DNA के खोजकर्ता कौन हैं? डीएनए की खोज के बारे में जानें

डीएनए, या डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल (Deoxyribonucleic Acid), एक विशेष अणु है जो सभी जीवित प्राणियों में पाया जाता है। यह वह अणु है जो प्रत्येक पौधे, पशु और मानव को विशिष्ट बनाता है। डीएनए में वे निर्देश या सूचना होती हैं जो किसी जीव के निर्माण और कार्य को नियंत्रित करती हैं। डीएनए की खोज की कहानी लगभग 150 वर्ष पहले एक स्विस वैज्ञानिक फ्रेडरिक मीज़र (Friedrich Miescher) से शुरू हुई और आगे चलकर अनेक वैज्ञानिकों ने इसके ढांचे और महत्व को समझाया।

फ्रेडरिक मीज़र की पहली खोज

साल 1869 में स्विस जीवविज्ञानी योहान्स फ्रेडरिक मीज़र ने सबसे पहले डीएनए की खोज की। जर्मनी के ट्यूबिंगन में एक प्रयोगशाला में काम करते हुए उन्होंने अस्पताल की पट्टियों (bandages) से सफेद रक्त कणों का अध्ययन किया। इसी दौरान उन्होंने कोशिकाओं के नाभिक (nucleus) में एक अजीब पदार्थ पाया जो फॉस्फोरस से भरपूर था। उन्होंने इसे “न्यूक्लिन (nuclein)” नाम दिया — जो आज हम डीएनए के रूप में जानते हैं।

उस समय वैज्ञानिक यह नहीं समझ पाए कि मीज़र की खोज कितनी महत्वपूर्ण थी। उन्हें यह ज्ञान नहीं था कि यही पदार्थ आनुवंशिक जानकारी (genetic information) वहन करता है।

मीज़र का जीवन और कार्य

फ्रेडरिक मीज़र का जन्म 13 अगस्त 1844 को स्विट्जरलैंड में हुआ था। उनका परिवार वैज्ञानिक पृष्ठभूमि वाला था — उनके पिता और चाचा दोनों शरीर रचना विज्ञान (anatomy) के प्रोफेसर थे। मीज़र ने चिकित्सा (medicine) की पढ़ाई की, लेकिन श्रवण समस्या (hearing problem) के कारण उन्होंने डॉक्टर बनने के बजाय अनुसंधान का मार्ग चुना।

उन्होंने अत्यंत सावधानी से सफेद रक्त कोशिकाओं के नाभिक को अलग (isolate) किया और पाया कि न्यूक्लिन में फॉस्फोरस और नाइट्रोजन होते हैं, लेकिन सल्फर नहीं — यह विज्ञान में उस समय एक पूरी तरह नई खोज थी।

आगे का शोध और डीएनए की संरचना

मीज़र की खोज के कई वर्षों बाद वैज्ञानिकों ने डीएनए पर अनुसंधान जारी रखा। 1953 में जेम्स वॉटसन (James Watson) और फ्रांसिस क्रिक (Francis Crick) ने डीएनए की “डबल हेलिक्स (Double Helix)” संरचना की खोज की — जो एक मुड़ी हुई सीढ़ी (twisted ladder) के समान होती है।
उनके मॉडल ने यह स्पष्ट किया कि डीएनए आनुवंशिक जानकारी को कैसे संग्रहीत और प्रतिलिपि (replicate) करता है।

रोसालिंड फ्रैंकलिन की महत्वपूर्ण भूमिका

इस खोज में एक प्रतिभाशाली वैज्ञानिक रोसालिंड फ्रैंकलिन (Rosalind Franklin) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी। उन्होंने एक्स-रे विवर्तन (X-ray diffraction) तकनीक का उपयोग करके डीएनए की अत्यंत स्पष्ट तस्वीरें लीं। उनकी प्रसिद्ध “फोटो 51” से वॉटसन और क्रिक को डीएनए की वास्तविक संरचना समझने में मदद मिली। मॉरिस विल्किन्स (Maurice Wilkins) ने भी इस शोध में सहयोग किया।

नवेल पुरस्कार और मान्यता

साल 1962 में वॉटसन, क्रिक और विल्किन्स को फिजियोलॉजी या मेडिसिन के लिए नोबेल पुरस्कार मिला, डीएनए की संरचना की खोज के लिए। दुर्भाग्यवश, उस समय तक रोसालिंड फ्रैंकलिन का निधन हो चुका था, इसलिए उन्हें यह पुरस्कार नहीं मिल सका — हालांकि उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण था।

फ्रेडरिक मीज़र की विरासत

मीज़र की खोज को उनके जीवनकाल में पूरी तरह समझा नहीं गया, परंतु उनकी खोज ने आधुनिक आनुवंशिकी (modern genetics) की नींव रखी। आज उनके सम्मान में दो अनुसंधान संस्थान कार्यरत हैं —

  • फ्रेडरिक मीज़र प्रयोगशाला (Friedrich Miescher Laboratory), ट्यूबिंगन

  • फ्रेडरिक मीज़र इंस्टीट्यूट फॉर बायोमेडिकल रिसर्च (Friedrich Miescher Institute for Biomedical Research), बेसल

उनका कार्य यह साबित करता है कि कभी-कभी सबसे गहरी खोजें शांत प्रयोगशालाओं में जन्म लेती हैं, जो आने वाले समय में जीवन के रहस्यों को उजागर करती हैं।

Children’s Day 2025: भारत में यह कब और कैसे मनाया जाता है?

