77वां गणतंत्र दिवस परेड 2026: मुख्य पहली बातें, सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक झलकियाँ

26 जनवरी 2026 को आयोजित 77वां गणतंत्र दिवस परेड हाल के वर्षों की सबसे आधुनिक, तकनीक-आधारित और प्रभावशाली परेडों में से एक रही। नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित लगभग 90 मिनट के इस भव्य समारोह में भारत की सैन्य शक्ति, स्वदेशी रक्षा तकनीक और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस वर्ष की परेड कई ऐतिहासिक ‘पहली बार’ प्रस्तुतियों के कारण विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों और रक्षा मामलों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है।

गणतंत्र दिवस परेड 2026 की प्रमुख ‘पहली बार’ उपलब्धियाँ

सूर्यास्त्र रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की पहली झलक

परेड का सबसे बड़ा आकर्षण रहा यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम (URLS) ‘सूर्यास्त्र’ का पहली बार प्रदर्शन। यह स्वदेशी डीप-स्ट्राइक रॉकेट प्रणाली 300 किलोमीटर तक सतह-से-सतह लक्ष्य को भेदने में सक्षम है। इसका प्रदर्शन भारत की लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन पर बढ़ते फोकस को दर्शाता है।

भैरव लाइट कमांडो बटालियन की परेड में एंट्री

नई गठित भैरव लाइट कमांडो बटालियन ने भी पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में मार्च किया। यह बटालियन नियमित पैदल सेना और विशेष बलों के बीच की ऑपरेशनल कमी को पूरा करने के लिए बनाई गई है और कठिन इलाकों में तेज़, उच्च-गतिशील अभियानों के लिए तैयार की गई है। इससे पहले इसका सार्वजनिक पदार्पण जयपुर में सेना दिवस परेड में हुआ था।

पहली बार पशु दस्ता शामिल

एक अनोखे और प्रतीकात्मक कदम के तहत इस वर्ष पशु दस्ता भी परेड का हिस्सा बना। इसमें शामिल थे:

  • ऊँचाई वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त जांस्कर पोनी
  • रेगिस्तानी अभियानों में उपयोगी बैक्ट्रियन ऊँट
  • रैप्टर्स (शिकार करने वाले पक्षी)
  • भारतीय सेना के डॉग्स

ये सभी कठिन इलाकों में वाहनों के सीमित उपयोग के कारण सेना के लिए फोर्स मल्टीप्लायर माने जाते हैं।

नई ‘फेज़्ड बैटल एरे’ प्रस्तुति

इस बार परेड की प्रस्तुति शैली में बड़ा बदलाव देखने को मिला। पारंपरिक मार्चिंग के बजाय ‘फेज़्ड बैटल एरे फॉर्मेशन’ अपनाया गया, जिसमें सेना की तैनाती वास्तविक युद्ध जैसी क्रमबद्ध दिखाई गई। इसमें पहले टोही इकाइयाँ, फिर भारी हथियार, लॉजिस्टिक्स और अंत में पूर्ण युद्ध साजो-सामान के साथ सैनिक शामिल थे। इससे परेड अधिक यथार्थवादी और ऑपरेशनल बन गई।

61 कैवेलरी रेजिमेंट पहली बार युद्धक वेश में

अपनी पारंपरिक शाही वर्दी और विशिष्ट पगड़ी के लिए प्रसिद्ध 61 कैवेलरी रेजिमेंट इस बार पहली बार कॉम्बैट बैटल गियर में नजर आई। यह बदलाव परंपरा के साथ-साथ सेना की बढ़ती ऑपरेशनल तत्परता को दर्शाता है।

शक्तिबाण आर्टिलरी रेजिमेंट का पदार्पण

नई गठित शक्तिबाण रेजिमेंट ने भी पहली बार परेड में भाग लिया। यह रेजिमेंट आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सुसज्जित है, जिसमें शामिल हैं:

  • ड्रोन
  • काउंटर-ड्रोन सिस्टम
  • लोइटरिंग म्यूनिशन

यह भारत के मानवरहित और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध की ओर बढ़ते कदम को दर्शाता है।

परेड में प्रदर्शित उन्नत हथियार प्रणालियाँ

परेड में भारत की अत्याधुनिक रक्षा क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया, जिनमें शामिल हैं:

  • ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल
  • आकाश सतह-से-वायु मिसाइल प्रणाली
  • MRSAM (मीडियम रेंज सतह-से-वायु मिसाइल)
  • ATAGS (एडवांस्ड टोव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम)
  • धनुष तोप
  • विभिन्न सैन्य ड्रोन का स्थैतिक प्रदर्शन

ये प्रणालियाँ भारत की वायु रक्षा, आर्टिलरी आधुनिकीकरण और स्वदेशी मिसाइल विकास में हुई प्रगति को दर्शाती हैं।

भव्य वायुसेना फ्लाई-पास्ट

भारतीय वायुसेना का फ्लाई-पास्ट दो चरणों में हुआ, जिसमें 29 विमान शामिल थे:

  • राफेल लड़ाकू विमान
  • सुखोई-30 एमकेआई
  • मिग-29
  • P-8I समुद्री निगरानी विमान
  • अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर
  • लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH)
  • एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH)
  • Mi-17 हेलीकॉप्टर
  • C-130 और C-295 परिवहन विमान

इन विमानों ने युद्धक संरचनाओं में उड़ान भरकर हवाई प्रभुत्व और संयुक्त सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया।

मार्चिंग दस्ते और सैन्य बैंड

परेड में 18 मार्चिंग टुकड़ियाँ और 13 सैन्य बैंड शामिल हुए, जिन्होंने अनुशासन और ऊर्जा से भरा माहौल बनाया। इसके साथ ही भारी थर्मल वर्दी में मिक्स्ड स्काउट्स दस्ता भी पहली बार शामिल हुआ, जो युवाओं की भागीदारी और समावेशिता का प्रतीक था।

अंतरराष्ट्रीय भागीदारी

राजनयिक दृष्टि से भी यह परेड खास रही। यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और एक छोटा EU सैन्य दस्ता भी परेड में शामिल हुआ। यह भारत की बढ़ती वैश्विक रणनीतिक साझेदारियों को दर्शाता है।

गणतंत्र दिवस 2026: तारीख, थीम, मुख्य अतिथि और महत्व जानें

भारत हर वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाता है। यह दिन इसलिए विशेष है क्योंकि 1950 में इसी दिन भारतीय संविधान लागू हुआ, जिससे भारत एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बना।गणतंत्र दिवस 2026 भारत का 77वां गणतंत्र दिवस होगा और यह देश के कानून, लोकतंत्र और एकता को याद करने का महत्वपूर्ण अवसर है।

गणतंत्र दिवस 2026 – तिथि

गणतंत्र दिवस हर साल 26 जनवरी को मनाया जाता है।
2026 में यह भारत का 77वां गणतंत्र दिवस होगा।

यह दिन भारतीय संविधान को अपनाने (1950) की याद दिलाता है। भारत और विदेशों में स्थित भारतीय संस्थानों में ध्वजारोहण, परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे राष्ट्र और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाएगा।

गणतंत्र दिवस 2026 कैसे मनाया जाएगा?

