भुवनेश्वर कुमार IPL में 200 विकेट लेने वाले पहले तेज़ गेंदबाज़ बने

रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच हुए मुकाबले में भुवनेश्वर कुमार ने इतिहास रच दिया, क्योंकि वह इंडियन प्रीमियर लीग में 200 विकेट लेने वाले पहले तेज़ गेंदबाज़ बन गए। उन्होंने CSK के आयुष म्हात्रे को आउट करके यह उपलब्धि हासिल की। ​​यह लीग में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, खासकर तब जब IPL के इतिहास में स्पिनरों को सबसे ज़्यादा विकेट लेने वालों के तौर पर जाना जाता है।

200 विकेट लेने वाले पहले तेज़ गेंदबाज़

क्रिकेट जगत के कई बड़े नाम IPL में खेल चुके हैं और अभी भी खेल रहे हैं, लेकिन यह उपलब्धि ऐतिहासिक है, क्योंकि उन्होंने अपना 200वां विकेट हासिल किया और ऐसा करने वाले पहले तेज़ गेंदबाज़ बन गए। आमतौर पर स्पिनरों को ही सबसे ज़्यादा विकेट लेने के लिए जाना जाता है, ऐसे में इस भारतीय तेज़ गेंदबाज़ के लिए यह उपलब्धि सचमुच ऐतिहासिक है।

वह इस समय IPL में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल से ठीक पीछे हैं।

IPL में भुवनेश्वर का सफ़र

भुवनेश्वर ने 2011 में IPL में डेब्यू किया था और वे इन फ्रेंचाइज़ियों के सबसे भरोसेमंद गेंदबाज़ों में से एक रहे हैं:

  • रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु
  • पुणे वॉरियर्स इंडिया
  • सनराइज़र्स हैदराबाद

उनका सबसे बेहतरीन सीज़न 2017 में आया, जब उन्होंने 26 विकेट लिए और अपनी टीम के लिए ‘पर्पल कैप’ का अवॉर्ड जीता।

‘पर्पल कैप किंग’ के नाम से मशहूर

उनके नाम एक बेहद खास रिकॉर्ड दर्ज है — लगातार दो बार ‘पर्पल कैप’ जीतना।

  • 2016 – 23 विकेट
  • 2017 – 26 विकेट

IPL के इतिहास में वह एकमात्र ऐसे गेंदबाज़ हैं, जिन्होंने लगातार दो वर्षों तक यह उपलब्धि हासिल की है।

IPL में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले टॉप 5 खिलाड़ियों की सूची

  • युजवेंद्र चहल : 223 विकेट
  • भुवनेश्वर कुमार: 202 विकेट
  • सुनील नरेन: 193 विकेट
  • पीयूष चावला : 192 विकेट
  • रविचंद्रन अश्विन: 187 विकेट

LPG उत्पादन में भारत के प्रमुख शहर कौन-कौन से हैं? देखें लिस्ट

भारत में आज 33 करोड़ से अधिक परिवार खाना बनाने के लिए एलपीजी सिलिडंर (LPG cylinder) का इस्तेमाल करते हैं। ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध की वजह से एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत में एलपीजी (LPG) का उत्पादन और वितरण तीन बड़ी सरकारी कंपनियों के पास है। इन कंपनियों की हिस्सेदारी भारतीय बाजार में सबसे अधिक है। ऐसे में इन्हें ऑयल मार्केटिंग कंपनियां भी कहा जाता है। इन तीन कंपनियों में भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के नाम शामिल है।

भारत की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी

इंडियन ऑयल द्वारा इंडेन नाम से एलपीजी गैस का उत्पादन कर बिक्री की जाती है। यह कंपनी भारत की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी है। बता दें कि भारतीय एलपीजी बाजार में इंडेन की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। यह भारत के कुल उत्पादन का 40 से 50 प्रतिशत हिस्से का योगदान देता है। ऐसे में यह विश्व के सबसे बड़े पैक-एलपीजी ब्रांडों में शामिल है। इंडियन गैस भारत की सबसे बड़ी एलपीजी कंपनी (India Number One LPG Company) है।

देश की दूसरी सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी

भारत पेट्रोलियम अपने एलपीजी गैस उत्पाद को भारत गैस नाम से बेचता है। यह कंपनी देश की दूसरी सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी है। साथ ही, इसके पास बड़ी रिफाइनरियों एवं बॉटलिंग प्लांट का अच्छा-खासा नेटवर्क भी है। देशभर में इसके करोड़ों उपभोक्ता हैं।

ONGC की सहायक कंपनी

हिंदुस्तान पेट्रोलियम अपने एलपीजी गैस उत्पाद को एचपी गैस (HP GAS) नाम से बेचता है। दरअसल, यह कंपनी ONGC की सहायक कंपनी के तौर पर काम करती है। हालांकि, भारत में इसकी पहचान गैस उत्पादन और वितरण के लिए भी है। इस कंपनी के कमर्शियल गैस सिलिंडर अधिक देखने को मिलते हैं।

गैस का मार्केट शेयर

Indane सबसे बड़े हिस्से के साथ सबसे आगे है, जिसके बाद Bharat Gas और HP Gas का स्थान आता है। निजी खिलाड़ियों की मौजूदगी अभी भी अपेक्षाकृत कम है। इसके बाद दूसरे नंबर पर भारत गैस है। भारत गैस का मार्केट शेयर करीब 26 से 27 फीसदी है। तीसरे नंबर पर HP गैस है। इसका मार्केट शेयर करीब 22 से 24 फीसदी है। और 2 से 7 फीसदी में बाकी के प्लेयर हैं।

