कोर सेक्टर्स की ग्रोथ धीमी हुई, जनवरी में 4 फीसदी पर आई

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी कोर उद्योगों का सूचकांक (ICI) के अनुसार, जनवरी 2026 में भारत की आठ प्रमुख आधारभूत उद्योगों की वृद्धि दर 4% रही। यह दिसंबर 2025 के संशोधित 4.7% की तुलना में कम है। इस मंदी का प्रभाव व्यापक रहा और अधिकांश क्षेत्रों में क्रमिक (sequential) गिरावट देखी गई। हालांकि, स्टील और सीमेंट क्षेत्र निर्माण और अवसंरचना गतिविधियों के चलते मजबूत बने रहे।

जनवरी 2026: सेक्टरवार प्रदर्शन

मजबूत प्रदर्शन करने वाले क्षेत्र

  • सीमेंट: +10.7% (लगातार दो अंकों की वृद्धि)
  • स्टील: +9.9%
  • बिजली: +3.8%
  • उर्वरक: +3.7%
  • कोयला: +3.1%

कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्र

  • कच्चा तेल (Crude Oil): -5.8% (लगातार पाँचवाँ महीना गिरावट)
  • प्राकृतिक गैस: -5% (लगातार 19वाँ महीना नकारात्मक वृद्धि)

रिफाइनरी उत्पादों को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में दिसंबर की तुलना में वृद्धि दर में कमी दर्ज की गई।

इंडेक्स ऑफ कोर इंडस्ट्रीज (ICI) क्या है?

कोर उद्योगों का सूचकांक (ICI) आठ प्रमुख अवसंरचना क्षेत्रों के उत्पादन को मापता है—

  • कोयला
  • कच्चा तेल
  • प्राकृतिक गैस
  • रिफाइनरी उत्पाद
  • उर्वरक
  • स्टील
  • सीमेंट
  • बिजली

ये क्षेत्र मिलकर औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 40.27% का भार रखते हैं, इसलिए इन्हें औद्योगिक गतिविधि का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।

औद्योगिक उत्पादन अब भी मजबूत

  • कोर सेक्टर में नरमी के बावजूद, भारत का समग्र औद्योगिक उत्पादन (IIP) वर्ष-दर-वर्ष 7.8% की 26 महीनों की उच्चतम दर से बढ़ा।
  • यह वृद्धि विनिर्माण, खनन और बिजली उत्पादन में मजबूती के कारण संभव हुई।
  • वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल–जनवरी) के पहले दस महीनों में कोर सेक्टर की वृद्धि 2.8% रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 4.5% थी।

स्टील और सीमेंट में मजबूत वृद्धि के कारण

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, स्टील और सीमेंट की तेज वृद्धि के पीछे प्रमुख कारण हैं—

  • केंद्र सरकार द्वारा अवसंरचना व्यय में वृद्धि
  • राज्यों द्वारा पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में बढ़ती भागीदारी
  • आवास और रियल एस्टेट क्षेत्र में स्थिर मांग
  • निर्माण परियोजनाओं में लगातार गति

ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री Aditi Nayar ने इसे मजबूत निर्माण गतिविधि का संकेत बताया, हालांकि अन्य क्षेत्रों में नरमी दिखाई दे रही है।

सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के बाद ट्रंप ने 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा की

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को ट्रंप के नए टैरिफ को रद्द (Trump Tariff) कर दिया। इसके बाद ट्रंप ने मौजूदा इंपोर्ट ड्यूटी के ऊपर 10 परसेंट ग्लोबल टैरिफ ऑर्डर पर साइन किए। यह ऑर्डर करीब 5 महीने के लिए है, जिससे यूनाइटेड स्टेट्स के सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के बावजूद उनकी ट्रेड पॉलिसी में बढ़ोतरी का संकेत मिलता है। यह नया टैरिफ कब से लागू होगा कि इसकी नई तारीख भी सामने आ गई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने जो टैरिफ दुनिया के अलग-अलग देशों पर लगाए थे वो सब रद्द हो गए हैं। इससे पहले जो टैरिफ लगा करते थे वही टैरिफ लगेंगे। यानी ट्रंप के आने के पहले जो टैरिफ व्यवस्था थी, वही लागू होगा। भारत पर पहले 3 से 4 फीसदी का टैरिफ लगता था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने 10% वैश्विक टैरिफ क्यों घोषित किया?

  • सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से कहा कि राष्ट्रपति को IEEPA के तहत व्यापक वैश्विक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है।
  • यह फैसला 20 फरवरी 2026 को सुनाया गया।
  • फैसले की आलोचना करने के बाद ट्रंप ने Trade Act of 1974 की धारा 122 का सहारा लिया।
  • इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति 150 दिनों के लिए अधिकतम 15% तक अस्थायी टैरिफ लगा सकते हैं, यदि भुगतान संतुलन (Balance of Payments) या व्यापार घाटे की समस्या हो।
  • इसी कानून का उपयोग करते हुए ट्रंप ने सभी आयातों पर बिना भेदभाव के 10% टैरिफ लगाने की घोषणा की।
  • 150 दिनों से अधिक विस्तार के लिए कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होगी।

10% अमेरिकी आयात टैरिफ का क्या अर्थ है?

