तेलंगाना बजट 2026: इंदिरम्मा परिवार जीवन बीमा योजना क्या है?

तेलंगाना सरकार ने बजट 2026 में एक बड़ा जनकल्याणकारी कदम उठाते हुए कई महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा की। उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने राज्य विधानसभा में बजट पेश किया। इस दौरान इंदिरम्मा फैमिली लाइफ इंश्योरेंस योजना और एक नई कैशलेस स्वास्थ्य योजना की शुरुआत की घोषणा की गई। इन योजनाओं का उद्देश्य परिवारों और सरकारी कर्मचारियों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है।

इंदिरम्मा फैमिली लाइफ इंश्योरेंस योजना

यह योजना बजट की प्रमुख घोषणाओं में से एक है, जिसे 2 जून 2026 से लागू किया जाएगा।

मुख्य विशेषताएँ:

  • प्रत्येक परिवार को ₹5 लाख का बीमा कवर
  • राज्य के लगभग 1.15 करोड़ परिवारों को लाभ
  • परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की अचानक मृत्यु की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना

सभी के लिए सार्वभौमिक कवरेज

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका सार्वभौमिक दृष्टिकोण है।

  • यह योजना आय या सामाजिक वर्ग के आधार पर भेदभाव किए बिना सभी परिवारों को कवर करेगी।
  • गरीब, मध्यम वर्ग और उच्च आय वर्ग—सभी को समान सुरक्षा मिलेगी।
  • सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी परिवार को किसी दुर्घटना या त्रासदी के कारण आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।

नई कैशलेस स्वास्थ्य योजना

इस योजना के साथ-साथ सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक नई कैशलेस स्वास्थ्य योजना की भी घोषणा की है।

  • इसे राजीव आरोग्यश्री ट्रस्ट के माध्यम से लागू किया जाएगा।
  • लगभग 23.51 लाख लाभार्थियों को कवर किया जाएगा, जिसमें कर्मचारी, पेंशनभोगी और उनके आश्रित शामिल हैं।
  • राज्य के सभी अस्पतालों में 1,998 बीमारियों के इलाज की सुविधा प्रदान की जाएगी।

सरकारी कर्मचारियों के लिए दुर्घटना बीमा

राज्य सरकार ने पहली बार सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए व्यापक दुर्घटना बीमा योजना भी शुरू की है।

मुख्य लाभ:

  • ₹1.20 करोड़ का दुर्घटना बीमा कवर
  • ₹10 लाख का टर्म लाइफ इंश्योरेंस (60 वर्ष तक)
  • हवाई दुर्घटना में मृत्यु पर अतिरिक्त ₹2 करोड़ का कवर

कृष्ण कुमार ठाकुर NMDC में निदेशक (कार्मिक) नियुक्त

1998 बैच के अधिकारी कृष्ण कुमार ठाकुर ने NMDC लिमिटेड में निदेशक (कार्मिक) का पदभार ग्रहण कर लिया है। NMDC भारत की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक कंपनी है। उन्होंने भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा के अधिकारी के रूप में अपनी सेवा शुरू की थी। उनके पास भारतीय रेलवे और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में मानव संसाधन प्रबंधन का दो दशकों से भी अधिक का अनुभव है।

निदेशक (कार्मिक) के रूप में नियुक्ति

उन्होंने 20 मार्च 2026 को आधिकारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। यह नियुक्ति संगठन में मानव संसाधन नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुभव के आधार पर उनसे कर्मचारी सहभागिता (Employee Engagement) और उत्पादकता बढ़ाने की उम्मीद है।

कौन हैं कृष्ण कुमार ठाकुर?

