गुजरात का अब तक का सबसे बड़ा बजट 2026-27: एआई, पर्यटन और ओलंपिक सपनों पर फोकस

गुजरात का बजट 2026-27 (Gujarat Budget 2026-27) 18 फरवरी 2026 को गांधीनगर विधानसभा में वित्त मंत्री कनु देसाई द्वारा प्रस्तुत किया गया। यह बजट ₹4,08,053 करोड़ के रिकॉर्ड परिव्यय के साथ राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा बजट है। सरकार ने वर्ष 2026 को “गुजरात पर्यटन वर्ष” घोषित करते हुए पर्यटन, एआई आधारित पुलिसिंग, ओलंपिक स्तर की खेल अवसंरचना, बस विस्तार, पुलिस आवास, हाईवे और स्वास्थ्य कवरेज पर विशेष जोर दिया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने वित्त मंत्री कनु देसाई द्वारा विधानसभा में पेश किए गए वर्ष 2026‑27 के बजट को विश्वास‑आधारित शासन और मानव‑केंद्रित आर्थिक ढांचे के विजन को साकार करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट सामाजिक सुरक्षा, मानव संसाधन विकास, ढांचागत सुविधाओं, आर्थिक विकास और ग्रीन ग्रोथ जैसे पांच स्तंभों पर आधारित है।

रिकॉर्ड ₹4.08 लाख करोड़ का प्रावधान

गुजरात बजट 2026-27 को सामाजिक सुरक्षा, मानव संसाधन विकास, बुनियादी ढांचा, आर्थिक विस्तार और हरित विकास जैसे पांच स्तंभों पर आधारित किया गया है। लगातार पांचवां बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने इसे केवल वार्षिक खर्च योजना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक विकास खाका बताया, जो तकनीक, पर्यटन और वैश्विक ब्रांडिंग के साथ राज्य को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।

गुजरात पर्यटन वर्ष 2026: विरासत और तीर्थ पर्यटन को बढ़ावा

  • गुजरात पर्यटन बजट 2026-27 में वर्ष 2026 को “गुजरात पर्यटन वर्ष” घोषित किया गया है और पर्यटन, तीर्थ, नागरिक उड्डयन तथा खेल के लिए ₹5,096 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
  • मुख्य आकर्षण के रूप में सोमनाथ मंदिर में विश्वस्तरीय बस पोर्ट के निर्माण के लिए ₹447 करोड़ आवंटित किए गए हैं, ताकि आगंतुकों की आवाजाही बेहतर हो और इसे वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सके।
  • इसके अतिरिक्त, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity) में सुविधाओं के उन्नयन के लिए ₹236 करोड़ निर्धारित किए गए हैं।
  • लोथल और धोलावीरा जैसे ऐतिहासिक स्थलों को भी वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
  • “गुजरात पर्यटन वर्ष” का उद्देश्य विरासत संरक्षण को रोजगार सृजन और आर्थिक विस्तार से जोड़ना है।

एआई आधारित पुलिसिंग और पुलिस आवास

  • गुजरात बजट 2026-27 में एआई आधारित पुलिसिंग की बड़ी पहल की गई है। ₹60 करोड़ की लागत से डेटा फ्यूजन सेंटर और एआई इन पुलिसिंग के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा, जिससे रियल-टाइम डेटा विश्लेषण और भविष्यवाणी आधारित कानून व्यवस्था संभव होगी।
  • साथ ही, अगले पांच वर्षों में 20,444 आधुनिक पुलिस आवासों के निर्माण के लिए ₹1,571 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिससे पुलिस कल्याण और कार्यकुशलता को मजबूती मिलेगी।

ओलंपिक के लिए तैयार अहमदाबाद और खेल बुनियादी ढांचा

अहमदाबाद को 2030 राष्ट्रमंडल खेलों से पहले “ओलंपिक रेडी सिटी” बनाने की योजना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल परिसर, स्टेडियम और सार्वजनिक परिवहन एकीकरण के लिए ₹1,278 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इससे गुजरात को वैश्विक खेल गंतव्य के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है।

परिवहन, हाईवे और हरित गतिशीलता

  • बजट में 2,463 नई तकनीकी उन्नत बसें शामिल करने का प्रस्ताव है, जिनमें 500 एसी इलेक्ट्रिक बसें और 500 मिनी बसें आदिवासी क्षेत्रों, छात्रों और औद्योगिक श्रमिकों के लिए होंगी। इसके लिए ₹1,286 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
  • साथ ही 1,155 किमी राज्य सड़कों को “गर्वी गुजरात हाई-स्पीड कॉरिडोर” के रूप में विकसित करने के लिए ₹800 करोड़ का प्रावधान है, जिससे लॉजिस्टिक्स दक्षता और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ेगी।

स्वास्थ्य कवरेज और सामाजिक सुरक्षा

गुजरात बजट 2026-27 में लगभग 6.4 लाख राज्य कर्मचारियों और पेंशनरों को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत ₹10 लाख तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। इससे जेब से होने वाले खर्च में कमी आएगी और परिवारों को वित्तीय सुरक्षा मिलेगी।

कुल मिलाकर, गुजरात बजट 2026-27 बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ मानव-केंद्रित कल्याण योजनाओं का संतुलित समावेश प्रस्तुत करता है, जो आने वाले दशक के लिए राज्य की विकास दिशा तय करता है।

जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक पल: 66 साल में पहली बार रणजी फाइनल

