पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल का निधन

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पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त और कांग्रेस नेता मनोहर सिंह गिल का 15 अक्टूबर को निधन हो गया। पद्म विभूषण से सम्मानित गिल ने साउथ दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। उन्होंने 86 वर्ष की उम्र में आखिरी सांस ली। निर्वाचन आयोग ने पूर्व मुख्य आयुक्त डॉक्टर मनोहर सिंह गिल के निधन पर शोक जताया है। सीईसी राजीव कुमार, आयुक्त अनूप चंद्र पांडेय और अरुण गोयल ने गिल के निधन को आयोग के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

 

मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्य

उन्होंने 1996 से 2001 तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्य किया था। वह कांग्रेस सरकार में यूथ अफेयर और खेल मंत्री भी रहे। इसके अलावा उन्होंने सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री का पद भी संभाला।

 

2004 में राज्यसभा के लिए चुने गए

पंजाब कैडर के पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी गिल 2004 में कांग्रेस के टिकट पर राज्यसभा के लिए चुने गए थे। 1980 के दशक में पंजाब के कृषि सचिव के रूप में कार्य करने के बाद उन्होंने ‘एन इंडियन सक्सेस स्टोरी: एग्रीकल्चर एंड कोऑपरेटिव्स’ नामक पुस्तक भी लिखी थी।

 

पद्म विभूषण से सम्मानित

देश के 11वें राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के अलावा 20 से ज्यादा राज्यों के विधानसभा चुनाव भी डॉ. गिल ने अपने कार्यकाल में कराए थे। एम एस गिल को सिविल सेवक के रूप में असाधारण और विशिष्ट सेवाओं के लिए साल 2000 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।

 

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रौनक साधवानी बने शतरंज अंडर-20 के विश्व चैंपियन

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भारत के ग्रैंडमास्टर 17 वर्षीय रौनक साधवानी इटली में दमदार प्रदर्शन करते हुए अंडर-20 विश्व जूनियर रैपिड शतरंज चैंपियन बन गए। महाराष्ट्र के नागपुर के रौनक ने 11वें राउंड में 8.5 अंक के साथ विजेता ट्रॉफी अपने नाम की। खास बात यह है कि रौनक को टूर्नामेंट में खेलने के लिए वीजा हासिल करने में परेशानी आई थी, लेकिन उनकी एकाग्रता भंग नहीं हुई।

शीर्ष वरीयता प्राप्त रौनक के अभियान की शुरुआत खराब रही। दूसरे और 5वें राउंड में वे बेहद कम रैंक वाले खिलाड़ियों से हार गए थे। पांच राउंड तक सिर्फ तीन अंक हासिल कर पाए थे। हालांकि अंतिम राउंड में जर्मनी के टोबियास कोएले को हराकर विजेता बन गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर रौनक साधवानी को बधाई दी। उन्होंने कहा, रौनक ने रणनीतिक प्रतिभा, कौशल से विश्व को आश्चर्यचकित किया और देश को गौरवान्वित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, फिडे वर्ल्ड जूनियर रैपिड शतरंज चैंपियनशिप 2023 में ऐतिहासिक जीत के लिए रौनक साधवानी को बधाई। उनकी रणनीतिक प्रतिभा और कौशल ने दुनिया को आश्चर्यचकित किया। साथ ही देश को गौरवान्वित भी किया है। वह अपनी असाधारण उपलब्धियों से हमारे देश के युवाओं को प्रेरित करते रहें। उन्हें भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं।

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World Cup 2023 Schedule and Fixture, PDF Download_100.1

जयशंकर ने वियतनाम में रबींद्रनाथ टैगोर की प्रतिमा का अनावरण किया

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विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वियतनाम के बाक निन्ह में रबींद्रनाथ टैगोर की प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान जयशंकर ने कहा कि मुझे यह जानकर खुशी हुई कि रबींद्रनाथ टैगोर की कृतियों को वियतनाम में व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त है, पूरे देश में पढ़ा और सराहा जाता है। यहां तक कि वियतनामी पाठ्यपुस्तकों में भी शामिल किया गया है। यह जानकर वाकई खुशी हुई कि टैगोर की गीतांजलि का वियतनामी में अनुवाद किया गया है। भारत और वियतनाम के बीच बौद्ध धर्म की विरासत में निहित एक गहरा ऐतिहासिक संबंध है।