2026 का यह नया आयात टैरिफ मतलब है कि अमेरिका में आने वाले सभी सामानों पर अतिरिक्त 10% कर लगेगा। यह पहले से लागू टैरिफ के अतिरिक्त होगा, जैसे—

  • Section 232 टैरिफ (राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर)
  • Section 301 टैरिफ (अनुचित व्यापार प्रथाओं के आधार पर)

इससे अमेरिकी बाजार में आयातित वस्तुएँ महंगी हो जाएँगी।

  • अमेरिकी उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
  • निर्यातक देशों की प्रतिस्पर्धात्मकता घट सकती है।
  • यदि अन्य देश जवाबी टैरिफ लगाते हैं, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है।

भारत पर प्रभाव: कौन-कौन से क्षेत्र प्रभावित होंगे?

10% वैश्विक टैरिफ का असर भारतीय निर्यात पर भी पड़ेगा। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि भारत को कोई विशेष छूट नहीं मिलेगी।

प्रभावित होने वाले प्रमुख क्षेत्र—

  • वस्त्र और परिधान
  • इस्पात और धातु उत्पाद
  • इंजीनियरिंग सामान
  • ऑटो कंपोनेंट्स

पहले भी भारत पर अमेरिकी व्यापारिक उपायों के तहत 50% तक टैरिफ लगाया गया था, जिसे वार्ता के बाद लगभग 18% तक कम किया गया। अब नया 10% टैरिफ अतिरिक्त लागत दबाव पैदा करेगा। यदि अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे हो जाते हैं, तो निर्यात मांग घट सकती है, जिससे विनिर्माण और रोजगार पर असर पड़ सकता है।

व्यापक वैश्विक प्रभाव

  • यह कदम चीन, यूरोपीय संघ और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की ओर से जवाबी कार्रवाई को जन्म दे सकता है।
  • व्यापार युद्ध वैश्विक आर्थिक वृद्धि को धीमा कर सकते हैं और वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा सकते हैं।
  • अमेरिका पर निर्भर विकासशील देशों की मुद्रा पर दबाव बढ़ सकता है और व्यापार घाटा चौड़ा हो सकता है।

भारत के लिए यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण और मजबूत व्यापारिक साझेदारी की दिशा में प्रयास कर रहा है। यह कदम भारत को “मेक इन इंडिया” जैसे अभियानों के तहत घरेलू विनिर्माण को और तेज़ी से बढ़ावा देने के लिए प्रेरित कर सकता है।

मुख्य तथ्य (Static Facts)

  • घोषित टैरिफ: सभी आयात पर 10%
  • उपयोग किया गया कानूनी प्रावधान: Trade Act of 1974 की धारा 122
  • अधिकतम सीमा (धारा 122 के तहत): 150 दिनों के लिए 15%
  • सुप्रीम कोर्ट का फैसला: 20 फरवरी 2026
  • टैरिफ लागू होने की तिथि: 25 फरवरी 2026
  • पहले चुनौती दी गई कानूनी आधार: IEEPA

प्रसिद्ध बांग्ला लेखक शंकर का 93 वर्ष की आयु में निधन

प्रख्यात साहित्यकार मणिशंकर मुखोपाध्याय, जिन्हें साहित्य जगत शंकर के नाम से जानता है, का 93 वर्ष की आयु में 20 फरवरी 2026 को निधन हो गया। उनके जाने से केवल एक रचनाकार नहीं, बल्कि एक जीवंत युग, एक चलता-फिरता इतिहास और संवेदनाओं से भरी एक पूरी दुनिया जैसे थम गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि शंकर का निधन बंगाल की सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति है।

मणिशंकर मुखोपाध्याय: बंगाल के साहित्यिक दिग्गज

  • शंकर का जन्म हावड़ा में मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ।
  • अपने लंबे साहित्यिक करियर में उन्होंने लगभग 100 उपन्यास और लघु कथाएँ लिखीं।
  • उनकी रचनाओं ने स्वतंत्रता-उत्तरकालीन शहरी भारत के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तनों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
  • उनका निधन बंगाल की सांस्कृतिक दुनिया में गहरा शून्य छोड़ गया।
  • मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें साहित्य और समाज में उनके प्रभावशाली योगदान के लिए “अपरिवर्तनीय क्षति” बताया।

शंकर के प्रसिद्ध कार्य और फिल्म रूपांतरण

  • उनकी रचनाएँ सिमाबध्या और जन अरण्य को प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे ने 1971 और 1975 में प्रसिद्ध कैलकत्ता ट्रिलॉजी का हिस्सा बनाकर रूपांतरित किया।
  • इन फिल्मों में कॉर्पोरेट महत्वाकांक्षा, नैतिक समझौते और शहरी जीवन में जीवित रहने की चुनौतियों को चित्रित किया गया।
  • एक और प्रतिष्ठित उपन्यास चौरंगी को 1968 में पिनाकी भूषण मुखर्जीद्वारा निर्देशित एक महत्वपूर्ण बंगाली फिल्म में रूपांतरित किया गया, जिसमें उत्तम कुमार ने मुख्य भूमिका निभाई।
  • उनका उपन्यास मान सम्मान 1986 में बसु चटर्जी द्वारा निर्देशित हिंदी फिल्म शीशा में रूपांतरित हुआ।
  • इन रूपांतरणों ने शंकर के प्रभाव को साहित्य से परे मुख्यधारा के भारतीय सिनेमा तक बढ़ा दिया।