वे सार्वजनिक क्षेत्र में मानव संसाधन प्रबंधन के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने सोलापुर, भोपाल और मुंबई जैसे प्रमुख रेलवे मंडलों में कार्य किया है। पश्चिमी रेलवे के रेलवे भर्ती सेल (Railway Recruitment Cell) के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने लगभग 12,000 कर्मचारियों की भर्ती की देखरेख की। यह उपलब्धि बड़े पैमाने पर भर्ती और कार्यबल योजना में उनकी दक्षता को दर्शाती है।

शैक्षिक पृष्ठभूमि और विशेषज्ञता

वे भागलपुर स्थित तिलका मांझी विश्वविद्यालय (Tilka Manjhi University) के पूर्व छात्र हैं, जहाँ से उन्होंने साहित्य में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की। उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (Tata Institute of Social Sciences) से मानव संसाधन में PGDM किया है, जो भारत के प्रमुख संस्थानों में से एक है।

CPSUs में प्रमुख भूमिकाएँ और अंतरराष्ट्रीय अनुभव

कृष्ण कुमार ठाकुर ने NMDC में शामिल होने से पहले कई प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSUs) में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। RITES Limited में रहते हुए उन्होंने सऊदी अरब में एक अंतरराष्ट्रीय ट्रेन संचालन परियोजना पर काम किया, जिससे उन्हें वैश्विक स्तर का अनुभव प्राप्त हुआ। इसके बाद Konkan Railway Corporation Limited में मानव संसाधन प्रमुख के रूप में उन्होंने HR नीतियों को सुव्यवस्थित किया और संगठनात्मक दक्षता को बढ़ाया। आगे चलकर भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) में निदेशक (HR) के रूप में उन्होंने समान प्रोत्साहन योजनाओं जैसे कई सुधार लागू किए, जिससे कर्मचारियों के प्रदर्शन और संतुष्टि में वृद्धि हुई।

आयकर नियमों में बड़ा बदलाव: 2025 अधिनियम के तहत नई अधिसूचना

नए आयकर नियम 2026 अधिसूचित कर दिए गए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। ये नियम भारत की कर अनुपालन प्रणाली में व्यापक सुधारों का हिस्सा हैं और नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत पुराने प्रावधानों को प्रतिस्थापित करेंगे। इन सुधारों का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, रिपोर्टिंग मानकों को मजबूत करना और डिजिटल व अंतरराष्ट्रीय (क्रॉस-बॉर्डर) व्यवसायों के लिए कर प्रणाली को आधुनिक बनाना है।

नए टैक्स अनुपालन ढांचे में क्या बदलाव?

नए नियम एक आधुनिक अनुपालन ढांचा प्रस्तुत करते हैं, जिसका उद्देश्य कर प्रक्रियाओं को सरल बनाना और जटिलताओं को कम करना है।

  • बेहतर रिपोर्टिंग प्रणाली और स्पष्ट परिभाषाओं पर जोर दिया गया है।
  • व्यवसायों और करदाताओं के लिए एक समान अनुपालन मानक सुनिश्चित किए गए हैं।

डिजिटल टैक्सेशन और महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति (SEP)

इन नियमों की प्रमुख विशेषता डिजिटल और दूरस्थ व्यवसायों पर कर लगाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं।

  • महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति (SEP) की अवधारणा को और मजबूत किया गया है।
  • यदि लेन-देन ₹2 करोड़ से अधिक हो या
  • उपयोगकर्ताओं की संख्या 3 लाख से अधिक हो, तो कर लागू होगा।
  • यह नियम भारत में कार्यरत वैश्विक डिजिटल कंपनियों को लक्षित करता है।

स्टॉक एक्सचेंज के लिए कड़े अनुपालन नियम

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए स्टॉक एक्सचेंज पर सख्त नियम लागू किए गए हैं।

  • ऑडिट ट्रेल्स को 7 वर्षों तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।
  • लेन-देन रिकॉर्ड को हटाने की अनुमति नहीं होगी।
  • संशोधित लेन-देन की मासिक रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी।

कैपिटल गेन नियम हुए सरल

सरकार ने पूंजीगत लाभ (Capital Gains) से जुड़े नियमों को सरल बनाया है।

  • डिबेंचर रूपांतरण और क्रॉस-बॉर्डर पुनर्गठन के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश दिए गए हैं।
  • शून्य-कूपन बॉन्ड (Zero Coupon Bond) के लिए नया ढांचा पेश किया गया है।
  • मानकीकृत मूल्यांकन पद्धतियाँ लागू की गई हैं।
  • इससे सूचीबद्ध (Listed) और गैर-सूचीबद्ध (Unlisted) परिसंपत्तियों पर निष्पक्ष कराधान सुनिश्चित होगा।

