कैबिनेट ने 2026-27 सीज़न के लिए कच्चे जूट के MSP को मंज़ूरी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को मंजूरी दे दी है।

कच्चे जूट का MSP ₹5,925 प्रति क्विंटल निर्धारित

सरकार ने 2026-27 विपणन सत्र के लिए कच्चे जूट (TD-3 ग्रेड) का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹5,925 प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। यह MSP अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर 61.8% का लाभ सुनिश्चित करता है। यह निर्णय सरकार के उस सिद्धांत के अनुरूप है, जिसकी घोषणा बजट 2018-19 में की गई थी, जिसके तहत MSP को उत्पादन लागत का कम से कम 1.5 गुना निर्धारित किया जाता है।

पिछले सत्र की तुलना में वृद्धि

2025-26 सत्र की तुलना में MSP में ₹275 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। वर्ष 2014-15 में कच्चे जूट का MSP ₹2,400 प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर ₹5,925 प्रति क्विंटल हो गया है। इस प्रकार 2014-15 से अब तक MSP में ₹3,525 प्रति क्विंटल (लगभग 2.5 गुना) की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

किसानों को लाभ

सरकार के अनुसार वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान जूट किसानों को MSP के रूप में कुल ₹1,342 करोड़ का भुगतान किया गया। इसके विपरीत वर्ष 2004-05 से 2013-14 की अवधि में केवल ₹441 करोड़ का भुगतान किया गया था। यह आंकड़ा किसानों को दी जा रही वित्तीय सहायता में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।

जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की भूमिका

भारतीय जूट निगम (JCI) केंद्र सरकार की नोडल एजेंसी के रूप में मूल्य समर्थन संचालन (Price Support Operations) जारी रखेगी। खरीद प्रक्रिया के दौरान होने वाले किसी भी नुकसान की भरपाई केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह की जाएगी।

निर्णय का महत्व

MSP में की गई वृद्धि का उद्देश्य जूट किसानों को उचित पारिश्रमिक सुनिश्चित करना, जूट की खेती को प्रोत्साहित करना, ग्रामीण आय को सुदृढ़ करना तथा जूट उद्योग की आपूर्ति शृंखला को समर्थन देना है। यह निर्णय विशेष रूप से प्रमुख जूट उत्पादक राज्यों— पश्चिम बंगाल, असम और बिहार— के किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध होने की उम्मीद है।

MCQs: कच्चे जूट के लिए MSP 2026-27

Q1. 2026-27 सीज़न के लिए कच्चे जूट (TD-3 ग्रेड) के लिए MSP तय की गई है:
(a) ₹5,500 प्रति क्विंटल
(b) ₹5,650 प्रति क्विंटल
(c) ₹5,925 प्रति क्विंटल
(d) ₹6,000 प्रति क्विंटल
(e) ₹6,200 प्रति क्विंटल

जवाब: (c)
हल: MSP ₹5,925 प्रति क्विंटल तय की गई है।

Q2. MSP प्रोडक्शन की वेटेड एवरेज कॉस्ट पर कितना परसेंट रिटर्न पक्का करता है? (a) 50%
(b) 55%
(c) 58%
(d) 61.8%
(e) 65%

जवाब: (d)
हल: MSP प्रोडक्शन कॉस्ट पर 61.8% का रिटर्न पक्का करता है।

Q3. 2025-26 सीज़न की तुलना में कच्चे जूट का MSP कितना बढ़ा है?
(a) ₹200
(b) ₹250
(c) ₹275
(d) ₹300
(e) ₹350

जवाब: (c)
हल: MSP में ₹275 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई।

Q4. जूट प्राइस सपोर्ट ऑपरेशन के लिए कौन सा संगठन नोडल एजेंसी के तौर पर काम करता है? (a) FCI
(b) NABARD
(c) कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया
(d) जूट कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया
(e) APEDA

जवाब: (d)
जवाब: जूट कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (JCI) प्राइस सपोर्ट ऑपरेशन करता है।

सवाल 5. MSP को प्रोडक्शन की लागत का कम से कम 1.5 गुना तय करने का नियम किस बजट में बताया गया था?

(a) 2016-17
(b) 2017-18
(c) 2018-19
(d) 2019-20
(e) 2020-21

जवाब: (c)
जवाब: इस नियम की घोषणा बजट 2018-19 में की गई थी।

DBT के 40 साल पूरे; डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘SUJVIKA’ AI-ड्रिवन बायोटेक डेटा पोर्टल लॉन्च किया

जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के 40वें स्थापना दिवस पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने “SUJVIKA” नामक एआई-आधारित बायोटेक उत्पाद डेटा पोर्टल का शुभारंभ किया। यह पोर्टल उद्योग भागीदार जैव प्रौद्योगिकी संचालित उद्यमों का संघ (ABLE) के सहयोग से विकसित किया गया है। कार्यक्रम का आयोजन नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित सिविल सेवा अधिकारी संस्थान (CSOI) में हुआ।

SUJVIKA क्या है?

