National logistics policy 2022: जानिए क्या है ये, कैसे होगा फायदा

हाल ही में सरकार ने राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति 2022 शुरू की है। इसका उद्देश्य ‘अंतिम छोर तक त्वरित वितरण’ करना है, साथ ही परिवहन से संबंधित चुनौतियों को समाप्त करना है। प्रधानमंत्री ने इस पॉलिसी की शुरुआत करते हुए इसकी सभी खूबियां गिनाईं और अपने संबोधन में कहा कि विकास की तरफ बढ़ते भारत को यह नीति एक नई दिशा देगी।

जानें पॉलिसी से क्या होगा फायदा

इस राष्ट्रीय रसद नीति के लागू होने के बाद कोविड से प्रभावित अर्थ व्यवस्था को रफ्तार मिलेगी। इससे सामानों की सप्लाई में आने वाली समस्याओं को हल करने में सहायता मिलेगी और साथ ही माल ढुलाई में होने वाली ईंधन की खपत को कम करने की दिशा में भी फायदा होगा। फिलहाल भारत में लॉजिस्टिक्स यानी माल ढुलाई हेतु ज्यादातर सड़क, उसके बाद जल परिवहन और फिर हवाई मार्ग का इस्तेमाल किया जाता है।

भारत अपनी जीडीपी का लगभग 13 से 14 प्रतिशत हिस्सा लॉजिस्टिक्स यानी माल ढुलाई पर खर्च कर देता है जबकि जर्मनी और जापान जैसे देश इसी के लिए 8 से 9 फीसदी ही खर्च करते हैं। इस पॉलिसी के लागू होने से लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को भी मजबूती मिलेगी तथा इस पर खर्च भी कम हो जाएगा।

क्या है National Logistics Policy?

राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति में सिंगल रेफरेंस पॉइंट बनाया गया है जिसका उद्देश्य अगले 10 सालों में लॉजिस्टिक्स सेक्टर की लागत को 10 प्रतिशत तक लाया जाना है, जो अभी जीडीपी का 13-14 प्रतिशत है। फिलहाल माल ढुलाई यानी लॉजिस्टिक्स का ज्यादातर का काम भारत में सड़कों के माध्यम से होता है। इस पॉलिसी के अंतर्गत अब माल ढुलाई का काम रेल ट्रांसपोर्ट के साथ-साथ शिपिंग और एयर ट्रांसपोर्ट से होगा। इससे सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि सड़कों पर ट्रैफिक कम होगा तथा दूसरे ईंधन की बचत होगी। पैसे और समय दोनों कम लगेंगे।

इस नीति का महत्त्व क्या है?

राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नीति के शुभारंभ के साथ पीएम गति शक्ति को और बढ़ावा एवं पूरकता मिलेगी। यह नीति इस क्षेत्र को देश में एक एकीकृत, लागत-कुशल, लचीला तथा सतत लॉजिस्टिक परितंत्र बनाने में सहायता करेगी क्योंकि यह नियमों को सुव्यवस्थित करने व आपूर्ति-पक्ष की बाधाओं को दूर करने के साथ-साथ क्षेत्र के सभी बुनियादों को कवर करती है। यह नीति भारतीय वस्तुओं की प्रतिस्पर्द्धात्मकता में सुधार, आर्थिक विकास एवं रोजगार के अवसरों को बढ़ाने का एक प्रयास है।

RBI ने डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने हेतु तीन नए डिजिटल भुगतान पहल की शुरुआत की

 

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) गर्वनर शक्तिकांत दास ने डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने हेतु तीन नए डिजिटल भुगतान पहल की शुरुआत की है। मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2022 में आरबीआई गर्वनर ने यूपीआई पर रुपे क्रेडिट कार्ड, यूपीआई लाइट और भारत बिलपे क्रॉस-बॉर्डर बिल पेमेंट सोल्यूशंस सेवा को लॉन्च किया है। ऐसा  माना जा रहा है कि इन सेवाओं के शुरू होने के बाद तीस करोड़ और नए लोग डिजिटल पेमेंट के इस सिस्टम के साथ जुड़ सकेंगे। शक्तिकांत दास ने कहा कि आरबीआई ग्राहकों की सुरक्षा के ध्यान में रखते हुए फिनटेक कंपनियों के इंनोवेशन को सभी प्रकार से सपोर्ट करने के लिए तैयार है।