जम्मू और कश्मीर क्रिकेट टीम ने इतिहास रचते हुए पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में जगह बना ली है। कल्याणी में खेले गए रोमांचक सेमीफाइनल मुकाबले में जम्मू-कश्मीर ने बंगाल क्रिकेट टीम को छह विकेट से हराकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।

साधारण लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम को शुरुआती झटके लगे, लेकिन अब्दुल समद और वंशज शर्मा ने पारी को संभाला। पहली पारी में 82 रनों की अहम पारी खेलने वाले अब्दुल समद ने एक बार फिर निडर बल्लेबाजी करते हुए मैच का रुख बदल दिया, जबकि वंशज शर्मा ने शानदार सीधा छक्का लगाकर जीत पर मुहर लगा दी। यह जीत 66 वर्षों के लंबे इंतजार का अंत है और जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।

जम्मू-कश्मीर का पहला रणजी ट्रॉफी फाइनल: ऐतिहासिक उपलब्धि

  • 66 वर्षों में पहला रणजी ट्रॉफी फाइनल
  • बंगाल पर छह विकेट से जीत
  • कल्याणी मैदान पर हासिल की उपलब्धि
  • भारतीय घरेलू क्रिकेट में जम्मू-कश्मीर के उभार का प्रतीक

पिछले कुछ सत्रों में लगातार मजबूत प्रदर्शन के बाद यह सफलता टीम की मेहनत और निरंतर प्रगति का परिणाम है।

अब्दुल समद का मैच जिताऊ प्रदर्शन

अब्दुल समद ने दबाव की स्थिति में एक बार फिर खुद को साबित किया। उनकी आक्रामक और आत्मविश्वास भरी बल्लेबाजी ने टीम को मुश्किल हालात से बाहर निकाला और फाइनल का रास्ता प्रशस्त किया।

प्रदर्शन क्षेत्र योगदान
पहली पारी 85 गेंदों पर 82 रन
महत्वपूर्ण साझेदारी 143 रनों की साझेदारी
दूसरी पारी 27 गेंदों पर तेज़ 30 रन

समद के आक्रामक स्ट्रोकप्ले ने बंगाल के गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त कर दिया, विशेष रूप से आकाश दीप और शाहबाज अहमद को निशाना बनाया।

बंगाल की शुरुआती वापसी से बढ़ा रोमांच

हालांकि लक्ष्य छोटा था, लेकिन बंगाल क्रिकेट टीम ने जोरदार प्रतिरोध दिखाया।

  • तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने शुभम पुंडीर को आउट किया।
  • कप्तान पारस डोगरा केवल 9 रन बनाकर पवेलियन लौट गए।
  • जम्मू-कश्मीर का स्कोर 71/4 हो गया।

इन त्वरित विकेटों ने मैच का रुख कुछ समय के लिए बदल दिया और आसान दिख रही जीत में तनाव पैदा कर दिया।

जम्मू-कश्मीर का उभरता घरेलू सफर

जम्मू और कश्मीर क्रिकेट टीम की सफलता अचानक नहीं आई।

  • पिछले सत्र में मुंबई क्रिकेट टीम को मुंबई में हराया।
  • मध्य प्रदेश और दिल्ली के खिलाफ बाहर जीत दर्ज की।
  • क्वार्टरफाइनल में केरल के खिलाफ करीबी मुकाबले में जीत हासिल की।

इन प्रदर्शनों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जीतने की टीम की बढ़ती क्षमता और आत्मविश्वास को दर्शाया।

जम्मू-कश्मीर के लिए यह फाइनल क्यों खास है?

  • रणजी ट्रॉफी भारत की प्रमुख घरेलू रेड-बॉल प्रतियोगिता है, जिसे भविष्य के अंतरराष्ट्रीय सितारों की नर्सरी माना जाता है।
  • जम्मू-कश्मीर का अपने पहले रणजी फाइनल में पहुंचना भारतीय घरेलू क्रिकेट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। परंपरागत रूप से मुंबई और कर्नाटक जैसी टीमों के दबदबे वाले इस टूर्नामेंट में अब उभरती टीमें भी मजबूत चुनौती दे रही हैं।
  • जम्मू-कश्मीर की यह सफलता खिलाड़ी विकास, बेहतर एक्सपोज़र और दबाव में प्रदर्शन की क्षमता में सुधार को दर्शाती है, जो भारतीय घरेलू क्रिकेट के बदलते परिदृश्य का संकेत है।

मध्य प्रदेश बजट 2026-27: महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के लिए बड़ा बजट, बड़ा प्रभाव

मध्य प्रदेश का बजट 2026-27 18 फरवरी 2026 को विधानसभा में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा पेश किया गया। ₹4,38,317 करोड़ के विशाल परिव्यय वाला यह बजट महिलाओं के कल्याण, ग्रामीण विकास, युवा रोजगार और बुनियादी ढांचे पर केंद्रित है। मोहन यादव सरकार के लगातार तीसरे बजट में 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ कुंभ के लिए ₹3,600 करोड़ का प्रावधान भी किया गया है। हालांकि सत्र के दौरान विपक्ष ने बढ़ते राज्य ऋण पर चिंता जताई।

“GYANII” मॉडल पर आधारित बजट

  • बजट को “GYANII” मॉडल – गरीब कल्याण, युवा शक्ति, अन्नदाता, नारी शक्ति, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री – के तहत तैयार किया गया है। इन प्राथमिक क्षेत्रों के लिए लगभग ₹3 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं।
  • महिला सशक्तिकरण इस बजट की प्रमुख विशेषता है। महिलाओं के कल्याण हेतु ₹1,27,555 करोड़ निर्धारित किए गए हैं। साथ ही 5,700 कार्यरत महिला छात्रावासों के निर्माण की घोषणा की गई है, जो महिला-केंद्रित विकास दृष्टिकोण को मजबूत करता है।