Children’s Day 2025: बाल दिवस 2025 (Children’s Day 2025) भारत में हर साल बड़े उत्साह और प्यार के साथ मनाया जाता है ताकि बच्चों की निर्दोषता, खुशी और उज्जवल भविष्य का सम्मान किया जा सके। वर्ष 2025 में बाल दिवस 14 नवंबर (शुक्रवार) को मनाया जाएगा, जो पंडित जवाहरलाल नेहरू, भारत के पहले प्रधानमंत्री की जयंती का दिन भी है। यह दिन हमें नेहरू जी के बच्चों के प्रति गहरे प्रेम और इस विश्वास की याद दिलाता है कि बच्चे ही देश का भविष्य और निर्माणकर्ता हैं।

भारत में बाल दिवस कब मनाया जाता है?

भारत में बाल दिवस हर साल 14 नवंबर को मनाया जाता है। यह दिन पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिन्हें बच्चे प्यार से “चाचा नेहरू” कहते थे। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि बच्चों को खुशी, शिक्षा और स्नेहपूर्ण वातावरण देना समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

बाल दिवस 2025 (Children’s Day 2025) की थीम

बाल दिवस 2025 की थीम है — “हर बच्चे के लिए, हर अधिकार” (For Every Child, Every Right).
इस वर्ष की थीम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चे को शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा का समान अधिकार मिले। यह समाज को प्रेरित करती है कि हर बच्चा सीख सके, खेल सके और सुरक्षित वातावरण में जीवन जी सके।

बाल दिवस का महत्व

बाल दिवस, जिसे “बाल दिवस” या “बाल दिवस (Bal Diwas)” कहा जाता है, बच्चों के महत्व को दर्शाता है। यह दिन माता-पिता, शिक्षकों और समाज को याद दिलाता है कि हर बच्चे को प्यार, सम्मान और विकास के अवसर मिलना चाहिए। नेहरू जी का मानना था कि यदि बच्चों को अच्छी परवरिश और शिक्षा दी जाए, तो वे भारत का उज्जवल भविष्य बना सकते हैं।

नेहरू जयंती को बाल दिवस क्यों कहा जाता है?

नेहरू जयंती (14 नवंबर) को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है क्योंकि पंडित नेहरू को बच्चों से अत्यधिक स्नेह था। बच्चे उन्हें प्यार से “चाचा नेहरू” कहते थे। उनका मानना था कि बच्चे देश की सबसे बड़ी संपत्ति हैं और उन्हें प्यार, शिक्षा और समान अवसर मिलना चाहिए ताकि वे अपने सपनों को साकार कर सकें।

भारत में बाल दिवस कैसे मनाया जाता है?

बाल दिवस के अवसर पर पूरे भारत में स्कूलों और समुदायों में बच्चों के लिए कई मनोरंजक और शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

कुछ प्रमुख आयोजन इस प्रकार हैं —

  • सांस्कृतिक कार्यक्रम – गीत, नृत्य और नाटक प्रस्तुतियाँ।

  • प्रतियोगिताएँ – चित्रकला, निबंध लेखन और भाषण प्रतियोगिताएँ बच्चों के अधिकारों पर।

  • मिठाइयों और उपहारों का वितरण – बच्चों को सम्मानित और खुश करने के लिए।

  • जागरूकता अभियान – शिक्षा और बाल कल्याण के महत्व पर।

इन आयोजनों का उद्देश्य बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने, आत्मविश्वास बढ़ाने और मित्रता व सहयोग के मूल्यों को सीखने का अवसर देना है।

बाल दिवस 2025: बच्चों को पढ़ाएं नेहरू के अनमोल विचार

पंडित जवाहर लाल नेहरू (Pandit Jawahar Lal Nehru) देश के पहले प्रधानमंत्री थे। उनका बच्चों के प्रति लगाव जग जाहिर था। पंडित नेहरू हमेशा बच्चों को प्यार और महत्व देने की बात करते थे। नेहरू को ‘आधुनिक भारत का निर्माता’ कहा जाता है। उनका जन्म 14 नवंबर (November 14) 1889 को हुआ था। उनका जन्मदिन हर साल 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

पंडित जवाहरलाल नेहरू के अनमोल विचार

  • संकट के समय हर छोटी चीज मायने रखती है।
  • तथ्य, तथ्य हैं और आपके नापसंद करने से गायब नहीं हो जाएंगे।
  • सही शिक्षा से ही समाज की बेहतर व्यवस्था का निर्माण किया जा सकता है।
  • लोगों की कला उनके मन के विचारों को दर्शाती है।
  • सफलता उन्हें मिलती है, जो निडर होकर फैसला लेते हैं और परिणामों से नहीं घबराते।
  • एक महान कार्य में लगन और कुशल पूर्वक काम करने पर भी, भले ही उसे तुरंत पहचान न मिले, अंततः सफल जरूर होता है।
  • असफलता तब होती है जब हम अपने आदर्शों, उद्देश्यों और सिद्धांतों को भूल जाते हैं।
  • हमारे अंदर सबसे बड़ी कमी यह होती है कि हम चीजों के बारे में बात ज्यादा करते हैं और काम कम करते हैं।

बाल साहित्य पुरस्कार 2025 की घोषणा, विजेताओं की पूरी सूची देखें

साहित्य अकादेमी बाल साहित्य पुरस्कार 2025 की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है, जिसमें 24 भारतीय भाषाओं के बाल साहित्य लेखकों की सृजनात्मक प्रतिभा को सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार 14 नवम्बर 2025 (बाल दिवस) को त्रिवेणी सभागार, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में प्रदान किए जाएंगे। यह आयोजन अकादेमी की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके माध्यम से वह भारतीय संस्कृति से जुड़ी विविधतापूर्ण कहानियों और रचनात्मक लेखन को प्रोत्साहित करते हुए नवोदित पाठकों के लिए समृद्ध साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ा रही है।

