गृह मंत्रालय (MHA) के एक राष्ट्रव्यापी निर्देश के तहत, बेंगलुरु में ‘ऑपरेशन अभ्यास’ नामक एक व्यापक सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य जनता में आपात स्थिति के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आपदा से निपटने की तैयारियों को मजबूत करना था। इस अभ्यास का संचालन कर्नाटक राज्य अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग द्वारा किया गया, जिसमें आग लगने, मलबे में फंसे लोगों को बचाने और ऊंची इमारतों से निकासी जैसी परिस्थितियों में बचाव और प्राथमिक चिकित्सा कार्यों का सजीव अभ्यास किया गया। विशेष रूप से हलासुरु क्षेत्र में यह ड्रिल व्यापक पैमाने पर आयोजित की गई।
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मार्केट कैप के हिसाब से 2025 में शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान क्रिप्टोकरेंसी
आज का क्रिप्टोकरेंसी बाजार केवल प्रचार तक सीमित नहीं रह गया है; यह तेजी से दैनिक वित्तीय व्यवहारों का हिस्सा बनता जा रहा है। Forbes की एक रिपोर्ट के अनुसार, 7 मई 2025 तक वैश्विक क्रिप्टोकरेंसी बाजार का कुल मूल्य $3.09 ट्रिलियन तक पहुंच गया है। Statista Market Insights का अनुमान है कि वैश्विक क्रिप्टो बाजार की अनुमानित आय US$45.3 बिलियन तक पहुंच सकती है, जबकि उपयोगकर्ताओं की संख्या 2025 तक 861.01 मिलियन तक बढ़ने की उम्मीद है।
अप्रैल 2025 की शुरुआत में बढ़ते टैरिफ तनाव के बीच प्रमुख क्रिप्टोकरेंसीज़ में भारी गिरावट देखी गई, विशेषकर बिटकॉइन में, जो जनवरी 2025 में $107,000 से अधिक के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था। हालांकि, पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा टैरिफ पर 90 दिनों के लिए रोक लगाने की घोषणा के बाद बिटकॉइन की कीमत में जोरदार उछाल आया और इसका मार्केट कैप $1.92 ट्रिलियन तक पहुंच गया, जिससे यह सबसे मूल्यवान और लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी बन गई।
बिटकॉइन को “डिजिटल गोल्ड” माना जाता है और इसकी कुल आपूर्ति केवल 21 मिलियन सिक्कों तक सीमित है। इसकी वृद्धि को संस्थागत निवेश, ETF स्वीकृति और नवाचार जैसे कारकों से बल मिल रहा है, Forbes की रिपोर्ट में बताया गया है। बिटकॉइन के बाद, दूसरे और तीसरे स्थान पर क्रमशः Ethereum और Tether हैं, जिनका वर्तमान मार्केट कैप $220.63 बिलियन और $149.41 बिलियन है।
दुनिया की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान क्रिप्टोकरेंसी (मार्केट कैप के आधार पर) — मई 2025 तक
| स्थान | नाम | प्रतीक (Symbol) | बाज़ार पूंजीकरण (USD में) |
| 1 | बिटकॉइन (Bitcoin) | BTC | $1.92 ट्रिलियन |
| 2 | एथेरियम (Ethereum) | ETH | $220.86 बिलियन |
| 3 | टेथर (Tether) | USDT | $149.41 बिलियन |
| 4 | एक्सआरपी (XRP) | XRP | $125.82 बिलियन |
| 5 | बीएनबी (BNB) | BNB | $87.87 बिलियन |
| 6 | सोलाना (Solana) | SOL | $75.98 बिलियन |
| 7 | यूएसडीसी (USDC) | USDC | $60.97 बिलियन |
| 8 | डोज़कॉइन (Dogecoin) | DOGE | $25.69 बिलियन |
| 9 | कार्डानो (Cardano) | ADA | $24.51 बिलियन |
| 10 | ट्रॉन (TRON) | TRX | $23.14 बिलियन |
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रोहित शर्मा ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की
भारतीय क्रिकेट के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, रोहित शर्मा — जो भारत के सबसे सफल बल्लेबाज़ों में से एक और वर्तमान टेस्ट कप्तान हैं — ने आधिकारिक रूप से टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। यह निर्णय उन्होंने बहुप्रतीक्षित भारत बनाम इंग्लैंड टेस्ट श्रृंखला से ठीक पहले लिया, जिससे उनके लंबे और उतार-चढ़ाव भरे टेस्ट करियर का अंत हो गया। रोहित ने 2013 में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था और अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ी है जो संघर्ष, पुनर्निर्माण और नेतृत्व से भरी रही है। हालांकि उन्होंने IPL 2025 के दौरान टीम की कप्तानी जारी रखने की इच्छा जताई थी, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) में बदलते समीकरणों के कारण उनके टेस्ट करियर का समापन अपेक्षा से पहले और कुछ हद तक अप्रत्याशित रूप से हो गया।
समाचार में क्यों?
