पेरू ने जोस मारिया बाल्काज़र को अंतरिम राष्ट्रपति चुना, एक दशक में आठवें नेता

पेरू की संसद ने भ्रष्टाचार के आरोपों में महाभियोग झेल रहे पूर्व राष्ट्रपति जोस जेरी को पद से हटाए जाने के बाद जोसे मारिया बाल्काज़र को देश का नया अंतरिम राष्ट्रपति चुना है। यह निर्णय पेरू की कांग्रेस द्वारा लाइव प्रसारित मतदान के माध्यम से लिया गया। कांग्रेस के प्रमुख होने के नाते बाल्काज़र ने स्वचालित रूप से अंतरिम राष्ट्रपति का पद संभाल लिया। यह घटनाक्रम देश की राजनीतिक अस्थिरता को दर्शाता है, जहां पिछले एक दशक में कई नेतृत्व परिवर्तन हो चुके हैं।

2016 के बाद आठवें राष्ट्रपति

83 वर्षीय वकील और पूर्व न्यायाधीश जोसे मारिया बाल्काज़र 2016 के बाद पेरू के आठवें राष्ट्रपति बने हैं। यह नियुक्ति देश में पिछले कुछ वर्षों से जारी राजनीतिक अस्थिरता को दर्शाती है। उन्होंने जोस जेरी का स्थान लिया, जिन्हें भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों के बाद पद से हटा दिया गया था।

लोकतांत्रिक संक्रमण का आश्वासन

चुनाव के बाद अपने संबोधन में बाल्काज़र ने नागरिकों को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार शांतिपूर्ण और पारदर्शी लोकतांत्रिक संक्रमण सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि बचे हुए महीनों में वे पेरू की जनता को निष्पक्ष और विश्वसनीय चुनावी प्रक्रिया प्रदान करेंगे, जिसमें किसी भी प्रकार की शंका की गुंजाइश नहीं होगी। उनका मुख्य दायित्व आगामी चुनावों की निगरानी करना और संक्रमण प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराना होगा।

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

पेरू ने पिछले एक दशक में राजनीतिक संकट, महाभियोग की कार्यवाहियों और भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण लगातार नेतृत्व परिवर्तन देखे हैं। यह ताजा घटनाक्रम दक्षिण अमेरिकी देश में जारी शासन संबंधी चुनौतियों को उजागर करता है। अंतरिम प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि वह राजनीतिक संस्थाओं को स्थिर करने और चुनावों से पहले जनता का विश्वास बहाल करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।

MCQs: पेरू के अंतरिम प्रेसिडेंट 2026

Q1. फरवरी 2026 में पेरू के अंतरिम प्रेसिडेंट के तौर पर किसे चुना गया है?
(a) जोस जेरी
(b) पेड्रो कैस्टिलो
(c) जोस मारिया बाल्काज़र
(d) मार्टिन विज़कारा
(e) दीना बोलुआर्टे

जवाब: (c)
Sol: जोस मारिया बाल्काज़र पेरू के अंतरिम प्रेसिडेंट के तौर पर चुने गए।

Q2. जोस मारिया बाल्काज़र 2016 से पेरू के ______ हेड ऑफ़ स्टेट बने।
(a) पाँचवें
(b) छठे
(c) सातवें
(d) आठवें
(e) नौवें

जवाब: (d)
Sol: वह 2016 से पेरू के आठवें प्रेसिडेंट बने।

Q3. पूर्व अंतरिम प्रेसिडेंट जोस जेरी को इन वजहों से पद से हटाया गया:
(a) हेल्थ कारण
(b) चुनाव हार
(c) भ्रष्टाचार के आरोप
(d) मिलिट्री तख्तापलट
(e) आर्थिक संकट

जवाब: (c)
Sol: जोस जेरी पर भ्रष्टाचार (भ्रष्टाचार) के आरोपों के कारण महाभियोग लगाया गया था।

Q4. जोस मारिया बाल्काज़र ने पहले ये पद संभाले थे:
(a) आर्मी जनरल
(b) इकोनॉमिस्ट
(c) वकील और पूर्व जज
(d) बिज़नेस लीडर
(e) डिप्लोमैट

जवाब: (c)
Sol: बाल्काज़र 83 साल के वकील और पूर्व जज हैं।

Q5. पेरू की राजधानी, जहाँ कांग्रेस ने नए प्रेसिडेंट को चुना, वह है:
(a) सैंटियागो
(b) ब्यूनस आयर्स
(c) क्विटो
(d) लीमा
(e) बोगोटा