भारत में प्रमुख LPG उत्पादक शहर और रिफाइनरियां:

  • जामनगर (गुजरात): रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिफाइनरी के साथ देश का सबसे बड़ा एलपीजी हब।
  • पानीपत (हरियाणा): इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) की बड़ी रिफाइनरी।
  • मथुरा (उत्तर प्रदेश): IOCL रिफाइनरी।
  • हल्दिया (पश्चिम बंगाल): IOCL रिफाइनरी।
  • कोच्चि (केरल): भारत पेट्रोलियम (BPCL) रिफाइनरी।
  • मंगलोर (कर्नाटक): मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स (MRPL)।
  • वडोदरा/कोयाली (गुजरात): IOCL रिफाइनरी।
  • वडिनार (गुजरात): नायरा एनर्जी रिफाइनरी।
  • बरौनी (बिहार): IOCL रिफाइनरी।
  • पारादीप (ओडिशा): IOCL रिफाइनरी।
  • भटिंडा (पंजाब): HPCL-मित्तल रिफाइनरी।
  • असम (बोंगाईगांव, डिगबोई, गुवाहाटी): यहाँ भी IOCL की रिफाइनरियां LPG का उत्पादन करती हैं।

 

जानें भारत के किस शहर से पहली बार हुई थी जनगणना की शुरुआत?

बता दें कि, भारत में जनगणना 2026-27 की शुरुआत हो गई है। इस बार इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा। इसके तहत पहले चरण में मकान और निवास का डाटा एकत्रित होगा और दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा, जिसमें शिक्षा, लिंग, धर्म और जाति से जुड़े आंकड़े शामिल रहेंगे।

हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब भारत में जनगणना हो रही है। इसकी शुरुआत 202 साल पहले उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में साल 1824 में हुई थी, जब आर. गुलाब ने शहर की जनगणना कराई थी। भारत का पहली डिजिटल जनगणना (Census) 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है।

डिजिटल भारत के दौर में अब कागज-कलम की जगह मोबाइल ऐप एवं टैबलेट ने ले ली है। इसी तकनीकी बदलावों के अनुरूप खुद को बदलते हुए भारत सरकार ने अपनी आबादी की जनगणना डिजिटली कराने की सोची है। भारत में आखिरी बार साल 2011 में जनगणना हुई थी। यह देश की 15वीं और आजाद भारत की 7वीं जनगणना थी।

पहली बार जनगणना

इलाहाबाद में साल 1824 में आर. गुलाब ने पहली बार जनगणना कराई थी। इसके बाद 1827-28 में बनारस में जेम्स प्रिंसेप ने जनगणना करवाई। वहीं, साल 1830 में ढाका में हेनरी वाल्टर ने जनगणना कराई, जिसे पहली और पूरी तरह आधुनिक शहर की जनगणना माना गया।

भारत में पहली बार देशव्यापी जनगणना

भारत में पहली बार देशव्यापी जनगणना साल 1872 में गवर्नर जनरल लॉर्ड मेयो के कार्यकाल में हुई थी। हालांकि, यह एक ही समय पर नहीं हुई थी और इस दौरान कई क्षेत्र शामिल नहीं हो सके थे। इस कारण से इस जनगणना को सही नहीं माना जाता है।

भारत में पहली नियमित जनगणना साल 1881 में गवर्नर जनरल रहे लॉर्ड रिपन के कार्यकाल में हुई थी। उस समय डब्ल्यू. सी. प्लाउडेन के नेतृत्व में पूरे देश में एक साथ जनगणना की गई थी। इसके बाद प्रत्येक 10 साल में एक बार जनगणना की परंपरा शुरू हुई थी।

आजादी के बाद भारत की पहली जनगणना

आजादी के बाद भारत की पहली जनगणना साल 1951 में हुई थी। यह जनगणना 10 फरवरी 1951 को शुरू हुई और 1948 के जनगणना अधिनियम के तहत आयोजित की गई थी।

गुजरात हाईकोर्ट ने AI के इस्तेमाल को लेकर एक सख्त नीति जारी की

गुजरात हाई कोर्ट ने एक नीति जारी की है, जिसके तहत न्यायिक फ़ैसले लेने या फ़ैसलों का मसौदा तैयार करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। हाई कोर्ट ने माना है कि AI कार्यक्षमता को बेहतर बना सकता है, लेकिन साथ ही इस बात पर भी ज़ोर दिया है कि निष्पक्षता, जवाबदेही और न्यायिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए न्याय प्रक्रिया के केंद्र में मानवीय तर्कशक्ति ही रहनी चाहिए। यह कदम कानून और शासन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में AI की भूमिका को लेकर बढ़ती बहसों के बाद उठाया गया है।

निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार

बार ऐंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि AI का इस्तेमाल किसी भी तरह की न्यायिक सोच, तर्क, बेल या सजा तय करने जैसे अहम फैसलों में नहीं किया जा सकता। इस नीति को संविधान के अनुच्छेद 225 और अनुच्छेद 227 के तहत बनाई गई है और इसका आधार अनुच्छेद 21 में दिए गए निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार पर रखा गया है।