लाड़ली बहना योजना को निरंतर समर्थन

  • बजट 2026-27 में लाड़ली बहना योजना के लिए ₹23,883 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को प्रति माह ₹1,500 की आर्थिक सहायता मिल रही है। 2023 में शुरुआत के बाद से अब तक ₹52,304 करोड़ वितरित किए जा चुके हैं।
  • इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों और उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को भी समर्थन दिया गया है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

सिंहस्थ कुंभ 2028 और धार्मिक पर्यटन

बजट में सिंहस्थ कुंभ 2028 के लिए ₹3,600 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो उज्जैन में आयोजित होगा। इस आयोजन से लाखों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, जिससे पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। सड़कों, स्वच्छता, भीड़ प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

ग्रामीण विकास, रोजगार और सौर ऊर्जा

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को ₹40,062 करोड़ आवंटित किए गए हैं। ग्रामीण रोजगार योजना के लिए ₹10,428 करोड़ और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लिए पीएम जनमन योजना के तहत ₹900 करोड़ का प्रावधान है।

सरकार ने 15,000 शिक्षकों की भर्ती और कक्षा 8 तक के सरकारी स्कूल छात्रों को मुफ्त टेट्रा पैक दूध देने की घोषणा की है। साथ ही 1 लाख किसानों को सोलर पंप दिए जाएंगे, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा और कृषि लागत में कमी आएगी।

बुनियादी ढांचा, जल आपूर्ति और बिना नए कर

सड़क मरम्मत के लिए ₹12,690 करोड़ और ग्रामीण जल आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु जल जीवन मिशन के लिए ₹4,454 करोड़ का प्रावधान किया गया है। श्रम विभाग को ₹1,335 करोड़ दिए गए हैं। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने स्पष्ट किया कि कोई नया कर नहीं लगाया जाएगा।

हालांकि विपक्ष ने बजट सत्र से पहले ₹5,600 करोड़ के ऋण लेने का आरोप लगाते हुए बढ़ते कर्ज पर सवाल उठाए। सरकार का कहना है कि यह बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत विजन के अनुरूप है।

मध्य प्रदेश से जुड़े प्रमुख तथ्य

  • राज्यपाल: मंगूभाई पटेल
  • मुख्यमंत्री: मोहन यादव
  • वित्त मंत्री: जगदीश देवड़ा
  • राजधानी: भोपाल
  • प्रमुख शहर: इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर

यह बजट महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के सशक्तिकरण के साथ राज्य के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

शिवाजी महाराज जयंती 2026: 19 फरवरी क्यों है गौरव, साहस और स्वराज्य का प्रतीक दिवस?

छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती वर्ष 2026 में 19 फरवरी (गुरुवार) को पूरे भारत में, विशेषकर महाराष्ट्र में, बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। यह दिन मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के साहस, अद्वितीय सैन्य कौशल, कुशल नेतृत्व और स्वराज्य (स्व-शासन) की उनकी महान दृष्टि को स्मरण करने का अवसर है। इस अवसर पर लोग शुभकामनाएं, प्रेरणादायक उद्धरण, चित्र और बैनर साझा करते हैं तथा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। विद्यालयों, महाविद्यालयों और स्थानीय समुदायों द्वारा विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि युवा पीढ़ी को वीरता, न्याय और देशभक्ति के उनके आदर्शों से प्रेरित किया जा सके।

शिवाजी महाराज जयंती 2026 कब है? 

छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती वर्ष 2026 में गुरुवार, 19 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। Maharashtra में यह उत्सव प्रायः ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 19 फरवरी को मनाया जाता है, हालांकि पारंपरिक रूप से उनकी जन्मतिथि हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष में भी मानी जाती है। यह दिन व्यापक रूप से सार्वजनिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। शिवाजी महाराज जयंती 2026 उनके जन्मदिवस का स्मरण करते हुए भारतीय इतिहास और मराठा साम्राज्य में उनके अद्वितीय योगदान को सम्मान देती है।

छत्रपति शिवाजी महाराज कौन थे?

छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म शिवनेरी किले में शाहाजी राजे भोसले और माता जीजाबाई के घर हुआ था। उनकी माता ने उनके व्यक्तित्व में वीरता, अनुशासन और धार्मिक आस्था के संस्कार डाले। 6 जून 1674 को रायगढ़ किले में उनका राज्याभिषेक हुआ और वे मराठा साम्राज्य के प्रथम छत्रपति बने। 1674 से 1680 तक उनके शासनकाल में एक मजबूत, जनकेंद्रित और सुव्यवस्थित राज्य की स्थापना हुई। शिवाजी महाराज जयंती 2026 केवल एक वीर योद्धा ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी शासक के रूप में भी उनके योगदान का उत्सव है।

सैन्य प्रतिभा और स्वराज्य का सपना

शिवाजी महाराज को गुरिल्ला युद्ध पद्धति “गनिमी कावा” के प्रणेता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने मात्र 16 वर्ष की आयु में तोरणा किले पर कब्जा किया और बाद में रायगढ़, सिंहगढ़ तथा प्रतापगढ़ सहित 300 से अधिक किलों का निर्माण या सुदृढ़ीकरण किया। सह्याद्रि पर्वतमाला का रणनीतिक उपयोग कर उन्होंने शक्तिशाली साम्राज्यों के विरुद्ध सैन्य बढ़त हासिल की।