जवाब: (d)
Sol: वोट पेरू की राजधानी लीमा में हुआ।

ICRA का अनुमान: Q3 FY2025-26 में भारत की GDP वृद्धि दर 7.2% रहने की संभावना

ICRA ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3) में भारत की वर्ष-दर-वर्ष (YoY) जीडीपी वृद्धि दर घटकर 7.2% रह सकती है, जबकि दूसरी तिमाही (Q2) में यह 8.2% थी। यह मंदी मुख्यतः सेवा और कृषि क्षेत्रों के कमजोर प्रदर्शन के कारण है, हालांकि औद्योगिक क्षेत्र में सुधार देखने को मिला है।

क्षेत्रवार प्रदर्शन

सेवा क्षेत्र:

  • Q3 FY26 में वृद्धि दर 7.8% रहने का अनुमान है, जो Q2 FY26 के 9.2% से कम है।
  • सरकारी व्यय में कमी और सेवा निर्यात में कमजोरी इसका प्रमुख कारण है।

कृषि क्षेत्र:

वृद्धि दर Q3 में 3.0% रहने का अनुमान है, जो पिछली तिमाही के 3.5% से कम है।

औद्योगिक क्षेत्र:

  • इस क्षेत्र में सुधार दर्ज किया गया है और वृद्धि दर 8.3% तक पहुंचने का अनुमान है, जो छह तिमाहियों का उच्चतम स्तर है। यह Q2 के 7.7% से अधिक है।
  • हालांकि औद्योगिक क्षेत्र में सुधार हुआ है, लेकिन सेवा और कृषि क्षेत्र की कमजोरी कुल वृद्धि को सीमित कर सकती है।

मंदी के प्रमुख कारण

ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के अनुसार, वृद्धि दर में नरमी के पीछे कई कारण हैं:

  • प्रतिकूल बेस इफेक्ट
  • केंद्र सरकार के पूंजीगत व्यय (Capex) में संकुचन
  • राज्य सरकारों के राजस्व व्यय में सुस्ती
  • वस्तु निर्यात (Merchandise Exports) में कमजोरी

हालांकि, त्योहारी मांग और जीएसटी तर्कसंगतकरण (GST Rationalisation) ने वृद्धि दर को 7% से ऊपर बनाए रखने में मदद की।

सरकारी व्यय का रुझान

केंद्रीय पूंजीगत व्यय:

Q3 FY26 में 23.4% की वार्षिक गिरावट दर्ज की गई, जबकि Q3 FY25 में 47.7% की वृद्धि थी। यह Q2 FY26 के ₹3.1 ट्रिलियन से घटकर Q3 में ₹2.1 ट्रिलियन रह गया।

राजस्व व्यय:

  • केंद्र सरकार का गैर-ब्याज राजस्व व्यय Q3 FY26 में 3.5% घटा।
  • राज्य सरकारों का गैर-ब्याज राजस्व व्यय वृद्धि दर 7.3% (Q2) से घटकर 2.7% (Q3) रह गई।
  • केंद्र और राज्यों का संयुक्त राजस्व व्यय Q3 में 0.3% की मामूली वृद्धि दर्ज कर सका, जबकि Q2 में 0.6% की गिरावट थी।

आगे का परिदृश्य

  • ICRA ने अपनी Q3 जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान मौजूदा आर्थिक आंकड़ों के आधार पर 7.2% पर स्थिर किया है, जो वित्त वर्ष की पहली छमाही के 8.0% से कम है।
  • औद्योगिक क्षेत्र से कुछ समर्थन मिलने के बावजूद, सेवा, कृषि और सरकारी व्यय में कमजोरी के कारण समग्र आर्थिक गति सीमित रह सकती है।

योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में IBM के AI गवटेक इनोवेशन सेंटर का उद्घाटन किया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में IBM के एआई गवटेक इनोवेशन सेंटर का उद्घाटन किया और इसे राज्य में प्रौद्योगिकी-आधारित सुशासन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल उत्तर प्रदेश को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डीप टेक और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने में सहायक होगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस केंद्र के माध्यम से शासन व्यवस्था अधिक पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनेगी।

तकनीक-संचालित शासन को मजबूत करना

IBM के साथ मिलकर बनाया गया AI गवटेक इनोवेशन सेंटर, गवर्नेंस, ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक सर्विस डिलीवरी को बेहतर बनाने के लिए AI-बेस्ड सॉल्यूशन को डिज़ाइन और स्केल करने के लिए एक प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी में बहुत पोटेंशियल है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत का पहला कंप्यूटर IBM की मदद से इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी कानपुर में लगाया गया था, जिससे टेक्नोलॉजिकल प्रोग्रेस के साथ राज्य के ऐतिहासिक लिंक पर रोशनी पड़ी।