गणतंत्र दिवस 2026 पूरे भारत में देशभक्ति और गर्व के साथ मनाया जाएगा। मुख्य कार्यक्रम नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होगा, जिसमें भारत की सैन्य शक्ति, संस्कृति, टेक्नोलॉजी और एकता को दिखाने वाली एक शानदार परेड होगी। स्कूल, कॉलेज, सरकारी दफ्तर और विदेशों में भारतीय मिशन इस दिन राष्ट्रीय झंडा फहराएंगे, राष्ट्रगान गाएंगे और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करेंगे।

हम गणतंत्र दिवस क्यों मनाते हैं?

गणतंत्र दिवस इसलिए मनाया जाता है ताकि यह याद रखा जा सके कि भारत ने 26 जनवरी 1950 को अपना संविधान अपनाया था। हालांकि भारत 15 अगस्त 1947 को आज़ाद हो गया था, लेकिन 1950 तक उसका कोई स्थायी संविधान नहीं था।

26 जनवरी की तारीख को 1930 की पूर्ण स्वराज घोषणा का सम्मान करने के लिए चुना गया था, जब भारत ने पहली बार ब्रिटिश शासन से पूरी आज़ादी की मांग की थी।

गणतंत्र दिवस हमें याद दिलाता है:

  • संविधान की सर्वोच्चता
  • कानून का शासन
  • लोकतांत्रिक व्यवस्था
  • समानता, स्वतंत्रता और न्याय

गणतंत्र दिवस 2026 के मुख्य अतिथि

गणतंत्र दिवस 2026 के मुख्य अतिथि यूरोपीय संघ (European Union) के शीर्ष नेता होंगे:

  • उर्सुला वॉन डेर लेयेन – यूरोपीय आयोग (European Commission) की अध्यक्ष
  • एंतोनियो कोस्टा – यूरोपीय परिषद (European Council) के अध्यक्ष

वे भारत–यूरोपीय संघ संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होंगे। इनके अलावा अन्य अंतरराष्ट्रीय नेताओं को भी इस अवसर पर आमंत्रित किया जाएगा।

गणतंत्र दिवस 2026 की थीम

गणतंत्र दिवस 2026 की मुख्य थीम ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा पर केंद्रित है।

इस अवसर पर 1923 के ऐतिहासिक ‘बंदे मातरम् एल्बम’ की चित्रकलाएँ कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित की जाएँगी। ये चित्र ‘वंदे मातरम्’ गीत के भावार्थ को दर्शाते हैं और भारत की स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आज एक सशक्त लोकतंत्र बनने तक की यात्रा को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं।

1923 के ऐतिहासिक ‘वंदे मातरम् एल्बम’ की पेंटिंग्स कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित की जाएंगी, जो भारत की स्वतंत्रता से लेकर लोकतंत्र तक की यात्रा को दर्शाएंगी।

लगभग 2,500 कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दो विचारों पर आधारित होंगी:

  • आज़ादी और राष्ट्रीय गौरव
  • विकास, शक्ति और आत्मनिर्भरता

गणतंत्र दिवस परेड 2026 – समय और कार्यक्रम

  • सुबह 9:30 बजे: प्रधानमंत्री नेशनल वॉर मेमोरियल पर श्रद्धांजलि देंगे
  • सुबह 10:30 बजे: गणतंत्र दिवस परेड कर्तव्य पथ पर शुरू होगी
  • अवधि: लगभग 90 मिनट

पूरे भारत और विदेश में लोग दूरदर्शन और सरकारी YouTube चैनलों पर परेड लाइव देख सकते हैं।

गणतंत्र दिवस का इतिहास

  • 1929 – लाहौर अधिवेशन: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज (पूर्ण स्वतंत्रता) की घोषणा की।
  • 1930–1947: स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया गया।
  • 1946 – संविधान सभा का गठन: भारत के संविधान के निर्माण के लिए संविधान सभा की स्थापना हुई।
  • 26 नवंबर 1949: भारत का संविधान अंगीकृत किया गया।
  • 26 जनवरी 1950: संविधान लागू हुआ, भारत एक गणराज्य बना और डॉ. राजेन्द्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति बने।
  • पहली गणतंत्र दिवस परेड: नई दिल्ली में आयोजित हुई, जिसने भारत के लोकतांत्रिक स्वरूप में परिवर्तन को प्रदर्शित किया।

लोकतंत्र में संविधान की भूमिका

भारतीय संविधान यह सुनिश्चित करता है कि:

  • भारत एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य है।
  • 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों को मताधिकार प्राप्त है।
  • मौलिक अधिकार जैसे—समानता का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, और भेदभाव से संरक्षण।
  • कानून का शासन (Rule of Law): कानून के समक्ष सभी समान हैं और सभी को कानून का पालन करना अनिवार्य है।
  • स्वतंत्र न्यायपालिका: नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है और सरकार के कार्यों की न्यायिक समीक्षा करती है।
  • सत्ता का पृथक्करण: विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संतुलन बनाकर सत्ता के दुरुपयोग को रोकता है।
  • संघीय व्यवस्था: केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन सुनिश्चित करती है।
  • कल्याणकारी दिशानिर्देश: सामाजिक और आर्थिक न्याय को बढ़ावा देते हैं।
  • स्थानीय लोकतंत्र: पंचायतों और नगरपालिकाओं को सशक्त बनाकर जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करता है।

गणतंत्र दिवस पर प्रदान किए जाने वाले पुरस्कार

गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान के लिए नागरिकों को सम्मानित करते हैं। प्रमुख पुरस्कार इस प्रकार हैं:

नागरिक पुरस्कार

  • भारत रत्न – भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान
  • पद्म विभूषण – असाधारण एवं विशिष्ट सेवा के लिए
  • पद्म भूषण – विशिष्ट सेवा के लिए
  • पद्म श्री – उल्लेखनीय योगदान के लिए