SUJVIKA एक ट्रेड स्टैटिस्टिक्स डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म है, जो बायोटेक उत्पादों के आयात से संबंधित संरचित और प्रमाणित डेटा उपलब्ध कराता है। यह पोर्टल बायोकेमिकल उत्पादों पर सेक्टर-वार जानकारी, औद्योगिक एंजाइम और अन्य बायोटेक आयात का डेटा, उच्च-मूल्य और उच्च-आयतन आयात का विश्लेषण, आयात निर्भरता का आकलन तथा स्वदेशीकरण और अनुसंधान एवं विकास (R&D) योजना को समर्थन प्रदान करता है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक–निजी भागीदारी के माध्यम से घरेलू बायोमैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और साक्ष्य-आधारित नीतिनिर्माण को सुदृढ़ करना है।

भारत की बढ़ती बायोइकोनॉमी

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैव-प्रौद्योगिकी अगली औद्योगिक क्रांति को गति देगी और “विकसित भारत 2047” के तहत 1 ट्रिलियन डॉलर की बायोइकोनॉमी का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2014 में 100 से कम बायोटेक स्टार्टअप थे, जो आज बढ़कर 11,000 से अधिक हो चुके हैं। इसी अवधि में भारत की बायोइकोनॉमी लगभग 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में 165.7 अरब डॉलर तक पहुँच गई है। भारत आज वैश्विक स्तर पर अग्रणी बायोटेक गंतव्यों और वैक्सीन निर्माताओं में शामिल है।

नीतिगत एवं संस्थागत समर्थन

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत BioE3 नीति (Biotechnology for Economy, Environment and Employment) के कार्यान्वयन में जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) और जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और नवाचार परिषद (BRIC) अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। इसके अतिरिक्त नेशनल बायोफाउंड्री नेटवर्क (6 बायोफाउंड्री और 21 बायो-एनएबलर सुविधाएँ), 21 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 95 बायो-इनक्यूबेटर तथा ₹1 लाख करोड़ के RDI पहल के अंतर्गत ₹2,000 करोड़ का राष्ट्रीय आह्वान जैसी पहलें भी इस क्षेत्र को मजबूती दे रही हैं।

वैज्ञानिक उपलब्धियाँ

जीनोमइंडिया परियोजना के अंतर्गत 99 आबादियों के 10,000 व्यक्तियों के जीनोम अनुक्रमण का डेटा भारतीय जैविक डेटा केंद्र के माध्यम से उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा, सीवियर हीमोफीलिया A के लिए भारत का पहला मानव जीन थेरेपी परीक्षण सफल रहा, जिसमें फैक्टर VIII का स्थायी उत्पादन दर्ज किया गया।

अंतरिक्ष जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और DBT के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत अंतरिक्ष मिशनों में बायोटेक प्रयोगों को भी बढ़ावा दिया गया है।

डिजिटल रूपांतरण और महत्व

मंत्री ने DBT की नई वेबसाइट का भी शुभारंभ किया, जिसे डिजिटल ब्रांड आइडेंटिटी मैनुअल (DBIM) के अनुरूप तैयार किया गया है, जिससे मानकीकृत डिजिटल शासन को बढ़ावा मिलेगा।

DBT का 40वाँ स्थापना दिवस वर्ष 1986 से अब तक की यात्रा को दर्शाता है— जहाँ विभाग ने क्षमता निर्माण से शुरुआत कर आज नवाचार, उद्यमिता और बायोइकोनॉमिक विकास के प्रमुख प्रेरक के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है। “SUJVIKA” का शुभारंभ भारत के बायोटेक इकोसिस्टम को एआई-सक्षम डेटा इंटेलिजेंस और रणनीतिक योजना के माध्यम से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारत-अमेरिका संयुक्त विशेष बल अभ्यास ‘वज्र प्रहार’ हिमाचल प्रदेश में शुरू

भारत–अमेरिका संयुक्त विशेष बल अभ्यास ‘वज्र प्रहार’ का 16वाँ संस्करण 24 फरवरी से 16 मार्च 2026 तक हिमाचल प्रदेश के बकलोह स्थित स्पेशल फोर्सेस ट्रेनिंग स्कूल में आयोजित किया जाएगा। इस अभ्यास में भारतीय सेना और संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना के विशेष बल भाग लेंगे, जिससे दोनों देशों के रक्षा संबंध और मजबूत होंगे।

भाग लेने वाली टुकड़ियाँ

भारतीय सेना की ओर से 45 कर्मियों की विशेष बल टुकड़ी भाग ले रही है, जबकि अमेरिका की ओर से 12 सैनिकों की टुकड़ी, जिन्हें ग्रीन बेरेट्स (Green Berets) के नाम से जाना जाता है, शामिल होगी। इससे पहले इस अभ्यास का पिछला संस्करण नवंबर 2024 में अमेरिका के ऑर्चर्ड कॉम्बैट ट्रेनिंग सेंटर, इडाहो में आयोजित किया गया था।