शिवाजी महाराज जयंती 2026 उनके अभिनव सैन्य नियोजन, मजबूत गुप्तचर तंत्र और पश्चिमी तट की रक्षा के लिए सशक्त नौसेना के निर्माण को भी रेखांकित करती है। उनका “स्वराज्य” का सपना स्वतंत्रता और आत्म-शासन का प्रतीक था, जिसने आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित किया।

शिवाजी महाराज जयंती 2026 का महत्व

शिवाजी महाराज की जयंती का महत्व उनके शाश्वत आदर्शों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान में निहित है। यह दिन उनके साहस, दूरदर्शिता और स्वराज्य के संकल्प को याद करने का अवसर है।

सैन्य प्रतिभा

  • शिवाजी महाराज ने गुरिल्ला युद्ध पद्धति (गनिमी कावा) को विकसित किया और उसे प्रभावी ढंग से अपनाया।
  • उन्होंने रायगढ़, सिंहगढ़ और प्रतापगढ़ जैसे मजबूत पहाड़ी किलों का निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण किया।
  • भारत के पश्चिमी तट की सुरक्षा के लिए एक सशक्त नौसेना का गठन किया।

प्रशासनिक सुधार

  • उन्होंने एक प्रभावी राजस्व व्यवस्था स्थापित की और न्यायपूर्ण शासन सुनिश्चित किया।
  • उनका प्रशासन अनुशासित और जनहितैषी था।
  • अधिकारियों की नियुक्ति योग्यता के आधार पर की जाती थी, न कि जाति या धर्म के आधार पर।

धार्मिक सौहार्द

  • एक आस्थावान हिंदू होने के बावजूद उन्होंने सभी धर्मों का सम्मान किया।
  • पूजा स्थलों की रक्षा की और युद्ध अभियानों के दौरान महिलाओं की सुरक्षा एवं सम्मान सुनिश्चित किया।

सांस्कृतिक गौरव

  • उन्होंने मराठी और संस्कृत को राजकीय भाषा के रूप में प्रोत्साहित किया।
  • भारतीय परंपराओं और दरबारी संस्कृति को पुनर्जीवित किया।
  • शिवाजी महाराज जयंती 2026 उनके आदर्शों को अपनाने और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को सुदृढ़ करने का प्रेरणादायक अवसर है।

शिवाजी महाराज जयंती समारोह का इतिहास

शिवाजी महाराज की जयंती का सार्वजनिक रूप से आयोजन ब्रिटिश शासनकाल के दौरान लोकप्रिय हुआ। समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले ने वर्ष 1870 में पहली बार सार्वजनिक रूप से यह उत्सव प्रारंभ किया, ताकि शिवाजी महाराज के योगदान को उजागर किया जा सके। बाद में Bal Gangadhar Tilak (लोकमान्य तिलक) ने 19वीं सदी के उत्तरार्ध में इसे व्यापक रूप से लोकप्रिय बनाया, जिससे भारतीयों में राष्ट्रवाद और एकता की भावना मजबूत हुई। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह उत्सव आत्मसम्मान और प्रतिरोध का प्रतीक बन गया।

2026 में महाराष्ट्र भर में भव्य आयोजन

  • वर्ष 2026 में यह जयंती पूरे महाराष्ट्र में भव्य रूप से मनाई जाएगी।
  • रायगढ़ किला पर विशेष समारोह और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
  • शिवनेरी किला में उनके बचपन से जुड़ी कथाओं और ऐतिहासिक भ्रमण का आयोजन होगा।
  • मुंबई में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस जैसे प्रमुख स्थलों को सजाया जाएगा और भव्य रैलियां निकाली जाएंगी।
  • कोल्हापुर और सिंधुदुर्ग में भी जनसभाएं, शैक्षणिक कार्यक्रम और समुद्री श्रद्धांजलि समारोह आयोजित होंगे।
  • विद्यालयों में निबंध प्रतियोगिता, भाषण और नाटकों के माध्यम से विद्यार्थियों को उनके जीवन और आदर्शों से अवगत कराया जाएगा।

शिवाजी महाराज से नेतृत्व के सबक

शिवाजी महाराज का जीवन आज भी प्रेरणा का स्रोत है। उनसे हमें मिलते हैं:

  • विपरीत परिस्थितियों में साहस
  • दूरदर्शी रणनीति और योजना
  • शासन में न्याय और समानता
  • महिलाओं और सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान
  • स्वराज्य और राष्ट्रीय गौरव के प्रति अटूट प्रतिबद्धता

ये मूल्य आज के आधुनिक नेतृत्व और सुशासन में भी उतने ही प्रासंगिक हैं।

भारत में जेंडर बजटिंग में 11.55% की बढ़ोतरी: ₹5.01 लाख करोड़ का क्या है महत्व?