AI का इस्तेमाल सबूतों को छाँटने

यह नियम हाईकोर्ट से लेकर जिला अदालतों तक सभी जजों, कोर्ट कर्मचारियों, लीगल असिस्टेंट, इंटर्न और पैरा-लीगल वॉलंटियर्स पर लागू होगा। नीति के अनुसार, AI का इस्तेमाल सबूतों को छाँटने, उनकी विश्वसनीयता जाँचने, गवाही का सार निकालने या किसी भी तरह के प्रमाण के मूल्यांकन में भी नहीं किया जा सकता।

कुछ सीमित कामों के लिए AI की अनुमति

हालाँकि, कुछ सीमित कामों के लिए AI की अनुमति दी गई है। जैसे कानूनी रिसर्च, पुराने फैसलों को खोजना, कानून की व्याख्या समझना और प्रशासनिक कार्य जैसे नोटिस या सर्कुलर बनाना। इसके अलावा AI का उपयोग भाषा सुधारने या ड्राफ्ट को बेहतर बनाने में किया जा सकता है लेकिन अंतिम कानूनी तर्क और फैसला पूरी तरह जज का ही होगा।

AI की गलती को बहाना नहीं बनाया जा सकता

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि AI से बनी किसी भी जानकारी की जिम्मेदारी पूरी तरह उस व्यक्ति की होगी जो उस पर हस्ताक्षर करता है। AI की गलती को बहाना नहीं बनाया जा सकता। साथ ही, निजी और संवेदनशील जानकारी जैसे पक्षकारों के नाम, पते, केस से जुड़े दस्तावेज या गोपनीय जानकारी को सार्वजनिक AI टूल में डालने पर भी रोक लगा दी गई है।

विभागीय कार्रवाई

यदि कोई इस नीति का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ IT ऐक्ट एवं भारतीय न्याय संहिता 2024 के तहत कानूनी कार्रवाई हो सकती है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि AI में पक्षपात हो सकता है और इसलिए न्याय व्यवस्था में इसका सावधानी से इस्तेमाल जरूरी है।

शासन और सेवा वितरण को बढ़ावा देने हेतु ‘साधना सप्ताह 2026’ का शुभारंभ

भारत ने ‘साधना सप्ताह 2026’ की शुरुआत की है। यह एक राष्ट्रव्यापी पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य नागरिक-केंद्रित शासन को मज़बूत करना और सिविल सेवाओं में क्षमता निर्माण करना है। यह सप्ताह 2 से 8 अप्रैल 2026 तक मनाया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत विभिन्न मंत्रालय, राज्य और कई प्रशिक्षण संस्थान एक साथ मिलकर कौशल, जवाबदेही और सेवा वितरण को बेहतर बनाने का काम करेंगे। यह कार्यक्रम ‘मिशन कर्मयोगी’ के अंतर्गत संचालित किया जाएगा और यह आधुनिक तथा प्रौद्योगिकी-आधारित शासन की ओर हो रहे बदलाव को दर्शाता है।

साधना सप्ताह क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

  • ‘साधना सप्ताह’ का पूरा नाम ‘राष्ट्रीय प्रगति के लिए अनुकूलनीय विकास और मानवीय योग्यता को सुदृढ़ बनाना’ (Strengthening Adaptive Development and Humane Aptitude for National Advancement) है। यह भारत की सबसे बड़ी सहयोगात्मक शासन पहलों में से एक है।
  • इसका आयोजन कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), क्षमता निर्माण आयोग और कर्मयोगी भारत द्वारा किया जाता है।
  • इस पहल का उद्देश्य जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा देना, तथा सिविल सेवकों में कौशल और दक्षताओं का विकास करना है।
  • चूँकि इस कार्यक्रम में 100 से अधिक मंत्रालयों, 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और 250 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों की भागीदारी होगी, इसलिए यह शासन सुधारों की दिशा में एक कदम है।

मिशन कर्मयोगी: सिविल सेवाओं की रीढ़

‘साधना सप्ताह’ का विचार ‘मिशन कर्मयोगी’ में निहित है, जो सिविल सेवाओं की क्षमता निर्माण के लिए भारत का एक प्रमुख कार्यक्रम है।

इसे ‘सिविल सेवाओं की क्षमता निर्माण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम’ के नाम से भी जाना जाता है। इसका मुख्य ध्यान निम्नलिखित बातों पर होगा:

  • नियम-आधारित शासन से भूमिका-आधारित शासन की ओर बढ़ना
  • साथ ही, सक्षमता-आधारित प्रशासन का निर्माण करना
  • जवाबदेही और कार्य-कुशलता को बढ़ाना

यह मिशन माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न के साथ शुरू किया गया था, और इसका उद्देश्य एक ऐसी ‘भविष्य के लिए तैयार’ नौकरशाही का निर्माण करना है, जो बेहतर सार्वजनिक सेवाएँ प्रदान करने में सक्षम हो।

iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल परिवर्तन

इस परिवर्तन का मुख्य आधार iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म है, जो सरकारी अधिकारियों के लिए एक डिजिटल लर्निंग इकोसिस्टम है।

इस प्लेटफॉर्म के तहत अब तक की मुख्य उपलब्धियां इस प्रकार हैं:

  • 1.5 करोड़ से अधिक पंजीकृत शिक्षार्थी
  • 8 करोड़ से अधिक कोर्स पूरे किए गए
  • कई भाषाओं में 4,600+ कोर्स तक पहुंच

यह प्लेटफ़ॉर्म किसी भी समय, कहीं भी सीखने की सुविधा प्रदान करता है, साथ ही व्यवहारिक, कार्यात्मक और संबंधित क्षेत्रों में कौशल विकास में भी मदद करता है।

साधना सप्ताह 2026 के तीन मुख्य विषय

  • प्रौद्योगिकी: जो स्मार्ट गवर्नेंस को शक्ति प्रदान करेगी।
  • परंपरा: भारत की ज्ञान प्रणालियों से सीखना।
  • मूर्त: सुधारों के वास्तविक प्रभाव को मापना।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नीतियां नागरिकों के जीवन में स्पष्ट सुधार लाएं।

इस सप्ताह शुरू की जाने वाली प्रमुख पहलें

शासन क्षमता को मज़बूत करने के लिए कई नए कार्यक्रम शुरू किए गए हैं।

  • कर्मयोगी क्षमता कनेक्ट – फ्रंटलाइन सेवा देने के कौशल को बेहतर बनाता है
  • राष्ट्रीय जन सेवा कार्यक्रम – ज़मीनी स्तर पर लोगों की भागीदारी को भी बढ़ावा देता है
  • UNNATI पोर्टल – प्रशिक्षण संस्थानों के लिए डिजिटल आधार
  • AI-आधारित अमृत ज्ञान कोष – शासन से जुड़ी सीख पर आधारित केस-स्टडी
  • विकसित पंचायत के लिए क्षमता निर्माण – स्थानीय शासन को मज़बूत बनाता है

 

छत्तीसगढ़ में लगभग एक सदी बाद काले हिरणों की वापसी

छत्तीसगढ़ राज्य से काले हिरणों के संरक्षण की एक शानदार सफलता की कहानी सामने आई है। इस राज्य में एक समय यह प्रजाति विलुप्त हो गई थी, लेकिन कई प्रयासों के बाद अब राज्य में काले हिरणों की आबादी में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। 1927 में आखिरी बार आधिकारिक तौर पर देखे जाने के लगभग एक सदी बाद, अब राज्य में लगभग 130 काले हिरण खुले जंगल में आज़ादी से घूम रहे हैं, और लगभग 80 अन्य काले हिरणों को भी जंगल में छोड़े जाने का इंतज़ार है। यह पुनर्स्थापन अभियान 2018 में शुरू किया गया था, और यह वन्यजीवों के संरक्षण और बहाली के प्रयासों में एक अहम मोड़ साबित हुआ है।

विलुप्ति से पुनरुद्धार तक – काले हिरणों की यात्रा

काला हिरण, जो कि मृगों की एक सुंदर प्रजाति है और मूल रूप से भारतीय उपमहाद्वीप का निवासी है, आवास की कमी और शिकार के दबाव के कारण छत्तीसगढ़ से विलुप्त हो गया था।

इनके पुनरुद्धार की शुरुआत वर्ष 2018 में बरनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में हुई, जहाँ काले हिरणों का पहला जत्था (बैच) छोड़ा गया। इनमें से 50 हिरणों को दिल्ली से लाकर यहाँ बसाया गया, जबकि 27 हिरण बिलासपुर स्थित कानन पेंडारी चिड़ियाघर से लाए गए थे।

शुरुआत में उन्हें बाड़ों में रखा गया था, और जंगल में छोड़े जाने से पहले जानवरों को सावधानीपूर्वक तैयार की गई वातावरण के अनुकूल ढलने की प्रक्रिया से गुज़रना पड़ा। Covid-19 काल के दौरान लगभग 15 जानवरों की मृत्यु हो गई थी। इस झटके के बावजूद, प्रभावी संरक्षण रणनीतियों के कारण उनकी आबादी में लगातार वृद्धि हुई है।

आज बरनवापारा में लगभग:

  • 130 काले हिरण खुले जंगल में हैं
  • 60 सुरक्षित बाड़ों में हैं

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत वैज्ञानिक संरक्षण

काले हिरणों को फिर से बसाने का कार्यक्रम वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत चलाया गया है। यह अधिनियम एक वैज्ञानिक और नैतिक दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है।

इस प्रक्रिया में ये चीज़ें शामिल थीं:

  • उनके लिए तनाव-मुक्त स्थानांतरण तकनीकें।
  • साथ ही, धीरे-धीरे माहौल में ढलने के लिए अनुकूलन बाड़े।
  • PTZ IR कैमरों का उपयोग करके लगातार निगरानी।
  • वन रक्षकों द्वारा रोज़ाना पैदल गश्त।

इन प्रयासों के चलते मृत्यु दर का जोखिम कम हुआ है और जीवित रहने की दर में सुधार आया है; इसी वजह से यह भारत की सबसे आशाजनक वन्यजीव पुनर्स्थापन परियोजनाओं में से एक बन गई है।

आवास का विस्तार: गोमर्धा अभयारण्य के लिए नई योजनाएँ

बरनवापारा में मिली सफलता से उत्साहित होकर, वन विभाग अब गोमर्धा वन्यजीव अभयारण्य में काले हिरणों का एक और समूह लाने की योजना बना रहा है।

इस कदम का उद्देश्य है:

  • प्रजाति के भौगोलिक विस्तार को बढ़ाना
  • किसी एक ही आवास पर पड़ने वाले पारिस्थितिक दबाव को कम करना
  • जनसंख्या की दीर्घकालिक स्थिरता को सुदृढ़ बनाना

काले हिरण का संरक्षण क्यों ज़रूरी है?