AI, डीप टेक और क्वांटम कंप्यूटिंग पर फोकस

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश इन क्षेत्रों में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
  • रोबोटिक्स
  • ड्रोन टेक्नोलॉजी
  • मेडिकल टेक्नोलॉजी (मेडटेक)
  • क्वांटम कंप्यूटिंग

राज्य के बजट में रोबोटिक्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी में सेंटर्स ऑफ़ एक्सीलेंस के लिए पहले ही प्रावधान किए जा चुके हैं। मेडटेक सेक्टर में IIT कानपुर के साथ सहयोग भी चल रहा है।

यूपी सरकार के साथ एमओयू साइन किए गए

कार्यक्रम के दौरान IBM ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। पहला समझौता राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के साथ किया गया, जिसके तहत विभिन्न विभागों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित अनुप्रयोग विकसित किए जाएंगे, ताकि शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सके।

दूसरा समझौता विद्यालयी शिक्षा निदेशालय के साथ किया गया, जिसके अंतर्गत कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए एआई साक्षरता कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसका उद्देश्य छात्रों को उभरती प्रौद्योगिकियों से परिचित कराना और भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करना है।

इस अवसर पर IBM के चेयरमैन एवं सीईओ Arvind Krishna ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता वैश्विक स्तर पर सरकारी कार्यकुशलता और आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह साझेदारी उत्तर प्रदेश को तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।

‘एआई सिटी’ लखनऊ का विजन

‘एआई सिटी’ लखनऊ की परिकल्पना को आगे बढ़ाते हुए योगी आदित्यनाथ ने IBM का राज्य के साथ साझेदारी के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सहयोग लखनऊ को एक “एआई सिटी” के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग सहित उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े सभी प्रयासों को राज्य सरकार का पूर्ण समर्थन मिलेगा।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश तकनीकी नवाचार, डिजिटल अवसंरचना और कौशल विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, और यह पहल राज्य को राष्ट्रीय तथा वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाएगी। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार, IBM तथा Indian Institute of Technology Kanpur (आईआईटी कानपुर) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएम भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में श्रील प्रभुपाद पर गुजराती जीवनी का विमोचन किया

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में ‘विश्वगुरु श्रील प्रभुपाद’ नामक गुजराती जीवनी का विमोचन किया। यह पुस्तक ए. सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद के प्रेरणादायक जीवन पर आधारित है, जो अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण चेतना सोसायटी (इस्कॉन) के संस्थापक-आचार्य थे। इस पुस्तक में बताया गया है कि किस प्रकार श्रील प्रभुपाद ने भारतीय अध्यात्म और वैदिक ज्ञान को वैश्विक मंच तक पहुँचाया तथा भगवान श्रीकृष्ण के संदेश को विभिन्न महाद्वीपों में फैलाकर भारत की आध्यात्मिक विरासत को विश्वभर में प्रतिष्ठित किया।

आध्यात्मिक मार्गदर्शक को श्रद्धांजलि

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि ए. सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद की जीवन यात्रा संघर्षों से भरी रही, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अटूट भक्ति ने उन्हें असाधारण सफलता दिलाई। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति कठिनाइयों से निराश हो जाता है, तब श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश उसे सही मार्ग दिखाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि धैर्य, आंतरिक शांति और आस्था जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। भगवान राम और भगवान कृष्ण के आदर्शों का अनुसरण करने से मोक्ष का मार्ग सुलभ हो जाता है।

150वीं जयंती पर सम्मान

मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि श्रील प्रभुपाद की 150वीं जयंती के अवसर पर नरेंद्र मोदी ने उनके सम्मान में स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया। उन्होंने लेखिका डॉ. उषा उपाध्याय की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने गुजराती भाषा में प्रभुपाद के जीवन को प्रस्तुत कर उनके गहन विचारों को गुजरात की जनता तक पहुँचाया है।