बाल साहित्य पुरस्कार 2025 समारोह की मुख्य झलकियाँ

इस वर्ष का पुरस्कार समारोह साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष मधव कौशिक की अध्यक्षता में आयोजित होगा। कार्यक्रम में प्रसिद्ध गुजराती लेखिका वर्षा दास मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी, जबकि अकादेमी की उपाध्यक्ष कुमुद शर्मा धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगी। स्वागत भाषण पल्लवी प्रशांत होलकर, सचिव, साहित्य अकादेमी द्वारा दिया जाएगा।

प्रत्येक पुरस्कार विजेता को ₹50,000 की नकद राशि और कांस्य की पट्टिका (ब्रॉन्ज प्लाक) प्रदान की जाएगी, जो उनके द्वारा अपनी-अपनी भाषाओं में बाल साहित्य को समृद्ध बनाने में किए गए उत्कृष्ट योगदान की सराहना के रूप में दी जाएगी।

बाल साहित्य पुरस्कार 2025: भाषा के अनुसार विजेताओं की पूरी सूची

  • असमिया – मैनाहंतार पद्य (कविता), सुरेंद्र मोहन दास
  • बांग्ला – एखोनो गए कांता दये (कहानियां), त्रिदीब कुमार चट्टोपाध्याय
  • बोडो – खांथी ब्वस्वन अर्व अखु दनाई (कहानियां), बिनय कुमार ब्रह्मा
  • डोगरी – नन्हीं तोर (कविता), पी.एल. परिहार ‘शौक’
  • अंग्रेजी – दक्षिण: दक्षिण भारतीय मिथक और दंतकथाएं (कहानियां), नितिन कुशलप्पा एमपी
  • गुजराती – तिनचक (कविता), कीर्तिदा ब्रह्मभट्ट
  • हिंदी – एक बटे बारह (नॉन-फिक्शन और संस्मरण), सुशील शुक्ला
  • कन्नड़ – नोटबुक (लघु कथाएँ), के. शिवलिंगप्पा हंडीहाल
  • कश्मीरी – शुरे ते त्चुरे ग्युश (लघु कथाएँ), इज़हार मुबाशिर
  • कोंकणी – बेलाबाईचो शंकर अनी वारिस कान्यो (कहानियां), नयना अदारकर
  • मैथिली – चुक्का (लघु कथाएँ), मुन्नी कामत
  • मलयालम – पेंगुइनुकालुडे वंकाराविल (उपन्यास), श्रीजीत मूथेदथ
  • मणिपुरी – अंगांगशिंग-जी शन्नाबुंगशिदा (नाटक), शांतो एम।
  • मराठी – अभयमाया (कविता), सुरेश गोविंदराव सावंत
  • नेपाली – शांति वन (उपन्यास), संगमू लेप्चा
  • उड़िया – केते फुला फूटिची (कविता), राजकिशोर परही
  • पंजाबी – जड्डू पत्ता (उपन्यास), पाली खादिम (अमृत पाल सिंह)
  • राजस्थानी – पंखेरुव नी पीड़ा (नाटक), भोगीलाल पाटीदार
  • संस्कृत – बलविस्वम (कविता), प्रीति आर. पुजारा
  • संथाली – सोना मिरू-अग सन्देश (कविता), हरलाल मुर्मू
  • सिंधी – आसमानी परी (कविता), हीना अगनानी ‘हीर’
  • तमिल – ओट्टराय सिरागु ओविया (उपन्यास), विष्णुपुरम सर्वानन
  • तेलुगु – काबुरला देवता (कहानी), गंगीसेट्टी शिवकुमार
  • उर्दू – कौमी सितारे (लेख), ग़ज़नफ़र इक़बाल

पुरस्कार विजेताओं की बैठक: साहित्यिक चिंतन 

पुरस्कार समारोह के पश्चात 15 नवम्बर 2025 को नई दिल्ली के रवीन्द्र भवन सभागार, फिरोजशाह रोड में “पुरस्कार विजेताओं की बैठक” आयोजित की जाएगी। इस बैठक की अध्यक्षता साहित्य अकादेमी की उपाध्यक्ष कुमुद शर्मा करेंगी। यह मंच पुरस्कार विजेताओं को अपने रचनात्मक सफर, प्रेरणा स्रोतों और साहित्यिक योगदानों पर विचार-विमर्श करने का अवसर प्रदान करेगा।

महत्व: विविधता और सांस्कृतिक शिक्षा का संवर्द्धन

बाल साहित्य पुरस्कार का उद्देश्य है—

  • क्षेत्रीय भाषाओं के लेखकों को पहचान और सम्मान देना,

  • भारतीय संस्कृति से जुड़ा बाल साहित्य प्रोत्साहित करना,

  • साहित्यिक विविधता और बहुभाषिकता को बढ़ावा देना,

  • बाल पाठकों और नवोदित लेखकों को प्रेरित करना।

यह वार्षिक पहल नई पीढ़ी के लिए शिक्षा, संस्कार और कल्पनाशक्ति में साहित्य की भूमिका को और सशक्त बनाती है।

स्थिर तथ्य (Static Facts)

  • पुरस्कार का नाम: बाल साहित्य पुरस्कार 2025

  • प्रदाता संस्था: साहित्य अकादेमी

  • पुरस्कार समारोह की तिथि: 14 नवम्बर 2025

  • स्थल: त्रिवेणी सभागार, तानसेन मार्ग, नई दिल्ली

  • पुरस्कार राशि: ₹50,000 + कांस्य पट्टिका

  • सम्मानित भाषाएँ: 24 भारतीय भाषाएँ

  • मुख्य अतिथि: वर्षा दास (गुजराती लेखिका)

  • अध्यक्षता: मधव कौशिक (अध्यक्ष, साहित्य अकादेमी)

  • पुरस्कार विजेताओं की बैठक: 15 नवम्बर 2025, रवीन्द्र भवन, नई दिल्ली

  • उद्देश्य: बाल साहित्य में उत्कृष्ट योगदान का सम्मान

भारत को बोत्सवाना से 8 चीते मिलेंगे: प्रोजेक्ट चीता के पुनरुद्धार में एक बड़ा कदम

