क्वाड देशों की नौसेनाओं की मालाबार एक्सरसाइज का आगाज

मालाबार अभ्यास 2025, एक प्रमुख बहुपक्षीय नौसैनिक युद्धाभ्यास, वर्तमान में उत्तरी प्रशांत महासागर के गुआम में आयोजित किया जा रहा है। भारत का प्रतिनिधित्व आईएनएस सह्याद्री, एक स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट, द्वारा किया जा रहा है। यह उच्चस्तरीय समुद्री अभ्यास बंदरगाह (हार्बर) और समुद्र (सी) — दोनों चरणों में आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारत की उस रणनीतिक भूमिका को रेखांकित करना है, जिसके तहत वह अपने प्रमुख साझेदार देशों के साथ मिलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्रिय योगदान दे रहा है।

भारत की भागीदारी: आईएनएस सह्याद्री पर विशेष ध्यान

  • आईएनएस सह्याद्री एक स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट है।
  • यह मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स द्वारा निर्मित प्रोजेक्ट 17 (शिवालिक-श्रेणी) के अंतर्गत बनाई गई है, जो रक्षा उत्पादन में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को प्रदर्शित करती है।
  • यह युद्धपोत कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अभियानों में भाग ले चुका है, जो भारत की बढ़ती नौसैनिक शक्ति और वैश्विक उपस्थिति को सुदृढ़ करता है।
  • मालाबार 2025 में भागीदारी भारत की इस प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि वह सैन्य सहयोग, पारस्परिक संचालन क्षमता (interoperability) को बढ़ाने और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मालाबार अभ्यास क्या है?

मालाबार नौसैनिक अभ्यास की शुरुआत 1992 में भारत और अमेरिका के बीच एक द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में हुई थी।
बाद में यह विकसित होकर एक चतुर्भुज (Quad) अभ्यास बन गया, जिसमें अब शामिल हैं:

  • भारत

  • अमेरिका

  • जापान

  • ऑस्ट्रेलिया

यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संयुक्त नौसैनिक संचालन, समुद्री जागरूकता (Maritime Domain Awareness) और पारस्परिक समन्वय को बढ़ावा देने वाला एक प्रमुख सुरक्षा मंच है।

मालाबार 2025 की संरचना

बंदरगाह चरण (Harbour Phase)

गुआम बंदरगाह पर आयोजित इस चरण में निम्न गतिविधियाँ शामिल हैं:

  • संचालन संबंधी योजना बैठकों का आयोजन

  • संचार प्रोटोकॉल का समन्वय

  • प्रतिभागी नौसेनाओं के बीच परिचयात्मक मुलाकातें

  • खेल मुकाबले और सांस्कृतिक आदान-प्रदान

यह चरण संचालन पूर्व रणनीतिक तालमेल और सहयोग सुनिश्चित करता है।

समुद्री चरण (Sea Phase)

समुद्र में जाने के बाद, प्रतिभागी नौसेनाएँ निम्नलिखित अभ्यास करती हैं:

  • संयुक्त बेड़े की चालबाज़ियाँ (Joint Fleet Manoeuvres)

  • पनडुब्बी रोधी युद्धाभ्यास (ASW Drills)

  • गनरी अभ्यास (Gunnery Exercises)

  • विमान और हेलीकॉप्टर आधारित उन्नत उड़ान संचालन

ये अभ्यास तत्परता की जाँच, प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार और वास्तविक समय में सामरिक समन्वय को मजबूत करते हैं।

गुआम का रणनीतिक महत्व

गुआम, पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित अमेरिकी द्वीपीय क्षेत्र, एक अग्रिम तैनाती (forward-deployed) वाला रणनीतिक नौसैनिक अड्डा है।
यह स्थल चुना जाना इस बात को रेखांकित करता है कि —

  • गुआम हिंद-प्रशांत सुरक्षा ढाँचे का एक प्रमुख हिस्सा है,

  • यहाँ की अग्रिम उपस्थिति और त्वरित चेतावनी प्रणाली अत्यंत महत्वपूर्ण है,

  • यह मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत (Free and Open Indo-Pacific) की अवधारणा को समर्थन देता है।

भारत की नौसैनिक उपस्थिति यहाँ उसकी ब्लू-वॉटर (Blue-water) क्षमताओं और वैश्विक समुद्री भूमिका के विस्तार का संकेत है।

स्थिर तथ्य एवं प्रमुख निष्कर्ष

विवरण जानकारी
अभ्यास का नाम मालाबार 2025
स्थान गुआम, उत्तरी प्रशांत महासागर
भारतीय नौपोत आईएनएस सह्याद्री
जहाज़ की श्रेणी शिवालिक-श्रेणी गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट
निर्माण परियोजना प्रोजेक्ट 17 (मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स)
प्रतिभागी देश भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया (क्वाड सदस्य)