अभ्यास का उद्देश्य

अभ्यास ‘वज्र प्रहार’ का मुख्य उद्देश्य सैन्य सहयोग को बढ़ावा देना, विशेष बलों के बीच पारस्परिक संचालन क्षमता (Interoperability) में सुधार करना, संयुक्त परिचालन क्षमताओं को सुदृढ़ करना तथा विशेष अभियानों की रणनीतियों में विशेषज्ञता का आदान-प्रदान करना है। यह अभ्यास विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में संयुक्त विशेष बल अभियानों के संचालन पर केंद्रित है।

प्रमुख प्रशिक्षण घटक

प्रशिक्षण कार्यक्रम में उच्च स्तर की शारीरिक तैयारी, संयुक्त मिशन योजना, सामरिक ड्रिल का निष्पादन, सर्वोत्तम प्रथाओं और परिचालन अनुभवों का साझा करना तथा विशेष अभियानों की रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाएँ (TTPs) शामिल हैं। इसका उद्देश्य चुनौतीपूर्ण वातावरण में जटिल अभियानों के लिए समन्वय और तत्परता को बढ़ाना है।

सामरिक महत्व

अभ्यास ‘वज्र प्रहार’ भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह दोनों देशों के विशेष बलों के बीच आपसी विश्वास, पेशेवर सौहार्द और परिचालन समन्वय को और मजबूत करता है।

भारत और इज़राइल ने नई दिल्ली में FTA बातचीत का पहला दौर शुरू किया

भारत और इज़राइल ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement–FTA) के लिए औपचारिक रूप से पहली दौर की वार्ताएँ शुरू कर दी हैं। ये चर्चाएँ 23 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आरंभ हुईं और 26 फरवरी 2026 तक चलेंगी। इससे पहले नवंबर 2025 में वार्ता के लिए संदर्भ की शर्तें (Terms of Reference–ToR) पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसके तहत द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक संरचित रूपरेखा तय की गई। यह पहल दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने और निवेश, प्रौद्योगिकी तथा नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

भारत–इज़राइल व्यापार संबंध

भारत और इज़राइल के बीच वित्त वर्ष 2024-25 में कुल माल व्यापार (Merchandise Trade) लगभग 3.62 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। दोनों देशों के बीच नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा, उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण, कृषि और सेवा क्षेत्र जैसे कई क्षेत्रों में मजबूत पूरकता (Complementarity) मौजूद है। प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से विशेष रूप से एमएसएमई सहित व्यवसायों को नीति स्थिरता और पूर्वानुमेयता (Certainty and Predictability) मिलने की उम्मीद है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार प्रवाह को और गति मिलेगी।

वार्ता के प्रमुख क्षेत्र

दोनों देशों के तकनीकी विशेषज्ञ निम्नलिखित विषयों पर विस्तृत चर्चा कर रहे हैं— वस्तुओं का व्यापार (Trade in Goods), सेवाओं का व्यापार (Trade in Services), मूल के नियम (Rules of Origin), स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (Sanitary and Phytosanitary–SPS) उपाय, व्यापार में तकनीकी बाधाएँ (Technical Barriers to Trade–TBT), सीमा शुल्क प्रक्रियाएँ एवं व्यापार सुगमता (Customs Procedures and Trade Facilitation) तथा बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights–IPR)। ये सभी विषय व्यापक और संतुलित FTA के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करते हैं।

प्रमुख अधिकारी

  • वार्ता के उद्घाटन सत्र के दौरान भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि ये बातचीत ऐसे उपयुक्त समय पर हो रही है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25–26 फरवरी 2026 को इज़राइल की यात्रा पर हैं।
  • भारत के मुख्य वार्ताकार अजय भादू, जो वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव हैं, ने संतुलित और दूरदर्शी समझौते के निर्माण के महत्व पर बल दिया।
  • इज़राइल की मुख्य वार्ताकार यिफ़ात अलोन पेरेल, जो ट्रेड पॉलिसी एवं एग्रीमेंट्स की वरिष्ठ निदेशक हैं, ने कहा कि प्रस्तावित FTA दोनों देशों की आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने और नए बाजारों के द्वार खोलने में सहायक हो सकता है।

सामरिक महत्व

ये वार्ताएँ भारत और इज़राइल के बीच बढ़ती सामरिक साझेदारी को दर्शाती हैं। प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) से आर्थिक सहयोग को गहराई मिलने, आपूर्ति शृंखला की मजबूती बढ़ने तथा दोनों देशों के व्यवसायों के लिए नए अवसर सृजित होने की अपेक्षा है। दोनों पक्ष राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक आर्थिक आकांक्षाओं के अनुरूप एक संतुलित एवं परस्पर लाभकारी समझौता करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