विदेश मंत्री ने टैगोर की आवक्ष प्रतिमा का अनावरण करते हुए कहा कि भारत और वियतनाम के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंध लगभग 2,000 साल पुराने हैं, जो बौद्ध धर्म की विरासत से जुड़े हैं। आज एक असाधारण भारतीय व्यक्तित्व गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के सम्मान में एक और उल्लेखनीय स्मारक की स्थापना की गई है। टैगोर एक प्रसिद्ध चित्रकार, शिक्षक, मानवतावादी, संगीतकार और एक बहुत ही गहन विचारक थे।

 

गीतांजलि का वियतनामी में अनुवाद

विदेश मंत्री ने कहा कि यह जानकर वाकई खुशी हुई कि टैगोर की गीतांजलि का वियतनामी में अनुवाद किया गया और इसे 2001 में प्रकाशित किया गया। ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि टैगोर ने 1929 में हो ची मिन्ह सिटी की तीन दिवसीय यात्रा की थी, जिसका वियतनाम पर एक स्थायी बौद्धिक और सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव पड़ा।

 

गीतांजलि टैगोर की सबसे प्रसिद्ध कृति

कविता संग्रह गीतांजलि टैगोर की सबसे प्रसिद्ध कृति है, जो 1910 में भारत में प्रकाशित हुई थी। टैगोर को इसके अंग्रेजी अनुवाद ‘सॉन्ग ऑफरिंग्स’ के लिए साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था और वह 1913 में यह सम्मान पाने वाले पहले गैर-यूरोपीय बने थे। जयशंकर ने कहा कि उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि वियतनाम ने 1982 में टैगोर के सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया था। जयशंकर रविवार को वियतनाम पहुंचे। वियतनाम से वह सिंगापुर जाएंगे।

 

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Putin in Kyrgystan for first trip abroad since ICC arrest warrant_110.1

जानें World Anaesthesia Day का इतिहास, महत्व और थीम

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‘वर्ल्ड एनेस्थीसिया डे’ हर साल 16 अक्टूबर को मनाया जाता है। मेडिकल भाषा में समझे तो यह सर्जरी, ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल किया जाता है। एनेस्थीसिया दिवस हर साल इसलिए भी मनाया जाता है ताकि दुनियाभर के लोगों को इसके महत्व और जागरूर किया जाए। एनेस्थीसिया की खोज ही अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है क्योंकि यही वह खास चीज है जिसके जरिए बड़ा से बड़ा सर्जरी बिना किसी दर्द के मरीज झेल लेते हैं। एनेस्थीसिया छोटी या बड़ी सर्जरी के दौरान बेहोश करने का एक मेडिकल प्रोसेस है जिसके जरिए मरीज को बेहोश किया जाता है।

 

महत्व

‘वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ सोसाइटीज ऑफ एनेस्थेसियोलॉजिस्ट’ के अनुसार, लगभग 5 बिलियन लोगों को सुरक्षित एनेस्थीसिया प्रथाओं तक पहुंच का अभाव है। विश्व एनेस्थीसिया दिवस एक शक्तिशाली वकालत उपकरण के रूप में कार्य करता है जो लोगों, चिकित्सा पेशेवरों और समाज को एनेस्थीसिया के महत्व और रोगी की भलाई में एनेस्थेसियोलॉजिस्ट द्वारा निभाई जाने वाली महत्वपूर्ण भूमिकाओं के बारे में शिक्षित करने का प्रयास करता है।

 

थीम

विश्व एनेस्थीसिया दिवस 2023 का विषय ‘एनेस्थीसिया और कैंसर देखभाल’ है। यह थीम कैंसर के उपचार में एनेस्थीसिया की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास करता है। यह कैंसर के इलाज को बढ़ाने के लिए एनेस्थीसिया सेवाओं को मजबूत करने का भी प्रयास करता है।

 

एनेस्थीसिया क्या है?