शंकर का संघर्ष और प्रारंभिक जीवन

  • बंगाली लेखक शंकर का जीवन संघर्ष और दृढ़ संकल्प से भरा रहा।
  • उन्होंने कम उम्र में अपने पिता को खो दिया और अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए कई नौकरियाँ कीं।
  • उन्होंने नोएल फ्रेडरिक बारवेल के अधीन कलकत्ता उच्च न्यायालय में क्लर्क के रूप में कार्य किया।
  • कठिनाइयों के बावजूद, उन्होंने रिपन कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की।
  • उनके वास्तविक जीवन के अनुभवों का उनके उपन्यासों पर गहरा प्रभाव पड़ा, जिनमें अक्सर कॉर्पोरेट और शहरी परिवेश में महत्वाकांक्षा, कठिनाइयाँ और नैतिक संघर्ष चित्रित किए गए।

पुरस्कार और अंतिम साहित्यिक योगदान

  • शंकर को उनके जीवनकाल में कई सम्मानों से नवाज़ा गया।
  • 2021 में उन्हें साहित्यिक योगदान के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • उनका अंतिम प्रमुख साहित्यिक प्रोजेक्ट स्वामी विवेकानंद पर आधारित एक शोध-आधारित पुस्तक थी, जो उनकी दर्शन और आध्यात्म में रुचि को दर्शाता है।

शंकर की बांग्ला साहित्य में विरासत

शंकर के उपन्यासों ने आधुनिक बांग्ला कहानी कहने की शैली को पुनः आकार दिया—

  • कॉर्पोरेट और नौकरशाही भारत को उजागर करना
  • शहरी जीवन में नैतिक संघर्षों का अन्वेषण
  • मजबूत और बहुपरत पात्रों का निर्माण
  • साहित्य और सिनेमा के बीच पुल का निर्माण
  • उनकी रचनाएँ आज भी अकादमिक चर्चाओं का हिस्सा हैं और समकालीन लेखकों को प्रभावित करती हैं।

भारतीय साहित्य में योगदान

  • शंकर की रचनाएँ स्वतंत्रता-उत्तरकालीन भारतीय साहित्य की वह धारा हैं, जिसने शहरी परिवर्तन का विश्लेषण किया।
  • उनके यथार्थवादी कथानक ने कोलकाता और उसके बाहर सामाजिक और आर्थिक बदलावों का दस्तावेजीकरण किया।
  • उपन्यासों के माध्यम से उन्होंने आकांक्षाओं, वर्गीय गतिशीलता और तेजी से आधुनिक हो रही समाज में नैतिक समझौतों को दर्ज किया।

01 अप्रैल 2026 से नेशनल हाईवे पर नकद टोल बंद करने की तैयारी

देश में पूरी तरह डिजिटल नेशनल हाइवे टोलिंग सिस्टम विकसित करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण 1 अप्रैल 2026 से राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह बंद करने पर विचार कर रहा है। यह व्यवस्था लागू होने के बाद सभी टोल भुगतान केवल डिजिटल माध्यमों- FASTag या यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI)- के जरिए किए जाएंगे।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अनुसार, अब देशभर में सभी टोल भुगतान केवल डिजिटल माध्यमों जैसे FASTag और UPI (Unified Payments Interface) के माध्यम से ही किए जाएंगे। इस कदम का उद्देश्य संचालन क्षमता बढ़ाना, जाम कम करना और टोल लेनदेन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

टोल plazas पर नकद भुगतान क्यों बंद किया जा रहा है?

इस निर्णय के पीछे कई उद्देश्य हैं—

1. तेज़ यातायात प्रवाह

डिजिटल भुगतान लेन की गति बढ़ाता है, जिससे वाहन टोल plazas पर जल्दी से गुजर सकते हैं।

2. भीड़ और जाम कम करना

नकद लेनदेन टोल प्रक्रिया को धीमा करता है। कैशलेस प्रणाली लंबी कतार और इंतजार के समय को कम करती है।

3. पारदर्शिता बढ़ाना

डिजिटल लेनदेन बेहतर निगरानी सुनिश्चित करते हैं, राजस्व हेरफेर को कम करते हैं और जवाबदेही में सुधार करते हैं।

4. उपयोगकर्ता अनुभव में सुधार

सुगम डिजिटल भुगतान के साथ यात्रियों को राजमार्गों पर यात्रा के दौरान अधिक सहज अनुभव मिलेगा।

1 अप्रैल से स्वीकार किए जाने वाले डिजिटल माध्यम

  • FASTag: रेडियो फ़्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) आधारित ऑटोमैटिक टोल कटौती प्रणाली।
  • UPI (एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस)

अधिकांश वाहनों के लिए FASTag पहले से अनिवार्य है, लेकिन अब यह पूरी तरह से अनिवार्य हो जाएगा, जिससे नकद और डिजिटल दोनों लेन के हाइब्रिड मॉडल को समाप्त किया जा रहा है।

राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेसवे पर प्रभाव

भारत में वर्तमान में 1,150 से अधिक टोल plazas हैं।
पूर्ण डिजिटल टोलिंग संक्रमण से अपेक्षित लाभ—

  • यातायात प्रबंधन में सुधार
  • देरी कम होना
  • सड़क सुरक्षा में वृद्धि
  • परिवहन में डिजिटल अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण

यह परिवर्तन भारत की डिजिटल इंडिया पहल और स्मार्ट मोबिलिटी समाधान की दिशा में सामंजस्यपूर्ण कदम है।

FASTag क्या है?