भारत के सोने का प्रत्यावर्तन: आरबीआई की नई रणनीति

भारत के स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) के प्रबंधन में एक ऐतिहासिक बदलाव लाते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में विदेशों में रखे बड़े हिस्से को देश वापस लाने की प्रक्रिया तेज़ कर दी है। मार्च से सितंबर 2025 के बीच आरबीआई ने 64 टन से अधिक सोना भारत लाया, जबकि मार्च 2023 से अब तक कुल 274 टन सोना वापस लाया जा चुका है। यह कदम 1990 के दशक के बाद भारत के सबसे बड़े स्वर्ण पुनर्वास अभियानों में से एक है — जो न केवल एक लॉजिस्टिक बदलाव है बल्कि आर्थिक संप्रभुता और रणनीतिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक भी है।

भारत का स्वर्ण भंडार — वर्तमान स्थिति (सितंबर 2025 तक)

विवरण मात्रा (टन में) विवरण
भारत का कुल आधिकारिक स्वर्ण भंडार 880 टन आरबीआई के पास कुल सोना
भारत में संग्रहीत 575.8 टन घरेलू वॉल्ट्स में
विदेशों में संग्रहीत (मुख्यतः बैंक ऑफ इंग्लैंड और BIS) 290.37 टन विदेशी सुरक्षित भंडारों में
स्वर्ण जमा योजनाओं (Gold Deposits) में 13.99 टन विभिन्न वित्तीय संस्थानों में

अब भारत का 65% से अधिक सोना देश के भीतर संग्रहीत है — जो आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम संकेत है।

सोना वापस लाने के प्रमुख कारण

1. राष्ट्रीय संप्रभुता को सशक्त बनाना
विदेशों से सोना वापस लाने का मुख्य उद्देश्य है कि भारत के सबसे सुरक्षित संपत्ति वर्ग (gold reserves) पर विदेशी संस्थाओं की निर्भरता घटे और देश का नियंत्रण बढ़े।

2. घरेलू सुरक्षा भंडार की क्षमता में वृद्धि
भारत ने अब पर्याप्त उच्च-सुरक्षा भंडारण सुविधाएँ (vault infrastructure) विकसित कर ली हैं, जहाँ बड़े पैमाने पर सोना सुरक्षित रखा जा सकता है।

3. भू-राजनीतिक जोखिमों से सुरक्षा
अंतरराष्ट्रीय संकट या प्रतिबंधों के समय विदेशों में रखा सोना अप्राप्य हो सकता है। भारत में संग्रहीत सोना आपात स्थिति में तुरंत उपलब्ध रहेगा।

4. विदेशी भंडारण लागत में कमी
विदेशी वॉल्ट में सोना रखने पर “custody” और “insurance” शुल्क देना पड़ता है। घरेलू भंडारण से इन खर्चों में कमी आएगी।

5. आरक्षित संपत्ति का रणनीतिक प्रबंधन
सोना मुद्रास्फीति और मुद्रा अस्थिरता के विरुद्ध एक मजबूत सुरक्षा कवच (hedge) है। अधिक सोना देश में रखने से आरबीआई को विदेशी मुद्रा भंडार के बेहतर प्रबंधन की लचीलापन मिलता है।

सोना भारत कैसे लाया जा रहा है?

  • प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय और उच्च-सुरक्षा व्यवस्था के तहत होती है।

  • सोना छोटे-छोटे बैचों में वायु मार्ग से सुरक्षित परिवहन द्वारा लाया जाता है।

  • विदेशी संस्थाओं जैसे Bank of England और BIS के साथ समन्वय स्थापित किया जाता है।

  • आरबीआई के अपने सुरक्षित वॉल्ट्स में इसे स्थानांतरित किया जाता है।

आर्थिक प्रभाव

1. भंडार संरचना में सुधार:
भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में सोने की हिस्सेदारी मार्च 2025 के 11.70% से बढ़कर सितंबर 2025 में 13.92% हो गई है।

2. आर्थिक सुरक्षा में मजबूती:
देश में अधिक सोना रखना भारत को वैश्विक वित्तीय संकटों या मुद्रा उतार-चढ़ाव से बचाव की अतिरिक्त क्षमता देता है।

3. मौद्रिक नीति में लचीलापन:
घरेलू स्वर्ण भंडार का उपयोग आवश्यकता पड़ने पर लिक्विडिटी प्रबंधन या मुद्रा स्वैप व्यवस्था में किया जा सकता है।

स्थिर तथ्य 

बिंदु विवरण
कुल स्वर्ण भंडार (सितंबर 2025) 880 टन
मार्च 2023 से अब तक लौटाया गया सोना 274 टन
भारत में संग्रहीत सोना 575.8 टन
विदेशों में संग्रहीत सोना 290.37 टन
स्वर्ण जमा योजनाओं में 13.99 टन
सोने का कुल भंडार में हिस्सा 13.92% (सितंबर 2025)
मुख्य उद्देश्य जोखिम घटाना, लागत बचाना, राष्ट्रीय नियंत्रण बढ़ाना