भारत ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। प्रोजेक्ट चीता (Project Cheetah) के तहत भारत को बोत्सवाना से 8 चीते मिलने जा रहे हैं। यह घोषणा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की बोत्सवाना की राजकीय यात्रा के दौरान की गई, जो भारत और अफ्रीका के बीच पर्यावरणीय कूटनीति का एक नया अध्याय है।

गैबोरोन में ऐतिहासिक घोषणा

राष्ट्रपति मुर्मू ने बोत्सवाना के राष्ट्रपति डूमा बोकॉ (Duma Boko) के साथ राजधानी गैबोरोन में द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की, लेकिन मुख्य आकर्षण रहा — बोत्सवाना द्वारा भारत को 8 चीतों का उपहार देने की औपचारिक घोषणा।
कल एक प्रतीकात्मक हस्तांतरण समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें राष्ट्रपति मुर्मू की उपस्थिति इस पहल की राजनयिक और पारिस्थितिक महत्ता को दर्शाएगी।

प्रोजेक्ट चीता क्या है?

प्रोजेक्ट चीता भारत की वह महत्वाकांक्षी पहल है, जिसके तहत 1952 में भारत में विलुप्त हो चुके चीतों को दोबारा बसाया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य है:

  • घासभूमि पारिस्थितिकी संतुलन बहाल करना,

  • इको-टूरिज़्म और जन-जागरूकता को बढ़ावा देना,

  • वन्यजीव संरक्षण ढांचे को मजबूत बनाना, और

  • अफ्रीकी देशों के साथ सहयोग स्थापित करना।

भारत ने 2022 में नामीबिया से पहली बार चीते लाकर मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) में छोड़े थे।

बोत्सवाना के चीतों का महत्व

बोत्सवाना विश्व में सबसे बड़ी जंगली चीता आबादी वाले देशों में से एक है। इसके द्वारा भेजे जा रहे 8 चीते भारत की परियोजना के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे:

  • आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) को बढ़ाएंगे,

  • भारत जैसे सवाना-प्रकार के जलवायु में अनुकूल रहेंगे, और

  • दोनों देशों के बीच संरक्षण सहयोग को मजबूत करेंगे।

यह कदम अफ्रीका की भारत के प्रति सहयोग भावना और वैश्विक वन्यजीव संरक्षण में साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

राष्ट्रपति मुर्मू की अफ्रीका यात्रा: रणनीतिक उपलब्धि

राष्ट्रपति मुर्मू की यह यात्रा अंगोला और बोत्सवाना दोनों देशों की पहली राजकीय यात्रा है। इसका उद्देश्य दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South–South Cooperation) को बढ़ावा देना है, जिसमें शामिल हैं:

  • पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण,

  • सांस्कृतिक और शैक्षणिक सहयोग,

  • द्विपक्षीय व्यापार और क्षमता निर्माण।

चीतों के हस्तांतरण समारोह में उनकी उपस्थिति भारत की पर्यावरणीय कूटनीति और जन-केन्द्रित संरक्षण नीति की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

स्थिर तथ्य (Static Facts)

श्रेणी विवरण
परियोजना का नाम प्रोजेक्ट चीता
घोषणा द्वारा भारत सरकार
भारत में विलुप्ति वर्ष 1952
पुनर्प्रवेश की शुरुआत 2022 (नामीबिया से)
नए चीते प्रदान करने वाला देश बोत्सवाना
चीते की संख्या 8
प्रतीकात्मक हस्तांतरण तिथि नवंबर 2025
स्थान गैबोरोन, बोत्सवाना

भारत ने पहला क्वांटम डायमंड माइक्रोस्कोप पेश किया

भारत ने वैज्ञानिक नवाचार के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है — देश का पहला स्वदेशी क्वांटम डायमंड माइक्रोस्कोप (Quantum Diamond Microscope – QDM) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के पी-क्वेस्ट समूह (P-Quest Group) द्वारा विकसित किया गया है। इसे ईएसटीआईसी 2025 (Emerging Science Technology and Innovation Conclave) के दौरान लॉन्च किया गया। यह अत्याधुनिक उपकरण न्यूरोसाइंस, मटेरियल साइंस और सेमीकंडक्टर डायग्नोस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला है।

क्वांटम डायमंड माइक्रोस्कोप क्या है?

क्वांटम डायमंड माइक्रोस्कोप एक उन्नत क्वांटम सेंसिंग उपकरण है, जो हीरे (Diamond) में मौजूद नाइट्रोजन-वैकेंसी (Nitrogen-Vacancy या NV) केंद्रों की मदद से सूक्ष्म चुंबकीय क्षेत्रों का सटीक पता लगाता है।

यह कैसे काम करता है:

  • NV केंद्र, हीरे में परमाणु स्तर के दोष होते हैं, जहाँ एक नाइट्रोजन परमाणु एक कार्बन परमाणु की रिक्ति के पास स्थित होता है।

  • ये केंद्र कमरे के तापमान पर क्वांटम स्थिरता (Quantum Coherence) बनाए रखते हैं।

  • ऑप्टिकली डिटेक्टेड मैग्नेटिक रेज़ोनेंस (ODMR) तकनीक के ज़रिए, चुंबकीय क्षेत्र की उपस्थिति में इन केंद्रों की फ्लोरेसेंस (Fluorescence) बदल जाती है।

  • इससे 3D चुंबकीय क्षेत्र का वास्तविक समय (Real-time) इमेजिंग संभव हो पाती है — जैसे पारंपरिक माइक्रोस्कोप प्रकाश के ज़रिए चित्र दिखाता है।

