अक्टूबर 2025 से RBI परिपत्र, अधिसूचनाएं और अपडेट

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) समय-समय पर जारी किए जाने वाले परिपत्रों, नीतिगत अद्यतनों और विनियामक अधिसूचनाओं के माध्यम से देश की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ये आधिकारिक दिशानिर्देश बैंकों, वित्तीय संस्थानों और आम जनता को मौद्रिक नीति, डिजिटल भुगतान, बैंकिंग मानदंडों और आर्थिक विनियमों में हुए नवीनतम परिवर्तनों की जानकारी देते हैं। अक्टूबर 2025 में जारी आरबीआई परिपत्रों और अधिसूचनाओं को जानना बैंकिंग, यूपीएससी तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के साथ-साथ भारत के बदलते वित्तीय परिदृश्य को समझने वालों के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह लेख अक्टूबर 2025 में जारी प्रमुख आरबीआई घोषणाओं और अद्यतनों का संक्षिप्त सार प्रस्तुत करता है, जिससे पाठक अद्यतन और परीक्षा-तैयार रह सकें।

अक्टूबर 2025 के आरबीआई परिपत्र, अधिसूचनाएँ और अद्यतन

1. एसआरवीए आधारित कॉरपोरेट ऋण निवेश (SRVA-Based Investment in Corporate Debt)

अब वे विदेशी संस्थाएँ, जिनके पास भारत में स्पेशल रुपया वोस्ट्रो अकाउंट (SRVA) हैं, अपने एकत्रित भारतीय रुपये (INR) शेष को निम्न कॉरपोरेट ऋण साधनों में निवेश कर सकती हैं—

  • गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (NCDs)

  • भारतीय कंपनियों द्वारा जारी बॉन्ड

  • कमर्शियल पेपर्स (CPs)

अनुपालन एवं प्रक्रिया:

  • इन निवेशों पर FPI (Foreign Portfolio Investor) के न्यूनतम परिपक्वता मानदंड और सीमा लागू नहीं होंगी।

  • एसआरवीए धारकों को सभी नियामक मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।

  • एसआरवीए प्रबंधित करने वाले भारतीय बैंक:

    • विदेशी निवेशकों के लिए नया डिमैट खाता खोलने की सुविधा देंगे।

    • सभी लेनदेन SEBI-अधिकृत डिपॉजिटरीज़ को रिपोर्ट करेंगे।

2. भारतीय रुपये में व्यापार निपटान का विस्तारित दायरा (Expanded Scope of INR Trade Settlement)

अधिकृत डीलर (AD) श्रेणी–I बैंक अब विदेशी एसआरवीए धारकों — जैसे विदेशी बैंक और व्यापारिक साझेदार — को आरबीआई द्वारा अनुमोदित सीमाओं के भीतर कॉरपोरेट ऋण साधनों में निवेश की अनुमति दे सकते हैं।

3. एकीकृत लोकपाल योजना (Integrated Ombudsman Scheme – RB-IOS, 2021)

संशोधित लोकपाल योजना के तहत उपभोक्ता शिकायत निवारण कवरेज को बढ़ाया गया है:

  • बैंक: सभी वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs), राज्य/केंद्रीय सहकारी बैंक और वे नगरीय सहकारी बैंक जिनकी जमा राशि ₹50 करोड़ से अधिक है।

  • एनबीएफसी: वे जमा स्वीकार करने वाली या ₹100 करोड़ से अधिक परिसंपत्ति आकार वाली प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण एनबीएफसी।

  • अन्य: भुगतान प्रणाली संचालक और क्रेडिट सूचना कंपनियाँ।

4. उधार और ऋण प्रावधान (Borrowing & Lending Amendments, 2025)

भारतीय अधिकृत डीलर बैंक अब भूटान, नेपाल और श्रीलंका के निवासियों तथा इन देशों के बैंकों को व्यापारिक लेनदेन के लिए भारतीय रुपये में ऋण प्रदान कर सकते हैं।
उद्देश्य: स्थानीय मुद्रा के माध्यम से उपमहाद्वीपीय व्यापारिक संबंधों को सुदृढ़ करना।

5. निर्यातकों के लिए विदेशी मुद्रा खाते में लचीलापन (Foreign Currency Accounts for Exporters)

भारतीय निर्यातक अब विदेशी मुद्रा खाते खोल सकते हैं —

  • भारत के बाहर किसी बैंक में, या

  • अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) में, जिसे नियामकीय दृष्टि से “भारत के बाहर” माना जाएगा।

अनुमत कार्य:

  • निर्यात आय या अग्रिम भुगतान प्राप्त करना

  • भारत में माल/सेवाओं के आयात बिलों का निपटान

  • विदेशी मुद्रा को भारत में पुनः लाना

समयसीमा:

  • IFSC खाता: प्राप्ति के 3 माह के भीतर

  • अन्य विदेशी बैंक: प्राप्ति के 1 माह के भीतर

6. नामांकन सुविधा पर नई दिशा-निर्देश (Nomination Facility Directions, 2025)

1 नवंबर 2025 से प्रभावी, सभी बैंक (वाणिज्यिक, सहकारी, RRBs, और SBI) को निम्नलिखित खातों में नामांकन सुविधा को मानकीकृत और अनिवार्य रूप से प्रोत्साहित करना होगा—

  • बचत, चालू, सावधि, आवर्ती एवं अन्य जमा खाते

  • सुरक्षित लॉकर

  • सुरक्षित अभिरक्षा में रखी वस्तुएँ

  • व्यक्तिगत स्वामित्व वाले प्रोप्राइटरशिप खाते

मुख्य प्रावधान:

  • ग्राहक नामांकन से इनकार कर सकते हैं, परंतु बैंक को इसके लाभ समझाना और अस्वीकृति का लिखित रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है।

  • यदि किसी नामांकित व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसका नामांकन समाप्त हो जाएगा।

  • बैंक को सभी नामांकन, संशोधन या रद्दीकरण आवेदन पर 3 कार्य दिवसों के भीतर उत्तर देना होगा।