प्रेरणादायक वैश्विक आध्यात्मिक यात्रा

‘ग्लोबल हरे कृष्णा मूवमेंट’ के सह-मार्गदर्शक एवं उपाध्यक्ष श्री चंचलापति दास ने बताया कि 70 वर्ष की आयु में श्रील प्रभुपाद मात्र 40 रुपये लेकर अमेरिका गए थे। समुद्री यात्रा के दौरान उन्हें दो बार हृदयाघात हुआ, फिर भी उन्होंने कठिनाइयों के बावजूद हरे कृष्ण महामंत्र का विश्वभर में प्रचार किया। उनके प्रयासों से दुनिया भर में 108 से अधिक कृष्ण मंदिर स्थापित हुए।

अक्षय पात्र फाउंडेशन की भूमिका

कार्यक्रम में अक्षय पात्र फाउंडेशन की सेवा पहलों का भी उल्लेख किया गया। वर्ष 2007 में, जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण चेतना सोसायटी (इस्कॉन) को राज्य में सेवा कार्य के लिए आमंत्रित किया और गांधीनगर में अक्षय पात्र की पहली रसोई का उद्घाटन किया। आज यह संस्था गुजरात में प्रतिदिन 5 लाख बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराती है, जबकि देशभर में लगभग 23.5 लाख बच्चों को प्रतिदिन भोजन प्रदान करती है। वक्ताओं ने कहा कि श्रील प्रभुपाद ने न केवल आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसार किया, बल्कि भोजन वितरण जैसे सेवा कार्यों के माध्यम से मानवता के प्रति करुणा और सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत किया।

दिल्ली में लागू होगी ‘राहवीर योजना’, जानें सबकुछ

दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में सड़क दुर्घटना पीड़ितों की सहायता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की ‘राह-वीर’ योजना लागू करने का निर्णय लिया है। इस योजना का उद्देश्य गंभीर रूप से घायल सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना और नागरिकों को उनकी मदद के लिए प्रोत्साहित करना है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की कि इस योजना के तहत जो भी व्यक्ति दुर्घटना पीड़ित की सहायता कर उसे शीघ्र अस्पताल पहुंचाने में मदद करेगा, उसे ₹25,000 की नकद पुरस्कार राशि तथा प्रशंसा प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह पहल ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान त्वरित सहायता सुनिश्चित कर अनेक जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

‘राह-वीर’ योजना का उद्देश्य

‘राह-वीर’ योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गंभीर रूप से घायल सड़क दुर्घटना पीड़ितों को ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर उपचार मिल सके। दुर्घटना के बाद का पहला घंटा जीवन बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सरकार का मानना है कि विशेषकर व्यस्त महानगरों जैसे दिल्ली में, जहां प्रतिदिन हजारों वाहन सड़कों पर चलते हैं, वहां त्वरित जनसहयोग से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

गुड समैरिटन के लिए कानूनी सुरक्षा

अक्सर लोग पुलिस पूछताछ या कानूनी झंझट के डर से दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने से हिचकते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए योजना में मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत ‘गुड समैरिटन’ प्रावधानों के अंतर्गत कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है। इससे मदद करने वाले व्यक्ति को अनावश्यक कानूनी परेशानियों से सुरक्षा मिलेगी।

सरकार को उम्मीद है कि आर्थिक प्रोत्साहन और कानूनी सुरक्षा मिलने से अधिक नागरिक घायल व्यक्तियों की सहायता के लिए आगे आएंगे।

‘राह-वीर’ योजना की प्रमुख विशेषताएँ

  • ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने पर ₹25,000 का पुरस्कार।
  • एक ही दुर्घटना में कई लोगों को बचाने पर भी अधिकतम पुरस्कार ₹25,000 ही रहेगा।
  • सहायता करने वाले व्यक्ति को प्रशंसा प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा।
  • हर वर्ष 10 उत्कृष्ट ‘राह-वीरों’ को ₹1 लाख का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया जाएगा।

यह पहल आपातकालीन परिस्थितियों में करुणा, सामाजिक जिम्मेदारी और समय पर चिकित्सा सहायता की संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारतीय नौसेना में 27 फरवरी को शामिल होगा युद्धपोत अंजदीप

भारतीय नौसेना को एक और पनडुब्बी रोधी युद्धपोत अंजदीप मिलने जा रहा है। उथले पानी में काम करने की क्षमता वाले आठ पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों की श्रृंखला का यह तीसरा युद्धपोत 27 फरवरी 2026 को चेन्नई में नौसेना में शामिल किया जाएगा। इस समारोह में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी भी शामिल होंगे। यह जहाज कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया है।