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रुपे क्रेडिट कार्ड के साथ यूपीआई लिंक का लाभ

रुपे क्रेडिट कार्ड के साथ यूपीआई लिंक से कस्टमर्स और मर्चेंट दोनों को लाभ होगा। क्यूआर कोड के माध्यम से कस्टमर्स क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर सकेंगे। रुपे क्रेडिट कार्ड वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (वीपीए) यानी यूपीआई आईडी से जुड़ा होगा। इस प्रकार सीधे एवं सुरक्षित भुगतान लेनदेन किया जा सकेगा। सबसे पहले पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक के ग्राहक BHIM ऐप के साथ UPI पर RuPay क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर सकेंगे।

 

UPI Lite क्या है ?

छोटे वैल्यू का ट्रांजैक्शन बेहद सरल एवं आसान तरीके से यूपीआई लाइट के जरिए किया जा सकेगा। भारत में 50 प्रतिशत से ज्यादा 200 रुपये से कम वैल्यू वाले यूपीआई भुगतान किया जाता है। BHIM App पर यूपीआई लाइट के जुड़ जाने के बाद उपयोगकर्ता निकट- ऑफलाइन मोड में छोटे मूल्य के लेनदेन कर सकेंगे। ये यूपीआई प्लेटफॉर्म पर एक दिन में एक अरब लेनदेन को हासिल करने में मदद करेगा। UPI लाइट भुगतान लेनदेन की ऊपरी सीमा 200 रुपये होगी जबकि डिवाइस पर वॉलेट के लिए UPI लाइट शेष राशि की कुल सीमा किसी भी समय 2,000 रुपये होगी।

भारत बिलपे क्रॉस-बार्डर बिल पेमेंट क्या है ?

आरबीआई गर्वनर ने इस वर्ष अप्रैल में मॉनिटरी पॉलिसी की घोषणा करते हुए कहा था कि विदेशों में रह रहे भारतीयों को अपने वतन में रह रहे परिवार के सदस्यों के बिल के भुगतान करने में आसानी के लिए बिल पेमेंट सिस्टम की शुरुआत की जाएगी। विदेशों में तीन करोड़ से ज्यादा भारतीय रह रहे हैं। भारत बिलपे क्रॉस-बार्डर बिल पेमेंट फैसिलिटी के शुरू होने के बाद गैर-प्रवासी भारतीय देश में परिवार के सदस्यों के बिजली से लेकर पानी का बिल और स्कूल फीस का भुगतान कर सकेंगे।

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RBI Removes Central Bank of India from PCA Framework_80.1

रेटिंग एजेंसी क्रेडिट सुईस ने ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट जारी की

 

रेटिंग एजेंसी क्रेडिट सुईस ने ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट जारी की। इसके अनुसार भारत में आय से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन करने पर पता चला कि कोरोना काल में देश आर्थिक असमानता काफी बढ़ गई थी। 2020 में यह दर अपने चरम 82.3 फीसदी पर पहुंच गई थी और 2021 तक बरकरार थी। बता दें कोरोना महामारी ने दुनियाभर में तबाही मचाई। इस दौरान लॉकडाउन की वजह से उद्योग-धंधे चौपट हो गए और करोड़ों लोगों की नौकरी चली गई। इस वजह से देश में आर्थिक असमानता बढ़ गई थी। क्रेडिट सुइस के मुताबिक 2021 में भारत में 7.96 लाख करोड़पति थे, जिनकी संख्या 2026 तक 105 फीसदी बढ़कर 16.32 लाख हो जाएगी।