यह तकनीक नैनोस्केल (Nanoscale) पर गतिशील चुंबकीय घटनाओं की व्यापक छवियाँ लेने में सक्षम है, जो अविनाशी परीक्षण (Non-destructive Testing) और जैविक अनुसंधान में अत्यंत उपयोगी है।

मुख्य अनुप्रयोग और प्रभाव

न्यूरोसाइंस और मस्तिष्क अनुसंधान

QDM न्यूरॉन्स और मस्तिष्क ऊतकों में वास्तविक समय की चुंबकीय गतिविधि का नक्शा तैयार कर सकता है। इससे मस्तिष्क संकेतों और तंत्रिका विकारों को बिना आक्रामक तरीकों के समझना संभव होगा।

सेमीकंडक्टर और चिप डिज़ाइन

3D चिप संरचनाओं में जटिल विद्युत प्रवाह का विश्लेषण मौजूदा उपकरणों से कठिन है। QDM बिना चिप को तोड़े परत-दर-परत चुंबकीय मैपिंग प्रदान करता है — जो स्वायत्त प्रणालियों, क्रायोजेनिक प्रोसेसरों और अगली पीढ़ी की इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए महत्वपूर्ण है।

बैटरी और पदार्थ विज्ञान

बैटरी डायग्नोस्टिक्स तथा मटेरियल साइंस में QDM आयनिक गति, चरण परिवर्तन (Phase Transition) और चुंबकीय गुणों को ट्रैक कर सकता है, जिससे नई ऊर्जा तकनीकों के विकास में सहायता मिलेगी।

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) को मजबूती

यह उपलब्धि भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (National Quantum Mission) को मज़बूती प्रदान करती है, जिसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा संचालित किया जा रहा है। इस मिशन का लक्ष्य क्वांटम सेंसिंग, कंप्यूटिंग, क्रिप्टोग्राफी और मटेरियल तकनीक में स्वदेशी क्षमताएँ विकसित करना है।

इस परियोजना का नेतृत्व प्रोफेसर कस्तुरी साहा (Prof. Kasturi Saha) ने किया है। उनकी टीम ने इस क्षेत्र में भारत का पहला पेटेंट भी हासिल किया है — जो क्वांटम मैग्नेटिक इमेजिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम है।

लॉन्च के अवसर पर उपस्थित प्रमुख व्यक्तित्व

  • डॉ. जितेंद्र सिंह – केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री

  • प्रो. अजय के. सूद – भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार

  • प्रो. अभय करंदीकर – सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST)

इनकी उपस्थिति ने इस स्वदेशी क्वांटम नवाचार के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

स्थिर तथ्य (Static Facts)

श्रेणी विवरण
लॉन्च तिथि नवंबर 2025 (ESTIC 2025)
विकसित किया गया P-Quest Group, IIT बॉम्बे
नेतृत्व प्रो. कस्तुरी साहा
प्रौद्योगिकी आधार हीरे में नाइट्रोजन-वैकेंसी (NV) केंद्र
मुख्य कार्य ODMR तकनीक से 3D चुंबकीय क्षेत्र इमेजिंग
मुख्य उपयोग न्यूरोसाइंस, चिप डायग्नोस्टिक्स, मटेरियल रिसर्च
भारत का पहला पेटेंट QDM मैग्नेटिक इमेजिंग क्षेत्र में
संबंधित मिशन राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM)

भारत की वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही की GDP लगभग 7.2% तक बढ़ जाएगी

भारत की अर्थव्यवस्था एक बार फिर मजबूती दिखा रही है, जहाँ वित्त वर्ष 2025–26 (जुलाई–सितंबर 2025) की दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी (Real GDP) में 7.2% की वृद्धि का अनुमान है। यह पिछले वर्ष की समान तिमाही की तुलना में उल्लेखनीय सुधार है और यह निजी खपत (Private Consumption) तथा सरकारी पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) के योगदान को दर्शाता है, जिन्होंने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भी विकास की गति बनाए रखी है।

मजबूत निजी खपत से विकास को बल

हालिया आर्थिक विश्लेषण के अनुसार, निजी खपत दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि का प्रमुख कारक रही है। अनुमान है कि इसमें 8% वार्षिक वृद्धि हुई है, जबकि पहली तिमाही में यह 7% और पिछले वर्ष की समान तिमाही में 6.4% थी।

इस वृद्धि के पीछे कई कारण रहे —

  • विभिन्न आय वर्गों में वास्तविक आय में वृद्धि,

  • ग्रामीण मजदूरी में स्थिर बढ़ोतरी,

  • खुदरा महंगाई में ऐतिहासिक गिरावट,

  • और बजट 2025–26 में दिए गए कर राहत उपाय।

इन कारकों ने विशेष रूप से ग्रामीण और मध्यम आय वर्ग के उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ाई। आयकर कटौती और स्थिर वस्तु मूल्यों ने घरेलू मांग को और प्रोत्साहित किया।

आपूर्ति पक्ष से सहारा: सेवाएँ और विनिर्माण

आपूर्ति पक्ष से, भारत का सेवा क्षेत्र (Services Sector) लगातार मजबूत बना रहा। इसके साथ ही, विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing) में भी उत्पादन में सुधार देखने को मिला, खासकर निर्यात वस्तुओं में। कम इनपुट लागतों ने कंपनियों के लाभांश को बनाए रखा और उत्पादन को बढ़ावा दिया, भले ही वैश्विक मांग मध्यम रही हो।

निवेश गतिविधि बनी सशक्त

तिमाही के दौरान निवेश मांग (Investment Demand) भी मजबूत रही, जिसमें 7.5% की वार्षिक वृद्धि का अनुमान है। यह वृद्धि मुख्य रूप से निम्न कारकों से संचालित रही —