सर्जरी या किसी अन्य दर्दनाक प्रक्रिया से पहले मरीजों को एनेस्थीसिया दिया जाता है। यह मरीजों को बेहोश करके बिना किसी दर्द के सुरक्षित इलाज में मदद करता है। एनेस्थीसिया मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं, लोकल, जनरल और जनरल एनेस्थीसिया। दी गई दवाइयों से संवेदना खत्म हो जाती है। एनेस्थीसिया के बाद रोगी को थोड़ी देर के लिए मुंह सुखने लगता है, गले में खराश, नींद आना, मांसपेशियों में दर्द, भ्रम और कंपकंपी का अनुभव हो सकता है।

 

इतिहास

विश्व एनेस्थीसिया दिवस एनेस्थीसिया के जन्म का प्रतीक है। एनेस्थीसिया का पहली बार उपयोग 16 अक्टूबर, 1846 को किया गया था। ईथर एनेस्थीसिया का पहला सफल प्रदर्शन विलियम थॉमस ग्रीन मॉर्टन (1819-1868) द्वारा बोस्टन, एमए, यूएसए के मैसाचुसेट्स जनरल अस्पताल में किया गया था।

 

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August 23 to be celebrated as National Space Day, Govt issues notification_100.1

केरल ने अपनी पहली 3डी-प्रिंटेड इमारत का किया उद्घाटन

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केरल के तिरुवनंतपुरम में राज्य की पहली 3डी-प्रिंटेड इमारत का उद्घाटन किया गया। 380 वर्ग फुट की इमारत पीटीपी नगर में केरल राज्य विनिर्माण केंद्र (केसनिक) परिसर में बनाई गई है। जिसका उद्घाटन राजस्व मंत्री के राजन ने किया। राज्य निर्मिति केंद्र (केसनिक) तिरुवनंतपुरम के पीटीपी नगर में स्थित है।

यह इमारत केरल राज्य विनिर्माण केंद्र के परिसर में बनाई गई है। इस बिल्डिंग का नाम ‘अमेज-28’ रखा गया है। इस इमारत का क्षेत्रफल 380 वर्ग फुट है।
इस इमारत का निर्माण चेन्नई स्थित स्टार्टअप त्वास्टा द्वारा किया गया है। 3 डी प्रिंटिंग को एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग कहा जाता है। इस तकनीक में कंप्यूटर द्वारा निर्मित डिज़ाइन का उपयोग करके परत-दर-परत निर्माण किया जाता है।

 

पहला 3 डी डाकघर

ज्ञातव्य है कि सितंबर, 2023 में देश का पहला 3 डी डाकघर बेंगलुरू में खोला गया था। राज्य निर्मिति केंद्र (केसनिक) तिरुवनंतपुरम के पीटीपी नगर में स्थित है। 11 लाख रुपये की लागत वाली यह संरचना आईआईटी-मद्रास के पूर्व छात्रों द्वारा संचालित चेन्नई स्थित स्टार्ट-अप त्वास्टा की मदद से बनाई गई थी। केसनिक ने 3डी प्रिंटिंग प्रोजेक्ट के लिए ट्वास्टा के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे।

 

स्थिरता और न्यूनतम अपशिष्ट

3डी प्रिंटिंग ऐसे लाभ प्रदान करती है जो तेजी से निर्माण और बहुमुखी डिजाइन से परे हैं। इस तकनीक का एक समान रूप से महत्वपूर्ण आयाम इसकी स्थिरता है। 3डी प्रिंटिंग नाटकीय रूप से अपशिष्ट को कम करती है, जब कम्प्यूटरीकृत तरीकों को नियोजित किया जाता है तो यह लगभग शून्य स्तर तक पहुंच जाता है। 3डी प्रिंटिंग की यह स्थायी सुविधा पर्यावरण के प्रति जागरूक निर्माण प्रथाओं की ओर विश्वव्यापी रुझान के साथ सामंजस्य स्थापित करती है।

