रेलवे हुआ स्मार्ट! शिकायत निवारण और भीड़ प्रबंधन के लिए एआई-सक्षम ऐप्स की शुरुआत

भारतीय रेलवे ने शिकायत निवारण, टिकट कन्फर्मेशन की भविष्यवाणी, हाउसकीपिंग सेवाओं और भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए सात प्रमुख यात्री-उन्मुख एप्लिकेशनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को एकीकृत किया है। इस पहल का नेतृत्व रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (CRIS) ने किया, जिसे नई दिल्ली में आयोजित AI India Summit 2026 के दौरान प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। इन नए एआई-सक्षम ऐप्स का उद्देश्य देशभर में यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना, शिकायतों का त्वरित समाधान करना और ट्रेन संचालन को अधिक कुशल बनाना है।

RailMadad और RailOne में एआई: स्मार्ट यात्री सेवाएँ

Indian Railways के एआई-सक्षम ऐप्स में अब कई उन्नत सुविधाएँ शामिल की गई हैं, जो यात्री सेवाओं को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाती हैं।

  • RailMadad – एआई शिकायतों को उनकी तात्कालिकता और प्रकार के आधार पर वर्गीकृत कर प्राथमिकता तय करता है।
  • RailOne – प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) वाले टिकट की कन्फर्मेशन प्रतिशत का अधिक सटीक पूर्वानुमान लगाता है।
  • Coach Mitra – ऑनबोर्ड हाउसकीपिंग सेवाओं में एआई सहायता प्रदान करता है (वर्तमान में 74 ट्रेनों में संचालित)।

G V L Satya Kumar, प्रबंध निदेशक, Centre for Railway Information Systems (CRIS) के अनुसार, RailMadad में एआई शिकायत रुझानों की पहचान करने और यात्रियों की भावनाओं (Sentiment Analysis) का आकलन करने में भी सक्षम है।

इसके अतिरिक्त, Bhashini के साथ एकीकरण से 12 भाषाओं में वॉइस-टू-टेक्स्ट सुविधा उपलब्ध हुई है, जिससे बहुभाषी शिकायत दर्ज करना अधिक सुलभ और आसान हो गया है।

CRIS ने 15 और सिस्टम में एआई एकीकरण बढ़ाया

रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (CRIS), जो भारतीय रेल का तकनीकी अंग है, अब 15 अतिरिक्त प्रणालियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल कर रहा है।

इनमें प्रमुख सिस्टम शामिल हैं—

  • अनुकूलित और स्वचालित लोको लिंक का निर्माण (GOAL)
  • कोचिंग क्रू लिंक प्रबंधन प्रणाली (CCLMS)
  • ट्रैक प्रबंधन प्रणाली

इन उन्नयनों का उद्देश्य माल ढुलाई (फ्रेट) की दक्षता बढ़ाना, ट्रेन संचालन को अधिक सुचारु बनाना तथा सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करना है। यह कदम भारतीय रेलवे के डिजिटल परिवर्तन और स्मार्ट प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रेलवे भीड़ प्रबंधन और बॉटलनेक पूर्वानुमान में एआई

Indian Railways ने भीड़ प्रबंधन के लिए एक उन्नत एआई आधारित प्रणाली विकसित की है, जो रेलवे संचालन में एक बड़ा नवाचार मानी जा रही है।

यह प्रणाली निम्न डेटा को एकीकृत करेगी—

  • आरक्षित टिकटिंग डेटा
  • अनारक्षित टिकटिंग डेटा
  • ट्रेन मूवमेंट डेटा

एआई प्रति घंटे के आधार पर यह अनुमान लगाएगा कि किस प्लेटफॉर्म पर अधिक भीड़ होने की संभावना है। टिकट खरीद के समय (टाइमस्टैम्प) को ट्रेन शेड्यूल के साथ जोड़कर यात्रियों की आवाजाही (फुटफॉल) का घनत्व मानचित्रित किया जाएगा।

महत्वपूर्ण रूप से, यह प्रणाली स्टेशन के प्रवेश द्वारों और फुट ओवर ब्रिज पर संभावित भीड़भाड़ (बॉटलनेक) की पहले से पहचान करेगी, ताकि जाम की स्थिति बनने से पहले ही प्रबंधन किया जा सके।

साथ ही, यह पूर्वानुमान निम्न परिस्थितियों के अनुसार समायोजित किया जाएगा—

  • त्योहार
  • विशेष कार्यक्रम
  • वीकेंड यात्रा में वृद्धि

यह सक्रिय (Proactive) दृष्टिकोण यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा और दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में सहायक होगा।

प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस और सुरक्षा में एआई

  • रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (CRIS) ऐतिहासिक विफलता (Failure) डेटा के आधार पर एआई-आधारित घटना पूर्वानुमान मॉडल विकसित कर रहा है।
  • अब मरम्मत केवल खराबी आने के बाद (Reactive Maintenance) नहीं, बल्कि पहले से अनुमान (Predictive Maintenance) के आधार पर की जाएगी। यह प्रणाली ट्रैक, लोकोमोटिव, वैगन और सिग्नलिंग सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की अग्रिम पहचान कर सकेगी कि कहाँ मरम्मत की आवश्यकता है।
  • इस बदलाव से रेलवे सुरक्षा में वृद्धि होगी और संचालन में होने वाली बाधाएँ कम होंगी।

GST डेटा से माल ढुलाई में बढ़ोतरी

  • भारतीय रेल अब जीएसटी डेटा का उपयोग कर देशभर में वस्तुओं की आवाजाही का विश्लेषण कर रहा है।
  • एआई की सहायता से लगभग 300 संभावित फ्रेट क्लस्टर पहचाने गए हैं, जहाँ रेलवे अपनी माल सेवाओं का विस्तार कर सकता है।
  • इस पहल का उद्देश्य सड़क परिवहन से रेल परिवहन की ओर माल ढुलाई को प्रोत्साहित करना, दक्षता बढ़ाना और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • भारतीय रेलवे का तकनीकी अंग: रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (CRIS)
  • घोषणा का मंच: AI India Summit 2026
  • एआई-सक्षम ऐप्स: RailMadad, RailOne, Coach Mitra
  • Bhashini के माध्यम से समर्थित भाषाएँ: 12
  • पहचाने गए फ्रेट क्लस्टर: 300
  • Coach Mitra संचालित ट्रेनें: 74