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क्रेडिट सुइस के ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट 2022 के मुताबिक मौजूदा समय से लेकर 2026 तक भारत में करोड़पतियों की संख्या दोगुनी हो जाएगी। वहीं चीन में करोड़पतियों की संख्या मौजूदा लेवल से 97 प्रतिशत ज्यादा होगी। दुनिया के सबसे बड़े अर्थव्यवस्था संयुक्त राज्य अमेरिका में 13 फीसदी करोड़पति बढ़ जायेंगे। वहीं पूरी दुनिया में करोड़पतियों की संख्या 2021 के 2.50 करोड़ से बढ़कर 8.70 करोड़ हो जाएगी।

 

अमेरिका में सबसे ज्यादा करोड़पति होंगे। दूसरे स्थान पर चीन है। लेकिन अमेरिका और चीन के बीच फासला बहुत ज्यादा है। दुनिया के कुल करोड़पतियों में भारत की हिस्सेदारी मात्र 1 फीसदी के करीब है। वहीं कुल करोड़पतियों में अमेरिका की हिस्सेदारी 39 फीसदी है।

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भारत में मंदी की संभावना नहीं: एसएंडपी

 

वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने कहा कि अमेरिका और यूरो क्षेत्र भले ही मंदी की ओर बढ़ रहे हों लेकिन भारत पर इसका असर पड़ने की आशंका नहीं है। उसने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अर्थव्यवस्था से बहुत ज्यादा जुड़ी हुई नहीं है। पास विदेशी मुद्रा का पर्याप्त भंडार है वहीं आपकी कंपनियां भी अच्छा बहीखाता कायम रखने में सफल रही हैं।

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ग्रुएनवाल्ड ने कहा कि देखा जाए तो भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था से कभी भी पूरी तरह से जुड़ा नहीं था और इसलिए यह वैश्विक बाजारों से तुलनात्मक रूप से स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोप में मंदी आती है तो बहुत कुछ वैश्विक कोष के प्रवाह पर भी निर्भर करेगा।

 

मंदी का भारत पर असर नहीं

 

अमेरिका और यूरो क्षेत्र भले ही मंदी की तरफ बढ़ रहे हों, लेकिन भारत पर इसका असर पड़ने की आशंका नहीं है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने यह बात कही। उसने कहा कि ऐसा इसलिए है, क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अर्थव्यवस्था से बहुत ज्यादा जुड़ी हुई नहीं है। एसएंडपी ग्लोबल में मुख्य अर्थशास्त्री एवं प्रबंध निदेशक पॉल एफ ग्रुएनवाल्ड ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी व्यापक घरेलू मांग की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था से बहुत ज्यादा अलग है।

 

हालांकि, भारत ऊर्जा का शुद्ध आयात करता है। आपके पास विदेशी मुद्रा का पर्याप्त भंडार है। वहीं, आपकी कंपनियां भी अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। ग्रुएनवाल्ड ने कहा कि देखा जाए तो भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था से कभी भी पूरी तरह से जुड़ा नहीं था। इसलिए यह वैश्विक बाजारों से तुलनात्मक रूप से स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोप में मंदी आती है, तो बहुत कुछ वैश्विक फंड के प्रवाह पर भी निर्भर करेगा।

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कैबिनेट ने सौर सेल के लिए अतिरिक्त पीएलआई योजना को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत में सौर फोटोवोल्टिक (पीवी) मॉड्यूल के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शन लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की दूसरी किश्त को मंजूरी दे दी। बता दें केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक प्रेस वार्ता में घोषणा की। पीएलआई योजना की दूसरी किश्त के साथ सरकार उम्मीद कर रही है कि देश में पूरी तरह से और आंशिक रूप से एकीकृत, सौर पीवी मॉड्यूल की लगभग 65GW प्रति वर्ष विनिर्माण क्षमता स्थापित की जाएगी।

पीएलआई योजना की दूसरी किश्त

“उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल’ पर राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए पीएलआई योजना की दूसरी किश्त को 19,500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ अनुमोदित किया गया है। इसके माध्यम से हम भारत में सौर पीवी मॉड्यूल में गीगा वाट (जीडब्ल्यू) पैमाने की विनिर्माण क्षमता हासिल करने पर विचार कर रहे हैं, जिससे अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में आयात निर्भरता कम हो सके। यह सरकार की आत्मानिर्भर भारत पहल को भी मजबूत करेगा और रोजगार पैदा करेगा।