FASTag एक इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली है, जो RFID तकनीक का उपयोग करती है। यह वाहन से जुड़े प्रीपेड खाते से टोल शुल्क स्वचालित रूप से कटता है।

लाभ

  • टोल plazas पर रुकने की आवश्यकता नहीं
  • स्वचालित भुगतान कटौती
  • लेनदेन पर SMS अलर्ट
  • कम इंजन आइडलिंग के कारण ईंधन की बचत

NHAI और डिजिटल टोलिंग

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का संचालन और प्रबंधन करता है। पिछले दशक में, इसने दक्षता बढ़ाने और मैनुअल हस्तक्षेप कम करने के लिए डिजिटल टोलिंग प्रणाली क्रमिक रूप से लागू की। 2019 में FASTag का राष्ट्रीय स्तर पर रोलआउट शुरू हुआ, और यह नवीनतम कदम टोल संग्रह की पूर्ण डिजिटलकरण प्रक्रिया का अंतिम चरण है।

अरुणाचल प्रदेश स्थापना दिवस 2026: गौरव, संस्कृति और प्रगति

अरुणाचल प्रदेश स्थापना दिवस 2026 (Arunachal Pradesh Foundation Day 2026) 20 फरवरी को मनाया जाएगा। यह दिन वर्ष 1987 में अरुणाचल प्रदेश के भारत के 24वें राज्य के रूप में गठन की स्मृति में मनाया जाता है। “उगते सूरज की भूमि” (Land of the Rising Sun) के नाम से प्रसिद्ध अरुणाचल प्रदेश भारत का वह पहला क्षेत्र है जहाँ सबसे पहले सूर्य की किरणें पहुँचती हैं। देश के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित यह राज्य भूटान, चीन और म्यांमार के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ साझा करता है। अरुणाचल प्रदेश स्थापना दिवस 2026 राज्य के सामरिक महत्व, सांस्कृतिक विविधता और केंद्र शासित प्रदेश से पूर्ण राज्य बनने की ऐतिहासिक यात्रा को रेखांकित करता है।

अरुणाचल प्रदेश स्थापना दिवस 2026: तिथि और परिचय

  • तिथि: शुक्रवार, 20 फरवरी 2026
  • यह दिन 1987 में केंद्र शासित प्रदेश से पूर्ण राज्य बनने की स्मृति में मनाया जाता है।
  • राजधानी: ईटानगर
  • वर्तमान में राज्य में 26 जिले हैं।

इस अवसर पर आधिकारिक समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम, परेड और जनसभाएँ आयोजित की जाती हैं, जिनमें राज्य की विरासत और उपलब्धियों का उत्सव मनाया जाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

प्रमुख घटनाएँ

  • 1826: यांडाबू की संधि के बाद प्रथम आंग्ल-बर्मी युद्ध के पश्चात क्षेत्र ब्रिटिश नियंत्रण में आया।
  • 1914: शिमला समझौते के तहत तिब्बत और नेफा (NEFA) के बीच मैकमोहन रेखा निर्धारित की गई।
  • 1947: स्वतंत्रता के बाद नेफा असम प्रशासन के अधीन आया।
  • 1972: नेफा का नाम बदलकर अरुणाचल प्रदेश रखा गया और इसे केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला।
  • 1987: 55वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1986 के तहत “अरुणाचल प्रदेश राज्य अधिनियम” के माध्यम से यह भारत का 24वां राज्य बना।

यह परिवर्तन प्रशासनिक विकास और राजनीतिक आकांक्षाओं की लंबी प्रक्रिया का परिणाम था।

स्थापना दिवस का महत्व

  • अरुणाचल प्रदेश स्थापना दिवस गर्व और आत्मचिंतन का दिन है।
  • यह स्वशासन के लिए लोगों के संघर्ष और आकांक्षाओं का सम्मान करता है।
  • आधारभूत संरचना, शिक्षा, पर्यटन और संपर्क क्षेत्र में हुई प्रगति का उत्सव मनाता है।
  • अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के कारण राज्य भारत की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • यह विविध जनजातीय समुदायों के बीच एकता को मजबूत करता है।

सांस्कृतिक उत्सव और परंपराएँ

  • इस दिन राज्य की 26 प्रमुख जनजातियों और 100 से अधिक उप-जनजातियों की समृद्ध संस्कृति प्रदर्शित की जाती है।
  • पारंपरिक नृत्य और लोक संगीत
  • सांस्कृतिक प्रदर्शनी
  • विकास संबंधी उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर भाषण
  • राज्य के प्रमुख त्योहार जैसे लोसार, सोलुंग, और न्योकुम इसकी जीवंत सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं।
  • यह उत्सव अरुणाचल प्रदेश की पहचान को एक सांस्कृतिक रूप से विविध और प्राकृतिक संपदा से समृद्ध राज्य के रूप में सुदृढ़ करता है।

भारत एआई शिखर सम्मेलन 2026 में ‘नई दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट प्रतिबद्धताएँ’ लॉन्च

भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने “न्यू दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट कमिटमेंट्स” की घोषणा की। यह पहल अग्रणी वैश्विक एआई कंपनियों और भारत के घरेलू नवोन्मेषकों को एक साथ लाती है, जिसका उद्देश्य समावेशी, बहुभाषी और जिम्मेदार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को बढ़ावा देना है। इन प्रतिबद्धताओं का लक्ष्य मानव सुरक्षा, समानता और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को एआई विकास के केंद्र में रखना है।

भारत की एआई रणनीति: लोकतंत्रीकरण, विस्तार और संप्रभुता

अश्विनी वैष्णव ने भारत की एआई रणनीति को तीन स्तंभों पर आधारित बताया—

  1. प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण
  2. जनसंख्या स्तर पर तैनाती
  3. एआई प्रणालियों में राष्ट्रीय संप्रभुता

उन्होंने बताया कि भारत एआई स्टैक की सभी पाँच परतों पर काम कर रहा है—

  • एप्लिकेशन
  • मॉडल
  • कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर
  • प्रतिभा विकास
  • ऊर्जा समर्थन

मुख्य ध्यान स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं में एआई के वास्तविक उपयोग पर है।

न्यू दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट कमिटमेंट्स क्या हैं?

यह प्रतिबद्धताएँ वैश्विक और भारतीय एआई कंपनियों द्वारा की गई स्वैच्छिक सहयोगात्मक घोषणाएँ हैं।

भाग लेने वाले भारतीय संगठनों में शामिल हैं—

  • Sarvam AI
  • BharatGen
  • Gnani.ai
  • Soket AI

इनके साथ अग्रणी वैश्विक एआई कंपनियाँ भी शामिल हैं, ताकि सांस्कृतिक विविधता और समानता के अनुरूप जिम्मेदार एआई को बढ़ावा दिया जा सके।

प्रतिबद्धता 1: वास्तविक दुनिया में एआई उपयोग की समझ को बढ़ाना

पहली प्रतिबद्धता का उद्देश्य वास्तविक एआई उपयोग से संबंधित अनाम और समेकित (aggregated) डेटा आधारित अंतर्दृष्टि विकसित करना है।

मुख्य लक्ष्य—

  • एआई का रोजगार और कौशल पर प्रभाव का अध्ययन
  • उत्पादकता में वृद्धि का विश्लेषण
  • डेटा-आधारित नीति निर्माण को समर्थन
  • आर्थिक परिवर्तन के रुझानों का आकलन

इस पहल का उद्देश्य सरकारों को एआई शासन (AI Governance) के लिए सूचित रणनीतियाँ विकसित करने में सहायता देना है।

प्रतिबद्धता 2: बहुभाषी और संदर्भ-संवेदी एआई को मजबूत करना

दूसरी प्रतिबद्धता बहुभाषी और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील एआई प्रणालियों पर केंद्रित है।

सहभागी संगठन—

  • कम प्रतिनिधित्व वाली भाषाओं में डेटा सेट विकसित करेंगे
  • विभिन्न संस्कृतियों के लिए मूल्यांकन मानक बनाएंगे
  • संदर्भ-आधारित एआई प्रदर्शन में सुधार करेंगे
  • उपकरणों और पद्धतियों में लचीलापन बनाए रखेंगे

यह कदम विशेष रूप से ग्लोबल साउथ में एआई की पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने के लिए महत्वपूर्ण है, जहाँ भाषाई विविधता अधिक है।

ये एआई प्रतिबद्धताएँ वैश्विक स्तर पर क्यों महत्वपूर्ण हैं?

न्यू दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट कमिटमेंट्स का उद्देश्य—

  • एआई विकास को समावेशी बनाना
  • नैतिक और जिम्मेदार एआई को बढ़ावा देना
  • बहुभाषी प्रणालियों में पूर्वाग्रह कम करना
  • विश्वभर में समान एआई पहुंच सुनिश्चित करना

भारत स्वयं को “मनुष्यों के लिए, मनुष्यों द्वारा, मनुष्यों का एआई” के समर्थक नेता के रूप में स्थापित कर रहा है।

भारत का एआई स्टैक दृष्टिकोण

भारत का एआई स्टैक पाँच एकीकृत परतों को शामिल करता है—

  • नागरिकों के लिए एप्लिकेशन
  • नवाचार के लिए एआई मॉडल
  • विस्तार के लिए कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर
  • स्थिरता के लिए कुशल प्रतिभा
  • लचीलापन के लिए ऊर्जा क्षमता

इन सभी स्तरों पर क्षमता निर्माण कर भारत बाहरी निर्भरता से बचते हुए समावेशी डिजिटल विकास को बढ़ावा देना चाहता है।

मुख्य बिंदु

  • कार्यक्रम: इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026
  • घोषणा: न्यू दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट कमिटमेंट्स
  • घोषणा करने वाले: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव
  • फोकस क्षेत्र: वास्तविक एआई उपयोग, बहुभाषी एआई मूल्यांकन
  • एआई स्टैक परतें: एप्लिकेशन, मॉडल, कंप्यूट, प्रतिभा, ऊर्जा
  • भारतीय सहभागी कंपनियाँ: Sarvam AI, BharatGen, Gnani.ai, Soket AI