MCQs: इंडिया-इज़राइल FTA बातचीत

Q1. इंडिया-इज़राइल FTA बातचीत का पहला राउंड कब शुरू हुआ:
(a) 20 फरवरी 2026
(b) 21 फरवरी 2026
(c) 23 फरवरी 2026
(d) 25 फरवरी 2026
(e) 26 फरवरी 2026

जवाब: (c)
जवाब: बातचीत 23 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुई।

Q2. FY 2024-25 में इंडिया और इज़राइल के बीच कुल सामान का व्यापार इस तरह था:
(a) USD 2.5 बिलियन
(b) USD 3.0 बिलियन
(c) USD 3.62 बिलियन
(d) USD 4.2 बिलियन
(e) USD 5.1 बिलियन

जवाब: (c)
जवाब: दोनों देशों के बीच व्यापार USD 3.62 बिलियन था।

Q3. FTA के लिए टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस (ToR) पर साइन किए गए थे:
(a) अक्टूबर 2025
(b) नवंबर 2025
(c) दिसंबर 2025
(d) जनवरी 2026
(e) फरवरी 2026

जवाब: (b)
जवाब: ToR पर नवंबर 2025 में साइन किए गए थे।

Q4. FTA के लिए भारत के चीफ नेगोशिएटर कौन हैं?
(a) राजेश अग्रवाल
(b) अजय भादू
(c) पीयूष गोयल
(d) सौरभ कुमार
(e) अमिताभ कांत

जवाब: (b)
जवाब: अजय भादू, डिपार्टमेंट ऑफ़ कॉमर्स के एडिशनल सेक्रेटरी, भारत के चीफ नेगोशिएटर हैं।

Q5. इनमें से कौन सा टॉपिक FTA नेगोशिएट्स के तहत कवर नहीं किया गया है? (a) सामान का व्यापार
(b) इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स
(c) कस्टम्स प्रोसीजर
(d) मॉनेटरी पॉलिसी रेगुलेशन
(e) सर्विसेज़ का व्यापार

जवाब: (d)
Sol: मॉनेटरी पॉलिसी रेगुलेशन FTA बातचीत का हिस्सा नहीं है।

भारत-जापान संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘धर्म गार्जियन’ उत्तराखंड में शुरू हुआ

भारत–जापान संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘धर्म गार्डियन’ का 7वां संस्करण चौबटिया, उत्तराखंड स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में शुरू हो गया है। यह अभ्यास 24 फरवरी से 9 मार्च 2026 तक आयोजित किया जाएगा। यह वार्षिक सैन्य अभ्यास भारतीय सेना और जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JGSDF) के बीच आयोजित होता है, जो दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

भागीदारी और टुकड़ियाँ

इस संस्करण में दोनों देशों ने 120-120 सैनिकों की टुकड़ी तैनात की है। जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JGSDF) की ओर से 32वीं इन्फैंट्री रेजिमेंट के सैनिक भाग ले रहे हैं, जबकि भारतीय सेना की टुकड़ी लद्दाख स्काउट्स से ली गई है। यह अभ्यास भारत और जापान में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है, जो दोनों देशों के बीच गहराती सामरिक साझेदारी को दर्शाता है।

अभ्यास का उद्देश्य

अभ्यास ‘धर्म गार्डियन’ का मुख्य उद्देश्य सैन्य सहयोग को सुदृढ़ करना, पारस्परिक संचालन क्षमता (Interoperability) बढ़ाना और संयुक्त अभियानों की दक्षता में सुधार करना है। इसके तहत अर्ध-शहरी क्षेत्रों में संयुक्त अभियान चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह अभ्यास आधुनिक सैन्य तकनीकों के उपयोग, संयुक्त योजना निर्माण तथा समन्वित सामरिक संचालन पर विशेष रूप से केंद्रित है।

प्रमुख सामरिक गतिविधियाँ

दो सप्ताह तक चलने वाले इस अभ्यास के दौरान सैनिक कई महत्वपूर्ण सामरिक गतिविधियाँ संचालित करेंगे। इनमें अस्थायी ऑपरेटिंग बेस (Temporary Operating Base) की स्थापना, इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) ग्रिड का विकास, मोबाइल वाहन चेक पोस्ट की स्थापना, शत्रुतापूर्ण वातावरण में घेराबंदी और तलाशी अभियान (Cordon and Search Operations), हेलिबोर्न ऑपरेशन तथा हाउस इंटरवेंशन ड्रिल शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य यथार्थपरक परिस्थितियों में संयुक्त युद्धक क्षमता को मजबूत करना और उच्च स्तर की शारीरिक दक्षता हासिल करना है।

सामरिक महत्व

‘धर्म गार्डियन’ भारत–जापान रक्षा संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है। यह अभ्यास दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास, परिचालन समन्वय (Operational Synergy) और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की तैयारी को सुदृढ़ करता है। नियमित रूप से आयोजित यह संयुक्त सैन्य अभ्यास द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को और गहराई प्रदान करता है।