डिविडेंड और खर्च से जुड़े नियम

नए नियमों में डिविडेंड से संबंधित अनुपालन को और सख्त किया गया है।

  • खर्चों के लिए एक सरल ढांचा पेश किया गया है।
  • प्रत्यक्ष खर्चों की अनुमति दी गई है।
  • निवेश मूल्य का अतिरिक्त 1% तक खर्च मान्य होगा।

मार्शल आर्ट्स के उस्ताद Chuck Norris का निधन, जानें सबकुछ

मार्शल आर्ट के दिग्गज और एक्शन फिल्मों के बादशाह चक नॉरिस (Chuck Norris) का 86 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। इस समय पूरी दुनिया इस महान कलाकार के जाने का शोक मना रही है। पर्दे पर अपने दमदार किरदारों एवं अविश्वसनीय जीवन रक्षा कौशल के लिए मशहूर नॉरिस स्ट्रेंथ के एक ग्लोबल सिंबल बन गए थे।

चक ने ‘लोन वुल्फ मैकक्वेड’, ‘कोड ऑफ साइलेंस’ और ‘वे ऑफ द ड्रैगन’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया है। उनके निधन की पुष्टि उनके परिवार ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए की। चक नॉरिस के परिवार ने उनके निधन पर इंस्टाग्राम पर एक इमोशनल पोस्ट शेयर किया है। उन्होंने लिखा, ‘बहुत दुख के साथ, हमारे परिवार ने प्यारे चक नॉरिस के अचानक निधन की खबर साझा की है।

चक नॉरिस की जीवनी

1940 में जन्मे चक ने अमेरिकी वायु सेना में अपनी सेवाएं दीं और उसके बाद मार्शल आर्ट्स की दुनिया में कदम रखा. उन्होंने कराटे, जूडो और ब्राजीलियन जिउ-जित्सु जैसे कई फॉर्म्स में ब्लैक बेल्ट हासिल की थी. पर्दे पर उनकी असली पहचान 1972 में तब बनी, जब उन्होंने महान ब्रूस ली के साथ एक यादगार ऑन-स्क्रीन फाइट की. तब से लेकर आज तक, चक नॉरिस का नाम एक्शन की दुनिया में सम्मान के साथ लिया जाता है.

मार्शल आर्ट और टीवी शो से मिली पहचान

मार्शल आर्ट और टीवी शो से मिली पहचान चक नॉरिस को मार्शल आर्ट में महारत हासिल थी। उनके पास कराटे, ताइक्वांडो, तांग सू डो, ब्राजीलियन जिउ-जित्सु और जूडो में ब्लैक बेल्ट थे।

उन्होंने ब्रूस ली के साथ ‘द वे ऑफ द ड्रैगन’ में काम किया। इसके बाद वे कई एक्शन फिल्मों में दिखे और CBS शो ‘वॉकर, टेक्सास रेंजर’ में लीड रोल किया, जो नौ सीजन तक चला।

चक नॉरिस की मशहूर फिल्में

चक नॉरिस की मशहूर फिल्मों में ‘मिसिंग इन एक्शन’, ‘कोड ऑफ साइलेंस’ और ‘फायरवॉकर’ शामिल हैं। उन्हें 1983 की फिल्म ‘लोन वुल्फ मैकक्वाड’ में रोल के लिए खास पहचान मिली। वे टीवी शो ‘वॉकर, टेक्सास रेंजर’ के लगभग 200 एपिसोड में दिखे। शो का रीबूट 2020 में शुरू हुआ और 2024 तक चला।

मार्शल आर्ट्स में अपार सफलता

चक नॉरिस ने भी फिल्मों और टीवी से पहले मार्शल आर्ट्स में अपार सफलता हासिल की थी। उन्होंने कराटे की अपनी कोरियाई मूल की अमेरिकी शैली बनाई। उन्होंने यूनाइटेड फाइटिंग आर्ट्स फेडरेशन की भी स्थापना की, जिसने दुनिया भर में 3,300 से अधिक चक नॉरिस सिस्टम ब्लैक बेल्ट प्रदान किए हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने वॉकर, टेक्सास रेंजर जैसी टीवी सीरीज में काम किया जो नौ सीजन तक चलीं। उन्हें 6 बार वर्ल्ड प्रोफेशनल मिडिलवेट कराटे चैंपियन के खिताब से नवाजा जा चुका है।

चापचर कुट मिज़ोरम का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार क्यों है?

