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आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नादेंडला भास्कर राव का हैदराबाद में निधन

अविभाजित आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नादेंडला भास्कर राव का हैदराबाद में 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वे एक निजी अस्पताल में उम्र से संबंधित बीमारियों का इलाज करवा रहे थे। वे अपने लंबे राजनीतिक करियर के लिए जाने जाते हैं, और 1984 की नाटकीय राजनीतिक घटनाओं में अपनी भूमिका के कारण वे दक्षिण भारतीय राजनीति की सबसे विवादित हस्तियों में से एक बने रहे।

1984 का ‘अगस्त तख्तापलट’ जिसने उनके करियर को परिभाषित किया

  • भास्कर राव को मुख्य रूप से 1984 के ‘अगस्त तख्तापलट’ के लिए याद किया जाता है, जो आंध्र प्रदेश का एक प्रमुख राजनीतिक संकट था।
  • उस समय वे तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के संस्थापक एन. टी. रामाराव (NTR) के नेतृत्व वाली सरकार में वित्त मंत्री के रूप में कार्यरत थे।
  • जब NTR चिकित्सा उपचार के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में थे, तब भास्कर राव ने बहुमत के समर्थन का दावा किया।
  • उन्होंने 16 अगस्त, 1984 को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
  • और इस कदम से पूरे राज्य में भारी राजनीतिक अशांति फैल गई है।
  • NTR वापस लौटे और उन्होंने ‘धर्म युद्धम’ नामक एक ज़ोरदार जन-अभियान शुरू किया, जिसमें लोकतंत्र की बहाली की मांग की गई थी।

31 दिनों के भीतर ही केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप किया और 16 सितंबर, 1984 को NTR को राज्य के मुख्यमंत्री के पद पर फिर से बहाल कर दिया गया।

मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल

मुख्यमंत्री के रूप में भास्कर राव का कार्यकाल केवल 31 दिनों तक चला, जो आंध्र प्रदेश के इतिहास में सबसे छोटे कार्यकालों में से एक है।

उनके निर्णयों के बावजूद, उनके कार्यकाल की चर्चा राजनीतिक अध्ययनों में व्यापक रूप से की जाती है, जिसका कारण हैं:

  • संवैधानिक औचित्य से जुड़े प्रश्न
  • राज्यपाल और केंद्र सरकार की भूमिका
  • संघीय राजनीति और लोकतांत्रिक मानदंडों पर इसका प्रभाव

प्रारंभिक जीवन और राजनीतिक सफर

उनका जन्म 23 जून, 1935 को गुंटूर में हुआ था और राजनीति में आने से पहले उन्होंने एक वकील के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी।

  • उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से हुई। 1978 में उन्होंने विजयवाड़ा पूर्वी निर्वाचन क्षेत्र से जीत भी हासिल की।
  • इसके अलावा, 1982 में वे तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के संस्थापक सदस्य भी बने।

1984 के संकट के बाद, वे दोबारा कांग्रेस में शामिल हो गए और अपने राजनीतिक सफर को जारी रखा।

बाद का राजनीतिक जीवन और पार्टियों में बदलाव

भास्कर राव दशकों तक राजनीति में सक्रिय रहे।

  • 1998 में वे खम्मम से संसद सदस्य (MP) चुने गए।
  • बाद में, 2019 में वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए।

उनका राजनीतिक जीवन आंध्र प्रदेश और भारत में हो रहे बदलते राजनीतिक परिदृश्यों को भी दर्शाता है।

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