  • पासबुक, स्टेटमेंट या डिपॉजिट रसीद पर “Nomination Registered” और नामांकित व्यक्ति का नाम प्रदर्शित किया जाएगा।

  • नामांकन अधिकारों के बारे में जन-जागरूकता अभियान, ब्रोशर, फॉर्म और पुस्तिकाओं में स्पष्ट जानकारी देना अनिवार्य होगा।

अमित शाह ने शहरी सहकारी बैंकों के लिए डिजिटल ऐप लॉन्च किए

केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शहरी सहकारी बैंकों (Urban Cooperative Banks – UCBs) के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए दो नवीन मोबाइल एप्लिकेशन — ‘सहकार डिजी पे’ और ‘सहकार डिजी लोन’ लॉन्च किए। भारत की कैशलेस अर्थव्यवस्था में डिजिटल भुगतान के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए शाह ने कहा कि प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए सहकारी बैंकों को आधुनिक तकनीकों को अपनाना ही होगा। यह लॉन्च शहरी सहकारी ऋण क्षेत्र पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान हुआ, जहाँ मंत्री ने इस क्षेत्र के व्यावसायीकरण और विकास के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी प्रस्तुत किए।

शहरी सहकारी बैंकों का डिजिटल परिवर्तन

सहकार डिजी पे और सहकार डिजी लोन

  • सहकार डिजी पे: एक डिजिटल भुगतान प्लेटफ़ॉर्म जो UCB ग्राहकों को सुगम ऑनलाइन लेन-देन की सुविधा देगा।

  • सहकार डिजी लोन: एक डिजिटल ऋण प्लेटफ़ॉर्म जो व्यक्तियों और छोटे व्यवसायों को आसान ऋण उपलब्ध कराएगा।

उद्देश्य:
UCBs में तेज़ डिजिटल अपनाने को प्रोत्साहित करना ताकि वे कैशलेस अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा कर सकें।

लक्ष्य:
आने वाले दो वर्षों में 1,500 बैंकों को इन डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स से जोड़ना।

विकास और विस्तार के लक्ष्य

  • राष्ट्रीय लक्ष्य: पाँच वर्षों में हर उस शहर में कम से कम एक अतिरिक्त UCB स्थापित करना जिसकी आबादी 2 लाख से अधिक है।

  • रणनीति: सफल सहकारी ऋण समितियों को शहरी सहकारी बैंकों में परिवर्तित करना।

  • प्राथमिकता: युवा उद्यमियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को वित्तीय सहायता प्रदान करना।

क्षेत्रीय सुधार और उपलब्धियाँ

  • वित्तीय स्थिति में सुधार: पिछले दो वर्षों में NPA दर 2.8% से घटकर 0.6% रह गई।

  • नीतिगत सुधार:

    • प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के लिए मॉडल उपनियमों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया गया।

    • सहकारी बैंकों की कंप्यूटरीकरण और सेवा विस्तार को बढ़ावा दिया गया।

  • वैश्विक मान्यता:

    • अमूल और IFFCO को अंतरराष्ट्रीय सहकारी गठबंधन (ICA) द्वारा विश्व के शीर्ष दो सहकारी संगठनों के रूप में स्थान मिला।

चुनौतियाँ और आगे की दिशा

  • खतरे में बैंक: लगभग 20 UCBs बंद होने की कगार पर हैं।

  • पुनरुद्धार रणनीति: सफल उदाहरणों जैसे यस बैंक पुनर्गठन मॉडल से सीखने की आवश्यकता।

  • केंद्रीय मार्गदर्शन: यद्यपि सहकारिता राज्य का विषय है, केंद्र सरकार समान नीति दिशा और विकास हेतु मार्गदर्शन प्रदान कर रही है।

मुख्य स्थिर तथ्य 

बिंदु विवरण
लॉन्च तिथि 10 नवंबर 2025
मंत्री अमित शाह, केंद्रीय सहकारिता मंत्री
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स सहकार डिजी पे और सहकार डिजी लोन
लक्षित आबादी कवरेज 2 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर
NPA में गिरावट 2.8% → 0.6%
डिजिटल अपनाने का लक्ष्य 1,500 UCBs (2 वर्षों में)
वैश्विक मान्यता अमूल और IFFCO विश्व के शीर्ष सहकारी संस्थान

कौन हैं अर्जुन एरिगैसी? जानें उनके उपलब्धियों के बारे में

अर्जुन कुमार एरिगैसी भारत के सबसे प्रतिभाशाली युवा शतरंज खिलाड़ियों में से एक हैं, जो अपनी चतुर सोच और साहसिक खेल शैली के लिए जाने जाते हैं। वे बहुत कम उम्र में ग्रैंडमास्टर बन गए और कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भारत को गौरवान्वित किया है। तेलंगाना के एक छोटे से कस्बे से निकलकर दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में से एक बनने तक का उनका सफ़र वाकई प्रेरणादायक है और उनकी कड़ी मेहनत और प्रतिभा को दर्शाता है।

दोस्तों के साथ शतरंज खेलना शुरू किया

3 सितंबर 2003 को आंध्र प्रदेश (अब तेलंगाना) के वारंगल में जन्मे अर्जुन ने अपने दोस्तों के साथ मनोरंजन के लिए शतरंज खेलना शुरू किया। यह मंदिर शहर तिरुपति में उनके किंडरगार्टन शिक्षक थे जिन्होंने अर्जुन के माता-पिता को सलाह दी थी कि शतरंज खेलना उनके लिए अच्छा होगा। क्योंकि अर्जुन के पास सीखने की क्षमता और ललक थी। वह चीजों को तेजी से याद करते थे। उनकी रुचि को देखते हुए, उनके न्यूरोसर्जन पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में चेस की ट्रेनिंग दिलाने का फैसला किया, और उन्हें हनमकोंडा में बीएस शतरंज अकादमी और बाद में उनके गृहनगर वारंगल में कोथापेट में रेस अकादमी में भर्ती कराया।