मिजोरम का प्रमुख वसंत उत्सव चापचार कुट बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर राजधानी आइजोल में रंग-बिरंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम, पारंपरिक नृत्य, संगीत और प्रदर्शनी आयोजित की गईं। यह उत्सव मार्च में मनाया जाता है और झूम खेती (Jhum Cultivation) की प्रक्रिया पूरी होने तथा वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। इसमें स्थानीय लोगों, पर्यटकों और गणमान्य व्यक्तियों की भागीदारी देखने को मिली, जिसमें मिजो संस्कृति, कला और व्यंजनों की झलक प्रस्तुत की गई।

चापचार कुट: मिजोरम का प्रमुख त्योहार

चापचार कुट मिजोरम के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है और यह मिजो लोगों की कृषि परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह झूम खेती के कठिन कार्य—विशेष रूप से बुवाई से पहले जंगल साफ करने—के पूर्ण होने का उत्सव है। यह त्योहार मेहनत के बाद विश्राम, खुशी और कृतज्ञता का प्रतीक है तथा मिजो समुदाय और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है।

इतिहास: उत्पत्ति और विकास

माना जाता है कि इसकी शुरुआत 1450 से 1700 ईस्वी के बीच सुआइपुई (Suaipui) नामक गाँव में हुई थी। प्रारंभ में यह केवल जंगल साफ करने के बाद मनाया जाने वाला एक साधारण उत्सव था। समय के साथ यह एक भव्य सांस्कृतिक महोत्सव में बदल गया। आज यह गाँवों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों जैसे Aizawl में भी बड़े स्तर पर मनाया जाता है और पर्यटन को बढ़ावा देता है।

चेराव (Cheraw) बांस नृत्य: प्रमुख आकर्षण

चापचार कुट का सबसे प्रसिद्ध और आकर्षक हिस्सा चेराव (बांस नृत्य) है। यह मिजोरम के सबसे पुराने और लोकप्रिय नृत्यों में से एक है। इसमें पुरुष बांस की लाठियों को तालबद्ध तरीके से बजाते हैं, जबकि महिलाएं उनके बीच सुंदरता से नृत्य करती हैं। इस नृत्य में तालमेल और सटीकता बहुत जरूरी होती है, क्योंकि नर्तकियों को चलती हुई बांस की लाठियों से अपने पैर बचाने होते हैं।

संगीत, कला और सांस्कृतिक गतिविधियाँ

यह त्योहार मिजो समाज के सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन की झलक प्रस्तुत करता है।

  • लोग पारंपरिक वेशभूषा, रंग-बिरंगे आभूषण और हेडगियर पहनते हैं।
  • ढोल, झांझ और गोंग जैसे वाद्य यंत्रों के साथ पारंपरिक संगीत प्रस्तुत किया जाता है।
  • समूह नृत्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रदर्शनों से पूरा माहौल उत्सवमय हो जाता है।

विश्व कविता दिवस 2026: शब्दों और रचनात्मकता की शक्ति का उत्सव

विश्व कविता दिवस 2026 (World Poetry Day 2026) हर वर्ष 21 मार्च को पूरे विश्व में मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य कवियों का सम्मान करना और कविता की शाश्वत कला को प्रोत्साहित करना है। यह दिवस कविता को एक शक्तिशाली अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में पहचान देता है, जो विभिन्न संस्कृतियों और पीढ़ियों के लोगों को जोड़ता है।

इसकी स्थापना UNESCO द्वारा की गई थी। यह दिन कविता पढ़ने, लिखने और साझा करने को बढ़ावा देने के साथ-साथ भाषाई विविधता को भी प्रोत्साहित करता है।