7 मई 2025 को रोहित शर्मा ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। यह फैसला उन्होंने भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाली आगामी टेस्ट श्रृंखला से ठीक पहले लिया, जबकि उन्होंने इससे पहले टीम की कप्तानी जारी रखने की इच्छा जताई थी। लेकिन 2025–27 वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) चक्र के लिए युवा नेतृत्व की तलाश के चलते BCCI के निर्णय ने इस फैसले को प्रभावित किया।
करियर का संक्षिप्त विवरण
टेस्ट डेब्यू और शुरुआती वादा (2013)
रोहित ने 2013 में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया और अपने पहले दो घरेलू टेस्ट मैचों में शतक जड़कर जबरदस्त शुरुआत की।
वे मिडल ऑर्डर बल्लेबाज़ के रूप में अपार संभावनाओं वाले खिलाड़ी माने गए।
संघर्ष और अस्थिरता
मध्य क्रम में अपनी जगह पक्की करने में उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
लगातार चोटों और फॉर्म में गिरावट के चलते कई वर्षों तक उनकी उपस्थिति सीमित रही।
सलामी बल्लेबाज़ के रूप में रूपांतरण (2019 के बाद)
2019 में उन्हें पारी की शुरुआत करने का मौका मिला — जो उनके टेस्ट करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।
उन्होंने खासकर घरेलू पिचों पर शानदार प्रदर्शन किया और सुरुचिपूर्ण बल्लेबाज़ी से बड़े रन बनाए।
कप्तानी युग (2022–2025)
2022 में विराट कोहली के पद छोड़ने के बाद उन्होंने टेस्ट कप्तानी संभाली।
उनकी कप्तानी में भारत ने कई श्रृंखलाएं जीतीं, लेकिन न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कुछ अहम हार भी झेलीं।
उनके नेतृत्व की स्थिरता की सराहना हुई, हालांकि विदेशी दौरों पर प्रदर्शन को लेकर सवाल उठे।
संन्यास के कारण
हालांकि उनका इरादा सकारात्मक था, लेकिन पिछली टेस्ट श्रृंखला में उनका फॉर्म गिर गया।
38 वर्ष की उम्र में BCCI ने आगामी WTC चक्र के लिए युवा नेतृत्व को प्राथमिकता दी।
हाल ही में उन्होंने T20I क्रिकेट से भी संन्यास लिया था, और टेस्ट से संन्यास भी उनके अंतरराष्ट्रीय करियर के समापन की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है।
1965 के बाद से पाकिस्तान के खिलाफ भारत के प्रमुख सैन्य अभियान
ऑपरेशन सिंदूर और भारत की सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के प्रति बढ़ती राष्ट्रीय रुचि के बीच, पाकिस्तान के खिलाफ भारत के पूर्व सैन्य अभियानों पर एक नज़र डाली जाए तो यह देश की रणनीतिक दृष्टिकोण में आए बदलाव को दर्शाता है—जहाँ पहले पारंपरिक युद्ध हुआ करते थे, अब सटीक सर्जिकल स्ट्राइक्स प्रमुख हो गई हैं। 1965 के भारत-पाक युद्ध से लेकर 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक तक, ये ऑपरेशन भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
पृष्ठभूमि / परिचय
1947 से अब तक भारत और पाकिस्तान के बीच कई सैन्य टकराव हो चुके हैं। समय के साथ भारत की सैन्य प्रतिक्रियाएं पूर्ण युद्ध से लेकर सीमा पार आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाने वाले विशेष अभियानों तक विस्तृत हो गई हैं। इन अभियानों ने दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य को आकार दिया है और बाहरी आक्रमण तथा आतंकवाद के खिलाफ भारत की संकल्पशक्ति को प्रदर्शित किया है।
भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ कुछ प्रमुख सैन्य अभियान:
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ऑपरेशन रिडल (1965)
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प्रसंग: पाकिस्तान के ऑपरेशन जिब्राल्टर और ग्रैंड स्लैम के जवाब में
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कार्रवाई: भारत ने लाहौर और कसूर पर आक्रमण किया
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प्रभाव: पाकिस्तान की आक्रामकता को नाकाम किया; ताशकंद समझौता हुआ
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ऑपरेशन एब्लेज़ (1965)
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उद्देश्य: कच्छ के रण में हुई झड़पों के दौरान अग्रिम सैनिक तैनाती
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महत्व: पूर्ण युद्ध से पहले भारत की तत्परता दर्शाई