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत बजट आवंटन 2026-27 में जेंडर बजट का आवंटन बढ़ाकर ₹5.01 लाख करोड़ कर दिया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष के ₹4.49 लाख करोड़ की तुलना में 11.55% अधिक है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए इस बढ़ी हुई राशि की घोषणा की। कुल केंद्रीय बजट में जेंडर बजट की हिस्सेदारी भी पिछले वर्ष के 8.86% से बढ़कर 9.37% हो गई है। यह वृद्धि महिलाओं के कल्याण और सशक्तिकरण के प्रति सरकार की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

जेंडर बजट 2026-27 का आवंटन बढ़कर ₹5.01 लाख करोड़

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 पेश करते हुए जेंडर बजट में बड़ी बढ़ोतरी की घोषणा की। महिलाओं और बालिकाओं के लिए ₹5.01 लाख करोड़ की राशि निर्धारित की गई है, जो पिछले वर्ष के ₹4.49 लाख करोड़ की तुलना में 11.55% अधिक है। यह वृद्धि भारत में लैंगिक समावेशी विकास और महिला सशक्तिकरण योजनाओं के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

कुल बजट में जेंडर बजट की हिस्सेदारी बढ़कर 9.37%

वित्त वर्ष 2026-27 में कुल केंद्रीय बजट में जेंडर बजट की हिस्सेदारी बढ़कर 9.37% हो गई है, जो पिछले वर्ष 8.86% थी। इसका अर्थ है कि कुल बजट का लगभग दसवां हिस्सा महिलाओं से संबंधित योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों पर खर्च किया जाएगा।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, यह हाल के वर्षों में दर्ज सबसे उच्च अनुपातों में से एक है, जो जेंडर-उत्तरदायी बजटिंग को दी जा रही प्राथमिकता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

जेंडर बजट 2026-27 में अधिक मंत्रालयों की भागीदारी

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार इस वर्ष 53 मंत्रालयों और विभागों तथा पांच केंद्र शासित प्रदेशों ने जेंडर बजट आवंटन की रिपोर्ट दी है, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 49 थी। चालू वित्त वर्ष में चार नए मंत्रालयों और विभागों ने भी जेंडर बजट घटकों को शामिल किया है। यह भारत में जेंडर बजट ढांचे की शुरुआत के बाद से अब तक की सबसे व्यापक संस्थागत भागीदारी को दर्शाता है।

जेंडर बजटिंग क्या है?

जेंडर बजटिंग एक नीति उपकरण है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक व्यय का लाभ महिलाओं और बालिकाओं तक पहुंचे। इसका अर्थ महिलाओं के लिए अलग बजट बनाना नहीं है, बल्कि विभिन्न सरकारी योजनाओं में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने वाले प्रावधानों और धनराशि की पहचान और आवंटन करना है।

भारत में जेंडर बजटिंग की शुरुआत वर्ष 2005-06 में की गई थी, ताकि स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में लैंगिक असमानताओं को कम किया जा सके। वर्ष 2026-27 में बढ़ा हुआ आवंटन महिलाओं की आर्थिक भागीदारी, सुरक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण को मजबूती देगा, जो समावेशी आर्थिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भारत में जेंडर बजटिंग

जेंडर बजटिंग को औपचारिक रूप से 2005-06 में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को लाभ पहुंचाने वाले सार्वजनिक व्यय का ट्रैक रखना है। हर वर्ष केंद्रीय बजट के हिस्से के रूप में जेंडर बजट स्टेटमेंट प्रस्तुत किया जाता है।

पिछले कुछ वर्षों में इसका आवंटन लगातार बढ़ा है, जो महिला सशक्तिकरण, मातृ स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्तीय समावेशन और कौशल विकास पर नीति-स्तरीय फोकस को दर्शाता है। यह पहल United Nations के सतत विकास लक्ष्य 5 (लैंगिक समानता) के अनुरूप है और समावेशी विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

NHAI राष्ट्रीय राजमार्गों पर बनाएगा मधुमक्खी गलियारे, जानें वजह

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने 17 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे “बी कॉरिडोर” (BeeCorridors) नामक एक अनोखी और पर्यावरण-अनुकूल पहल की घोषणा की है। इस योजना के तहत राजमार्गों के आसपास परागण-अनुकूल (पॉलिनेटर-फ्रेंडली) गलियारों का विकास किया जाएगा, जिनमें फूलदार पेड़-पौधे लगाए जाएंगे ताकि मधुमक्खियों और अन्य परागणकर्ताओं के संरक्षण को बढ़ावा मिल सके। इसका उद्देश्य मधुमक्खियों पर बढ़ते पारिस्थितिक दबाव को कम करना और जैव विविधता को मजबूत करना है। वर्ष 2026–27 में लगभग 40 लाख पेड़ लगाए जाने का लक्ष्य है, जिनमें से करीब 60% पौधारोपण बी कॉरिडोर पहल के तहत होगा। यह कदम सतत और हरित राजमार्ग विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

NHAI बी कॉरिडोर पहल: सतत राष्ट्रीय राजमार्ग विकास की दिशा में बड़ा कदम

एनएचएआई की बी कॉरिडोर पहल राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे सजावटी पौधारोपण से हटकर पारिस्थितिक पौधारोपण की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव दर्शाती है। अब सजावटी पौधों की जगह ऐसे पेड़-पौधे लगाए जाएंगे जो पराग और मधुरस (नेक्टर) से भरपूर हों और मधुमक्खियों सहित अन्य परागणकर्ताओं को समर्थन दें। यह पहल पूरे वर्ष मधुमक्खियों को भोजन की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। बी कॉरिडोर के माध्यम से जैव विविधता में सुधार होगा और दीर्घकालिक पारिस्थितिक संतुलन को बढ़ावा मिलेगा।

परागण संरक्षण क्यों महत्वपूर्ण है?

मधुमक्खियाँ और अन्य परागणकर्ता कृषि और बागवानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन बढ़ते पारिस्थितिक दबाव के कारण उनकी संख्या प्रभावित हो रही है। एनएचएआई की यह पहल मधुमक्खी-अनुकूल हरित पट्टियाँ विकसित कर पारिस्थितिक संतुलन बहाल करने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने का प्रयास करती है। स्वस्थ परागणकर्ता आबादी फसल उत्पादन और जैव विविधता दोनों को मजबूत बनाती है। इस प्रकार राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे पौधारोपण क्षेत्र केवल हरियाली नहीं बल्कि पारिस्थितिक समर्थन तंत्र बनेंगे।

बी कॉरिडोर कैसे विकसित किए जाएंगे?