विश्व कविता दिवस 2026: तिथि और वैश्विक आयोजन

  • यह दिवस हर वर्ष 21 मार्च को मनाया जाता है।
  • यह दुनिया भर के कविता प्रेमियों, लेखकों और कलाकारों को एक साथ लाता है।
  • यह भाषा की समृद्धि का उत्सव मनाता है और लोगों को काव्य अभिव्यक्ति को अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
  • इस दिन कविता पाठ, लेखन प्रतियोगिताएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
  • 2026 का आयोजन नई पीढ़ी में कविता के प्रति रुचि जगाने और साहित्यिक परंपराओं को जीवित रखने में सहायक होगा।

विश्व कविता दिवस का इतिहास और UNESCO की पहल

यूनेस्को ने 1999 में पेरिस में आयोजित अपने 30वें महासभा सम्मेलन के दौरान पहली बार 21 मार्च को विश्व कविता दिवस के रूप में अपनाया था। इतिहास भर में प्रचलित कविता में भाषा, अभिव्यक्ति और अर्थ के विभिन्न रूप शामिल होते हैं। यह अक्सर संगीत के साथ होती है और विशेष अवसरों पर इसका पाठ किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य कविता को सांस्कृतिक और कलात्मक अभिव्यक्ति के रूप में बढ़ावा देना था। इससे पहले कुछ देशों में 15 अक्टूबर को रोमन कवि Virgil की जयंती के रूप में कविता दिवस मनाया जाता था।

आधुनिक समय में महत्व

  • यह दिवस लोगों को साझा भावनाओं और विचारों के माध्यम से जोड़ता है।
  • कविता मानव अनुभव, प्रकृति और समाज को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।

मुख्य महत्व:

  • भाषाई विविधता और लुप्त होती भाषाओं को बढ़ावा
  • रचनात्मक अभिव्यक्ति और आलोचनात्मक सोच को प्रोत्साहन
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान और संवाद को बढ़ावा
  • कविता को संगीत और रंगमंच जैसी कला विधाओं से जोड़ना

Eid-Ul-Fitr 2026: जानें महत्व और कैसे मनाते हैं ये त्योहार?

देशभर में आज यानी 21 मार्च को ईद मनाई जा रही है। ईद‑उल‑फितर इस्लाम धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस पर्व को मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार रमजान के पाक महीने के खत्म होने पर मनाया जाता है। आज खुशी और भाईचारे का पर्व ईद-उल-फितर बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। आज लोग मस्जिदों में नमाज़ अदा करते हैं, गले मिलते हैं और एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हैं।

ईद के दिन की शुरुआत

ईद के दिन की शुरुआत खास नमाज़ से होती है, जिसे ‘ईद की नमाज़’ कहा जाता है। इसके साथ ही आज के दिन जकात और फितरा देना भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ईद-उल-फितर इस्लाम धर्म का बेहद खास त्योहार माना जाता है। पूरे महीने रोजे रखने के बाद जब नया चांद दिखाई देता है, तब शव्वाल महीने की शुरुआत होती है और उसी के पहले दिन ईद मनाई जाती है। इस दिन सुबह लोग ईद की नमाज अदा करते हैं और इसके साथ ही रोजों का सिलसिला समाप्त हो जाता है।

इस्लाम धर्म का बेहद खास त्योहार

ईद-उल-फितर इस्लाम धर्म का बेहद खास त्योहार माना जाता है। पूरे महीने रोजे रखने के बाद जब नया चांद दिखाई देता है, तब शव्वाल महीने की शुरुआत होती है और उसी के पहले दिन ईद मनाई जाती है। इस दिन सुबह लोग ईद की नमाज अदा करते हैं और इसके साथ ही रोजों का सिलसिला समाप्त हो जाता है।

ईद-उल-फितर का खास महत्व

ईद के मौके पर घरों में तरह-तरह के मीठे पकवान बनाए जाते हैं, खासकर सेवइयां। मेहमानों का स्वागत मिठाई से किया जाता है और बच्चों व अपनों को ईदी दी जाती है। लोग एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की बधाई देते हैं। इस दिन दान का भी खास महत्व होता है, इसलिए जरूरतमंदों की मदद करना बेहद शुभ माना जाता है।

इस्लाम धर्म में ईद-उल-फितर का खास महत्व होता है। रमजान के पूरे महीने रोजे रखने के बाद लोग अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्होंने उन्हें इबादत करने की ताकत दी। मान्यता है कि सच्चे मन से रखे गए रोजों से अल्लाह खुश होते हैं और अपनी रहमत बरसाते हैं। इसी खुशी और आशीर्वाद को ईद-उल-फितर के रूप में मनाया जाता है।

ईद-उल-फितर कैसे मनाई जाती है?