पुराना युद्धपोत 2003 में रिटायर

कंपनी ऐसे आठ पनडुब्बी रोधी युद्धपोत बना रही है जिनमें से अंजदीप तीसरा है। इसे विशेष रूप से तटीय और कम गहरे पानी वाले क्षेत्रों में ऑपरेशनों के लिए तैयार किया गया है। अंजदीप नौसेना के इसी नाम वाले पुराने युद्धपोत का नया अवतार है। पुराना युद्धपोत 2003 में रिटायर हो गया था।

इस युद्धपोत का नाम

अंजदीप नाम कर्नाटक के कारवार तट के पास स्थित अंजदीप द्वीप के नाम पर रखा गया है। यह युद्धपोत 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ बना है। इससे देश की रक्षा निर्माण क्षमता को बल मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी।

इस युद्धपोत की विशेषताएं

  • रक्षा मंत्रालय के अनुसार इसे डॉल्फिन हंटर के रूप में डिजाइन किया गया है।
  • जो तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बी का पता लगाकर उसे निष्क्रिय करने में सक्षम है।
  • लगभग 77 मीटर लंबे इस श्रेणी के युद्धपोत वॉटरजेट से चलने वाले नौसेना के अब तक के सबसे बड़े युद्धपोत हैं।
  • इनमें अत्याधुनिक हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट और उथले पानी में काम करने वाला सोनार सिस्टम लगाया गया है।
  • इससे समुद्र के काफी अंदर तक मौजूद दुश्मन के खतरों का पता लगाने और उनको नष्ट करने की क्षमता बढ़ेगी।
  • यह जहाज नौसेना की तटीय निगरानी और समुद्री बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता को भी मजबूत करेगा।

झारखंड बजट 2026-27: ₹1.58 लाख करोड़ का ‘अबुआ दिशोम बजट’ पेश

झारखंड सरकार ने 24 फरवरी 2026 को राज्य विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹1.58 लाख करोड़ का बजट पेश किया। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इस बजट को सदन में प्रस्तुत किया, जिसे ‘अबुआ दिशोम बजट’ नाम दिया गया है। यह बजट पिछले वर्ष के ₹1.45 लाख करोड़ के आवंटन की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के नेतृत्व वाली सरकार ने कहा है कि यह नया वित्तीय खाका राज्य के गरीब परिवारों, किसानों, आदिवासियों और महिलाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने पर केंद्रित है।

झारखंड बजट 2026-27 विधानसभा में प्रस्तुत

झारखंड बजट 2026-27 को राज्य विधानसभा में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया। उन्होंने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए कुल ₹1.58 लाख करोड़ के व्यय का प्रस्ताव रखा। बजट सत्र के दौरान रांची में पेश किए गए इस बजट को समावेशी और विकासोन्मुखी बताया गया, जिसका उद्देश्य लक्षित व्यय और कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के सभी वर्गों को लाभ पहुंचाना है।

FY 2025-26 से तुलना

झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) नेतृत्व वाली सरकार ने FY 2025-26 के लिए ₹1.45 लाख करोड़ का बजट पेश किया था।

  • नया आवंटन: ₹1.58 लाख करोड़
  • वृद्धि: ₹13,000 करोड़

यह वृद्धि राज्य सरकार की बढ़ी हुई व्यय प्राथमिकताओं और विस्तारित वित्तीय प्रतिबद्धताओं को दर्शाती है। अतिरिक्त राशि से बुनियादी ढांचे, सामाजिक कल्याण योजनाओं, ग्रामीण विकास और विभिन्न क्षेत्रों में विकास को बल मिलने की संभावना है।

‘अबुआ दिशोम बजट’ का अर्थ

  • ‘अबुआ दिशोम बजट’ नाम राज्य की क्षेत्रीय पहचान और समावेशी विकास पर जोर को दर्शाता है।
  • “अबुआ दिशोम” का अर्थ स्थानीय आदिवासी बोली में “हमारी धरती” होता है।

इस नामकरण के माध्यम से सरकार ने आदिवासी कल्याण, स्थानीय आकांक्षाओं और जमीनी सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है।

बजट 2026-27 के प्रमुख फोकस क्षेत्र

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के अनुसार ₹1.58 लाख करोड़ का बजट निम्न वर्गों की आकांक्षाओं को पूरा करने पर केंद्रित है:

  • गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग
  • किसान और ग्रामीण समुदाय
  • आदिवासी आबादी
  • महिला लाभार्थी

यह बजट सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों, कृषि सहायता प्रणालियों और विकासात्मक पहलों को मजबूत करने की दिशा में कदम माना जा रहा है।