MCQs: एक्सरसाइज धर्म गार्डियन 2026

Q1. एक्सरसाइज ‘धर्म गार्डियन’ का 7वां एडिशन भारत और इनके बीच हो रहा है:
(a) यूनाइटेड स्टेट्स
(b) ऑस्ट्रेलिया
(c) जापान
(d) साउथ कोरिया
(e) फ्रांस

जवाब: (c)
Sol: यह एक्सरसाइज भारत और जापान के बीच हो रही है।

Q2. एक्सरसाइज ‘धर्म गार्डियन’ 2026 यहां हो रही है:
(a) देहरादून
(b) लेह
(c) चौबटिया
(d) रानीखेत
(e) श्रीनगर

जवाब: (c)
Sol: यह एक्सरसाइज फॉरेन ट्रेनिंग नोड, चौबटिया, उत्तराखंड में हो रही है।

Q3. एक्सरसाइज में इंडियन आर्मी की टुकड़ी शामिल है:
(a) राजपूत रेजिमेंट
(b) सिख रेजिमेंट
(c) गोरखा राइफल्स
(d) लद्दाख स्काउट्स
(e) जाट रेजिमेंट

जवाब: (d)
जवाब: इंडियन टुकड़ी लद्दाख स्काउट्स से शामिल है।

Q4. एक्सरसाइज इस समय के लिए तय है:
(a) 20 फरवरी से 5 मार्च 2026
(b) 24 फरवरी से 9 मार्च 2026
(c) 25 फरवरी से 10 मार्च 2026
(d) 1 मार्च से 15 मार्च 2026
(e) 5 मार्च से 20 मार्च 2026

जवाब: (b)
जवाब: एक्सरसाइज 24 फरवरी से 9 मार्च 2026 तक चलेगी।

Q5. एक्सरसाइज में इनमें से कौन सी मुख्य टैक्टिकल एक्टिविटी है? (a) नेवल सबमरीन ऑपरेशन
(b) स्पेस सर्विलांस ड्रिल
(c) कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन
(d) साइबर हैकिंग सिमुलेशन
(e) मिसाइल टेस्ट फायरिंग

जवाब: (c)
हल: कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन की जाने वाली टैक्टिकल ड्रिल में से एक है।

पेरू ने जोस मारिया बाल्काज़र को अंतरिम राष्ट्रपति चुना, एक दशक में आठवें नेता

पेरू की संसद ने भ्रष्टाचार के आरोपों में महाभियोग झेल रहे पूर्व राष्ट्रपति जोस जेरी को पद से हटाए जाने के बाद जोसे मारिया बाल्काज़र को देश का नया अंतरिम राष्ट्रपति चुना है। यह निर्णय पेरू की कांग्रेस द्वारा लाइव प्रसारित मतदान के माध्यम से लिया गया। कांग्रेस के प्रमुख होने के नाते बाल्काज़र ने स्वचालित रूप से अंतरिम राष्ट्रपति का पद संभाल लिया। यह घटनाक्रम देश की राजनीतिक अस्थिरता को दर्शाता है, जहां पिछले एक दशक में कई नेतृत्व परिवर्तन हो चुके हैं।

2016 के बाद आठवें राष्ट्रपति

83 वर्षीय वकील और पूर्व न्यायाधीश जोसे मारिया बाल्काज़र 2016 के बाद पेरू के आठवें राष्ट्रपति बने हैं। यह नियुक्ति देश में पिछले कुछ वर्षों से जारी राजनीतिक अस्थिरता को दर्शाती है। उन्होंने जोस जेरी का स्थान लिया, जिन्हें भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों के बाद पद से हटा दिया गया था।

लोकतांत्रिक संक्रमण का आश्वासन

चुनाव के बाद अपने संबोधन में बाल्काज़र ने नागरिकों को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार शांतिपूर्ण और पारदर्शी लोकतांत्रिक संक्रमण सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि बचे हुए महीनों में वे पेरू की जनता को निष्पक्ष और विश्वसनीय चुनावी प्रक्रिया प्रदान करेंगे, जिसमें किसी भी प्रकार की शंका की गुंजाइश नहीं होगी। उनका मुख्य दायित्व आगामी चुनावों की निगरानी करना और संक्रमण प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराना होगा।

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

पेरू ने पिछले एक दशक में राजनीतिक संकट, महाभियोग की कार्यवाहियों और भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण लगातार नेतृत्व परिवर्तन देखे हैं। यह ताजा घटनाक्रम दक्षिण अमेरिकी देश में जारी शासन संबंधी चुनौतियों को उजागर करता है। अंतरिम प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि वह राजनीतिक संस्थाओं को स्थिर करने और चुनावों से पहले जनता का विश्वास बहाल करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।