  • काले हिरण न सिर्फ़ देखने में बेहद आकर्षक जानवर होते हैं, बल्कि वे पारिस्थितिकी तंत्र में एक अहम भूमिका भी निभाते हैं।
  • खुरदरी घास खाने वाले जानवर होने के नाते, वे घास के मैदानों के पारिस्थितिकी तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं।
  • उनकी मौजूदगी, ऐसी घास की प्रजातियों को फैलने से रोकने में मदद करती है जिन्हें दूसरे जानवर खाना पसंद नहीं करते; साथ ही, वे घास के मैदानों की उत्पादकता को बढ़ाने में भी सहायक होते हैं।
  • इसके अलावा, वे शिकारी जानवरों के लिए शिकार के विविध स्रोतों को बनाए रखने में भी मदद करते हैं, और खुले आवासों में पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखते हैं।

कृष्णमृग के बारे में

  • यह मृग की एक प्रजाति है जो मूल रूप से भारत और नेपाल में पाई जाती है।
  • वैज्ञानिक नाम: Antilope cervicapra
  • वितरण: राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा और प्रायद्वीपीय भारत के अन्य हिस्सों में व्यापक रूप से पाया जाता है।
  • राजकीय पशु: इसे पंजाब, हरियाणा और आंध्र प्रदेश द्वारा राजकीय पशु घोषित किया गया है।
  • आवास: यह खुले घास के मैदानों, शुष्क झाड़ीदार क्षेत्रों और हल्के वन क्षेत्रों को पसंद करता है।
  • इसे IUCN की सूची के तहत अनुसूची I (Schedule I) श्रेणी में रखा गया था।

Kar Saathi से इनकम टैक्स भरना होगा आसान, जानें कैसे

भारत के आयकर विभाग ने ‘कर साथी’ नाम से एक नया प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च किया है। इसे टैक्स फ़ाइल करने की प्रक्रिया को आसान बनाने और यूज़र अनुभव को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस पहल के तहत एक AI-पावर्ड असिस्टेंट पेश किया गया है, जो टैक्स देने वालों को 24*7 मार्गदर्शन देता है। जैसे-जैसे भारत आने वाले आयकर अधिनियम, 2025 के तहत एक आधुनिक टैक्स प्रणाली की ओर बढ़ रहा है, यह प्लेटफ़ॉर्म देश भर में लाखों यूज़र्स के लिए टैक्स नियमों का पालन करना आसान, तेज़ और ज़्यादा सुलभ बनाने का लक्ष्य रखता है।

‘कर साथी’ क्या है?

  • ‘कर साथी’ प्लेटफॉर्म मूल रूप से डायरेक्ट टैक्स से जुड़ी सभी सेवाओं के लिए एक वन-स्टॉप डिजिटल समाधान है। यह जानकारी, टूल्स और सहायता को एक ही यूज़र-फ्रेंडली इंटरफ़ेस में जोड़ता है।
  • यह प्लेटफ़ॉर्म एक AI-संचालित चैटबॉट सहायक, कर संसाधनों के लिए एक केंद्रीय केंद्र और फ़ाइलिंग तथा अनुपालन के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करता है।
  • यह पहल कराधान प्रणाली को सरल, अधिक पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-आधारित बनाने के लिए सरकार के प्रयासों को प्रदर्शित करती है।

CBDT और PRARAMBH पहल की भूमिका

‘कर साथी’ की शुरुआत एक व्यापक सुधार एजेंडा का हिस्सा है, जिसका नेतृत्व केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) कर रहा है।

CBDT के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने ‘प्रारंभ’ (PRARAMBH) के शुभारंभ के दौरान इस पहल पर प्रकाश डाला। ‘प्रारंभ’ एक आउटरीच कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य नई कर व्यवस्था में सुचारू रूप से बदलाव सुनिश्चित करना है।

‘प्रारंभ’ (मिशन विकसित भारत के लिए नीति सुधार और जिम्मेदार कार्रवाई) मुख्य रूप से इन बातों पर केंद्रित है:

  • कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना
  • कर प्रशासन में डिजिटल माध्यमों को अपनाने को बढ़ावा देना
  • और करदाताओं के बीच जागरूकता और अनुपालन को बढ़ाना

नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत सरलीकरण

सुधार प्रक्रिया की मुख्य बात इसकी जटिलता में की गई भारी कमी है।

मुख्य बदलावों में शामिल हैं:

  • नियमों की संख्या 510 से घटाकर 333 कर दी गई।
  • फॉर्मों की संख्या 399 से घटाकर 190 कर दी गई।
  • इसके अतिरिक्त, 6 करोड़ से अधिक लेन-देनों के लिए अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को समाप्त किए जाने की उम्मीद है।

इस सरलीकरण से कागज़ी कार्यवाही में कमी आने के साथ-साथ कर अनुपालन को लेकर होने वाली भ्रांतियों के भी कम होने की आशा है।