₹1.58 लाख करोड़ बजट का वित्तीय महत्व

  • ₹1.58 लाख करोड़ का बजट झारखंड की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय योजना है। राज्य बजट आगामी वित्त वर्ष के लिए अनुमानित राजस्व और व्यय का खाका प्रस्तुत करता है।
  • उच्च बजट आवंटन आमतौर पर बढ़े हुए राजस्व संग्रह, अधिक उधारी या संशोधित राजकोषीय रणनीति का संकेत देता है।
  • झारखंड बजट 2026-27 सरकार के आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने, सामाजिक समावेशन बढ़ाने और साथ ही वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के इरादे को दर्शाता है।

जनवरी 2026 में रूसी फॉसिल फ्यूल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना भारत

ऊर्जा और स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (CREA) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में भारत रूसी जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा। इस अवधि में भारत ने लगभग 2.2 अरब यूरो (करीब 2.59 अरब डॉलर) मूल्य का ऊर्जा आयात किया। नवंबर के बाद से रूस से कच्चे तेल के आयात में कुछ कमी आई है, फिर भी कुल खरीद में कच्चे तेल की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। वैश्विक प्रतिबंधों, यूरोपीय संघ की पाबंदियों और बदलते व्यापार प्रवाह के कारण भारत के रूसी तेल आयात और उसकी समग्र ऊर्जा रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

जनवरी 2026 में भारत का रूसी तेल आयात

CREA के अनुसार, जनवरी 2026 में भारत का रूसी जीवाश्म ईंधन आयात 2.2 अरब यूरो (2.59 अरब डॉलर) रहा, जो दिसंबर के 2.3 अरब यूरो से थोड़ा कम है।

आयात का विवरण

  • कच्चा तेल: 2 अरब यूरो (2.36 अरब डॉलर) – 78% हिस्सेदारी
  • कोयला: 442 मिलियन यूरो (520.6 मिलियन डॉलर)
  • तेल उत्पाद: 30 मिलियन यूरो (35.3 मिलियन डॉलर)

नवंबर से 23% की गिरावट के बावजूद, रूस से जीवाश्म ईंधन खरीदने में भारत चीन के बाद दूसरे स्थान पर बना रहा। यह दर्शाता है कि रियायती रूसी तेल भारत की ऊर्जा सुरक्षा में अब भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

चीन ने बढ़ाया आयात, रूस का सबसे बड़ा खरीदार बना

जहां भारत ने खरीद में कमी की, वहीं चीन ने पिछले दो महीनों में रूसी तेल आयात में 29% की वृद्धि की। जनवरी में चीन का आयात 4 अरब यूरो (4.71 अरब डॉलर) तक पहुंच गया।

प्रमुख बिंदु

  • चीनी रिफाइनरियों ने यूराल्स (Urals) ग्रेड कच्चे तेल की खरीद दोगुनी की।
  • ESPO ग्रेड का आयात स्थिर रहा।
  • रूस का तेल चीन के कुल आयात का लगभग 16% रहा।

इस प्रकार 2026 में चीन ने रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत की।

प्रतिबंधों और वैश्विक नीतियों का प्रभाव

भारत के रूसी तेल आयात पर कई भू-राजनीतिक कारकों का प्रभाव पड़ा:

  • अमेरिकी प्रतिबंध एजेंसी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) द्वारा Rosneft पर लगाए गए प्रतिबंधों का असर भारतीय रिफाइनरियों पर पड़ा।
  • 21 जनवरी 2026 से यूरोपीय संघ द्वारा रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों पर प्रतिबंध लागू हुआ।
  • 1 फरवरी से EU-UK मूल्य सीमा 44.1 डॉलर प्रति बैरल निर्धारित की गई।

जनवरी में Reliance Industries के जामनगर रिफाइनरी को समुद्री मार्ग से रूसी तेल नहीं मिला, हालांकि फरवरी में आपूर्ति फिर शुरू हो गई।

यूराल्स कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक रुझान

रूस के यूराल्स कच्चे तेल की औसत कीमत जनवरी में 4% बढ़कर 54.2 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो नई EU-UK मूल्य सीमा से ऊपर रही।

प्रमुख आंकड़े

  • भारत ने जनवरी में 12 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) रूसी तेल आयात किया।
  • सऊदी अरब ने भारत को 7,74,000 bpd की आपूर्ति की।
  • मार्च में रूस से आयात घटकर 8,00,000 bpd तक आने की संभावना है, जो मई 2022 के बाद सबसे कम होगा।