यह डिजिटल और एआई आधारित परिवर्तन भारतीय रेलवे को अधिक सुरक्षित, कुशल और भविष्य के लिए तैयार परिवहन प्रणाली बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मेड इन इंडिया: नड्डा ने कसौली सेंटर में स्वदेशी टीडी वैक्सीन लॉन्च की

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने हिमाचल प्रदेश के सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट में देश में बनी टेटनस और एडल्ट डिप्थीरिया (Td) वैक्सीन लॉन्च की। यह लॉन्च भारत के पब्लिक हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और हेल्थकेयर में आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है। इसके साथ ही, भारत ने ग्लोबल वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग लीडर के तौर पर अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है।

CRI कसौली में देसी Td वैक्सीन लॉन्च हुई

  • स्वदेशी टेटनस एवं एडल्ट डिफ्थीरिया (Td) वैक्सीन का शुभारंभ हिमाचल प्रदेश स्थित केंद्रीय अनुसंधान संस्थान, कसौली में किया गया, जो भारत के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के वैक्सीन निर्माण संस्थानों में से एक है।
  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री Jagat Prakash Nadda ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • यह वैक्सीन अब वैश्विक सिफारिशों और टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) के दिशानिर्देशों के अनुरूप टेटनस टॉक्सॉइड (TT) वैक्सीन का स्थान लेगी।

यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के लिए 55 लाख Td वैक्सीन डोज़

औपचारिक शुभारंभ के साथ ही Td वैक्सीन अब भारत के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) के अंतर्गत उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रमुख घोषणाएँ

  • अप्रैल 2026 तक 55 लाख डोज़ की आपूर्ति
  • आगामी वर्षों में उत्पादन क्षमता में चरणबद्ध वृद्धि
  • राष्ट्रीय नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में पूर्ण एकीकरण

स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह कदम राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने और वैक्सीन आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

Td वैक्सीन में परिवर्तन क्यों महत्वपूर्ण है?

टेटनस टॉक्सॉइड (TT) से Td वैक्सीन में बदलाव वैश्विक सिफारिशों के अनुरूप किया गया है। यह कदम व्यापक और बेहतर प्रतिरक्षा कवरेज सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है।

पृष्ठभूमि सिफारिशें

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 2006 में TT से Td में परिवर्तन की सिफारिश की।
  • 2017 के WHO टेटनस वैक्सीन पोजीशन पेपर में इस सिफारिश की पुनः पुष्टि की गई।
  • स्ट्रैटेजिक एडवाइजरी ग्रुप ऑफ एक्सपर्ट्स (SAGE) द्वारा इसका समर्थन किया गया।
  • भारत में टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) ने इसे अपनाने की अनुशंसा की।

Td वैक्सीन टेटनस और डिफ्थीरिया दोनों से सुरक्षा प्रदान करती है। इससे सभी आयु वर्गों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं, के लिए प्रतिरक्षा कवरेज और अधिक सुदृढ़ होता है।

भारत ने हासिल की 99% टीकाकरण कवरेज

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बताया कि भारत ने लगभग 99% टीकाकरण कवरेज प्राप्त कर ली है। उन्होंने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी उपलब्धि बताया।

यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) की प्रमुख विशेषताएँ

भारत का सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम है।

मुख्य बिंदु

  • 11 वैक्सीन के माध्यम से 12 बीमारियों से सुरक्षा
  • प्रतिवर्ष लगभग 5 करोड़ लाभार्थी
  • 2.5 करोड़ गर्भवती महिलाएँ
  • 2.5 करोड़ बच्चे
  • गर्भावस्था से 16 वर्ष की आयु तक 27 डोज़ का प्रावधान
  • U-WIN प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल ट्रैकिंग
  • गर्भवती महिलाओं के लिए 5 एंटीनटल (Antenatal) जांच सुनिश्चित, जिनमें कम से कम एक विशेषज्ञ परामर्श शामिल

यह व्यापक कार्यक्रम देश की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

CRI कसौली: वैक्सीन आत्मनिर्भरता को मजबूती

हिमाचल प्रदेश स्थित केंद्रीय अनुसंधान संस्थान, कसौली (CRI) गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (GMP) मानकों के तहत वैक्सीन निर्माण करने वाला पहला सरकारी संस्थान है।

संस्थान ने सफलतापूर्वक—

  • विकासात्मक अध्ययन पूरे किए
  • टेस्ट लाइसेंस प्राप्त किया
  • मार्केटिंग प्राधिकरण हासिल किया
  • वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया
  • केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला से मंजूरी प्राप्त की

स्वदेशी Td वैक्सीन भारत की वैक्सीन नवाचार क्षमता, अनुसंधान कौशल और नियामक अनुपालन की बढ़ती मजबूती को दर्शाती है। यह पहल देश को वैक्सीन निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

 

लार्सन एंड टूब्रो व्योमा ढोलेरा SIR में 250 मेगावाट ग्रीन एआई डेटा सेंटर का अध्ययन करेगा

गुजरात सरकार ने India AI Impact Summit 2026 के दौरान Larsen & Toubro की व्योमा इकाई (L&T Vyoma) के साथ ढोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (SIR) में 250 मेगावाट क्षमता वाला ग्रीन एआई-रेडी डेटा सेंटर स्थापित करने की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। ₹25,000 करोड़ के प्रस्तावित निवेश वाला यह प्रोजेक्ट भारत में एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और सतत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

250 मेगावाट ग्रीन एआई डेटा सेंटर: MoU की प्रमुख बातें

यह समझौता गुजरात के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और एलएंडटी की व्योमा इकाई के बीच नई दिल्ली में आयोजित समिट के दौरान ‘इन्वेस्टमेंट प्रमोशन एक्टिविटी’ के अंतर्गत हुआ।

हस्ताक्षर गुजरात के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया की उपस्थिति में किए गए।

परियोजना की मुख्य विशेषताएँ

  • निवेश: ₹25,000 करोड़
  • क्षमता: 250 मेगावाट हाई-स्केल एआई-रेडी डेटा सेंटर
  • स्थान: ढोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (SIR)
  • प्रकृति: ग्रीन एवं सतत अवसंरचना
  • संभावित संचालन वर्ष: 2028

MoU के तहत L&T Vyoma की भूमिका

समिट में घोषित समझौते के अनुसार, L&T Vyoma अंतिम परियोजना क्रियान्वयन से पहले विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) करेगी।

अध्ययन में शामिल होंगे:

  • भूमि की उपयुक्तता
  • अवसंरचना की तैयारी
  • उपलब्धता क्षेत्र (Availability Zones)
  • स्थिरता एवं सतत विकास मानक

वहीं, गुजरात सरकार संबंधित विभागों के माध्यम से आवश्यक अवसंरचना और नीतिगत सहयोग उपलब्ध कराएगी।

एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ढोलेरा SIR क्यों?

ढोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (SIR) भारत के सबसे बड़े नियोजित औद्योगिक स्मार्ट शहरों में से एक है। इसे आधुनिक अवसंरचना, बेहतर कनेक्टिविटी और औद्योगिक कॉरिडोर के साथ रणनीतिक रूप से विकसित किया गया है।

यह प्रस्तावित परियोजना निम्न लक्ष्यों के अनुरूप है:

  • गुजरात आईटी/आईटीईएस नीति (2022–27)
  • भारत के डिजिटल परिवर्तन लक्ष्य
  • नवीकरणीय एवं सतत ऊर्जा पहल

सरकार का मानना है कि यह परियोजना गुजरात को एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, एडवांस्ड एनालिटिक्स और क्लाउड कंप्यूटिंग का अग्रणी केंद्र बनाने में मदद करेगी।

आर्थिक और रोजगार प्रभाव

₹25,000 करोड़ का यह बड़ा निवेश गुजरात और विशेष रूप से ढोलेरा SIR के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर लेकर आ सकता है।

प्रत्यक्ष प्रभाव

  • निर्माण और कमीशनिंग में रोजगार
  • दीर्घकालिक संचालन से जुड़े रोजगार
  • तकनीकी एवं डेटा प्रबंधन भूमिकाएँ

अप्रत्यक्ष प्रभाव

  • सहायक पारिस्थितिकी तंत्र का विकास
  • एआई स्टार्टअप्स और डिजिटल सेवाओं की वृद्धि
  • क्षेत्रीय अवसंरचना को बढ़ावा
  • कुल मिलाकर, यह परियोजना ढोलेरा SIR को भारत के उभरते एआई इकोसिस्टम का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना सकती है।

ICICI की नई ‘स्वास्थ्य पेंशन योजना’: रिटायरमेंट योजना और स्वास्थ्य सुरक्षा का स्मार्ट संयोजन

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल पेंशन फंड ने 20 फरवरी 2026 को पेंशन निधि नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) के सैंडबॉक्स ढांचे के तहत ‘स्वास्थ्य पेंशन योजना’ लॉन्च की है, जिसका उद्देश्य रिटायरमेंट प्लानिंग को स्वास्थ्य संबंधी लचीलापन के साथ जोड़ना है। यह योजना निवेशकों को दीर्घकालिक रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने की सुविधा देती है, साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में स्वास्थ्य से जुड़ी निकासी (withdrawal) की अनुमति भी प्रदान करती है। भारत में स्वास्थ्य बीमा की पहुंच लगभग 38 प्रतिशत के आसपास होने के कारण, यह उत्पाद स्वास्थ्य वित्तपोषण की कमी को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ‘आईसीआईसीआई स्वास्थ्य पेंशन योजना’ को डिजिटल-फर्स्ट मॉडल के रूप में तैयार किया गया है और इसके पायलट चरण में Apollo Hospitals को एंकर पार्टनर बनाया गया है।

पीएफआरडीए सैंडबॉक्स के तहत आईसीआईसीआई स्वास्थ्य पेंशन योजना

  • आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल पेंशन फंड द्वारा शुरू की गई ‘आईसीआईसीआई स्वास्थ्य पेंशन योजना’ को पेंशन निधि नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) के रेगुलेटरी सैंडबॉक्स ढांचे के अंतर्गत पेश किया गया है।
  • रेगुलेटरी सैंडबॉक्स एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत नवाचारपूर्ण वित्तीय उत्पादों को पूर्ण स्तर पर लागू करने से पहले सीमित दायरे में परीक्षण (पायलट) किया जाता है। इससे नियामक और संस्थान दोनों को उत्पाद की व्यवहारिकता और जोखिमों का आकलन करने का अवसर मिलता है।
  • पीएफआरडीए के अध्यक्ष शिवसुब्रमण्यम रमन ने कहा कि यह योजना स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए रिटायरमेंट बचत को सुरक्षित (ring-fence) रखकर वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देती है। इसे स्वास्थ्य बीमा का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक (complementary) व्यवस्था के रूप में संरचित किया गया है।
  • भविष्य के चरणों में नियामक खाते खोलने की प्रक्रिया को मौजूदा स्वास्थ्य बीमा कवरेज से जोड़ने पर भी विचार कर सकता है, जिससे स्वास्थ्य और पेंशन सुरक्षा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।

स्वास्थ्य पेंशन योजना की प्रमुख विशेषताएँ

  • आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल पेंशन फंड की ‘स्वास्थ्य पेंशन योजना’ निवेशकों को अधिक लचीले विकल्प प्रदान करती है।
  • इस योजना के तहत सदस्य अपनी स्वयं की जमा राशि का 25% तक कई बार आंशिक निकासी कर सकते हैं।
  • यह व्यवस्था नियमित राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) नियमों से अधिक लचीली है, जहाँ कार्यकाल के दौरान केवल चार आंशिक निकासी की अनुमति होती है।
  • यदि चिकित्सा आपात स्थिति में कुल कोष (कॉर्पस) का 70% से अधिक खर्च आवश्यक हो, तो समयपूर्व बंद (Premature Closure) की अनुमति दी जाती है।
  • भुगतान सीधे स्वास्थ्य सेवा प्रदाता को किया जाता है, और शेष राशि को मानक पेंशन योजना में स्थानांतरित कर दिया जाता है।
  • प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट चरण में, दीर्घकालिक संपत्ति सृजन को बढ़ावा देने के लिए “ICICI PF NPS Swasthya Equity Plus” वेरिएंट के तहत उच्च इक्विटी निवेश का विकल्प दिया गया है।
  • यह योजना रिटायरमेंट सुरक्षा और स्वास्थ्य आपात स्थितियों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करती है।