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ऑपरेशन कैक्टस लिली (1971)
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प्रसंग: बांग्लादेश मुक्ति संग्राम
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मिशन: मेघना नदी पार कर ढाका पहुँचना
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महत्व: पाकिस्तानी सुरक्षा तंत्र को दरकिनार करने में सफलता
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ऑपरेशन ट्राइडेंट (1971)
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क्रियान्वयन: भारतीय नौसेना द्वारा
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लक्ष्य: कराची बंदरगाह
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मुख्य बिंदु: क्षेत्र में पहली बार एंटी-शिप मिसाइलों का उपयोग
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ऑपरेशन पाइथन (1971)
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आगे की कार्रवाई: ट्राइडेंट के बाद दूसरी नौसेना स्ट्राइक
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प्रभाव: कराची को भारी नुकसान; बांग्लादेश की स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त
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ऑपरेशन मेघदूत (1984)
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उद्देश्य: सियाचिन ग्लेशियर की रणनीतिक ऊँचाइयों पर कब्ज़ा
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बल: सेना और वायुसेना
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परिणाम: पाकिस्तान से पहले महत्वपूर्ण स्थानों पर नियंत्रण
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ऑपरेशन विजय (1999)
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प्रसंग: कारगिल युद्ध
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लक्ष्य: पाकिस्तानी घुसपैठियों को भारतीय क्षेत्र से खदेड़ना
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नतीजा: सभी चौकियों को पुनः प्राप्त किया गया, पाकिस्तान पीछे हटा
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ऑपरेशन साफ़ेद सागर (1999)
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शाखा: भारतीय वायुसेना
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महत्व: 1971 के बाद कश्मीर में पहला हवाई अभियान
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मिशन: कारगिल में दुश्मन की चौकियों पर हवाई हमला
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सर्जिकल स्ट्राइक्स (2016)
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प्रेरणा: उरी आतंकवादी हमला
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कार्रवाई: सेना ने एलओसी पार कर आतंकी लॉन्च पैड्स पर हमले किए
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नोट: भारत की आतंकवाद नीति में निर्णायक बदलाव
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ऑपरेशन बंदर (2019)
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प्रेरणा: पुलवामा हमले में 40 CRPF जवानों की शहादत
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कार्रवाई: बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर पर वायुसेना का हमला
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महत्व: 1971 के बाद पहली बार एलओसी पार एयरस्ट्राइक; संक्षिप्त हवाई झड़पें
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SBI ने कार्यबल को सशक्त बनाने के लिए सबसे बड़ी स्टाफ सहभागिता पहल शुरू की
भारतीय स्टेट बैंक (SBI), जो भारत का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है, ने अपने कर्मचारियों को भविष्य के लिए तैयार करने और प्रदर्शन, गौरव एवं उत्पादकता को बढ़ाने के उद्देश्य से एक व्यापक कर्मचारी संलग्नता और कौशल विकास पहल शुरू की है। इस पहल को ‘Next LEAP’ और ‘SuPer SBI: Great to Greater’ नाम दिया गया है। यह भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा ऐसा प्रयास माना जा रहा है।
क्यों है खबरों में?