2030 तक इतना बिजली क्षमता का लक्ष्य

भारत में वर्तमान में सोलर वेफर्स और पॉलीसिलिकॉन का कोई निर्माण नहीं है। इस योजना के माध्यम से, सरकार तीन श्रेणियों में सौर भागों के निर्माण पर जोर देगी, जिसमें मुख्य रूप से एकीकृत इकाइयों के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, और अन्य दो को वेफर्स-पॉलीसिलिकॉन और सेल-मॉड्यूल के बीच समान रूप से विभाजित किया जाएगा। सरकार ने 2030 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों से 500GW स्थापित बिजली क्षमता का लक्ष्य भी निर्धारित किया है, जिसका मतलब लगभग 280-300GW सौर ऊर्जा की क्षमता होगी।

सौर पीवी मॉड्यूल पर राष्ट्रीय कार्यक्रम का उद्देश्य

उच्च दक्षता के सौर पीवी मॉड्यूल पर राष्ट्रीय कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल के विनिर्माण के लिए एक परिवेश तैयार करना और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आयात निर्भरता को कम करना है। साथ ही यह आत्मनिर्भर भारत पहल को मजबूत करेगा और रोजगार पैदा करेगा।

योजना से प्रत्यक्ष रोजगार

इसमें कहा गया है कि योजना से प्रत्यक्ष रूप से करीब 94,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा। साथ ही ईवीए, सौर ग्लास आदि जैसी अन्य सामाग्रियों की विनिर्माण क्षमता सृजित होगी। इसके अलावा इससे प्रत्यक्ष रूप से 1,95,000 तथा परोक्ष रूप से 7,80,000 रोजगार सृजित होंगे। इससे लगभग 1.37 लाख करोड़ रुपये के आयात में कमी आने का अनुमान है। इसके अतिरिक्त सौर पीवी मॉड्यूल में दक्षता में सुधार के लिए अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।

संस्कृत विद्वान पद्मश्री आचार्य रामायण शुक्ल का निधन

 

पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित, संस्कृत विद्वान और काशी विद्वत परिषद के पूर्व अध्यक्ष आचार्य राम यत्ना शुक्ला का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। संस्कृत व्याकरण और वेदांत शिक्षण और आधुनिकीकरण के नए तरीकों का आविष्कार करने की दिशा में उनके योगदान के कारण उन्हें लोकप्रिय रूप से “अभिनव पाणिनी” कहा जाता है।

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आचार्य रामयत्न शुक्ल के बारे में:

  • आचार्य रामयत्न शुक्ल, जिनका जन्म 15 जनवरी 1932 को भदोही जिले, उत्तर प्रदेश (यूपी) में हुआ था, संस्कृत व्याकरण के विद्वान थे और उन्होंने प्राचीन और संस्कृत ग्रंथों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • वे यूपी नागकूप शास्त्रथ समिति और सनातन संस्कृति संवर्धन परिषद के संस्थापक थे, जो संस्कृत भाषा और समाज के नैतिक मूल्यों के उत्थान में लगे हुए हैं।
  • उन्होंने संपूर्ण नंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी, यूपी में विभागाध्यक्ष (एचओडी) और डीन के रूप में भी कार्य किया।
  • उन्होंने वाराणसी (यूपी) में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), पुडुचेरी में फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ इंडोलॉजी, नई दिल्ली में लाल बहादुर शास्त्री विश्वविद्यालय जैसे भारत के प्रमुख संस्थानों के प्रिंसिपल, लेक्चरर, रीडर और विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में कार्य किया।

पुरस्कार:

 