 

केरल 3डी प्रिंटिंग तकनीक का व्यावसायीकरण

केरल का लक्ष्य इस अग्रणी तकनीक का व्यावसायीकरण करना है, जिसमें निजी और सरकारी दोनों संस्थाओं की गहरी दिलचस्पी है। केआईआईएफबी और इसरो जैसे संगठनों के साथ चल रही चर्चाएं निर्माण उद्योग के भीतर 3डी प्रिंटिंग के महत्वपूर्ण हित और संभावित अनुप्रयोगों को रेखांकित करती हैं।

 

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुख्य बातें

केरल राज्य निर्मिति केंद्रम के निदेशक: देबी वर्गीस

 

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पंजाब के नवांपिंड सरदारां गांव को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव का पुरस्कार मिला

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पंजाब के गुरदासपुर में स्थित खूबसूरत नवांपिंड सरदारां गांव को हाल ही में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा “भारत का सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव 2023” के खिताब से नवाजा गया। पांच बहनों ने मिलकर अपने गांव को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव से सम्मानित कराया है। सभी अपनी-अपनी पेशेवर जिंदगी में व्यस्त है इसके बावजूद पांच बहनों ने यहां नवां पिंड सरदारां गांव में अपने दो पैतृक आवास के संरक्षण का बीड़ा उठाया और उनकी मेहनत रंग लायी तथा केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने उनके गांव को हाल में 2023 के लिए भारत के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव के सम्मान से नवाजा।

संघा बहनों के नाम से मशहूर इन महिलाओं ने अपने दो पैतृक आवास – ‘कोठी’ और ‘पीपल हवेली’ के संरक्षण में जी-जान लगा दी। गुरदासपुर में नवां पिंड सरदारां गांव को पंजाब की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार तथा पर्यटन के जरिए सतत विकास के लिए इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया। देश के 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के कुल 750 गांवों ने इस पुरस्कार के लिए आवेदन किया था और इनमें से 35 चयनित गांवों में नवां पिंड सरदारां को भी चुना गया।

 

‘कोठी’ और ‘पीपल हवेली’ करीब 140 साल पहले निर्मित

‘कोठी’ और ‘पीपल हवेली’ करीब 140 साल पहले निर्मित की गयी और कुछ साल पहले उसकी मरम्मत करायी गयी और उसे ‘होमस्टे’ में तब्दील कर दिया जहां घरेलू और विदेशी पर्यटक आकर ठहरते हैं। इन इमारतों की देखभाल कर रही पांच बहनों के नाम गुरसिमरन कौर संघा, गुरमीत राय संघा, मनप्रीत कौर संघा, गीता संघा और नूर संघा हैं।

 

रोजगार के अवसर

संघा परिवार गुरदासपुर जिला प्रशासन के सहयोग से न केवल ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है बल्कि उसने स्थानीय समुदाय को भी इसमें शामिल किया है और उन्हें रोजगार के अवसर मुहैया करा रहा है।

दिल्ली में रहने वाली गुरसिमरन कौर संघा ने कहा कि वह गांव में बकरी पालन का व्यवसाय करती हैं तथा उन्होंने इसमें स्थानीय युवाओं को भी शामिल किया है। गीता संघा शिल्प उत्पादों के लिए गांव में महिला स्वयं-सहायता समूहों के साथ काम करती हैं। गुरमीत राय संघा ने कहा कि शिल्प उत्पादों के लिए ‘बारी कलेक्टिव’ नामक ब्रांड बनाया गया है। मनप्रीत कौर संघा मकान में होमस्टे की ऑनलाइन बुकिंग का काम संभालती हैं। पांच बहनों में सबसे छोटी नूर संघा पेशे से वकील हैं और मुंबई में रहती हैं।

 