भारत की स्वास्थ्य वित्तपोषण चुनौती का समाधान

भारत में स्वास्थ्य बीमा की पहुंच लगभग 38 प्रतिशत के आसपास है। बड़ी संख्या में परिवार अपनी आय का 15–20 प्रतिशत हिस्सा स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करते हैं और अस्पताल में भर्ती के दौरान अक्सर जेब से भुगतान (Out-of-Pocket) या संपत्ति बेचने तक की नौबत आ जाती है।

ICICI Prudential Pension Fund की ‘स्वास्थ्य पेंशन योजना’ का उद्देश्य इसी बोझ को कम करना है। यह चिकित्सा खर्चों के लिए एक संरचित बचत तंत्र प्रदान करती है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए अलग से कोष तैयार किया जा सके।

यह योजना विशेष रूप से निम्न खर्चों में उपयोगी है—

  • को-पेमेंट (Co-payment)
  • ओपीडी परामर्श
  • दवाइयों की खरीद
  • डायग्नोस्टिक जांच
  • बीमा द्वारा पूरी तरह कवर न होने वाले अस्पताल खर्च

Apollo 24/7 के साथ डिजिटल एकीकरण

  • यह योजना पूरी तरह डिजिटल है और Apollo Hospitals के Apollo 24/7 प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत है।
  • सदस्य अपने स्वास्थ्य पेंशन खाते के माध्यम से दवाइयाँ, जांच सेवाएँ और अस्पताल सुविधाएँ प्राप्त कर सकते हैं।
  • पायलट चरण में बेंगलुरु और हैदराबाद में अस्पताल व फार्मेसी की भौतिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं, जबकि डिजिटल सेवाएँ देशभर में सुलभ हैं।
  • इस पहल के डिजिटल भागीदार के रूप में KFin Technologies कार्य कर रहा है।
  • यह डिजिटल-फर्स्ट मॉडल पारदर्शिता, सुविधा और स्वास्थ्य-लिंक्ड पेंशन बचत की रियल-टाइम ट्रैकिंग को बेहतर बनाता है।

स्वास्थ्य-लिंक्ड पेंशन उत्पादों का रणनीतिक महत्व

  • ICICI Prudential Pension Fund की ‘स्वास्थ्य पेंशन योजना’ बदलते हुए National Pension System (NPS) ढांचे के अंतर्गत रिटायरमेंट और स्वास्थ्य योजना में नवाचार को दर्शाती है।
  • पेंशन बचत को स्वास्थ्य संबंधी लचीलेपन के साथ जोड़कर यह योजना दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करती है। यह भारत के व्यापक वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) लक्ष्यों के अनुरूप है और बढ़ती स्वास्थ्य महंगाई (Healthcare Inflation) की चुनौती का समाधान प्रस्तुत करती है।
  • जैसे-जैसे जनसंख्या वृद्ध हो रही है और चिकित्सा खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, ऐसे हाइब्रिड वित्तीय उत्पाद भविष्य में और अधिक प्रासंगिक बन सकते हैं। यह मॉडल बचत, सुरक्षा और सामाजिक कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राज्य कैबिनेट ने बिहार में महत्वाकांक्षी एयरपोर्ट परियोजना को दी स्वीकृति

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट ने सारण जिले के सोनपुर में एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना उत्तर बिहार के लिए एक बड़ा बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) प्रोत्साहन मानी जा रही है। 4,200 मीटर लंबा रनवे एयरबस A380 जैसे बड़े विमानों के संचालन में सक्षम होगा। यह हवाई अड्डा हाजीपुर और दुमरिया के बीच 4,228 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा और इसे वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

सोनपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा: मुख्य विशेषताएँ

  • यह परियोजना भूमि क्षेत्र के लिहाज से बिहार का सबसे बड़ा और देश के प्रमुख बड़े हवाई अड्डों में से एक होगा।
  • 4.2 किमी लंबा रनवे वाइड-बॉडी और लंबी दूरी के विमानों के लिए उपयुक्त होगा।
  • राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण के लिए ₹1,302 करोड़ आवंटित किए हैं, और प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
  • केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय से साइट क्लीयरेंस मिल चुकी है, और इस प्रस्ताव का उल्लेख केंद्रीय बजट में भी किया गया था।

4.2 किमी रनवे क्यों है महत्वपूर्ण?

  • 4,200 मीटर का रनवे लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए आवश्यक होता है।
  • इससे बड़े यात्री और कार्गो विमान सीधे बिहार से उड़ान भर सकेंगे।
  • राज्य को कनेक्टिंग हब पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
  • प्रतिकूल मौसम में भी संचालन अधिक सुरक्षित और लचीला रहेगा।

उत्तर बिहार के विकास पर प्रभाव

यह निर्णय उत्तर बिहार के लिए एक ऐतिहासिक परियोजना माना जा रहा है। वर्तमान में बिहार में संचालित प्रमुख हवाई अड्डे हैं—

  • जय प्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा
  • गया हवाई अड्डा
  • दरभंगा हवाई अड्डा
  • पूर्णिया हवाई अड्डा

इसके अलावा भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में एक नया हवाई अड्डा विकसित किया जा रहा है।

सोनपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बनने से पटना हवाई अड्डे पर दबाव कम होगा और विमानन अवसंरचना का क्षेत्रीय संतुलन बेहतर होगा।

आर्थिक और रणनीतिक लाभ

  • निर्माण और संचालन चरण में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा।
  • कृषि निर्यात, विनिर्माण, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों को लाभ मिलेगा।
  • बेहतर कार्गो सुविधाओं से सारण, हाजीपुर और आसपास के उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान होगी।
  • बड़े अवसंरचना प्रोजेक्ट्स से रियल एस्टेट, आतिथ्य और सेवा क्षेत्रों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे राज्य की जीडीपी वृद्धि में योगदान होगा।

अन्य कैबिनेट निर्णय

  • उसी बैठक में विभिन्न विभागों के 35 प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
  • भागलपुर जिले के इस्माइलपुर से बिंदटोली के बीच कटाव-रोधी कार्यों के लिए ₹70 करोड़ स्वीकृत किए गए, जिससे बाढ़ से क्षतिग्रस्त तटबंधों को मजबूत किया जाएगा।

मुख्य तथ्य

  • स्थान: सोनपुर, सारण जिला, बिहार
  • रनवे लंबाई: 4,200 मीटर
  • कुल क्षेत्र: 4,228 एकड़
  • लक्ष्य पूर्णता: 2030
  • भूमि अधिग्रहण राशि: ₹1,302 करोड़
  • वर्तमान प्रमुख हवाई अड्डा: जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, पटना

केवल 8 साल की उम्र, AI समिट का सबसे नन्‍हा स्‍पीकर रणवीर सचदेवा कौन है?

नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit 2026 में एक ऐसा पल आया जिसने सभी को चौंका दिया। आठ वर्षीय रणवीर सचदेवा इस वैश्विक मंच पर सबसे कम उम्र के वक्ता बने। दुनिया भर के सीईओ और एआई विशेषज्ञों से भरे इस सम्मेलन में एक छोटे बच्चे को कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे जटिल विषयों पर आत्मविश्वास से बोलते देखना बेहद खास था। रणवीर ने न केवल मुख्य भाषण दिया, बल्कि Sundar Pichai और Sam Altman से मुलाकात भी की, जिससे वे देशभर में चर्चा का विषय बन गए। उनका संदेश सरल लेकिन प्रभावशाली था— एआई सभी के लिए बननी चाहिए, ताकि तकनीक का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच सके।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के सबसे कम उम्र के वक्ता: कौन हैं रणवीर सचदेवा?

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित India AI Impact Summit 2026 में दुनिया भर के शीर्ष तकनीकी विशेषज्ञ, निवेशक और नीति-निर्माता शामिल हुए। लेकिन इस भव्य आयोजन में सबसे ज्यादा चर्चा आठ वर्षीय रणवीर सचदेवा की रही, जिन्होंने खुद को “दिल से टेक्नोलॉजिस्ट” बताया।

रणवीर के बारे में प्रमुख तथ्य

  • मात्र तीन वर्ष की आयु में कोडिंग शुरू की
  • कम उम्र में ही मशीन लर्निंग मॉडल्स का अध्ययन किया
  • अंतरराष्ट्रीय टेक मंचों पर भाषण दे चुके हैं
  • भारतीय दर्शन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संयोजन की वकालत करते हैं

अपनी कम उम्र के बावजूद, रणवीर ने एआई मॉडल्स, नैतिकता (AI Ethics) और वैश्विक एआई प्रणालियों के निर्माण में भारत की भूमिका पर स्पष्ट और आत्मविश्वासपूर्ण विचार रखे। उनका दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि नई पीढ़ी तकनीक को केवल नवाचार के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के साथ जोड़कर देख रही है।

रणवीर सचदेवा की सुंदर पिचाई और सैम ऑल्टमैन से मुलाकात

India AI Impact Summit 2026 का एक सबसे चर्चित क्षण वह रहा जब युवा प्रतिभा रणवीर सचदेवा ने वैश्विक तकनीकी नेताओं से मुलाकात की।

उन्होंने मुलाकात की—

  • सुंदर पिचाई – गूगल के सीईओ
  • सैम ऑल्टमैन – ओपनएआई के सीईओ

इन मुलाकातों की तस्वीरें और स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। सम्मेलन में मौजूद कई लोग यह देखकर आश्चर्यचकित रह गए कि एक भारतीय बालक वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता को आकार देने वाले शीर्ष नेताओं के साथ एआई जैसे जटिल विषय पर आत्मविश्वास से चर्चा कर रहा है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर रणवीर सचदेवा ने क्या कहा?

India AI Impact Summit 2026 में अपने मुख्य भाषण के दौरान रणवीर सचदेवा ने एआई में सुगम्यता (Accessibility) और समावेशन (Inclusion) पर विशेष जोर दिया।

एआई पर उनके मुख्य विचार

  • एआई केवल विशेषज्ञों के लिए नहीं, बल्कि सभी लोगों के लिए सुलभ होनी चाहिए।
  • भारत नैतिक (Ethical) एआई सिस्टम विकसित करने में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
  • प्राचीन भारतीय मूल्य आधुनिक तकनीक को दिशा दे सकते हैं।
  • एआई का उपयोग आम लोगों की वास्तविक समस्याओं को हल करने के लिए होना चाहिए।

रणवीर ने जटिल एआई अवधारणाओं को बेहद सरल भाषा में समझाया, जिससे गैर-तकनीकी श्रोता भी उन्हें आसानी से समझ सके। उनकी आत्मविश्वासपूर्ण प्रस्तुति और स्पष्ट सोच ने वैश्विक सीईओ और नवोन्मेषकों की उपस्थिति वाले दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया।

पृष्ठभूमि: क्यों महत्वपूर्ण है इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026?

भारत तेजी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) नवाचार का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बनकर उभरा है। मजबूत डिजिटल अवसंरचना, सरकारी पहलों और बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम के साथ देश नैतिक एआई विकास में अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

India AI Impact Summit 2026 का उद्देश्य था—

  • जिम्मेदार (Responsible) एआई को बढ़ावा देना
  • वैश्विक तकनीकी नेताओं के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना
  • भारत की एआई प्रतिभा को प्रदर्शित करना
  • एआई नीति और नवाचार पर गहन चर्चा करना

इस मंच पर रणवीर सचदेवा की उपस्थिति यह दर्शाती है कि अब एआई की दुनिया उम्र, पृष्ठभूमि या भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रही। नई पीढ़ी भी वैश्विक तकनीकी विमर्श में प्रभावशाली भूमिका निभा रही है।

तालियों से आगे: अब तक का रणवीर सचदेवा का सफर

रणवीर सचदेवा तकनीकी दुनिया में नए नहीं हैं। India AI Impact Summit 2026 में भाषण देने से पहले ही वे कई उपलब्धियाँ हासिल कर चुके थे।

उन्होंने—

  • अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भाषण दिया
  • उन्नत मशीन लर्निंग अवधारणाओं का अध्ययन किया
  • वैश्विक एआई समुदायों के साथ सक्रिय सहभागिता की