वीरता एवं सेवा पुरस्कार

  • राष्ट्रपति पुलिस पदक – विशिष्ट सेवा के लिए
  • पुलिस पदक (वीरता) – साहस और बहादुरी के लिए
  • अग्निशमन सेवा एवं होम गार्ड्स पुरस्कार – वीरता एवं साहस के लिए

अन्य पुरस्कार

  • जीवन रक्षा पदक – जीवन बचाने के साहसिक कार्यों के लिए
  • प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार – बच्चों द्वारा दिखाई गई वीरता, प्रतिभा और उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए

गणतंत्र दिवस 2026 का महत्व

गणतंत्र दिवस 2026 भारत के लोकतंत्र, संविधान और एकता की याद दिलाता है। यह निम्नलिखित उपलब्धियों और मूल्यों का उत्सव है:

  • संविधान के प्रवर्तन की वर्षगांठ (26 जनवरी 1950)
  • लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक कर्तव्यों का सम्मान
  • विविधता में एकता और राष्ट्रीय एकीकरण
  • भारत की रक्षा क्षमता और सांस्कृतिक उपलब्धियाँ
  • मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों के पालन के लिए प्रेरणा

AIFF ने पूर्व भारतीय डिफेंडर इलियास पाशा के निधन पर शोक व्यक्त किया

भारत और ईस्ट बंगाल के पूर्व दिग्गज फुटबॉलर इलियास पाशा का 22 जनवरी 2026 को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। अपने शांत, अनुशासित और सटीक खेल के लिए प्रसिद्ध पाशा कर्नाटक के बेहतरीन फुटबॉलरों में गिने जाते थे। उनके निधन से भारतीय फुटबॉल जगत में शोक की लहर है। वे अपने पीछे पत्नी, दो बेटियां और दो बेटे छोड़ गए हैं।

प्रारंभिक जीवन और फुटबॉल की शुरुआत

इलियास पाशा का जन्म और पालन-पोषण उत्तर बेंगलुरु के व्यालिकावल क्षेत्र में हुआ। उन्होंने अपने फुटबॉल करियर की शुरुआत विनायका फुटबॉल क्लब से की, जहां एक युवा डिफेंडर के रूप में उनकी प्रतिभा जल्द ही सामने आई। उनकी मेहनत और खेल कौशल ने उन्हें 1980 के दशक के मध्य में इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज़ (ITI) क्लब तक पहुंचाया, जिससे उनके राष्ट्रीय स्तर के करियर की नींव पड़ी।

राष्ट्रीय फुटबॉल में उभार

पाशा ने 27 जनवरी, 1987 को कोझिकोड में हुए नेहरू कप में बुल्गारिया के खिलाफ भारत के लिए डेब्यू किया था। उन्होंने आठ इंटरनेशनल मैच खेले, जिसमें दो नेहरू कप (1987 और 1991), 1991 के SAF गेम्स और 1992 के एशियन कप क्वालिफायर शामिल हैं। उनके शांत और संयमित डिफेंस ने उन्हें नेशनल टीम के लिए एक भरोसेमंद खिलाड़ी बना दिया था।

संतोष ट्रॉफी और घरेलू उपलब्धियां

कर्नाटक का प्रतिनिधित्व करते हुए, पाशा नियमित रूप से संतोष ट्रॉफी में खेलते थे, और कोलकाता (1987), क्विलोन (1988), और गुवाहाटी (1989) में टूर्नामेंट में हिस्सा लिया। गुवाहाटी में उनके शानदार प्रदर्शन की वजह से कर्नाटक फाइनल के करीब पहुंच गया था। बाद में, उन्होंने 1993 और 1995 में बंगाल के साथ दो संतोष ट्रॉफी खिताब जीते।

क्लब करियर की झलक

पाशा मोहम्मडन स्पोर्टिंग के लिए खेले, और 1989 में उन्होंने सैत नागजी ट्रॉफी और निज़ाम गोल्ड कप जीता। इसके बाद वह ईस्ट बंगाल में शामिल हो गए, जहाँ 1990 के दशक में उन्होंने अपने करियर का सबसे अच्छा समय बिताया। उन्होंने 1993-94 सीज़न में टीम की कप्तानी की और क्लब की कई सफलताओं में उनकी अहम भूमिका थी।

ईस्ट बंगाल के साथ प्रमुख उपलब्धियां

  • कलकत्ता फुटबॉल लीग: 1991, 1993, 1995, 1996, 1998
  • आईएफए शील्ड: 1990, 1991, 1994, 1995, 1997
  • डूरंड कप: 1990, 1991, 1993, 1995

अन्य ट्रॉफियां: फेडरेशन कप, रोवर्स कप, वाई-वाई कप, एयरलाइंस ट्रॉफी, बोर्डोलोई ट्रॉफी, कलिंगा कप, मैकडॉवेल ट्रॉफी, सुपर कप

वे 1990 की ट्रिपल क्राउन विजेता ईस्ट बंगाल टीम का हिस्सा थे और 1993 में क्लब को उसकी पहली अंतरराष्ट्रीय ट्रॉफी वाई-वाई कप दिलाने वाली टीम में भी शामिल रहे।
1993-94 एशियन कप विनर्स कप में अल ज़ावरा एससी के खिलाफ 6-2 की ऐतिहासिक जीत में उन्होंने कप्तानी की।

व्यक्तित्व और विरासत

दाएं विंग-बैक के रूप में इलियास पाशा अपने अनुशासन, शांति और खेल को पढ़ने की क्षमता के लिए जाने जाते थे। वे गोलकीपर के लिए भरोसेमंद ढाल साबित होते थे।
पूर्व साथी खिलाड़ी फल्गुनी दत्ता ने उन्हें एक मार्गदर्शक और प्रेरक व्यक्तित्व बताया, जो बिना किसी ईर्ष्या के युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे। 2012 में, ईस्ट बंगाल क्लब ने उन्हें उनके योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया।

श्रद्धांजलि और अंतिम विदाई

  • अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) और पूरे भारतीय फुटबॉल जगत ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
  • ईस्ट बंगाल क्लब ने सम्मान स्वरूप क्लब का झंडा आधा झुका दिया और अंडर-16 टीम ने एक मिनट का मौन रखा।
  • बेंगलुरु स्थित उनके निवास पर उन्हें अंतिम विदाई दी गई, जहां पूर्व खिलाड़ी और अधिकारी उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