विश्वनाथन आनंद के बाद रचा इतिहास

अर्जुन एरिगैसी FIDE रैंकिंग में 2800 एलो रेटिंग अंक हासिल करने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं। उनसे पहले सिर्फ ये कारनामा विश्वनाथन आनंद ने किया है। अर्जुन एरिगैसी ने 14 साल की उम्र में ही ग्रैंडमास्टर का खिताब अपने नाम कर लिया था। अर्जुन ने काफी कम उम्र में ही शतरंज के मास्टर बनाने का सफर शुरु कर दिया था।

अर्जुन एरिगैसी का प्रारंभिक करियर

अर्जुन की प्रतिभा उनके करियर की शुरुआत से ही स्पष्ट थी। वर्ष 2015 में उन्होंने कोरिया में आयोजित एशियाई यूथ चैम्पियनशिप में रजत पदक (सिल्वर मेडल) जीता। यह उनकी पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता थी, जिसने उन्हें भारत के अग्रणी शतरंज खिलाड़ियों में से एक बनने की दिशा में आगे बढ़ाया।

2021 में उभार 

अर्जुन एरिगैसी के करियर का टर्निंग पॉइंट साल वर्ष 2021 में साबित हुआ। वे गोल्डमनी एशियन रैपिड (Champions Chess Tour) के लिए क्वालीफाई करने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने और शीर्ष अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने जूनियर U21 राउंड टेबल ओपन (बुल्गारिया) में दूसरा स्थान और लिंडोर्स एबे ब्लिट्ज टूर्नामेंट (रीगा) में तीसरा स्थान हासिल किया। उसी वर्ष उन्होंने टाटा स्टील इंडिया चेस टूर्नामेंट 2021 के रैपिड सेक्शन में शानदार जीत दर्ज की, जहाँ उन्होंने लेवोन अरोनियन और विदित गुजराती जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को पछाड़ा।

अर्जुन एरिगैसी का हालिया प्रदर्शन 

टाटा स्टील चेस टूर्नामेंट 2025 में अर्जुन ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए 10वां स्थान प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने इतिहास रचते हुए Chess.com फ्रीस्टाइल फ्राइडे की तीनों लगातार प्रतियोगिताएँ जीतीं, जो अब तक का एक रिकॉर्ड उपलब्धि है। जून 2025 में, उन्होंने लंदन में आयोजित वर्ल्ड रैपिड चेस चैम्पियनशिप में अपनी टीम को विजेता बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अर्जुन एरिगैसी को प्राप्त पुरस्कार और सम्मान

अर्जुन की मेहनत और सफलता ने उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कार दिलाए हैं —

  • स्पोर्टस्टार इमर्जिंग हीरो अवॉर्ड (2023)

  • TOISA चेस प्लेयर ऑफ द ईयर (2021)

IN-SPACe और SIDBI ने ₹1,000 करोड़ का वेंचर कैपिटल फंड लॉन्च किया

भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्द्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) ने एसआईडीबीआई वेंचर कैपिटल लिमिटेड (SVCL) के सहयोग से भारत के निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र की वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए ₹1,000 करोड़ का वेंचर कैपिटल फंड लॉन्च किया है। यह फंड, जिसे भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से औपचारिक स्वीकृति मिल चुकी है, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से जुड़ी स्टार्टअप कंपनियों को शुरुआती और विकास पूंजी प्रदान करेगा — जिनमें लॉन्च सिस्टम, सैटेलाइट निर्माण, पेलोड विकास और डाउनस्ट्रीम अनुप्रयोग शामिल हैं।

फंड का उद्देश्य और दायरा

IN-SPACe–SIDBI Space VC Fund का उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान कर देश में स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देना और अंतरिक्ष क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन को सशक्त बनाना है।

मुख्य फोकस क्षेत्र

  • लॉन्च टेक्नोलॉजी: लॉन्च व्हीकल और प्रणोदन प्रणाली (propulsion systems) विकसित करने वाली कंपनियों को फंडिंग।

  • सैटेलाइट एवं पेलोड सिस्टम: उपग्रह निर्माण और पेलोड नवाचार में कार्यरत स्टार्टअप्स का समर्थन।

  • इन-स्पेस सर्विसेज: ऑर्बिट में सर्विसिंग, स्पेस मैन्युफैक्चरिंग और मलबा प्रबंधन (debris management) में नए समाधान को प्रोत्साहन।

  • पृथ्वी अवलोकन एवं संचार: डेटा आधारित अनुप्रयोगों और संचार नेटवर्क को सशक्त बनाना।

  • डाउनस्ट्रीम एप्लिकेशन: कृषि, जलवायु और रक्षा के लिए अंतरिक्ष डेटा का उपयोग करने वाले उद्यमों में निवेश।

नेतृत्व के विचार

लोचन सेहरा, IAS, संयुक्त सचिव, IN-SPACe ने कहा —

“यह फंड भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक बड़ा सक्षम उपकरण साबित होगा। यह स्टार्टअप्स को वित्तीय समर्थन देगा ताकि वे अपने विचारों को परख सकें, स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकसित कर सकें और आत्मविश्वास के साथ विस्तार कर सकें।”

अरूप कुमार, प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, SVCL, ने कहा —

“अंतरिक्ष क्षेत्र राष्ट्रीय विकास का सबसे संभावनाशील क्षेत्र है। यह विशेष फंड नई कंपनियों को पूंजी और साहस देगा ताकि वे नवाचार करें, अपने आविष्कारों को व्यावसायिक रूप दें और भारत को एक वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ाएं।”

पृष्ठभूमि और स्वीकृति

  • इस फंड को अक्टूबर 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी, जो भारत की निजी अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को विस्तार देने की नीति का हिस्सा है।

  • SVCL, जो SIDBI की 100% स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है, को फंड मैनेजर नियुक्त किया गया है।