‘कर साथी’ से टैक्सपेयर्स को कैसे फ़ायदा होता है

  • यह प्लेटफ़ॉर्म टैक्सपेयर्स के यूज़र अनुभव को कई तरीकों से सीधे बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • AI गाइडेंस उपलब्ध होने के कारण, यूज़र्स को अब अपनी बेसिक सवालों के लिए टैक्स कंसल्टेंट्स से बार-बार मदद लेने की ज़रूरत नहीं पड़ सकती है।
  • साथ ही, रियल-टाइम मदद से गलतियाँ कम करने में मदद मिलेगी, टैक्स नियमों की समझ बेहतर होगी और फ़ाइलिंग की प्रक्रिया तेज़ होगी।
  • यह प्लेटफ़ॉर्म पहली बार टैक्स भरने वालों, दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों और छोटे बिज़नेस मालिकों के लिए भी टैक्स सेवाओं को आसान बनाता है।

करदाताओं को कैसे मिलेगी सहूलियत?

इनकम टैक्स विभाग की यह नई वेबसाइट करदाताओं की सहूलियत की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव है। एआई असिस्टेंट ‘कर साथी’ की मदद से 24 घंटे मिलने वाली सहायता और स्मार्ट नेविगेशन न केवल आम जनता के लिए टैक्स अनुपालन को आसान बनाएंगे।

मूडीज ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की GDP वृद्धि अनुमानों को घटाकर 6% कर दिया

वैश्विक रेटिंग एजेंसी Moody’s Ratings ने भारत की इकोनॉमी की वृद्धि के अनुमान को 6.8 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया है। मिडिल ईस्ट में चल रही इस जंग का असर पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है। क्योंकि इसके कारण ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मूज बंद कर दिया है जहां से तेल और गैस की सप्लाई होती है। चूँकि भारत कच्चे तेल और LPG के आयात पर अत्यधिक निर्भर है, इसलिए इसके प्रभाव ईंधन की बढ़ती कीमतों, मुद्रास्फीति की चिंताओं और घरेलू उपभोग पर पड़ने वाले दबाव के रूप में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।

मूडीज़ ने भारत के GDP अनुमान में कटौती क्यों की?

आर्थिक परिदृश्य में आई गिरावट भू-राजनीतिक अस्थिरता को लेकर बढ़ती चिंताओं को दर्शाती है, जो भारत के व्यापक आर्थिक बुनियादी तत्वों को प्रभावित कर रही है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है।

इस क्षेत्र पर भारत की निर्भरता काफ़ी ज़्यादा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 55% आयात इसी क्षेत्र से करता है, और साथ ही LPG की 90% से ज़्यादा आपूर्ति भी पश्चिम एशिया से ही होती है। इन रुकावटों के चलते, मूडीज़ का अनुमान है कि निजी उपभोग कमज़ोर पड़ेगा और औद्योगिक गतिविधियाँ धीमी हो जाएँगी। इसके अलावा, इससे निवेश की गति भी धीमी पड़ जाएगी।

ये सभी कारक मिलकर वित्त वर्ष 2027 में वृद्धि को मध्यम स्तर पर लाने में योगदान दे रहे हैं।

महंगाई का खतरा बढ़ रहा है: ईंधन, भोजन और उससे आगे

संघर्ष के सबसे तेज़ी से दिखने वाले प्रभावों में से एक महंगाई है। मूडीज़ ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2027 में महंगाई बढ़कर 4.8% हो जाएगी, जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह 2.4% थी।

इसके कारण आपस में जुड़े हुए हैं—जैसे ईंधन और परिवहन की बढ़ती लागत, और साथ ही LPG की आपूर्ति में रुकावटें, जिनके कारण घरों में इसकी कमी हो रही है।

इसके अलावा, उर्वरकों की बढ़ती कीमतें भी खाद्य महंगाई का कारण बनेंगी।

RBI और सरकार क्या कर सकती है?

जैसे-जैसे महंगाई का खतरा फिर से बढ़ रहा है, पॉलिसी बनाने वालों को कीमतों को कंट्रोल करने और ग्रोथ को सपोर्ट करने के बीच एक नाजुक बैलेंस बनाना होगा।

संभावित जवाबों में ये शामिल हैं,

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) इंटरेस्ट रेट को बनाए रख सकता है या धीरे-धीरे बढ़ा सकता है।
  • सरकार फ्यूल और फर्टिलाइज़र पर सब्सिडी बढ़ा सकती है।
  • ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए कैपिटल खर्च पर लगातार फोकस।

राजकोषीय दबाव और राजस्व संबंधी चुनौतियाँ

इस संघर्ष से सरकार के वित्त पर भी दबाव पड़ने की आशंका है।

मुख्य चिंताओं में शामिल हैं:

  • महंगे तेल और उर्वरकों के कारण सब्सिडी का बढ़ता बोझ
  • साथ ही, ईंधन शुल्क में कटौती के कारण कर राजस्व में कमी
  • और मांग में सुस्ती के कारण GST और कॉर्पोरेट कर संग्रह में गिरावट

अन्य अनुमान भी मूडीज़ से मेल खाते हैं

सावधानी बरतने की बात कहने में मूडीज़ अकेला नहीं है। अन्य वैश्विक और घरेलू रेटिंग एजेंसियों ने भी भारत के लिए अपने अनुमानों में बदलाव किया है।

  • OECD ने 6.1% विकास दर का अनुमान लगाया है।
  • EY का भी मानना ​​है कि अगर यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है, तो विकास दर में 1 प्रतिशत अंक की गिरावट आ सकती है।
  • ICRA ने भी 6.5% विकास दर का अनुमान लगाया है।