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने भारत के बैंकिंग क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा स्टाफ एंगेजमेंट और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है, जिसका उद्देश्य अपने 2.3 लाख कर्मचारियों को भविष्य के लिए तैयार करना और संगठन के प्रति गौरव का भाव पैदा करना है।
लक्ष्य और उद्देश्य
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कर्मचारियों को निरंतर सीखने और कौशल विकास के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार करना।
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SBI की विरासत से जुड़ाव और गौरव की भावना को बढ़ाना।
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उत्पादकता, संचालन कुशलता और ग्राहक सेवा को बेहतर बनाना।
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नेतृत्व के सुचारु हस्तांतरण और उत्तराधिकार योजना सुनिश्चित करना।
मुख्य पहलू
Next LEAP पहल
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शीर्ष प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों से सीधे संवाद पर केंद्रित।
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कौशल की पर्याप्तता और जमीनी स्तर से फीडबैक प्राप्त करने पर ज़ोर।
SuPer SBI: Great to Greater प्रशिक्षण कार्यक्रम
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अब तक 1.75 लाख कर्मचारियों को शामिल किया गया।
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आधुनिक कौशल और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान कर गौरव की भावना को प्रेरित करना।
लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS)
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सभी शिक्षण और विकास गतिविधियों के लिए केंद्रीकृत मंच।
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व्यक्तिगत विकास योजनाओं (IDPs) के साथ तालमेल में कार्य करता है।
डेटा-संचालित प्रदर्शन प्रणाली
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निष्पक्ष और मानकीकृत मूल्यांकन के लिए डिजिटल टूल्स का प्रयोग।
उत्तराधिकार योजना नीति
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वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों के लिए उत्तराधिकार योजना विकसित की गई है ताकि नेतृत्व की निरंतरता बनी रहे।
पृष्ठभूमि और स्थैतिक तथ्य
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SBI भारत का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है।
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मार्च 2024 तक, इसके पास 2,32,296 कर्मचारी और 50 करोड़ से अधिक ग्राहक थे।
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यह पहल SBI की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसका उद्देश्य डिजिटल युग में प्रतिस्पर्धी बने रहना है।
| सारांश / स्थैतिक | विवरण |
| क्यों है खबरों में? | SBI ने कर्मचारियों को सशक्त करने हेतु सबसे बड़ी स्टाफ एंगेजमेंट पहल शुरू की |
| पहल के नाम | Next LEAP, SuPer SBI: Great to Greater |
| बैंक | भारतीय स्टेट बैंक (SBI) |
| प्रशिक्षित कर्मचारियों की संख्या | 1.75 लाख |
| कुल कर्मचारी (मार्च 2024 तक) | 2,32,296 |
| उद्देश्य | कौशल वृद्धि, भविष्य के लिए तत्परता, कर्मचारी गौरव और उत्पादकता |
| विशेष फोकस क्षेत्र | डिजिटल लर्निंग, उत्तराधिकार योजना, प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली |
अर्जेंटीना के विश्व कप विजेता फुटबॉलर लुइस गैल्वन का निधन
अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर और 1978में विश्व कप जीतने वाली टीम के सदस्य लुइस गैल्वन का निधन हो गया है। वे 77वर्ष के थे और पिछले कुछ सप्ताह से निमोनिया से जूझ रहे थे। 77 वर्ष की आयु में गालवान का 5 मई 2025 को अर्जेंटीना के कोर्दोबा शहर में निधन हो गया। मैदान पर उनके प्रभावशाली खेल और क्लब एटलेटिको ताजेरेस के प्रति निष्ठा के लिए उन्हें अत्यधिक सम्मान प्राप्त था। उन्होंने 1978 के उस विवादित विश्व कप में अर्जेंटीना की पहली खिताबी जीत में निर्णायक भूमिका निभाई, जो सैन्य तानाशाही के दौर में आयोजित हुआ था।
क्यों हैं खबरों में?