नवां पिंड सरदारां

नवां पिंड सरदारां अमृतसर को कांगड़ा में माता वैष्णो देवी मंदिर, धर्मशाला, डलहौजी और अन्य महत्वपूर्ण पर्यटक स्थलों से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-54 से पांच किलोमीटर दक्षिण में स्थित है।

 

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हर साल 23 अगस्त को मनाया जाएगा ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’, सरकार ने जारी की अधिसूचना

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केंद्र सरकार ने 23 अगस्त को ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। यह फैसला चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर विक्रम लैंडर की लैंडिंग और प्रज्ञान रोवर की तैनाती के साथ चंद्रयान-3 मिशन की सफलता का जश्न मनाने के लिए की गई है। इसको लेकर एक अधिसूचना भी जारी की गई है।

अंतरिक्ष विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया कि 23 अगस्त, 2023 को विक्रम लैंडर की लैंडिंग और चंद्रमा की सतह पर प्रज्ञान रोवर की तैनाती के साथ चंद्रयान -2023 मिशन की सफलता के साथ भारत अंतरिक्ष यात्रा करने वाले देशों के एक विशिष्ट समूह में शामिल हो गया, जो चंद्रमा पर उतरने वाला चौथा देश और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला पहला राष्ट्र बन गया। इस ऐतिहासिक मिशन के परिणाम आने वाले वर्षों में मानव जाति को लाभान्वित करेंगे।

इसमें आगे कहा गया, यह दिन अंतरिक्ष मिशनों में देश की प्रगति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित को आगे बढ़ाने के लिए युवा पीढ़ी को प्रेरित करता है और अंतरिक्ष क्षेत्र को एक प्रमुख प्रेरणा प्रदान करता है। इसलिए, भारत सरकार ने इस ऐतिहासिक क्षण को मनाने के लिए हर साल अगस्त के 23वें दिन को ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ के रूप में घोषित किया है।

 

23 अगस्त को देशभर में मनाया गया जश्न

गौरतलब है कि 23 अगस्त को जब इंडियन स्पेस रिसर्च ओर्गनाइजेशन (ISRO) का चंद्र मिशन पूरा हुआ था तो पूरे देश में जश्न मनाया गया था। चंद्रयान की सफल लैंडिंग के साथ ही भारत अमेरिका, रूस, और चीन के बाद चांद पर पहुंचने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया था, जबकि चांद के साउथ पोल पर पहुंचने वाला भारत पहला देश है। इसरो की इस सफलता पर मोदी कैबिनेट ने इस साल अगस्त महीने में 23 अगस्त के दिन को ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ के रूप में मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

 

पीएम मोदी ने वैज्ञानिकों के साथ बैठक में दी थी जानकारी

इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के बेंगलुरु में इसरो के वैज्ञानिकों के साथ अपनी बैठक के दौरान भी घोषणा की थी कि 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के रूप में मनाया जाएगा, जो चंद्रयान-3 मिशन की बड़ी सफलता को चिह्नित करेगा।

 

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हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (आईओआरए) और इसके महत्व को समझना

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हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (आईओआरए) ने हाल ही में 11 अक्टूबर को कोलंबो में अपनी मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाई, जिसमें दुनिया भर के देशों ने दिलचस्पी दिखाई। 23 सदस्य देशों और 11 संवाद भागीदारों के साथ, IORA हिंद महासागर के आसपास क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

