तुर्की ने एक नया बिल पास किया है, जिसका मकसद 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया तक पहुँच को सीमित करना है। यह बिल ऑनलाइन सुरक्षा को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। इस कानून के तहत, प्लेटफ़ॉर्म्स को उम्र की पुष्टि करने वाले सख्त सिस्टम और माता-पिता के नियंत्रण (parental controls) लागू करने होंगे। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब डिजिटल कंटेंट का बच्चों पर पड़ने वाले असर को लेकर दुनिया भर में चिंताएँ बढ़ रही हैं।
नए सोशल मीडिया कानून की मुख्य विशेषताएं
यह नया प्रस्तावित कानून डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों के लिए कई अनिवार्य उपाय प्रस्तुत करता है।
प्रमुख प्रावधान
- 15 वर्ष से कम उम्र के यूज़र्स को अकाउंट बनाने से रोकने के लिए उम्र की पुष्टि करने वाले सिस्टम।
- साथ ही, बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नज़र रखने और उन्हें मैनेज करने के लिए मुख्य पेरेंटल कंट्रोल टूल्स।
- नुकसानदायक या अनुचित कंटेंट को तुरंत हटाना।
- YouTube, TikTok, Facebook और Instagram जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स के लिए अनिवार्य अनुपालन की ज़रूरत।
इसके अतिरिक्त, ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रतिनिधियों को नियुक्त करना होगा।
इस कदम के पीछे का कारण
यह बिल तुर्की के कहरामनमारस में हुई स्कूल की दुखद घटना के ठीक बाद आया है, जिसने युवा मनों पर ऑनलाइन सामग्री के प्रभाव को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी हैं।
रेसेप तैयप एर्दोगान ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सोशल मीडिया से पैदा होने वाले जोखिमों से निपटना ज़रूरी है।
और उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
सरकार का यह भी तर्क है कि बच्चों को इन चीज़ों से बचाने के लिए ज़्यादा सख़्त नियमों की ज़रूरत है:
- साइबरबुलिंग
- नुकसानदेह या हिंसक सामग्री
- ऑनलाइन लत
- निजता से जुड़े जोखिम
दूसरे देशों के उदाहरण
हाल ही में, कई देशों ने अपने यहाँ सोशल मीडिया रेगुलेशन लागू किया है, और कई दूसरे देश भी इसे लागू करने के बारे में सोच रहे हैं।
- ऑस्ट्रेलिया ने कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, जिसके चलते लाखों अकाउंट बंद हो गए हैं।
- इंडोनेशिया ने हाल ही में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तक पहुँच पर रोक लगा दी है।
- स्पेन, फ्रांस, UK और कुछ दूसरे यूरोपीय देश भी इसी तरह के कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं या उन्हें लागू कर रहे हैं।
टेक कंपनियों और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर प्रभाव
यदि यह बिल मंज़ूर हो जाता है, तो इस कानून के तहत बड़ी टेक कंपनियों को ये कदम उठाने होंगे:
- उम्र की पुष्टि (Age Verification) के लिए अपने सिस्टम को फिर से डिज़ाइन करना।
- कंटेंट मॉडरेशन (Content Moderation) के टूल्स में निवेश करना।
- साथ ही, स्थानीय नियमों का पालन सुनिश्चित करना।


सिंधु जल को लेकर पाकिस्तान की गुहार: यूए...
ब्रिटेन सरकार का बड़ा फैसला: अब कभी सिगरे...
भारत और दक्षिण कोरिया ने नई दिल्ली में उ...