2025 में मुंबई एशिया के सबसे खुशहाल शहरों में शीर्ष पर

खुशी एक व्यक्तिगत अनुभव है, जो व्यक्ति के जीवन, परिवेश और शहर की गतिशीलता से आकार लेती है। हाल ही में टाइम आउट (Time Out) द्वारा एशिया के 18,000 से अधिक निवासियों पर किए गए सर्वेक्षण में मुंबई को एशिया का सबसे खुशहाल शहर (Happiest City in Asia 2025) घोषित किया गया। सर्वे में संस्कृति, भोजन, नाइटलाइफ़ और जीवन की समग्र गुणवत्ता जैसे मानकों का मूल्यांकन किया गया। भीड़भाड़ और व्यस्त जीवनशैली के बावजूद, मुंबई की अद्वितीय ऊर्जा और आकर्षण ने इसे शीर्ष स्थान दिलाया।

मुंबई की खुशी के प्रमुख कारण

1. उच्च “जॉय क्वोशेंट” (Joy Quotient)

  • 94% निवासियों ने कहा कि मुंबई उन्हें “खुशी” देती है।

  • सर्वे में शामिल सभी एशियाई शहरों में मुंबई खुशी के पैमानों पर सबसे आगे रही।

2. समुदाय की भावना (Sense of Community)

  • 89% लोगों ने कहा कि वे मुंबई में रहकर अन्य शहरों की तुलना में अधिक खुश हैं।

  • 88% निवासियों का मानना है कि उनके पड़ोसी वास्तव में खुशमिज़ाज और सहयोगी हैं।

3. खुशी में तेज़ वृद्धि (Growth in Happiness)

  • पिछले कुछ वर्षों में मुंबई में खुशी का स्तर 87% बढ़ा है।

  • बॉलीवुड, मनोरंजन और विविध जीवनशैली ने इसमें अहम भूमिका निभाई है।

4. जीवंत जीवनशैली (Vibrant Lifestyle)

  • बॉलीवुड और नाइटलाइफ़ से जुड़ा सामाजिक जीवन शहर को “कभी न सोने वाला शहर” बनाता है।

  • महत्वाकांक्षा और आशावाद मुंबई की पहचान हैं, जो निवासियों की खुशी को बढ़ाते हैं।

5. स्ट्रीट फूड संस्कृति (Street Food Culture)

  • वड़ा पाव, भेल पुरी जैसी प्रसिद्ध सड़क-खाद्य परंपराएँ शहर की आत्मा से जुड़ी हैं।

  • मरीन ड्राइव पर शाम की सैर और सड़क किनारे खाने का आनंद लोगों के दैनिक जीवन में खुशी जोड़ता है।

एशिया के शीर्ष 10 खुशहाल शहर (2025)

क्रमांक शहर
1 मुंबई (भारत)
2 बीजिंग (चीन)
3 शंघाई (चीन)
4 चियांग माई (थाईलैंड)
5 हनोई (वियतनाम)
6 जकार्ता (इंडोनेशिया)
7 हांगकांग
8 बैंकॉक (थाईलैंड)
9 सिंगापुर
10 सियोल (दक्षिण कोरिया)

मुख्य निष्कर्ष (Important Takeaways)

  • मुंबई की खुशी सांस्कृतिक, सामाजिक और जीवनशैली से जुड़ी है, न कि केवल बुनियादी ढांचे से।

  • खुशी सापेक्ष (Subjective) है — यह सामाजिक-आर्थिक वर्गों के अनुसार बदल सकती है।

  • मनोरंजन, समुदाय की भावना और स्ट्रीट फूड संस्कृति शहरी जीवन के संतुलन में बड़ा योगदान देती हैं।

  • यदि मुंबई पर्यावरणीय और बुनियादी ढांचा चुनौतियों को हल कर ले, तो इसका “वास्तविक खुशी सूचकांक” और भी बढ़ सकता है।

Miss Universe 2025: जानें कौन हैं मिस यूनिवर्स 2025 में शामिल होने वाली मनिका विश्वकर्मा?

Miss Universe 2025: थाईलैंड में जारी मिस यूनिवर्स 2025 (Miss Universe 2025) मुकाबले में भारतीय सुंदरी मनिका विश्वकर्मा (Manika Vishwakarma) का जलवा जारी है। राजस्थान की मनिका विश्वकर्मा ने मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व कर पूरे देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है। 74वीं मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में भारत की ओर से चयनित मनिका फिलहाल थाईलैंड में चल रही इस अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिता में हिस्सा ले रही हैं, जिसका फाइनल रिजल्ट 21 नवंबर को घोषित होगा।

कौन हैं मनिका विश्वकर्मा (Manika Vishwakarma)