  • फंड की शुरुआत लोचन सेहरा (IN-SPACe) और अरूप कुमार (SVCL) द्वारा हस्ताक्षरित योगदान समझौते के साथ हुई।

भारत के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्व

₹1,000 करोड़ का यह फंड भारत के प्रयासों में एक परिवर्तनकारी कदम है, जो निजी अंतरिक्ष उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में अग्रसर करेगा।

अपेक्षित प्रभाव:

  • स्टार्टअप सशक्तिकरण: नई तकनीकों के नवाचार और व्यावसायीकरण को बढ़ावा।

  • स्वदेशीकरण: महत्वपूर्ण अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना।

  • आर्थिक वृद्धि: उच्च मूल्य वाले रोजगार सृजन और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाना।

  • रणनीतिक नेतृत्व: भारत को किफायती और सतत अंतरिक्ष समाधानों का वैश्विक केंद्र बनाना।

मुख्य तथ्य — IN-SPACe–SIDBI स्पेस वेंचर कैपिटल फंड

घटक विवरण
फंड का आकार ₹1,000 करोड़
साझेदार संस्थाएं IN-SPACe एवं SIDBI Venture Capital Limited (SVCL)
फंड मैनेजर SVCL (SIDBI की 100% सहायक कंपनी)
स्वीकृति केंद्रीय मंत्रिमंडल (अक्टूबर 2024) एवं SEBI की मंजूरी
उद्देश्य अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को शुरुआती और विकास पूंजी उपलब्ध कराना
मुख्य फोकस क्षेत्र लॉन्च टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट, पेलोड, इन-स्पेस सर्विसेज, पृथ्वी अवलोकन, संचार एवं डाउनस्ट्रीम एप्लिकेशन
उपस्थित अधिकारी लोचन सेहरा (IN-SPACe) एवं अरूप कुमार (SVCL)

दिग्गज फिल्म अभिनेता धर्मेन्द्र का निधन?, सच्चाई या अफवाह, 12वीं पास कर मुंबई पहुंचे थे धर्मेन्द्र

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेन्द्र, जिन्होंने 1960 के दशक में अपने करियर की शुरुआत की थी और शोले, फूल और पत्थर तथा चुपके-चुपके जैसी फिल्मों से दर्शकों का दिल जीता, लगभग छह दशकों से हिंदी सिनेमा के महत्वपूर्ण चेहरों में शामिल हैं। दिसंबर में वे 90 वर्ष के होने जा रहे हैं। फिलहाल, अभिनेता को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। उनकी बेटी ईशा देओल ने पुष्टि की है कि धर्मेन्द्र की हालत में सुधार हो रहा है।

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धर्मेंद्र का करियर

धर्मेन्द्र ने 1960 में फिल्मफेयर पत्रिका द्वारा आयोजित एक प्रतिभा प्रतियोगिता जीती, जिसके बाद उन्हें हिंदी फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे में काम करने का मौका मिला, यही उनकी फिल्मी पारी की शुरुआत थी। साल 1954 में धर्मेन्द्र ने प्रकाश कौर से विवाह किया। बाद में, 1980 के दशक की शुरुआत में उन्होंने अभिनेत्री हेमा मालिनी से शादी की, हालांकि उन्होंने अपनी पहली पत्नी को तलाक नहीं दिया। धर्मेन्द्र को भारतीय सिनेमा के इतिहास के सबसे सफल और लोकप्रिय अभिनेताओं में गिना जाता है। पांच से अधिक दशकों तक फैले अपने करियर में उन्होंने न केवल एक्शन फिल्मों से बल्कि रोमांटिक और कॉमेडी भूमिकाओं से भी दर्शकों का दिल जीता। अपने शानदार व्यक्तित्व और दमदार अंदाज के कारण वे लंबे समय तक बॉलीवुड के “ही-मैन” के रूप में मशहूर रहे।

प्रारंभिक जीवन और करियर की शुरुआत

  • पूरा नाम: धर्मेन्द्र केवल कृष्ण देओल

  • जन्मस्थान: लुधियाना, पंजाब

  • पहली फिल्म: दिल भी तेरा हम भी तेरे (1960)
    धीरे-धीरे अपनी सशक्त अदाकारी और आकर्षक व्यक्तित्व के बल पर धर्मेन्द्र ने बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई और शीघ्र ही एक सुपरस्टार के रूप में उभरे।

प्रसिद्ध फ़िल्में और करियर की ऊँचाइयाँ

“ही-मैन” की उपाधि उन्हें उन दमदार भूमिकाओं के लिए मिली, जिनमें वे साहस, शक्ति और नायकत्व का प्रतीक बने।

कुछ प्रमुख फ़िल्में:

  • फूल और पत्थर (1966) – पहली बड़ी हिट फ़िल्म

  • मेरा गाँव मेरा देश (1971) – अभिनय की परिपक्वता का उदाहरण

  • यादों की बारात (1973) – संगीत और भावनाओं का बेहतरीन संगम

  • बेताब (1983) – उनके पुत्र सनी देओल की पहली फ़िल्म

  • घायल (1990) – एक्शन और संवेदना का संगम

  • शोले (1975), चुपके चुपके (1975) – उनके सर्वाधिक यादगार अभिनय में से एक

व्यक्तिगत जीवन

धर्मेन्द्र ने वर्ष 1954 में प्रकाश कौर से विवाह किया। बाद में उन्होंने अभिनेत्री हेमा मालिनी से विवाह किया, जो बॉलीवुड की सबसे चर्चित जोड़ियों में से एक रही।

संतानें:

  • सनी देओल, बॉबी देओल (प्रकाश कौर से)

  • ईशा देओल, अहाना देओल (हेमा मालिनी से)

  • अजीता और विजेता (प्रकाश कौर से)

उनके पुत्र सनी और बॉबी देओल हिंदी सिनेमा के प्रमुख अभिनेता हैं, वहीं ईशा और अहाना ने भी फिल्म और प्रोडक्शन क्षेत्र में कार्य किया है।