उन्हें केशव पुरस्कार, वाचस्पति पुरस्कार और विश्वभारती पुरस्कार सहित 25 से अधिक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। उन्हें “महामहोपाध्याय” की उपाधि से भी सम्मानित किया गया है। सामाजिक कार्यों में उनके अपार योगदान के लिए उन्हें 2021 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने कई किताबें और शोध पत्र लिखे हैं। उनके प्रमुख प्रकाशनों में से एक “व्याकरण दर्शन सृष्टि प्राक्रिया विवाद” है।

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चेक गणराज्य की लिंडा फ्रुहविर्टोवा ने चेन्नई ओपन 2022 का खिताब जीता

 

चेक गणराज्य की 17 वर्षीय लिंडा फ्रुहविर्टोवा ने चेन्नई ओपन 2022 डब्ल्यूटीए 250 टेनिस एकल जीतने के लिए शानदार वापसी की। लिंडा ने चेन्नई ओपन 2022 का खिताब जीतकर सबको चौंका दिया है। चेक गणराज्य की रहने वाली यंग लिंडा चेन्नई ओपन डब्ल्यूटीए 250 टेनिस टूर्नामेंट के एकल फाइनल में नंबर 3 की खिलाड़ी सीड मैग्डा लिनेट को 4-6 6-3 6-4 से हराकर अपना पहला टूर खिताब जीता है। बीच में 17 वर्षीय लिंडा निर्णायक मुकाबले में 1-4 से पिछड़ रही थीं लेकिन वहां से जबरदस्त वापसी करते हुए लिंडा ने यह खिताब जीत लिया।

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चेन्नई ओपन डब्ल्यूटीए टूर्नामेंट के बारे में:

 

चेन्नई ओपन 14 वर्षों में भारत में आयोजित पहला डब्ल्यूटीए टूर्नामेंट था। टेनिस की दिग्गज सेरेना विलियम्स ने फाइनल में स्विट्जरलैंड की पूर्व विश्व नंबर 7 पैटी श्नाइडर को हराकर 2008 में बैंगलोर ओपन जीता, जबकि एथेंस 2004 ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता सन टियांटियन और चीन की पेंग शुआई ने युगल खिताब जीता।

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PM CARES Fund: सरकार ने उद्योगपति रतन टाटा को ट्रस्टी नियुक्त किया

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ उद्योगपति रतन टाटा को एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। सरकार ने रतन टाटा को ‘PM केयर्स’ फंड का नया ट्रस्टी नियुक्त किया है। रतन टाटा के साथ देश के कई अन्य सम्मानित व्यक्तियों को भी ‘PM केयर्स’ फंड की सलाहकार समिति में नियुक्त किया गया है। ये बैठक ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में इसकी एक बैठक भी संपन्न हुई है। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्माता सीतारमण भी मौजूद रहीं।

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बता दें उनके साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश केटी थॉमस और लोकसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर करिया मुंडा को भी पीएम केयर्स फंड का ट्रस्टी बनाया गया है। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, रतन टाटा के अलावा एडवाइजरी बोर्ड में पूर्व कैग राजीव महर्षि, इन्फोसिस फाउंडेशन की पूर्व चेयरपर्सन सुधा मूर्ति, इंडिकॉर्प्स और पिरामल फाउंडेशन के पूर्व सीईओ आनंद शाह को भी नॉमिनेट किया गया है।

 

पीएम केयर्स फंड की स्थापना

 

पीएम केयर्स फंड की स्थापना कोविड-19 महामारी की शुरुआत के कुछ दिन बाद की गई थी। इस फंड की शुरुआत महामारी के कारण उत्पन्न हुई किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में मदद मुहैया कराने और प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान करने के लिए की गई थी। इस फंड में किसी भी शख्स या संस्थान द्वारा स्वैच्छिक रूप से दान किया जा सकता था। इसमें किए गए डोनेशन पर टैक्स छूट के लिए दावा भी किया जा सकता है। फाइनेंशियल ईयर 2020-21 में पीएम केयर्स फंड में लगभग 7,032 करोड़ रुपये जुटाए गए थे।

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National logistics policy 2022: The New Policy and History Explained_70.1