लुइस गैल्वन के निधन पर साथी खिलाड़ियों, प्रशंसकों, क्लबों और फुटबॉल संगठनों ने गहरी संवेदना प्रकट की। यह घटना अर्जेंटीना के एक अन्य दिग्गज खिलाड़ी ह्यूगो गाती के हालिया निधन के बाद हुई है। ऐसे में अर्जेंटीना के फुटबॉल इतिहास और 1978 विश्व कप की विरासत पर फिर से चर्चा हो रही है।
पृष्ठभूमि व करियर उपलब्धियाँ:
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लुइस गैल्वन ने 1970 और 80 के दशक में अर्जेंटीना फुटबॉल में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया।
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क्लब एटलेटिको ताजेरेस के लिए 17 वर्षों में 503 मैच खेले और छह घरेलू खिताब जीते।
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1978 फीफा विश्व कप में अर्जेंटीना का प्रतिनिधित्व किया और नीदरलैंड्स के खिलाफ फाइनल सहित सभी मैचों में खेले।
1978 विश्व कप मुख्य बातें:
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फाइनल में अर्जेंटीना ने नीदरलैंड को एक्स्ट्रा टाइम में 3-1 से हराया।
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गैल्वन की रक्षात्मक क्षमता और नेतृत्व की खूब सराहना हुई।
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यह विश्व कप सैन्य तानाशाही की छाया में आयोजित हुआ और पेरू के खिलाफ 6-0 की जीत को लेकर मैच-फिक्सिंग के आरोप लगे।
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हालांकि विवादों के बावजूद गालवान के व्यक्तिगत योगदान को व्यापक सम्मान मिला।
श्रद्धांजलियाँ:
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क्लब एटलेटिको ताजेरेस ने उन्हें “क्लब का प्रतीक” बताया।
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उबाल्दो फिलोल (1978 के गोलकीपर) ने उनके खेल और व्यक्तित्व की प्रशंसा की।
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अर्जेंटीना फुटबॉल संघ (AFA) ने आधिकारिक रूप से शोक व्यक्त किया।
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प्रशंसकों और पत्रकारों ने उन्हें “विनम्र योद्धा” और “राष्ट्रीय नायक” कहा।
अतिरिक्त संदर्भ – ह्यूगो गाती का निधन:
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गैल्वन के निधन से कुछ दिन पहले ही अर्जेंटीना के एक और फुटबॉल दिग्गज ह्यूगो गाती का भी निधन हुआ।
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“एल लोको” के नाम से प्रसिद्ध गाती, अर्जेंटीना टॉप डिवीजन में सबसे अधिक 765 मैच खेलने का रिकॉर्ड रखते थे।
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वे अपने अनोखे गोलकीपिंग स्टाइल और टीवी पर सक्रिय उपस्थिति के लिए भी प्रसिद्ध रहे।
विश्व एथलेटिक्स दिवस 2025: इतिहास और महत्व
वर्ल्ड एथलेटिक्स डे 2025 को 7 मई को विश्व स्तर पर मनाया जा रहा है। यह दिन युवाओं में एथलेटिक्स की भागीदारी को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य-सचेत जीवनशैली को प्रोत्साहित करने की परंपरा को जारी रखता है। इस वार्षिक आयोजन की शुरुआत इंटरनेशनल एमेच्योर एथलेटिक फेडरेशन (IAAF)—जो अब “वर्ल्ड एथलेटिक्स” के नाम से जाना जाता है—द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य स्कूलों, कॉलेजों और स्थानीय समुदायों में ट्रैक और फील्ड प्रतियोगिताओं का आयोजन कराना और अनुशासन, टीमवर्क तथा निरंतरता जैसे मूल्यों को विकसित करना है।
क्यों है समाचारों में?