सम्मान और उपलब्धियाँ

  • पद्म भूषण (2012): भारत सरकार द्वारा कला क्षेत्र में योगदान हेतु प्रदान किया गया।

  • फिल्मफेयर पुरस्कार: सर्वश्रेष्ठ अभिनेता श्रेणी में कई बार नामांकन और पुरस्कार।
    धर्मेन्द्र को न केवल उनकी फिल्मों के लिए बल्कि भारतीय फिल्म उद्योग को आकार देने में उनके योगदान के लिए भी याद किया जाएगा।

परीक्षा हेतु प्रमुख तथ्य

तथ्य विवरण
पूरा नाम धर्मेन्द्र देओल
जन्म तिथि 8 दिसंबर 1935
अभी का आयु 89 वर्ष
प्रमुख फ़िल्में शोले, फूल और पत्थर, चुपके चुपके
उपनाम बॉलीवुड का “ही-मैन”
कुल फ़िल्में 300 से अधिक
सम्मान पद्म भूषण (2012), फिल्मफेयर पुरस्कार

बांग्लादेश संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन में शामिल होने वाला पहला दक्षिण एशियाई देश बना

बांग्लादेश ने 2025 में आधिकारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र जल अभिसमय (UN Water Convention) को स्वीकार कर लिया है, जिससे वह ऐसा करने वाला पहला दक्षिण एशियाई देश बन गया है। यह निर्णय क्षेत्रीय सीमापार जल प्रबंधन (Transboundary Water Governance) के दृष्टिकोण में एक बड़ा परिवर्तन दर्शाता है और विशेष रूप से भारत के साथ मौजूदा द्विपक्षीय जल-साझाकरण समझौतों को प्रभावित कर सकता है। जैसे-जैसे वैश्विक जल संकट गहराता जा रहा है, बांग्लादेश का यह कदम अपने हितों को एक बहुपक्षीय कानूनी ढांचे के माध्यम से सुरक्षित करने की रणनीतिक दिशा को दर्शाता है।

यूएन वाटर कन्वेंशन क्या है?

इस अभिसमय का पूरा नाम है — “Convention on the Protection and Use of Transboundary Watercourses and International Lakes”, जो साझा जल निकायों के सतत और न्यायसंगत उपयोग को सुनिश्चित करने वाला एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता है।

  • स्वीकृत (Adopted): 1992, हेलसिंकी में

  • प्रवर्तन (Came into force): 1996 (संयुक्त राष्ट्र यूरोपीय आर्थिक आयोग – UNECE के तहत)

  • वैश्विक पहुंच (Global reach): 2016 से सभी यूएन सदस्य देशों के लिए खुला

यह अभिसमय साझा नदियों, झीलों और जलभृतों (Aquifers) के प्रबंधन में सहयोग, समानता और विवाद-निवारण के लिए एक ठोस कानूनी ढांचा प्रदान करता है।

अभिसमय की प्रमुख विशेषताएँ

बांग्लादेश का इस संधि में शामिल होना इसकी इन विशिष्टताओं से प्रेरित है:

  • सहकारी शासन (Cooperative Governance): साझा जल स्रोतों के प्रबंधन हेतु औपचारिक समझौतों और संयुक्त संस्थानों की अनिवार्यता।

  • समान उपयोग का सिद्धांत (Equitable Utilization): साझा जल संसाधनों का न्यायसंगत उपयोग सुनिश्चित करना और किसी अन्य देश को गंभीर क्षति से बचाना।

  • विवाद निवारण प्रणाली (Conflict Prevention): शांतिपूर्ण विवाद समाधान के लिए संस्थागत ढांचा।

  • एसडीजी संरेखण (SDG Alignment): यह एसडीजी 6.5 (एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन) को आगे बढ़ाता है और भोजन सुरक्षा (SDG 2), जलवायु कार्रवाई (SDG 13) तथा शांतिपूर्ण संस्थान (SDG 16) जैसे लक्ष्यों को भी समर्थन देता है।

  • वैश्विक भागीदारी (Global Inclusion): हाल के वर्षों में चाड, घाना, इराक, नाइजीरिया, गाम्बिया, नामीबिया और पनामा जैसे देशों ने भी इसे अपनाया है।

बांग्लादेश की रणनीतिक प्रेरणा

बांग्लादेश भारत के साथ 54 नदियाँ साझा करता है, जिनमें तीस्ता और गंगा जैसी प्रमुख नदियाँ शामिल हैं। ये नदियाँ देश की कृषि, पेयजल और पारिस्थितिक संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
तीस्ता जल समझौते में लंबे समय से हो रही देरी और ऊपरी धारा से बढ़ते जल उपयोग ने बांग्लादेश की चिंता बढ़ाई है।

इस अभिसमय से जुड़कर बांग्लादेश को—

  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने जल-संबंधी मुद्दे उठाने का वैधानिक मंच,

  • वैश्विक जल शासन सहायता तंत्र तक पहुंच,

  • और अन्य सदस्य देशों के साथ राजनयिक गठबंधन बनाने का अवसर मिला है।

भारत और क्षेत्रीय जल कूटनीति पर प्रभाव

भारत ने अब तक यूएन वाटर कन्वेंशन को स्वीकार नहीं किया है।
वह जल विवादों को सुलझाने के लिए द्विपक्षीय संधियों पर भरोसा करता है, जैसे कि —

  • इंडस वाटर्स ट्रीटी (1960) — पाकिस्तान के साथ

  • गंगा जल साझा संधि (1996) — बांग्लादेश के साथ

भारत का मत है कि सीमापार जल मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाने से राजनयिक लचीलापन (Diplomatic Flexibility) कम हो सकता है, इसलिए वह बेसिन स्तर या द्विपक्षीय वार्ता को प्राथमिकता देता है।

प्रमुख वैश्विक सूचकांक 2025 में भारत की रैंकिंग

किसी देश की विकास और प्रगति का स्तर अक्सर उन वैश्विक सूचकांकों और रिपोर्टों में दिखाई देता है, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय संगठनों द्वारा प्रकाशित किया जाता है। ये रैंकिंग शासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और सामाजिक समानता जैसे क्षेत्रों में देशों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने में मदद करती हैं।