2026 का बिजनेस माइलस्टोन: राजस्व की दौड़ में अमेज़न ने वॉलमार्ट को पीछे छोड़ा

वर्ष 2026 में एक ऐतिहासिक कॉर्पोरेट उपलब्धि दर्ज हुई, जब Amazon ने वार्षिक राजस्व के आधार पर Walmart को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी का स्थान हासिल कर लिया। अमेज़न ने वित्त वर्ष 2025 में 717 अरब डॉलर का राजस्व दर्ज किया, जबकि वॉलमार्ट का राजस्व 31 जनवरी 2026 को समाप्त 12 महीनों में 713.2 अरब डॉलर रहा। वॉलमार्ट एक दशक से अधिक समय तक वैश्विक राजस्व सूची में शीर्ष पर रहा था।

2025 का राजस्व तुलना: Amazon बनाम Walmart

  • Amazon: 717 अरब डॉलर (FY 2025)
  • Walmart: 713.2 अरब डॉलर (31 जनवरी 2026 तक)
  • यह अंतर भले ही मामूली दिखे, लेकिन वैश्विक कॉर्पोरेट परिदृश्य में यह एक बड़ा बदलाव दर्शाता है।

अमेज़न शीर्ष पर कैसे पहुँचा?

1994 में Jeff Bezos द्वारा एक ऑनलाइन बुकस्टोर के रूप में स्थापित अमेज़न ने समय के साथ कई क्षेत्रों में आक्रामक विस्तार किया।

प्रमुख विकास कारक

  • ई-कॉमर्स का व्यापक विस्तार
  • Amazon Web Services (AWS) की तेज़ वृद्धि
  • एआई-संचालित डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर
  • वैश्विक स्तर पर डिजिटल उपभोक्ता रुझान

पिछले दशक में अमेज़न की राजस्व वृद्धि दर वॉलमार्ट की तुलना में लगभग 10 गुना तेज रही।

AWS और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका

अमेज़न की सफलता में उसके क्लाउड कंप्यूटिंग डिवीजन Amazon Web Services (AWS) की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

यदि AWS को अलग कर दिया जाए—

  • 2025 में अमेज़न का राजस्व केवल 588 अरब डॉलर होता।

इससे स्पष्ट है कि अमेज़न की बढ़त का मुख्य आधार है—

  • एआई युग में डेटा सेंटर की मांग
  • क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर सेवाएँ
  • एंटरप्राइज़ डिजिटल परिवर्तन

वॉलमार्ट क्लाउड कंप्यूटिंग क्षेत्र में सक्रिय नहीं है, जिससे अमेज़न को रणनीतिक लाभ मिला।

रिटेल मुकाबला: भौतिक बनाम डिजिटल

  • अमेज़न को प्रति माह लगभग 2.7 अरब वेबसाइट और ऐप विज़िट मिलती हैं।
  • वॉलमार्ट के पास विश्वभर में 10,000 से अधिक स्टोर और शॉपिंग क्लब हैं।

रोचक तथ्य:

  • वॉलमार्ट ई-कॉमर्स में तेजी से सुधार कर रहा है।
  • अमेज़न ने 2017 में Whole Foods Market का अधिग्रहण किया, लेकिन भौतिक रिटेल विस्तार में अपेक्षाकृत धीमा रहा।

इससे स्पष्ट होता है कि अमेज़न की राजस्व जीत केवल रिटेल नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी-चालित वृद्धि का परिणाम है।

बाज़ार मूल्य बनाम राजस्व

सबसे अधिक राजस्व होना, सबसे अधिक मूल्यवान कंपनी होने के समान नहीं है।

वर्तमान में—

  • Nvidia लगभग 4.5 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी है।
  • अमेज़न का बाज़ार मूल्य Nvidia से आधे से भी कम है।
  • वॉलमार्ट का मूल्यांकन इससे काफी कम है।

इसलिए राजस्व नेतृत्व कंपनी के पैमाने (scale) को दर्शाता है, न कि अनिवार्य रूप से लाभप्रदता या बाज़ार पूंजीकरण को।

जेफ बेजोस और वैश्विक संपत्ति रैंकिंग

  • Jeff Bezos ने 2017 में Bill Gates को पीछे छोड़कर दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति का स्थान प्राप्त किया था।
  • वर्तमान में वे लगभग 228 अरब डॉलर की अनुमानित संपत्ति के साथ वैश्विक सूची में चौथे स्थान पर हैं, जिनकी अधिकांश संपत्ति अमेज़न के शेयरों से जुड़ी है।

IPC ने प्रतिबंध हटाया: रूसी और बेलारूसी खिलाड़ी मिलान-कोर्टिना 2026 में भाग लेंगे

कई वर्षों के प्रतिबंधों के बाद, अंतर्राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति (IPC) ने आधिकारिक रूप से मिलान-कोर्टिना 2026 शीतकालीन पैरालंपिक के लिए रूसी खिलाड़ियों पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है। अब रूस और बेलारूस के खिलाड़ी अपने राष्ट्रीय ध्वज के तहत प्रतिस्पर्धा करेंगे, और यदि वे पदक जीतते हैं तो उनके राष्ट्रीय गान भी बजाए जाएंगे।

यह 2022 के बाद एक बड़ा बदलाव है, जब यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई के कारण रूस पर प्रतिबंध लगाया गया था। तब से रूस और बेलारूस के खिलाड़ी केवल तटस्थ (Neutral) प्रतिभागियों के रूप में बिना राष्ट्रीय प्रतीकों के भाग ले सकते थे।

