की शुरुआत हो जाती है, जिसके बाद होली तक रंग खेलने की परंपरा चली आ रही है। फूलों वाली होली के अलावा यहां की लड्डूमार होली, लठमार होली और हुरंगा होली भी बेहद प्रसिद्ध हैं।

  • लड्डूमार होली: लड्डूमार होली 25 फ़रवरी 2026, बुधवार को बरसाना स्थित राधा रानी मंदिर के अंदर खेली गई। इस दिन भक्त एक-दूसरे पर लड्डू फेंककर होली उत्सव मनाते हैं।
  • लठमार होली: लठमार होली 26 फ़रवरी 2026, गुरुवार को बरसाना में खेली गई। इस अनोखी परंपरा में विवाहित महिलाएं अपने पतियों व अन्य पुरुषों को लाठी से मारती हैं।
  • छड़ी-मार होली: छड़ी-मार होली इस साल 1 मार्च 2026, रविवार को गोकुल में मनाई जाएगी। इस दिन महिलाएं पुरुषों को छड़ी से मारकर पारंपरिक उत्सव मनाती हैं।

फूलों वाली होली की शुरुआत कैसे हुई

यह विशेष होली वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर, बरसाना, नंदगांव और विभिन्न वैष्णव मंदिरों में मनाई जाती है। यह परंपरा मंदिर-उपासना में एक सौम्य और भक्तिपूर्ण रूप में विकसित हुई, जहां रंगों के स्थान पर पुष्प-वर्षा की जाती है। फूल को वैष्णव उपासना में प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना गया है। देवताओं पर पुष्प-वर्षा करना दिव्य आनंद का संकेत होता है। ऐसी मान्यता है कि वसंत ऋतु में वृंदावन के कुंजों में राधा-कृष्ण पुष्पों के बीच क्रीड़ा करते थे। भक्त इसी आनंद का अनुभव करने के लिए फूलों वाली होली मनाते हैं।

लड्डू मार होली क्यों मनाई जाती है 

मान्यता है की श्रीकृष्ण और उनके सखा नंदगांव से बरसाना आते थे। वे राधा रानी और सखियों से हंसी-मजाक किया करते थे। सखियां भी उन्हें प्रेमपूर्वक चिढ़ाती थीं। इसी प्रेमपूर्ण वातावरण में मिठाइयों का आदान-प्रदान होता था और इसी भाव से लड्डू मार होली की परंपरा विकसित हुई। माना जाता है कि लड्डू मिठास का प्रतीक और दिव्य प्रेम की मधुरता का संकेत है। यह दर्शाता है कि राधा-कृष्ण की लीला में जो भी नोक-झोंक है वह अंततः प्रेम से भरा हुआ है।

Holi 2026: 3 या 4 मार्च, जानें किस दिन है होली, 3 मार्च, नोट कर लें सही समय और शुभ मुहूर्त

Holi 2026 Kab Hai: होली का पर्व (Holi 2026) हर साल की चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। होलिका दहन के बाद अगले दिन रंगोत्सव मनाया जाता है। होली का पर्व खुशियों और बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। इस साल होली की तारीख को लेकर थोड़ी भ्रम बना हुआ है। दरअसल, पूर्णिमा तिथि दो दिन और चंद्रग्रहण लगने के कारण होलिका दहन और रंगोत्सव की तारीख को लेकर थोड़ी भ्रम है। जानें होली का पर्व इस साल कब मनाया जाएगा।

होलिका दहन कब है? 

पंचांग की गणना के अनुसार, होलिका दहन (Holika Dahan 2026) 2 मार्च को करना शास्त्र सम्मत है। बता दें कि 2 मार्च को शाम में पूर्णिमा तिथि लग जाएगा। पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को शाम में 5 बजकर 56 मिनट पर आरंभ हो जाएगी और अगले दिन 5 बजकर 8 मिनट पर पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी। 2 मार्च को भद्रा मुख मध्यरात्रि 2 बजकर 38 मिनट से सुबह में 4 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। ऐसे में 2 मार्च को ही होलिका दहन (Holika Dahan 2026) करना शुभ रहेगा। बता दें कि होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है। 3 मार्च को शाम में 5 बजकर 8 मिनट तक पूर्णिमा तिथि तो रहेगी लेकिन इस समय चंद्रग्रहण भी होगा। दोपहर में 3 बजकर 20 मिनट से चंद्र ग्रहण आरंभ हो जाएगा और शाम में 6 बजकर 47 मिनट पर ग्रहण समाप्त होगा। उससे पहले ही पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी।

होली 2026 की तारीख

होलिका दहन के अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है। उस समय में चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि होती है। पंचांग के अनुसार, प्रतिपदा तिथि 3 मार्च को शाम 05:07 बजे से शुरू होकर 4 मार्च को शाम 04:48 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर चैत्र कृष्ण प्रतिपदा 4 मार्च को है। इसलिए इस साल होली का त्योहार 4 मार्च बुधवार को मनाना शास्त्र सम्मत है। रंगोत्सव होली 4 मार्च को मनाई जाएगी।

होली का महत्व

होली ( Holi 2026) का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। इस दिन अपने भक्त प्रहलाद को भगवान विष्णु ने बचाया था। प्रहलाद भगवान विष्णु को बहुत बड़ा भक्त था। प्रहलाद के पिता हिरण्यकश्यप असुर राज था। वह प्रहलाद को भगवान विष्णु की भक्ति करने से रोकता है लेकिन, भक्त प्रहलाद ने कभी भी भगवान विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी। हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका (Holika) से भक्त प्रहलाद को जलती आग में लेकर बैठने के लिए कहा। क्योंकि, होलिका को आग में नहीं जलने का वरदान था। लेकिन, जब होलिका प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठी तो वह खुद ही जलकर भस्म हो गई। इसलिए होलिका दहन (Holika Dahan 2026) मनाया जाता है वहीं, होलिका का अंत और प्रहलाद की जीत के बाद लोगों ने एक दूसरे को रंग लगाकर उत्सव मनाया था। इसलिए होलिका दहन के अगले दिन रंगोत्सव मनाया जाता है।

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