भारत, जो दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, लगातार उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। फिर भी, विभिन्न वैश्विक सूचकांकों में उसकी स्थिति यह दर्शाती है कि जहाँ एक ओर कई क्षेत्रों में भारत ने मज़बूती दिखाई है, वहीं कुछ क्षेत्रों में अब भी सुधार की आवश्यकता बनी हुई है। आइए, 2025 के नवीनतम वैश्विक सूचकांकों और रिपोर्टों में भारत की स्थिति पर एक नज़र डालते हैं।

भारत की महत्वपूर्ण वैश्विक सूचकांकों में स्थिति 2025

सूचकांक का नाम प्रकाशित करने वाला संगठन भारत की रैंक (2025) प्रमुख बिंदु / मानदंड
जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक 2025 जर्मनवॉच, न्यू क्लाइमेट इंस्टीट्यूट, क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क 10वां ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा उपयोग और जलवायु नीति पर प्रदर्शन का आकलन करता है।
क्यूएस वर्ल्ड फ्यूचर स्किल्स इंडेक्स 2025 क्वाक्वारेली साइमंड्स (QS) 25वां भविष्य के कार्य कौशल, शैक्षणिक तैयारी और आर्थिक रूपांतरण का मूल्यांकन करता है।
हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2025 इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी 85वां भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए वीज़ा-मुक्त गंतव्यों की संख्या पर आधारित।
ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2025 ग्लोबल फायरपावर 4था 145 देशों की पारंपरिक सैन्य शक्ति का आकलन करता है।
ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2024 इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस 14वां 163 देशों में आतंकवाद के प्रभाव को मापता है।
ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2024 विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) 39वां / 133 अर्थव्यवस्थाएँ नवाचार-आधारित विकास का मूल्यांकन करता है।
ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2024 कंसर्न वर्ल्डवाइड एवं वेल्ट हंगर हिल्फे 105वां / 127 कुपोषण, बाल दुबलापन, ठिगनापन और मृत्यु दर के आधार पर भूख को मापता है।
वर्ल्ड कॉम्पिटिटिवनेस इंडेक्स 2024 अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधन विकास संस्थान (IMD) 39वां दीर्घकालिक मूल्य सृजन और प्रतिस्पर्धात्मकता का मूल्यांकन करता है।
ग्लोबल पीस इंडेक्स 2024 इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस 116वां / 163 संघर्ष, सुरक्षा और सैन्यीकरण के आधार पर शांति स्तर का मूल्यांकन करता है।
वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2024 रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स 162वां प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा का मूल्यांकन करता है।
वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2024 आईक्यूएयर 3रा (सबसे प्रदूषित देश) दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बनी रही।
इंटरनेशनल इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी इंडेक्स 2024 यू.एस. चैंबर ऑफ कॉमर्स 42वां / 55 अर्थव्यवस्थाएँ बौद्धिक संपदा की सुरक्षा और प्रवर्तन का मूल्यांकन करता है।
ग्लोबल सॉफ्ट पावर इंडेक्स 2024 ब्रांड फाइनेंस 29वां राष्ट्रीय प्रभाव और प्रतिष्ठा की वैश्विक धारणा को मापता है।
मानव विकास सूचकांक 2023–24 संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) 134वां / 193 देश जीवन प्रत्याशा, शिक्षा और प्रति व्यक्ति आय के आधार पर मूल्यांकन।
लैंगिक असमानता सूचकांक 2022 संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) 108वां / 193 देश स्वास्थ्य, सशक्तिकरण और श्रम भागीदारी में लैंगिक असमानता को मापता है।
वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2024 संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क 126वां नागरिकों की खुशी और सामाजिक कल्याण की धारणा पर आधारित।
भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक 2023 ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल 93वां / 180 देश सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार की धारणा के आधार पर रैंकिंग।
विधि का शासन सूचकांक 2024 वर्ल्ड जस्टिस प्रोजेक्ट 79वां न्याय, शासन और जवाबदेही का मूल्यांकन करता है।
ग्लोबल लाइवेबिलिटी इंडेक्स 2024 इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट नई दिल्ली व मुंबई: 141वां 173 शहरों में जीवन की गुणवत्ता और मानक का आकलन।
बहुआयामी गरीबी सूचकांक 2024 UNDP एवं ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल भारत में 23.4 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी में हैं।
ऊर्जा संक्रमण सूचकांक 2024 विश्व आर्थिक मंच 63वां / 120 देश ऊर्जा प्रदर्शन और संक्रमण तत्परता की तुलना करता है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक 2024 अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) भारत की GDP वृद्धि दर 2024 और 2025 में 6.5% अनुमानित।
वैश्विक प्रेषण प्रवाह रिपोर्ट 2024 विश्व बैंक भारत को 129 अरब अमेरिकी डॉलर की प्राप्ति — विश्व में सर्वाधिक।
SIPRI रिपोर्ट स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट 2019–23 के दौरान भारत विश्व का सबसे बड़ा हथियार आयातक बना रहा।
लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स 2023 विश्व बैंक 38वां व्यापार लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता को मापता है।

विश्लेषण एवं अंतर्दृष्टि 

भारत के प्रदर्शन का विश्लेषण दर्शाता है कि—

  • श्रेष्ठ प्रदर्शन वाले क्षेत्र: भारत ने सैन्य शक्ति, नवाचार, प्रवासी प्रेषण (Remittances) और जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट स्थान हासिल किया है।

  • सुधार की आवश्यकता वाले क्षेत्र: प्रेस की स्वतंत्रता, भूख नियंत्रण, भ्रष्टाचार पर अंकुश और लैंगिक समानता जैसे क्षेत्रों में अभी काफी सुधार की आवश्यकता है।