 

Chetak Screen Awards 2026: किसने मारी बाज़ी? जानिए सभी विजेताओं की पूरी सूची

भारतीय सिनेमा के लिए रविवार (05 अप्रैल 2026) की रात बेहद खास बन गई, जब चेतक स्क्रीन अवार्ड्स 2026 (Chetak Screen Awards 2026) का भव्य आयोजन हुआ और साल की बेहतरीन फिल्मों और कलाकारों को सम्मानित किया गया। इस बार का समारोह कई वजहों से चर्चा में रहा। एक तरफ जहां ‘धुरंधर’ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 14 पुरस्कार अपने नाम किए, वहीं ‘होमबाउंड’ ने सबसे बड़े सम्मान सर्वश्रेष्ठ फिल्म का खिताब जीतकर सबका ध्यान खींच लिया।

अवार्ड नाइट के चमकते सितारे: सबसे बड़े विनर्स कौन?

शीर्ष श्रेणी में नॉमिनेशंस के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली, और उनमें से कुछ बेहतरीन परफॉर्मेंस ने उस रात अवॉर्ड अपने नाम किया।

कुछ मुख्य अवार्ड्स में शामिल हैं,

  • सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म: होमबाउंड
  • सर्वश्रेष्ठ निर्देशक: आदित्य धर (धुरंधर)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (पुरुष): रणवीर सिंह (धुरंधर)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (महिला): यामी गौतम (हक)

ये पुरस्कार व्यावसायिक सफलता और समीक्षकों की सराहना के मेल को उजागर करते हैं।

चेतक स्क्रीन अवार्ड्स 2026 – विजेताओं की सूची

शीर्ष पुरस्कार

  • सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म: होमबाउंड
    सर्वश्रेष्ठ निर्देशक: आदित्य धर (धुरंधर)
    सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (पुरुष): रणवीर सिंह (धुरंधर)
    सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (महिला): यामी गौतम (हक)

अभिनय पुरस्कार

सहायक भूमिकाएँ

  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता (पुरुष): अक्षय खन्ना (धुरंधर)
  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री (महिला): शालिनी वत्सा (होमबाउंड)

बेहतरीन प्रदर्शन

  • निर्णायक अभिनेता (पुरुष): अहान पांडे (सैय्यारा)
  • निर्णायक अभिनेता (महिला): अनीत पद्दा (सैय्यारा)
  • निर्णायक निर्देशक: शाज़िया इक़बाल (धड़क 2)

तकनीकी और रचनात्मक पुरस्कार

  • सर्वश्रेष्ठ छायांकन: धुरंधर – विकाश नौलखा
  • सर्वश्रेष्ठ संपादन: धुरंधर – शिवकुमार वी. पणिक्कर
  • सर्वश्रेष्ठ प्रोडक्शन डिज़ाइन: धुरंधर – सैनी एस. जोहरे
  • सर्वश्रेष्ठ ध्वनि डिज़ाइन: धुरंधर – बिश्वदीप चटर्जी
  • सर्वश्रेष्ठ विशेष प्रभाव (वीएफएक्स): धुरंधर

लेखन और संवाद

  • सर्वश्रेष्ठ कहानी और पटकथा: होमबाउंड
  • सर्वश्रेष्ठ संवाद: धुरंधर-आदित्य धर

संगीत पुरस्कार

  • सर्वश्रेष्ठ गीत: सैयारा (शीर्षक ट्रैक)
  • सर्वश्रेष्ठ गीत: गुलज़ार (गुस्ताख इश्क)
  • सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक (पुरुष): फहीम अब्दुल्ला (सैय्यारा)
  • सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका (महिला): श्रेया घोषाल (सैय्यारा)
  • सर्वश्रेष्ठ बैकग्राउंड स्कोर: धुरंधर – शाश्वत सचदेव

अन्य प्रमुख पुरस्कार

  • सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफी: धुरंधर – शरारत
  • सर्वश्रेष्ठ पोशाक डिजाइन: छावा और धुरंधर (संयुक्त मान्यता)
  • सर्वश्रेष्ठ मेकअप और हेयरस्टाइल: धुरंधर
  • सर्वश्रेष्ठ एक्शन: धुरंधर

विशेष श्रेणी

लैंगिक संवेदनशीलता के लिए सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म: हक़

OTT पुरस्कार

  • सर्वश्रेष्ठ ओटीटी फिल्म: स्टोलन
  • सर्वश्रेष्ठ ओटीटी अभिनेता (पुरुष): अभिषेक बनर्जी (स्टोलन)
  • सर्वश्रेष्ठ ओटीटी अभिनेता (महिला): सान्या मल्होत्रा ​​(मिसेज़)
  • सर्वश्रेष्ठ ओटीटी निर्देशक: करण तेजपाल (स्टोलन)
  • सर्वश्रेष्ठ ओटीटी स्क्रिप्ट: स्टोलन

धुरंधर: 2026 का सबसे बड़ा विजेता

फ़िल्म ‘धुरंधर’ ने कई श्रेणियों में अपना दबदबा बनाया है, और इसने अभिनय तथा तकनीकी, दोनों ही पहलुओं में अपनी उत्कृष्टता साबित की है।