वर्ल्ड एथलेटिक्स डे 2025 आज, 7 मई को मनाया जा रहा है, जो इस वैश्विक आयोजन का 29वां संस्करण है। यह दिन युवाओं में निष्क्रियता, मोटापे और नियमित शारीरिक गतिविधियों के मानसिक लाभों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच विशेष महत्व प्राप्त कर रहा है। इस वर्ष की थीम अभी घोषित नहीं की गई है, लेकिन वर्ल्ड एथलेटिक्स द्वारा समावेशिता, स्थायित्व और सशक्तिकरण पर केंद्रित अभियान की अपेक्षा की जा रही है।
उद्देश्य और लक्ष्य
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युवा प्रतिभागिता को जमीनी स्तर पर एथलेटिक्स में प्रोत्साहित करना
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शारीरिक फिटनेस को बढ़ावा देना
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ओलंपिक मूल्यों जैसे निष्पक्ष खेल, ईमानदारी और टीमवर्क को बढ़ावा देना
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नई प्रतिभाओं की खोज करना जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन कर सकें
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लिंग समानता को खेलों में सुनिश्चित करना
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सक्रिय जीवनशैली के दीर्घकालिक फायदों के प्रति जागरूकता फैलाना
पृष्ठभूमि और इतिहास
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1996: IAAF अध्यक्ष प्रीमो नेबिओलो के नेतृत्व में पहला वर्ल्ड एथलेटिक्स डे मनाया गया
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1912: IAAF की स्थापना स्टॉकहोम ओलंपिक के बाद हुई
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2001: IAAF का नाम बदलकर इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ एथलेटिक्स फेडरेशंस किया गया
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2019: संगठन को अधिक आधुनिक पहचान देने हेतु नाम बदलकर World Athletics किया गया
इस दिन का महत्व
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ट्रैक और फील्ड जैसे खेलों को पुनर्जीवित करता है, जो अक्सर उपेक्षित हो जाते हैं
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स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाता है और निष्क्रिय जीवनशैली के खिलाफ संदेश देता है
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युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और खेलभावना का विकास करता है
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खेलों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मज़बूत करता है
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सतत विकास लक्ष्य 3 (SDG 3): स्वस्थ जीवन और कल्याण के अनुरूप है
| सारांश / स्थैतिक जानकारी | विवरण |
| क्यों है समाचारों में? | युवाओं के फिटनेस को बढ़ावा देने हेतु विश्व स्तर पर वर्ल्ड एथलेटिक्स डे 2025 मनाया गया |
| आयोजन तिथि | 7 मई 2025 |
| शुरुआत करने वाला संगठन | अंतरराष्ट्रीय एमेच्योर एथलेटिक फेडरेशन (IAAF) |
| वर्तमान नाम | वर्ल्ड एथलेटिक्स |
| उद्देश्य | युवाओं की फिटनेस और एथलेटिक्स में भागीदारी को प्रोत्साहित करना |
| थीम (2025) | अभी घोषित नहीं हुई |
| महत्व | शारीरिक गतिविधि, खेल संस्कृति और समावेशिता को बढ़ावा देना |
इंटरनेशनल नो डाइट डे 2025: इतिहास और महत्व
हर साल 6 मई को इंटरनेशनल नो डायट डे (International No Diet Day) मनाया जाता है। यह एक वैश्विक पहल है जिसका उद्देश्य शरीर की सकारात्मकता (body positivity), आत्म-स्वीकृति (self-acceptance) को बढ़ावा देना और हानिकारक डायट कल्चर को अस्वीकार करना है। 1992 में शुरू हुए इस आंदोलन का उद्देश्य मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना, शरीर की विविधता को स्वीकार करना और अत्यधिक डाइटिंग व वजन आधारित भेदभाव के खतरों के प्रति जागरूकता फैलाना है।
क्यों है समाचारों में?