इलियास पाशा की विरासत

इलियास पाशा को एक विश्वसनीय डिफेंडर, अनुशासित खिलाड़ी और प्रेरणादायक मार्गदर्शक के रूप में हमेशा याद किया जाएगा। उनका जीवन और योगदान आने वाली पीढ़ियों के फुटबॉल खिलाड़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

ओडिशा ने गुटखा, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों पर पूरी तरह बैन लगा दिया

ओडिशा राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने गुटखा, पान मसाला तथा तंबाकू या निकोटीन युक्त सभी उत्पादों पर सख्त प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इस नई अधिसूचना का उद्देश्य इन उत्पादों के दुरुपयोग को रोकना और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह प्रतिबंध निर्माण, बिक्री, भंडारण, परिवहन और वितरण—सभी पर लागू होगा। इसके साथ ही ओडिशा सुप्रीम कोर्ट के देशव्यापी निर्देशों के पूर्ण अनुपालन वाला राज्य बन गया है।

निर्माण और बिक्री पर पूर्ण रोक

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार—

  • गुटखा, पान मसाला तथा तंबाकू/निकोटीन युक्त उत्पादों का
  • निर्माण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित होगी।
  • यह प्रतिबंध पैकेज्ड और अनपैकेज्ड दोनों प्रकार के उत्पादों पर लागू होगा।

अलग-अलग बेचे जाने वाले लेकिन आपस में मिलाकर सेवन किए जाने वाले उत्पाद भी प्रतिबंध के दायरे में आएंगे।

पहले से मौजूद प्रतिबंध और नए प्रावधान

  • ओडिशा में वर्ष 2013 से तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लागू था।
  • हालाँकि, नई अधिसूचना में पहले मौजूद अस्पष्टताओं को दूर कर राज्यभर में सख्त और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है।
  • स्वास्थ्य सचिव अस्वथी एस. के अनुसार, यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप गुटखा और पान मसाला पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

सभी चबाने योग्य उत्पादों पर लागू

यह प्रतिबंध—

  • सभी चबाने योग्य खाद्य उत्पादों पर लागू होगा,
  • चाहे वे सुगंधित हों या बिना सुगंध के,
  • फ्लेवरयुक्त हों या अन्य पदार्थों के साथ मिश्रित हों।

किसी भी नाम या रूप में बेचे जाने वाले उत्पादों को शामिल कर लिया गया है, ताकि कानून से बचने के रास्ते बंद किए जा सकें।

तंबाकू उत्पादों पर नए कर नियम

1 फरवरी 2026 से, केंद्र सरकार तंबाकू और पान मसाला उत्पादों पर अधिक कर लगाएगी—

  • पान मसाला, सिगरेट आदि पर 40% GST
  • बीड़ी पर 18% GST
  • इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर (Cess) तथा अतिरिक्त उत्पाद शुल्क भी लगाया जाएगा।

वित्त मंत्रालय ने चबाने वाले तंबाकू, जर्दा सुगंधित तंबाकू और गुटखा पैकिंग मशीनों से संबंधित नए नियम भी अधिसूचित किए हैं, जो 1 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगे।
इस तिथि के बाद वर्तमान GST मुआवजा उपकर (Compensation Cess) समाप्त हो जाएगा।

यह प्रतिबंध क्यों महत्वपूर्ण है?

यह व्यापक प्रतिबंध—

  • तंबाकू सेवन में कमी लाने,
  • जनस्वास्थ्य की रक्षा करने,
  • और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों के अनुरूप सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने में सहायक होगा।

गुटखा, पान मसाला और तंबाकू के सभी रूपों को लक्षित कर, ओडिशा राज्य ने स्वास्थ्य संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए एक मजबूत कदम उठाया है।

लखनऊ बना यूपी का पहला ‘जीरो फ्रेश वेस्ट डंप’ शहर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ बहुत तेजी से विकसित हो रहा है। लगभग 40 लाख की आबादी और करीब 7.5 लाख दुकानें, कार्यालय एवं प्रतिष्ठान होने के कारण रोज़ाना कचरे का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। इस चुनौती से निपटने के लिए लखनऊ नगर निगम (LMC) ने एक आधुनिक एवं वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली अपनाई है, जिसका उद्देश्य स्वच्छता, पुनर्चक्रण और पर्यावरण सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

शिवरी में तीसरे कचरा प्रसंस्करण संयंत्र का उद्घाटन

  • लखनऊ में हाल ही में शिवरी साइट पर तीसरे ताज़ा कचरा प्रसंस्करण संयंत्र की शुरुआत की गई है। इसके साथ ही लखनऊ उत्तर प्रदेश का पहला शहर बन गया है, जहाँ 100% ताज़े नगर निगम कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जा रहा है।
  • इस उपलब्धि के कारण लखनऊ को ‘ज़ीरो फ्रेश वेस्ट डंप’ शहर का दर्जा मिला है, यानी अब नया कचरा खुले में नहीं डाला जाता।

शहर की उच्च कचरा प्रसंस्करण क्षमता

  • नया शिवरी संयंत्र प्रतिदिन 700 मीट्रिक टन कचरा प्रसंस्करित कर सकता है। पहले से मौजूद दो संयंत्रों के साथ मिलकर अब लखनऊ की कुल कचरा प्रसंस्करण क्षमता 2,100 मीट्रिक टन प्रतिदिन हो गई है।
  • यह क्षमता शहर में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले कचरे के बराबर है, जिससे सभी अपशिष्ट का पर्यावरण-सुरक्षित उपचार सुनिश्चित होता है।

लखनऊ में दैनिक कचरे का प्रबंधन कैसे होता है?