MCQs: पेरू के अंतरिम प्रेसिडेंट 2026

Q1. फरवरी 2026 में पेरू के अंतरिम प्रेसिडेंट के तौर पर किसे चुना गया है?
(a) जोस जेरी
(b) पेड्रो कैस्टिलो
(c) जोस मारिया बाल्काज़र
(d) मार्टिन विज़कारा
(e) दीना बोलुआर्टे

जवाब: (c)
Sol: जोस मारिया बाल्काज़र पेरू के अंतरिम प्रेसिडेंट के तौर पर चुने गए।

Q2. जोस मारिया बाल्काज़र 2016 से पेरू के ______ हेड ऑफ़ स्टेट बने।
(a) पाँचवें
(b) छठे
(c) सातवें
(d) आठवें
(e) नौवें

जवाब: (d)
Sol: वह 2016 से पेरू के आठवें प्रेसिडेंट बने।

Q3. पूर्व अंतरिम प्रेसिडेंट जोस जेरी को इन वजहों से पद से हटाया गया:
(a) हेल्थ कारण
(b) चुनाव हार
(c) भ्रष्टाचार के आरोप
(d) मिलिट्री तख्तापलट
(e) आर्थिक संकट

जवाब: (c)
Sol: जोस जेरी पर भ्रष्टाचार (भ्रष्टाचार) के आरोपों के कारण महाभियोग लगाया गया था।

Q4. जोस मारिया बाल्काज़र ने पहले ये पद संभाले थे:
(a) आर्मी जनरल
(b) इकोनॉमिस्ट
(c) वकील और पूर्व जज
(d) बिज़नेस लीडर
(e) डिप्लोमैट

जवाब: (c)
Sol: बाल्काज़र 83 साल के वकील और पूर्व जज हैं।

Q5. पेरू की राजधानी, जहाँ कांग्रेस ने नए प्रेसिडेंट को चुना, वह है:
(a) सैंटियागो
(b) ब्यूनस आयर्स
(c) क्विटो
(d) लीमा
(e) बोगोटा

जवाब: (d)
Sol: वोट पेरू की राजधानी लीमा में हुआ।

ICRA का अनुमान: Q3 FY2025-26 में भारत की GDP वृद्धि दर 7.2% रहने की संभावना

ICRA ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3) में भारत की वर्ष-दर-वर्ष (YoY) जीडीपी वृद्धि दर घटकर 7.2% रह सकती है, जबकि दूसरी तिमाही (Q2) में यह 8.2% थी। यह मंदी मुख्यतः सेवा और कृषि क्षेत्रों के कमजोर प्रदर्शन के कारण है, हालांकि औद्योगिक क्षेत्र में सुधार देखने को मिला है।

क्षेत्रवार प्रदर्शन

सेवा क्षेत्र:

  • Q3 FY26 में वृद्धि दर 7.8% रहने का अनुमान है, जो Q2 FY26 के 9.2% से कम है।
  • सरकारी व्यय में कमी और सेवा निर्यात में कमजोरी इसका प्रमुख कारण है।

कृषि क्षेत्र:

वृद्धि दर Q3 में 3.0% रहने का अनुमान है, जो पिछली तिमाही के 3.5% से कम है।

औद्योगिक क्षेत्र:

  • इस क्षेत्र में सुधार दर्ज किया गया है और वृद्धि दर 8.3% तक पहुंचने का अनुमान है, जो छह तिमाहियों का उच्चतम स्तर है। यह Q2 के 7.7% से अधिक है।
  • हालांकि औद्योगिक क्षेत्र में सुधार हुआ है, लेकिन सेवा और कृषि क्षेत्र की कमजोरी कुल वृद्धि को सीमित कर सकती है।

मंदी के प्रमुख कारण

ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के अनुसार, वृद्धि दर में नरमी के पीछे कई कारण हैं:

  • प्रतिकूल बेस इफेक्ट
  • केंद्र सरकार के पूंजीगत व्यय (Capex) में संकुचन
  • राज्य सरकारों के राजस्व व्यय में सुस्ती
  • वस्तु निर्यात (Merchandise Exports) में कमजोरी

हालांकि, त्योहारी मांग और जीएसटी तर्कसंगतकरण (GST Rationalisation) ने वृद्धि दर को 7% से ऊपर बनाए रखने में मदद की।

सरकारी व्यय का रुझान

केंद्रीय पूंजीगत व्यय:

Q3 FY26 में 23.4% की वार्षिक गिरावट दर्ज की गई, जबकि Q3 FY25 में 47.7% की वृद्धि थी। यह Q2 FY26 के ₹3.1 ट्रिलियन से घटकर Q3 में ₹2.1 ट्रिलियन रह गया।

राजस्व व्यय:

  • केंद्र सरकार का गैर-ब्याज राजस्व व्यय Q3 FY26 में 3.5% घटा।
  • राज्य सरकारों का गैर-ब्याज राजस्व व्यय वृद्धि दर 7.3% (Q2) से घटकर 2.7% (Q3) रह गई।
  • केंद्र और राज्यों का संयुक्त राजस्व व्यय Q3 में 0.3% की मामूली वृद्धि दर्ज कर सका, जबकि Q2 में 0.6% की गिरावट थी।