इस योजना के तहत पेड़, झाड़ियाँ, जड़ी-बूटियाँ और घास का मिश्रण लगाया जाएगा। नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और सिरिस जैसी देशी प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी। विभिन्न मौसमों में अलग-अलग समय पर फूल खिलने की व्यवस्था की जाएगी ताकि पूरे वर्ष मधुरस उपलब्ध रहे। मधुमक्खियों की औसत उड़ान दूरी को ध्यान में रखते हुए 500 मीटर से 1 किलोमीटर के अंतराल पर फूलदार पेड़ों के समूह लगाए जाएंगे। यह व्यवस्थित दृष्टिकोण सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है।

वर्ष 2026–27 के लिए पौधारोपण लक्ष्य

एनएचएआई वर्ष 2026–27 में लगभग 40 लाख पेड़ लगाने की योजना बना रहा है, जिनमें से लगभग 60% बी कॉरिडोर पहल के तहत होंगे। देशभर के फील्ड कार्यालय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के आधार पर उपयुक्त राजमार्ग खंड और खाली भूमि का चयन करेंगे। इस अवधि में कम से कम तीन परागण कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। यह बड़े पैमाने का मधुमक्खी-अनुकूल पौधारोपण अभियान राष्ट्रीय स्तर पर परागण संरक्षण को मजबूती देगा।

परागणकर्ता और पारिस्थितिक अवसंरचना

परागणकर्ता, विशेषकर मधुमक्खियाँ, वैश्विक खाद्य उत्पादन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा सुनिश्चित करती हैं। अक्सर अवसंरचना विकास में जैव विविधता की अनदेखी हो जाती है, लेकिन पारिस्थितिक अवसंरचना विकास और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ती है। बी कॉरिडोर जैसी पहल परिवहन विकास को पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ संतुलित करती है। देशी और मधुरस-समृद्ध प्रजातियों के रोपण से भारत परागण सेवाओं, कृषि उत्पादन और जलवायु सहनशीलता में सुधार कर सकता है। ऐसा सतत राष्ट्रीय राजमार्ग मॉडल अन्य देशों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

T20 वर्ल्ड कप 2026 में सबसे ज़्यादा विकेट: सबसे ज़्यादा विकेट लेने वालों की पूरी लिस्ट

T20 वर्ल्ड कप 2026 में रोमांचक क्रिकेट एक्शन देखने को मिल रहा है, जिसमें टॉप बॉलर सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले बॉलर के टाइटल के लिए मुकाबला कर रहे हैं। भारत और श्रीलंका मिलकर इस टूर्नामेंट का 10वां एडिशन खेल रहे हैं, जो अलग-अलग जगहों पर खेला जा रहा है, जिसमें स्पिन-फ्रेंडली पिचें और हाई-स्कोरिंग ग्राउंड हैं।

जब टीमें सेमी-फ़ाइनल स्पॉट के लिए लड़ रही हैं, तो बॉलर मैच के नतीजों को बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। तेज़ पेसर से लेकर चालाक ऑल-राउंडर तक, कई खिलाड़ियों ने पहले ही बड़ा असर डाला है।

शैडली वैन शल्कविक विकेट चार्ट में सबसे आगे

USA के शैडली वैन शल्कविक अभी T20 वर्ल्ड कप 2026 में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ हैं। उन्होंने सिर्फ़ चार मैचों में 13 विकेट लिए हैं, जिससे वे अब तक टूर्नामेंट के सबसे अच्छे गेंदबाज़ बन गए हैं। उनकी लगातार लाइन, डिसिप्लिन्ड लेंथ और ज़रूरी मौकों पर विकेट लेने की काबिलियत ने USA को बड़े मैचों में मुकाबले में बने रहने में मदद की है।

अब तक के बेस्ट बॉलिंग फिगर

वेस्टइंडीज के ऑलराउंडर रोमारियो शेफर्ड के नाम अब तक टूर्नामेंट में बेस्ट बॉलिंग फिगर हैं। उन्होंने स्कॉटलैंड के खिलाफ 5/20 का शानदार स्पेल किया, जो अब तक के कॉम्पिटिशन के बेस्ट परफॉर्मेंस में से एक है।

T20 वर्ल्ड कप 2026 में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी

सबसे ज़्यादा विकेट लेने वालों की अपडेटेड लिस्ट यहाँ दी गई है:

रैंक खिलाड़ी देश विकेट मैच
1 शैडली वैन शाल्कविक संयुक्त राज्य अमेरिका 13 4
2 माइकल लीस्क स्कॉटलैंड 9 4
3 लुंगी एनगिडी दक्षिण अफ्रीका 8 3
4 अज़मतुल्लाह उमरज़ई अफ़ग़ानिस्तान 8 3
5 ब्लेसिंग मुज़ारबानी ज़िम्बाब्वे 7 2

गेंदबाजों का बड़ा असर

  • माइकल लीस्क ने चार मैचों में 9 विकेट लेकर सबको प्रभावित किया है।
  • साउथ अफ्रीका के पेस लीडर लुंगी एनगिडी ने सिर्फ़ तीन मैचों में 8 विकेट लिए हैं।
  • अफ़गानिस्तान के ऑलराउंडर अज़मतुल्लाह उमरज़ई बल्ले और गेंद दोनों से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
  • ज़िम्बाब्वे के लंबे तेज़ गेंदबाज़ ब्लेसिंग मुज़रबानी ने सिर्फ़ दो मैचों में 7 विकेट लिए हैं, और उनका स्ट्राइक रेट बहुत अच्छा है।