लखनऊ में प्रतिदिन लगभग 2,000 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है। इसके प्रबंधन के लिए LMC ने भूमि ग्रीन एनर्जी के साथ साझेदारी की है, जो तीन आधुनिक कचरा प्रसंस्करण संयंत्रों का संचालन करती है।
कचरे को दो भागों में अलग किया जाता है—

  • जैविक कचरा (55%)
  • अजैविक कचरा (45%)

जैविक कचरे से खाद और बायोगैस बनाई जाती है, जबकि अजैविक कचरे को पुनर्चक्रण या RDF (Refuse Derived Fuel) में बदला जाता है, जिसका उपयोग सीमेंट और कागज उद्योगों में होता है।
शहर में घर-घर कचरा संग्रहण की दक्षता 96.53% तक पहुँच चुकी है और 70% से अधिक कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण हो रहा है।

पुराने (लीगेसी) कचरे का वैज्ञानिक निपटान

लखनऊ में पहले लगभग 18.5 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा जमा था। इनमें से 12.86 लाख मीट्रिक टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जा चुका है।
प्रसंस्कृत सामग्री का पर्यावरण-अनुकूल पुन: उपयोग किया गया है, जिससे खुले में कचरा डालने की आवश्यकता समाप्त हो गई है।

कचरे से बने उपयोगी उत्पाद

इस प्रणाली से कई उपयोगी उत्पाद तैयार हुए हैं—

  • 2.27 लाख मीट्रिक टन RDF देशभर के उद्योगों में सह-प्रसंस्करण के लिए भेजा गया
  • 4.38 लाख मीट्रिक टन मोटा कचरा
  • 0.59 लाख मीट्रिक टन बायो-सॉयल
  • 2.35 लाख मीट्रिक टन निर्माण एवं विध्वंस कचरा

इन सभी का उपयोग निचले क्षेत्रों को भरने और अवसंरचना विकास में किया जा रहा है।

कचरा प्रबंधन से भूमि की पुनर्प्राप्ति

पुराने कचरे के निरंतर प्रसंस्करण से 25 एकड़ से अधिक भूमि पुनः प्राप्त की गई है। इस भूमि पर अब एक आधुनिक अपशिष्ट उपचार परिसर विकसित किया गया है, जिसमें—

  • विंडरो पैड
  • आंतरिक सड़कें
  • शेड
  • वेट ब्रिज
  • अन्य आवश्यक सुविधाएँ मौजूद हैं।

शिवरी में प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्र

  • कचरे के बेहतर उपयोग के लिए LMC शिवरी में 15 मेगावाट का वेस्ट-टू-एनर्जी (WtE) संयंत्र स्थापित करने की योजना बना रहा है।
  • यह संयंत्र प्रतिदिन 1,000–1,200 मीट्रिक टन RDF का उपयोग कर बिजली उत्पन्न करेगा। इससे सीमेंट संयंत्रों तक RDF ले जाने की लागत और लंबी दूरी (लगभग 500 किमी) दोनों कम होंगी।

सतत शहरी विकास का आदर्श मॉडल

  • लखनऊ का अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के सिद्धांतों पर आधारित है, जहाँ कचरे को संसाधन के रूप में देखा जाता है।
  • डंपिंग में कमी, पुनर्चक्रण में वृद्धि और ऊर्जा उत्पादन के माध्यम से शहर पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
  • लखनऊ नगर निगम के ये प्रयास भारत और विदेशों के अन्य शहरों के लिए एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करते हैं कि वैज्ञानिक योजना और मजबूत क्रियान्वयन से शहरी अपशिष्ट प्रबंधन को सफलतापूर्वक बदला जा सकता है।

राजस्थान का अलवर 81 वन्यजीव प्रजातियों के साथ एक बड़ा बायोलॉजिकल पार्क विकसित करेगा

राजस्थान अपने वन्यजीव पर्यटन में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ने जा रहा है। अलवर जिले के कटी घाटी क्षेत्र में एक नया जैविक पार्क (Biological Park) विकसित किया जाएगा। यह पार्क वन्यजीव संरक्षण, पशु देखभाल और पर्यटन—तीनों को एक ही स्थान पर जोड़ने वाला होगा। इसके पूरा होने पर यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का अपनी तरह का पहला जैविक पार्क बन जाएगा, जिसमें सफारी, रेस्क्यू सेंटर और अत्याधुनिक पशु चिकित्सालय की सुविधाएँ होंगी।

अलवर जैविक पार्क का स्थान और क्षेत्रफल

प्रस्तावित जैविक पार्क का निर्माण अलवर जिले में कटी घाटी और जैसमंद के बीच किया जाएगा। यह लगभग 100 हेक्टेयर भूमि में फैला होगा। इसमें से करीब 30 प्रतिशत क्षेत्र चिड़ियाघर के रूप में विकसित किया जाएगा, जबकि शेष 70 प्रतिशत क्षेत्र हरित क्षेत्र रहेगा, ताकि प्राकृतिक वातावरण बना रहे।

400 से अधिक वन्यजीवों का होगा घर

अलवर जैविक पार्क में 81 विभिन्न प्रजातियों के 400 से अधिक वन्यजीव रखे जाएंगे। यहाँ पर्यटक शेर, चीता और भारत में पाई जाने वाली विभिन्न प्रजातियों के बाघों को देख सकेंगे। इसके अलावा अफ्रीका से लाए गए जिराफ भी यहाँ का प्रमुख आकर्षण होंगे, जो इस पार्क को क्षेत्र में विशिष्ट बनाएंगे।

एक ही स्थान पर शेर, बाघ और शाकाहारी सफारी

इस पार्क की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि यहाँ एक ही परिसर में कई प्रकार की सफारी उपलब्ध होंगी। पर्यटक शेर सफारी, बाघ सफारी और शाकाहारी जीवों की सफारी का आनंद ले सकेंगे। NCR क्षेत्र में इस प्रकार की सुविधा पहली बार देखने को मिलेगी, जिससे बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने की संभावना है।

हाई-टेक पशु रेस्क्यू सेंटर

जैविक पार्क के भीतर एक आधुनिक पशु रेस्क्यू सेंटर भी बनाया जाएगा। इसे गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान में स्थित प्रसिद्ध रेस्क्यू सुविधा की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। वन विभाग की टीम पहले ही गिर जाकर वहाँ की रेस्क्यू तकनीक, सामुदायिक सहभागिता और पशु देखभाल प्रणाली का अध्ययन कर चुकी है।

वन्यजीवों के लिए आधुनिक पशु चिकित्सालय

परियोजना में एक पूरी तरह सुसज्जित पशु चिकित्सालय भी शामिल है। इसमें घायल, बीमार और बचाए गए वन्यजीवों के उपचार के लिए आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और वन विभाग के अधिकारियों की स्थायी तैनाती की जाएगी।

तितली पार्क से बढ़ेगी प्राकृतिक सुंदरता

बड़े वन्यजीवों के साथ-साथ पार्क में एक तितली पार्क भी विकसित किया जाएगा। इसमें विभिन्न प्रजातियों की तितलियाँ प्रदर्शित की जाएँगी, जो पार्क की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ शैक्षणिक महत्व भी रखेगा। यह विशेष रूप से बच्चों, छात्रों और प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करेगा।