ईद के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर साफ-सुथरे और नए कपड़े पहनते हैं और मस्जिद या ईदगाह में जाकर नमाज अदा करते हैं। इसके बाद परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ मिलकर खुशियां बांटते हैं। घरों में सेवइयां और शीर खुरमा जैसे स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं और एक-दूसरे को मिठाई व तोहफे देकर ईद की मुबारकबाद दी जाती है। यह त्योहार प्यार, भाईचारे और खुशी का संदेश देता है।

ईद-उल-फितर का महत्व

इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, रमजान का महीना बहुत पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान पहली बार कुरान शरीफ आई थी। माना जाता है कि इसी दिन से पैगंबर हजरत मुहम्मद के मक्का से मदीना आने के बाद ईद-उल-फितर मनाने की परंपरा शुरू हुई थी। तभी से यह दिन खुशियों के त्योहार के रूप में मनाया जाने लगा।

जकात और फितरा क्या है?

ईद का दिन मुस्लिम समुदाय के लिए बेहद खास होता है। यह दिन जरूरतमंदों के प्रति सहानुभूति और सहायता का संदेश भी देता है। जकात इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक अनिवार्य दान है, जो साहिब-ए-निसाब यानी निर्धारित संपत्ति वाले मुसलमानों द्वारा वर्ष में एक बार अपनी कुल संपत्ति का गरीबों को दिया जाता है। फितरा (Fitra/Zakat-ul-Fitr) रमजान के अंत में ईद की नमाज से पहले दिया जाने वाला एक निश्चित अनिवार्य दान है, ताकि गरीब भी ईद मना सकें।

 

विश्व कठपुतली दिवस 2026: क्यों आज भी जीवित है यह प्राचीन कला

विश्व कठपुतली दिवस 2026 हर वर्ष 21 मार्च को विश्वभर में मनाया जाता है। कठपुतली कला को वैश्विक कला के रूप में मान्यता देने हेतु विश्व कठपुतली दिवस (WPD) हर साल 21 मार्च को दुनिया भर में मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य दुनिया भर में कठपुतली कलाकारों को बढ़ावा देना और उनका सम्मान करना भी है।

इस दिन का उद्देश्य कठपुतली कला की समृद्ध परंपरा को बढ़ावा देना और संरक्षित करना है। यह दिवस कठपुतली को एक सांस्कृतिक और शैक्षिक माध्यम के रूप में महत्व देता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2003 में UNIMA (यूनियन इंटरनेशनेल डे ला मैरिओनेट) द्वारा की गई थी। यह आयोजन कठपुतली कलाकारों, रचनाकारों और विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों को एक मंच पर लाता है।

विश्व कठपुतली दिवस 2026: उत्पत्ति और उद्देश्य

  • इस दिन की शुरुआत UNIMA की पहल से हुई, जिसका लक्ष्य विश्व स्तर पर कठपुतली कला को बढ़ावा देना है।
  • इसका उद्देश्य कठपुतली थिएटर के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना है।
  • यह पारंपरिक कठपुतली कला को सुरक्षित रखने के साथ-साथ नवाचार को भी प्रोत्साहित करता है।
  • कठपुतली का उपयोग नैतिक शिक्षा, कहानी कहने और सामाजिक जागरूकता के माध्यम के रूप में भी किया जाता है।

विश्व कठपुतली दिवस 2026 के उद्देश्य

इस दिवस के कई प्रमुख उद्देश्य हैं, जो परंपरा और आधुनिकता दोनों को समर्थन देते हैं:

  • पारंपरिक कठपुतली कला का संरक्षण
  • नवाचार और आधुनिक कहानी कहने को बढ़ावा
  • शिक्षा के साधन के रूप में कठपुतली का उपयोग
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा

वैश्विक उत्सव और गतिविधियाँ

  • यह दिवस UNIMA के राष्ट्रीय केंद्रों द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मनाया जाता है।
  • इनमें प्रदर्शन, कार्यशालाएँ, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल होते हैं।
  • कलाकार और कठपुतली विशेषज्ञ विभिन्न शैलियों का प्रदर्शन करते हैं।
  • यह दिन समुदायों को जोड़ने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में मदद करता है।