IORA का गठन

Indian Ocean Rim Association (IORA) UPSC

  • यह एक अंतर-सरकारी संगठन है जिसका उद्देश्य हिंद महासागर की सीमा से लगे 23 सदस्यीय राज्यों और 9 डायलॉग पार्टनर्स के माध्यम से हिंद महासागर क्षेत्र के भीतर क्षेत्रीय सहयोग और सतत विकास को मजबूत करना है।
  • इसका गठन 1997 में हुआ था और इसका सचिवालय मॉरीशस में है।
  • IORA एक क्षेत्रीय मंच है, जो प्रकृति में त्रिपक्षीय है, जो सरकार, व्यापार और शिक्षा जगत के प्रतिनिधियों को एक साथ लाता है, ताकि उनके बीच सहयोग और करीबी बातचीत को बढ़ावा दिया जा सके।
  • यह विशेष रूप से व्यापार सुविधा और निवेश, संवर्धन के साथ-साथ क्षेत्र के सामाजिक विकास पर आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए खुले क्षेत्रवाद के सिद्धांतों पर आधारित है।
  • सदस्य: ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, कोमोरोस, फ्राँस, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, केन्या, मेडागास्कर, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, मोजाम्बिक, ओमान, सेशेल्स, सिंगापुर, सोमालिया, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, तंजानिया, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, यमन।
  • संवाद भागीदार: चीन, मिस्र, सऊदी अरब, जर्मनी, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, रूस, तुर्किये, यूनाइटेड किंगडम तथा संयुक्त राज्य अमेरिका।

 

हिंद महासागर क्षेत्र का महत्व

  • हिंद महासागर क्षेत्र अपनी भौगोलिक, आर्थिक और रणनीतिक प्रासंगिकता के कारण अत्यधिक महत्व रखता है।
  • विश्व की लगभग एक-तिहाई जनसंख्या, कुल 2.6 बिलियन लोग, इसी क्षेत्र में रहते हैं।
  • इसके अलावा, वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसके माध्यम से गुजरता है, जिसमें वैश्विक तेल व्यापार का 80%, कंटेनरीकृत कार्गो का 50% और थोक कार्गो का 33% शामिल है।
  • यह क्षेत्र सामूहिक रूप से 1 ट्रिलियन डॉलर मूल्य की वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करता है, जिसमें इंट्रा-आईओआरए व्यापार लगभग 800 बिलियन डॉलर का होता है।
  • यह हिंद महासागर क्षेत्र को वैश्विक वाणिज्य और सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाता है।

 

IORA: बदलते भू-रणनीतिक परिदृश्य में एक सुरक्षित स्थान

  • एक विकसित भू-रणनीतिक परिदृश्य में, जहां देश विभिन्न क्षेत्रीय समूहों और पहलों में शामिल हो रहे हैं, आईओआरए भारत और क्षेत्र के अन्य देशों के लिए एक “सुरक्षित स्थान” के रूप में कार्य करता है।
  • यह बड़ी शक्तियों की प्रतिद्वंद्विता से उत्पन्न निरंतर चुनौतियों से बचने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
  • IORA में सदस्यता आम सहमति पर आधारित है, और यह अन्य समूहों की तुलना में कम विवादास्पद माहौल बनाए रखती है।
  • उदाहरण के लिए, भारत को सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र (एमएफएन) का दर्जा देने में विफल रहने के कारण आईओआरए सदस्यता के लिए पाकिस्तान का आवेदन 2001 से लंबित है।
  • यह IORA को भारत और उसके पड़ोसियों के लिए एक पसंदीदा मंच बनाता है।

 

IORA के फोकस क्षेत्र

IORA ने अपने चार्टर में सात प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की रूपरेखा तैयार की है:

समुद्री सुरक्षा और संरक्षा: क्षेत्र के भीतर समुद्री गतिविधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

व्यापार और निवेश सुविधा: आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना।

मत्स्य पालन प्रबंधन: स्थिरता के लिए क्षेत्र की मत्स्य पालन का प्रबंधन करना।

आपदा जोखिम प्रबंधन: प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए तैयारी करना।

शैक्षणिक, विज्ञान और प्रौद्योगिकी: शैक्षणिक और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को प्रोत्साहित करना।

पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान: सदस्य देशों के भीतर सांस्कृतिक समझ और पर्यटन को बढ़ावा देना।

लैंगिक सशक्तिकरण: क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बनाने वाली पहलों पर ध्यान केंद्रित करना।

 

हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा करना

  • मंत्रिपरिषद की हालिया बैठक में, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हिंद महासागर को “स्वतंत्र, खुला और समावेशी स्थान” बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।
  • उन्होंने समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन के आधार पर संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की आवश्यकता पर बल दिया।
  • चीन के लिए एक संदेश के रूप में व्याख्या की गई ये टिप्पणियां, छिपे हुए एजेंडे, अव्यवहार्य परियोजनाओं और अस्थिर ऋण के खिलाफ क्षेत्र की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करती हैं जो हिंद महासागर क्षेत्र के देशों को खतरे में डाल सकती हैं।

 

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Escalation in Nagorno-Karabakh Conflict: Azerbaijan Launches Military Operation_120.1

 

भारत के बाहर डॉ. आंबेडकर की सबसे ऊंची प्रतिमा का अनावरण

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भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की देश के बाहर सबसे ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया गया। अमेरिका के मैरीलैंड शहर में बाबा साहेब की 19 फुट ऊंची प्रतिमा को ‘स्टैच्यू ऑफ इक्वेलिटी’ का नाम दिया गया है। अनावरण समारोह में अमेरिका के विभिन्न हिस्सों से 500 से अधिक भारतीय-अमेरिकी समेत अन्य देशों के लोग शामिल हुए।

मालूम हो कि इस 19 फीट प्रतिमा को सरदार पटेल की प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाने वाले प्रसिद्ध कलाकार और मूर्तिकार राम सुतार ने बनाई है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को गुजरात में सरदार सरोवर बांध के नीचे की ओर नर्मदा में एक द्वीप पर स्थापित किया गया है। स्टैच्यू ऑफ इक्वेलिटी के अनावरण समारोह में शामिल होने आए प्रतिभागियों का भारी बारिश और बूंदाबांदी के बाद भी उत्साह कम नहीं हुआ।

 

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

प्रतिमा के अनावरण समारोह के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों से आए भारतीय-अमेरिकियों ने वहां कई तरह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं। वहीं, इस प्रतिमा के अनावरण के समारोह में शामिल दिलीप म्हास्के ने कहा कि स्टैच्यू ऑफ इक्वेलिटी 1.4 अरब भारतीयों और 4.5 मिलियन भारतीय अमेरिकियों का प्रतिनिधित्व करेगी।

 

प्रतिमा का अनावरण

मालूम हो कि स्वतंत्र भारत में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पहले मंत्रिमंडल में डॉ अम्बेडकर को कानून और न्याय मंत्री बनाया गया था। वहीं, उन्होंने 14 अक्टूबर, 1956 को अपने समर्थकों के साथ उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया था। इसके कुछ ही महीनों बाद छह दिसंबर को उनका निधन हो गया था। उनके बौद्ध धर्म अपनाने की तारिख और मैरीलैंड में प्रतिमा का अनावरण की तारीख दोनों एक दूसरे से मेल खाती है। मैरीलैंड में 14 अक्टूबर को ही प्रतिमा का अनावरण किया गया, जिसे धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस के रूप में मनाया जाता है।

 

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Russia Delivers Uranium for Bangladesh's Rooppur Nuclear Power Plant_90.1

छात्र-छात्रों के लिए ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी, जानें सबकुछ

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शिक्षा मंत्रालय और भारत सरकार ने एपीएआर आईडी की शुरुआत की है, जिसे “वन नेशन वन स्टूडेंट आईडी कार्ड” के रूप में जाना जाता है। इस अभूतपूर्व कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों के लिए डिग्री, छात्रवृत्ति, पुरस्कार और अन्य क्रेडिट सहित शैक्षणिक डेटा को डिजिटल रूप से केंद्रीकृत करना है। इस लेख में, हम आपको एपीएआर आईडी के लाभों और इसे आधिकारिक वेबसाइट से कैसे डाउनलोड करें, इसके बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करेंगे।

वन नेशन वन स्टूडेंट आईडी कार्ड, एपीएआर आईडी, भारत में छात्रों के लिए अधिक संगठित और सुलभ शैक्षणिक अनुभव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अपनी APAAR आईडी को पंजीकृत और डाउनलोड करके, आप विभिन्न लाभों को अनलॉक कर सकते हैं और अपने शैक्षणिक रिकॉर्ड को आसानी से संग्रहीत कर सकते हैं। इस कार्यक्रम से हजारों संस्थान और लाखों छात्र पहले ही लाभान्वित हो चुके हैं, यह शिक्षा क्षेत्र में एक आशाजनक विकास है।