मिलान-कोर्टिना 2026 के लिए कोटा स्लॉट की पुष्टि

आईपीसी ने एथलीट कोटा वितरण की स्पष्ट घोषणा की है।

रूस के लिए पुष्टि किए गए स्लॉट

  • कुल: 6 खिलाड़ी
  • 2 – पैरा-अल्पाइन स्कीइंग (1 पुरुष, 1 महिला)
  • 2 – पैरा-क्रॉस कंट्री स्कीइंग (1 पुरुष, 1 महिला)
  • 2 – पैरा-स्नोबोर्ड (दोनों पुरुष)

बेलारूस के लिए पुष्टि किए गए स्लॉट

  • कुल: 4 खिलाड़ी
  • सभी क्रॉस-कंट्री स्कीइंग में (1 पुरुष, 3 महिलाएँ)

अधिकारियों ने पुष्टि की कि इन खिलाड़ियों को अन्य देशों के खिलाड़ियों की तरह ही माना जाएगा, जिसमें ध्वज प्रदर्शन और पदक समारोह में राष्ट्रीय गान शामिल है।

प्रतिबंध क्यों लगाया गया था?

रूस पर लगे प्रतिबंध दो प्रमुख कारणों से जुड़े थे—

  • 2014 सोची ओलंपिक के बाद सामने आया राज्य-प्रायोजित डोपिंग घोटाला।
  • 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष, जिसे ओलंपिक संघर्षविराम (Olympic Truce) के उल्लंघन के रूप में देखा गया।
  • इसके बाद से रूस की भागीदारी कई अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में सीमित या तटस्थ रूप में रही।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह निर्णय केवल पैरालंपिक खेलों पर लागू होता है। 2026 शीतकालीन ओलंपिक के लिए प्रतिबंध अलग हैं।

मिलान-कोर्टिना 2026 में नजर रखने योग्य खिलाड़ी

एलेक्सी बुगाएव: तीन बार के पैरालंपिक अल्पाइन स्कीइंग चैंपियन और रूस के सबसे सफल शीतकालीन खिलाड़ियों में से एक।

इवान गोलुबकोव और अनास्तासिया बागियन: दोनों क्रॉस-कंट्री स्कीइंग में मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं और पदक की संभावनाएँ रखते हैं।

व्लादिमीर सेमिरुन्नी का संघ परिवर्तन

व्लादिमीर सेमिरुनिय ने अलग रास्ता अपनाया—

  • येकातेरिनबर्ग में जन्म
  • 2023 में पोलैंड स्थानांतरित
  • 2025 में आधिकारिक रूप से संघ परिवर्तन
  • अंतरराष्ट्रीय स्केटिंग संघ द्वारा 14 महीने का प्रतिबंध

हाल ही में उन्होंने मिलान में पुरुषों की 10,000 मीटर स्पर्धा में रजत पदक जीता, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि कुछ खिलाड़ियों ने प्रतिबंधों के बीच अलग रणनीति अपनाई।

इस निर्णय का वैश्विक खेलों पर प्रभाव

आईपीसी का यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में व्यापक बहस को जन्म देता है—

  • क्या खिलाड़ियों को राजनीतिक संघर्षों से अलग रखा जाना चाहिए?
  • क्या वैश्विक खेल राजनीति से स्वतंत्र रह सकते हैं?
  • अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाएँ निष्पक्षता और जवाबदेही के बीच संतुलन कैसे बनाएँ?

2026 शीतकालीन पैरालंपिक के लिए यह निर्णय एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।

शीतकालीन पैरालंपिक के बारे में

शीतकालीन पैरालंपिक दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए आयोजित अंतरराष्ट्रीय बहु-खेल प्रतियोगिता है, जो हर चार वर्ष में आयोजित होती है।

मुख्य प्रतियोगिताएँ—

  • अल्पाइन स्कीइंग
  • क्रॉस-कंट्री स्कीइंग
  • स्नोबोर्ड
  • बायथलॉन

2026 संस्करण का आयोजन इटली के मिलान और कॉर्टिना डी’एम्पेज़ो में होगा।

विश्व में भूख से लड़ने के लिए दो लाख टन चावल आपूर्ति करेगा भारत

भारत दुनियाभर में चल रहे मानवीय कार्यों के लिए दो लाख टन टूटे चावल की आपूर्ति करेगा। भूख से लड़ने के मकसद पांच साल के दौरान यह आपूर्ति की जाएगी। इस संबंध में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के बीच करार पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के तहत अवधि को आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है और कीमत भी हर साल आम सहमति से तय की जाएगी। 31 मार्च, 2026 तक के लिए कीमत प्रति क्विंटल 2,800 रुपये तय की गई है।

भारत की वैश्विक खाद्य सुरक्षा प्रतिबद्धता

खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि डब्ल्यूईएफपी के साथ साझेदारी के जरिये हम भूख से जूझ रहे लोगों को उम्मीद, पोषण और सम्मान दे रहे हैं। यह समझौता भारत की इस प्रतिबद्धता को दिखाता है कि कोई भी भूखा न रहे। भारत कुपोषण और खाने की कमी से लड़ने में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ खड़ा रहेगा। डब्ल्यूएफपी के उप कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ ने कहा कि भारत के साथ यह समझौता वैश्विक स्तर पर भूख से लड़ने में एक अहम पड़ाव है। भारत का सहयोग डब्ल्यूएफपी को अगले पांच वर्षों में कमज़ोर आबादी तक ज्यादा असरदार तरीके से पौष्टिक खाना पहुंचाने में मदद करेगा।