उनका सफर यह साबित करता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रति जुनून किसी भी उम्र में शुरू हो सकता है। यह युवा वक्ता आज भारत भर में हजारों छात्रों और तकनीक प्रेमियों के लिए प्रेरणा बन चुका है और लगातार नई पीढ़ी को नवाचार की ओर प्रोत्साहित कर रहा है।

हिलेरी नाइट और मेगन केलर के दम पर अमेरिका ने ओवरटाइम में कनाडा को हराकर ओलंपिक स्वर्ण जीता

अमेरिका की महिला राष्ट्रीय हॉकी टीम ने एक बार फिर ओलंपिक स्वर्ण पदक जीत लिया। 19 फरवरी 2026 को 2026 Winter Olympics में खेले गए रोमांचक फाइनल में अमेरिका ने कनाडा को 2-1 से ओवरटाइम में हराया। नियमित समय के अंतिम क्षणों तक अमेरिका 0-1 से पीछे था। लेकिन आखिरी तीन मिनट से कम समय रहते Hilary Knight ने शानदार बराबरी का गोल दागकर मुकाबला 1-1 कर दिया। इसके बाद सडन-डेथ ओवरटाइम में Megan Keller ने निर्णायक गोल कर अमेरिका को ऐतिहासिक जीत दिला दी। यह अमेरिका का महिला हॉकी में तीसरा ओलंपिक स्वर्ण पदक है और 2018 के बाद पहला।

अमेरिका बनाम कनाडा: ओलंपिक हॉकी की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्विता

महिला हॉकी में अमेरिका और कनाडा की टक्कर को अंतरराष्ट्रीय हॉकी की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्विता माना जाता है।

  • महिला हॉकी की ओलंपिक शुरुआत 1998 में 1998 Winter Olympics में हुई थी।
  • तब से दोनों टीमें लगभग हर बार स्वर्ण पदक मुकाबले में आमने-सामने रही हैं।
  • मिलान 2026 से पहले अमेरिका ने केवल 1998 और 2018 में स्वर्ण जीता था।

मिलान में मिली जीत ने इस ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता में एक नया अध्याय जोड़ दिया।

हिलेरी नाइट का आखिरी मिनट का बराबरी गोल

  • गोल्ड मेडल गेम के ज़्यादातर समय कनाडा ने 1-0 की मामूली बढ़त बनाए रखी।
  • ऐसा लग रहा था कि कनाडाई ओलंपिक गोल्ड से कुछ ही मिनट दूर हैं।
  • फिर हिलेरी नाइट आईं।
  • रेगुलेशन में तीन मिनट से भी कम समय बचा था, नाइट ने एक अहम बराबरी का गोल करके स्कोर 1-1 कर दिया और ओवरटाइम के लिए मजबूर कर दिया।
  • इस गोल ने पूरे स्टेडियम को हैरान कर दिया और मोमेंटम पूरी तरह से टीम USA के पक्ष में हो गया।
  • नाइट ने बाद में कहा कि जब मेगन केलर ने ओवरटाइम में मूव बनाया तो उन्हें कॉन्फिडेंस महसूस हुआ।
  • उन्होंने इस टीम को “अब तक की सबसे बेहतरीन अमेरिकी हॉकी टीम” बताया।

मेगन केलर का गोल्डन गोल

  • ओवरटाइम शुरू होने के ठीक चार मिनट बाद, मेगन केलर को टेलर हाइज़ से एक पास मिला।
  • उन्होंने कुशलता से कनाडाई डिफेंडर क्लेयर थॉम्पसन को चकमा दिया और गोलकीपर एन-रेनी डेसबिएन्स के पास से पक को खिसका दिया।
  • पक नेट से टकराया। खेल खत्म।
  • टीम USA ने 2026 विंटर ओलंपिक्स में ओवरटाइम में 2-1 से जीत हासिल की।
  • केलर ने इस पल को “अविश्वसनीय” कहा, और टीम के चार साल के सफर और एकता की तारीफ की। खिलाड़ियों ने बर्फ पर दौड़ते हुए जश्न में ग्लव्स और स्टिक फेंके।

हिलेरी नाइट का ऐतिहासिक रिकॉर्ड

2026 का स्वर्ण पदक नाइट के करियर में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जोड़ता है।

उनकी ओलंपिक उपलब्धियाँ—

  • दूसरा ओलंपिक स्वर्ण पदक
  • कुल पाँच ओलंपिक पदक
  • अमेरिकी महिला हॉकी खिलाड़ी द्वारा सर्वाधिक ओलंपिक पदक
  • ओलंपिक में अमेरिका की ओर से सर्वाधिक गोल और अंक

नाइट ने यह भी खुलासा किया कि फाइनल से एक दिन पहले उन्होंने अमेरिकी स्पीड स्केटर Brittany Bowe को प्रपोज किया था।
उन्होंने मज़ाक में कहा कि वह गोल्ड मेडल मैच से ज्यादा प्रपोज़ल को लेकर घबराई हुई थीं।

ओलंपिक में अमेरिकी महिला हॉकी का सफर

  • महिला हॉकी 1998 में ओलंपिक खेल बनी।
  • तब से अमेरिका और कनाडा का दबदबा कायम है।
  • अमेरिका ने 1998 और 2018 में स्वर्ण जीता था।
  • मिलान 2026 की जीत खास इसलिए है क्योंकि इससे आठ साल का इंतजार खत्म हुआ।
  • पूरी प्रतियोगिता में अजेय रहना इस उपलब्धि को और भी ऐतिहासिक बनाता है।

कोर सेक्टर्स की ग्रोथ धीमी हुई, जनवरी में 4 फीसदी पर आई

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी कोर उद्योगों का सूचकांक (ICI) के अनुसार, जनवरी 2026 में भारत की आठ प्रमुख आधारभूत उद्योगों की वृद्धि दर 4% रही। यह दिसंबर 2025 के संशोधित 4.7% की तुलना में कम है। इस मंदी का प्रभाव व्यापक रहा और अधिकांश क्षेत्रों में क्रमिक (sequential) गिरावट देखी गई। हालांकि, स्टील और सीमेंट क्षेत्र निर्माण और अवसंरचना गतिविधियों के चलते मजबूत बने रहे।

जनवरी 2026: सेक्टरवार प्रदर्शन

मजबूत प्रदर्शन करने वाले क्षेत्र

  • सीमेंट: +10.7% (लगातार दो अंकों की वृद्धि)
  • स्टील: +9.9%
  • बिजली: +3.8%
  • उर्वरक: +3.7%
  • कोयला: +3.1%

कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्र

  • कच्चा तेल (Crude Oil): -5.8% (लगातार पाँचवाँ महीना गिरावट)
  • प्राकृतिक गैस: -5% (लगातार 19वाँ महीना नकारात्मक वृद्धि)

रिफाइनरी उत्पादों को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में दिसंबर की तुलना में वृद्धि दर में कमी दर्ज की गई।

इंडेक्स ऑफ कोर इंडस्ट्रीज (ICI) क्या है?