  • जलवायु प्रगति: जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक में शीर्ष 10 में स्थान प्राप्त करना भारत की नवीकरणीय ऊर्जा और उत्सर्जन नीतियों में निरंतर सुधार को दर्शाता है।

  • सामाजिक असमानता का संकेत: मानव विकास और खुशी सूचकांक में निम्न रैंक भारत में आय एवं सामाजिक असमानता की स्थायी चुनौतियों को उजागर करती है।

असम में बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक पारित

असम सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए “असम बहुविवाह निषेध विधेयक, 2025” (Assam Prohibition of Polygamy Bill 2025) को मंज़ूरी दी है। इस विधेयक का उद्देश्य बहुविवाह (Polygamy) यानी एक व्यक्ति द्वारा पहली शादी रहते हुए दूसरी शादी करने की प्रथा को प्रतिबंधित करना है। इसे दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। यह कदम राज्य में विवाह संबंधी कानूनों में कानूनी एकरूपता लाने और महिलाओं के अधिकारों को सशक्त करने की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है।

विधेयक के मुख्य प्रावधान

  • यदि किसी व्यक्ति की पहली शादी अभी भी वैध है, तो वह दूसरी शादी नहीं कर सकेगा।

  • इस कानून का उल्लंघन करने वाले को 7 वर्ष तक की सज़ा हो सकती है।

  • विधेयक में प्रभावित महिलाओं के लिए एक विशेष मुआवज़ा कोष (Compensation Fund) बनाने का भी प्रावधान है।

  • यह विधेयक 25 नवंबर 2025 को असम विधानसभा में पेश किया जाएगा।

छूट और विशेष प्रावधान

  • यह कानून अनुसूचित जनजातियों (STs) या संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों पर लागू नहीं होगा।

  • 2005 से पहले हुई अनुसूचित क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय के अंतर्गत वैध शादियाँ भी इस कानून के दायरे से बाहर रहेंगी।

इस विधेयक का महत्व

  • लैंगिक न्याय (Gender Justice): बहुविवाह पर रोक लगाकर महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक असुरक्षा से बचाने का प्रयास।

  • कानूनी एकरूपता (Legal Uniformity): असम सरकार विवाह कानूनों को सभी समुदायों के लिए समान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

  • संवैधानिक अधिकारिता (Legislative Competence): विशेषज्ञ समिति ने निष्कर्ष निकाला था कि चूंकि विवाह और तलाक “संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List)” में आते हैं, इसलिए असम को ऐसा कानून बनाने का अधिकार है।

  • दृष्टांत (Precedent): यह कानून अन्य राज्यों के लिए भी व्यक्तिगत कानून सुधार (Personal Law Reform) की दिशा में एक मिसाल बन सकता है।

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की Biography: उनके जीवन, करियर, उपलब्धियों और विरासत के बारे में जानें

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक, महान विद्वान, और स्वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री थे। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता में गहरा विश्वास रखा और महात्मा गांधी के अहिंसात्मक आंदोलनों का पूरा समर्थन किया। भारत में शिक्षा को सुधारने के उनके प्रयासों के सम्मान में 11 नवम्बर को हर वर्ष राष्ट्रीय शिक्षा दिवस (National Education Day) के रूप में मनाया जाता है।

प्रारंभिक जीवन

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का जन्म 11 नवम्बर 1888 को मक्का (सऊदी अरब) में मुहियुद्दीन अहमद के रूप में हुआ था। जब वे दो वर्ष के थे, उनका परिवार भारत के कलकत्ता (अब कोलकाता) आ गया। उनके पिता एक प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान थे, जबकि उनकी माता मदीना के प्रतिष्ठित विद्वानों के परिवार से थीं।

शिक्षा और प्रारंभिक रुचियाँ

  • आज़ाद की शिक्षा घर पर ही हुई। उन्होंने छोटी उम्र में ही फ़ारसी, उर्दू, अरबी जैसी कई भाषाएँ सीख लीं। उन्हें इतिहास, दर्शनशास्त्र और गणित जैसे विषयों में गहरी रुचि थी।
  • बारह वर्ष की आयु तक उन्होंने एक पुस्तकालय, वाचनालय और वाद-विवाद संस्था स्थापित कर ली थी। वे इस्लामी धर्मशास्त्र, विज्ञान और दर्शन के गहरे ज्ञाता बन चुके थे।

पत्रकार के रूप में मौलाना आज़ाद

  • मौलाना आज़ाद ने 11 वर्ष की आयु में ही ‘आज़ाद’ उपनाम से कविताएँ और लेख लिखना शुरू कर दिया था।
  • 1912 में उन्होंने “अल-हिलाल (Al-Hilal)” नामक साप्ताहिक पत्रिका निकाली, जिसमें उन्होंने ब्रिटिश शासन की कड़ी आलोचना की। यह पत्रिका इतनी लोकप्रिय हुई कि 1914 में ब्रिटिश सरकार ने इसे प्रतिबंधित कर दिया।
  • इसके बाद उन्होंने “अल-बलाघ (Al-Balagh)” नामक एक और प्रकाशन शुरू किया, जिसे 1916 में फिर से प्रतिबंधित कर दिया गया। उनके क्रांतिकारी विचारों के कारण उन्हें कई प्रदेशों में प्रवेश से रोका गया और 1920 तक बिहार में नजरबंद रखा गया।

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका

  • 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में मौलाना आज़ाद ने क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया और अरविंदो घोष जैसे नेताओं के साथ कार्य किया।
  • 1908 में वे मिस्र, सीरिया, तुर्की और फ्रांस गए, जहाँ से उनके राष्ट्रवादी विचारों को नई दिशा मिली।
  • उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का नेतृत्व किया और महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन (1920–22) का समर्थन किया।
  • 1923 में, मात्र 35 वर्ष की आयु में, वे कांग्रेस के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष बने।
  • 1930 के नमक सत्याग्रह के दौरान उन्हें जेल भेजा गया।
  • 1940 से 1946 तक वे कांग्रेस अध्यक्ष रहे और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने पर फिर गिरफ्तार किए गए।