विश्व कठपुतली दिवस 2026 की नई पहल

2026 में एक नई वैश्विक पहल शुरू की गई है। अब हर वर्ष एक प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कठपुतली विशेषज्ञ मुख्य व्याख्यान (Keynote Lecture) देंगे। यह व्याख्यान Charleville-Mézières (फ्रांस) में आयोजित होगा और विश्वभर में प्रसारित किया जाएगा। इसका उद्देश्य विचारों के आदान-प्रदान, सीखने और सांस्कृतिक चर्चा को बढ़ावा देना है।

आधुनिक समाज में कठपुतली का महत्व

यह दिवस केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा और संचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कठपुतली जटिल विचारों को सरल बनाकर प्रस्तुत करने में मदद करती है। यह विशेष रूप से बच्चों और विविध समुदायों तक संदेश पहुँचाने का प्रभावी माध्यम है।

FIFA वर्ल्ड कप 2026 पर WADA बैन का खतरा टला: आगे क्या होगा?

विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सरकारी अधिकारियों को प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने से रोकने के फैसले को इस साल होने वाले विश्व कप के बाद तक टाल दिया है। इससे ट्रंप और अन्य अधिकारियों के साथ संभावित टकराव कम से कम विश्व कप तक टल गया है।

वाडा एक ऐसा नियम लागू करने पर विचार कर रही है जो ट्रंप और सभी अमेरिकी सरकारी अधिकारियों को प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने से रोक सकता है, भले ही उनका आयोजन अमेरिकी धरती पर ही क्यों न हो। इस नियम का मूल आधार अमेरिकी सरकार का वाडा के वार्षिक शुल्क का भुगतान नहीं करना है। वाडा की कार्यकारी समिति की बैठक हुई और उसने कहा कि वह सितंबर में इस नए नियम पर विचार करेगी और यह विश्व कप खत्म होने के दो महीने बाद होगा। अमेरिका विश्व कप की मेजबानी कनाडा और मेक्सिको के साथ मिलकर कर रहा है।

फीफा वर्ल्ड कप 2026 की मेज़बानी

फीफा वर्ल्ड कप 2026 की मेज़बानी पहली बार तीन देशों—अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा—के बीच होगी, और ईरान के कुछ मैच अमेरिका के विभिन्न शहरों में खेले जाने थे। ईरान का मानना है कि सुरक्षा के साथ-साथ वीजा नियम, यात्रा प्रतिबंध और राजनीतिक माहौल भी उनकी चिंता का कारण बन सकते हैं, जो टीम की तैयारियों और टूर्नामेंट में भागीदारी पर असर डाल सकते हैं।

WADA का निर्णय और प्रस्तावित नियम

WADA ने इस नियम पर अंतिम निर्णय सितंबर 2026 तक टाल दिया है, जो वर्ल्ड कप खत्म होने के करीब दो महीने बाद होगा। प्रस्तावित नियम के अनुसार, जिन देशों की सरकारें WADA को अपना बकाया भुगतान नहीं करतीं, उनके सरकारी प्रतिनिधियों को अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में शामिल होने से रोका जा सकता है।

इस फैसले का महत्व

यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वित्तीय योगदान को वैश्विक खेल आयोजनों में भागीदारी से जोड़ता है। अमेरिका ने 2023 से लगभग 7.3 मिलियन डॉलर का भुगतान रोक रखा है। फैसले को टालने से यह सुनिश्चित हुआ है कि FIFA World Cup 2026 बिना किसी विवाद के आयोजित हो सके।
हालांकि, यदि यह नियम लागू होता है, तो भविष्य के आयोजनों—जैसे 2028 Los Angeles Olympics—पर इसका असर पड़ सकता है।

अमेरिका–WADA विवाद

  • अमेरिका और WADA के बीच यह विवाद लंबे समय से चल रहा है। अमेरिका ने WADA द्वारा डोपिंग मामलों (विशेषकर चीनी खिलाड़ियों से जुड़े मामलों) के प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए फंडिंग रोकी है।
  • WADA का कहना है कि इस तरह की वित्तीय अनिश्चितता वैश्विक एंटी-डोपिंग कार्यक्रम को प्रभावित करती है और इससे खिलाड़ियों को नुकसान हो सकता है।