मुश्किल हालात बॉलर्स की परीक्षा लेते हैं

भारत और श्रीलंका के अलग-अलग शहरों में मैच खेले जा रहे हैं, इसलिए बॉलर्स को इन चीज़ों के साथ जल्दी से एडजस्ट करना होगा:

  • टर्निंग पिचें
  • नमी वाला मौसम
  • छोटी बाउंड्री
  • ज़्यादा स्कोर वाली सतहें

इन चुनौतियों के साथ तालमेल बिठाना टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले बॉलर के तौर पर खत्म करने के लिए ज़रूरी है।

मैक्रों की भारत यात्रा 2026: भारत-फ्रांस के बीच महत्वपूर्ण खनिज सहयोग समझौता

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान भारत और फ्रांस ने 18 फरवरी 2026 को महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) पर सहयोग के लिए संयुक्त आशय घोषणा (Joint Declaration of Intent) पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की खोज, उत्खनन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इसका उद्देश्य हरित और डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत एवं लचीली आपूर्ति शृंखलाएं तैयार करना है। मुंबई में हुई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के बाद इस घोषणा को भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी में एक नए मील के पत्थर के रूप में देखा जा रहा है।

क्या हुआ हस्ताक्षर?

भारत-फ्रांस महत्वपूर्ण खनिज सहयोग एक संयुक्त आशय घोषणा के माध्यम से औपचारिक रूप से स्थापित हुआ। यह समझौता दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और अन्य आवश्यक खनिजों की विविध और टिकाऊ आपूर्ति शृंखला सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। ये खनिज स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। भारत के राजदूत संजीव कुमार सिंगला ने संयुक्त उन्नत प्रौद्योगिकी विकास समूह के गठन की जानकारी भी दी। यह समझौता उभरती प्रौद्योगिकियों और औद्योगिक लचीलापन के क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक सहयोग को दर्शाता है।

हरित और डिजिटल अर्थव्यवस्था में महत्व

महत्वपूर्ण खनिज नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, बैटरी भंडारण, डिजिटल अवसंरचना और रक्षा विनिर्माण के लिए आधारभूत भूमिका निभाते हैं। दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का उपयोग पवन टर्बाइन, इलेक्ट्रिक वाहन, सौर पैनल और उच्च तकनीकी इलेक्ट्रॉनिक्स में होता है। खोज, उत्खनन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण में साझेदारी के माध्यम से दोनों देश सीमित वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना चाहते हैं। यह पहल दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करेगी और वैश्विक स्थिरता लक्ष्यों के तहत जलवायु प्रतिबद्धताओं को समर्थन देगी।

सीएनआरएस साझेदारी और उन्नत प्रौद्योगिकी सहयोग

इस सहयोग के तहत भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और फ्रांस के CNRS (नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च) के बीच एक आशय पत्र पर भी सहमति बनी। इसके तहत उन्नत सामग्रियों (Advanced Materials) पर एक केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है, जिससे शोध सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। सीएनआरएस विश्व की प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाओं में से एक है। साथ ही, दोनों देशों ने संयुक्त उन्नत प्रौद्योगिकी विकास समूह गठित करने का निर्णय लिया, जिससे नवाचार, औद्योगिक अनुसंधान और उभरती तकनीकों में सहयोग और गहरा होगा।

व्यापक रणनीतिक वार्ता: इंडो-पैसिफिक, यूक्रेन और गाज़ा

रणनीतिक वार्ताएं केवल महत्वपूर्ण खनिजों तक सीमित नहीं रहीं। दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन संघर्ष पर चिंता व्यक्त की और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का समर्थन किया। गाज़ा शांति योजना के कार्यान्वयन और दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन को भी दोहराया गया।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों ने स्वतंत्र, मुक्त और नियम-आधारित व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना के लिए गठबंधन (CDRI) जैसे मंचों के माध्यम से सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी। यह व्यापक संवाद भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को बहुआयामी और भविष्य उन्मुख बनाता है।

टाइप II नॉन-डिपॉजिट NBFC क्या है? एयरटेल मनी की नई भूमिका को समझा गया

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एयरटेल मनी को पंजीकरण प्रमाणपत्र (Certificate of Registration – CoR) प्रदान किया है। इस स्वीकृति के साथ भारती एयरटेल की सहायक कंपनी अब टाइप-II, गैर-जमा स्वीकार करने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) के रूप में कार्य कर सकेगी। यह अनुमति एयरटेल मनी के लिए विनियमित वित्तीय सेवाओं के व्यापक क्षेत्र में औपचारिक प्रवेश का संकेत है। साथ ही, भारती एयरटेल ने आरबीआई द्वारा अनिवार्य अस्वीकरण जारी करते हुए स्पष्ट किया कि नियामक संस्था कंपनी की वित्तीय सुदृढ़ता या देनदारियों की गारंटी नहीं देती।

एयरटेल मनी को आरबीआई से टाइप-II एनबीएफसी की मंजूरी

  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एयरटेल मनी (Airtel Money) को एनबीएफसी (Non-Banking Financial Company) के रूप में पंजीकरण प्रदान किया है।
  • इसे टाइप-II गैर-जमा स्वीकार करने वाली एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • यह अनुमति एनबीएफसी ढांचे के तहत दी गई है, जिससे एयरटेल मनी अब आरबीआई के नियमों के अनुसार अपने वित्तीय उत्पादों और सेवाओं का कानूनी रूप से विस्तार कर सकेगी।