  • सरकारी बुनियादी ढांचा परियोजनाएँ,

  • सार्वजनिक पूंजीगत व्यय,

  • और निजी क्षेत्र द्वारा निर्माण व पूंजी निर्माण में स्थिर निवेश।

हालाँकि वैश्विक आर्थिक स्थिति अनिश्चित रही, भारत में पूंजी निवेश का माहौल स्थिर बना रहा।

मुद्रास्फीति और राजकोषीय स्थिति: मिले-जुले संकेत

जहाँ वास्तविक जीडीपी वृद्धि मजबूत रही, वहीं सांकेतिक जीडीपी (Nominal GDP) की वृद्धि दर 8% से कम रहने का अनुमान है। यह प्रवृत्ति सरकार के राजस्व संग्रह और राजकोषीय संतुलन (Fiscal Arithmetic) के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

इससे संकेत मिलते हैं —

  • कर संग्रह अपेक्षा से कम रह सकता है,

  • राजकोषीय लक्ष्यों पर दबाव बन सकता है,

  • और यद्यपि मुद्रास्फीति अभी निम्न स्तर पर है, किंतु नाममात्र वृद्धि बनाए रखने के लिए इसका संतुलित रहना आवश्यक होगा।

वास्तविक और सांकेतिक वृद्धि के बीच का यह अंतर आने वाले महीनों में सरकार की वित्तीय रणनीति का प्रमुख निर्धारक रहेगा।

स्थिर तथ्य (Static Facts)

संकेतक विवरण
Q2 FY26 जीडीपी वृद्धि (वास्तविक) 7.2%
Q2 FY25 जीडीपी वृद्धि 5.6%
Q1 FY26 जीडीपी वृद्धि 7.8% (पाँच तिमाहियों में सर्वोच्च)
निजी खपत वृद्धि (Q2 FY26) 8% (अनुमानित)
निवेश मांग वृद्धि (Q2 FY26) 7.5% (अनुमानित)
सांकेतिक जीडीपी प्रवृत्ति 8% से कम
मुद्रास्फीति प्रभाव घटती मुद्रास्फीति से वास्तविक वेतन और मांग में वृद्धि

पद्म पुरस्कार 2026: बिंद्रा से लेकर पेस तक, भारत के खेल जगत के दिग्गजों पर रहेगी नज़र

भारत जब पद्म पुरस्कार 2026 की तैयारियों में जुटा है, तब देश के कई शीर्ष खिलाड़ियों, खेल प्रशासकों और चिकित्सा विशेषज्ञों के नाम इन प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों के लिए अनुशंसित किए गए हैं। यह सूची न केवल ओलंपिक चैंपियनों को बल्कि उन योगदानकर्ताओं को भी मान्यता देती है जिन्होंने भारत के खेल सफर को वैश्विक पहचान दिलाई है।

पद्म विभूषण (Padma Vibhushan) के लिए नामांकित — भारत के खेल आइकॉन

भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान खेल जगत के दो दिग्गजों को अनुशंसित किया गया है —

1. अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra)

  • भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता (बीजिंग 2008 – 10 मीटर एयर राइफल)

  • पाँच बार ओलंपिक में प्रतिनिधित्व किया

  • 2009 में पद्म भूषण से सम्मानित

  • अनुशंसा: भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) द्वारा

2. लिएंडर पेस (Leander Paes)

  • 18 बार के ग्रैंड स्लैम विजेता (डबल्स श्रेणी)

  • अटलांटा 1996 ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता — भारत के एकमात्र ओलंपिक टेनिस पदकधारी

  • पूर्व पद्म श्री (2001) और पद्म भूषण (2014) प्राप्तकर्ता

  • अनुशंसा: ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन (AITA) द्वारा

यदि इन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाता है, तो ये विश्वनाथन आनंद, सचिन तेंदुलकर, सर एडमंड हिलेरी, और एम.सी. मैरी कॉम के बाद यह सम्मान पाने वाले 5वें और 6वें खिलाड़ी होंगे।

पद्म भूषण (Padma Bhushan) के लिए नामांकित — आधुनिक उत्कृष्टता का सम्मान

1. नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra)

  • टोक्यो 2020 ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता (भाला फेंक)

  • विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप और डायमंड लीग फाइनल्स विजेता

  • पद्म श्री (2022) से सम्मानित

  • अनुशंसा: भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) द्वारा

2. गगन नारंग (Gagan Narang)

  • लंदन 2012 ओलंपिक कांस्य पदक विजेता (शूटिंग)

  • राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में कई पदक

  • पद्म श्री (2011) प्राप्तकर्ता

  • भारतीय निशानेबाजी में दीर्घकालिक योगदान के लिए मान्यता प्राप्त

पद्म श्री (Padma Shri) के लिए नामांकित — उभरते सितारे और योगदानकर्ता

1. मनु भाकर (Manu Bhaker)

  • पेरिस 2024 ओलंपिक में दो बार कांस्य पदक विजेता (10 मीटर एयर पिस्टल)

  • भारत की सबसे कम उम्र की सफल निशानेबाजों में से एक

2. हरमनप्रीत सिंह (Harmanpreet Singh)

  • भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान

  • पेरिस 2024 ओलंपिक में टीम को कांस्य पदक तक पहुँचाया

  • भारतीय हॉकी के पुनरुत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका

3. रंधीर सिंह (Randhir Singh)

  • पूर्व ओलंपिक निशानेबाज

  • ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) के अध्यक्ष

  • वरिष्ठ खेल प्रशासक और नीति निर्माता

4. डॉ. दिनशॉ पारडीवाला (Dr. Dinshaw Pardiwala)

  • अग्रणी खेल चोट विशेषज्ञ और ऑर्थोपेडिक सर्जन

  • भारत के शीर्ष एथलीटों के उपचार के लिए प्रसिद्ध

5. वीरेन रसकिन्हा (Viren Rasquinha)

  • पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान

  • ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट (OGQ) में खेल विकास और नेतृत्व के लिए प्रसिद्ध

6. संदीप प्रधान (Sandip Pradhan)

  • भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के पूर्व महानिदेशक

  • खेलो इंडिया कार्यक्रम और प्रतिभा विकास में प्रमुख भूमिका

त्वरित स्थैतिक तथ्य (Static GK Facts for Revision)

श्रेणी नामांकित व्यक्ति (2026)
पद्म विभूषण अभिनव बिंद्रा, लिएंडर पेस
पद्म भूषण नीरज चोपड़ा, गगन नारंग
पद्म श्री मनु भाकर, हरमनप्रीत सिंह, रंधीर सिंह, डॉ. दिनशॉ पारडीवाला, वीरेन रसकिन्हा, संदीप प्रधान

मुख्य तथ्य:

  • अभिनव बिंद्रा: भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता (बीजिंग 2008)

  • लिएंडर पेस: ओलंपिक टेनिस में भारत के एकमात्र पदकधारी (1996)

  • नीरज चोपड़ा: टोक्यो 2020 स्वर्ण विजेता और डायमंड लीग चैंपियन

सर्वियर इंडिया ने कैंसर के लिए निःशुल्क बायोमार्कर परीक्षण शुरू किया

भारत के कैंसर निदान पारिस्थितिकी तंत्र को नई दिशा देते हुए सर्वियर इंडिया (Servier India) ने एक राष्ट्रीय पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य तीव्र अस्थि मज्जा ल्यूकेमिया (Acute Myeloid Leukaemia – AML) और कोलांजियोकार्सिनोमा (Cholangiocarcinoma – CCA) से पीड़ित रोगियों के लिए बायोमार्कर परीक्षण की पहुंच बढ़ाना है। यह कार्यक्रम जीनोमिक प्रयोगशालाओं MedGenome और Strand Life Sciences के सहयोग से शुरू किया गया है, ताकि अत्याधुनिक प्रिसीजन ऑन्कोलॉजी (Precision Oncology) तकनीक को विशेष रूप से सरकारी अस्पतालों और पिछड़े क्षेत्रों तक पहुँचाया जा सके।

भारत में आणविक परीक्षण (Molecular Testing) का विस्तार

भारत में कैंसर निदान के क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती रही है — गुणवत्तापूर्ण आनुवंशिक परीक्षणों की सीमित उपलब्धता, विशेषकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में।
इसी कमी को पूरा करने के लिए, सर्वियर इंडिया अब एक विशेष बायोमार्कर परीक्षण पैनल उपलब्ध कराएगा, जो मुख्य रूप से IDH1 और IDH2 जीन म्यूटेशन पर केंद्रित होगा — ये दोनों जीन AML और CCA जैसी बीमारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • सरकारी अस्पतालों के मरीजों को ये परीक्षण निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।

  • अन्य मरीजों को रियायती दरों पर परीक्षण की सुविधा मिलेगी, सर्वियर की Patient Assistance Programme के तहत।

यह कदम कैंसर निदान में समान अवसर (equitable access) सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

प्रिसीजन ऑन्कोलॉजी पर केंद्रित पहल

इस पहल का मुख्य आधार प्रिसीजन ऑन्कोलॉजी है — जहाँ उपचार हर मरीज के कैंसर की जीन-स्तरीय पहचान के आधार पर तय किया जाता है।
IDH1 और IDH2 जैसी म्यूटेशन की पहचान करने से चिकित्सक —

  • अधिक प्रभावी लक्षित उपचार (targeted therapy) चुन सकते हैं,

  • कम प्रभावी सामान्य उपचारों से बच सकते हैं, और

  • मरीज की जीवित रहने की संभावना और परिणामों में सुधार कर सकते हैं।

सर्वियर इंडिया का कहना है कि शुरुआती चरण में आणविक परीक्षण (early molecular testing) से समय पर उपचार निर्णय लिए जा सकते हैं, जो तेज़ी से फैलने वाले इन कैंसर प्रकारों में निर्णायक साबित हो सकते हैं।

मुख्य कैंसर प्रकार

1. तीव्र अस्थि मज्जा ल्यूकेमिया (Acute Myeloid Leukaemia – AML)

  • यह रक्त कैंसर का तेजी से बढ़ने वाला प्रकार है, जो श्वेत रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है।

  • सही और त्वरित निदान इस बीमारी के उपचार के लिए अत्यंत आवश्यक है।

  • IDH जीन म्यूटेशन से संबंधित लक्षित उपचार अब उपलब्ध हैं।

2. कोलांजियोकार्सिनोमा (Cholangiocarcinoma – CCA)

  • यह पित्त नलिकाओं में उत्पन्न होने वाला दुर्लभ कैंसर है।

  • देर से पहचान के कारण उपचार जटिल हो जाता है।

  • आनुवंशिक प्रोफाइलिंग से उपचार योजना अधिक सटीक बनाई जा सकती है।

सहयोगी मॉडल (Collaborative Delivery Model)

इस पहल की सफलता एक साझेदारी-आधारित मॉडल पर आधारित है —

  • MedGenome और Strand Life Sciences जीनोमिक परीक्षण व तकनीकी समर्थन प्रदान करेंगे।

  • अस्पताल और चिकित्सक मरीजों की पहचान और सैंपल समन्वय में सहयोग करेंगे।

  • रोगी नेटवर्क और काउंसलिंग समूह मरीजों को जानकारी, मार्गदर्शन और उपचार सहायता प्रदान करेंगे।

यह ‘लास्ट माइल डिलीवरी मॉडल’ परीक्षण और उपचार के बीच के समय को घटाकर त्वरित चिकित्सीय हस्तक्षेप सुनिश्चित करेगा।