देशभर के चिड़ियाघरों से लाए जाएँगे जानवर

पार्क को आबाद करने के लिए वन विभाग ने देश के 25 चिड़ियाघरों से संपर्क किया है। वहाँ से ऐसे जानवरों की जानकारी जुटाई जा रही है, जिन्हें सुरक्षित रूप से अलवर लाया जा सके। आवश्यक अनुमतियाँ मिलने के बाद चरणबद्ध तरीके से स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

स्वीकृति प्रक्रिया और परियोजना की समय-सीमा

वन विभाग द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पहले ही तैयार कर ली गई है। निर्माण कार्य केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से स्वीकृति मिलने के बाद शुरू किया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।

पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

अलवर जैविक पार्क से वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिलने के साथ-साथ राजस्थान के पर्यटन को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। आधुनिक सुविधाओं, विविध प्रजातियों और अनेक सफारी विकल्पों के साथ यह पार्क पर्यटकों, शोधकर्ताओं और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र बनेगा।

गणतंत्र दिवस 2026: गणतंत्र दिवस पर छोटे और लंबे भाषण

गणतंत्र दिवस भारत के सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्वों में से एक है, जिसे हर वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में देश अपना 77वाँ गणतंत्र दिवस गर्व के साथ मनाएगा। यह दिन हमें भारतीय संविधान को अपनाने तथा न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूल मूल्यों की याद दिलाता है। इस अवसर पर स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में स्वतंत्रता सेनानियों, सैनिकों और भारत की लोकतांत्रिक भावना को सम्मान देने के लिए भाषणों का आयोजन किया जाता है। इन समारोहों में लघु और दीर्घ दोनों प्रकार के भाषणों की विशेष भूमिका होती है।

गणतंत्र दिवस 2026

गणतंत्र दिवस 2026 को भारत में 26 जनवरी को 77वें गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाएगा। यह विशेष दिन 1950 में भारतीय संविधान को अपनाए जाने की स्मृति में मनाया जाता है। यह दिवस नागरिकों को लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और समानता का संदेश देता है। देशभर में लोग भव्य परेड, ध्वजारोहण, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भाषणों के माध्यम से स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और राष्ट्रीय गौरव को सुदृढ़ करेंगे।

गणतंत्र दिवस 2026 पर छोटा भाषण

माननीय शिक्षकगण, मेरे प्रिय मित्रों और मेरे सभी देशवासियों को सादर नमस्कार।

आज हम यहाँ भारत का 77वाँ गणतंत्र दिवस मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं। इस वर्ष का यह आयोजन और भी विशेष है, क्योंकि इसकी थीम “वंदे मातरम् के 150 वर्ष” है।

वंदे मातरम्, जिसे बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था, केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम का सशक्त प्रतीक है। पिछले 150 वर्षों से इन शब्दों ने लाखों भारतीयों को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और राष्ट्र के सम्मान के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी है। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहस और आशा के साथ वंदे मातरम् का गान किया।

गणतंत्र दिवस हमें यह याद दिलाता है कि भारत अपने संविधान द्वारा शासित है, जो हमें अधिकार देने के साथ-साथ कर्तव्यों का भी बोध कराता है। यह हमें एकता, समानता और सभी के प्रति सम्मान जैसे मूल्यों की शिक्षा देता है। जिस प्रकार वंदे मातरम् हमें भावनात्मक रूप से अपनी मातृभूमि से जोड़ता है, उसी प्रकार संविधान हमें एक जिम्मेदार लोकतांत्रिक नागरिक के रूप में जोड़ता है।

इस गौरवपूर्ण अवसर पर, आइए हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को स्मरण करें और देश की प्रगति के लिए ईमानदारी से कार्य करने का संकल्प लें। हम अपनी संस्कृति का सम्मान करें, अपनी एकता की रक्षा करें और समाज में सकारात्मक योगदान दें।

वंदे मातरम् के 150 वर्षों का उत्सव मनाते हुए, आइए इसके आदर्शों को अपने हृदय और कर्मों में जीवित रखें।

जय हिंद!
धन्यवाद।

गणतंत्र दिवस 2026 पर लंबा भाषण

माननीय मुख्य अतिथि महोदय, सम्मानित शिक्षकगण और मेरे प्रिय मित्रों को सादर नमस्कार।

आज हम सभी यहाँ भारत का 77वाँ गणतंत्र दिवस बड़े गर्व और हर्ष के साथ मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं। 26 जनवरी 1950 को हमारे देश ने भारतीय संविधान को अपनाया और एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बना। यह ऐतिहासिक दिन हमें उन मूल्यों की याद दिलाता है, जिन पर हमारा राष्ट्र आधारित है—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व।

गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय अवकाश नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्रता के लंबे संघर्ष को स्मरण करने का दिन भी है। महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और अनेक वीर नेताओं ने अपने सुख-चैन का त्याग किया, यहाँ तक कि अपने प्राणों की आहुति दी, ताकि हम एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक भारत में जीवन जी सकें।
डॉ. बी. आर. अंबेडकर, जो संविधान के प्रमुख शिल्पकार थे, ने हमें एक ऐसा सशक्त संविधान दिया, जो हमारे अधिकारों की रक्षा करता है और हमें कर्तव्यों का मार्गदर्शन देता है।

प्रत्येक वर्ष कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य गणतंत्र दिवस परेड भारत की शक्ति, एकता और समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करती है। यह रक्षा, विज्ञान, शिक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में देश की प्रगति को दर्शाती है। साथ ही, यह हमें यह भी याद दिलाती है कि भारत की वास्तविक शक्ति उसके नागरिकों में निहित है, जो विभिन्न धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों से होते हुए भी एक राष्ट्र के रूप में एकजुट हैं।

भारत के नागरिक होने के नाते हमें यह समझना चाहिए कि अधिकारों के साथ जिम्मेदारियाँ भी आती हैं। हमें अपने संविधान का सम्मान करना चाहिए, कानून का पालन करना चाहिए, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करनी चाहिए और देश के विकास के लिए ईमानदारी से कार्य करना चाहिए। आज का युवा वर्ग शिक्षा, नवाचार और अच्छे मूल्यों के माध्यम से भारत के भविष्य को आकार देने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

गणतंत्र दिवस 2026 के इस गौरवपूर्ण अवसर पर, आइए हम एकजुट रहने, राष्ट्र का सम्मान करने और समाज में सकारात्मक योगदान देने की शपथ लें। मिलकर हम एक मजबूत, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील भारत का निर्माण करें।