आगे का परिदृश्य

  • ICRA ने अपनी Q3 जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान मौजूदा आर्थिक आंकड़ों के आधार पर 7.2% पर स्थिर किया है, जो वित्त वर्ष की पहली छमाही के 8.0% से कम है।
  • औद्योगिक क्षेत्र से कुछ समर्थन मिलने के बावजूद, सेवा, कृषि और सरकारी व्यय में कमजोरी के कारण समग्र आर्थिक गति सीमित रह सकती है।

योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में IBM के AI गवटेक इनोवेशन सेंटर का उद्घाटन किया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में IBM के एआई गवटेक इनोवेशन सेंटर का उद्घाटन किया और इसे राज्य में प्रौद्योगिकी-आधारित सुशासन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल उत्तर प्रदेश को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डीप टेक और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने में सहायक होगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस केंद्र के माध्यम से शासन व्यवस्था अधिक पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनेगी।

तकनीक-संचालित शासन को मजबूत करना

IBM के साथ मिलकर बनाया गया AI गवटेक इनोवेशन सेंटर, गवर्नेंस, ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक सर्विस डिलीवरी को बेहतर बनाने के लिए AI-बेस्ड सॉल्यूशन को डिज़ाइन और स्केल करने के लिए एक प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी में बहुत पोटेंशियल है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत का पहला कंप्यूटर IBM की मदद से इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी कानपुर में लगाया गया था, जिससे टेक्नोलॉजिकल प्रोग्रेस के साथ राज्य के ऐतिहासिक लिंक पर रोशनी पड़ी।

AI, डीप टेक और क्वांटम कंप्यूटिंग पर फोकस

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश इन क्षेत्रों में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
  • रोबोटिक्स
  • ड्रोन टेक्नोलॉजी
  • मेडिकल टेक्नोलॉजी (मेडटेक)
  • क्वांटम कंप्यूटिंग

राज्य के बजट में रोबोटिक्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी में सेंटर्स ऑफ़ एक्सीलेंस के लिए पहले ही प्रावधान किए जा चुके हैं। मेडटेक सेक्टर में IIT कानपुर के साथ सहयोग भी चल रहा है।

यूपी सरकार के साथ एमओयू साइन किए गए

कार्यक्रम के दौरान IBM ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। पहला समझौता राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के साथ किया गया, जिसके तहत विभिन्न विभागों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित अनुप्रयोग विकसित किए जाएंगे, ताकि शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सके।

दूसरा समझौता विद्यालयी शिक्षा निदेशालय के साथ किया गया, जिसके अंतर्गत कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए एआई साक्षरता कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसका उद्देश्य छात्रों को उभरती प्रौद्योगिकियों से परिचित कराना और भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करना है।

इस अवसर पर IBM के चेयरमैन एवं सीईओ Arvind Krishna ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता वैश्विक स्तर पर सरकारी कार्यकुशलता और आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह साझेदारी उत्तर प्रदेश को तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।

‘एआई सिटी’ लखनऊ का विजन

‘एआई सिटी’ लखनऊ की परिकल्पना को आगे बढ़ाते हुए योगी आदित्यनाथ ने IBM का राज्य के साथ साझेदारी के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सहयोग लखनऊ को एक “एआई सिटी” के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग सहित उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े सभी प्रयासों को राज्य सरकार का पूर्ण समर्थन मिलेगा।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश तकनीकी नवाचार, डिजिटल अवसंरचना और कौशल विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, और यह पहल राज्य को राष्ट्रीय तथा वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाएगी। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार, IBM तथा Indian Institute of Technology Kanpur (आईआईटी कानपुर) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएम भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में श्रील प्रभुपाद पर गुजराती जीवनी का विमोचन किया

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में ‘विश्वगुरु श्रील प्रभुपाद’ नामक गुजराती जीवनी का विमोचन किया। यह पुस्तक ए. सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद के प्रेरणादायक जीवन पर आधारित है, जो अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण चेतना सोसायटी (इस्कॉन) के संस्थापक-आचार्य थे। इस पुस्तक में बताया गया है कि किस प्रकार श्रील प्रभुपाद ने भारतीय अध्यात्म और वैदिक ज्ञान को वैश्विक मंच तक पहुँचाया तथा भगवान श्रीकृष्ण के संदेश को विभिन्न महाद्वीपों में फैलाकर भारत की आध्यात्मिक विरासत को विश्वभर में प्रतिष्ठित किया।