‘सर्वियर केयर’ के अंतर्गत रोगी सहायता

यह बायोमार्कर परीक्षण कार्यक्रम ‘Servier Care’ पहल के तहत संचालित होगा — जो एक समग्र रोगी सहायता मंच है।
इसमें शामिल हैं —

  • निःशुल्क या रियायती डायग्नोस्टिक परीक्षण

  • पात्र मरीजों के लिए आर्थिक सहायता

  • दवाओं की उपलब्धता में सहयोग

  • संपूर्ण उपचार प्रक्रिया में मार्गदर्शन

इस कार्यक्रम के माध्यम से सर्वियर इंडिया का उद्देश्य है — एक दयालु, सुलभ और एकीकृत स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण, जो विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए सहायक हो।

संक्षिप्त तथ्य

विवरण जानकारी
पहल का नाम सर्वियर इंडिया राष्ट्रीय बायोमार्कर परीक्षण पहल
मुख्य रोग तीव्र अस्थि मज्जा ल्यूकेमिया (AML) और कोलांजियोकार्सिनोमा (CCA)
मुख्य जीन परीक्षण IDH1 और IDH2 म्यूटेशन
साझेदार प्रयोगशालाएँ MedGenome, Strand Life Sciences
अभियान का उद्देश्य प्रिसीजन ऑन्कोलॉजी के माध्यम से कैंसर निदान को सुलभ बनाना
लाभार्थी सरकारी अस्पतालों और पिछड़े क्षेत्रों के मरीज
कार्यक्रम के अंतर्गत Servier Care – रोगी सहायता मंच

कोलंबो विश्वविद्यालय में भारत-श्रीलंका संस्कृत महोत्सव का उद्घाटन

साझी सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाते हुए भारत–श्रीलंका संस्कृत महोत्सव का शुभारंभ 10 नवंबर 2025 को कोलंबो विश्वविद्यालय में किया गया। इस अवसर ने भारत और श्रीलंका के बीच संस्कृत — जो विश्व की सबसे प्राचीन और पूजनीय भाषाओं में से एक है — के संरक्षण और प्रसार के प्रति नई प्रतिबद्धता को उजागर किया।
सप्ताहभर चलने वाले इस महोत्सव में दोनों देशों के विद्वानों, भिक्षुओं, विद्यार्थियों और सांस्कृतिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिससे संस्कृत को सभ्यता, सद्भाव और ज्ञान की सनातन कड़ी के रूप में पुनः स्थापित किया गया।

महोत्सव का आयोजन

यह संस्कृत महोत्सव भारत और श्रीलंका के प्रमुख शैक्षणिक व सांस्कृतिक संस्थानों के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया है —

  • स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र (कोलंबो) — भारतीय उच्चायोग का सांस्कृतिक विभाग

  • श्रीलंका का शिक्षा और उच्च शिक्षा मंत्रालय

  • केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (भारत)

  • इंडिया–श्रीलंका फाउंडेशन

इन संस्थाओं के सम्मिलित प्रयास से यह आयोजन शैक्षणिक, आध्यात्मिक और कूटनीतिक पहलुओं का संगम बन गया है, जो संस्कृत को केवल अध्ययन का विषय नहीं, बल्कि जीवंत सांस्कृतिक सेतु के रूप में प्रस्तुत करता है।

उद्घाटन समारोह

महोत्सव का संयुक्त उद्घाटन निम्नलिखित प्रमुख हस्तियों द्वारा किया गया —

  • श्री संतोष झा, भारत के श्रीलंका स्थित उच्चायुक्त

  • डॉ. मधुरा सेनविरत्ना, उप शिक्षा एवं उच्च शिक्षा मंत्री, श्रीलंका

इस अवसर पर उच्चायुक्त संतोष झा ने कहा कि संस्कृत भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक पुल का कार्य करती रही है, विशेषकर धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से। उन्होंने इस साझा विरासत को आधुनिक संदर्भों में सुरक्षित रखने के महत्व पर बल दिया।

महोत्सव की प्रमुख विशेषताएँ

यह संस्कृत महोत्सव केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि ज्ञान, संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का जीवंत मंच है। इसमें शामिल हैं —

  • संस्कृत बोलचाल कार्यशालाएँ, श्रीलंका के 250 से अधिक पिरिवेना (बौद्ध शिक्षण संस्थानों) के भिक्षु-अध्यापकों के लिए

  • संस्कृत विद्वानों के व्याख्यान एवं संगोष्ठियाँ, आधुनिक युग में संस्कृत की प्रासंगिकता पर

  • संस्कृत आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ — नृत्य, नाट्य और संगीत कार्यक्रम

  • भारत और श्रीलंका के विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के बीच संवाद कार्यक्रम

इन गतिविधियों का उद्देश्य यह दर्शाना है कि संस्कृत केवल एक प्राचीन ग्रंथों में सीमित भाषा नहीं, बल्कि जीवंत, विकासशील और युगों से प्रेरणा देने वाली भाषा है — जो आज भी साहित्य, दर्शन और कला में अपनी गहरी छाप छोड़ रही है।

संक्षिप्त तथ्य

विवरण जानकारी
कार्यक्रम का नाम भारत–श्रीलंका संस्कृत महोत्सव 2025
तारीख 10 नवंबर 2025
स्थान कोलंबो विश्वविद्यालय, श्रीलंका
आयोजक संस्थान स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, श्रीलंका शिक्षा मंत्रालय, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, इंडिया–श्रीलंका फाउंडेशन
मुख्य अतिथि संतोष झा (भारतीय उच्चायुक्त), डॉ. मधुरा सेनविरत्ना (उप मंत्री, श्रीलंका)
उद्देश्य भारत–श्रीलंका के सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करना और संस्कृत भाषा का प्रचार-प्रसार करना

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