6 मई 2025 को इंटरनेशनल नो डायट डे मनाया गया। इस अवसर पर फैटफोबिया (fatphobia) को समाप्त करने, सौंदर्य के सामाजिक मानकों को चुनौती देने और समावेशी स्वास्थ्य पद्धतियों के महत्त्व को उजागर करने की अपील की गई। इस वर्ष विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य, “इंट्युटिव ईटिंग” (सहज भोजन) और बिना डाइटिंग के समर हेल्थ टिप्स पर ध्यान दिया गया।
इंटरनेशनल नो डायट डे के मुख्य उद्देश्य
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डायटिंग और बॉडी शेमिंग के हानिकारक प्रभावों को चुनौती देना।
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शरीर की विविधता को बढ़ावा देना और यह समझाना कि स्वास्थ्य हर आकार और आकार में संभव है।
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विशेष रूप से युवाओं में खाने से संबंधित विकारों (Eating Disorders) के प्रति जागरूकता फैलाना।
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सख्त डाइटिंग की जगह स्वस्थ और टिकाऊ जीवनशैली अपनाने को प्रोत्साहन देना।
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फैटफोबिया, वजन आधारित भेदभाव और अवास्तविक सौंदर्य मानकों का विरोध करना।
पृष्ठभूमि
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इसकी शुरुआत 1992 में ब्रिटिश नारीवादी और “डायट ब्रेकर्स” की संस्थापक मैरी इवांस यंग ने की थी।
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उन्होंने स्वयं एनोरेक्सिया से जूझने के बाद इस आंदोलन की शुरुआत की ताकि लोग अपने शरीर को सम्मान और स्वीकृति दे सकें।
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पहले यह केवल यूके में मनाया जाता था, लेकिन अब यह एक अंतर्राष्ट्रीय आयोजन बन चुका है।
महत्त्व
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डाइटिंग के मानसिक और शारीरिक खतरों के बारे में जागरूकता फैलाता है।
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आत्म-दया, सकारात्मक शरीर छवि और मीडिया साक्षरता को प्रोत्साहित करता है।
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मानसिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण आंदोलनों से जुड़ता है।
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लोगों को ऊर्जा और आनंद के लिए स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए प्रेरित करता है, न कि केवल रूप-रंग के लिए।
बिना डाइटिंग के फिट रहने के सुझाव
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संतुलित आहार लें: फल, सब्ज़ियाँ, अनाज, प्रोटीन और अच्छे वसा को शामिल करें।
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माइंडफुल ईटिंग अपनाएं: भूख लगने पर खाएं, पेट भरने पर रुकें, खाने के समय ध्यान न भटकाएं।
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हाइड्रेटेड रहें: विशेष रूप से गर्मियों में पर्याप्त पानी पीना ज़रूरी है।
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पौष्टिक स्नैक्स चुनें: दही, मेवे, फल—प्रोसेस्ड फूड की जगह।
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नियमित व्यायाम करें: ऐसा व्यायाम चुनें जो आनंददायक और बनाए रखने योग्य हो।
गर्मियों के लिए बेहतरीन खाद्य पदार्थ
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खीरा, तरबूज, बेरीज़: पानी की मात्रा अधिक, एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर।
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दही: पाचन स्वास्थ्य में सहायक और ठंडक प्रदान करता है।
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हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ: आसानी से पचने योग्य और पोषक तत्वों से भरपूर।