वैश्विक एकजुटता के समर्थक

स्काउ ने कहा कि एक बड़े खेती-बाड़ी वाले देश और वैश्विक एकजुटता के समर्थक के तौर पर, भारत हमें जीरो हंगर के लक्ष्य को एक्शन में बदलने के लिए प्रेरित करता है। हम इस बदलाव लाने वाली साझेदारी के लिए भारत को धन्यवाद देते हैं। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

डब्ल्यूएफपी के साथ सहयोग

दुनिया भर में मानवीय जरूरतों को पूरा करने में डब्ल्यूएफपी के साथ सहयोग को मजबूत करती है और वैश्विक खाद्य प्रणाली में एक भरोसेमंद और जिम्मेदार योगदानकर्ता के तौर पर भारत की भूमिका को मजबूत करती है।

वैश्विक कूटनीतिक पहल के बीच भारत ट्रंप के गाज़ा शांति बोर्ड में पर्यवेक्षक के रूप में शामिल

भारत ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आयोजित गाज़ा पुनर्निर्माण और स्थिरीकरण पर केंद्रित प्रथम “बोर्ड ऑफ पीस” बैठक में एक पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया।वॉशिंगटन डीसी में भारत का प्रतिनिधित्व उप मिशन प्रमुख नामग्या सी खम्पा ने किया। इस बैठक में 40 से अधिक देशों और यूरोपीय संघ ने भाग लिया।

हालांकि भारत बोर्ड का औपचारिक सदस्य नहीं बना, लेकिन उसकी उपस्थिति गाज़ा संघर्ष और क्षेत्रीय शांति प्रयासों से जुड़े विकसित हो रहे कूटनीतिक प्रयासों में उसकी सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है।

ट्रंप का “गाज़ा बोर्ड ऑफ पीस” क्या है?

डोनाल्ड ट्रंप ने इस बोर्ड का गठन निम्न उद्देश्यों से किया—

  • गाज़ा के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना
  • एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (Stabilisation Force) को संगठित करना
  • संरचित शांति ढांचा (Structured Peace Framework) को बढ़ावा देना

यह बैठक डोनाल्ड जे. ट्रम्प शांति संस्थान में आयोजित की गई, जिसमें यूरोप, एशिया और मध्य-पूर्व के नेता शामिल हुए।

पर्यवेक्षक के रूप में भारत की भूमिका

भारत ने बोर्ड का सदस्य बनने के बजाय पर्यवेक्षक के रूप में भाग लेने का निर्णय लिया। अन्य पर्यवेक्षक देशों में शामिल थे—

  • जर्मनी
  • इटली
  • नॉर्वे
  • स्विट्ज़रलैंड
  • यूनाइटेड किंगडम

भारत की यह भागीदारी इज़राइल-फिलिस्तीन मुद्दे पर उसकी संतुलित और सावधानीपूर्ण कूटनीतिक नीति को दर्शाती है, जिसमें वह औपचारिक पक्षधरता से बचते हुए संवाद में शामिल रहता है।

भारत-पाकिस्तान युद्धविराम पर ट्रंप की टिप्पणी

  • बैठक के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा दोहराया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच पूर्व संघर्ष को व्यापार शुल्क (टैरिफ) की धमकी देकर रुकवाया था।
  • उन्होंने कहा कि यदि दोनों देश शत्रुता समाप्त नहीं करते, तो वे 200% टैरिफ लगा सकते थे।
  • हालांकि भारत ने आधिकारिक रूप से इस दावे को खारिज किया है। भारत का कहना है कि सैन्य तनाव में कमी दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMOs) के बीच प्रत्यक्ष वार्ता के बाद हुई थी।

पाकिस्तान की भागीदारी

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif इस बैठक में बोर्ड सदस्य के रूप में शामिल हुए।

ट्रंप ने कार्यक्रम के दौरान शरीफ और पाकिस्तान की सैन्य नेतृत्व की सराहना की।
यह दक्षिण एशिया से जुड़ी भू-राजनीतिक संवेदनशीलताओं को भी उजागर करता है।

वैश्विक भागीदारी और गाज़ा पुनर्निर्माण एजेंडा

40 से अधिक देशों और यूरोपीय संघ ने भागीदारी की पुष्टि की। मुख्य एजेंडा बिंदु थे—

  • गाज़ा में युद्धोत्तर पुनर्निर्माण
  • स्थिरीकरण एवं शांति स्थापना तंत्र
  • अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संसाधनों का संकलन

यह पहल गाज़ा में दीर्घकालिक स्थिरता के लिए व्यापक शांति योजना का हिस्सा बताई जा रही है।

गाज़ा पर भारत की कूटनीतिक नीति

भारत परंपरागत रूप से समर्थन करता है—

  • दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution)
  • शांतिपूर्ण संवाद
  • मानवीय सहायता

पर्यवेक्षक के रूप में भाग लेकर भारत ने पश्चिम एशिया की राजनीति में अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए कूटनीतिक संवाद में सक्रिय सहभागिता दिखाई है।

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