इस बीच सऊदी अरब भारत के तेल आयात टोकरी में अपनी हिस्सेदारी फिर बढ़ा रहा है।

रूस से तेल आयात पर भारत की ऊर्जा रणनीति

हालांकि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि नए व्यापार समझौते के तहत भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर सकता है, लेकिन भारत सरकार की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

भारत की रणनीति निम्नलिखित पर आधारित दिखाई देती है:

  • कच्चे तेल के स्रोतों का विविधीकरण
  • दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना
  • भू-राजनीतिक संतुलन बनाए रखना
  • लागत प्रभावी आयात सुनिश्चित करना

कुल मिलाकर, भारत का रूसी तेल आयात मुख्यतः मूल्य लाभ और आपूर्ति स्थिरता पर आधारित है, न कि राजनीतिक झुकाव पर।

 

PM मोदी का ऐतिहासिक इज़राइल दौरा: नेसेट प्लेनम को संबोधित करने वाले पहले भारतीय नेता

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 फरवरी 2026 से शुरू होने वाली अपनी दो दिवसीय इज़राइल यात्रा के दौरान इतिहास रचने जा रहे हैं, क्योंकि वे नेसेट के पूर्ण सदन (प्लेनम) को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनेंगे। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस दौरे को “ऐतिहासिक” बताया है, जो भारत-इज़राइल संबंधों में एक नए मील के पत्थर का प्रतीक है। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, नेतन्याहू और राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग के साथ उच्चस्तरीय वार्ता करेंगे, जिससे सुरक्षा, नवाचार और क्षेत्रीय मामलों में दोनों देशों के बीच सहयोग और मजबूत होने की उम्मीद है।

पहली बार नेसेट पूर्ण सदन को संबोधित करेंगे नरेंद्र मोदी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इतिहास रचते हुए नेसेट के पूर्ण सदन (प्लेनम) को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनेंगे। यह विशेष संसदीय सत्र 25 फरवरी 2026 को उनकी इज़राइल यात्रा के दौरान स्थानीय समयानुसार शाम 5:00 बजे आयोजित किया जाएगा।

यह मोदी का इज़राइल का दूसरा दौरा होगा। इससे पहले 2017 की उनकी ऐतिहासिक यात्रा में दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) का दर्जा मिला था। नेसेट को संबोधित करना गहरे होते कूटनीतिक संबंधों का प्रतीक है और वैश्विक मंच पर भारत-इज़राइल संबंधों के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

बेंजामिन नेतन्याहू और इसहाक हर्ज़ोग के साथ उच्चस्तरीय वार्ता

इज़राइल यात्रा 2026 के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। नेतन्याहू ने इस यात्रा को “ऐतिहासिक” बताते हुए नवाचार, सुरक्षा, रक्षा प्रौद्योगिकी, कृषि और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग पर प्रकाश डाला है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों और पूर्व मुलाकातों का भी उल्लेख किया। दोनों देशों के नेता पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति, तकनीकी सहयोग और भारत-इज़राइल के बीच व्यापार विस्तार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं।

नेसेट पूर्ण सदन का विस्तृत कार्यक्रम

  • नेसेट में आयोजित कार्यक्रम औपचारिक और कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
  • 16:30 बजे वेल प्रांगण (Weil Courtyard) में आधिकारिक स्वागत समारोह आयोजित होगा, जिसमें नेसेट स्पीकर अमीर ओहाना, प्रधानमंत्री नेतन्याहू और उनकी धर्मपत्नी उपस्थित रहेंगे।
  • 16:35 बजे प्रधानमंत्री मोदी चागाल स्टेट हॉल (Chagall State Hall) में अतिथि पुस्तिका पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसके बाद संयुक्त फोटो सत्र होगा।
  • 17:00 बजे उनके सम्मान में विशेष पूर्ण सत्र (Special Plenary Session) आयोजित किया जाएगा।

भारत-इज़राइल संबंध: रणनीतिक और राजनीतिक महत्व

भारत और इज़राइल के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध वर्ष 1992 में स्थापित हुए थे। तब से लेकर अब तक दोनों देशों के रिश्तों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पिछले एक दशक में सहयोग रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, नवाचार और प्रौद्योगिकी जैसे अनेक क्षेत्रों में विस्तार हुआ है। भारत इज़राइल का एक प्रमुख रक्षा भागीदार है, जबकि इज़राइल भारत को उन्नत कृषि तकनीक और जल प्रबंधन समाधान उपलब्ध कराता है।