हिंदू-मुस्लिम एकता के समर्थक

मौलाना आज़ाद जीवन भर हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रबल समर्थक रहे। उन्होंने अपने लेखों और भाषणों में एकता और धर्मनिरपेक्ष भारत की वकालत की।
वे देश के विभाजन के विरोधी थे और विभाजन के बाद हुए दंगों से अत्यंत दुखी हुए। उन्होंने शरणार्थी शिविरों की स्थापना में मदद की और हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों का संचालन किया।

शिक्षा के क्षेत्र में योगदान

मौलाना’ उपाधि उन्हें उनके गहन ज्ञान के कारण मिली। उन्होंने स्वतंत्र भारत की शिक्षा नीति के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने 1920 में अलीगढ़ में जामिया मिलिया इस्लामिया (Jamia Millia Islamia) की स्थापना में सहयोग दिया।

वे 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा के प्रबल पक्षधर थे और उन्होंने पूर्वी और पश्चिमी शिक्षा प्रणाली के संतुलन का समर्थन किया।

उनके नेतृत्व में कई प्रमुख संस्थाएँ बनीं —

  • विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC)

  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IITs)

  • भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc)

स्वतंत्रता के बाद का जीवन

  • स्वतंत्र भारत में वे पहले शिक्षा मंत्री (1947–1958) बने। उन्होंने विद्यालयों, कॉलेजों और उच्च शिक्षा संस्थानों के विकास पर विशेष जोर दिया।
  • उन्होंने साहित्य अकादमी, संगीत नाटक अकादमी और ललित कला अकादमी जैसी सांस्कृतिक संस्थाओं की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • उन्होंने 1950 में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की स्थापना की, ताकि अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके।

साहित्यिक योगदान

मौलाना आज़ाद एक उत्कृष्ट लेखक भी थे। उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं —

  • India Wins Freedom

  • ग़ुबार-ए-ख़ातिर (Ghubar-e-Khatir)

  • तज़किरा (Tazkirah)

  • तरजुमान-उल-क़ुरआन (Tarjumanul Quran)

निधन और विरासत

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का निधन 22 फरवरी 1958 को हुआ। 1992 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उनकी जयंती 11 नवम्बर को भारत में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाई जाती है। मौलाना आज़ाद एजुकेशन फ़ाउंडेशन (1989) गरीब और वंचित वर्गों की शिक्षा को बढ़ावा देती है, जबकि मौलाना अबुल कलाम आज़ाद नेशनल फ़ेलोशिप अल्पसंख्यक छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए सहायता प्रदान करती है।

Booker Prize 2025: हंगरी-ब्रिटिश लेखक डेविड स्जेले ने उपन्यास ‘फ्लेश’ हेतु 2025 का बुकर पुरस्कार जीता

लंदन में 10 नवंबर 2025 को रात आयोजित समारोह में हंगरी-ब्रिटिश लेखक डेविड स्जेले को उनके उपन्यास ‘फ्लेश’ के लिए बुकर प्राइज 2025 से सम्मानित किया गया। इस अवॉर्ड के तहत उन्हें 50,000 पाउंड की राशि और ट्रॉफी दी गई। पुरस्कार उन्हें पिछले साल की विजेता सामंथा हार्वी ने प्रदान किया। 51 वर्षीय स्जेले के उपन्यास ‘फ्लेश’ में एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो भावनात्मक रूप से टूट चुका है और जिंदगी की कुछ अप्रत्याशित घटनाएं उसकी दुनिया बदल देती हैं। कहानी को समझने के बाद फैसला सुनाने वालों ने इस किताब को ‘सरल लेकिन गहराई से भरी, तनावपूर्ण और भावनात्मक रूप से झकझोर देने वाली कहानी’ बताया।

किरण देसाई: एक करीबी दावेदार

बता दें कि भारतीय मूल की लेखिका किरण देसाई अपनी किताब सोनिया और सनी का अकेलापन’ के लिए इस बार दूसरे स्थान पर रहीं। अगर वे जीततीं, तो वे बुकर प्राइज के 56 वर्षों के इतिहास में दो बार यह पुरस्कार जीतने वाली पांचवीं लेखिका बन जातीं। इससे पहले उन्होंने 2006 में ‘नुकसान की विरासत’ के लिए यह पुरस्कार जीता था।

667 पन्नों की एक लंबी कहानी

किरण देसाई की नई किताब 667 पन्नों की एक लंबी कहानी है, जिसमें भारत और अमेरिका की पृष्ठभूमि पर दो भारतीय युवाओं सोनिया और सनी, के जीवन और प्रेम को दिखाया गया है। निर्णायकों ने इसे ‘प्रेम, परिवार, परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम’ बताया। बुकर प्राइज के निर्णायक मंडल के अध्यक्ष आयरिश लेखक रॉडी डॉयल ने कहा कि ‘फ्लेश’ एक बिल्कुल अलग तरह की किताब है। यह थोड़ी अंधेरी कहानी है, लेकिन इसे पढ़ना आनंददायक है।

ये किताबें भी थे सूची में सामिल

गौरतलब है कि इस साल बुकर प्राइज की सूची में अन्य नामों में सुसान चोई (‘फ्लैशलाइट’), केटी कितामुरा (‘ऑडिशन’), बेन मार्कोविट्स (‘द रेस्ट ऑफ अवर लाइव्स’) और एंड्रयू मिलर (‘द लैंड इन विंटर’) शामिल थे। सभी फाइनलिस्ट लेखकों को 2,500 पाउंड और उनकी किताब का विशेष संस्करण दिया जाएगा। निर्णायकों ने कहा कि इस साल की सभी छह किताबें ‘मानव भावनाओं, रिश्तों और समाज की जटिलताओं’ को अनोखे ढंग से पेश करती हैं। साथ ही हर लेखक ने अपनी कहानी को पूरी मौलिकता और खूबसूरती के साथ लिखा है।

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