मनिका विश्वकर्मा का जन्म राजस्थान के श्री गंगानगर में हुआ। वह अब दिल्ली में रहती हैं, क्योंकि पढ़ाई और मॉडलिंग दोनों ही यही से चल रही है। मनिका को उनके माता-पिता बहुत सपोर्ट करते हैं। मनिका विश्वकर्मा दिल्ली यूनिवर्सिटी के माता सुंदरी कॉलेज फॉर विमेन में पॉलिटिकल साइंस और इकोनॉमिक्स की फाइनल ईयर स्टूडेंट हैं। मनिका ट्रेंड क्लासिकल डांसर भी हैं। इसके अलावा उन्‍होंने ललित कला अकादमी और जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स से पेंटिंग का कोर्स भी किया है। वह NCC कैडेट भी रही हैं। इसके अलावा मनिका विदेश मंत्रालय के BIMSTEC इवेंट में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

मनिका विश्‍वकर्मा ने 2024 में सबसे पहले मिस यूनिवर्स राजस्थान का ताज जीता। फिर 18 अगस्त 2025 को जयपुर में मिस यूनिवर्स इंडिया 2025 बनीं। पिछली विनर रिया सिंघा ने खुद उनके सिर पर ताज रखा। उसी दिन सुबह राजस्थान का ताज उतारा और शाम को नेशनल ताज पहना।

बच्चों के लिए करती है ये काम 

मनिका ने न्यूरोनोवा नाम का प्लेटफॉर्म खुद शुरू किया। ये ADHD और न्यूरोडाइवर्जेंट बच्चों के लिए है। वो कहती हैं कि ये बीमारी नहीं, सुपरपावर है। लोग इन्हें विकार समझते हैं, लेकिन मनिका उन्हें अलग तरह की क्षमता बताती हैं।

कब है मिस यूनिवर्स का फाइनल

74वां मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता 21 नवंबर, 2025 को थाईलैंड के नोंथाबुरी में इम्पैक्ट चैलेंजर हॉल में आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन में मिस यूनिवर्स 2024, डेनमार्क की विक्टोरिया थेलविग, अपने उत्तराधिकारी को ताज सौंपेंगी। इससे पहले भारत तीन बार मिस यूनिवर्स का खिताब अपने नाम कर चुका है, जिसमें सुष्मिता सेन (1994), लारा दत्ता (2000) और हर्नाज संधू (2021) का नाम शामिल है।

 

Japan में 6.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, तेज झटकों के बाद सुनामी की चेतावनी

जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने 09 नवंबर को उत्तरी जापानी तट के पास एक शक्तिशाली भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने बताया कि 6.7 की शुरुआती तीव्रता वाला भूकंप इवाते प्रीफेक्चर के तट से दूर समुद्र की सतह से 10 किलोमीटर नीचे आया।

एजेंसी ने उत्तरी तटीय इलाके में 1 मीटर तक की सुनामी की चेतावनी जारी की। वहीं, जापान के पब्लिक ब्रॉडकास्टर NHK ने कहा कि देश के उत्तर में इवाते प्रीफेक्चर के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की गई है और निवासियों से तटीय इलाकों से दूर रहने को कहा गया है।

भूकंप की तीव्रता 6.7 मापी गई

मौसम विज्ञान एजेंसी (जेएमए) ने कहा कि भूकंप की तीव्रता 6.7 मापी गई और भूकंप का केंद्र इवाते प्रांत के तट पर समुद्र की सतह से 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। इतने तेज भूकंप के बाद जापान में सुनामी की चेतावनी जारी की गई है। उत्तरी तटीय क्षेत्र में समुद्र में एक मीटर तक सुनामी की लहरें उठने की की आशंका व्यक्त की गई है।

तटीय क्षेत्रों से दूर रहने की चेतावनी

सार्वजनिक प्रसारक एनएचके ने सुनामी के खतरे के कारण लोगों को तटीय क्षेत्रों से दूर रहने की चेतावनी दी है। उसके मुताबिक क्षेत्र में और अधिक भूकंप आ सकते हैं। एनएचके ने बताया कि इवाते प्रांत के ओफुनाटो शहर और ओमिनाटो बंदरगाह पर लगभग 10 सेंटीमीटर की सुनामी की सूचना है।

जापान में लगातार आते हैं भूकंप

जापान उन देशों में शुमार है, जहां दुनिया में सबसे ज्यादा भूकंप आते हैं। प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर पर स्थित होने के चलते यहां कई टेक्टोनिक प्लेटें मिलती हैं। इस कारण से जापान में लगातार भूकंप आते रहते हैं। जापान में सुनामी भी कई मौकों पर तबाही मचा चुकी है। सुनामी आने के लिहाज से भी जापान संवेदनशील देश है।

दुनिया में सबसे ज्यादा भूकंप जापान में आते हैं। इससे निपटने के लिए जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने आधुनिक भूकंप चेतावनी प्रणाली विकसित की है। साथ ही समुद्र में सुनामी सेंसर का व्यापक नेटवर्क स्थापित किया है। यह नेटवर्क समुद्री गतिविधियों की निगरानी करता है। इससे भूकंप के बाद सुनामी आने का आंकलन किया जाता है।

Surya Grahan 2026: जानें अगले साल कब लगेगा पहला सूर्य ग्रहण, क्या भारत में दिखाई देगा?