धुरंधर द्वारा जीते गए प्रमुख पुरस्कार

  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (पुरुष) – रणवीर सिंह
  • सर्वश्रेष्ठ निर्देशक – आदित्य धर
  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता – अक्षय खन्ना
  • सर्वश्रेष्ठ बैकग्राउंड स्कोर – शाश्वत सचदेव
  • सर्वश्रेष्ठ सिनेमैटोग्राफी
  • सर्वश्रेष्ठ संपादन
  • सर्वश्रेष्ठ एक्शन
  • सर्वश्रेष्ठ साउंड डिज़ाइन
  • सर्वश्रेष्ठ प्रोडक्शन डिज़ाइन
  • सर्वश्रेष्ठ स्पेशल इफ़ेक्ट्स

‘होमबाउंड’ ने सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का पुरस्कार जीता

‘धुरंधर’ फ़िल्म के दबदबे के बावजूद, ‘होमबाउंड’ ने ‘सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म’ श्रेणी में जीत हासिल की है। यह फ़िल्म अपनी मज़बूत कहानी कहने के अंदाज़ और भावनात्मक गहराई को उजागर करती है।

इस फ़िल्म को वैश्विक मंच पर पहले ही पहचान मिल चुकी है, और इसे Oscars 2026 के लिए भी नामांकित किया गया है।

यह जीत कहानी कहने की ताक़त और दर्शकों के साथ जुड़ाव के महत्व को दर्शाती है।

BRO का प्रोजेक्ट चेतक 47 साल का हुआ: इसने भारत के सीमावर्ती इंफ्रास्ट्रक्चर को कैसे मज़बूत किया

सीमा सड़क संगठन के ‘प्रोजेक्ट चेतक’ ने बीकानेर में अपना 47वां स्थापना दिवस मनाया। यह प्रोजेक्ट भारत के सीमावर्ती बुनियादी ढांचे में अपने लंबे समय से चले आ रहे योगदान को रेखांकित करता है। इस प्रोजेक्ट की स्थापना 1980 में हुई थी और इसने पश्चिमी भारत के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों के विकास और रखरखाव में एक अहम भूमिका निभाई है। पिछले कुछ वर्षों में, इसने सीमावर्ती क्षेत्रों के आस-पास कनेक्टिविटी में काफी सुधार किया है, और साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा तथा क्षेत्रीय विकास, दोनों को मजबूती प्रदान की है।

प्रोजेक्ट चेतक क्या है और इसका क्या महत्व है?

प्रोजेक्ट चेतक, सीमा सड़क संगठन (BRO) के अंतर्गत आने वाली प्रमुख बुनियादी ढांचा पहलों में से एक है।

इसका कार्यक्षेत्र मुख्य रूप से भारत के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित है।

इसने पाकिस्तान के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमा के निकट रणनीतिक सड़क नेटवर्क विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और यह रक्षा संबंधी आवाजाही तथा लॉजिस्टिक्स में सहायता प्रदान करेगा। इसके साथ ही, यह राजस्थान, पंजाब और उत्तरी गुजरात के दूरदराज के रेगिस्तानी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को भी बेहतर बना रहा है।

पिछले 47 वर्षों में, इसने बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके साथ ही, इसने सीमा तक पहुंच को सुदृढ़ किया है और समग्र क्षेत्रीय संपर्क को बेहतर बनाया है।

47 वर्षों में प्रमुख योगदान

परियोजना की शुरुआत से ही, इसने बुनियादी ढांचा विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय मील के पत्थर हासिल किए हैं।

प्रोजेक्ट चेतक की प्रमुख उपलब्धियाँ

इसने 4,000 किलोमीटर से भी अधिक लंबे सड़क नेटवर्क का निर्माण और रखरखाव किया है, और साथ ही लगभग 214 किलोमीटर लंबी ‘खाई-सह-बांध’ (Ditch-cum-Bund) संरचनाओं का भी विकास किया है। इसके अलावा, इस प्रोजेक्ट ने दुर्गम इलाकों में भी हर मौसम में आवागमन की सुविधा सुनिश्चित की है।

इन प्रयासों ने सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों को सुलभ और रणनीतिक रूप से मज़बूत क्षेत्रों में बदल दिया है।

कनेक्टिविटी के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा

‘प्रोजेक्ट चेतक’ का एक मुख्य उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक जाने वाली फीडर सड़कों का रखरखाव करके भारत के रक्षा बलों को सहायता प्रदान करना है। इसके साथ ही, राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ने वाले मार्गों को दो-लेन (double-lane) मानकों के अनुरूप उन्नत बनाना और सैनिकों तथा साजो-सामान की त्वरित आवाजाही सुनिश्चित करना भी इसका लक्ष्य है।

यह बुनियादी ढांचा रक्षा तैयारियों को सुदृढ़ करने और विशेष रूप से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रतिक्रिया क्षमता को बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मिशन के पीछे का आदर्श वाक्य

यह परियोजना एक प्रेरणादायक आदर्श वाक्य के साथ संचालित होती है, जो है: “चेतक का प्रयास, देश का विकास”।

यह आदर्श वाक्य बुनियादी ढांचे के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण और सीमावर्ती क्षेत्रों को सुदृढ़ बनाने के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इसके अतिरिक्त, यह उस क्षेत्र के लोगों के लिए समावेशी विकास को बढ़ावा देने का भी लक्ष्य रखता है।

 

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