कोर उद्योगों का सूचकांक (ICI) आठ प्रमुख अवसंरचना क्षेत्रों के उत्पादन को मापता है—

  • कोयला
  • कच्चा तेल
  • प्राकृतिक गैस
  • रिफाइनरी उत्पाद
  • उर्वरक
  • स्टील
  • सीमेंट
  • बिजली

ये क्षेत्र मिलकर औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 40.27% का भार रखते हैं, इसलिए इन्हें औद्योगिक गतिविधि का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।

औद्योगिक उत्पादन अब भी मजबूत

  • कोर सेक्टर में नरमी के बावजूद, भारत का समग्र औद्योगिक उत्पादन (IIP) वर्ष-दर-वर्ष 7.8% की 26 महीनों की उच्चतम दर से बढ़ा।
  • यह वृद्धि विनिर्माण, खनन और बिजली उत्पादन में मजबूती के कारण संभव हुई।
  • वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल–जनवरी) के पहले दस महीनों में कोर सेक्टर की वृद्धि 2.8% रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 4.5% थी।

स्टील और सीमेंट में मजबूत वृद्धि के कारण

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, स्टील और सीमेंट की तेज वृद्धि के पीछे प्रमुख कारण हैं—

  • केंद्र सरकार द्वारा अवसंरचना व्यय में वृद्धि
  • राज्यों द्वारा पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में बढ़ती भागीदारी
  • आवास और रियल एस्टेट क्षेत्र में स्थिर मांग
  • निर्माण परियोजनाओं में लगातार गति

ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री Aditi Nayar ने इसे मजबूत निर्माण गतिविधि का संकेत बताया, हालांकि अन्य क्षेत्रों में नरमी दिखाई दे रही है।

सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के बाद ट्रंप ने 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा की

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को ट्रंप के नए टैरिफ को रद्द (Trump Tariff) कर दिया। इसके बाद ट्रंप ने मौजूदा इंपोर्ट ड्यूटी के ऊपर 10 परसेंट ग्लोबल टैरिफ ऑर्डर पर साइन किए। यह ऑर्डर करीब 5 महीने के लिए है, जिससे यूनाइटेड स्टेट्स के सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के बावजूद उनकी ट्रेड पॉलिसी में बढ़ोतरी का संकेत मिलता है। यह नया टैरिफ कब से लागू होगा कि इसकी नई तारीख भी सामने आ गई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने जो टैरिफ दुनिया के अलग-अलग देशों पर लगाए थे वो सब रद्द हो गए हैं। इससे पहले जो टैरिफ लगा करते थे वही टैरिफ लगेंगे। यानी ट्रंप के आने के पहले जो टैरिफ व्यवस्था थी, वही लागू होगा। भारत पर पहले 3 से 4 फीसदी का टैरिफ लगता था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने 10% वैश्विक टैरिफ क्यों घोषित किया?

  • सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से कहा कि राष्ट्रपति को IEEPA के तहत व्यापक वैश्विक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है।
  • यह फैसला 20 फरवरी 2026 को सुनाया गया।
  • फैसले की आलोचना करने के बाद ट्रंप ने Trade Act of 1974 की धारा 122 का सहारा लिया।
  • इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति 150 दिनों के लिए अधिकतम 15% तक अस्थायी टैरिफ लगा सकते हैं, यदि भुगतान संतुलन (Balance of Payments) या व्यापार घाटे की समस्या हो।
  • इसी कानून का उपयोग करते हुए ट्रंप ने सभी आयातों पर बिना भेदभाव के 10% टैरिफ लगाने की घोषणा की।
  • 150 दिनों से अधिक विस्तार के लिए कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होगी।

10% अमेरिकी आयात टैरिफ का क्या अर्थ है?

2026 का यह नया आयात टैरिफ मतलब है कि अमेरिका में आने वाले सभी सामानों पर अतिरिक्त 10% कर लगेगा। यह पहले से लागू टैरिफ के अतिरिक्त होगा, जैसे—

  • Section 232 टैरिफ (राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर)
  • Section 301 टैरिफ (अनुचित व्यापार प्रथाओं के आधार पर)

इससे अमेरिकी बाजार में आयातित वस्तुएँ महंगी हो जाएँगी।

  • अमेरिकी उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
  • निर्यातक देशों की प्रतिस्पर्धात्मकता घट सकती है।
  • यदि अन्य देश जवाबी टैरिफ लगाते हैं, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है।

भारत पर प्रभाव: कौन-कौन से क्षेत्र प्रभावित होंगे?

10% वैश्विक टैरिफ का असर भारतीय निर्यात पर भी पड़ेगा। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि भारत को कोई विशेष छूट नहीं मिलेगी।

प्रभावित होने वाले प्रमुख क्षेत्र—

  • वस्त्र और परिधान
  • इस्पात और धातु उत्पाद
  • इंजीनियरिंग सामान
  • ऑटो कंपोनेंट्स

पहले भी भारत पर अमेरिकी व्यापारिक उपायों के तहत 50% तक टैरिफ लगाया गया था, जिसे वार्ता के बाद लगभग 18% तक कम किया गया। अब नया 10% टैरिफ अतिरिक्त लागत दबाव पैदा करेगा। यदि अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे हो जाते हैं, तो निर्यात मांग घट सकती है, जिससे विनिर्माण और रोजगार पर असर पड़ सकता है।