साल 2025 का काउंटडाउन शुरू हो गया है। लोगों में अब नए साल 2026 के लिए उत्सुकता बढ़ रही है। नए साल में ग्रहण किस दिन होंगे? पहला ग्रहण कब और कौन सा होगा? भारत में नजर आएगा या नहीं? दरसल भारत में ग्रहण का खगोलीय महत्व होने के साथ ही धार्मिक महत्व भी है।  भारत में ग्रहण नजर आने पर सूतक काल का विचार किया जाता है। इस दौरान मंदिरों के द्वार बंद रहते हैं और पूजा पाठ नहीं होता। आइए जानते हैं साल 2026 का पहला ग्रहण कौन सा होगा, कब होगा और भारत में नजर आएगा भी या नहीं?

सूर्य ग्रहण 2026 (Surya Grahan 2026)

साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2026) 17 फरवरी को लगने जा रहा है। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। इसे जिम्बाब्वे, दक्षिण अफ्रीका, जाम्बिया, मोजम्बीक, मॉरीशस, अंटार्कटिका सहित तन्जानिया और दक्षिण अमेरिकी देशों में देखा जा सकेगा।

क्या होता है सूतक समय

सूर्य ग्रहण लगने से 12 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है। इस दौरान मांगलिक काम और पूजा-पाठ करने की मनाही है। सूर्य ग्रहण के साथ ही सूतक काल का समापन होता है।

सूर्य ग्रहण क्या है?

सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है जो तब घटित होती है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है। जिससे सूर्य का प्रकाश कुछ समय के लिए अवरुद्ध हो जाता है। सरल शब्दों में, जब चंद्रमा सूर्य को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है तब सूर्य ग्रहण लगता है। ऐसा हमेशा अमावस्या के दिन होता है, जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में होते हैं।

सूर्य ग्रहण का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

धार्मिक दृष्टि से सूर्य ग्रहण के समय सूर्यदेव की पूजा व मंत्र जप करना अत्यंत शुभ माना गया है। पद्म पुराण में कहा गया है कि ग्रहण काल में किया गया जप, ध्यान और दान सौ गुना अधिक फलदायी होता है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक खगोलीय संयोग है। इस दौरान सूर्य की किरणों का कुछ भाग पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाता, जिससे कुछ स्थानों पर अस्थायी अंधकार फैल जाता है।

साल का दूसरा सूर्य ग्रहण

साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त, 2026 को लगेगा। श्रावण मास की हरियाली अमावस्या को यह ग्रहण लगेगा और ये भी भारत में नहीं दिखेगा। यह उत्तरी अमेरिका, अफ्रीका, यूरोप आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन में दिखाई देगा।

2026 में दो सूर्य और दो चंद्र ग्रहण

2026 में दो सूर्य और दो चंद्र ग्रहण लगेंगे। साथ ही, अगले साल दुर्लभ फुल ब्लड मून फिर से देखने को मिलेगा। 2026 साल का पहला ग्रहण सूर्य ग्रहण होगा, जो फरवरी में नजर आएगा। वहीं, साल का पहला चन्द्र ग्रहण मार्च में होलिका दहन के दिन लगेगा।

ग्रहण में क्या करें और क्या नहीं?

  • ग्रहण के सूतक काल में पूजा पाठ नहीं होता।
  • ग्रहण के दौरान खाना-पीना नहीं चाहिए।
  • खाने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालकर रखना चाहिए।
  • ग्रहण की समाप्ति के बाद घर और पूजा स्थल को गंगाजल का छिड़काव करके शुद्ध करना चाहिए।
  • ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और न ही ग्रहण देखना चाहिए।
  • ग्रहण के सूतक काल में भोजन बनाना, खाना, सोना, बाल काटना, तेल लगाना, सिलाई-कढ़ाई करना और चाकू चलाना नहीं चाहिए।

 

उत्‍तराखंड के 25 साल: पीएम मोदी ने 8 हजार करोड़ की परियोजनाओं की दी सौगात

उत्तराखंड के स्थापना दिवस (Uttarakhand Foundation Day) और रजत जयंती (Silver Jubilee) के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान (Forest Research Institute – FRI) में आयोजित भव्य समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने राज्य में ₹8,000 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। यह अवसर न केवल उत्तराखंड की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है, बल्कि केंद्र और राज्य के बीच “डबल इंजन सरकार” के सहयोगात्मक विकास मॉडल को भी दर्शाता है।

मुख्य विकास एवं कल्याणकारी पहलें

प्रधानमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में विकास को गति देने के लिए अनेक परियोजनाएँ आरंभ कीं, जिनमें शामिल हैं —

  • ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई योजनाएँ

  • ऊर्जा एवं शहरी विकास परियोजनाएँ

  • युवाओं के लिए तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रम

  • खेल अवसंरचना परियोजनाएँ, जिससे युवाओं को खेल और फिटनेस के अवसर मिलेंगे

इन परियोजनाओं से रोजगार सृजन, सेवा वितरण में सुधार और पहाड़ी क्षेत्रों के समग्र विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।

किसानों के लिए प्रत्यक्ष लाभ

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत ₹62 करोड़ से अधिक की राशि सीधे 28,000 से अधिक किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित की।

PMFBY का उद्देश्य: प्राकृतिक आपदाओं, कीटों या रोगों से फसल हानि की स्थिति में किसानों को बीमा कवरेज प्रदान करना।

इस पहल से किसानों को समय पर और पारदर्शी तरीके से सहायता सुनिश्चित हुई।

डाक टिकट और प्रदर्शनी का शुभारंभ

राज्य की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने स्मारक डाक टिकट (Commemorative Postage Stamp) जारी किया, जो उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान और प्रगति को दर्शाता है।

उन्होंने राज्य के स्थानीय नवाचारों और विकास मॉडलों पर आधारित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया तथा विभिन्न हितधारकों से संवाद किया।

प्रधानमंत्री का संबोधन: “नए उत्तराखंड” का संकल्प

अपने उद्बोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा —

  • उत्तराखंड के लोगों को स्थापना दिवस और रजत जयंती की बधाई दी।

  • पिछले 25 वर्षों में राज्य के पर्यटन, शिक्षा और आधारभूत ढांचे में हुई प्रगति की सराहना की।

  • राज्य की जैविक संपदा, हर्बल संसाधन और जलविद्युत क्षमता को “अवसरों के नए द्वार” बताया।

  • डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई कि राज्य को नई ऊँचाइयों पर ले जाया जाएगा।

  • युवाओं और स्थानीय निकायों से राज्य के अगले विकास चरण में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

संक्षिप्त तथ्य 

विषय विवरण
राज्य स्थापना दिवस 9 नवंबर 2000
अवसर उत्तराखंड की 25वीं वर्षगांठ (रजत जयंती – 2025)
कार्यक्रम स्थल वन अनुसंधान संस्थान (FRI), देहरादून
घोषित परियोजनाएँ ₹8,000 करोड़ से अधिक
PMFBY के अंतर्गत सहायता ₹62 करोड़ से अधिक
लाभार्थी किसान 28,000+
मुख्य क्षेत्र जल, सिंचाई, शिक्षा, ऊर्जा, शहरी विकास, कौशल एवं खेल
मुख्य संदेश डबल इंजन सरकार के माध्यम से समग्र विकास

ऐतिहासिक कदम: कर्नाटक भारत का पहला राज्य बना जिसमें मासिक धर्म के लिए सवेतन अवकाश मिलेगा

कर्नाटक सरकार ने लैंगिक समानता और कार्यस्थल समावेशन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए महिलाओं को प्रति वर्ष 12 दिन का सवेतन मासिक धर्म अवकाश (Paid Menstrual Leave) देने की मंज़ूरी दी है। यह नीति सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों पर लागू होगी, जिससे राज्य भारत का पहला प्रदेश बन गया है जिसने इस तरह का व्यापक कदम उठाया है।

नीति की प्रमुख बातें

  • लाभार्थी: कर्नाटक की सभी महिला कर्मचारी (सरकारी एवं निजी क्षेत्र)

  • अवकाश अवधि: प्रति माह 1 दिन — कुल 12 दिन प्रतिवर्ष

  • उद्देश्य: महिलाओं के स्वास्थ्य, गरिमा और कार्यक्षमता को समर्थन देना

  • लागू क्षेत्र: सभी सार्वजनिक, निजी और औद्योगिक प्रतिष्ठान

महत्व और प्रभाव

  1. जैविक वास्तविकता की स्वीकृति: मासिक धर्म के दौरान होने वाली थकान, दर्द और असुविधा को औपचारिक रूप से मान्यता देना एक संवेदनशील और यथार्थवादी नीति दृष्टिकोण है।

  2. उत्पादकता में सुधार: आराम और पुनर्प्राप्ति का अवसर मिलने से कार्यकुशलता और मनोबल दोनों में वृद्धि होगी।

  3. वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप: जापान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, ताइवान और स्पेन जैसे देशों में पहले से ही ऐसी नीतियाँ लागू हैं; कर्नाटक का कदम भारत को इसी प्रगतिशील श्रेणी में लाता है।

  4. शारीरिक श्रम वाले क्षेत्रों में राहत: विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए सहायक जो अधिक शारीरिक मेहनत वाले कार्य करती हैं।