टाइप-II गैर-जमा एनबीएफसी को समझें

टाइप-II (Non-Deposit Accepting) एनबीएफसी—

  • आम जनता से जमा (डिपॉजिट) स्वीकार नहीं कर सकती।
  • ऋण देने और अन्य वित्तीय गतिविधियों में संलग्न हो सकती है।
  • आरबीआई की निगरानी और अनुपालन मानकों के तहत कार्य करती है।

इस प्रकार की एनबीएफसी का मुख्य ध्यान जमा स्वीकार करने के बजाय ऋण, भुगतान सेवाओं और अन्य वित्तीय समाधानों पर केंद्रित रहता है।

आरबीआई का अनिवार्य अस्वीकरण – महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण

आरबीआई के निर्देशानुसार Bharti Airtel ने स्पष्ट किया कि—

  • आरबीआई कंपनी की वित्तीय सुदृढ़ता की कोई गारंटी नहीं देता।
  • आरबीआई कंपनी के बयानों या विचारों का सत्यापन नहीं करता।
  • आरबीआई किसी भी देनदारी या पुनर्भुगतान के लिए जिम्मेदार नहीं है।
  • यह एनबीएफसी पंजीकरण के साथ लागू होने वाला एक मानक नियामकीय अस्वीकरण है।

टेलीकॉम और फिनटेक का संगम

  • Airtel Money टेलीकॉम और वित्तीय सेवाओं के बीच एक सेतु का कार्य करता है।
  • यह भारत में डिजिटल भुगतान और फिनटेक क्षेत्र की वृद्धि को समर्थन देता है।
  • यह तकनीक-आधारित एनबीएफसी मॉडलों की बढ़ती प्रवृत्ति को मजबूत करता है।
  • साथ ही, यह मोबाइल प्लेटफॉर्म और वित्तीय समाधानों के गहरे एकीकरण को दर्शाता है।

मशहूर एक्ट्रेस प्रवीणा देशपांडे का निधन

अभिनेत्री प्रवीणा देशपांडे का 17 फरवरी 2026 को मुंबई में 60 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह मल्टीपल मायलोमा नामक श्वेत रक्त कोशिकाओं के कैंसर से पीड़ित थीं। उनके परिवार ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इस दुखद समाचार की पुष्टि की। वह वर्ष 2019 से उपचार करा रही थीं, लेकिन उन्होंने अपनी बीमारी को निजी रखा। फिल्म Ready की अभिनेत्री का अंतिम संस्कार उसी दिन अंधेरी, मुंबई में किया गया। उनके परिवार में उनके पति और दो बच्चे हैं।

मृत्यु का कारण: मल्टीपल मायलोमा

प्रवीणा देशपांडे ने मल्टीपल मायलोमा जैसी गंभीर रक्त कैंसर बीमारी से लंबी लड़ाई लड़ी। यह बीमारी प्लाज़्मा कोशिकाओं को प्रभावित करती है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। 2019 से उपचार के बावजूद उन्होंने अपनी स्वास्थ्य स्थिति को सार्वजनिक नहीं किया। बीमारी के दौरान भी उन्होंने चुनिंदा रूप से मनोरंजन जगत में काम जारी रखा। उनके निधन की खबर से प्रशंसकों और सहकर्मियों में शोक की लहर दौड़ गई।

अंतिम ऑन-स्क्रीन उपस्थिति

निधन से पहले प्रवीणा देशपांडे ने नेटफ्लिक्स सीरीज़ Taskaree में कैमियो भूमिका निभाई थी, जिसमें उन्होंने अभिनेता इमरान हाशमी के साथ स्क्रीन साझा की। सीरीज़ की रिलीज़ के बाद उन्होंने निर्देशक नीरज पांडे की सराहना की थी और भविष्य में उनके साथ फिर काम करने की इच्छा जताई थी, जो अब अधूरी रह गई।

करियर यात्रा: टीवी और फिल्में

प्रवीणा देशपांडे ने अपने करियर की शुरुआत रंगमंच से की, जिसके बाद उन्होंने टेलीविजन और फिल्मों में कदम रखा। उन्हें लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों जैसे घर एक मंदिर, करम अपना अपना और कुल्फी कुमार बाजेवाला से पहचान मिली।

फिल्मों में उन्होंने मराठी और हिंदी सिनेमा में काम किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में शामिल हैं—

  • मुंबई मेरी जान
  • डी-डे
  • एक विलेन
  • गब्बर इज बैक
  • परमाणु: द स्टोरी ऑफ पोखरण

उनके अभिनय की गहराई और संवेदनशीलता के लिए सराहना की जाती थी।

मल्टीपल मायलोमा: एक संक्षिप्त जानकारी

मल्टीपल मायलोमा प्लाज़्मा कोशिकाओं में बनने वाला कैंसर है, जो अस्थि मज्जा (बोन मैरो) को प्रभावित करता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकता है। इसके सामान्य लक्षणों में हड्डियों में दर्द, थकान, बार-बार संक्रमण और एनीमिया शामिल हैं। उपचार में कीमोथेरेपी, लक्षित थेरेपी और स्टेम सेल प्रत्यारोपण शामिल हो सकते हैं, जो बीमारी की अवस्था पर निर्भर करता है। प्रवीणा देशपांडे लगभग सात वर्षों तक इस बीमारी से जूझती रहीं।

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