भविष्य पर असर

यह स्थिति FIFA World Cup 2026 को प्रभावित नहीं करेगी और टूर्नामेंट सामान्य रूप से आयोजित होगा। लेकिन यदि यह नियम बाद में लागू किया जाता है, तो 2028 ओलंपिक से पहले इसे लागू किया जा सकता है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या अंतरराष्ट्रीय खेल संगठन निर्वाचित नेताओं की भागीदारी को सीमित कर सकते हैं और ऐसे नियमों को व्यवहार में कैसे लागू किया जाएगा।

Forbes List 2026: 30 साल से कम उम्र के सबसे युवा अरबपति, वैश्विक रुझानों का खुलासा

हाल ही में जारी 2026 के सबसे युवा अरबपतियों (30 वर्ष से कम) की सूची नई पीढ़ी के धन सृजनकर्ताओं को दर्शाती है। Forbes के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में 30 वर्ष से कम आयु के 35 अरबपति हैं, जिनकी कुल संपत्ति लगभग 92.4 अरब डॉलर है। इनमें से कई ने अपनी संपत्ति विरासत में प्राप्त की है, जबकि कुछ युवा उद्यमी तकनीक और स्टार्टअप्स के माध्यम से धन अर्जित कर रहे हैं। भारत के दृष्टिकोण से 22 वर्षीय एआई उद्यमी Surya Midha इस वैश्विक सूची में छठे स्थान पर हैं।

टॉप 10 सबसे युवा अरबपति 2026: मुख्य बिंदु

यह सूची विरासत में मिली संपत्ति और स्वयं के प्रयास से अर्जित सफलता का मिश्रण दिखाती है। अधिकांश अरबपति पारिवारिक व्यवसायों से जुड़े हैं, विशेषकर फार्मा, मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल जैसे क्षेत्रों में। वहीं, एआई स्टार्टअप्स के उभार ने नए सेल्फ-मेड अरबपतियों को जन्म दिया है।

2026 के टॉप 10 सबसे युवा अरबपति (30 वर्ष से कम)

  • एमेली वोग्ट ट्रेजेस (20) – औद्योगिक मशीनरी
  • जोहान्स वॉन बॉमबाख (20) – फार्मा
  • लिविया वोग्ट डी असिस (21) – औद्योगिक मशीनरी
  • क्लेमेंटे डेल वेकियो (21) – चश्मा उद्योग
  • किम जंग-यौन (22) – ऑनलाइन गेमिंग
  • सूर्य मिधा (22) – एआई सॉफ्टवेयर
  • ब्रेंडन फूडी (22) – एआई सॉफ्टवेयर
  • आदर्श हिरेमठ (22) – एआई सॉफ्टवेयर
  • केविन डेविड लेहमन (23) – ड्रगस्टोर्स
  • पेद्रो वोग्ट ट्रेजेस (23) – औद्योगिक मशीनरी

सूची में भारतीय मूल का प्रतिनिधित्व

इस सूची की एक प्रमुख विशेषता Surya Midha हैं, जो वैश्विक स्तर पर भारतीय मूल के उद्यमियों के उभरते प्रभाव को दर्शाते हैं। मात्र 22 वर्ष की आयु में उन्होंने अपनी एआई भर्ती स्टार्टअप “Mercor” के माध्यम से यह सफलता हासिल की है। उनके सह-संस्थापक Brendan Foody और Adarsh Hiremath भी इस सूची में शामिल हैं, जो यह दिखाता है कि सहयोगात्मक स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से संपत्ति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

2026 में एआई का बढ़ता प्रभाव

यह सूची स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वैश्विक संपत्ति निर्माण का एक बड़ा माध्यम बनता जा रहा है। कई नए अरबपति एआई आधारित कंपनियों से उभर रहे हैं। यह ट्रेंड बताता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑटोमेशन और डेटा-आधारित तकनीकें भविष्य की अर्थव्यवस्था को दिशा दे रही हैं।

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