समावेशी और संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता

  • लचीले कार्य घंटे या वर्क-फ्रॉम-होम विकल्प

  • कार्यस्थलों पर स्वच्छता सुविधाओं में सुधार

  • मासिक धर्म से जुड़ी जागरूकता और संवेदनशीलता अभियान

  • अवकाश को वैकल्पिक और गोपनीय रखना, ताकि कोई भेदभाव न हो

संक्षिप्त तथ्य 

विषय विवरण
राज्य कर्नाटक
नीति का प्रकार वार्षिक सवेतन मासिक धर्म अवकाश
लाभार्थी सभी महिला कर्मचारी (सरकारी और निजी क्षेत्र)
अवकाश की मात्रा प्रति वर्ष 12 दिन (प्रति माह 1 दिन)
महत्व भारत का पहला राज्य जिसने यह नीति लागू की
उद्देश्य महिलाओं के स्वास्थ्य, समानता और कार्यस्थल समावेशन को बढ़ावा देना

DNA के खोजकर्ता जेम्स वॉटसन का निधन

डीएनए खोजकर्ता नोबेल पुरस्कार विजेता जेम्स वॉटसन का 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। जेम्स वॉटसन ने 1953 में डीएनए की ट्विस्टेड-लैडर संरचना (डबल हेलिक्स) की खोज की थी। इसी खोज के बाद से चिकित्सा, अपराध जांच, जीनोलॉजी और नैतिकता के क्षेत्र में नई क्रांति आई।

दरअसल, जेम्स वॉटसन ने 1953 में ब्रिटिश वैज्ञानिक फ्रांसिस क्रिक के साथ मिलकर डीएनए की डबल हेलिक्स संरचना की पहचान की थी। जो 20वीं सदी की सबसे बड़ी वैज्ञानिक खोजों में से एक है। यह ऐतिहासिक खोज विज्ञान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक थी। हालांकि, नस्ल और लिंग पर उनके विवादित बयानों ने उनको भारी नुकसान पहुंचाया। जिसके चलते वैज्ञानिक समुदाय ने उनसे दूरी बना ली।

जेम्स वाटसन: नोबेल पुरस्कार  

जेम्स वाटसन को 1962 में फ्रांसिस क्रिक और मौरिस विल्किंस के साथ नोबेल पुरस्कार मिला था, क्योंकि उन्होंने यह खोज की थी कि डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड या डीएनए एक डबल हेलिक्स है, जिसमें दो स्ट्रैंड होते हैं जो एक दूसरे के चारों ओर कुंडलित होकर एक लंबी, धीरे-धीरे मुड़ने वाली सीढ़ी जैसा आकार बनाते हैं। यह खोज विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि थी। इससे तुरंत पता चल गया कि आनुवंशिक जानकारी कैसे संग्रहीत होती है और कोशिकाएँ विभाजित होने पर अपने डीएनए की प्रतिलिपि कैसे बनाती हैं।

जेम्स वॉटसन: उपलब्धि

शिकागो में जन्मे जेम्स वॉटसन की यह उपलब्धि, जो उस समय मिली जब वे मात्र 24 वर्ष के थे, उन्हें विज्ञान की दुनिया में दशकों तक एक प्रतिष्ठित व्यक्ति बना दिया। लेकिन अपने जीवन अंतिम में विवादित टिप्पणियों के कारण उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। उनकी आपत्तिजनक टिप्पणियों में यह भी था कि अश्वेत लोग श्वेत लोगों से कम बुद्धिमान होते हैं।

वाटसन के बयान 

2007 में, जब वो पहले कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की कैवेंडिश लैब में काम कर चुके थे, उन्होंने लंदन की संडे टाइम्स मैगजीन से कहा कि वो “अफ्रीका के भविष्य को लेकर निराश” हैं, क्योंकि “हमारी सारी नीतियां यह मानकर बनी हैं कि अफ्रीकी लोगों की बुद्धि हमारे जैसी ही है — जबकि सभी टेस्ट कुछ और बताते हैं.” इस बयान के बाद उन्हें न्यूयॉर्क की कोल्ड स्प्रिंग हार्बर लैब में चांसलर के पद से हटा दिया गया था।

2019 में उन्होंने फिर से ऐसा ही बयान दिया — जब उन्होंने कहा कि नस्ल और आप कितने बुद्धिमान है इस के बीच संबंध है — तो लैब ने उनसे सभी उपाधियां छीन लीं, जैसे चांसलर एमेरिटस, प्रोफेसर एमेरिटस और मानद ट्रस्टी।

लैब ने कहा कि डॉ. वॉटसन के बयान गलत हैं और विज्ञान उनका समर्थन नहीं करता। डीएनए की खोज 1869 में हुई थी, लेकिन तब वैज्ञानिक इसकी संरचना नहीं जानते थे।