जय हिंद! जय भारत!
धन्यवाद।

सिंगापुर की ‘ट्री लेडी’ के नाम से मशहूर कीर्तिदा मेकानी का निधन

भारत में जन्मी और सिंगापुर को कर्मभूमि बनाने वाली प्रसिद्ध पर्यावरणविद कीर्तिदा मेकानी का 19 जनवरी को 66 वर्ष की आयु में हृदयाघात से निधन हो गया। वे “ट्री लेडी” के नाम से व्यापक रूप से जानी जाती थीं। पिछले तीन दशकों से अधिक समय तक उन्होंने प्रकृति संरक्षण, सामुदायिक कल्याण और सांस्कृतिक विकास के लिए शांत लेकिन प्रभावशाली कार्य किया। उनके प्रयासों ने सिंगापुर के स्कूलों, उद्यानों, कला संस्थानों और हरित परिदृश्यों को गहराई से प्रभावित किया।

प्रारंभिक जीवन और प्रकृति से जुड़ाव

  • कीर्तिदा मेकानी का पालन-पोषण कर्नाटक (भारत) के एक पारिवारिक खेत में हुआ। बचपन में उन्होंने प्रकृति को करीब से समझा—जैसे जैविक कचरे का खाद (कम्पोस्ट) बनकर उपजाऊ मिट्टी में बदलना।
  • इन सरल अनुभवों ने उनके भीतर पर्यावरण के प्रति गहरा सम्मान पैदा किया और यह विश्वास दिया कि प्रकृति मानव जीवन को संतुलित और बेहतर दिशा दे सकती है।

सिंगापुर की यात्रा

वर्ष 1990 में कीर्तिदा अपने पति भरत मेकानी के साथ सिंगापुर चली गईं। हवाई अड्डे से शहर तक की यात्रा के दौरान दिखाई देने वाली हरियाली ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। यही पहला अनुभव आगे चलकर सिंगापुर को और अधिक हरित व टिकाऊ बनाने की उनकी प्रेरणा बना।

पर्यावरण जागरूकता में नेतृत्व

  • वर्ष 1993 में कीर्तिदा सिंगापुर एनवायरनमेंट काउंसिल की पहली कार्यकारी निदेशक बनीं।
  • अपने कार्यकाल में उन्होंने 50 से अधिक पर्यावरण संरक्षण एवं शिक्षा कार्यक्रमों की शुरुआत की, जिनसे छात्र, उद्योग और स्थानीय समुदाय जुड़े और दैनिक जीवन में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई।

प्रसिद्ध ‘प्लांट-ए-ट्री’ कार्यक्रम

  • उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक था 2007 में नेशनल पार्क्स बोर्ड के साथ शुरू किया गया ‘प्लांट-ए-ट्री’ कार्यक्रम।
  • शुरुआत में लोगों को संदेह था कि आम नागरिक इसमें भाग लेंगे या नहीं, लेकिन कीर्तिदा को विश्वास था।
    आज तक इस कार्यक्रम के तहत—
  • 76,000 से अधिक पेड़ लगाए जा चुके हैं,
  • अनेक देशज (नेटिव) प्रजातियाँ शामिल की गईं,
  • और हजारों स्वयंसेवक जुड़े।

यह सिंगापुर का एक प्रमुख जन-आधारित हरित आंदोलन बन चुका है।

सामुदायिक उद्यानों का समर्थन

कीर्तिदा ने Community in Bloom कार्यक्रम में राजदूत के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आज सिंगापुर में—

  • हजारों सामुदायिक उद्यान,
  • और दसियों हजार स्वयंसेवक

प्रकृति से जुड़कर सामूहिक रूप से कार्य कर रहे हैं, जिससे सामाजिक जुड़ाव भी मजबूत हुआ है।

शिक्षा और नवाचार में योगदान

  • वे United World College of South East Asia Foundation की ट्रस्टी रहीं, जहाँ छात्रों द्वारा संचालित वर्षावन पुनर्स्थापन परियोजनाओं को समर्थन दिया।
  • वर्ष 2016 में उन्होंने Biomimicry Singapore Network की सह-स्थापना की, जिसका उद्देश्य प्रकृति से सीख लेकर टिकाऊ नवाचार को बढ़ावा देना था।

कला और संस्कृति में योगदान

पर्यावरण के साथ-साथ किर्तिदा कला जगत में भी सक्रिय रहीं।
वे—

  • LASALLE College of the Arts,
  • और Singapore Indian Fine Arts Society के बोर्ड की सदस्य रहीं।

एक कुशल सिरेमिक कलाकार के रूप में उन्होंने अपनी कला प्रदर्शित कर यह दिखाया कि रचनात्मकता और प्रकृति-संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।

वैश्विक संरक्षण प्रयास

किर्तिदा ने कई अंतरराष्ट्रीय संरक्षण संगठनों के साथ काम किया।
वे WWF Singapore के बोर्ड में रहीं और—

  • पौध संरक्षण,
  • समुद्री जैवविविधता,
  • तथा कुसु द्वीप के आसपास प्रवाल भित्ति (कोरल) पुनर्स्थापन
    जैसी परियोजनाओं का समर्थन किया।

पुरस्कार और सम्मान

उनकी आजीवन सेवाओं के लिए—

  • 2015 में उन्हें सिंगापुर का President’s Award for the Environment,
  • और 2024 में Singapore Women’s Hall of Fame में Champion of the Environment के रूप में शामिल किया गया।

कीर्तिदा मेकानी की स्मृति

  • जो लोग उन्हें जानते थे, वे उन्हें विनम्र, संवेदनशील और करुणामयी व्यक्तित्व के रूप में याद करते हैं।
  • उनके पति भरत मेकानी के अनुसार, वे उद्देश्य और करुणा से भरा जीवन जीती थीं।
  • आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके लगाए पेड़, संजोए गए उद्यान और प्रेरित लोग उनकी उपस्थिति को जीवित रखते हैं।

कीर्तिदा मेकानी की विरासत

  • कीर्तिदा मेकानी का जीवन यह सिखाता है कि एक व्यक्ति भी प्रकृति और समाज के प्रति प्रेम के साथ बड़ा बदलाव ला सकता है।
  • उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को सतत जीवन-शैली अपनाने और धरती की रक्षा करने के लिए प्रेरित करती रहेगी।

टाटा ग्रुप महाराष्ट्र की AI इनोवेशन सिटी में 11 बिलियन डॉलर का निवेश करेगा

भारत के कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उन्नत प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में एक बड़ा कदम उठने जा रहा है। टाटा समूह ने महाराष्ट्र में एक विशाल AI इनोवेशन सिटी विकसित करने के लिए 11 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की है। यह परियोजना नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास रणनीतिक रूप से स्थित होगी।

क्यों चर्चा में?