World Rose Day 2022: जानें विश्व गुलाब दिवस का इतिहास

 

दुनियाभर में 22 सितंबर को विश्व गुलाब दिवस (World Rose Day) मनाया जाता है। कैंसर पीड़ितों से मानवीय व्यवहार करने और उनका दुख बांटने के लिए हर साल 22 सितंबर को वर्ल्ड रोज डे मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का खास उद्देश्य ही कैंसर से लड़ने वाले लोगों को जीने की प्रेरणा देना और उनके जीवन में खुशियां लाना है।

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ये दिन कैंसर के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए है। यह एक ऐसा दिन है जो कैंसर से लड़ने वाले लोगों में आशा और उत्साह फैलाने के लिए समर्पित है, क्योंकि लगभग सभी कैंसर के इलाज में शारीरिक रूप से बहुत कष्ट होता है। उसके अतिरिक्त कैंसर आपके दिमाग और दिल को भी प्रभावित करता है।

 

विश्व गुलाब दिवस का इतिहास

22 सितंबर को हर साल रोज डे कनाडा की मेलिंडा रोज की याद में मनाया जाता है। मेलिंडा रोज को 12 साल की उम्र में ब्लड कैंसर हो गया था। ये ब्लड कैंसर का एक दुर्लभ रूप था, जिसे एस्किंस ट्यूमर का नाम दिया गया। इलाज के बाद डॉक्टरों ने कहा था कि मेलिंडा रोज एक हफ्ते से ज्यादा जीवित नहीं रह पाएंगी। लेकिन वह 6 महीने तक जीवित रही। मेलिंडा रोज इन 6 महीनों में कैंसर को हराने की उम्मीद कभी नहीं छोड़ी। मेलिंडा रोज ने कई लोगों के जीवन को प्रभावित किया। इन 6 महीनों में मेलिंडा ने कैंसर रोगियों के साथ समय बिताया। उनके जीवन में कुछ खुशियाँ लाने के लिए छोटे नोट्स, कविताएं और ई-मेल लिखें। खुशी और आशा फैलाना उसके जीवन का मिशन बन गया था।

 

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बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने 4 लोगों को ‘गोलकीपर्स ग्लोबल गोल्स अवार्ड्स’ से सम्मानित किया

बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने भारत की राधिका बत्रा, अफगानिस्तान की जारा जोया, युगांडा की वेनेसा नाकाटे और यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सुला वोन डेर लेयेन को संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने की दिशा में उनके असाधारण कार्य के लिए सम्मानित किया है। फाउंडेशन ने कहा कि इन लोगों को ‘गोलकीपर्स ग्लोबल गोल्स अवार्ड्स’ न्यूयॉर्क के लिंकन सेंटर में इन्हें अपने समुदाय और दुनिया भर में सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में किए गए कार्य के जरिये ‘समाज में बदलाव लाने’ पर सम्मानित किया गया।

यह पुरस्कार क्यों दिया गया?

 

गैर-लाभकारी संगठन ‘एवरी इन्फैंट मैटर्स’ की सह-संस्थापक राधिका बत्रा को भारत में वंचित वर्ग के बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य समाधान प्रदान करने में उनके काम के लिए पुरस्कृत किया गया है। अफगानिस्तान मकी पत्रकार जारा जोया को वहां की कहानियां बताने में उनकी प्रतिबद्धता व समर्पण के लिए पुरस्कृत किया गया। वेनेसा नाकाटे युगांडा की जलवायु कार्यकर्ता हैं और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वोन डेर लेयेन को उनके देश में सामाजिक क्रांति लाने के लिए पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

 

इन्होंने दिए अवार्ड

 

बिल गेट्स और मेलिंडा फ्रेंच गेट्स द्वारा प्रस्तुत 2022 का ग्लोबल गोलकीपर पुरस्कार उन्हें दिया जाता है जिन्होंने सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में वैश्विक स्तर पर प्रगति की हो। पुरस्कार देने वालों में नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई और मनोरंजन के क्षेत्र की लिली सिंह भी शामिल थीं।

 

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