प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अप्रैल, 2026 को कर्नाटक का दौरा किया और श्री आदिचंचनगिरी महासंस्थान मठ में ‘श्री गुरु भैरवैय मंदिर’ का उद्घाटन किया। यह दौरा भारत की गहरी आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को उजागर करता है। प्रधानमंत्री ने इस नवनिर्मित मंदिर को सेवा और ज्ञान का प्रतीक बताया, जो शाश्वत आध्यात्मिक मूल्यों को संजोए हुए है और देश की समृद्ध संस्कृति तथा विरासत को दर्शाता है।
श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर का उद्घाटन
श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर उस मठ से जुड़ी आध्यात्मिक परंपरा और शिक्षाओं के प्रति एक श्रद्धांजलि के रूप में स्थापित है।
उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक चेतना को संरक्षित करने का महत्व, सेवा, अनुशासन और करुणा के मूल्यों के माध्यम से समाज का मार्गदर्शन करता रहेगा।
ज्वाला पीठ और कालभैरव मंदिर का दौरा
राज्य के अपने दौरे के दौरान, प्रधानमंत्री ने ज्वाला पीठ और श्री कालभैरव मंदिर में भी पूजा-अर्चना की।
इससे उस क्षेत्र के आध्यात्मिक महत्व को भी और बल मिला।
ये दौरे कर्नाटक के सांस्कृतिक महत्व को भी दर्शाते हैं, जो धार्मिक आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों का केंद्र है।
श्री बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी को श्रद्धांजलि
PM मोदी ने भी बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी को श्रद्धांजलि अर्पित की है।
उन्होंने उन्हें आध्यात्मिकता और समाज सेवा का प्रकाश-स्तंभ बताया।
उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में महास्वामीजी के योगदान को भी रेखांकित किया, जिसने बड़ी संख्या में लोगों पर सकारात्मक प्रभाव डाला है।
यह दौरा क्यों महत्वपूर्ण है
यह दौरा सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक पर्यटन और सामुदायिक मूल्यों को बढ़ावा देने पर सरकार के ज़ोर को दर्शाता है।
यह सामाजिक विकास और राष्ट्र-निर्माण में, और विशेष रूप से शिक्षा और कल्याण जैसे क्षेत्रों में, आध्यात्मिक संस्थाओं की भूमिका को भी उजागर करता है।


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