स्थैतिक तथ्य

  • नाम: जेम्स डेवी वॉटसन
  • जन्म: 6 अप्रैल, 1928, शिकागो, अमेरिका
  • निधन: 7 नवंबर, 2025, ईस्ट नॉर्थपोर्ट, न्यूयॉर्क (आयु 97)
  • डीएनए संरचना (डबल हेलिक्स) के सह-खोजकर्ता: 1953
  • सहयोगी: फ्रांसिस एच.सी. क्रिक
  • शरीरक्रिया विज्ञान या चिकित्सा में नोबेल पुरस्कार: 1962
  • प्रसिद्ध पुस्तक: द डबल हेलिक्स (1968)

प्रधानमंत्री मोदी ने नेक्सकार19 लॉन्च किया: भारत की पहली घरेलू कार टी-सेल थेरेपी

भारत के स्वास्थ्य और जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2025 में NexCAR19 — भारत की पहली स्वदेशी CAR T-सेल थेरेपी — का शुभारंभ किया। यह नवाचार कैंसर उपचार में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने की दिशा में भारत का निर्णायक कदम है। इसे इम्यूनोACT (IIT बॉम्बे इनक्यूबेटेड स्टार्टअप), टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, DBT (जैव प्रौद्योगिकी विभाग) और BIRAC के सहयोग से विकसित किया गया है।

NexCAR19 क्या है?

NexCAR19 एक उन्नत CAR (Chimeric Antigen Receptor) T-सेल थेरेपी है — जिसमें मरीज की अपनी T-कोशिकाओं (T-cells) को जेनेटिक रूप से संशोधित किया जाता है ताकि वे कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर नष्ट कर सकें।
यह विशेष रूप से B-सेल ब्लड कैंसर, जैसे कि

  • ल्यूकेमिया (Leukemia)

  • लिंफोमा (Lymphoma)
    के इलाज के लिए बनाई गई है।
    यह उन मरीजों के लिए वरदान साबित हो सकती है जिन पर पारंपरिक इलाज (जैसे कीमोथेरेपी या रेडिएशन) प्रभावी नहीं होता।

CAR T-सेल थेरेपी कैसे काम करती है

  1. संग्रह (Collection): मरीज के खून से T-सेल निकाले जाते हैं।

  2. इंजीनियरिंग (Engineering): इन कोशिकाओं को प्रयोगशाला में इस तरह बदला जाता है कि वे कैंसर-विशिष्ट एंटीजन को पहचान सकें।

  3. गुणन (Multiplication): संशोधित कोशिकाओं को बड़ी संख्या में बढ़ाया जाता है।

  4. इंफ्यूजन (Infusion): इन T-सेल्स को दोबारा मरीज के शरीर में प्रविष्ट कराया जाता है ताकि वे कैंसर कोशिकाओं को निशाना बना सकें।

यह थेरेपी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) को ही कैंसर से लड़ने का सबसे शक्तिशाली हथियार बना देती है।

भारत के लिए NexCAR19 का महत्व

वैज्ञानिक और स्वदेशी उपलब्धि

NexCAR19 भारत में विकसित पहली CAR T-सेल थेरेपी है, जिससे विदेशी उपचारों पर निर्भरता कम होगी — जो पहले ₹3–4 करोड़ तक महंगे होते थे।

मेक इन इंडिया का उदाहरण

यह “आत्मनिर्भर भारत” मिशन के अंतर्गत स्वास्थ्य नवाचार (health innovation) का प्रतीक है — भारत अब बायोटेक्नोलॉजी के वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास के साथ खड़ा है।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत

अब भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जो जीन और सेल थेरेपी विकसित करने में सक्षम हैं — जैसे अमेरिका, चीन और जर्मनी।

साझा अनुसंधान की शक्ति

IIT बॉम्बे, टाटा मेमोरियल सेंटर, DBT और BIRAC का यह संयुक्त प्रयास भारत की “अकादमिक–उद्योग साझेदारी” की सफलता को दर्शाता है।

कैंसर उपचार में प्रभाव

भारत में कैंसर, विशेष रूप से रक्त कैंसर, एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है। NexCAR19 इसके उपचार में नई उम्मीद लेकर आया है —

  • पुनरावृत्त (relapsed) मरीजों के लिए आशा

  • व्यक्तिगत (personalized) इलाज

  • कम लागत में उन्नत थेरेपी

  • भारत में ही उच्चस्तरीय उपचार की उपलब्धता

यह नवाचार भारत में ऑन्कोलॉजी (Oncology) के क्षेत्र को और अधिक सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

मुख्य तथ्य (Static GK Facts)

विवरण जानकारी
थेरेपी का नाम NexCAR19
प्रकार CAR (Chimeric Antigen Receptor) T-सेल थेरेपी
लक्षित कैंसर B-सेल ल्यूकेमिया और लिंफोमा
विकसित करने वाला ImmunoACT (IIT बॉम्बे इनक्यूबेटेड स्टार्टअप)
सहयोगी संस्थान टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल
समर्थन द्वारा DBT और BIRAC
लॉन्च करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
लॉन्च तिथि नवंबर 2025

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