आध्यात्मिक मार्गदर्शक को श्रद्धांजलि

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि ए. सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद की जीवन यात्रा संघर्षों से भरी रही, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अटूट भक्ति ने उन्हें असाधारण सफलता दिलाई। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति कठिनाइयों से निराश हो जाता है, तब श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश उसे सही मार्ग दिखाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि धैर्य, आंतरिक शांति और आस्था जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। भगवान राम और भगवान कृष्ण के आदर्शों का अनुसरण करने से मोक्ष का मार्ग सुलभ हो जाता है।

150वीं जयंती पर सम्मान

मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि श्रील प्रभुपाद की 150वीं जयंती के अवसर पर नरेंद्र मोदी ने उनके सम्मान में स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया। उन्होंने लेखिका डॉ. उषा उपाध्याय की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने गुजराती भाषा में प्रभुपाद के जीवन को प्रस्तुत कर उनके गहन विचारों को गुजरात की जनता तक पहुँचाया है।

प्रेरणादायक वैश्विक आध्यात्मिक यात्रा

‘ग्लोबल हरे कृष्णा मूवमेंट’ के सह-मार्गदर्शक एवं उपाध्यक्ष श्री चंचलापति दास ने बताया कि 70 वर्ष की आयु में श्रील प्रभुपाद मात्र 40 रुपये लेकर अमेरिका गए थे। समुद्री यात्रा के दौरान उन्हें दो बार हृदयाघात हुआ, फिर भी उन्होंने कठिनाइयों के बावजूद हरे कृष्ण महामंत्र का विश्वभर में प्रचार किया। उनके प्रयासों से दुनिया भर में 108 से अधिक कृष्ण मंदिर स्थापित हुए।

अक्षय पात्र फाउंडेशन की भूमिका

कार्यक्रम में अक्षय पात्र फाउंडेशन की सेवा पहलों का भी उल्लेख किया गया। वर्ष 2007 में, जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण चेतना सोसायटी (इस्कॉन) को राज्य में सेवा कार्य के लिए आमंत्रित किया और गांधीनगर में अक्षय पात्र की पहली रसोई का उद्घाटन किया। आज यह संस्था गुजरात में प्रतिदिन 5 लाख बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराती है, जबकि देशभर में लगभग 23.5 लाख बच्चों को प्रतिदिन भोजन प्रदान करती है। वक्ताओं ने कहा कि श्रील प्रभुपाद ने न केवल आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसार किया, बल्कि भोजन वितरण जैसे सेवा कार्यों के माध्यम से मानवता के प्रति करुणा और सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत किया।

दिल्ली में लागू होगी ‘राहवीर योजना’, जानें सबकुछ

दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में सड़क दुर्घटना पीड़ितों की सहायता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की ‘राह-वीर’ योजना लागू करने का निर्णय लिया है। इस योजना का उद्देश्य गंभीर रूप से घायल सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना और नागरिकों को उनकी मदद के लिए प्रोत्साहित करना है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की कि इस योजना के तहत जो भी व्यक्ति दुर्घटना पीड़ित की सहायता कर उसे शीघ्र अस्पताल पहुंचाने में मदद करेगा, उसे ₹25,000 की नकद पुरस्कार राशि तथा प्रशंसा प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह पहल ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान त्वरित सहायता सुनिश्चित कर अनेक जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

‘राह-वीर’ योजना का उद्देश्य

‘राह-वीर’ योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गंभीर रूप से घायल सड़क दुर्घटना पीड़ितों को ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर उपचार मिल सके। दुर्घटना के बाद का पहला घंटा जीवन बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सरकार का मानना है कि विशेषकर व्यस्त महानगरों जैसे दिल्ली में, जहां प्रतिदिन हजारों वाहन सड़कों पर चलते हैं, वहां त्वरित जनसहयोग से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

गुड समैरिटन के लिए कानूनी सुरक्षा

अक्सर लोग पुलिस पूछताछ या कानूनी झंझट के डर से दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने से हिचकते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए योजना में मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत ‘गुड समैरिटन’ प्रावधानों के अंतर्गत कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है। इससे मदद करने वाले व्यक्ति को अनावश्यक कानूनी परेशानियों से सुरक्षा मिलेगी।

सरकार को उम्मीद है कि आर्थिक प्रोत्साहन और कानूनी सुरक्षा मिलने से अधिक नागरिक घायल व्यक्तियों की सहायता के लिए आगे आएंगे।

‘राह-वीर’ योजना की प्रमुख विशेषताएँ

  • ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने पर ₹25,000 का पुरस्कार।
  • एक ही दुर्घटना में कई लोगों को बचाने पर भी अधिकतम पुरस्कार ₹25,000 ही रहेगा।
  • सहायता करने वाले व्यक्ति को प्रशंसा प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा।
  • हर वर्ष 10 उत्कृष्ट ‘राह-वीरों’ को ₹1 लाख का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया जाएगा।

यह पहल आपातकालीन परिस्थितियों में करुणा, सामाजिक जिम्मेदारी और समय पर चिकित्सा सहायता की संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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