व्यापक वैश्विक प्रभाव

  • यह कदम चीन, यूरोपीय संघ और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की ओर से जवाबी कार्रवाई को जन्म दे सकता है।
  • व्यापार युद्ध वैश्विक आर्थिक वृद्धि को धीमा कर सकते हैं और वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा सकते हैं।
  • अमेरिका पर निर्भर विकासशील देशों की मुद्रा पर दबाव बढ़ सकता है और व्यापार घाटा चौड़ा हो सकता है।

भारत के लिए यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण और मजबूत व्यापारिक साझेदारी की दिशा में प्रयास कर रहा है। यह कदम भारत को “मेक इन इंडिया” जैसे अभियानों के तहत घरेलू विनिर्माण को और तेज़ी से बढ़ावा देने के लिए प्रेरित कर सकता है।

मुख्य तथ्य (Static Facts)

  • घोषित टैरिफ: सभी आयात पर 10%
  • उपयोग किया गया कानूनी प्रावधान: Trade Act of 1974 की धारा 122
  • अधिकतम सीमा (धारा 122 के तहत): 150 दिनों के लिए 15%
  • सुप्रीम कोर्ट का फैसला: 20 फरवरी 2026
  • टैरिफ लागू होने की तिथि: 25 फरवरी 2026
  • पहले चुनौती दी गई कानूनी आधार: IEEPA

प्रसिद्ध बांग्ला लेखक शंकर का 93 वर्ष की आयु में निधन

प्रख्यात साहित्यकार मणिशंकर मुखोपाध्याय, जिन्हें साहित्य जगत शंकर के नाम से जानता है, का 93 वर्ष की आयु में 20 फरवरी 2026 को निधन हो गया। उनके जाने से केवल एक रचनाकार नहीं, बल्कि एक जीवंत युग, एक चलता-फिरता इतिहास और संवेदनाओं से भरी एक पूरी दुनिया जैसे थम गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि शंकर का निधन बंगाल की सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति है।

मणिशंकर मुखोपाध्याय: बंगाल के साहित्यिक दिग्गज

  • शंकर का जन्म हावड़ा में मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ।
  • अपने लंबे साहित्यिक करियर में उन्होंने लगभग 100 उपन्यास और लघु कथाएँ लिखीं।
  • उनकी रचनाओं ने स्वतंत्रता-उत्तरकालीन शहरी भारत के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तनों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
  • उनका निधन बंगाल की सांस्कृतिक दुनिया में गहरा शून्य छोड़ गया।
  • मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें साहित्य और समाज में उनके प्रभावशाली योगदान के लिए “अपरिवर्तनीय क्षति” बताया।

शंकर के प्रसिद्ध कार्य और फिल्म रूपांतरण

  • उनकी रचनाएँ सिमाबध्या और जन अरण्य को प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे ने 1971 और 1975 में प्रसिद्ध कैलकत्ता ट्रिलॉजी का हिस्सा बनाकर रूपांतरित किया।
  • इन फिल्मों में कॉर्पोरेट महत्वाकांक्षा, नैतिक समझौते और शहरी जीवन में जीवित रहने की चुनौतियों को चित्रित किया गया।
  • एक और प्रतिष्ठित उपन्यास चौरंगी को 1968 में पिनाकी भूषण मुखर्जीद्वारा निर्देशित एक महत्वपूर्ण बंगाली फिल्म में रूपांतरित किया गया, जिसमें उत्तम कुमार ने मुख्य भूमिका निभाई।
  • उनका उपन्यास मान सम्मान 1986 में बसु चटर्जी द्वारा निर्देशित हिंदी फिल्म शीशा में रूपांतरित हुआ।
  • इन रूपांतरणों ने शंकर के प्रभाव को साहित्य से परे मुख्यधारा के भारतीय सिनेमा तक बढ़ा दिया।

शंकर का संघर्ष और प्रारंभिक जीवन

  • बंगाली लेखक शंकर का जीवन संघर्ष और दृढ़ संकल्प से भरा रहा।
  • उन्होंने कम उम्र में अपने पिता को खो दिया और अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए कई नौकरियाँ कीं।
  • उन्होंने नोएल फ्रेडरिक बारवेल के अधीन कलकत्ता उच्च न्यायालय में क्लर्क के रूप में कार्य किया।
  • कठिनाइयों के बावजूद, उन्होंने रिपन कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की।
  • उनके वास्तविक जीवन के अनुभवों का उनके उपन्यासों पर गहरा प्रभाव पड़ा, जिनमें अक्सर कॉर्पोरेट और शहरी परिवेश में महत्वाकांक्षा, कठिनाइयाँ और नैतिक संघर्ष चित्रित किए गए।

पुरस्कार और अंतिम साहित्यिक योगदान

  • शंकर को उनके जीवनकाल में कई सम्मानों से नवाज़ा गया।
  • 2021 में उन्हें साहित्यिक योगदान के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • उनका अंतिम प्रमुख साहित्यिक प्रोजेक्ट स्वामी विवेकानंद पर आधारित एक शोध-आधारित पुस्तक थी, जो उनकी दर्शन और आध्यात्म में रुचि को दर्शाता है।

शंकर की बांग्ला साहित्य में विरासत

शंकर के उपन्यासों ने आधुनिक बांग्ला कहानी कहने की शैली को पुनः आकार दिया—

  • कॉर्पोरेट और नौकरशाही भारत को उजागर करना
  • शहरी जीवन में नैतिक संघर्षों का अन्वेषण
  • मजबूत और बहुपरत पात्रों का निर्माण
  • साहित्य और सिनेमा के बीच पुल का निर्माण
  • उनकी रचनाएँ आज भी अकादमिक चर्चाओं का हिस्सा हैं और समकालीन लेखकों को प्रभावित करती हैं।

भारतीय साहित्य में योगदान

  • शंकर की रचनाएँ स्वतंत्रता-उत्तरकालीन भारतीय साहित्य की वह धारा हैं, जिसने शहरी परिवर्तन का विश्लेषण किया।
  • उनके यथार्थवादी कथानक ने कोलकाता और उसके बाहर सामाजिक और आर्थिक बदलावों का दस्तावेजीकरण किया।
  • उपन्यासों के माध्यम से उन्होंने आकांक्षाओं, वर्गीय गतिशीलता और तेजी से आधुनिक हो रही समाज में नैतिक समझौतों को दर्ज किया।

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