नेसेट में दिया गया संबोधन दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच प्रतीकात्मक और राजनीतिक विश्वास को और मजबूत करता है। यह यात्रा भारत की संतुलित “पश्चिम एशिया नीति” को भी रेखांकित करती है, जिसमें भारत इज़राइल के साथ-साथ अरब देशों के साथ भी मजबूत संबंध बनाए रखता है।

नेसेट: संरचना और भूमिका

नेसेट इज़राइल की एकसदनीय संसद है, जिसमें 120 सदस्य होते हैं। यह देश की विधायी संस्था के रूप में कार्य करती है और सरकार गठन तथा कानून पारित करने में केंद्रीय भूमिका निभाती है। इज़राइल के प्रधानमंत्री को प्रभावी शासन के लिए नेसेट में बहुमत का समर्थन प्राप्त होना आवश्यक होता है।

पूर्ण सत्र (Plenary Session) औपचारिक बैठकें होती हैं, जहां महत्वपूर्ण बहस, भाषण और मतदान होते हैं। नेसेट के पूर्ण सदन को संबोधित करना किसी भी विदेशी नेता के लिए उच्च कूटनीतिक सम्मान माना जाता है।

 

दिल्ली ओपन 2026: स्टेफानोस साकेलारिडिस ने रोमांचक सिंगल्स जीत के साथ इतिहास रचा

दिल्ली ओपन 2026 का समापन रोमांचक मुकाबले के साथ हुआ, जहां ग्रीस के स्टेफानोस साकेलारिडिस ने ग्रेट ब्रिटेन के ओलिवर क्रॉफर्ड को कड़े मुकाबले में हराकर पुरुष एकल खिताब अपने नाम किया। 21 वर्षीय साकेलारिडिस ने 7-5, 5-6, 7-6 से जीत दर्ज करते हुए अपना पहला एटीपी चैलेंजर टूर (ATP Challenger Tour) सिंगल्स खिताब जीता।

फाइनल मुकाबले की मुख्य झलकियाँ

  • पहला ATP चैलेंजर सिंगल्स खिताब
  • निर्णायक सेट टाई-ब्रेक तक पहुंचा
  • शानदार वापसी करते हुए मुकाबला जीता
  • दूसरे मैच प्वाइंट पर 8-6 से टाई-ब्रेक अपने नाम किया

ग्रीक खिलाड़ी ने मानसिक मजबूती और धैर्य का बेहतरीन प्रदर्शन किया।

डबल्स खिताब: भारतीय जोड़ी की सफलता

डबल्स वर्ग में भारत के सिद्धांत बंथिया और बुल्गारिया के अलेक्जेंडर डोंस्की ने ट्रॉफी जीती।

उन्होंने फाइनल में:

  • भारत के निकी कालियांडा पूनाचा
  • थाईलैंड के प्रुच्या इसारो को हराया।

यह तीसरी बार है जब किसी भारतीय खिलाड़ी ने दिल्ली ओपन का डबल्स खिताब जीता है, जो ATP चैलेंजर प्रतियोगिताओं में भारत की बढ़ती उपस्थिति को दर्शाता है।

दिल्ली ओपन में भारतीय उपलब्धियाँ

दिल्ली ओपन के इतिहास में कई भारतीय खिलाड़ियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है:

  • साकेत मायनेनी और सनम सिंह – 2015 डबल्स चैंपियन
  • युकी भांबरी और महेश भूपति – 2016 डबल्स चैंपियन
  • सोमदेव देववर्मन – 2014 और 2015 में लगातार सिंगल्स खिताब जीतने वाले एकमात्र भारतीय

सोमदेव देववर्मन के बाद से अब तक कोई भारतीय सिंगल्स खिताब नहीं जीत पाया है।

ATP चैलेंजर टूर में दिल्ली ओपन का महत्व

दिल्ली ओपन ATP Challenger Tour का हिस्सा है, जो उभरते खिलाड़ियों के लिए ATP रैंकिंग में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण मंच है।

  • चैलेंजर खिताब जीतने से रैंकिंग अंक में बड़ा फायदा मिलता है।
  • युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव मिलता है।
  • कई शीर्ष ATP खिलाड़ी अपने करियर की शुरुआत चैलेंजर खिताब जीतकर ही करते हैं।

स्टेफानोस साकेलारिडिस के लिए यह जीत उनके पेशेवर करियर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जबकि भारतीय टेनिस के लिए डबल्स खिताब देश की निरंतर सफलता को दर्शाता है।

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