 

एपीएआर आईडी पंजीकरण फॉर्म

  • सरकारी पहल: जानें कि कैसे भारत सरकार और शिक्षा मंत्रालय नागरिकों को लाभ पहुंचाने वाली पहल शुरू करते रहते हैं।
  • पंजीकरण प्रक्रिया: एपीएआर आईडी पंजीकरण पूरा करने के महत्व को समझें और उपयोग के लिए कार्ड कैसे डाउनलोड करें।

 

एपीएआर कार्ड: वन नेशन वन आईडी कार्ड पंजीकरण

  • डिजिटल छात्र आईडी: एपीएआर कार्ड के बारे में जानें, जो भारत में छात्रों के लिए एक डिजिटल आईडी कार्ड है, चाहे वे निजी या सरकारी स्कूलों या कॉलेजों में पढ़ते हों।
  • मुख्य उद्देश्य: APAAR कार्ड कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्यों का अन्वेषण करें, जैसे शैक्षणिक डेटा और शैक्षणिक क्रेडिट को एक ही स्थान पर एकत्रित करना।
  • विशिष्ट पहचानकर्ता: समझें कि कैसे कार्ड में प्रत्येक छात्र के लिए एक अद्वितीय 12-अंकीय APAAR नंबर शामिल है।

 

एबीसी कार्ड पीडीएफ डाउनलोड

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में चर्चा के बाद अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट लॉन्च किया गया था। इस पोर्टल के तहत, सभी छात्र पंजीकरण कर सकते हैं और एबीसी कार्ड द्वारा प्रदान किए गए लाभों का लाभ उठा सकते हैं। एपीएआर कार्ड पीडीएफ @ abc.gov.in डाउनलोड करने के बाद, उस पर उल्लिखित विवरण, जैसे नाम, एपीएआर आईडी, क्यूआर कोड और अन्य को सत्यापित करना महत्वपूर्ण है। वर्तमान में, हजारों संस्थानों और दो करोड़ छात्रों ने एबीसी कार्ड या एपीएआर आईडी कार्ड के लिए ऑनलाइन पंजीकरण किया है।

 

डिजिलॉकर द्वारा एबीसी बैंक पंजीकरण

  • एबीसी बैंक खाता: डिजिलॉकर के माध्यम से चल रहे एबीसी बैंक पंजीकरण के बारे में जानें।
  • खाता सेटअप: जानें कि अपने मोबाइल नंबर का उपयोग करके खाता कैसे सेट करें, विश्वविद्यालय विवरण, शैक्षणिक योग्यता और बहुत कुछ चुनें।
  • एपीएआर कार्ड जारी करना: एपीएआर कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को समझें और विभिन्न सेवाओं के लिए इसे कैसे डाउनलोड करें।

 

एपीएआर आईडी पंजीकरण ऑनलाइन के लिए गाइड

  • पंजीकरण चरण: abc.gov.in वेबसाइट पर एपीएआर आईडी पंजीकरण ऑनलाइन पूरा करने के लिए विस्तृत निर्देशों का पालन करें।
  • मोबाइल और आधार कार्ड: पंजीकरण प्रक्रिया में अपने मोबाइल नंबर और आधार कार्ड नंबर की भूमिका को समझें।
  • स्कूल या विश्वविद्यालय का चयन करना: जानें कि अपना स्कूल या विश्वविद्यालय कैसे चुनें और अपनी कक्षा या पाठ्यक्रम निर्दिष्ट करें।
  • कार्ड जनरेशन: जानें कि फॉर्म कैसे जमा करें और अकादमिक क्रेडिट एकत्र करने के लिए अपना एपीएआर आईडी कार्ड ऑनलाइन कैसे बनाएं।

 

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