टाटा समूह ने महाराष्ट्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर से जुड़ी सेवाओं पर केंद्रित एक विश्वस्तरीय इनोवेशन सिटी स्थापित करने के लिए 11 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है।

टाटा समूह की AI इनोवेशन सिटी: प्रमुख बिंदु

प्रस्तावित इनोवेशन सिटी भारत को अगली पीढ़ी की तकनीकों में अग्रणी बनाने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है।

  • 11 अरब डॉलर का प्रस्तावित निवेश
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर सेवाओं पर फोकस
  • बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर अवसंरचना
  • वैश्विक स्तर का नवाचार और तकनीकी सेवा केंद्र बनने की परिकल्पना

यह परियोजना भारत के डिजिटल और तकनीकी परिवर्तन के प्रति टाटा समूह की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

नवी मुंबई एयरपोर्ट के पास रणनीतिक स्थान

  • इस इनोवेशन सिटी का स्थान इसे विशेष महत्व देता है।
  • नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट स्थित
  • हवाई अड्डा अडानी समूह द्वारा विकसित एक प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजना
  • वैश्विक कनेक्टिविटी और हाई-टेक उद्योग के बीच मजबूत तालमेल
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियों, वैश्विक प्रतिभाओं और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने में सहायक

महाराष्ट्र की आर्थिक पृष्ठभूमि

  • महाराष्ट्र भारत की अर्थव्यवस्था में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
  • भारत के GDP में 10% से अधिक योगदान
  • मुंबई में देश के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज, बड़े कॉरपोरेट समूह और फिल्म उद्योग
  • आर्थिक मजबूती के बावजूद बेरोजगारी की चुनौती
  • इनोवेशन सिटी से रोजगार सृजन, निवेश वृद्धि और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त की उम्मीद

सरकारी समर्थन और निवेशकों की रुचि

  • इस परियोजना को मजबूत राजनीतिक समर्थन प्राप्त है।
  • देवेंद्र फडणवीस के अनुसार अंतरराष्ट्रीय निवेशक गंभीर रुचि दिखा रहे हैं
  • घोषणा दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान की गई
  • महाराष्ट्र के व्यापक बुनियादी ढांचा और आर्थिक सुधार एजेंडे से जुड़ी पहल
  • सरकारी समर्थन से घरेलू और वैश्विक निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा

पराक्रम दिवस 2026: नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती

पराक्रम दिवस 2026 भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की स्मृति और सम्मान में 23 जनवरी 2026 (शुक्रवार) को पूरे देश में मनाया जाएगा। यह दिवस उनके अदम्य साहस, दृढ़ नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण को याद करने का अवसर है। पराक्रम दिवस का उद्देश्य विशेष रूप से छात्रों और युवाओं को निर्भीक, अनुशासित और देशभक्त बनने के लिए प्रेरित करना है।

पराक्रम दिवस 2026

  • तिथि: 23 जनवरी 2026 (शुक्रवार)
  • अवसर: नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती
  • आयोजन: राष्ट्रव्यापी देशभक्ति कार्यक्रम, शैक्षणिक व सांस्कृतिक गतिविधियाँ

पराक्रम दिवस क्या है?

पराक्रम दिवस का अर्थ है “साहस का दिन”। इसे हर वर्ष 23 जनवरी को मनाया जाता है, जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिवस है। भारत सरकार ने इस दिन को उनकी वीरता, बलिदान और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को सम्मान देने के लिए घोषित किया है। यह दिवस संकल्प, दृढ़ता और देशभक्ति की शक्ति का स्मरण कराता है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस कौन थे?

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक, ओडिशा में हुआ था। वे एक मेधावी छात्र थे और इंग्लैंड में भारतीय सिविल सेवा (ICS) परीक्षा उत्तीर्ण की, परंतु देशसेवा के लिए उन्होंने यह प्रतिष्ठित पद त्याग दिया। बाद में वे आज़ाद हिंद फ़ौज (INA) के सर्वोच्च नेता बने और “दिल्ली चलो” का ओजस्वी नारा दिया। उनका जीवन आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करता है।

पराक्रम दिवस का इतिहास

भारत सरकार ने 19 जनवरी 2021 को नेताजी की 125वीं जयंती के अवसर पर 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। तब से यह दिवस प्रतिवर्ष नेताजी के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को सम्मानित करने के लिए मनाया जा रहा है।

पराक्रम दिवस 2026 क्यों मनाया जाता है?

पराक्रम दिवस 2026 का उद्देश्य नेताजी की निर्भीक भावना, अनुशासन और नेतृत्व को याद करना है। यह दिन नागरिकों को सत्य के लिए खड़े होने, राष्ट्रहित में परिश्रम करने और एकजुट रहने का संदेश देता है। विशेष रूप से युवाओं में साहस, ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी का भाव जागृत करता है।

भारत में पराक्रम दिवस कैसे मनाया जाता है?

देशभर में स्कूल, कॉलेज और संस्थान नेताजी के जीवन और आदर्शों पर आधारित कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
मुख्य गतिविधियाँ:

  • भाषण, निबंध लेखन, वाद-विवाद
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम और देशभक्ति प्रस्तुतियाँ
  • विशेष आयोजन कोलकाता, दिल्ली और कटक जैसे शहरों में

छात्रों और युवाओं के लिए संदेश

पराक्रम दिवस 2026 युवाओं को अनुशासन, आत्मविश्वास और कठोर परिश्रम का महत्व सिखाता है। नेताजी का जीवन बताता है कि राष्ट्र सर्वोपरि है, एकता में शक्ति है और कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं माननी चाहिए।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े रोचक तथ्य

  • जन्म: 23 जनवरी 1897, कटक (ओडिशा)
  • ICS परीक्षा उत्तीर्ण कर स्वतंत्रता संग्राम के लिए पद त्यागा
  • कांग्रेस अध्यक्ष: 1938 और 1939
  • फ़ॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना
  • आज़ाद हिंद फ़ौज का नेतृत्व; नारा — “दिल्ली चलो”
  • “जय हिंद” का प्रचलन, जो बाद में राष्ट्रीय अभिवादन बना
  • ब्रिटिश शासन द्वारा कई बार कारावास
  • 1941 में नाटकीय ढंग से नजरबंदी से पलायन
  • जर्मनी और जापान से अंतरराष्ट्रीय समर्थन की कोशिश
  • 1945 में विमान दुर्घटना में कथित मृत्यु आज भी रहस्य

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